Datasets:

Modalities:
Text
Formats:
text
Libraries:
Datasets
License:
Dataset Viewer
Auto-converted to Parquet Duplicate
text
stringlengths
0
6.43k
काकोरी काण्ड भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रान्तिकारियों द्वारा ब्रिटिश राज के विरुद्ध भयंकर युद्ध छेड़ने की खतरनाक मंशा से हथियार खरीदने के लिये ब्रिटिश सरकार का ही खजाना लूट लेने की एक ऐतिहासिक घटना थी जो 9 अगस्त 1925 को घटी। इस ट्रेन डकैती में जर्मनी के बने चार माउज़र पिस्तौल काम में लाये गये थे। इन पिस्तौलों की वि...
क्रान्तिकारियों द्वारा चलाए जा रहे आजादी के आन्दोलन को गति देने के लिये धन की तत्काल व्यवस्था की जरूरत के मद्देनजर शाहजहाँपुर में हुई बैठक के दौरान राम प्रसाद बिस्मिल ने अंग्रेजी सरकार का खजाना लूटने की योजना बनायी थी। इस योजनानुसार दल के ही एक प्रमुख सदस्य राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी ने 9 अगस्त 1925 को लखनऊ जिले के काकोरी रे...
हिन्दुस्तान प्रजातन्त्र संघ की ओर से प्रकाशित इश्तहार और उसके संविधान को लेकर बंगाल पहुँचे दल के दोनों नेता- शचीन्द्रनाथ सान्याल बाँकुरा में उस समय गिरफ्तार कर लिये गये जब वे यह इश्तहार अपने किसी साथी को पोस्ट करने जा रहे थे। इसी प्रकार योगेशचन्द्र चटर्जी कानपुर से पार्टी की मीटिंग करके जैसे ही हावड़ा स्टेशन पर ट्रेन स...
दोनों प्रमुख नेताओं के गिरफ्तार हो जाने से राम प्रसाद 'बिस्मिल' के कन्धों पर उत्तर प्रदेश के साथ-साथ बंगाल के क्रान्तिकारी सदस्यों का उत्तरदायित्व भी आ गया। बिस्मिल का स्वभाव था कि वे या तो किसी काम को हाथ में लेते न थे और यदि एक बार काम हाथ में ले लिया तो उसे पूरा किये बगैर छोड़ते न थे। पार्टी के कार्य हेतु धन की आवश्...
इन दोनों डकैतियों में एक-एक व्यक्ति मौके पर ही मारा गया। इससे बिस्मिल की आत्मा को अत्यधिक कष्ट हुआ। आखिरकार उन्होंने यह पक्का निश्चय कर लिया कि वे अब केवल सरकारी खजाना ही लूटेंगे, हिन्दुस्तान के किसी भी रईस के घर डकैती बिल्कुल न डालेंगे।
8 अगस्त को राम प्रसाद 'बिस्मिल' के घर पर हुई एक इमर्जेन्सी मीटिंग में निर्णय लेकर योजना बनी और अगले ही दिन 9 अगस्त 1925 को शाहजहाँपुर शहर के रेलवे स्टेशन से बिस्मिल के नेतृत्व में कुल 10 लोग, जिनमें शाहजहाँपुर से बिस्मिल के अतिरिक्त अशफाक उल्ला खाँ, मुरारी शर्मा तथा बनवारी लाल, बंगाल से राजेन्द्र लाहिडी, शचीन्द्रनाथ बख...
इन क्रान्तिकारियों के पास पिस्तौलों के अतिरिक्त जर्मनी के बने चार माउजर भी थे जिनके बट में कुन्दा लगा लेने से वह छोटी आटोमेटिक रायफल की तरह लगता था और सामने वाले के मन में भय पैदा कर देता था। इन माउजरों की मारक क्षमता भी अधिक होती थी उन दिनों ये माउजर आज की ए0के0-47 रायफल की तरह चर्चित हुआ करते थे। लखनऊ से पहले काकोरी ...
मन्मथनाथ गुप्त ने उत्सुकतावश माउजर का ट्रैगर दबा दिया जिससे छूटी गोली अहमद अली नाम के मुसाफिर को लग गयी। वह मौके पर ही ढेर हो गया। शीघ्रतावश चाँदी के सिक्कों व नोटों से भरे चमड़े के थैले चादरों में बाँधकर वहाँ से भागने में एक चादर वहीं छूट गई। अगले दिन अखबारों के माध्यम से यह खबर पूरे संसार में फैल गयी। ब्रिटिश सरकार न...
