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1.69
7.1
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1.69
7.1
जो इस घर का मालिक है। यह बेचारी अनाथ हो जाएगी तो मालकिन को न फेंक दूं।
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5.803
बालिका चिल्लाई, दोनों फूफा वाले बैल भागे जे रहे हैं। ओ दादा दादा।
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5.483
जूजू बोली मीमी मेरे साथ खेलो मामा विस्कर्ज ने देखा,
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5.12
गले में बड़ी बड़ी रस्सियाँ न होती, तो दोनों पकड़ाई में न आते। भागना व्यर्थ है।
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5.696
साथ नांद में मुँह डालते और साथ ही बैठते थे।
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3.435
उसके खद्दोकालबेऐब हैं। मगर वो ताजगी, वो गुफ्तगी, वो नजर फरे भी नहीं है।
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6.443
शादी में जो जोड़े और जेवर आये थे, वो बहुत ही दिल शिकन थे।
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4.288
राम दुलारी बहन की खफ्त का मजा उठाती हुई बोली बहन,
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4.203
संध्या समय दोनों बैल अपने नए स्थान पर पहुँचे।
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3.029
और भी कई रीतियों से अपना असंतोष प्रकट कर देता है। अतएव उसका स्थान गधे से नीचा है।
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7.083
खुद अच्छा पहन लेने और अच्छा खा लेने। ही से तो जिंदगी का मकसद पूरा नहीं हो जाता।
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5.248
कदाचित सीधापन संसार के लिए उपयुक्त नहीं है?
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3.52
दोनों ने अपनी मूक भाषा में सलाह की। 1 दूसरे को कनखियों से देखा और लेट गए।
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6.123
दोनों मित्र जीत के नशे में झूमते चले जाते थे।
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3.2
वहीं उसे मार गिराना था। उसे मार गिराते, तो दुनिया क्या कहती? वो अपने धर्म छोड़ दे।
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6.72
सीधे दौड़ते चले गए, यहाँ तक कि मार्ग का ज्ञान न रहा।
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4.032
कहाँ 75 और कहाँ 500 इतनी रकम जमीर का खून करके भी क्यों न मिले।
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5.973
मुझे तो मालूम होता है कि प्राण निकल रहे हैं, इतनी जल्द हिम्मत न।
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4.992
इमारत का कोई दूसरा सामान ही न था।
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2.347
रूप कुमारी के बदन में आग सी लग गई। फो रे दिमाग गोया उसका शौहर लाट ही तो है।
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6.933
उसे तम सकुर के अंदाज से बोली। तब तो शायद 1000 मिलने लगे।
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4.821
फिर भी रूपकुमारी उसकी मुतहम्मिल नहीं हो सकती। जमीर की कीमत ज्यादा से ज्यादा सौ रुपए हो सकती है।
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6.997
तुम यहाँ गलती कर रही हो तो सभी पास हो सकते हैं। मगर एजेंटी करने किसको आती है।
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6.613
वही रामदुलारी जो लड़कपन में सर के बाल खोले फुहर सी इधर उधर खेला करती थी।
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6.144
1 बालक ने कहा, ऐसे बैल किसी के पास न होंगे। दूसरे ने समर्थन किया।
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5.995
वो तो 1 शत्रु से मल्लयुद्ध करने का आदी था, जो ही हीरा पर झपटा।
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5.269
संघर्ष पूर्ण गति में पीछे से हाँकता तो दोनों दाये बाये भागते।
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4.523
वो राम दुलारी से हेटी बन कर नहीं रह सकती। ये मर्द भी कितने अहम होते हैं।
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5.205
रेशम, मखमल और सोने की बदौलत नक्शा थोड़ा ही बदल जाएगा।
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4.8
लेकिन कल इस अनाथ पर आफत आएगी सब इसी पर संदेह करेंगे सहसा।
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5.675
रात को भी जब कुछ भोजन न मिला तो हीरा के दिल में विद्रोह की ज्वाला दहक उठी।
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5.376
यहाँ तक कि साँड बेदम होकर गिर पड़ा। तब दोनों ने उसे छोड़ दिया।
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4.523
झूरी ने चुराया चारा मिलता तो क्यों भागते स्त्री चिड़ी भागे।
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6.165
जब एजेंटी में इतनी तन्हा और भत्ते मिलते हैं तो कॉलेज बंद क्यों नहीं हो जाते?
