objnum,sentences ,पर्यटन की दृष्टि से अप्रेल से जून तक का मौसम सुविधाजनक माना जाता है जबकि सर्दियों के मौसम में शिमला का बर्फ़ से ढका सौंदर्य देखने के लिए पर्यटकों की होड़ लगती है । ,समुद्रतल से 2036 मीटर की ऊँचाई पर स्थित डलहौजी को हिमाचल प्रदेश के एक अलग तरह के पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है । ,डलहौजी में भीड़भाड़ के स्थान पर शांत माहौल है । ,लंबी छुट्टियाँ गुजारने वाले एकांतपसंद लोग डलहौजी बड़ी संख्या में आते हैं । ,लेकिन चंबा जाने वाला हर सैलानी डलहौजी को पहला स्थान देता है । ,पंजाब के समीप होने के कारण पंजाबी परिवार साल भर यहाँ घूमते मिलते हैं । sg,1853 में अंगरेजों ने चंबा का यह खूबसूरत इलाका यहाँ के राजा से खरीदा था । sg,उस वक्त के अंगरेज शासक लार्ड डलहौजी के नाम पर इसका नाम ’ डलहौजी ’ रख दिया गया । ,नजदीक शहर पठानकोट से सिर्फ 3 घंटे के सफर यानी सिर्फ 88 किलोमीटर के बाद डलहौजी आ जाता है । ,डलहौजी उस धौलाधार पर्वतमाला के सामने पड़ता है जो साल भर बर्फ़ की नई नई परतें ओढ़ती है । ,धौलाधार पर्वत शिखर गहरी ढ़लानों और खुले आसमान को छूते पर्वतों को देखने के लिए अच्छी जगह है । ,धौलाधार पर्वत शिखर के पास ही सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा लगी है । ,सुभाष चंद्र बोस कुछ दिन यहाँ आ कर रहे थे । sg,रेलिंग के सहारे खड़े हो कर यहाँ से पंजाब का मैदानी इलाका भी देखा जा सकता है । ,"गाँधी चौक और सुभाष चौक को जो 2 रास्ते जोड़ते हैं , उन्हें ’ ठंडी सड़क ’ और ’ गरम सड़क ’ कहते हैं ।" ,धूप में निकलना हो तो गरम सड़क है और छाँव में निकलना हो तो ठंडी सड़क है । ,गर्मियों में ठंडी सड़क सब को लुभाती है । ,पेड़ो से घिरी यह ठंडी सड़क डलहौजी की माल रोड भी कहलाती है । ,डलहौजी में बर्फ़ से ढकी पर्वत श्रृंखलाओं को देखने के लिए व्यू प्वाइंट बने हैं । pl,दोनों सड़कों पर तिब्बती बौद्धों द्वारा चट्टानों पर थंका शैली के चित्र अनोखे रूप में उकेरे गए हैं । ,कभी पंजपुला से धर्मशाला की ओर एक पैदल मार्ग जाता था । ,पंजपुला एक सैरगाह है । ,डलहौजी में शहीद भगत सिंह के चाचा की समाधि भी है । ,डलहौजी में एक झरना पर्यटकों के पिकनिक स्थल के रूप में मौजूद है । ,अगर गाँधी चौक से पंजपुला के रास्ते पर निकलें तो एक चश्मा आता है । ,पहले चश्मे में इतना पानी होता था कि 7 धाराएँ बनती थीं । ,आज चश्मे में से एक धारा निकलती है । ,विश्राम करने और ठंडा पानी पीने के लिए सप्तधारा अच्छा ठौर है । ,यह चश्मा चंबा के राजाओं के एक महल और उस की ऐतिहासिक व कलात्मक सुंदरता के लिए जाना जाता है । ,यहाँ देवदार और गहरी ढलानों में सीढ़ीनुमा खेत आकर्षण का केन्द्र हैं । ,"डलहौजी में यह ऐसा सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है जहाँ से व्यास , चिनाब और रावी नदियों को एक साथ देखा जा सकता है ।" ,यह स्थल ’ म्यूजिकल पीक ’ भी कहलाता है । pl,देवदार के अनोखे झुंडों और घने जंगलों के बीच यह स्थान सैलानियों को नया एहसास कराता है । ,डलहौजी के अभ्यारण्य में वन्यजीवों और दुर्लभ पक्षियों को वन विभाग की अनुमति से देखा जा सकता है । ,कालाटोप गांधी चौक से 8 किलोमीटर दूर है । ,अप्रैल से जून और सितंबर से अक्तूबर तक बेहतर मौसम रहता है । pl,अगस्त के बाद गर्म कपड़े साथ रखें । ,सामान्य स्वेटर व शाल हर मौसम में चाहिए । ,"डलहौजी से तिब्बती व हिमाचली शिल्प की वस्तुएँ , शाल और टोपियाँ व मेवे खरीद सकते हैं ।" ,"चंबा में चौगान के चारों ओर फैले बाजार में हिमाचली वस्त्र , चप्पल व मेवों की दुकानें हैं ।" ,चंबा के रुमाल प्रसिद्ध हैं । ,खजियार डलहौजी से 22 किलोमीटर दूर है । ,डलहौजी जाकर खजियार सभी जाना चाहते हैं क्योंकि यह हर प्रकार के पर्यटकों और बच्चों को लुभाता है । ,दूरदूर तक फैला मखमली मैदान है जो देवदार के जंगल से घिरा है । ,खजियार में ठहरने और खाने - पीने की पूरी सुविधा है । ,खुली प्रकृति में बेखटके घूमने और चाँदनी रातों में खुले आकाश के नीचे फुरसत से तंबू में रहने वालों के लिए खजियार अच्छी जगह है । ,खजियार को हिमालय का स्विट्जरलैंड कहा जाता है । ,खजियार की शाम हर सैलानी को सुकून देती है । ,बच्चों को दौड़ने और खुशी से चिल्लाने का मौका मिलता है । ,घुड़सवारी यहाँ का मुख्य मनोरंजन और रोमांच है । ,और भी कई सैद्धांतिक कारण हैं जो संयोजन चिकित्सा का समर्थन करते हैं । ,विभिन्न दवाओं के उपयोग से अलग प्रकार की प्रतिक्रिया होती है । ,INH जीवाणु की प्रतिकृति के खिलाफ जीवाणुनाशक है । ,"EMB कम खुराक पर जीवाणुरोधी है , परन्तु इसका उपयोग तपेदिक उपचार में उच्च जीवाणुनाशक खुराक में किया जाता है ।" ,RMP जीवाणुनाशक है और इसका निःसंक्रामक प्रभाव पड़ता है । ,"PZA केवल कमजोर जीवाणुनाशक है , लेकिन मैक्रोफेज की स्थिति में या तीव्र सूजन के स्थानों में , अम्लीय वातावरण में स्थित जीवाणुओं के लिए बहुत अधिक प्रभावी है ।" pl,रिफाम्पिसिन के आने से पहले टीबी के सभी उपचार 18 माह या इससे भी लम्बी अवधि के लिए प्रयुक्त किये जाते थे । ,"1953 में , संयुक्त राष्ट्र की मानक खुराक 3SPH / 15PH या 3SPH / 15SH थी ।" ,"1965 और 1970 के बीच , EMP ने PAS की जगह ले ली ।" ,1968 में टीबी के उपचार के लिए RMP का उपयोग किया जाने लगा और 1970 में BTS के अध्ययन से यह पता चला कि 2HRE / 7HR प्रभावोत्पादक था । ,"1984 में , एक BTS अध्ययन से पता चला कि 2HRZ / 4HR प्रभावोत्पादक था , इसके अप्रभावी होने की दर ( रिलेप्स ) दो साल के बाद 3 प्रतिशत से भी कम पाई गयी ।" ,"1995 में , जब यह पता चला कि INH प्रतिरोध बढ़ रहा है , BTS के साथ EMB या STM को मिलाने की सलाह दी गयी : 2HREZ / 4HR या 2SHRZ / 4HR , इसी खुराक का उपयोग वर्तमान में किया जा रहा है ।" ,विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सलाह दी कि अगर 2 महीने के उपचार के बाद भी रोगी का कल्चर पोज़िटिव पाया जाता है तो उसके लिए HR की छह माह की निरंतरता प्रावस्था का उपयोग किया जाना चाहिए । ,( लगभग 15 प्रतिशत रोगी जिनमें पूर्ण - संवेदी टीबी होती है ) और उन रोगियों में भी इसका उपयोग किया जाना चाहिए जिनमें उपचार की शुरुआत में व्यापक द्विपक्षीय गुहिका ( bilateral cavitation ) का निर्माण हो गया हो । ,"डॉट्स ( DOTS ) शब्द का उपयोग "" प्रत्यक्ष प्रेक्षित थेरेपी , छोटा - कोर्स ( Directly Observed Therapy , Short - course ) "" के लिए किया जाता है और यह टीबी रोकने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) की एक मुख्य योजना है ।" ,"इसमें टीबी के नियंत्रण के लिए सरकार की वचनबद्धता , टीबी के सक्रिय लक्षणों से युक्त रोगियों में थूक - स्मियर माइक्रोस्कोपिक परीक्षण , प्रत्यक्ष प्रेक्षण छोटे - कोर्स कीमोथेरेपी उपचार , दवाओं की एक निश्चित आपूर्ति , मानकीकृत रिपोर्टिंग और मामलों और उपचार के परिणामों की रिकॉर्डिंग शामिल है ।" ,डब्ल्यूएचओ की सलाह है कि पहले दो माह के लिए टीबी के सभी रोगियों की थेरेपी ( उपचार ) प्रेक्षित होनी चाहिए ( और हो सके तो पूरी थेरेपी प्रेक्षित ही होनी चाहिए ) । ,इसका अर्थ यह है कि रोगी को देखने वाला स्वतंत्र प्रेक्षक उसके टीबी - रोधी उपचार ( anti - TB therapy ) पर पूरी निगरानी रखे । ,"स्वतंत्र प्रेक्षक अक्सर कोई स्वास्थ्यरक्षा कार्यकर्ता नहीं होता , वह एक दुकानदार या समाज में कोई बड़ा व्यक्ति या इसी तरह से कोई वरिष्ठ व्यक्ति हो सकता है ।" ,डॉट्स का उपयोग आंतरायिक खुराक के साथ ( सप्ताह में तीन बार या 2HREZ / 4HR ) किया जाता है । ,"सप्ताह में दो बार खुराक भी प्रभावी है लेकिन डब्ल्यूएचओ के द्वारा इसकी सलाह नहीं दी जाती , क्योंकि इसमें गलती ( अगर कोई एक खुराक लेना भूल जाये तो सप्ताह में ली गयी केवल एक खुराक प्रभावी नहीं होती ) के लिए मार्जिन नहीं होता है ।" ,डॉट्स का ठीक प्रकार से उपयोग करने से उपचार की सफलता की दर 95 प्रतिशत से भी अधिक होती है और यह भविष्य में टीबी के कई दवाओं के प्रति प्रतिरोध के स्ट्रेस ( उपभेदों ) ( multi - drug resistant strains of tuberculosis ) के विकास को भी रोकती है । ,"डॉट्स का उपयोग तपेदिक के फिर से होने की संभावना को कम करता है , जिसके परिणामस्वरूप उपचार के सफल होने की दर में कमी आती है ।" pl,द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान चाइनीज सैनिकों को रामगढ़ में अमेरिकन प्रशिक्षक द्वारा ब्रिटिश खर्चे पर प्रशिक्षित किया गया था । ,"रामगढ़ छावनी कोयला खदान क्षेत्रों जैसे रजरप्पा , सयाल एवं गिद्दी से घिरा है ।" ,रजरप्पा / छिन्नमस्तिका मंदिर रामगढ़ बोकारो मार्ग पर रामगढ़ से 38 कि.मी. की दूरी पर स्थित है । ,चित्तरपुर से भी रजरप्पा / छिन्नमस्तिका मंदिर जाने का मार्ग है । ,रजरप्पा / छिन्नमस्तिका मंदिर दामोदर नदी और भेड़ा नदी ( भैरवी नदी ) के संगम स्थल पर बसा हुआ है । ,रजरप्पा / छिन्नमस्तिका मंदिर की प्रसिद्धि शक्तिपीठ के रूप में है । ,तांत्रिकों ने तंत्र साधना के लिए इसे उपयुक्त स्थल बताया है । ,नदियों के संगम स्थल पर जो मंदिर के ठीक सामने है सुंदर किन्तु छोटा प्रपात है । ,"जब भैरवी नदी दामोदर पर गिरती है , यहाँ 23 फीट ऊँचा प्रपात बनता है ।" pl,रजरप्पा / छिन्नमस्तिका मंदिर के चारों ओर महाविद्याओं के मंदिर स्थापित किए गये हैं । ,"यथा - तारा , षोडशी , भुवनेश्वरी , भैरवी , बागला , कमला , मातंगी , धूमावती आदि ।" ,अनुमान के आधार पर लोग कहते हैं रजरप्पा / छिन्नमस्तिका मंदिर समुद्रगुप्त काल का मंदिर है ( 320 से 380 ई. के बीच ) किन्तु कुछ लोग इसे महाभारत काल से भी जोड़ते हैं । ,पतरातू में ताप विद्युत गृह की स्थापना की गयी है । ,पतरातू रामगढ़ से 35 कि.मी. पश्चिम में स्थित है । ,पतरातू में एक विशाल डैम भी है जो प्रसिद्ध पिकनिक स्थल के रूप में विकसित किया हुआ है । ,रामगढ़ छावनी रेलवे स्टेशन मुरी बरकाना रेललाईन पर स्थित है जो राँची हजारीबाग रोड पर स्थित है । ,अतीत में रामगढ़ से होकर दामोदर नदी गुजरती थी । ,रामगढ़ शहर वर्ष 1940 में ऑल इंडिया कांग्रेस सेशन का स्थल रह चुका है । ,रामगढ़ देश के दो प्रतिष्ठित रेंजिमेंटों सिख रेंजिमेंट और पंजाब रेंजिमेंट का केन्द्र रहा है । ,"गिरिडीह एक बेहद प्राचीन एवं सुन्दर शहर जो मनोरम पहाड़ एवं पहाड़ियों की गोद में बसा हुआ है , तथा शुरू से ही भ्रमणकारियों विशेषकर पश्चिम बंगाल से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है ।" ,गिरिडीह जिले के पर्यटन स्थलों में पारसनाथ मंदिर के अतिरिक्त अन्य स्थल जैसे हरिहरधाम जो जिला मुख्यालय से दक्षिण - पश्चिम दिशा में बगोदर प्रखंड में अवस्थित है । ,हरिहरधाम में देश का सबसे बड़ा शिवलिंग विराजमान है । ,हर वर्ष देशभर से हजारों लोग हरिहरधाम भ्रमण करने आते हैं । ,"गिरिडीह जिले के पर्यटन स्थलों के अन्य पर्यटन आकर्षणों में उसरी जलप्रपात , बैदाडीह , दालगंडो गाँव इत्यादि हैं ।" ,"पारसनाथ झारखण्ड का सबसे ऊँचा पहाड़ है , जिसकी ऊँचाई 4441 फीट है ।" ,पारसनाथ पहाड़ पर जैनियों का सबसे प्रमुख धार्मिक स्थल है जिसे सम्मेद शिखर भी कहते हैं । ,सम्मेद शिखर के लिए यह प्रसिद्ध है कि जैनियों के 20वें तीर्थकारों ने यहीं पर निर्वाण प्राप्त किया था । ,उन सभी तीर्थकारों के चरणचिह्न एक साथ हैं । ,पारसनाथ के पत्थर आसपास के पत्थरों की तुलना में कड़े हैं अतः उनका अपरदन इस पहाड़ के पत्थरों की तुलना में अधिक हो जाता है । ,बैदाडीह स्थान बड़े कुएँ के लिए प्रसिद्ध है । sg,इस कुएँ का पानी महत्वपूर्ण औषधिय खनिज को समाहित किये हुए है । ,बैदाडीह के बड़े कुएँ के पास लक्ष्मी पूजा के अवसर पर वृहद मेला आयोजन की परम्परा रही है । ,"सम्मेद शिखरजी , जैनियों का विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल -" ,विशेषता : जैन संप्रदाय के 24वें में से 20 तीर्थकारों की निर्वाण भूमि । sg,"सम्मेद शिखरजी , पवित्र तीर्थ को दिगंबर और श्वेताम्बर दोनों संप्रदाय के जैनी पूजते हैं ।" ,2000 वर्ष पुराने मंदिरों के दालगंडो गाँव का पर्यटन के लिहाज से बड़ा ही विशेष महत्व है । ,साथ ही यहाँ हरियाली से लबरेज झारखण्ड की सबसे ऊँची पहाड़ी होने का गौरव भी पार्श्वनाथ पर्वत को प्राप्त है । ,पारसनाथ पर्वत की तलहटी पर मधुवन गाँव पीरटाँड़ प्रखंड के अन्तर्गत आता है जहाँ जैनियों के तीर्थस्थल बसे हुए हैं । ,मधुवन में अनेक जैन मंदिर हैं जिन्हें 2000 वर्षों से भी अधिक प्राचीन कहा जाता है । ,मधुवन में सामोशरण मंदिर तथा भोमिया जी स्थान काफी सुन्दर एवं महत्वपूर्ण माने जाते हैं । ,"इसके अतिरिक्त मधुवन में श्वेताम्बर मंदिर , अदिनाथ का टोंक , नन्दीश्वर द्वीप , सहस्रकूट , जिन चैत्यालय आदि प्रमुख स्थल हैं ।" ,दलगंडो शिव मंदिर के लिए प्रसिद्ध है । ,दलगंडो में शिवरात्रि के अवसर पर सालाना मेला लगता है । ,"झारखण्डी धाम तीर्थयात्रियों के लिए एक प्रमुख स्थान है , जहाँ से झारखण्ड नाम की उत्पत्ति हुई है ।" ,यहाँ अवस्थित शिव मंदिर में प्रतिवर्ष मेले का आयोजन होता है । ,खंडोली ,गिरिडीह से आठ किलोमीटर उत्तर में पहाड़ियों की तराई में अवस्थित यह एक महत्वपूर्ण पिकनिक स्थल है । ,खंडोली पिकनिक स्थल में पर्यटन विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष जिला प्रशासन की ओर से एडवेंचर टूरिज्म फेस्टीवल का आयोजन किया जाता है । ,गिरिडीह शहर से 13 कि.मी. पूरब में उसरी नदी पर एक सुंदर जलप्रपात है जिसे उसरी प्रपात कहा जाता है । pl,उसरी प्रपात का रमणीक दृश्य हजारों पर्यटकों को प्रतिदिन आकर्षित करता है । ,यह एक प्रसिद्ध पिकनिक स्थल भी है । ,जिसमें सैकड़ों लोग खड़े हो सकते हैं । ,जम्मू से शिवखोड़ी तक का रास्ता प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है । ,अखनूर जम्मू से 32 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक सुंदर पिकनिक स्थल है । ,अखनूर वह स्थान है जहाँ चिनाब नदी पहाड़ों से बलखाती हुई मैदान में उतर आती है । ,अतीत का शाही महल आज अमर पैलेस संग्रहालय के नाम से जाना जाता है । ,"तवी नदी के किनारे बने शाही महल की विशेषता इसकी बेहतरीन वास्तुशिल्प है ," sg,शाही महल का डिजाइन एक फ्रेंच वास्तुकार ने तैयार किया था । ,शाही महल में पुराने समय की अनेक नायाब वस्तुएँ संगृहीत हैं । ,यहाँ का पहाड़ी चित्रकला से संबधित अनूठे चित्रों का संग्रह देखने लायक है । ,"जम्मू - श्रीनगर राष्ट्रीय मार्ग पर स्थित पर्यटन स्थल झज्जर कोटली , पर्यटकों के लिए एक अच्छा पिकनिक स्थल है ।" ,"झज्जर कोटली में कलकल करता एक झरना है , जिसका स्वच्छ पानी पर्यटकों की थकान दूर करता है ।" ,"भारत की सबसे पुरानी तहसील रामनगर , जम्मू से 102 किलोमीटर की दूरी पर है ।" ,रामनगर तहसील का मुख्य आकर्षण यहाँ बना किला और मंदिर हैं । ,जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुद और बटोट कस्बों के बीच जम्मू से 122 किलोमीटर दूर स्थित है पटनीटाप । sg,पटनीटाप क्षेत्र खूबसूरती का पर्याय माना जाता है । ,देवदार के घने जंगल और हरी हरी घास के सुंदर ढलान पटनीटाप आने वाले पर्यटकों का मन मोह लेने के लिए काफी हैं । ,उधमपुर जिले में आने वाला पटनीटाप क्षेत्र एक मशहूर रिसोर्ट में तब्दील हो चुका है । ,पटनीटाप विकास प्राधिकरण ने इस स्थान को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए इस के सनासर आदि स्थानों का विकास किया है । ,पटनीटाप पर पूरे साल पर्यटकों का तांता लगा रहता है । ,स्कीइंग के शौकीनों के लिए पटनीटाप जगह काफी रोमांचक है । ,सर्दियों में पटनीटाप में स्कीइंग का आयोजन किया जाता है । ,स्कीइंग को बढ़ावा देने के मकसद से यहाँ पर अब सिखाने का भी प्रबंध किया गया है जो आप एक सप्ताह के भीतर सीख सकते हैं । sg,पटनीटाप से जुड़े नत्थाटाप के बाद पड़ने वाली खूबसूरत सनासर घाटी को खासतौर पर पैराग्लाइडिंग के लिए विकसित किया गया है । ,पटनीटाप में एक खूबसूरत झील भी है । ,झील के किनारे बैठ कर सैलानी प्रकृति के सुंदर नजारों का लुत्फ उठाते हैं । ,पटनीटाप में पैराग्लाइडिंग सीखने आए देशी - विदेशी पर्यटकों के खेलने के लिए गोल्फ का एक मैदान भी है । ,झेलम नदी के किनारे बसा श्रीनगर जम्मू - कश्मीर प्रदेश का एक खूबसूरत शहर है । ,श्रीनगर में हर तरफ कुदरत के हसीन नजारे देखने को मिलते हैं । ,"हर तरफ बिखरी हरियाली , हरीभरी घाटियाँ , पहाड़ों को चूमती झीलों का प्राकृतिक सौंदर्य और उस पर खुला नीला आसमान ।" ,"जी हाँ , धरती का स्वर्ग यानी श्रीनगर की ये विशेषताएँ ही तो हैं ।" ,जो श्रीनगर को अन्य पहाड़ी पर्यटन स्थलों से अलग करती हैं । ,जहाँगीर ने श्रीनगर शहर की खूबसूरती से प्रभावित होकर ही इसे धरती के स्वर्ग के नाम से नवाजा था । ,श्रीनगर शहर के अंदर और इसके आसपास कुदरत के बेशकीमती खजाने बिखरे पड़े हैं । ,"बस , देरी है तो इन्हें अपनी आँखों में समेट लेने की ।" ,श्रीनगर आने वाले देशीविदेशी सैलानियों को पैदल चलने में थकान नहीं लगती । ,क्योंकि श्रीनगर का मौसम नया रंग बिखेरते हुए आता है । ,श्रीनगर को जम्मू - कश्मीर का गौरव भी कहा जाता है । ,श्रीनगर अपनी बेपनाह खूबसूरती के अलावा ट्रैडिशनल कश्मीरी हैंडीक्राफ्ट और सूखे मेवों के लिए प्रसिद्ध है । ,"श्रीनगर में मुख्यतया: कश्मीरी , डोगरी , उर्दू व अंग्रेजी भाषाएँ बोली जाती हैं ।" ,श्रीनगर घूमने का सबसे बढ़िया समय अप्रैल से जून है । pl,"समुद्रतल से 1,730 मीटर की ऊँचाई पर स्थित श्रीनगर का जर्रा - जर्रा दुनिया भर के सैलानियों को अपनी तरफ खींचता है ।" ,"श्रीनगर में बहने वाली डल झील , वूलर झील , मुगलकालीन बगीचे , हजरतबल दरगाह , गुलमर्ग आदि यहाँ के दर्शनीय स्थल हैं ।" ,"पहलगाम , सोनमर्ग आदि श्रीनगर के मुख्य आकर्षणों में शुमार हैं ।" ,डल झील अपनी खूबसूरती के लिए दुनिया भर में मशहूर है । ,डल झील जम्मू - कश्मीर की दूसरी बड़ी झील है । pl,डल झील चारों तरफ से पर्वत की चोटियों से घिरी है । sg,6 किलोमीटर लंबी और 3 किलोमीटर चौड़ी झील के किनारों पर हरे - भरे बगीचे अपनी रौनक बिखेर रहे हैं । ,झील में बत्तखों की तरह तैरने वाले शिकारे सैलानियों को झील व टापुओं की सैर करवाते हैं । ,झील के पानी में तैरते घर के आकार की हाउस बोट्‍स लोगों को एक अलग और खास तरह का मजा देती हैं । ,रात में इन हाउस बोट्स से निकलने वाली सुनहरी रोशनी झील के पानी व आसपास के नजारे को और ज्यादा मनमोहक बना देती है । ,उसमें तैयार आलू का मसाला डालें । ,दो मिनट बाद आंच से उतार लें और ठंडा होने पर उसकी छोटी - छोटी गोली बनाएं । ,अब ब्रेड की स्लाइस के किनारे हटा कर उसे पानी में डुबोएं । ,उसमें मसाले की गोली रखकर हल्के हाथ से दबाएं । ,नॉन स्टिक तवे में तल लें । ,"कुरकुरी होने पर दही , हरी और इमली की चटनी एवं सेंव बुरकाएं और प्लेट में सजा कर पेश करें ।" ,आप चाहे तो इसे मैदे की पूरी में भी भर कर तल सकते हैं । ,आटे में सब सामग्री मिलाकर पूड़ी जैसा आटा गूंथ कर थोड़ी देर के लिए रख दें । ,"अब बेसन में सारे मसाले डालें और अच्छा मोयन डालकर गोली बन जाए , ऐसा गूंथ कर छोटी - छोटी गोली बना लें ।" ,"आटे की लोई बनाकर पूरी बेलें , फिर बेसन की गोली रखकर हाथ से गोल - गोल दबाते हुए कचोरी बना लें ।" ,एक तेल गरम करके धीमी आंच पर सारी कचोरी तल लें । ,अब गरमा - गरम कचोरी चटनी के साथ पेश करें । ,यह कचोरी चार दिन के लिए रखने पर भी खराब नहीं होती । ,चाहे तो इसे चाट की सामग्री डालकर भी खा सकते हैं । ,कॉटेज चीज के डेढ़ - डेढ़ इंच के टुकड़े काट लें । ,"इन टुकड़ों पर नमक , पीली मिर्च पावडर व अदरक - लहसुन पेस्ट डाल कर पैंतालीस मिनट के लिए रख दें ।" ,ताकि इसमें से अतिरिक्त पानी बाहर निकल आए । ,अब एक बड़ा बाउल लें । ,उसमें पनीर डालें । ,हाथ से मसलें । ,"उसमें भूना बेसन , जीरा , धनिया पावडर , नमक व जावित्री पावडर मिला लें ।" ,गीले पानी में भीगी सौंफ को उसमें मिला दें । ,अब उसमें क्रीम मिला दें । ,इस मिश्रण में कॉटेज चीज के टुकड़े मिला दें और एक - दो घंटे के लिए मेरीनेट होने के लिए रख दें । ,तत्पश्चात इनकी छोटी - छोटी टिकिया बनाकर डीप फ्राई अथवा तवे पर तेल लगाकर दोनों तरफ से कुरकुरी होने तक सेंक लें । ,तत्पश्चात हरी और मीठी चटनी तथा दही मिलाकर गरमा - गरम तिल - पनीर की टिकिया पेश करें । ,चना दाल को दो घंटे पहले पानी में भिगो दें । ,आटे में नमक व मोयन डालकर गूंथ लें । ,दाल को उबाल लें । ,ठंडा होने पर पीस लें । ,"कड़ाही को गैस पर रखें , उसमें दो चम्मच तेल रखकर सौंफ व हींग का बघार देकर अदरक - लहसुन का पेस्ट डालकर हल्का - सा सेंकें व पिसी हुई दाल व सभी मसाले डालकर धीमी आंच पर हल्का गुलाबी होने तक सेकें ।" ,ऊपर से हरा धनिया डालें । ,अब आटे की छोटी - छोटी लोई बना कर बेल लें और मसाला भरे । ,हलके हाथों से बेल कर तवे पर तेल लगाकर दोनों ओर से सेकें । ,"लाजवाब नमकीन पूरी आमटी , टमाटर सॉस या हरी चटनी के साथ परोसें ।" ,"सर्वप्रथम चुकंदर को धोकर , कुकर में रखकर 1 सीटी लगा कर पका लें ।" ,तत्पश्चात मिक्सी में नारियल को महीन करके पेस्ट बना लें । ,चाहे तो जरूरतानुसार थोड़ा - सा दूध या पानी डाल सकते हैं । ,चुकंदर को छीलकर हाथ से महीन मसल लें । ,"अब एक बड़े कटोरे में मसला हुआ चुकंदर , नारियल पेस्ट , दही , दोनों तरह के नमक मिला लें ।" ,"एक बड़े चम्मच में तेल गरम करके राई , मीठा नीम और लाल मिर्च तड़काएं और तैयार रायते में डाल दें और फ्रिज में रख दें ।" ,ठंडा होने पर हरा धनिया बुरका कर चुकंदर का लजीज रायता घर वालों को पेश करें । ,यह रायता सेहत बनाने के लिए बहुत लाभकारी है । ,सबसे पहले दो कप पानी लेकर शक्कर गला लें । ,फिर सभी मेवा सामग्री को मिक्स करके 3 - 4 घंटे के लिए भिगो कर रखें । ,तत्पश्चात पानी निथारकर मिक्सी में बारीक पीस लें । ,पतले कपड़े की सहायता से पीसे हुए मिश्रण को छान लें । ,"उसमें थोडा पानी , शक्कर और अंगूर और संतरे मसलते हुए पूरी ठंडाई को छान लें ।" ,अब उसमें भांग की दो गोलियां मिलाएं और अच्छी तरह घोंट लें । ,थोड़ी देर के लिए फ्रिज में रखें । ,अगर आप सौभाग्यशाली रहे तो सील की तरह दिखने वाले डगोंग नाम के एक स्तनधारी जीव को देख पाएँगे जो आज विलुप्ति के अंतिम कगार पर खड़ा है । ,जैसे - जैसे समुद्री पानी में हलचल शुरू हुई हम समझ गये कि पानी का स्तर ऊपर उठ रहा है । sg,समुद्र के पानी का स्तर ऊपर उठने की स्थिति को हाई टाइड कहते हैं । ,हाई टाइड में पानी का स्तर इतना ऊपर आ जाता है कि नाव आसानी से तैर सकती है । ,अब हमने इस द्वीप को अलविदा कहने का निश्चय किया । pl,सागर अपने अंक में न जाने जीवन के कितने ही रहस्यों को समेटे हुए है जिनसे रू-ब-रू होने के लिए पायरटन द्वीप उपयुक्त है । ,बेदी पोर्ट से 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पायरटन द्वीप समुद्री जीवों के साथ - साथ अपने अद्वितीय प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए भी विख्यात है । ,प्रकृति व मानवीय रचनाओं से समृद्ध उदयपुर के ऐश्वर्य और सौंदर्य को जिसने भी देखा वह इसका कायल हो गया । ,घूमने के नज़रिये से उदयपुर के सौंदर्य का यह आलम है कि राजस्थान का यही एक ऐसा शहर है जहाँ साल में कभी भी आप पर्यटन का लुत्फ़ ले सकते हैं । ,अरावली की पहाड़ियों से घिरा उदयपुर का सौंदर्य देखते बनता है । ,उदयपुर को झीलों के शहर की संज्ञा दी गई है । ,उदयपुर का निर्माण करने वाले महाराणा उदय सिंह का दुर्भाग्य राजस्थान का सौभाग्य बन गया । ,महाराणा उदय सिंह अपनी पुरानी राजधानी चित्तौढ़गढ़ पर मुगलों के लगातार आक्रमण से परेशान हो चुके थे । ,एक आध्यात्मिक व्यक्ति की सलाह पर महाराणा उदय सिंह ने पिछौला नदी के तट पर अपनी राजधानी बनाई व इसे उदयपुर नाम दिया । ,"संगमरमर के महल , बेहद शानदार बाग - बगीचे , झीलें और अतिथ्य - सत्कार के लिए मशहूर यहाँ के मिलनसार लोग , ये खास विशेषताएँ हैं उदयपुर की ।" ,पिछौला झील पर नज़र पड़ती है तो उस पर पड़ती सिटी पैलेस के अक़्स को देखकर मन रोमांचित हो उठता है । ,राजस्थान का सबसे विशाल महल है सिटी पैलेस । ,सिटी पैलेस में कारीगरी की बारीकी देखते बनती है । ,"इस परिसर के तीन महल - बारी , दिलखुश व मोती तथा सूरज गोखुर , मोर चौक , जिसका नाम अपने आकर्षक मोर की पच्चीकारी के कारण पड़ा है , पवित्र स्थल धूनी माता व राणा प्रताप का संग्रहालय इस परिसर के दर्शनीय स्थल हैं ।" ,"पिछौला नदी के मध्य निर्मित लेक पैलेस , जो कि विश्व के रोमांटिक होटलों में से एक गिना जाता है ।" ,पिछौला झील और उसके आसपास आप पैदल ही घूम सकते हैं । ,उदयपुर जायें तो घुड़सवारी का आनंद ज़रूर लीजिये । ,अगर जैसलमेर में ऊँट की सवारी का आनंद लिया जा सकता है तो उदयपुर में घुड़सवारी का अपना ही मज़ा है । ,जैसलमेर के कई ऑपरेटर घुड़सवारी की व्यवस्था करते हैं मगर प्रिंसेस ट्रेल इनमें उम्दा है । ,लोगों को जांबाज़ मारवाड़ी घोड़ों पर सवारी करायी जाती है । ,"ये ऑपरेटर दूर व नज़दीक , दोनों तरह की सवारी कराते हैं ।" ,"हॉर्स सवारी की भी व्यवस्था करते हैं , जिसके तहत एक रात जंगल के मध्य शिविरों में ठहरने की व्यवस्था होती है ।" ,यह वाकई रोमांचकारी होता है । ,प्रिंसेस ट्रेल को 98290-42012 टेलीफोन नंबर पर संपर्क किया जा सकता है । ,उदयपुर चटपटे और मिर्च - मसाले वाले खाने के लिए जाना जाता है । ,उदयपुर के गट्टे की सब्जी तो मशहूर है ही मिर्ची बड़ा और कचौड़ी का भी जवाब नहीं है । ,कई होटलों व रेस्तराँ में थाली की व्यवस्था है जहाँ आप जी भर कर राजस्थानी एवं गुजराती भोजन का स्वाद ले सकते हैं । ,उदयपुर में पर्यटकों के ठहरने के भी पर्याप्त इंतज़ाम हैं । ,गणगौर घाट पर स्थित होटल गणगौर पैलेस एक बजट होटल है । ,वाजिब दाम पर अच्छी ख़िदमत गणगौर पैलेस की खासियत है । ,"द टाइगर में आप स्पा , झील के सौंदर्य देखने व अच्छे भोजन का लुत्फ़ ले सकते हैं ।" ,"जगत निवास पैलेस , झील के मध्य अवस्थित सभी सुविधाओं से युक्त होटल है ।" ,लेक पैलेस विश्व के आकर्षक होटलों में से एक माना जाता है । ,"क्वालिटी इन चार - सितारा होटल है जबकि द ट्रिडेंट , हिलटॉप पैलेस , जय समंद आइलैंड , राजदर्शन , पारस महल , आदि तीन - सितारा होटल हैं ।" ,"लेक पिछौला , शिव निवास पैलेस , फतेह प्रकाश पैलेस , उदय विलास पैलेस बेहतरीन होटल हैं ।" ,उदयपुर में खरीदारी के लिए जायें तो पूरे राजस्थान के सामान को दिमाग में रख कर जायें । ,"खूबसूरत कठपुतलियाँ , खिलौने , गुड्डे - गुड़िया के अलावा कपड़ों और परिधानों की एक लंबी श्रृंखला , यानि हैंड प्रिंट , बंधेज और बाटिक प्रिंट के सामान - वस्त्र , चाँदी व लकड़ी पर उत्कीर्ण उपयोगी व सजावटी सामान , यहाँ की लोक शैली के गहने , ब्लू पॉटरी , पिछवई या वॉल हैंगिंग आदि राजस्थानियों की कारीगरी के उत्कृष्ट नमूने खरीद सकते हैं ।" ,"खरीदारी के लिए आप राजस्थान सरकार के हैंडीक्राफ्ट इंपोरियम , चेतक सर्कल , बापू बाज़ार , सिटी मार्केट , हाथी पोल और लेक पैलेस रोड में घूम सकते हैं ।" ,उदयपुर यों ही नहीं कहलाता पूरब का वेनिस । ,उदयपुर में महाराणा प्रताप सिंह एक छोटा सा हवाई अड्डा है । ,"दिल्ली , जयपुर और मुम्बई से उदयपुर के लिए प्रतिदिन की उड़ानें हैं ।" ,हवाई अड्डा शहर से 20 किलोमीटर की दूरी पर है । ,"राजस्थान के प्रायः सभी प्रमुख शहरों , जैसे जयपुर , बीकानेर , जोधपुर , अजमेर और माउंट आबू से उदयपुर के लिए बहुत अच्छी बस सेवाएँ हैं ।" ,नई दिल्ली और जयपुर से उदयपुर के लिए दैनिक रेल सेवा है । ,मुम्बई से उदयपुर के लिए अहमदाबाद में ट्रेन बदलनी पड़ती है । ,तालाब में बने आइलैण्ड में मोटरबोट के साथ पैडलबोट से सैर की सुविधा उपलब्ध है । ,आइलैण्ड में लगी पवन चक्की भी आकर्षित करती है । ,बस्तर के राजमहल के मुख्य द्वार पर बस्तर की आराध्य देवी माँ दण्तेश्वरी का मंदिर है । pl,मंदिर के साथ दशहरे पर चलने वाले विशाल रथ भी इसके द्वार पर देखे जा सकते हैं । ,दण्तेश्वरी मंदिर के सामने बस्तर के काकतीय वंश के अंतिम महाराजा प्रवीरचन्द्र भंजदेव की प्रतिमा बस्तर वासियों की आस्था का प्रतीक है । ,धरमपुरा रोड पर भगवान बालाजी का भव्य मंदिर है । ,धरमपुरा रोड के बालाजी के मंदिर में प्रदेश ही नहीं वरन देश के अन्य भागों से भी श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं । ,केरल प्रांत पर्यटकों में बेहद लोकप्रिय है । ,इसीलिए केरल को ' God's Own Country ' अर्थात् ' ईश्वर का अपना घर ' नाम से पुकारा जाता है । ,केरल में अनेक प्रकार के दर्शनीय स्थल हैं । ,"केरल के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में प्रमुख हैं - पर्वतीय तराइयाँ , समुद्र तटीय क्षेत्र , अरण्य क्षेत्र , तीर्थाटन केन्द्र आदि ।" ,इन स्थानों पर देश - विदेश से असंख्य पर्यटक भ्रमणार्थ आते हैं । ,"मुन्नार , नेल्लियांपति , पोन्मुटि आदि पर्वतीय क्षेत्र , कोवलम , वर्कला , चेरायि आदि समुद्र तट , पेरियार , इरविकुळम आदि वन्य पशु केन्द्र , कोल्लम , अलप्पुष़ा विशेष आकर्षण केन्द्र हैं ।" ,भारतीय चिकित्सा पद्धति में आयुर्वेद का भी पर्यटन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान है । sg,राज्य की आर्थिक व्यवस्था में भी पर्यटन ने निर्णयात्मक भूमिका निभाई है । ,भारत के केन्द्रशासित प्रदेशों में दमन और दीव भी हैं । ,अरब सागर की अपार - अगाध जलराशि ने इन्हें व्यापार और पर्यटन का प्रमुख केन्द्र बना दिया है । ,दमन और दीव में बहुत छोटे - छोटे द्वीप हैं । ,"प्राकृतिक सुंदरता , विविध संस्कृतियों के मेल व सुंदर समुद्र तटों ने दमन और दीव को असीम खूबसूरती से नवाजा है ।" ,गुजरात व महाराष्ट्र राज्य की नजदीकी ने यहाँ के पर्यटन को फलने - फूलने का पूरा मौका दिया है । ,बहुत समय तक दमन और दीव पर पुर्तगालियों का शासन था । ,उसके बाद पुर्तगालियों से आजाद कराकर दमन और दीव को गोआ में मिला दिया गया । ,वर्ष 1987 में दमन और दीव को एक अलग केन्द्रशासित प्रदेश का दर्जा दिया गया । ,भारत के प्रमुख व्यावसायिक केन्द्र मुंबई से दमन की दूरी लगभग 193 कि.मी. है । ,दमन पूर्व में गुजरात राज्य से तथा पश्चिम में अरब सागर से जुड़ा है । ,दमन के उत्तर में ' कोलाक ' तथा दक्षिण में ' कलाई ' नदी है । ,दमन का पड़ोसी जिला गुजरात का वलसाड जिला है । ,"दीव भारत का एक ऐसा द्वीप है , जो दो पुलों के द्वारा जुड़ा है ।" ,दीव गुजरात के जूनागढ़ जिले से जुड़ा है । ,दमन दो भागों में ' मोटी दमन ' और ' नानी दमन ' में विभाजित है । ,दमन के दोनों भागों को विभक्त करने वाली नदी दमनगंगा नदी है । ,"मोटी दमन में कई पुराने चर्च हैं , जिनमें प्रमुख चर्च ' कैथेडरल बोल जेसू ' है ।" pl,दमन के चर्च की दीवारों पर की गई ईसा मसीह के जीवन से संबंधित सुंदर चित्रकारी व लकड़ी की बेहतरीन नक्काशी पर्यटकों को यहाँ खींच लाती है । ,नानी दमन का मुख्य आकर्षण संत जैरोम का किला है । sg,दमन का जैरोम किला मुगलों के आक्रमण से सुरक्षा के लिए बनाया गया था । ,"इसके अलावा दमन के अन्य पर्यटक आकर्षणों में बोम जीजस चर्च , अवर लेडी ऑफ सी चर्च , अवर लेडी ऑफ रेमीडियोज चर्च , परगोला गार्डन , अम्यूजमेंट पार्क , दमनगंगा टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स , काचीगाम , सत्य सागर उद्यान , मिरासोल गार्डन , मिरासोल वाटर पार्क आदि हैं ।" ,दमन की जमीन को छूते अरब सागर ने दमन को अप्रतिम प्राकृतिक सुंदरता व हरियाली प्रदान की है । ,"दमन में दो बीच देविका बीच , और जैमपोरे बीच हैं ।" ,देविका बीच दमन से पाँच किमी उत्तर में है । pl,देविका बीच बच्चों को बहुत लुभाता है क्योंकि यहाँ बच्चों के लिए पार्क व अन्य सुविधाएँ हैं । ,नानी दमन में स्थित जैमपोरे बीच दमन का प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट भी है । pl,जैमपोरे बीच का शांत वातावरण प्रेमियों को खींच लाता है । ,जैमपोरे बीच के शांत वातावरण के कारण अधिकांश प्रेमी जोड़े यहाँ स्वच्छंदता की तलाश में आते हैं । ,तैराकी के लिए भी जैमपोरे बीच बहुत अच्छा स्थान है । ,क्या है दीव में । ,"सेंट पॉल चर्च , दीव फोर्ट , पनीकोटा फोर्ट , घोघला बीच , चिल्ड्रन पार्क और समर हाउस दीव के मुख्य पर्यटन स्थल हैं ।" ,नगोआ बीच दीव का बेहद ही सुंदर बीच है । ,दीव से 20 मिनट की ड्राइव करके आप आसानी से नगोआ बीच पहुँच सकते हैं । ,जूते के आकार के समान होने के कारण 2 किमी तक फैला नगोआ द्वीप अब पर्यटकों की पहली पसंद बन रहा है । ,चक्रतीर्थ बीच हरियाली के सौंदर्य से भरपूर है । ,"अब मैं भगवान से मम्मी के लिए क्या मांगू , वो उन्हीं के पास तो है ।" ,वो जो चाहती है उनसे मांग सकती है । ,अंजलि ! तुम कहां चली गई हो ? ,तुम जानती हो कि तुम्हारे बिना मैं कितना अकेला हो जाऊंगा । ,ये अंजलि कौन है ? ,अंजलि ! मेरी आठ साल की बेटी है । ,अंजलि ! तुम्हारी सेहत तो ठीक है ना ? ,मुझे टीना के बारे में पता नहीं था । ,"कैसे पता होता , तुम तो गायब ही हो गई ।" ,"जब मुझे मेरे दोस्त की जरूरत थी , तुम तो थी ही नहीं ।" ,लड़कियां बास्केटबॉल नहीं खेल सकतीं ? ,इसने तुमसे सच कहा और तुम इससे लड़ने लगी ? ,क्यूं ? ,रोज कॉलेज में मिस अंजलि आपको बास्केटबॉल में हरा नहीं देती थी क्या ? ,"रोज - रोज नहीं हराती थी , कभी - कभी हराती थी ।" ,याद करो अंजलि ! तुम रोज हारती थी । ,"मैं , तुम्हें अभी इसी वक्‍त चैलेंज करती हूं , मेरे साथ खेलो ।" ,"हाय टीना ! आज अगर तुम यहां होती ना , तो तुम गर्व से कह सकती कि अंजलि मेरी बेटी है ।" ,"क्योंकि वह बहुत अच्छी है और क्यों न हो , उसका नाम अंजलि जो है ।" ,"लेकिन पता है , उसकी सबसे अच्छी बात क्या है , कि वो बिल्कुल तुम्हारी जैसी है ।" ,अंजलि बहुत ही प्यारी लग रही है ना इस फोटो में ? ,वो यहां नहीं इसलिए रोज उसकी फोटो देख - देखकर तू खुश हो जाता है । ,"अमन ! शादी तो दिसंबर में हो रही है ना , तू लंडन क्यों नहीं होकर आता ?" ,लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि वो मुझसे प्यार नहीं करती । ,"मर्द बहुत कमजोर होते हैं बेटी , बहुत कमजोर होते हैं ।" ,"ये उसूल तो बना लेते है , पर भूल जाते हैं दिल के आगे कोई उसूल नहीं होता ।" ,"और हम इन जिद्‍दी , कमजोर मर्दों को एहसास दिलाते हैं कि दिल के रिश्ते धड़कनों से बनते हैं , उसूलों से नहीं ।" ,"लेकिन ये दिल के रिश्ते , दिल की बात कह देने से बनते हैं बेटी ।" sg,तुम अपने दिल की बात कह दो अंजलि । ,कभी - कभी दिल की बात कहने से दिल टूट भी सकता है । ,"न कहोगी , तो कौन सा आबाद रहेगा ?" ,अमन ने बताया कि तुम्हारी शादी होने वाली है । ,अमन ! मैं आज रात को ही वापस जाना चाहती हूं । ,"तुमने ये टीना को दिया था , जब वो एक नई जिंदगी शुरू करने जा रही थी ।" sg,आज तुम भी एक नई जिंदगी शुरू करने जा रही हो । ,मैं जानता हूं कि तुम और राहुल एक साथ बहुत खुश रहोगे । ,"आप शादी की तैयारियां शुरू कर दीजिए , मैं अब और इंतजार नहीं करना चाहती ।" ,लेकिन अंजलि ! बाबाजी ने तो कहा था कि दिसंबर के पहले कोई तारीख नहीं है । ,"मां ! खुशियां तारीख नहीं NULL , तकदीर लाती है , जिसे कोई नहीं बदल सकता ।" ,अंजलि ने इतनी जल्दी शादी का फैसला किया कि मुझे पूरी तैयारी करने का वक्‍त ही नहीं मिला । ,"तुम जानती हो , मैंने हमेशा तुम्हारी आंखों में वो प्यार देखना चाहा जो मेरी आंखों में है ।" ,"और आज मुझे वो प्यार दिखाई दिया है , लेकिन वो मेरे लिए नहीं ।" ,"जब से तुमने प्यार को समझा है , प्यार को जाना है , सिर्फ उसी से प्यार किया ।" ,राहुल ही तुम्हारा पहला प्यार है और पहला प्यार क्या होता है वो मुझसे पूछो और तुम मेरे लिए सब गँवाने जा रही थी । ,"मैं इस प्यार के बीच कैसे आ सकता हूं , ये तो कभी मेरा था ही नहीं ।" ,और वैसे भी किसी ने मुझसे कहा है कि मैं तो इतना हैंडसम हूं कि मुझे कोई भी मिल सकती है । ,इनमें वो सारी बातें हैं जो मैं अपनी बेटी को कहना चाहती हूं । pl,ये ही मेरी बेटी की यादें बन कर रह जायेगीं । sg,रूपा हमें गायत्री मंत्र सुनाएगी । ,गायत्री मंत्र तो मैं भूल गई । ,क्या ? ,ये तू क्या कह रही है रूपा ? sg,सुना बहनों हमारी रूपा गायत्री मंत्र भूल गयी । ,हजारीबाग नेशनल पार्क में दृश्यावलोकन के लिए चार ऊँचे टॉवर बनाए गए हैं जिनकी ऊँचाई 200 फीट है । sg,पटना - राँची रोड पर हजारीबाग से 22 कि.मी. उत्तर की ओर घने जंगल के मध्य 186.25 वर्ग कि.मी. में इस पार्क को रेखाकिंत किया गया है । pl,इस पार्क की सघनता पर्यटकों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करती है । ,हजारीबाग - पटना मार्ग में सालपर्णी स्थित है । ,ऊँची - ऊँची घाटियों को अपनी गोद में संजोये सालपर्णी का वन हिल स्टेशन से कम नहीं है । ,एनएच से तीन कि.