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सुबह में उठा तो मन में 1 आईडिया आया। | Buddy | |
मैंने सबसे पहले जू जू को जगाया जू, जू, जू उठो न। | Buddy | |
सूसू ने आलस में कहा बडी बडी रे, अभी तो सो रही हूँ। | Buddy | |
फिर मैं मामा विस्कर्ज के पास गया। | Buddy | |
लेकिन सावधानी से जाना, जूजू को साथ ले जाना। | Buddy | |
पापा पास पास में ही थे। | Buddy | |
उन्होंने सुना और बोले बड़ी मैं भी चल रहा हूँ। | Buddy | |
रास्ता जानता हूँ पापा पास के बिना तो तुम खो जाओगे। | Buddy | |
नेटर भाई को मैंने बताया नेटर आज की मस्ती जरुर कहानी में डालना। | Buddy | |
नेरेटर ने हंस कर कहा बड़ी बड़ी तुम्हारी हरकतें तो हमेशा कहानी बनती है। | Buddy | |
जूजू को भी देना। | Buddy | |
टोटो तो मेरे साथ दौड़ने को तैयार था। | Buddy | |
टोटो बार बार मेरी तरफ देख कर पूंछ हिलाता। | Buddy | |
जैसे कह रहा हो बड़ी जल्दी चलो मिमी धीरे धीरे हमारे पीछे आ रही थी। | Buddy | |
कभी पेड़ पर चढ़कर देखती, कभी नीचे आकर साथ चलती। | Buddy | |
मिमी ने कहा बड़ी मुझे भी फल चाहिए। | Buddy | |
मिसिस चिल्पी ऊपर से उड़ती हुई बोली बड़ी बड़ी मैं भी आ रही हूँ। | Buddy | |
हवा से सबको देखूंगी और बताउंगी रास्ता साफ़ है की नहीं हम सब चल पड़े। | Buddy | |
रास्ते में जूजू ने कई बार मुझसे पूछा। | Buddy | |
बड़ी कितनी दूर है मामा विस्कर्ज ने उसे समझाया। | Buddy | |
पापा पोज ने रास्ता दिखाया। | Buddy | |
मिस्टर नट्टी ने नर्स दिए। | Buddy | |
टोटो दौड़ता रहा, मिमी चढ़ती उतरती रही और मिस चर्पी गाती रही। | Buddy | |
आखिरकार बड़े पेड़ तक पहुँचे। | Buddy | |
फल इतने मीठे थे की सबकी मुस्कान नहीं रुकी। | Buddy | |
मोती दिल में ऐंठकर रह गया गया, आ पहुँचा और दोनों को पकड़ कर ले चला। | Buddy | |
कुशल हुई कि उसने इस वक्त मारपीट न की, नहीं तो मोती भी पलट पड़ता। | Buddy | |
उसके तेवर देख कर गया और उसके सहायक समझ गए की इस वक्त टाल जाना ही मसलहत है। | Buddy | |
आज दोनो के सामने। | Buddy | |
फिर वही सूखा भूसा लाया गया। | Buddy | |
दोनों चुपचाप खड़े रहे। | Buddy | |
घर में लोग भोजन करने लगे। | Buddy | |
उस वक्त छोटी सी लड़की, 2 रोटियां लिए निकली और दोनों के मुँह में देकर चली गई। | Buddy | |
उस 1 रोटी से इनकी भूख तो क्या शांत होती, पर दोनों के हृदय को मानो भोजन मिल गया। | Buddy | |
यहाँ भी किसी सज्जन का वास है। | Buddy | |
उसकी माँ मर चुकी थी। | Buddy | |
सौतेली माँ उसे मारती रहती थी। | Buddy | |
इसलिए इन बैलों से 1 प्रकार की आत्मीयता हो गई थी। | Buddy | |
दोनों दिन भर जोते जाते। | Buddy | |
मगर दोनो की आँखों में रोम रोम में विद्रोह भरा हुआ था। | Buddy | |
1 दिन मोती ने मूक भाषा में कहा, अब तो नहीं सहा जाता। | Buddy | |
हीरा क्या करना चाहते हो? | Buddy | |
एकाद को सींगों पर उठाकर फेंक दूंगा। | Buddy | |
लेकिन जानते हो वह प्यारी लड़की, जो हमें रोटियां खिलाती हैं, उसी की लड़की है। | Buddy | |
यह बेचारी अनाथ हो जाएगी। | Buddy | |
तुम मालकिन को न फेंक दूं। | Buddy | |
वही तो इस लड़की को मारती है, लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है। | Buddy | |
तुम तो किसी तरह निकलने ही नहीं देते। | Buddy | |