खुफिया प्रमुख खान बहादुर तसद्दुक हुसैन ने पूरी छानबीन और तहकीकात करके बरतानिया सरकार को जैसे ही इस बात की पुष्टि की कि काकोरी ट्रेन डकैती क्रान्तिकारियों का एक सुनियोजित षड्यन्त्र है, पुलिस ने काकोरी काण्ड के सम्बन्ध में जानकारी देने व षड्यन्त्र में शामिल किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करवाने के लिये इनाम की घोषणा के साथ ...
इस ऐतिहासिक मामले में 40 व्यक्तियों को भारत भर से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के स्थान के साथ उनके नाम इस प्रकार हैं:
फरार क्रान्तिकारियों में से दो को पुलिस ने बाद में गिरफ़्तार किया था। उनके नाम व स्थान निम्न हैं:
उपरोक्त 40 व्यक्तियों में से तीन लोग शचीन्द्रनाथ सान्याल बाँकुरा में, योगेशचन्द्र चटर्जी हावडा में तथा राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी दक्षिणेश्वर बम विस्फोट मामले में कलकत्ता से पहले ही गिरफ्तार हो चुके थे और दो लोग अशफाक उल्ला खाँ और शचीन्द्रनाथ बख्शी को तब गिरफ्तार किया गया जब मुख्य काकोरी षड्यन्त्र केस का फैसला हो चुका था। इन...
काकोरी-काण्ड में केवल 10 लोग ही वास्तविक रूप से शामिल हुए थे, पुलिस की ओर से उन सभी को भी इस केस में नामजद किया गया। इन 10 लोगों में से पाँच - चन्द्रशेखर आजाद, मुरारी शर्मा, केशव चक्रवर्ती, अशफाक उल्ला खाँ व शचीन्द्र नाथ बख्शी को छोड़कर, जो उस समय तक पुलिस के हाथ नहीं आये, शेष सभी व्यक्तियों पर सरकार बनाम राम प्रसाद बि...
लखनऊ जेल में काकोरी षड्यन्त्र के सभी अभियुक्त कैद थे। केस चल रहा था इसी दौरान बसन्त पंचमी का त्यौहार आ गया। सब क्रान्तिकारियों ने मिलकर तय किया कि कल बसन्त पंचमी के दिन हम सभी सर पर पीली टोपी और हाथ में पीला रूमाल लेकर कोर्ट चलेंगे। उन्होंने अपने नेता राम प्रसाद 'बिस्मिल' से कहा- "पण्डित जी! कल के लिये कोई फड़कती हुई क...
मेरा रँग दे बसन्ती चोला....हो मेरा रँग दे बसन्ती चोला....
इसी रंग में रँग के शिवा ने माँ का बन्धन खोला,यही रंग हल्दीघाटी में था प्रताप ने घोला;नव बसन्त में भारत के हित वीरों का यह टोला,किस मस्ती से पहन के निकला यह बासन्ती चोला।
मेरा रँग दे बसन्ती चोला....हो मेरा रँग दे बसन्ती चोला....
अमर शहीद भगत सिंह जिन दिनों लाहौर जेल में बन्द थे तो उन्होंने इस गीत में ये पंक्तियाँ और जोड़ी थीं:
इसी रंग में बिस्मिल जी ने "वन्दे-मातरम्" बोला,यही रंग अशफाक को भाया उनका दिल भी डोला;इसी रंग को हम मस्तों ने, हम मस्तों ने;दूर फिरंगी को करने को, को करने को;लहू में अपने घोला।
मेरा रँग दे बसन्ती चोला....हो मेरा रँग दे बसन्ती चोला....
माय! रँग दे बसन्ती चोला....हो माय! रँग दे बसन्ती चोला....मेरा रँग दे बसन्ती चोला....
राम प्रसाद 'बिस्मिल' बिस्मिल अज़ीमाबादी की यह गज़ल क्रान्तिकारी जेल से पुलिस की लारी में अदालत जाते हुए, अदालत में मजिस्ट्रेट को चिढाते हुए व अदालत से लौटकर वापस जेल आते हुए कोरस के रूप में गाया करते थे। बिस्मिल के बलिदान के बाद तो यह रचना सभी क्रान्तिकारियों का मन्त्र बन गयी। जितनी रचना यहाँ दी जा रही है वे लोग उतनी ह...
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,देखना है जोर कितना बाजुए-क़ातिल में है !वक़्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमाँ !हम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में है !खीँच कर लाई है हमको क़त्ल होने की उम्म्मीद,आशिकों का आज जमघट कूच-ए-क़ातिल में है !ऐ शहीदे-मुल्को-मिल्लत हम तेरे ऊपर निसार,अब तेरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफ़िल...