मी. अंदर सालपर्ण विश्रामगार व वाच टावर है । ,तालाब में बोटिंग की सुविधा भी है । ,बड़कागाँव प्रखंड मुख्यालय से 12 कि.मी. की दूरी पर बरसोपानी की गुफा है । ,पर्यटक गुफा में जाकर ताली बजायेंगे तो गुफा के गुंबद से पानी टपकने लगता है । sg,जोर से आवाज लगाने पर भी यह नजारा देखा जा सकता है । ,इस्को गुफा बड़कागाँव प्रखंड चौक से 22 कि.मी. की दूरी पर स्थित है । ,शहर के समीप ही अवस्थित केनारीहिल में एक सुव्यवस्थित पार्क और छोटे - छोटे तालाब हैं । ,"केनारीहिल में एक ऑबजरवेशन ( अवलोकन ) टावर भी है , जहाँ से पर्यटक शहर के मनोहारी दृश्य एवं वादियों का अवलोकन कर सकते हैं ।" ,खूबसूरत कोनार डैम हजारीबाग से 51 कि.मी. तथा विशुनगढ़ से 9 कि.मी. दूरी पर स्थित है । ,दामोदर घाटी निगम द्वारा प्रथम चरण में निर्मित कोनार डैम बहुउद्देशीय डैम है । ,कोनार डैम कोनार नदी पर बनाया गया है जो 885 मीटर लंबा और 48 मीटर ऊँचा है । ,कोनार डैम - ,1955 में बनकर यह तैयार हुआ था । ,कोनार डैम के जलाशय से 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई की जाती है । ,कोनार डैम से 4 मेगावाट विद्युत का उत्पादन होता है । ,कोनार डैम के पास अय्यर बाँध भी है जहाँ से 2.25 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है । ,बनासो भी इस जिले के तथा आसपास के क्षेत्रों का प्रसिद्ध तीर्थस्थल माना जाता है । ,"बनासो में माँ भगवती का मंदिर है , जिसे महामाया मंदिर कहा जाता है ।" ,प्रचलित है कि महामाया मंदिर का निर्माण शिव के अखंड भक्त बाणासुर ने किया था । ,महामाया मंदिर में लोग इच्छित मनोकामना की पूर्ति के लिए मन्नतें माँगते हैं । ,हजारीबाग शहर से 38 कि.मी. दक्षिण - पश्चिम में स्थित सूरजकुंड एक प्रसिद्ध गर्मजल का झरना है । ,झरने के पानी का तापमान 190 डिग्री फारेनहाइट रहता है । ,चर्म रोगी हजारों की संख्या में यहाँ आते रहते हैं । ,"हजारीबाग का सतपहाड़ ऐसे स्थलों में से एक है , जहाँ चट्टानों पर की गई पेटिंग विश्व में अपना स्थान रखती है ।" ,सतपहाड़ में बहुत से माइकोलिथ तथा रंगे हुए पत्थर पाये गये हैं । ,इस्को गाँव के निकट सती हिल्स की खोज की गयी है । ,इतिहासकारों का कहना है कि सती हिल्स की यह गुफा काफी विशाल रही होगी और इसमें करीब 200 लोग एक साथ आसानी से बैठ सकते हैं । ,"इस गुफा के किनारे एक नाला गुजरता है , जिसमें साल भर पानी बहता है ।" ,इस्को गाँव हजारीबाग से 45 किलोमीटर दूरी पर है । ,इस्को गाँव बड़कागाँव प्रखण्ड में है । ,पुरातत्ववेत्ताओं के अनुसार इस्को गाँव की चट्टानों पर पायी गई पेंटिंग्स मध्यकालीन युग की हैं । sg,इस्को गाँव में यह बात भी प्रमाणित की जा चुकी है कि हिमयुग में मानव अत्यधिक गहरी गुफाओं में रहते थे । ,हजारीबाग झील शहर के बीचोंबीच में स्थित है । sg,हजारीबाग झील के किनारे पर्यटकों के बैठने के लिए सीढ़ी बनायी गयी है । ,हजारीबाग झील के चारों तरफ पेड़ लगे हुए हैं । ,हजारीबाग झील में बोटिंग की व्यवस्था है । ,हजारीबाग के पास ही में स्वर्ण जयंती कैफेटेरिया पार्क है । ,स्वर्ण जयंती कैफेटेरिया पार्क में पर्यटक स्वादिष्ट भोजन के अलावा झूला और टॉय ट्रेन का आनंद उठा सकते हैं । ,बड़कागाँव ( हजारीबाग ) से महज 6 कि.मी. की दूरी पर मेगालीथ के बेजोड़ नमूने आज भी बिखरे पड़े हैं । ,मेगालीथ के बेजोड़ नमूनों में कई सूक्ष्म उपकरण तथा माइक्रोलिथिक औजार आदि शामिल हैं । ,मेगालिथ के अद्‌भुत नमूनों का यह स्थान इक्वीनोक्स प्वाइंटर के रूप में जाना जाता है । ,मान्यता है कि आदिमानव यहाँ से सूर्योदय के दृश्यों को निहारा करता होगा । ,रामगढ़ जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल - ,नव सृजित जिला मुख्यालय रामगढ़ एक छावनी शहर है । ,रामगढ़ छावनी से बाहर नागरिक क्षेत्र रामगढ़ शहर के रूप में जाना जाता है । ,झारखण्ड की राजधानी राँची से सटे उत्तर दिशा में रामगढ़ शहर अवस्थित है । ,"इसके बाद मैदा में कस्टर्ड पावडर , सोडा , बेकिंग पावडर मिलाकर अच्छी तरह छान लें , ताकि सारी सामग्री एक साथ मिक्स हो जाए ।" ,अब इस छने हुए मिश्रण को मलाई शक्कर के घोल में मिलाएं और एक तरफ चम्मच चलाते हुए फेंट लें । ,मिश्रण को फेंटते समय इसमें दूध मिलाते जाए । ,अब केक के मिश्रण को गैस अवन में 45 मिनट या माइक्रोवेव अवन में 20 मिनट ब्राउन होने तक बेक कर लें । ,"आप चाहे तो केक में चॉकलेट एसेंस , बटरस्कॉच , वनीला , पाइनापल फ्लेवर भी डाल सकते हैं ।" ,तैयार केक पर आइसिंग कर सर्व करें । ,बटर और कस्टर्ड मिल्क को मिलाकर अच्छी तरह फेटें । ,"उसमें मैदा , बेकिंग , कोको पावडर , सोडा , कलर और एसेंस डालकर फेटें ।" ,फिर दूध डालकर अच्छी तरह फेटें । ,टीन के बर्तन में चिकनाई लगाकर सतह पर मैदा छिड़कें । ,अब मिश्रण को भरें और 180 डिग्री सें. पर 25 मिनट तक बेक करें । ,फ्रॉस्टिंग के लिए मक्खन और आइसिंग शुगर को मिलाकर हल्का होने तक फेटें । ,"फेटते समय कोको पावडर , कलर और एसेंस भी मिला दें ।" ,सजाने के लिए चॉकलेट के टुकड़े करके दूध में पिघला लें । ,केक को दो भागों में काटें । ,आधे भाग पर 1 / 4 फ्रॉस्टिंग की हुई सामग्री फैला दें । ,केक का दूसरा भाग इस पर रखें और केक को ठंडा करके दोनों तरफ चॉकलेट फैला दें । ,अब घर आए मेहमानों के साथ न्यू ईयर का आनंद लें । ,सर्वप्रथम मैदा को छान लें । ,"सोडा , बेकिंग पावडर डालें ।" ,"अब मलाई , मक्खन और शक्कर को मिक्स करके हल्की क्रीम बनने तक फेंटें ।" ,"इसमें मैदा , दही और एसेंस ऐसे मिलाएँ कि मिश्रण एकसार हो जाए ।" ,केक टीन में चिकनाई लगाकर थोड़ा - सा सूखा मैदा बुरकाकर फेंटा मिश्रण डाल दें । ,अवन को अच्छा गरम करने के बाद उसमें केक टीन को रखकर करीब पैंतीस - चालीस मिनट तक बेक करें । ,अब तैयार केक पर आइसिंग शुगर की सहायता से लिखें और रंगबिरंगी जेम्स की गोलियाँ चिपका कर सजा दें । ,तैयार केक को फ्रिज में रख दें । ,सर्वप्रथम मैदा व बेकिंग पावडर को छान लें । ,अब पोटेटो को छीलकर कद्दूकस करके तेल में तल कर रख लें । ,एक बर्तन में शक्कर और घी को हल्का होने तक फेंटें । ,फिर अंडे को फेंटकर इसमें मिलाएँ । ,"तत्पश्चात मैदा , नमक , बेकिंग पावडर व वनीला एसेंस डालकर पुनः हल्का होने तक फेंटें और उसमें तले पोटेटो के लच्छे डालकर अच्छी तरह कुछ देर चलाएँ ।" ,बेकिंग डिश में चिकनाई लगाकर सामग्री डालें । ,अब अवन को 200 सेंटीग्रेड पर गरम करके केक को 20 मिनट तक बेक करें । ,आइसिंग से सजाकर टेस्टी पोटेटो - एग्ज केक सर्व करें । ,"सबसे पहले आटे में तेल , नमक डालकर पानी मिलाकर मुलायम गूंथ लें तथा 20 - 25 मिनट के लिए ढंककर रख दें ।" ,करीब 20 मिनट बाद इस आटे की पतली - पतली चपाती बना लें । ,अब एक पैन में मक्खन गरम करें ,उसमें जीरा डालकर प्याज और बारीक कटी हरी मिर्च डालकर कुछेक ( 2 - 3 ) मिनट तक चलाएं । ,अब इसमें लहसुन - अदरक का पेस्ट डालकर भून लें । ,फिर कटे हुए टमाटर डालकर 2 मिनट तक पकाएं । ,आलू डालकर 3 - 4 मिनट तक फ्राई करें । ,शिमला मिर्च भी डाल दें और 2 मिनट तक बिना ढंके पकाएं । ,अब इसमें नमक और बारीक कटा हरा धनिया डाल दें । ,पनीर भी डाल दें ध्यान रहे कि मिश्रण सूखा ही रहे । ,इस मिश्रण को आंच से उतार लें । ,अब एक चपाती लेकर उसमें टॉमेटो कैचअप डालकर चम्मच से फैला लें । ,इसी प्रकार 2 - 3 और चपातियों में भरावन भर कर रोल तैयार कर लें । ,अब एक तवे पर थोड़ा - सा मक्खन डाल दें । ,भरावन भरकर तैयार किए गए 3 - 4 फ्रैंकी रोल तवे पर रख दें । ,थोड़ा - सा मक्खन रोल के ऊपर भी लगा दें । ,तवे पर हल्के - से सेंक कर उतार लें और गर्मागर्म सर्व करें । ,"जनसंख्या में यात्रा की दरों और रोग - प्रतिरोधकता में कमीं के कारण , 20 वीं शताब्दी के बाद के वर्षों में मामलों की दर बढ़ रही है ।" pl,"कई प्रकार के परजीवी फेफड़ों को प्रभावित कर सकते हैं जिनमें "" टोक्सोप्लाज़्मा गोन्डी "" , "" स्ट्रॉन्गीलॉएडस स्टेकोरालिस "" , "" ऐस्केरिस ल्युम्ब्रीकॉएड्स "" और "" प्लास्मोडियम मलेरिया "" शामिल हैं ।" ,"ये जीव आम तौर पर शरीर में त्वचा के साथ सीधे संपर्क , अंतर्ग्रहण , कीट के काटने से दाखिल होते हैं ।" ,""" पैरागोनिमस वेस्टरमानि "" छोड़ कर अधिकतर परजीवी विशिष्ट रूप से फेफड़ों को प्रभावित नहीं करते हैं लेकिन फेफड़ों को दूसरे स्थानों से द्वतीयक रूप में शामिल करते हैं ।" sg,"कुछ परजीवी , विशेष रूप से वे जो "" एस्केरिस "" और "" स्ट्रॉन्गीलॉएड्स "" प्रजाति से होते हैं , गंभीर स्नोफीलिक प्रतिक्रिया उकसाते हैं , जिसके कारण स्नोफीलिक निमोनिया हो सकता है ।" ,दूसरे संक्रमणों में जैसे कि मलेरिया आदि में फेफड़ों का शामिल होना प्राथमिक रूप से साइटोकाइन - प्रेरित प्रणालीगत सूजन के कारण होता है । ,"विकसित दुनिया में यह संक्रमण , यात्रा से वापस आये लोगों या प्रवासियों के माध्यम से अधिक आम रूप से फैलता है ।" ,वैश्विक रूप से यह संक्रमण उन जगहों पर अधिक आम है जहां पर रोग - प्रतिरोधकता कम है । ,इडियोपैथिक इंटरस्टिशियल निमोनिया या गैर संक्रामक निमोनिया विसरित फेफड़ा रोग का वर्ग है । ,"इनमें विसरित वायुकोशीय क्षति , संयोजक निमोनिया , गैर विशिष्ट इंटरस्टिशियल निमोनिया , लिम्फोसाइटिक इंटरस्टिशियल निमोनिया , विश्लकीय निमोनिया , श्वसन संबंधी श्वासनलिका शोथ , इंटरस्टिशियल फेफड़ों के रोग और सामान्य इंटरस्टिशियल निमोनिया शामिल हैं ।" ,अक्सर निमोनिया ऊपरी श्वसन पथ संक्रमण के रूप में आरंभ होता है और फिर निचले श्वसन पथ में जाता है । ,वायरस फेफड़ों तक भिन्न - भिन्न मार्ग से पहुंच सकते हैं । ,श्वसन सिंशियल वायरस आम तौर पर तब संक्रमित होते हैं जब लोग संदूषित वस्तुओं को छूते हैं और फिर अपनी आँखों या नाकों को छूते हैं । ,अन्य वायरस जनित संक्रमण तब होते हैं जब वायु में फैली संदूषित महीन बूंदें मुंह या आंखों के रास्ते श्वसन कर ली जाती हैं । sg,"एक बार जब ऊपरी वायुमार्ग में पहुंच जाता है तो वायरस अपना मार्ग फेफड़ों में बना लेते हैं , जहां से वायुमार्ग , एल्वियोलि या फेफड़ा पेन्काइमा से जुड़ी कोशिकाओं में प्रवेश कर जाते हैं ।" ,कुछ वायरस जैसे कि चेचक या हरपीस सिम्प्लेक्स रक्त के माध्यम से फेफड़ों तक पहुंचते हैं । ,फेफड़ों पर आक्रमण के कारण भिन्न - भिन्न डिग्री की कोशिकाओं की मृत्यु हो सकती है । ,जब प्रतिरक्षा तंत्र इस संक्रमण पर प्रतिक्रिया देता है तो फेफड़ों को और अधिक क्षति हो सकती है । sg,"श्वेत रक्त कणिकाएं , मुख्य रूप से एकल नाभिकीय कोशिकाएं प्राथमिक रूप से सूजन पैदा करती हैं ।" ,"साथ ही फेफड़ों को क्षति भी पहुंचाती हैं , बहुत से वायरस इसी समय अन्य अंगों को प्रभावित कर सकते हैं और इस प्रकार अन्य शारीरिक क्रियाओं को भी बाधित करते हैं ।" ,वायरस शरीर को बैक्टीरिया जनित संक्रमणों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाते हैं ; इस प्रकार से बैक्टीरिया जनित निमोनिया सह - रुग्ण स्थिति तक पहुंचा सकते हैं । ,अधिकतर बैक्टीरिया गले या नाक में रहने वाले जीवों के प्रवेश से फेफड़ों में शामिल हो जाते हैं । ,सामान्य लोगों में से आधे लोगों में ये छोटे जीव नींद के दौरान प्रवेश करते हैं । ,"जबकि गले में हमेशा बैक्टीरिया होते हैं , संक्रामक संभावनाओं वाले वहां पर केवल कुछ ही समय तक कुछ विशेष परिस्थितियों में रह पाते हैं ।" ,"इस प्रकार के बैक्टीरिया जैसे "" माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकलोसिस "" और "" लिगियोनेला न्यूमोफिला "" की एक अल्प मात्रा , वायु में फैली संदूषित महीन बूंदों के माध्यम से फेफड़ों में पहुंच जाती हैं ।" ,बैक्टीरिया रक्त द्वारा फैल सकते हैं । ,"एक बार फेफड़ों में पहुंचने के बाद बैक्टीरिया कोशिकों के बीच के स्थान में और एल्वियोलि , जहां पर मैक्रोफेग और न्यूट्रोफिल ( रक्षक श्वेत रक्त कणिकायें ) बैक्टीरिया को निष्क्रिय करने का प्रयास करते हैं , में प्रवेश कर सकते हैं ।" sg,न्यूट्रोफिल साइटोकाइन मुक्त करते हैं जो प्रतिरक्षा तंत्र को सामान्य रूप से सक्रिय करता है । ,"इसके कारण आम बैक्टीरिया जनित निमोनिया के कारण होने वाले बुखार , ठिठुरन और थकान जैसे लक्षण होते हैं ।" ,"न्यूट्रोफिल , बैक्टीरिया और आसपास की रक्त वाहिकाओं से तरल एल्वियोली में भर जाता है जिसके कारण सीने के एक्स - रे में समेकन दिखता है ।" ,निमोनिया का निदान आम तौर पर शारीरिक चिह्नों और सीने के एक्स - रे के संयोजन द्वारा किया जाता है । ,हालांकि अंतर्निहित कारण की पुष्टि करना कठिन हो सकता है क्योंकि बैक्टीरिया जनित अथवा गैर - बैक्टीरिया जनित मूल के बीच अंतर करने वाला कोई भी पुष्टीकरण परीक्षण नहीं उपलब्ध है । ,"विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बच्चों में निमोनिया के निर्धारण का आधार चिकित्सीय आधार पर खांसी या श्वसन में जटिलता और तीव्र श्वसन दर , सीने में भीतरी खिचाव में या चेतना में कमी को बताया है ।" ,"तीव्र श्वसन दर को दो माह तक के बच्चों में 60 से अधिक श्वसन प्रति मिनट , दो माह से एक साल के बच्चों में 50 से अधिक श्वसन प्रति मिनट और 1 साल से 5 साल तक के बच्चों में 40 से अधिक श्वसन प्रति मिनट के रूप में निर्धारित किया गया है ।" ,"बच्चों में बढ़ी हुई श्वसन दर और सीने में घटा भीतरी खिचाव , स्टेथेस्कोप से सीने की चिटकन के सुनाई देने से अधिक संवेदनशील है ।" ,"वयस्कों में , हल्के मामलों में जांच की जरूरत नहीं पड़ती है ।" ,यदि सभी महत्वपूर्ण चिह्न और परिश्रवण सामान्य हैं तो निमोनिया की जोखिम बहुत कम है । ,"अस्पताल में भर्ती किये जाने की जरूरत वाले लोगों में , पूर्ण रक्त गणना , सीरम इलेक्ट्रोलाइट , सी - रिएक्टिव प्रोटीन स्तर के साथ - साथ पल्स ऑक्सीमेट्री , सीने की रेडियोग्राफी और रक्त परीक्षणों और संभवतः यकृत प्रकार्य परीक्षणों को अनुशंसित किया जाता है ।" ,"इन्फ्लुएंज़ा जैसे रोग का निदान चिह्नों और लक्षणों के आधार पर किया जाता है ; हालांकि , इन्फ्लुएंज़ा संक्रमण की पुष्टीकरण के लिये परीक्षण की जरूरत पड़ती है ।" ,इस प्रकार उपचार अक्सर समुदाय में इन्फ्लुएंज़ा की उपस्थिति या तीव्र इन्फ्लुएंज़ा परीक्षण पर आधारित होता है । ,"शारीरिक परीक्षण कभी - कभार निम्न रक्तचाप , उच्च हृदय दर या निम्न ऑक्सीजन संतृप्ति का खुलासा कर सकता है ।" ,श्वसन दर सामान्य से अधिक हो सकती है और यह अन्य चिह्नों की उपस्थिति से एक या दो दिन पहले हो सकता है । ,सीने का परीक्षण सामान्य हो सकता है लेकिन प्रभावित भाग की ओर सीने का फुलाव कम दिख सकता है । ,सूजे सीनों के कारण बढ़े वायुमार्ग से श्वसन की तीखी ध्वनि को ब्रॉन्कियल श्वसन कहा जाता है और इनको स्टेथेस्कोप से ऑस्किलेशन पर सुना जाता है । sg,सांस को अंदर लेने के दौरान प्रभावित क्षेत्र पर चिटकन ( रेल्स ) को सुना जा सकता है । ,प्रभावित फेफड़े के ऊपर टक्कर को फीका सा सुना जा सकता है और बढ़ने के विपरीत घटी हुई मुखर प्रतिध्वनि निमोनिया को फुफ्फुसीय बहाव से अलग किया जा सकता है । sg,निदान के लिये अक्सर सीने का रेडियोग्राफ उपयोग किया जाता है । ,"हल्के रोग की दशा वाले लोगों में इमेजिंग केवल उन लोगों में जरूरी होती है जिनमें संभावित जटिलतायें होती हैं , जो उपचार से बेहतर नहीं होते हैं या जिनमें कारण अनिश्चित होते हैं ।" ,यदि कोई व्यक्ति अस्पताल में भर्ती किये जाने के लिये पर्याप्त रूप से बीमार है तो उसके लिये रेडियोग्राफ की अनुशंसा की जाती है । ,परिणाम हमेशा रोग की गंभीरता के साथ संबंधित नहीं होते हैं और विश्वसनीय रूप से बैक्टीरिया जनित संक्रमण और वायरस संक्रमण के बीच अंतर नहीं कर पाते हैं । sg,कोये से रेशे निकालने की क्रिया को ’ रीलिंग ’ ( reeling ) कहते हैं । ,इस क्रिया में रीलर की सूझ - बूझ और अच्छी रीलिंग मशीन की जरुरत पड़ती है जिससे रेशम पर्याप्‍त मात्रा में कोये से निकाला जा सके । ,चूँकि एक कोकून से निकला हुआ रेशा बहुत महीन होता है जिसका रीलिंग करना बहुत कठिन होता है इसलिए तीन से दस कोकून के रेशों को इकट्‍ठा मिलाकर रीलिंग की जाती है । ,उदाहरण के लिए 20 से 22 डैनियर का बहुसूत्रीय ( multifilament yarn ) बनाने के लिए 7 कोकून पर्याप्‍त होते हैं । ,"भूमंडलीकरण व विश्‍व व्यापार संगठन का विकासशील देशों के किसानों पर प्रतिकूल असर हाल के वर्षों में चिंता का विषय रहा है , विशेषकर कपास के किसानों के संदर्भ में तो इस चिंता के कारण बहुत स्पष्‍ट हैं ।" ,"अमेरिका में 20,000 किसानों को वर्ष 2005 में 470 करोड़ डॉलर की सरकारी सहायता दी गईं ।" ,यह इस फसल के बाजार मूल्य के बराबर की सहायता है । ,"इस कारण विश्‍व बाजार में कपास की कीमत 9 से 13 प्रतिशत गिरती रही है , बावजूद इसके विश्‍व के कपास निर्यात का एक तिहाई हिस्सा अमेरिका को मिल जाता है ।" ,भारत में अनेक क्षेत्रों विशेषकर विदर्भ के किसानों की भी भूमंडलीकरण के प्रतिकूल असर के बारे में शिकायत रही है । ,विदर्भ के एक अग्रणी किसान कार्यकर्ता विजय जावंघिया ने हाल ही में कहा कि 1997 और 2003 के बीच 110 लाख बेल कपास का आयात हुआ है । ,आयात शुल्क बहुत कम यानी 10 प्रतिशत कर दिया गया है । ,"जो कपड़ा - मिलें सूत का निर्यात करती हैं , उन्हें यह भी नहीं देना पड़ता ।" pl,इस कारण सब्सिडी आधारित सस्ती विदेशी कीमतें सीधे - सीधे हमारे किसानों को नुकसान पहुंचा रही हैं । ,"उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2005 में 412 किसानों ने विदर्भ में आत्महत्या की , जबकि 2006 में आत्महत्या करनेवाले किसानों की संख्या बढ़कर 1050 तक पहुंच गईं 2007 के पहले महीने में विदर्भ में 62 किसानों ने आत्महत्या की ।" ,"जुलाई , 2006 में यहां प्रधानमंत्री गये और उन्होंने 3750 करोड़ रूपये की विशेष सहायता की घोषणा की ।" ,"इसके बावजूद आत्महत्याओं का सिलसिला थमा नहीं , इस पैकेज में सिंचाई के लिए दिया पैसा तो कई कारणों से खर्च ही नहीं हुआ , पर सबसे बड़ी कमी यह रह गयी कि किसानों को कपास का न्यायसंगत मूल्य मिलने की कोई ’ टिकाऊ व्यवस्था ’ नहीं की गईं इतना ही नहीं , सरकार ने कम मूल्य पर भी खरीद करने में बहुत देरी की व किसानों को व्यापारियों के शोषण से बचाने का उपाय नहीं किया ।" ,"इस तरह ’ इकोनॉमिस्ट ’ पत्रिका ने जो विश्‍लेषण प्रस्तुत किया है , उसमें विदर्भ के किसानों की समस्या को गंभीरता से स्वीकार करने के बावजूद कोई असरदार समाधान नहीं उभरता है ।" ,यह असरदार समाधान तो किसानों के मजबूत संगठन से ही प्राप्‍त हो सकता है । ,जिसके आधार पर वे विभिन्न लॉबियों के दांवपेचों को नकार कर न्यायसंगत मूल्य प्राप्‍त करने में सफल हो सकते हैं । ,किसानों के इस प्रयास को समाज का व्यापक समर्थन मिलना चाहिए । ,"इसके साथ ही दीर्घकालीन समाधान के रूप में हमें इस मुद्‍दे पर महात्मा गांधी के विचारों पर भी ध्यान देना चाहिए , जो गांवों की आत्मनिर्भरता से जुड़े हैं ।" ,इस सोच में हथकरघा जुलाहों व कपास के किसानों में नजदीकी व पूरक संबंध हैं । pl,कपास की देसी किस्मों को किसान स्थानीय जुलाहों को उपलब्ध करवाते हैं । ,इस व्यवस्था में हथकरघा जुलाहों को कच्चे माल की चिंता नहीं रहती है व देसी किस्मों को सस्ती लागत पर उगाने वाले किसानों को अपने क्षेत्र के पास ही बिक्री क्षेत्र मिल जाता है । ,किसान अपनी जरूरत की खाद्य - फसलें व कपास साथ - साथ उगाएं व देसी कपास को अपेक्षाकृत कम उपजाऊ भूमि पर भी उगा सकते हैं । ,इस स्थिति में छोटे किसानों के लिए टिक पाना ज्यादा मुमकिन होगा । ,आज भूमंडलीकरण से बढ़ती समस्याओं के बीच इस तरह की वैकल्पिक सोच को जीवित रखना भी जरूरी हो गया है । ,"विश्‍व बैंक की विज्ञप्‍ति के अनुसार , संवृद्धि और विकास आयोग का कार्यकाल दो वर्ष का होगा ।" ,आयोग से उम्मीद है कि वह गरीबी में कमी लाने और विकास की दृष्‍टि से आर्थिक संवृद्धि के विषय में समझदारी बढ़ायेगा । ,बैंक का दावा है कि आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष है । ,"सतही तौर पर यह दावा जो हो , यथार्थ से काफी दूर है ।" ,"आयोग के सदस्यों के भाषणों , लेखों , पुस्तकों आदि को देखें तो स्पष्‍ट हो जायेगा कि वे सब एक ही वैचारिक रंग में सराबोर हैं ।" ,वे सब आर्थिक संवृद्धि की नव - उदारवादी रणनीति के साथ पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं । ,विश्‍व बैंक की क्या मजबूरी थी कि उसने इस आयोग की स्थापना के लिए पहल की है ? ,इसको जानने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा । ,"नब्बे के दशक के आरंभ में जॉन विलियम्सन ने ’ वाशिंगटन आम राय ’ का प्रतिपादन किया , जो भूमंडलीकरण के वर्तमान दौर का वैचारिक आधार बना ।" ,"कहना न होगा कि अर्थव्यवस्था में राज्य की सक्रिय भूमिका को नकार दिया गया और यह धारणा बनायी गयी कि बाजार की शक्‍तियां संसाधनों का कुशलता और विकेक से आवंटन करेंगी , जिससे जोरदार आर्थिक संवृद्धि होगी ।" ,इसके फलस्वरूप आर्थिक विकास स्वतः होगा । ,"सोवियत संघ , समाजवादी खेमे और गुटनिरपेक्ष आंदोलन के धराशायी होने के बाद अमेरिका को लगा था कि वह दुनिया को मनमर्जी से चला सकेगा ।" ,लेकिन इधर वर्षों के घटनाक्रम ने अमेरिका को निराश किया है । sg,एक के बाद एक लातिन अमेरिका देश वाशिंगटन आम राय को ठुकराते गये हैं । ,"वहां अनेक देशों में वामपंथी सत्ता में आ गये हैं , जो वाशिंगटन आम राय पर आधारित भूमंडलीकरण के खिलाफ हैं ।" ,वामपंथ की ओर झुकाव का सिलसिला जारी है । ,"फ्रांस , स्पेन , इटली और जर्मनी जैसे पश्‍चिमी देशों में भी विरोध के स्वर मुखर हैं ।" ,’ न्यूयार्क टाइम्स ’ के स्तंभकार टॉमस फ्रीडमैन के रुमानी विचार धूल में मिल गये हैं । ,राष्‍ट्रों के बीच और उनके अंदर आर्थिक असमानताएं घटने के बदले लगातार बढ़ती जा रही हैं । ,"चिर प्रचारित ’ अमेरिका स्वप्न ’ जिसके अंतर्गत प्रतिभा , लगन और मेहनत से ऊपर उठने की बात थी , अब कूड़ेदान में है ।" ,ब्रिटिश पत्र आबजर्वर ( 8 जून ) में पॉल हैरिस लिखते हैं - खेद है कि यह ( अमेरिका स्वप्न ) पुराना तर्क अब सही नहीं रहा । ,धनी - गरीब के बीच में खाई बढ़ती ही गयी है । ,परिणामस्वरूप खाई को लांघने की क्षमता कम से कम हो गयी है । ,"जहां एक प्रतिनिधि अमेरिकी परिवार की आय पिछले पचीस वर्षों में 18 प्रतिशत बढ़ी है , वहीं सबसे धनी 1 प्रतिशत परिवारों की आय में 200 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है ।" ,"अरे सबेरे से कुछ नहीं खाया , भूख सहोगे ?" ,"सबेरे से ऐसे ही लेटे पड़े हुए हैं , अपना इलाज चलाए जा रहे हैं , फायदा रत्ती भर नहीं ।" ,"हम तो आज की रात देख लेते हैं , नहीं तो कल सबेरे चौबेपुर के वैद जी को बुलवाके दिखला देंगे ।" ,"खिलाओ सारी कमाई वैदों - हकीमों को , चार दिन देख लो जरा सब्र कर लो ।" ,"अरे भले मानस ! दो - चार पैसा ना खर्चा हो जाए , उसके लिए तुम खुद हैरान हो रहे हो और बच्चों को भी परेशान कर रहे हो ।" ,"ओमकार ! तुम मेरी मानो तो कल वैद जी को बुला लो , समझे ?" ,ये वैद जी का घर किधर है ? ,चौबेपुर में रहती हो और वैद जी का घर नहीं मालूम । ,"अरे ! भईया ! जैसा बताया था वैसा आ गए , अब रास्ता ही गलत बता दिए , तो और बात है ।" sg,ऐ भाई ! घर में घुसकर घर का पता पूछा जाता है का ? ,"चलो , बाहर चलो ।" ,जाते हैं भईया ! जरा मेहरबानी करके वैद जी के घर का पता बता दो । ,"थोड़ा ठहरना पड़ेगा , तुम यहाँ बैठो , हम अभी तैयार होकर आते हैं ।" ,"अरे , कहां गई नाव ?" ,हम तो यहीं छोड़ के गए थे । ,"आपके चौबेपुर की लड़कियाँ जो ना करें , सो थोड़ा है ।" ,"हम जब यहाँ आए न , तो वो सब यहाँ बर्तन माँज रहीं थीं , उन्होंने ही ठेल दी होगी ।" ,"उनमें से एक आपकी लड़की भी थी , पूछ लीजिएगा ।" ,"सच पूछिए तिवारी जी तो बीमारी आपकी पुरानी है , आपने पहले से ध्यान नहीं दिया इसलिए बिगड़ गई है ।" sg,अब पूरी तरह ठीक होने में समय लगेगा । ,उम्र बढ़ने के साथ - साथ आदमी को खानपान में संयम बरतना चाहिए । ,अजी ! दाम की चिंता आप क्यों करते हैं ? ,"आप जिसमें खुश हो वही होगा , लेकिन हम जैसे कहें वैसे चलिए , दवा खाइए , नियम - परहेज से रहिए ।" ,लेकिन वैद जी ! आपने तो कहा था कि ठीक होने में काफी समय लग जायेगा । ,तीन दिन के बाद आकर हमें हाल बताना । ,"गुंजा ! वो जो चंदन सबेरे हमको लेने आया था , उसकी नाव बहाई ?" ,"खैर , अब दुबारा कभी आए तो उससे झगड़ा मत करना , ठीक से बात करना ।" ,बात करने की भी का पड़ी है हमको ? ,हम क्या सबसे झगड़ा करती फिरती हैं का ? ,काका ! अब कैसी तबीयत है तुम्हारी ? ,"काका ! जरा चंदन को भेज दो ना हमारे साथ , आंवले तुड़वाने हैं ।" ,आंवले तोड़ने के लिए चंदन ही है का ? ,तुम्हारे घर में जन - मजूर नाहीं हैं । ,ई हमरे से ऐसी ही टेढ़ी बातें करता है । ,"काका ! हमें फुर्सत नाहीं है , तुम्हारी दवाई लेने के लिए चौबेपुर भी तो जाना है ।" ,"जाके आंवले तोड़ दे , वहीं से चौबेपुर निकल जाना ।" ,तो तुम आओ धीरे - धीरे हम आगे जाकर ढेर सारे आंबले तोड़ रखेंगे । ,बैठे की फुर्सत नाहीं है महारानी जी ! हमने तुमसे पहले ही कहा था कि हमें जाना है चौबेपुर । ,"अरे बाप रे , तुम तो ऐसे चौबेपुर - चौबेपुर कर रहे हो जैसा तुम्हारा प्राण वहीं है ।" ,वैद जी ! वैद जी हैं घर में ? ,"ये काम या तो पुलिस का या उसके बाप का NULL , मेरा नहीं ।" ,"मुझे और गुस्सा मत दिला सक्सेना , सब किया कराया तेरा ही है , सारे फसाद की जड़ तो तू है ।" ,अभी एक दूसरे पर इल्ज़ाम लगाने से मोहिनी वापस तो नहीं आएगी । ,इसलिए बेहतर यही है श्यामलाल जी ! गुस्सा थूक के मोहिनी की रिहाई के बारे में सोचा जाए । ,कोई न कोई रास्ता ज़रूर निकल आएगा । ,रास्ता तुम्हारे दरवाज़े तक आया है श्यामलाल ! ,"लोटिया पठान के गुनाहों से भरी दुनिया के जिस अन्धेरे कोने में तुम्हारी बेटी कैद है , वहाँ कानून के लम्बे हाथ नहीं पहुँच सकते , सिर्फ मेरे हाथ पहुँच सकते हैं ।" ,"तू कल का छोकरा लोटिया पठान से क्या टकराएगा , काट के फेंक देंगे गटर में ।" ,श्यामलाल ! तुम अपने स्वार्थ में इतने अंधे हो चुके हो कि तुम्हें अपने फायदे की बात भी नहीं दिखाई देती । ,"मेरा फायदा , लो सुन लो ये करेंगे मेरा फायदा ।" ,देखो श्यामलाल ! अगर मैं तुम्हारी बेटी को वापस न ला सका तो समझो कि तुम्हारा एक कांटा तो हमेशा के लिए निकल जाएगा । ,क्योंकि तुम समझते हो कि लोटिया और उसके आदमी मुझे ज़िंदा वापस नहीं लौटने देंगे । ,"हाँ हाँ , ये तो समझता हूँ भैया ।" ,अगर मैं मोहिनी को वापस ले आता हूँ तो तुम्हें तुम्हारी बेटी मिल जाएगी । ,लेकिन अपनी जान खतरे में डाल कर तुम्हें क्या मिलेगा ? ,जैसे - जैसे हम द्वीप के निकट पहुँचते गये वैसे - वैसे मैनग्रोव के जंगल और उनकी टहनियों पर बैठे विभिन्न प्रकार के पक्षियों के समूह हमारी आँखों के सामने और भी स्पष्ट होते चले जा रहे थे । ,होवर और मार्श हैरियर जैसे शिकारी पक्षी पानी की सतह से कुछ ऊँचाई पर अपनी पैनी निगाहों और तेज पंजों के साथ घात लगाये उड़ रहे थे । ,जैसे ही कोई शिकार पर उनकी नजर पड़ती वे बिजली की सी फुर्ती के साथ उन पर टूट पड़तीं और उन्हें तेज पंजों में दबोच लेती । ,यहाँ पलास फिश जैसा दुर्लभ पक्षियों का झुंड भी देखने को मिला । sg,दूर से ही हमें पायरटन द्वीप का लाइट हाउस दिख गया । sg,करीब दो घंटे हमने रोमांच से भरा यह सफर तय कर लिया । ,सुनहरी रेत का आवरण ओढ़े इस द्वीप के किनारों पर आपको असंख्य केकड़े जमीन पर रेंगते नजर आ जायेंगे । ,पायरटन द्वीप की प्राकृतिक विविधताओं को देखने और समझने के लिए एक गाइड का साथ होना अनिवार्य है । ,पायरटन द्वीप का निकटतम हवाई अड्डा सात किलोमीटर की दूरी पर जामनगर में है । ,पायरटन द्वीप का निकटतम रेलवे स्टेशन जामनगर और 90 किलोमीटर की दूरी पर राजकोट है । ,पायरटन जाने का सबसे बेहतर समय अक्टूबर से अप्रैल के मध्य है । ,समुद्र की सतह में जैसे ठहराव आया अर्थात लो टाइड की स्थिति उत्पन्न हुई । ,हम फॉरेस्ट डिर्पाटमेंट के गाइड शीलू भाई के साथ जल में जीवन का अनोखा दृश्य देखने के लिए निकल पड़े । ,यहाँ के स्वच्छ पानी में न जाने मूँगे की चट्टानों की कितनी ही श्रृंखला देखने को मिलीं । ,इन चट्टानों को देख कर ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई अनमोल रतन का भंडार हो । ,"असल में चकाचौंध कर देने वाली चट्टानों की यह श्रृंखला सूक्ष्मदर्शी जीवों की सुरक्षा कवच की भूमिका निभाती हैं , पानी की गहराई और रोशनी के घटते प्रभाव के साथ यह श्रृंखला और भी खूबसूरत और रंगीन होती जाती है ।" ,सबसे पहला समुद्री जीव जिस पर हमारी नजर पड़ी वह था ऑक्टोपस । ,शायद उसे इस बात का आभास हो गया था कि हमने उसे देख लिया है और किसी गिरगिट की तरह उसने अपने आपको चट्टान के रंग में ढाल लिया । sg,पहली बार हम किसी समुद्री जीव को इतने करीब से देख रहे थे । ,उसके शरीर की सतह पर कई छोटे - छोटे छिद्र थे । sg,जिससे वह अपने शिकार को मजबूती से अपने शिकंजे में कस लेता है । ,इस मायावी जीव की विशेषता है कि यह अपने आप को वातावरण के अनुकूल विभिन्न रंगों में ढाल सकता है । ,"जैसे ही शीलू भाई ने उसे आजाद किया , उसने काले रंग का तरल पदार्थ पानी में छोड़ दिया और धुएँ की तरह अदृश्य हो गया ।" ,समुद्र में ऐसे और भी कई जीव हैं जो अपनी अदभुत क्षमताओं का प्रयोग या तो शिकार करने के लिए करते हैं या शिकार होने से बचने के लिए । pl,तारा मीन शिकारी के कब्जे में आते ही अपनी भुजाओं को शरीर से अलग कर सकती है । sg,पप्फर नामक मछली तो अपने शरीर को गुब्बारे की तरह अपने वास्तविक आकार से तीन गुना बड़ा कर सकती है । ,इसे देखकर किसी को भी यह भ्रम हो सकता है कि यह एक शक्तिशाली बड़ी मछली है । ,यहाँ पर मौजूद केकड़े की विभिन्न प्रजातियों को देखना रोमांचित कर देने वाला दृश्य था । ,"ब्लू नेप्टयून , रेड कोरल के अलावा कुछ के अलावा कुछ के शरीर का ऊपरी हिस्सा काँटेदार बालों से ढका था , जिसे शीलू भाई ने वूल्फ क्रैब की संज्ञा दी ।" ,कुछ ही देर में हमारी मुलाकात स्टार फिश और पप्फर फिश से भी हो गई । ,जैसे ही शीलू ने पप्फर को अपने हाथों में उठाया वह किसी गुब्बारे की तरह फूल गई । ,यह सचमुच बचाव का एक कारगर तरीका है । ,इस मछली के बारे में एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि पफ्फर उन मछलियों में एक है जो अपनी पलकें झपका सकती हैं । ,"एक अलग तरह का ऑक्टोपस , जेली फिश , रेड कोरल जो बेहद आकर्षक लगता है ।" ,बंदरगाह पर किंगफिशर सहित कई मोहक और अनूठे पक्षी नजर आते हैं जो वातावरण को गुंजायमान रखते हैं । ,पानी के अंदर रहने वाले इन जीवों को देखने के लिए आपको दो या तीन फुट गहरे पानी में उतरना पड़ सकता है । sg,इसलिए सैलानियों को इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि वे ऐसे जूते पहनें जो उन्हें पानी के अंदर रहने वाले विषैले जीवों से सुरक्षित रख सके । sg,समुद्र के इसी स्वच्छ पानी में रंग - बिरंगी सी - लिली और सी - पेन के समूह ने हमारा मन मोह लिया । ,असल में किसी उपवन की तरह दिखने वाला यह खूबसूरत दृश्य किसी वनस्पति का नहीं बल्कि समुद्री जीवों का झुंड है । sg,जो मछलियों और दूसरे छोटे जीवों को अपनी ओर आकर्षित कर उन्हें अपना शिकार बना लेते हैं । ,जैसे - जैसे दिन ढलने लगा हम वापस द्वीप पर आ गये । ,शहर के शोर - शराबे और भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर इस शांत द्वीप में एक दरगाह भी है जहाँ कभी - कभी कुछ स्थानीय लोग आकर नमाज़ अदा कर जाते हैं । ,इस द्वीप में न कहीं भोजन का उचित इंतजाम है और न ही पीने के पानी का इसलिए पर्यटकों को यहाँ आने से पहले ही पानी और भोजन की उचित व्यवस्था कर लेनी चाहिए । ,सभी पर्यटक यूँ तो शाम तक वापस लौट जाते हैं पर हमने यहाँ रात बिताने का निर्णय लिया और इसकी इजाजत भी मिल गई । ,क्षितिज के पीछे ढलते सूर्य की लालिमा जब इस द्वीप पर पड़ती है तो यहाँ के प्राकृतिक सौन्दर्य में चार चाँद लग जाते हैं । ,रात के अंधेरे में इस शांत द्वीप पर सिर्फ लहरों की किलकारियाँ ही सुनाई पड़ती हैं । ,द्वीप से वापस लौटने के क्रम में हमने मैनग्रोव पर किंगफिशर को देखा । ,समुद्री काक के एक बड़े समुह को देखकर ऐसा लग रहा था मानो वे हमारा पीछा कर रहे हों । sg,पक्षियों की चहचहाहट से जब हमारी नींद खुली तो यहाँ का दृश्य सचमुच मंत्रमुग्ध कर देने वाला था । ,आसमान में उड़ते पक्षियों को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वे कई विभिन्न प्रकार की आकृतियाँ बना रहे हों । ,ईएमबी की ऐसे टीबी के उपचार में कोई भूमिका नहीं है जो आईएनएच और आरएमपी दोनों के लिए संवेदनशील हो और इसे केवल आईएनएच प्रतिरोध की बढती हुई दर के कारण ही प्रारंभिक उपचार में शामिल किया जाता है । ,"अगर INH प्रतिरोध की दरें कम ज्ञात होती हैं , या संक्रामक टीबी विभेद को आईएनएच के संवेदी जाना जाता है , तो ईएमबी का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है ।" ,"जिन लोगों में शराब के कारण यकृत रोग हो जाता है , उनमें टीबी का जोखिम बढ़ जाता है ।" pl,यकृत के सिरहोसिस के रोगियों में विशेष रूप से ट्युबरकुलोसिस पेरिटोनिटिस की घटनाएं अधिक देखी जाती हैं । sg,"यकृत रोग के ज्ञात होने पर रोगी में दवा बदलने की आवश्यकता नहीं होती , जब तक यकृत रोग का कारण टीबी के उपचार को न माना जाये ।" ,"कुछ प्राधिकरणों के अनुसार यकृत रोगियों में पीजेडए का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए , क्योंकि पहली पंक्ति की दवा पीजेडए के कारण हैपेटाइटिस होने की संभावना अधिक होती है ।" ,"जिन रोगियों में पहले से यकृत रोग होता है , उन्हें टीबी के उपचार के दौरान यकृत कार्य परीक्षण ( LFT ) किया जाना चाहिए ।" ,दवा से होने वाले हैपेटाइटिस के बारे में अलग से एक खंड में ऊपर चर्चा की गयी है । ,गर्भावस्था खुद टीबी के लिए एक जोखिम कारक नहीं है । ,"रिफाम्पिसिन हार्मोनल गर्भनिरोधक को कम प्रभावी बना देती है , इसलिए टीबी के उपचार के दौरान गर्भनिरोध के लिए अन्य उपाय अपनाये जाने चाहिए ।" ,"गर्भावस्था में टीबी का इलाज न किये जाने से गर्भपात का ख़तरा बढ़ जाता है , यह गर्भवती महिला के लिए खतरनाक हो सकता है और साथ ही अजन्मे बच्चे में कोई बड़ी असामान्यता का कारण भी बन सकता है ।" ,अमेरिकी दिशानिर्देशों के अनुसार गर्भावस्था में टीबी के उपचार के दौरान पीजेडए का उपयोग नहीं करने की सलाह दी जाती है ; संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा ऐसे दिशानिर्देश नहीं दिए गए हैं । ,"इसमें यह तथ्य भी शामिल है कि जिन क्षेत्रों में डॉट्स रणनीति का उपयोग नहीं किया जाता , वहां आमतौर पर सुरक्षा के कम मानक उपलब्ध कराये जाते हैं ।" ,"जिन क्षेत्रों में डॉट्स का उपयोग किया जाता है , वहां अन्य सुविधाओं के लिए मदद की अपेक्षा करने वाले रोगियों की संख्या कम होती है जिन्हें अज्ञात उपचार दिए जाते हैं और इस उपचार के अज्ञात परिणाम सामने आते हैं ।" ,हालांकि अगर डॉट्स कार्यक्रम को लागू नहीं किया जाता या गलत तरीके से लागू किया जाता है तो सकारात्मक परिणामों की संभावना नहीं रहती है । ,"यह कार्यक्रम ठीक प्रकार से लागू किया जाये और प्रभावी रूप से कारगर हो , इसके लिए स्वास्थ्य रक्षा प्रदाताओं को अपना पूरा योगदान देना होता है ।" ,इसके लिए सार्वजनिक और निजी चिकित्सकों के बीच अच्छे लिंक होने चाहिए । ,"सबके लिए स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिए , और जो देश टीबी की रोकथाम और इसके उपचार के लक्ष्यों को पाने के प्रयास कर रहे हैं , उन्हें इस दृष्टि से विश्वस्तरीय सहायता उपलब्ध करायी गयी है ।" ,"कुछ शोधकर्ताओं का सुझाव है कि , क्योंकि डॉट्स प्रणाली उप - सहारा अफ्रीका में तपेदिक के उपचार में इतनी सफल हुई है कि डॉट्स का उपयोग असंक्रामक रोगों जैसे मधुमेह , उच्च रक्तचाप और एपिलेप्सी जैसे रोगों के उपचार में भी किया जाना चहिये ।" ,डब्ल्यूएचओ ने 1998 में MDR - TB के उपचार के लिए डॉट्स प्रोग्राम का विस्तार किया ( जिसे डॉट्स - प्लस कहा जाता है ) । ,डॉट्स प्लस कार्यक्रम को लागू करने के लिए डॉट्स की सभी आवश्यकताओं के अलावा दवा संवेदनशीलता परीक्षण की क्षमता और दूसरी पंक्ति के एजेंट्स की उपलब्धता ( जो यहां तक कि विकसित देशों में नियमित रूप से उपलब्ध नहीं है ) आवश्यक है । ,"इसीलिए डॉट्स प्लस डॉट्स की तुलना में अधिक महंगा पड़ता है और जो देश इसे लागू करना चाहते हैं , उन्हें इसके प्रति अधिक वचनबद्धता रखनी होगी ।" ,संसाधन के सीमित होने का तात्पर्य यह है कि डॉट्स - प्लस को लागू करने से मौजूदा डॉट्स प्रोग्राम की उपेक्षा हो जाती है और इसके परिणामस्वरूप कुल मिलाकर देखभाल के समग्र मानकों का स्तर गिर जाता है । ,"डॉट्स - प्लस के लिए तब तक मासिक निगरानी रखी जाती है जब तक कल्चर की रिपोर्ट नकारात्मक में नहीं बदल जाती , लेकिन डॉट्स के लिए ऐसा नहीं है ।" ,अगर