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|---|---|---|---|
अप्रकृत | वि. | [सं.] | १. प्रकृत वा स्वाभाविक नभएको। | २. विषय नमिलेको; भिन्न विषयको; अप्रासङ्गिक। |
पण्डितम्मन्य | वि. | [सं.] | पण्डितमानी। |
अर्थप्रद | वि. | [सं.] | १. अर्थ दिने; सार्थक। | २. धनदाता; वृत्तिदाता। |
हुल्को | ना. | कुलामा बगेर आएको एक भुल्को पानी। | |
सपुले | ना. | [सुनु.] | सुनकोसीको तीर हुँदै पूर्वी नेपालमा छरिएर बसेका किराँत जातिको एक थर। |
प्रद | वि. | [सं.] | नाम शब्दका पछाडि जोडिएर 'दिने' भन्ने अर्थ बुझाउने विशेषणवाचक उत्तर पद। |
ह्वाङो | वि. | पूरै खुला। | |
पत्रालाप | ना. | [सं.] | चिठीपत्र आदिका सहायताबाट हुने विचारको आदानप्रदान। |
चोरीसिकारी | ना. | वनपालेलाई छलेर सुटुक्क सिकार खेल्ने कार्य। | |
नमकहलाल | वि. | कसैको नुन खाएपछि नुनको सोझो गर्ने; कृतज्ञ। | |
छुट्टा | वि. | [छुट] | १. खुद्रा पैसा। | २. अलग; भिन्न; छुट्टो; छुट्ट। | ३. आफ्नो समूह वा ठाउँभन्दा अलग्ग बसेको; छुट्टिएको; बेग्लै भएको। |
बल्याउनु | सक्रि. | [बाली+आउ+नु] | धान, कोदो आदि अन्नका बाला बिउका निम्ति छानेर काट्नु; राम्रोसित फलेका र राम्रा दाना भएका धान वा कोदाका बाला छानी छानी टिप्नु। |
पधौरे | वि. | पदुवा; पदौरे। | |
कबाज | ना. | [अ.] | हे. कवाज। |
खर्रा | ना. | खरेटो। | |
जमिनदारी | ना. | १. जमिनदारको खुवा वा बिर्ता; जिरायत। | २. जमिनदारको पद वा दायित्व। | |
अन्डे | वि. | [अण्डा+ए] | १. अण्डकोष सुन्निएको; ठुला अण्ड भएको। | २. आँडे। |
वर्णाश्रम | ना. | [सं.] | ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य र शूद्र चार वर्णले पालन गर्नुपर्ने सनातन धर्मअनुसारका ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ र सन्न्यास चार आश्रम। |
पक्षधर | ना. | [सं.] | विभिन्न पक्षमध्ये एक पक्षतिर लाग्ने व्यक्ति; पक्षपाती। |
मल्लो | वि. | माथिल्लो; माथिको। | |
भीमपलासी | ना. | इज्जत नभएको मान्छे; गाईजात्रे व्यक्ति। | |
डरमर्दो | वि. | डरलाग्दो; भयानक डर उब्जाउने; डर लाग्ने; भयङ्कर। | |
कथाप्रबन्ध | ना. | [सं.] | कथानकको जोरजाम; त्यसको परिकल्पना; कथाको सङ्गठन। |
अरारी | ना. | [सं. आरी] | काठको अँगारबाट बारुद बनाइने काँडादार एक वनस्पति; त्यसैको फल। |
थपाइनु | कक्रि. | १. थप्न लगाइनु। | २. थाप्ने तुल्याइनु। | |
खटन | ना. | [सं.] | १. आज्ञा; आदेश। | २. कसैलाई काममा पठाइने निधो; नियुक्ति। | ३. कुनै वस्तु खटाएर वा अड्कलेर दिने काम। |
सिङ्गमर्मर | ना. | [फा. सङ्गमरमर] | सङ्गमरमर। |
यज्ञधर्म | ना. | यज्ञ गरेपछि पाइने धर्म; यज्ञ गर्दा प्राप्त हुने धर्म। | |
लिँडेकुचो | ना. | बढार्दा बढार्दा बुच्चो भएको पुरानो कुचो। | |
सगियो | ना. | निरन्तर पानी परेको अवस्था; मनसुनी वर्षा; झरी। | |
छिणु | ना. | काठको सानो टुक्रो। | |
फटक | ना. | फड्कने काम; उफ्राइ; फट्काइ; फट्को। | |
स्मितवदना | वि. | [सं.] | हँसिलो अनुहार भएकी (स्त्री)। |
बबी | ना. | आफूभन्दा सानो उमेरकी र उच्च कुलका केटीहरूलाई गरिेने आदरयुक्त सम्बोधन। | |
मण्डलक | ना. | [सं.] | १. ऐना। | २. कुकुर। | ३. डल्ला गाँठा र घेरा हुने कुष्ठरोग; गाँठेकोर। | ४. विम्ब। सावा। |
