subnum,sentences ,और भी कई सैद्धांतिक कारण हैं जो संयोजन चिकित्सा का समर्थन करते हैं । ,विभिन्न दवाओं के उपयोग से अलग प्रकार की प्रतिक्रिया होती है । ,INH जीवाणु की प्रतिकृति के खिलाफ जीवाणुनाशक है । ,"EMB कम खुराक पर जीवाणुरोधी है , परन्तु इसका उपयोग तपेदिक उपचार में उच्च जीवाणुनाशक खुराक में किया जाता है ।" ,RMP जीवाणुनाशक है और इसका निःसंक्रामक प्रभाव पड़ता है । ,"PZA केवल कमजोर जीवाणुनाशक है , लेकिन मैक्रोफेज की स्थिति में या तीव्र सूजन के स्थानों में , अम्लीय वातावरण में स्थित जीवाणुओं के लिए बहुत अधिक प्रभावी है ।" ,रिफाम्पिसिन के आने से पहले टीबी के सभी उपचार 18 माह या इससे भी लम्बी अवधि के लिए प्रयुक्त किये जाते थे । sg,"1953 में , संयुक्त राष्ट्र की मानक खुराक 3SPH / 15PH या 3SPH / 15SH थी ।" ,"1965 और 1970 के बीच , EMP ने PAS की जगह ले ली ।" ,1968 में टीबी के उपचार के लिए RMP का उपयोग किया जाने लगा और 1970 में BTS के अध्ययन से यह पता चला कि 2HRE / 7HR प्रभावोत्पादक था । ,"1984 में , एक BTS अध्ययन से पता चला कि 2HRZ / 4HR प्रभावोत्पादक था , इसके अप्रभावी होने की दर ( रिलेप्स ) दो साल के बाद 3 प्रतिशत से भी कम पाई गयी ।" ,"1995 में , जब यह पता चला कि INH प्रतिरोध बढ़ रहा है , BTS के साथ EMB या STM को मिलाने की सलाह दी गयी : 2HREZ / 4HR या 2SHRZ / 4HR , इसी खुराक का उपयोग वर्तमान में किया जा रहा है ।" ,विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सलाह दी कि अगर 2 महीने के उपचार के बाद भी रोगी का कल्चर पोज़िटिव पाया जाता है तो उसके लिए HR की छह माह की निरंतरता प्रावस्था का उपयोग किया जाना चाहिए । ,( लगभग 15 प्रतिशत रोगी जिनमें पूर्ण - संवेदी टीबी होती है ) और उन रोगियों में भी इसका उपयोग किया जाना चाहिए जिनमें उपचार की शुरुआत में व्यापक द्विपक्षीय गुहिका ( bilateral cavitation ) का निर्माण हो गया हो । ,"डॉट्स ( DOTS ) शब्द का उपयोग "" प्रत्यक्ष प्रेक्षित थेरेपी , छोटा - कोर्स ( Directly Observed Therapy , Short - course ) "" के लिए किया जाता है और यह टीबी रोकने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) की एक मुख्य योजना है ।" ,"इसमें टीबी के नियंत्रण के लिए सरकार की वचनबद्धता , टीबी के सक्रिय लक्षणों से युक्त रोगियों में थूक - स्मियर माइक्रोस्कोपिक परीक्षण , प्रत्यक्ष प्रेक्षण छोटे - कोर्स कीमोथेरेपी उपचार , दवाओं की एक निश्चित आपूर्ति , मानकीकृत रिपोर्टिंग और मामलों और उपचार के परिणामों की रिकॉर्डिंग शामिल है ।" sg,डब्ल्यूएचओ की सलाह है कि पहले दो माह के लिए टीबी के सभी रोगियों की थेरेपी ( उपचार ) प्रेक्षित होनी चाहिए ( और हो सके तो पूरी थेरेपी प्रेक्षित ही होनी चाहिए ) । sg,इसका अर्थ यह है कि रोगी को देखने वाला स्वतंत्र प्रेक्षक उसके टीबी - रोधी उपचार ( anti - TB therapy ) पर पूरी निगरानी रखे । ,"स्वतंत्र प्रेक्षक अक्सर कोई स्वास्थ्यरक्षा कार्यकर्ता नहीं होता , वह एक दुकानदार या समाज में कोई बड़ा व्यक्ति या इसी तरह से कोई वरिष्ठ व्यक्ति हो सकता है ।" ,डॉट्स का उपयोग आंतरायिक खुराक के साथ ( सप्ताह में तीन बार या 2HREZ / 4HR ) किया जाता है । ,"सप्ताह में दो बार खुराक भी प्रभावी है लेकिन डब्ल्यूएचओ के द्वारा इसकी सलाह नहीं दी जाती , क्योंकि इसमें गलती ( अगर कोई एक खुराक लेना भूल जाये तो सप्ताह में ली गयी केवल एक खुराक प्रभावी नहीं होती ) के लिए मार्जिन नहीं होता है ।" ,डॉट्स का ठीक प्रकार से उपयोग करने से उपचार की सफलता की दर 95 प्रतिशत से भी अधिक होती है और यह भविष्य में टीबी के कई दवाओं के प्रति प्रतिरोध के स्ट्रेस ( उपभेदों ) ( multi - drug resistant strains of tuberculosis ) के विकास को भी रोकती है । ,"डॉट्स का उपयोग तपेदिक के फिर से होने की संभावना को कम करता है , जिसके परिणामस्वरूप उपचार के सफल होने की दर में कमी आती है ।" ,"जनसंख्या में यात्रा की दरों और रोग - प्रतिरोधकता में कमीं के कारण , 20 वीं शताब्दी के बाद के वर्षों में मामलों की दर बढ़ रही है ।" pl,"कई प्रकार के परजीवी फेफड़ों को प्रभावित कर सकते हैं जिनमें "" टोक्सोप्लाज़्मा गोन्डी "" , "" स्ट्रॉन्गीलॉएडस स्टेकोरालिस "" , "" ऐस्केरिस ल्युम्ब्रीकॉएड्स "" और "" प्लास्मोडियम मलेरिया "" शामिल हैं ।" ,"ये जीव आम तौर पर शरीर में त्वचा के साथ सीधे संपर्क , अंतर्ग्रहण , कीट के काटने से दाखिल होते हैं ।" ,""" पैरागोनिमस वेस्टरमानि "" छोड़ कर अधिकतर परजीवी विशिष्ट रूप से फेफड़ों को प्रभावित नहीं करते हैं लेकिन फेफड़ों को दूसरे स्थानों से द्वतीयक रूप में शामिल करते हैं ।" ,"कुछ परजीवी , विशेष रूप से वे जो "" एस्केरिस "" और "" स्ट्रॉन्गीलॉएड्स "" प्रजाति से होते हैं , गंभीर स्नोफीलिक प्रतिक्रिया उकसाते हैं , जिसके कारण स्नोफीलिक निमोनिया हो सकता है ।" ,दूसरे संक्रमणों में जैसे कि मलेरिया आदि में फेफड़ों का शामिल होना प्राथमिक रूप से साइटोकाइन - प्रेरित प्रणालीगत सूजन के कारण होता है । sg,"विकसित दुनिया में यह संक्रमण , यात्रा से वापस आये लोगों या प्रवासियों के माध्यम से अधिक आम रूप से फैलता है ।" sg,वैश्विक रूप से यह संक्रमण उन जगहों पर अधिक आम है जहां पर रोग - प्रतिरोधकता कम है । ,इडियोपैथिक इंटरस्टिशियल निमोनिया या गैर संक्रामक निमोनिया विसरित फेफड़ा रोग का वर्ग है । ,"इनमें विसरित वायुकोशीय क्षति , संयोजक निमोनिया , गैर विशिष्ट इंटरस्टिशियल निमोनिया , लिम्फोसाइटिक इंटरस्टिशियल निमोनिया , विश्लकीय निमोनिया , श्वसन संबंधी श्वासनलिका शोथ , इंटरस्टिशियल फेफड़ों के रोग और सामान्य इंटरस्टिशियल निमोनिया शामिल हैं ।" ,अक्सर निमोनिया ऊपरी श्वसन पथ संक्रमण के रूप में आरंभ होता है और फिर निचले श्वसन पथ में जाता है । ,वायरस फेफड़ों तक भिन्न - भिन्न मार्ग से पहुंच सकते हैं । ,श्वसन सिंशियल वायरस आम तौर पर तब संक्रमित होते हैं जब लोग संदूषित वस्तुओं को छूते हैं और फिर अपनी आँखों या नाकों को छूते हैं । ,अन्य वायरस जनित संक्रमण तब होते हैं जब वायु में फैली संदूषित महीन बूंदें मुंह या आंखों के रास्ते श्वसन कर ली जाती हैं । sg,"एक बार जब ऊपरी वायुमार्ग में पहुंच जाता है तो वायरस अपना मार्ग फेफड़ों में बना लेते हैं , जहां से वायुमार्ग , एल्वियोलि या फेफड़ा पेन्काइमा से जुड़ी कोशिकाओं में प्रवेश कर जाते हैं ।" ,कुछ वायरस जैसे कि चेचक या हरपीस सिम्प्लेक्स रक्त के माध्यम से फेफड़ों तक पहुंचते हैं । ,फेफड़ों पर आक्रमण के कारण भिन्न - भिन्न डिग्री की कोशिकाओं की मृत्यु हो सकती है । ,जब प्रतिरक्षा तंत्र इस संक्रमण पर प्रतिक्रिया देता है तो फेफड़ों को और अधिक क्षति हो सकती है । ,"श्वेत रक्त कणिकाएं , मुख्य रूप से एकल नाभिकीय कोशिकाएं प्राथमिक रूप से सूजन पैदा करती हैं ।" ,"साथ ही फेफड़ों को क्षति भी पहुंचाती हैं , बहुत से वायरस इसी समय अन्य अंगों को प्रभावित कर सकते हैं और इस प्रकार अन्य शारीरिक क्रियाओं को भी बाधित करते हैं ।" ,वायरस शरीर को बैक्टीरिया जनित संक्रमणों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाते हैं ; इस प्रकार से बैक्टीरिया जनित निमोनिया सह - रुग्ण स्थिति तक पहुंचा सकते हैं । ,अधिकतर बैक्टीरिया गले या नाक में रहने वाले जीवों के प्रवेश से फेफड़ों में शामिल हो जाते हैं । pl,सामान्य लोगों में से आधे लोगों में ये छोटे जीव नींद के दौरान प्रवेश करते हैं । ,"जबकि गले में हमेशा बैक्टीरिया होते हैं , संक्रामक संभावनाओं वाले वहां पर केवल कुछ ही समय तक कुछ विशेष परिस्थितियों में रह पाते हैं ।" sg,"इस प्रकार के बैक्टीरिया जैसे "" माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकलोसिस "" और "" लिगियोनेला न्यूमोफिला "" की एक अल्प मात्रा , वायु में फैली संदूषित महीन बूंदों के माध्यम से फेफड़ों में पहुंच जाती हैं ।" ,बैक्टीरिया रक्त द्वारा फैल सकते हैं । pl,"एक बार फेफड़ों में पहुंचने के बाद बैक्टीरिया कोशिकों के बीच के स्थान में और एल्वियोलि , जहां पर मैक्रोफेग और न्यूट्रोफिल ( रक्षक श्वेत रक्त कणिकायें ) बैक्टीरिया को निष्क्रिय करने का प्रयास करते हैं , में प्रवेश कर सकते हैं ।" ,न्यूट्रोफिल साइटोकाइन मुक्त करते हैं जो प्रतिरक्षा तंत्र को सामान्य रूप से सक्रिय करता है । pl,"इसके कारण आम बैक्टीरिया जनित निमोनिया के कारण होने वाले बुखार , ठिठुरन और थकान जैसे लक्षण होते हैं ।" sg,"न्यूट्रोफिल , बैक्टीरिया और आसपास की रक्त वाहिकाओं से तरल एल्वियोली में भर जाता है जिसके कारण सीने के एक्स - रे में समेकन दिखता है ।" sg,निमोनिया का निदान आम तौर पर शारीरिक चिह्नों और सीने के एक्स - रे के संयोजन द्वारा किया जाता है । ,हालांकि अंतर्निहित कारण की पुष्टि करना कठिन हो सकता है क्योंकि बैक्टीरिया जनित अथवा गैर - बैक्टीरिया जनित मूल के बीच अंतर करने वाला कोई भी पुष्टीकरण परीक्षण नहीं उपलब्ध है । ,"विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बच्चों में निमोनिया के निर्धारण का आधार चिकित्सीय आधार पर खांसी या श्वसन में जटिलता और तीव्र श्वसन दर , सीने में भीतरी खिचाव में या चेतना में कमी को बताया है ।" ,"तीव्र श्वसन दर को दो माह तक के बच्चों में 60 से अधिक श्वसन प्रति मिनट , दो माह से एक साल के बच्चों में 50 से अधिक श्वसन प्रति मिनट और 1 साल से 5 साल तक के बच्चों में 40 से अधिक श्वसन प्रति मिनट के रूप में निर्धारित किया गया है ।" sg,"बच्चों में बढ़ी हुई श्वसन दर और सीने में घटा भीतरी खिचाव , स्टेथेस्कोप से सीने की चिटकन के सुनाई देने से अधिक संवेदनशील है ।" sg,"वयस्कों में , हल्के मामलों में जांच की जरूरत नहीं पड़ती है ।" ,यदि सभी महत्वपूर्ण चिह्न और परिश्रवण सामान्य हैं तो निमोनिया की जोखिम बहुत कम है । ,"अस्पताल में भर्ती किये जाने की जरूरत वाले लोगों में , पूर्ण रक्त गणना , सीरम इलेक्ट्रोलाइट , सी - रिएक्टिव प्रोटीन स्तर के साथ - साथ पल्स ऑक्सीमेट्री , सीने की रेडियोग्राफी और रक्त परीक्षणों और संभवतः यकृत प्रकार्य परीक्षणों को अनुशंसित किया जाता है ।" ,"इन्फ्लुएंज़ा जैसे रोग का निदान चिह्नों और लक्षणों के आधार पर किया जाता है ; हालांकि , इन्फ्लुएंज़ा संक्रमण की पुष्टीकरण के लिये परीक्षण की जरूरत पड़ती है ।" sg,इस प्रकार उपचार अक्सर समुदाय में इन्फ्लुएंज़ा की उपस्थिति या तीव्र इन्फ्लुएंज़ा परीक्षण पर आधारित होता है । ,"शारीरिक परीक्षण कभी - कभार निम्न रक्तचाप , उच्च हृदय दर या निम्न ऑक्सीजन संतृप्ति का खुलासा कर सकता है ।" ,श्वसन दर सामान्य से अधिक हो सकती है और यह अन्य चिह्नों की उपस्थिति से एक या दो दिन पहले हो सकता है । sg,सीने का परीक्षण सामान्य हो सकता है लेकिन प्रभावित भाग की ओर सीने का फुलाव कम दिख सकता है । ,सूजे सीनों के कारण बढ़े वायुमार्ग से श्वसन की तीखी ध्वनि को ब्रॉन्कियल श्वसन कहा जाता है और इनको स्टेथेस्कोप से ऑस्किलेशन पर सुना जाता है । ,सांस को अंदर लेने के दौरान प्रभावित क्षेत्र पर चिटकन ( रेल्स ) को सुना जा सकता है । ,प्रभावित फेफड़े के ऊपर टक्कर को फीका सा सुना जा सकता है और बढ़ने के विपरीत घटी हुई मुखर प्रतिध्वनि निमोनिया को फुफ्फुसीय बहाव से अलग किया जा सकता है । ,निदान के लिये अक्सर सीने का रेडियोग्राफ उपयोग किया जाता है । sg,"हल्के रोग की दशा वाले लोगों में इमेजिंग केवल उन लोगों में जरूरी होती है जिनमें संभावित जटिलतायें होती हैं , जो उपचार से बेहतर नहीं होते हैं या जिनमें कारण अनिश्चित होते हैं ।" ,यदि कोई व्यक्ति अस्पताल में भर्ती किये जाने के लिये पर्याप्त रूप से बीमार है तो उसके लिये रेडियोग्राफ की अनुशंसा की जाती है । ,परिणाम हमेशा रोग की गंभीरता के साथ संबंधित नहीं होते हैं और विश्वसनीय रूप से बैक्टीरिया जनित संक्रमण और वायरस संक्रमण के बीच अंतर नहीं कर पाते हैं । ,ईएमबी की ऐसे टीबी के उपचार में कोई भूमिका नहीं है जो आईएनएच और आरएमपी दोनों के लिए संवेदनशील हो और इसे केवल आईएनएच प्रतिरोध की बढती हुई दर के कारण ही प्रारंभिक उपचार में शामिल किया जाता है । ,"अगर INH प्रतिरोध की दरें कम ज्ञात होती हैं , या संक्रामक टीबी विभेद को आईएनएच के संवेदी जाना जाता है , तो ईएमबी का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है ।" sg,"जिन लोगों में शराब के कारण यकृत रोग हो जाता है , उनमें टीबी का जोखिम बढ़ जाता है ।" ,यकृत के सिरहोसिस के रोगियों में विशेष रूप से ट्युबरकुलोसिस पेरिटोनिटिस की घटनाएं अधिक देखी जाती हैं । sg,"यकृत रोग के ज्ञात होने पर रोगी में दवा बदलने की आवश्यकता नहीं होती , जब तक यकृत रोग का कारण टीबी के उपचार को न माना जाये ।" ,"कुछ प्राधिकरणों के अनुसार यकृत रोगियों में पीजेडए का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए , क्योंकि पहली पंक्ति की दवा पीजेडए के कारण हैपेटाइटिस होने की संभावना अधिक होती है ।" ,"जिन रोगियों में पहले से यकृत रोग होता है , उन्हें टीबी के उपचार के दौरान यकृत कार्य परीक्षण ( LFT ) किया जाना चाहिए ।" ,दवा से होने वाले हैपेटाइटिस के बारे में अलग से एक खंड में ऊपर चर्चा की गयी है । ,गर्भावस्था खुद टीबी के लिए एक जोखिम कारक नहीं है । ,"रिफाम्पिसिन हार्मोनल गर्भनिरोधक को कम प्रभावी बना देती है , इसलिए टीबी के उपचार के दौरान गर्भनिरोध के लिए अन्य उपाय अपनाये जाने चाहिए ।" ,"गर्भावस्था में टीबी का इलाज न किये जाने से गर्भपात का ख़तरा बढ़ जाता है , यह गर्भवती महिला के लिए खतरनाक हो सकता है और साथ ही अजन्मे बच्चे में कोई बड़ी असामान्यता का कारण भी बन सकता है ।" ,अमेरिकी दिशानिर्देशों के अनुसार गर्भावस्था में टीबी के उपचार के दौरान पीजेडए का उपयोग नहीं करने की सलाह दी जाती है ; संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा ऐसे दिशानिर्देश नहीं दिए गए हैं । sg,"इसमें यह तथ्य भी शामिल है कि जिन क्षेत्रों में डॉट्स रणनीति का उपयोग नहीं किया जाता , वहां आमतौर पर सुरक्षा के कम मानक उपलब्ध कराये जाते हैं ।" sg,"जिन क्षेत्रों में डॉट्स का उपयोग किया जाता है , वहां अन्य सुविधाओं के लिए मदद की अपेक्षा करने वाले रोगियों की संख्या कम होती है जिन्हें अज्ञात उपचार दिए जाते हैं और इस उपचार के अज्ञात परिणाम सामने आते हैं ।" ,हालांकि अगर डॉट्स कार्यक्रम को लागू नहीं किया जाता या गलत तरीके से लागू किया जाता है तो सकारात्मक परिणामों की संभावना नहीं रहती है । ,"यह कार्यक्रम ठीक प्रकार से लागू किया जाये और प्रभावी रूप से कारगर हो , इसके लिए स्वास्थ्य रक्षा प्रदाताओं को अपना पूरा योगदान देना होता है ।" ,इसके लिए सार्वजनिक और निजी चिकित्सकों के बीच अच्छे लिंक होने चाहिए । ,"सबके लिए स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिए , और जो देश टीबी की रोकथाम और इसके उपचार के लक्ष्यों को पाने के प्रयास कर रहे हैं , उन्हें इस दृष्टि से विश्वस्तरीय सहायता उपलब्ध करायी गयी है ।" sg,"कुछ शोधकर्ताओं का सुझाव है कि , क्योंकि डॉट्स प्रणाली उप - सहारा अफ्रीका में तपेदिक के उपचार में इतनी सफल हुई है कि डॉट्स का उपयोग असंक्रामक रोगों जैसे मधुमेह , उच्च रक्तचाप और एपिलेप्सी जैसे रोगों के उपचार में भी किया जाना चहिये ।" ,डब्ल्यूएचओ ने 1998 में MDR - TB के उपचार के लिए डॉट्स प्रोग्राम का विस्तार किया ( जिसे डॉट्स - प्लस कहा जाता है ) । ,डॉट्स प्लस कार्यक्रम को लागू करने के लिए डॉट्स की सभी आवश्यकताओं के अलावा दवा संवेदनशीलता परीक्षण की क्षमता और दूसरी पंक्ति के एजेंट्स की उपलब्धता ( जो यहां तक कि विकसित देशों में नियमित रूप से उपलब्ध नहीं है ) आवश्यक है । ,"इसीलिए डॉट्स प्लस डॉट्स की तुलना में अधिक महंगा पड़ता है और जो देश इसे लागू करना चाहते हैं , उन्हें इसके प्रति अधिक वचनबद्धता रखनी होगी ।" sg,संसाधन के सीमित होने का तात्पर्य यह है कि डॉट्स - प्लस को लागू करने से मौजूदा डॉट्स प्रोग्राम की उपेक्षा हो जाती है और इसके परिणामस्वरूप कुल मिलाकर देखभाल के समग्र मानकों का स्तर गिर जाता है । ,"डॉट्स - प्लस के लिए तब तक मासिक निगरानी रखी जाती है जब तक कल्चर की रिपोर्ट नकारात्मक में नहीं बदल जाती , लेकिन डॉट्स के लिए ऐसा नहीं है ।" ,अगर कल्चर सकारात्मक है और उपचार के तीन माह बाद रोग के लक्षण फिर से प्रकट नहीं होते तो दवा प्रतिरोधी रोग के लिए या किसी दवा के काम ना करने पर रोगी की पुनः - जांच आवश्यक है । ,"अगर तीन माह की थेरेपी के बाद भी कल्चर नकारात्मक में नहीं बदलता , तो कुछ चिकित्सक रोगी को भर्ती कर लेते हैं ताकि उसकी उपचार प्रक्रिया पर बारीकी से निगरानी रखी जा सके ।" ,"वह तपेदिक जो फुफ्फुसों ( फेफड़ों ) को प्रभावित नहीं करता , अतिरिक्त - फुफ्फुसीय तपेदिक कहलाता है ।" ,केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र का रोग विशेष रूप से इस वर्गीकरण में शामिल नहीं किया जाता है । ,संयुक्त राष्ट्र और डब्ल्यूएचओ 2HREZ / 4HR को सलाह देते हैं ; संयुक्त राज्य अमेरिका में 2HREZ / 7HR की सलाह दी जाती है । ,"यह कहना यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षण से एक अच्छा प्रमाण है कि ट्युबरकुलोसिस लिम्फेडेनीटिस में और मेरुरज्जु कि टीबी में , छह माह का उपचार नौ माह की अवधि के उपचार के बराबर है ; इसलिए संयुक्त राज्य अमेरिका की सलाह को प्रमाणों का समर्थन प्राप्त नहीं है ।" ,लसिकानोड्स की टीबी ( टीबी लिम्फेडेनीटिस / TB lymphadenitis ) के 25 प्रतिशत मामलों में रोगी को उपचार दिए जाने पर स्थिति बेहतर होने से पहले बदतर हो जाती है और ऐसा अक्सर उपचार के पहले कुछ महीनों में होता है । ,"उपचार शुरू किये जाने के कुछ सप्ताह बाद ही , लसिका नोड्स ( लसिका पर्व भी कहलाते हैं ) आकार में बढ़ जाते हैं और लसिका नोड्स जो पहले ठोस थे , वे कुछ तरलीकृत होने लगते हैं ।" ,लेकिन इससे ऐसा नहीं कहा जा सकता कि उपचार विफल हो रहा है और यह आमतौर पर रोगियों में ( और उनके चिकित्सकों में ) अनावश्यक दहशत भी पैदा करता है । ,धैर्य रखने पर उपचार के दो से तीन सप्ताह के भीतर लसिका नोड्स फिर से संकुचित होने लगते हैं और इस समय लसिका पर्वों की फिर से बायोप्सी करने या फिर से जांच करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है । ,"यदि फिर से सुक्ष्मजैविक अध्ययन के आदेश दिए जाते हैं , तो इस जांच में समान संवेदनशीलता प्रतिरूप के साथ जीवित जीवाणुओं की उपस्थिति ज्ञात होगी ।" ,जो फिर से भ्रम में डाल सकती है । ,"इस समय अक्सर जो चिकित्सक टीबी के उपचार में अनुभवी नहीं होते , अक्सर यह मान कर दूसरी पंक्ति की दवाएं शुरू कर देते हैं , कि उपचार कारगर नहीं है ।" ,"इन स्थितियों में , सिर्फ आश्वासन की आवश्यकता होती है ।" ,"स्टेरॉयड सूजन को कम करने में उपयोगी हो सकते हैं , विशेष रूप से तब इनका उपयोग किया जाना चाहिए जब इसमें बहुत दर्द होता हो , लेकिन ये जरुरी नहीं है ।" ,अतिरिक्त एंटीबायोटिक की कोई जरुरत नहीं होती है और यह अनावश्यक रूप से उपचार की लम्बाई को बढाती है । ,"तपेदिक केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है ( मस्तिष्क - आवरण ( मेनिन्जेस ) , मस्तिष्क और मेरुरज्जु ) , इन मामलों में यह क्रमशः टीबी मेनिनजाईटिस , टीबी सेरेब्रिटिस , टीबी मायेलिटिस कहलाता है ।" ,इसके मानक उपचार के रूप में बारह महीने दवाएं ( 2HREZ / 10HR ) दी जाती हैं और स्टेरॉयड अनिवार्य है । sg,इसका निदान मुश्किल है क्योंकि आधे से कम मामलों में ही सीएसएफ कल्चर सकारात्मक आता है और इसीलिए अधिकांश मामलों का उपचार केवल नैदानिक संदेह के आधार पर ही किया जाता है । ,सीएसएफ का पीसीआर सुक्ष्मजैविक उपज को प्रमाणित नहीं करता ; कल्चर सबसे संवेदी विधि है और कम से कम 5 मिलीलीटर ( हो सके तो 20 मिलीलीटर ) सीएसएफ को विश्लेषण के लिए भेजा जाता है । ,"टीबी सेरेब्रिटिस ( या मस्तिष्क की टीबी ) में निदान के लिए मस्तिष्क की बायोप्सी की आवश्यकता हो सकती है , क्योंकि सीएसएफ आमतौर पर सामान्य होता है ।" ,यह हमेशा उपलब्ध नहीं होता है । ,कुछ चिकित्सक इसे जायज़ नहीं ठहराते हैं । ,उनका कहना है कि जब टीबी - प्रतिरोधी थेरेपी का परीक्षण भी समान परिणाम दे सकता है तो एक रोगी को इतने आक्रामक और खतरनाक प्रक्रिया से गुजरने की क्या जरुरत है । sg,संभवतया मस्तिष्क की बायोप्सी तभी न्यायोचित है जब दवा प्रतिरोधी टीबी का संदेह हो । ,"ऐसा भी संभव है कि टीबी मेनिनजाईटिस के उपचार के लिए छोटी अवधि ( जैसे छह माह ) की चिकित्सा पर्याप्त हो , लेकिन कोई चिकित्सकीय परीक्षण इसे प्रमाणित नहीं करता है ।" sg,टीबी मेनिनजाईटिस का उपचार किये जाने के बाद भी रोगी का सीएसएफ 12 माह तक असामान्य रहता है । ,"इस असामान्यता का चिकित्सकीय प्रगति या परिणाम से कोई सम्बन्ध नहीं होता , और यह इस बात को इंगित नहीं करता कि उपचार को आगे और बढ़ाने की या दोहराने की कोई आवश्यकता है ।" sg,इसलिए उपचार की प्रगति पर निगरानी रखने के लिए लम्बर पंकचर के द्वारा सीएसएफ के सेम्पल को दोहराया नहीं जाना चाहिए । ,"हालांकि टीबी मैनिंजाइटिस और टीबी सेरेब्रिटिस को एक साथ वर्गीकृत किया जाता है , कई चिकित्सकों का अनुभव यह है कि उपचार के लिए प्रतिक्रिया समान नहीं होती ।" ,"टीबी मैनिंजाइटिस आमतौर पर इलाज के लिए अच्छी तरह से प्रतिक्रिया देता है , लेकिन टीबी सेरेब्रिटिस के लिए लम्बे उपचार ( दो साल तक ) की आवश्यकता हो सकती है और स्टेरॉयड कोर्स की आवश्यकता लम्बी अवधि ( छह माह ) तक हो सकती है ।" ,टीबी मैनिंजाइटिस के विपरीत टीबी सेरेब्रिटिस में प्रगति पर निगरानी रखने के लिए बार मस्तिष्क की सीटी या एमआरआई इमेजिंग करने की जरुरत पड़ती है । ,सीएनएस टीबी रक्त से फैलने की दृष्टि से माध्यमिक हो सकता है : इसलिए कुछ विशेषज्ञ मिलियरी टीबी के रोगियों में सीएसएफ के सेम्पल नियमित रूप से लेने की सलाह देते हैं । ,टीबी विरोधी दवाएं जो सीएनएस टीबी के उपचार के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी हैं । ,वे हैं : स्टेरॉयड का प्रयोग टीबी मैनिंजाइटिस में नियमित रूप से किया जाता है ( नीचे दिया गया अनुभाग देखें ) । ,"एक परीक्षण से यह भी पता चला है कि एस्पिरिन भी फायदेमंद होती है , लेकिन इससे पहले कि इसे नियमित रूप से काम में लिया जाये , इस पर आगे और कार्य करने की आवश्यकता है ।" sg,टीबी मैनिंजाइटिस और टीबी पेरीकार्डीटिस के उपचार के लिए कोर्टिकोस्टेरॉयड ( उदाहरण प्रेडनिसोलोन और डेक्सामेथासोन ) की उपयोगिता भी प्रमाणित हो चुकी है । ,"टीबी मैनिंजाइटिस के लिए डेक्सामेथासोन की 8 से 12 मिलीग्राम की खुराक प्रतिदिन 6 सप्ताह से अधिक समय के लिए दी जाती है ( वे लोग अधिक सटीक खुराक लेना चाहते हैं , उन्हें थ्वाईटेस दी जाती है "" एट आल "" , 2004 )" ,पेरीकार्डीटिस के लिए प्रेडनिसोलोन की 60 मिलीग्राम खुराक प्रतिदिन चार से आठ सप्ताह के लिए दी जाती है । ,"स्टेरॉयड फुफ्फुसआवरणशोथ , अत्यधिक बढ़ चुके टीबी और बच्चों के टीबी में अस्थायी लाभ दे सकती है ।" sg,चिकित्सा की सफलता शीघ्रातिशीघ्र चिकित्सा प्रारंभ करने पर निर्भर करती है । ,रोग का संदेह होते ही चिकित्सा आरंभ कर देना आवश्यक है । ,"अत्युग्र दशाओं में और विशेषकर जब रोग आरंभ हुए कुछ समय बीत चुका हो तो रोगी की जीवनरक्षा के लिए 80,000 मात्रक ( unit ) से लेकर दो लाख मात्रक तक प्रतिजीव विषयुक्त सीरम देना आवश्यक है ।" pl,साधारण उग्र दशाओं में 16 से 32 हजार मात्रक पर्याप्त हैं । ,मृदु रोग में पाँच से लेकर 15 हजार मात्रक तक पर्याप्त है । ,उग्र दशाओं में कम से कम आधी मात्रा शिरा द्वारा देनी चाहिए तथा शेष को नितंब प्रान्त में अंतर्पेशी इंजेक्शन से देना चाहिए । ,प्रोकेन बेंज़ाइल पेनिसिलिन छह लाख मात्रक भी ( जिसमें एक लाख साधारण बेंज़ाइल पेनिसिलिन संमिलित हो ) पाँच दिन तक प्रतिदिन एक बार दिया जाए । ,रोग के जीवाणुओं पर इसकी घातक क्रिया होती है । ,ऐराइथोमाइसीन के भी संतोषजनक परिणाम हुए हैं । sg,रोगमुक्ति के पश्चात् भी हृदय की रक्षा के लिए कम से कम तीन सप्ताह तक पूर्ण विश्राम आवश्यक है । ,उग्र रोग के पश्चात् रोगी तीन मास तक काम करने के योग्य नहीं रहता । ,गले की बीमारी ( डिप्थीरिया ) से सुरक्षा के लिए बच्चों को डीपीटी का टीका लगवाएं । ,विवरण के लिए शिशु असंक्रमीकरण की अनुसूची देखें । ,"किसी बच्चे को गले की बीमारी ( डिप्थीरिया ) की संभावना होने पर तत्काल डॉक्टर से परामर्श करें , क्योंकि इससे जीवनभर का खतरा होता है ।" ,यह बहुत आवश्यक है और सदा सफल होता है । ,आजकल यह क्षमीकरण ( वैक्सीनेशन ) शैशवावस्था में ही प्रारंभ कर दिया जाता है । ,"10 से 12 मास की आयु में डिपथीरिया टॉक्साइड ( toxoid ) का प्रथम इंजेक्शन , 15 - 18 मास पर दूसरा , फिर स्कूल प्रवेश के समय अंतिम इंजेक्शन आठ या नौ वर्ष की आयु में दिया जाता है ।" sg,इससे बालक में जीवन पर्यंत रोगक्षमता बनी रहती है । ,"सहिष्णुता की जाँच कर लेना बहुत आवश्यक होता है , जिन्हें सीरम के इंजेक्शन लग चुके हों उनमें यह जाँच करके इंजेक्शन दिए जाएँ ।" ,डिप्थीरिया प्रति सीरम ( antiserum ) के 10 में एक शक्ति के विलयन के 002 मिलीमीटर अधस्त्वक इंजेक्शन देने के आधे घंटे के पश्चात् तक यदि रोगी में कोई विशेष लक्षण नहीं होते तो 002 मिलीमीटर ( बिना घुले हुए ) सीरम का फिर इंजेक्शन दिया जाता है । ,इससे भी यदि लक्षण न उत्पन्न हो तो आधे घंटे बाद पूरी मात्रा दी जा सकती है । ,लक्षणों के प्रकट होने पर सीरम देने का विचार छोड़कर पेनिसिलिन तथा अन्य प्रतिजीव विषों द्वारा चिकित्सा करनी पड़ती है । ,"वेल्स में वाइगोल जॉन ब्राइट और वाइगोल फॉर्ड डफरिन को यह बीमारी हुई थी , इसलिए वे पूरी कोशिश करते थे कि हर बच्चे को खसरे का टीका लगे ।" sg,2007 में जापान में विशाल महामारी फैल गयी जिसकी वजह से अधिकतर विश्वविद्यालयों और दूसरे संस्थानों को बंद कर दिया गया ताकि इस बीमारी को फैलने से रोका जा सके । sg,इज़रायल में अगस्त 2007 और मई 2008 के बीच में इस बीमारी के तकरीबन 1000 मामलों की सूचना मिली थी ( इससे ठीक एक साल पहले इसके विपरीत सिर्फ कुछ दर्जन मामले ही दर्ज किये गये थे ) । ,रूढ़िवादी यहूदी समुदायों में कई बच्चों को टीकाकरण कवरेज से अलग रखने के कारण वे इस बीमारी से प्रभावित हुए । sg,"2008 में यह बीमारी स्थानीय थी जिसकी वजह से 2008 में ब्रिटेन में इस बीमारी के 1,217 मामलों का निदान किया गया था ।" ,"और स्विट्जरलैंड , इटली तथा आस्ट्रिया से भी महामारी की खबरें मिलीं ।" sg,इसके लिए टीकाकरण की कम दर जिम्मेदार हैं । ,मार्च 2010 में फिलीपींस ने खसरे के मामलों को लगातार बढ़ता देख महामारी की घोषणा कर दी । ,"उत्तरी , केंद्रीय और दक्षिणी अमेरिका से स्वदेशी खसरे के पूर्ण रूप से सफाया होने की घोषणा की गयी ।" sg,12 नवम्बर 2002 को इस क्षेत्र में एक आखिरी स्थानीय मामले की सूचना मिली । ,"पर उत्तरी अर्जेंटीना , कनाडा के ग्रामीण प्रांतों में , खासकर ओंटारियो , क्युबेक और अल्बर्टा के कुछ क्षेत्रों में मामूली स्थानीय स्थिति बनी हुई है ।" ,हालांकि दुनिया के दूसरे प्रदेशों से खसरे के वायरसों का आयात होने से महामारियां अब भी हो रही हैं । ,"जून 2006 में , बोस्टन में महामारी फैल गयी जब वहां का एक निवासी भारत में संक्रमित हुआ और अक्टूबर 2007 में मिशिगन की एक लड़की को टीका लगाया गया , जब वह स्वीडन में इस बीमारी का शिकार हुई ।" ,"1 जनवरी और 25 अप्रैल 2008 के बीच संयुक्त राष्ट्र में खसरे के 64 मामलों की पुष्टि हुई और सेंटर फॉर डिसिज़ कंट्रोल एंड प्रीवेंशन को दर्ज किया गया , जो 2001 के बाद से किसी भी वर्ष में दर्ज की गयी रिपोर्ट में सबसे अधिक है ।" ,संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में अन्य देशों से खसरे के आयात के 64 मामलों में से 54 संयुक्त राज्य अमेरिका से सम्बंधित थे और 64 में से 63 रोगी ऐसे थे जिन्हें टीका नहीं दिया गया था या अन्य टीकाकरण की स्थिति से अज्ञात थे । ,"9 जुलाई 2008 तक 15 राज्यों में कुल 127 मामलों की सूचना मिली ( जिनमें से 22 एरिजोना के थे ) , जो 1997 के बाद से सबसे बड़ा प्रकोप था ( जब 138 मामलों की सूचना दी गयी थी ) ।" ,अधिकांश मामलों का अधिग्रहण संयुक्त राज्य के बाहर हुआ और वे व्यक्ति प्रभावित हुए जिन्हें टीका नहीं दिया गया था । sg,30 जुलाई 2008 तक मामलों की संख्या बढ़कर 131 तक पहुंच गयी । pl,इनमें से आधे में वे बच्चे शामिल हैं जिनके माता पिता ने अपने बच्चों का टीकाकरण कराने से मना कर दिया था । ,131 मामले 7 विभिन्न महामारियों में हुए थे । ,कोई मौत नहीं हुई थी और १५ लोगों को अस्पताल में दाखिल करना पड़ा था । pl,11 मामलों में रोगियों ने खसरे के टीके की कम से कम एक खुराक प्राप्त की थी । ,122 मामले ऐसे थे जिसमें बच्चों को टीका नहीं दिया गया था या जिनके टीकाकरण की स्थिति अज्ञात थी । ,"इनमें से कुछ एक वर्ष की आयु से कम के थे और इतनी कम उम्र के थे जब टीकाकरण की सिफारिश की जाती है , लेकिन 63 मामलों में धार्मिक या दार्शनिक कारणों से टीकाकरण कराने से मना कर दिया गया था ।" ,"रीनलेट प्रकार फ्रांस के सरवियर कंपनी द्वारा आविष्कृत केवल एक साधन है , ताकि वे स्ट्रॉन्शियम के अपने संस्करण को पेटेंट कर सकें ।" ,"स्ट्रोंटियम , चाहे उसका कोई भी रूप हो , पानी में घुलने योग्य और उदर अम्ल में आयनित होना चाहिए ।" ,स्ट्रॉन्शियम को तब आंत्र नली से रक्त प्रवाह में वहन के लिए प्रोटीन - बद्ध किया जाता है । ,"सोडियम एलेनड्रोनेट ( फ़ोसामैक्स ) जैसी औषधियों के विपरीत , स्ट्रॉन्शियम अस्थि पुनःचालन को बाधित नहीं करता और , वास्तव में , मजबूत हड्डियों का उत्पादन हो सकता है ।" sg,"अध्ययनों से पता चला है कि पांच साल के बाद एलेनड्रोनेट अस्थि क्षय का कारक भी हो सकता है , जबकि स्ट्रॉन्शियम जीवन - काल के दौरान प्रयुक्ति से हड्डी का निर्माण जारी रखता है ।" ,"स्ट्रॉन्शियम को आहार या कैल्शियम युक्त व्यंजनों के साथ नहीं लेना चाहिए , क्योंकि उदग्रहण के दौरान कैल्शियम की प्रतिस्पर्धा स्ट्रॉन्शियम के साथ होती है ।" ,"फिर भी , यह ज़रूरी है कि हर रोज़ कैल्शियम , मैग्नीशियम और चिकित्सीय मात्रा में विटामिन डी लेना चाहिए , लेकिन स्ट्रॉन्शियम लेते समय में नहीं ।" ,स्ट्रॉन्शियम को रात में खाली पेट लेना चाहिए । ,"ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम के लिए एस्ट्रोजेन प्रतिस्थापन उपचार एक अच्छा इलाज है , लेकिन इस समय , जब तक कि उसके इस्तेमाल के लिए अन्य संकेत उपलब्ध ना हों , उसकी सिफ़ारिश नहीं की जाती है ।" ,महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद पहले दशक में एस्ट्रोजन की सिफ़ारिश के बारे में अनिश्चितता और विवाद मौजूद हैं । ,"अल्पजननग्रंथि वाले पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन से अस्थि की मात्रा और गुणवत्ता में सुधार दिखाई दिया है , लेकिन यथा 2008 , फ़्रैक्चर या पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन पर एक सामान्य स्तर के साथ प्रभाव का कोई अध्ययन कर रहे हैं ।" sg,"SERM दवाओं का एक वर्ग है , जो पूरे शरीर में एस्ट्रोजन ग्राहियों पर एक चयनात्मक तरीके से काम करता है ।" sg,"आम तौर पर , अस्थि खनिज घनत्व ( BMD ) को ट्रेबिकुलार अस्थि में अस्थिकोरक और अस्थिशोषक गतिविधि के बीच एक संतुलन द्वारा नियंत्रित किया जाता है ।" sg,"एस्ट्रोजेन की अस्थि गठन - अवशोषण संतुलन के नियमन में प्रमुख भूमिका है , क्योंकि यह अस्थिकोरक गतिविधियों को बढ़ावा देता है ।" ,"रेलॉक्सिफीन जैसे कुछ SERM , अस्थिशोषकों द्वारा हड्डी अवशोषण को धीमा करते हुए अस्थियों पर प्रभाव डालते हैं ।" ,नैदानिक परीक्षणों में SERM को प्रभावी साबित किया गया है । ,"अस्थि विकास , अस्थि रोग - निदान और अस्थि की शक्ति बनाए रखने के लिए कैल्शियम की आवश्यकता है और यह हड्डियों की कमज़ोरी के इलाज का एक पहलू है ।" sg,देश और उम्र के आधार पर खाने में कैल्शियम की सिफारिशों में भिन्नता है । sg,जिन लोगों को ऑस्टियोपोरोसिस का अधिक ख़तरा है ( पचास साल की उम्र के बाद ) उनके लिए अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा सुझाई गई मात्रा 1200 एमजी प्रति दिन है । ,आहार का सेवन बढ़ाने के लिए कैल्शियम पूरक इस्तेमाल किए जा सकते हैं और पूरे दिन कई छोटी ख़ुराकें ( 500 mg या उससे कम ) लेने के माध्यम से अवशोषण अनुकूलित किया जा सकता है । sg,ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने और इसके इलाज में कैल्शियम की भूमिका अस्पष्ट है - ,बहुत कम कैल्शियम की मात्रा वाली कुछ आबादियों में भी हड्डियों के फ्रैक्चर की दर अत्यंत कम है और दूध और दुग्ध उत्पादों के माध्यम से खाने में कैल्शियम के उच्च दर वाले अन्य लोगों में अस्थि - भंग की दर उच्च है । ,"ऑस्टियोपोरोसिस के विकास में कई अन्य कारकों के बीच खाने में कैल्शियम को एक कारक बनाते हुए , प्रोटीन , नमक और विटामिन D का सेवन , व्यायाम और सूर्य के प्रकाश से संपर्क जैसे अन्य सभी कारक , अस्थि खनिज को प्रभावित कर सकते हैं ।" ,"2007 में , WHO ( विश्व स्वास्थ्य संगठन ) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आहार के साथ अम्लीय मिलावट के साथ कैल्शियम खाने की वजह से वह हड्डियों की कमज़ोरी को प्रभावित करता है ।" sg,"कैल्शियम और कैल्शियम व विटामिन D शामिल यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षणों के एक मध्य - विश्लेषण ने कैल्शियम के उच्च स्तरों के उपयोग ( 1,200 mg या उससे अधिक ) और विटामिन डी ( 800 IU या अधिक ) का समर्थन किया ।" ,हालांकि अस्थि स्वास्थ्य ( अस्थियों के फ़्रैक्चर के प्रति अस्थि क्षति ) के आकलन के लिए प्रयुक्त मापदंड के आधार पर परिणामों में विभिन्नता रही । sg,एक अन्य अध्ययन के साथ मध्य - विश्लेषण ने इलाज के प्रोटोकॉल का श्रेष्ठ अनुपालन करने वाले रोगियों के लिए काफी बेहतर परिणामों का समर्थन किया । ,"इसके विपरीत , कैल्शियम पूरकों में उन्नत उच्च लेपोप्रोटीन की सघनता ( HDL , "" अच्छा कोलेस्ट्रॉल "" ) की पिछली रिपोर्ट के बावजूद , ( न्यूजीलैंड में किए गए एक अध्ययन में , जिसमें 1471 महिलाओं ने भाग