कल्चर सकारात्मक है और उपचार के तीन माह बाद रोग के लक्षण फिर से प्रकट नहीं होते तो दवा प्रतिरोधी रोग के लिए या किसी दवा के काम ना करने पर रोगी की पुनः - जांच आवश्यक है । ,"अगर तीन माह की थेरेपी के बाद भी कल्चर नकारात्मक में नहीं बदलता , तो कुछ चिकित्सक रोगी को भर्ती कर लेते हैं ताकि उसकी उपचार प्रक्रिया पर बारीकी से निगरानी रखी जा सके ।" ,"वह तपेदिक जो फुफ्फुसों ( फेफड़ों ) को प्रभावित नहीं करता , अतिरिक्त - फुफ्फुसीय तपेदिक कहलाता है ।" sg,केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र का रोग विशेष रूप से इस वर्गीकरण में शामिल नहीं किया जाता है । ,संयुक्त राष्ट्र और डब्ल्यूएचओ 2HREZ / 4HR को सलाह देते हैं ; संयुक्त राज्य अमेरिका में 2HREZ / 7HR की सलाह दी जाती है । ,"यह कहना यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षण से एक अच्छा प्रमाण है कि ट्युबरकुलोसिस लिम्फेडेनीटिस में और मेरुरज्जु कि टीबी में , छह माह का उपचार नौ माह की अवधि के उपचार के बराबर है ; इसलिए संयुक्त राज्य अमेरिका की सलाह को प्रमाणों का समर्थन प्राप्त नहीं है ।" ,लसिकानोड्स की टीबी ( टीबी लिम्फेडेनीटिस / TB lymphadenitis ) के 25 प्रतिशत मामलों में रोगी को उपचार दिए जाने पर स्थिति बेहतर होने से पहले बदतर हो जाती है और ऐसा अक्सर उपचार के पहले कुछ महीनों में होता है । ,"उपचार शुरू किये जाने के कुछ सप्ताह बाद ही , लसिका नोड्स ( लसिका पर्व भी कहलाते हैं ) आकार में बढ़ जाते हैं और लसिका नोड्स जो पहले ठोस थे , वे कुछ तरलीकृत होने लगते हैं ।" ,लेकिन इससे ऐसा नहीं कहा जा सकता कि उपचार विफल हो रहा है और यह आमतौर पर रोगियों में ( और उनके चिकित्सकों में ) अनावश्यक दहशत भी पैदा करता है । ,धैर्य रखने पर उपचार के दो से तीन सप्ताह के भीतर लसिका नोड्स फिर से संकुचित होने लगते हैं और इस समय लसिका पर्वों की फिर से बायोप्सी करने या फिर से जांच करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है । ,"यदि फिर से सुक्ष्मजैविक अध्ययन के आदेश दिए जाते हैं , तो इस जांच में समान संवेदनशीलता प्रतिरूप के साथ जीवित जीवाणुओं की उपस्थिति ज्ञात होगी ।" ,जो फिर से भ्रम में डाल सकती है । pl,"इस समय अक्सर जो चिकित्सक टीबी के उपचार में अनुभवी नहीं होते , अक्सर यह मान कर दूसरी पंक्ति की दवाएं शुरू कर देते हैं , कि उपचार कारगर नहीं है ।" ,"इन स्थितियों में , सिर्फ आश्वासन की आवश्यकता होती है ।" ,"स्टेरॉयड सूजन को कम करने में उपयोगी हो सकते हैं , विशेष रूप से तब इनका उपयोग किया जाना चाहिए जब इसमें बहुत दर्द होता हो , लेकिन ये जरुरी नहीं है ।" ,अतिरिक्त एंटीबायोटिक की कोई जरुरत नहीं होती है और यह अनावश्यक रूप से उपचार की लम्बाई को बढाती है । ,"तपेदिक केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है ( मस्तिष्क - आवरण ( मेनिन्जेस ) , मस्तिष्क और मेरुरज्जु ) , इन मामलों में यह क्रमशः टीबी मेनिनजाईटिस , टीबी सेरेब्रिटिस , टीबी मायेलिटिस कहलाता है ।" ,इसके मानक उपचार के रूप में बारह महीने दवाएं ( 2HREZ / 10HR ) दी जाती हैं और स्टेरॉयड अनिवार्य है । ,इसका निदान मुश्किल है क्योंकि आधे से कम मामलों में ही सीएसएफ कल्चर सकारात्मक आता है और इसीलिए अधिकांश मामलों का उपचार केवल नैदानिक संदेह के आधार पर ही किया जाता है । ,सीएसएफ का पीसीआर सुक्ष्मजैविक उपज को प्रमाणित नहीं करता ; कल्चर सबसे संवेदी विधि है और कम से कम 5 मिलीलीटर ( हो सके तो 20 मिलीलीटर ) सीएसएफ को विश्लेषण के लिए भेजा जाता है । ,"टीबी सेरेब्रिटिस ( या मस्तिष्क की टीबी ) में निदान के लिए मस्तिष्क की बायोप्सी की आवश्यकता हो सकती है , क्योंकि सीएसएफ आमतौर पर सामान्य होता है ।" ,यह हमेशा उपलब्ध नहीं होता है । ,कुछ चिकित्सक इसे जायज़ नहीं ठहराते हैं । ,उनका कहना है कि जब टीबी - प्रतिरोधी थेरेपी का परीक्षण भी समान परिणाम दे सकता है तो एक रोगी को इतने आक्रामक और खतरनाक प्रक्रिया से गुजरने की क्या जरुरत है । ,संभवतया मस्तिष्क की बायोप्सी तभी न्यायोचित है जब दवा प्रतिरोधी टीबी का संदेह हो । ,"ऐसा भी संभव है कि टीबी मेनिनजाईटिस के उपचार के लिए छोटी अवधि ( जैसे छह माह ) की चिकित्सा पर्याप्त हो , लेकिन कोई चिकित्सकीय परीक्षण इसे प्रमाणित नहीं करता है ।" ,टीबी मेनिनजाईटिस का उपचार किये जाने के बाद भी रोगी का सीएसएफ 12 माह तक असामान्य रहता है । ,"इस असामान्यता का चिकित्सकीय प्रगति या परिणाम से कोई सम्बन्ध नहीं होता , और यह इस बात को इंगित नहीं करता कि उपचार को आगे और बढ़ाने की या दोहराने की कोई आवश्यकता है ।" sg,इसलिए उपचार की प्रगति पर निगरानी रखने के लिए लम्बर पंकचर के द्वारा सीएसएफ के सेम्पल को दोहराया नहीं जाना चाहिए । ,"हालांकि टीबी मैनिंजाइटिस और टीबी सेरेब्रिटिस को एक साथ वर्गीकृत किया जाता है , कई चिकित्सकों का अनुभव यह है कि उपचार के लिए प्रतिक्रिया समान नहीं होती ।" ,"टीबी मैनिंजाइटिस आमतौर पर इलाज के लिए अच्छी तरह से प्रतिक्रिया देता है , लेकिन टीबी सेरेब्रिटिस के लिए लम्बे उपचार ( दो साल तक ) की आवश्यकता हो सकती है और स्टेरॉयड कोर्स की आवश्यकता लम्बी अवधि ( छह माह ) तक हो सकती है ।" ,टीबी मैनिंजाइटिस के विपरीत टीबी सेरेब्रिटिस में प्रगति पर निगरानी रखने के लिए बार मस्तिष्क की सीटी या एमआरआई इमेजिंग करने की जरुरत पड़ती है । ,सीएनएस टीबी रक्त से फैलने की दृष्टि से माध्यमिक हो सकता है : इसलिए कुछ विशेषज्ञ मिलियरी टीबी के रोगियों में सीएसएफ के सेम्पल नियमित रूप से लेने की सलाह देते हैं । ,टीबी विरोधी दवाएं जो सीएनएस टीबी के उपचार के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी हैं । ,वे हैं : स्टेरॉयड का प्रयोग टीबी मैनिंजाइटिस में नियमित रूप से किया जाता है ( नीचे दिया गया अनुभाग देखें ) । ,"एक परीक्षण से यह भी पता चला है कि एस्पिरिन भी फायदेमंद होती है , लेकिन इससे पहले कि इसे नियमित रूप से काम में लिया जाये , इस पर आगे और कार्य करने की आवश्यकता है ।" ,टीबी मैनिंजाइटिस और टीबी पेरीकार्डीटिस के उपचार के लिए कोर्टिकोस्टेरॉयड ( उदाहरण प्रेडनिसोलोन और डेक्सामेथासोन ) की उपयोगिता भी प्रमाणित हो चुकी है । sg,"टीबी मैनिंजाइटिस के लिए डेक्सामेथासोन की 8 से 12 मिलीग्राम की खुराक प्रतिदिन 6 सप्ताह से अधिक समय के लिए दी जाती है ( वे लोग अधिक सटीक खुराक लेना चाहते हैं , उन्हें थ्वाईटेस दी जाती है "" एट आल "" , 2004 )" sg,पेरीकार्डीटिस के लिए प्रेडनिसोलोन की 60 मिलीग्राम खुराक प्रतिदिन चार से आठ सप्ताह के लिए दी जाती है । sg,"स्टेरॉयड फुफ्फुसआवरणशोथ , अत्यधिक बढ़ चुके टीबी और बच्चों के टीबी में अस्थायी लाभ दे सकती है ।" ,राज कुमार गुप्ता की ' घनचक्कर ' में इमरान हाशमी और विद्या बालन के होने की वजह से उम्मीद थी कि धमाकेदार ओपनिंग मिलेगी । ,फिल्म ने पहले दिन 7 करोड़ से अधिक का व्यापार किया । ,"शुक्रवार और रविवार को थोड़े दर्शक बढ़े , लेकिन यह बढ़त भी उल्लेखनीय नहीं रही ।" ,यह फिल्म बाक्स आफिस पर अपेक्षित छलांग नहीं मार सकी । ,फिर भी वीकएंड के तीनों दिन कलेक्शन 7 - 8 करोड़ के बीच रहा । ,' घनचक्कर ' ने पहले वीकएंड में 22 करोड़ से अधिक का कलेक्शन किया । ,औसत से बेहतर कलेक्शन से यह फिल्म सुरक्षित मानी जा रही है । ,ट्रेड पंडितों के मुताबिक पंजाबी फिल्म ' जट एंड जूलियट ' की बड़ी सफलता से ' घनचक्कर ' के दर्शक घटे । ,तमाम प्रचार के बावजूद ' यमला पगला दीवाना 2 ' पहले वीकएंड में 23 करोड़ से कम ही कलेक्शन कर सकी । ,दूसरे हफ्ते में होने के बावजूद ' ये जवानी है दीवानी ' ने 28 करोड़ से अधिक का कलेक्शन किया । ,दर्शक दीवानी के दीवाने रहे । ,उन्होंने दीवाना को तरजीह नहीं दी । ,इस बार देओल परिवार की कॉमिकल कोशिश ने निराश किया । ,"पहले दिन इस फिल्म का कलेक्शन 7.5 था , जो शनिवार को घट कर 6.5 करोड़ हो गया ।" ,शनिवार को कलेक्शन में आई गिरावट संकेत है कि फिल्म अच्छा बिजनेस नहीं कर रही है । ,"हां , रविवार को ' यमला पगला दीवाना 2 ' का कलेक्शन 8 करोड़ से अधिक जरूर रहा ।" ,स्पष्ट है कि दर्शकों ने रणबीर कपूर की ' ये जवानी है दीवानी ' को अधिक पसंद किया है । ,' यमला पगला दीवाना 2 ' के दर्शक उसकी तुलना में कम रहे । ,उल्लेखनीय है कि ' ये जवानी है दीवानी ' पहला हफ्ता पूरा करने के पहले ही 100 करोड़ क्लब में चली गई थी । ,अयान मुखर्जी की ' ये जवानी है दीवानी ' रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण की जोड़ी की वजह से चर्चा में रही । ,इस फिल्म के प्रोमो और गानों ने दर्शकों की जिज्ञासा बढ़ा दी । ,उत्तर भारत में रणबीर कपूर की प्रोमोशनल यात्रा ने भी फिल्म के प्रचार में योगदान किया । ,उम्मीद के मुताबिक दीवाने दर्शकों ने भी उत्साह दिखाया । ,"पहले ही दिन इस फिल्म का कलेक्शन 19 करोड़ से अधिक रहा , जो शनिवार और रविवार को बढ़कर क्रमश: 20 करोड़ और 22 करोड़ से अधिक हो गया ।" ,फिल्म अभी तक सौ करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है । ,पहले तीन दिनों में 62 करोड़ से अधिक के कलेक्शन से रणबीर कपूर ने साबित कर दिया है कि वे खानत्रयी के बाद सबसे अधिक भरोसेमंद स्टार हैं । ,रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण की कामयाबी की हैट्रिक भी लग गई । ,लगता है रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण की जवानी का रंग एक बार फिर दर्शकों पर चढ़ गया है । ,रंग भी ऐसा चढ़ा कि उसके आगे सलमान की दबंगई फीकी पड़ गई । ,रणबीर की फिल्म ने ओपनिंग वीकेंड यानी शुक्रवार से रविवार तक तीन दिन में 62.75 करोड़ रुपये कमाए । ,सलमान की दबंग - 2 इस मामले में पीछे रह गई । ,जवानी..ने शुक्रवार को 19.45 करोड़ और शनिवार - रविवार को 20.16 और 22.5 करोड़ रुपये कमाए । ,कहा जा रहा है कि ये फिल्म जल्द ही सौ करोड़ के क्लब में शामिल हो सकती है । ,इससे पहले रणबीर की फिल्म बर्फी ने 100 करोड़ रुपये का बिजनेस किया था । ,लोगों को इस रोमांटिक कपल की फिल्म ' ये जवानी है दीवानी ' काफी पसंद आ रही है । ,इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले दिल्ली में ही इस फिल्म ने दो करोड़ की ओपनिंग की थी । ,यह आंकड़ा रणबीर की किसी भी फिल्म के ओपनिंग कलैक्शन में सर्वाधिक है । ,फिल्म की एडवांस बुकिंग चल रही है तो कई शो हाउसफुल चल रहे हैं । ,अगर फिल्म का प्रदर्शन ऐसे ही चला तो फिल्म को साल 2013 की सबसे बड़ी हिट फिल्म होने से कोई रोक नहीं सकता है । ,मालूम हो कि 31 मई को रिलीज हुई फिल्म ये जवानी है दीवानी के निर्माता करण जौहर हैं । ,"फिल्म में लीड रोल रणबीर कपूर , दीपिका पादुकोण , आदित्य रॉय कपूर और कल्कि कोचलिन ने किया है ।" ,फिल्म में पहली बार डासिंग डीवा माधुरी दीक्षित का आयटम नंबर भी लोगों को पसंद आ रहा है । ,फिल्म के गाने भी चार्ट में सबसे ऊपर बज रहे हैं । ,फिलहाल शुरुआती रुझानों से तो लगता है कि फिल्म सुपरहिट हो गई है । ,पिछले हफ्ते रिलीज हुई चार फिल्मों में से दो अनदेखी ही रह गई । ,"बाकी दो ढंग से थिएटर में पहुंच तो गई , लेकिन उन्हें दर्शक नहीं मिले ।" ,प्रिटी जिंटा अभिनीत ' इश्क इन पेरिस ' टालमटोल के बाद आखिरकार रिलीज हुई । ,इस फिल्म में शुरू से ही वितरकों की कम रुचि थी । ,यही वजह है कि फिल्म को बहुत अच्छा रेस्पांस नहीं मिला । ,रिलीज होने के पहले ही बासी हो चुकी प्रिटी जिंटा की इस फिल्म में दर्शकों ने बिल्कुल रुचि नहीं दिखाई । ,दूसरी फिल्म ' हम हैं राही कार के ' का मुंबई में जोरदार प्रचार हुआ । ,थोड़े - बहुत दर्शक देखने गए तो निराश होकर लौटे । ,नतीजा यह हुआ कि अगले शो से ही दर्शकों में गिरावट आ गई । ,"फिर नीरस व बेजान प्रश्‍नों के आधार पर कुछ निकाल पाना निरा असंभव नहीं , तो महाकठिन अवश्य हो जाता है ।" ,अच्छे पत्रकार आयोजक और संवाददाता सम्मेलन के संभावित विषय को भांप कर पहले से व्यक्‍ति व विषय दोनों के बारे में अधिकाधिक ज्ञान हासिल कर अच्छे प्रश्‍न तैयार करके संवाददाता सम्मेलन में जाते हैं । ,"केवल प्रश्‍नोत्तर को समाचार के रूप में ’ रिकॉर्ड ’ करने वाला ’ रेकार्डर ’ तो हो सकता है , संवाददाता नहीं ।" ,संवाददाता से कहीं अधिक की अपेक्षा होती है । ,यह तभी संभव है जब उसे विषय की मुकम्मल जानकारी हो । ,संवाददाता सम्मेलन के आयोजन के पीछे का उद्देश्य पता हो । ,तीक्ष्ण प्रश्‍नों को दृढ़ता व विनयशीलता तथा मधुर वाणी का लेप लगाकर पूछने की क्षमता हो । ,शक्‍ल और भाव - भंगिमा को समझने की अक्‍ल हो । ,बहस में नहीं उलझने का दृढ़ निश्‍चय हो । ,समाचार के महत्वपूर्ण पहलुओं की घ्राणशक्‍ति हो । ,टकराने वाले टालू जवाबों से बगैर हिम्मत हारे किसी भी कीमत पर सच उगलवाने में सफलता पाने का पूर्ण निश्‍चय हो । ,यह क्षमता अनुभवों से विकसित भी की जा सकती है । ,कई बार पहले से तैयारी का मौका नहीं मिलता । ,"फिर भी पत्रकार अज्ञानी तो होता नहीं , इसलिए उसे दिक्‍कत नहीं होती ।" ,लेकिन यदि आयोजक या विषय की जानकारी पहले से नहीं हो सके तो वहां जाकर अपनी कुशाग्र बुद्धि से कुछ अता - पता कर लेना चाहिए । ,फिर जो लिखित वक्‍तव्य मिले उसे झटपट ध्यान से पढ़ व समझ लेना चाहिए । sg,"उसके आधार पर बुद्धिमत्तापूर्ण सवाल सोच - समझकर , तैयार कर दाग देना चाहिए ।" ,फिर तो क्रम सही शुरू हो जाएगा और रास्ते अपने - आप बनते जाएंगे । ,"संवाददाता सम्मेलनों में हर पत्रकार को केवल शारीरिक रूप से ही नहीं , मानसिक रूप से भी सदैव उपस्थित रहना चाहिए ।" ,समय से पहले पहुंचने के भी अपने लाभ हैं । sg,इस समय का सदुपयोग आप तारतम्य बिठाने में कर सकते हैं । ,इसी तरह सम्मेलन की समाप्‍ति के बाद भी यदि बहुत देर नहीं हो रही हो तो तुरंत भागना लाभकारी नहीं होता । ,बाद में अनौपचारिक बातचीत में कई बार विशेष जानकारी या विशेष खबर का सुराग मिल जाता है । ,परखने की क्षमता पत्रकार का भारी गुण है । sg,बाल की खाल निकालने का कौशल भी कई बार दिखाना पड़ता है । ,प्राय: दूरदर्शन पर प्रधानमंत्री या किसी अन्य अति विशिष्‍ट व्यक्‍ति का संवाददाता सम्मेलन देखकर दर्शक - श्रोता की प्रतिक्रिया होती है कि ’ मजा नहीं आया ’ । ,इसके लिए हम पत्रकार भी कम दोषी नहीं हैं । ,हम पूरी तरह तैयार होकर नहीं जाते । ,कई ऐसी खबरें होंगी जिन पर अच्छे सवाल बन सकते हैं । ,कभी ऐसा भी हो सकता है कि उसी दिन की प्रकाशित खबर पर कोई दूसरा संवाददाता सवाल दाग रहा हो । ,ऐसी स्थिति में यदि प्रकाशित खबर की जानकारी नहीं होगी तो प्रश्‍नोत्तर पल्ले कहां से पड़ेगा । ,संवाददाता सम्मेलन में अपना ज्ञान बघारने या भाषण झाड़ने की प्रवृत्ति ठीक नहीं है । ,कम से कम सटीक शब्दों में सटीक सवाल पूछकर सब्र के साथ उत्तर सुनने की आदत डालनी चाहिए । ,हम वहां खबर लेने जाते हैं । ,"दूसरों को क्या करना या नहीं करना चाहिए , यह बताने का जिम्मा हमारा नहीं है ।" ,हमारा एकमात्र लक्ष्य है खबर निकालकर उसे पठनीय भाषा में तैयार कर पाठकों तक पहुंचाना । ,तथ्य दमदार होंगे तो वे खुद बोलेंगे । sg,संवाददाता सम्मेलन में पत्रकार को अपने काम से काम रखना चाहिए । ,फालतू की सलाह देने से बचना चाहिए । ,पत्रकार यदि किसी क्षेत्र विशेष के समाचार पत्र का प्रतिनिधित्व कर रहा हो तो उसे राष्‍ट्रीय नेता के संवाददाता सम्मेलन में अपने उत्तर हासिल करने चाहिए । ,स्थानीय समाचार हर पाठक को प्रिय होता है । ,हमारी बस्ती की छोटी - सी बात हमारे लिए दुनिया के दूसरे छोर की बड़ी से बड़ी बात से अधिक महत्वपूर्ण है । ,संवाददाता सम्मेलन में अक्सर सवालों को टालने की प्रवृत्ति होती है । ,इसे कोई भी असली पत्रकार सहज स्वीकार नहीं करेगा । ,वह अपनी प्रखर बुद्धि से माकूल उत्तर पाकर ही दम लेगा । ,कुछ तोहफे और नकद राशि देकर भी संवाददाता को खरीदने की कोशिश करते हैं । ,"सब इस पर निर्भर करता है कि वह किस अखबार का संवाददाता है , उसका कितना प्रभाव उस चुनाव क्षेत्र पर पड़ता है ।" ,"अगर वह अखबार उस चुनाव क्षेत्र में ज्यादा पढ़ा जाता है तो दबाव ज्यादा होगा , कम पढ़ा जाता है तो कम होगा ।" ,उसकी पेशागत विवशता है कि वह विभिन्न तरह के लोगों से निरंतर संपर्क रखे । ,इन संपर्कों को निभाने का एक दबाव भी संवाददाता पर होता है । ,"जातिवाद में आप विश्‍वास भले न करें , अगर संयोग से आपकी और उम्मीदवार की जाति एक है तो जाति के आधार पर भी प्रभावित करने की कोशिशें होंगी ।" ,अरे बेटी ! तू पूजा - पाठ में ध्यान नहीं रखेगी तो अपने बच्चों को क्या सिखायेगी ? ,"जो हम कहते हैं , जो हम सोचते हैं , उसी का असर तो हमारे बच्चों पर पड़ता है ।" ,जाओ स्कूल फंक्शन के लिए तैयार हो जाओ । sg,हर स्टूडेंट को सिर्फ एक ही मिनट दिया जायेगा । ,हमारी पहली कॉन्टेस्टेंट है जसबिंदर सिंह । ,मेरा टॉपिक है पूजा । ,हम हर सुबह वाहे गुरू की पूजा करते हैं । ,पापा कहते हैं कि पूजा करने से वाहे गुरू खुश हो जायेंगे और हमारी रक्षा करेंगे । ,पर मम्मी कहती हैं कि पूजा करने से दादी खुश हो जायेंगी और हमें बड़ा मकान छोड़ जायेंगी । ,पूजा भट्ट मेरी फेवरेट ऐक्ट्रेस हैं और मेरी बेस्ट फ्रेंड का नाम भी पूजा है । ,मां वो है जो हमको इतना प्यार करती है कि कभी - कभी हम खुद उस प्यार को समझ नहीं पाते । ,"मां वो है जो हमको एहसास दिलाती है कि हम कितने अच्छे हैं , हमसे अच्छा और कोई है ही नहीं ।" ,"मां वो है जिसकी खुशी हमारी हँसी से है , जिसका दुख हमारे दुख से है ।" ,मां वो है जिसके बिना हम जी नहीं सकते । ,"मां सब कुछ है , बस हमारे पास ही नहीं ।" ,लेकिन हमारे पास पापा हैं और वह भी काफी अच्छे हैं । ,"पता है राहुल ! वो अपने शर्मा जी हैं ना शर्मा जी , उनका फोन आया था ।" ,"वह , अपने दिल्ली के पड़ोसी , उन्होंने रिश्ता भेजा है ।" ,"वैसे वह कह रहे थे कि लड़की सुन्दर है , सुशील है ।" ,मैंने तो साफ इंकार कर दिया । sg,मैं वैसे भी कौन सा काम गलत करती हूं ? ,"अब लड़की सुशील है तो क्या हुआ , सुन्दर है तो क्या हुआ ?" ,"हर लड़की आजकल सुशील ही होती है , सुन्दर ही होती है ।" ,तुम दूसरी शादी नहीं करोगे ? ,"मां ! हम एक ही बार जीते हैं , एक बार मरते हैं , शादी भी एक ही बार होती है और प्यार भी एक ही बार होता है , बार - बार नहीं होता ।" ,"तुम तो अपने आप को संभाल लोगे बेटे , लेकिन अंजली ?" ,तुम्हें नहीं लगता उसे एक मां की जरूरत है ? ,"वो ठीक है , क्योंकि उसके पास वो है जो मेरे पास भी नहीं NULL , उसकी मां की चिट्ठियां ।" ,"मेरी प्यारी अंजली , हैप्पी बर्थडे ।" ,"आज तुम आठ साल की हो गई हो , और मुझे यकीन है कि तुम बिल्कुल अपने पापा जैसी हो ।" ,"वही आंखे , वही चेहरा , है ना अंजली ?" ,"नहीं , मैं आपके जैसी हूं ।" ,क्या तुम्हारे पापा अभी भी रात को जूते पहनकर सोते हैं ? ,उनकी ये आदत कब जायेगी ? ,आज मैं तुम्हें एक कहानी सुनाने जा रही हूं । ,"इस कहानी में मैं हूं , तुम्हारे पापा हैं और अंजली ।" ,सुबह - सुबह मुझसे उठा नहीं जाता है । ,उठा नहीं जाता या तुम डर गए थे ? ,हे ! राहुल खन्ना किसी से नहीं डरता है । ,लेकिन अंजली शर्मा से रोज बास्केटबॉल में जरूर हारता है । ,लड़कियों की तरह मत चिल्लाओ । sg,ऐ ! मुझे लड़की मत बुलाओ । ,तुम तो लड़की हो ही नहीं । ,"ऐटलीस्ट , मैं उन स्टुपिड लड़कियों की तरह नहीं हूं , जिनके पीछे तुम भागते रहते हो ।" ,"मैं लड़कियों के पीछे नहीं भागता , लड़कियां मेरे पीछे भागती हैं ।" ,सोच क्या रही हो मोहिनी ! कूद जाओ । ,"अगर वो नहीं आया तो , तो क्या प्यार में जान देने वाले इतिहास बनाते हैं , कूद जाओ मोहिनी ! कूद जाओ ।" ,"आप यहाँ तैरने की प्रेक्टिस करने आती हैं या डूबने की , एक - आध बार और कूदेंगी तो डूबने की प्रेक्टिस हो जाएगी ।" ,"सीधी खड़ी रहो तुम , सिर्फ दो फीट पानी में हो तुम , कब आई तुम ?" ,अभी - अभी आई । pl,हर कलाकार ने अपने - अपने नज़रिये से कई पेटिंग्स प्रस्तुत की हैं । ,असम की अरुंधती चौधरी ने कल्पनाओं को कलात्मक व रचनात्मक रूप देकर संतुलित ढंग से पेश किया है । ,इसी श्रृंखला में वृद्ध चित्रकार सरफराज़ अहमद ने उम्दा तरीके से दिल्ली की खूबसूरती व शाही तस्वीरों को कैनवस पर उकेरा है । ,"पूर्व मिस यूनिवर्स और अभिनेत्री सुष्मिता सेन और पाकिस्तानी क्रिकेटर वसीम अकरम ने शुक्रवार को मीडिया में फैली उन ‘ खबरों ‘ का जोरदार खंडन किया , जिनमें कहा जा रहा था कि दोनों सितारे शादी करने की योजना बना रहे हैं ।" ,उन्होंने मीडिया से कहा कि उसे लोगों की निजता का सम्मान करना चाहिए । ,उल्लेखनीय है कि मीडिया के एक वर्ग में ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि ये दोनों पिछले कुछ वर्षों से एक दूसरे के प्रेम में हैं और जल्दी ही विवाह बंधन में बंधने जा रहे हैं । ,"लेकिन 37 वर्षीय सुष्मिता ने ट्विटर पर शुक्रवार को मामले को स्पष्ट किया कि 46 वर्षीय अकरम उनके अच्छे दोस्त हैं , इससे अधिक कुछ नहीं ।" ,"उन्होंने लिखा कि वह पिछले कुछ समय से अकरम से अपनी शादी की योजना के बारे में पढ़ रही हैं , जो पूरी तरह बकवास है ।" ,वह सिर्फ मेरे दोस्त हैं और हमेशा रहेंगे । ,सुष्मिता ने मीडिया को गैर ज़िम्मेदार बताते हुए कहा है कि अकरम की जिंदगी में एक शानदार महिला थी .... अफवाहें पूरी तरह बेकार और अपमानजनक हैं । ,उधर अकरम ने भी अफवाहों का खंडन किया और कहा कि वह अपना पूरा समय दो बच्चों के साथ बिताना चाहते हैं । ,"भारत का शास्त्रीय व लोकनृत्य , संगीत , रंगमंच , कला और कला से ही जुड़ी तमाम विधाओं के बीच सूत्रधार के रूप में मौजूद ‘ सहित्य ‘ के एक खास उत्सव का राजधानी में आयोजन होने वाला है ।" ,इसकी खासियत यह होगी कि इसमें साहित्य के दिग्गजों के अलावा अलग - अलग कला विधाओं के दिग्गज कलाकार भी कला के साहित्य पर प्रकाश डालेंगे । ,साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित इस साहित्योत्सव का आयोजन 18 से लेकर 22 फरवरी तक मंडी हाउस में किया जाएगा । ,साहित्योत्सव के विषय में अकादमी के सचिव डॉ. श्रीनिवास राव ने कहा कि साहित्य के उत्सव को पेपर प्रजेंटेशन और व्याख्यानों तक सीमित न रखकर इसे रविंद्र भवन के परिसरों तक लाया जा रहा है । ,"एक नए रंग - रूप में आयोजित इस उत्सव में संगीत , नृत्य और थिएटर से जुड़े कलाकारों की मौजूदगी साहित्य को अधिक आकर्षण और विस्तार देगी ।" ,"साहित्योत्सव में साहित्य अकादमी पर गुलज़ार निर्मित व निर्देशित वृतचित्र के प्रदर्शन , साहित्य व सिनेमा का संबंध , साहित्य व मीडिया , साहित्य व रंगमंच , साहित्य - चित्रकला - संगीत - नृत्य पर इन विषयों के विशेषज्ञ की वार्ता खास होगी ।" pl,इनके अलावा इस साल के साहित्य अकादमी अवार्ड 2012 के विजेता लेखकों को पुरस्कृत भी किया जाएगा । ,आज खतरा मोल लेने को जी चाह रहा है । ,काजू कतली की मिठाई के बाद गुड़ के लड्डू खिलाने की कोशिश टाइप ख़तरा । ,मगर जिस हलवाई की उम्र गुड़ के लड्डू बनाते गुजरी हो वो उसे कैसे छोड़ सकता है ? ,सो मैं भी नहीं छोडूंगा । ,वही करूंगा जो दिल चाहता है । ,आप मेरी बात सुन भी रहे हैं कि नहीं ? ,‘ पलट ! तेरा ध्यान किधर है भाई । ‘ ,मेरी तरह या मुझसे भी ज्यादा उम्र - रसीदा लोग अब तक समझ गए होंगे कि मैं किसकी बात कर रहा हूं लेकिन नव - उम्र जवानों को तो बताना ही पड़ेगा कि मैं असल में एक ऐसे कॉमेडियन की बात करने जा रहा हूं जिसे हिंदुस्तानी सिनेमा का पहला स्टार कॉमेडियन माना गया है । ,एक ऐसा कॉमेडियन जिसकी फीस अपने दौर के बड़े हीरोज़ के मुकाबले भी ज्यादा थी । ,"जो फिल्मों में सिर्फ तड़के के लिए नहीं रखा जाता था , बल्कि बाकायदा हीरो भी था ।" ,पूरा नाम नूर मुहम्मद चार्ली । ,हिंदुस्तानी सिनेमा के परदे पर शुरूआती दौर में जिन लोगों ने कॉमेडी की उनमें एक नाम आता है चार्ली का । ,चार्ली यानी नूर मुहम्मद चार्ली 1912 में गुजरात के पोरबंदर के जन्मे नूर मुहम्मद ने महान अभिनेता चार्ली चैप्लिन से मुतासिर होकर अपने नाम के साथ ‘ चार्ली ‘ जोड़ा था । ,और कमाल देखिए कि उन्हें शोहरत भी अपने असल नाम की बजाय इसी नाम से मिली । ,1931 में जब भारतीय सिनेमा को आवाज मिली उससे बहुत पहले साइलेंट सिनेमा वाले दौर में पश्चिम में लारल - हार्डी चैप्लिन जैसे सितारों की हास्य फिल्मों ने दुनिया में धूम मचा दी थी । ,इन फिल्मों में हास्य के साथ ही व्यंग का गहरा और तीखा पुट होता था । ,ख़ासकर चार्ली चैप्लिन की फिल्मों में । ,"भारत में भी इस तरह की कुछ कोशिशें होती रहती थीं , लेकिन सवाक सिनेमा के आगमन के साथ ही इस दिशा में कोशिशें और तेज हो गईं ।" ,"तब दीक्षित , गौरी , केसरी और ई. बिलीमोरिया जैसे चार कलाकार उभरकर सामने आए ।" ,"सरदार चंदूलाल शाह और उनकी पार्टनर गोहर मामाजीवाला की कंपनी रंजीत मूवीटोन ने 1932 में इन चारों को साथ लेकर एक फिल्म बनाई , जो बेहद कामयाब साबित हुई ।" ,"इस फिल्म का नाम था , सारे नाम थे - ‘ चार चक्रम ‘ उर्फ ‘ फोर रासकल्स ‘ उर्फ ‘ चांडाल चौकड़ी ‘ उर्फ ‘ चार भोंदू ‘ ।" ,"इसी साल एलीफेंटा मूवीटोन , पंजाब की एक फिल्म रिलीज हुई ‘ पार्क दामन रक्कासा ‘ उर्फ ‘ इनोसेंट डांसर ‘ उर्फ ‘ निर्दोष नॄतिका ‘ ।" ,इस फिल्म में ‘ बाबा चार्ली ‘ नाम से परदे पर आए एक हास्य अभिनेता ने अपने हाव - भाव और मासूम हरकतों से भरे अंदाज से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा । ,"ये अभिनेता यूं तो साइलेंट फिल्म के ज़माने से ही काम कर रहा था , लेकिन दर्शकों की नजर में वह इसी फिल्म से आया ।" ,"इस अभिनेता में अपनी हास्य प्रतिभा के अलावा एक कुदरती हुनर और था , जिसने उसकी कामायाबी में चार चांद लगा दिए ।" ,यह प्रतिभा थी गायकी की । ,वे अपने टिपीकल अंदाज में अपने गीत ख़ुद ही गाते थे और ख़ूब रंग भर देते थे । ,इसी वजह से उनको ख़ूब काम भी मिलने लगा था । ,"1939 की फिल्म ‘ ठोकर ‘ में उनका गाया गीत ‘ जब से मिली है तेरे दर की ख़ाक , संदल का लगाना छोड़ दिया ‘ ख़ूब मशहूर हुआ ।" ,1941 की फिल्म ‘ ढंढेरा ‘ में चार्ली ख़ुद ही हीरो और ख़ुद ही डायरेक्टर भी थे । ,"इस फिल्म का एक गीत बड़ा मजेदार है , जो दूसरे विश्व युद्ध के उस दौर में काफी मायने रखता था ।" ,"डी. एन. मधोक के लिखे इस गीत को जरा देखें ‘ हिटर खाए अंडा , गोरिंग हुआ मुस्टंडा / पर मुसोलिनी बिचारा कभी मुर्गी , कभी मुर्गा ‘ ।" ,इसी फिल्म में मधोक का ही लिखा और चार्ली का गाया एक और गीत है जिसका मुखड़ा 1988 में फिल्म ‘ तेजाब ‘ में जबर्दस्त हिट हुआ और माधुरी को स्टारडम दिया । ,बूढ़ाघाघ / लोधा प्रपात झारखण्ड का सबसे ऊँचा प्रपात कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी किन्तु यहाँ तक जाने का मार्ग सुगम नहीं होने के कारण यह गुमनामी का शिकार हो गया है । ,कांति जलप्रपात चंदवा - कुडू मार्ग पर सेन्हा गाँव से 6 कि.मी. दूरी पर स्थित है । ,कांति जलप्रपात एक प्रसिद्ध पिकनिक स्थल है । ,कांति जलप्रपात साल भर लोग आते - जाते रहते हैं । ,आम झरिया अपने मनोरम प्राकृतिक दृश्यावली के लिए प्रसिद्ध है । ,आम झरिया गाँव चंदवा से 11 कि.मी. की दूरी पर स्थित है । ,आम झरिया गाँव में एक पहाड़ी की चोटी पर जंगल विभाग का डाकबंगला भी बना हुआ है । ,गिरिडीह से 10 किलोमीटार दूर अवस्थित एक स्थल है खंडोली । ,खंडोली जैसी प्राकृतिक नैसर्गिकता से भरपूर जगह मिलना सिर्फ झारखण्ड ही नहीं देश के अन्य हिस्से में भी मुश्किल है । ,"खंडोली में एक साथ जलाशय , पहाड़ी एवं समतल मैदान पर प्राकृतिक एम्यूजमेंट पार्क का निर्माण किया गया है ।" ,"इन्हीं विशेषताओं के कारण खंडोली रोमांचक खेल व मनोरंजन के लिए सिर्फ झारखण्ड ही नहीं , अन्य प्रदेश के लोगों के लिए भी आकर्षण का केन्द्र बनकर उभरा है ।" ,"पर्यटन विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष एडवेंचर स्पोर्ट्स को प्रोत्साहित करने के लिए खंडोली ( गिरडीह ) , हजारीबाग , जमशेदपुर आदि स्थलों पर एडवेंचर टूरिज्म फेस्टिवल का अयोजन किया जाता है ।" ,हर वर्ष एडवेंचर टूरिज्म फेस्टिवल के मौके पर झारखण्ड - बिहार के अलग - अलग हिस्से से यहाँ लगभग 300 - 400 लोग सपरिवार आनन्द उठाने पहुँचते हैं । ,"आनन्द व उत्सव के माहौल में यहाँ पहुँचने वाले पर्यटक पारासेलिंग , पर्वतारोहण , कायाकिंग वाटर सर्फिंग आदि का आनन्द खंडोली डैम , खंडोली पहाड़ी पर लेते हैं ।" ,यहाँ आयोजन सिर्फ फेस्टिवल के दौरान नहीं होता है बल्कि इसके अलावा अन्य दिनों में भी एडवेंचर से जुड़े खेलों का आयोजन करते हैं और प्रशिक्षण भी देते हैं । ,"झारखण्ड में रोमांचक एडवेंचर टूरिज्म यहीं खत्म नहीं होता बल्कि टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन , जमशेदपुर द्वारा भी महत्वपूर्ण पहल के तहत जमशेदपुर के सोनारी इलाके में विश्व स्तरीय आयोजन का सिलसिला जारी है ।" ,"फाउंडेशन की ओर से वैसे लोगों के लिए जो क्लाइम्बिंग व माउंटेनियरिंग को गंभीरता से लेते हैं उनके लिए बाउल्डरिंग , फ्रीहैंड क्लाइम्बिंग , रैप्पलिंग आदि का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है ।" ,फाउंडेशन की ओर से सोनारी हिल के निकट पारासेलिंग करवाया जाता है तो डिमना लेक में वाटर एडवेंचर का आनन्द लिया जा सकता है । ,"इतना ही नहीं NULL , उफनते जल में रोमांचक कारनामा दिखाने के शौकीन लोगों के लिए स्वर्णरेखा व खरकई नदी में भी विशेष एडवेंचर गेम का आयोजन होता है ।" ,"खंडोली , गिरडीह :" ,"वाटर सर्फिंग , पारासेलिंग , पर्वतारोहण , कायाकिंग का आयोजन होता है ।" ,"तुरीतुमुंग , जमशेदपुर :" ,"पर्वतारोहण , बाउल्डरिंग , फ्रीहैंड क्लाइम्बिंग , रैप्पलिंग का आयोजन होता है ।" ,"डिमना लेक , जमशेदपुर :" ,"वाटर स्पोर्ट्स , बोटिंग की व्यवस्था है ।" ,जम्मू का अनूठा सौन्दर्य - ,"मनमोहक , लुभावने , हरे - भरे मैदान , भव्य पर्वत शिखर और उनके बीच झीलों और घाटियों का सिलसिला……" ,"जी हाँ , जम्मू के हर मोड़ पर एक नया आश्चर्य आपको चौंका देता है ।" ,प्राचीन मंदिरों के जगमगाते शिखरों और पहाड़ों पर स्थित पवित्र धर्म - स्थलों के बीच के ये नज़ारे आपको कल्पना से भी परे लगते हैं । ,किन्तु इन दृश्यों का आनन्द धीरे - धीरे और चुपचाप धैर्य से लिया जाता है । ,एक बार आपने यदि इनके सौंदर्य का रसपान कर लिया तो आप इनमें खोकर रह जाएँगे यह हमारा वादा है । ,ऐसे खूबसूरत नज़ारे जिन्हें आप देखेंगे तो बस देखते ही रह जाएँगे । ,जम्मू का सबसे प्रमुख रघुनाथ मंदिर शहर के एकदम बीचों - बीच स्थित है और यह जम्मू की शान है । ,उत्तर भारत के इस सबसे विशाल मंदिर परिसर में अनेक छोटे - छोटे मंदिर हैं । ,रघुनाथ मंदिर के गर्भगृहों में देवी देवताओं की विशाल मूर्तियाँ हैं और साथ में अनेक लिंग हैं । ,रघुनाथ मंदिर में हर हिन्दू देवी देवताओं की मूर्तियाँ आपको दिखाई देंगी जिससे इसका रूप ही आश्चर्यचकित करने वाला है । ,बाहू किले के अन्दर प्रसिद्ध बावे वाली माता के मंदिर में हर मंगलवार और रविवार को दर्शनार्थियों का मेला लगता है और हर किसी में दर्शन के लिए होड़ सी लगती है । sg,"उससे थोड़ा आगे जाने पर बाहू किले के सामने की पहाड़ी पर खूबसूरत जगह पर महामाया का मंदिर बनाया गया है , जिसके एक तरफ तवी नदी बहती है ।" ,बावे वाली माता जम्मू की अधिष्ठाता देवी है । ,दूसरा तीर्थ स्थल पीर बुद्धन अली शाह यानी पीर बाबा की दरगाह है । ,कहते हैं पीर बाबा की दरगाह अपने लोगों को बुरी आत्माओं और दुर्घटनाओं से बचाती है । ,गुरु गोविंद सिंह के मित्र पीर बाबा ने जीवन भर सिर्फ दूध का ही सेवन किया था और 500 वर्ष की अवस्था में अपनी देह छोड़ी थी । ,हर बृहस्पतिवार को मुसलमानों से भी कहीं बड़ी संख्या में हिन्दू और सिख श्रद्धालु इस दरगाह पर आते हैं और मन्नते माँगते हैं । ,पीर बाबा पर लोगों की आस्था बहुत ही अधिक है । ,जम्मू आने पर अधिकतर अति विशिष्ट व्यक्ति यानी वी आई पी दरगाह जाना नहीं भूलते । ,"तवी नदी के किनारे पीर खाओ गुफा मंदिर , पंचबक्खतर मंदिर और रणविरेश्वर मंदिर हैं ।" ,"इनमें से हर मंदिर के साथ एक न एक कथा जुड़ी हुई है और निश्चित दिन पर श्रद्धालु यहाँ आते हैं , पूजा अर्चना करते हैं ।" ,रणविरेश्वर मंदिर में क्रिस्टल के 12 से 18 इंच के 12 शिवलिंग हैं । ,रणविरेश्वर मंदिर के गलियारों के पत्थरों पर हज़ारों शालिग्राम लगे हैं जो पत्थर के स्लैब पर फिक्स्ड हैं । ,जम्मू में एक और पवित्र स्थल पीरमीठा है । ,पीरमीठा अजायबदेव और गरीब नाथ के समकालीन थे । ,अजायबदेव और गरीब नाथ दोनों संत अपनी भविष्यवाणियों और चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध थे । ,पीर अपने भक्तों से चुटकीभर शक्कर के अलावा कुछ नही लेते थे । ,अब फवाद को ऑस्ट्रेलियाई नागरिकता भी मिल गई है । ,नागरिकता मिलने के बाद खुश फवाद ने कहा ऑस्ट्रेलिया ने उनके लिए जो किया है अब उसे वह मैदान पर लौटाने को बैचेन हैं । ,वहीं क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख जेम्स सदरलैंड ने कहा कि फवाद के संघर्ष के समर्थन में पूरा ऑस्ट्रेलिया है और यह मामला इस बात का उदारहण बन गया है कि किस तरह हम क्रिकेट से लोगों की जिंदगी बदल सकते हैं । ,क्रिकेट के खेल में सबसे अहम चीज होती है पार्टनरशिप । ,"मैन ऑफ द मैच चाहे कोई भी बने , एक मैच जीतने के लिए टीम के खिलाड़ियों का एकजुट प्रदर्शन जरूरी होता है ।" ,एक बल्लेबाज तभी सेंचुरी बना सकता है जब उसका पार्टनर दूसरे छोर से टिका रहे । ,यदि ऐसा न हो तो क्रिकेट में कभी बैटिंग रिकॉर्ड्स बनें ही ना । ,वनडे इतिहास का एक ऐसा ही अनमोल रिकॉर्ड भारत के गौतम गंभीर और विराट कोहली के नाम है । ,"वैसे तो क्रिकेट की दुनिया में सर डॉन ब्रेडमैन , विवियन रिचर्ड्स , सचिन तेंडुलकर जैसे कई दिग्गज खिलाड़ी हुए , लेकिन जो कारनामा भारत के दो युवाओं ने किया है , उसे वनडे इतिहास में कोई दूसरा नहीं कर सका ।" ,"यही नहीं NULL , इस अनूठे रिकॉर्ड लिस्ट में टॉप 6 नाम भारतीय हैं ।" ,वनडे मैचों में किसी भी विकेट के लिए पार्टनरशिप करते हुए बेस्ट एवरेज ( 2000 से ज्यादा रन ) का वर्ल्ड रिकॉर्ड भारत के विराट कोहली और गौतम गंभीर के नाम है । ,"दिल्ली के इन दो धुरंधरों ने कम उम्र में वो कारनामा कर दिखाया , जिसका ख्वाब कई पुराने दिग्गज बस देखते ही रह गए ।" ,"गंभीर और कोहली ने 2008 से 2013 के बीच एकसाथ 35 साझेदारियां कीं , जिनमें से 2 में वे नॉटआउट भी रहे ।" ,दोनों ने इन 35 पारियों में 60 - 60 के रिकॉर्ड औसत से 2000 रन जोड़े हैं । ,दोनों की बेस्ट पार्टनरशिप 224 रन की रही । ,वनडे इतिहास में किसी भी बैटिंग जोड़ी ने गंभीर और कोहली से बेहतर औसत से रन नहीं जोड़े । ,"यही नहीं NULL , 60 से ज्यादा के एवरेज से पार्टनरशिप करने वाले वे दुनिया की पहली जोड़ी भी हैं ।" ,दोनों ने पार्टनरशिप में 7 सेंचुरी और 4 हाफ सेंचुरी लगाई हैं । ,इन दोनों ने वनडे की 56 पारियों में 60.53 के औसत से 2845 रन जोड़े हैं । ,2008 से 2013 के बीच खेले मैचों में दोनों ने 7 शतकीय और 15 अर्धशतकीय साझेदारियां कीं । ,1992 से 2000 के बीच इन दो इंडियन धुरंधरों ने 41 पारियों में 57.05 के औसत से 2111 रन जोड़े । ,दोनों के बीच 9 शतकीय और 8 अर्धशतकीय साझेदारियां हुईं । ,प्रोटीज टीम के इन दो दिग्गजों ने 2005 से 2013 के बीच 42 पारियों में साथ बल्लेबाजी करते हुए 55.56 के औसत से 2278 रन जोड़े । ,दोनों ने मिलकर 7 सेंचुरी और 10 हाफ सेंचुरी भी जमाई हैं । ,इनका बेस्ट परफॉर्मेंस 186 रन का रहा है । ,इस कैरेबियाई जोड़े ने 2001 से 2011 के बीच साथ बल्लेबाजी की । ,वनडे की 49 साझेदारियों में दोनों ने 54.30 के औसत से 2498 रन जोड़े । ,एवरेज के मामले में नंबर 1 ऑस्ट्रेलियाई जोड़ी रही सायमंड्स और क्लार्क की । ,"2003 से 2009 के बीच दोनों ने 49 पारियों में 53.78 के औसत से 2205 रन जोड़े , जिसमें 4 सेंचुरी और 14 हाफ सेंचुरी शुमार रहीं ।" ,वेस्ट इंडीज के इन दो दिग्गजों ने 1979 से 1991 के बीच 52.58 के औसत से रन जोड़े थे । ,महज 103 पारियों में 5206 रन जोड़कर वे वनडे इतिहास के पहले पेयर बने थे जिसने 50 प्लस के एवरेज से पार्टनरशिप निभाई । ,2001 से 2008 के बीच दबंग रहे इन दो कंगारुओं ने 52.44 के औसत से 3514 रन जोड़े । ,इसमें 10 सेंचुरी और 15 हाफ सेंचुरी शुमार रहीं । ,पंटर ने लगभग हर बल्लेबाज के साथ पार्टनरशिप निभाई । ,"1998 से 2006 के बीच दोनों ने 62 पारियों में 51.98 के औसत से 3015 रन जोड़े , जिसमें 8 शतकीय और 14 अर्धशतकीय साझेदारियां शुमार रहीं ।" ,ये पाकिस्तान के लिए औसत के मामले में अव्वल जोड़ी रही । ,"1985 से 1993 के बीच मियांदाद और राजा ने मिलकर 46 पारियों में 51.82 के औसत से 2125 रन जोड़े , जिसमें 5 सेंचुरी और 16 हाफ सेंचुरी शामिल रहीं ।" ,दस जुलाई से इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऐशेज सीरीज का पहला टेस्ट शुरू होने