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5.312
क्या खाएं आशा भरी आँखों से द्वार की ओर ताकने लगे।
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4.523
हीरा ने चिंतित स्वर में कहा, अपने घमंड में फूला हुआ है।
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4.139
अपना यों बेचा जाना, उन्हें अच्छा लगा या बुरा, कौन जाने कठिन?
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5.205
आरजू विनती न सुनेगा, भाग क्यों न चले भागना कायरता है।
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5.525
हमें तो तुम्हारी चाकरी में मर जाना कबूल था। हमने कभी दाने चारे की शिकायत नहीं की।
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5.76
ढाई सौ में घर का खर्च खुश फेली से चल जाता है।
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3.072
वो किया था। लेकिन अब वो सूरत जैसे याददाश्त से मिट गई है।
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4.693
लेकिन जानते हो, वह प्यारी लड़की, जो हमें रोटियां खिलाती है, उसी की लड़की है,
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5.717
मगर ये शहर, ये कशिश और किसी में नहीं। और उसके दिल में हसद का 1 शोला सा दहक उठा।
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6.955
उसके घर वाले गरीब हैं, पर इज्जत तो है, किसी का गला तो नहीं दबाते,
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4.928
इस 2 साल में कैसे हुन बरस गया, कौन जाने जेवर किसी ऐसी मांग कर लाई हो।
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5.632
कहा जाता है वे जीवन के आदर्श को नीचा करते हैं।
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3.819
24 बार मोती ने गाड़ी को खाई में गिराना चाहा, पर हीरा ने संभाल लिया। वो ज्यादा सहनशील था।
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6.656
बे मालकिन, मुझे मालकिन, मुझे मार ही डालेगी। चुरा कर डाला।
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5.803
जिस वक्त ये दोनों बैल हल या गाड़ी में जोत दिए जाते और गर्दन हिला हिला कर चलते,
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6.379
प्रतिरोध में मारता तो दोनों सींगे नीची करके हुंकारते।
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3.861
मैंने हाँ कहा हम सब साथ खेले बड़ी जूजू मामा विस्कर्ज पापा,
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6.827
4 पैसे कुसमय के लिए बचाकर रखते हैं।
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2.603
वो उठ कर ड्राइंग रूम में गई। और कदे आदम शिष्य में अपनी सूरत देखी?
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4.501
हाँ, यह मैं स्वीकार करता हूँ। लेकिन इतनी मोटी रस्सी टूटेगी कैसे, इसका 1 उपाय है।
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6.869
हमने तो तुम्हारी सेवा करने में कोई कसर नहीं उठा रखी।
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3.264
मगर अब भी कुछ उम्मीद बाकी थी। शायद उसकी तस्कीन कल्प का कोई रास्ता निकल आए।
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6.251
औरतें दिल में खुदा, जाने क्या समझे। यहाँ कोई आईना तो होगा ही। ड्राइंग रूम में तो जरूर होगा।
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6.72
तो मार से कहाँ तक बचेंगे गया। 2 आदमियों के साथ दौड़ा आ रहा है। दोनों के हाथों में लाठियाँ हैं।
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6.848
हजारों लड़के क्यों अपनी जिंदगी खराब करते हैं।
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2.837
यह कहाँ का इंसाफ है कि रूप कुमारी जो हसीन है, तमीजदार है, किफायत शियार है,
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6.357
1 1 लाख के तो उसके 2 लड़के हैं। भगवान उन्हें जिंदा सलामत रखे, वो इसी में खुश हैं।
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6.656
बैल कभी कभी मारता भी है, कभी कभी अरियल बैल भी देखने में आता है,
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4.715
अब देखूँ, कहाँ से खली और चोकर मिलता है। सूखे भूसे के सिवा कुछ न दूंगी।
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5.931
बिसातियों दर्जियों और बजाज के तकाजे सहेंगी,
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3.755
कोई कितना ही हंसे बेहया की बला दूर बस।
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3.84
चरने लगे, रह रह कर आहट लेते रहे थे। कोई आता तो नहीं है।
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4.971
