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जो इस घर का मालिक है। यह बेचारी अनाथ हो जाएगी तो मालकिन को न फेंक दूं। | mimi-master-2 | 5.803 | |
बालिका चिल्लाई, दोनों फूफा वाले बैल भागे जे रहे हैं। ओ दादा दादा। | mimi-master-2 | 5.483 | |
जूजू बोली मीमी मेरे साथ खेलो मामा विस्कर्ज ने देखा, | mimi-master-2 | 5.12 | |
गले में बड़ी बड़ी रस्सियाँ न होती, तो दोनों पकड़ाई में न आते। भागना व्यर्थ है। | mimi-master-2 | 5.696 | |
साथ नांद में मुँह डालते और साथ ही बैठते थे। | mimi-master-2 | 3.435 | |
उसके खद्दोकालबेऐब हैं। मगर वो ताजगी, वो गुफ्तगी, वो नजर फरे भी नहीं है। | mimi-master-2 | 6.443 | |
शादी में जो जोड़े और जेवर आये थे, वो बहुत ही दिल शिकन थे। | mimi-master-2 | 4.288 | |
राम दुलारी बहन की खफ्त का मजा उठाती हुई बोली बहन, | mimi-master-2 | 4.203 | |
संध्या समय दोनों बैल अपने नए स्थान पर पहुँचे। | mimi-master-2 | 3.029 | |
और भी कई रीतियों से अपना असंतोष प्रकट कर देता है। अतएव उसका स्थान गधे से नीचा है। | mimi-master-2 | 7.083 | |
खुद अच्छा पहन लेने और अच्छा खा लेने। ही से तो जिंदगी का मकसद पूरा नहीं हो जाता। | mimi-master-2 | 5.248 | |
कदाचित सीधापन संसार के लिए उपयुक्त नहीं है? | mimi-master-2 | 3.52 | |
दोनों ने अपनी मूक भाषा में सलाह की। 1 दूसरे को कनखियों से देखा और लेट गए। | mimi-master-2 | 6.123 | |
दोनों मित्र जीत के नशे में झूमते चले जाते थे। | mimi-master-2 | 3.2 | |
वहीं उसे मार गिराना था। उसे मार गिराते, तो दुनिया क्या कहती? वो अपने धर्म छोड़ दे। | mimi-master-2 | 6.72 | |
सीधे दौड़ते चले गए, यहाँ तक कि मार्ग का ज्ञान न रहा। | mimi-master-2 | 4.032 | |
कहाँ 75 और कहाँ 500 इतनी रकम जमीर का खून करके भी क्यों न मिले। | mimi-master-2 | 5.973 | |
मुझे तो मालूम होता है कि प्राण निकल रहे हैं, इतनी जल्द हिम्मत न। | mimi-master-2 | 4.992 | |
इमारत का कोई दूसरा सामान ही न था। | mimi-master-2 | 2.347 | |
रूप कुमारी के बदन में आग सी लग गई। फो रे दिमाग गोया उसका शौहर लाट ही तो है। | mimi-master-2 | 6.933 | |
उसे तम सकुर के अंदाज से बोली। तब तो शायद 1000 मिलने लगे। | mimi-master-2 | 4.821 | |
फिर भी रूपकुमारी उसकी मुतहम्मिल नहीं हो सकती। जमीर की कीमत ज्यादा से ज्यादा सौ रुपए हो सकती है। | mimi-master-2 | 6.997 | |
तुम यहाँ गलती कर रही हो तो सभी पास हो सकते हैं। मगर एजेंटी करने किसको आती है। | mimi-master-2 | 6.613 | |
वही रामदुलारी जो लड़कपन में सर के बाल खोले फुहर सी इधर उधर खेला करती थी। | mimi-master-2 | 6.144 | |
1 बालक ने कहा, ऐसे बैल किसी के पास न होंगे। दूसरे ने समर्थन किया। | mimi-master-2 | 5.995 | |
वो तो 1 शत्रु से मल्लयुद्ध करने का आदी था, जो ही हीरा पर झपटा। | mimi-master-2 | 5.269 | |
संघर्ष पूर्ण गति में पीछे से हाँकता तो दोनों दाये बाये भागते। | mimi-master-2 | 4.523 | |
वो राम दुलारी से हेटी बन कर नहीं रह सकती। ये मर्द भी कितने अहम होते हैं। | mimi-master-2 | 5.205 | |
रेशम, मखमल और सोने की बदौलत नक्शा थोड़ा ही बदल जाएगा। | mimi-master-2 | 4.8 | |
लेकिन कल इस अनाथ पर आफत आएगी सब इसी पर संदेह करेंगे सहसा। | mimi-master-2 | 5.675 | |
रात को भी जब कुछ भोजन न मिला तो हीरा के दिल में विद्रोह की ज्वाला दहक उठी। | mimi-master-2 | 5.376 | |
यहाँ तक कि साँड बेदम होकर गिर पड़ा। तब दोनों ने उसे छोड़ दिया। | mimi-master-2 | 4.523 | |
झूरी ने चुराया चारा मिलता तो क्यों भागते स्त्री चिड़ी भागे। | mimi-master-2 | 6.165 | |