जा रहा है । ,"कप्तान माइकल क्लार्क का चोटिल होना , डेविड वार्नर का दारू पीकर हाथापाई करना और अब कोच मिकी ऑर्थर को चलता करने के बाद ऑस्ट्रेलिया के लिए ऐशेज सीरीज बड़ी चुनौती साबित हो रही है ।" ,मैदान में भी ऑस्ट्रेलियाई टीम फिसड्डी साबित हो रही है । ,टीम इंडिया के हाथों बॉर्डर - गावस्कर ट्रॉफी टेस्ट सीरीज में 4 - 0 से शर्मनाक हार के बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम की चैंपियंस ट्रॉफी में जमकर फजीहत हो चुकी है । ,इस टूर्नामेंट में कंगारू बिना कोई मैच जीते ही बाहर हो गए थे । ,अब संकट की इस घड़ी में ऑस्ट्रेलिया ने ऐशेज सीरीज को जीतने एक और दाव खेला है । ,दरअसल कंगारू टीम ने एक पाकिस्तानी के भरोसे अंग्रेजों पर फतह की तैयारी की है और सरकार ने भी इस कदम में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड का साथ दिया है । ,ये पाकिस्तानी है लेग स्पिनर फवाद अहमद । ,अबोटाबाद के फवाद 2005 से पाकिस्तान में प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेल रहे हैं । ,बेहतर करिअर के लिए 2010 में फवाद ऑस्ट्रेलिया चले गए थे । ,ऑस्ट्रेलिया पहुंचे फवाद ने कम समय मे ही अपनी धाक जमा ली है । ,हालांकि उनका ऑस्ट्रेलिया की नेशनल टीम में खेलना तभी संभव था जब उन्हें वहां की नागरिकता मिल जाए । ,इस दौरान विक्टोरिया के लिए शैफील्ड शील्ड खेलते हुए तीन मैचों में ही फवाद ने अपनी फिरकी का जलवा दिखाते हुए 16 विकेट झटक कई ऑस्ट्रेलियाई दिग्गजों को अपना दीवाना बना लिया । ,अरे बाप रे आदमी मौत का सौदागर हो गया है । ,कितनी भयावह खबर छपी है । ,पढ़कर रोंगटे खड़े हो गये जिन लोगों ने अपनी आंखों से देखा होगा उनकी क्या हालत हुई होगी । ,क्यों चीख पुकार कर रहे हो कहते हुए नन्दिनी सामने खड़ी हो गयी । ,सन्तोष - लो खुद की आंख से देख लो अखबार में छपी दिल दहला देने वाली खबर । ,आज आदमी मौत का सौदागर हो गया है । ,नन्दिनी - मेरे हाथ में आटा लगा है आप ही सुना दो । ,सन्तोष - आदमी आदमी की हत्या बाद शिनाख्त मिटाकर कमाई करने लगे हैं । ,बेचारे मृतकों के घर परिवार के सपनों की बारात में हैवान किस्म के लोग आग लगा दे रहें हैं । ,आदमी कितना दरिन्दा हो गया है । ,मौत का सौदागर बन गया है । ,अमानुष लोग कैसे - कैसे भयावह धंधे करने लगे हैं । ,"आदमी के रूप में आदमी , आदमी की मौत बनकर घूम रहे हैं ।" ,"कैसे कमजोर , सीधे - सादे लोग दरिन्दों से बच पायेगें ?" ,नन्दिनी - ठीक कह रहे हो स्वार्थ के इस युग में आदमी को पहचानना बहुत कठिन हो गया है । ,कहते हैं सोना परखे घरी - घरी आदमी परखे एक घरी वाली कहावत आज के आदमी पर लागू नहीं हो रही है क्योंकि वह चेहरा बदलने में इतना माहिर हो गया है । ,आदमी के पल - पल मुखौटे बदलने का ही तो नतीजा है कि आदमी नरकंकाल तक का भयावह धंधा करने लगे हैं । ,कुछ साल पहले ताबूत काण्ड आम आदमी को हिलाकर रख दिया था । ,स्वार्थ में आज का आदमी इतना पागल हो गया है कि अपने स्वार्थ के अलावा कुछ सूझ ही नहीं रहा है । ,क्या जमाना आ गया है आदमी मौत का सौदागर बन गया है । ,सन्तोष - सच आज के इस युग में आदमी स्वार्थ के जाल में ऐसा उलझ गया है कि वह अच्छे - बुरे में अन्तर नहीं कर पा रहा है । ,पागलपन में मदहोश का कत्ल कर अपनी खुशियों की नींव रख रहा है । ,नन्दिनी - अखबार वाली खबरों को तनिक छोटी करके बताओगे क्या ? ,सन्तोष - सुनो भोले बाबा की नगरी में पुलिस ने एक ऐसे खूनी गिरोह का भण्डाफोड़ किया है जो फर्जी नाम से आदमी का बीमा करवाता था और बाद में किसी मासूम गरीब को अपने जाल में फंसाकर मौत के घाट उतार देता था । ,इस गिरोह के दरिन्दे बीमा कम्पनी से कई क्लेम भी ले चुके हैं । ,ये मौत के सौदागर अपने काले कारनामें को सफेद कर बीमा कम्पनी की आंखों में धूल झोंक कर करोड़ों का चूना लगा चुके हैं । ,नन्दिनी - बाप रे आदमी इतने बड़े कसाई हो गये हैं कि आदमी को बकरा - मुर्गी की तरह काटकर लाश को कमाई का जरिया बना रहे हैं । ,हे भगवान तुम्हारे आदमी को ये क्या हो गया कि आदमी से हैवान हो गया । ,अच्छा ये बताओ इन दरिन्दों के खूनी खेल का पर्दाफाश कैसे हुआ ? ,सन्तोष - छपी खबर के अनुसार ये दरिन्दें मासूम गरीब को अपने जाल में फंसाकर उसकी हत्या करने के बाद चेहरा ऐसे कुचल देते थे कि शिनाख्त ही नहीं हो पाती थी । ,ये दरिन्दें फर्जी नाम से करवाये बीमे के आदमी को मृतक बताकर क्लेम ले उड़ते थे । ,नन्दिनी - अब ये बात मत दोहराना डर लगने लगा है । ,आप तो बस ये बताओ कि हैवानों का भण्डा कैसे पुलिस फोड़ी । ,सन्तोष - भागवान मैं कोई जांच अधिकारी तो नहीं । ,अखबार में सब छपा है । ,नन्दिनी - मैं कहां कह रही हूं कि तुम जांच अधिकारी हो । ,जांच अधिकारी से बड़ा अधिकारी बनने की काबिलियत तुममें तो है । ,आदमी द्वारा रचे चक्रव्यूह की देन कहें या नसीब का खेल लाख काबिलियत होते हुए भी तुम्हें तरक्की से पीछे ढकेला गया । ,खैर वो सब छोड़ो तुम तो मासूम कमजोर के सपनों को डंसने वाले मौत के सौदागरों की करतूत बताओ । ,सन्तोष - सुनाने में मेरे पैर कांपने लगे हैं । ,खैर सुनो - पुलिस द्वारा एक बीमा कम्पनी के आवेदन पर जांच की जा रही थी । ,बीमा कम्पनी सड़क दुर्घटना में मारे गये मासूमेन्द्र जो वास्तव में मौजेन्द्र जो एक मजदूर था की मौत पर बीमा कम्पनी को शंका हुई उसने मामला पुलिस को जांच के लिये सौंप दिया । ,नन्दिनी - बीमा कम्पनी को शंका इसीलिये हुई होगी कि ये मौत के सौदागर मासूमों को मारकर चेहरा ऐसे कुचल देते होंगे कि शिनाख्त न हो पाये । ,मजबूरन कम्पनी को दरिन्दों के हलफनामें को मानना पड़े । ,भोले बाबा ने बीमा कम्पनी का तीसरा नेत्र खोल दिया तभी तो मामला पुलिस के पास पहुंचा । ,सन्तोष - कम्पनी जांच तो पहले भी अपने स्तर पर करती होगी पर ये दरिन्दे ऐसे सबूत पेश कर देते होंगे कि बीमा अधिकारी झूठ को सच मान बैठते होंगे । ,नन्दिनी - भोले बाबा की कृपा से कितने मासूमों की जान बच गयी । ,बीमा अधिकारियों को क्लेम दिखा दिया होगा दरिन्दों के अपराध का बाबा ने । ,कहते हैं ना चोर की दाढ़ी में तिनका । ,सन्तोष - फरेब पर खड़ी इमारत तो ढ़हेगी जरूर वही हुआ । ,जांच से पता चला कि मरने वाला मासूमेन्द्र न होकर मौजेन्द्र था जिसकी शिनाख्त मौसूमेन्द्र के रूप में हुई थी । ,मौजूमेन्द्र सीधा - साधा मजदूर था जिसे दरिन्दों ने कुचल कर मासूमेन्द्र के रूप में पहचान की थी यानि जिस नाम से फर्जी बीमा हुआ था । ,नन्दिनी - दरिन्दों के जाल में बेचारा गरीब फंस कैसे गया । ,सन्तोष - खबर के मुताबिक मौत के सौदागरों ने गरीब मौजेन्द्र को अपना बनाया । ,बेचारा झांसे में आ गया । ,कहते हैं ना गरीब हर आदमी पर विश्वास कर लेता है । ,यही विश्वास उसकी दुर्दशा का कारण होता है । ,बेचारा गरीब दरिन्दों पर विश्वास कर बैठा और यही विश्वास मौत का कारण बन गया । ,दरिन्दें मौजेन्द्र को मुर्गा दारू खिलाये पिलाये । ,जब वह नशे में हो गया तब मौत के सौदागरों ने उसकी हत्या कर दी इसके बाद कार से ऐसा कुचला कि उसकी असली पहचान ही खत्म हो गयी । ,आखिरकार कार का ड्राइवर पुलिस के हत्थे चढ गया और पुलिस ने सब कुछ उगलवा लिया । ,नन्दिनी - ड्राइवर के बयान के बाद तो कातिल दरिन्दें भी पुलिस की गिरफ्त में आ गये होंगे । ,दरिन्दों को भी वैसे ही कुचल कर मारे जाने की सजा मिलनी चाहिये । ,तभी दरिन्दों में डर पैदा होगा और कमजोर गरीब मासूम आदमी भी षडयन्त्र के शिकार से भी बच सकेगा । ,सन्तोष - देश का कानून तनिक लचीला है । ,"इसी का फायदा बदमाश किस्म के लोग और पहुंच वाले उठाते हैं , जिसके परिणामस्वरूप् अपराध की प्रवृति बढ़ती है ।" ,दरिन्दे सलाखों के पीछे आ गये हैं पर देखो इनको फांसी की सजा कब मिलती है ? ,नन्दिनी - हैं तो इसी के हकदार ये मौत के सौदागर । ,अगर ये मौत के सौदागर रूपये के लिये मासूम गरीबों को कुचल - कुचल कर मारते रहे तो गरीब आदमी का बसर कैसे होगा ? ,सन्तोष - एस. पी. साहब का बयान भी छपा है । ,नन्दिनी - क्या कह रहे हैं एस. पी. साहब ? ,सन्तोष - बयान के अनुसार तो इन मौत के सौदागरों का प्लान काफी खतरनाक था और सही साबित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी । ,पुलिस कार्रवाई का चमत्कार ही कहो कि ये दरिन्दे सलाखों के पीछे आ गये वरना इनके हत्या के तरीके से मामला उजागर ही नहीं हो पाता । ,मौत के सौदागर मासूमों का कत्ल कर फर्जी नाम से किये गये बीमा के रूपये के पहाड़ पर बैठे मौज मनाते और मौका मिलते ही किसी मासूम की बलि चढ़ाकर बीमा कम्पनी से रूपया ऐंठते रहते । ,नन्दिनी - क्या जमाना आ गया है आदमी आदमी को मुर्गी बकरे की तरह काटने लगा है । ,सन्तोष - देवीजी इस खूनी खेल में औरतें भी शामिल हैं । ,नन्दिनी - क्या ? ,सन्तोष - हां । ,"कुकर्मेश , खूनवीर , कत्लवीर और जोरवीर के साथ ममता , समता और जोरवीर की बीबी कुसुम भी शामिल हैं खूनी खेल की काली कमाई में ।" ,"दिखाने को तो ये जोरवीर की घरवाली घरों में बर्तन , झाड़ू का काम करती थी पर असली चेहरा तो खूनी है ।" ,ये पापिनें ना जाने कितने मासूमों का खून पी चुकीं होंगी । ,ये सब बराबर के भागीदार हैं खूनी खेल में । ,नन्दिनी - हे भगवान इन मौत के सौदागरों का कब संहार होगा । ,सन्तोष - चढ गये हैं पुलिस के हत्थे हत्यारे तो फांसी के फन्दे तक पहुंच ही जायेंगे । ,नन्दिनी - फर्जी क्लेम लेने के लिये हत्यारे फर्जी आश्रित भी खड़ा कर देते होंगे । ,सन्तोष - हत्यारे मासूम की हत्या कर लाश का चेहरा विकृत कर के उसकी जेब में अपना पता डाल देते थे । ,पुलिस इसी पते के आधार पर इन दरिन्दों से सम्पर्क करती थी । ,"ये बीबी , बच्चे , मां बाप सब फर्जी बन जाते थे ।" ,पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाश इन्हें सौंप देती थी । ,ये आनन - फानन में जला - जुलाकर बीमा कम्पनी में क्लेम ठोंक देते थे । ,ये दरिन्दे मासूमों की हत्या का पांच - पांच लाख तक के क्लेम ले चुके थे । ,"नन्दिनी - देखो रूपये के लालच में ये मौत के सौदागर मासूमों , गरीबों , बेरोजगारों को काम दिलाने के बहाने अपने जाल में फांसकर कुचल - कुचल कर मार देते थे ।" ,"हैवान कुकर्मेश , खूनवीर , कत्लवीर , ममता , समता , कुसुम उसके नकली आश्रित बनकर क्लेम लेने वाले लोग होंगे ।" ,भला हो उस जांच अधिकारी का जिसका तीसरा नेत्र खुल गया और हत्यारे दरिन्दे गिरोह का पर्दाफाश हो गया । ,सन्तोष - दरिन्दे सलाखों के पीछे तो आ गये हैं । ,काश इन्हें जल्दी फांसी लग जाती । ,नन्दिनी - देखो ये काम कचहरी का है । ,अब इस केस के बारे में कोई बात न करो मुझे चक्कर जैसा लग रहा है । ,तुम जाओ नहा - धोकर पूजा पाठ करो । ,मुझे खौफ सताने लगा है । ,सन्तोष - डरो नहीं । ,देश की पुलिस तो है ना दरिन्दों के दमन के लिये । ,नन्दिनी - काश ऐसा हो जाता । ,सन्तोष और नन्दिनी अपने - अपने काम में लग गये । ,सप्ताह भर बाद फिर अखबार में छपी खबर को पढ़कर सन्तोष चौक कर चिल्ला पड़ा । ,नन्दिनी - आज क्या हुआ ? ,सन्तोष - मौत के सौदागरों को फांसी हो गयी । ,फर्जी तरीके से कमाई रकम और प्रापर्टी सब राजसात् हो गयी । ,नन्दिनी - अच्छा हुआ हमारी न्याय व्यवस्था और पुलिस पर अंगुली नहीं उठेगी । ,सन्तोष - न्याय प्रक्रिया में ढ़िलाई अपराध बढाती है । ,नन्दिनी - पुराने ढर्रे से हटकर अच्छा फैसला हुआ है । ,"बेचारे गरीब , मासूम और बेरोजगार मृतकों की आत्माओं को जरूर शान्ति मिली होगी ।" ,मौत के सौदागर सिर उठाने में भी अब थर - थर कांपेंगे यदि ऐसे न्याय होता रहा तो । ,सन्तोष - सत्यमेव जयते का नारा भी बुलन्द हुआ है । ,श्रीलंकाई खिलाड़ी को रन आउट करने की कोशिश करते कप्तान धोनी । ,"दिल्ली के गब्बर जब से वनडे टीम में वापस आए हैं , लगातार धमाका कर रहे हैं ।" ,श्रीलंका के खिलाफ सेमीफाइनल में भी उनका धमाका जारी रहा । ,टीम इंडिया के कप्तान धोनी ने दूसरे विकेटकीपर दिनेश कार्तिक का जमकर फायदा उठाया । ,उन्होंने कार्तिक को कीपिंग की जिम्मेदारी सौंपकर खुद बॉल उठा ली । ,4 ओवर की बॉलिंग में उन्होंने कुल 17 रन दिए । ,"एक बार तो उनकी अपील को फील्ड अंपायर ने हामी भी दे दी , लेकिन यूडीआरएस ने उनसे विकेट लेने का मौका छीन लिया ।" ,शिखर ने बल्ले से कमाल के साथ ही फील्डिंग में भी योगदान दिया । ,इशांत शर्मा घनी जुल्फों के बावजूद तीन विकेट चटकाने में कामयाब रहे और मैन ऑफ द मैच बने । ,मैच के पांचवें ओवर में श्रीलंका के ओपनर दिलशान को लंगड़ाते हुए रिटायर्ड हर्ट होना पड़ा । ,"8वां विकेट गिरने के बाद वे क्रीज पर आए , लेकिन तब तक ओवर खत्म हो चुके थे ।" ,कोहली ने बाउंड्री पर कैच लपकने के लिए जंप लगाई थी लेकिन वे नहीं पकड़ सके । ,दस जुलाई क्रिकेट वर्ल्ड का एक और बढ़ा दिन । ,टेंटब्रिज में इस दिन ऐशेज 2013 का पहला टेस्ट दो परंपरागत प्रतिद्वंद्वियों इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच शुरू होगा । ,यह सीरीज न सिर्फ इन दो देशों बल्कि दुनिया भर के क्रिकेट लवर्स के लिए बेहद खास होती है । ,ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रहा है वहीं इंग्लैंड टेस्ट में अपना सिक्का जमा चुका है । ,ऐसे में इंग्लिश टीम के पूर्व खिलाड़ियों ने माइंड गेम खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था लेकिन शेन वॉटसन ने एक ही धमाके में इनकी न सिर्फ बोलती बंद कर दी है बल्कि पूरी इंग्लिश टीम को टेंशन में डाल दिया है । ,दरअसल अंग्रेज हाल ही में टीम इंडिया को उनके ही घर में टेस्ट सीरीज हरा चुके हैं वहीं ऑस्ट्रेलिया को टीम इंडिया ने टेस्ट सीरीज में 4 - 0 से हराया था । ,इस सीरीज में शेन वॉटसन समेत तीन अन्य खिलाड़ियों का कोच से विवाद ने भी ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की किरकिरी कराई थी । ,माइकल क्लार्क के चोटिल होने के बाद वार्नर का हाथापाई कांड और फिर कोच मिकी ऑर्थर की विदाई के बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम ऐशेज से पहले मानिसक दबाव में है । ,वहीं चोट से उबर कर पीटसरन की वापसी इंग्लिश खेमे के लिए प्लस प्वाइंट मानी जा रही थी । ,टीम इंडिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में आउट ऑफ फार्म रहे शेन वॉटसन को ऐशेज सीरीज में नए कोच डैरन लीमैन ने ओपनिंग की जिम्मेदारी सौंपी है । ,साथ ही ऑस्ट्रेलिया के लिए केवल एक मैच खेल चुके क्रिस रोजर्स को उनका जोड़ीदार बनाया है । ,वॉटसन ने कोच के डिसीजन को सही साबित करते हुए ऐशेज से पहले आखिरी प्रैक्टिस मैच में वूस्टरशर के खिलाफ धमाकेदार शतक जड़ दिया है । ,वहीं शेनू ने रोजर्स के साथ नॉटआउट 150 रन की साझेदारी भी कर डाली है । ,वॉटसन की इस पारी ने बड़बोले अंग्रेजों की बोलती बंद कर दी है । ,हौसला और इच्छा हो तो नामुमकिन कुछ भी नहीं NULL । ,इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया तालिबानी खौफ वाले अफगानिस्तान की सीमा से सटे पाकिस्तानी गांव में जन्में एक खिलाड़ी ने । ,पाकिस्तान में हिंदुकुश की पहाड़ियों से घिरा जिला है स्वाबी । ,अफगानिस्तान की सीमा करीब होने के कारण यहां भी कट्टरपंथी तालिबानियों का खौफ रहता है । ,इस खौफ में पला - बढ़ा एक खिलाड़ी फवाद अहमद अब ऑस्ट्रेलिया की क्रिकेट टीम में शामिल होने को तैयार है । ,क्रिकेट के लिए फवाद की दीवानगी और संघर्ष को देखते हुए ही ऑस्ट्रेलिया ने इसे न सिर्फ उसे शरण दी बल्कि नेशनल टीम में शामिल करने में आड़े आ रहे नियमों तक को बदल डाला । ,मंगलवार को फवाद को ऑस्ट्रेलियाई नागरिकता मिल गई । ,स्वाबी में क्रिकेट की एबीसीडी सीखने के बाद फवाद को ऐबटाबाद के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलने का मौका मिला । ,इसके बाद फवाद ने पाकिस्तान कस्टम की टीम से कायदे आजम ट्रॉफी में अपने जौहर दिखाए । ,इन मैचों में फवाद ने कुल 39 विकेट अपने नाम किए । ,फवाद जब ऐबटाबाद में खेलते थे तो तालिबानियों से संबंध रखने वाले कट्टरपंथी उन्हें जान से मारने की धमकियां देते थे । ,कट्टरपंथियों का कहना था कि क्रिकेट पश्चिमी देशों के मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है और इसे खेलना पाप है । ,साल 2010 में इन धमकियों के बाद फवाद ने पाकिस्तान छोड़ ऑस्ट्रेलिया से शरण मांगी । ,क्रिकेट के लिए फवाद के जुनून को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन अप्रावासन मंत्री क्रिस बोवेन ने खुद यह मामला देखा और तय किया कि फवाद को ऑस्ट्रेलिया में रहने और खेलने के लिए स्थाई वीजा दिया जाए । ,ऑस्ट्रेलिया में फवाद ने मेलबॉर्न यूनिवर्सिटी के लिए खेलना शुरू किया । ,नवंबर 2012 में फवाद को ऑस्ट्रेलिया में हमेशा के लिए रहने की इजाजत दे दी गई । ,इसके बाद फवाद ने ऑस्ट्रेलिया की बिग - बैश लीग के लिए मेलबॉर्न रीनीगेड्स के साथ अनुबंध कर लिया । ,फवाद की फिरकी का जादू चल चुका था जल्द ही शैफील्ड शील्ड के लिए उन्हें विक्टोरिया की टीम में भी शामिल कर लिया गया । ,जनवरी 2013 में फवाद को वेस्टइंडीज के खिलाफ प्रधानमंत्री एकादश में भी जगह मिली साथ ही इंग्लैंड दौरे पर गई ऑस्ट्रेलियाई टीम में भी उन्हें शामिल किया गया । ,इंग्लंड में फवाद के प्रदर्शन को देखने के बाद ही उन्हें ऐशेज सीरीज का दावेदार माना जाने लगा था । ,नेशनल टीम में खेलने से पहले फवाद को ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता मिलनी जरूरी थी । ,इसके लिए ऑस्ट्रेलियाई बोर्ड ने सरकार से विशेष अनुरोध भी किया । ,इसका नतीजा यह रहा कि संसद में आव्रजन नीति में संशोधन तक किया गया । ,हस्तिनापुर जाने के लिए हमने दिल्ली में कश्मीरी गेट बस अड्डे से जाना सुविधाजनक समझा । ,कश्मीरी गेट से लगातार मेरठ तक की बसें जाती हैं । ,फिर मेरठ से हस्तिनापुर की बसें मिल जाती हैं । ,दिल्ली से हस्तिनापुर की दूरी तकरीबन 105 किलोमीटर है । ,"हस्तिनापुर को शास्त्रों में अन्य कई नामों से भी जाना जाता है , जैसे गजपुर , नागपुर , असंधिवत , ब्रह्मास्थल , शांतिनगर , कुजारपुर आदि ।" ,हस्तिनापुर में जैन धर्म के चौबीस तीर्थंकरों में से सबसे पहले तीर्थंकर श्री आदिनाथ प्रभु ने अपने चार सौ दिनों के व्रत के पश्चात श्रेयंषकुमार के हाथों से गन्ने का रस ग्रहण कर अपने व्रत का समापन किया था । ,"हस्तिनापुर में ही श्री शांतिनाथ प्रभु , कुंथनाथ प्रभु और श्री अरहनाथ प्रभु के बारह कल्याणक हुए ।" ,भगवान मल्लिनाथ का समवोशरन भी हस्तिनापुर में ही हुआ । ,"हस्तिनापुर में ही मुनि सुव्रत नाथ स्वामी , भगवान पार्श्वनाथ और भगवान महावीर स्वामी ने अपनी दिव्य वाणी में प्रवचन दिए ।" ,हस्तिनापुर में प्रक्षाल और पूजा - अर्चना का समय सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक है । ,और दिगम्बर जैन मंदिर में पूजा करने का समय सुबह सात बजे प्रारम्भ होता है । ,हस्तिनापुर में आदिनाथ भगवान दीक्षा लेने के 4 सौ दिनों बाद वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन आए थे । ,लोगबाग दूर - दूर से उनके दर्शन के लिए जाते थे । ,राजकुमार श्रेयंषकुमार को जब इस बात का ज्ञान हुआ तो उन्हें अपने पूर्वजों की अन्न - जल त्यागने की प्रथा का स्मरण हो आया । ,राजकुमार श्रेयंषकुमार ने आदिनाथ प्रभु से व्रत के समापन के लिए इक्षु रस ग्रहण करने की प्रार्थना की जिसे उन्होंने स्वीकार किया । sg,बाद में इस दिन को अक्षय तृतीया कहा जाने लगा । pl,हस्तिनापुर में भगवान ने अपने प्रवचनों से 6 बड़े राजाओं को जैन धर्म का अनुयायी बनाया । sg,"24 तीर्थंकरो में से 20वें तीर्थंकर श्री मुनि सुव्रत स्वामी , 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ भगवान और अंतिम तीर्थंकर श्री महावीर स्वामी ने भी इस स्थान को अपने चरणों से पावन किया ।" ,भारत में कुल 12 चक्रवर्ती सम्राट हुए । ,भारत के कुल 12 चक्रवर्ती सम्राट में से 6 का जन्म स्थान हस्तिनापुर है । ,रामायण काल के परशुराम भी हस्तिनापुर में पैदा हुए । ,हस्तिनापुर कौरवों और पांडवों की राजधानी रह चुकी है । ,कार्तिक पूर्णिमा और वैशाख शुक्ल तृतीया को श्वेताम्बर जैन मंदिर में और कार्तिक शुक्ल से पूर्णिमा के बीच दिगम्बर जैन मंदिर में कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है । pl,भगवान आदिनाथ ने पोदनपुर और हस्तिनापुर राज्य अपने पुत्र बाहुबली को सौंप दिये थे । ,बाहुबली ने पोदनपुर पर शासन किया जबकि उनके पुत्र सोमयश ने हस्तिनापुर पर । ,बाहुबली के छोटे भाई श्रेयंषकुमार ने आदिनाथ भगवान का चरणाभिषेक किया था | sg,श्रेयंषकुमार की स्मृति में रत्न स्तम्भ बनवाया था । sg,वहाँ पर आदिनाथ भगवान के चरणपादुका भी स्थापित किये थे । pl,"श्री शांतिनाथ भगवान , श्री कुंथनाथ भगवान और अरहनाथ भगवान के चार कल्याणक की स्मृति में भी यहाँ तीन स्तम्भ बनवाये गए ।" sg,""" राजा शिवराज ने महावीर स्वामी के प्रवचन सुनकर जैन धर्म को अपनाया ।" sg,"महावीर स्वामी की स्मृति में राजा शिवराज ने हस्तिनापुर में एक स्तम्भ बनवाया । """ pl,सम्राट अशोक के एक वंशज ने भी अपने शासन काल के दौरान कई जैन मंदिर बनवाए । ,लेकिन समय के साथ वे प्राचीन स्तम्भ और मंदिर धीरे - धीरे विलीन हो गए । ,यह हस्तिनापुर नगर पवित्र गंगा के किनारे मौजूद है । ,हस्तिनापुर पहुँचे लोगों के ठहरने के लिए धर्मशाला का भी प्रबंध मिलता है । ,"श्वेतांबर ट्रस्ट धर्मशाला में ठहरने के लिए 400 कमरे और सुबह के नाश्ते , दोपहर के लंच और रात के भोजन की व्यवस्था होती है ।" ,इसी प्रकार अन्य कईं धर्मशालाएँ आसानी से मिल जाती हैं । ,अतिशय क्षेत्र तिजारा : ,इच्छा से ज्यादा मिलता है यहाँ ,चंद्र प्रभु दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र देहरा - तिजारा राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है । ,यह अतिशय क्षेत्र कहलाता है । ,अतिशय का अर्थ है सामान्य से बहुत ज्यादा । ,यानी ऐसा क्षेत्र जहाँ कुछ असाधारण घटित हो या कोई चमत्कार हो जाए । ,"यानी अगर साधारण तौर पर जो कुछ माँगा जाए , उससे कहीं ज्यादा मिल जाए ।" ,इतना मिले कि आप सराबोर हो जाएँ । ,ऐसी ही है तिजारा क्षेत्र की मान्यता । ,तिजारा का यह अतिशय क्षेत्र या कहें कि मंदिर अलवर जिले से 52 किलोमीटर और दिल्ली से 117 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । ,तिजारा अतिशय क्षेत्र में 24 तीर्थंकरों में से 8वें तीर्थंकर श्री चंद्र प्रभु भगवान की आराधना की जाती है । ,तिजारा अतिशय क्षेत्र में चंद्र प्रभु भगवान की सफेद रंग की अत्यंत मनोहारी संगमरमर की मूर्ति स्थापित है । ,"यह संगमरमर मूर्ति इस क्षेत्र में कराई गई खुदाई के दौरान 16 अगस्त , 1956 को निकली थी ।" ,बताते हैं कि तिजारा क्षेत्र के एक मशहूर वैद्य बिहारी लाल की पत्‍नी सरस्वती देवी ने तीन दिन का उपवास रखा था । ,आम जनता के लिए सरल और सुबोध भाषा - शैली में लिखी पत्रिकाएं ही उपयोगी हो सकती हैं । ,"हिंदी में इस तरह की अनेक साप्‍ताहिक , पाक्षिक और मासिक पत्रिकाएं निकलती हैं ।" ,इनमें ’ विज्ञान प्रगति ’ और ’ आविष्कार ’ प्रमुख हैं । pl,’ विज्ञान प्रगति ’ की लगभग एक लाख प्रतियां प्रकाशित की जाती हैं । ,"इन दोनों पत्रिकाओं की साज - सज्जा , मुद्रण उच्‍च स्तर का है ।" sg,अधिकांश हिंदी दैनिक और पत्र - पत्रिकाएं समय - समय पर विज्ञान विषयक सामग्री प्रकाशित करती हैं । pl,"हिंदी के कुछ पत्र विज्ञान , कृषि , पशुपालन , पर्यावरण और वानिकी पर नियमित स्तंभ भी प्रकाशित करते हैं ।" sg,अनेक हिंदी दैनिक पत्र अपने रविवारीय परिशिष्‍ट में विज्ञान विषय पर रोचक सामग्री देते हैं । sg,इस दिशा में ’ नवभारत टाइम्स ’ और ’ हिन्दुस्तान ’ ने उल्लेखनीय कार्य किया है । pl,"क्रिकेट मैच का आंखों देखा हाल सुनाने में हिंदी खेल समीक्षकों के सामने अनुवाद , शब्दावली और मुहावरों आदि की अनेक समस्याएं आईं ।" ,लेकिन उन्होंने परीक्षण और ’ गलती ’ करो और उससे ’ सीखो ’ विधि का प्रयोग करते हुए उन कठिनाइयों पर विजय हासिल की । ,"अब तो हिंदी में न केवल क्रिकेट का NULL , बल्कि लगभग सभी खेलों का इतना अच्छा हाल सुनाते हैं कि कुछ खेल पत्रकार उसे सुनकर खेल की रिपोर्टिंग कर देते हैं ।" ,हिंदी में खेल संबंधी कुछ पत्रिकाएं निकलीं । ,लेकिन उन सभी का प्रकाशन कुछ समय बाद बंद हो गया । ,इनमें ’ खेल भारती ’ का नाम उल्लेखनीय है । ,’ खेल भारती ’ के अलावा कुछ समय तक ’ स्पोर्टस वीक ’ ने ’ खेल युग ’ का भी प्रकाशन किया । ,’ क्रिकेट सम्राट ’ नामक पत्रिका भी कुछ समय अच्छी चली । ,इस समय ’ खेल खिलाड़ी ’ के अलावा हिंदी में शायद ही कोई अन्य खेल पत्रिका निकलती हो । ,महिलाओं में जागृति लाने और उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में शामिल करने का श्रेय गांधीजी को है । ,गांधीजी पहले नेता थे जो स्‍त्रियों और पुरुषों के बीच किसी किस्म का भेदभाव या अंतर स्वीकार करने को तैयार नहीं थे । ,उन्होंने सभी स्‍त्री - पुरुषों से स्वतंत्रता संग्राम और रचनात्मक कार्यक्रमों में शामिल होने की अपील की । ,पत्रकार व्यवसाय में महिलाओं के आगमन की घोषणा करने वाली और सामाजिक चेतना फैलाने वाली हिंदी की पहली पत्रिका ’ बाल बोधनी ’ थी । ,इसका प्रकाशन भारतेंदु हरिश्‍चंद्र ने पहली जनवरी 1874 को किया था । ,"इसके प्रथम अंक के प्रथम पृष्‍ठ पर यह निवेदन प्रकाशित हुआ था , मेरी प्यारी बहनों , मैं तुम्हारी नई बहन ’ बाल बोधनी ’ आज तुम लोगों से मिलने आई हूं और मेरी यह इच्छा है कि तुम लोगों से हर महीने एक बार मिलूं ।" ,बीसवीं शताब्दी के दूसरे दशक के शुरू में सुदर्शनाचार्य ने इलाहाबाद से ’ गृहलक्ष्मी ’ पत्रिका का प्रकाशन किया । sg,इसी वर्ष वाराणसी से बाबूराव विष्‍णु पराड़कर तथा शांतिप्रिय द्विवेदी के संपादन में महिलोपयोगी पत्रिका ’ कमला ’ का प्रकाशन शुरू हुआ । ,यह अपने समय की सर्वोत्तम महिलोपयोगी पत्रिका थी । sg,इसी समय गोविंद शास्‍त्री दुगवेकर ने वाराणसी से ’ गृहस्‍थ ’ पत्रिका गृहस्‍थ प्रकाशन शुरू किया । ,स्वतंत्रता के बाद महिलाओं की पत्रिकाओं का और विकास हुआ । ,बेनेट कोलमैन कंपनी ( टाइम्स ऑफ इंडिया ) समूह ने अंग्रेजी में ’ फैमिना ’ निकालकर इसकी शुरुआत की । ,पिछले चार दशकों के दौरान ’ फैमिना ’ की तर्ज पर हिंदी में ’ वामा ’ निकालने का भी प्रयास किया गया किंतु वह सफल नहीं हुआ । ,’ फैमिना ’ की तर्ज पर अंग्रेजी में ’ सेवा ’ भी निकलती है । sg,अंग्रेजी की महिला पत्रिकाओं की शैली पर इलाहाबाद के मित्र प्रकाशन ने ’ मनोरमा ’ का प्रकाशन शुरू किया । sg,इसी प्रकार दिल्ली प्रेस ने ’ गृहशोभा ’ का प्रकाशन शुरू किया । ,इधर पारिवारिक झगड़े के कारण ’ मनोरमा ’ का प्रकाशन बंद है । ,इधर हेमामालिनी के संपादन में ’ मेरी सहेली ’ का प्रकाशन शुरू हुआ है । sg,अनेक महिला संगठन अपनी पत्रिका निकालते हैं । ,मधु किश्‍वर के संपादन में ’ मानुषी ’ निकल रही है । ,भोपाल से ’ अनुसुइया ’ पत्रिका का प्रकाशन हो रहा है । sg,महिला दक्षता समिति ’ जननी ’ नाम से एक पत्रिका निकालती है । ,"उषा राय ने महिलाओं की समस्याओं और शिक्षा , स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर बड़े अच्छे ढंग से प्रकाश डाला है ।" ,शहनाज अंकलेसरिया रक्षा संबंधी मामलों की विशेषज्ञ हैं । ,तवलीन सिंह समकालीन राजनीति की उत्कृष्‍ट समीक्षा करती हैं । ,"मृणाल पांडे विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं की संपादक के रूप में नारी समस्याओं , स्‍त्री - पुरुष असमानता और महिलाओं के पिछड़ेपन पर हिंदी और अंग्रेजी में समान रूप से लिखती रही हैं ।" ,कूमी कपूर ’ इंडियन एक्सप्रेस ’ की स्थानीय संपादक हैं । ,एनडीटीवी की बरखा दत्त ने तो जोखिम भरी जगहों में जाकर यह सिद्ध कर दिया है कि अब महिलाएं किसी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं । ,हिंदी फिल्म पत्रिका की शुरुआत विचित्र तरीके से हुई । sg,शुरू में प्रत्येक फिल्म के बारे में दो - चार पृष्‍ठों की एक पुस्तिका प्रकाशित की जाती थी । ,इसमें फिल्म के अभिनेता - अभिनेत्रियों के नामों के सहित फिल्म की कथा का सार और फिल्म के सभी गाने होते थे । sg,फिल्म संबंधी इस कौतूहल और भूख ने दिल्ली में फिल्म पत्रकारिता को जन्म दिया । ,चिकित्सा की सफलता शीघ्रातिशीघ्र चिकित्सा प्रारंभ करने पर निर्भर करती है । ,रोग का संदेह होते ही चिकित्सा आरंभ कर देना आवश्यक है । ,"अत्युग्र दशाओं में और विशेषकर जब रोग आरंभ हुए कुछ समय बीत चुका हो तो रोगी की जीवनरक्षा के लिए 80,000 मात्रक ( unit ) से लेकर दो लाख मात्रक तक प्रतिजीव विषयुक्त सीरम देना आवश्यक है ।" ,साधारण उग्र दशाओं में 16 से 32 हजार मात्रक पर्याप्त हैं । ,मृदु रोग में पाँच से लेकर 15 हजार मात्रक तक पर्याप्त है । ,उग्र दशाओं में कम से कम आधी मात्रा शिरा द्वारा देनी चाहिए तथा शेष को नितंब प्रान्त में अंतर्पेशी इंजेक्शन से देना चाहिए । ,प्रोकेन बेंज़ाइल पेनिसिलिन छह लाख मात्रक भी ( जिसमें एक लाख साधारण बेंज़ाइल पेनिसिलिन संमिलित हो ) पाँच दिन तक प्रतिदिन एक बार दिया जाए । ,रोग के जीवाणुओं पर इसकी घातक क्रिया होती है । ,ऐराइथोमाइसीन के भी संतोषजनक परिणाम हुए हैं । ,रोगमुक्ति के पश्चात् भी हृदय की रक्षा के लिए कम से कम तीन सप्ताह तक पूर्ण विश्राम आवश्यक है । ,उग्र रोग के पश्चात् रोगी तीन मास तक काम करने के योग्य नहीं रहता । sg,गले की बीमारी ( डिप्थीरिया ) से सुरक्षा के लिए बच्चों को डीपीटी का टीका लगवाएं । sg,विवरण के लिए शिशु असंक्रमीकरण की अनुसूची देखें । ,"किसी बच्चे को गले की बीमारी ( डिप्थीरिया ) की संभावना होने पर तत्काल डॉक्टर से परामर्श करें , क्योंकि इससे जीवनभर का खतरा होता है ।" ,यह बहुत आवश्यक है और सदा सफल होता है । sg,आजकल यह क्षमीकरण ( वैक्सीनेशन ) शैशवावस्था में ही प्रारंभ कर दिया जाता है । ,"10 से 12 मास की आयु में डिपथीरिया टॉक्साइड ( toxoid ) का प्रथम इंजेक्शन , 15 - 18 मास पर दूसरा , फिर स्कूल प्रवेश के समय अंतिम इंजेक्शन आठ या नौ वर्ष की आयु में दिया जाता है ।" ,इससे बालक में जीवन पर्यंत रोगक्षमता बनी रहती है । ,"सहिष्णुता की जाँच कर लेना बहुत आवश्यक होता है , जिन्हें सीरम के इंजेक्शन लग चुके हों उनमें यह जाँच करके इंजेक्शन दिए जाएँ ।" ,डिप्थीरिया प्रति सीरम ( antiserum ) के 10 में एक शक्ति के विलयन के 002 मिलीमीटर अधस्त्वक इंजेक्शन देने के आधे घंटे के पश्चात् तक यदि रोगी में कोई विशेष लक्षण नहीं होते तो 002 मिलीमीटर ( बिना घुले हुए ) सीरम का फिर इंजेक्शन दिया जाता है । ,इससे भी यदि लक्षण न उत्पन्न हो तो आधे घंटे बाद पूरी मात्रा दी जा सकती है । ,लक्षणों के प्रकट होने पर सीरम देने का विचार छोड़कर पेनिसिलिन तथा अन्य प्रतिजीव विषों द्वारा चिकित्सा करनी पड़ती है । ,दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उल्लेखनीय कलेक्शन नहीं कर सकीं । ,अतुल सभरवाल की फिल्म औरंगजेब की कहानी गुड़गांव की थी । ,हो सकता है इसी वजह से दिल्ली और उसके आसपास के दर्शकों ने इसे अधिक पसंद किया । ,उत्तर भारत के अन्य शहरों में भी इसे मुंबई और पश्चिम भारत की तुलना में अधिक दर्शक मिले । ,इन दिनों कामयाब फिल्मों के कलेक्शन का पैटर्न है कि शनिवार का कलेक्शन शुक्रवार से 20 से 50 प्रतिशत ज्यादा हो । ,यह गति रविवार को भी बनी रहे । ,औरंगजेब के कलेक्शन में शनिवार को कोई खास बढ़ोत्तरी नहीं हुई । ,रविवार को अवश्य कलेक्शन थोड़ा बढ़ा । ,"शुक्रवार को औरंगजेब ने 300 करोड़ का कलेक्शन किया , जो रविवार को 3 करोड़ के लगभग पहुंचा ।" ,औरंगजेब का वीकएंड कलेक्शन 13 करोड़ के लगभग रहा । ,यशराज फिल्म्स की औरंगजेब को उत्तर भारत के दर्शकों ने संभाल लिया । ,फिल्म गिप्पी थियेटर में दर्शक नहीं बटोर पाई । ,सोनम नैयर की फिल्म गिप्प्पी ओपनिंग डे पर सिर्फ 75 लाख रुपए का बिजनेस ही कर पाई । ,ट्रेड एक्सपर्ट राठी के मुताबिक गिप्पी धर्मा प्रोडक्शन की सबसे कम लागत वाली फिल्मों में से एक है और ये भले ही अच्छा बिजनेस नहीं कर पाई पर अपनी लागत तो निकाल ही लेगी । ,गौरतलब है रिलीज के दूसरे दिन इस फिल्म का कलेक्शन एक करोड़ तक पहुंचा । ,रविवार को भी इस फिल्म की कमाई में थोड़ी बढ़ोतरी हुई । ,रविवार को इस फिल्म ने करीब सवा करोड़ कमाए । ,इस तरह शुरुआती तीन दिनों में इस फिल्म ने लगभग तीन करोड़ का कारोबार कर लिया है । ,सैफ अली खान और कुणाल की जोंबी फिल्म गो गोवा गॉन ने अपने जबरदस्त प्रमोशन के चलते ओपनिंग वीकएंड में 12.5 करोड़ का आंकड़ा छू लिया । ,सैफ अली खान ने एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें जोंबी फिल्म पसंद नहीं आती और वो खुद नहीं जानते कि उन्होंने गो गोवा गॉन के लिए हामी क्यों भरी थी । ,पर कुछ भी हो सैफ अली खान की इस होम प्रोडक्शन ने बेहतरीन सफलता हासिल की । ,फिल्म ने पहले ही दिन 3.75 करोड़ रुपए का कमाई की । ,उसके बाद शनिवार का कलेक्शन करीब 4 करोड़ और रविवार का कलेक्शन 4.50 करोड़ रुपए रहा । ,ट्रेड एक्सपर्ट अक्षय राठी के अनुसार गो गोवा गॉन काफी मनोरंजक फिल्म है । ,पर इसकी अपील अगर छोटे शहरों में भी होती तो यह ज्यादा कमाई करती । ,संजय गुप्ता की फिल्म शूटआउट एट वडाला ने रिलीज के पहले दो दिन में लगभग 20 करोड़ रुपये की कमाई की है । ,संजय गुप्ता की इस मल्टी स्टार एक्शन फिल्म ने फ्राइडे को रिलीज होते ही 10.1 करोड़ रुपये की कमाई कर डाली । ,ट्रेड एनॉलिस्ट तरण आदर्श ने इस फिल्म की काफी तारीफ की हैं । ,फिल्म का रिव्यू काफी अच्छा है । ,फिल्म समीक्षकों के साथ दर्शकों ने भी इस फिल्म को बहुत पसंद किया है । ,जॉन अब्राहम के किरदार मान्या सुर्वे का रोल भी सबको खूब पसंद आ रहा है । ,देखना यह होगा कि फिल्म अपनी लागत रिकवर करने के बाद एक सुपरहिट साबित होती है या नहीं NULL । ,जॉनी ब्वॉय भी ये ही दुआ मांग रहे होंगे । ,फ्राइडे को रिलीज हुई फिल्म आशिकी 2 को बहुत अच्छा रिस्पांस मिला । ,इस फिल्म ने रिलीज के दिन ही करीब सात करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया था । ,नए कलाकारों की इस फिल्म को दर्शकों ने पसंद किया । ,"आदित्य रॉय कपूर और श्रद्धा कपूर जैसे नए कलाकारों के मुताबिक , इंडियन बॉक्स ऑफिस पर आशिकी 2 के कलेक्शन ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है ।" ,आशिकी 2 ने शनिवार को 6.75 करोड़ और रविवार को 7.50 करोड़ की कमाई की । ,कुल मिलाकर जहां आशिकी 2 का पहले सप्ताह का कलेक्शन तकरीबन 20.50 करोड़ रहा तो दूसरी तरफ रिलीज हुई हॉलीवुड फिल्म आयरन मैन 3 का कलेक्शन 29.10 करोड़ के आसपास रहा । ,"फिल्म नहीं चली तो आईपीएल का बहाना और चल गई तो अपनी पीठ थपथपाना , ऐसा होता है क्या ।" ,अगर किसी फिल्म के निर्माता - निर्देशक दूसरे दिन से ही दावा करने लगे कि उनकी फिल्म मुनाफे में आ चुकी है तो इसका साफ मतलब होता है कि वे कलेक्शन को लेकर आश्वस्त नहीं हैं । ,एक थी डायन के साथ ऐसा ही कुछ हो रहा है । ,फिल्म हिल चुकी है । ,एक थी डायन के प्रचार और एकता कपूर एवं विशाल भारद्वाज की मार्केटिंग और क्रिएटिव संगत से लग रहा था कि फिल्म को दर्शक हाथोंहाथ लेंगे । ,अब जाहिर है कोई भी युक्ति नहीं चली । ,एक थी डायन को पहले दिन लगभग 6 करोड़ का कलेक्शन मिला । ,फिल्म पसंद आती तो शनिवार और रविवार का कलेक्शन बढ़ता । ,एक थी डायन का वीकएंड कलेक्शन लगभग 17 करोड़ रहा । ,कुछ ट्रेड पंडित 15 और 18 करोड़ भी बता रहे हैं । ,बॉलीवुड में यह जरूरी नहीं है किसी फिल्म में अगर कोई बड़ा स्टार होगा तो ही फिल्म हिट रहेगी । ,डेविड धवन की फिल्म चश्मेबद्दूर में कोई बड़ा स्टार नहीं है फिर भी फिल्म ने रिलीज के दो दिन में ही 11.45 करोड़ की कमाई की है । ,ट्रेड ऐनलिस्ट तरन आदर्श ने ट्वीट किया कि फिल्म चश्मेबद्दूर ने भारत में जबरदस्त शुरुआत की है । ,नॉर्थ इंडिया और मुंबई में इस फिल्म को काफी अच्छा रिस्पांस मिला है । ,वायकॉम 18 मोशन पिक्चर्स द्वारा निर्मित चश्मेबद्दूर पर 17 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं । ,टैबलेट में लेथियम लिऑन 8000 एमएएच की बैटरी लगी हुई है । ,"इसके साथ ही इसमें गूगल प्ले स्टोर , गूगल मैप नेविगेशन , एचटीएमएल ब्रोश , एडोब फ्लैश , एडोब रीडर के साथ ही ई - बुक रीडर , फेसबुक , ट्विटर , यूट्यूब , एमएसएन मैसेंजर जैसे एप्लीकेशन प्री लोडेड हैं ।" ,साथ एंग्री बर्ड्स और फ्रूट निंजा जैसे गेम्स भी यह सपोर्ट करता है । ,पावरमैक्स ब्रांड नाम से स्मार्टफोन वर्ग में दस्तक देने के बाद सलोरा इंटरनेशनल ने ' प्रोटैब ' नाम से टैबलेट पीसी पेश किया है जो एआरएम कारटेक्स ए 9 1.2 गीगाहर्ट्ज के प्रोसेसर से लैस है । ,सलोरा इंटरनेशनल के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक गोपाल कुमार जीवारजका ने बताया कि प्रोटैब एचडी टैबलेट पीसी एंड्रायड जेलीबीन 4.1 प्लेटफार्म पर काम करता है और इसमें 7 इंच का एलसीडी टच स्क्रीन है । ,उन्होंने