बचेगी कोई उपाय सोचो।
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2.197
हीरा तो मेड पर था, निकल गया। मोती सींचे हुए खेत में था, उसके खुर कीचर में धँसने लगे।
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7.083
उसके चेहरे पर। 1 विषाद स्थायी रूप से छाया रहता है।
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4.011
मगर रामदुलारी के लहजे में इतनी सदाकत थी के तहतू सूर में उसे मुतस्सिर हो रही थी।
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6.656
हीरा ने कहा, मालूम होता है, राह भूल गए, तुम भी बेतहाशा भागे।
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5.504
लेकिन गधे गधा है। और वह है बैल।
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2.965
पॉज नेरेटर मिस्टर नट्टी टोटो, मिस चिपी,
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4.693
और तो सभी पानी पिला पिला कर रखते हैं।
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2.389
यहाँ कई भैसे थी, कई बकरियां, कई घोड़े, कई गधे। पर किसी के सामने चारा न था।
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6.912
उसकी माँ मर चुकी थी, सौतेली माँ उसे मारती रहती थी।
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3.968
मोती उसमें घुस गया। हीरा मना करता रहा, पर उसने 1 न, सुनी, अभी, 2 ही,
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6.293
अपने शौहर पर जान देती है। बच्चों को जान से अजीज समझती है।
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4.629
देखिए न, भारतवासियों की अफ्रीका में क्या दुर्दशा हो रही है?
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4.224
जिस परिचित मार्ग से आये थे, उसका यहाँ पता न था। नए नए गाँव मिलने लगे।
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5.547
4 बातें सुनकर गम खा जाते हैं, फिर भी बदनाम हैं।
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3.904
गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।
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5.397
कोई अपने घर से रोटियाँ लाया, कोई गुड़, कोई चोकर, कोई भूसी।
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4.693
गया ने पीछा किया और भी तेज हुए। गया ने शोर मचाया।
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4.331
दोनों की पूंछें खड़ी हो गई।
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1.728
उस पर मिला सूखा भूसा नाद की तरफ आँखें तक न उठायी।
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4.565
पर ये दोनों भी उस्ताद थे। उसे वह अवसर न देते थे।
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3.797
दिल भारी हो रहा था। जिसे उन्होंने अपना घर समझ रखा था, वो आज उनसे छूट गया।
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5.952
मैंने सोचा ऊपर से देखने में सब कितने प्यारे लगते हैं।
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3.947
लेकिन मजमे में वो आईना देखने या बनाव सिंघार करने की आदि नहीं है ये।
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5.952
जब पेट भर गया, दोनों ने आजादी का अनुभव किया, तो मस्त होकर उछलने कूदने लगे।
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5.952
अगर ईश्वर ने उन्हें वाणी दी होती, तो झूरी से पूछते, तुम हम गरीबों को क्यों निकाल रहे हो?
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6.827
बैलों ने नाद में मुँह डाला तो फीका फीका, न कोई चिकनाहट, न कोई रस।
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5.888
सारा दिन दोनो मित्र फाटक की ओर टकटकी लगाए। ताकते रहे, पर कोई चारा लेकर आता न दिखाई दिया।
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7.061
आँखें रखकर भी अंधे बनते हैं। मेरे कपड़ो में। राम दुलारी को खड़ा कर।
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4.693
उसने उनके माथे, सहलाए और बोली खोल देती हूँ चुपके से भाग जाओ,
mimi-master-2
5.397
हीरा ने तिरस्कार किया, गिरे हुए बैरी पर सींग थीना, चलाना चाहिए, ये सब ढोंग है।
mimi-master-2
6.635
मिमी सबसे चालाक हैं। नैरेटर कहानी में मेरी हरकतें डाल रहे थे।
mimi-master-2
4.8
मगर दोनों की आंखों में रोम रोम में विद्रोह भरा हुआ था।
mimi-master-2
3.925
उस वक्त हर 1 की यही चेष्टा होती थी कि ज्यादा से ज्यादा बोझ मेरी ही गर्दन पर रहे।
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6.635
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