बताओ तुरा कर भाग चले। | Buddy | |
हाँ, यह मैं स्वीकार करता हूँ। | Buddy | |
लेकिन इतनी मोटी रस्सी टूटेगी कैसे? | Buddy | |
पहले रस्सी को थोड़ा सा चबा लो, फिर 1 झटके में जाती हैं। | Buddy | |
रात को जब बालिका रोटियाँ खिलाकर चली गई। | Buddy | |
दोनों रस्सियाँ चबाने लगे, पर मोटी रस्सी मुँह में न आती थी। | Buddy | |
बेचारे बार बार जोर लगाकर रह जाते थे। | Buddy | |
सहसा घर का द्वार खुला और वह लड़की निकली। | Buddy | |
दोनों सिर झुकाकर उसका हाथ चाटने लगे। | Buddy | |
दोनों की पूंछें खड़ी हो गई। | Buddy | |
उसने उनके माथे सहलाए और बोली खोल देती हूँ चुपके से भाग जाओ। | Buddy | |
नहीं तो ये लोग मार डालेंगे। | Buddy | |
आज घर में सलाह हो रही है कि इनकी नाकों में नाथ डाल दी जाए। | Buddy | |
उसने गरा खोल दिया, पर दोनो चुप खड़े रहे। | Buddy | |
मोती ने अपनी भाषा में पूछा, अब चलती क्यों नहीं? | Buddy | |
चले तो, लेकिन कल इस अनाथ पर आफत आएगी सब इसी पर संदेह करेंगे सहसा? | Buddy | |
बालिका चिल्लाई, दोनों फूफा वाले बैल भागे जे रहे हैं। | Buddy | |
दोनों बैल भागे जा रहे है। | Buddy | |
जल्दी दौड़ो गया। | Buddy | |
हड़बड़ा कर भीतर से निकला और बैलों को पकड़ने चला। | Buddy | |
गया ने पीछा किया और भी तेज हुए। | Buddy | |
फिर गाँव के कुछ आदमियों को भी साथ लेने के लिए लौटा। | Buddy | |
दोनों मित्रों को भागने का मौका मिल गया। | Buddy | |
सीधे दौड़ते चले गए। | Buddy | |
यहाँ तक कि मार्ग का ज्ञान न रहा। | Buddy | |
जिस परिचित मार्ग से आए थे, उसका यहाँ पता न था। | Buddy | |
नए नए गाँव मिलने लगे। | Buddy | |
तब दोनों 1 खेत के किनारे खड़े होकर सोचने लगे, अब क्या करना चाहिए? | Buddy | |
हीरा ने कहा मालूम होता है। | Buddy | |
राह भूल गए, तुम भी बेतहाशा भागे। | Buddy | |
वहीं उसे मार गिराना था। | Buddy | |
उसे मार गिराते, तो दुनिया क्या कहती? | Buddy | |
वह अपने धर्म छोड़ दे। | Buddy | |
लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़े? | Buddy | |
दोनों भूख से व्याकुल हो रहे थे। | Buddy | |
खेत में मटर खड़ी थी। | Buddy | |
रह रहकर आहट लेते रहे थे। | Buddy | |
जब पेट भर गया, दोनों ने आजादी का अनुभव किया, तो मस्त होकर उछलने कूदने लगे। | Buddy | |
पहले दोनों ने डकार ली, फिर सींग मिलाए और 1 दूसरे को ठेलने लगे। | Buddy | |
मोती ने हीरा को कई कदम पीछे हटा दिया। | Buddy | |
यहाँ तक की वो खाई में गिर गया। | Buddy | |
तब उसे भी क्रोध आ गया। | Buddy | |
संभलकर उठा और मोती से भिड़ गया। | Buddy | |
मोती ने देखा, खेल में झगड़ा हुआ चाहता है, तो किनारे हट गया। | Buddy | |
अरे, यह क्या कोई सा ढोता चला आ रहा है। | Buddy | |
दोनों मित्र बगले झाँक रहे थे। | Buddy | |
सार पूरा हाथ ही था। | Buddy | |
उससे भिडना जान से हाथ धोना है, लेकिन न भिडने पर भी जान बचती नहीं नजर आती। | Buddy | |
इन्हीं की तरफ आ भी रहा है कितनी भयंकर सूरत है। | Buddy | |
मोती ने मु भाषा में कहा, बुरे फसे जान, बचेगी, कोई उपाय सोचो। | Buddy | |
हीरा ने चिंतित स्वर में कहा अपने घमंड में फूला हुआ है। | Buddy | |
और सुवन्ती न सुनेगा भाग क्यों न चले भागना कायरता है। | Buddy |
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