पाँच फरार क्रान्तिकारियों में अशफाक उल्ला खाँ को दिल्ली और शचीन्द्र नाथ बख्शी को भागलपुर से पुलिस ने उस समय गिरफ्तार किया जब काकोरी-काण्ड के मुख्य मुकदमे का फैसला सुनाया जा चुका था। स्पेशल जज जे0 आर0 डब्लू0 बैनेट की अदालत में काकोरी षद्यन्त्र का पूरक मुकदमा दर्ज हुआ और 13 जुलाई 1927 को इन दोनों पर भी सरकार के विरुद्ध स...
सेशन जज के फैसले के खिलाफ 18 जुलाई 1927 को अवध चीफ कोर्ट में अपील दायर की गयी। चीफ कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सर लुइस शर्ट और विशेष न्यायाधीश मोहम्मद रजा के सामने दोनों मामले पेश हुए। जगतनारायण 'मुल्ला' को सरकारी पक्ष रखने का काम सौंपा गया जबकि सजायाफ्ता क्रान्तिकारियों की ओर से के0सी0 दत्त, जयकरणनाथ मिश्र व कृपाशंकर हजे...
बिस्मिल ने चीफ कोर्ट के सामने जब धाराप्रवाह अंग्रेजी में फैसले के खिलाफ बहस की तो सरकारी वकील जगतनारायण मुल्ला जी बगलें झाँकते नजर आये। इस पर चीफ जस्टिस लुइस शर्टस् को बिस्मिल से अंग्रेजी में यह पूछना पड़ा - "मिस्टर रामप्रसाड ! फ्रॉम भिच यूनीवर्सिटी यू हैव टेकेन द डिग्री ऑफ ला ?" इस पर बिस्मिल ने हँस कर चीफ जस्टिस को उ...
काकोरी काण्ड का मुकदमा लखनऊ में चल रहा था। पण्डित जगतनारायण मुल्ला सरकारी वकील के साथ उर्दू के शायर भी थे। उन्होंने अभियुक्तों के लिए "मुल्जिमान" की जगह "मुलाजिम" शब्द बोल दिया। फिर क्या था पण्डित राम प्रसाद 'बिस्मिल' ने तपाक से उन पर ये चुटीली फब्ती कसी: "मुलाजिम हमको मत कहिये, बड़ा अफ़सोस होता है; अदालत के अदब से हम ...
बिस्मिल द्वारा की गयी सफाई की बहस से सरकारी तबके में सनसनी फैल गयी। मुल्ला जी ने सरकारी वकील की हैसियत से पैरवी करने में आनाकानी की। अतएव अदालत ने बिस्मिल की 18 जुलाई 1927 को दी गयी स्वयं वकालत करने की अर्जी खारिज कर दी। उसके बाद उन्होंने 76 पृष्ठ की तर्कपूर्ण लिखित बहस पेश की जिसे देखकर जजों ने यह शंका व्यक्त की कि यह...
22 अगस्त 1927 को जो फैसला सुनाया गया उसके अनुसार राम प्रसाद बिस्मिल, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी व अशफाक उल्ला खाँ को आई0पी0सी0 की दफा 121 व 120 के अन्तर्गत आजीवन कारावास तथा 302 व 396 के अनुसार फाँसी एवं ठाकुर रोशन सिंह को पहली दो दफाओं में 5+5 कुल 10 वर्ष की कड़ी कैद तथा अगली दो दफाओं के अनुसार फाँसी का हुक्म हुआ। शचीन्द्रन...
अवध चीफ कोर्ट का फैसला आते ही यह खबर दावानल की तरह समूचे हिन्दुस्तान में फैल गयी। ठाकुर मनजीत सिंह राठौर ने सेण्ट्रल लेजिस्लेटिव कौन्सिल में काकोरी काण्ड के चारो मृत्यु-दण्ड प्राप्त कैदियों की सजायें कम करके आजीवन कारावास में बदलने का प्रस्ताव पेश किया। कौन्सिल के कई सदस्यों ने सर विलियम मोरिस को, जो उस समय संयुक्त प्र...
इसके बाद मदन मोहन मालवीय के नेतृत्व में पाँच व्यक्तियों का एक प्रतिनिधि मण्डल शिमला जाकर वायसराय से दोबारा मिला और उनसे यह प्रार्थना की कि चूँकि इन चारो अभियुक्तों ने लिखित रूप में सरकार को यह वचन दे दिया है कि वे भविष्य में इस प्रकार की किसी भी गतिविधि में हिस्सा न लेंगे और उन्होंने अपने किये पर पश्चाताप भी प्रकट किया...