लिया , हृद्पेशीय रोधगलन ( दिल का दौरा ) की दर में संभावित वृद्धि पाई गई ।" ,"यदि पुष्टि हो , यह संकेत देता है कि फ़्रैक्चर के कम जोखिम वाली महिलाओं में कैल्शियम की पूरकता से अच्छे से ज्यादा नुकसान ही हो सकता है ।" ,"कुछ अध्ययनों से पता चला है कि विटामिन D की अधिक मात्रा बुज़ुर्गों में अस्थि - भंग कम कर देती है , हालांकि महिलाओं के स्वास्थ्य पहल ने पाया कि यद्यपि कैल्शियम और विटामिन D से अस्थि घनत्व में 1 % की वृद्धि हुई , तथापि इसने कूल्हे के अस्थि - भंग को प्रभावित नहीं किया , पर गुर्दे की पथरी के निर्माण में 17 % की वृद्धि की ।" ,"कई अध्ययनों से पता चला है कि एयरोबिक , भार सहन और प्रतिरोध अभ्यास सभी रजोनिवृतोत्तर महिलाओं में BMD को बनाए रख सकते हैं या बढ़ा सकते हैं ।" ,"कई शोधकर्ताओं ने यह इंगित करने का प्रयास किया है कि BMD और अस्थि गुणवत्ता के अन्य मैट्रिक्स में सुधार लाने में कौन से व्यायाम सबसे प्रभावशाली हैं , लेकिन परिणामों में भिन्नता रही है ।" sg,रजोनिवृतोत्तर महिलाओं में नियमित रूप से एक साल के लिए कूद अभ्यास से BMD और सन्निकट टिबिया की निष्क्रियता के क्षण की वृद्धि प्रतीत होती है । ,"ट्रेडमिल वॉकिंग , व्यायाम प्रशिक्षण , क़दम - चालन , कूद , सहनशीलता और शक्ति अभ्यास सभी के परिणामस्वरूप ऑस्टियोपीनिक रजोनिवृतोत्तर महिलाओं में L2 - L4 BMD की महत्वपूर्ण वृद्धि हुई ।" sg,"शक्ति प्रशिक्षण से , विशेषतः दूरस्थ त्रिज्या और कूल्हे के BMD में सुधार हासिल हुआ ।" sg,हार्मोन प्रतिस्थापन उपचार ( HRT ) जैसे अन्य औषधीय उपचार से संयुक्त व्यायाम से अकेले HRT की जगह BMD वृद्धि अधिक दृष्टिगोचर हुई । pl,"ऑस्टियोपोरोटिक रोगियों में BMD वृद्धि के अलावा संतुलन , चाल में सुधार तथा गिरने के जोखिम में कमी जैसे अतिरिक्त लाभ शामिल हैं ।" ,"हालांकि ऑस्टियोपोरोसिस रोगियों में अस्थि - भंग की जटिलताओं के कारण वर्धित मृत्यु - दर है , अधिकांश मरीज़ रोग "" के साथ "" मरते हैं ना कि उसकी वजह "" से "" ।" ,"कूल्हों के फ़ैक्चर की वजह से गतिशीलता में कमी और कई जटिलताओं का एक अतिरिक्त जोखिम ( जैसे गहरी शिरापरक घनास्त्रता और / या फुफ्फुसीय अंतःशल्यता , न्यूमोनिया ) हो सकता है ।" ,"कूल्हे के फ़्रैक्चर के बाद 6 महीने की मृत्यु - दर लगभग 13.5 % बनती है और ऐसे लोगों के पर्याप्त अनुपात ( लगभग 13 % ) को , जिन्हें कूल्हे का फ़्रैक्चर हुआ है , कूल्हा अस्थि - भंग के बाद चलने - फिरने के लिए पूरी मदद की ज़रूरत होती है ।" ,"कशेरुकी अस्थि - भंग में , जिसका मृत्यु - दर पर कम असर होता है , तंत्रिकाजन्य मूल का चिरकालिक दर्द हो सकता है , जिसे क़ाबू में करना मुश्किल हो सकता है और अंग - विकृति भी संभव है ।" ,"हालांकि दुर्लभ , पर एकाधिक कशेरुकी अस्थि - भंग ऐसे गंभीर कूबड़ ( कुब्जता ) को जन्म दे सकता है कि परिणामी आंतरिक अंगों पर दबाव से सांस लेने की क्षमता ख़राब हो सकती है ।" pl,"मौत और अन्य जटिलताओं के जोखिम के अलावा , ऑस्टियोपोरोटिक फ़्रैक्चर निम्नतर स्वास्थ्य - संबंधी जीवन - गुणवत्ता के साथ जुड़े हैं ।" ,यह अनुमान है कि दुनिया भर में 50 वर्ष की आयु से ऊपर की 3 महिलाओं में 1 को और 12 पुरुषों में 1 को हड्डियों की कमज़ोरी होती है । ,"सालाना यह लाखों अस्थि - भंग के लिए जिम्मेदार है , जिनमें ज़्यादातर कटिपरक कशेरुकी , कूल्हे और कलाई से जुड़े हैं ।" sg,पसलियों का नाज़ुक फ़्रैक्चर भी पुरुषों में सामान्य है । pl,"कूल्हे के फ़्रैक्चर , ऑस्टियोपोरोसिस के सबसे गंभीर परिणामों के लिए जिम्मेदार हैं ।" ,"संयुक्त राज्य अमेरिका में सालाना 250,000 से अधिक कूल्हे के फ़्रैक्चरों के लिए ऑस्टियोपोरोसिस जिम्मेदार है ।" ,"यह अनुमान है कि एक 50 वर्षीय श्वेत महिला को , सन्निकट जाँघ की हड्डी के फ़्रैक्चर का , 17.5 % आजीवन जोखिम है ।" ,"सभी आबादियों के पुरुष और महिलाएं , दोनों के लिए साठ से नब्बे के हर दशक में कूल्हे के फ़्रैक्चरों की घटनाएं बढ़ती रहती हैं ।" ,"सबसे ज्यादा घटनाएं उन पुरुषों और महिलाओं में पाई गई हैं , जिनकी उम्र 80 या अधिक रही है ।" ,50 से अधिक उम्र वाली 35 - 50 % सभी महिलाओं को कम से कम एक कशेरुकी फ्रैक्चर हुआ था । ,डिप्थीरिया ,"रोहिणी या डिप्थीरिया ( Diphtheria ) उग्र संक्रामक रोग है , जो 2 से लेकर 10 वर्ष तक की आयु के बालकों को अधिक होता है , यद्यपि सभी आयुवालों को यह रोग हो सकता है ।" sg,इसका उद्भव काल ( incubation period ) दो से लेकर चार दिन तक का है । ,रोग प्रायः गले में होता है और टॉन्सिल भी आक्रांत होते हैं । ,"स्वरयंत्र , नासिका , नेत्र तथा बाह्य जननेंद्रिय भी आक्रांत हो सकते हैं ।" ,"यह वास्तव में स्थानिक रोग है , किंतु जीवाणु द्वारा उत्पन्न हुए जीवविष के शरीर में व्याप्त होने से रुधिर विषाक्तता ( Toxemia ) के लक्षण प्रकट हो जाते हैं ।" ,"ज्वर , अरुचि , सिर तथा शरीर में पीड़ा आदि जीवविष के ही परिणाम होते हैं ।" ,इनका विशेष हानिकारक प्रभाव हृदय पर पड़ता है । ,कुछ रोगियों में इनके कारण हृदयविराम ( heart failure ) से मृत्यु हो जाती है । sg,रोग का कारण कोराइन बैक्टीरियम डिपथीरी ( Coryn bacterium diphtheriae ) नामक जीवाणु होता है । ,"यह प्रायः बिंदु संक्रमण से तथा बालकों द्वारा एक दूसरे की पेंसिल , लेखनी आदि वस्तुओं को मुँह में रख लेने से गले की श्लैष्मिक कला में प्रविष्ट होकर वहाँ रोग उत्पन्न कर देता है , जिसके कारण उत्पन्न हुए स्त्राव में फाइब्रिन अधिक होने से स्त्राव वहाँ पर झिल्ली के रूप में एकत्र हो जाता है ।" ,उसका रंग मटमैला सा होता है और उसके पास श्लेष्मिक कला में शोथ होता है । ,झिल्ली नीचे मांस से चिपकी होती है और कठिनाई से पृथक् की जा सकती है । ,"यह जीवाणु तीन प्रकार का होता है , उग्र ( gravis ) , मध्यम ( intermedians ) और मृदु ( mitis ) ।" ,"प्रथम प्रकार अत्युग्र , दूसरा उग्र और तीसरा मृदु रूप का रोग उत्पन्न करता है , जिसमें कभी - कभी झिल्ली तक नहीं बनती ।" pl,केवल गलशाथ के लक्षण होते हैं । ,कोरिनेबेक्टीरियम डिप्थेरिया और कफ के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में यह फैलता है । sg,इसके अतिरिक्त जीवाणु एक प्रकार के जीव विष को जन्म देता है जिससे हृदय की पेशियों में सूजन आ सकती है अथवा स्नायु तंत्र की खराबी हो सकती है । ,झिल्ली ही रोग का विशेष लक्षण है । ,"उपयुक्त चिकित्सा तत्काल प्रारंभ न करने से वह गले में चारों ओर से उत्पन्न होकर श्वास मार्ग तक को रोक सकती है , जिससे रोगी को श्वासकष्ट हो जाता है और फुफ्फुसों में वायु नहीं पहुँच पाती ।" ,गले में शोथ होता है । ,टॉन्सिल भी सूज जाते हैं । ,झिल्ली गले में न बनकर उसके नीचे श्वासनली ( trachea ) में बन सकती है । ,"अग्रनासिका के आक्रांत होने पर नासास्राव विशेषतया अधिक होता है , किंतु श्वासकष्ट नहीं होता ।" sg,नेत्र तथा जननेंद्रियों के रोग में उनपर झिल्ली एकत्र हो जाती है । sg,रोगी को ज्वर 1000 - 1020 फा0 तक रहता है । ,रुधिर विषाक्तता के कारण रोगी क्लांत दिखाई देता है । sg,रोग की उग्रता उसके चेहरे तथा साधारण दशा से झलक जाती है । ,"सिरदर्द , अरुचि , कब्ज आदि बने रहते हैं ।" pl,डिप्थीरिया के जीवविष हृतपेशीस्तर ( myocardium ) पर अपकर्षण ( degeneration ) प्रभाव डालते हैं । pl,"हृदय के दुर्बल हो जाने से उसके स्पंदन दुर्बल हो जाते हैं , जिससे शरीर का रक्तचाप कम हो जाता है ।" sg,"जितना हृद्दौर्बल्य बढ़ता है , रोगी के जीवन की आशा उतनी ही कम हो जाती है ।" ,तंत्रिका तंत्र पर भी विषों का प्रभाव होता है । sg,"गले के भीतर की पेशियों का स्तंभ प्रायः 10वें या 12वें दिन पर दिखाई पड़ता है , जो पहले वहाँ की दुर्बलता से आरंभ होता है ।" sg,रोगी का शब्द अनुनासिक हो जाता है । ,निगलने पर जल या अन्य पेय नाक से लौट आते हैं । ,"नेत्र की पेशियों की क्रिया का ह्रास हो सकता है , जिससे समायोजन ( accommodation ) क्रिया न होने से रोगी को छोटे अक्षर स्पष्ट नहीं दिखाई देते ।" pl,आगे चलकर दो या तीन सप्ताह के पश्चात् और कभी - कभी इससे पहले ही बहुतंत्रिकाशोथ ( polyneuritis ) के लक्षण प्रकट हो जाते हैं । ,"कभी - कभी स्वरयंत्र आक्रांत हो जाता है , जिससे श्वासावरोध का डर रहता है ।" ,ऐसी दशा में तत्काल श्वासनली का वेधन ( tracheotomy ) करके श्वासमार्ग बनाना पड़ता है । ,यह प्रायः कठिन नहीं होता । ,रोग का संदेह होने पर यदि झिल्ली न दिखाई दे तो गले के स्त्राव की संवर्धन ( culture ) परीक्षाएँ आवश्यक हैं । sg,शिक जाँच ( Schick test ) द्वारा रोग के वाहकों को पहचानने से रोग को रोकने में बहुत सहायता मिलती है । ,"ग्रसनी शोथ ( Phyaryngitis ) , टॉन्सिल शोथ ( Tonsillitis ) , मुँह तथा गले में फंगस संक्रमण आदि रोगों से डिप्थीरिया को पहचानना आवश्यक है ।" ,"प्रतिजीव विषयुक्त सीरम , जो प्रायः रोगक्षमीकृत घोड़ों के रक्त से तैयार किया जाता है , इस रोग की प्रथम औषधि है , किंतु चिकित्सक को पहले यह निश्चय कर लेना चाहिए कि रोगी सीरम के प्रति असहिष्णु तो नहीं है , क्योंकि कुछ रोगी सीरम को सहन नहीं कर पाते , विशेषकर वे रोगी जिनको पहले सीरम के इंजेक्शन लगे हों ।" ,इस कारण इंजेक्शन देने से पूर्व पूछ लेना चाहिए । ,यदि इंजेक्शन नहीं लगे हैं तो विशेष डर नहीं है । ,"यदि लगे हों , तो असहिष्णुता की जाँच करना आवश्यक है ।" ,यह दशा तीव्रग्रहिता ( anaphylaxis ) कहलाती है । ,इसमें मृत्यु तक हो सकती है । pl,""" पी. विवैक्स "" तथा "" पी. ओवेल "" परजीवी वर्षों तक यकृत में छुपे रह सकते हैं ।" ,अतः रक्त से रोग मिट जाने पर भी रोग से पूर्णतया मुक्ति मिल गई है ऐसा मान लेना गलत है । ,""" पी. विवैक्स "" में संक्रमण के 30 साल बाद तक फिर से मलेरिया हो सकता है ।" sg,"समशीतोष्ण क्षेत्रों में "" पी. विवैक्स "" के हर पाँच में से एक मामला ठंड के मौसम में छुपा रह कर अगले साल अचानक उभरता है ।" ,मलेरिया प्लास्मोडियम गण के प्रोटोज़ोआ परजीवियों से फैलता है । pl,"इस गण के चार सदस्य मनुष्यों को संक्रमित करते हैं - "" प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम "" , "" प्लास्मोडियम विवैक्स "" , "" प्लास्मोडियम ओवेल "" तथा "" प्लास्मोडियम मलेरिये "" ।" ,"इनमें से सर्वाधिक खतरनाक पी. फैल्सीपैरम माना जाता है , यह मलेरिया के 80 प्रतिशत मामलों और 90 प्रतिशत मृत्युओं के लिए जिम्मेदार होता है ।" ,"यह परजीवी पक्षियों , रेँगने वाले जीवों , बन्दरों , चिम्पांज़ियों तथा चूहों को भी संक्रमित करता है ।" ,"कई अन्य प्रकार के प्लास्मोडियम से भी मनुष्य में संक्रमण ज्ञात हैं किंतु "" पी. नाउलेसी "" ( "" P. knowlesi "" ) के अलावा ये नगण्य हैं ।" ,पक्षियों में पाए जाने वाले मलेरिया से मुर्गियाँ मर सकती हैं लेकिन इससे मुर्गी -JOIN पालकों को अधिक नुकसान होता नहीं पाया गया है । pl,हवाई द्वीप समूह में जब मनुष्य के साथ यह रोग पहुँचा तो वहाँ की कई पक्षी प्रजातियाँ इससे विनष्ट हो गयीं क्योंकि इसके विरुद्ध कोई प्राकृतिक प्रतिरोध क्षमता उनमें नहीं थी । sg,"मलेरिया परजीवी की प्राथमिक पोषक मादा "" एनोफ़िलीज़ "" मच्छर होती है , जोकि मलेरिया का संक्रमण फैलाने में भी मदद करती है ।" pl,""" एनोफ़िलीज़ "" गण के मच्छर सारे संसार में फैले हुए हैं ।" ,"केवल मादा मच्छर खून से पोषण लेती है , अतः यह ही वाहक होती है ना कि नर ।" sg,"मादा मच्छर "" एनोफ़िलीज़ "" रात को ही काटती है ।" ,शाम होते ही यह शिकार की तलाश में निकल पडती है तथा तब तक घूमती है जब तक शिकार मिल नहीं जाता । ,यह खड़े पानी के अन्दर अंडे देती है । ,अंडों और उनसे निकलने वाले लारवा दोनों को पानी की अत्यंत सख्त जरूरत होती है । sg,इसके अतिरिक्त लारवा को सांस लेने के लिए पानी की सतह पर बार -JOIN बार आना पड़ता है । pl,अंडे -JOIN लारवा -JOIN प्यूपा और फिर वयस्क होने में मच्छर लगभग 10 - 14 दिन का समय लेते हैं । ,"वयस्क मच्छर पराग और शर्करा वाले अन्य भोज्य -JOIN पदार्थों पर पलते हैं , लेकिन मादा मच्छर को अंडे देने के लिए रक्त की आवश्यकता होती है ।" sg,"मलेरिया परजीवी का पहला शिकार तथा वाहक मादा "" एनोफ़िलीज़ "" मच्छर बनती है ।" ,युवा मच्छर संक्रमित मानव को काटने पर उसके रक्त से मलेरिया परजीवी को ग्रहण कर लेते हैं । ,"रक्त में मौजूद परजीवी के जननाणु ( अंग्रेजी : "" gametocytes "" , "" गैमीटोसाइट्स "" ) मच्छर के पेट में नर और मादा के रूप में विकसित हो जाते हैं और फिर मिलकर अंडाणु ( अंग्रेजी : "" oocytes "" , "" ऊसाइट्स "" ) बना लेते हैं जो मच्छर की अंतड़ियों की दीवार में पलने लगते हैं ।" ,"परिपक्व होने पर ये फूटते हैं और इसमें से निकलने वाले बीजाणु ( अंग्रेजी : "" sporozoites "" , "" स्पोरोज़ॉट्स "" ) उस मच्छर की लार -JOIN ग्रंथियों में पहुँच जाते हैं ।" ,मच्छर फिर जब स्वस्थ मनुष्य को काटता है तो त्वचा में लार के साथ -JOIN साथ बीजाणु भी भेज देता है । ,"मानव शरीर में ये बीजाणु फिर पलकर जननाणु बनाते हैं ( नीचे देखें ) , जो फिर आगे संक्रमण फैलाते हैं ।" ,"इसके अलावा मलेरिया संक्रमित रक्त को चढ़ाने से भी फैल सकता है , लेकिन ऐसा होना बहुत असाधारण है ।" ,मलेरिया परजीवी का मानव में विकास दो चरणों में होता है : यकृत में प्रथम चरण और लाल रक्त कोशिकाओं में दूसरा चरण । ,"जब एक संक्रमित मच्छर मानव को काटता है तो बीजाणु ( अंग्रेजी : "" sporozoites "" , "" स्पोरोज़ॉइट्स "" ) मानव रक्त में प्रवेश कर यकृत में पहुँचते हैं और शरीर में प्रवेश पाने के 30 मिनट के भीतर यकृत की कोशिकाओं को संक्रमित कर देते हैं ।" ,फिर ये यकृत में अलैंगिक जनन करने लगते हैं । ,यह चरण 6 से 15 दिन चलता है । pl,"इस जनन से हजारों अंशाणु ( अंग्रेजी : "" merozoites "" , "" मीरोज़ॉइट्स "" ) बनते हैं जो अपनी मेहमान कोशिकाओं को तोड़ कर रक्त में प्रवेश कर जातें हैं तथा लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करना शुरू कर देते हैं ।" sg,इससे रोग का दूसरा चरण शुरू होता है । ,""" पी. विवैक्स "" और "" पी. ओवेल "" के कुछ बीजाणु यकृत को ही संक्रमित करके रुक जाते हैं और सुप्ताणु ( अंग्रेजी : "" hypnozoites "" , "" हिप्नोज़ॉइट्स "" ) के रूप में निष्क्रिय हो जाते हैं ।" ,ये 6 से 12 मास तक निष्क्रिय रह कर फिर अचानक अंशाणुओं के रूप में प्रकट हो जाते हैं और रोग पैदा कर देते हैं । pl,लाल रक्त कोशिका में प्रवेश करके ये परजीवी खुद को फिर से गुणित करते रहते हैं । ,"ये वलय रूप में विकसित होकर फिर भोजाणु ( अंग्रेजी : "" trophozoites "" , "" ट्रोफ़ोज़ॉइट्स "" ) और फिर बहुनाभिकीय शाइज़ॉण्ट ( अंग्रेजी : "" schizont "" ) और फिर अनेकों अंशाणु बना देते हैं ।" pl,समय समय पर ये अंशाणु पोषक कोशिकाओं को तोड़कर नयीं लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित कर देते हैं । ,ऐसे कई चरण चलते हैं । ,मलेरिया में बुखार के दौरे आने का कारण होता है हजारों अंशाणुओं का एकसाथ नई लाल रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करना । ,"मलेरिया परजीवी अपने जीवन का लगभग सभी समय यकृत की कोशिकाओं या लाल रक्त कोशिकाओं में छुपा रहकर बिताता है , इसलिए मानव शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र से बचा रह जाता है ।" sg,"1965 से 2006 तक , संयुक्त राज्य अमेरिका में धूम्रपान की दर 42 % से गिर कर 20.8 % हुई है ।" ,छोड़ने वालों में अधिकतर पेशेवर संपन्न आदमी थे । sg,"उपभोग में इस कमी के बावज़ूद , प्रति दिन प्रति व्यक्ति सिगरेट की औसत खपत संख्या 1954 में 22 से बढ़ कर 1978 में 30 हो गई ।" ,"यह विरोधाभास बताता है कि छोड़ने वाले लोग कम थे , जबकि जारी रखने वाले हलकी सिगरेटों की ओर आकर्षित होने लगे ।" ,"यह प्रवृत्ति कई औद्योगिक देशों में समानान्तर चलती रही , भले ही उसकी दर बराबर रही या उसमें गिरावट आई ।" ,"तथापि , विकासशील दुनिया में , 2002 में 3.4 % की दर के साथ तम्बाकू की खपत में वृद्धि जारी है ।" ,"अफ्रीका के कई क्षेत्रों में , धूम्रपान को आधुनिकता से जोड़ कर देखा जाता है और पश्चिम की कई मज़बूत सलाहों पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है ।" ,"आज रूस तम्बाकू का शीर्ष उपभोक्ता है और उसके बाद इंडोनेशिया , लाओस , यूक्रेन , बेलारूस , ग्रीस , जोर्डन और चीन हैं ।" sg,विकासशील दुनिया में खपत की दर को कम करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तम्बाकू मुक्त पहल ( Tobacco Free Initiative ) ( TFI ) नामक कार्यक्रम की शुरुआत की है । sg,"1980 के दशक की शुरुआत में , अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों की संगठित तस्करी बढ़ी ।" ,धूम्रपान . ,"इसे एक रिवाज के एक भाग के रूप में , समाधि में जाने के लिए प्रेरित करने और आध्यात्मिक ज्ञान को उत्पन्न करने में भी किया जा सकता है ।" ,"वर्तमान में धूम्रपान की सबसे प्रचलित विधि सिगरेट है , जो मुख्य रूप से उद्योगों द्वारा निर्मित होती है किन्तु खुले तम्बाकू तथा कागज़ को हाथ से गोल करके भी बनाई जाती है ।" ,"धूम्रपान के अन्य साधनों में पाइप , सिगार , हुक्का एवं बॉन्ग शामिल हैं ।" ,ऐसा बताया जाता है कि धूम्रपान से संबंधित बीमारियां सभी दीर्घकालिक धूम्रपान करने वालों में से आधों की जान ले लेती हैं किन्तु ये बीमारियां धूम्रपान न करने वालों को भी लग सकती हैं । pl,2007 की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक वर्ष दुनिया भर में 4.9 मिलियन लोग धूम्रपान की वजह से मरते हैं । ,धूम्रपान मनोरंजक दवा का एक सबसे सामान्य रूप है । ,तंबाकू धूम्रपान वर्तमान धूम्रपान का सबसे लोकप्रिय प्रकार है और अधिकतर सभी मानव समाजों में एक बिलियन लोगों द्वारा किया जाता है । ,धूम्रपान के लिए कम प्रचलित नशीली दवाओं में भांग तथा अफीम शामिल हैं । ,"कुछ पदार्थों को हानिकारक मादक पदार्थों के रूप में वर्गीकृत किया गया है जैसे कि हेरोइन , किन्तु इनका प्रयोग अत्यंत सीमित है क्योंकि अक्सर ये व्यवसायिक रूप से उपलब्ध नहीं होते ।" ,धूम्रपान का इतिहास लगभग 5000 ई. पू. पुराना हो सकता है और दुनिया भर की कई संस्कृतियों में इसका जिक्र किया गया है । ,"शुरूआती धूम्रपान धार्मिक अनुष्ठानों जैसे देवताओं को प्रसाद , सफाई के रिवाजों के तौर पर , या फिर आध्यात्मिक ज्ञान के लिए ओझाओं या पुजारियों द्वारा अनुमान लगाने के लिए अपने मस्तिष्क के विचार बदलने के प्रयोजन से किया जाता था ।" sg,"यूरोपीय अन्वेषण और अमेरिका की विजय के बाद , तम्बाकू धूम्रपान की आदत दुनिया भर में तेज़ी से फैली ।" ,"भारत तथा अफ्रीका के उप सहारा में , यह धूम्रपान के समकालीन तरीकों ( अधिकतर भांग ) के साथ मिल गई ।" ,"यूरोप में , यह नए प्रकार की सामाजिक गतिविधि और नशीली दवाओं के सेवन के रूप में शुरू हुई , जो पहले अज्ञात थी ।" ,"धूम्रपान संबंधित धारणाएं ; पवित्र और पापी , परिष्कृत और गलत , रामबाण दवा और स्वास्थ्य के लिए घातक खतरा , समय तथा स्थान के साथ बदलती रही हैं ।" ,"केवल अपेक्षाकृत हाल ही में और औद्योगिक पश्चिमी देशों में मुख्य रूप से , धूम्रपान को नकारात्मक रूप से देखा जाने लगा है ।" pl,"आज चिकित्सा अध्ययनों ने यह प्रमाणित कर दिया है कि तम्बाकू धूम्रपान कई रोगों जैसे फेफड़े का कैंसर , दिल का दौरा , नपुंसकता और जन्मजात विकारों को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारणों में से एक है ।" ,"धूम्रपान के स्वास्थ्य निहित खतरों के कारण , कई देशों ने तम्बाकू पदार्थों पर उच्च कर लगा दिए हैं और तम्बाकू धूम्रपान को रोकने के प्रयासों के रूप में धूम्रपान विरोधी अभियान प्रत्येक वर्ष शुरू किए जाते हैं ।" sg,धूम्रपान का इतिहास लगभग 5000 ई. पू. शामानीवाद के समय का है । ,"कई प्राचीन सभ्यताओं में जैसे बेबीलोनियन , भारतीय और चीनी , धार्मिक अनुष्ठानों में धूप जलाते थे , जिस प्रकार इज़राइली और बाद में कैथोलिक और रूढ़िवादी ईसाई चर्च भी करने लगे थे ।" ,अमेरिका में धूम्रपान की शुरुआत संभवतः झाड़फूंक के समारोहों में धूप जलाने से शुरू हुई किन्तु बाद में इसे आनंद के लिए या सामजिक रस्म के रूप में स्वीकार कर लिया गया । ,तम्बाकू और अन्य कई नशीली दवाओं का प्रयोग समाधि में जाने तथा आत्माओं की दुनिया से संपर्क करने के लिए किया जाता था । ,"लगभग 2000 साल पहले भांग , मक्खन ( घी ) , मछली के मांस , सांप की सूखी खाल और कई प्रकार के लेप अगरबत्तियों के चारों ओर मले जाते थे ।" ,"धूनी "" ( "" धूप "" ) "" और हवन "" ( "" होम "" ) "" का वर्णन आयुर्वेद में चिकित्सा के प्रयोजन के लिए किया गया है और कम से कम 3000 साल पहले से इनका प्रयोग होता रहा है , जबकि "" धूम्रपान "" ( अर्थात धुंआ पीना ) , कम से कम 2000 साल पहले से चला आ रहा है ।" ,आधुनिक समय से पहले ये पदार्थ विभिन्न लम्बाईयों के पाइपों या चिल्मों द्वारा ग्रहण किए जाते थे । ,"तम्बाकू के आगमन से पहले , मध्य पूर्व में भांग का धूम्रपान आम था तथा यह एक सामान्य सामाजिक गतिविधि थी जो एक पानी के पाइप के इर्द गिर्द केन्द्रित थी , जिसे हुक्का कहते थे ।" ,"तंबाकू की शुरुआत के बाद विशेष रूप से , धूम्रपान , मुस्लिम समाज और संस्कृति का एक महत्त्वपूर्ण अंग बन गया और यह कई महत्त्वपूर्ण रस्मों जैसे शादियों , ज़नाज़े के साथ जुड़ गया और इसकी अभिव्यक्ति वास्तुकला , कपड़ों , साहित्य तथा कविता द्वारा की जाने लगी ।" ,"अफ्रीका के उप सहारा में भांग का धूम्रपान इथियोपिया और पूर्वी अफ्रीकी तट पर भारतीय या अरब व्यापारियों द्वारा 1200 के दशक में या इससे पहले शुरू हुआ और यह उन मार्गों पर फ़ैल गया जिनके द्वारा कॉफी का व्यापार किया जाता था , जो इथियोपिया के पहाड़ी इलाकों में उगाई जाती थी ।" ,"यह धूम्रपान मिट्टी के कटोरे के साथ जुड़े कालाबाश पानी के पाइपों द्वारा किया जाता था , जो कि निश्चित तौर एक इथियोपियाई आविष्कार था जो बाद में पूर्वी , दक्षिणी तथा मध्य अफ्रीका में प्रचलित हुआ ।" ,"अमेरिका तक पहुँचने वाले पहले खोजकर्ताओं और विजेताओं द्वारा दी गई सूचनाओं , जिसमें निवासी पादरी स्वयं खुमारी की उच्च दर तक धूम्रपान करते थे , से ऐसी संभावनाओं का पता चलता है कि रिवाज़ केवल तम्बाकू तक ही सीमित नहीं थे ।" ,तम्बाकू के वाणिज्यिक विकास के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में वाणिज्यिक तम्बाकू का इतिहास देखें । ,"जेम्सटाउन समझौते के छह साल बाद 1612 में , तम्बाकू को सफलतापूर्वक नकदी फसल के रूप में उगाने का श्रेय जॉन राल्फ को दिया गया ।" ,"मांग तेज़ी से बढ़ी क्योंकि तम्बाकू , जो "" सुनहरी फसल "" के रूप में प्रसिद्ध हो गया था , ने वर्जीनिया को अपने सोने के अभियान में असफल होने के बाद पुर्नजीवित कर दिया था ।" ,"दुनिया भर से आने वाली मांगों को पूरा करने के लिए , तम्बाकू लगातार बोया गया जिससे भूमि तेज़ी से बंजर होने लगी ।" ,इसने पश्चिम को एक अज्ञात महाद्वीप में बसने के लिए प्रेरक का कार्य किया और इसी तरह तम्बाकू उत्पादन का एक विस्तार हुआ । pl,"बेकन के विद्रोह से पहले ठेके पर काम करने वाले मजदूर इसके प्राथमिक श्रमिक बने , जिसके बाद गुलामी पर ध्यान केन्द्रित किया गया ।" ,यह प्रवृत्ति अमेरिकी क्रांति के बाद कम हुई क्योंकि दासप्रथा लाभहीन मानी गई । ,हालाँकि 1794 में सूत कातने वाली मशीनों के आविष्कार के साथ यह प्रथा फिर से जीवित हो गई । ,1560 में फ्रांस में जीन निकोट नाम के एक फ्रांसीसी ( जिनके नाम से निकोटिन शब्द बना है ) ने तम्बाकू का प्रयोग शुरू किया । sg,फ्रांस से तम्बाकू इंग्लैंड में फैल गया । sg,"धूम्रपान करने वाले पहले अंग्रेज की सूचना 1556 में ब्रिस्टल के एक नाविक के बारे में है , जिसे "" अपने नथुनों से धुआं छोड़ते हुए "" देखा गया ।" sg,"चाय , कॉफी और अफीम की ही तरह , तम्बाकू कई प्रकार के मादक पदार्थों में से एक था जिनका प्रयोग दवाई के तौर पर किया जाता था ।" pl,1600 के आसपास फ्रांसीसी व्यापारियों द्वारा उस जगह पर तम्बाकू की शुरुआत की गई जिसे आज के आधुनिक समय में जाम्बिया और सेनेगल के नाम से जाना जाता है । ,"इसी समय मोरक्को के काफिले टिम्बकटू के आसपास के क्षेत्रों से तथा पुर्तगाली दक्षिणी अफ्रीका में वस्तु ( और पौधे ) ले कर आये , जिससे 1650 तक पूरे अफ्रीका में तम्बाकू लोकप्रिय हो गया ।" ,प्राचीन दुनिया में शुरुआत के तुरंत बाद ही तम्बाकू की राज्य स्तर पर और धार्मिक नेताओं द्वारा आलोचना होने लगी । ,"तुर्क साम्राज्य , 1623 - 40 , का सुल्तान मुराद चतुर्थ , यह कह कर धूम्रपान पर प्रतिबंध लगाने वाले पहले व्यक्तियों में से एक था कि यह जनता की नैतिकता और स्वास्थ्य के लिए खतरा है ।" ,चीनी सम्राट चोंगझेन ने अपनी मृत्यु से दो साल पहले धूम्रपान पर प्रतिबंध लगाने और मिंग राजवंश को समाप्त करने का फतवा जारी किया । ,"बाद में , किंग राजवंश के मांचू , जो खानाबदोश घुड़सवार योद्धाओं का कबीला था , ने धूम्रपान के बारे में दावा किया कि "" यह तीरंदाजी की उपेक्षा से अधिक जघन्य अपराध है "" ।" pl,"जापान में इडो काल के दौरान , सेनाध्यक्षों द्वारा तम्बाकू के कुछ शुरूआती पौधे यह कह कर बेकार घोषित कर दिए गए कि ये सैन्य अर्थ व्यवस्था के लिए खतरा हैं , क्योंकि , मूल्यवान भूमि को फसलों के पौधों की बजाए एक नशीली दवाई के रूप में प्रयुक्त किया जा रहा है ।" ,गर्भवती महिलाओं में टीबी के उपचार पर काफी प्रयोग किये गए हैं और गर्भावस्था में पीजेडए के कोई विषैले प्रभाव नहीं देखे गए । ,"आरएमपी की ऊंची खुराक ( मानव में प्रयुक्त की जाने वाली खुराक से भी ज्यादा ) पशुओं में न्यूरल ट्यूब दोष का कारण बनती हैं , लेकिन मनुष्यों में ऐसे प्रभाव नहीं देखे गए हैं ।" sg,गर्भावस्था में और बच्चे के जन्म के बाद की अवस्थाओं के दौरान हेपेटाइटिस का अधिक जोखिम हो सकता है । ,"महिलाओं को यही सलाह दी जाती है कि जब तक उनका टीबी का उपचार पूरा ना हो जाये , तब तक गर्भवती ना होने में ही समझदारी है ।" ,"एमिनोग्लाइकोसाइड्स ( एसटीएम , केप्रिओमाइसिन , एमिकासिन ) का उपयोग गर्भावस्था में सावधानी के साथ किया जाना चाहिए क्योंकि यह अजन्मे बच्चे में बहरेपन का कारण बन सकता है ।" ,चिकित्सक को मां के उपचार के साथ बच्चे को होने वाले संभावी नुकसान को भी ध्यान में रखना चाहिए और उन बच्चों में अच्छे परिणाम देखे गए जिनकी मां का उपचार एमिनोग्लाइकोसाइड्स से किया गया । ,पेरू में प्राप्त अनुभव दर्शाते हैं कि MDR - TB के लिए उपचार गर्भावस्था को ख़त्म करने की सलाह का कारण नहीं है और इसमें अच्छे परिणाम संभव हैं । sg,"जिन रोगियों में वृक्क असफल हो जाते हैं , उनमें टीबी का जोखिम 10 से 30 गुना बढ़ जाता है ।" ,"वीक रोगियों , जिन्हें इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं दी जा रहीं हैं , या जिनमें प्रत्यारोपण पर विचार किया जा रहा है , उनमें अगर उचित हो तो सुषुप्त तपेदिक के उपचार पर विचार किया जाना चाहिए ।" ,"एमिनोग्लाइकोसाइड्स ( एसटीएम , केप्रियोमाइसिन और एमिकासिन ) का उपयोग उन रोगियों में नहीं किया जाना चाहिए , जिनमें थोड़ी बहुत या गंभीर वृक्क समस्या हो , क्योंकि इससे वृक्कों को और अधिक नुकसान पहुंचने की संभावना होती है ।" ,अगर एमिनोग्लाइकोसाइड के उपयोग की उपेक्षा नहीं की जा सकती ( उदाहरण दवा प्रतिरोधी टीबी के उपचार में ) तो सीरम के स्तर की पूरी निगरानी रखी जानी चाहिए और रोगी को पार्श्व प्रभावों की संभावना की चेतावनी दी जानी चाहिए ( विशेष रूप से बहरापन ) । ,"यदि रोगी की वृक्क असफलता अंतिम अवस्था में है और वृक्क अब कोई खास काम नहीं कर रहे हैं , तब एमिनोग्लाइकोसाइड्स का उपयोग किया जा सकता है ।" ,लेकिन केवल तभी जब दवा के स्तर की आसानी से जांच की जा सकती हो ( अक्सर केवल एमिकासिन के स्तर का ही मापन किया जा सकता है ) । ,"वृक्कों की थोड़ी बहुत असामान्यता की स्थिति में , टीबी के उपचार में नियंत्रित रूप से प्रयुक्त दवाओं में किसी प्रकार के परिवर्तन की आवश्यकता नहीं होती है ।" ,"गंभीर वृक्क असफलता की स्थिति में ( GFR30 ) , इएमबी की खुराक को आधा कर दिया जाना चाहिए ( या बिल्कुल रोक देना चाहिए ) ।" ,"PZA खुराक 20 मिलीग्राम / किलोग्राम / दिन ( संयुक्त राष्ट्र की सिफारिश के अनुसार ) या सामान्य खुराक की एक तिहाई ( अमेरिकी सिफारिश के अनुसार ) है , लेकिन इसके समर्थन में पर्याप्त प्रकाशित प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं ।" ,"डायलिसिस पर उपस्थित रोगियों में 2HRZ / 4HR का उपयोग करते हुए , प्रारंभिक उच्च तीव्रता के चरण में दवाएं प्रतिदिन दी जानी चाहिए ।" ,"निरंतरता चरण में , प्रत्येक हीमो डायलिसिस सत्र के अंत में दवाएं दी जानी चाहिए और जिस दिन डायलिसिस नहीं किया जाता , उस दिन कोई दवा नहीं दी जानी चाहिए ।" ,"एचआईवी के रोगियों में , अगर संभव हो एचआईवी के इलाज को तब तक स्थगित कर दिया जाना चाहिए , जब तक टीबी का उपचार पूरा न हो जाये ।" ,वर्तमान ब्रिटिश दिशानिर्देशों के अनुसार ( ब्रिटिश एचआईवी एसोसिएशन के द्वारा उपलब्ध ) । pl,"इस बात के प्रमाण हैं कि इन रोगियों पर टीबी और एचआईवी दोनों के विशेषज्ञों की निगरानी होनी चाहिए , ताकि परिणामों में किसी और बीमारी से समझौता न करना पड़े ।" ,"अगर टीबी के उपचार के साथ एचआईवी का उपचार शुरू करना पड़े , विशेषज्ञ एचआईवी फार्मासिस्ट की सलाह ली जानी चाहिए ।" pl,सामान्य रूप से कहा जाये तो NRTI के साथ कोई ख़ास सम्बन्ध नहीं हैं । ,नेविरेपीन का उपयोग रिफाम्पिसिन के साथ नहीं किया जाना चाहिए । ,"इफावरेन्ज का इस्तेमाल किया जा सकता है , लेकिन खुराक रोगी के वजन पर निर्भर करती है ( 600 मिलीग्राम प्रतिदिन अगर वजन 50 किलोग्राम से कम हो ; 800 मिलीग्राम प्रतिदिन यदि वजन 50 किलोग्राम से अधिक हो ) ।" ,"इफावरेन्ज के स्तर की जांच उपचार शुरू किये जाने के बाद शुरुआत में की जानी चाहिए , ( दुर्भाग्य से , यह सेवा संयुक्त राज्य अमेरिका में उपलब्ध नहीं है लेकिन संयुक्त राष्ट्र में उपलब्ध है ) ।" ,अगर संभव हो तो प्रोटियेज़ संदमक का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए । sg,रिफाम्पिसिन और प्रोटियेज़ संदमक पर रहने वाले रोगियों में उपचार के असफल रहने या रोग के फिर से उत्पन्न होने का ख़तरा अधिक होता है । ,"डब्ल्यूएचओ एचआईवी के रोगियों में थायोएसिटाज़ोन का उपयोग नहीं करने की चेतावनी देता है , क्योंकि इससे घातक एक्सफोलिएटीव डर्मेटाईटिस का 23 प्रतिशत जोखिम होता है ।" ,आईएनएच के उपयोग से मिर्गी के दौरों की संभावना बढ़ जाती है । ,आईएनएच लेने वाले सभी मिर्गी के रोगियों को प्रतिदिन 10 मिलीग्राम पायरीडोकसिन दी जानी चाहिए । pl,इस बात के कोई प्रमाण नहीं हैं कि जिन रोगियों को मिर्गी की बीमारी नहीं है उनमें आईएनएच दौरों का कारण बन सकता हो । ,टीबी के उपचार में मिर्गी के लिए दी जाने वाली कई दवाओं की प्रतिक्रियाएं शामिल हैं और सीरम में दवाओं के स्तर पर पूरी निगरानी रखी जानी चाहिए । ,"रिफाम्पिसिन और कार्बामाज़ेपिन , रिफाम्पिसिन और फ़िनाइटोइन और रिफाम्पिसिन और सोडियम वाल्प्रोएट के बीच गंभीर प्रतिक्रिया होती है ।" ,हमेशा फार्मासिस्ट की सलाह ली जानी चाहिए । sg,"बहु - दवा प्रतिरोधी तपेदिक ( MDR - TB ) , टीबी का वह प्रकार है जो कम से कम आईएनएच और आरएमपी के लिए प्रतिरोधी है ।" ,"वे आइसोलेट्स जो टीबी - रोधी दवाओं के किसी और संयोजन के लिए प्रतिरोध को बढ़ाते हैं , लेकिन आईएनएच और आरएमपी के लिए प्रतिरोधी नहीं हैं , उन्हें MDR - TB की श्रेणी में नहीं रखा जाता है ।" ,"अक्टूबर 2006 को दी गयी परिभाषा के अनुसार , "" बड़े पैमाने पर दवा प्रतिरोधी तपेदिक "" ( XDR - TB ) को MDR - TB के रूप में परिभाषित किया जाता है जो क्विनोलोन के लिए प्रतिरोधी है और केनामाइसिन , केप्रिओमाइसिन या एमिकासिन में से किसी एक के लिए प्रतिरोधी है ।" sg,XDR - टीबी के पुराने मामले की परिभाषा MDR - TB है जो तीन या दूसरी पंक्ति की दवाओं के छह से अधिक वर्गों के लिए प्रतिरोधी है । ,"इस परिभाषा का उपयोग अब नहीं किया जाना चाहिए , लेकिन यहां इसे इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि कई पुराने प्रकाशन इसका उपयोग करते हैं ।" pl,MDR - टीबी और XDR - टीबी दोनों के उपचार के लिए समान सिद्धांत हैं । ,"मुख्य अंतर यह है कि XDR - टीबी में मृत्यु दर MDR - टीबी की तुलना में अधिक होती है , क्योंकि इसमें प्रभावी उपचार के विकल्पों की संख्या कम होती है ।" ,"XDR - टीबी के महामारी विज्ञान का वर्तमान में अच्छी तरह से अध्ययन नहीं किया गया है , लेकिन यह माना जाता है कि XDR - TB आसानी से स्वस्थ आबादी में संचरित नहीं होती है ।" ,लेकिन यह ऐसी आबादी में महामारी का रूप ले सकती है जो पहले से ही एचआईवी से पीड़ित हैं इसलिए उनमें टीबी के संक्रमण की संभावना अधिक होती है । sg,1997 में 35 देशों में किये गए एक सर्वेक्षण के अनुसार सर्वेक्षण के लगभग एक तिहाई देशों में इसकी दर 2 प्रतिशत से ज्यादा थी । ,"इसकी उच्चतम दर पूर्व सोवियत संघ , बाल्टिक राज्यों , अर्जेंटीना , भारत और चीन में पाई गयीं , इसे गरीबी और राष्ट्रीय तपेदिक नियंत्रण कार्यक्रमों की असफलता से जोड़ा गया ।" ,"इसी तरह , न्यूयॉर्क शहर में 1990 के दशक की शुरुआत में MDR - टीबी की ऊंची दरें पाई गयीं , इसे रीगन प्रशासन के द्वारा लागू किये गए सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की समाप्ति से जोड़ा गया ।" ,MDR - टीबी पूरी तरह से संवेदनशील टीबी के उपचार के दौरान विकसित हो सकती है और ऐसा अक्सर रोगी के द्वारा कोई खुराक न लेने या उपचार पूरा न करने के कारण होता है । ,"शुक्र है , MTR - टीबी के उपभेद कम फिट हैं और इनमें संचरण की क्षमता भी कम होती है ।" ,कई सालों से यह ज्ञात है कि आईएनएच प्रतिरोधी टीबी गिनीपिग में कम विषाक्त है और जानपदिक रोग विज्ञान का प्रमाण यह है कि टीबी के MDR उपभेद स्वाभाविक रूप से अधिक प्रभावी नहीं हैं । ,लॉसएंजिल्स में किये गए एक अध्ययन में MDR - टीबी के केवल 6 % मामले ही पाए गए । sg,"बहिर्मुखता एक ऐसी विशेषता है जो ज्यादातर धूम्रपान से जुड़ी है और धूम्रपान करने वाले मिलनसार , आवेगी , जोखिम उठाने वाले और उत्तेजना की चाहत रखने वाले व्यक्ति होते हैं ।" ,"हालांकि व्यक्तित्व