धनेश्वर | ना. | [सं.] | १. कुबेर। | २. धनको मालिक। | ३. वाग्मती अञ्चलअन्तर्गत काभ्रे जिल्लामा पर्ने धान्य पूर्णिमा र सोपछिको पञ्चमीमा ठुलो मेला लाग्ने महादेवको प्रसिद्ध मन्दिर। | ४. विष्णु। |
छिन्ताङ काण्ड | ना. | धनकुटा जिल्लाको छिन्ताङमा २०३७ सालमा वामपन्थी शक्तिलाई निर्मम रूपमा दमन गरी हत्या गरिएको, पक्राउ गरी थुनामा राखिएको, यातना दिइएको काण्ड। | |
रैखर्क | ना. | वस्तुभाउ चर्ने ठुलो खर्क। | |
वनमाली | वि. | [सं.] | १. कृष्ण। | २. लहराहरूबाट स्वागतद्वार आदि सजाइने एक जातको लहरो। | ३. वनमाला पहिरने। |
धपधप | क्रिवि. | [अमू. (द्वि.) धप] | ज्वाला तरङ्गित हुँदाको आवाजसमेत हुने गरी बलेर वा उजेलिएर वा ननिभ्ने गरी; खुब सजिसजाउ हुने गरी; सिँगारिएर; धपक्क; धपधपी; धपधप्ती; लगातार बत्ती बाल्दा वा चम्कँदाको किसिमले। |
पञ्च देवदारु | ना. | [सं.] | हिमाली स्थलमा ६००० देखि ८००० मिटरको क्षेत्रमा हुने देवतरुमध्येका पाँच देवदारु। |
उतार्नी | ना. | [उतार+नी] | कसैको पछाडि उसको दोषको बखान गर्ने काम; अर्काको कुरा काट्ने काम; बदख्वाइँ। |
पत्नीवान् | वि. | [सं.] | पत्नी भएको; विवाहित। |
न्यायाधीन | वि. | [सं.] | न्यायको अधीन; न्यायमा आश्रित। |
जिह्वारोग | ना. | [सं.] | जिब्राको रोग। |
तकधिन | ना. | तबलाको आवाज। | |
एकाधिकार | ना. | [सं.] | कुनै उद्योग, व्यापार, खरिदबिक्री आदिमा एउटा व्यक्ति वा संस्थाको मात्र पूर्ण अधिकार भएको स्थिति; एकलौटी अधिकार; एकाधिपत्य। |
प्रेषणादेश | ना. | [सं.] | कुनै सामान एक ठाउँबाट अर्का ठाउँमा पठाउने आदेश वा अधिकार प्राप्त भएको पत्र वा लिखत। |
प्रतिकर्तव्य | ना. | [सं.] | कसैले गरेको असल कार्यको जबाफमा गरिने सत्कार्य। |
बौराँजू | ना. | मालिक्नी। | |
मघैया | ना. | [प्रा. मगही< सं. मगध] | १. एक असल जातको पान; मगही। | २. प्राचीन कालमा स्तुति, गाथा आदि गाएर जीवनवृत्ति गर्ने एक जाति। |
थोरो | ना. | [बहु./ति. थोरा] | पाडो; नब्याएको पाडी; थोरे। |
मूलद्वारे | ना. | [मूल+द्वारे] | ढोकामा बस्ने पालेहरूमा मुख्य नाइके। |
उन्निद्रता | ना. | [सं.] | जागापन; अनिदोपन। |
प्रसङ्गतः | क्रिवि. | [सं.] | प्रसङ्गअनुसार; प्रसङ्गवश। |
पन्ने | वि. | पन्ना भएको। | |
छावनी | ना. | छाउनी; फौज बस्ने ठाउँ। | |
पिरपिराहट | ना. | पिरपिराउने वा पिर पिर गर्ने काम वा प्रक्रिया। | |
क्युबी | ना. | [गु.] | नेपालको मध्यपश्चिमी पहाडी क्षेत्रमा बसोबास गर्ने गुरुङ जातिको एक थर। |
ङिस्सिनु | अक्रि. | [अमू. ङिस्स+इ+नु] | ङिस्स पर्नु; हिस्सिनु; जिल्लिनु; ङिच्चिनु। |
प्रतिबोधित | वि. | [सं.] | प्रतिबोध भएको वा गरिएको; चेतनाको जागरण भएको। |
देख्नु न सुन्नु | टु. | कुनै कुरा नदेखिएको र नसुनिएको। | |
दुमुछा | ना. | [रा.] | नेपालको पूर्वी पहाडी क्षेत्र मूल थलो भएका राई जातिको एक थर। |
पुँसी | ना. | हे. फुपू। | |
कुचो | ना. | [प्रा. कुच्चो] | धुलो, कसिङ्गर आदि बढार्ने बाबियो, सिरु, पराल, अम्रिसो आदिको मुठो; बढार्ने साधन; झाडु। |
बग्दु | सक्रि. | [बग्+दु] | बग्नु। |
ग्रसनीशोथ | ना. | [सं.] | घाँटी सुन्निने रोग। |
चिल्सो | ना. | हे. चिलेसो। | |