अन्ततः बैरिस्टर मोहन लाल सक्सेना ने प्रिवी कौन्सिल में क्षमादान की याचिका के दस्तावेज तैयार करके इंग्लैण्ड के विख्यात वकील एस0 एल0 पोलक के पास भिजवाये किन्तु लन्दन के न्यायाधीशों व सम्राट के वैधानिक सलाहकारों ने उस पर यही दलील दी कि इस षड्यन्त्र का सूत्रधार राम प्रसाद 'बिस्मिल' बड़ा ही खतरनाक और पेशेवर अपराधी है उसे यद...
रिलैप्स अमरीकी रैपर एमिनेम की छठी स्टूडियो एल्बम है, जो 15 मई 2009 को इंटरस्कोप रिकार्ड्स पर रिलीज़ की गयी। अपनी नींद की गोलियों की लत और लेखकों से विवाद के कारण, पांच साल तक रिकॉर्डिंग से दूर रहने के बाद, यह एन्कोर के बाद मूल रचना पर आधारित उसकी पहली एल्बम है। एलबम के लिए 2007 से 2009 के दौरान कई रिकॉर्डिंग स्टूडियो म...
अपने पहले सप्ताह में ही 6,08,000 प्रतियां बेच कर एल्बम ने यू.एस. बिलबोर्ड 200 चार्ट पर पहले स्थान से शुरुआत की. 2009 की एक सबसे प्रत्याशित एलबम रिलीज़ के रूप में, अंततः संयुक्त राज्य अमेरिका में इसकी 19 लाख से अधिक प्रतियां बिकीं और नतीजतन इसके तीन एकल गानों ने चार्ट में सफलता हासिल की. रिलीज़ के दौरान, रिलैप्स को आमतौ...
2005 के बाद से ही, एमिनेम अपने संगीत से नाता तोड़ कर हिप हॉप निर्माता बन कर अन्य रिकॉर्ड कार्यों को करने का इच्छुक था, विशेषकर उन कलाकारों के लिए, जो उसके अपने लेबल शैडी रिकॉर्ड्स के लिए साइन किये गये थे। हालांकि, एमिनेम का बुरा दौर तब शुरू हुआ जब 2005 की गर्मियों में थकान और अपनी नींद की गोलियों की लत के कारण यूरोपीयन...
मई 2007 से ही एमिनेम द्वारा आगामी एल्बम पर ध्यान लगाने की खबरें 50 सेंट और स्टेट कुओ, जो शैडी रिकॉर्ड के क्रमशः वर्तमान और पूर्व सदस्य थे, द्वारा दी जा रहीं थीं। इसके अतिरिक्त, रैपर बिज़ार - हिप हॉप समूह-D12 के सदस्य - ने बताया कि समूह की तीसरी स्टूडियो एल्बम को रोका गया था क्योंकि इंटरस्कोप रिकॉर्ड्स पहले एमिनेम की एल...
2005 में रैपर द्वारा अपनी नींद की गोलियों की लत का इलाज़ कराने के दो साल बाद, रिलैप्स की रिकॉर्डिंग के शुरूआती चरणों के दौरान, रिकॉर्ड निर्माता और और बास ब्रदर्स के लंबे समय से डेट्रॉइट सहयोगी जेफ़ बास ने एमिनेम के साथ 25 गानों पर काम किया। प्रूफ की मौत के कारण, एमिनेम एक अवधि तक कुछ भी नया नहीं लिख सका, क्योंकि उसने म...
2007 में एमिनेम ने फर्नडेल, मिशिगन, में एफिजी स्टूडियो खरीदा तथा 54 साउंड रिकार्डिंग स्टूडियो की अपनी पूर्व निर्माण टीम से अपने कार्य संबंध ख़त्म कर दिए जिसमे बॉस ब्रदर्स भी शामिल थे। इसके पश्चात् उसने निर्माता डॉ॰ ड्रे के साथ रिकॉर्डिंग जारी रखी, जिन्होनें सितंबर 2007 में कहा कि उनका इरादा खुद को दो महीने तक रिलैप्स क...
इस रिकॉर्डिंग अवधि के दौरान, रिलैप्स के लिए बने कई गाने इंटरनेट पर लीक हो गये, जिसमे "क्रेक अ बोटल" का एक अधूरा संस्करण भी शामिल था। इसके बाद जनवरी 2009 में डॉ॰ ड्रे तथा 50 सेंट के अतिरिक्त स्वरों के साथ गाना ख़त्म हुआ। लीक होने के बावजूद, ब्रिटिश समाचारपत्र द इंडीपेंडेंट के अनुसार, एल्बम को गुप्त रूप से पूरा किया जा र...