और सामाजिक कारक लोगों को धूम्रपान के लिए प्रेरित कर सकते हैं , लेकिन वास्तविक आदत प्रभाव डालने की अनुकूलता की क्रिया है ।" ,प्रारंभिक चरण के दौरान धूम्रपान सुखद अनुभूतियां प्रदान करता है ( इसके डोपामाइन ( dopamine ) प्रणाली पर प्रभाव के कारण ) और इस तरह सकारात्मक सुदृढ़ीकरण के एक स्रोत के रूप में कार्य करता है । ,एक व्यक्ति द्वारा कई वर्षों तक धूम्रपान करने के पश्चात छोड़ने के लक्षण और नकारात्मक सुदृढ़ीकरण प्रमुख उत्प्रेरक हो जाते हैं । ,"हालांकि लम्बे समय से तम्बाकू के धूम्रपान को एक सार्वभौमिक नशे की लत के रूप में देखा गया है , आंकड़ों द्वारा यह सिद्ध किया जा चुका है कि निकोटिन का आदी बनने में लोगों को अलग अलग समय लगता है ।" sg,"वास्तव में , "" नशेड़ी व्यवहार दर्शाने वाली जनसंख्या "" के ग्राफ की प्रतिशतता 100 % तक पहुँचने से पहले , "" निकोटिन की मात्रा "" के ग्राफ के बराबर है जिससे पता चलता है कि एक अनुपात में सभी लोग कभी भी निकोटिन पर निर्भर नहीं होते ।" ,"हालांकि , धूम्रपान करने वाले लोग ऐसी प्रक्रिया में लिप्त होते हैं जिसका स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है , वे अपने व्यवहार को युक्ति संगत बताते हैं ।" ,धार्मिक नेता अक्सर उन प्रमुख लोगों में से रहे हैं जिन्होनें धूम्रपान को अनैतिक या तिरस्कार के योग्य माना है । ,1634 में मास्को के पैट्रिआर्क ने तम्बाकू की बिक्री पर रोक लगा दी और इस प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले स्त्री और पुरुषों की नाक काटने और उनकी चमड़ी उधड़ने तक चाबुक मारने की सज़ा सुनाई । ,कुछ इसी तरह पश्चिमी चर्च नेता अर्बन VII ( सप्तम ) ने 1590 के पोप सम्बंधी आदेश में धूम्रपान की निन्दा की । ,"कई ठोस प्रयासों के बावजूद , प्रतिरोध और प्रतिबंध लगभग दुनियाभर में नजरअंदाज कर दिए गये ।" ,"जब इंग्लैंड के एक कट्टर धूम्रपान विरोधी और "" ए काउंटरब्लास्ट टू टोबेको "" ( A Counterblast to Tobacco ) के लेखक जेम्स प्रथम ने 1604 में तम्बाकू पर अप्रत्याशित 4000 % कर लगा कर एक नई शुरुआत करने की कोशिश की , तो यह एक विफलता साबित हुई , क्योंकि 1600 के दशक की शुरुआत में लंदन में लगभग 7000 तम्बाकू विक्रेता थे ।" ,"बाद में , होशियार शासकों को धूम्रपान प्रतिबंध की निरर्थकता का एहसास हुआ और तम्बाकू के व्यापार और खेती को आकर्षक सरकारी एकाधिकार में बदल दिया गया ।" ,"1600 के दशक के मध्य तक हर प्रमुख सभ्यता तम्बाकू के धूम्रपान से परिचित थी और बहुत से मामलों में इसे पहले ही देशी संस्कृति में शामिल कर लिया गया था , बावजूद इसके कि कई शासकों ने इसे रोकने के लिए सख्त दंड या जुर्माने का प्रावधान किया ।" ,"तंबाकू , उत्पाद और पौधे , दोनों प्रमुख बंदरगाहों और बाजारों के प्रमुख मार्गों पर और इसके बाद आंतरिक इलाकों में फैले ।" ,"अंग्रेजी भाषा का शब्द "" स्मोकिंग "" 1700 के दशक के अंत में गढ़ा गया था , जिससे पहले यह प्रक्रिया "" धुंआ पीने "" ( drinking smoke ) के नाम से जानी जाती थी ।" ,विश्व में किसी भी स्थान से कहीं ज्यादा अफ्रीका के उप सहारा में तंबाकू और भांग का प्रयोग ना केवल सामाजिक संबंधों की पुष्टि करने अपितु नए संबंध बनाने में भी किया गया । ,"वर्तमान में कांगो के नाम से बुलाई जाने वाली जगह पर 1800 के दशक में लुबुको ( "" द लैंड ऑफ़ फ्रेंडशिप "" ) में बेना दिएम्बा ( Bena Diemba ) ( "" पीपुल ऑफ़ कैनाबिस "" ) नाम से एक संस्था गठित की गई थी ।" ,बेना दिएम्बा शांतिप्रिय समुदाय थे जिन्होनें भांग के पक्ष में शराब तथा हर्बल दवाओं को अस्वीकार कर दिया था । sg,"1860 के दशक में अमेरिकी नागरिक युद्ध तक विकास स्थिर रहा , जिसके बाद प्रमुख श्रमिक , दास से फसल के हिस्सेदार बन गए ।" ,इससे मांग में एक जटिल परिवर्तन हुआ जिसके कारण सिगरेट के साथ तंबाकू उत्पादन के औद्योगीकरण की शुरुआत हुई । ,1881 में एक शिल्पकार जेम्स बोंसेक ने सिगरेट का उत्पादन बढ़ाने के लिए मशीन बनाई । sg,1800 के दशक में अफीम का धूम्रपान आम हो गया था । ,पहले यह केवल खाई जाती थी और वह भी मुख्य रूप से केवल अपने औषधीय गुणों के कारण । sg,चीन में बड़े पैमाने पर अफीम के धूम्रपान में वृद्धि का मुख्य कारण चीनी राजवंश किंग द्वारा ब्रिटिश व्यापार घटा था । pl,"इस समस्या को सुलझाने के लिए , ब्रिटिश लोगों ने भारतीय उपनिवेशों में बड़े पैमाने पर उगाई गई अफीम का निर्यात शुरू कर दिया ।" ,"सामाजिक समस्याओं और मुद्रा में बड़ी गिरावट के कारण , आयात को रोकने के लिए चीन द्वारा कई प्रयास हुए जो अंततः अफीम युद्ध में बदल गए ।" ,बाद में अफीम का धूम्रपान चीनी प्रवासियों के प्रसार के साथ फैला तथा दक्षिण व दक्षिण पूर्व एशिया और यूरोप के आसपास स्थित चीनी शहरों के अफीम के कुख्यात गुप्त अड्डों तक फैलता चला गया । ,"1800 के दशक के उत्तरार्द्ध में , अफीम धूम्रपान , यूरोप के कलात्मक समुदाय में लोकप्रिय हो गया था , विशेषकर पेरिस में कलाकारों के इलाके जैसे मोंटपार्नेस तथा मोंटमारट्रे आभासी "" अफीम राजधानियां "" बन गए थे ।" ,"जबकि दुनिया भर के चीनी शहरों में स्थित अफीम के गुप्त ठिकानों ने प्रवासी चीनियों को आपूर्ति जारी रखी , प्रथम विश्व युद्ध के फैलने के बाद यूरोपीय कलाकारों में यह प्रवृत्ति बड़े पैमाने पर कम हुई ।" sg,चीन में अफ़ीम की खपत 1960 और 1970 के दशक में सांस्कृतिक क्रांति के दौरान कम हुई । ,1930 और 1940 के दशकों में होने वाले आंदोलन के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए नाजी जर्मनी में होने वाले तम्बाकू -JOIN विरोधी आंदोलन को देखें । ,आधुनिक आंदोलन के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए धूम्रपान -JOIN विरोधी आंदोलन देखें । pl,"1920 के दशक में जीवन में वृद्धि की संभावनाओं और सिगरेट निर्माण के आधुनिकीकरण के साथ , स्वास्थ्य के प्रतिकूल प्रभाव और अधिक परिलक्षित होने लगे ।" ,"जर्मनी में , धूम्रपान विरोधी समूह , जो अक्सर शराब विरोधी समूहों के साथ जुड़े होते थे , ने 1912 और 1932 में "" देर तबकगेग्नेर "" ( Der Tabakgegner ) ( तम्बाकू विरोधी ) नामक एक पत्रिका में तम्बाकू की खपत के खिलाफ अपना पक्ष प्रकाशित किया ।" ,"1929 में , ड्रेस्डेन जर्मनी के फ्रिट्ज लिकिंट ने फेफड़ों के कैंसर - तम्बाकू के संबंध में औपचारिक सांख्यिकीय प्रमाणों के साथ एक पत्र प्रकाशित किया ।" ,"घनघोर अवसाद के दौरान , एडॉल्फ हिटलर ने धूम्रपान करने की लत को पैसे की बरबादी कहकर इसकी निन्दा की थी और बाद में इस विषय पर उसने दृढ़ वक्तव्य दिये ।" sg,नाजी प्रजनन नीति के साथ इस आन्दोलन को और अधिक बढ़ावा मिला क्योंकि जर्मन परिवार में धूम्रपान करने वाली महिला पत्नी या मां बनने के लिए अनुपयुक्त मानी जाती थी । sg,द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी आंदोलन समाप्त हो गया क्योंकि धूम्रपान विरोधी समूहों ने जल्दी ही अपना समर्थन खो दिया था । pl,"द्वितीय विश्व युद्ध के अंत तक , अमेरिकी सिगरेट निर्माताओं ने जर्मन काले बाज़ार में फिर से प्रवेश कर लिया ।" ,"तम्बाकू की अवैध तस्करी प्रचलित हो गई , और धूम्रपान विरोधी अभियान के नेताओं की हत्या कर दी गई ।" sg,"मार्शल योजना के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका ने जहाजों द्वारा जर्मनी में मुफ्त में तम्बाकू भेजा जो 1948 में 24,000 टन और 1949 में 69,000 टन था ।" ,"युद्ध के पश्चात् जर्मनी में प्रति व्यक्ति सिगरेट की वार्षिक खपत 1950 में 460 से बढ़ कर 1963 तक 1,523 हो गई ।" ,"1900 के दशक के अंत तक , जर्मनी के धूम्रपान विरोधी अभियान नाजी युग के 1939 - 1941 के प्रभाव को बढ़ाने में असमर्थ थे और जर्मन तम्बाकू स्वास्थ्य अनुसन्धान संस्थान को रॉबर्ट एन प्रॉक्टर द्वारा "" मौन "" वर्णित किया गया था ।" ,1950 में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक शोध द्वारा रिचर्ड डौल ने धूम्रपान और फेफड़ों के कैंसर के बीच में संबंध दिखाया । ,"चार साल बाद , 1954 में ब्रिटिश डॉक्टरों के एक अध्ययन , यह अध्ययन 40 हजार डॉक्टरों द्वारा 20 से भी अधिक वर्षों तक किया गया था , ने इस बात की पुष्टि की जिसके आधार पर सरकार ने सलाह जारी की कि धूम्रपान और फेफड़ों के कैंसर का आपस में संबंध था ।" sg,"कुछ इसी तरह 1964 में धूम्रपान और स्वास्थ्य पर अमेरिकन सर्जन जनरल ने धूम्रपान और कैंसर के बीच संबंध बताया , जिसकी पुष्टि 20 वर्षों बाद 1980 के दशक के बाद के वर्षों में की गई ।" ,"जबकि 1980 के दशक में वैज्ञानिक साक्ष्य बढ़ने लगे , तम्बाकू कंपनियों ने आंशिक लापरवाही का दावा किया क्योंकि स्वास्थ्य के प्रतिकूल प्रभाव अज्ञात या अविश्वसनीय थे ।" ,"1998 तक स्वास्थ्य अधिकारियों ने इन दावों का साथ दिया , जिसके बाद उन्होनें स्थिति पलट दी ।" ,"संयुक्त राज्य अमेरिका की चार बड़ी तम्बाकू कंपनियों और 46 राज्यों के अटॉर्नी जनरलों के बीच हुए टोबेको मास्टर सेटलमेन्ट एग्रीमेंट ( Tobacco Master Settlement Agreement ) , जो बाद में अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा नागरिक समझौता बन गया , के तहत तम्बाकू के कई प्रकार के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया और स्वास्थ्य के लिए मुआवजे की मांग रखी गई ।" ,इसने विशेष रूप से कशेरुकी फ्रैक्चर के निवारण में अपनी क्षमता साबित कर दी है । ,"प्रयोगशाला प्रयोगों में नोट किया गया कि स्ट्रॉन्शियम रीनलेट अस्थिकोरकों के प्रसार को बढ़ावा NULL , साथ ही अस्थिभंजकों के प्रसार को प्रतिबंधित करता है ।" ,स्ट्रॉन्शियम रीनलेट को हर रोज़ 2g मौखिक निलंबन के रूप में लिया जाता है और कशेरुकी और हिप फ्रैक्चर को रोकने के लिए हड्डियों की कमजोरी के उपचार हेतु इसे लाइसेंस दिया गया है । sg,"बिसफ़ॉस्फोनेट की तुलना में स्ट्रॉन्शियम रीनलेट को अनुषंगी प्रभाव लाभ हासिल है , क्योंकि यह किसी तरह का ऊपरी GI अनुषंगी प्रभाव नहीं पैदा करता , जो कि हड्डियों की कमजोरी में दवा हटा लिए जाने का सबसे आम कारण है ।" ,"अध्ययनों में शिरापरक घनास्रशल्यता के जोखिम में थोड़ी - सी वृद्धि नोट की गई , जिसके कारण का निर्धारण नहीं किया गया है ।" ,इससे पता चलता है कि यह अलग कारणों से घनास्त्रता के जोखिम से ग्रस्त रोगियों में कम उपयुक्त हो सकता है । sg,"अस्थि मैट्रिक्स में कैल्शियम के स्थान पर ( भारी ) स्ट्रॉन्शियम का उद्ग्रहण , DXA पर मापे गए अस्थि खनिज घनत्व में पर्याप्त और बेमेल वृद्धि दर्शाता है , जिससे स्ट्रॉन्शियम से उपचार किए गए रोगियों के लिए इस विधि द्वारा अस्थि घनत्व के अतिरिक्त अनुवर्तन की व्याख्या में कठिनाई होती है ।" ,एक सुधार एल्गोरिथम तैयार किया गया है । ,"हालांकि स्ट्रॉन्शियम रीनलेट प्रभावी है , पर संयुक्त राज्य अमेरिका में अभी तक इसका उपयोग स्वीकृत नहीं हुआ है ।" ,"तथापि , अमेरिका में कई नामी विटामिन निर्माताओं से स्ट्रॉन्शियम साइट्रेट उपलब्ध है ।" ,"अधिकांश शोधकर्ताओं का मानना है कि स्ट्रॉन्शियम भले ही किसी रूप में प्रयुक्त हो , वह सुरक्षित और प्रभावी है ।" ,ऑस्टियोपोरोसिस sg,अस्थिसुषिरता या ऑस्टियोपोरोसिस ( osteoporosis ) हड्डी का एक रोग है जिससे फ़्रैक्चर का ख़तरा बढ़ जाता है । ,"ऑस्टियोपोरोसिस में अस्थि खनिज घनत्व ( BMD ) कम हो जाता है , अस्थि सूक्ष्म - संरचना विघटित होती है और अस्थि में असंग्रहित प्रोटीन की राशि और विविधता परिवर्तित होती है ।" ,"विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) ने महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस को DXA के मापन अनुसार अधिकतम अस्थि पिंड ( औसत 20 वर्षीय स्वस्थ महिला ) से नीचे अस्थि खनिज घनत्व 2.5 मानक विचलन के रूप में परिभाषित किया है ; शब्द "" ऑस्टियोपोरोसिस की स्थापना "" में नाज़ुक फ़्रैक्चर की उपस्थिति भी शामिल है ।" ,"ऑस्टियोपोरोसिस , महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद सर्वाधिक सामान्य है , तब उसे रजोनिवृत्तोत्तर ऑस्टियोपोरोसिस कहते हैं , पर यह पुरुषों में भी विकसित हो सकता है और यह किसी में भी विशिष्ट हार्मोन संबंधी विकार तथा अन्य दीर्घकालिक बीमारियों के कारण या औषधियों , विशेष रूप से ग्लूकोकार्टिकॉइड के परिणामस्वरूप हो सकता है ," ,जब इस बीमारी को स्टेरॉयड या ग्लूकोकार्टिकॉइड - प्रेरित ऑस्टियोपोरोसिस ( SIOP या GIOP ) कहा जाता है । ,"उसके प्रभाव को देखते हुए नाज़ुक फ़्रैक्चर का ख़तरा रहता है , हड्डियों की कमज़ोरी उल्लेखनीय तौर पर जीवन प्रत्याशा और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है ।" ,ऑस्टियोपोरोसिस को जीवन - शैली में परिवर्तन और कभी - कभी दवाइयों से रोका जा सकता है ; हड्डियों की कमज़ोरी वाले लोगों के उपचार में दोनों शामिल हो सकती हैं । ,"जीवन - शैली बदलने में व्यायाम और गिरने से रोकना शामिल हैं ; दवाइयों में कैल्शियम , विटामिन डी , बिसफ़ॉसफ़ोनेट और कई अन्य शामिल हैं ।" ,"गिरने से रोकथाम की सलाह में चहलक़दमी वाली मांसपेशियों को तानने के लिए व्यायाम , ऊतक - संवेदी - सुधार अभ्यास ; संतुलन चिकित्सा शामिल की जा सकती हैं ।" ,"व्यायाम , अपने उपचयी प्रभाव के साथ , ऑस्टियोपोरोसिस को उसी समय बंद या उलट सकता है ।" sg,ऑस्टियोपोरोसिस के सभी मामलों में अंतर्निहित प्रणाली अस्थि अवशोषण और अस्थि - निर्माण के बीच असंतुलन है । sg,सामान्य अस्थि में निरंतर अस्थि का पुनर्प्रतिरूपण मैट्रिक्स मौजूद रहता है । ,किसी भी समय बिंदु पर सभी अस्थि पिंड का 10 % पुनर्प्रतिरूपण से गुज़रता रहता है । ,"जैसा कि 1963 में फ़्रॉस्ट ने पहली बार बताया , यह प्रक्रिया अस्थि बहुकोशिकीय इकाइयों ( BMU ) में घटित होती है ।" ,"अस्थिशोषक कोशिकाओं द्वारा ( अस्थि मज्जा से प्राप्त ) अस्थि का अवशोषण होता है , जिसके बाद नई अस्थि अस्थिकोरक कोशिकाओं द्वारा जमा की जाती है ।" ,"जिन तीन प्रमुख क्रियाविधियों द्वारा हड्डियों की कमज़ोरी विकसित होती है , वे हैं अपर्याप्त "" शीर्ष अस्थि पिंड "" ( विकास के दौरान कंकाल अपर्याप्त पिंड और शक्ति विकसित करता है ) , अत्यधिक अस्थि अवशोषण और पुनर्प्रतिरूपण के दौरान नई अस्थि का अपर्याप्त गठन ।" ,"नाज़ुक अस्थि ऊतक के विकास के मूल में है , इन तीन क्रियाविधियों की पारस्परिक क्रिया ।" ,हार्मोन संबंधी कारक अस्थि अवशोषण की दर को विशेषतः निर्धारित करते हैं । ,"एस्ट्रोजेन की कमी ( उदा. रजोनिवृत्ति के परिणामस्वरूप ) अस्थि अवशोषण को बढ़ाती है और साथ ही , आम तौर पर भार - वहन करने वाली अस्थियों में होने वाले नई अस्थि के निक्षेपण को कम करती है ।" sg,"इस प्रक्रिया को दबाने के लिए अपेक्षित एस्ट्रोजन की मात्रा , आम तौर पर गर्भाशय और स्तन ग्रंथि को उत्तेजित करने के लिए अपेक्षित मात्रा से कम है ।" sg,अस्थि हेर - फेर के विनियमन में आल्फा - रूप का एस्ट्रोजन रिसेप्टर बहुत महत्वपूर्ण लगता है । ,"अस्थि हेर - फेर में , एस्ट्रोजेन के अलावा कैल्शियम चयापचय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और कैल्शियम और विटामिन D की कमी , अस्थि निक्षेपण अपक्षय की ओर ले जाती है ।" pl,"इसके अतिरिक्त , पैराथाइरॉइड ग्रंथियां कम कैल्शियम स्तर के प्रति प्रतिक्रिया करते हुए पैराथाइरॉइड हार्मोन ( पैराथारमोन , PTH ) स्रावित करती हैं , जो रक्त में कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करने के लिए अस्थि अवशोषण बढ़ाती है ।" ,"अस्थि निक्षेपण को बढ़ाने वाली , थायरॉयड द्वारा उत्पादित हार्मोन कैल्सीटोनिन की भूमिका कम स्पष्ट है और संभवतः PTH की तरह उतनी महत्वपूर्ण नहीं ।" pl,"अस्थिशोषकों के सक्रियकरण विभिन्न आणविक संकेतों द्वारा नियंत्रित हैं , जिनमें से RANKL ( परमाणु कारक kB लाइगैंड के लिए रिसेप्टर उत्प्रेरक ) पर सर्वाधिक अध्ययन किया गया है ।" ,"यह अणु , अस्थिकोरक और अन्य कोशिकाओं ( जैसे लसिकाणु ) द्वारा निर्मित होता है और RANK ( परमाणु कारक kB का रिसेप्टर उत्प्रेरक ) को उत्तेजित करता है ।" ,ऑस्टियोप्रोटिजरिन ( OPG ) RANK को जकड़ने का मौक़ा पाने से पहले RANKL को जोड़ता है और इसलिए उसकी अस्थि अवशोषण में वृद्धि की क्षमता को दबा देता है । ,"RANKL , RANK और OPG , ट्यूमर परिगलन कारक और उसके ग्राहियों से निकट से जुड़े हुए हैं ।" ,""" Wnt "" संकेतन मार्ग की भूमिका को स्वीकृति मिली है , पर अच्छी तरह से कम समझा गया है ।" ,"एइकोसनॉइड और इंटरल्युकिन के स्थानीय उत्पादन को , अस्थि हेर - फेर को नियंत्रित करने में भाग लेने वाला माना जाता है और ऑस्टियोपोरोसिस के विकास के मूल में इन मध्यस्थों का अधिक या कम उत्पादन कारक हो सकता है ।" ,"बंधकमय अस्थि , लंबी अस्थियों और कशेरुक के छोर पर स्थित स्पंजनुमा अस्थि है ।" ,"वल्कुटीय अस्थि , हड्डियों का कठोर बाहरी कवच और लंबी हड्डियों का मध्य है ।" ,"क्योंकि अस्थिकोरक और अस्थिशोषक , हड्डियों की सतह पर निवास करते हैं , बंधकमय अस्थि ज़्यादा सक्रिय है और अस्थि के हेर - फेर और पुनर्प्रतिरूपण के अधीन है ।" ,"न केवल अस्थि घनत्व कम होता है , बल्कि अस्थि की सूक्ष्म - संरचना बाधित होती है ।" ,बंधकमय अस्थि ,"कमज़ोर कंटिकाएं ( "" सूक्ष्म - दरारें "" ) भंग हो जाती हैं और कमज़ोर हड्डियों से प्रतिस्थापित होती हैं ।" sg,"आम ऑस्टियोपोरोटिक अस्थि - भंग जगहें , यथा कलाई , कूल्हे और रीढ़ की हड्डी में वल्कुटीय अस्थि से बंधकमय अस्थि का अनुपात अपेक्षाकृत उच्च होता है ।" ,"ये स्थल शक्ति के लिए बंधकमय अस्थि पर आश्रित हैं और इसलिए जब पुनर्प्रतिरूपण असंतुलित हो , तो तीव्र पुनर्प्रतिरूपण से इन जगहों का अपक्षय होता है ।" sg,ऑस्टियोपोरोसिस का अपना कोई विशेष लक्षण नहीं है । sg,"इसका मुख्य परिणाम , अस्थि भंग का वर्धित जोखिम है ।" ,"ऑस्टियोपोरोटिक फ़्रैक्चर उन स्थितियों में होते हैं , जहां आम तौर पर स्वस्थ लोगों की हड्डी नहीं टूटती है ; अतः उन्हें "" नाज़ुक अस्थि - भंग "" माना जाता हैं ।" ,"विशिष्ट नाज़ुक अस्थि - भंग कशेरुकी स्तंभ , पसली , कूल्हे और कलाई में होते हैं ।" pl,"मेरूदंड अवसाद ( "" संपीड़न फ़्रैक्चर "" ) के लक्षण हैं , अचानक पीठ दर्द , अक्सर तंत्रिका मूल दर्द ( तंत्रिका संपीड़न के कारण रह - रह कर उठने वाली तीव्र पीड़ा ) के साथ और विरल ही मेरूदंड संपीड़न या पुच्छीय अश्वग्रंथि सिंड्रोम के साथ , एकाधिक कशेरुकी अस्थि - भंग से भंगिमा में झुकाव , ऊंचाई में कमी , गतिशीलता में परिणामी कमी के कारण दीर्घकालिक दर्द होता है ।" ,लंबी हड्डियों के अस्थि - भंग गतिशीलता पर तीव्र क्षति पहुंचाते हैं और शल्य - चिकित्सा की आवश्यकता हो सकती है । ,"विशेषतः कूल्हे के फ़्रैक्चर के लिए आम तौर पर तुरंत शल्य - चिकित्सा की ज़रूरत है , क्योंकि कूल्हे के अस्थि - भंग के साथ गहरी नस घनास्रता और फुप्फुसीय वाहिकारोध और वर्धित मौत जैसे कई गंभीर जोखिम जुड़े हुए हैं ।" ,"बढ़ती उम्र से जुड़े गिरने के जोखिम में कलाई , रीढ़ और कूल्हे की हड्डी टूट सकती है ।" ,"गिरने का ख़तरा , क्रमशः , किसी भी कारण से दुर्बल नज़रें ( जैसे मोतियाबिंद ) , संतुलन विकार , गतिशीलता विकार ( उदा . पार्किंसंस रोग ) , मनोभ्रंश , और सार्कोपीनिया ( आयु - संबंधी कंकाल की मांसपेशी के नुक्सान ) से बढ़ जाता है ।" ,निपात ( चेतन या अचेतन अवस्था में भंगिमा तान का क्षणिक नुक्सान ) उल्लेखनीय तौर पर गिरने के जोखिम की ओर ले जाता है । ,"बेहोशी के कारण कई गुना हैं , पर इनमें ह्रदय - संबंधी अतालता ( अनियमित दिल की धड़कन ) , तंत्रिका - हृद संबंधी बेहोशी , ऑर्थोस्टेटिक अल्प रक्त - चाप ( खड़े होने पर रक्त - दाब में असामान्य कमी ) और दौरा शामिल हो सकते हैं ।" ,आवासीय परिवेश में बाधाओं और ढीली कालीनों को हटाया जाने से गिरना काफी कम हो सकता है । sg,"जो पहले भी गिर चुके हों और जिनकी चाल या संतुलन अव्यवस्थित हो , उन्हें सबसे ज्यादा गिरने का ख़तरा है ।" ,ऑस्टियोपोरोटिक फ़्रैक्चर के लिए जोखिम कारकों को ग़ैर - परिवर्तनीय और ( संभाव्य ) परिवर्तनीय के बीच विभाजित किया जा सकता है । ,"इसके अतिरिक्त , ऐसे विशिष्ट रोग तथा विकार मौजूद हैं , जिनमें ऑस्टियोपोरोसिस एक स्वीकृत समस्या है ।" ,"दवा का प्रयोग सैद्धांतिक रूप से परिवर्तनीय है , हालांकि कई मामलों में ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को बढ़ाने वाली दवाओं का उपयोग अपरिहार्य है ।" sg,ऑस्टियोपोरोसिस के लिए सबसे महत्वपूर्ण जोखिम कारक है उन्नत उम्र ( पुरुष और महिला दोनों में ) और महिला लिंग । ,"रजोनिवृत्ति के बाद एस्ट्रोजन की कमी अस्थि खनिज घनत्व की तेजी से कमी के साथ सह - संबद्ध है , जबकि पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी का तुलनात्मक ( पर कम स्पष्ट ) प्रभाव पड़ता है ।" ,"हालांकि ऑस्टियोपोरोसिस सभी जातीय समूहों के लोगों में पाया जाता है , यूरोपीय या एशियाई मूल के लोग ऑस्टियोपोरोसिस के प्रति पहले से ही प्रवृत्त हैं ।" sg,"जिन लोगों का पारिवारिक इतिहास अस्थि - भंग या ऑस्टियोपोरोसिस का है , उन्हें अधिक जोखिम है ।" ,"अस्थि - भंग और न्यून अस्थि खनिज घनत्व की वंशगतता 25 से लेकर 80 प्रतिशत तक विस्तार सहित , अपेक्षाकृत उच्च है ।" pl,ऑस्टियोपोरोसिस के विकास से जुड़े कम से कम 30 जीन मौजूद हैं । sg,श्वेत महिलाओं के लिए कॉलस अस्थि - भंग के संपोषण का जीवन - भर का जोखिम लगभग 16 % है । ,"70 वर्ष की उम्र तक पहुंचते - पहुंचते , 20 % महिलाओं को कम से कम एक कलाई फ्रैक्चर होता ही है ।" sg,"पसलियों का नाज़ुक फ़्रैक्चर , पुरुषों में पैंतीस साल की युवा उम्र से ही आम है ।" ,"अक्सर इन्हें हड्डियों की कमज़ोरी के संकेत के रूप में अनदेखा कर दिया जाता है , क्योंकि बहुधा ये लोग शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हैं और किसी शारीरिक गतिविधि के दौरान इन्हें फ्रैक्चर होता है ।" ,वाटर स्कीइंग या जेट स्कीइंग के दौरान फ़्रैक्चर एक उदाहरण हो सकता है । ,"तथापि , व्यक्ति के टेस्टोस्टेरोन स्तर के एक त्वरित परीक्षण से फ्रैक्चर के निदान के बाद , आसानी से प्रकट हो जाएगा कि क्या उस व्यक्ति को जोखिम हो सकता है ।" sg,हड्डियों की कमजोरी को रोकने के तरीक़ों में जीवन - शैली बदलाव भी शामिल है । ,"लेकिन , रोकथाम के लिए दवाइयों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है ।" ,"एक अलग अवधारणा के रूप में ऑस्टियोपोरोसिस ऑरथीसिस उपलब्ध है , जो रीढ़ के अस्थि - भंग को रोकने और मांसपेशियों के निर्माण में मदद देता है ।" ,गिरने से रोकथाम ऑस्टियोपोरोसिस जटिलताओं को रोकने में सहायक हो सकता है । sg,"ऑस्टियोपोरोसिस का जीवन - शैली निवारण , संभावित परिवर्तनीय जोखिम कारकों के कई पहलुओं से उलटाव द्वारा संभव है ।" ,"चूंकि धूम्रपान और असुरक्षित शराब सेवन को हड्डियों की कमज़ोरी से जोड़ा गया है , सामान्यतः ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम के लिए धूम्रपान बंद करने और संयमित शराब - सेवन की सिफारिश की जाती है ।" ,ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम के लिए किशोरावस्था के दौरान व्यायाम और उचित आहार के माध्यम से उच्च स्तरीय अस्थि - पिंड हासिल करना महत्वपूर्ण है । ,"बाक़ी जीवन भर सही व्यायाम और पोषण , अस्थि क्षय को टालता है ।" ,"प्रतिदिन 1500 mg कैल्शियम के साथ , सप्ताह में तीन बार टहलने , घूमने , या 70 - 90 % अधिकतम प्रयास पर सीढ़ी चढ़ने से 9 महीनों में 5 % द्वारा कटिपरक ( निचली ) रीढ़ के अस्थि घनत्व में वृद्धि हो सकती है ।" pl,"पहले से ही ऑस्टिपीनिया या हड्डियों की कमज़ोरी के साथ निदान वाले व्यक्तियों को चाहिए कि अपने चिकित्सक से व्यायाम कार्यक्रम की चर्चा करें , ताकि फ़्रैक्चर से बच सकें ।" ,उचित पोषण में पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन D वाला आहार शामिल है । ,ऑस्टियोपोरोसिस के प्रति जोखिम वाले मरीज़ों का ( उदा. स्टेरॉयड का उपयोग ) आम तौर पर विटामिन D और कैल्शियम पूरक तथा बिसफ़ॉस्फ़ोनेट के साथ उपचार किया जाता है । ,"गुर्दे की बीमारी में , विटामिन D के अधिक सक्रिय रूप जैसे पैराकाल्सिटॉल या ( विटामिन D के मुख्य जैविक सक्रिय रूप ) 1,25 - डीहाइड्रॉक्सीकोलेकैलसिफ़ेरॉल या कैल्सिट्राइऑल का प्रयोग किया जाता है , क्योंकि गुर्दे पर्याप्त मात्रा में विटामिन D में संग्रहित रूप में स्थित कैल्सीडाइऑल ( 25 हाइड्रॉक्सीकोलेकैलसिफ़ेरॉल ) से कैल्सीट्राइऑल उत्पन्न नहीं कर सकते ।" ,"उच्च प्रोटीन आहार का सेवन , मूत्र में कैल्शियम उत्सर्जन बढ़ाता है और इसे अनुसंधान अध्ययनों में अस्थि - भंग के वर्धित जोखिम से जोड़ा गया है ।" ,"अन्य अन्वेषणों से पता चला है कि कैल्शियम अवशोषण के लिए प्रोटीन आवश्यक है , लेकिन अत्यधिक प्रोटीन की खपत , इस प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करती है ।" ,हड्डियों की कमजोरी के निवारण और उपचार के लिए आहार में प्रोटीन पर कोई हस्तक्षेप करने वाले परीक्षण नहीं किए गए हैं । ,"इलाज के तौर पर , बिसफ़ॉस्फ़ोनेट अत्यधिक जोखिम वाले मामलों में इस्तेमाल किया जा सकता है ।" sg,ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम के लिए निर्धारित अन्य दवाओं में एक चयनात्मक एस्ट्रोजन रिसेप्टर मॉड्युलेटर ( SERM ) रेलॉक्सिफ़ीन शामिल है । ,"ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम के लिए एस्ट्रोजेन प्रतिस्थापन चिकित्सा एक अच्छा इलाज है , लेकिन इस समय , उसकी सिफ़ारिश नहीं की जाती है , जब तक कि उसके उपयोग के लिए अन्य संकेत उपलब्ध ना हों ।" ,"रजोनिवृत्ति के बाद पहले दशक में महिलाओं के लिए एस्ट्रोजन की सिफ़ारिश की जानी चाहिए या नहीं , इस संबंध में अनिश्चितता और विवाद जारी है ।" ,"अधोयौनग्रंथि वाले पुरुष में टेस्टोस्टेरोन , अस्थि की मात्रा और गुणवत्ता में सुधार करता दिखाई देता है , लेकिन यथा 2008 , अस्थि - भंग या सामान्य टेस्टोस्टेरोन स्तर वाले पुरुषों पर इनके प्रभाव का कोई अध्ययन नहीं किया गया है ।" ,"उम्र - संबंधी अस्थि - घनत्व और फ़्रैक्चर के खतरे में कटौती के बीच संबंध , कम से कम एस्टले कूपर से जुड़ा है और शब्द ' ऑस्टियोपोरोसिस ' तथा उसके रोगात्मक स्वरूप की पहचान का श्रेय आम तौर पर फ्रेंच रोगविज्ञानी जीन लॉबस्टीन को दिया जाता है ।" ,अमेरिकी एंडोक्राइनोलॉजिस्ट फुलर अलब्राइट ने ऑस्टियोपोरोसिस को रजोनिवृतोत्तर दशा से जोड़ा । ,हड्डियों की कमज़ोरी के उपचार में क्रांतिकारी परिवर्तन ले आने वाले बिसफ़ॉस्फ़ोनेट की खोज 1960 दशक में हुई । sg,"1986 में स्थापित राष्ट्रीय ऑस्टियोपोरोसिस सोसाइटी , हड्डियों की कमजोरी के निदान , निवारण और उपचार में सुधार के लिए समर्पित यूनाइटेड किंगडम का धर्मार्थ संस्थान है ।" ,"राष्ट्रीय ऑस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन ( संयुक्त राज्य अमेरिका के वाशिंगटन D.C. में मुख्यालय ) , ऑस्टियोपोरोसिस और संबंधित फ़्रैक्चरों का निवारण , आजीवन अस्थि - स्वास्थ्य को बढ़ावा , ऑस्टियोपोरोसिस से प्रभावित लोगों के जीवन - सुधार में मदद देने और कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता , समर्थन , सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी व्यावसायिक शिक्षा और अनुसंधान के लिए प्रयासरत है ।" ,"इंटरनेशनल ऑस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन ( IOF ) ( स्विट्जरलैंड के नैऑन में मुख्यालय ) मरीज़ , चिकित्सा और अनुसंधान सोसाइटियां , वैज्ञानिक , स्वास्थ्य - संरक्षण पेशेवर और अस्थि - स्वास्थ्य से संबद्ध अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के एक वैश्विक गठबंधन के रूप में कार्यरत है ।" ,"ऑर्थोपीडिक रिसर्च सोसाइटी ( संयुक्त राज्य अमेरिका के रोसमॉन्ट , IL में मुख्यालय ) एक अनुसंधान और व्यावसायिक विकास से जुड़ी सोसाइटी है , जो कई वर्षों से ऑस्टियोपोरोसिस अनुसंधान , उपचार और रोकथाम पर जोर दे रही है ।" ,अगर वे ठीक से दवा ले रहें हैं और दवा का अवशोषण भी हो रहा है तो ऐसी सम्भावना होती है कि उनका कोई और निदान किया जाना चाहिए ( सम्भवतया टीबी के निदान के अलावा कोई और रोग ) । ,इन रोगियों का निदान बहुत ध्यानपूर्वक किया जाना चाहिए और टीबी कल्चर और संवेदनशीलता परीक्षण के नमूनों का अध्ययन भली प्रकार से किया जाना चाहिए । ,"वे रोगी पहले कुछ बेहतर हो जाते हैं , उसके बाद उनकी तबीयत फिर से बिगड़ने लगती है , उनसे उपचार के अनुपालन की निगरानी करने के लिए पूछताछ की जानी चाहिए ।" ,"अगर अनुपालन की पुष्टि हो जाती है , तो प्रतिरोधी टीबी के लिए उनकी जांच की जानी चाहिए ( MDR - टीबी सहित ) ।" ,चाहे उपचार शुरू करने से पहले सूक्ष्म जैविकी के लिए पहले से नमूना लिया जा चुका हो । sg,दवा के पर्चे में या दवा लेने में किसी प्रकार की गलती इस बात का कारण बन सकती है कि रोगी उपचार के लिए प्रतिक्रिया प्रदर्शित ना करे । ,प्रतिरक्षा दोष प्रतिक्रिया प्रदर्शित ना करने का एक दुर्लभ कारण है । ,"रोगियों के एक छोटे से अनुपात में , उपचार विफलता चरम जैविक भिन्नता का एक प्रतिबिम्ब और इसका कोई कारण नहीं पाया जाता है ।" ,"रोगियों के एक अनुपात में , उपचार के लिए सभी मेडिकल और शल्य विकल्प समाप्त हो जाते हैं और जब ऐसी स्थिति आती है , तो रोगी और उसके परिवार को सूचित कर देना चाहिए कि रोगी के टीबी के कारण मर जाने की सम्भावना है ।" ,"ऐसे समय में रोगी को मनोवैज्ञानिक समर्थन देना चाहिए , उसकी पोषण आवश्यकताओं और श्वसन के लक्षणों पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए , ताकि उसकी मृत्यु सम्मानजनक हो ।" ,एक रोगी को तब रिलेप्स की श्रेणी में रखा जाता है जब वह उपचार करने पर ठीक हो जाता है लेकिन उपचार रोकने के बाद फिर से बीमार हो जाता है । ,"वे रोगी जिनमें उपचार करने पर क्षणिक सुधार होता है , या जो उपचार के लिए कभी भी प्रतिक्रिया प्रदर्शित नहीं करते ।" ,"उन्हें विफल उपचार की श्रेणी में रखा जाता है , जिसका विवरण ऊपर दिया गया है ।" ,"रिलेप्स की दर कम होती है जो उपचार से सम्बन्धित होती है , ऐसा तब भी हो सकता है जब रोगी ने 100 प्रतिशत अनुपालन के साथ दवाओं को ठीक प्रकार से लिया है ।" sg,( 2HREZ / 4HR के मानक उपचार में रिलेप्स की दर 2 से 3 प्रतिशत होती है ) । ,अधिकांश बार रिलेप्स उपचार के पूरा होने के बाद 6 माह के भीतर ही हो जाता है । sg,अक्सर उन रोगियों में रिलेप्स की सम्भावना अधिक होती है जो अपनी दवाओं को अनियमित रूप से लेते हैं । ,"रिलेप्स करने वाले रोगियों में प्रतिरोध की सम्भावना अधिक होती है और इनमें नमूने लेने के सभी प्रयास किये जाने चाहिए , ताकि संवेदनशीलता की जांच के लिए इनका कल्चर किया जा सके ।" ,"अधिकांश रोगी जो पूरी तरह संवेदी उपभेद के साथ रिलेप्स करते हैं उनमें यह सम्भव है कि ऐसे रोगी में रिलेप्स नहीं हुआ होता , लेकिन इसके बजाय उनमें पुनः संक्रमण हो गया होता है ।" ,ऐसे रोगियों का उपचार पहले की तरह सामान दवाओं से किया जा सकता है । ,( उपचार में और किसी दवा को जोड़ने की और दवाओं की अवधि को और अधिक लम्बा करने की आवश्यकता नहीं होती ) । ,"विश्व स्वास्थ्य संगठन 2SHREZ / 6HRE से उपचार करने की सलाह देता है , जब सूक्ष्मजैविक प्रमाण उपलब्ध ना हो ( अधिकांश देशों में जहां टीबी उच्च स्थानिकमारी वाला रोग है ) ।" ,इस उपचार को पूरी तरह से संवेदनशील टीबी के इष्टतम उपचार के लिए बनाया गया है । ,"( उन रोगियों में सबसे सामान्य खोज जिनमें रिलेप्स हो जाता है ) , साथ ही यह NH - प्रतिरोधी टीबी ( ज्ञात प्रतिरोध का सबसे आम रूप ) की सम्भावना को भी कवर करता है ।" ,"जीवन भर रिलेप्स के जोखिम के कारण , सभी रोगियों को उपचार पूरा होने पर रिलेप्स के लक्षणों की चेतावनी दी जाती है और उन्हें सख्त निर्देश दिए जाते हैं कि अगर उन्हें ऐसे कोई भी लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं ।" ,"जिन क्षेत्रों में टीबी अत्यधिक स्थानिकमारी वाला रोग है , रोगी को बुखार होना असामान्य नहीं है , लेकिन इनमें संक्रमण का कोई स्रोत नहीं पाया जाता ।" ,ऐसी स्थिति में चिकित्सक जांच के बाद सभी बीमारियों को अलग कर देता है और टीबी के उपचार का परीक्षण करता है । ,इसके लिए कम से कम तीन सप्ताह के लिए HEZ से उपचार किया जाता है । ,"उपचार में से RMP और STM को हटा दिया जाता है क्योंकि वे व्यापक स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक हैं , जबकि अन्य तीन पहली पंक्ति की दवाएं केवल माइक्रोबेक्टीरियल संक्रमण का उपचार करती हैं ।" ,उपचार के तीन माह बाद भी बुखार का बने रहना टीबी का एक अच्छा प्रमाण है और इस समय रोगी का टीबी का परम्परागत उपचार ( 2HREZ / 4HR ) शुरू कर देना चाहिए । ,अगर बुखार उपचार के तीन माह बाद ठीक नहीं होता तो यह भी हो सकता है कि रोगी का बुखार किसी और कारण से है । ,"यह दृष्टिकोण इसकी आलोचना के बिना है , इसमें तर्क दिया जाता है कि ऐसे सभी रोगियों को टीबी का उपचार दिया जाना चाहिए ।" sg,1940 के दशक के बाद से शल्य चिकित्सा ने तपेदिक के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । sg,तपेदिक के लिए पहला सफल उपचार शल्य चिकित्सा के द्वारा ही किया गया था । ,वे इस अवलोकन पर आधारित था कि ठीक हो चुके तपेदिक की सभी गुफाएं भर चुकी थीं । ,इसलिए शल्य चिकित्सा में उपचार के लिए खुली गुफाओं को भरने का प्रयास किया जाता है । ,इन सभी प्रक्रियाओं का उपयोग पूर्व एंटीबायोटिक युग में किया गया । sg,इसमें एक मिथक है कि शल्य चिकित्सकों का मानना है कि टीबी के जीव को ऑक्सीजन नहीं पहुंचने देनी चाहिए । ,हालांकि यह जाना माना तथ्य है कि यह जीव आवायुवीय परिस्थितियों में जीवित रहता है । ,हालांकि वर्तमान मानकों में इन प्रक्रियाओं को बर्बर माना जाता है । ,"यह याद रखा जाना चाहिए कि यह उपचार रोग के लिए सम्भावी इलाज है , क्योंकि इसमें मृत्यु दर कम से कम उतनी बुरी होती है जितनी कि फुफ्फुस कैंसर में होती है ।" ,इसमें न्युमोथोरेक्स को हमेशा ठीक किया जाता था और इस प्रक्रिया को कुछ सप्ताह के बाद बार बार दोहराया जाता था । ,"पंगु बनाया जा चुका डायाफ्राम इसके बाद ऊपर उठ जाता था और उस ओर का फुफ्फुस नष्ट हो जाता था , जिससे गुफा बंद हो जाती थी ।" ,छह से आठ पसलियों को तोड़ कर वक्ष गुहा में धकेल दिया जाता था ताकि फुफ्फुस के निचले हिस्से को नष्ट किया