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सेवन | |
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को जनमानस | |
जब वह अपनी मोटर साइकिल पर चढ़ कर | |
चंपा के दूसरे भाग में एक मनोरम शैलमाला थी | |
मैंने कल कुछ ज़्यादा ही खा लिया। | |
अपनी सारी कसक शब्दों में बिखेर देता है | |
वन | |
क्या उनको इतनी भी समझ न थी कि यह बेचारा | |
भगवान मेरे दादाजी को बचा लो | |
स्कूल के अहाते के अन्दर खेल का मैदान उसे अच्छा लगता था | |
किसी के जूते कड़े हो गए हैं | |
दरबार में सन्नाटा छाया हुआ था | |
उन्होंने मुझे ज़रूरत की चीज़ों की एक लम्बी सूची दी | |
वह बोलेहाँ जरूर पंचायत करो फैसला हो जाय | |
शैल के एक ऊँचे शिखर पर चंपा के नाविकों को | |
यूँ बच्चे भी शिक्षक को पसंद नहीं करते थे | |
बावली हो क्या | |
एक दीर्घ निश्वास लेकर चंपा ने मुँह फेर लिया | |
ये गोदाम भगवान के भक्तों के गोदाम है और | |
हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड में जॉब्स | |
मॉडलिंग से बोरियत लाई फिल्मों की ओर बिपाशा | |
लेकिन मैं कल तक रुकना नहीं चाहता | |
फिर नीचा सिर करके कुछ रूखाई से बोला | |
ज़ीरो | |
हामिद भीतर जाकर दादी से कहता | |
हम चारों ने मज़े से कॉफ़ी पी | |
उनके हटाने में उन्हें बड़े दुस्साहस से काम लेना पड़ा | |
कुछ दिन खालाजान ने सुना और सहा | |
इसे कथा न समझिएगा यह सच्ची घटना है | |
तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने | |
फ़ोर | |
एक महीने तक पैदल चलेंगे | |
सुन्दर टेकड़ी पर बसी यह नगरी आमेर अपने | |
मध्य प्रदेश के मंत्री बोलेहम हैं लल्लू देश के नागरिक जिसे चाहिए नमो | |
फिर वह बाहर चले जाते | |
मुर्दा बैल दिया था उस पर दाम माँगने चले हैं | |
अमूल को बनाया ब्रांड | |
समझो वहीं हमें भी दिल हो जहाँ हमारा | |
करते तो वह उन पर नज़र डाल लेते | |
चमककर वह कृपाण समुद्र का | |
रामचंद्र ने उठते हुए प्रश्न किया | |
जुम्मन को इस समय सदस्यों में विशेषकर वे ही लोग दीख पड़े | |
हर मैदान फ़तेह | |
जो भी हो कल फिर आएगा | |
ही उनका कानूनसम्बन्धी सब काम किया करते थे | |
राजा भक्त अम्बरीश के नाम से जोड़ते हैं | |
मेरे लिए जैसे रामधन वैसे अलगू | |
मैंने उन्हें एक सोने की घड़ी दी। | |
का एक मॉडल दिया | |
मत करो भैया नहीं हैं तो क्या हुआ मैं हूं ना | |
यह रश्मि जानती थी | |
फिर भी उस उम्र में मोहनदास को | |
चित्रकारों के दल ने एक बैठक की | |
सृष्टि नील कमलों में भर उठी | |
मजबूर होकर ब्रिटिश सरकार ने | |
मैंने कई बार माफ़ी माँगी | |
इन ग्रामीणों ने भी वजू किया और | |
चंपा ने कहा | |
मैंने पढ़ा है कि | |
यह उन्हीं की महिमा है | |
मैं जी भरकर हँसा | |
कहता हुआ चला गया | |
फ़ोर | |
वह हार नहीं मानेगी न आज और न कल | |
जो तुम बर्बाद कर रहे हो उसकी पूर्ति तुम कभी नहीं कर सकते | |
पेड़ों में आम और लीचियाँ लगी हुई हैं | |
जानू कह रही थी कि उसके घर में तिलगुड़ बनायी जाती है | |
तेरी कोशिशें ही कामयाब होंगी | |
सिक्स | |
उसने यही भूल कर दी टाइगर उस पर झपटा | |
इस सरलता से रख लिया | |
टॉम इस तरफ़ आ रहा है। | |
वो खून था हिंदुस्तानी | |
पर वह पूरा भरा नहीं | |
मैं चिल्लाता हुआ उन्हें रोकने के लिए दौड़ा | |
आप नीचे आ जाइये हम आपको पेड़ के ऊपर नहीं छोड़ सकते | |
बोला बाबू जी देवता के समान हैं | |
चौधरी को भी गरज थी ही घाटे की परवा न की | |
अवसाद और चिंता के इलाज में यह लाभकारी है | |
बात यह थी कि मेरी दादी और | |
मोटेवाले ने रेडियो से दमकल वालों को बुलाया | |
नौका लहरों में विकल थी | |
कि तुम ऐसा नहीं कर सकते | |
स्वच्छ भारत की बात करना और अमल में लाना दो अलग बातें राहुल गांधी | |
मैंने आँखें फाड़ कर उन्हें देखा क्या आप पेन्सिल और कागज़ खाएँगे | |
उसके अब्बाजान रुपये कमाने गए हैं | |
फेसबुक पर पीएमओ इंडिया के फर्जी पेज कइयों ने किया लाइक | |
यूँ ही चला चल दिल के सहारे | |
मोरू को स्कूल जाना अच्छा लगता क्योंकि उसके कई दोस्त भी स्कूल जाते थे | |
मैं इस शोध से बिल्कुल चौंक गई था | |
एक पड़ाव पूरा हो गया पर वे उस कार्य को | |
मैं बहुत शर्मिंदा था और ख़ुद को अभागा मानता था | |
कर्मचारी यह देखकर दंग रह गए कि कल तक | |
वे सीधे पेड़ की ओर बढ़े | |
उनके जमींदार एक ठाकुर साहब थे | |
हलवेपुलाव की वर्षासी की गयी | |
टू | |
पेड़ों पर चढ़कर कच्चे आम तोड़ना मोरू को अच्छा लगता था | |
अगर तुम दरवाज़ा थोड़ासा और खोल दोगे तो मैं | |
देशी विदेशी सैलानियों का एक बड़ा पर्यटन स्थल भी है |
Subsets and Splits
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