XXL के लिए एक साक्षात्कार में, एमिनेम ने रिलैप्स की अवधारणा के पीछे अपने नशा पुर्नवास की समाप्ति का हवाला दिया और इसके बाद इस तरह से रैप किया मानो वह नशे में हो, साथ ही साथ उसके काल्पनिक "क्रेज़ी" स्लिम शैडी पहलू की भी वापसी हुई. साक्षात्कारकर्ता डाटवॉन थॉमस के अनुसार, एमिनेम को एल्बम के लिए प्रेरणा उसकी बीती ज़िन्दगी ...
रिलैप्स की शुरुआत एक छोटे नाटक "डॉ॰ वेस्ट" से होती है, जिसमे अभिनेता डोमिनिक वेस्ट एक ऐसे ड्रग काउंसलर के रूप में आवाज़ देते हैं जिनकी विश्वसनीयता कम होने के कारण एमिनेम पुनः नशीली दवाओं का सेवन करने के साथ, एक बार फिर अपने स्लिम शैडी मैडमैन स्वरूप में पहुँच जाता है। इस छोटे नाटक के बाद "3 a.m." की शुरुआत होती है जहाँ ...
"मि. मैथर्स" नामक छोटे नाटक के बाद, जिसमे एमिनेम एक अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करता है, "देजा वू" 2007 में उसकी ओवरडोज़ और संगीत से दूरी के बाद उसकी नशे पर निर्भरता के विषय में बताता है। गाने में एमिनेम यह भी बताता है कि इसने किस प्रकार उसके पिछले पांच सालों में प्रभावित किया है, जिसमे एक दौर ऐसा भी आया जब उसकी ...
2007 में, शैडी रिकार्डस के रैपर काशिस ने इस का शीर्षक किंग मैथर्स के नाम से बताते हुए एल्बम के विषय में चर्चा करते हुए कहा कि यह उस वर्ष रिलीज़ हो जायेगी. बहरहाल, एमिनेम के प्रचारक डेनिस डेनेही ने इसका खंडन करते हुए कहा कि "2007 में कोई एल्बम रिलीज़ नहीं की जानी थी" और बताया कि अगस्त 2007 तक इसका कोई निश्चित शीर्षक भी ...
एल्बम को जारी करने की तिथि के संबंध, रॉलिंग स्टोन ने अक्टूबर 2008 के लेख में लिखा कि वर्जिन मेगास्टोन ने 27 नवम्बर 2008 को रिलैप्स के वितरण की योजना बनाई थी, जो कि संयोग से संयुक्त राज्य अमेरिका में थैंक्सगिविंग डे था। 27 अक्टूबर को इंटरस्कोप के एक प्रवक्ता ने बताया कि अभी तक कोई आधिकारिक तिथि तय नहीं की गयी थी और किसी...
दो महीने पहले लीक होने के बावजूद, "क्रैक अ बोटल" और प्रोमोशनल सिंगल को आख़िरकार 2 फ़रवरी 2009 में वैधानिक भुगतान के बाद डिजिटल डाउनलोड के लिए जारी किया गया, तथा यू.एस. बिलबोर्ड हॉट 100 में पहले स्थान पर भी पहुँच गया, जबकि एमिनेम के मैनेज़र पॉल रोज़नबर्ग के अनुसार गाने के लिए म्यूजिक वीडियो का निर्माण तथा निर्देशन सिंड्...
क्रैक अ बोटल को रिलीज़ करने के पश्चात्, "वी मेड यू" का म्यूज़िक विडियो 7 अप्रैल को प्रसारित किया गया और इसके एक सप्ताह बाद 13 अप्रैल को यह खरीदने के लिए उपलब्ध हो गया। वीडियो को जोसेफ काहन द्वारा निर्देशित किया गया था और इसका प्रीमियर एमटीवी के कई चैनलों के साथ एमटीवी की वेबसाइट पर भी किया गया। 28 अप्रैल को, एल्बम के त...
इससे पहले 4 अप्रैल 2009 में, 2009 NCAA अंतिम चार, की कवरेज के दौरान CBS पर एमिनेम को एक भाग में दिखाया गया जहाँ उसने "लव लैटर टू डेट्रॉयट" के कुछ शब्द गाये. बाद में उसी दिन रैपर ने हिप हॉप ग्रुप रन - DMC टू द रॉक और रोल हॉल ऑफ फेम के बारे में भी बताया. द डेट्रायट न्यूज़ के एडम ग्राहम ने इसे रिलैप्स के लिए "पहले से सोचे...