जा सके । ,"यह एक बर्बर शल्य चिकित्सा थी , लेकिन इसमें प्रक्रिया को फिर से दोहराने की आवश्यकता नहीं होती थी ।" ,"1940 और 1950 के दशक में संक्रमित फुफ्फुस को पुनः ठीक करना असंम्भव था , क्योंकि उस समय निश्चेतक विज्ञान इतना उन्नत नहीं हुआ था , जिससे फुफ्फुस की सर्जरी करते समय उसे बेहोश किया जा सके ।" sg,"आधुनिक समय में , तपेदिक की शल्य चिकित्सा , कई दवाओं से प्रतिरोधी टीबी के प्रबंधन तक ही सीमित है ।" ,"MDR - टीबी का रोगी जिसका कल्चर कई महीने के उपचार के बाद भी सकारात्मक रहता है , उसमें संक्रमित ऊतक को काटने के लिए लोबेक्टोमी या न्युमोनेक्टोमी का उपयोग किया जाता है ।" ,शल्य चिकित्सा के लिए उपयुक्त समय निर्धारित नहीं है और शल्य चिकित्सा के बाद भी रुग्णता बनी रह सकती है । sg,अमेरिका में एक केंद्र है जिसके पास सबसे ज्यादा अनुभव हैं । ,"यह केंद्र डेनवर , कोलोराडो में नेशनल ज्यूइश मेडिकल एंड रिसर्च सेंटर है ।" ,नॉन - इन्वेसिव वेन्टिलेशन गहन देखभाल इकाई में भर्ती लोगों के लिये लाभकारी हो सकता है । ,काउंटर पर बेची जाने वाली खांसी की दवा को प्रभावी नहीं पाया गया है और बच्चों में ज़िंक का उपयोग भी प्रभावी नहीं है । pl,म्यूकोलिक्टस के लिये भी अपर्याप्त साक्ष्य ही उपलब्ध हैं । ,एंटीबायोटिक उन लोगों में परिणाम को बेहतर करती है जो बैक्टीरिया जनित निमोनिया से पीड़ित होते हैं । sg,"एंटीबायोटिक का चुनाव आरंभिक रूप से प्रभावित व्यक्तियों की उम्र , अंतर्निहित स्वास्थ्य , अर्जित संक्रमण का स्थान आदि जैसी विशेषताओं पर निर्भर करता है ।" ,"यूके में समुदाय - अर्जित निमोनिया के लिये अनुभव उपचार के रूप में प्राथमिक रूप से एमॉक्सिसिलीन की अनुशंसा की जाती है , जबकि डॉक्सीसाइक्लीन या क्लैरिथ्रोमाइसीन विकल्प के रूप में अनुशंसित की जाती हैं ।" ,"उत्तरी अमरीका में जहां पर समुदाय - अर्जित निमोनिया के “ असामान्य ” प्रारूप आम हैं , वयस्कों में मैक्रोलाइड ( जैसे कि एज़ीथ्रोमाइसीन या एरीथ्रोमाइसीन ) और डॉक्सीसाइक्लीन ने एमॉक्सीसिलीन को प्रथम पंक्ति वाह्यरोगियों के उपचार में प्रतिस्थापित कर दिया है ।" sg,हल्के या मध्यम लक्षणों वाले बच्चों में एमॉक्सिसिलीन अभी भी प्रथम पंक्ति उपचार है । ,गैरजटिल मामलों में फ्लूरोक्विनोलोन्स का उपयोग हतोत्साहित किया जाता है क्योंकि इसके पश्च प्रभावों और प्रतिरोध उत्पन्न करने को लेकर चिंतायें होती हैं और इनका कोई खास चिकित्सीय लाभ भी नहीं दिखता है । ,पारंपरिक रूप से उपचार की अवधि सात से दस दिन की रही है लेकिन बढ़ते हुये साक्ष्य यह बताते हैं कि छोटा कोर्स ( तीन से पांच दिन ) समान रूप से प्रभावी होता है । ,"अस्पताल से अर्जित निमोनिया के लिये अनुशंसा में तीसरी और चौथी पीढ़ी के सिफाल्सोपोरिन्स , कार्बापेनम , फ्लोरोक्विनालोन , एमीनोग्लाइकोसाइड और वैन्कोमिसिन शामिल हैं ।" ,इन एंटीबायोटिक्स को अमूमन अंतःशिरीय रूप से दिया जाता है और संयोजनो में इनका उपयोग किया जाता है । ,वे जिनको अस्पताल में उपचार दिया जाता है उनमें से 90 % आरंभिक एंटीबायोटिक से बेहतर हो जाते हैं । ,इन्फ्लुएंज़ा वायरसों ( इन्फ्लुएंज़ा ए और इन्फ्लुएंज़ा बी ) से हुये वायरस जनित निमोनिया का उपचार करने के लिये न्यूरामिनिडेस इन्हिबिटर्स का उपयोग किया जा सकता है । ,"अन्य प्रकार के समुदाय अर्जित निमोनिया वायरस , जिनमें सार्स कोरोनावायरस , एडेनोवायरस , हंटावायरस और पैराइन्फ्लुएंज़ा वायरस शामिल हैं , विशिष्ट एंटीवायरस दवायें अनुशंसित की जाती हैं ।" ,"इन्फ्लुएंज़ा ए का उपचार रिमैन्टाडाइन या एमैन्टाडाइन द्वारा किया जाता है जबकि इन्फ्लुएंज़ा ए या बी का उपचार ओसेल्टावमिविर , ज़ानामिविर या पेरामिविर द्वारा किया जाता है ।" ,ये सबसे अधिक लाभ तब देती हैं जब इनको लक्षणों की शुरुआत के 48 घंटों के भीतर दिया जाये । pl,"H5N1 इन्फ्लुएंज़ा ए के अनेक चिह्न हैं जिनको एविएन इन्फ्लुएंज़ा या "" बर्ड फ्लू "" भी कहा जाता है , रिमैन्टाडाइन और ऐमन्टाडाइन के प्रति प्रतिरोध दिखाते हैं ।" ,कुछ विशेषज्ञों द्वारा वायरस जनित निमोनिया में एंटीबायोटिक के उपयोग की अनुशंसा की जाती है क्योंकि जटिलता पैदा करने वाले बैक्टीरिया संक्रमण से इंकार नहीं किया जा सकता है । ,ब्रिटिश थोराकिक सोसाइटी इस बात की अनुशंसा करती है कि उन लोगों के साथ एंटीबायोटिक का उपयोग नहीं किया जाना चाहिये जिनको रोग का हल्का प्रभाव हो । sg,कॉर्टिकॉस्टरॉएड का उपयोग विवादित है । ,सामान्यतः रुढिवादी रूप से एस्पिरेशन न्यूमोनिटिस को एंटीबायोटिक द्वारा उपचारित किया जाना केवल एस्पिरेशन निमोनिया के साथ देखा गया है । sg,एंटीबायोटिक का चुनाव कई सारे कारकों पर निर्भर करेगा जिनमें संदिग्ध कारक जीवाणु और समुदाय में अर्जित निमोनिया या अस्पताल में अर्जित निमोनिया शामिल हैं । ,"सामान्य विकल्पों में क्लिन्डामाइसिन , बीटा - लेक्टम एंटीबायोटिक और मेटरोनिडाज़ोल का संयोजन या एमिनोग्लाइकोसाइड शामिल हैं ।" ,"कॉर्टिकॉस्टेरॉएड कभी - कभार एस्पिरेशन निमोनिया मे उपयोग किया जाता है , लेकिन इनकी प्रभावशीलता के समर्थन पर सीमित साक्ष्य उपलब्ध हैं ।" ,"उपचार के साथ , अधिकतर प्रकार के बैक्टीरिया जनित निमोनिया 3 – 6 दिनों में स्थिर हो जाते हैं ।" ,अधिकतर लक्षणों के समाधान में कुछ सप्ताह लग जाते हैं । ,एक्स - रे परिणाम आम तौर पर चार सप्ताहों में स्पष्ट हो जाते हैं और मृत्युदर ( 1 % से कम ) कम होती है । ,बज़ुर्गों और फेफड़ों की अन्य समस्याओं से ग्रसित लोगों के ठीक होने में 12 सप्ताह लग सकते हैं । ,वे व्यक्ति जिनको अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है उनमें मृत्युदर 10 % तक उच्च हो सकती है और वे जिनको गहन देखभाल की जरूरत पड़ती है उनमें मृत्युदर 30 – 50 % तक हो सकती है । ,निमोनिया वह सबसे आम अस्पताल - अर्जित संक्रमण है जिसके कारण मृत्यु हो सकती है । sg,एंटीबायोटिक के आविर्भाव के पहले अस्पताल में भर्ती होने वालों में मृत्युदर आमतौर पर 30 % हुआ करती थी । ,जटिलतायें विशेष रूप से उन लोगों में हो सकती हैं जो बुज़ुर्ग हैं और जिनको अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्यायें हैं । ,"इन समस्याओं में अन्य समस्याओं के साथ एम्पाइयेमा , फेफड़ा एब्सेस , ब्रॉन्कियोलिटिस ऑब्लिटरान्स , गंभीर श्वसन समस्या सिन्ड्रोम , सेप्सिस और अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं की स्थितियों का जटिल होना शामिल है ।" ,"चिकित्सीय भविष्यवाणी नियमों को , निमोनिया में परिणामों को अधिक वस्तुगत रूप से पूर्वलक्षित करने के लिये विकसित किया गया है ।" ,ये नियम अक्सर इस बात का निश्चय करने के लिये उपयोग किये जाते हैं कि व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती करने की ज़रूरत है या नहीं । sg,"निमोनिया में तरल का रिसाव , फेफड़े के चारों ओर के स्थान में बन सकता है ।" ,"कभी - कभार , सूक्ष्म जीव इस तरल को संक्रमित कर देते हैं जिसके कारण एम्पाइयेमा हो जाता है ।" ,यदि यह एम्पायेमा के साक्ष्य दर्शाता है तो तरल को पूरी तरह से निकालना बहुत जरूरी है जिसके लिये अक्सर निकासी कैथेटर की जरूरत पड़ती है । sg,एम्पायेमा के गंभीर मामलो में शल्यक्रिया की जरूरत पड़ सकती है । ,यदि संक्रमित तरल निकाला नहीं जाता है तो संक्रमण बना रह सकता है क्योंकि फेफड़े की कैविटी में एंटीबायोटिक ठीक से भेदन नहीं कर पाती है । ,यदि तरल निष्क्रिय है तो इसको निकालने की ज़रूरत केवल तब पड़ सकती है जब इससे लक्षण पैदा हो रहे हों या ये अस्पष्ट हों । ,कभी - कभार फेफड़े में बैक्टीरिया संक्रमित तरल की एक थैली बनायेंगे जिसको फेफड़े का फोड़ा कहते हैं । ,फेफड़े के फोड़े को आम तौर पर छाती के एक्स - रे द्वारा देखा जा सकता है लेकिन निदान की पुष्टि के लिये अक्सर छाती के सीटी स्कैन की जरूरत पड़ती है । ,फोड़े आम तौर पर एस्पिरेशन निमोनिया में होते हैं और अक्सर इनमें कई तरह के बैक्टीरिया शामिल होते हैं । ,किसी फेफड़े के फोड़े के उपचार के लिये दीर्घ अवधि के एंटीबायोटिक पर्याप्त होते हैं लेकिन कभी - कभार फोड़ों को शल्यचिकित्सक या रेडियोलॉजिस्ट द्वारा निकाला जाना जरूरी हो जाता है । ,निमोनिया गंभीर श्वसन respiratory distress सिन्ड्रोम ( एआरडीएस ) को शुरु करके श्वसन विफलता पैदा कर सकता है जो संक्रमण और सूजन के संयोजन की प्रतिक्रिया का परिणाम होता है । ,फेफड़ों में तरल भर जाता है और वे सख्त हो जाते हैं । ,इस सख्ती के साथ एल्वियोलर तरल के कारण ऑक्सीजन निष्कर्षण में गंभीर कठिनाइयों के संयोजन के चलते उत्तरजीविता हेतु लंबी अवधि के लिये यांत्रिक श्वसन की आवश्यकता पड़ सकती है । ,"सेप्सिस , निमोनिया की एक संभावित जटिलता है लेकिन आम तौर पर केवल उन लोगों में होती है जिनमें खराब प्रतिरक्षा या हाइपोस्पलेनिस्म होती है ।" ,"इनमें से ज्यादातर पाँच वर्ष से कम आयु वाले बच्चें होते हैं , वहीं गर्भवती महिलाएँ भी इस रोग के प्रति संवेदनशील होती हैं ।" sg,संक्रमण रोकने के प्रयास तथा इलाज करने के प्रयासों के होते हुए भी १९९२ के बाद इसके मामलों में अभी तक कोई गिरावट नहीं आयी है । ,यदि मलेरिया की वर्तमान प्रसार दर बनी रही तो अगले २० वर्षों में मृत्यु दर दोगुनी हो सकती है । pl,"मलेरिया के बारे में वास्तविक आँकड़े अनुपलब्ध हैं क्योंकि ज्यादातर रोगी ग्रामीण इलाकों में रहते हैं , ना तो वे चिकित्सालय जाते हैं और ना उनके मामलों का लेखा जोखा रखा जाता है ।" sg,मलेरिया और एच.आई.वी. का एक साथ संक्रमण होने से मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है । ,"मलेरिया चूंकि एच.आई.वी. से अलग आयु - वर्ग में होता है , इसलिए यह मेल एच.आई.वी. - टी.बी. ( क्षय रोग ) के मेल से कम व्यापक और घातक होता है ।" ,"तथापि ये दोनों रोग एक दूसरे के प्रसार को फैलाने में योगदान देते हैं - मलेरिया से वायरल भार बढ जाता है , वहीं एड्स संक्रमण से व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाने से वह रोग की चपेट में आ जाता है ।" ,"वर्तमान में मलेरिया भूमध्य रेखा के दोनों तरफ विस्तृत क्षेत्र में फैला हुआ है इन क्षेत्रों में अमेरिका , एशिया तथा ज्यादातर अफ्रीका आता है , लेकिन इनमें से सबसे ज्यादा मौते ( लगभग ८५ से ९० % तक ) उप - सहारा अफ्रीका में होती हैं ।" ,"मलेरिया का वितरण समझना थोडा जटिल है , मलेरिया प्रभावित तथा मलेरिया मुक्त क्षेत्र प्रायः साथ साथ होते हैं ।" sg,सूखे क्षेत्रों में इसके प्रसार का वर्षा की मात्रा से गहरा संबंध है । ,डेंगू बुखार के विपरीत यह शहरों की अपेक्षा गाँवों में ज्यादा फैलता है । ,"उदाहरणार्थ वियतनाम , लाओस और कम्बोडिया के नगर मलेरिया मुक्त हैं , जबकि इन देशों के गाँव इस से पीड़ित हैं ।" ,"अपवाद - स्वरूप अफ्रीका में नगर - ग्रामीण सभी क्षेत्र इस से ग्रस्त हैं , यद्यपि बड़े नगरों में खतरा कम रहता है ।" ,१९६० के दशक के बाद से कभी इसके विश्व वितरण को मापा नहीं गया है । sg,"हाल ही में ब्रिटेन के वेलकम ट्रस्ट ने मलेरिया एटलस परियोजना को इस कार्य हेतु वित्तीय सहायता दी है , जिससे मलेरिया के वर्तमान तथा भविष्य के वितरण का बेहतर ढँग से अध्ययन किया जा सकेगा ।" ,"मलेरिया गरीबी से जुड़ा तो है ही , यह अपने आप में खुद गरीबी का कारण है तथा आर्थिक विकास में बाधक है ।" ,जिन क्षेत्रों में यह व्यापक रूप से फैलता है वहाँ यह अनेक प्रकार के नकारात्मक आर्थिक प्रभाव डालता है । ,"प्रति व्यक्ति जी.डी.पी की तुलना यदि १९९५ के आधार पर करें ( खरीद क्षमता को समायोजित करके ) , तो मलेरिया मुक्त क्षेत्रों और मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में इसमें पाँच गुना का अंतर नजर आता है ( १,५२६ डालर बनाम ८,२६८ डालर ) ।" ,जिन देशों में मलेरिया फैलता है उनके जी.डी.पी में १९६५ से १९९० के मध्य केवल प्रतिवर्ष ०.४ % की वृद्धि हुई वहीं मलेरिया से मुक्त देशों में यह २.४ % हुई । ,"यद्यपि साथ में होने भर से ही गरीबी और मलेरिया के बीच कारण का संबंध नहीं जोड़ा जा सकता है , बहुत से गरीब देशों में मलेरिया की रोकथाम करने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं हो पाता है ।" ,"केवल अफ्रीका में ही प्रतिवर्ष १२ अरब अमेरिकन डालर का नुकसान मलेरिया के चलते होता है , इसमें स्वास्थ्य व्यय , कार्यदिवसों की हानि , शिक्षा की हानि , दिमागी मलेरिया के चलते मानसिक क्षमता की हानि तथा निवेश एवं पर्यटन की हानि शामिल हैं ।" ,कुछ देशों में यह कुल जन स्वास्थ्य बजट का ४० % तक खा जाता है । pl,इन देशों में अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों में से ३० से ५० % और बाह्य - रोगी विभागों में देखे जाने वाले रोगियों में से ५० % तक रोगी मलेरिया के होते हैं । ,एड्स और तपेदिक के मुकाबले २००७ के नवंबर माह में मलेरिया के लिए दुगने से भी ज्यादा ४६.९ करोड़ डालर की सहायता राशि खर्च की गई । ,"मलेरिया के लक्षणों में शामिल हैं - ज्वर , कंपकंपी , जोड़ों में दर्द , उल्टी , रक्ताल्पता ( रक्त विनाश से ) , मूत्र में हीमोग्लोबिन और दौरे ।" sg,"मलेरिया का सबसे आम लक्षण है अचानक तेज कंपकंपी के साथ शीत लगना , जिसके फौरन बाद ज्वर आता है ।" ,४ से ६ घंटे के बाद ज्वर उतरता है और पसीना आता है । ,""" पी. फैल्सीपैरम "" के संक्रमण में यह पूरी प्रक्रिया हर ३६ से ४८ घंटे में होती है या लगातार ज्वर रह सकता है ।" ,"पी. विवैक्स "" और "" पी. ओवेल "" से होने वाले मलेरिया में हर दो दिन में ज्वर आता है , तथा "" पी. मलेरिये "" से हर तीन दिन में ।" pl,"मलेरिया के गंभीर मामले लगभग हमेशा "" पी. फैल्सीपैरम "" से होते हैं ।" ,यह संक्रमण के 6 से 14 दिन बाद होता है । ,"तिल्ली और यकृत का आकार बढ़ना , तीव्र सिरदर्द और अधोमधुरक्तता ( रक्त में ग्लूकोज़ की कमी ) भी अन्य गंभीर लक्षण हैं ।" ,"मूत्र में हीमोग्लोबिन का उत्सर्जन और इससे गुर्दों की विफलता तक हो सकती है , जिसे कालापानी बुखार ( अंग्रेजी : "" blackwater fever "" , "" ब्लैक वाटर फ़ीवर "" ) कहते हैं ।" ,"गंभीर मलेरिया से मूर्च्छा या मृत्यु भी हो सकती है , युवा बच्चे तथा गर्भवती महिलाओं में ऐसा होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है ।" ,अत्यंत गंभीर मामलों में मृत्यु कुछ घंटों तक में हो सकती है । ,गंभीर मामलों में उचित इलाज होने पर भी मृत्यु दर 20 % तक हो सकती है । ,"महामारी वाले क्षेत्र में प्रायः उपचार संतोषजनक नहीं हो पाता , अतः मृत्यु दर काफी ऊँची होती है और मलेरिया के प्रत्येक 10 मरीजों में से 1 मृत्यु को प्राप्त होता है ।" ,मलेरिया युवा बच्चों के विकासशील मस्तिष्क को गंभीर क्षति पहुंचा सकता है । ,बच्चों में दिमागी मलेरिया होने की संभावना अधिक रहती है और ऐसा होने पर दिमाग में रक्त की आपूर्ति कम हो सकती है और अक्सर मस्तिष्क को सीधे भी हानि पहुँचाती है । ,अत्यधिक क्षति होने पर हाथ - पांव अजीब तरह से । ,दीर्घ काल में गंभीर मलेरिया से उबरे बच्चों में अकसर अल्प मानसिक विकास देखा जाता है । ,"गर्भवती स्त्रियाँ मच्छरों के लिए बहुत आकर्षक होती हैं और मलेरिया से गर्भ की मृत्यु , निम्न जन्म भार और शिशु की मृत्यु तक हो सकते हैं ।" ,"मुख्यतया यह "" पी. फ़ैल्सीपैरम "" के संक्रमण से होता है , लेकिन "" पी. विवैक्स "" भी ऐसा कर सकता है ।" sg,"तिल्ली में नष्ट होने से बचने के लिए "" पी. फैल्सीपैरम "" एक अन्य चाल चलता है - यह लाल रक्त कोशिका की सतह पर एक चिपकाऊ प्रोटीन प्रदर्शित करा देता है जिससे संक्रमित रक्त कोशिकाएँ छोटी रक्त वाहिकाओं में चिपक जाती हैं और तिल्ली तक पहुँच नहीं पाती हैं ।" ,"इस कारण रक्तधारा में केवल वलय रूप ही दिखते हैं , अन्य सभी विकास के चरणों में यह छोटी रक्त वाहिकाओं की सतहों में चिपका रहता है ।" ,इस चिपचिपाहट के चलते ही मलेरिया रक्तस्त्राव की समस्या करता है । ,"यद्यपि संक्रमित लाल रक्त कोशिका की सतह पर प्रदर्शित प्रोटीन पीएफईएमपी-1 ( "" Plasmodium falciparum "" erythrocyte membrane protein-1 , प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम इरिथ्रोसाइट मैम्ब्रेन प्रोटीन-1 ) शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र का शिकार बन सकता है , ऐसा होता नहीं है क्योंकि इस प्रोटीन में विविधता बहुत ज्यादा होती है ।" ,हर परजीवी के पास इसके 60 प्रकार होते हैं वहीं सभी के पास मिला कर असंख्य रूपों में ये इस प्रोटीन को प्रदर्शित कर सकते हैं । ,वे बार बार इस प्रोटीन को बदल कर शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र से एक कदम आगे रहते हैं । ,कुछ अंशाणु नर -JOIN मादा जननाणुओं में बदल जाते हैं और जब मच्छर काटता है तो रक्त के साथ उन्हें भी ले जाता है । ,यहाँ वे फिर से अपना जीवन चक्र पूरा करते हैं । ,"मलेरिया के कुछ मामले आपातकालीन होते हैं तथा मरीज को पूर्णतया स्वस्थ होने तक निगरानी में रखना अनिवार्य होता है , किंतु अन्य प्रकार के मलेरिया में ऐसा आवश्यक नहीं है , इलाज बहिरंग विभाग में किया जा सकता है ।" sg,उचित इलाज होने पर मरीज बिलकुल ठीक हो जाता है । ,"कुछ लक्षणों का उपचार सामान्य दवाओं से किया जाता है , साथ में मलेरिया -JOIN रोधी दवाएँ भी दी जाती हैं ।" ,ये दवाएं दो प्रकार की होती हैं - पहली जो प्रतिरोधक होती हैं और रोग होने से पहले लिए जाने पर रोग से सुरक्षा करती हैं तथा दूसरी वे जिनका रोग से संक्रमित हो जाने के बाद प्रयोग किया जाता है । ,"अनेक दवाएँ केवल प्रतिरोध या केवल उपचार के लिए इस्तेमाल होती हैं , जबकि अन्य कई दोनों तरह से प्रयोग में लाई जा सकती हैं ।" ,कुछ दवाएँ एक -JOIN दूसरे के प्रभाव को बढ़ाती हैं और इनका प्रयोग साथ में किया जाता है । ,प्रतिरोधक दवाओं का प्रयोग अक्सर सामूहिक रूप से ही किया जाता है । sg,कुनैन पर आधारित अनेक औषधियों को मलेरिया का अच्छा उपचार समझा जाता है । ,"इसके अतिरिक्त आर्टिमीसिनिन जैसी औषधियाँ , जो आर्टिमीसिया एन्नुआ ( अंग्रेजी : Artemisia annua ) नामक पौधे से तैयार की जाती हैं , मलेरिया के इलाज में प्रभावी पाई गई हैं ।" sg,कुछ अन्य औषधियों का प्रयोग भी मलेरिया के विरुद्ध सफल हुआ है । sg,कुछ औषधियों पर प्रयोग जारी है । sg,दवा के चुनाव में सबसे प्रमुख कारक होता है उस क्षेत्र में मलेरिया परजीवी किन दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित कर चुका है । ,अनेक दवाएँ जिनका प्रयोग पहले मलेरिया के विरुद्ध सफल समझा जाता था आजकल सफल नहीं समझा जाता क्योंकि मलेरिया के परजीवी धीरे धीरे उनके प्रति प्रतिरोधक क्षमता प्राप्त कर चुके हैं । ,"होम्योपैथी में मलेरिया का उपचार उपलब्ध है , हालांकि अनेक चिकित्सकों का मानना है कि मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी का इलाज एलोपैथिक दवाओं से ही किया जाना चाहिये , क्योंकि ये वैज्ञानिक शोध पर आधारित हैं ।" sg,यहाँ तक कि ब्रिटिश होमियोपैथिक एसोसिएशन की सलाह यही है कि मलेरिया के उपचार के लिए होम्योपैथी पर निर्भर नहीं करना चाहिए । ,आयुर्वेद में मलेरिया को विषम ज्वर कहा जाता है और इसके उपचार के लिये अनेक औषधियाँ उपलब्ध हैं । ,"यद्यपि मलेरिया के आज प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं , लेकिन विश्व के अनेक अविकिसित क्षेत्रों के मलेरिया पीड़ित क्षेत्रों में या तो ये मिलते नहीं हैं या इतने महंगे होते हैं कि आम मरीज उसका उपयोग नहीं कर पाता है ।" ,"मलेरिया की दवाओं की बढ़ती माँग को देखकर अनेक प्रभावित देशों में बड़े पैमाने पर नकली दवाओं का कारोबार होता है , जो अनेक मृत्युओं का कारण बनता है ।" pl,आजकल कम्पनियाँ नई तकनीकों का प्रयोग करके इस समस्या से निपटने का प्रयास कर रही हैं । sg,"मलेरिया का प्रसार इन कारकों पर निर्भर करता है - मानव जनसंख्या का घनत्व , मच्छरों की जनसंख्या का घनत्व , मच्छरों से मनुष्यों तक प्रसार और मनुष्यों से मच्छरों तक प्रसार ।" ,इन कारकों में से किसी एक को भी बहुत कम कर दिया जाए तो उस क्षेत्र से मलेरिया को मिटाया जा सकता है । ,इसीलिये मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में रोग का प्रसार रोकने हेतु दवाओं के साथ -JOIN साथ मच्छरों का उन्मूलन या उनसे काटने से बचने के उपाय किये जाते हैं । ,अनेक अनुसंधान कर्ता दावा करते हैं कि मलेरिया के उपचार की तुलना में उस से बचाव का व्यय दीर्घ काल में कम रहेगा । ,1956 - 1960 के दशक में विश्व स्तर पर मलेरिया उन्मूलन के व्यापक प्रयास किये गये ( वैसे ही जैसे चेचक उन्मूलन हेतु किये गये थे ) । ,किंतु उनमें सफलता नहीं मिल सकी और मलेरिया आज भी अफ्रीका में उसी स्तर पर मौजूद है । ,मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करके मलेरिया पर बहुत नियंत्रण पाया जा सकता है । ,"खड़े पानी में मच्छर अपना प्रजनन करते हैं , ऐसे खड़े पानी की जगहों को ढक कर रखना , सुखा देना या बहा देना चाहिये या पानी की सतह पर तेल डाल देना चाहिये , जिससे मच्छरों के लारवा सांस न ले पाएं ।" ,इसके अतिरिक्त मलेरिया -JOIN प्रभावित क्षेत्रों में अकसर घरों की दीवारों पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाता है । pl,अनेक प्रजातियों के मच्छर मनुष्य का खून चूसने के बाद दीवार पर बैठ कर इसे हजम करते हैं । ,"ऐसे में अगर दीवारों पर कीटनाशकों का छिड़काव कर दिया जाए तो दीवार पर बैठते ही मच्छर मर जाएगा , किसी और मनुष्य को काटने के पहले ही ।" ,विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में छिडकाव के लिए लगभग 12 दवाओं को मान्यता दी है । ,"इनमें डीडीटी के अलावा परमैथ्रिन और डेल्टामैथ्रिन जैसी दवाएँ शामिल हैं , खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ मच्छर डीडीटी के प्रति रोधक क्षमता विकसित कर चुके हैं ।" ,मच्छरदानियाँ मच्छरों को लोगों से दूर रखने में सफल रहती हैं तथा मलेरिया संक्रमण को काफी हद तक रोकती हैं । ,एनोफिलीज़ मच्छर चूंकि रात को काटता है इसलिए बड़ी मच्छरदानी को चारपाई / बिस्तर पे लटका देने तथा इसके द्वारा बिस्तर को चारों तरफ से पूर्णतः घेर देने से सुरक्षा पूरी हो जाती है । ,मच्छरदानियाँ अपने आप में बहुत प्रभावी उपाय नहीं हैं किंतु यदि उन्हें रासायनिक रूप से उपचारित कर दें तो वे बहुत उपयोगी हो जाती हैं । ,मलेरिया -JOIN प्रभावित क्षेत्रों में मलेरिया के प्रति जागरूकता फैलाने से मलेरिया में 20 प्रतिशत तक की कमी देखी गई है । ,साथ ही मलेरिया का निदान और इलाज जल्द से जल्द करने से भी इसके प्रसार में कमी होती है । ,अन्य प्रयासों में शामिल है - मलेरिया संबंधी जानकारी इकट्ठी करके उसका बड़े पैमाने पर विश्लेषण करना और मलेरिया नियंत्रण के तरीके कितने प्रभावी हैं इसकी जांच करना । ,"ऐसे एक विश्लेषण में पता लगा कि लक्षण -JOIN विहीन संक्रमण वाले लोगों का इलाज करना बहुत आवश्यक होता है , क्योंकि इनमें बहुत मात्रा में मलेरिया संचित रहता है ।" ,मलेरिया के विरूद्ध टीके विकसित किये जा रहे हैं यद्यपि अभी तक सफलता नहीं मिली है । ,पहली बार प्रयास 1967 में चूहे पे किया गया था जिसे जीवित किंतु विकिरण से उपचारित बीजाणुओं का टीका दिया गया । sg,इसकी सफलता दर 60 % थी । ,"एसपीएफ66 ( अंग्रेजी : "" SPf66 "" ) पहला टीका था जिसका क्षेत्र परीक्षण हुआ , यह शुरू में सफल रहा किंतु बाद में सफलता दर 30 % से नीचे जाने से असफल मान लिया गया ।" sg,"आज आरटीएस , एसएएस02ए ( अंग्रेजी : "" RTS , S / AS02A "" ) टीका परीक्षणों में सबसे आगे के स्तर पर है ।" ,"आशा की जाती है कि "" पी. फैल्सीपरम "" के जीनोम की पूरी कोडिंग मिल जाने से नयी दवाओं का तथा टीकों का विकास एवं परीक्षण करने में आसानी होगी ।" sg,वहां खसरे के लिए कोई विशेष उपचार नहीं है । pl,हल्के और सरल खसरा से पीड़ित अधिकांश रोगी आराम और सहायक उपचार से ठीक हो जाएंगे । ,"हालांकि , यदि मरीज अधिक बीमार हो जाता है , तब चिकित्सा सलाह लेना महत्वपूर्ण हो जाता है , क्योंकि हो सकता है उनमें जटिलताएं विकसित हो रही हों ।" ,कुछ रोगियों में खसरे की अगली कड़ी के रूप में निमोनिया का विकास हो सकता है । ,"अन्य जटिलताओं में कान का संक्रमण , ब्रोंकाइटिस ( श्वसनीशोथ ) और इन्सेफेलाइटिस ( मस्तिष्कशोथ ) शामिल हैं ।" sg,तीव्र खसरा श्वसनीशोथ से होने वाली मृत्यु की दर 15 % है । ,हालांकि खसरा मस्तिष्कशोथ का कोई विशेष इलाज नहीं है । ,"प्रतिजैविक निमोनिया के लिए प्रतिजैविकों की जरूरत होती है , खसरे के बाद विवरशोथ और श्वसनीशोथ हो सकता है ।" ,"अन्य सभी उपचार के साथ बुखार कम करने और दर्द कम करने के लिए आइबुफेन या एक्टेमिनोफेन ( पैरासीटामोल भी कहा जाता है ) दिया जा सकता है और यदि आवश्यक हो , तेज खांसी से राहत पाने के लिए श्वसनी विस्फारक ( ब्रान्कोडायलेटर ) भी दिया जा सकता है ।" ,ध्यान रहे कि छोटे बच्चों को बिना चिकित्सा सलाह के कभी भी एस्पिरीन नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि इससे रे'ज सिंड्रोम जैसी बीमारी होने का खतरा रहता है । ,इलाज में विटामिन ए के उपयोग की जांच की जा चुकी है । ,"इसके इस्तेमाल से होनेवाले प्रयोग की व्यवस्थित समीक्षा करने से समग्र मृत्यु दर में कमी लाने में कोई सफलता नहीं मिली , लेकिन इसने 2 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर को जरूर कम किया ।" ,"हालांकि खसरे से पीड़ित अधिकतर मरीज बच गये , लेकिन कई जटिलताएं रह गयीं और अक्सर जटिलताएं पैदा होती हैं तथा उनमें श्वसनीशोथ , निमोनिया , मध्य कर्णशोथ , रक्तस्रावी ( हेमरैगिक ) जटिलताएं , तीव्र प्रसरित मस्तिष्क सुषुम्ना शोथ , तीव्र खसरा मस्तिष्कशोथ , अर्धजीर्ण कठिन संपूर्ण मस्तिष्क शोथ एसएसपीई ( sspe ) अंधत्व , वधिरता और मौत भी शामिल हो सकती है ।" ,सांख्यिकीय तौर पर खसरा के 1000 मामलों में से 2 - 3 मरीज मर जाते हैं और 5 - 10 जटिलताओं से पीड़ित रहते हैं । sg,"जिन रोगियों में जटिलताएं पैदा नहीं होती हैं , आमतौर पर उनके रोग का निदान बढ़िया होता है ।" ,"हालांकि , अधिकांश मरीज बच जाते हैं फिर भी टीका लगाना अति महत्वपूर्ण है क्योंकि खसरा के 15 प्रतिशत मरीजों में जटिलताएं मिलती हैं , कुछ में बहुत कम तो दूसरों में ( जैसे कि अर्धजीर्ण कठिन संपूर्ण मस्तिष्क शोथ ) आम तौर पर बहुत घातक जटिलताएं होती हैं ।" ,"इसके अलावा , भले ही वह रोगी खसरा से सिक्वेला या मृत्यु के बारे में चिंतित न हो लेकिन वह निमोनिया की विशाल कोशिका से प्रतिरक्षा में अक्षम रोगियों तक बीमारी फैला सकता है , जिनके मृत्यु की जोखिम बहुत अधिक रहती है ।" sg,खसरे के वायरस के संक्रमण का एक और गंभीर खतरा तीव्र खसरा श्वसनीशोथ है । ,"यह खसरे के दाने का निकलना शुरू होने के दूसरे दिन से लेकर एक सप्ताह तक , बहुत तेज बुखार , गंभीर सिर दर्द , कंपकंपी और अस्वाभाविक मनोभाव के साथ शुरू होता है ।" ,"इससे रोगी कोमा में जा सकता है , उसकी मृत्यु भी हो सकती है या उसके मस्तिष्क को क्षति पहुंच सकती है ।" sg,"विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ ( WHO ) के अनुसार , खसरे का टीका लगाने का प्रमुख कारण यह है कि यह बच्चों के मृत्यु दर को रोकने में काफी सहायक है ।" ,"दुनिया भर में , मीज़ल्स इनिशियेटिव के भागीदारों , द अमेरिकन रेड क्रॉस , द यूनाइटेड स्टेट्स सेंटर्स फॉर डिज़िज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन सीडीसी ( CDC ) , द यूनाइटेड नेशंस फाउंडेशन , यूनिसेफ और विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ ( WHO ) , के नेतृत्व में टीकाकरण अभियान से मृत्यु दर में काफी कमी आई है ।" ,"विश्व स्तर पर , खसरे से हो रही मौतों में 60 % की अनुमानित गिरावट देखी गयी , 1999 में हुई 873,000 मौतों की तुलना में 2005 में केवल 345,000 मौतें हुईं ।" sg,"विश्व स्तर पर 2008 में हुई 164,000 तक मौतों में गिरावट आने का अनुमान है , जिसमें दक्षिण - पूर्व एशियाई क्षेत्र में 2008 में 77 % लोगों का निधन खसरा की वजह से हुआ ।" ,डब्ल्यूएचओ ( WHO ) के छह में से पांच क्षेत्रों ने खसरा को समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है और मई 2010 में 63 वें वर्ल्ड हेल्थ असेंबली में प्रतिनिधियों ने 2000 में देखे गये स्तर से 2015 तक खसरे की वजह से होने वाली मृत्यु दर में 95 % की कटौती के वैश्विक लक्ष्य पर सहमति बनाई है तथा साथ ही इसके पूरी तरह से उन्मूलन की दिशा में कदम उठाने का निश्चय किया है । ,"हालांकि , मई 2010 में वैश्विक स्तर पर इसके पूर्ण उन्मूलन की किसी विशिष्ट तिथि का लक्ष्य तय करने पर अभी तक सहमति नहीं हुई है ।" ,"165 - 180 ई. पू. का एन्टोनिन प्लेग , जो प्लेग ऑफ गालेन के नाम से भी जाना जाता है , चेचक या खसरा के रूप में वर्णित है ।" ,इस बीमारी ने कुछ क्षेत्रों में एक तिहाई से अधिक की आबादी और रोमन सेना को पूरी तरह से खत्म कर दिया । sg,"पहली बार खसरा के साथ उसके भेद चेचक और छोटी माता के वैज्ञानिक विवरण पता करने का श्रेय फारसी चिकित्सक मोहम्मद इब्न ज़कारिया अर - रज़ी को जाता है , जो पश्चिम में "" राज़ेस "" के नाम से जाने जाते हैं , जिन्होंने "" द बुक ऑफ स्मॉल पॉक्स एंड मीज़ल्स "" ( अरबी में : "" किताब फी अल ज़दारी - वा अल - हस्बा "" ) शीर्षक पुस्तक प्रकाशित की ।" ,"खसरा एक स्थानिक रोग है , जिसका अर्थ है कि यह एक समुदाय में लगातार मौजूद रहता है और अधिकतर लोग इससे प्रतिरोध की क्षमता का विकास कर लेते हैं ।" ,"ऐसी आबादी में जिसका सामना खसरा जैसी बीमारी से नहीं हुआ हो , एक नये रोग से सामना होने पर विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं ।" sg,"1529 में , क्यूबा में खसरे की महामारी ने दो तिहाई बाशिंदों की जान ले ली जो पहले चेचक से बच गये थे ।" ,"दो साल बाद होंडूरस की आधी आबादी की मौत खसरे की वजह से हुई थी , जिसने मेक्सिको , सेंट्रल अमेरिका और इंका सभ्यता को उजाड़ दिया था ।" sg,मोटे तौर पर पिछले 150 वर्षों में खसरा से विश्वभर में 200 लाख लोगों के मारे जाने का अनुमान है । ,1850 में खसरा ने हवाई की आबादी के पांचवे हिस्से को मार दिया था । ,"1875 में खसरा से फिजी के 40,000 लोगों की मौत हो गयी , जो अनुमान के तौर पर पूरी आबादी का एक तिहाई हिस्सा था ।" sg,19 वीं सदी में इस रोग ने अंडमानी आबादी का भी नाश कर दिया । ,1954 में संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के एक 11 वर्षीय बच्चे डेविड एडमॉनस्टन के शरीर से इस बीमारी को फैलाने वाले वायरस को अलग किया गया था और उसे चूजे के भ्रूण उतक संस्कृति पर अनुकूलित और प्रचारित किया गया । ,अब तक खसरा वायरस के 21 उपभेदों की पहचान की गई है । ,मर्क में मोरिस हिलमैन ने पहले सफल वैक्सीन को विकसित किया । pl,1963 में इस बीमारी की रोकथाम के लिए लाइसेंस प्राप्त टीके उपलब्ध हो गये । ,2009 में सितंबर के शुरुआत में दक्षिण अफ्रीका में गोटांग के एक शहर जोहान्सबर्ग में खसरा के 48 मामलों की सूचना मिली । sg,इस महामारी के तुरंत बाद सरकार ने सभी बच्चों को टीका लगाये जाने का आदेश जारी कर दिया । ,उस समय सभी स्कूलों में टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया गया और अभिभावकों को अपने छोटे बच्चों को टीका दिलवाने की सलाह दी जाती थी । ,"कई लोग टीकाकरण कराने के लिए तैयार नहीं होते थे , क्योंकि उनका मानना था कि यह असुरक्षित और अप्रभावी है ।" ,स्वास्थ्य विभाग ने जनता को यकीन दिलाया कि उनका कार्यक्रम वास्तव में सुरक्षित है । ,अटकलें लगायी जाती थीं कि पता नहीं नई सूइयों का इस्तेमाल किया भी जाता था या नहीं । ,"मध्य अक्टूबर तक कम से कम 940 मामलों को दर्ज किया गया था , जिनमें 4 मौतें हुई थीं ।" ,"19 फ़रवरी 2009 को उत्तरी वियतनाम के 12 प्रांतों में खसरा के 505 मामलों की सूचना मिली , जिसमें हनोई के 160 मामले दर्ज किये गये थे ।" ,मस्तिष्कावरणशोथ ( मैनिंजाइटिस ) और मस्तिष्कशोथ ( इन्सेफेलाइटिस ) सहित उच्च दर की जटिलताओं ने स्वास्थ्य कर्मचारियों को चिंता में डाल दिया था और यू.एस.