कहा कि यह उत्पाद दाम और आकषर्क खूबियों के साथ अग्रणी ब्रांड के टैबलेट को टक्कर देगा । ,जैसी कई वेबसाइट्स इसके लिए पहले से ही बुकिंग कर रही थीं । ,"ब्लैकबेरी इससे पहले नए ओएस पर चलने वाला फुल टचस्क्रीन स्मार्टफोन Z10 भारत में 43,490 रुपए की कीमत पर लॉन्च कर चुकी है ।" ,कंपनी ने हाल ही में Z10 और कर्व 9220 के लिए ऐंई स्कीम शुरू की हैं । ,"भारत में टैबलेट पीसी का बाजार जनवरी - मार्च , 2013 में सालाना आधार पर ढाई गुना हो गया और इस दौरान 9 लाख से अधिक टैबलेट पीसी की बिक्री दर्ज की गई ।" ,"इस दौरान , रोजाना औसतन 10,000 टैबलेट पीसी बिके ।" ,"साइबरमीडिया रिसर्च की स्टडी के मुताबिक , बीते साल की इसी तिमाही में देसी - विदेशी कंपनियों ने कुल मिलाकर करीब 3.49 लाख टैबलेट पीसी बेचे थे ।" ,"हालांकि , अक्टूबर - दिसंबर , 2012 के मुकाबले इस तिमाही में टैबलेट पीसी की बिक्री में 17.57 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई ।" ,बीते साल की अंतिम तिमाही में करीब 11 लाख टैबलेट पीसी बिके थे । ,कार्बन ने 5 इंच डिस्प्ले वाला नया एंड्राइड 4.0 फैबलेट ए 25 लांच किया है । ,5 इंच की 480ध्800 पिक्सल की रिजोल्यूशन स्क्रीन वाला यह फैबलेट खूबियों से भरपूर है । ,इस फैबलेट में 5 मैगापिक्सल का रियर कैमरा एलईडी फ्लैश के साथ NULL । ,इस फैबलेट में 2000 एमएएच की पावरफुल बैटरी लगी हुई है । ,इस फैबलेट को मात्र 6590 में ऑनलाइन खरीद सकते हैं । ,"32 जीबी की रैम वाला यह फैबलेट 512 एमबी के इंटरनल स्टोरेज के साथ है , जिसे आप 32 जीबी तक बढ़ा सकते हैं ।" ,कार्बन ए 25 ड्यूल सिम फैबले जीएसएम और सिम दोनों को सपोर्ट करता है । ,यह एंड्राइड 4.0 ( आइसक्रीम सैंडविच ) पर रन करता है । ,"इसमें कनेक्टिविटी के लिए 2 जी , वाईफाई और ब्लूटूथ 3.0 NULL ।" ,सैमसंग ने भारत में टैबलेट्स में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए अपना नया टैबलेट गैलेक्सी नोट 510 लांच कर दिया है । ,सैमसंग गैलेक्सी नोट 510 एंड्रायड जैली बीन पर आधारित है । ,2 जीबी रैम के साथ इसमें 1.6 गीगाहर्ट्ज क्वाड कोर प्रोसेसर है । ,16 जीबी मैमोरी वाले इस टैबलेट में माइक्रो कार्ड एसडी से 64 जीबी तक मेमोरी बढ़ाई जा सकती है । ,इस टैबलेट की कीमत 43500 रुपए से शुरू होगी । ,9.2 मिलीमीटर पतला यह टैबलेट विंडो 8 पर रन करता है । ,"630 ग्राम वजन वाले इस टैबलेट में एक एडिशनल बैटरी भी है , जो अधिक समय तक इसे चार्ज रखेगी ।" ,यह टैबलेट बैटरी से आठ घंटे रन करेगा और एशिनल बैटरी से यह 19 घंटे तक चलेगा । ,टैबलेट में 10.1 इंच की डाइगोनल स्क्रीन है और ई - प्रिंटिंग की खूबी भी है एचपी के इस टैबलेट में । ,वैकल्पिक स्मार्ट जैकेट जो कनेक्टिविटी को आसान बनाता है । ,जापान की दिग्गज कंपनी ने मोबाइल वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस में अल्ट्रा स्लिम एंड्राइड टैबलेट एक्सपीरिया जेड लांच किया है । ,इस वॉटरप्रूफ टैबलेट की स्क्रीन 10.1 इंच की फुल एचडी है । ,इसकी खूबियां : ,495 ग्राम वजन वाला यह टैबलेट गूगल एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम पर रन करता है । ,इसकी मोटाई सिर्फ 6.99 मिलीमीटर है । ,इसका पिक्सेल डायमेंशन 1920 द् 1200 है । ,1.5 गीगा - हर्ट्ज्Zअ क्वाड - कोर स्नैप ड्रैगन श्4 प्रोसेसर से लैस है यह सोनी का टैबलेट । ,साथ ही 2 जीबी की रैम भी है । ,"इस टैबलेट में रियर कैमरा 8 जीबी का है , जबकि फ्रंट कैमरा 2 जीबी का है ।" ,"बैटरी भी 6000 एमएएच की है , जो पॉवरफुल है ।" ,कीमत : ,"16 जीबी वर्जन की कीमत 27000 रुपए है , जबकि 32 जीबी वर्जन की कीमत 32500 रुपए है ।" ,साउथ कोरियाई कंपनी सेमसंग ने गैलेक्सी नोट 8 लांच किया है । ,गैलेक्सी नोट 8 एपल के आईपैड मिनी से टक्कर लेते हुए लांच किया है । ,गैलेक्सी नोट 8.0 गूगल एंड्राइड सॉफ्टवेयर पर रन करता है इसकी खासियत यह है कि इसमें यूजर्स एक साथ कई एप्लिकेशन्स साथ चला सकते हैं । ,"इंटरनेट सर्च कंपनी गूगल ने एक ऐसा करामाती चश्मा बनाया है , जिसका इस्तेमाल एक स्मार्ट फोन की तरह किया जा सकता है ।" ,स्मार्ट ग्लास नाम के इस चश्मे का इस्तेमाल फोटो खींचने और वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए किया जा सकता है । ,"इतना ही नहीं NULL , इस चश्मे से आप ई - मेल भेज सकते हैं और सोशल नेटवर्किंग के लिए भी इस चश्मे का उपयोग किया जा सकता है ।" ,चश्मे में और भी कई खूबियां हैं ,गूगल का चश्मा अपने पहनने वाले के नज़रिए से दुनिया की तस्वीरें खींचेगा और तकनीक के ज़रिए उसे दुनिया भर से जोड़ेगा । sg,जहाँगीर और शाहजहाँ के शासनकाल में आगरा नगर चारदीवारी से घिरा था जिसमें 16 प्रवेशद्वार थे । ,1803 में आगरा ईस्ट इंडिया कंपनी के कब्जे में आ गया । ,उत्तर भारत में ब्रिटिश शासन का विस्तार होने पर आगरा को उत्तर - पश्चिम सूबों की राजधानी बना दिया गया । ,यों तो आगरे का क्रमबद्ध इतिहास लोदी काल से ही शुरू होता है पर इस के वर्तमान रूप को सजाने सँवारने का श्रेय मुगलों को जाता है । ,आगरा के दर्शनीय स्थलों में ताजमहल सबसे अधिक लोकप्रिय है । ,यमुना तट पर सफेद संगमरमर से बनी यह इमारत शाहजहाँ और उसकी बेगम मुमताज के प्यार की यादगार है । ,ताजमहल इमारत 1653 में बनकर तैयार हुई थी । ,ताजमहल के निर्माण में लगभग 22 वर्ष का समय लगा था । ,ताजमहल के प्रवेशद्वार पर कुरान की आयतें उत्कीर्ण हैं और ऊपर की ओर कई छोटेछोटे गुंबद बने हैं । sg,ताजमहल की रूपरेखा ईरान के वास्तुविद उस्ताद ईसा ने बनाई थी । ,ताजमहल की अद्वितीय नक्काशी देखने लायक है । ,महल में बनी छतरियों पर कीमती पत्थर और रत्न जड़े थे । ,"ताजमहल के चारों तरफ लाल पत्थरों की ऊँची चारदीवारी है जिसमें पूर्व , पश्चिम और दक्षिण दिशा में खुलने वाले 3 दरवाजे हैं ।" ,ताजमहल का मुख्यद्वार दक्षिणी दरवाजा है । ,ताजमहल की मुख्य इमारत एक विशाल चबूतरे पर बनी है जिसके चारों कोनों पर 4 विशाल मीनारें हैं । ,इन मीनारों के बीच में ही शाहजहाँ और मुमताज का मकबरा स्थित है जहाँ उन्हें दफनाया गया था । ,शाहजहाँ और मुमताज के मकबरों पर कलात्मक ढंग से पच्चीकारी की गई है । pl,शाहजहाँ और मुमताज के मकबरे चारों तरफ से महीन जालियों से घिरे हैं । ,ताजमहल के मुख्यद्वार और केन्द्रीय इमारत के बीच ईरानी डिजाइन का एक भव्य फौआरेदार बगीचा है जहाँ पर्यटकों को एक अलग ही सुकून मिलता है । ,"ताजमहल बनाने के लिए श्रमिक तक जहाँ रहते थे , वह स्थान एक छोटे से कसबे ’ ताजगंज ’ के नाम से जाना जाता है ।" sg,अकबर ने यमुना नदी के किनारे पर लाल किले का निर्माण शुरू करवाया जो लगभग 8 साल में बनकर तैयार हुआ । ,लालकिला आगरा की दूसरी महत्वपूर्ण इमारत है । ,लालकिले के ज्यादातर भवनों का निर्माण अकबर के बाद शाहजहाँ और औरंगजेब के शासनकाल में हुआ था । ,लाल किले के निर्माण में अधिकतर लाल पत्थर का इस्तेमाल हुआ । ,किले के बाहरी दरवाजे पर एक घुड़सवार की प्रतिमा है जो राजपूत सरकार अमरसिंह राठौर की उस बहादुरी की याद दिलाती है जब यह किले की ऊँची दीवार से अपने घोड़े सहित कूदा था । ,"किले के अन्दर की भव्य इमारतें हैं जिनमें शीशमहल , जहाँगीर महल , दीवाने आम , दीवाने खास , रंगमहल नूरजहाँ महल आदि खासतौर से देखने लायक हैं ।" ,पर्यटकों के लिए यह किला सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है । ,लाल किला ताजमहल से तीन किलोमीटर की दूरी पर है । sg,किले में बने सम्मान बुर्ज से ताजमहल का नजारा देखा जा सकता है । ,शाहजहाँ ने इसी किले में अपने जीवन के आखिरी दिन बिताए । ,सिकंदरा sg,भव्य इमारत का निर्माण सम्राट अकबर ने शुरू करवाया था जिसे 1613 में उसके बेटे जहाँगीर ने पूर्णता प्रदान की । ,"सिकंदरा में अकबर की कब्र है , जिसके लिए सीढ़ियों से होकर नीचे जाना पड़ता है ।" ,सिकंदरा इमारत लाल पत्थर तथा संगमरमर की बनी है । ,सिकंदरा हिंदू - मुस्लिम स्थापत्य कला का अद्भुत संगम है । ,"सिकंदरा शहर से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जहाँ रिक्शा , ऑटो , टैक्सी आदि वाहनों से पहुँचा जा सकता है ।" ,"चीनी का राजा , फारसी वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना है ।" sg,चीनी का राजा आयताकार मकबरे का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहाँ ने अपने दीवान तत्कालीन विद्वान और कवि शकुल्लाह की याद में करवाया था । ,पर्यटक चीनी का राजा मकबरे को देखने जरूर आते हैं । ,एतमादुद्दौला का मकबरा भी आगरा में ही स्थित है । ,सफेद संगमरमर से बनी यह भव्य इमारत फारसी स्थापत्य कला का शानदार नमूना है जिसे बेगम नूरजहाँ ने अपने पिता गयासुद्दीन बेग की याद में बनवाया था । sg,यहीं पर नूरजहाँ की माँ भी दफनाई गई थीं । ,ताजमहल से पहले बनी यह इमारत ताजमहल बनाने की प्रेरणा भी रही थी । ,इमारत के चारों ओर उद्यान हैं और इसकी जालीदार खिड़कियाँ इसे अलग ही खूबसूरती प्रदान करती हैं । ,जामा मस्जिद का निर्माण शाहजहाँ की अविवाहित बेटी जहाँआरा ने करवाया था । ,जामा मस्जिद आगरा के किनारी बाजार जाने वाले रास्ते पर स्थित है । ,सेंट पीटर्स चर्च ऊँची मीनारों वाला चर्च है । pl,सेंट पीटर्स चर्च की मीनारों को आगरा के किसी भी भाग से देखा जा सकता है । ,भव्य सेंट पीटर्स चर्च के बगल में ही अकबर द्वारा बनवाया गया ऐतिहासिक अकबरी चर्च भी है जिसको देखने का पर्यटकों में काफी उत्साह रहता है । ,आगरा से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण फतेहपुर सीकरी का निर्माण मुगल बादशाह अकबर ने करवाया था । ,अकबर का यह वह सपना है जिसे उसने अपने शासन के चरम काल में देखा था । ,दिल्ली में विश्‍व व्यापार को लेकर जी - 4 देशों की वार्ता शुरू हो गयी है । ,एक बार फिर अमीर और गरीब देशों के बीच आर्थिक रस्साकशी शुरू हो रही है । ,विकसित और विकासशील देशों के बीच कृषि क्षेत्र को दी जाने वाली रियायतों के मुद्दे पर मतभेद हैं । ,"जहां विकासशील देश चाहते हैं कि विकसित देश अपने किसानों को दी जा रही फार्म सब्सिडी घटाएं , ताकि विकासशील देशों के उत्पाद पश्‍चिमी देशों के बाजारों में बिक सकें , वहीं विकसित देश चाहते हैं कि उन्हें विकासशील देशों का अधिक से अधिक बाजार मिल सके ।" ,"वर्ष 2003 में कानकुन में हुए विश्‍व व्यापार सम्मेलन के दौरान भारत के तत्कालीन वाणिज्य मंत्री अरुण जेटली ने अपनी बुलंद आवाज में घोषणा की थी कि वह तब तक किसी समझौते के लिए तैयार नहीं होंगे , जब तक अमीर देशों को मिलने वाली फार्म सब्सिडी बरकरार रहेगी ।" ,पर वार्ता के अंतिम चरण ( जो अफ्रीकी देशों के बहिष्कार के कारण अंततः विफल रहा था ) तक पहुंचते - पहुंचते भारत ने कई अनुचित समझौतों के सामने घुटने टेक दिए थे । ,कमलनाथ भी अपने पूर्ववर्ती के ही नक्शेकदम पर चल रहे हैं । ,"जल्दबाजी में समाप्‍त किये गये जुलाई फ्रेमवर्क 2004 के बाद , जिसमें अमीर देशों को अपना कृषि सहयोग बढ़ाने की अनुमति दे दी गयी थी , कमलनाथ समझौते पर दोबारा विचार करने के खिलाफ थे , क्योंकि उसमें सिर्फ विकसित देशों के विकास के मुद्दों का उल्लेख था ।" ,"हांगकांग में 2005 में आयोजित मंत्री स्तर के सम्मेलन के ठीक पहले कमलनाथ ने मीडिया के समक्ष जोर - शोर से घोषणा की थी कि अमेरिका ने जो प्रस्ताव रखा है , उससे कृषि सब्सिडी में कोई वास्तविक कटौती नहीं होगी ।" ,"असली कटौती तभी मानी जायेगी , जब अमेरिका को सरकारी खजाने से मिलने वाली राशि में कमी होगी ।" ,"टिकाऊ कृषि विकास के लिए छोटे किसानों की बहुत जरुरत है , बल्कि यह कहा जा सकता है कि छोटे किसानों के बिना देर तक टिका रहने वाला , पर्यावरण की दृष्‍टि से सुरक्षित स्थाई विकास संभव ही नहीं है ।" ,"मशीनों की मदद से की गयी बड़े फार्मों की खेती अल्पकाल में अधिक उपज देने में तो सक्षम है , पर वह मिट्टी का उपजाऊपन बनाये रखने में अक्षम है ।" ,मानव सभ्यता में कृषि का विकास मूलतः छोटे किसान ने ही किया । sg,वे पीढ़ी दर पीढ़ी किसी भूमि को तीन - चार हजार साल तक इस तरह जोतते रहे कि मिट्टी का प्राकृतिक उपजाऊपन बना रहे । ,यह बहुत महत्त्वपूर्ण है कि किसान संगठनों में छोटे किसान को मजबूततम भूमिका मिले व यदि ऐसा ना हो रहा हो तो छोटे किसान नये किसान संगठन भी आरंभ कर सकते हैं । ,"विभिन्न देशों में ऐसे छोटे किसानों के संगठनों में आपसी तालमेल होना चाहिए ताकि वे मिलकर विश्‍व स्तर की अनुचित कृषि , खाद्य व व्यापार नीतियों व नियम - कानूनों के विरुद्ध भी अपनी आवाज बुलंद कर सकें ।" ,यह दुखद है कि अब तक पूंजीवादी और साम्यवादी दोनों तरह की व्यवस्थाएं छोटे किसानों से अन्याय करती रहीं हैं । ,ऊतक संवर्धन प्रयोगशाला में पौधों का पूर्ण नियंत्रित वातावरण में संवर्धन किया जाता है । ,इस प्रयोगशाला के निर्माण के पहले यह सुनिश्‍चित करें कि व्यावसायिक तथा शोध प्रयोगशाला का आकार प्रकार कैसा हो । ,साथ - ही यह भी सुनिश्‍चित करें कि इस प्रयोगशाला से कितने पौधे तैयार किये जाते हैं । ,सामान्यतः शोध एवं व्यावसायिक प्रयोगशाला एक समान ही होती है । ,साथ - ही प्रयोगशाला में प्रयोग होने वाले यंत्रों / उपकरणों की आवश्यकता सभी पौधों के संवर्धन में एक समान होती है । ,"साधारणतः प्रयोगशाला की स्थापना के लिए ऐसे स्थान का चयन करें जहां तापमान में उतार - चढ़ाव कम होता हो तथा गर्मी , बरसात तथा शीत ऋतु में न अधिक ठंड एवं न अधिक गर्मी पड़ती हो ।" ,ऐसी स्थिति में पहाड़ी या तराई क्षेत्र उपयुक्‍त होते हैं । ,साथ - ही बिजली की व्यवस्था का भी प्रमुखता से ध्यान रखें । sg,"जहां पर बिजली पर्याप्‍त मात्रा में उपलब्ध एवं सस्ती हो , उस स्थान के चयन को प्राथमिकता दें ।" ,ऊतक संवर्धन कक्ष प्रयोगशाला का प्रमुख भाग होता है । ,इस भाग का आकार - प्रकार पौधे की मात्रा के संवर्धन पर निर्भर करता है । ,साधारण संवर्धन कक्ष के फर्श व दीवारों पर टाइल्स होनी चाहिए । ,इस भाग में लैमिनारफ्लो तथा पोषक माध्यम एवं संवर्धित माध्यम को संवर्धन कक्ष में ले जाने की व्यवस्था होनी चाहिए । ,"इस भाग में दो एयर कंडिशनर की व्यवस्था हो , जिससे कि कक्ष के तापमान को एक समान ( 25 + / - 2 से ) बना कर रखा जा सके ।" ,साथ - ही कक्ष की छत पर दो अल्ट्रावाइलेट ट्‍यूब लाइट की व्यवस्था होनी चाहिए । ,सामान्यतः पोषक माध्यम कक्ष प्रयोगशाला के मध्य भाग में बनाया जाता है । ,"यह भाग ऊतक संवर्धन कक्ष तथा संवर्धन कक्ष से बड़ा बनाना चाहिए , जिससे संवर्धन माध्यम को बनाने में पर्याप्‍त जगह मिल सके ।" ,कक्ष के बीच में लकड़ी ग्रेनाइट टॉप लगी मेज हो जिस पर संवर्धन माध्यम बनाने का कार्य सावधानीपूर्वक किया जा सके । ,कक्ष की दीवारों पर अल्मारियों की व्यवस्था रखें ताकि इन पर रसायन आदि रखा जा सके । ,पीएच. मीटर : ,पोषक माध्यम की क्षारीय तथा अम्लीय व्यवस्था को मापकर एक निश्‍चित पीएच. पर लाया जा सके । ,रेफ्रिजरेटर : ,संवर्धन माध्यम तैयार करने में सहायक ताप संवेदी रसायन एवं वृद्धि हार्मोन को सुरक्षित रखने के लिए उपयोग किया जाता है । ,आवश्यकतानुसार दो रेफ्रिजेरेटर का उपयोग करें । ,इलेक्ट्रॉनिक बैलेंस : ,इस तोलक का उपयोग प्रमुख रूप से ऐसे रसायनों को तोलने में किया जाता है जो अति सूक्ष्म मात्रा में प्रयोग किए जाते हों । ,व्यावसायिक प्रयोगशाला में इस कक्ष का उपयोग प्रमुख रूप से किया जाता है । ,यह कक्ष प्रयोगशाला भवन के पोषक माध्यम तैयारी कक्ष से मिलाते हुए प्रयोगशाला के अन्तिम हिस्से में बनाया जाना चाहिए । ,इस कक्ष के प्रत्येक भाग को जीवाणुरहित रखने के लिए कक्ष की दीवारों व फर्श में टाइल / पत्थर लगाए जाने चाहिए । ,इस कक्ष के भाग का आकार उपरोक्‍त बनाए गए तीनों कक्षों से छोटा रखा जाना चाहिए । ,इस कक्ष की छत पर दो अल्ट्रावाइलेट 3 फुट वाली ट्‍यूब लाईटें होनी चाहिए । ,आवश्यकतानुसार मध्यम प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए । ,इस कक्ष में दो एयरकंडीशनर होने चाहिए जो आवश्यकतानुसार हर 15 घंटे बाद स्वचालित यंत्र द्वारा कार्यरत होने चाहिए । sg,"करीब 3,000 हज़ार वर्ष पहले राजा बहुलोचन ने सबसे पहले बाहू गढ़ बनवाया था ।" ,मौजूदा किले को हाल ही में डोगरा राजाओं ने सुधार करके फिर से बनाया हुआ है । ,बाहू गढ़ किले के भीतर एक काली मंदिर भी है । ,जम्मू से पाँच किलोमीटर दूर बाहू गढ़ के चारों तरफ फैले बाग - ए - बाहू विशाल बगीचे से शहर का सुंदर दृश्य दिखता है । ,बाग - ए - बाहू सुबह आठ बजे से शाम आठ बजे तक खुला रहता है । ,बाहू गढ़ के पीछे बाइपास रोड पर तवी नदी के किनारे शहर का प्राचीन महामाया मंदिर है जिसके चारों तरफ सिटी फॉरेस्ट है । ,पेड़ों की कतारों से घिरे यहाँ के छोटे से बगीचे से शहर का मनमोहक लुभावना दृश्य दिखता है । ,मुबारक मंडी पैलेस महल परिसर में सबसे प्राचीन इमारत 1824 की है । ,"मुबारक मंडी पैलेस की वास्तुकला पर राजस्थानी , मुगल और बरोक यूरोपीय शैली का प्रभाव है ।" ,मुबारक मंडी पैलेस का शीश महल देखकर तो आप चौंक ही जाएँगे । sg,"पिंक हॉल में अब डोगरा कला संग्रहालय बनाया गया है , जिसमें विभिन्न पहाड़ी शैलियों के आधार पर कई तरह की छोटी - छोटी पेंटिंग सुरक्षित रखी गई हैं ।" ,"जम्मू से 50 किलोमीटर दूर छोटा सा कटरा शहर , त्रिकूट पर्वत में वैष्ण देवी मंदिर के दर्शनार्थ जाने वाले यात्रियों का आधार शिविर है ।" ,कटरा से मंदिर तक 12 किलोमीटर का सफर पैदल जाना होता है । ,हर वर्ष वैष्ण देवी जाने वाले करीब 40 लाख यात्री कटरा से होकर ही गुजरते हैं । ,"कटरा में ठहरने के लिए टूरिस्ट बंगले , यात्रिका , अनेक निजी होटल और तीर्थयात्रियों की सुविधाओं के लिए सराय भी उपलब्ध हैं ।" ,"जम्मू से 103 किलोमीटर दूर कुड मशहूर पर्यटन स्थल समुद्र तल से 1,738 मीटर की ऊँचाई पर जम्मू - श्रीनगर हाईवे पर स्थित है ।" ,ठहरने के लिए जे एंड के टीडीसी के टूरिस्ट बंगलों के अलावा यहाँ पर अनेक निजी होटल भी हैं । ,"2,024 मीटर की ऊँचाई पर पटनीटॉप एक सुंदर पठार पर बसा है ।" ,पटनीटॉप खूबसूरत पर्यटन स्थल जम्मू से 110 किलोमीटर दूर है । ,"जम्मू - श्रीनगर हाईवे , इसके बीच से गुजरता है ।" ,घने जंगल से घिरे पटनीटॉप के पिकनिक स्थल और नज़ारे वास्तव में शानदार हैं यहाँ पर घूमने से मन में एक प्रकार की शान्ति मिलती है । ,चिनाब नदी के थाले में इन पहाड़ों की छटा देखते ही बनती है । pl,सर्दियों में बर्फ की मोटी परत के कारण स्की जैसे अनेक बर्फ के खेल यहाँ खेले जाते हैं । ,पटनीटॉप आने वाले यात्रियों और पर्यटकों के लिए कई टूरिस्ट हट हैं । ,इन सबका प्रबंधन जे एंड के टीडीसी यानी जम्मू - कश्मीर पर्यटन विकास निगम करता है । ,पटनीटॉप में अनेक निजी होटल भी हैं । sg,"जम्मू से 129 और पटनीटॉप से सिर्फ 19 किलोमीटर दूर सनासर , सैलानियों के लिए शान्त वातावरण उपलब्ध कराता है ।" ,कप के आकार के घास के मैदान हैं और जिसके चारों तरफ चीड़ के विशाल पेड़ हैं । ,अब सनासर में गोल्फ कोर्स बना दिया गया है और पैराग्लाइडिंग की सुविधा भी है । ,"ठहरने के लिए जे एंड के टीडीसी के हट , टूरिस्ट बंगले और डॉरमीट्री उपलब्ध हैं ।" ,"जम्मू से 125 किलोमीटर की दूरी पर जम्मू - श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर समुद्र तल से 1,560 मीटर की ऊँचाई पर बटोट पर्यटन स्थल पटनीटॉप के जंगली ढलान पर चिनाब के शानदार गौर्ज के सामने है ।" ,"बटोट में भी जम्मू - कश्मीर पर्यटन विकास निगम जे एंड के टीडीसी के टूरिस्ट बंगले , हट और डॉरमीट्री हैं जहाँ हर वर्ग के लोग ठहर सकते हैं ।" ,"पर्यटन ज्ञान , रोमांच और मनोरंजन का बेहतरीन माध्यम है ।" pl,लो टाइड के दौरान समुद्री जीव - जंतुओं को पायरटन द्वीपों में देखा जा सकता है जो अपने आप में दुर्लभ हैं । ,गुजरात के जामनगर से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ऐसे 42 द्वीपों का समूह है जो विभिन्न प्रकार के देशी और विदेशी पक्षियों की शरणस्थली है । ,वायु शीफ ( मैनग्रोव ) से आच्छादित पायरटन द्वीप न सिर्फ इन पक्षियों के लिए आदर्श प्रजननस्थली है बल्कि विविध प्रकार के समुद्री जीवों के लिए जीवन का स्रोत भी है । ,पायरटन द्वीप में समुद्री जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखना एक अनोखा अनुभव है । pl,जल में जीवन के इन्हीं विभिन्न रंगों को संजोये रखने के लिए भारत सरकार ने 1980 में इन द्वीपों को संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया । ,दो साल के बाद इन द्वीपों को देश का प्रथम नेशनल मरीन पार्क होने का गौरव प्राप्त हुआ । ,पायरटन द्वीप की दलदली सतह पर वायु शीफ ( मैनग्रोव ) की बहुतायत है । ,मैनग्रोव की जड़ें सतह से कुछ ऊँचाई पर स्थित होती हैं ताकि ये हवा से ऑक्सीजन की आवश्यक मात्रा प्राप्त कर सकें । ,मैनग्रोव की जड़ों में पानी में रहने वाले कई छोटे जीवों की उत्पत्ति होती है । ,मैनग्रोव के पत्ते पानी में रहने वाले कई छोटे जीवों का मुख्य आहार हैं । ,आसमान की ऊँचाइयों में उड़ने वाले पक्षी भी अपने भोजन के लिए इन्हीं मैनग्रोव के जंगलों पर निर्भर रहते हैं । ,यही वजह है कि समुद्र में स्थित इन चारागाहों को जीवन का स्रोत भी कहा जाता है । ,"समुद्री जीवन के इस असाधारण दुनिया का नजारा बनने के लिए सबसे पहले जामनगर स्थित नेशनल मरीन पार्क के कार्यालय की अनुमति लेनी पड़ती है , NULL फिर शुरू होता है एक सफर जो समुद्री जीवन के कई रहस्यों को उजागर करता है ।" ,बेदी पोर्ट पर पहुँचते ही हमारी नजर पक्षियों के एक बड़े से समूह पर पड़ी और पानी की सतह पर उछल - कूद करती डॉलफिन भी दिख गई । sg,हमने अपनी यात्रा बेदी पोर्ट से आरंभ की । ,बंदरगाह पहुँचते ही हमारी नजर पक्षियों के एक बड़े से समूह पर पड़ी जो तट को छूते हुए पल भर में आँखों से ओझल हो गये । ,अभी हमने कुछ मिनटों का सफर भी तय नहीं किया था कि किस्मत ने हमारा साथ दिया और पानी की सतह पर उछल - कूद करती डॉलफिन दिख गई । ,जल में क्रीड़ा करते इन डॉलफिनों को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वे हमारा इस द्वीप में आने का स्वागत कर रही हों । ,वर्तमान परिप्रेक्ष्य में विस्तृत क्षेत्रों का वायु फोटोग्राफी के द्वारा सर्वेक्षण किया जा सकता है । ,व्यावहारिक कार्यों के लिए भूमि सर्वेक्षण के महत्त्व पर अब कोई भी उंगली नहीं उठाता है । ,भौतिक नियोजन में इसके अनुप्रयोग के कई उदाहरण हैं । ,आंग्ला - पोलिश भौगोलिक अध्ययन गोष्‍ठी ( Anglo - Polish Geographical Seminar ) के कार्यविवरण से एक रोचक ग्रंथ तैयार हुआ है । ,इसमें एक नियोजित अर्थव्यवस्था में भूमि उपयोग मानचित्रण के विकास व उद्देश्यों को ब्रिटिश सर्वेक्षण से संभावित अपेक्षा की गई है । ,"इसका अति सामान्य वैज्ञानिक उद्देश्य उन विधियों का अध्ययन करना है , जिनके द्वारा मानवीय व्यवस्था प्राकृतिक पर्यावरण का प्रयोग करती है ।" ,अनिवार्यतः यह एक भौगोलिक अध्ययन है जिसे भूमि उपयोग सर्वेक्षण द्वारा ही पूरा किया जा सकता है । sg,यह सर्वेक्षण भौगोलिक परिवेश का अधिक विवेकशील प्रयोग करने के लिए आधार प्रस्तुत करता है । ,यह इसका एक महान व्यावहारिक महत्त्व है । ,कृषि भूगोल अभी भी विकास की अवस्था में है । ,इसमें कुछ वर्ष पूर्व वनस्पति विज्ञान अथवा वस्तुतः पादप - समाजविज्ञान ( Phytosocilogy ) भी शामिल थे । ,इस प्रकार पोलिश सर्वेक्षण भूमि उपयोग सर्वेक्षण के उद्देश्य व क्षेत्र को प्रमुखता से देखता है । sg,वह भूमि आवरण तथा भूमि उपयोग शब्दों का ( जिन अर्थों में यहाँ उपयोग किया गया है ) अर्थ स्पष्‍ट करता है । pl,वह पृष्‍ठभूमि के आंकड़े यथानुसार फार्मों की आकृतियों को भी स्पष्‍ट करता है । pl,साधारणतया इस प्रकार के आंकड़े भिन्न मानचित्रों द्वारा प्रस्तुत किये जाते हैं । ,इनका शीशे के आवरणों की भांति होना आवश्यक है । ,"अंतर्सम्बन्धों को सुविधापूर्वक समझाने के लिए भौतिक दशाओं , परिवहन क्षमता व परिव्यय के ऐसे ही ढकनों के साथ इनका प्रयोग किया जाना चाहिए ।" ,"आधारभूत भूमि उपयोग मानचित्रों पर ऐसे विवरणों का प्रस्तुत किया जाना पोलैण्ड के मानचित्रों का पूर्वनिर्धारित प्रयोजन रहा है , जिससे कि व्यावहारिक नियोजन में सहायता हो सके ।" ,भूमि उपयोग मानचित्रों में प्रस्तुत की गई वस्तु का वास्तविक चित्रण से जोड़ने पर बल देना आवश्यक है । ,चूंकि भूमि उपयोग मानचित्र किसी समय के भूमि उपयोग का लेखा करते हैं वस्तुतः वे भू - दृश्यों का सामान्य चित्र खींचने के अलावा और कुछ नहीं कर सकते हैं । ,"चूंकि एक खेत में एक वर्ष घास उगाई जाती है तो दूसरे वर्ष उसमें खाद्यान्न फसलें उगाई जा सकती हैं , इसलिए प्रकाशित होने के पहले ही वह मानचित्र असामयिक हो जाता है ।" ,इस प्रकार के मानचित्रों को न समझने के कारण ही भूमि उपयोग की यह असफलता सामने आती है । ,इस तकनीक की इस आधार पर आलोचना की जाती है । ,किसी एक कृष्ण में फसलों का हेर - फेर होना सस्यावर्तन को अभिव्यक्‍त करता है तथा अन्य खेतों में तदनुसार होने वाले बदलावों के कारण यह हेरफेर इस अभाव को पूरा कर देती है । sg,ग्रेट ब्रिटेन सरीखे तेज प्राविधिक परिवर्तन वाले देशों में प्रतिरूपों की स्थिरता को भिन्न - भिन्न तिथियों के मानचित्रों की तुलना द्वारा स्पष्‍ट किया जा सकता है । sg,इस प्रकार एक भूमि उपयोग मानचित्र को अनेक वर्षों तक एक प्रामाणिक दस्तावेज माना जा सकता है । ,इसकी प्रामाणिकता का समय प्रकृति तथा परिवर्तन की दर पर निर्भर होता है । ,वस्तुगत अभिलेखन खूबी का यह आशय है कि भूमि उपयोग मानचित्र पर ऐसा कोई संकेत नहीं होता है जो यह सिद्ध करे कि भूमि का उपयोग उसकी उत्तमता के अनुकूल है अथवा नहीं । ,"कुछ विशिष्‍ट प्रकरण इसके अपवाद हो सकते हैं , जैसे कि उच्चावचन सम्बन्ध ।" sg,स्काटलैण्ड की उच्च भूमियों में पर्वतों पर अजोतभूमि व ऊबड़ - खाबड़ चरागाह को दिखाने हेतु पीले रंग का उपयोग करना इस बात को व्यक्‍त करता है कि 3000 फुट की ऊँचाई पर संतोषप्रद भूमि का उपयोग पाया जाता है । ,मृदा की उत्पादकता में मृदा एकमात्र भौतिक घटक नहीं है । ,भूमि के साधनों का अनुमान लगाने के लिए भूमि संभाव्यता के वर्गीकरण की अनेक योजनाएँ विकसित हुई हैं । ,भूमि संभाव्यत को वर्गीकृत करने का उद्देश्य यह है कि परीक्षित भूमि के हर भू - भाग की उत्पादकता या उत्पादकता की संभाव्यता को प्रस्थापित किया जाए । ,इस तरह के विभाजन का प्रयोग एक तरफ यह निर्धारित करने के लिए हो सकता है कि उस विशिष्‍ट भू - भाग को जो कम सघन चरागाह के लिए उपयोग में लाया गया है उसका उपयोग पुनर्वनरोपण योजनाओं में हो अथवा सुधरी हुई खेती में या फिर उसे अविकसित ही छोड़ दिया जाए । ,दूसरी ओर पथ - प्रदर्शक के रूप में वह यह स्पष्‍ट कर सकता है कि उसी भू - भाग को क्या वर्तमान उपयोग के लिए संरक्षित कर दिया जाए अथवा वहाँ भवन निर्माण की अनुमति प्रदान कर दी जाए । ,यह पुनर्वनरोपण कृषि विकास अथवा वृक्ष या सस्य की एक जाति हेतु तैयार किया जाता है । ,संयुक्‍त राज्य मृदा संरक्षण सेवा द्वारा प्रस्तुत भूमि संभाव्यता वर्गीकरण का उदाहरण है जो मुख्य रूप से अपरदन संकटों पर आधारित है । ,इसका ध्येय कृषि तथा विभाजक संरक्षण उद्देश्यों के लिए भूमि का गुणात्मक प्राक्कलन करना है । pl,इसके अन्तर्गत आठ श्रेणियों को स्वीकार किया गया है । ,इसका प्राथमिक वर्गीकरण ’ खेती के उपयुक्‍त भूमि ’ या ’ अनुपयुक्‍त भूमि ’ है । ,कृषि के लिए उपयुक्‍त भूमि ,प्रथम श्रेणी - ,"अति उत्तम भूमि , जिसे अक्षत रूप में साधारण कृषि तरीकों द्वारा जोता जाता है ।" ,द्वितीय श्रेणी - ,ऐसी भूमि जिसे अक्षत रूप में सीमित पूर्वावधान के साथ जोता जा सकता है । ,तृतीय श्रेणी - ,"तृतीय भूमि के अन्तर्गत जिसके उपयोग में विशेष सीमा बंधन होते हैं , किन्तु अपरदन संकटों के प्रति चौकसी बरतने पर उसे नियमित रूप से जोता जा सकता है ।" ,चतुर्थ श्रेणी - ,ऐसी भूमि जिसका उपयोग बेहद कठोर सीमाबन्धन तरीके से किया जाता है । pl,बहुत अधिक निगरानी रखकर खेतों को प्रासंगिक फसलों तक ही सीमित रखा जा सकता है । ,इसके पाँच अथवा छह वर्ष में सस्यावर्तन जरूरी है । ,इसके पश्‍चात अनाज की फसल अथवा रिजका ( uncerne ) बोना बहुधा व्यावहारिक होता है । ,"पंचम श्रेणी के अन्तर्गत ऐसी भूमि शामिल है जो लगभग समतल हो किन्तु गीलेपन , पथरीलेपन अथवा अन्य कारकों के कारण उस पर कृषि करना असंभव हो ।" ,ऐसी भूमि में कुछ सीमाबंधनों के साथ वन व्यवस्था व चराई करना शामिल है । ,जब मटर गल जाए व ग्रेवी गाढ़ी हो जाए तब केसर डाल दें । ,अच्छी तरह मिलाकर गैस बंद कर दें । ,ऊपर से हरा धनिया बुरक कर गरमा - गरम सर्व करें । ,सर्वप्रथम आंवलों को धोकर कपड़े से साफ कीजिए । ,एक बर्तन में आंवले डालकर दो बड़े चम्मच तेल डालकर धीमी आंच पर पकाएं । ,हल्के से पकने पर उन्हें गैस पर से उतार लें और ठंडा कर लें । ,अब आंवलों की गुठलियां अलग कर दें । ,एक कड़ाही में तेल गरम करके उसे थोड़ा - सा ठंडा कर लें । ,इस तेल में उपरोक्त सभी मसालें डालकर चलाएं । ,पूरी तरह ठंडा होने पर आंवले में चम्मच की सहायता से मसाला भर दें और जार में भरकर बंद कर दें । ,लीजिए आंवले का लजीज भरवां अचार तैयार है । ,छोटे आकार के बैंगन लेकर उनमें बीच में से चीरा लगा लें । ,"अब टमाटर , अदरक व लहसुन पीस लें ।" ,इमली को आधा कप पानी में 1 घंटे के लिए भिगो दें । ,फिर इसे छलनी से छानकर रस निकाल लें । ,"नारियल पावडर , पिसी मूंगफली , शक्कर , धनिया पावडर , हल्दी , नमक , लालमिर्च पावडर व गरम मसाले को मिला लें ।" ,आधा मसाला बैंगन में भर दें व आधा अलग रख लें । ,अब एक कड़ाही में तेल गर्म करें । ,उसमें जीरा डालकर प्याज डालें और गुलाबी होने तक भून लें । ,फिर टमाटर डालें अच्छी तरह से भुनने के बाद बचा मसाला और इमली का रस डालें । ,अब भरे हुए बैंगन डालकर धीमी आंच पर अच्छी तरह पकाएं । ,"बैंगन नरम हो जाए तब उलट - पलट करके , गैस बंद कर दें ।" ,हरा धनिया डालकर लजीज बघारे हैदराबादी बैंगन गरमा - गरम रोटी अथवा ज्वार - बाजरे की रोटी के साथ परोसें । ,सबसे पहले कड़ाही में तेल गर्म करके उसमें जीरा व मेथीदाना डालें । ,हल्का भूरे होने पर कटा प्याज डालें । ,प्याज गोल्डन ब्राउन भूनने के बाद टमाटर डालें और पकने दें । ,अब मटर डाल दीजिए । ,तत्पश्चात एक - एक करके सभी मसाले डाल दीजिए । ,मिश्रण अच्छी तरह पकने के बाद एक ग्लास पानी डालकर उबलने दें । ,अब सिवइयां मिलाकर 5 से 7 मिनट तक पकाए । ,पानी अच्छी तरह सूख जाने पर इसे गैस से उतार लें । ,उसके बाद उसमें नींबू रस व चीनी मिलाएं । ,सर्व करने के पहले गर्मागर्म सेंवइयों पर हरा धनिया बुरके और नींबू के अचार के साथ लजीज चटपटी सिवइयां पेश करें । ,सबसे पहले मैदा व नमक को मिलाकर छान लें । ,"उसमें दो बड़े चम्मच घी का मोयन देकर दरदरी पिसी कालीमिर्च , कलौंजी मिलाकर कड़ा आटा गूंथ लें ।" ,फिर थोड़ी देर गीले कपड़े से ढंककर रखें । ,अब मैदे की छोटी - छोटी पूरियां बनाएं और उन्हें तिकोनी मोड़ दें । ,ऊपर 1 - 1 कालीमिर्च लगाएं । ,सभी मठरियां तैयार होने के बाद गरम घी में धीमी आंच पर सुनहरी होने तक तल लें । ,ठंडी होने पर एयर टाइट डिब्बे में भरकर रखें । ,ये मठरी 10 - 15 दिनों तक खराब नहीं होती है । ,सबसे पहले चावल धोकर उबाल लें । ,अब गरम चावल में देसी घी और नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें । ,चावल को बराबर तीन हिस्सों में बांट लें । ,"एक हिस्से में कुछ बूंदे लाल रंग , दूसरे में पीली और तीसरे में हरा रंग डालें और मिलाकर अलग रख लें ।" ,"अब शिमला मिर्च , गाजर और प्याज को करीब 1 - डेढ़ इंच पतला और लंबा काट लें ।" ,पनीर के भी छोटे - छोटे टुकड़े काट लें । ,"कड़ाही में तेल गर्म कर कटा पनीर , गाजर , शिमला मिर्च और प्याज डालकर सुनहरा होने तक तलें ।" ,अब एक बड़ी प्लेट में तीनों रंग के चावल सजाएं । ,"पनीर , कच्चा नारियल और सभी सब्जियों को एक साथ मिलाकर चावल के ऊपर किनारे पर सजाएं ।" ,टीम इंडिया को लास्ट ओवर्स में बेस्ट ने दो करारे झटके देकर पस्त कर दिया । ,आखिरी ओवर में टीम इंडिया को बड़े स्कोर तक पहुंचाने का दारोमदार कप्तान धोनी और रविंद्र जडेजा पर था । ,बेस्ट ने 47 ओवर में धोनी और 49 वे ओवर में जडेजा को जबर्दस्त यार्कर पर बोल्ड कर टीम इंडिया के अरमानों पर पानी फेर दिया और इंडीज को जीतने के लिए 230 रनों का ही टोटल मिला । ,यही नहीं इंडीज जब 220 रन पर नौ विकेट खो चुका था बेस्ट ने कैमर रोच के साथ दस रन जोड़ टीम को जीत भी दिलाई । ,आईपीएल में जलवा दिखाने के बाद डैरन सैमी तो इंडीज के संकटमोचक बन चुके हैं । ,सैमी ने इस मुकाबले में भी जमकर जलवा दिखाया । ,पहले विराट कोहली और फिर रोहित शर्मा का विकेट लेकर सैमी ने गेंद से अपना योगदान दिया । ,उसके बाद जब इंडीज छह विकेट पर 161 रन के स्कोर पर संकट में था सैमी ने बल्ले से भी अपना जलवा दिखाते हुए 25 गेंदों पर दो चौकों और तीन छक्कों की मदद से 29 रनों की शानदार पारी खेल चाल्र्स का भरपूर साथ दिया । ,कप्तान ड्वेन ब्रावो की गैर मौजूदगी में उनके भाई डैरन ब्रावो ने इस मैच में अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई । ,जब इंडीज टीम तीन विकेट पर 26 रन बनाकर संकट में थी ब्रावो ने जोनाथन चाल्र्स के साथ 116 रनों की बहुमूल्य साझेदारी की । ,ब्रावो ने टीम इंडिया की पेस बैटरी के साथ स्पिन का भी बखूबी सामना किया और 78 गेंदों पर पांच चौकों और एक छक्के की मदद से 55 रनों की शानदार पारी खेली । ,ब्रावो की इस पारी ने इंडीज को जीत की राह दिखा दी । ,वेस्टइंडीज के मैच में सभी की निगाहें ओपनर क्रिस गेल पर टिकी होती हैं लेकिन गेल के इस जोड़ीदार ने टीम इंडिया को फेल कर दिया । ,गेल के आउट होने के बाद जोनाथन चार्ल्स ने आक्रमण की जिम्मेदारी संभाल ली और पहले ब्रावो और फिर सैमी के साथ मिल टीम को जीत की दहलीज तक पहुंचाया । ,हालाकि चार्ल्स महज तीन रनों से अपना शतक चूक गए लेकिन उनकी यह पारी इंडीज को जीत जरूर दिला गई । ,1923 के सीजन में बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर वैली को एमसीसी के वेस्ट इंडीज टूर के लिए चुन लिया गया । ,यह उनके करियर का बड़ा अहम पड़ाव था । ,उस समय तक कैरेबियाई टीम को टेस्ट स्टेटस नहीं मिला था । ,हेमंड ने वहां अपने बल्ले का कमाल दिखाते हुए 2 सेंचुरी और 2 फिफ्टी समेत 732 रन बनाए । ,साथ ही उन्होंने 28.65 के औसत से 20 विकेट भी झटके । ,पहले ही मुकाबले में हेमंड ने नाबाद 238 रन बनाए थे । ,टूर के अंतिम दिनों में वैली की तबीयत अचानक से नासाज़ हुई । ,उन्हें चलने फिरने में तकलीफ हो रही थी । ,साथ ही तेज बुखार के कारण उनकी हालत खस्ता थी । ,घर लौटते समय जहाज पर कोई डॉक्टरी सेवा मौजूद नहीं थी । ,इस कारण हेमंड की हालत और बिगड़ गई । ,घर पहुंचने पर अप्रैल 1926 में उनका पहला ऑपरेशन किया गया । ,उनकी बिगड़ती हालत देख डॉक्टर्स ने जवाब देना शुरू कर दिया था । ,"डॉक्टर्स को लग रहा था कि वैली अब नहीं बचेंगे , लेकिन उनकी हिम्मत ने उन्हें फिर से भला - चंगा कर दिया ।" ,"डॉक्टरों ने उनकी मां को यह तक कह दिया था कि उनका एक पैर काटना पड़ेगा , लेकिन ईश्वर की कृपा से ऐसा कुछ नहीं हुआ ।" ,"वैली हेमंड की बायोग्राफी लिखने वाले क्रिकेट राइटर डेविड फुट के मुताबिक वैली सिफिलिस नाम की बीमारी से ग्रसित थे , जो कि असुरक्षित यौन संबंधों के कारण होती है ।" ,"हालांकि , इस बात का पता कभी डॉक्टर्स नहीं लगा सके कि वैली की बीमारी दरअसल थी क्या , लेकिन डेविड ने सिफिलिस का दावा कर सभी को हैरान कर दिया ।" ,सेक्स की लत के कारण हुई उस बीमारी के कारण हेमंड का टेस्ट डेब्यू एक साल टल गया । ,19 जून 1903 को जन्मे वैली के पिता विलियम ब्रिटिश आर्मी में कॉर्पोरल थे । ,वैली हेमंड का परिवार उनके क्रिकेट में करियर बनाने के खिलाफ था । ,लेकिन बचपन से जिद्दी रहे वैली ने अपने इस शौक को नहीं छोड़ा । ,उनकी जिद के आगे परिवार को झुकना पड़ा और उन्हें क्रिकेट खेलने की इजाजत मिल गई । ,वैली ने क्रिकेट ट्रेनिंग की शुरुआत एक सिपाही के बल्ले से की थी । ,उनका मानना था कि उसी ट्रेनिंग के कारण वे गेंद को दूसरे बल्लेबाजों से ज्यादा ताकत के साथ मार पाते थे । ,पहला विश्व युद्ध वैली हेमंड के लिए कहर बरपाने वाला रहा । ,उनके पिता की पोस्टिंग फ्रांस में की गई थी । ,एमियंस के नजदीक अपनी बटालियन के साथ जंग में लड़ते हुए उनके पिता शहीद हो गए । ,पति की मौत के बाद वैली की मां मैरियन उन्हें साथ लेकर साउथसी में रहने चली गईं । ,"वे चाहती थीं कि उनका बेटा किसान बने , लेकिन वैली का मन खेल में रम चुका था ।" ,अगस्त 1920 में वैली हेमंड ग्लूसेस्टरशायर काउंटी से जुड़ गए । ,"हालांकि , अपनी पहली चार पारियों में वे कुल 27 रन ही बना सके , लेकिन उनके साथी खिलाड़ियों को उनकी काबीलियत पर पूरा भरोसा था ।" ,1923 के सीजन में वैली ने करियर का पहला फर्स्ट क्लास सैकड़ा लगाया । ,सर्रे के खिलाफ बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने पहली पारी में 110 और दूसरी पारी में 92 रन बनाए । ,इसके बाद जैसे वैली के क्रिकेट करियर की गाड़ी दौड़ पड़ी । ,अगस्त 1920 में वैली हेमंड ग्लूसेस्टरशायर काउंटी से जुड़ गए । ,जनश्रुति के अनुसार अगस्त्य वन क्षेत्र महर्षि अगस्त्य का निवास स्थान था । pl,चोटी पर पहुँचने के लिए बीहड़ वन के दुर्गम मार्गों को पार करना पड़ता है । ,अगस्त्य पर्वत दुर्लभ जड़ी - बूटियों के उद्यान के लिए महत्वपूर्ण है । ,आदिवासी जनों का विश्वास है कि यहाँ ब्रह्मचारी महर्षि अगस्त्य निवास करते थे । ,अतः किसी समय स्त्रियों को वहाँ जाने की अनुमति नहीं थी । ,यह स्थान दिसम्बर के दूसरे सप्ताह से फरवरी तक पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहता है । ,यहाँ जाने के लिए तिरुवनन्तपुरम के पी. टी. पी. नगर में स्थित वाइल्ड लाइफ वार्डन से अनुमति पत्र लेने की आवश्यकता है । ,तिरुवनन्तपुरम रेलवे स्टेशन से अगस्त्यारकूडम तक की दूरी 61 कि.