जब एजेंटी में इतनी तन्हा और भत्ते मिलते हैं तो कॉलेज बंद क्यों नहीं हो जाते? | mimi-master-2 | 5.312 | |
क्या खाएं आशा भरी आँखों से द्वार की ओर ताकने लगे। | mimi-master-2 | 4.523 | |
हीरा ने चिंतित स्वर में कहा, अपने घमंड में फूला हुआ है। | mimi-master-2 | 4.139 | |
अपना यों बेचा जाना, उन्हें अच्छा लगा या बुरा, कौन जाने कठिन? | mimi-master-2 | 5.205 | |
आरजू विनती न सुनेगा, भाग क्यों न चले भागना कायरता है। | mimi-master-2 | 5.525 | |
हमें तो तुम्हारी चाकरी में मर जाना कबूल था। हमने कभी दाने चारे की शिकायत नहीं की। | mimi-master-2 | 5.76 | |
ढाई सौ में घर का खर्च खुश फेली से चल जाता है। | mimi-master-2 | 3.072 | |
वो किया था। लेकिन अब वो सूरत जैसे याददाश्त से मिट गई है। | mimi-master-2 | 4.693 | |
लेकिन जानते हो, वह प्यारी लड़की, जो हमें रोटियां खिलाती है, उसी की लड़की है, | mimi-master-2 | 5.717 | |
मगर ये शहर, ये कशिश और किसी में नहीं। और उसके दिल में हसद का 1 शोला सा दहक उठा। | mimi-master-2 | 6.955 | |
उसके घर वाले गरीब हैं, पर इज्जत तो है, किसी का गला तो नहीं दबाते, | mimi-master-2 | 4.928 | |
इस 2 साल में कैसे हुन बरस गया, कौन जाने जेवर किसी ऐसी मांग कर लाई हो। | mimi-master-2 | 5.632 | |
कहा जाता है वे जीवन के आदर्श को नीचा करते हैं। | mimi-master-2 | 3.819 | |
24 बार मोती ने गाड़ी को खाई में गिराना चाहा, पर हीरा ने संभाल लिया। वो ज्यादा सहनशील था। | mimi-master-2 | 6.656 | |
बे मालकिन, मुझे मालकिन, मुझे मार ही डालेगी। चुरा कर डाला। | mimi-master-2 | 5.803 | |
जिस वक्त ये दोनों बैल हल या गाड़ी में जोत दिए जाते और गर्दन हिला हिला कर चलते, | mimi-master-2 | 6.379 | |
प्रतिरोध में मारता तो दोनों सींगे नीची करके हुंकारते। | mimi-master-2 | 3.861 | |
मैंने हाँ कहा हम सब साथ खेले बड़ी जूजू मामा विस्कर्ज पापा, | mimi-master-2 | 6.827 | |
4 पैसे कुसमय के लिए बचाकर रखते हैं। | mimi-master-2 | 2.603 | |
वो उठ कर ड्राइंग रूम में गई। और कदे आदम शिष्य में अपनी सूरत देखी? | mimi-master-2 | 4.501 | |
हाँ, यह मैं स्वीकार करता हूँ। लेकिन इतनी मोटी रस्सी टूटेगी कैसे, इसका 1 उपाय है। | mimi-master-2 | 6.869 | |
हमने तो तुम्हारी सेवा करने में कोई कसर नहीं उठा रखी। | mimi-master-2 | 3.264 | |
मगर अब भी कुछ उम्मीद बाकी थी। शायद उसकी तस्कीन कल्प का कोई रास्ता निकल आए। | mimi-master-2 | 6.251 | |
औरतें दिल में खुदा, जाने क्या समझे। यहाँ कोई आईना तो होगा ही। ड्राइंग रूम में तो जरूर होगा। | mimi-master-2 | 6.72 | |
तो मार से कहाँ तक बचेंगे गया। 2 आदमियों के साथ दौड़ा आ रहा है। दोनों के हाथों में लाठियाँ हैं। | mimi-master-2 | 6.848 | |
हजारों लड़के क्यों अपनी जिंदगी खराब करते हैं। | mimi-master-2 | 2.837 | |
यह कहाँ का इंसाफ है कि रूप कुमारी जो हसीन है, तमीजदार है, किफायत शियार है, | mimi-master-2 | 6.357 | |
1 1 लाख के तो उसके 2 लड़के हैं। भगवान उन्हें जिंदा सलामत रखे, वो इसी में खुश हैं। | mimi-master-2 | 6.656 | |
बैल कभी कभी मारता भी है, कभी कभी अरियल बैल भी देखने में आता है, | mimi-master-2 | 4.715 | |
अब देखूँ, कहाँ से खली और चोकर मिलता है। सूखे भूसे के सिवा कुछ न दूंगी। | mimi-master-2 | 5.931 | |
बिसातियों दर्जियों और बजाज के तकाजे सहेंगी, | mimi-master-2 | 3.755 | |
कोई कितना ही हंसे बेहया की बला दूर बस। | mimi-master-2 | 3.84 | |
चरने लगे, रह रह कर आहट लेते रहे थे। कोई आता तो नहीं है। | mimi-master-2 | 4.971 | |