सीडीसी ( U.S.CDC ) ने सभी पर्यटकों को खसरे का टीका दिलाये जाने की सिफारिश कर दी थी । sg,1 अप्रैल 2009 को उत्तरी वेल्स के दो स्कूलों में महामारी फैल गयी । ,"1983 से 2000 तक , इन्होंने 172 रोगियों में 180 शल्य चिकित्साएं कीं ; इनमें से 98 लोबेक्टोमी थीं और 82 न्यूमोनेक्टोमी थीं ।" sg,इसमें 3.3 % ऑपरेटिव मृत्यु दर दर्ज की गयी । ,6.8 % लोग ऑपरेशन के बाद मर गए । ,"12 % में महत्वपूर्ण रुग्णता ( विशेष रूप से सांस ना ले पाने की स्थिति ) की स्थिति बनी रही 91 रोगी जिनका कल्चर शल्य चिकित्सा से पहले सकारात्मक था , उनमें से 4 का कल्चर शल्य चिकित्सा के बाद भी सकारात्मक आया ।" pl,"शल्य चिकित्सा के बाद तपेदिक का उपचार करने के बाद भी कुछ जटिलताएं पायी गयीं जैसे बार बार हिमोपटाईसिस , फुफ्फुस का नष्ट हो जाना या एम्पाइएमा ( फुफ्फुसीय गुहा में मवाद का इकठ्ठा हो जाना ) ।" ,"फुफ्फुस के अलावा किसी अन्य अंग की टीबी में , शल्य चिकित्सा अक्सर निदान के लिए आवश्यक होती है ( उपचार के लिए नहीं NULL ) : लसिका पर्वों की सर्जिकल छंटाई , फोड़े में से स्राव , ऊतक बायोप्सी , आदि इसके उदाहरण हैं ।" ,टीबी कल्चर के लिए गए नमूनों को निर्जर्मीकृत पात्र में रखकर प्रयोगशाला भेजा जाना चाहिए । ,ध्यान रखना चाहिए कि इसमें कोई बाहरी पदार्थ ना मिल जाये ( यहां तक कि पानी या सलाइन भी नहीं ) और जितना जल्दी हो सके इसे प्रयोगशाला पहुंचा दिया जाना चाहिए । ,"जहां तरल कल्चर की सुविधा उपलब्ध है , निर्जर्मीकृत स्थान से नमूने को सीधे प्रक्रिया स्थान में डाल दिया जाना चाहिए ; इससे परिणाम में सुधार आता है ।" ,"मेरुरज्जु की टीबी में , रीढ़ की हड्डी की अस्थिरता के लिए शल्य चिकित्सा का संकेत दिया जाता है ( जब अस्थियों को बहुत अधिक नुकसान पहुंच चुका हो ) या जब मेरुरज्जु को ख़तरा हो ।" ,अगर रोगी इतना ज्यादा बीमार है कि उपचार को रोका नहीं जा सकता तो एसटीएम और इएमबी तब तक दिए जाने चाहिए जब तक ट्रांसएमिनेस का स्तर सामान्य ना हो जाये ( ये दो दवाएं हेपेटाइटिस से सम्बंधित नहीं हैं ) । ,"टीबी के उपचार के दौरान एकाएक बढ़ने वाला हेपेटाइटिस हो सकता है , लेकिन यह बहुत कम देखा जाता है ; ऐसी स्थिति में आपातकालीन यकृत प्रत्यारोपण करना पड़ता है अन्यथा रोगी की मृत्यु हो जाती है ।" ,दवाओं को फिर से अलग अलग शुरू किया जाना चाहिए । ,"ऐसा करते समय रोगी पर पूरी निगरानी की जानी चाहिए , अर्थात उसका प्रेक्षण किया जाना चाहिए ।" ,रोगी को हर परीक्षण खुराक दिए जाने के बाद कम से कम चार घंटे तक रोगी का पल्स और रक्तचाप नापा जाना चाहिए । sg,"इसके लिए एक नर्स मौजूद होनी चाहिए ( अधिकांश समस्याएं परीक्षण खुराक के छह घंटे के भीतर होती हैं , ( अगर हो तो ।" ,रोगी अचानक बहुत बीमार हो सकता है और इस समय उसे गहन देखभाल सेवाओं और सुविधाओं की आवश्यकता होती है । ,दवाओं को इस क्रम में दिया जाना चाहिए । ,एक दिन में एक से ज्यादा परीक्षण खुराक नहीं दी जानी चाहिए और परीक्षण खुराक देने के समय अन्य सभी दवाओं को रोक देना चाहिए । ,"उदाहरण के लिए चौथे दिन , रोगी को केवल आरएमपी दी जाती है , कोई अन्य दवा नहीं दी जाती ।" ,"अगर रोगी 9 दिन की परीक्षण खुराक ले लेता है , तो यह पता लगाया जा सकता है कि पीजेडए के कारण हैपेटाइटिस हुआ है और पीजेडए की परीक्षण खुराक की आवश्यकता नहीं है ।" ,"दवा के परीक्षण का उपयोग करने का कारण यह है कि टीबी का उपचार करने के लिए दो मुख्य दवाएं आईएनएच और आरएमपी हैं , इसलिए इनका परीक्षण पहले किया जाता है ।" ,पीजेडए के कारण हेपेटाइटिस की संभावना सबसे अधिक होती है और यह एक ऐसी दवा भी है जिसे आसानी से हटाया जा सकता है । ,"इएमबी उस समय उपयोगी होती है जब टीबी के जीवाणु का संवेदनशीलता प्रतिरूप ज्ञात नहीं होता और इसे हटाया जा सकता है अगर यह जीवाणु आईएनएच के लिए संवेदी हो , हटाई जाने वाली दवाओं की सूची नीचे दी गयी है ।" ,"जिस क्रम में दवाओं का परीक्षण किया जाता है , वह निम्न विचारधाराओं के अनुसार अलग हो सकता है :" ,इससे रोगियों को एक बार फिर से उस दवा से बचाया जा सकता है जिसकी वजह से पहले भी उनमें ( संभवतया ) खतरनाक प्रतिकूल प्रतिक्रिया देखी जा चुकी है । ,"इसी तरह के सिद्धांतों का उपयोग करते हुए , अन्य प्रतिकूल प्रभावों ( जैसे बुखार और दाने ) के लिए इसी तरह की योजना का इस्तेमाल किया जा सकता है ।" pl,फुफ्फुसीय टीबी के उपचार के कुरान मानक उपचार से विचलन के समर्थन में कुछ प्रमाण हैं । ,"जिन रोगियों में उपचार की शुरुआत में थूक का कल्चर सकारात्मक आता है और स्मियर नकारात्मक , वे उपचार के चार माह तक अच्छी प्रतिक्रिया करते हैं ( यह एचआईवी - सकारात्मक रोगियों के लिए सत्य नहीं है ) ।" ,और जिन रोगियों का थूक का कल्चर नकारात्मक आता है वे केवल उपचार के तीन माह के भीतर अच्छी प्रतिक्रिया करते हैं ( संभवतया ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इनमें से कुछ रोगियों को पहले कभी टीबी नहीं हुयी होती ) । ,"केवल तीन या चार महीने के लिए रोगी का उपचार करना बुद्धिमानी नहीं है , लेकिन सभी चिकित्सकों के पास ऐसे रोगी होते हैं जो जल्दी ही अपना उपचार रोक देते हैं ( किसी भी कारण से ) ।" ,उन्हें आश्वस्त किया जा सकता है कि कभी कभी फिर से उपचार की आवश्यकता नहीं होती है । ,"बुजुर्ग मरीज जो पहले से बड़ी संख्या में गोलियां खा रहें हैं , उन्हें पीजेडए की जगह 9HR दी जा सकती है , जो बड़े आकार की होती है ।" ,हमेशा शुरुआत से चार दवाओं के साथ उपचार करना जरूरी नहीं होता है । sg,एक ऐसे रोगी का निकट संपर्क इसका उदाहरण हो सकता है जिसमें तपेदिक का पूरी तरह से संवेदनशील विभेद हो । ,"इस मामले में , 2HRZ / 4HR का उपयोग स्वीकार्य है ( इएमबी और एसटीएम को हटा दिया जाता है ) , इसमें यह उम्मीद की जाती है कि इनके विभेद आईएनएच सुग्राही हैं ।" ,"वास्तव में , पहले 1990 के दशक के प्रारंभ तक कई देशों में इसी मानक उपचार की सलाह दी जाती थी , जब आइसोनियाज़िड के लिए प्रतिरोध की दर बढ़ गयी थी ।" ,"जब टीबी का मस्तिष्क और मेरुरज्जु ( मैनिंजाइटिस , इन्सेफेलाइटिस ) पर भी असर हो जाता है , उसका उपचार वर्तमान में 2HREZ / 10HR से किया जाता है ( कुल 13 माह का उपचार ) , लेकिन इस बात के प्रमाण हैं कि यह 2HREZ / 4HR से बेहतर है ।" ,कोई भी इतना बहादुर नहीं होता जो ऐसे समकक्ष छोटे कोर्स के लिए चिकित्सकीय परीक्षण करवा सके । sg,संयुक्त राष्ट्र में आइसोनियाज़िड के लिए प्रतिरोध 6 से 7 प्रतिशत है ( 25 फ़रवरी 2006 ) । ,"दुनिया भर में , यह प्रतिरोध का सबसे आम प्रकार है , इसलिए वर्तमान में उपचार की शुरुआत में HREZ के उपयोग की सलाह तब दी जाती है जब संवेदनशीलता ज्ञात हो ।" ,वर्तमान प्रकोप की रिपोर्ट के बारे में ज्ञान होना जरुरी है ( जैसे लन्दन में आईएनएच प्रतिरोधी टीबी का वर्तमान प्रकोप ) । ,"अगर किसी ऐसे रोगी को आइसोनियाज़िड प्रतिरोधी टीबी के विभेद से संक्रमित पाया जाता है जो 2 माह के लिए HREZ को पूरा कर चुका है , तो उसे अगले 10 माह के लिए बदल कर औषधि दी जाती है ।" ,"और इसी तरह अगर रोगी आइसोनियाज़िड के प्रति असहिष्णु है , तब भी ऐसा ही किया जाता है ( हालांकि 2REZ / 7RE को प्रयुक्त किया जा सकता है यदि रोगी पर पूरी निगरानी रखी जाये ) ।" ,संयुक्त राज्य अमेरिका में एक क्विनोलोन जैसे मोक्सीफ्लोक्सेसिन के साथ 6RZE के उपयोग की सलाह दी जाती है । ,इन सभी दवाओं के प्रमाण के स्तर अच्छे नहीं हैं और दूसरे के ऊपर एक की सलाह कम ही दी जाती है । ,ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है कि टीबी का एक विभेद रिफाम्पिसिन है लेकिन साथ ही आइसोनियाज़िड के लिए प्रतिरोधी नहीं है । ,लेकिन रिफाम्पिसिन के लिए असहिष्णुता सामान्य नहीं है ( हेपेटाइटिस और थ्रोम्बोसाइटोपेनिया रिफाम्पिसिन को रोकने के सबसे आम कारण हैं ) । ,"पहली पंक्ति की दवाओं में , रिफाम्पिसिन सबसे महंगी भी है और गरीब देशों में , इसीलिए अक्सर उपचार में रिफाम्पिसिन का उपयोग नहीं किया जाता है ।" ,"रिफाम्पिसिन तपेदिक के उपचार के लिए उपलब्ध सबसे शक्तिशाली निर्जर्मीकृत दवा है और सभी उपचार जिनमें रिफाम्पिसिन का प्रयोग नहीं किया जाता है , वे मानक उपचार से लम्बे होते हैं ।" ,संयुक्त राष्ट्र में 18HE या HEZ की सिफारिश की जाती है । ,संयुक्त राज्य अमेरिका में क्विनोलोन के विकल्प के साथ 9 से 12HEZ की सलाह दी जाती है ( उदाहरण एमएक्सएफ ) । ,दवा जिसमें से पायराज़ीनामाइड को हटा दिया गया है । ,"HREZ दवा में पीजेडए दोनों , हेपेटाइटिस और दर्द्युक्त जोड़ों के दर्द का आम कारण है और उन रोगियों में इसे सुरक्षित रूप से रोका जा सकता है , जो इसके प्रति असहिष्णु हैं ।" ,"आइसोलेटेड पीजेडए के प्रति प्रतिरोध "" एम . ट्युबरकुलोसिस "" में असामान्य है , लेकिन "" एम . बोविस "" पीजेडए के लिए प्रतिरोधी है ।" ,पीजेडए पूरी तरह से सम्वेदनशील टीबी के उपचार के लिए महत्वपूर्ण नहीं है और इसकी मुख्य भूमिका उपचार की कुल अवधि को 9 माह से कम करके 6 माह तक ले आती है । pl,"संयुक्त राष्ट्र में परीक्षणों में इस बात के प्रमाण मिले हैं कि 9HR "" एम . ट्युबरकुलोसिस "" के लिए उपयुक्त है , यह "" एम . बोविस "" के उपचार के लिए प्रयुक्त पहली पंक्ति की खुराक भी है ।" ,इएमबी के लिए असहिष्णुता या प्रतिरोध दुर्लभ है । ,"अगर कोई रोगी वास्तव में असहिष्णु है या इएमबी प्रतिरोधी टीबी से संक्रमित है , तो 2HRZ / 4HR बिल्कुल स्वीकार्य उपचार है ।" ,"सबसे आम तौर पर शामिल जीवों में "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" , "" हेमोफेलस इन्फ्लुएंज़ा "" और "" क्लेबसिएला निमोनिया "" शामिल है ।" ,लक्षणों के अन्य कारणों पर भी विचार किया जाना चाहिये जैसे कि मायोकार्डियल इन्फार्क्शन या एक फुफ्फुसीय सन्निवेशन । ,निमोनिया एक आम रोग है जो लगभग 450 मिलियन लोगों को प्रतिवर्ष होता है और दुनिया के सभी हिस्से इसमें शामिल हैं । ,यह सभी उम्र के लोगों में मृत्यु का प्रमुख कारण है जिसके परिणामस्वरूप हर साल 4 मिलियन मृत्यु होती हैं ( पूरी दुनिया में होने वाली कुल मृत्यु का 7 % ) । ,"पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों , वयस्कों और 75 वर्ष से अधिक उम्र वाले बुज़ुर्गों में यह अधिकतम है ।" ,विकसित दुनिया की तुलना में विकासशील दुनिया में यह पांच गुना तक अधिक होता है । ,वायरस जनित निमोनिया लगभग 200 मिलियन मामलों के लिये जिम्मेदार है । ,"संयुक्त राज्य अमरीका में 2009 तक , निमोनिया , मृत्यु का 8 वा प्रमुख कारण है ।" ,2008 में निमोनिया लगभग 156 मिलियन बच्चों को हुआ ( विकासशील देशों में 151 मिलियन और विकसित देशों में 5 मिलियन बच्चे ) । ,"इसके परिणामस्वरूप 1.6 मिलियन मृत्यु या पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की कुल मृत्यु की 28 – 34 % मृत्यु हुई , जिसमें से 95 % विकासशील देशों में हुईं ।" ,"इस रोग के सबसे अधिक बोझ वाले देशों में भारत ( 43 मिलियन ) , चीन ( 21 मिलियन ) और पाकिस्तान ( 10 मिलियन ) शामिल हैं ।" ,यह कम आय वाले देशों में मृत्यु का प्रमुख कारण है । ,इनमें से अधिकांश मृत्यु नवजात अवधि में हुईं । sg,विश्व स्वास्थ्य संगठन का आंकलन है कि नवजातों में होने वाली तीन मौतों में से एक निमोनिया के कारण होती है । ,"सैद्धांतिक रूप से इनमें से लगभग आधी मौतों की रोकथाम हो सकती है , क्योंकि ये एक ऐसे बैक्टीरिया के कारण होती हैं जिसका प्रभावी टीका उपलब्ध है ।" ,पूरे मानवीय इतिहास में निमोनिया सबसे आम रोग रहा है । ,हिप्पोक्रेटस ( 460 ई.पू. – 370 ई.पू. ) द्वारा लक्षणों का वर्णन : ,""" पेरिनिमोनिया और फुफ्फुसीय आसक्ति , को निम्न प्रकार से पहचाना जाता है ।" ,यदि तेज़ बुखार हो । ,"यदि दोनो ओर या एक ओर दर्द हो और यदि कफ़ की उपस्थिति के साथ निःश्वसन होता हो और खांसी से निकले कफ़ का रंग सुनहरा या गहरे नीले ग्रे रंग का हो या पतला , मटमैला लाल रंग का हो या सामान्य से भिन्न चरित्र का हो ।" ,"जब निमोनिया का प्रभाव अपने उच्चतम पर होता है , मामला सुधरने योग्य नहीं होता है और यह बुरा तब होता है जब सांस लेना तकलीफदेह हो और मूत्र पतला व बदबूदार हो , गर्दन व सिर से पसीना आता है और ऐसा पसीना आना खराब है और रोग के हिंसक होने के परिणाम स्वरूप घुटन , चक्कर आदि हावी होने लगता है । """ ,"हालांकि , हिप्पोक्रेटस ने निमोनिया को "" प्राचीन लोगों द्वारा नामित "" रोग के रूप में संदर्भित किया था ।" ,उन्होंने फेफड़ों की कैविटी में तरल के जमाव को शल्यक्रिया द्वारा निकालने का वर्णन भी किया था । ,"माइमोनिडस ( 1135 – 1204 ईस्वी ) ने देखा : "" निमोनिया के मूल लक्षण निम्नलिखित हैं : तीव्र बुखार , एक ओर फेफड़े में श्वसन में दर्द , छोटी व तेज़ सांसें , ऊपर नीचे होती नाड़ी और खांसी । """ ,"यह चिकित्सीय वर्णन काफी हद तक आधुनिक पाठ्यपुस्तकों में मिलने वाले वर्णनों के समान है और यह इस बात को बताता है कि चिकित्सीय ज्ञान , किस हद तक मध्यकाल से 19 शताब्दी में आया ।" ,एडविन क्लेब्स वह पहला व्यक्ति था जिसने 1875 में निमोनिया के कारण मरे हुए व्यक्तियों के वायुमार्ग का विश्लेषण किया । ,"दो आम बैक्टीरिया जनित कारणों "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" और "" क्लेब्सिएला निमोनिया "" की पहचान से संबंधित आरंभिक कार्य कार्ल फ्रेडलैन्डर और अल्बर्ट फ्रैन्केल ने क्रमशः 1882 और 1884 में किया था ।" sg,फ्रेडलैन्डर के आरंभिक कार्य ने ग्राम स्टेन को पेश किया जो कि एक मूलभूत प्रयोगशाला परीक्षण था जिसे आज भी बैक्टीरिया को पहचानने और वर्गीकृत करने में उपयोग किया जाता है । ,क्रिस्चिएन ग्राम के 1884 में पेश किये गये पेपर ने दो बैक्टीरिया के बीच भिन्नताओं को पहचानने की प्रक्रिया की व्याख्या की और दिखाया कि निमोनिया एक से अधिक सूक्ष्मजीवों के कारण हो सकता है । ,""" आधुनिक चिकित्सा के पिता "" के नाम से जाने जाने वाले सर विलियम ओस्लर ने निमोनिया द्वारा होने वाली मृत्यु और अक्षमता को मान्यता प्रदान की और इसको 1918 में "" मनुष्यों की मृत्यु का कप्तान "" कहा , क्योंकि इस समय तक इससे होने वाली मौतो की संख्या ने तपेदिक से होने वाली मौतों की संख्या को पीछे छोड़ दिया था ।" ,"इस शब्द को मूलतः जॉन बुनियन द्वारा उपयोग किया गया था जो कि "" खब्बू "" ( तपेदिक ) के संदर्भ में था ।" ,"ऑस्लर ने निमोनिया को "" बुज़ुर्ग आदमी का दोस्त "" कहा था क्योंकि मृत्यु अक्सर झटपट और दर्द रहित होती थी , जबकि मरने के और भी कई धीमे और दर्द रहित तरीके भी थे ।" pl,1900 के आसपास बहुत से विकासों ने निमोनिया से पीड़ित लोगों के लिये परिणामों को बेहतर कर दिया था । sg,"20 शताब्दी में पेनिसलीन तथा अन्य एंटीबायोटिक , आधुनिक शल्यक्रिया तकनीकों और गहन देखभाल के आगमन के साथ , विकसित दुनिया में निमोनिया में मृत्यु दर तेजी से कम हो गयी ।" sg,"1988 में "" हेमोफिलस इन्फ्लयुएंज़ा "" टाइप बी के विरुद्ध नवजातों में टीकाकरण की शुरुआत ने इसके बाद से इन मामलों में नाटकीय कमी कर दी ।" sg,"1977 में वयस्कों और 2000 में बच्चों में "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" के विरुद्ध टीकाकरण ने ऐसी ही कमी को दर्शाया ।" sg,"विकासशील देशों में रोग के उच्च बोझ और विकसित देशों में रोग के प्रति तुलनात्मक रूप से कम जानकारी के कारण , चिंतित नागरिकों और नीति निर्माताओं के लिये रोग के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिये वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय ने नवम्बर की 12 तारीख को विश्व निमोनिया दिवस घोषित किया है ।" ,समुदाय अर्जित निमोनिया की अनुमानित वैश्विक आर्थिक लागत $17 बिलियन आंकी गयी है । ,निमोनिया ,फुफ्फुसशोथ या फुफ्फुस प्रदाह ( निमोनिया ) फेफड़े में सूजन वाली एक परिस्थिति है — जो प्राथमिक रूप से अल्वियोली ( कूपिका ) कहे जाने वाले बेहद सूक्ष्म ( माइक्रोस्कोपिक ) वायु कूपों को प्रभावित करती है । ,"यह मुख्य रूप से विषाणु या जीवाणु और कम आम तौर पर सूक्ष्मजीव , कुछ दवाओं और अन्य परिस्थितियों जैसे स्वप्रतिरक्षित रोगों द्वारा संक्रमण द्वारा होती है ।" sg,"आम लक्षणों में खांसी , बुखार और सांस लेने में कठिनाई शामिल हैं ।" sg,"नैदानिक उपकरणों में , एक्स - रे और बलगम का कल्चर शामिल हैं ।" pl,कुछ प्रकार के निमोनिया की रोकथाम के लिये टीके उपलब्ध हैं । ,"उपचार , अंतर्निहित कारणों पर निर्भर करते हैं ।" sg,प्रकल्पित बैक्टीरिया जनित निमोनिया का उपचार प्रतिजैविक द्वारा किया जाता है । ,यदि निमोनिया गंभीर हो तो प्रभावित व्यक्ति को आम तौर पर अस्पताल में भर्ती किया जाता है । ,"वार्षिक रूप से , निमोनिया लगभग 450 मिलियन लोगों को प्रभावित करता है जो कि विश्व की जनसंख्या का सात प्रतिशत है और इसके कारण लगभग 4 मिलियन मृत्यु होती हैं ।" ,"19 शताब्दी में विलियम ओस्लर द्वारा निमोनिया को "" मौत बांटने वाले पुरुषों का मुखिया "" कहा गया था , लेकिन 20 शताब्दी में एंटीबायोटिक उपचार और टीकों के आने से बचने वाले लोगों की संख्या बेहतर हुई है ।" ,"बावजूद इसके , विकासशील देशों में , बहुत बुज़ुर्गों , बहुत युवा उम्र के लोगों और जटिल रोगियों में निमोनिया अभी मृत्यु का प्रमुख कारण बना हुआ है ।" pl,"संक्रामक निमोनिया से पीड़ित लोगों में अक्सर बलगम वाली खांसी , बुखार के साथ कंपकपी वाली ठंड , सांस में तकलीफ , गहरी सांस लेने पर तीखा व चुभन वाला छाती का दर्द और बढ़ी श्वसन दर के लक्षण होते हैं ।" ,चलते - चलते रुकने व मुड़ने में परेशानी होती है । sg,चेहरे का दृश्य बदल जाता है । ,आंखों का झपकना कम हो जाता है । ,आंखें चौड़ी खुली रहती हैं । ,व्यक्ति मानों सतत घूर रहा हो या टकटकी लगाए हो । ,"चेहरा भावशून्य प्रतीत होता है बातचीत करते समय चेहरे पर खिलने वाले तरह - तरह के भाव व मुद्राएं ( जैसे कि मुस्कुराना , हंसना , क्रोध , दुःख , भय आदि ) प्रकट नहीं होते या कम नजर आते हैं ।" ,"उपरोक्त वर्णित अनेक लक्षणों में से कुछ , प्रायः वृद्धावस्था में बिना पार्किन्‍सोनिज्‍म के भी देखे जा सकते हैं ।" ,"कभी - कभी यह भेद करना मुश्किल हो जाता है कि बूढ़े व्यक्तियों में होने वाले कम्पन , धीमापन , चलने की दिक्कत डगमगापन आदि पार्किन्‍सोनिज्‍म के कारण हैं या सिर्फ उम्र के कारण ।" ,खाना खाने में तकलीफ होती है । ,भोजन निगलना धीमा हो जाता है । ,गले में अटकता है । ,कम्पन के कारण गिलास या कप छलकते हैं । sg,हाथों से कौर टपकता है । sg,मुंह में लार अधिक आती है । ,चबाना धीमा हो जाता है । ,"ठसका लगता है , खांसी आती है ।" ,बाद के वर्षों में जब औषधियों का आरम्भिक अच्छा प्रभाव क्षीणतर होता चला जाता है । ,"मरीज की गतिविधियां सिमटती जाती हैं , घूमना - फिरना बन्द हो जाता है ।" sg,दैनिक नित्य कर्मों में मदद लगती है । ,"संवादहीनता पैदा होती है क्योंकि उच्चारण इतना धीमा , स्फुट अस्पष्ट कि घर वालों को भी ठीक से समझ नहीं आता ।" sg,स्वाभाविक ही मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ता है । ,"सुस्ती , उदासी व चिड़चिड़ापन पैदा होते हैं ।" ,स्मृति में मामूली कमी देखी जा सकती है । ,"नींद में कमी , वजन में कमी , कब्जियत , जल्दी सांस भर आना , पेशाब करने में रुकावट , चक्कर आना , खड़े होने पर अंधेरा आना , सेक्स में कमजोरी ।" ,पार्किंसन रोग ,पार्किंसन रोग ( Parkinson's disease or PD ) केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र का एक रोग है जिसमें रोगी के शरीर के अंग कंपन करते रहते हैं । ,पार्किन्‍सोनिज्‍म का आरम्भ आहिस्ता - आहिस्ता होता है । ,पता भी नहीं पड़ता कि कब लक्षण शुरू हुए । ,अनेक सप्ताहों व महीनों के बाद जब लक्षणों की तीव्रता बढ़ जाती है तब अहसास होता है कि कुछ गड़बड़ है । ,"डॉक्टर जब हिस्‍ट्री ( इतिवृत्त ) कुरेदते हैं तब मरीज़ व घरवाले पीछे मुड़ कर देखते हैं याद करते हैं और स्वीकारते हैं कि हां सचमुच ये कुछ लक्षण , कम तीव्रता के साथ पहले से मौजूद थे ।" ,लेकिन तारीख बताना सम्भव नहीं होता । ,"कभी - कभी किसी विशिष्ट घटना से इन लक्षणों का आरम्भ जोड़ दिया जाता है - उदाहरण के लिये कोई दुर्घटना , चोट , बुखार आदि ।" ,यह संयोगवश होता है । sg,उक्त तात्कालिक घटना के कारण मरीज़ का ध्यान पार्किन्‍सोनिज्‍म के लक्षणों की ओर चला जाता है जो कि धीरे - धीरे पहले से ही अपनी मौजूदगी बना रहे थे । ,बहुत सारे मरीजों में पार्किन्‍सोनिज्‍म रोग की शुरूआत कम्पन से होती है । ,कम्पन अर्थात् धूजनी या धूजन या ट्रेमर या कांपना । ,"हाथ की एक कलाई या अधिक अंगुलियों का , हाथ की कलाई का , बांह का ।" ,पहले कम रहता है । ,यदाकदा होता है । ,रुक रुक कर होता है । ,"शुरुआत में जैज़ उन स्थानों पर धूम्रपान से अत्याधिक जुड़ा हुआ था जहां यह बजाया जाता था , जैसे कि बार , डांस हाल , जैज़ क्लब और यहां तक कि वेश्यालयों में भी ।" pl,"इसके अलावा तम्बाकू में और भी कई विषाक्त यौगिक हैं जिनसे दीर्घ अवधि तक धूम्रपान करने वालों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं जिनमें से कई संवहनी असामान्यताएं जैसे स्टेनोसिस , फेफड़ों का कैंसर , दिल का दौरा , स्ट्रोक , नपुंसकता , धूम्रपान करने वाली माताओं द्वारा जन्मे गये शिशु का कम वजन आदि शामिल हैं ।" ,"बाद वाले को जैज़ समुदाय में "" चाय "" , "" मग्गल "" और "" रीफर "" के नाम से जाना गया और यह 1920 से 1930 के दशक तक इतना प्रभावी था कि इसने उस समय रचे गये गीतों में अपनी जगह बना ली जैसे कि लुईस आर्मस्ट्राँग का "" मग्गल्स "" ( Muggles ) , लैरी एडलर का "" स्मोकिंग रीफर्स "" ( Smoking Reefers ) और डॉन रेडमैन का "" चैंट ऑफ़ द वीड "" ( Chant of The Weed ) ।" sg,"1940 और 50 के दशक में जैज़ संगीतकारों में मारिजुआना की लोकप्रियता बनी रही , जब तक कि इसका स्थान हेरोइन के प्रयोग ने नहीं ले लिया ।" ,"आधुनिक लोकप्रिय संगीत का एक और प्रकार जो गांजे के धूम्रपान के साथ बहुत अधिक जुड़ा है , रेगे नामक संगीत की एक शैली है जो जैमेका में 1950 के अंतिम और 60 के आरंभिक दशक में पनपी ।" ,"माना जाता है कि 19वीं शताब्दी के मध्य में भांग , या गांजे का प्रयोग अप्रवासी भारतीय श्रमिकों द्वारा शुरू किया गया और मुख्य रूप से यह भारतीय श्रमिकों से जुड़ा था जब तक कि इसे 20वीं सदी के मध्य में रस्ताफारी आंदोलन द्वारा विनियोजित नहीं किया गया ।" ,"रस्ताफारी गांजे के धूम्रपान को भगवान या जाह के पास आने का साधन मानते हैं , एक संगठन जिसे रेगे के प्रतीकों जैसे कि बॉब मारले और पीटर तोश ने 1960 और 70 के दशक में अत्याधिक लोकप्रिय बनाया ।" ,"हालांकि , अत्यधिक उत्पादन और जटिल कानूनों की समस्या से परेशान ड्रग डीलरों ने पाउडर को "" क्रैक "" -JOIN कोकीन को एक ठोस धूम्रपान करने योग्य रूप में बदलने का निश्चय किया , जिसे कम मात्रा में ज्यादा लोगों को बेचा जा सकता था ।" sg,"1990 के दशक में पुलिस कार्यवाही के साथ मज़बूत अर्थव्यवस्था से कई संभावित उम्मीदवारों का माल जब्त होने या उन्हें आदत छोड़ने के लिए मजबूर करने के कारण , इस प्रवृत्ति में कमी आई ।" ,"हाल के वर्ष वाष्पित हेरोइन , मेथाम्फेटामाइन तथा फेन्सीस्लाइडीन ( पीसीपी ) ( PCP ) की खपत में वृद्धि को दर्शाते हैं ।" pl,"इनके साथ कम संख्या में दिमाग पर असर करने वाली दवाएं जैसे कि DMT , 5 - Meo -JOIN DMT और सल्विया डिविनोरम शामिल हैं ।" sg,धूम्रपान में प्रयुक्त होने वाला सबसे लोकप्रिय पदार्थ तम्बाकू है । pl,तम्बाकू की विभिन्न प्रजातियाँ मौजूद हैं जिन्हें कई प्रकार के मिश्रण और ब्रांडों की विविधता से बनाया जाता है । ,"तंबाकू अक्सर सुगंधित करके बेचा जाता है , जिसमें अक्सर विभिन्न फलों की खुशबू होती है , कुछ ऐसे रूप में जो पानी के पाइपों जैसे हुक्के के साथ अधिक लोकप्रिय है ।" sg,"धूम्रपान में प्रयुक्त होने वाला दूसरा सबसे आम पदार्थ भांग है , जिसे "" कैनाबिस सतिवा "" ( Cannabis sativa ) के फूलों या पत्तियों से बनाया जाता है ।" ,"इस पदार्थ को दुनिया के अधिकतर देशों द्वारा अवैध माना जाता है और वे देश जिनमें सार्वजनिक खपत बर्दाश्त की जाती है , यह केवल सही तौर पर वैध है ।" sg,"इस के बावजूद , कई देशों में वयस्क जनसंख्या का काफी बड़ा प्रतिशत इसका प्रयोग करने वालों की कोशिश करने वालों में से है जिनमें से एक छोटी संख्या इसका प्रयोग नियमित रूप से करती है ।" ,"चूंकि तम्बाकू अवैध है या ज्यादातर क्षेत्रों में बर्दाश्त किया जाता है , सिगरेटों में इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन नहीं होता है जिसका अर्थ है कि धूम्रपान का सबसे प्रचलित प्रकार हाथ से मोड़ी गई सिगरेट , जिसे अक्सर जॉईंट ( joints ) कहा जाता है , या पाइप है ।" ,पानी के पाइप भी काफी आम हैं और भांग के लिए इस्तेमाल करने पर अक्सर इन्हें बॉन्ग कहा जाता है । ,कुछ अन्य मादक दवाओं का प्रयोग छोटे पैमाने पर होता है । ,इनमें से अधिकतर पदार्थ नियंत्रित हैं और कुछ तम्बाकू या भांग से कहीं अधिक नशीले हैं । ,"इनमें क्रैक कोकीन , हेरोइन , मेथाम्फेटामाइन और पीसीपी ( PCP ) शामिल हैं ।" pl,"इनके साथ कम संख्या में दिमाग पर असर करने वाली दवाएं जैसे कि DMT , 5 - Meo -JOIN DMT और सल्विया डिविनोरम शामिल हैं ।" sg,धूम्रपान के सबसे प्राचीन रूप के प्रदर्शन के लिए भी किसी तरह के उपकरण की आवश्यकता है । ,इसके परिणामस्वरूप दुनिया भर में विभिन्न प्रकार के धूम्रपान उपकरण और सामग्रियां बनी हैं । ,"चाहे तम्बाकू , भांग , अफीम या जड़ी बूटी हो , सभी प्रकारों के मिश्रण को जलाने के लिए आग के एक स्रोत की आवश्यकता होती है ।" sg,"अभी तक सबसे आम सिगरेट है , जो कस कर लपेटी गई कागज़ की ट्यूब से बनी होती है , व जिसका निर्माण औद्योगिक रूप से किया जाता है , या फिर कागज़ को मोड़ कर खुले तम्बाकू से बनाया जाता है , जिसमें एक फ़िल्टर हो सकता है ।" ,अन्य लोकप्रिय धूम्रपान उपकरणों में विभिन्न प्रकार के पाइप और सिगार हैं । sg,"एक कम आम लेकिन तेजी से लोकप्रियता की ओर बढ़ता प्रकार वैपोराईज़र ( vaporizer ) है , जो गर्म हवा से संचालित होता है और जिसमें पदार्थ का दहन नहीं करना पड़ता , अतः फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए कम खतरनाक होता है ।" pl,"वास्तविक धूम्रपान उपकरण के अलावा कई अन्य वस्तुएं धूम्रपान के साथ जुड़ी हुई हैं , सिगरेट केस , सिगार बॉक्स , लाईटर , माचिस , सिगरेट होल्डर , सिगार होल्डर , ऐश ट्रे , पाइप क्लीनर , तम्बाकू कटर , माचिस स्टैंड , पाइप टेम्पर , सिगरेट कॉम्पैनीयन तथा कई अन्य ।" ,इनमें से कई मूल्यवान संग्राहक वस्तुएं बन गई हैं और विशेषकर अलंकृत और प्राचीन वस्तु बेहतरीन नीलामी घरों में उच्च कीमतों पर बिक सकती है । sg,इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट की शुरुआत के साथ 2004 में धूम्रपान का एक कथित अधिक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प प्रदर्शित हुआ । ,"ये बैटरी चालित , सिगरेट जैसे उपकरण , तम्बाकू द्वारा उत्पन्न होने वाले धुएं की नकल के रूप में एयरोसोल का उत्पादन करते हैं , जिससे उपयोगकर्ता को तम्बाकू धूम्रपान में उत्पन्न होने वाले हानिकारक पदार्थों के बिना निकोटिन प्राप्त होता है ।" ,"दावा किया गया है कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट असली सिगरेटों की तुलना में कम हानिकारक है , हालांकि कई देशों की कानूनी स्थिति के अनुसार यह अभी विवादित है ।" ,"शिराओं में मादक पदार्थ को पहुंचाने का सबसे तीव्र और कारगर ढंग किसी पदार्थ के वाष्पित गैस रूप को फेफड़ों द्वारा अन्दर लेना है ( क्योंकि गैसें सीधे फुफ्फुसीय शिरा में मिलती हैं , इसके बाद दिल में तथा यहां से दिमाग तक ) और यह पहली सांस के एक सैकेंड से भी कम समय में उपयोगकर्ता को प्रभावित करती है ।" ,"फेफड़े कई लाख छोटे बल्बों से मिलकर बने होते हैं , जिन्हें अल्वेओली ( alveoli ) कहा जाता है जो कि एक साथ मिलकर 70 मी. तक का क्षेत्र बनाते हैं ( जो कि लगभग एक टेनिस कोर्ट के क्षेत्र के बराबर है ) ।" ,"इसका प्रयोग उपयोगी औषधियां लेने के लिए किया जा सकता है जैसे एयरोसोल , जो कि दवाओं की छोटी बूंदों से मिल कर बने होते हैं , या फिर पत्तियां जला कर उसके द्वारा उत्पन्न गैस द्वारा , जिसमें मस्तिष्क को उत्तेजित करने वाले पदार्थ हैं , या फिर पदार्थ के शुद्ध रूप को ग्रहण करके ।" ,"सभी दवाओं का धूम्रपान नहीं किया जा सकता , उदाहरण के लिए सल्फेट व्युत्पन्न ( डेरिवेटिव ) जो मुख्यतः सांस द्वारा नाक के अन्दर ली जाती है , हालांकि पदार्थ के अति शुद्ध रूप का धूम्रपान किया जा सकता है लेकिन इसके लिए ठीक से दवा लेने के लिए अत्याधिक कौशल की आवश्यकता होती है ।" ,यह विधि भी कुछ हद तक अकुशल है चूंकि सारा धुंआ सांस द्वारा अन्दर नहीं जाएगा । sg,"सांस द्वारा अन्दर लिया गया पदार्थ तंत्रिकाओं के सिरों में रासायनिक प्रतिक्रियाएं करता है , क्योंकि यह एंडोरफिन्स और डोपामाइन जैसे प्राकृतिक उत्पादों जैसा होता है , जो खुशी के एहसास से संबंधित हैं ।" ,"परिणामस्वरूप प्राप्त होने वाले अनुभव को "" हाई "" ( High ) कहते हैं जो कि निकोटिन के कारण हुई हलकी उत्तेजना से लेकर हेरोइन , कोकीन और मेथाम्फेटामाइन के मामले में अत्याधिक उत्तेजना के बीच की स्थिति हो सकती है ।" ,"चाहे पदार्थ जो भी हो , फेफड़ों में धुआं लेने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है ।" sg,"ज्वलनशील पत्तियों की सामग्री जैसे तम्बाकू या भांग के अधूरे दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड उत्पन्न होती है , जो फेफड़ों में रक्त द्वारा ले जाई जाने वाली ऑक्सीजन की मात्रा पर प्रभाव डालती है ।" pl,"इसके अलावा तम्बाकू में और भी कई विषाक्त यौगिक हैं जिनसे दीर्घ अवधि तक धूम्रपान करने वालों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं जिनमें से कई संवहनी असामान्यताएं जैसे स्टेनोसिस , फेफड़ों का कैंसर , दिल का दौरा , स्ट्रोक , नपुंसकता , धूम्रपान करने वाली माताओं द्वारा जन्मे गये शिशु का कम वजन आदि शामिल हैं ।" sg,दीर्घकालीन धूम्रपान करने वालों के चेहरे में एक विशेष परिवर्तन आता है जिसे डॉक्टरों द्वारा स्मोकर्स फेस ( smoker's face ) कहा जाता है । ,ज्यादातर धूम्रपान करने वाले वयस्कता या किशोरावस्था की शुरुआत में धूम्रपान आरम्भ करते हैं । pl,"धूम्रपान में जोखिम लेने और विद्रोह के तत्व हैं , जो अक्सर युवा लोगों को आकर्षित करते हैं ।" sg,उच्च वर्ग के मॉडल और साथियों की उपस्थिति भी धूम्रपान को प्रोत्साहित कर सकती है । ,"चूंकि किशोर वयस्कों की बजाए अपने साथियों से अधिक प्रभावित होते हैं , इसलिए माता पिता , स्कूल और स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा उन्हें सिगरेट से बचाने की कोशिशें अक्सर असफल सिद्ध होती हैं ।" pl,हैंस आइसेंक जैसे मनोवैज्ञानिकों ने विशिष्ट धूम्रपान करने वालों के लिए एक व्यक्तित्व रेखा चित्र का विकास किया है । sg,डेंगू बुखार का निदान माइक्रोबायलोजी संबंधी प्रयोगशाला परीक्षण द्वारा किया जा सकता है । ,कुछ भिन्न परीक्षण भी किये जा सकते हैं । sg,कोशिकाओं के कल्चर ( या नमूनों में ) में एक परीक्षण ( वायरस आइसोलेशन ) डेंगू वायरस को पृथक करता है । ,"एक अन्य परीक्षण ( न्यूक्लिक अम्ल पहचान ) वायरस से न्यूक्लिक अम्लों की पहचान करता है , जिसमें पॉलीमर्स चेन रिएक्शन ( PCR ) कही जाने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है ।" ,एक तीसरा परीक्षण ( एंटीजन पहचान ) वायरस के एंटीजन की पहचान करता है । ,एक अन्य परीक्षण रक्त में उन प्रतिरक्षियों की पहचान करता है जो डेंगू वायरस से शरीर को लड़ने की क्षमता देते हैं । ,"वायरस आइसोलेशन तथा न्यूक्लिक अम्ल पहचान परीक्षण , एंटीजन पहचान से बेहतर काम के होते हैं ।" ,"हालांकि इन परीक्षणों की लागत अधिक होती है , इसलिये ये अधिक स्थानों पर उपलब्ध नहीं हैं ।" sg,जब डेंगू रोग अपने प्रारंभिक चरणों में होता है तो ये सारे परीक्षण नकारात्मक हो सकते हैं ( अर्थात ये नहीं दर्शाते हैं कि व्यक्ति को बीमारी है ) । pl,प्रतिरक्षी परीक्षण के अलावा ये प्रयोगशाला परीक्षण केवल बीमारी के गंभीर ( आरंभिक ) चरण के दौरान डेंगू बुखार के निदान में सहायक हो सकते हैं । ,"हालांकि , प्रतिरक्षी परीक्षण इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि व्यक्ति को डेंगू , संक्रमण की बाद की अवस्था का है ।" ,शरीर प्रतिरक्षियों का निर्माण करता है जो विशिष्ट रूप से 5 से 7 दिनों बाद डेंगू वायरस से लड़ते हैं । ,डेंगू वायरस से लोगों को बचाने के लिये अभी तक किसी वैक्सीन को स्वीकृत नहीं किया गया है । ,संक्रमण को रोकने के लिये विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) ने मच्छरों की जनसंख्या को नियंत्रित करने तथा लोगों को मच्छरों के काटे जाने से बचाने का सुझाव दिया है । ,"WHO ने डेंगू के रोकथाम के लिये एक कार्यक्रम ( "" एकीकृत वेक्टर नियंत्रण "" ) का सुझाव दिया है जिसमें 5 भिन्न भाग शामिल हैं ।" ,मच्छरों को नियंत्रित करने तथा लोगों को इससे काटे जाने से बचाने के लिये WHO कुछ विशिष्ट सुझाव भी देता है । sg,""" एडीज़ आएजेप्टी "" मच्छर को नियंत्रित करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि इसके निवासों से मुक्ति पायी जाय ।" ,लोगों को पानी के खुले पात्रों को खाली रखना चाहिये ( जिससे मच्छर इनमें अंडा न दे सकें ) । ,इन क्षेत्रों में मच्छरों को नियंत्रित करने के लिये कीटनाशकों या जैविक नियंत्रण एजेंटों का भी उपयोग किया जा सकता है । ,वैज्ञानिकों का यह मानना है कि ऑर्गेनोफास्फेट या पाइरेथाइराइड इंसेक्टेसाइड का छिड़काव कोई सहायता नहीं करता है । ,ठहरे हुए पानी को समाप्त करना चाहिये क्योंकि यह मच्छरों को आकर्षित करता है और इसलिये भी कि इस ठहरे हुये पानी में जीवाणुओं के पैदा होने से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं । pl,मच्छरों के काटने से बचने के लिये लोग ऐसे कपड़े पहन सकते हैं जो पूरी तरह से उनकी त्वचा को ढक कर रखें । ,"वे कीटरोधियों ( जैसे कीटरोधी स्प्रे ) का उपयोग कर सकते हैं , जो मच्छरों को दूर रखेंगे ( DEET सबसे अच्छा काम करती है ) ।" ,"लोग , आराम करते समय मसहरी ( मच्छरदानी ) का भी उपयोग कर सकते हैं ।" sg,डेंगू बुखार के लिये कोई विशिष्ट उपचार नहीं है । pl,"लक्षणों के आधार पर , भिन्न लोगों के लिये भिन्न उपचार हैं ।" ,"कुछ लोग घरों पर मात्र तरल पीकर बेहतर हो सकते हैं , जिसके साथ उनके स्वास्थ्य सेवा पेशेवर नजदीकी रूप से उनके स्वास्थ्य की निगरानी करके यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि वे बेहतर हो रहे हों ।" sg,कुछ अन्य लोगों को अंतःशिरा द्रव्य या रक्त आधान की आवश्यकता हो सकती है । ,"यदि किसी व्यक्ति की पहले से जटिल स्वास्थ्य स्थिति की समस्या है तो , स्वास्थ्य सेवा पेशेवर उस व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती करने का निर्णय ले सकते हैं ।" ,जब किसी व्यक्ति को अंतःशिरा द्रव्य की जरूरत होती है तो आम तौर पर उनको इसकी जरूरत एक या दो दिन के लिये हो सकती है । ,स्वास्थ्य सेवा पेशेवर तरल की मात्रा को बढ़ाएगा जिससे कि व्यक्ति मूत्र की एक तय मात्रा ( 0.5 – 1 मिली / किग्रा / घंटा ) निर्गत कर सके । ,तरल की मात्रा इसलिये भी बढ़ायी जा सकती है जिससे कि व्यक्ति की हेमाटोक्रिट ( रक्त में आयरन की मात्रा ) तथा महत्वपूर्ण चिह्न सामान्य स्थिति पर वापस आ सके । ,"रक्तस्राव के जोखिम के कारण स्वास्थ्य सेवा पेशेवर , नासोगैस्ट्रिक इन्ट्यूबेशन ( नाक के रास्ते से किसी व्यक्ति के पेट में नलिका डालना ) , अंतःपेशीय इंजेक्शन ( दवा को मांसपेशियों में सीधे देना ) तथा धमनियों में पंचर ( किसी धमनी में सुई लगाना ) करना जैसी आक्रामक चिकित्सा प्रक्रियाओं से बचते हैं ।" ,बुखार तथा दर्द के लिये एसेटामिनोफेन ( टाइलेनॉल ) दी जा सकती है । ,"सूजन - रोधी दवा का एक प्रकार जिसे NSAID ( जैसे आइब्यूप्रोफेन या ऐस्पिरिन ) कहते हैं , प्रयोग नहीं की जानी चाहिये क्योंकि रक्तस्राव होने की काफी संभावना होती है ।" ,यदि व्यक्ति के महत्वपूर्ण चिह्न बदलें या सामान्य न हो और यदि उनके रक्त में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या कम होती जा रही हो तो रक्त आधान को जल्दी शुरू किया जाना चाहिये । sg,जब रक्त आधान की आवश्यकता हो तो व्यक्ति को संपूर्ण रक्त ( रक्त जिसको इसके विभिन्न भागों में विभक्त नहीं किया गया हो ) या