मी. की है । ,तिरुवनन्तपुरम अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा से बोणक्काड तक की दूरी 69 कि.मी. है । ,तिरुवनन्तपुरम से 36 कि.मी. उत्तर में स्थित प्रसिद्ध वर्कला बीच के पास का अंचुतेंगु नामक ऐतिहासिक महत्व रखने वाला समुद्रतटीय क्षेत्र है । ,अंचुतेंगु की प्राकृतिक सुषमा दर्शनीय है । ,भारत में यूरोपीय औपनिवेशिक शासन से अंचुतेंगु का सम्बन्ध है । ,"पुर्तगाली , डच और ब्रिटिश साम्राज्यों ने यहाँ शासन किया था ।" sg,1684 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने केरल में अपना पहला व्यापार केन्द्र अंचुतेंगु में ही स्थापित किया था । sg,आट्टिंगल रानी ने एक इलाका ब्रिटिश कंपनी को वार्षिक कर पर दिया था । ,नारियल के पाँच पेड़ होने के कारण यह भूभाग ' अंचुतेंगु ' नाम से प्रसिद्ध हो गया । ,अंचुतेंगु का प्रमुख ऐतिहासिक स्मारक ' इंग्लिश किला ' है जो संरक्षित है । ,किले के अन्दर एक कब्रगाह है जिसमें लगभग सन् 1704 काल की कब्रें हैं । sg,"झीलें , कतार बाँधे खड़े नारियल के पेड़ और नहरें अंचुतेंगु की शोभा को मनोहारी बनाते हैं ।" ,अंचुतेंगु का समुद्रतट भी अत्यंत सुन्दर है । ,अंचुतेंगु मछुआरों का प्रमुख केन्द्र भी है । ,"अंचुतेंगु से निकटतम रेलवे स्टेशन वर्कला , 8 कि.मी. की दूरी पर है ।" ,तिरुवनन्तपुरम अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा से अंचुतेंगु 46 कि.मी. है । ,आक्कुलम झील नौकारोहण की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है । ,आक्कुलम झील का पिकनिक स्पॉट प्रातः 10 बजे से देर रात तक खुला रहता है । ,बोटिंग और बच्चों का पार्क दोनों बच्चों को भी बेहद पसन्द आते हैं । ,तिरुवनन्तपुरम रेलवे स्टेशन से आक्कुलम 10 कि.मी. की दूरी पर है । ,तिरुवनन्तपुरम अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से आक्कुलम 7 कि.मी. दूर है । ,1983 में स्थापित इंडियन स्कूल ऑफ मार्शियल आर्ट्स ( ISMA ) के संस्थापक श्री बालचंद्रन नायर हैं । ,भारत सरकार तथा केरल स्पोर्ट्स काउंसिल द्वारा मान्यता प्राप्त यह संस्था कलरिप्पयट्टु नामक आयोधन कला का प्रशिक्षणालय है । ,इंडियन स्कूल ऑफ मार्शियल आर्ट्स एक तिमंजिली इमारत में स्थित है । ,इंडियन स्कूल ऑफ मार्शियल आर्ट्स में कलरि चिकित्सा भी उपलब्ध है । ,इंडियन स्कूल ऑफ मार्शियल आर्ट्स में उष़िच्चिल ( मसाज ) के लिए प्रयुक्त होने वाली ' एण्णत्तोणि ( मालिश वाली मेज़ ) 600 वर्ष पुरानी है । ,इस्मा ( ISMA ) की अन्य विशेषताएँ हैं धान की कोठरी और औषधीय जड़ी - बूटियों का रूफ गार्डन । ,अतिथियों के लिए मध्यम दर्जे के आवास और भोजन की व्यवस्था उपलब्ध है । ,इंडियन स्कूल ऑफ मार्शियल आर्ट्स में अनेक ताड़पत्रीय ग्रन्थ संरक्षित हैं । ,तिरुवनन्तपुरम रेलवे स्टेशन से इंडियन स्कूल ऑफ मार्शियल आर्ट्स 2 कि.मी. की दूरी पर है । ,तिरुवनन्तपुरम अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा से इंडियन स्कूल ऑफ मार्शियल आर्ट्स 8 कि.मी. की दूरी पर है । ,अगस्त्य पहाड़ के पार्श्व भागों में नेय्यार वन में उत्तरम कयम स्थित है । ,उत्तरम कयम विविध तरह की जड़ी - बूटियों तथा विभिन्न प्रकार के पक्षियों से भरा छोटा - सा भूभाग है । sg,आजकल केरल के वन विभाग ने यहाँ ट्री हाउस की सुविधा प्रदान की है । ,उत्तरम कयम जाने के लिए नेय्यार रिज़र्वायर से बोट लेकर कोम्बा नामक जगह तक पहुँचना होगा । ,कोम्बा से दो किलोमीटर घने जंगल से पैदल चलकर उत्तरकयम पहुँचा जा सकता है । ,उत्तरम कयम से दो कि.मी. की दूरी पर मीनमुट्टि जलप्रपात है । ,"मीनमुट्टि जलप्रपात वल्लियार , मुल्लयार और नेय्यार आदि नहरों का उद्‍गम स्थान है ।" ,वन विभाग द्वारा उत्तरम कयम पर्यटन की व्यवस्था की गई है । ,उत्तरम कयम का निकटतम रेलवे स्टेशन तिरुवनन्तपुरम 32 कि.मी. दूर है । ,निकटतम एयरपोर्ट - तिरुवनन्तपुरम अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा से उत्तरम कयम 38 कि.मी. की दूरी पर है । ,पोन्मुडी ( प्रसिद्ध पहाड़ी सुखवास केन्द्र ) जाने के रास्ते में कल्लार नदी पड़ती है । ,कल्लार नदी के कारण इस स्थान का नाम कल्लार पड़ा है । ,वहाँ गंगेश्वर नामक लिंग गंगा के द्वारा पूजित है । ,महत्ता बोधगया की - ,सिद्धार्थ के बुद्धत्व प्राप्ति और बौद्ध मत के प्रसार को 2550 वर्ष हो चुके हैं । ,इतना ही प्राचीन है बोधगया का इतिहास जो युगों से एक महत्वपूर्ण दर्शन स्थली है । ,"भारत के पवित्रतम बौद्धस्थलों में बोधगया , प्रशमित , शांत एवं नैसर्गिक सौंदर्य से ओत - प्रोत है ।" ,बिहार राज्य का यह प्रमुख पूज्य तीर्थस्थल है । ,राजसी जीवन को त्याग कर वर्षों तक परम सत्य की खोज करते रहने के बाद इसी स्थान पर सिद्धार्थ भगवान बुद्ध बने । sg,"जिस पीपल के वृक्ष के नीचे राजकुमार सिद्धार्थ को जीवन में परम संबोधि से साक्षात्कार हुआ , वह वृक्ष आज भी यहाँ के वातावरण को पवित्र कर रहा है ।" ,उल्लेखनीय है कि वर्ष 2006 - 7 को महात्मा बुद्ध के महापरिनिर्वाण के 2550 वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है । ,बिहार का प्राचीन इतिहास अत्यंत गौरवपूर्ण एवं प्रासंगिक रहा है । ,"इस राज्य के अनेक नगर ऐसे हैं , जहाँ भारत की आध्यात्मिक एवं धार्मिक मान्यताओं का जन्म हुआ ।" ,इसी प्रदेश की मिट्टी में दुनिया भर को दिशा देने वाले महान प्रज्ञापुरुषों ने जन्म लिया । ,"बिहार प्रांत की पृष्ठभूमि अत्यंत पौराणिक है , जिसका उल्लेख पुराणों एवं वेदों में भी मिलता है ।" ,उल्लेखनीय है कि लाइट ऑफ एशिया कहे जाने वाले भगवान बुद्ध और जैन तीर्थकारों की कर्म भूमि भी बिहार प्रदेश था । ,"ईसवीं काल के पहले यहाँ के महान राजाओं में बिम्बिसार , चन्द्रगुप्त मौर्य और अशोक महान प्रमुख हैं ।" ,सम्राट अशोक के कालखंड में मगध और उसकी राजधानी पाटलीपुत्र की ख्याति दुनिया भर में व्याप्त थी । ,बिहार का वास्तविक नाम विहार था जो अपभ्रंश होकर बिहार बन गया । ,बिहार का तात्पर्य बौद्ध भिक्षुओं के भ्रमण से है । ,स्पष्ट है कि भगवान बुद्ध के शिष्य बौद्ध भिक्षु घूम - घूमकर इस पूरे क्षेत्र में बुद्ध की शिक्षाओं का प्रचार - प्रसार करते थे । ,बिहार पर प्रचुर संख्या में बौद्ध मठ होने से आज भी इस स्थान को अंतर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक एवं धार्मिक स्थल की मान्यता प्राप्त है । ,पाटलिपुत्र ईसा के जन्म से वर्षों पूर्व भी ज्ञान और ललित कलाओं का एक अत्यंत समृद्ध और उद्यात्त केन्द्र रहा है । ,दुनिया की पहली यूनिवर्सिटी ( नालंदा विश्वविद्यालय ) बिहार प्रांत में स्थित थी । ,यह भूमि अंतर्राष्ट्रीय अध्ययनों की केन्द्र बिन्दु रही है । ,बोधगया में जन - विश्वास है कि बुद्ध के जन्मदिन पर मूल बोधि वृक्ष उग आता है । ,वनाच्छादित एकांत में यह सुरम्य स्थल निरंजना नदी ( फाल्गू ) के तट पर गया से 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । ,"वर्तमान में जो बोधि वृक्ष अस्तित्व में है , वह भगवान बुद्ध के कालखंड के वृक्ष की पाँचवी पीढ़ी का है ।" ,बोधगया में स्थित महाबोधि मंदिर असंख्य श्रद्धालुओं की भावनाओं एवं धार्मिक मान्यताओं का केन्द्र है । ,"यह बोधि वृक्ष से पूर्व में स्थित है , जिसका भूतल 48 वर्ग फुट का है ।" ,महाबोधि मंदिर की ऊँचाई 170 फुट है । pl,"महाबोधि मंदिर के शीर्ष पर छज्जे बनाये गये हैं , जो धर्म की संप्रभुता के द्योतक हैं ।" ,"मंदिर के अंदर मुख्य पवित्र स्थल है , जहाँ एक चबूतरे पर बुद्ध की विशाल प्रतिमा प्रतिष्ठापित की गई है ।" ,महाबोधि मंदिर का क्षेत्र विभिन्न प्रकार के स्तूपों से आच्छादित है । ,इन स्तूपों में से अनेक स्तूप मनौतियाँ पूरी करने के लिये प्रसिद्ध हैं । ,जबकि कुछ स्तूप बुद्ध की स्मृति में तो कुछ स्थल की सौंदर्य वृद्धि करने के लिये बनाये गये हैं । ,बोधगया में विश्व भर में बौद्ध धर्म को मानने वाले देशों के मंदिर हैं । ,"लगभग 2,500 वर्षों की अनवरत काल यात्रा में विविध स्वरूपों , भावों , एवं आकारों में निर्मित ये स्तूप भारतीय स्थापत्य एवं सौंदर्य के परिचायक हैं ।" ,बोधि मंदिर में रतनागर नामक स्थान पर बुद्ध ने एक सप्ताह तक निवास किया । ,मान्यता है कि यहाँ बुद्ध की देह पर पाँच रंग खिल उठे थे । ,जबकि कमलताल नामक स्थान पर बुद्ध ने एक सप्ताह तक प्रवास किया । ,"कुल मिलाकर बोध गया दुनिया भर में विस्तारित बौद्ध धर्मावलंबियों के लिये परम श्रद्धा एवं महामान्यता का केन्द्र है , जहाँ एक बार पहुँचने भर से श्रद्धालु अपने जीवन को परिपूर्ण अनुभव करता है ।" ,बोधगया से 112 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पटना एयरपोर्ट यहाँ से निकटतम हवाईअड्डा है । ,"निकटतम रेलवे स्टेशन गया है , जिसकी दूरी यहाँ से 16 किलोमीटर है ।" ,"गया से बोध गया तक राष्ट्रीय राजमार्ग है , जो दिल्ली - कोलकाता को जोड़ता है ।" pl,बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा बोधगया के लिये प्रतिदिन डीलक्स बसें संचालित की जाती हैं । ,बैद्यनाथ धाम : ,"यह देवगढ़ में स्थित है , जिसकी दूरी पटना से 29 किलोमीटर है ।" ,"यहाँ भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है , जिसकी अत्यंत मान्यता है ।" ,पावापुरी : ,यह जैन धर्म के 24 वें तीर्थकार भगवान महावीर की निर्वाण स्थली है । ,जो पटना से 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । ,"जैन धर्मावलंबियों के लिये यह एक पावन तीर्थ है , जहाँ की यात्रा अपना एक विशेष महत्व रखती है ।" ,सीतामढ़ी : ,यहीं के जानकीकुंड नामक स्थान पर भगवान श्री राम के श्वसुर राजा जनक को नवजात सीता मिली थीं । ,"वेल्स में वाइगोल जॉन ब्राइट और वाइगोल फॉर्ड डफरिन को यह बीमारी हुई थी , इसलिए वे पूरी कोशिश करते थे कि हर बच्चे को खसरे का टीका लगे ।" ,2007 में जापान में विशाल महामारी फैल गयी जिसकी वजह से अधिकतर विश्वविद्यालयों और दूसरे संस्थानों को बंद कर दिया गया ताकि इस बीमारी को फैलने से रोका जा सके । ,इज़रायल में अगस्त 2007 और मई 2008 के बीच में इस बीमारी के तकरीबन 1000 मामलों की सूचना मिली थी ( इससे ठीक एक साल पहले इसके विपरीत सिर्फ कुछ दर्जन मामले ही दर्ज किये गये थे ) । ,रूढ़िवादी यहूदी समुदायों में कई बच्चों को टीकाकरण कवरेज से अलग रखने के कारण वे इस बीमारी से प्रभावित हुए । ,"2008 में यह बीमारी स्थानीय थी जिसकी वजह से 2008 में ब्रिटेन में इस बीमारी के 1,217 मामलों का निदान किया गया था ।" ,"और स्विट्जरलैंड , इटली तथा आस्ट्रिया से भी महामारी की खबरें मिलीं ।" ,इसके लिए टीकाकरण की कम दर जिम्मेदार हैं । ,मार्च 2010 में फिलीपींस ने खसरे के मामलों को लगातार बढ़ता देख महामारी की घोषणा कर दी । ,"उत्तरी , केंद्रीय और दक्षिणी अमेरिका से स्वदेशी खसरे के पूर्ण रूप से सफाया होने की घोषणा की गयी ।" ,12 नवम्बर 2002 को इस क्षेत्र में एक आखिरी स्थानीय मामले की सूचना मिली । ,"पर उत्तरी अर्जेंटीना , कनाडा के ग्रामीण प्रांतों में , खासकर ओंटारियो , क्युबेक और अल्बर्टा के कुछ क्षेत्रों में मामूली स्थानीय स्थिति बनी हुई है ।" ,हालांकि दुनिया के दूसरे प्रदेशों से खसरे के वायरसों का आयात होने से महामारियां अब भी हो रही हैं । ,"जून 2006 में , बोस्टन में महामारी फैल गयी जब वहां का एक निवासी भारत में संक्रमित हुआ और अक्टूबर 2007 में मिशिगन की एक लड़की को टीका लगाया गया , जब वह स्वीडन में इस बीमारी का शिकार हुई ।" ,"1 जनवरी और 25 अप्रैल 2008 के बीच संयुक्त राष्ट्र में खसरे के 64 मामलों की पुष्टि हुई और सेंटर फॉर डिसिज़ कंट्रोल एंड प्रीवेंशन को दर्ज किया गया , जो 2001 के बाद से किसी भी वर्ष में दर्ज की गयी रिपोर्ट में सबसे अधिक है ।" ,संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में अन्य देशों से खसरे के आयात के 64 मामलों में से 54 संयुक्त राज्य अमेरिका से सम्बंधित थे और 64 में से 63 रोगी ऐसे थे जिन्हें टीका नहीं दिया गया था या अन्य टीकाकरण की स्थिति से अज्ञात थे । ,"9 जुलाई 2008 तक 15 राज्यों में कुल 127 मामलों की सूचना मिली ( जिनमें से 22 एरिजोना के थे ) , जो 1997 के बाद से सबसे बड़ा प्रकोप था ( जब 138 मामलों की सूचना दी गयी थी ) ।" ,अधिकांश मामलों का अधिग्रहण संयुक्त राज्य के बाहर हुआ और वे व्यक्ति प्रभावित हुए जिन्हें टीका नहीं दिया गया था । ,30 जुलाई 2008 तक मामलों की संख्या बढ़कर 131 तक पहुंच गयी । ,इनमें से आधे में वे बच्चे शामिल हैं जिनके माता पिता ने अपने बच्चों का टीकाकरण कराने से मना कर दिया था । ,131 मामले 7 विभिन्न महामारियों में हुए थे । ,कोई मौत नहीं हुई थी और १५ लोगों को अस्पताल में दाखिल करना पड़ा था । sg,11 मामलों में रोगियों ने खसरे के टीके की कम से कम एक खुराक प्राप्त की थी । ,122 मामले ऐसे थे जिसमें बच्चों को टीका नहीं दिया गया था या जिनके टीकाकरण की स्थिति अज्ञात थी । ,"इनमें से कुछ एक वर्ष की आयु से कम के थे और इतनी कम उम्र के थे जब टीकाकरण की सिफारिश की जाती है , लेकिन 63 मामलों में धार्मिक या दार्शनिक कारणों से टीकाकरण कराने से मना कर दिया गया था ।" ,"रीनलेट प्रकार फ्रांस के सरवियर कंपनी द्वारा आविष्कृत केवल एक साधन है , ताकि वे स्ट्रॉन्शियम के अपने संस्करण को पेटेंट कर सकें ।" ,"स्ट्रोंटियम , चाहे उसका कोई भी रूप हो , पानी में घुलने योग्य और उदर अम्ल में आयनित होना चाहिए ।" ,स्ट्रॉन्शियम को तब आंत्र नली से रक्त प्रवाह में वहन के लिए प्रोटीन - बद्ध किया जाता है । ,"सोडियम एलेनड्रोनेट ( फ़ोसामैक्स ) जैसी औषधियों के विपरीत , स्ट्रॉन्शियम अस्थि पुनःचालन को बाधित नहीं करता और , वास्तव में , मजबूत हड्डियों का उत्पादन हो सकता है ।" ,"अध्ययनों से पता चला है कि पांच साल के बाद एलेनड्रोनेट अस्थि क्षय का कारक भी हो सकता है , जबकि स्ट्रॉन्शियम जीवन - काल के दौरान प्रयुक्ति से हड्डी का निर्माण जारी रखता है ।" ,"स्ट्रॉन्शियम को आहार या कैल्शियम युक्त व्यंजनों के साथ नहीं लेना चाहिए , क्योंकि उदग्रहण के दौरान कैल्शियम की प्रतिस्पर्धा स्ट्रॉन्शियम के साथ होती है ।" ,"फिर भी , यह ज़रूरी है कि हर रोज़ कैल्शियम , मैग्नीशियम और चिकित्सीय मात्रा में विटामिन डी लेना चाहिए , लेकिन स्ट्रॉन्शियम लेते समय में नहीं ।" ,स्ट्रॉन्शियम को रात में खाली पेट लेना चाहिए । ,"ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम के लिए एस्ट्रोजेन प्रतिस्थापन उपचार एक अच्छा इलाज है , लेकिन इस समय , जब तक कि उसके इस्तेमाल के लिए अन्य संकेत उपलब्ध ना हों , उसकी सिफ़ारिश नहीं की जाती है ।" ,महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद पहले दशक में एस्ट्रोजन की सिफ़ारिश के बारे में अनिश्चितता और विवाद मौजूद हैं । ,"अल्पजननग्रंथि वाले पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन से अस्थि की मात्रा और गुणवत्ता में सुधार दिखाई दिया है , लेकिन यथा 2008 , फ़्रैक्चर या पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन पर एक सामान्य स्तर के साथ प्रभाव का कोई अध्ययन कर रहे हैं ।" ,"SERM दवाओं का एक वर्ग है , जो पूरे शरीर में एस्ट्रोजन ग्राहियों पर एक चयनात्मक तरीके से काम करता है ।" sg,"आम तौर पर , अस्थि खनिज घनत्व ( BMD ) को ट्रेबिकुलार अस्थि में अस्थिकोरक और अस्थिशोषक गतिविधि के बीच एक संतुलन द्वारा नियंत्रित किया जाता है ।" ,"एस्ट्रोजेन की अस्थि गठन - अवशोषण संतुलन के नियमन में प्रमुख भूमिका है , क्योंकि यह अस्थिकोरक गतिविधियों को बढ़ावा देता है ।" ,"रेलॉक्सिफीन जैसे कुछ SERM , अस्थिशोषकों द्वारा हड्डी अवशोषण को धीमा करते हुए अस्थियों पर प्रभाव डालते हैं ।" ,नैदानिक परीक्षणों में SERM को प्रभावी साबित किया गया है । ,"अस्थि विकास , अस्थि रोग - निदान और अस्थि की शक्ति बनाए रखने के लिए कैल्शियम की आवश्यकता है और यह हड्डियों की कमज़ोरी के इलाज का एक पहलू है ।" ,देश और उम्र के आधार पर खाने में कैल्शियम की सिफारिशों में भिन्नता है । ,जिन लोगों को ऑस्टियोपोरोसिस का अधिक ख़तरा है ( पचास साल की उम्र के बाद ) उनके लिए अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा सुझाई गई मात्रा 1200 एमजी प्रति दिन है । ,आहार का सेवन बढ़ाने के लिए कैल्शियम पूरक इस्तेमाल किए जा सकते हैं और पूरे दिन कई छोटी ख़ुराकें ( 500 mg या उससे कम ) लेने के माध्यम से अवशोषण अनुकूलित किया जा सकता है । ,ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने और इसके इलाज में कैल्शियम की भूमिका अस्पष्ट है - ,बहुत कम कैल्शियम की मात्रा वाली कुछ आबादियों में भी हड्डियों के फ्रैक्चर की दर अत्यंत कम है और दूध और दुग्ध उत्पादों के माध्यम से खाने में कैल्शियम के उच्च दर वाले अन्य लोगों में अस्थि - भंग की दर उच्च है । sg,"ऑस्टियोपोरोसिस के विकास में कई अन्य कारकों के बीच खाने में कैल्शियम को एक कारक बनाते हुए , प्रोटीन , नमक और विटामिन D का सेवन , व्यायाम और सूर्य के प्रकाश से संपर्क जैसे अन्य सभी कारक , अस्थि खनिज को प्रभावित कर सकते हैं ।" ,"2007 में , WHO ( विश्व स्वास्थ्य संगठन ) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आहार के साथ अम्लीय मिलावट के साथ कैल्शियम खाने की वजह से वह हड्डियों की कमज़ोरी को प्रभावित करता है ।" ,"कैल्शियम और कैल्शियम व विटामिन D शामिल यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षणों के एक मध्य - विश्लेषण ने कैल्शियम के उच्च स्तरों के उपयोग ( 1,200 mg या उससे अधिक ) और विटामिन डी ( 800 IU या अधिक ) का समर्थन किया ।" ,हालांकि अस्थि स्वास्थ्य ( अस्थियों के फ़्रैक्चर के प्रति अस्थि क्षति ) के आकलन के लिए प्रयुक्त मापदंड के आधार पर परिणामों में विभिन्नता रही । ,एक अन्य अध्ययन के साथ मध्य - विश्लेषण ने इलाज के प्रोटोकॉल का श्रेष्ठ अनुपालन करने वाले रोगियों के लिए काफी बेहतर परिणामों का समर्थन किया । ,"इसके विपरीत , कैल्शियम पूरकों में उन्नत उच्च लेपोप्रोटीन की सघनता ( HDL , "" अच्छा कोलेस्ट्रॉल "" ) की पिछली रिपोर्ट के बावजूद , ( न्यूजीलैंड में किए गए एक अध्ययन में , जिसमें 1471 महिलाओं ने भाग लिया , हृद्पेशीय रोधगलन ( दिल का दौरा ) की दर में संभावित वृद्धि पाई गई ।" ,"यदि पुष्टि हो , यह संकेत देता है कि फ़्रैक्चर के कम जोखिम वाली महिलाओं में कैल्शियम की पूरकता से अच्छे से ज्यादा नुकसान ही हो सकता है ।" ,"कुछ अध्ययनों से पता चला है कि विटामिन D की अधिक मात्रा बुज़ुर्गों में अस्थि - भंग कम कर देती है , हालांकि महिलाओं के स्वास्थ्य पहल ने पाया कि यद्यपि कैल्शियम और विटामिन D से अस्थि घनत्व में 1 % की वृद्धि हुई , तथापि इसने कूल्हे के अस्थि - भंग को प्रभावित नहीं किया , पर गुर्दे की पथरी के निर्माण में 17 % की वृद्धि की ।" ,"कई अध्ययनों से पता चला है कि एयरोबिक , भार सहन और प्रतिरोध अभ्यास सभी रजोनिवृतोत्तर महिलाओं में BMD को बनाए रख सकते हैं या बढ़ा सकते हैं ।" ,"कई शोधकर्ताओं ने यह इंगित करने का प्रयास किया है कि BMD और अस्थि गुणवत्ता के अन्य मैट्रिक्स में सुधार लाने में कौन से व्यायाम सबसे प्रभावशाली हैं , लेकिन परिणामों में भिन्नता रही है ।" ,रजोनिवृतोत्तर महिलाओं में नियमित रूप से एक साल के लिए कूद अभ्यास से BMD और सन्निकट टिबिया की निष्क्रियता के क्षण की वृद्धि प्रतीत होती है । ,"ट्रेडमिल वॉकिंग , व्यायाम प्रशिक्षण , क़दम - चालन , कूद , सहनशीलता और शक्ति अभ्यास सभी के परिणामस्वरूप ऑस्टियोपीनिक रजोनिवृतोत्तर महिलाओं में L2 - L4 BMD की महत्वपूर्ण वृद्धि हुई ।" ,"शक्ति प्रशिक्षण से , विशेषतः दूरस्थ त्रिज्या और कूल्हे के BMD में सुधार हासिल हुआ ।" ,हार्मोन प्रतिस्थापन उपचार ( HRT ) जैसे अन्य औषधीय उपचार से संयुक्त व्यायाम से अकेले HRT की जगह BMD वृद्धि अधिक दृष्टिगोचर हुई । ,"ऑस्टियोपोरोटिक रोगियों में BMD वृद्धि के अलावा संतुलन , चाल में सुधार तथा गिरने के जोखिम में कमी जैसे अतिरिक्त लाभ शामिल हैं ।" ,"हालांकि ऑस्टियोपोरोसिस रोगियों में अस्थि - भंग की जटिलताओं के कारण वर्धित मृत्यु - दर है , अधिकांश मरीज़ रोग "" के साथ "" मरते हैं ना कि उसकी वजह "" से "" ।" ,"कूल्हों के फ़ैक्चर की वजह से गतिशीलता में कमी और कई जटिलताओं का एक अतिरिक्त जोखिम ( जैसे गहरी शिरापरक घनास्त्रता और / या फुफ्फुसीय अंतःशल्यता , न्यूमोनिया ) हो सकता है ।" ,"कूल्हे के फ़्रैक्चर के बाद 6 महीने की मृत्यु - दर लगभग 13.5 % बनती है और ऐसे लोगों के पर्याप्त अनुपात ( लगभग 13 % ) को , जिन्हें कूल्हे का फ़्रैक्चर हुआ है , कूल्हा अस्थि - भंग के बाद चलने - फिरने के लिए पूरी मदद की ज़रूरत होती है ।" ,"कशेरुकी अस्थि - भंग में , जिसका मृत्यु - दर पर कम असर होता है , तंत्रिकाजन्य मूल का चिरकालिक दर्द हो सकता है , जिसे क़ाबू में करना मुश्किल हो सकता है और अंग - विकृति भी संभव है ।" ,"हालांकि दुर्लभ , पर एकाधिक कशेरुकी अस्थि - भंग ऐसे गंभीर कूबड़ ( कुब्जता ) को जन्म दे सकता है कि परिणामी आंतरिक अंगों पर दबाव से सांस लेने की क्षमता ख़राब हो सकती है ।" ,"मौत और अन्य जटिलताओं के जोखिम के अलावा , ऑस्टियोपोरोटिक फ़्रैक्चर निम्नतर स्वास्थ्य - संबंधी जीवन - गुणवत्ता के साथ जुड़े हैं ।" ,यह अनुमान है कि दुनिया भर में 50 वर्ष की आयु से ऊपर की 3 महिलाओं में 1 को और 12 पुरुषों में 1 को हड्डियों की कमज़ोरी होती है । ,"सालाना यह लाखों अस्थि - भंग के लिए जिम्मेदार है , जिनमें ज़्यादातर कटिपरक कशेरुकी , कूल्हे और कलाई से जुड़े हैं ।" ,पसलियों का नाज़ुक फ़्रैक्चर भी पुरुषों में सामान्य है । ,"कूल्हे के फ़्रैक्चर , ऑस्टियोपोरोसिस के सबसे गंभीर परिणामों के लिए जिम्मेदार हैं ।" ,"संयुक्त राज्य अमेरिका में सालाना 250,000 से अधिक कूल्हे के फ़्रैक्चरों के लिए ऑस्टियोपोरोसिस जिम्मेदार है ।" ,"यह अनुमान है कि एक 50 वर्षीय श्वेत महिला को , सन्निकट जाँघ की हड्डी के फ़्रैक्चर का , 17.5 % आजीवन जोखिम है ।" pl,"सभी आबादियों के पुरुष और महिलाएं , दोनों के लिए साठ से नब्बे के हर दशक में कूल्हे के फ़्रैक्चरों की घटनाएं बढ़ती रहती हैं ।" ,"सबसे ज्यादा घटनाएं उन पुरुषों और महिलाओं में पाई गई हैं , जिनकी उम्र 80 या अधिक रही है ।" ,50 से अधिक उम्र वाली 35 - 50 % सभी महिलाओं को कम से कम एक कशेरुकी फ्रैक्चर हुआ था । ,पूना में 1849 में ’ ज्ञान प्रकाश ’ का प्रकाशन हुआ था । ,यह सार्वजनिक महत्व के प्रश्‍नों पर बहुत प्रभावशाली ढंग से लिखता था । ,इसी संगठन ने पूना में कांग्रेस बुलाने का निर्णय किया था । ,महाराष्‍ट्र के सार्वजनिक जीवन के एक प्रकार से आदि - संस्थापक श्री महादेव गोविंद रानाडे भी इसमें तथा ’ इन्दु प्रकाश ’ में लिखते थे । ,"कोल्हापुर के दीवान के विरुद्ध एक लेख छापने पर श्री तिलक और श्री आगरकर को सजा हुई और बाद में जब 1897 में पूना में प्लेग फैला और कमिश्‍नर रैंड के अत्याचार असहनीय़ हो गए तो लोकमान्य तिलक ने 4 मई , 1897 में एक लेख छापा जिसमें लिखा था - ’ बीमारी तो बहाना है , वास्तव में सरकार लोगों की आत्मा को कुचलना चाहती है ।" ,"मिस्टर रैंड अत्याचारी हैं और जो कुछ वे कर रहे हैं , वह सरकार की आज्ञा से ही कर रहे हैं , इसलिए सरकार के पास प्रार्थना देना व्यर्थ है ।" ,इस प्रकार के लेखों के पश्‍चात् चापेकर बंधुओं ने 22 जून को श्री रैंड की हत्या कर दी थी । ,इस प्रकार हम देखते हैं कि जिन लोगों को भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस के प्रथम दिन आजादी के कार्य में प्रतिनिधियों की सूची में सर्वप्रथम स्थान दिया गया वे भारतीय समाचार पत्रों के कुछ संपादक थे । ,"यह बात सिर्फ श्रीमती एनी बेसेंट ने ही लिखी हो , ऐसा नहीं है ।" ,लेकिन इन संपादकों और समाचार पत्रों का केवल उपस्थित होना ही काफी नहीं माना गया । sg,"पहली कांग्रेस का पहला प्रस्ताव मद्रास के ’ हिंदू ’ के संपादक जी. सुब्रह्मण्यम अयार ने पेश किया था , जिसमें यह मांग की गई थी कि सरकार भारतीय प्रशासन की जांच के लिए एक आयोग नियुक्‍त करे ।" ,"श्रीमती बेसेंट ने उनके बारे में कहा था कि वे मद्रास के नेताओं में सबसे साहसी और दूरदृष्‍टि रखने वाले नेता थे और उन्होंने जिस प्रशंसनीय भाषण के द्वारा प्रथम प्रस्ताव उपस्थित किया , वह बहुत कुछ आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है ।" ,"श्री मदनमोहन मालवीय , जिन्होंने ’ दैनिक हिन्दुस्तान ’ का संपादन किया तथा साप्‍ताहिक और दैनिक ’ अभ्युदय ’ निकाला और दिल्ली के हिन्दुस्तान टाइम्स को राष्‍ट्रीय पत्र का स्वरूप प्राप्‍त हुआ ।" ,पंडित मोतीलाल नेहरू ’ लीडर ’ पत्र के निदेशक मंडल के प्रथम अध्यक्ष थे और ’ लीडर ’ से जमानत मांगी गई थी तो उन्होंने कहा था कि जब तक मेरे घर में एक भी ईंट है तब तक मैं ’ लीडर ’ को मरने नहीं दूंगा । ,उन्होंने ’ इंडीपेंडेंट ’ पत्र की भी स्थापना की । ,"लाला लाजपत राय की प्रेरणा से ’ पंजाबी ’ , ’ वंदेमातरम ’ और ’ पीपुल ’ नाम के तीन पत्र लाहौर से निकले ।" ,"जहां तक क्रांतिकारी आंदोलन का संबंध है , भारत का क्रांतिकारी आंदोलन बंदूक और बम के साथ नहीं NULL , समाचार पत्रों से शुरू हुआ ।" ,जिनमें कुछ नाम अत्यंत गौरवशाली हैं । ,स्वयं ’ गदर ’ अखबार अपने आप में क्रांति का बड़ा दूत था । ,"यह एक वर्ष के काल में ही हिन्दी , उर्दू , पंजाबी , गुजराती , मराठी और अंग्रेजी में निकलने लगा और कुल मिलाकर इसकी लाखों प्रतियां छपती थीं और भारत के बाहर जहां - जहां भी भारतीय थे , उनको भेजी जातीं ।" ,विदेशों में समाचार पत्रों द्वारा भारतीय स्वाधीनता के लिए प्रयास का इतिहास काफी पुराना है । sg,"भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस ने अपने प्रारंभ से ही ब्रिटेन में कांग्रेस की एक शाखा स्थापित की , जिसकी ओर से ’ इंडिया ’ नाम का एक पत्र प्रकाशित होता था और उसका खर्च कांग्रेस की ओर से दिया जाता था ।" sg,’ युगांतर ’ के बाद भारत में ’ वन्देमातरम ’ पत्र ने राष्‍ट्रीय आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई । ,"इसकी स्थापना श्री सुबोध चंद्र मलिक , देशबंधु चित्तरंजन दास और बिपिन चंद्र पाल ने 6 अगस्त , 1906 को श्री अरबिंद घोष के संपादकत्व में की थी ।" ,"जहां तक हिंदी पत्रों का संबंध है , प्रारंभ में जो पत्र कलकत्ता से निकले , उन्हें सरकारी सहायता की अपेक्षा रहती थी , परंतु इस दृष्‍टि से सबसे महत्वपूर्ण भूमिका भारतेंदु हरिश्‍चंद्र की थी , जिन्होंने 1868 में ’ कविवचन सुधा ’ नामक एक कविता की पत्रिका निकाली परंतु बाद में उसमें गद्य भी सम्मिलित होता रहा ।" sg,"सन् 1885 में कालाकांकर से राजा रामपाल सिंह ने ’ हिन्दोस्तान ’ पत्र निकाला , जिसके प्रथम संपादक श्री मदनमोहन मालवीय थे ।" ,"वे श्री बालकृष्‍ण भट्ट की परंपरा के थे और उन्होंने न केवल ’ हिन्दोस्तान ’ के द्वारा बल्कि बाद में अन्य पत्रों के द्वारा , जिनका हम जिक्र कर चुके हैं , राष्‍ट्रीय आंदोलन को बढ़ाया ।" ,"कलकत्ता का एक प्रसिद्ध हिंदी समाचार पत्र ’ भारतमित्र ’ था , जो मई , 1878 को पाक्षिक पत्र के रूप में निकला ।" ,बाद में यह दैनिक हो गया और इस पत्र ने राष्‍ट्रीय आंदोलन में बहुत बड़ा योगदान दिया । sg,"पंडित सुंदरलाल ने इलाहाबाद से ’ कर्मयोगी ’ साप्‍ताहिक निकाला , जो उग्र विचारधारा का पत्र था और जिसमें अरविंद घोष के ’ कर्मयोगी ’ तथा लोकमान्य तिलक के ’ केसरी ’ में प्रकाशित लेख भी छपते थे ।" ,बहुत शीघ्र ही इसकी प्रसार संख्या दस हजार प्रतियां हो गई और इससे तंग आकर भारत सरकार ने 1908 और 1910 के दमनकारी कानूनों के अंतर्गत इसे बंद करा दिया । sg,"श्री सुंदरलाल जी की प्रेरणा और सहयोग से श्री शिवनारायण भटनागर ने उर्दू का ’ स्वराज्य ’ पत्र निकाला जिसके नौ संपादकों को राजद्रोह के अंतर्गत सजा हुई और एक के बाद एक जेल भेजे गए , कई को काले पानी की सजा हुई ।" ,लाहौर में महाशय खुशहाल चंद खुरसंद ने ’ मिलाप ’ और महाशय कृष्ण ने उर्दू पत्रों का प्रकाशन किया और ये पत्र भी राष्‍ट्रीय आंदोलन के प्रचारक रहे । ,पंजाब में राष्‍ट्रीय पत्रों की परंपरा काफी पुरानी रही है । sg,सन् 1881 में सरदार दयाल सिंह मजीठिया ने श्री सुरेंद्रनाथ बनर्जी के परामर्श से श्री शीतलाकांत चटर्जी के संपादकत्व में अंग्रेजी पत्र ’ ट्रिब्यून ’ का प्रकाशन आरंभ किया । ,"कुछ दिनों तक श्री बिपिनचंद्र पाल ने भी इस पत्र में संपादन किया और बाद में 1917 से श्री कालीनाथ राय , जो पहले ’ बंगाली ’ पत्र में काम कर रहे थे और जो 1911 में लाला लाजपत राय के ’ पंजाबी ’ पत्र के संपादक हुए थे , इसके संपादक हो गए और दिसंबर , 1945 तक इसके संपादक रहे ।" ,भारत का कोई प्रांत ऐसा नहीं था जिसने राष्‍ट्रीयता का प्रचार करने वाले पत्रों और पत्रकारों को जन्म न दिया हो । ,"बंबई से ’ बाम्बे क्रॉनिकल ’ तो निकला ही , उसके ही एक संपादक श्री बी. जी. हार्नीमैन ने ’ बाम्बे क्रॉनिकल ’ को उग्र राष्‍ट्रीयता का एक प्रबल पत्र बना दिया ।" ,बिहार के राष्‍ट्रीय पत्रों में श्री सच्चिदानंद सिन्हा द्वारा स्थापित ’ सर्चलाइट ’ पत्र श्री मुरली मनोहर सिन्हा के संपादकत्व में राष्‍ट्रीय आंदोलन का बड़ा पक्षधर रहा । ,बिहार के हिंदी पत्रों में श्री देवव्रत शास्‍त्री द्वारा स्थापित ’ नवशक्‍ति ’ और ’ राष्‍ट्रवाणी ’ राष्‍ट्रीय आंदोलन के पत्र रहे । ,’ साप्‍ताहिक ’ ’ साप्‍ताहिक योगी ’ ’ योगी ’ और ’ हुंकार ’ ने भी जनजागरण में योगदान दिया । ,स्वतंत्रता आंदोलन में पत्रकारों के योगदान का इतिहास वस्तुत: स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास है क्योंकि या तो पत्र का संपादक स्वयं स्वतंत्रता का नेता हो गया या नेता ने अपने विचारों को प्रकट करने के लिए पत्र निकालना आवश्यक समझा । sg,"स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में ही 8 जून , 1854 को कोलकाता से बाबू श्याम सुंदर सेन ने हिंदी का पहला दैनिक पत्र ’ समाचार सुधारवर्षण ’ प्रकाशित किया ।" ,गणना में यह तिथि 9 जून निकलती है । ,यह एक द्विभाषी पत्र था जिसमें बंगला और हिंदी भाषा में मजमून प्रकाशित किए जाते थे । ,किंतु शीर्षक से ही पता चल जाता है कि हिंदी को पर्याप्‍त महत्व दिया जाता था । ,"’ समाचार सुधावर्षण ’ का प्रकाशन जब आरंभ हुआ , तब तक भारत में पत्रकारिता 75 वर्षों के अनुभवों से समृद्ध हो चुकी थी ।" ,कोलकाता इसका उद्‍गम और प्रमुख केंद्र था । ,"यद्यपि दैनिक समाचार पत्र तो उस समय उंगलियों पर गिने जा सकने लायक ही थे , किंतु तब तक देश के विभिन्न स्थानों से भिन्न - भिन्न भाषाओं में बीसियों साप्‍ताहिक / पाक्षिक / मासिक समाचार पत्र निकल रहे थे ।" sg,"समाज को शिक्षित , सूचित और प्रेरित करने की भूमिका निभा रहे थे ।" ,दीर्घकालीन योजनाओं पर अधिक बल दिया गया । ,योजना का उद्देश्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना ही नहीं वरन् ग्रामीण जीवन का समग्र विकास करना भी था । sg,कृषि योजनाओं को संगठित करने तथा सिंचाई व शक्‍ति संबंधी साधनों का प्रबंध करने का कार्य पूर्णतः राज्य सरकारों को दिया गया । ,केन्द्रीय सरकार का उत्तरदायित्व विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा चलाई गई योजनाओं में समन्वय स्थापित करना था । ,द्वितीय पंचवर्षीय योजना और कृषि - ,दूसरी पंचवर्षीय योजना की शुरुआत सन् 1956 में हुई । ,इसके तहत उद्योग के विकास को प्रमुखता दी गई फिर भी कृषि - उत्पादन बढ़ाने के महत्त्व को कम नहीं किया गया । ,कृषि नियोजन की दृष्‍टि से इस योजना की निम्नलिखित विशेषताएँ थीं । ,कृषि नियोजन इस ढंग से किया जाए कि उससे बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए खाद्यान्न प्राप्‍त हो सकें तथा उद्योगों को कच्चा माल मिल सके । ,कृषि उत्पादन का विविधिकरण किया जाये अर्थात खाद्यान्न के साथ - साथ व्यापारिक फसलों को बढ़ाने पर ध्यान दिया जाए । sg,साधन कुशल और उन्नत रीतियों द्वारा कृषि उत्पादकता बढ़ाई जाये । ,तृतीय पंचवर्षीय योजना और कृषि - sg,तृतीय पंचवर्षीय योजना के तहत पुनः कृषि विकास को प्रमुख उद्देश्य बनाया गया । ,चौथी योजना पंचवर्षीय और कृषि - sg,इस पंचवर्षीय योजना में कृषि विकास को उच्च प्राथमिकता दी गई । ,"यही नहीं चौथी योजना में उन उद्योगों में विकास पर भी बल दिया गया जो कृषि आदान उर्वरक , मशीनरी आदि उपलब्ध कराते हैं ।" ,पाँचवीं पंचवर्षीय योजना और कृषि - ,इस पंचवर्षीय योजना में कृषि के विकास को पर्याप्‍त महत्व दिया गया और कृषि क्षेत्र में प्रतिवर्ष 4.67 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया गया था । ,छठी पंचवर्षीय योजना के दौरान कृषि विज्ञान हेतु प्रमुखतः निम्न कदम उठाये गये । ,शुष्क भूमि खेती - ,सन् 1970 - 71 में शुष्क भूमि कृषि विकास कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी । ,छठीं योजना में इस कार्यक्रम के अन्तर्गत कृषि उत्पादन बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया है । ,कृषि शिक्षा में अनुसंधान - sg,कृषि संबंधी विकास विभागों तथा कृषि विश्‍वविद्यालयों के मध्य समन्वय स्थापित किया जाएगा । ,कृषि विकास में वांछनीय विकास और उत्पादन में स्थायित्व की दृष्‍टि से आवश्यक शोधकार्यों की व्यवस्था के रुप में कृषि विश्‍वविद्यालय को विशिष्‍ट भूमिका निभानी होगी । ,उर्वरकों का उपयोग - ,रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग को अधिक महत्त्व दिया गया जिससे कृषि उत्पादन में तीव्र गति से वृद्धि हो सके । ,आठवीं पंचवर्षीय योजना और कृषि - ,यह पंचवर्षीय योजना कृषि नियोजन से सम्बन्धित थी । ,"कृषि के विकास पर 22,467 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान था ।" ,"इसमें से 34,425 करोड़ रुपये ग्रामीण विकास पर NULL , 6750 करोड़ रुपये विशेष क्षेत्र कार्यक्रम तथा 35,525 करोड़ रुपये सिंचाई तथा बाढ़ नियंत्रण कार्यक्रम पर खर्च किए गए ।" ,इस प्रकार कुल व्यय का 22.2 प्रतिशत भाग कृषि विकास से सम्बन्धित कार्यक्रमों के लिये था । ,खाद्यान्न के मामले में आत्म - निर्भरता तथा कृषि उत्पादन का विविधिकरण करके निर्यात में वृद्धि करना इस योजना का मुख्य लक्ष्य था । ,नौवीं पंचवर्षीय योजना और कृषि - ,इस योजना के अन्तर्गत कृषि विकास कार्यक्रम ,सरकार द्वारा घोषित नीति ` भोजन सुरक्षा ` पर आधारित थी जिसका प्रमुख लक्ष्य कृषि उत्पादन को दुगुना करना था जिससे भारत को अगले दस वर्षों में ` भूख मुक्‍त ` किया जा सके । sg,नौवीं पंचवर्षीय योजना में कृषि विकास की वार्षिक दर 4.5 प्रतिशत रखी गई । ,इस पंचवर्षीय योजना में सीमान्त तथा लघु किसानों के उत्थान के लिए भी कदम उठाने का सुझाव दिया गया । ,अधोसंरचना तथा सिंचाई पर भी विशेष ध्यान दिया गया । pl,पहाड़ी पिछड़े तथा जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए क्षेत्रीय कार्यक्रम चलाए गए । pl,कृषि साख को बढ़ाने के उपाय भी बतलाये गए । ,"कृषि संबंधित क्षेत्रों जैसे : बागवानी , मछली पालन , पशुपालन एवं डेयरी के विकास को कृषि उत्पादों के निर्यात तथा सहकारिता को भी बढ़ावा देने के सुझाव दिये गये ।" ,दसवीं पंचवर्षीय योजना और कृषि - ,"इस योजना के दौरान कृषि तथा संबंधित क्रियाओं पर 58,933 करोड़ रु. व्यय करने का प्रावधान था ।" ,"इस योजना में कृषि विकास के लिए सिंचाई , बीजों , शक्‍ति और सड़कों में अधिक सार्वजनिक निवेश किया जाएगा ।" ,"परन्तु उर्वरकों , जल तथा शक्‍ति के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता को कम किया जाएगा ।" ,नहर प्रणाली का सही ढंग से रख - रखाव किया जाएगा । ,"खाद्यान्न तथा अन्य वस्तुओं की न्यूनतम समर्थन कीमतों को इस प्रकार से समन्वित किया जाएगा ताकि कृषि में विविधिकरण , पर्यावरण संबंधी सुरक्षा को प्रोत्साहन मिले तथा खाद्यान्न अनुदान को कम किया जाए ।" ,हमारे देश में सीमान्त किसानों के पास कृषि योग्य भूमि का 76 प्रतिशत भाग है । ,इसके अतिरिक्‍त जो छोटे किसान हैं उनके पास बहुत कम कृषि योग्य भूमि है । ,वे कृषि से मात्र जीविका यापन ही कर पाते हैं । ,कृषि एक ऐसा कार्य है जो पूर्णतः प्रकृति पर आधारित है । ,"प्राकृतिक प्रकोप जैसे बाढ़ , सूखा आदि के दौरान किसान विवश हो जाता है ।" ,"इन आकस्मिक प्राकृतिक विपदाओं की खेती पर मार , डीजल , उर्वरकों , कीटनाशी व कृषि यन्त्रों के लगातार बढ़ते मूल्य अर्थात् महँगाई की मार से सबसे ज्यादा लघु या सीमान्त कृषक वर्ग पीड़ित है , परन्तु इनकी समस्यायें पिछले कुछ दशकों से ज्यों - की - त्यों हैं ।" ,"अगर सही दिशा में हमें कृषि उत्पादन बढ़ाना है , तो कृषि समस्याओं पर विशेष ध्यान देना अति आवश्यक है ।" ,हमारे देश में गेहूँ का उत्पादन सन् 2001 - 02 में 731 लाख टन है । ,"उत्तर प्रदेश देश का प्रथम राज्य है , जहाँ सबसे ज्यादा गेहूँ का उत्पादन हुआ है ।" ,इसके बाद क्रमशः पंजाब व हरियाणा का स्थान है । ,भारत में कुछ ही ऐसे राज्य हैं जिनकी कृषि उत्पादकता अधिक है । ,भारत में निम्मलिखित कारणों से कृषि उत्पादकता कम रहती है - ,"हमारे देश के अधिकांश किसान कम पढ़े - लिखे हैं और धर्म , जाति आदि के बारे में उनका परम्परावादी दृष्‍टिकोण है , जिसके कारण वे आधुनिक तकनीकों को अपनाने में सकुचाते हैं ।" ,मलेरिया या दुर्वात एक वाहक -JOIN जनित संक्रामक रोग है जो प्रोटोज़ोआ परजीवी द्वारा फैलता है । ,"यह मुख्य रूप से अमेरिका , एशिया और अफ्रीका महाद्वीपों के उष्ण तथा उपोष्ण कटिबंधी क्षेत्रों में फैला हुआ है ।" ,प्रत्येक वर्ष यह ५१.