नेवर से नेवर टूर पर समूह के साथी सदस्यों रॉयस दा 5'9" के साथ स्विफ्टी व कुनिवा को रिलैप्स के बारे में लाइव साक्षात्कार तथा बातचीत करने के लिए किस 100FM द्वारा रोक दिया गया। रॉयस ने कहा कि एलबम खेल को बदल कर रख देगी और मजाक में कहा कि एमिनेम द्वारा अपनी एल्बम को उतारने के बाद उसे स्वयं की एल्बम को तीन साल तक पीछे धकेलना...
रिलैप्स एल्बम का कवर सबसे पहले 21 अप्रैल 2009 को एमिनेम के ट्विटर अकाउंट के माध्यम से प्रकाशित किया गया था। इसमें रैपर के सिर को दवा की हजारों गोलियों द्वारा ढके हुए दिखाया गया है। कवर पर एक स्टीकर दवा के पर्चे के लेबल की तरह है, जिसमे एमिनेम रोगी है और डॉ॰ ड्रे चिकित्सक हैं। एमटीवी न्यूज़ के गिल कौफ्मैन ने कवर को रैपर...
2009 की एक सबसे प्रत्याशित एल्बम के रूप मॅ, रिलैप्स साल की सर्वाधिक बिकने वाली हिप हॉप एल्बम भी थी। अपनी रिलीज़ के समय, रिलीज के पहले हफ्ते में अपनी 6,08,000 प्रतियां बेच कर एल्बम ने यू.एस. बिलबोर्ड 200 चार्ट पर प्रथम स्थान से शुरुआत की। यू.एस. के अतिरिक्त, अन्य कई देशों में भी रिलैप्स अपने पहले हफ्ते में प्रथम स्थान प...
अपनी रिलीज़ के समय, मेटाक्रिटिक के 59/100 के कुल अंकों के आधार पर एल्बम को आम तौर पर आलोचकों से मिश्रित समीक्षाएं प्राप्त हुईं. "प्रभावशाली ढंग से केन्द्रित तथा अच्छा काम" कहने के बावज़ूद, लॉस एंजिल्स टाइम्स के लेखक एन पॉवेर्स ने इसे सामान्यतः मिश्रित समीक्षा दी और पाया कि इसका संगीत "उत्कृष्ट नहीं था", यह कहते हुए कि ...
5 में से 4 स्टार देते हुए रोलिंग स्टोन के लेखक रोब शेफील्ड ने इसे "और अधिक दर्दनाक, ईमानदार और महत्वपूर्ण रिकॉर्ड" बताया, जिसे उन्होनें एमिनेम की बहुप्रशंसित तीसरी एलबम द एमिनेम शो के साथ देखा था। आलम्यूज़िक के स्टीफन थॉमस अर्लवाइन ने इसे "संगीत के हिसाब से हॉट, सघन और नाटकीय" एल्बम के रूप में वर्णित किया और कहा कि "उस...
}}
साँचा:Eminem
सर्वसत्तावाद, सर्वाधिकारवाद या समग्रवादी व्यवस्था उस राजनीतिक व्यवस्था का नाम है जिसमें शासन अपनी सत्ता की कोई सीमारेखा नहीं मानता और लोगों के जीवन के सभी पहलुओं को यथासम्भव नियंत्रित करने को उद्यत रहता है। ऐसा शासन प्रायः किसी एक व्यक्ति, एक वर्ग या एक समूह के नियंत्रण में रहता है।
समग्रवादी व्यवस्था लक्ष्यों, साधनों एवं नीतियों के दृष्टिकोण से प्रजातांत्रिक व्यवस्था के बिल्कुल विपरीत होता है। यह एक तानाशाह या शक्तिशाली समूह की इच्छाओं एवं संकल्पनाओं पर आधारित होता है।इसमें राजनैतिक शक्ति का केन्द्रीकरण होता है अर्थात् राजनैतिक शक्ति एक व्यक्ति, समूह या दल के हाथ में होती है। ये आर्थिक क्रियाओं क...
इस व्यवस्था में दबाव का तत्व विशेष स्थान रखता है। इसके दो प्रमुख रूप रहे हैं - अधिनायकतंत्र तथा साम्यवादी तंत्र।
राजनीतिक व्यवस्था के एक प्रकार के रूप में 'सर्वसत्तावाद' एक ऐसा पद है जो निरंकुशता, अधिनायकवाद और तानाशाही जैसे पदों का समानार्थक लगता है। यद्यपि इस समानार्थकता को ख़ारिज नहीं किया जा सकता, लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद प्रचलित ज्ञान के समाजशास्त्र की निगाह से देखने पर सर्वसत्तावाद भिन्न तात्पर्यों से सम्पन्न अभिव्यक...