पैक की गयी लाल रक्त कणिकाओं को दिया जाना चाहिये । ,"प्लेटलेट्स ( संपूर्ण रक्त से निकाली गयी ) तथा ताज़ा फ्रीज़ किया प्लाज़्मा , आम तौर पर संस्तुत नहीं किया जाता है ।" ,जब व्यक्ति डेंगू के सुधार वाले चरण में होता है तो आम तौर पर उसे और अंतःशिरा द्रव्य नहीं दिये जाते हैं जिससे कि उसके शरीर में तरल की मात्रा अधिक न हो । ,यदि द्रव्य की अधिकता हो जाय लेकिन उस व्यक्ति के महत्वपूर्ण चिह्न स्थिर ( अपरिवर्तित ) हों तो सिर्फ और द्रव्य दिये जाने को रोकना ही पर्याप्त है । ,"यदि व्यक्ति रोग की जटिल अवस्था में न हो तो , उसे फ्यूरोसेमाइड ( लैसिक्स ) जैसे लूप मूत्रवर्धक दिये जा सकते हैं ।" ,ये उस व्यक्ति के रक्त परिसंचरण से अतिरिक्त द्रव्य को बाहर करने में सहायक होंगे । ,डेंगू से पीड़ित अधिकतर लोग ठीक हो जाते हैं और उनको बाद में किसी तरह की कोई समस्या नहीं होती है । ,डेंगू से संक्रमित लोगों में 1 से 5 % ( प्रत्येक 100 में से 1 से 5 ) की उपचार के अभाव में मृत्यु हो जाती है । ,अच्छे उपचार के बावजूद 1 % से कम लोगों की मृत्यु हो जाती है । ,"हालांकि , गंभीर डेंगू से पीड़ित लोगों में से 26 % ( प्रत्येक 100 में से 26 ) की मृत्यु हो जाती है ।" ,डेंगू 110 से अधिक देशों में आम है । pl,"प्रत्येक वर्ष , पूरी दुनिया के 50 से 100 मिलियन लोग इससे प्रभावित होते हैं ।" ,"प्रत्येक वर्ष , पूरी दुनिया के इसके चलते आधे मिलियन लोग अस्पताल में भर्ती होते हैं तथा लगभग 12,500 से 25,000 लोगों की मृत्यु हो जाती है ।" ,"डेंगू , संधिपादों ( आर्थोपोड्स ) द्वारा फैलने वाला सबसे आम वायरल रोग है ।" ,खसरा ,"खसरा श्वसन प्रणाली में वायरस , विशेष रूप से "" मोर्बिली वायरस "" के जीन्स पैरामिक्सो वायरस के संक्रमण से होता है ।" ,"मोर्बिली वायरस भी अन्य पैरामिक्सो वायरसों की तरह ही एकल असहाय , नकारात्मक भावना वाले आरएनए वायरसों द्वारा घिरे होते हैं ।" ,"इसके लक्षणों में बुखार , खांसी , बहती हुई नाक , लाल आंखें और एक सामान्यीकृत मेकुलोपापुलर एरीथेमाटस चकते भी शामिल हैं ।" ,"खसरा ( कभी - कभी यह अंग्रेज़ी नाम मीज़ल्स से भी जाना जाता है ) श्वसन के माध्यम से फैलता है ( संक्रमित व्यक्ति के मुंह और नाक से बहते द्रव के सीधे या वायुविलय के माध्यम से संपर्क में आने से ) और बहुत संक्रामक है तथा 90 % लोग जिनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता नहीं है और जो संक्रमित व्यक्ति के साथ एक ही घर में रहते हैं , वे इसके शिकार हो सकते हैं ।" ,"यह संक्रमण औसतन 14 दिनों ( 6 - 19 दिनों तक ) तक प्रभावी रहता है और 2 - 4 दिन पहले से दाने निकलने की शुरुआत हो जाती है , अगले 2 - 5 दिनों तक संक्रमित रहता है ( अर्थात् कुल मिलाकर 4 - 9 दिनों तक संक्रमण रहता है ) ।" ,"अंग्रेजी बोलने वाले देशों में खसरा का एक वैकल्पिक नाम "" रुबेओला "" है , जिसे अक्सर "" रुबेला "" ( जर्मन खसरा ) के साथ जोड़ा जाता है ; हालांकि दोनों रोगों में कोई संबंध नहीं हैं ।" ,"खसरा के खास लक्षणों में चार दिन का बुखार , तीनों "" सी "" - कफ ( खांसी ) , कोरिज़ा ( बहती हुई नाक ) और नेत्रश्लेष्मलाशोथ ( लाल आंखें ) शामिल हैं ।" ,बुखार 40 °C ( 104 °F ) तक पहुंच सकता है । ,"खसरा के समय मुंह के अंदर दिखाई देने वाले "" कॉपलिक धब्बे "" रोगनिदानात्मक हैं , लेकिन अक्सर ये दिखाई नहीं देते हैं , यहां तक कि खसरा के असली मामलों में भी , क्योंकि वे क्षणिक होते हैं और उत्पन्न होने के एक दिन के भीतर ही गायब हो जाते हैं ।" ,"खसरा के दाने , खास तौर पर व्यापक मेकुलोपापुलर , एरीथेमेटस दानों के रूप में वर्णित किये जाते हैं , जो बुखार होने के कई दिनों के बाद शुरू होते हैं ।" ,"यह सिर से शुरू होता है और बाद में पूरे शरीर में फैल जाता है , इससे अक्सर खुजली होती है ।" ,"इस दाने को "" दाग़ "" कहा जाता है , जो गायब होने से पहले , लाल रंग से बदलकर गहरे भूरे रंग का हो जाता है ।" ,"खसरा की जटिलताएं अपेक्षाकृत साधारण ही हैं , जिसमें हल्के और कम गंभीर दस्त से लेकर , निमोनिया और मस्तिष्ककोप , ( अर्धजीर्ण कठिन संपूर्ण मस्तिष्‍क शोथ ) , कनीनिका व्रणोत्पत्ति और फिर उसकी वजह से कनीनिका में घाव के निशान रह जाने के खतरे हैं ।" pl,आमतौर पर जटिलताएं वयस्कों में ज्यादा होती हैं जो वायरस के शिकार हो जाते हैं । sg,विकसित देशों में स्वस्थ लोगों में खसरा की वजह से मौत की दर प्रति हज़ार में तीन मौतें या 0.3 % है । sg,अविकसित देशों में कुपोषण और बुरी स्वास्थ्य सेवा की अधिकता की वजह से मृत्यु दर 28 % की ऊंचाई तक पहुंच गयी है । sg,"प्रतिरक्षा में अक्षम मरीज़ों में ( "" उदाहरण "" के रूप में एड्स पीड़ित लोगों में ) मृत्यु दर लगभग 30 % है ।" pl,खसरा के रोगियों को सांस लेने की सुविधाओं के साथ रखा जाना चाहिए । ,"केवल मनुष्य ही खसरा के ज्ञात पोषक हैं , हालांकि यह वायरस गैर मानव पशु प्रजातियों को भी संक्रमित कर सकता है ।" ,"खसरा के रोग का निदान करने के लिए कम से कम तीन दिन के बुखार के साथ ही तीन "" सी ( खांसी , सर्दी - जुकाम , नेत्रश्लेष्मलाशोथ ) "" ( कफ , कोरिज़ा , कंजंक्टीवाइटिस ) में से एक का होना अति आवश्यक है ।" ,""" कोप्लिक्स के दाग के निरीक्षण से भी खसरा का निदान हो सकता है । """ ,"वैकल्पिक रूप से , खसरा का प्रयोगशाला निदान श्वसन के नमूनों से खसरा के सकारात्मक आईजीएम प्रतिपिण्डों या खसरा के वायरस आरएनए के अलगाव की पुष्टि होने से किया जा सकता है ।" ,"बच्चों में जहां शिराछेदन अनुपयुक्त होता है , वहां विशिष्ट आइजीए जांच के लिए लारमय खसरा की लार को इकट्ठा किया जा सकता है ।" ,खसरा के अन्य रोगियों के साथ सकारात्मक संपर्क में आना महामारी विज्ञान में मजबूत प्रमाण जोड़ सकते हैं । sg,"संक्रमित व्यक्ति के साथ सेक्स के माध्यम से वीर्य , लार या बलगम सहित , किसी भी तरह का कोई भी संपर्क संक्रमण पैदा कर सकता है ।" ,"विकसित देशों में अधिकतर बच्चों को 18 महीने की आयु तक साधारण तौर पर त्रि - स्तरीय एमएमआर वैक्सीन ( खसरा , कण्ठमाला और रुबेओला ) के भाग के रूप में खसरा के खिलाफ प्रतिरक्षित कर दिया जाता है ।" ,इससे पहले आमतौर पर 18 महीने से छोटे बच्चों को यह टीका नहीं दिया जाता है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान मां के शरीर से इनके अंदर खसरा विरोधी प्रतिरक्षक - ग्लॉब्युलिन ( प्राकृतिक प्रतिरक्षी ) संचारित हो जाते हैं । ,रोगक्षमता की दरों को बढ़ाने के लिए आमतौर पर चार और पांच साल के बच्चों को दूसरी खुराक दी जाती है । ,खसरा को अपेक्षाकृत असामान्य बनाने के लिए ही टीकाकरण की दरों को काफी बढ़ा दिया गया था । ,"यहां तक कि कॉलेज के छात्रावास या इसी तरह के समायोजन में अक्सर स्थानीय टीकाकरण कार्यक्रम में ऐसा एक मामला उजागर होता है , यदि ऐसे लोगों में से किसी एक की पहले से प्रतिरक्षा नहीं हुई हो ।" ,"विकासशील देशों में जहां खसरा उच्च स्थानिक है , वहां डब्ल्यूएचओ ने छह महीने और नौ महीने की उम्र में टीके की दो खुराक देने का सुझाव दिया है ।" ,बच्चा एचआईवी संक्रमित हो या नहीं उसे टीका दिया जाना चाहिए । ,"एचआईवी संक्रमित शिशुओं में टीका कम प्रभावी है , लेकिन प्रतिकूल प्रतिक्रिया के जोखिम कम हैं ।" ,टीका नहीं लिये होने पर आबादी को रोग का खतरा रहता है । ,2000 के प्रारंभ में उत्तरी नाइज़ीरिया में धार्मिक और राजनीतिक आपत्तियों के कारण टीकाकरण की दरों में गिरावट आयी और तेजी से मामलों में इजाफा हुआ और सैकड़ों बच्चों की मौत हो गयी । ,1998 में संयुक्त राज्य में एमएमआर टीका विवाद में ,"एमएमआर के संयुक्त टीके ( बच्चों को मम्प्स , मीज़ल्स और रुबेओला का टीकाकरण दिया जा रहा था ) और स्वलीनता ( ऑटिज़्म ) में संभावित कड़ी होने के बाद भी "" खसरा पार्टी "" में इज़ाफा हुआ ।" sg,जहां माता - पिता ने अपने बच्चों को जानबूझकर इंजेक्शन न दिलाकर मीज़ल्स होने दिया । ,इस उम्मीद पर कि ऐसा करने से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जायेगी । ,"इस अभ्यास से बच्चों में कई जानलेवा बीमारियां पैदा हो गयीं , इसी वजह से सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने ऐसा करने से रोका ।" ,वैज्ञानिक सबूत इस परिकल्पना का समर्थन बिल्कुल नहीं करते हैं कि स्वलीनता ( ऑटिज़्म ) में एमएमआर की कोई भूमिका है । ,"2009 में , "" संडे टाइम्स "" की रिपोर्ट में कहा गया कि वेकफील्ड ने 1998 में अपने अखबारों में रोगियों की संख्या में हेरफेर किया और गलत परिणाम दिखाते हुए स्वलीनता के साथ संबंध दर्शाया था ।" ,""" द लान्सेट "" ने 2 फ़रवरी 2010 को 1998 के अखबार को झुठला दिया ।" ,"जनवरी 2010 में , शिष्ट बच्चों के एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि खसरा , कण्ठमाला और रूबेला जैसे रोग के लिए टीकाकरण ऑटिस्टिक ( स्वलीनता ) के विकार को बढ़ावा देने का जोखिम कारक नहीं था , बल्कि जिन मरीजों ने टीका लगवा लिया था उन मरीजों में ऑटिस्टिक के विकार पैदा होने का खतरा थोड़ा कम था , हालांकि इसके पीछे के तंत्र की वास्तविक कार्रवाई अज्ञात है और यह परिणाम संयोग हो सकता है ।" ,ब्रिटेन में ऑटिज़्म से संबंधित एमएमआर अध्ययन की वजह से टीकाकरण के प्रयोग में तेजी से कमी आयी और फिर से खसरा के मामलों की वापसी हुई । ,"2007 में वेल्स और इंग्लैंड में खसरा के 971 मामले सामने आये , जो अब तक के खसरा के मामलों में सबसे ज्यादा वृद्धि दर्शाता है , जबकि 1995 में खसरा के रिकार्ड रखने की शुरूआत की गयी थी ।" ,2005 में इंडियाना में खसरा का प्रकोप उन बच्चों पर पड़ा जिनके मां - बाप ने टीकाकरण से इंकार कर दिया था । sg,मीज़ल्स इनिशियेटिव के सदस्यों द्वारा जारी किये गये एक संयुक्त बयान में खसरा के खिलाफ लड़ाई का एक और फायदा सामने आया । ,खसरा टीकाकरण अभियानों ने अन्य कारणों से हो रही बच्चों की मौतों में कमी करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है । ,"वे अन्य जीवन रक्षक उपायों - जैसे कि मलेरिया से बचने के लिए मच्छरदानी , कीड़े मारने वाली दवा और विटामिन ए जैसी परिपूरक दवाओं का वितरण करने वाला जरिया बन गये हैं ।" ,खसरा टीकाकरण को अन्य स्वास्थ्य हस्तक्षेपों से मिलाना मिलेनियम डेवलप्मेंट गोल संख्या 4 ( सहस्राब्दि विकास लक्ष्य ) की उपलब्धि में एक महत्वपूर्ण योगदान है । ,1990 से 2015 तक बच्चों की मौत में दो तिहाई कटौती करना । ,बाद में अधिक देर तक रहने लगता है व अन्य अंगों को भी प्रभावित करता है । ,"प्रायः एक ही ओर ( दायें या बायें ) रहता है , परन्तु अनेक मरीजों में , बाद में दोनों ओर होने लगता है ।" sg,"आराम की अवस्था में जब हाथ टेबल पर या घुटने पर , जमीन या कुर्सी पर टिका हुआ हो तब यह कम्पन दिखाई पड़ता है ।" ,"बारिक सधे हुए काम करने में दिक्कत आने लगती है , जैसे कि लिखना , बटन लगाना , दाढ़ी बनाना , मूंछ के बाल काटना , सुई में धागा पिरोना ।" sg,"कुछ समय बाद में , उसी ओर का पांव प्रभावित होता है ।" ,"कम्पन या उससे अधिक महत्वपूर्ण , भारीपन या धीमापन के कारण चलते समय वह पैर घिसटता है , धीरे उठता है , देर से उठता है , कम उठता है ।" ,"धीमापन , समस्त गतिविधियों में व्याप्त हो जाता है ।" ,चाल धीमी / काम धीमा । ,"शरीर की मांसपेशियों की ताकत कम नहीं होती है , लकवा नहीं होता ।" ,परन्तु सुघड़ता व फूर्ति से काम करने की क्षमता कम होती जाती है । sg,हाथ पैरों में जकड़न होती है । ,मरीज को भारीपन का अहसास हो सकता है । ,परन्तु जकड़न की पहचान चिकित्सक बेहतर कर पाते हैं - जब से मरीज के हाथ पैरों को मोड कर व सीधा करके देखते हैं बहुत प्रतिरोध मिलता है । ,मरीज जानबूझ कर नहीं कर रहा होता । sg,जकड़न वाला प्रतिरोध अपने आप बना रहता है । sg,खड़े होते समय व चलते समय मरीज सीधा तन कर नहीं रहता । ,थोड़ा सा आगे की ओर झुक जाता है । ,घुटने व कुहनी भी थोडे मुडे रहते हैं । ,कदम छोटे होते हैं । ,पांव जमीन में घिसटते हुए आवाज करते हैं । ,कदम कम उठते हैं गिरने की प्रवृत्ति बन जाती है । ,ढलान वाली जगह पर छोटे कदम जल्दी - जल्दी उठते हैं व कभी - कभी रोकते नहीं बनता । ,"चलते समय भुजाएं स्थिर रहती हैं , आगे पीछे झूलती नहीं ।" ,"बैठे से उठने में देर लगती है , दिक्कत होती है ।" ,"पाइप द्वारा धूम्रपान जो अभी तक धूम्रपान के ताज़ा रूपों में से एक है , को अक्सर गंभीर चिंतन , बुढ़ापे से जोड़ कर देखा जाता है और इसे अक्सर विचित्र और पुरातन माना जाता है ।" ,"सिगरेट धूम्रपान , जो 19वीं सदी के अंत तक बड़े पैमाने पर नहीं शुरू हुआ था , दुनिया में आधुनिकता और औद्योगिक तेज़ी से अधिक जुड़ा है ।" ,"सिगार पहले तथा अभी भी पुरुषत्व , शक्ति और पूंजीवादी छवि के साथ जुड़े माने जाते रहे हैं ।" ,लम्बे समय से सार्वजनिक रूप से धूम्रपान पुरुषों के लिए आरक्षित रहा है और जब कुछ महिलाओं द्वारा किया जाता है तब इसे संकीर्णता के साथ जोड़ा जाता है । ,जापान में इडो अवधि के दौरान वेश्या और उनके ग्राहक अक्सर भेष बदल कर एक दूसरे को सिगरेट पेश करने के बहाने मिलते थे तथा 19वीं सदी के यूरोप के लिए भी यही बात सच थी । pl,धूम्रपान के शुरूआती चित्रण 9वीं शताब्दी के प्राचीन मायन ( Mayan ) मिट्टी के बर्तनों पर पाए जा सकते हैं । ,कला मुख्य रूप से धार्मिक प्रकृति की थी और इसमें देवताओं या शासकों को सिगरेट के शुरूआती रूपों का धूम्रपान करते हुए दर्शाया गया था । ,अमेरिका के बाहर धूम्रपान की शुरुआत के तुरंत बाद इन्हें यूरोप तथा एशिया के चित्रों में देखा जाने लगा । pl,डच गोल्डन युग के चित्रकार लोगों के चित्र बनाने वाले उन पहले चित्रकारों में से एक थे जो लोगों को धूम्रपान तथा पाइप और तम्बाकू के साथ चित्रित करते थे । ,"17वीं सदी के दक्षिणी यूरोपीय चित्रकारों के लिए , ग्रीक और रोमन प्राचीन काल से पौराणिक कथाओं से प्रेरित हो कर रूपांकनों में सिगरेट को शामिल करना अधिक आधुनिक था ।" ,शुरुआत में धूम्रपान को नीचता माना गया था और इसे किसानों के साथ जोड़ा जाता था । ,कई प्रारंभिक चित्र मद्यपान गृहों या वेश्यालयों के दृश्यों के थे । pl,"बाद में , जब डच गणराज्य ने काफी शक्ति और धन प्राप्त कर लिया तो धूम्रपान करने वाले संपन्न और शौक़ीन सज्जनों के सुन्दर चित्र बने जिसमें वे पाइप उठाते हुए प्रदर्शित किये जाते थे ।" ,"धूम्रपान आनंद , क्षणस्थायता और सांसारिक जीवन की संक्षिप्तता का प्रतिनिधित्व करता है , क्योंकि ये सब धुएं में उड़ जाते हैं ।" ,धूम्रपान सूंघने तथा इसके स्वाद की भावना के प्रदर्शन से भी जुड़ा है । ,18वीं सदी की चित्रकला में धूम्रपान और अधिक विरल हो गया चूंकि सुरुचिपूर्ण रूप से सूंघना और लोकप्रिय बन गया । ,पाइप द्वारा धूम्रपान एक बार फिर निचले दर्जे के साधारण और देशी लोगों के चित्रों में परिवर्तित हो गया तथा कटे हुए तम्बाकू को सूंघने के बाद सफाई से छींकना एक दुर्लभ कला थी । ,जब धूम्रपान आया तो यह अक्सर पूर्व से प्रभावित विदेशी चित्रों से प्रभावित था । ,औपनिवेशिक -JOIN सिद्धांत के कई समर्थकों का विवादास्पद रूप से मानना है कि यह चित्रण यूरोप का अपने उपनिवेशों पर श्रेष्ठता का प्रभाव तथा नारीत्व पर पुरुष प्रभुत्व जताने का ढंग था । ,"वे 19वीं सदी के विदेशी और "" दूसरे "" विषयों में विश्वास रखते थे , जो कि आत्मज्ञान के दौरान एथनोलॉजी की लोकप्रियता में वृद्धि के साथ प्रसिद्ध हुए थे ।" sg,19वीं सदी में धूम्रपान साधारण आनंद के एक प्रतीक के रूप में आम था । pl,"पाइप का धूम्रपान करता हुआ "" कुलीन दैत्य "" , प्राचीन रोमन खंडहरों में गंभीर चिंतन करते हुए , पाइप का कश लगाते हुए चित्र कलाकारों के दृश्यों में से एक बन गए ।" ,नव सशक्त मध्यम वर्ग ने भी स्मोकिंग सैलून तथा पुस्तकालयों में हानिरहित आनंद का एक नया आयाम ढूंढ लिया । ,"सिगरेट धूम्रपान या सिगार बोहेमियन ( bohemian ) से भी जुड़ गया , कोई ऐसा जिसने रूढ़िवादी मध्य वर्ग को त्यागा तथा रूढ़िवाद के प्रति अपमान प्रदर्शित किया ।" ,लेकिन यह ऐसी खुशी थी जो केवल पुरुषों की दुनिया तक ही सीमित थी । ,धूम्रपान करने वाली महिला को वेश्यावृति के साथ जोड़ कर देखा जाता था और यह ऐसी क्रिया नहीं मानी जाती थी जिसमें सही महिलाएं खुद को शामिल करें । ,ऐसा सदी के अंत तक नहीं हुआ कि धूम्रपान करने वाली महिलाएं चित्रों और फोटो में ठाठ से और आकर्षक रूप से दिखाई दें । ,"विन्सेन्ट वैन गॉग जैसे प्रभाववादी , जो खुद पाइप धूम्रपान करते थे , उदासी और "" fin -JOIN du-siècle "" भाग्यवाद से प्रेरित हो कर धूम्रपान से जुड़ गए ।" ,"जबकि सिगरेट , पाइप और सिगार के प्रतीकों को क्रमशः 19वीं सदी तक एक ही समझा जाता था , 20वीं सदी तक के कलाकारों के लिए इसका पूरी तरह से उपयोग शुरू नहीं हुआ था ।" ,"एक पाइप सावधानी और शान्ति का प्रतीक था , सिगरेट आधुनिकता , ताकत और यौवन का प्रतीक था , किन्तु यह बेचैनी का भी प्रतीक था ; सिगार अधिकार , धन और सत्ता का प्रतीक था ।" sg,"द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के दशकों के दौरान , जब धूम्रपान अपने चरम पर था किन्तु अभी इसका धूम्रपान विरोधी आन्दोलनों से पाला नहीं पड़ा था , लापरवाही से होठों के बीच रखी एक सिगरेट युवा विद्रोह को दर्शाती थी , जो मार्लोन ब्रांडो तथा जेम्स डीन या मार्लबोरो व्यक्ति जैसे विज्ञापन के आधार की प्रतीक थी ।" pl,धूम्रपान के नकारात्मक पहलू 1970 के दशक तक प्रकट होने लगे थे । ,"अस्वास्थ्यकर निचले वर्ग , जो सिगरेट का धुंआ छोड़ते थे , विशेषकर धूम्रपान विरोधी अभियानों से प्रेरित या उनके द्वारा लगाये गए चित्रों से प्रेरणा तथा उत्साह की कमी महसूस करते थे ।" sg,"मूक फिल्मों के युग से ही , धूम्रपान फिल्म प्रतीकों का एक मुख्य हिस्सा रहा है ।" ,"रोमांचक फिल्म "" नोयर "" जैसी फिल्मों में , सिगरेट का धुआँ अक्सर चरित्र को दर्शाता है तथा यह अक्सर रहस्य का आवरण या शून्यवाद दर्शाने के लिए भी प्रयुक्त होता है ।" sg,"इनमें से एक अग्रणी प्रतीक फ्रिट्ज़ लैंग की वेइमार एरा "" डॉ माब्यूस , देर स्पाइलर "" , ( Weimar era Dr Mabuse , der Spieler ) 1922 ( "" डॉ माब्यूस , द गैम्बलर "" ) में देखा जा सकता है , जब लोग जुआ खेलने के दौरान पत्ते खेलने के साथ धूम्रपान करते हुए जुआरी को देख कर चकित हो जाते हैं ।" ,"शुरुआत में फिल्म में धूम्रपान करने वाली महिलाओं को भी उत्तेज़कता तथा मोहक कामुकता से जोड़ कर देखा जाता था , जिनमें से सबसे विशेष जर्मन फिल्म स्टार मार्लीन डाईट्रिच थीं ।" ,"इसी तरह , हम्फ्रे बोगार्ट और ऑड्री हेपबर्न जैसे अभिनेताओं को उनकी धूम्रपान वाली छवि के साथ बारीकी से चित्रित किया गया है और उनके कुछ सबसे प्रसिद्ध चित्रों तथा भूमिकाओं में सिगरेट के धुएं की एक घनी धुंध दिखाई देती है ।" ,"हेपबर्न ने एक सिगरेट धारक के रूप में , विशेषकर ब्रेकफास्ट एट टिफ़नी'स ( Breakfast at Tiffany's ) नामक फिल्म में , अक्सर ग्लैमर बढ़ाया |" ,"धूम्रपान सेंसरशिप को खत्म करने के लिए भी प्रयोग में लाया जा सकता था , क्योंकि दो सिगरेटों का एक ऐश ट्रे में जलना अक्सर यौन गतिविधि को ' दर्शाता ' था ।" ,"द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से , स्क्रीन पर धूम्रपान के दृश्य धीरे -JOIN धीरे कम हो गए , चूंकि धूम्रपान के स्पष्ट स्वास्थ्य खतरे अब व्यापक हो गए थे ।" ,"धूम्रपान विरोधी अभियान को अधिक से अधिक सम्मान और प्रभाव मिलने के कारण , स्क्रीन पर धूम्रपान को नहीं दिखने के जागरुक प्रयास किये जा रहे हैं ताकि धूम्रपान को प्रोत्साहन न मिले , विशेषकर पारिवारिक फिल्मों में या फिर इसे सकारात्मक रूप से दिखाया जाता है ।" pl,आज के दौर में स्क्रीन पर धूम्रपान करने वाले चरित्र अक्सर असामाजिक या आपराधिक होते हैं । ,"सिर्फ कल्पना के अन्य प्रकार के रूप में , धूम्रपान का साहित्य में महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है और धूम्रपान करने वाले चरित्रों को अक्सर महान व्यक्तित्व , या सनकी , या विशेष रूप से सबसे प्रमुख व्यक्ति जैसे शर्लक होम्स के रूप में दिखाया जाता था ।" sg,"छोटी कहानियों और उपन्यासों का एक हिस्सा बनने के अलावा , धूम्रपान साहित्य अंतहीन प्रशंसाओं तक फैला हुआ है , जिसमें इसके गुणों तथा एक समर्पित धूम्रपान करने वाले के रूप में लेखक की पहचान की पुष्टि की जाती है ।" ,"विशेष रूप से 19वीं शताब्दी के अंत और शुरुआती 20वीं सदी में , धूमधाम से "" टोबेको : इट्स हिस्टरी एंड एसोसिएशंज़ "" ( Tobacco : Its History and associations ) ( 1876 ) , "" सिगरेट्स इन फैक्ट एंड फैंसी "" ( Cigarettes in Fact and Fancy ) ( 1906 ) और "" पाइप एंड पाउच : द स्मोकर्स ओन बुक ऑफ़ पोइट्री "" ( Pipe and Pouch : The Smokers Own Book of Poetry ) ( 1905 ) जैसी किताबें अमेरिका और ब्रिटेन में लिखी गई थीं ।" ,"शीर्षकों को पुरुषों द्वारा अन्य पुरुषों के लिए लिखा गया था और इसमें सामान्य गपशप व धूम्रपान के प्रति प्रेम के काव्य चिंतन और इससे संबंधित सभी चीज़ें शामिल हैं , तथा साथ ही परिपक्व अविवाहित जीवन की निरंतर सराहना की गई है ।" ,""" द फ्रेगरेन्ट वीड : सम ऑफ़ द गुड थिंग्स विच हैव बीन सेड ओर संग अबाउट टोबेको "" , ( The Fragrant Weed : Some of the Good Things Which Have been Said or Sung about Tobacco ) 1907 में प्रकाशित हुई , इसके साथ और बहुत सी पुस्तकों के अलावा , टॉम हाल द्वारा लिखी गई "" ए बैचलर्स व्यू "" ( A Bachelor's Views ) नामक कविता की निम्न पंक्तियां बाकी सभी पुस्तकों से कुछ विशिष्ट हैं ।" ,"ये सभी कार्य एक युग में प्रकाशित किये गए थे जिसके बाद , सिगरेट तम्बाकू की खपत का प्रमुख साधन बन गयी तथा पाइप , सिगार और तम्बाकू चबाना अभी भी सामान्य बात है ।" ,ज्यादातर पुस्तकें उपन्यास पैकेजिंग के रूप में प्रकाशित हुईं जो पढ़े लिखे सज्जनों को आकर्षित करती थीं । ,""" पाइप एंड पाउच "" ( Pipe and Pouch ) तम्बाकू की थैली से मिलते जुलते चमड़े के बैग में आई तथा "" सिगरेट्स इन फैक्ट एंड फैंसी "" ( Cigarettes in Fact and Fancy ) ( 1901 ) पुस्तक के कवर पर चमड़ा मढ़ा हुआ था जो एक नकली सिगारनुमा डिब्बे में पैक की गई थी ।" ,"1920 के दशक के अंत में , साहित्य के इस प्रकार के प्रकाशन बड़े पैमाने पर घटते चले गए और बाद में केवल 20वीं शताब्दी में अनियमित अवधियों में पुनर्जीवित किये जा सके ।" ,"शुरूआती आधुनिक समय के संगीत में तम्बाकू के कुछ उदहारण हैं , हालांकि वे टुकड़ों में खास मौकों पर प्रदर्शित किये गये हैं जैसे जोहान्न सेबेस्टियन बाक का "" एडीफाइंग थोट्स ऑफ़ ए टोबैको -JOIN स्मोकर "" ( Edifying Thoughts of a Tobacco -JOIN Smoker ) ।" ,"हालांकि , शुरुआती 20वीं सदी और उसके बाद से धूम्रपान लोकप्रिय संगीत के साथ जुड़ा रहा है ।" sg,"बुज़ुर्गों में , मतिभ्रम सबसे प्रमुख चिह्न हो सकता है ।" ,"पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में बुखार , खांसी , तेज सांस लेने में कठिनाई आम चिह्न हैं ।" ,बुखार बहुत विशिष्ट लक्षण नहीं है क्योंकि यह सामान्य बीमारियों में भी होता है क्योंकि कई गंभीर रोगों से या कुपोषण से पीड़ित लोगों में नहीं भी हो सकता है । ,इसके अतिरिक्त 2 माह से कम उम्र के बच्चों में खांसी अक्सर नहीं होती है । ,"अधिक गंभीर चिह्नों और लक्षणों में त्वचा की नीली रंगत , प्यास में कमीं , बेहोशी और ऐंठन , बार - बार उल्टी या चेतना का घटा स्तर शामिल हो सकता है ।" pl,निमोनिया के बैक्टीरिया तथा वायरस जनित मामलों में आम तौर पर समान लक्षण होते हैं । ,"कुछ मामले परंपरागत लेकिन , गैर - विशिष्ट , चिकित्सीय विशिष्टताओं से जुड़े होते हैं ।" ,""" लेगियोनेला "" द्वारा हुए निमोनिया में पेड़ू दर्द , डायरिया या मतिभ्रम हो सकता है , जबकि "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" द्वारा हुए निमोनिया में जंग जैसे रंग वाला बलगम , और "" क्लेबसिएला "" द्वारा हुए निमोनिया में “ करेंट जेली ” के नाम से जाने वाला खूनी बलगम हो सकता है ।" ,खूनी बलगम ( हेमोप्टाइसिस नामक ) तपेदिक ग्राम नकारात्मक निमोनिया और फेफड़े के फोड़े के साथ - साथ तीव्र ब्रोंकाइटिस के साथ भी हो सकता है । ,""" माइकोप्लाज़्मा "" निमोनिया में गर्दन में लिम्फ नोड्स की सूजन , जोड़ों में दर्द या कान के मध्य में संक्रमण हो सकता है ।" sg,वायरस जनित निमोनिया में बैक्टीरिया जनित निमोनिया की तुलना में आम तौर पर घरघराहट अधिक होती है । ,निमोनिया मुख्य रूप से बैक्टीरिया या वायरस द्वारा और कम आम तौर पर फफूंद और परजीवियों द्वारा होता है । ,हालांकि संक्रामक एजेंटों के 100 से अधिक उपभेदों की पहचान की गयी है लेकिन अधिकांश मामलों के लिये इनमें केवल कुछ ही जिम्मेदार हैं । ,वायरस व बैक्टीरिया के मिश्रित कारण वाले संक्रमण बच्चों के संक्रमणों के मामलों में 45 % तक और वयस्कों में 15 % तक जिम्मेदार होते हैं । ,सावधानी के साथ किये गये परीक्षणों के बावजूद लगभग आधे मामलों में कारक एजेंट पृथक नहीं किये जा सकते हैं । ,"शब्द "" निमोनिया "" व्यापक रूप से कई बार फेफड़ों की सूजन की किसी भी स्थिति ( उदाहरण के लिये स्वतः प्रतिरोधी रोग , रसायन से जलने पर या दवाओं की प्रतिक्रिया ) पर लागू किये जा सकते हैं ; हालांकि , इस सूजन को अधिक सटीक रूप से न्यूमोनाइटिस कहा जाता है ।" ,"संक्रामक एजेंट अनुमानित प्रस्तुतियों के आधार पर ऐतिहासिक रूप से “ सामान्य ” और “ असामान्य ” एजेंटों में विभाजित किये गये थे लेकिन साक्ष्य इस विभेद का समर्थन नहीं करते हैं , इस कारण अब इस पर जोर नहीं दिया जाता है ।" ,"निमोनिया होने की संभावना को बढ़ाने वाली परिस्थितियों और जोखिम कारकों में धूम्रपान , प्रतिरक्षा की कमी तथा मद्यपान की लत , गंभीर प्रतिरोधी फेफड़ा रोग , गंभीर गुर्दा रोग और यकृत रोग शामिल हैं ।" sg,अम्लता - दबाने वाली दवाओं जैसे प्रोटॉन - पंप इन्हिबटर्स या H2 ब्लॉकर्स का उपयोग निमोनिया के बढ़े जोखिम से संबंधित है । ,उम्र का अधिक होना निमोनिया के होने को बढ़ावा देता है । sg,"समुदाय उपार्जित निमोनिया ( सीएपी ) के मुख्य कारक बैक्टीरिया है , जिसमें से "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" लगभग 50 % मामलों से जुड़ा होता है ।" ,"आम तौर पर शामिल अलग तरह के अन्य बैक्टीरिया में 20 % में "" हीमोफीलस इन्फ्युएंज़ा "" , 13 % में "" क्लैमाइडोफिला निमोनिया "" और 3 % में "" मिकोप्लाज़्मा निमोनिया "" ; "" स्टैफिलोकॉकस ऑरियस "" ; "" मोराक्सेला कैटराहैलिस "" ; "" लैगियोनेला न्यूमोफेला "" और ग्राम - निगेटिव बासिलि शामिल है ।" pl,"उपरोक्त संक्रमणों के कई दवा प्रतिरोधी संस्करण अब और आम होते जा रहे हैं जिनमें दवा प्रतिरोधी "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" ( डीआरएसपी ) और मेथिसिलीन - प्रतिरोधी स्ट्रेप्टोकॉकस ऑरियस ( एमआरएसए ) शामिल है ।" sg,जब जोखिम कारक उपस्थित हों तो जीवाणुओं के विस्तार को सुविधा मिलती है । ,"मद्यपान की लत "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" , एनाएरोबिक ऑर्गेनिज़्म और "" माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस "" से जुड़ी हुई है ; धूम्रपान "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" , "" हेमोफिलस इन्फ्युएन्ज़ा "" , "" मॉरेक्सेला केटराहेलिस "" और "" लेगोइयोनेला न्यूमोफिला "" के प्रभावों को पैदा करता है ।" ,"चिड़ियों से एक्सपोज़र "" कैमिडिया सिटासी "" के साथ ; पालतू जानवर "" कॉक्सिएला बुर्नेती "" के साथ ; पेच की सामग्री में बाहरी पदार्थ का प्रवेश एनाएरोबिक ऑर्गेनिज़्म के साथ और सिस्टिक फ्राइब्रोसिस , "" स्यूडोमोनस एरयूजिनोसा "" तथा "" स्ट्रेप्टोकॉकस ऑयरियस "" से संबंधित है ।" ,""" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" जाड़े में अधिक आम है , और ऐसे लोगों में इसका संदेह अधिक किया जाना चाहिये जो एनाएरोबिक ऑर्गेनिज़्म का अधिक मात्रा में सेवन करते हैं ।" sg,"वयस्कों में , वायरस लगभग एक तिहाई मामलों के लिये और बच्चों में लगभग 15 % निमोनिया के मामलों के लिये जिम्मेदार है ।" ,"आम तौर पर शामिल एजेंटों में राइनोवायरस , कोरोनावायरस , इन्फ्यूएंज़ा वायरस , रेस्पिरेटरी सिन्साइटियल वायरस ( आरएसवी ) , एडीनोवायरस और पैराइन्फ्युएन्ज़ा शामिल है ।" ,"हरपीस सिम्प्लेक्स वायरस नवजात शिशुओं , कैंसर पीड़ित लोगों , अंग प्रत्यारोपण स्वीकार करने वालों और काफी जल गये लोगों के समूहों को छोड़ कर , बेहद कम निमोनिया पैदा करता है ।" ,अंग प्रत्यारोपण करा चुके या प्रतिरोधकता हास वाले लोगों में साइटोमोगालो वायरस निमोनिया की उच्च दर होती है । ,"वायरस संक्रमणों से पीड़ित , "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" , "" स्ट्रेप्टोकॉकस ऑयरियस "" , "" हेमोफिलस इन्फ्युएन्ज़ा "" बैक्टीरिया से द्वितीयक रूप से पीड़ित हो सकते हैं , विशेष रूप से तब जबकि अन्य स्वास्थ्य समस्यायें उपस्थित हों ।" ,भिन्न - भिन्न वायरस वर्ष की भिन्न - भिन्न अवधियों में प्रबलता दिखाते हैं । sg,"अन्य वायरसों का प्रभाव भी कभी – कभी होता है जैसे कि "" हान्टा वायरस "" और "" कोरोना वायरस "" ।" ,"फफूंद से होने वाला निमोनिया असामान्य है लेकिन उन लोगों मे अधिक आम तौर पर होता है जो एड्स , प्रतिरोधकता विरोधी दवा या अन्य चिकित्सीय कारणों से कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली की समस्या से पीड़ित होते हैं ।" ,"यह अक्सर "" हिस्टोप्लाज़्मा कैप्स्यूलेटम "" , ब्लास्टोमाइसेस , "" क्रिप्टोकॉकस नियोफॉर्मन्स "" , "" न्यूमोनाइटिस जिरोवेसि "" और "" कॉकिडायोइडेस इमिटिस "" द्वारा होता है ।" ,"हिस्टोप्लास्मोसिस मिसिसिपी नदी घाटी में और कॉकिडियोआइडोमाइकोसिस , दक्षिणपश्चिम संयुक्त राज्य अमरीका में सबसे अधिक आम है ।" ,"उदाहरण के लिये डेंगू को "" ब्रेकहार्ट फीवर "" तथा "" ला डेंगू "" भी कहा जाता था ।" ,"जटिल डेंगू के लिये कई नाम उपयोग किये जाते थे : उदाहरण के लिये "" इनफेक्शस थ्रोम्बोकाइटोपेनिक परप्यूरा "" , "" फिलीपाइन "" , "" थाई "" तथा "" सिंगापुर हेमोरेजिक फीवर "" ।" ,"वैज्ञानिक , डेंगू की रोकथाम तथा उपचार के मार्गों पर शोध कर रहे हैं ।" ,लोग मच्छरों पर नियंत्रण पाने वैक्सीन बनाने तथा वायरस से लड़ने के लिये दवाएं बनाने पर कार्य कर रहे हैं । ,मच्छरों को नियंत्रित करने के लिये कई सरल काम किये गये हैं । ,"उदाहरण के लिये गप्पियां ( "" पोइसीलिया रेटिक्युलाटा "" ) या कोपपॉड को ठहरे हुये पानी में मच्छरों के लार्वा ( अंडे ) खाने के लिये डाला जा सकता है ।" ,"वैज्ञानिक , लोगों को सभी चार प्रकार के डेंगू से सुरक्षित करने के लिये वैक्सीन बनाने पर काम कर रहे हैं ।" ,"कुछ वैज्ञानिक इस बात से चिंतित हैं कि वैक्सीन , एंटीबॉडी - निर्भर वृद्धि ( ADE ) के कारण गंभीर रोग के जोखिम को बढ़ा सकता है ।" pl,सर्वश्रेष्ठ संभव वैक्सीन की कुछ भिन्न गुणवत्ताएं होंगी । ,"पहला , यह सुरक्षित होगा ।" ,"दूसरा , यह एक या दो इंजेक्शन ( या शॉट्स ) के बाद कार्यशील होगा ।" ,"तीसरा , यह सभी प्रकार के डेंगू वायरसों से सुरक्षा प्रदान करेगा ।" ,"चौथा , यह ADE नहीं पैदा करेगा ।" ,"पांचवां , इसका परिवहन तथा संग्रहण ( उपयोग किये जाने तक ) आसान होगा ।" ,"छठा , यह कम - लागत तथा लागत - प्रभावी ( अपनी लागत के अनुसार उपयोगी ) होगा ।" ,2009 तक कुछ वैक्सीनों का परीक्षण किया गया था । ,वैज्ञानिक आशा करते हैं कि पहला वैक्सीन 2015 तक व्यवसायिक निर्माण ( आम उपयोग ) के लिये तैयार होगा । ,"वैज्ञानिक , डेंगू बुख़ार के आक्रमण का उपचार करने के लिये वायरस विरोधी दवाओं को बनाने के लिये तथा लोगों को गंभीर जटिलताओं से बचाने की दिशा में काम कर रहे हैं ।" ,वे इस बात पर भी काम कर रहे हैं कि वायरस की प्रोटीन संरचना किस प्रकार की है । sg,इससे डेंगू के लिये प्रभावी दवाओं के निर्माण में सहायता मिल सकती है । ,डेंगू बुख़ार ,डेंगू बुख़ार एक संक्रमण है जो डेंगू वायरस के कारण होता है । ,मच्छर डेंगू वायरस को संचरित करते ( या फैलाते ) हैं । ,"डेंगू बुख़ार को "" हड्डीतोड़ बुख़ार "" के नाम से भी जाना जाता है , क्योंकि इससे पीड़ित लोगों को इतना अधिक दर्द हो सकता है कि जैसे उनकी हड्डियाँ टूट गयी हों ।" ,डेंगू बुख़ार के कुछ लक्षणों में बुखार ; सिरदर्द ; त्वचा पर चेचक जैसे लाल चकत्ते तथा मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द शामिल हैं । sg,"कुछ लोगों में , डेंगू बुख़ार एक या दो ऐसे रूपों में हो सकता है जो जीवन के लिये खतरा हो सकते हैं ।" ,"पहला , डेंगू रक्तस्रावी बुख़ार है , जिसके कारण रक्त वाहिकाओं ( रक्त ले जाने वाली नलिकाएं ) , में रक्तस्राव या रिसाव होता है तथा रक्त प्लेटलेट्स ( जिनके कारण रक्त जमता है ) का स्तर कम होता है ।" ,"दूसरा डेंगू शॉक सिंड्रोम है , जिससे खतरनाक रूप से निम्न रक्तचाप होता है ।" ,डेंगू वायरस चार भिन्न - भिन्न प्रकारों के होते हैं । ,यदि किसी व्यक्ति को इनमें से किसी एक प्रकार के वायरस का संक्रमण हो जाये तो आमतौर पर उसके पूरे जीवन में वह उस प्रकार के डेंगू वायरस से सुरक्षित रहता है । ,हालांकि बाकी के तीन प्रकारों से वह कुछ समय के लिये ही सुरक्षित रहता है । ,यदि उसको इन तीन में से किसी एक प्रकार के वायरस से संक्रमण हो तो उसे गंभीर समस्याएं होने की संभावना काफी अधिक होती है । sg,लोगों को डेंगू वायरस से बचाने के लिये कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है । pl,"डेंगू बुख़ार से लोगों को बचाने के लिये कुछ उपाय हैं , जो किये जाने चाहिये ।" ,लोग अपने को मच्छरों से बचा सकते हैं तथा उनसे काटे जाने की संख्या को सीमित कर सकते हैं । ,वैज्ञानिक मच्छरों के पनपने की जगहों को छोटा तथा कम करने को कहते हैं । ,यदि किसी को डेंगू बुख़ार हो जाय तो वह आमतौर पर अपनी बीमारी के कम या सीमित होने तक पर्याप्त तरल पीकर ठीक हो सकता है । ,"यदि व्यक्ति की स्थिति अधिक गंभीर है तो , उसे अंतः शिरा द्रव्य ( सुई या नलिका का उपयोग करते हुये शिराओं में दिया जाने वाला द्रव्य ) या रक्त आधान ( किसी अन्य व्यक्ति द्वारा रक्त देना ) की जरूरत हो सकती है ।" pl,"1960 से , काफी लोग डेंगू बुख़ार से पीड़ित हो रहे हैं ।" sg,द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से