बचेगी कोई उपाय सोचो। | mimi-master-2 | 2.197 | |
हीरा तो मेड पर था, निकल गया। मोती सींचे हुए खेत में था, उसके खुर कीचर में धँसने लगे। | mimi-master-2 | 7.083 | |
उसके चेहरे पर। 1 विषाद स्थायी रूप से छाया रहता है। | mimi-master-2 | 4.011 | |
मगर रामदुलारी के लहजे में इतनी सदाकत थी के तहतू सूर में उसे मुतस्सिर हो रही थी। | mimi-master-2 | 6.656 | |
हीरा ने कहा, मालूम होता है, राह भूल गए, तुम भी बेतहाशा भागे। | mimi-master-2 | 5.504 | |
लेकिन गधे गधा है। और वह है बैल। | mimi-master-2 | 2.965 | |
पॉज नेरेटर मिस्टर नट्टी टोटो, मिस चिपी, | mimi-master-2 | 4.693 | |
और तो सभी पानी पिला पिला कर रखते हैं। | mimi-master-2 | 2.389 | |
यहाँ कई भैसे थी, कई बकरियां, कई घोड़े, कई गधे। पर किसी के सामने चारा न था। | mimi-master-2 | 6.912 | |
उसकी माँ मर चुकी थी, सौतेली माँ उसे मारती रहती थी। | mimi-master-2 | 3.968 | |
मोती उसमें घुस गया। हीरा मना करता रहा, पर उसने 1 न, सुनी, अभी, 2 ही, | mimi-master-2 | 6.293 | |
अपने शौहर पर जान देती है। बच्चों को जान से अजीज समझती है। | mimi-master-2 | 4.629 | |
देखिए न, भारतवासियों की अफ्रीका में क्या दुर्दशा हो रही है? | mimi-master-2 | 4.224 | |
जिस परिचित मार्ग से आये थे, उसका यहाँ पता न था। नए नए गाँव मिलने लगे। | mimi-master-2 | 5.547 | |
4 बातें सुनकर गम खा जाते हैं, फिर भी बदनाम हैं। | mimi-master-2 | 3.904 | |
गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी। | mimi-master-2 | 5.397 | |
कोई अपने घर से रोटियाँ लाया, कोई गुड़, कोई चोकर, कोई भूसी। | mimi-master-2 | 4.693 | |
गया ने पीछा किया और भी तेज हुए। गया ने शोर मचाया। | mimi-master-2 | 4.331 | |
दोनों की पूंछें खड़ी हो गई। | mimi-master-2 | 1.728 | |
उस पर मिला सूखा भूसा नाद की तरफ आँखें तक न उठायी। | mimi-master-2 | 4.565 | |
पर ये दोनों भी उस्ताद थे। उसे वह अवसर न देते थे। | mimi-master-2 | 3.797 | |
दिल भारी हो रहा था। जिसे उन्होंने अपना घर समझ रखा था, वो आज उनसे छूट गया। | mimi-master-2 | 5.952 | |
मैंने सोचा ऊपर से देखने में सब कितने प्यारे लगते हैं। | mimi-master-2 | 3.947 | |
लेकिन मजमे में वो आईना देखने या बनाव सिंघार करने की आदि नहीं है ये। | mimi-master-2 | 5.952 | |
जब पेट भर गया, दोनों ने आजादी का अनुभव किया, तो मस्त होकर उछलने कूदने लगे। | mimi-master-2 | 5.952 | |
अगर ईश्वर ने उन्हें वाणी दी होती, तो झूरी से पूछते, तुम हम गरीबों को क्यों निकाल रहे हो? | mimi-master-2 | 6.827 | |
बैलों ने नाद में मुँह डाला तो फीका फीका, न कोई चिकनाहट, न कोई रस। | mimi-master-2 | 5.888 | |
सारा दिन दोनो मित्र फाटक की ओर टकटकी लगाए। ताकते रहे, पर कोई चारा लेकर आता न दिखाई दिया। | mimi-master-2 | 7.061 | |
आँखें रखकर भी अंधे बनते हैं। मेरे कपड़ो में। राम दुलारी को खड़ा कर। | mimi-master-2 | 4.693 | |
उसने उनके माथे, सहलाए और बोली खोल देती हूँ चुपके से भाग जाओ, | mimi-master-2 | 5.397 | |
हीरा ने तिरस्कार किया, गिरे हुए बैरी पर सींग थीना, चलाना चाहिए, ये सब ढोंग है। | mimi-master-2 | 6.635 | |
मिमी सबसे चालाक हैं। नैरेटर कहानी में मेरी हरकतें डाल रहे थे। | mimi-master-2 | 4.8 | |
मगर दोनों की आंखों में रोम रोम में विद्रोह भरा हुआ था। | mimi-master-2 | 3.925 | |
उस वक्त हर 1 की यही चेष्टा होती थी कि ज्यादा से ज्यादा बोझ मेरी ही गर्दन पर रहे। | mimi-master-2 | 6.635 |
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