बीसवीं सदी के दूसरे दशक से पहले समाज-विज्ञान में इस पद का इस्तेमाल किया ही नहीं जाता था। 1923 में इतालवी फ़ासीवाद का एक प्रणाली के रूप वर्णन करने के लिए गियोवानी अमेंडोला ने इसका प्रयोग किया। इसके बाद फ़ासीवाद के प्रमुख सिद्धांतकार गियोवानी जेंटील ने बेनिटो मुसोलिनी के नेतृत्व में स्थापित व्यवस्था को ‘टोटलिरिटो’ की संज...
शासन पद्धतियों का तुलनात्मक अध्ययन करने वाले विद्वानों कार्ल फ़्रेड्रिख़ और ज़िगनियू ब्रेज़िंस्की ने सर्वसत्तावाद की परिभाषा जीवन के हर क्षेत्र को अपने दायरे में समेट लेने वाली विचारधारा, एक पार्टी की हूकूमत वाले राज्य, ख़ुफ़िया पुलिस के दबदबे और आर्थिक-सांस्कृतिक-प्रचारात्मक ढाँचे पर सरकारी जकड़ के संयोग के रूप में की...
ज्ञान के समाजशास्त्र के इस शीतयुद्धीन संस्करण में राजनीतिशास्त्रियों ने जम कर योगदान किया। उनके प्रयासों से ही सर्वसत्तावाद की नयी व्याख्याएँ पचास और साठ के दशक में उभरे आधुनिकीकरण और विकास के सिद्धांतों के नतीजे के रूप में सामने आयीं। इसके पहले चरण में सभी समाजों को परम्परागत से आधुनिकता की तरफ़ सिलसिलेवार रैखिक गति स...
1968 में अमेरिकी बुद्धिजीवी सेमुअल पी. हंटिंग्टन की रचना पॉलिटिकल ऑर्डर इन चेंजिंग सोसाइटी का प्रकाशन हुआ। हॉब्स की युगप्रवर्तक रचना लेवायथन से प्रभावित इस कृति में हंटिंग्टन ने तर्क दिया कि अविकसित समाजों में कई बार फ़ौज के अलावा ऐसी कोई आधुनिक, पेशेवर और संगठित राष्ट्रीय संस्था नहीं होती जो लोकतंत्र की तरफ़ संक्रमण क...
लोकतंत्र और सर्वसत्तावाद के बीच इस द्विभाजन को पहली चुनौती 1970 में मिली। समाज-वैज्ञानिकों ने 1964 से 1974 के बीच के दौर में देखा कि लातीनी अमेरिका के अपेक्षाकृत विकसित देशों में ही नहीं, बल्कि स्पेन और पुर्तगाल जैसे धनी देशों में अधिनायकवादी शासन चल रहा है। मैक्सिको में भी लोकतंत्र के आवरण के नीचे दरअसल तानाशाही है। य...
अमेरिकी राजनीतिशास्त्री जीन किर्कपैट्रिक ने 1979 में हंटिंग्टन, लिंज़ और ओडोनेल की व्याख्याओं के आधार पर स्पष्ट सूत्रीकरण किया कि सर्वसत्तावादी केवल मार्क्सवादी- लेनिनवादी हूकूमतें हैं। अधिनायकवादी शासन दमनकारी तो होता है पर उसमें पूँजीवादी लोकतंत्र के रूप में सुधरने की गुंजाइश होती है। किर्कपैट्रिक के इस बहुचर्चित लेख...
शीत युद्ध खत्म हो जाने के बाद राजनीतिशास्त्र के दायरों में इस समय स्थिति यह है कि विद्वानों ने सर्वसत्तावाद की श्रेणी को पूरी तरह से ख़ारिज करके अधिनायकवादी व्यवस्थाओं की एक नयी व्यापक श्रेणी बनायी है। इसमें दमनकारी, असहिष्णु, निजी अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं का अतिक्रमण और ग़ैर-राजकीय हित समूहों को सीमित स्वायत्तत...
1. हान्ना एरेंत, द ओरिजिंस ऑफ़ टोटलिटेरियनिज़म, मेरिडियन, न्यूयॉर्क, दूसरा संस्करण.
2. कार्ल पॉपर, ओपन सोसाइटी ऐंड इट्स एनिमीज़, रॉटलेज, लंदन.