५ करोड़ लोगों को प्रभावित करता है तथा १० से ३० लाख लोगों की मृत्यु का कारण बनता है जिनमें से अधिकतर उप -JOIN सहारा अफ्रीका के युवा बच्चे होते हैं । ,मलेरिया को आमतौर पर गरीबी से जोड़ कर देखा जाता है किंतु यह खुद अपने आप में गरीबी का कारण है तथा आर्थिक विकास का प्रमुख अवरोधक है । ,मलेरिया सबसे प्रचलित संक्रामक रोगों में से एक है तथा भंयकर जन स्वास्थ्य समस्या है । ,"यह रोग "" प्लास्मोडियम "" गण के प्रोटोज़ोआ परजीवी के माध्यम से फैलता है ।" sg,"केवल चार प्रकार के "" प्लास्मोडियम "" ( "" Plasmodium "" ) परजीवी मनुष्य को प्रभावित करते हैं जिनमें से सर्वाधिक खतरनाक "" प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम "" ( "" Plasmodium falciparum "" ) तथा "" प्लास्मोडियम विवैक्स "" ( "" Plasmodium vivax "" ) माने जाते हैं , साथ ही "" प्लास्मोडियम ओवेल "" ( "" Plasmodium ovale "" ) तथा "" प्लास्मोडियम मलेरिये "" ( "" Plasmodium malariae "" ) भी मानव को प्रभावित करते हैं ।" ,इस सारे समूह को ' मलेरिया परजीवी ' कहते हैं । ,"मलेरिया के परजीवी का वाहक मादा "" एनोफ़िलेज़ "" ( "" Anopheles "" ) मच्छर है ।" ,"इसके काटने पर मलेरिया के परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं में प्रवेश करके बहुगुणित होते हैं जिससे रक्तहीनता ( एनीमिया ) के लक्षण उभरते हैं ( चक्कर आना , साँस फूलना , द्रुतनाड़ी इत्यादि ) ।" sg,"इसके अलावा अविशिष्ट लक्षण जैसे कि बुखार , सर्दी , उबकाई और जुखाम जैसी अनुभूति भी देखीं जाती हैं ।" ,गंभीर मामलों में मरीज मूर्च्छा में जा सकता है और मृत्यु भी हो सकती है । ,मलेरिया के फैलाव को रोकने के लिए कई उपाय किये जा सकते हैं । ,"मच्छरदानी और कीड़े भगाने वाली दवाएं मच्छर काटने से बचाती हैं , तो कीटनाशक दवा के छिडकाव तथा स्थिर जल ( जिस पर मच्छर अण्डे देते हैं ) की निकासी से मच्छरों का नियंत्रण किया जा सकता है ।" ,"मलेरिया की रोकथाम के लिये यद्यपि टीके / वैक्सीन पर शोध जारी है , लेकिन अभी तक कोई उपलब्ध नहीं हो सका है ।" ,मलेरिया से बचने के लिए निरोधक दवाएं लम्बे समय तक लेनी पड़ती हैं और इतनी महंगी होती हैं कि मलेरिया प्रभावित लोगों की पहुँच से अक्सर बाहर होती हैं । ,मलेरिया प्रभावी इलाके के ज्यादातर वयस्क लोगों में बार -JOIN बार मलेरिया होने की प्रवृत्ति होती है । ,"साथ ही उनमें इस के विरूद्ध आंशिक प्रतिरोधक क्षमता भी आ जाती है , किंतु यह प्रतिरोधक क्षमता उस समय कम हो जाती है जब वे ऐसे क्षेत्र में चले जाते हैं जो मलेरिया से प्रभावित नहीं हों ।" ,यदि वे प्रभावित क्षेत्र में वापस लौटते हैं तो उन्हे फिर से पूर्ण सावधानी बरतनी चाहिए । ,मलेरिया संक्रमण का इलाज कुनैन या आर्टिमीसिनिन जैसी मलेरियारोधी दवाओं से किया जाता है यद्यपि दवा प्रतिरोधकता के मामले तेजी से सामान्य होते जा रहे हैं । ,"मलेरिया मानव को ५०,००० वर्षों से प्रभावित कर रहा है शायद यह सदैव से मनुष्य जाति पर परजीवी रहा है ।" ,इस परजीवी के निकटवर्ती रिश्तेदार हमारे निकटवर्ती रिश्तेदारों में यानि चिम्पांज़ी में रहते हैं । ,जब से इतिहास लिखा जा रहा है तबसे मलेरिया के वर्णन मिलते हैं । ,सबसे पुराना वर्णन चीन से २७०० ईसा पूर्व का मिलता है । ,"मलेरिया शब्द की उत्पत्ति मध्यकालीन इटालियन भाषा के शब्दों "" माला एरिया "" से हुई है जिनका अर्थ है ' बुरी हवा ' ।" ,"इसे ' दलदली बुखार ' ( अंग्रेजी : marsh fever , मार्श फ़ीवर ) या ' एग ' ( अंग्रेजी : ague ) भी कहा जाता था क्योंकि यह दलदली क्षेत्रों में व्यापक रूप से फैलता था ।" ,मलेरिया पर पहले पहल गंभीर वैज्ञानिक अध्ययन १८८० में हुआ था जब एक फ़्रांसीसी सैन्य चिकित्सक चार्ल्स लुई अल्फोंस लैवेरन ने अल्जीरिया में काम करते हुए पहली बार लाल रक्त कोशिका के अन्दर परजीवी को देखा था । ,तब उसने यह प्रस्तावित किया कि मलेरिया रोग का कारण यह प्रोटोज़ोआ परजीवी है । sg,इस तथा अन्य खोजों हेतु उसे १९०७ का चिकित्सा नोबेल पुरस्कार दिया गया । sg,"इस प्रोटोज़ोआ का नाम "" प्लास्मोडियम "" इटालियन वैज्ञानिकों एत्तोरे मार्चियाफावा तथा आंजेलो सेली ने रखा था ।" sg,इसके एक वर्ष बाद क्युबाई चिकित्सक कार्लोस फिनले ने पीत ज्वर का इलाज करते हुए पहली बार यह दावा किया कि मच्छर रोग को एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य तक फैलाते हैं । ,किंतु इसे अकाट्य रूप प्रमाणित करने का कार्य ब्रिटेन के सर रोनाल्ड रॉस ने सिकंदराबाद में काम करते हुए १८९८ में किया था । ,इन्होंने मच्छरों की विशेष जातियों से पक्षियों को कटवा कर उन मच्छरों की लार ग्रंथियों से परजीवी अलग कर के दिखाया जिन्हें उन्होंने संक्रमित पक्षियों में पाला था । ,इस कार्य हेतु उन्हें १९०२ का चिकित्सा नोबेल मिला । ,"बाद में भारतीय चिकित्सा सेवा से त्यागपत्र देकर रॉस ने नवस्थापित लिवरपूल स्कूल ऑफ़ ट्रॉपिकल मेडिसिन में कार्य किया तथा मिस्र , पनामा , यूनान तथा मारीशस जैसे कई देशों में मलेरिया नियंत्रण कार्यों में योगदान दिया ।" ,फिनले तथा रॉस की खोजों की पुष्टि वाल्टर रीड की अध्यक्षता में एक चिकित्सकीय बोर्ड ने १९०० में की । ,"इसकी सलाहों का पालन विलियम सी. गोर्गस ने पनामा नहर के निर्माण के समय किया , जिसके चलते हजारों मजदूरों की जान बच सकी ।" ,इन उपायों का प्रयोग भविष्य़ में इस बीमारी के विरूद्ध किया गया । ,मलेरिया के विरूद्ध पहला प्रभावी उपचार सिनकोना वृक्ष की छाल से किया गया था जिसमें कुनैन पाई जाती है । ,यह वृक्ष पेरु देश में एण्डीज़ पर्वतों की ढलानों पर उगता है । ,इस छाल का प्रयोग स्थानीय लोग लम्बे समय से मलेरिया के विरूद्ध करते रहे थे । sg,"जीसुइट पादरियों ने करीब १६४० इस्वी में यह इलाज यूरोप पहुँचा दिया , जहाँ यह बहुत लोकप्रिय हुआ ।" ,परन्तु छाल से कुनैन को १८२० तक अलग नहीं किया जा सका । ,"यह कार्य अंततः फ़्रांसीसी रसायनविदों पियेर जोसेफ पेलेतिये तथा जोसेफ बियाँनेमे कैवेंतु ने किया था , इन्होंने ही कुनैन को यह नाम दिया ।" ,"बीसवीं सदी के प्रारंभ में , एन्टीबायोटिक दवाओं के अभाव में , उपदंश ( सिफिलिस ) के रोगियों को जान बूझ कर मलेरिया से संक्रमित किया जाता था ।" ,इसके बाद कुनैन देने से मलेरिया और उपदंश दोनों काबू में आ जाते थे । ,"यद्यपि कुछ मरीजों की मृत्यु मलेरिया से हो जाती थी , उपदंश से होने वाली निश्चित मृत्यु से यह नितांत बेहतर माना जाता था ।" ,"यधपि मलेरिया परजीवी के जीवन के रक्त चरण और मच्छर चरण का पता बहुत पहले लग गया था , किंतु यह 1980 में जा कर पता लगा कि यह यकृत में छिपे रूप से मौजूद रह सकता है ।" ,इस खोज से यह गुत्थी सुलझी कि क्यों मलेरिया से उबरे मरीज वर्षों बाद अचानक रोग से ग्रस्त हो जाते हैं । ,"मलेरिया प्रतिवर्ष ४० से ९० करोड़ बुखार के मामलों का कारण बनता है , वहीं इससे १० से ३० लाख मौतें हर साल होती हैं , जिसका अर्थ है प्रति ३० सैकेण्ड में एक मौत ।" ,भंडाफोड़ की पत्रकारिता एक हद तक ही लाभ दे सकती है । ,आवश्यकता इस बात की है कि जन सामान्य से जुड़ी समस्याओं और विकास प्रक्रिया की गहराई में जाने की कोशिश हरेक पत्रकार करे । ,सतही सूचनाओं को इक‍ट्ठा करने का मतलब पीकदान बनाने जैसा है । ,भारतीय अखबारों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे आज भी राजनीति से अधिक प्रभावित होते हैं । ,अधिकाधिक स्थान राजनीतिक उठा - पटक से जुड़ी खबरों को दिया जाता है । sg,भारतीय पत्रकारिता का आरंभ कलकत्ता से माना जाता है । ,"यह वह समय था जब अंग्रेजी भाषा का ज्ञान होना , उसे अपनाया जाना आधुनिकता की पहचान के लिए जरूरी समझा जाता था ।" ,भारत में इस आधुनिकता तथा नवजागरण का नेतृत्व राजा राममोहन राय ने किया जो एक समाज सुधारक तथा प्रगतिवादी दृष्‍टिकोण वाले व्यक्‍ति थे । ,ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत में मुद्रण कला व पत्रकारिता के मार्ग में अनेक प्रकार के अवरोध उत्पन्न करने के बावजूद भारत में पत्रकारिता की नींव पड़ी । ,हालांकि यह बात अलग और अपने आप में आश्‍चर्यजनक है कि भारत में पत्रकारिता की नींव अंग्रेजों ने ही डाली । ,इसी तरह अखबारों के प्रकाशन का आरंभ तो हुआ किंतु फिर भी अंग्रेज सरकार की दमनकारी नीति चालू रही । pl,वे सदैव ही भारत की भूमि से निकलने वाले समाचार पत्रों को शंका की दृष्‍टि से देखते थे । ,अंग्रेजों की इसी शंका के कारण भारतीय समाचार पत्रों की स्वतंत्रता पर अनेकानेक प्रहार किए गए । ,जिन समाचार पत्रों का क्रिश्‍चियन मिशनरी द्वारा संचालन हुआ करता था उनको ब्रिटिश सरकार प्रोत्साहन देती थी । ,इसी प्रोत्साहन के बल पर हिंदी के प्रमुख केंद्रों से भी ईसाई पत्रों का प्रकाशन व प्रसारण होने लगा । ,ये मिशनरी पत्र ईसाई पत्रों का सम्मान करते थे और भारत के सांस्कृतिक गौरव का विनाश करना चाहते थे । sg,इस तरह के अन्याय को राजा राममोहन राय सहन नहीं कर पाए । ,राजा राममोहन राय के ऐसे विनयशील भाव से भी अंग्रेज शासक द्रवित नहीं हुए और भारत में पत्र प्रकाशन के प्रति निरंतर विरोध बनाए रखा । ,मद्रास के गवर्नर सर टॉमस मुनरो ने प्रेस को स्वतंत्रता देना अपने लिए खतरनाक माना । pl,"प्रारंभिक समय में जिन समाचार पत्रों का प्रकाशन भारत में हुआ , उन पत्रों को अंग्रेज अंग्रेजी भाषा में छपवाते थे ।" ,इन समाचार पत्रों का काम जनता के लिए मनोरंजन की सामग्री व सूचनाएं देना था । ,वे पत्र राजनीति से संबंधित नहीं होते थे । ,सन् 1818 से पहले भारतीय भाषाओं में समाचार पत्र प्रकाशित नहीं हुए । ,"बंगाल , बिहार , उत्तर प्रदेश में पत्रों के आरंभ की आधी शती गुजर जाने के बाद राजस्थान में इसकी शुरुआत प्रारंभिक चरण में ही थी , राजस्थान का सर्वप्रथम पत्र ’ मजहरुल सरूर ’ माना जाता है ।" ,यह द्विभाषी पत्र हिंदी में सन् 1849 में भरतपुर से प्रकाशित हुआ था । ,भारत से निकलने वाले ज्यादातर पत्र द्विभाषी थे । ,इनमें पूर्णत: हिंदी का प्रथम दैनिक 1885 में कालाकांकर से राजा रामपाल सिंह का दैनिक ’ हिन्दोस्थान ’ एवं कानपुर से बाबू सीताराम का ’ भारतोदय ’ थे । ,भारतीय स्वातंत्र्य चेतना का प्रसार करने वाली भारतीय पत्रकारिता पर अंग्रेजों की दमनकारी नीति से यहां उसके विकास में अनेक बाधाएं उत्पन्न हुईं । ,किंतु अंग्रेजों में भी आपसी विरोध कुछ कम नहीं था । ,उक्‍त विवाद के कारण अमेरिका में सनसनीखेज व उत्तेजनात्मक पत्रकारिता का प्रारंभ हुआ । ,इसे पत्रकारिता के इतिहास में ’ पीत पत्रकारिता ’ कहकर संबोधित किया जाता है । sg,उन दिनों पुलित्जर और हर्स्ट अपने - अपने पत्रों की व्यंग्य चित्रपट्टी पीली स्याही में छापा करते थे । ,कदाचित् इस स्याही को ध्यान में रखकर ही सनसनीखेज और पक्षपातपूर्ण पत्रकारिता का नाम ’ येलो जर्नलिज्म ’ या पीत पत्रकारिता पड़ा । ,जब 1898 में लॉर्ड कर्जन भारत के वायसराय बने तो अंग्रेज सरकार के पास भारतीय समाचार पत्रों पर नियंत्रण रखने के लिए काफी शक्‍ति थी । ,उस समय भारत में समाचार पत्र दो प्रकार के थे - एक वे समाचार पत्र जो अंग्रेजी भाषा में अंग्रेजों द्वारा प्रकाशित किए जाते थे । ,उन्हें एंग्लो - इंडियन अखबार कहा जाता था । ,"दूसरे वे समाचार पत्र जो भारतीयों द्वारा विभिन्न भारतीय भाषाओं , हिंदी तथा अंग्रेजी में प्रकाशित किए जाते थे ।" ,कलकत्ता से आगरा होकर बंबई और बंबई से मद्रास तथा आगरा से पेशावर तक की तार की लाइनें 1855 में ही खोली थीं । sg,उससे पहले 20 वर्षों तक दूरी के हिसाब से डाक - टिकट देना पड़ता था । ,"समाचार पत्रों को ले जाने वाली रेलवे लाइनें भी 1857 में शुरू हुई , जब 274 मील की रेलवे लाइनें खोली गईं ।" ,"राजा राममोहन राय का ’ बंगदूत ’ जो एक साथ बंगला , हिंदी , फारसी और अंग्रेजी में छपता था , समाज सुधार का पत्र था ।" ,’ ज्ञाननेशन ’ भारतीय भाषाओं में शिक्षा की और बंगला भाषा को सरकारी भाषा की मांग करने के लिए प्रसिद्ध था । ,सन् 1857 में ही हिंदी के प्रथम दैनिक ’ समाचार सुधावर्षण ’ और उर्दू - फारसी के दो समाचार पत्रों ’ दूरबीन ’ और ’ सुलतान - उल - अखबार ’ के विरुद्ध यह मुकदमा चला कि उन्होंने बादशाह बहादुरशाह जफर का एक फरमान छापा जिसमें लोगों से मांग की गई थी कि अंग्रेजों को भारत से बाहर निकाल दें । ,"इस पत्र के संपादक श्री श्यामसुंदर सेन दिन भर की सुनवाई के बाद राजद्रोह के अपराध से मुक्‍त कर दिए गए और इसके बाद ही लॉर्ड केनिंग का प्रसिद्ध गैगिंग - एक्‍ट पारित हुआ , जिसमें समाचार पत्रों पर बहुत बंधन लगाए गए थे ।" ,"भारत में अंग्रेजी राज्य के विरुद्ध संघर्ष के क्षेत्र में जिन समाचार पत्रों का विशेष उल्लेख करना आवश्यक है , उनमें कलकत्ता का ’ हिन्द पेट्रियट ’ मुख्य था , जिसकी स्थापना 1853 में लेखक व नाटककार श्री गिरीशचंद्र घोष ने की थी और जो श्री हरीशचंद्र मुखर्जी के नेतृत्व में असाधारण लोकप्रियता प्राप्‍त कर गया ।" ,उन दिनों बंगाल में जैसोर से प्रकाशित एक साप्‍ताहिक पत्र चल रहा था जिसका नाम था - ’ अमृत बाजार पत्रिका ’ । ,इस पत्र के संचालकों पर सरकारी कर्मचारियों की आलोचना करने का मुकदमा चला और सजाएं हुईं । ,सन् 1871 में यह कलकत्ता से प्रकाशित होने लगा और विशेषतया इसी पत्र को दबाने के लिए 1878 का देशी भाषा पत्र कानून पास हुआ था । ,"लेकिन इस पत्र के संपादकों ने जिनमें श्री शिशिर कुमार घोष और श्री मोतीलाल घोष दो भाई थे , इसे रातोरात अंग्रेजी का पत्र बना दिया ।" ,इसके बाद यह पत्र भारतीय स्वाधीनता संग्राम का प्रबल समर्थक रहा । ,सर्वश्रेष्ठ गैर - फीचर फिल्म का पुरस्कार राजा शबीर खान की फिल्म ‘ शेफर्ड्स ऑफ पैराडाइज़ ‘ को दिया गया है जबकि सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ पुस्तक का पुरस्कार बीडी. गर्ग की ‘ साइलेंट सिनेमा ऑफ इंडिया ए पिक्टोरियल जर्नी ‘ को दिया गया है । ,"मुंबई आतंकी हमले पर बनी , चर्चित फिल्मकार रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘ द अटैक्स ऑफ 26 / 11 ` पर कुछ संवेदनशील दृश्यों के कारण संकट के बादल छा गए हैं ।" ,भारत पर हुए सबसे बड़े आतंकी हमले की सत्यकथा पर आधारित इस फिल्म के कुछ दृश्यों पर सरकार समेत सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को ऐतराज है । ,गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सेंसर बोर्ड से फिल्म को दोबारा देख कर कुछ दृश्यों की समीक्षा करने को कहा है । ,26 / 11 हमले के बाद विवादों से जुड़े रहे वर्मा की फिल्म पर सरकारी आपत्तियों को देख माना जा रहा है कि उन्हें कुछ दृश्यों से कांट - छांट करनी पड़ सकती है । sg,उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार गृह मंत्रालय ने सेंसर बोर्ड को पत्र लिखा है । ,इसमें कहा गया है कि देश की आंतरिक सुरक्षा की जवाबदेही गृह मंत्रालय की है । ,लिहाजा उसे ‘ द अटैक्स ऑफ 26 / 11 ‘ के बारे में विश्वास में रखा जाए । ,आपत्तियों की सूची के साथ मंत्रालय ने सेंसर बोर्ड से कुछ संवादों और दृश्यों में संशोधन कराने को भी कहा है । sg,सूत्रों के अनुसार खुफिया विभाग ने सरकार को आगाह किया कि फिल्म में हमले के दौरान राज्य और केंद्र सरकारों को हतप्रभ और दुविधा में दिखाया गया है । ,फिल्म में तीन दिन तक ताज होटल में पाकिस्तानी आतंकियों के साथ हुई खूनी जंग के दौरान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को फैसले लेने में देर करते और ढुलमुल रवैया अपनाते भी दिखाया गया है । ,नाना पाटेकर फिल्म में मुख्य पुलिस अधिकारी की भूमिका कर रहे हैं । ,फायदों के खेल में लोगों को आम आदमी की सच्ची आवाज से वाकिफ कराने वाले बेहद कम ही लोग हैं । sg,मशहूर व्यंग्यकार और जाने - माने पत्रकार अनुज खरे का नाम ऐसे ही कुछेक गिने - चुने लोगों में गिनाया जा सकता है । ,‘ चिल्लर चितंन ‘ के बाद खरे का यह दूसरा व्यंग्य संग्रह है । ,"खरे खुद मानते हैं कि कोई पत्ता न खड़के , किसी के अंदर हलचल न हो , कोई गुल न खिले , कोई व्यवस्था न बदले कोई खेल न हो तो लिखने से भला क्या फायदा ?" ,फायदे का यही मर्म उनके व्यंग्य की धार में नजर आता है । ,लेखक की मान्यता है कि खतरे न हों तो जिंदगी बदरंग हो जाती है । sg,लिहाजा दाद या दुत्कार की परवाह किए बिना उसने कलम चलाई है । ,"रूटीन के क्रांतिकारियों की खबर लेनी हो या क्रांति की संभावनाओं को पिघलने के कगार पर देखना , टुंडे विचारों का ताबूत उठाना हो या अपना कद किताबों पर खड़े होकर बढ़ने वालों की ‘ प्रशंसा ‘ करना अनुज एकदम खरे साबित हुए हैं ।" ,"उन्होंने निंदारस का लेटेस्ट वर्जन भी खोजा है और सिम्पैथी मैनेजमेंट को भी साधा है , वह लव का लोचा पकड़ पाने में कामयाब रहे हैं , तो मायके गई पत्नी को एक ठो बैरंग पत्र भी लिख मारे हैं ।" ,"उनकी भाषा में मस्तमौलापन और चौकन्नी तन्मयता है , जो पकड़ लेती है कि कहे जा रहे शब्द का निहितार्थ क्या है ।" ,लगभग 20 वर्षों के अंतराल के बाद किसी लेखक के नए रचनाकर्म का आना हैरानी भरा हो सकता है । ,लेकिन इस वजह से राजा खुगशाल जैसे लेखक के नए कविता संग्रह ‘ पहाड़ शीर्षक हैं पृथ्वी के ‘ को नजर अंदाज कतई नहीं किया जा सकता । ,1983 में ‘ संवाद के सिलसिले ‘ और 1991 में प्रकाशित ‘ सदी के शेष वर्ष ‘ के बाद यह राजा खुगशाल का तीसरा कविता संग्रह है । ,"उनकी कविताओं में समय , समाज , संस्कृति और व्यवस्था से लेकर पर्यावरण से जुड़ा चिंतन नजर आता है ।" ,इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि राजा खुगशाल ने कविता के प्रति अपनी निस्पृहता और उदासीनता के बीच अपने भीतर के कवि को जिंदा रखा है । ,लंबे अंतराल के बावजूद उनके भीतर के कवि ने अपने समय और समाज को कविताओं से ओझल नहीं होने दिया । ,राजा खुगशाल की कविताओं के कई रंग हैं । ,"कभी वे ‘ दुनिया का चेहरा ‘ कविता में बदलते चेहरों को बयां करते हैं , तो कभी ‘ भोटिये ‘ कविता में एक संस्कृति की कहानी कहते हैं ।" ,"‘ मील का पत्थर ‘ छोटी सी कविता है , लेकिन इसका अर्थ बहुत बड़ा है ।" pl,मील के पत्थरों को भी वे ‘ पथप्रदर्शक और सहयात्री ‘ मानते हैं । ,"इसी तरह ‘ अनंत में मौन ‘ ( स्व. शमशेर जी के प्रति सादर ) की काव्य भाषा सहज और सरल है , लेकिन कवित्व से रहित बिल्कुल नहीं ।" ,उन्होंने जो भी महसूस किया उसे आदर और सम्मान के साथ सहज भाषा में कविता का रूप दे दिया । ,शब्द अगर अभिव्यक्ति का माध्यम हैं तो नृत्य अभिव्यक्ति की एक शैली है । ,"सुर , ताल और लय से जुड़कर नृत्य सदियों से हमारी भावनाओं की जुबां बनता आया है ।" pl,मौसम बदले या माहौल हर अवसर के अनुसार एक अलग नृत्य ने हमारे देश की परंपराओं को समृद्ध किया है । ,"इन परंपराओं का योगदान तब और भी साफ नजर आता है , जब नृत्य के नाम से ही एक प्रदेश को पहचाना जाने लगता है ।" ,हालांकि हर विद्या के साथ कलाकार की अपनी विद्वता का भी बहुत महत्व है । ,जब कोई भी अच्छा कलाकार प्रस्तुति देता है तो इससे परंपरा मजबूत होती है । ,"इसमे खोज का भी अपना महत्व है क्योंकि कलाकार की कल्पना जितनी ऊंची होगी , प्रस्तुति उतनी ही अच्छी होगी ।" ,फिर चाहे राधा - कृष्ण को मंच पर लाएं या किसी और शीर्षक को अपनी कला से जोड़ें । ,"बेशक नए जमाने के लोग नए रंग में रंग चुके हैं , लेकिन इसके साथ ही यह भी दिलचस्प है कि शास्त्रीय संगीत और नृत्य जैसी प्राचीन कलाओं में रुचि लेने वालों की संख्या बढ़ रही है ।" ,इसकी सबसे बड़ी वजह कलाकारों का गहराई से काम करना कहा जाएगा । ,सांस्कृतिक - गतिविधियों से जुड़े कलाकार के भीतर अपनी कला के लिए आदर सम्मान और निष्ठा हो तो उसकी विधा हमेशा प्रासंगिक रहती है । ,यही हमारी सामाजिक - संस्कृति की पहचान है । ,भारत का शास्त्रीय नृत्य पूरी दुनिया में मशहूर है । ,वैसे भी नृत्य की कोई सरहद या सीमा नहीं होती है । ,अगर हमारे देश में यह प्राचीन पंरपरा है तो दुनिया भर में इसमें रचने - बसने वालों की भी कोई कमी नहीं है । ,"समय के साथ भले ही इसकी विधाओं में ज्यादा बदलाव नहीं आया है , पर इसमें भंगिमाओं और भावनाओं का जो मिश्रण है वह अद्भूत है ।" ,अंपायर की कार्रवाई से नाराज कप्तान इंजमाम ने टी - ब्रेक के बाद मैदान पर उतरने से इंकार कर दिया । ,पाकिस्तानी टीम के बॉयकॉट के बाद अंपायरों ने इंग्लैंड को उस टेस्ट का विजेता घोषित कर दिया था । ,बॉल टेंपरिंग में जेम्स एंडरसन का इतिहास अच्छा नहीं है । ,2010 में स्टुअर्ट ब्रॉड और एंडरसन ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ केपटाउन टेस्ट में बॉल टेंपरिंग की थी । ,दोनों गेंदबाजों ने गेंद को बदलने के लिए उसे जूते के स्पाइक्स के नीचे घिसा था । ,दोनों खिलाड़ियों की हरकत की आलोचना इंग्लैंड के कप्तान नासिर हुसैन ने भी की थी । ,2010 में पाकिस्तान के कप्तान रहे शाहिद आफरीदी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी - 20 मुकाबले में गेंद को ही चबाने लगे थे । ,उनकी हरकत जब कैमरे में कैद हुई तो अंपायर कार्रवाई करने को मजबूर हो गए । ,गेंद को आखिरकार बदला गया । ,2012 में श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए पहले टेस्ट के दौरान मेहमान टीम के क्रिस ब्रॉड और पीटर सिडल पर बॉल टेंपरिंग के आरोप लगे थे । ,श्रीलंकाई टीम के मुताबिक ये दोनों गेंदबाज बॉल की सीम बार - बार नाखून से उठा रहे थे । ,बाद में आईसीसी ने उन्हें बरी कर दिया । ,मुंबई । ,इस रणजी सीजन एक बेहद रोचक बात होने जा रही है । ,इतिहास में पहली बार एक चाचा - भतीजा की जोड़ी मुंबई टीम में हंगामा मचाने को तैयार है । ,सचिन तेंडुलकर और जहीर खान जैसे नेशनल टीम स्टार्स के अलावा कभी टीम इंडिया का हिस्सा रहे वसीम जाफर के भतीजे अरमान को मुंबई रणजी टीम के संभावितों में रखा गया है । ,"कहने को तो अरमान महज 14 साल के हैं , लेकिन उनके कारनामे उनकी उम्र से कहीं बड़े हैं ।" ,"जब सचिन तेंडुलकर ने स्कूली क्रिकेट में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर रणजी टीम में एंट्री मारी थी , तब उनकी उम्र भी कुछ अरमान के आसपास की ही रही थी ।" ,सचिन ने अपने टेलेंट को साबित करते हुए रणजी के डेब्यू मैच में ही सेंचुरी ठोकी थी । ,अब सभी की निगाहें अरमान पर टिक गई हैं । ,क्या वे भी सचिन की तरह यह कमाल कर पाते हैं या नहीं NULL । ,कहीं आप अरमान को भूल तो नहीं गए । ,यह वही अरमान है जिसने मास्टर ब्लास्टर के रिकॉर्ड को तोड़कर नया कीर्तिमान स्थापित किया था । ,मुंबई टीम के सेलेक्टर सुधीर नायक ने अरमान को संभावितों में शामिल कर अपना काम कर दिया है । ,अब देखने वाली बात है कि क्या वे सचिन के कारनामे को दोहरा पाते हैं या नहीं NULL । ,"अरमान का रिकॉर्ड साढ़े सात घंटे तक क्रीज पर मेहनत , 65 चौके , 16 छक्के और ढेर सारा मनोबल झोंकने के बाद अरमान जाफर ने रिजवी स्प्रिंगफील्ड स्कूल की ओर से खेलते हुए हैरिस शील्ड के मुकाबले में 473 रन बनाए थे ।" ,इससे पहले 2010 में उन्होंने जाइल्स शील्ड में 498 रन बनाए थे । ,अरमान में अपने चाचा की तरह ही रनों का अंबार लगाने के गुण हैं । ,"हालांकि , वसीम ने कभी उन्हें पर्सनल ट्रेनिंग नहीं दी ।" ,"चैंपियंस ट्रॉफी में अपनी जोरदार बल्लेबाजी से ' मैन ऑफ द टूर्नामेंट ' बने ओपनर शिखर धवन ने अपना सम्मान उत्तराखंड में आई आपदा के पीडितों को समर्पित कर जहां संवेदनशील इंसान होने का परिचय दिया , वहीं पिछले एक साल में शानदार प्रदर्शन करने वाले रवींद्र जडेजा की मैदान पर कामयाबी ने कई प्रमुख कारपोरेट घरानों का ध्यान खींचा है ।" ,चैंपियंस ट्रॉफी में भारत की खिताबी जीत के दौरान सर्वाधिक विकेट चटकाने के लिए ' गोल्डन बॉल ' पुरस्कार जीतने वाले जडेजा को कुछ राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय ब्रांड से विज्ञापन की आकर्षक पेशकश मिल रही हैं । ,"फाइनल में दो विकेट लेने के अलावा जडेजा ने 33 रन की महत्वपूर्ण पारी भी खेली थी , जिससे भारतीय टीम मेजबान इंग्लैंड को 129 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य देने में सफल रही ।" ,"सौराष्ट्र के इस ऑलराउंडर का प्रबंधन करने वाली कंपनी रिती स्पोर्ट्स के अरुण पांडे ने कहा , फिलहाल हम पेशकश का मूल्यांकन कर रहे हैं ।" ,आप जल्द ही देखेंगे कि कुछ काफी महत्वपूर्ण ब्रांड ने स्वयं को जडेजा के साथ जोड़ लिया है । ,उन्होंने कहा कि मैदान पर सफलता के साथ जडेजा ने अपनी छवि सुधारने पर भी काफी काम किया है । ,"जडेजा की नई हेयरस्टाइल , मूंछें और टैटूज उनको निश्चित तौर पर बाकी खिलाड़ियों से अलग करती है ।" ,पिछले कुछ समय में जडेजा की लोकप्रियता में काफी इजाफा हुआ है । ,कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने भी आईपीएल के पिछले सत्र के दौरान ट्विटर पर ' सर जडेजा जोक्स ' लिखे जो काफी लोकप्रिय रहे । ,उनके लिए सब कुछ ठीक रास्ते पर चल रहा है । ,आने वाले दिनों में ' ब्रांड जडेजा ' बाजार में छा जाए तो किसी को हैरानी नहीं होगी । ,टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन की बदौलत आईसीसी वनडे रैंकिंग में 21 स्थान की लंबी छलांग लगाई है और वे 29वें स्थान पर पहुंच गए हैं जबकि टूर्नामेंट में सर्वाधिक विकेट लेने वाले रवींद्र जडेजा गेंदबाजी रैंकिंग में तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं । ,धवन और जडेजा की यह सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग है । ,धवन के अब 607 रेटिंग अंक हैं जबकि जडेजा के 724 रेटिंग अंक हैं । ,विराट कोहली तीसरे स्थान पर बरकरार हैं जबकि शून्य पर आउट होने वाले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी एक स्थान खिसककर पांचवें नंबर पर आ गए हैं । ,इंग्लैंड के जोनाथन ट्रॉट चौथे नंबर पर पहुंच गए हैं । ,दक्षिण अफ्रीका के एबी डीविलियर्स और हाशिम अमला चोटी के दो स्थानों पर बने हुए हैं । ,बल्लेबाजी रैंकिंग में सुरेश रैना एक स्थान गिरकर 16वें नंबर पर पहुंच गए हैं जबकि रोहित शर्मा नौ स्थान के सुधार के साथ 49वें स्थान पर और जडेजा आठ पायदान चढ़कर 52वें नंबर पर पहुंच गए हैं । ,वेस्टइंडीज के सुनील नरेन पहले और पाकिस्तान के सईद अजमल दूसरे स्थान पर हैं । ,भारत के तेज गेंदबाज इशांत शर्मा ने चार स्थान के सुधार के साथ 51वां स्थान हासिल कर लिया है । ,भुवनेश्वर कुमार ने 29 स्थान की लंबी छलांग लगाई है और वह 78वें नंबर से 49वें स्थान पर पहुंच गए हैं । ,जडेजा ऑलराउंडर रैंकिंग में अपनी सर्वश्रेष्ठ रेटिंग 378 हासिल करते हुए तीसरे स्थान पर हैं । ,कामू - क्या बात है बडे बाबू माथे पर हाथ । ,अभी तो दिन की शुरूआत है । ,साहब से फटकार पड़ गयी क्या ? ,बड़े बाबू - कोई काम है तो बोलो । ,क्यों भूमिका बना रहे हो ? ,दूसरों की बातें क्यों कान लगाकर सुनते हो ? ,अच्छी आदत नहीं है । ,कामू - बड़े बाबू दीवारों को भी कान होते हैं । ,आपने तो सुना ही होगा । ,दिल के जख्म को सहलाते हुए भी आप वफादारी पर खरे उतर रहे हो । ,बॉस हैं कि आपको दोयम दर्जे के आदमी के अलावा और कुछ समझते ही नहीं । ,बड़े बाबू इतने पढ़े लिखे होकर भी दोयम दर्जे के आदमी माने जाते हो । ,आपके दिल पर क्या गुजरती होगी समझदार आदमी अनुभव कर सकता है । ,आपके दिल पर कितने गहरे - गहरे घाव हैं सब जानते हैं । ,हम से भी कुछ छिपा नहीं है । ,बड़ा बाबू - बॉस तो बॉस हैं । ,घर के मुखिया की तरह बॉस होते हैं । ,हमें उनका सम्मान करना चाहिये । ,कामू - साहब ईमानदारी बरतें सभी के साथ समानता का व्यवहार रखें तब ना । ,बड़े बाबू - कामू हमें तो अपना फर्ज पूरा करना है कुर्सी को सलाम करना है । ,कामू - साहब हैं कि आपको दोयम दर्जे का आदमी समझते हैं आप हो कि पूंछ हिलाते रहते हो । ,बड़े बाबू - कामू पूंछ हिलाने जैसी कोई बात नहीं है । ,बात है नैतिक दायित्व समझकर व्यवहार करने की । ,हम नौकरी करने आये हैं । ,किसी से व्यक्तिगत लड़ाई तो नहीं ना । ,कामू - बड़े बाबू आदमी के सिद्धान्त भी कुछ होते हैं नैतिक दायित्व के साथ । ,बड़े बाबू - तुम्हारी बात समझता हूं पर दूसरा अवहेलना कर रहा है तो कम से कम हम तो मानवीय सिद्धान्त और नैतिक दायित्व पर खरे उतरें । ,कामू - बड़े बाबू यहां हर आदमी के लिये अलग - अलग डण्डे हैं । ,आदमी को देखकर व्यवहार होता है । ,इस संस्था में सामन्तवाद की जड़ें अभी बहुत गहराई तक हैं । ,"बड़े बाबू भले ही बन गये हो अपनी शिक्षा की वजह से पर रूतबा तो नहीं बढा है , हो तो दोयम दर्जे के आदमी ।" ,आपको तो बड़ा साहब होना चाहिये था पर मामूली सी क्लर्क की नौकरी कर रहे हो डांट - डपट सुनकर । ,यहां तो जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली कहावत चरितार्थ है ऊपर से नीचे तक । ,आप जैसे लोग कितने पढ़े लिखे क्यों न हों पर ऊपर नहीं पहुंच पायेगें वहीं दूसरी ओर सामन्तवाद के पोषक दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहे हैं । ,न्यूनतम् शैक्षणिक योग्यता वाले ऊँचे - ऊँचे ओहदों पर बैठे हुए हैं । ,आप जैसे दोयम दर्जे के अधिक पढ़े - लिखे विषय विशेषज्ञ लोग भी बाबूगीरी कर रहे हैं या धक्के खा रहे हैं । ,खैर कर भी क्या सकते हैं ? ,सुनने वाला भी कोई नहीं है । ,"यहां तो पांत - पांत पर काग बैठे हुए हैं , सम्भावना बनी नहीं मौका ले उड़े ।" ,आप जैसे लोग खुद के सपनों का जनाजा खुद के कंधों पर ढ़ो रहे हैं आंखों में आंसू लिये । ,बड़े बाबू - व्यवस्था में दोष है । ,समय के साथ बदलाव आयेगा । ,कामू - लोकतन्त्र की बयार में सामन्तवाद का बवण्डर खतरा है सदियों से शोषितों के लिये । ,यही कारण है कि आप जैसे लोग तरक्की से दूर पड़े हुए राह ताक रहे हैं । ,हमारे बॉस भी सामन्तवाद के ही पक्षधर हैं । ,"छोटे लोगों पर गुर्राते और गरियाते हैं , बड़ों की पीठ थपथपाते हैं ।" ,यहां तो भारतीय व्यवस्था वाली योग्यता में श्रेष्ठ हैं तो सारी तरक्की के रास्ते खुले हुए हैं यदि ऐसा नहीं है तो नाक रगड़ते रह जाओ तरक्की कोसों दूर भागती रहेगी । ,बॉस भी आगे - आगे चलते हैं आप जैसों के दमन के लिये । ,बड़े बाबू - बॉस ही दोषी नहीं हैं । ,कामू - बॉस आपकी एक भी अर्जी आगे बढाये क्या ? ,"नहीं ना पर अपना मकसद पूरा करने के लिये साम , दाम , दण्ड और भेद सभी अस्त्र - शस्त्र को उपयोग कर रहे हैं ।" ,"क्या नीचे वाले की पीड़ा उन्हें सुनाई , दिखाई नहीं देती ?" ,क्या अंधे बहरे हो गये हैं ? ,ऐसा भी नहीं सब सुन - देख रहे हैं । ,वे चाहते ही नहीं कि आप तरक्की करो । ,"बडे बाबू - मन में भेद का भूत बैठा हुआ है , निकलने में वक्त लगेगा ।" ,खैर हमें तो अपना मन साफ रखना चाहिये । ,संस्था के हित में काम करना चाहिये । ,"कामू - वही कर रहे हो पर क्या भूल पाओगे एस. पी. आर. साहब का किया गया खुलेआम शोषण , देर रात तक आम सभा के चुनाव का पूरा काम छाती पर बैठकर करवाये और कामचोरी का इल्जाम भी लगाये ।" ,आपका कितना शोषण किया । ,आप भूले तो हो नहीं होगे । ,हां भूलने का ड्रामा जरूर करते हो । ,हर काम के लिये आपको बंधुआ मजदूर की तरह तलब कर लिया जाता है और फायदा चमचे लूट लेते हैं । ,क्या आप भूल गये मुख्यालय के जारी परिपत्र के बाद भी प्रोत्साहन राशि सालों तक नहीं दी गयी । ,बड़े बाबू हर जख्म हंस कर कैसे झेल लेते हो तनिक विद्रोह तक नहीं करते । ,आज तक मैं तो नहीं समझ पाया । ,बड़े बाबू - ईमानदारी के साथ काम करने पर भी दण्ड मिलता है दुख तो होता ही है कामू पर किस - किस की शिकायत करें । ,यहां तो पूरे कुएं में भांग घुली हुई है । ,तुम जानते ही हो मैं दोयम दर्जे का आदमी हो गया हूं । ,मेरी कौन सुनेगा । ,"हां बस एक तरीका है नौकरी से तौबा कर लूं , यहां तथाकथित ऊँचे लोग भी यही चाहते हैं पर परिवार का पालन कैसे करूंगा ।" ,तुमको पता ही है यहां छोटे आदमी की कौन सुनता है । ,कामू - कठिन तपस्या कर रहे हो बड़े बाबू घर - परिवार के लिये । ,यह तपस्या बेकार नहीं जायेगी । ,नौकरी छोड़ने की बात मन में नहीं लाना । ,मुझे मालूम है एस. पी. आर. साहब के आतंक से डरकर आप जेब में त्याग पत्र लेकर आते थे । ,बड़े बाबू - कामू वो मेरी नौकरी के जीवन का दुखद दिन था । ,कामू - हां बुरे वक्त में धीरज बनाये रखे बहुत बड़ी बात है । ,आज वही लोग शरमाते हैं अपने किये पर । ,बड़े बाबू लोगों के नजरिये में परिवर्तन नहीं हुआ आज तक । ,यदि हुआ होता तो आप बड़े बाबू नहीं बड़े अधिकारी होते । ,बड़े बाबू - जो मैं कर सकता था किया पर मेरी तरक्की ऊपर वालों को पसन्द नहीं तो क्या कर सकता हूं । ,मेरे लिये तो अब इस कम्पनी में तरक्की के सारे रास्ते बन्द हो चुके हैं । ,कामू - हां बड़े बाबू यह आपके भविष्य की ही हत्या नहीं ऊँची योग्यता की हत्या है । ,कहने को जमाना बदल गया है पर यहां अभी वही सामन्तवादी परम्परा जारी है । ,बड़े बाबू - मैं अपना धर्म ईमानदारी से निभा रहा हूं और यह मेरा फर्ज भी है । ,सामाजिक योग्यता के दम पर भले ही लोग मुझे अवन्नति के दलदल में ढकेलते रहे हो पर इस कम्पनी में मैं अपने धर्म और फर्ज से मुंह नहीं मोड़ूंगा । ,भले ही बॉस या कोई और हमारे लिये कुँआ खोदता रहे । ,कामू - सत्य कभी पराजित नहीं होता । ,मैं भी इन पत्थर दिलों पर सद्भावना की इबारत लिखने में कामयाब होऊंगा । ,कामू - बड़े बाबू सामाजिक कुव्यवस्था का मौन और घातक प्रदर्शन तो हो रहा है । ,यह तो सत्य है । ,इसी आग की बलि आपका कैरियर चढ गया है इस कम्पनी में । ,कहने को तो जमाना बदल रहा है । ,दुनिया छोटी हो गयी है । ,पर इस दूरसंचार और भूमण्डलीयकरण के युग में भारतीय सामाजिक व्यवस्था की दरारें आज भी संवरीं हुईं हैं जिसकी वजह से वंचित समाज आज भी पिछड़ा हुआ है क्योंकि भारतीय व्यवस्था और सामन्तवाद दोनों एक दूसरे के पूरक हैं और ये दोनों ही शोषित समाज के लिये घातक हैं जिसकी लपट में शोषित समाज का वर्तमान और भविष्य दोनों सुलग रहे हैं । ,बड़े बाबू - भारतीय समाज में बदलाव जरूर आयेगा । ,मन में सांप की तरह लोट रही नफरत की जगह समानता और सद्भावना का बीजारोपण जरूर होगा । ,"कामू - भारतीय समाज यदि महात्मा गांधी , डॉ. अम्बेडकर और लोहियाजी के दर्शन को आत्मसात कर ले तो दोष में समानता और सम्पन्न्ता की कभी न रूकने वाली बयार चल पडेगी ।" ,दुर्भाग्यबस यहां तो आम आदमी को बेवकूफ बनाकर बस अपना मतलब पूरा किया जा रहा है । ,इसी मानसिकता के कुछ बॉस भी हो गये हैं । ,बात तो कुछ और करते हैं पर अपना मतलब पहले साधते हैं उन्हें भी न तो संस्था और नाहीं समाज के हित से कोई मतलब होता है । ,नीचे वाले की आंखों में आंसू उन्हें सकून देता है । ,बड़े बाबू यह तो जान गये होंगे । ,बड़े बाबू - ऊंची कुर्सी पर बैठकर छोटो को आंसू देना सरासर अन्याय है । ,कामू - न्याय है या अन्याय मतलब की दौड़ में कोई नहीं देख रहा है । ,आगे कैसे निकलें जोड़तोड़ में लगा हुआ है । ,चाहे किसी का भविष्य चौपट हो कोई फर्क नहीं पड़ता लोग अभिमान में सब कुछ कर रहे हैं । ,कुछ लोग तो अपने भले के लिये दूसरे की छाती पर लात