यह बीमारी एक विश्वव्यापी समस्या हो गयी है । ,यह 110 देशों में आम है । pl,प्रत्येक वर्ष लगभग 50 - 100 मिलियन लोग डेंगू बुख़ार से पीड़ित होते हैं । pl,वायरस का प्रत्यक्ष उपचार करने के लिये लोग वैक्सीन तथा दवाओं पर काम कर रहे हैं । pl,"मच्छरों से मुक्ति पाने के लिये लोग , कई सारे अलग - अलग उपाय भी करते हैं ।" ,डेंगू बुख़ार का पहला वर्णन 1779 में लिखा गया था । ,20वीं शताब्दी की शुरुआत में वैज्ञानिकों ने यह जाना कि बीमारी डेंगू वायरस के कारण होती है तथा यह मच्छरों के माध्यम से संचरित होती ( या फैलती ) है । ,डेंगू वायरस से संक्रमित लगभग 80 % लोगों ( प्रत्येक 10 लोगों में से 8 ) में कोई लक्षण नहीं होते हैं या बेहद हल्के लक्षण ( जैसे कि मूलभूत बुख़ार ) होते हैं । pl,संक्रमित लोगों में से लगभग 5 % लोग ( प्रत्येक 100 लोगों में से 5 ) गंभीर रूप से बीमार पड़ते हैं । sg,"इन लोगों की एक छोटी संख्या में , बीमारी जीवन के लिये खतरनाक होती है ।" pl,डेंगू वायरस से पीड़ित होने के 3 से 14 दिनों के बाद किसी व्यक्ति में लक्षण दिखते हैं । ,"निमेनिया के एक्स - रे प्रस्तुतिकरण को लोबार निमोनिया , ब्रॉकोनिमोनिया ( लोब्यूलर निमोनिया भी कहा जाता है ) और इन्ट्रस्टिशल निमोनिया में वर्गीकृत किया जाता है ।" ,"बैक्टीरिया जनित , समुदाय से अर्जित निमोनिया , पारम्परिक रूप से एक फेफड़े के खंडीय लोब के फेफड़े में जमाव दिखाता है जिसे लोबार निमोनिया भी कहा जाता है ।" ,"हालांकि , परिणाम कितने भी अलग - अलग हो सकते हैं लेकिन अन्य प्रकार के निमोनिया में अन्य प्रतिमान समान होते हैं ।" ,"एस्पिरेशन निमोनिया , बैक्टीरिया जनित अपारदर्शिता ( ओपेसिटीस ) के साथ प्राथमिक रूप से फेफड़ों के आधार में और दाहिनी ओर उपस्थित हो सकता है ।" sg,"वायरस जनित निमोनिया का रेडियोग्राफ सामान्य , अधिक - सूजा , बैक्टीरिया वाले धब्बेदार क्षेत्रों या लोबार एकत्रीकरण वाले बैक्टीरिया जनित निमोनिया जैसा दिख सकता है ।" ,"विशेष रूप से निर्जलीकरण की अवस्था में , रोग की प्राथमिक अवस्था में रेडियोलॉजिक परिणाम उपस्थित नहीं भी हो सकते हैं या मोटापे से ग्रसित तथा फेफड़े की बीमारी के इतिहास वाले लोगों में इसकी व्याख्या कर पाना भी कठिन है ।" sg,"अनिश्चित मामलों में , सीटी स्कैन अतिरिक्त जानकारी प्रदान कर सकता है ।" ,समुदाय में रहने वाले लोगों में कारण एजेंट की निर्धारण लागत प्रभावी नहीं है और आमतौर पर प्रबंधन को बदलता नहीं है । ,"वे लोग जो उपचार के प्रति प्रतिक्रिया नहीं देते हैं उनमें बलगम कल्चर पर विचार किया जाना चाहिये और गंभीर उत्पादक कफ़ से पीड़ित लोगों में "" माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबक्यूलोसिस "" के लिये कल्चर किया जाना चाहिये ।" ,"अन्य विशिष्ट जीवों के लिये , सार्वजनिक स्वास्थ्य कारणों के लिये इसे प्रकोप के दौरान अनुशंसित किया जा सकता है ।" ,"वे जिनको गंभीर रोग के कारण अस्पताल में भर्ती किया गया है , बलग़म और रक्त कल्चर दोनों और साथ ही "" लेग्यिनेला "" और "" स्ट्रेप्टोकॉकस "" के एंटीजन के लिये मूत्र का परीक्षण अनुशंसित किया जाता है ।" ,वायरस जनित संक्रमण को अन्य तकनीकों के अतिरिक्त कल्चर या पॉलीमरेस चेन प्रतिक्रिया ( पीसीआर ) के साथ वायरस या इसके एंटीजन की पहचान की पुष्टि की जा सकती है । ,नियमित माइक्रोबायोलॉजिकल परीक्षणों के साथ कारक एजेंटों का निर्धारण केवल 15 % मामलों में हो पाता है । ,न्यूमोनाइटिस फेफड़े की सूजन से संबंधित है । ,"निमोनिया आम तौर पर संक्रमण और कभी - कभार गैर - संक्रामक न्यूमोनाइटिस से संबंधित है , जिसमें फुफ्फुसीय जमाव का अतिरिक्त गुण भी होता है ।" ,"निमोनिया को सबसे आम तौर पर इसके होने के स्थान और तरीके के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है : समुदाय से अर्जित , श्वास , स्वास्थ्य सेवा से संबंधित , अस्पताल से अर्जित और वेंटीलेटर से संबंधित निमोनिया ।" ,"इसे फेफड़े के प्रभावित क्षेत्र द्वारा भी वर्गीकृत किया जा सकता है : लोबार निमोनिया , ब्रॉन्कियल निमोनिया और गंभीर इन्ट्रस्टिशल निमोनिया ; या कारक जीवों के आधार पर भी वर्गीकृत किया जा सकता है ।" ,"बच्चों में निमोनिया को चिह्नों व लक्षणों के आधार पर गैर - गंभीर , गंभीर या बेहद गंभीर के रूप में अतिरिक्त रूप से वर्गीकृत किया जा सकता है ।" ,"कई सारे रोग निमोनिया के समान चिह्नों और लक्षणों वाले हो सकते हैं , जैसे कि : गंभीर प्रतिरोधी फेफड़ा रोग ( सीओपीडी ) , अस्थमा , फुफ्फुसीय एडेमा , ब्रांकिएकटैसिस , फेफड़े का कैंसर और फुफ्फुसीय एम्बोली ।" ,"निमोनिया से इतर अस्थमा और सीओपीडी आम तौर पर घरघराहट के साथ होते हैं , फुफ्फुसीय एडेमा में इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम असमान्य होता है , कैंसर व श्वासनलिकाविस्फार में लंबे समय की खांसी होती है और एम्बोली में तीखे सीने के दर्द की शुरुआत के साथ सांस लेने में तकलीफ होती है ।" ,"रोकथाम में टीकाकरण , पर्यावरणीय उपाय और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का उपयुक्त उपचार शामिल है ।" ,"यह माना जाता है कि उपयुक्त रोकथाम वाले उपाय वैश्विक रूप से स्थापित किये जाते तो बच्चों में मृत्युदर को 4,00,000 से कम किया जा सकता था और यदि वैश्विक रूप से उपयुक्त उपचार उपलब्ध होते तो बचपन में होने वाली मौतों में से 6,00,000 को कम किया जा सकता था ।" ,टीकाकरण कुछ बैक्टीरिया और वायरस जनित निमोनिया के विरुद्ध बच्चों तथा वयस्कों दोनों में रोकथाम करता है । ,इन्फ्लुएंज़ा टीकाकरण इन्फ्लुएंज़ा ए व बी के विरुद्ध सबसे अधिक प्रभावी है । ,सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेन्शन ( सीडीसी ) 6 और अधिक उम्र के प्रत्येक व्यक्ति के लिये वार्षिक टीकाकरण की अनुशंसा करता है । sg,स्वास्थ्य सेवा कार्यकर्ताओं का टीकाकरण उनके रोगियों के बीच वायरस जनित निमोनिया के जोखिम को कम करता है । pl,जब इंफ्लुएंज़ा का प्रकोप होता है तो एमान्टाडाइन या रिमैन्टाडाइन जैसी दवायें स्थितियों की रोकथाम करने में सहायता कर सकती हैं । ,यह अज्ञात है कि ज़ानामिविर या ओसेल्टामिविर प्रभावी हैं या नहीं और ऐसा इसलिये क्योंकि ओसेल्टामिविर बनाने वाली कंपनी ने परीक्षण आंकड़ों को स्वतंत्र विश्लेषण के लिये जारी करने से इन्कार कर दिया है । pl,""" हेमोफिलस इन्फ्लुएंज़ा "" और "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" के विरुद्ध टीकाकरण के अच्छे साक्ष्य उपलब्ध हैं ।" ,""" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" के विरुद्ध बच्चों को टीकाकरण प्रदान करने से वयस्कों में इसके संक्रमण में कमी आयी है , क्योंकि कई सारे वयस्क इस संक्रमण को बच्चों से ग्रहण करते हैं ।" ,"एक "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" टीका वयस्कों के लिये उपलब्ध है और इसको हमलावर निमोनिया रोग के जोखिम को कम करता पाया गया है ।" pl,"अन्य वे टीके जिनमें निमोनिया के विरुद्ध रक्षा प्रदान करने की क्षमता है , उनमें परट्यूसिस , वेरिसेला और चेचक के टीके शामिल हैं ।" ,धूम्रपान अवसान और घर के भीतर लकड़ी या गोबर के साथ खाना पकाने से होने वाला भीतरी वायु प्रदूषण कम करना दोनों ही अनुशंसित हैं । ,"धूम्रपान , अन्य रूप से स्वस्थ वयस्कों में न्यूमोकॉकल निमोनिया के लिए सबसे बड़ा अकेला जोखिम होता है ।" ,हाथों की स्वच्छता और अपनी बांह पर खांसना प्रभावी रोकथाम उपाय हो सकता है । ,बीमार लोगों द्वारा शल्यक्रिया मास्क पहनना बीमारी को रोक सकता है । sg,"अंतर्निहित बीमारियों ( जैसे HIV / AIDS , डायबिटीज़ मेलाटिस और कुपोषण ) का उपयुक्त उपचार निमोनिया के जोखिम को कम कर सकता है ।" ,6 माह से कम उम्र के बच्चों को मात्र माँ के दूध का आहार देना रोग की गंभीरता और जोखिम दोनों को कम करता है । ,"HIV / AIDS से पीड़ित लोगों और CD4 की गिनती 200 cells / uL से कम वाले लोगों में trimethoprim / सल्फामेथोक्साजोल एंटीबायोटिक , "" न्यूमोसिस्टिस निमोनिया "" के जोखिम को कम करता है और उन लोगों के लिये उपयोगी हो सकता है , जिनमें प्रतिरक्षा की कमी है लेकिन HIV नहीं है ।" ,"समूह बी स्ट्रेप्टोकॉकस और "" क्लामीडिया ट्रैकोमेटिस "" के लिये गर्भवती महिलाओं का परीक्षण और आवश्यकता पड़ने पर एंटीबायोटिक उपचार का प्रबंध करना शिशुओं में निमोनिया की दर को कम करता है ; माँ से बच्चे को HIV संक्रमण से बचाना भी कुशल हो सकता है ।" sg,"नवजात के मुंह और गले का मेकोनियम - चिह्नित एम्नियोटिक तरल से चूषण करने से एस्पाइरेशन निमोनिया की दर मे कमी नहीं पायी गयी है और ऐसा करना संभावित क्षति उत्पन्न कर सकता है , इस प्रकार यह अभ्यास अधिकतर परिस्थितियों में अनुशंसित नहीं है ।" sg,कमजोर बुजुर्गों में अच्छी मौखिक ( मुंह की ) स्वास्थ्य देखभाल एस्पिरेशन निमोनिया के जोखिम को कम कर सकता है । ,"संपूर्ण विघटन के लिये आमतौर पर मौखिक एंटीबायोटिक्स , आराम और सरल एन्लजेसिक्स और तरल की अधिक मात्रा ।" ,"हालांकि , अन्य चिकित्सीय स्थितियों वाले , बुजुर्ग या श्वसन में महत्वपूर्ण कठिनाई वालों को अधिक गहन देखभाल की आवश्यकता पड़ती है ।" ,"यदि लक्षण और खराब होते हैं , निमोनिया घर पर दिये जाने वाले उपचार से सुधरता नहीं है या जटिलतायें होती हैं तो अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता पड़ सकती है ।" ,"वैश्विक रूप से बच्चों में लगभग 7 – 13 % मामलों में अस्पताल में भर्ती करवाने की आवश्यकता पड़ती है जबकि विकसित दुनिया में वयस्कों में 22 से 42 % वे लोग , जिनमें सामुदायिक रूप से अर्जित निमोनिया होता है , अस्पताल में भर्ती होते हैं ।" sg,वयस्कों में अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत के निर्धारण के लिये सीयूआरबी - 65 स्कोर उपयोगी होता है । ,"यदि स्कोर 0 या 1 है तो लोग आमतौर पर घर पर रह कर उपचार करा सकते हैं , यदि स्कोर 2 है तो अस्पताल में थोड़ी सी अवधि के लिये भर्ती होना या नज़दीकी फॉलोअप की आवश्यकता होती है यदि यह 3 - 5 है तो अस्पताल में भर्ती होने की अनुशंसा की जाती है ।" ,श्वसन परेशानी या ऑक्सीजन संतृप्तता के 90 % से कम होने पर बच्चों को अस्पताल में भर्ती किया जाना चाहिये । sg,निमोनिया में सीने की फिज़ियोथेरेपी की उपयोगिता अभी तक निर्धारित नहीं है । ,यह माना जाता है कि डेंगू के ऊपर प्रति मिलियन जनसंख्या में से लगभग 1600 विकलांगता समायोजित जीवन वर्ष का भार है । sg,इसका अर्थ है कि डेंगू के कारण प्रति मिलियन जनसंख्या में से 1600 वर्षों का जीवन समाप्त हो जाता है । ,यह उतना ही है जितना कि रोग भार अन्य बचपन या टीबी ( तपेदिक ) जैसी उष्णकटिबंधीय बीमारियों का है । ,डेंगू मलेरिया के बाद दूसरे नंबर की सबसे महत्वपूर्ण उष्णकटिबंधीय बीमारी है । ,विश्व स्वास्थ्य संगठन भी डेंगू को 16 उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारियों ( अर्थात डेंगू को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता है जितना लिया जाना चाहिये ) में से एक मानता है । ,डेंगू पूरी दुनिया में और अधिक आम होता जा रहा है । ,1960 के मुकाबले 2010 में डेंगू 30 गुना अधिक आम था । pl,डेंगू के विस्तार के लिये कई सारी चीजें जिम्मेदार हैं । pl,शहरों में अधिक लोग रहने लगे हैं । sg,दुनिया की जनसंख्या बढ़ रही है । ,अधिक से अधिक लोग अब अंतर्राष्ट्रीय यात्राएं ( देशों के बीच ) कर रहे हैं । ,ग्लोबल वार्मिंग को भी डेंगू के विस्तार का एक कारण माना जाता है । ,डेंगू सबसे अधिक भूमध्य रेखा के आसपास होता है । pl,जहां डेंगू होता है उस क्षेत्र में 2.5 बिलियन लोग निवास करते हैं । pl,इनमें से 70 प्रतिशत लोग एशिया और प्रशांत क्षेत्र से हैं । pl,"अमरीका में डेंगू प्रभावित इन क्षेत्रों से यात्रा करके वापस आये लोगों में से 2.9 % से 8 % लोग ऐसे हैं , जिनको बुखार हो जाता है और जो यात्रा के दौरान प्रभावित हो जाते हैं ।" sg,लोगों के इस समूह में मलेरिया के बाद डेंगू दूसरा सबसे आम संक्रमण है जिसका निदान होता है । ,डेंगू को कई वर्षों पूर्व सबसे पहले लिखा गया था । sg,जिन साम्राज्य ( 265 से 420 ईसा पूर्व ) का एक चीनी चिकित्सा विश्वकोष एक ऐसे व्यक्ति की बात करता है जिसे संभवतः डेंगू हुआ था । sg,"किताब एक "" जल जहर ( वॉटर पॉएज़न ) "" रोग के बारे में बताता है जिसका संबंध उड़ने वाले कीटों से था ।" pl,17 वीं शताब्दी के लिखित दस्तावेज़ भी एक ऐसी महामारी की चर्चा करते हैं जो डेंगू हो सकती है ( जहां पर रोग थोड़े ही समय में तेज़ी से फैलता है ) । sg,सबसे अधिक संभावित डेंगू महामारी की आरंभिक रिपोर्ट 1779 तथा 1780 की है । ,"ये रिपोर्ट एक ऐसी महामारी की बात करती हैं जिसने एशिया , अफ्रीका तथा उत्तरी अमरीका को अपने घेरे में ले लिया था ।" pl,उस समय से 1940 तक बहुत सारी महामारियां नहीं हुई । pl,"1906 में वैज्ञानिकों ने सिद्ध किया कि लोगों को "" एडीज़ "" मच्छरों से संक्रमण हो रहा था ।" pl,1907 में वैज्ञानिकों ने दर्शाया कि डेंगू का कारण वायरस है । ,यह मात्र दूसरा रोग था जिसे वायरस से होता दिखाया गया था ( वैज्ञानिक पहले ही सिद्ध कर चुके थे कि पीला बुखार वायरस के कारण होता है ) । ,जॉन बर्टन क्लेलैंड तथा जोसेफ फ्रैंकलिन सिलर डेंगू के वायरस का अध्ययन करते रहे और वायरस के विस्तार के आधार का पता लगाया । ,दूसरे विश्व युद्ध के बाद डेंगू अधिक तेजी से फैलने लगा । ,माना गया कि युद्ध ने पर्यावरण को कई तरीको से बदला । ,भिन्न प्रकार के डेंगू नये क्षेत्रों में फैले । ,लोगो को पहली बार रक्तस्रावी डेंगू बुखार होना शुरू हुआ । ,डेंगू का यह भीषण प्रकार सबसे पहले 1953 में फिलीपींस में रिपोर्ट किया गया । sg,1970 के आते - आते रक्तस्रावी डेंगू बुखार बच्चों में मृत्यु का प्रमुख कारण बन गया । ,यह प्रशांत क्षेत्र तथा अमरीका में भी होने लगा । ,रक्तस्रावी डेंगू बुखार तथा डेंगू शॉक सिन्ड्रोम सबसे पहले मध्य तथा दक्षिण अमरीका में 1981 में रिपोर्ट किया गया । pl,इस समय स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों ने यह देखा कि जिन लोगों को टाइप 1 डेंगू वायरस का असर हो चुका था उनको कुछ वर्षों के बाद टाइप 2 डेंगू वायरस का असर हो रहा था । ,"यह स्पष्ट नहीं है कि शब्द "" डेंगू "" कहां से आया ।" ,"कुछ लोगों का मानना है कि यह शब्द स्वाहीली के वाक्यांश "" का - डिंगा पेपो "" से आया है ।" ,यह वाक्यांश बुरी आत्माओं से होने वाली बीमारी के बारे में बताता है । ,"माना जाता है कि स्वाहीली शब्द "" डिंगा "" स्पेनी के शब्द "" डेंगू "" से बना है ।" sg,"इस शब्द का अर्थ है "" सावधान "" ।" ,वह शब्द एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताने के लिये उपयोग किया गया हो सकता है जो डेंगू बुखार के हड्डी के दर्द से पीड़ित हो ; वह दर्द उस व्यक्ति को सावधानी के साथ चलने पर मजबूर करता होगा । ,"हालांकि , यह भी संभव है कि स्पेनी शब्द स्वाहीली भाषा से आया हो , न कि जैसा ऊपर बताया गया है ।" ,"अन्य लोगों का मानना है कि "" डेंगू "" नाम वेस्ट इंडीज़ से आया है ।" ,"वेस्ट इंडीज़ में , डेंगू से पीड़ित गुलाम "" ए डैंडी "" की तरह खड़े होने वाले और चलने वाले कहे जाते थे और इसी कारण से बीमारी को भी "" डैंडी फीवर "" कहा जाता था ।" ,""" हड्डी - तोड़ बुखार ( ब्रेकबोन फीवर ) "" नाम सबसे पहले एक चिकित्सक संयुक्त राज्य अमरीकी "" संस्थापक जनक "" बेंजामिन रश द्वारा उपयोग किया गया था ।" ,"1789 में रश ने "" हड्डी - तोड़ बुखार ( ब्रेकबोन फीवर ) "" नाम का उपयोग एक रिपोर्ट में किया जो 1780 में फिलाडेल्फिया में हुये डेंगू के प्रकोप पर था ।" ,"रिपोर्ट में रश ने अधिक औपचारिक नाम "" बिलियस रिमिटिंग फीवर "" का अधिकतर उपयोग किया ।" sg,"शब्द "" डेंगू बुखार "" 1828 तक आम तौर पर उपयोग में नहीं था ।" ,"दूसरे शब्दों में , वे समझाने के लिए , तर्क कला विकसित करते हैं कि उनके लिए धूम्रपान आवश्यक क्यों है , हालांकि जरूरी नहीं कि कारण तार्किक हों ।" ,"उदाहरण के लिए , एक धूम्रपान करने वाला यह कह कर अपने व्यवहार को सही बता सकता है कि हर कोई मरता है और इसलिए , सिगरेट वास्तव में कुछ भी नहीं बदलती है या एक व्यक्ति यह विश्वास कर सकता है कि धूम्रपान तनाव से छुटकारा दिलाता है या इसके कई अन्य लाभ हैं जो इसके जोखिम को सही ठहराते हैं ।" ,"धूम्रपान करने वाले , जिनकी प्रत्येक सुबह सिगरेट से शुरुआत होती है , अक्सर सकारात्मक प्रभावों को व्यक्त करेंगे , किन्तु वे स्वीकार नहीं करेंगे कि उन्हें खुशी की कमी महसूस हो रही है ( डोपामाइन के कम स्तर के कारण ) और खुशी के "" सामान्य "" स्तर को पाने के लिए वे धूम्रपान करेंगे ।" ,"( डोपामाइन का "" सामान्य "" स्तर ) ।" ,"2010 में प्रकाशित 20,000 से अधिक इज़रायली सैन्य रंगरूटों पर किये गये एक अध्ययन के अनुसार , धूम्रपान करने वालों में धूम्रपान न करने वालों की तुलना में कम बुद्धि ( I.Q. ) होती है ।" ,"जिन्होनें कभी धूम्रपान नहीं किया उनकी औसत बुद्धि 101 थी , जबकि एक पैकेट से अधिक धूम्रपान करने वालों की औसत बुद्धि 90 थी ।" sg,मुख्य रूप से तम्बाकू का धूम्रपान एक ऐसी प्रक्रिया है जो 1.1 बिलियन लोगों द्वारा की जाती है और इसका 1 / 3 भाग व्यस्क आबादी है । ,"धूम्रपान करने वाले की छवि काफी अलग हो सकती है , किन्तु यह अक्सर कल्पना में स्वयं तथा अकेलेपन से जुड़ी होती है ।" sg,"फिर भी , तंबाकू और भांग का धूम्रपान एक सामाजिक गतिविधि हो सकते हैं , जो सामाजिक संरचनाओं का सुदृढीकरण करते हैं और कई और विविध सामाजिक और जातीय समूहों के सांस्कृतिक अनुष्ठान का हिस्सा हो सकते हैं ।" ,"अधिकतर धूम्रपान करने वाले सामजिक परिवेश में धूम्रपान आरम्भ करते हैं और कई मामलों में सिगरेट पेश करना किसी बार , नाईट क्लब , काम करने की जगह या सड़क पर एक नई पहल को शुरू करने या अजनबी से बात करने का अच्छा बहाना हो सकता है ।" ,सिगरेट जलाना अक्सर आलस या आवारागर्दी से बचने का प्रभावशाली ढंग समझा जाता है । ,"किशोरों के लिए , यह उनके बचपन की दुनिया से निकलने के पहले कदम या वयस्कों की दुनिया से विद्रोह के रूप में कार्य करता है ।" ,"इसके अलावा , धूम्रपान सौहार्द के एक प्रकार के रूप में देखा जा सकता है ।" ,"ऐसा देखा गया है कि सिगरेट का एक पैकेट खोलने या अन्य लोगों को सिगरेट पेश करते समय , मस्तिष्क में डोपामाइन का स्तर बढ़ सकता है ( "" प्रसन्नता का अनुभव "" ) और निःसंदेह धूम्रपान करने वाले अन्य धूम्रपान करने वालों के साथ इस तरीके से संबंध स्थापित कर लेते हैं जिनसे उनकी यह आदत बनी रहती है ।" ,विशेषकर उन देशों में जहाँ सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान वैध कर दिया गया है । ,"मनोरंजक दवा के उपयोग के अलावा , यह अपनी पहचान स्थापित करने या धूम्रपान के अपने अनुभवों को अपनी छवि के विकास से जोड़ने का साधन हो सकता है ।" sg,19वीं सदी में आधुनिक धूम्रपान विरोधी आंदोलन ने धूम्रपान के बारे में जागरुकता फ़ैलाने से भी कहीं अधिक किया । ,"इसने धूम्रपान करने वाले की प्रतिक्रिया को उकसाया कि पहले क्या था और अब अक्सर क्या है , जो कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमले के रूप में माना जाता है और इसने धूम्रपान न करने वालों के बीच बागियों या बाहरी व्यक्तियों की छवि बना दी है ।" ,सैनिकों के बीच तम्बाकू के महत्व को एक ऐसी चीज़ के रूप में देखा गया जिसे कमांडरों द्वारा अनदेखा नहीं किया जा सकता था । ,"17वीं सदी तक तम्बाकू भत्ता कई देशों के नौसैनिकों के राशन का सामान्य हिस्सा था और प्रथम विश्वयुद्ध तक , युद्ध क्षेत्र में लड़ने वाले सैनिकों के लिए कई सिगरेट निर्माताओं और सरकारों ने गठजोड़ किया ।" ,"इस बात पर जोर दिया गया था कि कारागार में तम्बाकू का नियमित उपयोग ना केवल सैनिकों को शांत रखेगा , बल्कि दबाव सहने में भी उनकी मदद करेगा ।" ,"20वीं शताब्दी के मध्य तक , कई पश्चिमी देशों की अधिकांश व्यस्क आबादी धूम्रपान करने वालों की थी और धूम्रपान विरोधी कई कार्यकर्ताओं के दावों को यदि अनदेखा नहीं किया गया तो इन पर बहुत अधिक विश्वास भी नहीं किया गया ।" ,"वर्तमान में आंदोलन का दावा और अधिक पुख्ता और प्रामाणिक है , लेकिन जनसंख्या के अनुपात में धूम्रपान करने वालों की संख्या काफी स्थिर बनी हुई है ।" ,तंबाकू संबंधित बीमारियाँ आज दुनिया में सबसे बड़े हत्यारों के रूप में से एक हैं और औद्योगिक देशों में इन्हें अकाल मृत्यु का सबसे बड़ा कारण कहा जाता है । ,संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रति वर्ष लगभग 500000 मौतें तम्बाकू संबंधित बीमारियों के कारण होती हैं और एक ताज़ा अध्ययन का अनुमान है कि चीन के पुरुषों के 1 / 3 भाग ने धूम्रपान के कारण अपना जीवनकाल घटा लिया है । ,पुरुष और महिला धूम्रपान करने वाले अपने जीवन के क्रमशः 13.2 वर्ष और 14.5 वर्ष औसतन कम कर लेते हैं । pl,आजीवन धूम्रपान करने वाले लगभग आधे लोग धूम्रपान के कारण समय से पहले मर जाते हैं । ,फेफड़ों के कैंसर से मरने का खतरा 85 वर्ष की उम्र में धूम्रपान करने वाले एक पुरुष के लिए 22.1 % और धूम्रपान करने वाली एक वर्तमान महिला के लिए 11.9 % है । ,मृत्यु के प्रतिस्पर्धी कारणों की अनुपस्थिति में इसीसे यह भी अनुमान लगाया गया कि 85 वर्ष की उम्र से पहले आजीवन धूम्रपान न करने वालों की फेफड़ों के कैंसर से मरने की सम्भावना यूरोपीय क्षेत्र के पुरुष के लिए 1.1 % और महिला के लिए 0.8 % है । sg,"प्रतिदिन एक सिगरेट पीने से धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के लिए , धूम्रपान ना करने वाले व्यक्ति की अपेक्षा दिल के दौरे की संभावना पचास प्रतिशत है ।" ,अरैखिक खुराक प्रतिक्रिया को प्लेटलेट एकत्रीकरण प्रक्रिया पर धूम्रपान के प्रभाव से समझाया जाता है । ,"धूम्रपान के कारण होने वाली बीमारियों और वेदनाओं के कारण संवहनी स्टेनोसिस , फेफड़ों के कैंसर , दिल का दौरा और क्रोनिक प्रतिरोधी फुफ्फुसीय रोग हो सकते हैं ।" ,कई सरकारें मास मीडिया में धूम्रपान विरोधी अभियानों के साथ धूम्रपान के दीर्घकालीन खतरों के बारे में जोर देते हुए लोगों को रोकने की कोशिश कर रही हैं । ,"पैसिव धूम्रपान , या निष्क्रिय धूम्रपान , जो धूम्रपान करने वालों के आसपास के क्षेत्र में लोगों को तत्काल प्रभावित करता है , धूम्रपान पर प्रतिबंध लागू करने का एक प्रमुख कारण है ।" ,"यह एक ऐसा कानून है जो कि किसी व्यक्ति को इनडोर सार्वजनिक स्थलों जैसे बार , पब और रेस्तरां में धूम्रपान करने से रोकने के लिए बनाया गया है ।" sg,ऐसा करने के पीछे विचार यह है कि धूम्रपान को अत्याधिक असुविधाजनक बना कर इसे हतोत्साहित किया जाए तथा सार्वजनिक स्थानों पर खतरनाक धुएं पर रोक लगाई जाए । ,कानूनविदों के बीच चिंता का एक मुख्य कारण किशोरों को धूम्रपान के लिए हतोत्साहित करना है और कई राज्यों ने कम उम्र के लोगों को तम्बाकू पदार्थ बेचने के खिलाफ कानून पारित किये हैं । ,कई विकासशील देशों ने अभी धूम्रपान विरोधी नीतियां नहीं अपनाई हैं जिसके कारण कुछ देश धूम्रपान विरोधी अभियान और ETS ( पर्यावरण तम्बाकू धूम्रपान ) के बारे में शिक्षा दे रहे हैं । ,"कई प्रतिबंधों के बावजूद , यूरोपीय देश शीर्ष 20 स्थानों में से 18 स्थानों पर कब्ज़ा जमाए हुए हैं और एक मार्केट रिसर्च कम्पनी ERC के अनुसार , 2007 में प्रति व्यक्ति औसतन 3000 सिगरेटों के साथ सबसे ज्यादा धूम्रपान करने वाले ग्रीस में हैं ।" ,"विकसित दुनिया में धूम्रपान की दर स्थिर हुई है या इसमें गिरावट आई है , लेकिन विकासशील देशों में वृद्धि जारी है ।" sg,1965 से 2006 तक संयुक्त राज्य अमेरिका में धूम्रपान की दर 42 % से 20.8 % तक गिरी है । ,"दुनियाभर में कानूनों तथा मादक पदार्थों के कानूनों में मतभेद के कारण , समाज पर लत के प्रभाव , अलग -JOIN अलग पदार्थों तथा इनसे उत्पन्न होने वाली अप्रत्यक्ष सामजिक समस्याओं के कारण भिन्न हो सकते हैं ।" ,"हालांकि निकोटिन अत्याधिक नशीली दवाई है लेकिन मस्तिष्क पर इसका प्रभाव इतना तीव्र या ध्यान देने योग्य नहीं है जितना कि दूसरी दवाओं जैसे कोकीन , एम्फेटामाइन्स या अन्य कोई मादक पदार्थ का ( जिसमें हेरोइन व मॉर्फीन भी शामिल है ) ।" ,"चूंकि तम्बाकू गैर कानूनी दवा भी नहीं है , इसमें उपभोक्ता के लिए उच्च जोखिम और अधिक दामों वाला कोई काला बाज़ार नहीं है ।" ,धूम्रपान अल्जाइमर रोग के खतरे का एक महत्त्वपूर्ण कारक है । sg,तम्बाकू मुक्त बच्चों के लिए अभियान का दावा है कि धूम्रपान करने वालों की वजह से अमेरिकी उत्पादकता को प्रतिवर्ष 97.6 बिलियन डॉलर का नुकसान होता है और लगभग 96.7 बिलियन डॉलर सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य पर अतिरिक्त खर्च किया जाता है । ,यह सकल घरेलू उत्पाद के 1 % से भी अधिक है । sg,संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रतिदिन एक पैकेट से अधिक धूम्रपान करने वाला पुरुष अपने जीवन काल में औसतन 19000 डॉलर केवल अपनी चिकित्सा पर खर्च करता है । sg,अमेरिका में प्रतिदिन एक पैकेट से अधिक धूम्रपान करने वाली महिला भी अपने जीवन काल में औसतन 25800 डॉलर केवल अपनी अतिरिक्त स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च करती है । ,यह लागत अतिरिक्त राजस्व कर से अलग देखी जानी चाहिए जो धूम्रपान के कारण प्राप्त होता है । ,"धूम्रपान विभिन्न कला रूपों में संस्कृति में स्वीकार किया गया है और इसने कई अलग , अक्सर परस्पर विरोधी या परस्पर अलग , समय , स्थान और धूम्रपान करने वालों के अनुसार कई अर्थ विकसित किए हैं ।" ,"ये मच्छर आमतौर पर 350 उत्तर तथा 350 दक्षिण अक्षांस पर , 1000 मीटर से कम ऊंचाई पर होते हैं ।" ,ये अधिकतर दिन के समय काटते हैं । sg,इनके एक बार काटने से भी मानव संक्रमित हो सकता है । ,कभी - कभार मच्छरों को भी मानवों से डेंगू मिल सकता है । ,यदि मादा मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति को काट ले तो मच्छर को डेंगू वायरस मिल सकता है । sg,सबसे पहले वायरस उन कोशिकाओं में रहता है जो मच्छर के पेट में होती हैं । ,"लगभग 8 से 10 दिनों के बाद वायरस , मच्छर की लार ग्रंथियां जो लार ( या "" थूक "" ) बनाती हैं , उनमें संक्रमित हो जाते हैं ।" sg,इसका अर्थ है मच्छर द्वारा बनायी गयी लार डेंगू के वायरस से संक्रमित होती है । sg,इसलिये जब मच्छर मानव को काटते हैं तो इनकी संक्रमित लार मानव को संक्रमित कर सकती है । ,"वायरस उन संक्रमित मच्छरों के लिये कोई समस्या पैदा नहीं करते दिखते हैं , जो अपने पूरे जीवन भर संक्रमित रहेंगे ।" sg,"इस बात की संभावना सबसे अधिक होती है कि "" एडीज़ आएजेप्टी "" मच्छर डेंगू फैलाता है ।" ,ऐसा इसलिये कि क्योंकि ये मानवों के सबसे अधिक नज़दीक रहते हैं और जानवरों की बजाय मानवों पर जीते हैं । ,यह मानव - निर्मित पानी रखने के पात्रों में अंडे देना पसंद करते हैं । ,डेंगू संक्रमित रक्त उत्पादों तथा अंग दान द्वारा फैल सकता है । ,"यदि डेंगू से संक्रमित व्यक्ति रक्त दान या अंग दान करता है , जो किसी अन्य व्यक्ति को दिया जाता है , इस व्यक्ति को दान दिये गये रक्त या अंग से डेंगू हो सकता है ।" ,कुछ देशों जैसे सिंगापुर में डेंगू आम है । ,"इन देशों में , 10,000 रक्त आधानों में से 1.6 से 6 तक डेंगू फैलाते हैं ।" sg,गर्भावस्था के दौरान या बच्चे को जन्म देते समय डेंगू वायरस माँ से बच्चे में भी फैल सकता है । ,डेंगू आमतौर पर किन्ही और तरीकों से नहीं फैलता है । ,डेंगू से पीड़ित वयस्कों से अधिक शिशुओं तथा बच्चों में बीमारी की गंभीरता होने की अधिक संभावना होती है । ,"कुछ रोगियों में , बुखार किसी दवा से एलर्जी के कारण भी हो सकता है ।" ,चिकित्सक को इस संभावना को भी ध्यान में रखना चाहिए कि टीबी का निदान गलत किया जा रहा है । ,"अगर रोगी के उपचार को दो सप्ताह से ज्यादा समय हो चुका है और बुखार शुरू में चला गया था , फिर से हो गया है , तो ऐसी स्थिति में टीबी की सभी दवाओं को 72 घंटे के लिए रोक देना उचित है ।" ,"अगर टीबी की सभी दवाएं बंद कर देने के बाद भी बुखार बना रहता है , तो बुखार दवाओं के कारण नहीं है ।" ,अगर दवाएं बंद करने से बुखार चला जाता है तो अलग अलग हर दवा का परीक्षण किया जाना चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन सी दवा बुखार का कारण है । ,दवा से होने वाले हैपेटाइटिस के लिए भी इसी तरीके ( नीचे वर्णित ) का उपयोग किया जाता है । ,अक्सर यह बात सामने आती है कि बुखार के लिए उत्तरदायी दवा आरएमपी होती है : इसका विस्तृत विवरण रिफाम्पिसिन पर प्रविष्टि में दिया गया है । sg,"टीबी के इलाज से होने वाली एकमात्र सबसे बड़ी समस्या है दवाओं के कारण हैपेटाइटिस हो जाना , जिसमें मृत्यु दर लगभग 5 प्रतिशत होती है ।" ,"तीन दवाएं हैपेटाइटिस को प्रेरित कर सकती हैं : पीजेडए , आईएनएच और आरएमपी ( आवृति के घटते हुए क्रम में ) ।" ,लक्षणों के आधार पर इन तीन कारणों के बीच विभेदन करना सम्भव नहीं है । ,कौन सी दवा इसके लिए उत्तरदायी है इसकी जांच के लिए परीक्षण खुराक दी जानी चाहिए ( इसका विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है ) । ,"उपचार की शुरुआत में लीवर फंक्शन टेस्ट ( एलएफटी ) किया जाना चाहिए , लेकिन , अगर यह सामान्य है तो दुबारा इसकी जांच करने की आवश्यकता नहीं होती ।" ,रोगी को केवल हैपेटाइटिस के लक्षणों के बारे में चेतावनी दे दी जाती है । ,"कुछ चिकित्सक उपचार के दौरान एलएफटी के नियमित परीक्षण पर जोर देते हैं और इस मामले में , परीक्षण उपचार शुरू किये जाने के दो सप्ताह बाद ही किया जाता है और इसके बाद हर दो महीने बाद यह जांच की जाती है , जब तक कोई समस्या न दिखाई दे ।" ,आरएमपी उपचार के साथ बिलीरूबिन के बढ़ने की संभावना होती है ( आरएमपी बिलीरूबिन के उत्सर्जन को अवरोधित करता है ) RD_PUNC sg,आमतौर पर यह समस्या 10 दिनों के बाद हल हो जाती है ( इसकी क्षतिपूर्ति के लिए यकृत के एंजाइमों का उत्पादन बढ़ जाता है ) । ,बिलीरूबिन के स्तर के बढ़ने की सुरक्षापूर्वक उपेक्षा की जा सकती है । ,उपचार के पहले तीन सप्ताहों में यकृत ट्रांसएमिनेस ( एएलटी और एएसटी ) का बढ़ना सामान्य है । ,यदि रोगी में ऐसे कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं और इनमें से किसी भी स्राव का स्तर बहुत अधिक नहीं बढ़ता है तो कोई कार्रवाई करने की जरुरत नहीं है । sg,"कुछ विशेषज्ञों का सुझाव है कि इनकी ऊपरी सामान्य सीमा से चार गुना वृद्धि को उपेक्षित किया जा सकता है , लेकिन इस संख्या के समर्थन में कोई प्रमाण नहीं है ।" sg,कुछ विशेषज्ञों का विचार है कि उपचार को केवल तभी रोका जाना चाहिए अगर पीलिया नैदानिक रूप से स्पष्ट हो जाये । ,अगर चिकित्सकीय रूप से स्पष्ट हेपेटाइटिस प्रकट होता है तो सभी दवाओं को तब तक रोक दिया जाना चाहिए जब तक यकृत ट्रांसएमिनेस का स्तर समान्य न हो जाये । ,तपेदिक उपचार ,तपेदिक उपचार शब्द का उपयोग संक्रामक रोग तपेदिक ( क्षय या टीबी ) के चिकित्सकीय उपचार के लिए किया जाता है । ,"अगर सक्रिय तपेदिक का उपचार न किया जाये , हर तीन में से लगभग दो रोगियों की मृत्यु हो जाती है ।" sg,"तपेदिक के जिन रोगियों का उपयुक्त उपचार किया जाता है , उनमें मृत्यु दर केवल 5 प्रतिशत होती है ।" ,"टीबी के लिए मानक उपचार में आइसोनियाज़िड , रिफाम्पिसिन ( इसे संयुक्त राज्य अमेरिका में रिफाम्पिन के नाम से भी जाना जाता है ) , पायराज़ीनामाईड और एथेमब्युटोल का उपयोग दो महीने के लिए किया जाता है ।" ,इसके बाद केवल आइसोनियाज़िड और रिफाम्पिसिन का उपयोग चार महीने के लिए किया जाता है । ,छह महीने बाद ऐसा माना जाता है कि रोगी का उपचार पूरा हो गया है । ,( हालांकि अभी भी 2 से 3 प्रतिशत मामलों में रोग के फिर से होने की संभावना होती है ) । ,इस सुषुप्त ( शरीर में छुपे हुए ) तपेदिक के लिए छह से नौ महीने तक केवल आइसोनियाज़िड से मानक उपचार किया जाता है । ,"अगर जीव ( रोगकारक ) को पूरी तरह से संवेदनशील माना जाता है , तो पहले दो महीने के लिए आइसोनियाज़िड , रिफाम्पिसिन और पायराज़ीनामाईड से उपचार किया जाता है ।" ,उसके बाद चार महीने के लिए आइसोनियाज़िड और रिफाम्पिसिन से उपचार किया जाता है । ,एथेमब्युटोल का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं होती है । ,तपेदिक के उपचार में काम आने वाली सभी पहली पंक्ति की दवाओं के मानक नाम अंग्रेजी के तीन अक्षरों के हैं और इनका संक्षिप्त रूप केवल एक अक्षर का है । ,"संयुक्त राज्य अमेरिका में सामान्यतः ऐसे नामों और संक्षिप्त रूपों का उपयोग किया जाता है , जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य नहीं हैं : रिफाम्पिसिन को रिफाम्पिन कहा जाता है और इसका संक्षिप्त रूप RIF है ।" ,स्ट्रेप्टोमाइसिन को आमतौर पर इसके संक्षिप्त रूप SM से जाना जाता है । ,इसी तरह से दवाओं के नामों का संक्षिप्तीकरण भी एक मानक तरीके से ही किया जाता है । sg,"दवाओं की सूची उनके एक अक्षर वाले संक्षिप्त रूप का उपयोग करके बनायी जाती है ( ऊपर दिए गए क्रम में , जो मोटे तौर पर चिकित्सकीय उपयोग में उन्हें काम में लेने का क्रम है ) ।" ,"इसके आगे एक संख्या उपसर्ग लगाया जाता है , जो उपचार के महीनों की संख्या को बताता है ।" ,एक सबस्क्रिप्ट आंतरायिक खुराक को बताता है ( जैसे so का अर्थ है एक सप्ताह में तीन बार ) और अगर कोई सबस्क्रिप्ट नहीं लगाया जाता तो इसका अर्थ है कि दवा की खुराक रोज दी जाएगी । ,"अधिकांश उपचार प्रक्रियाओं में शुरुआत में उच्च तीव्रता की प्रावस्था होती है , जिसके बाद एक निरंतर प्रावस्था होती है ( इसे एक समेकन प्रावस्था या उन्मूलन प्रावस्था भी कहा जाता है ) ।" ,"उच्च तीव्रता की प्रावस्था पहले दी जाती है , इसके बाद निरंतर प्रावस्था दी जाती है , दोनों प्रवास्थाओं को एक स्लेश के निशान के द्वारा अलग अलग कर दिया जाता है ।" sg,"इसलिए इसका अर्थ है आइसोनियाज़िड , रिफाम्पिसिन , एथेमब्युटोल और पायराज़ीनामाईड रोज दो महीने के लिए इसके बाद आइसोनियाज़िड और रिफाम्पिसिन एक सप्ताह में तीन बार दी जाती हैं ।" ,इन मानक संक्षिप्त रूपों का उपयोग इस लेख के शेष हिस्से में किया गया है । pl,दूसरी पंक्ति की दवाओं के छह वर्ग हैं जिनका उपयोग