3. सेमुअल पी. हंटिंग्टन, पॉलिटिकल ऑर्डर इन चेंजिंग सोसाइटी, येल युनिवर्सिटी प्रेस, न्यू हैविन.
3. सी.जे. फ़्रेड्रिख़ और ज़ैड. ब्रेज़िंस्की, टोटलिटेरियन डिक्टेटरशिप ऐंड ऑटोक्रेसी, प्रेजर, न्यूयॉर्क.
4. जीन किर्कपैट्रिक, ‘डिक्टेटरशिप ऐंड डबल स्टेंडर्ड’, कमेंटरी, खण्ड 68, अंक 5.
5. जे.जे. लिंज़, ‘एन एथॉरिटेरियन रिज़ीम : अ केस ऑफ़ स्पेन’, ई. अलार्ड और एस रोकन, मास पॉलिटिक्स : स्टडीज़ इन पॉलिटिकल सोसियोलॅजी, फ़्री प्रेस, न्यूयॉर्क.
घनत्व
2Assigned on 19 सितंबर 1990, existing onwards.3एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया की सरकारें मानती है कि वे कभी सोवियत संघ का वैध भाग ही नहीं थे।रूस इन तीनों को सोवियत संघ का वैध अंश मानता है और इन सरकारों के कथन को अवैध मानता है।संयुक्त राज्य अमेरिका और बहुत सी अन्य पश्चिमी सरकारों ने इन तीनों का द्वितीय विश्वयुद्ध के बा...
सोवियत संघ, जिसका औपचारिक नाम सोवियत समाजवादी गणतंत्रों का संघ था, यूरेशिया के बड़े भूभाग पर विस्तृत एक देश था जो 1922 से 1991 तक अस्तित्व में रहा। यह अपनी स्थापना से 1990 तक साम्यवादी पार्टी द्वारा शासित रहा। संवैधानिक रूप से सोवियत संघ 15 स्वशासित गणतंत्रों का संघ था लेकिन वास्तव में पूरे देश के प्रशासन और अर्थव्यवस्...
शब्द "सोवियत" एक रूसी शब्द है जिसका अर्थ है परिषद, असेंबली, सलाह और सद्भाव।
सोवियत संघ की स्थापना की प्रक्रिया 1917 की रूसी क्रान्ति के साथ शुरू हुई जिसमें रूसी साम्राज्य के ज़ार को सत्ता से हटा दिया गया। व्लादिमीर लेनिन के नेतृत्व में बोल्शेविक पार्टी ने सत्ता पर क़ब्ज़ा कर लिया लेकिन फ़ौरन ही वह बोल्शेविक-विरोधी श्वेत मोर्चे के साथ गृह युद्ध में फँस गई। बोल्शेविकों की लाल सेना ने गृह युद्ध क...
अप्रैल 1917 : लेनिन और अन्य क्रान्तिकारी जर्मनी से रूस लौटे।
अक्तूबर 1917 : बोल्शेविकों ने आलेक्सान्द्र केरेंस्की की सत्ता को पलटा और मॉस्को पर अधिकार कर लिया।
1918 - 20 : बोल्शेविकों और विरोधियों में गृहयुद्ध।
1920 : पोलैण्ड से युद्ध
1921 : पोलैंड से शांति संधि, नई आर्थिक नीति, बाजार अर्थव्यवस्था की वापसी, स्थिरता।
1922 : रूस, बेलारूस और ट्रांसकॉकेशस क्षेत्रों का मिलन; सोवियत संघ की स्थापना।
1922 : जर्मनी ने सोवियत संघ को मान्यता दी।
1924 : सोवियत संघ में प्रोलिटैरिएट तानाशाही के तहत नया संविधान लागू। लेनिन की मृत्यु। जोसेफ स्टालिन ने सत्ता संभाली।
1933 : अमेरिका ने सोवियत संघ को मान्यता दी।
1934 : सोवियत संघ लीग ऑफ नेशंस में शामिल हुआ।
अगस्त 1939 : द्वितीय विश्वयुद्ध आरम्भ हुआ।
जून 1941 : जर्मनी ने सोवियत संघ पर हमला किया।
1943 : स्टालिनग्राद के युद्ध में जर्मनी की हार।
1945 : सोवियत सैनिकों ने बर्लिन पर कब्जा किया। याल्टा और पोट्सडैम सम्मेलनों के जरिए जर्मनी को विभाजित कर पूर्वी जर्मनी और पश्चिमी जर्मनी का निर्माण। जापान का आत्मसमर्पण और दूसरे विश्वयुद्ध की समाप्ति।
End of preview. Expand in Data Studio
README.md exists but content is empty.
Downloads last month
55