भुक्तवैराग्य | ना. | [सं.] | भोगेर प्राप्त भएको वैराग्य। |
गला सुक्नु | टु. | गलाबाट आवाज निस्कन नसक्नु। | |
सम्याङ्फुङ् | ना. | [लि.] | शिरफूल (सुनको फूल); एक प्रकारको गहना। |
चियाउनु | सक्रि. | लुक्ने ठाउँ वा चेप, प्वाल, छड्के कोण आदिबाट हेर्नु; गुप्त चालले वा छलेर विशेष दृष्टि लगाउनु; चियो गर्नु; चेवा गर्नु। | |
भिच्छु | ना. | [कथ्य] | हे. भिक्षु। |
सिङडा | ना. | हे. सिँगडा। | |
जर्साहेब | ना. | जर्नेल साहेब। | |
सङ्गीतलहरी | ना. | [सं.] | १. सङ्गीतकला वा सङ्गीतविद्याको किताब। | २. सङ्गीतको लहर वा तरङ्ग। |
हिमानीसौन्दर्य | ना. | [सं.] | हिमानीशोभा; हिउँको सुन्दरता। |
संसृत | वि. | [सं.] | १. प्रवाहयुक्त; वेगवान्। | २. बारम्बार जन्ममरण भइरहने। | ३. संसृतिमा आएको। |
तब त | संयो. | त्यसैले; त्यसकारण। | |
नागवास | ना. | [सं.] | सर्प जातिको वास भएको ठाउँ; नाग रहेको ठाउँ; धारा, कुवा, पँधेरो आदि स्थान; मूल फुटेको थलो। |
निलो | वि. | [सं. नील] | १. आकाशजस्तो गाढा रङको; नीर। | २. गाढा आकासे रङको; निलो रङ भएको। |
छुट्याइनु | कक्रि. | छुट्याउन लाइनु। | |
तिक्त | वि. | [सं.] | १. जिब्राले थाहा पाउने छ रसमध्ये एक रस; तितो स्वाद। | २. करेलो, चिराइतो, निम आदिका स्वादको; तितो। |
ढेस | ना. | [राज.] | अडेस। |
कर्णगत | वि. | [सं.] | कानमा परेको; कानले सुनेको। |
खुदो हुनु | टु. | आफूले भनेजस्तै परिणाम निस्कनु; भनेजस्तो लाभ हुनु। | |
धपेडी | ना. | [सं. धावन] | १. जिउले नसक्ने कामबाट हुने शारीरिक शिथिलता। | २. लगातारको हिँडाइ वा बढ्ता कामबाट हुने अत्यधिक परिश्रम; धामा। |
त्रिपन्न | वि. | [सं. त्रिपञ्चाशत्] | १. पचास र तीनको योगसङ्ख्या; ५३ अङ्क। | २. पचास र तीनको योगसङ्ख्याको। |
छरछराउनु | अक्रि. | [छरछर+आउ+नु] | पानी, रगत आदि छरछर आउनु। |
सबीज | वि. | [सं.] | बीजसहितको। |
भर्साउनु | सक्रि. | [भर्स+आउ+नु] | पकाइएको भात भर्सेलीमा वा मधुरो आँचमा राखेर चुरो मार्नु; ओथाउनु। |
सगोत्र व्यभिचार | ना. | [सं.] | आफ्नै वा एउटै गोत्रका केटा र केटीमा हुने अनैतिक सम्बन्ध। |
अधबेसुरो | वि. | [सं. अर्ध+बेसुरो] | १. गोज्याङ्ग्रो; लठेब्रो। | २. पूरा होस नभएको; आधा मात्र चेत भएको। |
घुर | ना. | परेवा, माछा आदिको गुँड। | |
तरबारे फूल | ना. | तरबारका ढाँचाका पात हुने, निला वा राता रङका फूल फुल्ने एक जातको बोट वा त्यसैको फूल। | |
प्रतिध्वनन | ना. | [सं.] | प्रतिध्वनित हुने प्रक्रिया; गुँजाइ वा घन्काइ। |
जुँगे | वि. | [जुँगा+ए] | १. जुँगाजस्तो; जुँघे। | २. जुँगावाल। | ३. लामा र धेरै जुँगा भएको (पुरुष)। |
विपाश | ना. | [सं.] | पासो नभएको; जन्जाल हटेको। |
पुत्रान्नाद | ना. | [सं.] | सन्तानको कमाइ वा आर्जनको भरमा निर्वाह गर्ने व्यक्ति। |
क्रुद्ध्याउनु | प्रेक्रि. | रिस उठाउनु। |
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Nepali Brihat Sabdakosh
122,000 words from the Nepali Brihat Sabdakosh (Nepal Academy). Fields: word, grammar, etymology, definition (HTML-stripped, pipe-separated senses). Source: https://github.com/bikashpadhikari/nepali-brihat-sabdakosh-json
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