टीबी के उपचार में किया जाता है । ,"तीन संभव कारणों से एक दवा को पहली पंक्ति के बजाय दूसरी पंक्ति में वर्गीकृत किया जाता है : यह पहली पंक्ति की दवा से कम प्रभावी हो सकती है ( उदाहरण , "" p "" - एमोनी सेलिसिलिक एसिड ) ; या , इसके कोई विषैले पार्श्व प्रभाव हो सकते हैं ( उदाहरण : साइकलोसेरिन ) ; या यह कई विकासशील देशों में उपलब्ध नहीं हो सकती है ( उदाहरण फ्लोरोक्विनोलोनेस ) ।" ,"अन्य दवाएं जो उपयोगी हो सकती हैं , परन्तु WHO की SLD की सूची में नहीं हैं :" ,"इन दवाओं को "" तीसरी पंक्ति की दवाएं "" माना जाता है और इन्हें यहां इसलिए सूचीबद्ध किया गया है क्योंकि वे या तो बहुत अधिक प्रभावी नहीं हैं ( उदहारण , क्लेरीथ्रोमाइसिन ) या क्योंकि उनकी प्रभाविकता अब तक साबित नहीं हुई है ( उदाहरण , लाइनज़ोलिड , R207910 ) ।" ,"रीफाब्युटिन प्रभावी है , लेकिन इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) की सूची में शामिल नहीं किया गया है क्योंकि अधिकांश विकासशील देशों के लिए यह गैर - व्यावहारिक रूप से महंगी है ।" sg,50 सालों से ज्यादा समय से तपेदिक का उपचार संयोजन चिकित्सा के द्वारा किया जाता रहा है । ,"किसी दवा को अकेले इस्तेमाल नहीं किया जाता है ( सुषुप्त टीबी या कीमोप्रोफाइलेक्सिस के अलावा ) और जिन दवाओं को अकेले इस्तेमाल किया जाता है , उनके प्रति शरीर में तेजी से प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है और उपचार असफल रहता है ।" sg,टीबी के उपचार के लिए कई दवाओं का एक साथ इस्तेमाल संभाव्यता पर आधारित है । ,"स्वतः उत्परिवर्तन की आवृति , जिसके परिणामस्वरूप एक विशेष दवा के लिए प्रतिरोध उत्पन्न हो जाता है , वह है : EMB के लिए 10 में एक , STM और INH के लिए 10 में 1 और RMP के लिए 10 में 1 ।" ,"जिस रोगी को व्यापक फुफ्फुसीय टीबी होता है , उसके शरीर में लगभग 10 जीवाणु होते हैं और इनमें संभवतया 10 EMB प्रतिरोधी जीवाणु , 10 STM प्रतिरोधी जीवाणु , 10 INH प्रतिरोधी जीवाणु और 10 RMP प्रतिरोधी जीवाणु होते हैं ।" ,"प्रतिरोध के उत्परिवर्तन अनायास और स्वतंत्र रूप से प्रकट होते हैं , इसलिए उसके एक ऐसे जीवाणु की शरण में जाने की संभावना , जो INH और RMP दोनों के लिए स्वतः प्रतिरोधी है , होती है ।" sg,10 में 1 x 10 में 1 = 10 में 1 और उसके एक ऐसे जीवाणु की शरण में जाने की सम्भावना 10 में 1 होती है जो सभी चारों दवाओं के लिए अनायास प्रतिरोधी हो जाये । ,"यह निश्चित रूप से , एक सरलीकरण है , परन्तु यही संयोजन चिकित्सा को स्पष्ट करने का एक सही तरीका भी है ।" ,पोलियो वैक्सीन ,दुनियाभर में पोलिओम्येलितिस ( या पोलिओ ) का मुकाबला करने के लिए दो पोलियो वैक्सीन का प्रयोग किया जाता है । ,पहला जोनास सॉल्क द्वारा विकसित किया गया और 1952 में उसका पहला परीक्षण किया गया । ,"1955 , अप्रैल 12 को सॉल्क द्वारा दुनिया को इसकी घोषणा की गयी कि , यह निष्क्रिय ( मरे हुए ) पोलियो वायरस के इंजेक्शन की खुराक होते हैं ।" ,एक मौखिक टीका अल्बर्ट साबिन द्वारा तनु ( कमजोर किये गए ) पोलियो वायरस का उपयोग करके विकसित किया गया । ,साबिन के टीके का मानव परीक्षण १९५७ में शुरू किया गया और इसने १९६२ में लाइसेंस प्राप्त किया । ,"चूँकि साधारणतः असंक्राम्य व्यक्तियों में पोलिओ वायरस की कोई दीर्घकालिक वाहक परिस्थिति नहीं है और , पोलियो वायरस का प्रकृति में कोई गैर रिहायशी भण्डारण नहीं है और पर्यावरण में इस वायरस का एक समय की विस्तारित अवधि के लिए अस्तित्व बनाये रखना मुश्किल है ।" sg,"इसलिए , टीकाकरण के द्वारा वायरस का व्यक्ति से व्यक्ति में संचरण की रोकथाम वैश्विक पोलियो उन्मूलन का एक महत्वपूर्ण कदम है ।" ,"इन दो टीकों द्वारा दुनिया के सबसे अधिक देशों से पोलियो का उन्मूलन किया गया है और दुनियाभर में पोलियो के मामले , अनुमानित , १९८८ में ३५०,००० से घटकर २००७ में १,६५२ रह गए हैं ।" sg,"सामान्य अर्थ में , टीकाकरण रोग प्रतिरोगी तंत्र को ' immunogen ' ( रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले तत्त्व ) के द्वारा तैयार करता है ।" ,"प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को , एक संक्रामक एजेंट के माध्यम से , उत्तेजित करने की प्रक्रिया को प्रतिरक्षण ( immunization ) के रूप में जाना जाता है ।" sg,"टीकाकरण द्वारा पोलियो के प्रति रोग क्षमता को विकसित करने से जंगली पोलियो वायरस का व्यक्ति से व्यक्ति संचरण कुशलतापूर्वक ब्लॉक हो जाता है , जिससे व्यक्तिगत टीका प्राप्तकर्ताओं और व्यापक समुदाय , दोनों की सुरक्षा होती है ।" ,"1936 में , मौरिस ब्रोदिए ने , जो कि न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में एक अनुसंधान सहायक थे , एक मुलभुत बन्दर स्पिनल कॉर्ड से एक formaldehyde द्वारा मारे गए पोलियो टीके का निर्माण करने का प्रयास किया ।" pl,उनके प्रारंभिक प्रयास पर्याप्त वायरस प्राप्त न कर पाने के कारण अवरुद्ध हुए । ,ब्रोदिए ने सबसे पहले उस टीके का परीक्षण अपने आप पर और अपने कई सहायकों पर किया । ,"उसके बाद उन्होंने वह teeka तीन हज़ार बच्चों को दिया , जिनमें से कई बच्चों को प्रतिक्रियात्मक एलर्जी हुई , लेकिन किसी में भी पोलियो प्रतिरोधकता विकसित नहीं हुई ।" ,"फिलाडेल्फिया के रोगविज्ञानी जॉन कोल्मेर ने भी उसी वर्ष एक teeka बनाने का दावा किया , लेकिन उससे भी प्रतिरोधकता उत्पन्न नहीं हुई और उन्हें कई मामले प्रवृत करने का दोषी ठहराया गया , जिनमें से कुछ जानलेवा थे ।" ,एक सफलता 1948 में मिली जब जॉन एंडर्स की अध्यक्षता में एक शोध समूह ने बोस्टन चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में मानव ऊतकों पर पोलियो वायरस सफलतापूर्वक उगा दिया । ,इस बढ़त ने वैक्सीन अनुसंधान में बहुत मदद की और अंततः पोलियो के खिलाफ टीके का विकास करना मुमकिन बना दिया । ,"एंडर्स और उनके सहयोगियों , थॉमस एच. सी. वेलर और फ्रेडरिक रॉबिंस द्वारा की गयी मेहनत को मान्यता देने के लिए उन्हें वर्ष १९५४ में फिजियोलॉजी या चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार दिया गया ।" ,"पोलियो वायरस के विकास के अन्य महत्वपूर्ण अग्रगणि थे : तीन पोलियो वायरस ( serotype ) की पहचान ( पोलियो वायरस प्रकार १ - PV1 , या Mahoney ; PV2 , Lansing और PV3 , Leon ) ।" ,यह निष्कर्ष कि पक्षाघात से पहले वायरस का रक्त में मौजूद होना ज़रूरी है और यह स्पष्टीकरण कि एंटीबॉडी की खुराक गामा - ग्लोबुलिन के रूप में लेने से पक्षाघाती पोलियो से बचा जा सकता है । ,दो पोलियो टीकों के विकास के मार्गदर्शन में पहले आधुनिक बहुसंख्यक टीकों तक पहुंचे । ,"संयुक्त राज्य अमेरिका में जंगली वायरस के स्थानिक संचरण के कारण लकवाग्रस्त पोलिओम्येलितिस के प्रकोप के कुछ आखिरी मामले वर्ष 1979 में मिडवेस्ट के भिन्न राज्यों , जिनमें से अमिश भी एक था , में दर्ज किये गए ।" ,"विश्व स्वास्थ्य संगठन , यूनिसेफ और रोटरी फाउंडेशन के नेतृत्व में १९८८ में पोलियो के उन्मूलन के लिए एक वैश्विक प्रयास शुरू किया गया , जो कि मुख्य रूप से अल्बर्ट साबिन के मौखिक वैक्सीन पर निर्भर था ।" ,यह रोग अमेरिका से १९४४ में पूरी तरह मिटा दिया गया । ,"2000 में ऑस्ट्रेलिया और चीन सहित , ३६ पश्चिमी प्रशांत के देशों से पोलियो आधिकारिक तौर पर मिटा दिया गया था ।" ,यूरोप 2002 में पोलियो मुक्त घोषित किया गया । ,"२००८ तक , पोलियो केवल इन चार देशों में स्थानिक रह गया : नाइजीरिया , भारत , अफगानिस्तान और पाकिस्तान ।" ,"हालांकि पोलियो वायरस संचरण दुनिया के बहुत बड़े हिस्से में बाधित कर दिया गया है , किन्तु जंगली पोलियो वायरस का संचरण जारी है और पहले से पोलियो मुक्त क्षेत्रों में जंगली पोलियो वायरस के आयातित होने का निरंतर ख़तरा बना हुआ है ।" ,"अगर पोलियो वायरस आयातित होता है तो , पोलियो का प्रकोप फ़ैल सकता है , खासतौर पर उन क्षेत्रों में जहाँ कम टीकाकरण कवरेज है और पर्याप्त स्वच्छता नहीं है ।" ,"अतः , टीकाकरण कवरेज के उच्च स्तरों को बनाए रखा जाना चाहिए ।" ,पहला प्रभावी पोलियो वैक्सीन पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय में 1952 में जोनास सॉल्क द्वारा विकसित किया गया था । ,लेकिन इसको वर्षो के परीक्षण की आवश्यकता थी । ,"धैर्य बंधाने के लिए सॉल्क ने 26 मार्च 1953 को रेडियो सीबीएस पर वयस्कों और बच्चों के एक छोटे से समूह पर सफल परीक्षण किये जाने की घोषणा की , दो दिन बाद उस परीक्षण के नतीजे JAMA में प्रकाशित किये गए ।" ,"सॉल्क वैक्सीन , या निष्क्रिय पोलियोवायरस टीके ( आइपीवी ) , तीन जंगली विषमय उपभेदों पर आधारित है ।" ,"Mahoney ( प्रकार 1 पोलियो वायरस ) , MEF - 1 ( प्रकार 2 पोलियो वायरस ) और Saukett ( प्रकार 3 पोलियो वायरस ) , जिन्हें बन्दर के गुर्दे के ऊतक समूह ( वेरो सेल रेखा ) के एक प्रकार में उगाया गया था और उसके बाद उन्हें फोर्मलिन से निष्क्रिय किया गया ।" ,"इंजेक्शन सॉल्क वैक्सीन आईजीजी के माध्यम से रक्तप्रवाह में प्रतिरक्षा प्रदान करता है , जो कि पोलियो के संक्रमण को बढ़ाकर विषाणुरक्तता में बदलने से रोकता है और मोटर नुरोंस की रक्षा करता है और इस प्रकार कंदाकार पोलियो एवं पोस्ट पोलियो सिंड्रोम के जोखिम को ख़त्म कर देता है ।" ,"1954 में इस वैक्सीन का Arsenal Elementary स्कूल और वाटसन होम फॉर चिल्ड्रेन पिट्सबर्ग , पेंसिल्वेनिया में परीक्षण किया था ।" ,फिर सॉल्क के टीके का इस्तेमाल थोमस फ्रांसिस के नेतृत्व में Francis Field Trial नामक एक परीक्षण में किया गया जो कि इतिहास का सबसे बड़ा चिकित्सा परीक्षण था । ,"परीक्षण की शुरुआत कुछ ४००० बच्चों के साथ Franklin Sherman Elementary School , मक्लेँ , वेर्जिनिया में की गयी ।" pl,जिसमें कि आगे चलकर Maine से लेकर कैलिफोर्निया तक ४४ राज्यों के १८ लाख बच्चे शामिल होने थे । ,"अध्ययन के ख़त्म होने तक , लगभग 440,000 बच्चों को एक या एक से अधिक टीके का इंजेक्शन दिया जा चुका था ।" ,"२१०,००० बच्चों को प्लासेबो , जिसमें हानिरहित मीडिया समूह शामिल था , दिया जा चुका था , और 12 लाख बच्चे जिन्हें कोई भी टीका नहीं लगाया गया था ।" ,"वे एक नियंत्रण समूह की भूमिका में थे , जिसका फिर निरीक्षण किया गया यह देखने के लिए कि किसी को पोलियो हुआ है या नहीं ।" ,"क्षेत्र परीक्षण के परिणामों की घोषणा 12 अप्रैल 1955 ( फ्रेंकलिन डी. रूजवेल्ट की मौत की दसवें सालगिरह ; देखिये , फ्रेंकलिन डी. रूजवेल्ट की लकवे की बीमारी ) को की गयी थी ।" ,"सॉल्क वैक्सीन PV1 1 ( प्रकार 1 पोलियो वायरस ) के विरुद्ध 60 से ७० % कारगर है , PV2 और PV3 के विरुद्ध ९० प्रतिशत से ज्यादा कारगर है , और कंदाकार पोलियो के विकास के विरुद्ध ९४ प्रतिशत तक कारगर है ।" ,सॉल्क वैक्सीन को 1955 में लाइसेंस दिए जाने के बाद जल्द ही बच्चों का टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया गया । pl,"अमेरिका में , March of Dimes के द्वारा प्रचारित सामूहिक प्रतिरक्षण टीकाकरण अभियान का अनुसरण करते हुए , पोलियो के सालाना मामले १९५७ में ५६०० तक गिर गए ।" pl,१९६१ तक संयुक्त राज्य अमेरिका में केवल १६१ मामले दर्ज हुए । ,"नवंबर 1987 में , संयुक्त राज्य अमेरिका में एक अधिक प्रबल आइपीवी को लाइसेंस दिया गया और वर्त्तमान में वह संयुक्त राज्य अमेरिका का चुनिन्दा विकल्प है ।" ,"पोलियो टीके की पहली खुराक जन्म के बाद शीघ्र ही , आमतौर पर १ से २ महीने की उम्र के बीच और , एक दूसरी खुराक 4 महीने की उम्र में दी जाती है ।" ,"तीसरी खुराक का समय टीका निरूपण पर निर्भर करता है , लेकिन यह ६ से १८ महीने की उम्र के बीच दे देना चाहिए ।" ,"४ से ६ साल की उम्र के बीच एक बूस्टर टीका दिया जाता है , जो कि स्कूल जाने तक या उस से पहले दिए जाने वाले कुल ४ टीकों में होता है ।" ,"कुछ देशों में , किशोरावस्था के दौरान एक पांचवाँ टीकाकरण दिया जाता है ।" ,विकसित देशों में वयस्कों ( 18 साल और उससे बड़ी आयु ) का नियमित टीकाकरण न तो ज़रूरी है और न ही इसकी सलाह दी जाती है क्योकि ज्यादातर व्यस्क या तो पहले से ही उन्मुक्त हैं या फिर जंगली पोलियो विषाणु के प्रति उनकी अरक्षितता का जोखिम बहुत कम है । ,"स्टेरॉयड पेरिटोनिटिस , मिलियरी रोग , स्वरयंत्र का टीबी , लिम्फेडेनीटिस और मूत्रजन यह पूर्ण रूप से प्रमाणित नहीं है और स्टेरॉयड के नियमित उपयोग की सलाह नहीं दी जा सकती ।" sg,इन रोगियों में स्टेरॉयड उपचार का उपयोग मामले पर निर्भर करता है जिसका फैसला चिकित्सक के द्वारा किया जाता है । ,थेलिडोमाइड टीबी मैनिंजाइटिस में लाभकारी हो सकता है और इसका उपयोग उन मामलों में किया गया है जिनमें रोगी स्टेरॉयड उपचार के लिए प्रतिक्रिया नहीं देता । ,"जो रोगी टीबी का उपचार नियमित रूप और भरोसे के साथ नहीं करते हैं , उनमें उपचार की विफलता की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है , उनमें रोग के फिर से होने , या दवा प्रतिरोधी टीबी विभेद उत्पन्न हो जाने की संभावना भी बहुत अधिक होती है ।" ,ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से रोगी अपना इलाज पूरा नहीं ले पाते । ,आमतौर पर टीबी के लक्षण उपचार शुरू होने के कुछ सप्ताह में ही कम होने लगते हैं और इस समय कई रोगी लापरवाह हो जाते हैं और दवा लेना बंद कर देते हैं । ,"इसके पूरे उपचार के लिए निरंतर दवा लेना जरुरी है , समय समय पर यह जांच भी की जानी चाहिए कि रोगी में कोई समस्या तो उत्पन्न नहीं हो रही है ।" ,रोगियों को यह बताया जाना जरूरी है कि उन्हें नियमित रूप से अपनी दवा लेनी चाहिए । ,"उपचार को पूरा किया जाना बहुत महत्वपूर्ण है , क्योंकि ऐसा न करने से रोग फिर से हो सकता है और दवा के लिए प्रतिरोध भी उत्पन्न हो सकता है ।" sg,इसमें एक मुख्य शिकायत यह रहती है कि इसकी गोलियां बहुत बड़ी होती हैं । ,सबसे बड़ी पीजेडए है ( होर्स टेबलेट का आकार ) ,"इसकी जगह पीजेडए विकल्प के रूप में सिरप भी दिया जा सकता है , या और अगर गोली का आकार वास्तव में बहुत बड़ा है और इसका सिरप विकल्प उपलब्ध नहीं है तो पीजेडए को पूरी तरह से हटाया जा सकता है ।" ,"अगर पीजेडए को हटा दिया जाता है , तो रोगी को यह चेतावनी दी जानी चाहिए कि इससे रोग के ठीक होने की अवधि बढ़ सकती है ( पीजेडए को हटाने के परिणामों को विस्तारपूर्वक नीचे बताया गया है ) ।" ,एक दूसरी शिकायत यह रहती है कि इस दवा को खाली पेट लेने की सलाह दी जाती है जिससे इसका अवशोषण जल्दी हो । ,"यह रोगियों के लिए कई बार मुश्किल हो जाता है ( उदाहरण के लिए , पारी में काम करने वाले लोग जो अपना भोजन अनियमित समय पर खाते हैं ) और इसलिए रोगी को सिर्फ दवा लेने के लिए अपनी दिनचर्या से एक घंटा जल्दी जागना पड़ता है ।" ,ये नियम वास्तव में इतने कड़े नहीं हैं जितना कि अक्सर चिकित्सकों के द्वारा बताये जाते हैं । ,"वास्तव में बात यह है कि अगर आरएमपी को वसा के साथ लिया जाये तो इसके अवशोषण की गति धीमी हो जाती है , लेकिन प्रोटीन , कार्बोहाइड्रेट और अम्लरोधी इसके अवशोषण को प्रभावित नहीं करते हैं ।" pl,"सितम्बर 2006 की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद से , अब दक्षिण अफ्रीका के अधिकांश प्रान्तों में मामले सामने आये हैं ।" ,"16 मार्च 2007 , तक 314 मामले दर्ज किये जा चुके थे , जिनमें से 215 की मृत्यु हो गयी ।" ,"यह स्पष्ट है कि टीबी के इस उपभेद का प्रसार एचआईवी और संक्रमण के अपर्याप्त नियंत्रण से सम्बंधित है ; अन्य देशों में जहां XDR - TB के उपभेद उत्पन्न हुए हैं , मामले का उपयुक्त प्रबंधन न किये जाने के कारण दवा के लिए प्रतिरोध विकसित हुआ ।" ,या रोगी के द्वारा उपचार को ठीक प्रकार से न लेने के कारण ऐसा हुआ । sg,"टीबी का यह उपभेद पहली और दूसरी पंक्ति के लिए , दक्षिण अफ्रीका में वर्तमान में उपलब्ध किसी भी दवा के लिए प्रतिक्रिया नहीं देता ।" ,अब यह स्पष्ट है कि इस समस्या को अधिकारियों के द्वारा बताये गए समय से अधिक समय हो चुका है और यह उससे कहीं अधिक व्यापक है । ,"23 नवम्बर 2006 तक XDR - TB के 303 मामले दर्ज किये जा चुके हैं , जिनमें से 263 मामले क्वाजुलू - नेटल में दर्ज किये गए ।" ,"टीबी के रोगियों को अलग रखा जाना एक गंभीर विचार है , कई लोगों के अनुसार यह रोगी के मानव अधिकारों का उल्लंघन है , लेकिन टीबी के इस उपभेद के आगे प्रसार को रोकने के लिए यह आवश्यक हो सकता है ।" ,MDR - टीबी का उपचार और निदान संक्रमण के बजाय बहुत कुछ कैंसर से मिलता जुलता है । sg,"इसमें मृत्यु दर 80 प्रतिशत तक है , जो कई कारकों पर निर्भर करती है , इन कारकों में शामिल हैं ।" ,"उपचार की अवधि कम से कम 18 महीने की होती है और इसमें एक साल भी लग सकता है ; इसमें शल्य चिकित्सा की आवश्यकता भी पड़ सकती है , हालांकि इष्टतम उपचार के बावजूद मृत्यु दर अधिक होती है ।" ,"उस ने कहा , अच्छे परिणाम अभी भी संभव हैं ।" ,उपचार कम से कम 18 माह की अवधि का होता है और इसमें प्रत्यक्ष प्रेक्षण का अवयव उपचार की सफलता को 69 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है । ,MDR - टीबी का इलाज ऐसे चिकित्सक से ही लेना चाहिए जो MDR - टीबी के उपचार में अनुभवी हो । sg,विशेषज्ञ केन्द्रों में उपचार लेने वाले रोगियों की तुलना में गैर विशेषज्ञ केन्द्रों में उपचार लेने वाले रोगियों में मृत्यु दर अधिक पाई गयी है । ,"स्पष्ट जोखिम के अलावा ( अर्थात MDR - टीबी के रोगी में ज्ञात जोखिम ) अन्य जोखिम भी देखे जाते हैं जैसे पुरुष लिंग , एचआईवी संक्रमण , पहले भी टीबी का हो चुका होना , टीबी का उपचार असफल होना , मानक टीबी के उपचार के लिए प्रतिक्रिया न होना और टीबी के मानक उपचार के बाद रोग का फिर से हो जाना ।" ,MDR - टीबी का उपचार संवेदनशीलता परीक्षण के आधार पर किया जाना चाहिए : इस जानकारी के बिना ऐसे रोगियों का उपचार असंभव है । ,अगर MDR - टीबी के संदिग्ध रोगी का उपचार किया जा रहा है तो रोगी का उपचार प्रयोगशाला संवेदनशीलता परीक्षण के आधार पर SHREZ + MXF + साइक्लोसेरीन के साथ शुरू किया जाना चाहिए । ,"कुछ देशों में "" rpoB "" के लिए एक जीन जांच उपलब्ध है और यह MDR - टीबी के लिए एक उपयोगी मार्कर का काम करता है ।" ,क्योंकि आइसोलेटेड आरएमपी प्रतिरोध दुर्लभ है ( ऐसी स्थिति को छोड़कर जब रोगी का उपचार पहले कभी केवल रिफाम्पिसिन के साथ किया जा चुका हो । ,"अगर जीन जांच ( "" rpoB "" ) के परिणाम सकारात्मक आते हैं तो आरएमपी को हटा कर SHEZ + MXF + साइक्लोसेरीन का उपयोग किया जाना चाहिए ।" sg,MDR - टीबी के संदेह के बावजूद रोगी को INH पर रखने का कारण यह है कि INH टीबी के उपचार में इतनी शक्तिशाली है कि इसे हटाना मूर्खता होगी जब तक इस बात का सूक्ष्मजैविक प्रमाण न मिल जाये कि यह अप्रभावी है । ,"आइसोनियाज़िड - प्रतिरोध के लिए भी जांच उपलब्ध है ( "" katG "" और "" mabA - inhA "" ) , लेकिन ये अधिक व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं हैं ।" ,"जब संवेदनशीलता ज्ञात हो जाती है और आइसोलेट को निश्चित रूप से INH और RMP दोनों के लिए प्रतिरोधी पाया जाता है , पांच दवाओं को निम्नलिखित क्रम में चुना जाना चाहिए ( ज्ञात संवेदनशीलताओं के आधार पर ) ।" ,"दवाओं को सूची में सबसे ऊपर रखा जाता है क्योंकि वे अधिक प्रभावी और कम विषाक्त हैं ; दवाओं को सूची में सबसे नीचे रखा जाता है क्योंकि वे कम प्रभावी और अधिक विषाक्त हैं , या उन्हें प्राप्त करने में कठिनाई होती है ।" ,"एक वर्ग के भीतर एक दवा के लिए प्रतिरोध का अर्थ है कि आमतौर पर उस वर्ग में सभी दवाओं के लिए प्रतिरोध होता है , परन्तु रिफाम्पिसिन एक उल्लेखनीय अपवाद है ।" ,रिफाम्पिसिन के लिए प्रतिरोध का तात्पर्य हमेशा रीफाब्युटिन से प्रतिरोध नहीं होता और प्रयोगशाला में इसकी जांच के लिए कहा जाता है । ,दवा के प्रत्येक वर्ग में केवल एक दवा का उपयोग करना ही संभव है । ,यदि उपचार के लिए पांच दवाएं ढूंढना मुश्किल है तो चिकित्सक इस बात का अनुरोध कर सकता है कि उच्च स्तरीय INH - प्रतिरोध की जांच की जाये । ,"अगर उपभेद में केवल निम्न स्तर का INH - प्रतिरोध है ( प्रतिरोध 1.0 mg / l INH पर , परन्तु 0.2 mg / l INH पर संवेदी ) तो INH की ऊंची खुराक का उपयोग उपचार के एक हिस्से के रूप में किया जा सकता है ।" ,"दवाओं को जारी रखने के साथ , PZA और इंटरफेरॉन का काउंट शून्य हो जाता है ; अर्थात , चार दवाओं के साथ PZA को शामिल करने से , आप पांच करने के लिए एक दवा का चयन और कर सकते हैं ।" ,"एक से अधिक इंजेक्शन वाली दवा का उपयोग करना संभव नहीं होता ( STM , केप्रिओमाइसिन या एमिकासिन ) , क्योंकि इन दवाओं का विषाक्त प्रभाव थोड़ा बहुत हो सकता है ।" ,"अगर संभव हो , एमिनोग्लाइकोसाइड्स प्रतिदिन कम से कम तीन महीने के लिए दी जानी चाहिए ( और संभवतया इसके बाद सप्ताह में तीन बार ) ।" ,सिप्रोफ्लोक्सासिन का उपयोग ट्यूबरकुलोसिस के उपचार में नहीं किया जाना चाहिए अगर अन्य फ्लोरोक्विनोलोन उपलब्ध हों । ,"MDR - टीबी में उपयोग के लिए कोई आंतरायिक उपचार नहीं है , परन्तु चिकित्सकीय अनुभव यह है कि सप्ताह में पांच दिन के लिए इंजेक्शन से दी जाने वाली दवाओं ( क्योंकि सप्ताहांत पर दवा देने के लिए कोई भी उपलब्ध नहीं होता है ) का बुरा परिणाम नहीं होता ।" ,प्रत्यक्ष प्रेक्षित थेरेपी निश्चित रूप से MDR - टीबी के परिणामों में सुधार करने में मदद करती है और इसे MDR - टीबी के उपचार का एक अभिन्न हिस्सा माना जाना चाहिए । ,"उपचार के लिए क्या प्रतिक्रिया हो रही है , इसका पता लगाने के लिए बार बार थूक का कल्चर किया जा सकता है ( अगर संभव हो तो हर माह इसे करना चाहिए ) ।" ,बच्चे यदि अच्छी तरह से पोषित हों तो उनके गंभीर रूप से बीमार होने की अधिक संभावना है ( यदि वे स्वस्थ हैं तथा अच्छी तरह से पोषित हैं ) । ,"( यह अन्य दूसरे संक्रमणों से भिन्न है जो कुपोषित , अस्वस्थ , या अच्छे पोषण की कमी वाले बच्चों में अधिक गंभीर होते हैं । )" sg,महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में गंभीर बीमारी की संभावना अधिक होती है । ,पुरानी ( दीर्घ - अवधि की ) बीमारियां जैसे मधुमेह तथा अस्थमा वाले लोगों में डेंगू जीवन के लिये खतरा हो सकता है । sg,जब मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो इसकी लार मानव की त्वचा में प्रवेश कर जाती है । ,यदि मच्छर को डेंगू है तो वायरस इसकी लार में होता है । sg,इसलिये जब मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो वायरस मच्छर की लार के साथ व्यक्ति की त्वचा में प्रविष्ट हो जाता है । ,वायरस व्यक्ति की श्वेत रक्त कणिकाओं से जुड़ कर उनमें प्रवेश कर जाता है ( श्वेत रक्त कणिकाओं को संक्रमण जैसे खतरों से निपटने के लिये सहायता करने का काम करना होता है ) । sg,जब श्वेत रक्त कणिकाएं शरीर में इधर - उधर जाती हैं तो वायरस पुर्नउत्पादन ( अपने प्रतिरूप पैदा करता है ) करता है । ,"श्वेत रक्त कणिकाएं कई तरह के संकेतों प्रोटीन ( तथाकथित माइटोकाइन ) के माध्यम से प्रतिक्रिया करती हैं जैसे इंटरल्यूकिन्स , इंटरफेरॉन तथा ट्यूमर परिगलन कारक ।" ,"इन प्रोटीन के कारण डेंगू के साथ बुखार , फ्लू जैसे लक्षण तथा गंभीर दर्द पैदा होते हैं ।" ,यदि किसी व्यक्ति को गंभीर संक्रमण है तो वायरस उसके शरीर में और अधिक तेज़ी से बढ़ता है । ,क्योंकि वायरस की संख्या बहुत अधिक है इसलिये ये कई और अंगों ( जैसे जिगर तथा अस्थि मज्जा ) को प्रभावित कर सकता है । ,छोटी रक्त केशिकाओं की दीवारों से रक्त रिस करके शरीर के कोटरों में चला जाता है । ,इस कारण से रक्त केशिकाओं में कम रक्त का प्रवाह ( या शरीर में कम रक्त का प्रवाह होता है ) होता है । sg,व्यक्ति का रक्तचाप इतना कम हो जाता है कि हृदय महत्वपूर्ण अंगों को पर्याप्त रक्त की आपूर्ति नहीं कर पाता है । sg,"साथ ही , अस्थि मज्जा पर्याप्त प्लेटलेट्स का निर्माण नहीं कर पाती है , जो रक्त का थक्का बनाने के लिये जरूरी है ।" sg,"पर्याप्त प्लेटलेट्स के बिना , व्यक्ति को रक्तस्राव होने की समस्या होने की काफी संभावना है ।" ,"रक्तस्राव , डेंगू के कारण पैदा होने वाली मुख्य जटिलता ( किसी भी बीमारी से होने वाली सबसे गंभीर समस्याओं में से एक ) है ।" ,"स्वास्थ्य सेवा पेशेवर आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति की जांच करके और यह देख कर कि उसके लक्षण डेंगू से मिलते हैं , डेंगू का निदान करते हैं ।" ,"स्वास्थ्य सेवा पेशेवर , इस प्रकार से डेंगू का निदान करने में उन क्षेत्रों में विशेष रूप से सक्षम हो सकते हैं जहां पर यह आम तौर पर होता है ।" ,"हालांकि , जब डेंगू प्रारंभिक अवस्था में होता है तो इसे अन्य वायरल संक्रमणों ( वायरस द्वारा होने वाले अन्य संक्रमण ) से अलग कर पाना कठिन होता है ।" ,किसी व्यक्ति को संभवतः डेंगू तब हो सकता है जब उसको बुखार हो तथा निम्न में से दो लक्षण हों : मतली और उल्टी ; लाल चकत्ते ; सामान्य दर्द ( पूरे शरीर में दर्द ) ; श्वेत रक्त कणिकाओं की कम संख्या ; या सकारात्मक टूर्निकेट परीक्षण । ,वे क्षेत्र जहां पर यह बीमारी आम है वहां पर कोई भी चेतावनी चिह्न तथा बुखार इस बात का संकेत है कि व्यक्ति को डेंगू है । ,चेतावनी चिह्न आम तौर पर डेंगू के गंभीर होने के पहले दिखने लगते हैं । ,टूर्निकेट परीक्षण तब काफी होता है जब कोई प्रयोगशाला परीक्षण नहीं किया जा सकता है । sg,टूर्निकेट परीक्षण में स्वास्थ्य सेवा पेशेवर रक्तचाप नापने वाले उपकरण का पट्टा व्यक्ति की बाहों के चारों ओर 5 मिनट तक बांधता है । ,फिर यदि उस व्यक्ति की त्वचा पर लाल धब्बे दिखें तो स्वास्थ्य सेवा पेशेवर उनकी गिनती करता है । sg,धब्बों की संख्या जितनी अधिक होगी व्यक्ति को डेंगू बुखार होने की संभावना उतनी अधिक होगी । ,चिकनगुनिया तथा डेंगू बुखार के बीच अंतर करना कठिन हो सकता है । ,चिकनगुनिया एक ऐसा वायरल संक्रमण है जिसमें डेंगू जैसे समान लक्षण होते हैं तथा यह भी विश्व के उन्ही हिस्सों में होता है । pl,"डेंगू के लक्षण अन्य बीमारियों मलेरिया , लेप्टोपाइरोसिस , टायफॉएड बुखार तथा मेनिंगोकॉक्कल रोग जैसे हो सकते हैं ।" ,"अक्सर , किसी व्यक्ति में डेंगू का निदान होने के पहले , उसके स्वास्थ्य सेवा पेशेवर इस बात को सुनिश्चित करने के लिये कि वह व्यक्ति इनमें से किसी एक परिस्थिति से पीड़ित न हो , कुछ परीक्षण करेंगे ।" ,जब किसी व्यक्ति को डेंगू होता है तो उसकी श्वेत रक्त कणिकाओं की कम संख्या का प्रयोगशाला परीक्षण में दिखना सबसे पहला परिवर्तन देखा जा सकता है । ,कम प्लेटलेट्स संख्या तथा चयापचय अम्लरक्तता ( मेटाबोलिक एसिडोसिस ) भी डेंगू के लक्षण हैं । ,यदि व्यक्ति को गंभीर डेंगू है तो ऐसे अन्य बदलाव भी होंगे जो रक्त का अध्ययन करने पर देखे जा सकते हैं । ,गंभीर डेंगू के कारण रक्त धाराओं से तरल का रिसाव हो सकता है । ,"जिसके कारण हीमोकॉन्सन्ट्रेशन ( रक्त में प्लाज़्मा - रक्त का तरल भाग , की कमी तथा लाल रक्त कणिकाओं की अधिकता ) हो सकता है ।" ,यह रक्त में एल्ब्युमिन के स्तर को भी कम करता है । ,कभी - कभार गंभीर डेंगू अधिक फुफ्फुस प्रवाह ( जिसमें रिसाव वाला द्रव्य फेफड़ों के आसपास एकत्र होता है ) या जलोदर ( रिसाव वाला द्रव्य पेट में एकत्र होने लगता है ) भी उत्पन्न करता है । ,यदि इसकी मात्रा पर्याप्त हो तो स्वास्थ्य सेवा पेशेवर इसे रोगी के परीक्षण के समय देख सकता है । ,कोई स्वास्थ्य सेवा पेशेवर डेंगू के शॉक सिंड्रोम को पहले ही देख सकता है यदि वह शरीर के भीतर द्रव्य देखने के लिये चिकित्सीय अल्ट्रासाउंड का उपयोग कर सके । ,"लेकिन बहुत सारे ऐसे क्षेत्रों में जहां पर डेंगू आम है , अधिकतर स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों तथा चिकित्सालयों में अल्ट्रासाउंड मशीनें नहीं होती हैं ।" sg,2009 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) नें डेंगू बुखार को दो प्रकारों में वर्गीकृत या विभाजित किया : सरल तथा गंभीर । ,इसके पहले 1997 में WHO ने रोग को अविभेदित तथा डेंगू बुखार में बांटा था । ,WHO ने तय किया कि डेंगू बुखार को विभाजित करने के इस पुराने तरीके को सरल करने की ज़रूरत है । ,इसने यह भी तय किया कि पुराना तरीका काफी सीमित था : इसमें वे सभी तरीके शामिल नहीं थे जिनसे डेंगू अपने को प्रस्तुत कर सकता था । ,हालांकि डेंगू वर्गीकरण का तरीका आधिकारिक रूप से बदला गया था लेकिन पुराना वर्गीकरण अभी भी प्रयोग किया जाता है । ,"WHO की पुरानी पद्धति में डेंगू रक्तस्रावी बुखार को चार चरणों में विभक्त किया गया था , जिनको ग्रेड I – IV कहा जाता था ।" pl,इसके पहले रोग के लिये भिन्न लोग भिन्न नाम उपयोग करते थे । ,लक्षण अक्सर 4 से 7 दिनों के बाद ही दिखते हैं । ,इस तरह यदि कोई व्यक्ति ऐसे क्षेत्र से लौटता है जहां डेंगू आम है और उसके लौटने के 14 दिन या उसके बाद उसको बुख़ार होता है या अन्य लक्षण दिखते हैं तो शायद उसको डेंगू नहीं है । pl,"अक्सर जब बच्चों को डेंगू बुख़ार होता है तो उनके लक्षण आम सर्दी - ज़ुकाम या आंत्रशोथ ( गैस्ट्रोएनटराइटिस ) ( या उदर फ्लू ; उदाहरण के लिये , उल्टी तथा दस्त ( डायरिया ) ) होते हैं ।" ,"हालांकि , बच्चों में डेंगू बुख़ार द्वारा गंभीर समस्याएं होने की अधिक संभावनाएं होती हैं ।" pl,डेंगू बुख़ार के ऐसे आदर्श लक्षण कम होते हैं जो अचानक शुरू हो जाते हैं जैसे सिरदर्द ( आमतौर पर आँखों के पीछे ) ; चकत्ते तथा मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द । sg,"बीमारी का उपनाम "" हड्डीतोड़ बुख़ार "" यह दर्शाता है कि यह दर्द कितना गंभीर हो सकता है ।" ,"डेंगू बुख़ार तीन चरणों में होता है : बुख़ार संबंधी , गंभीर तथा सुधार संबंधी ।" ,"बुख़ार संबंधी चरण में , किसी व्यक्ति को आमतौर पर उच्च बुख़ार होता है ।" sg,"( "" फैब्राइल "" का अर्थ है कि व्यक्ति को उच्च बुख़ार है । )" ,बुख़ार अक्सर 40 डिग्री सेल्सियस ( 104 डिग्री फ़ॉरेनहाइट ) होता है । ,व्यक्ति को सामान्य दर्द तथा सिरदर्द हो सकता है । ,यह चरण आमतौर पर 2 से 7 दिन तक चलता है । pl,इस चरण में जिन लोगों में लक्षण होते हैं उनमें से लगभग 50 से 80 % लोगों को चकत्ते हो जाते हैं । pl,"पहले या दूसरे दिन , चकत्ते लाल त्वचा जैसे दिख सकते हैं ।" pl,बीमारी के बाद के दिनों में ( चौथे से सातवें दिन पर ) चकत्ते चेचक जैसे लग सकते हैं । ,छोटे लाल दाग ( पटीकिया ) त्वचा पर उभर सकते हैं । pl,त्वचा को दबाने पर ये दाग हटते नहीं हैं । ,ये लाल दाग टूटी केशिकाओं के कारण बनते हैं । sg,व्यक्ति को श्लेष्म झिल्ली द्वारा मुंह तथा नाक से हल्का रक्तस्राव हो सकता है । ,बुख़ार अपने आप कम ( बेहतर ) होने लगता है तथा एक या दो दिनों के लिये वापस होने लगता है । ,"हालांकि , भिन्न लोगों में यह पैटर्न भिन्न होता है ।" ,"कुछ लोगों में , उच्च बुख़ार के जाने के बाद बीमारी गंभीर चरण में प्रवेश कर जाती है ।" ,गंभीर चरण एक से दो दिनों तक चलता है । ,"इस चरण के दौरान , छाती तथा पेट में तरल का निर्माण हो सकता है , ऐसा इसलिये क्योंकि रक्त नलिकाओं में रिसाव होता है ।" ,तरल बनता है तथा यह पूरे शरीर में परिसंचरित होता है । sg,इसका अर्थ है कि महत्वपूर्ण ( सबसे महत्वपूर्ण ) अंगों को उनकी आवश्यकता के अनुसार आम तौर पर रक्त नहीं मिलता है । pl,"इस कारण से , अंग सामान्य तरीके से काम नहीं कर पाते हैं ।" ,व्यक्ति को अत्यधिक रक्तस्राव भी हो सकता है ( आमतौर पर जठरांत्र संबंधी मार्ग में ) । ,"डेंगू से पीड़ित 5 % से कम व्यक्तियों को परिसंचरण आघात , डेंगू आघात सिन्ड्रोम तथा डेंगू रक्तस्रावी बुख़ार होता है ।" ,"यदि किसी व्यक्ति को पहले किसी दूसरे प्रकार ( "" द्वितीयक संक्रमण "" ) का डेंगू हुआ हो तो उसको ऐसी गंभीर समस्याएं होने की संभावनाएं अधिक होती हैं ।" ,"सुधार चरण में , वह तरल जो रक्त नलिकाओं से बाहर रिस जाता है , रक्तप्रवाह में वापस शामिल कर लिया जाता है ।" ,सुधार चरण 2 से 3 दिनों तक चलता है । ,व्यक्ति अक्सर इस चरण के दौरान काफी बेहतर हो जाता है । ,"हालांकि , उनको गंभीर खुजलाहट तथा धीमी हृदय गति की शिकायत हो सकती है ।" sg,"इस चरण के दौरान , व्यक्ति तरल ओवरलोड स्थिति ( जिसमें काफी अधिक तरल वापस ले लिया जाता है ) में जा सकता है ।" ,"यदि यह दिमाग को प्रभावित करता है तो , यह चेतना के स्तर में परिवर्तन या दौरे जैसी स्थिति ला सकता है ( जिसमें व्यक्ति की सोचने , समझने तथा व्यवहार करने की सामान्य स्थिति भिन्न हो सकती है ) ।" ,कभी - कभार डेंगू हमारे शरीर के अन्य तंत्रों को प्रभावित कर सकता है । ,किसी व्यक्ति में केवल लक्षण हो सकते हैं या आदर्श डेंगू लक्षण भी साथ में हो सकते हैं । sg,0.5 – 6 % मामलों में चेतना का स्तर घट सकता हैं । ,ऐसा तब हो सकता है जब डेंगू वायरस मस्तिष्क में संक्रमण पैदा करता है । ,ऐसा तब भी हो सकता है जब महत्वपूर्ण अंग सही ढंग से काम न कर रहे हों । ,अन्य स्नायुतंत्र संबंधी विकार ( मस्तिष्क तथा स्नायुओं को प्रभावित करने वाले विकार ) उन लोगों में दर्ज किये गये हैं जिनको डेंगू बुख़ार होता है । ,"उदाहरण के लिये , डेंगू ट्रांसवर्स माइलिटिस ( अनुप्रस्थ मेरुदंड की सूजन ) तथा गुइलियन - वाले सिन्ड्रोम पैदा कर सकता है ।" ,"हालांकि ऐसा लगभग नहीं होता है , लेकिन डेंगू दिल का संक्रमण तथा गंभीर जिगर की विफलता पैदा कर सकता है ।" ,डेंगू बुखार डेंगू वायरस के कारण होता है । sg,"वह वैज्ञानिक प्रणाली जिसमें वायरस का वर्गीकरण तथा नामकरण किया जाता है उसके अंतर्गत डेंगू वायरस "" फ्लाविविरिडे "" परिवार तथा "" फ्लाविविरस "" जीन का हिस्सा है ।" ,अन्य वायरस भी इस परिवार से संबंधित हैं तथा मानवों में बीमारियां पैदा कर सकते हैं । ,"उदाहरण के लिये , पीत - ज्वर वायरस , वेस्ट नाइल वायरस , सेंट लुईस एन्सेफलाइटिस वायरस , जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस , टिक - जनित एन्सेफलाइटिस वायरस , क्यासानूर जंगल रोग वायरस तथा ओमस्क रक्तस्रावी बुख़ार , सभी "" फ्लाविविरिडे "" परिवार से संबंधित हैं ।" pl,इनमें से अधिकतर वायरस मच्छरों या टिक द्वारा फैलते हैं । ,"डेंगू वायरस , अधिकतर "" एडीज़ "" मच्छरों द्वारा संचरित ( या फैलता ) होता है , विशेष रूप से "" एडीज़ आएजेप्टी "" प्रकार के मच्छर से ।"