रखकर ऊपर पहुंच जा रहे हैं । ,कुछ तो लाशों पर चढकर अपना मतलब पूरा कर ले रहे हैं । ,इंसानियत के नाते इंसान का ऐसा उद्देश्य तो नहीं होना चाहिये पर लोग हैं कि मानते नहीं । ,अपने को ऊपर उठाये रखने के लिये छलबल और भेदभाव को औजार बना रहे हैं । ,हमारी कम्पनी में सामन्तवाद उसी के विषबीज की लहलहाती फसल है जिसकी आग में आप जैसे आदमी का भविष्य तबाह हो रहा है । ,बड़े बाबू - हमें तो अपने फर्ज के साथ न्याय करना है । ,जब तक नौकरी चल रही है पूरी ईमानदारी बरतूंगा । ,आगे बढ़ने के रास्ते तो वैसे ही बन्द हो गये हैं एक दिन नौकरी भी चली जायेगी । ,मैं पूरे होश में पत्थर पर दूब उगाने की कोशिश करता रहूंगा । ,हार कर भी जीतने के लिये प्रयास करता रहूंगा । ,अब यही मेरे जीवन का उदेश्य हो गया है कामू । ,"कामू - बडे बाबू गरीबों का हक हड़पने वालों , आंसूओं पर हंसने वालों की चमड़ी गेंडे की तरह होती है ।" ,ऐसे लोग नहीं पसीजते । ,यदि पसीजते हैं तो वह मात्र दिखावा होता है अपना मतलब साधने के लिये । ,"बाबू ये लोग चाहते हैं इनके आगे पीछे येस सर , येस सर करते रहो और अभिमानियों की फटकार सुनते रहो ।" ,बड़े बाबू - कामू कुर्सी का सम्मान करना है । ,कामू - कुर्सी पर चाहे अपात्र ही क्यों न बैठा हो । ,बड़े बाबू - पात्र है या अपात्र हमें इस मुद्दे पर राय प्रगट करने का अधिकार नहीं है । ,कुर्सी पर प्रबन्धन न बिठाता है काबिलियत देखकर ही बैठाता होगा । ,हम तो बस काम करने के लिये हैं । ,कुर्सी पर बैठे आदमी के इशारे पर नाचने के लिये हैं । ,कामू - सच नौकरी तो मजबूरी है । ,काले अंग्रेजों की निरंकुशता हिटलरशाही है जो नीचे वालों के दमन पर उतारू रहते हैं । ,अपनों की पहचान कर ऊपर उठाने का जरिया भी । ,बड़े बाबू - नौकरी में ना के लिये कोई गुंजाइस नहीं होती है । ,"आदमी में कितनी योग्यतायें क्यों न हो , पर वह जिस ओहदे पर काम करता है उससे कम उसकी औकात अधिकारी की निगाह में होती है ।" ,कुछ तो गुलाम समझते हैं । ,कामू - ठीक कह रहे हैं जो कुछ आपके साथ हो रहा है इससे तो साबित हो गया है कि आपको दबा कर ही रखा गया है । ,वर्तमान में जो साहब हैं वही कौन अच्छा सलूक आपके साथ कर रहे हैं । ,ऐसे बुलाते हैं जैसे उनके घरेलू नौकर हो । ,जानता हूं साहब का व्यवहार तनिक भी आपको अच्छा नहीं लगता है पर मजबूरीबस येस सर कहना पड़ता है । ,हुक्म का पालन करना पड़ता है आधुनिक युग के दफतर में बंधुवा मजदूर की तरह । ,सच नौकरी मजबूरी का नाम है खासकर छोटे लोगों के मामले में । ,बड़े बाबू - बॉस इज आलवेज राईट वाली कहावत यहां अक्षरशः चरितार्थ है । ,"कामू - बॉस इज नॉट आलवेज़ राईट इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं अपने बॉस अपने वालों की भरपूर मदद करते हैं , चाहे जब आयें चाहे जब जायें या अपने हित में कोई भी काम करें भले ही इससे संस्था को नुकसान हो पर दूसरों पर नजर टिकाये रहते हैं ।" ,"अरे , यह भी कोई अफसरगीरी है ।" ,सच्चा अफसर तो घर के मुखिया के बराबर होता है जो हर आदमी के दुख सुख का ख्याल रखता है । ,हां काम भी करवाना अफसर को आना चाहिये क्योंकि काम के बदले ही तो तनख्वाह मिलती है । ,रूआब झाड़ना तो हिटलरशाही है अपनों को ऊपर उठाना गैरों को नीचे ढकेलना भेदभाव है पक्षपात है । ,भेद की आग में तो आपका कैरियर चौपट हुआ है इस संस्था में । ,योग्य व्यक्ति के साथ भेदभाव हत्या के समान है । ,बड़े बाबू - ये सब कहने की बातें हैं । ,मानता कौन है । ,जिसकी पहुंच है या भारतीय व्यवस्था वाली श्रेष्ठता है वही सिकन्दर बन जाता है । ,हमारे जैसे लोग कराहते भी हैं तो मुंह बन्द करने की सलाह दी जाती है ताकि दीवार को भनक न पड़ जाये । ,यहां तो योग्यताओं को ताक पर रखकर पहुंच वाले व्यक्ति को आगे बढाया जा रहा है भले ही शैक्षणिक योग्यता की कमी क्यों न हो । ,यही कारण है कि हम जैसे को सिसकते हुए भी येस सर कहना पड़ रहा है । ,ऐसा न करे तो बेचारा नीचे वाला कहां टिक पायेगा । ,मजबूरी है नौकरी करनी है । ,भारतीय व्यवस्था जातिवाद के कुपोषण की शिकार है जिससे कमजोर वर्ग के हितों को अनदेखा किया जा रहा है । ,सक्षम वर्ग अठखेलियां कर रहा है कमजोर के हितों पर कब्जा जमाकर । ,कामू - क्या यहां योग्यता हारती रहेगी सामाजिक श्रेष्ठता के आगे । ,"बड़ेबाबू - अभी तक तो ऐसा ही हो रहा है तभी ना , ना योग्यता श्रेष्ठ है और नाहीं आदमियत जातीय दम्भ के आगे ।" ,कामू - ठीक कह रहे बड़े बाबू तभी आजादी का सपना मर रहा है । ,आम आदमी से आज भी आजादी कोसों दूर है । ,बड़े बाबू - भले ही सपने मर रहे हैं पर सम्भावनायें नहीं मर सकतीं । ,कामू - बहुत बड़े थिंकर हो बड़े बाबू पर इस कम्पनी में विपत्ति ढो रहे हैं येस सर येस सर कहते हुए । ,बड़े बाबू - यही कैद तकदीर की दास्तान है । ,इस दास्तान को बदलने का भरपूर प्रयास है देखो कहां तक सफल हो पाता हूं । ,कामू - बड़े बाबू जब तक सामंतवाद की जड़ें हिलेंगी नहीं तब तक आम आदमी का उद्धार तो नहीं हो सकता । ,भले ही तरक्की का ढोल मूसर से पीटा जाये पर आम आदमी पुरानी भारतीय व्यवस्था में घुटन महसूस करता रहेगा । ,"लायक नालायक और नालायक लायक साबित होते रहेंगे छल , बल से ।" ,बड़े बाबू - कामू हम देश समाज और आदमियत के प्रति फर्ज पूरा कर खुद अपनी पीठ थपथपा तो सकते हैं । ,"कामू - यह तो कर ही सकते हैं पर जो दबे कुचले लोगों की उभरती योग्यताओं , प्रतिभाओं का बिखण्डित समाज में दहन हो रहा है उसका क्या ?" ,"देश में स्वधर्मी जातीय समानता की जरूरत है , इसी से देश और समाज स्वस्थ हो सकता है ।" ,"बड़े बाबू जाते - जाते एक बात बता दूं जो बॉस मन - भेद रखते है , योग्यताओं का दहन करते हैं वो बॉस कभी राइट नहीं हो सकते , भले आगे पीछे येस सर की रट लगाये रहें ।" ,हक के लिये लड़ना होगा बड़े बाबू येस सर येस सर से हक नहीं मिल सकता यहां । ,कब तक अपने सपनों की बारात का जनाजा निकलते हुए देखते रहोगे । ,"चूंकि फिल्म की लागत कम है , इसलिए ट्रेड पंडितों की राय में यह फिल्म जल्दी ही मुनाफे में आ जाएगी ।" ,जिस्म 2 की रिलीज ने क्या सुपर कूल हैं हम के दर्शक भी खींच लिए । ,जिस्म 2 की कामयाबी से जाहिर है कि हिंदी फिल्मों के दर्शक बोल्ड किस्म की फिल्में पसंद करने लगे हैं । ,पूजा भट्ट की फिल्म जिस्म 2 को समीक्षकों की मिश्रित प्रतिक्रिया मिली थी । ,शुद्धतावादी इस फिल्म की हीरोइन सनी लियोनी के अतीत को लेकर परेशान थे । ,एक पोर्न स्टार को हिंदी फिल्मों की हीरोइन के रूप में देखने के लिए तैयार नहीं थे । ,दर्शकों ने उन्हें देखा और पसंद भी किया । ,रणदीप हुडा और अरुणोदय सिंह जैसे कम मशहूर सितारों के बावजूद यह फिल्म चली । ,इस फिल्म ने पहले वीकएंड में 21 करोड़ से अधिक का कलेक्शन किया । ,"चूंकि फिल्म की लागत कम है , इसलिए ट्रेड पंडितों की राय में यह फिल्म जल्दी ही मुनाफे में आ जाएगी ।" ,जिस्म 2 की रिलीज ने क्या सुपर कूल हैं हम के दर्शक भी खींच लिए । ,जिस्म 2 की कामयाबी से जाहिर है कि हिंदी फिल्मों के दर्शक बोल्ड किस्म की फिल्में पसंद करने लगे हैं । ,अलग - अलग फिल्म समीक्षा मिलने पर भी कॉकटेल ने बॉक्स ऑफिस में धमाल मचाया । ,कॉकटेल का वीकएंड कलेक्शन बहुत अच्छा रहा । ,फिल्म ने शुक्रवार को रिलीज के साथ 11 करोड़ रुपए कमाए । ,शनिवार को 12 करोड़ और रविवार को 13 करोड़ रुपए कमाए । ,कुल मिलाकर फिल्म का वीकेंड कलेक्शन 36 करोड़ रुपयों का था । ,फिल्म 55 करोड़ रुपयों में बनी थी । ,"युवाओं को दीपिका पादुकोण , सैफ अली खान और डायना का कॉकटेल बहुत पसंद आया ।" ,एक मल्टीप्लेक्स के प्रवक्ता ने कहा कि यह सप्ताह मल्टीप्लेक्स के लिए सबसे अच्छा रहा । ,"कॉकटेल की जबरस्त ओपनिंग रही , रविवार को इसका कलेक्शन 95 से 96 प्रतिशत रहा ।" ,"वहीं बोल बच्चन का 80 प्रतिशत , बोलबच्चन भी अच्छा कर रही है ।" ,ट्रेड पंडित अमोद मेहता कहते हैं शुक्रवार को आई कॉकटेल से बोल बच्चन को थोड़ा झटका लगा लेकिन शनिवार और रविवार को सब सामान्य हो गया । ,फिल्म का संगीत दर्शकों को खूब भाया । ,पिछले हफ्ते आधा दर्जन से अधिक फिल्में रिलीज हुई । ,इनमें दर्शकों ने केवल एनीमेशन फिल्म अर्जुन को एक हद तक पसंद किया और समीक्षकों ने ये खुला आसमान को सराहा । ,बाकी फिल्में तो दो - चार शो के बाद ही थिएटर से उतरने लगीं । ,वे वीकएंड के तीन दिन भी थिएटरों में नहीं टिक सकीं । ,एनीमेशन फिल्म अर्जुन को अवश्य थोड़े दर्शक मिले । ,"हालांकि अर्जुन की ओपनिंग बहुत अच्छी नहीं रही , लेकिन शनिवार और रविवार को थोड़े दर्शक बढ़े ।" ,औसत से कमजोर फिल्मों की भीड़ में केवल अर्जुन ही आगे निकल सकी । ,"पहले छोटा भीम और अब अर्जुन NULL , लगता है बच्चों को भारत में बनी एनीमेशन फिल्में पसंद आने लगी हैं ।" ,"नवोदित अर्जुन कपूर और परिणिती चोपड़ा की फिल्म इशकजादे ने दूसरे हफ्ते में जितना बिजनेश किया है , उससे बमुशिकल दस प्रतिशत ज्यादा बिजनेस डिपार्टमेंट पहले हफ्ते में कर सकी ।" ,इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और संजय दत्त जैसे दिग्गज थे । ,कामयाब निर्देशक राम गोपाल वर्मा के निर्देशन में बनी डिपार्टमेंट को दर्शकों ने सिरे से नकार दिया । ,शुक्रवार को फिल्म की ओपनिंग साधारण रही । ,शनिवार को दर्शक कम हुए और रविवार को भी बढ़ नहीं सके । ,दिग्गज स्टारों और कामयाब निर्देशक की फिल्म 9 करोड़ की रकम भी नहीं पार कर सकी । ,रिलीज के बाद रामगोपाल वर्मा बता रहे हैं कि संजय दत्त और उनके मित्र की दखलंदाजी की वजह से फिल्म गड़बड़ हुई । ,दूसरों पर दोष मढ़ने से बेहतर है कि रामगोपाल वर्मा अपनी गलती स्वीकार करें और भविष्य के लिए सबक लें । ,पिछले हफ्ते रिलीज हुई डेंजरस इश्क और इशकजादे में कलेक्शन के लिहाज से इशकजादे आगे निकली । ,अर्जुन कपूर और परिणिती चोपड़ा की जोड़ी दर्शकों को पसंद आई । ,"पहले वीकएंड में इस फिल्म का कलेक्शन 15 करोड़ से ज्यादा रहा , जबकि करिश्मा कपूर की डेंजरस इश्क साढ़े तीन करोड़ भी नहीं पहुंच सकी ।" ,करिश्मा कपूर की रीलांचिंग सही नहीं रही । ,इससे ज्यादा कलेक्शन तो जन्नत 2 का रहा । ,जन्नत 2 हिट घोषित हो चुकी है । ,नए चेहरों के होने के बावजूद औसत से बेहतर बिजनेस करने से इशकजादे ने अर्जुन कपूर और परिणिती चोपड़ा की मांग बढ़ा दी है । ,ट्रेड पंडितों के मुताबिक इनकी कामयाबी का असर अभिषेक बच्चन और सोनाक्षी सिन्हा पर पड़ेगा । ,फिल्म इंडस्ट्री भी गजब जगह है । ,यहां एक की कामयाबी दूसरे की घटती मांग का सबब बनती है । ,कुणाल देशमुख निर्देशित जन्नत - 2 को मल्टीप्लेक्स से अधिक सिंगल स्क्रीन के दर्शकों ने पसंद किया है । ,इस फिल्म का पहले हफ्ते का कलेक्शन 6 करोड़ से थोड़ा ही अधिक रहा । ,इस फिल्म के कलेक्शन का ट्रेंड भी दूसरी सफल फिल्मों जैसा ही रहा । ,"शुक्रवार को इस फिल्म का कलेक्शन लगभग डेढ़ करोड़ रहा , जो रविवार को बढ़ कर ढाई करोड़ हो गया ।" ,सोमवार को शिरीन फरहाद.. ने एक करोड़ का कलेक्शन किया । ,कह सकते हैं कि समीक्षकों की सराहना और दर्शकों की पसंद के बावजूद एक था टाइगर की लोकप्रियता ने शिरीन फरहाद.. के बिजनेस को प्रभावित किया । ,"अधिकांश समीक्षकों को सचिन यार्डी की फिल्म क्या सुपर कूल हैं हम पसंद नहीं आई थी , लेकिन दर्शकों ने उनकी आलोचना की परवाह नहीं की ।" ,पहले वीकएंड में इस फिल्म ने 23 करोड़ से अधिक का कलेक्शन किया । ,तुषार कपूर और रितेश देशमुख की फिल्म के लिए यह औसत से बेहतर प्रदर्शन है । ,एकता कपूर की मार्केटिंग और प्रचार ने इस फिल्म के दर्शक जुटाए । ,शुरू से स्पष्ट था कि क्या सुपर कूल हैं हम एक एडल्ट कामेडी है । ,ट्रेड पंडितों के मुताबिक इस फिल्म को युवा दर्शकों ने ज्यादा पसंद किया है । ,खासकर मल्टीप्लेक्स में युवा दर्शकों की भीड़ ही उमड़ी । ,दूसरी फिल्म आलाप से अधिक उम्मीद नहीं थी । ,नए चेहरों की इस अनगढ़ फिल्म को दर्शक नहीं मिले । ,पिछली फिल्मों में कॉकटेल और बोल बच्चन अभी तक थिएटरों में टिकी हैं । ,बोल बच्चन तो 100 करोड़ क्लब में भी आ गई है । ,पिछले हफ्ते रिलीज हुई हिंदी फिल्मों से ज्यादा दर्शक हालीवुड की फिल्म बैटमैन - 3 को मिले । ,यह फिल्म अंग्रेजी के साथ हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में भी रिलीज हुई है । ,हिंदी फिल्मों में मेरे दोस्त पिक्चर अभी बाकी है से कोई उम्मीद ही नहीं थी । ,सीमित प्रिंट के साथ रिलीज हुई यह फिल्म प्रोमो और पोस्टर से बासी लग रही थी । ,"चिल्ड्रेन फिल्म सोसायटी की गट्टू की समीक्षकों ने तारीफ की , लेकिन बच्चों की फिल्म होने की वजह से इसे पर्याप्त स्क्रिन नहीं मिले ।" ,बैटमैन - 3 ने कॉकटेल और बोल बच्चन के कलेक्शन को भी प्रभावित किया । ,पहले हफ्ते में इस फिल्म ने भारत में 25 करोड़ से अधिक का बिजनेश किया । ,कबीर खान निर्देशित यशराज फिल्म्स की एक था टाइगर ने सबसे तेजी से महज पांच दिनों में 100 करोड़ का कलेक्शन पूरा कर लेने का नया रिकार्ड बनाया है । ,इस तथ्य के बावजूद यह भी सच है कि पहले पांच दिनों में ही दर्शकों में भारी उतार - चढ़ाव देखा गया । ,"पहले दिन इस फिल्म का कलेक्शन 30 करोड़ से अधिक था , लेकिन दूसरे ही दिन दर्शकों की संख्या आधी हो गई थी ।" ,निश्चित ही फिल्म को दर्शकों की माउथ पब्लिसिटी का सहारा नहीं मिला । ,"पहले दिन तो दर्शक सलमान खान के जादू में खिंचे चले आए , लेकिन उन्हें फिल्म अधिक पसंद नहीं आई होगी ।" ,गुरूवार से शनिवार तक इस फिल्म का कजेक्शन 15 से 20 करोड़ के बीच रहा । ,रिकार्डतोड़ ओपनिंग के बाद कलेक्शन की यह गिरावट हैरत में डालती है । ,रविवार को फिर 20 करोड़ से अधिक का कलेक्शन हुआ । ,एक था टाइगर को पांच दिनों के वीकएंड का जबरदस्त फायदा नहीं हो सका । ,सोमवार को फिर से कलेक्शन में गिरावट आई है । ,"हालांकि फिल्म ने सोमवार तक 120 करोड़ से अधिक कलेक्शन कर लिया था , लेकिन पहले दिन के अनुपात में कलेक्शन का नीचे आना बताता है कि सलमान खान दर्शकों की अपेक्षाएं इस बार पूरी नहीं कर सके ।" ,अनुराग कश्यप की गैंग्स ऑफ वासेपुर अच्छी चली थी । ,"उम्मीद थी कि वासेपुर 2 को भी वैसे ही पर्याप्त दर्शक मिलेंगे , लेकिन फिल्म के प्रति दर्शकों का उत्साह थोड़ा कम दिखा ।" ,अनके समीक्षकों को पहले की तुलना में दूसरी ज्यादा अच्छी लगी थी । ,दर्शक तो दर्शक होते हैं । ,उन्होंने वासेपुर 2 को पहली की तरह तवज्जो नहीं दी । ,"15 अगस्त , बुधवार को कबीर खान निर्देशित सलमान खान और कट्रीना कैफ की एक था टाइगर की रिलीज को देखते हुए वासेपुर 2 भी एक हफ्ते पहले बुधवार को रिलीज कर दी गई थी ।" ,कह सकते हैं कि दो दिन पहले की रिलीज से फिल्म 5 करोड़ प्लस में रही । ,अगर शुक्रवार को ही फिल्म रिलीज होती तो गुरूवार और शुक्रवार के दर्शक नहीं मिलते । ,इस बुधवार से वासेपुर 2 के शो और स्क्रीन कम हो गए हैं । ,अभी तो बताते हैं कि हर थिएटर में बस टाइगर की दहाड़ है । ,पूजा भट्ट की फिल्म जिस्म 2 को समीक्षकों की मिश्रित प्रतिक्रिया मिली थी । ,शुद्धतावादी इस फिल्म की हीरोइन सनी लियोनी के अतीत को लेकर परेशान थे । ,एक पोर्न स्टार को हिंदी फिल्मों की हीरोइन के रूप में देखने के लिए तैयार नहीं थे । ,दर्शकों ने उन्हें देख और पसंद भी किया । ,रणदीप हुडा और अरुणोदय सिंह जैसे कम मशहूर सितारों के बावजूद यह फिल्म चली । ,इस फिल्म ने पहले वीकएंड में 21 करोड़ से अधिक का कलेक्शन किया । ,डिप्थीरिया ,"रोहिणी या डिप्थीरिया ( Diphtheria ) उग्र संक्रामक रोग है , जो 2 से लेकर 10 वर्ष तक की आयु के बालकों को अधिक होता है , यद्यपि सभी आयुवालों को यह रोग हो सकता है ।" ,इसका उद्भव काल ( incubation period ) दो से लेकर चार दिन तक का है । ,रोग प्रायः गले में होता है और टॉन्सिल भी आक्रांत होते हैं । ,"स्वरयंत्र , नासिका , नेत्र तथा बाह्य जननेंद्रिय भी आक्रांत हो सकते हैं ।" ,"यह वास्तव में स्थानिक रोग है , किंतु जीवाणु द्वारा उत्पन्न हुए जीवविष के शरीर में व्याप्त होने से रुधिर विषाक्तता ( Toxemia ) के लक्षण प्रकट हो जाते हैं ।" ,"ज्वर , अरुचि , सिर तथा शरीर में पीड़ा आदि जीवविष के ही परिणाम होते हैं ।" ,इनका विशेष हानिकारक प्रभाव हृदय पर पड़ता है । ,कुछ रोगियों में इनके कारण हृदयविराम ( heart failure ) से मृत्यु हो जाती है । ,रोग का कारण कोराइन बैक्टीरियम डिपथीरी ( Coryn bacterium diphtheriae ) नामक जीवाणु होता है । sg,"यह प्रायः बिंदु संक्रमण से तथा बालकों द्वारा एक दूसरे की पेंसिल , लेखनी आदि वस्तुओं को मुँह में रख लेने से गले की श्लैष्मिक कला में प्रविष्ट होकर वहाँ रोग उत्पन्न कर देता है , जिसके कारण उत्पन्न हुए स्त्राव में फाइब्रिन अधिक होने से स्त्राव वहाँ पर झिल्ली के रूप में एकत्र हो जाता है ।" ,उसका रंग मटमैला सा होता है और उसके पास श्लेष्मिक कला में शोथ होता है । ,झिल्ली नीचे मांस से चिपकी होती है और कठिनाई से पृथक् की जा सकती है । ,"यह जीवाणु तीन प्रकार का होता है , उग्र ( gravis ) , मध्यम ( intermedians ) और मृदु ( mitis ) ।" ,"प्रथम प्रकार अत्युग्र , दूसरा उग्र और तीसरा मृदु रूप का रोग उत्पन्न करता है , जिसमें कभी - कभी झिल्ली तक नहीं बनती ।" ,केवल गलशाथ के लक्षण होते हैं । ,कोरिनेबेक्टीरियम डिप्थेरिया और कफ के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में यह फैलता है । sg,इसके अतिरिक्त जीवाणु एक प्रकार के जीव विष को जन्म देता है जिससे हृदय की पेशियों में सूजन आ सकती है अथवा स्नायु तंत्र की खराबी हो सकती है । ,झिल्ली ही रोग का विशेष लक्षण है । sg,"उपयुक्त चिकित्सा तत्काल प्रारंभ न करने से वह गले में चारों ओर से उत्पन्न होकर श्वास मार्ग तक को रोक सकती है , जिससे रोगी को श्वासकष्ट हो जाता है और फुफ्फुसों में वायु नहीं पहुँच पाती ।" ,गले में शोथ होता है । ,टॉन्सिल भी सूज जाते हैं । ,झिल्ली गले में न बनकर उसके नीचे श्वासनली ( trachea ) में बन सकती है । ,"अग्रनासिका के आक्रांत होने पर नासास्राव विशेषतया अधिक होता है , किंतु श्वासकष्ट नहीं होता ।" ,नेत्र तथा जननेंद्रियों के रोग में उनपर झिल्ली एकत्र हो जाती है । ,रोगी को ज्वर 1000 - 1020 फा0 तक रहता है । sg,रुधिर विषाक्तता के कारण रोगी क्लांत दिखाई देता है । ,रोग की उग्रता उसके चेहरे तथा साधारण दशा से झलक जाती है । ,"सिरदर्द , अरुचि , कब्ज आदि बने रहते हैं ।" sg,डिप्थीरिया के जीवविष हृतपेशीस्तर ( myocardium ) पर अपकर्षण ( degeneration ) प्रभाव डालते हैं । ,"हृदय के दुर्बल हो जाने से उसके स्पंदन दुर्बल हो जाते हैं , जिससे शरीर का रक्तचाप कम हो जाता है ।" ,"जितना हृद्दौर्बल्य बढ़ता है , रोगी के जीवन की आशा उतनी ही कम हो जाती है ।" ,तंत्रिका तंत्र पर भी विषों का प्रभाव होता है । ,"गले के भीतर की पेशियों का स्तंभ प्रायः 10वें या 12वें दिन पर दिखाई पड़ता है , जो पहले वहाँ की दुर्बलता से आरंभ होता है ।" ,रोगी का शब्द अनुनासिक हो जाता है । sg,निगलने पर जल या अन्य पेय नाक से लौट आते हैं । ,"नेत्र की पेशियों की क्रिया का ह्रास हो सकता है , जिससे समायोजन ( accommodation ) क्रिया न होने से रोगी को छोटे अक्षर स्पष्ट नहीं दिखाई देते ।" ,आगे चलकर दो या तीन सप्ताह के पश्चात् और कभी - कभी इससे पहले ही बहुतंत्रिकाशोथ ( polyneuritis ) के लक्षण प्रकट हो जाते हैं । ,"कभी - कभी स्वरयंत्र आक्रांत हो जाता है , जिससे श्वासावरोध का डर रहता है ।" sg,ऐसी दशा में तत्काल श्वासनली का वेधन ( tracheotomy ) करके श्वासमार्ग बनाना पड़ता है । ,यह प्रायः कठिन नहीं होता । ,रोग का संदेह होने पर यदि झिल्ली न दिखाई दे तो गले के स्त्राव की संवर्धन ( culture ) परीक्षाएँ आवश्यक हैं । ,शिक जाँच ( Schick test ) द्वारा रोग के वाहकों को पहचानने से रोग को रोकने में बहुत सहायता मिलती है । ,"ग्रसनी शोथ ( Phyaryngitis ) , टॉन्सिल शोथ ( Tonsillitis ) , मुँह तथा गले में फंगस संक्रमण आदि रोगों से डिप्थीरिया को पहचानना आवश्यक है ।" ,"प्रतिजीव विषयुक्त सीरम , जो प्रायः रोगक्षमीकृत घोड़ों के रक्त से तैयार किया जाता है , इस रोग की प्रथम औषधि है , किंतु चिकित्सक को पहले यह निश्चय कर लेना चाहिए कि रोगी सीरम के प्रति असहिष्णु तो नहीं है , क्योंकि कुछ रोगी सीरम को सहन नहीं कर पाते , विशेषकर वे रोगी जिनको पहले सीरम के इंजेक्शन लगे हों ।" ,इस कारण इंजेक्शन देने से पूर्व पूछ लेना चाहिए । ,यदि इंजेक्शन नहीं लगे हैं तो विशेष डर नहीं है । ,"यदि लगे हों , तो असहिष्णुता की जाँच करना आवश्यक है ।" ,यह दशा तीव्रग्रहिता ( anaphylaxis ) कहलाती है । ,इसमें मृत्यु तक हो सकती है । ,"छोटी प्रयोगशालाएं उत्तर प्रदेश ( 4 ) , सिक्किम , पंजाब ( 1 ) , हरियाणा ( 3 ) और असम में चल रही हैं किन्तु इनकी उत्पादक क्षमता काफी कम है ।" ,लगभग 15 प्रयोगशालाएं केवल उद्यान फसलों का प्रवर्धन कर रही हैं । ,"शोभाकारी पौधों में एंथूरियम , कैलंथे , डाइफेनबैचिया , फाइकस , कार्डीलाइन , आर्किड , जरबेरा प्रमुख हैं ।" ,कृषि भूमि का समुचित इस्तेमाल भौगोलिक अध्ययन का एक महत्वपूर्ण पहलू है । ,इसका संबंध मुख्यतया भौगोलिक कृषि से है । ,भूमि उपयोग शब्द वास्तव में स्वतः ही स्पष्‍ट है । ,किन्तु उपयोग व उनके विकल्प योजना के अर्थों की व्याख्या में अनेक गुत्थियाँ उठ खड़ी हुई हैं । ,उपयोग शब्द छोटा होने के कारण उसे अत्यधिक श्रेष्‍ठ माना गया है । ,"भूमि के स्वाभाविक अभिलक्षणों के अनुसार , भूमि उपयोग भू - धरातल का वास्तविक एवं विशिष्‍ट उपयोग है ।" ,भूमि उपयोग का अध्ययन मुख्यतः वनस्पति आच्छादन अथवा उसकी कमी से जुड़ा है । ,भूगोल के क्षेत्र में यह एक औपचारिक संकल्पना है । ,भू - योजना - भूमि उपयोग के दोहन की प्रक्रिया है अर्थात भूमि विशिष्‍ट ध्येय के लिए अनुप्रयुक्‍त होती है । ,मनुष्य के द्वारा अविकसित क्षेत्र भू - योजना के दृष्‍टिकोण से ऋणात्मक होते हैं । ,उपयोग के दृष्‍टिकोण से वनस्पति आवरण द्वारा किये गये कार्यों को समन्वित किये बगैर ही उसका परीक्षण करना एक निस्सार व महत्त्वहीन अभ्यास माना गया है । ,भूमि उपयोग - ,यह एक क्रिया है । ,अर्थात भूमि आवरण के माध्यम से भू - धरातल का उपयोग करना । ,"इस ग्रंथ में ’ भूमि आवरण ’ शब्द का उपयोग ’ धरातलीय आवरण ’ के तत्त्वों के लिए किया गया है , चाहे वे प्राकृतिक हों या मनुष्य द्वारा निर्मित किये गये हों ।" ,भूमि उपयोग ( भू - योजन ) का विशद अर्थ होता है । ,इसमें भूमि आवरण समाविष्‍ट रहता है । ,भूमि उपयोग के व्यापक अध्ययन में उपयोग के समस्त रूपों को शामिल करना उचित होगा । pl,भूमि उपयोग सर्वेक्षणों को हमेशा ही विशेषज्ञों से लेकर अविज्ञजनों तक की जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए क्योंकि भूमि उपयोग सर्वेक्षण एक महँगा उपक्रम है व आजकल भूमि उपयोग हर व्यक्‍ति से किसी - न - किसी रूप से अवश्य जुड़ा होता है । ,"विभिन्न प्रयोगों के तहत भूमि को उपयोग में लाए जाने की परंपरा उतनी ही प्राचीन है , जितना कि कृषि से मानव का संबंध रहा है ।" ,नये देशों में उपनिवेश के कारण भूमि संसाधनों के प्राक्कलन में दिलचस्पी ली गई । ,1919 में भूमि उपयोग को सबसे पहले व्यवस्थित रूप से अभिव्यक्‍त करने वाले मानचित्रों पर विचार किया गया । ,"गुल्म वनों , उच्च वनों तथा गुल्मों के रूप में वनों का उप - विभाजन किया गया है ।" ,"इसमें ऐसे वन शामिल हैं जिनमें कोई भी कटन पूर्वरोपित न होती हो , चाहे वे शंकुवृक्षी हों , पर्णपाती हों या मिश्रित वन ही क्यों न हों ।" ,"भूमि प्रबन्ध के दृष्‍टिकोण से हेरफेर वाले चरागाहों का वर्गीकरण खेती की भूमि के रूप में करना उचित है , परन्तु इससे व्याख्या में कुछ समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं ।" sg,"1938 - 39 में उत्तरी आयरलैण्ड में किये गये बाद के सर्वेक्षण में सभी घासस्थली को एक ही वर्ग में रखा गया है , चाहे उसमें हेरफेर होता हो या उत्तम प्रकार की चरागाह पाई जाती हो ।" sg,पर्याप्‍त विस्तार के कारण निम्न भूमि बाग के लिये एक श्रेणी आरंभ की गई । ,ग्रेट ब्रिटेन में बाग का विस्तार हालांकि महत्त्वपूर्ण नहीं है । pl,ब्रिटेन की हर काउन्ट के भूमि उपयोग का वर्णन करने के लिए अनेक प्रतिवेदन लिखे गये । ,सन् 1936 से 1946 के मध्य भागों में प्रकाशित भी किया गया । ,इस प्रकार क्षेत्रीय कार्य के आरम्भ तथा प्रतिवेदन के पूर्ण होने के मध्य का समय अधिक दिखाई देता है । ,उद्यानों को चरागाह तथा वृक्ष फसलों को साथ - साथ लिखा गया है । sg,घास के मैदानों में प्रबंध की समस्याओं के कारण सभी तरह के चारे को एक ही श्रेणी में सम्मिलित किया गया है । ,गुल्म घास स्थल अथवा रश पौधे युक्‍त घास भूमियों के लिए कुछ सुधार किया गया है । ,वैश्‍विक भूमि उपयोग सर्वेक्षण अन्तर्राष्‍ट्रीय भौगोलिक संघ द्वारा तैयार की गई एक आयोजना है । ,इसका उद्‍देश्य सम्पूर्ण विश्‍व के लिए भूमि उपयोग प्रतिवेदन तथा अपेक्षात्मक मानचित्र तैयार करना है । ,"विश्‍व भूमि उपयोग का एक ध्येय यह है कि 1 : 1,000,000 मापक पर विश्‍व भूमि उपयोग के मानचित्रण को प्रोत्साहित किया जाए ।" ,इस योजना में प्रस्ताविक मूलभूत श्रेणियों की सीमित संख्या का ध्येय सर्वेक्षण में तुलनात्मकता की आवश्यक श्रेणी को प्राप्‍त करना तथा स्थानीय विवरणों के लिए वांछित उपविभागों की व्यवस्था करना था । ,यद्यपि नौ श्रेणियों का मुख्य वर्गीकरण मानचित्रों के पुननिर्माण हेतु सर्वेक्षणों के साधारणीकरण में अनेक समस्याएं भी प्रस्तुत करता है । ,"ब्रिटेन के मुख्य भूमि उपयोग मानचित्रों को 1 : 625,000 मापक पर घटाकर इनसे सामान्य निष्कर्ष निकाला गया ।" sg,कम से कम 100 एकड़ का क्षेत्रफल इस मापक पर दिखाया जा सकता था । ,इस वजह से इसके निकटवर्ती खेतों के टुकड़े लिए गये और उनका अनुपात तथावत रखा गया । ,"1 : 1,000,000 मापक पर सामान्य निष्कर्षों को निकालने हेतु कम से कम 200 एकड़ या 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल होना आवश्यक था ।" pl,अब तक कई देश विभिन्न मापकों पर भूमि उपयोग मानचित्र तैयार कर चुके हैं । ,कतिपय राष्‍ट्रों में इन पर वर्तमान में काम भी चल रहा है । ,एकैक राष्‍ट्रीय सर्वेक्षणों में कई अधिकारियों के संलग्न हो जाने तथा अलग - अलग उद्देश्य और विधियाँ अपनाई जाने के कारण प्रमाणिकता का अभाव हो जाता है । pl,शासन राष्‍ट्रीय योजना कार्यों के कुछ सर्वेक्षण निजी कम्पनियों को ठेकों पर दे देता है । ,इन सर्वेक्षणों का ध्येय प्रकाशन नहीं होता । ,"इसमें किशमिश , टोमेटो सॉस , नमक और चावल का दूसरा भाग मिला लें ।" ,"एक चम्मच घी में राई का छौंक देकर हल्दी , आलू डालकर उतार लें ।" ,"इसमें चीज , 1 / 2 चम्मच नमक और बाकी चावल मिला लें ।" ,एक डिश में 1 बड़ा चम्मच घी लगा कर तीनों तरह के चावल एक के ऊपर एक परत लगाकर हाथ से अच्छी तरह दबाकर रख लें । ,अब इनको हल्के हाथ से उलट दें और किसी दूसरी थाली में निकाल लें । ,तैयार स्वादिष्ट नमकीन भारतीय पकवान शाही तिरंगे चावल का गणतंत्र दिवस के खास मौके पर जायका लें । ,ककड़ी को लंबे - लंबे स्लाइस में काटकर रख लें । ,अब गाजर और मूली को छीलकर लंबी स्लाइस में काट लें । ,"इसके बाद एक बड़ी - सी प्लेट में पहले गाजर , फिर मूली तत्पश्चात ककड़ी को एक के ऊपर एक तह करके जमा कर रख लें ।" ,"अब ऊपर से काला नमक , काली मिर्च का पावडर , पिसा जीरा व सादा नमक बुरकाएं ।" ,अब तैयार तिरंगा सलाद पेश करें । ,ताजे पनीर को तीन भागों में काट लें । ,"हर परत के ऊपर पुदीना चटनी , अचार मसाला , चिली सॉस व टोमेटो सॉस लगा लें और उसे एक के ऊपर एक रखें ।" ,"तत्पश्चात दही को फेंट कर उसमें बेसन , तेल , नमक , लाल मिर्च व गरम मसाला मिलाएं ।" ,घोल को 5 मिनट तक हिलाएं और इसमें पनीर को डुबो कर तंदूर में सेंके । ,अब हरे धनिया से सजा कर तिरंगा तंदूरी पनीर पेश करें । ,"सबसे पहले बेसन में हरा धनिया , मिर्च , सौंफ , हल्दी , अजवाइन , नमक डालकर घोल बनाकर रख लें ।" ,"अब उबले आलू में बारीक प्याज , नमक , हरी मिर्च , जीरा , मिलाकर गूंथ लें ।" ,अब हरी चटनी की सामग्री मिलाकर मिक्सी में पीस लें । ,"एक समतल जगह पर एक ब्रेड रखें , उस पर हरी चटनी लगाएं , उस पर दूसरी ब्रेड रखकर आलू का मिश्रण फैलाएं , उस पर तीसरी ब्रेड रखकर टमाटर सॉस लगाकर चौथी ब्रेड से ढंक कर सावधानीपूर्वक उठाकर बेसन के घोल से लपेटें और गरम तेल में भूरे होने तक तलें ।" ,अब इसे चार भाग में सैंडविच की तरह काट लें । ,लजीज तिरंगा सैंडविच को चटनी के साथ सर्व करें । ,करीब तीन घंटे तक अलग - अलग दाल और चावल को भिगो दें । ,"मटर , हरी मिर्च और अदरक को महीन पीस लें ।" ,मटर को तेल में थोड़ा सेंक कर उसमें नमक मिला दें । ,चावल को मोटा और उड़द दाल को बारीक पीसकर मिला लें । ,"इसमें नमक , फ्रूट सॉल्ट और पानी भी मिलाएं ।" ,चने और मूंग की दाल को एक साथ दानेदार पीस लें । ,"इसमें नमक , हल्दी , हींग , फ्रूट सॉल्ट , नींबू का रस और पानी मिलाएं ।" ,ढोकले के सांचे में तेल लगाकर मिश्रण की एक इंच मोटी परत लगाकर 5 - 7 मिनट भाप में पका लें । ,इसे उतार कर इसके ऊपर मटर की पीठी फैला दें । ,इसके ऊपर दाल - चावल के घोल की आधा इंच मोटी परत फैला कर भाप में पका कर ठंडा कर लें । ,अब चौकोर टुकड़ों में काट लें । ,"तेल में राई , मीठा नीम का छौंक लगाकर ढोकले के ऊपर डाल दें ।" ,नारियल और हरे धनिया से सजा कर ढोकले को नारियल चटनी के साथ परोसें । ,मावा और पनीर को किसनी से कद्दूकस कर लें । ,अब इसमें चीनी मिला दें । ,कड़ाही में मध्यम आंच पर पकने दें । ,मिश्रण गाढ़ा होने पर गैस बंद कर दें । ,अब इसे तीन भागों में बराबर बांट लें । ,पहले वाले को सफेद रखें । ,दूसरे भाग में मीठा पीला व तीसरे भाग में हरा रंग मिला लें । ,"हल्के हाथ से मोटा बेल लें और सबसे नीचे हरा , फिर सफेद और ऊपर पीले रंग की जमा दें और हल्के से हाथ से दबा कर बरक चिपका दें ।" ,तत्पश्चात इसकी चौकोर या तिरछे आकार में बर्फी काटें और गणतंत्र दिवस पर तिरंगी बर्फी पेश करें । ,सर्वप्रथम मलाई में आधा कटोरी शक्कर व गुलाब जल मिलाकर इसे अच्छी तरह फेंटे । ,बाकी बची हुई शक्कर आम में मिलाकर उसे फेंटें । ,"अब किसी प्लेट में एक ब्रेड रखें , उस पर आम का मिश्रण फैलाएं , इस पर दूसरी ब्रेड रखकर मलाई का मिश्रण फैलाएं ।" ,अब उसके ऊपर ब्रेड की तीसरी स्लाइस रखकर उस पर जैम लगाएं । ,तत्पश्चात चौथी ब्रेड रखकर मलाई का मिश्रण लगाएं । ,"तत्पश्चात सजावट हेतु काजू , किशमिश आदि चिपकाएं तथा इसे केक की तरह बीच से दो भागों में काट लें ।" ,जब मैदानों में हिजड़ों को किन्नर कहा जाने लगा तो यह आवाज उठी कि किन्नर तो किन्नौर के लोग हैं । ,लेकिन सवर्ण और अछूत दायरे में बँधे होने के कारण ’ किन्नर ’ नाम किन्नौर से जैसे बेगाना हो गया । ,"फिर भी किन्नौर के लोग गीतसंगीत , नृत्य और पर्वों के दीवाने हैं और उमंग का कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहते ।" ,आजादी से पहले किन्नौर के लोग तिब्बत से अपने काम की चीजों का आदानप्रदान करते थे । ,सिर्फ चाय और नमक भारतीय बाजार से किन्नौर में आता था । ,"1850 में लार्ड डलहौजी की योजना के तहत भारत तिब्बत मार्ग बना , जो आज एक बड़ा मार्ग है ।" ,"रिकांगपिओ किन्नौर का मुख्यालय है , जो शिमला से 221 किलोमीटर दूर है ।" ,इसे बास्पा घाटी भी कहते हैं । ,क्योंकि यह सतलुज की सहायक बास्पा नदी के किनारे फैली हुई घाटी है । ,वास्पा घाटी को ’ हिमालय की सबसे सुंदर घाटी ’ माना जाता है । ,"पत्थर , लकड़ी और स्लेट से बने यहाँ के मजबूत मकान कलात्मक और आकर्षक हैं ।" ,हर कहीं सेब के बाग हैं । sg,"अखरोट , अंगूर , काला जीरा और केसर इस घाटी को अलग पहचान देते हैं ।" ,सुरागाय और ट्राउट मछली यहाँ खूब हैं । ,पर्वत की ढलानों पर भोज वन चमकते हैं । ,देवदार के जंगल हर कहीं फैले हैं । ,दूर - दूर तक ऊँचीनीची ढलानों पर गाँव नजर आते हैं । ,"चांसी , कुप्पा , कामरू , सांगला , बनिंग सारिंग , बहसेरी , रक्षम और छितकुल गाँव घूमे जा सकते हैं ।" ,"सांगला बाजार , बस अड्डे और लोक निर्माण विभाग के बंगले के सामने है , जहाँ अधिकतर विदेशी पर्यटक मिलते हैं ।" ,"निचली ढलान पर सांगला गाँव है , जहाँ पुल पार करके यहाँ के सबसे सुंदर भ्रमण क्षेत्र ’ कश्मीर ’ जा सकते हैं ।" ,कश्मीर में रंगबिरंगी ट्राउट मछलियों का पालन केन्द्र भी है । ,कामरू किला कलात्मक है । ,सतलुज घाटी के इन दोनों इलाकों में किन्नौर के जिला मुख्यालय की इमारते दूरदूर तक बनी हैं । ,बीच में नया बस अड्डा है । ,चिलगोजे के वनों के बीच लगातार शहरी माहौल पनप रहा है । ,रिकांगपिओ बाजार बहुत फैला हुआ है । ,ऊपर कल्पा क्षेत्र में अब सैलानियों को अच्छा एकांत और खुला वातावरण मिलता है । ,कल्पा का सबसे प्राचीन और दर्शनीय गाँव ’ चिनी ’ है । ,यहाँ के बने प्राचीन और कलात्मक मंदिर कई शैलियों में नजर आते हैं । ,कल्पा में देवदार से घिरी ऊपरी सड़क सैर के लिए खूबसूरत है । ,चिनी और कल्पा गाँव में छोटे - छोटे बाजार हैं । ,खरीदारी के लिए रिकांगपिओ का बाजार ही मुख्य जगह है । ,ऊनी वस्त्र और सूखे मेवे ही स्थानीय चीजों में महत्त्वपूर्ण हैं । ,मई - जून में मौसम व रास्ते किन्नौर जाने के लिए अधिक अनुकूल हैं । ,फुरसत में रहने वाले लोग सितंबर से मध्य अक्टूबर तक भी जाते हैं । ,बरसात के दिनों में शिमला व किन्नौर व स्पिति के बीच के रास्ते बुरी तरह टूट जाते हैं । ,मनाली से आगे रोहतांग दर्रे के पार एक नई दुनिया शुरू होती है । pl,मानो कुदरत की किताब ने अपने सबसे रोमांचक पृष्ठ खोल दिए हों । ,"कुल्लू , चंबा , किन्नौर और जम्मू - कश्मीर राज्य के लद्दाख के साथ ही चीन की सीमा को छूने वाला लाहुल स्पिति हिमाचल प्रदेश का बहुत अलग तरह का जिला है ।" ,"भौगोलिक दृष्टि से लाहुल पहुँचने के लिए किन्नौर के रास्ते जाना ठीक है , फिर दोनों इलाके एकसाथ देखे जा सकते हैं ।" ,सर्दियों में रोहतांग बर्फ़बारी के कारण बंद हो जाता हैं । ,अत: मई से जून और सितंबर से अक्तूबर तक यहाँ जाना बेहतर है । ,लाहुल का मुख्यालय केलांग है और स्पिति का मुख्यालय काजा है । ,मनाली से 5 - 6 घंटे में बस मार्ग से केलांग पहुँचना बेहद रोमांचक है । ,रोहतांग तक चढ़ाई और फिर उतराई । ,"पहले चंद्रनदी का तटीय सफर , फिर भागा नदी का ।" ,यहीं दोनों नदियाँ तांदी संगम पर चंद्रभागा नदी बन जाती हैं और आगे जा कर चिनाब । ,"समुद्रतल से 3,150 मीटर की ऊँचाई वाला केलांग 8वीं सदी के गुरुघंटाल गोंपा और बौद्ध मंदिर की अनोखी कलात्मकता के लिए प्रसिद्ध है ।" ,कारदंग गोंपा का पुस्तकालय और चित्र संग्रहालय चकित करता है । ,ये स्थान पद्मसंभव की याद दिलाते हैं जो यहाँ इन की आधारशिला रख गए थे । ,पालकोट प्रखंड मुख्यालय है । ,कहा जाता है पालकोट प्रखंड रामायण काल का पंपापुर है जहाँ वानरराज बाली और सुग्रीव की राजधानी थी । ,पालकोट प्रखंड में अनेक गुफाएँ हैं । ,पालकोट प्रखंड में एक तालाब भी है जिसे पम्पासर कहा जाता है । ,"पालकोट की आबोहवा , झरने एवं पर्वतीय दृश्य काफी आकर्षक हैं ।" ,पालकोट प्रखंड में अनेक बगीचे हैं जिसमें से एक का नाम सती बगीचा है । ,राजाडेरा गाँव चैनपुर प्रखंड में स्थित जंगल के भीतर बसा हुआ बहुत ही रमणीक स्थान है । ,राजाडेरा गाँव नेतरहाट से 26 कि.मी. दक्षिण में है । ,राजाडेरा गाँव एक तश्तरीनुमा ऐसे निचले भूभाग में अवस्थित है जिसके चारों ओर पहाड़ी घिरी हुई है । ,राजाडेरा गाँव के पास में ही सदनी घाघ नामक जलप्रपात अवस्थित है । ,अंग्रेजों के काल से ही राजाडेरा गाँव प्रसिद्ध पिकनिक स्थल के रूप में चिह्नित है । ,गुमला जिले के डुमरी प्रखंड में चैनपुर से 26 कि.मी. उत्तर - पश्चिम में मंझागाँव स्थित है । ,"मंझागाँव , डांड़टोली और लिटियाचुओं तीन टोले में विभक्त है ।" ,मंझागाँव के पहाड़ी क्षेत्र में टांगीनाथ तीर्थस्थल बसा हुआ है । ,टांगीनाथ मंदिर एक शिव मंदिर है जो लगभग 12 फीट ऊँचा है । ,नवरतनगढ़ में नागवंशियों का इतिहास 64 ई. में सुतियाम्बे से शुरू होता है । ,प्रथम राजा फणिमुकुट राय थे । ,चौथे राजा मदन राय तक राजधानी सुतियाम्बे में रही । ,किन्तु पाँचवें राजा प्रताप राय अपनी राजधानी 309 ई. में चुटिया ले गये । ,नवरतनगढ़ के महाराजा देवशाह ने ( 48वें राजा ) गढ़ का निर्माण कराया इसलिए इसे नवरतनगढ़ कहा गया । ,नवरतनगढ़ का निर्माण 1585 ई. में हुआ । ,पुनः नवरतनगढ़ छोड़कर 51वें राजा यदुनाथ शाह को 1707 ई. में पालकोट आना पड़ा । ,पालकोट अभ्यारण्य राँची से 120 कि.मी. दूरी पर गुमला से दक्षिण में है । ,पालकोट अभ्यारण्य चैनपुर वन प्रमंडल क्षेत्र में स्थित है । ,पालकोट अभ्यारण्य में अनेक पहाड़ियाँ हैं जो अधिकतम 872 मीटर तथा न्यूनतम 622 मीटर ऊँची हैं । ,"पालकोट अभ्यारण्य में शंख नदी , बांकी नदी , पिंजरा नदी , पाइलमारा नदी और तोरपा नदी प्रवाहित होती हैं ।" ,पालकोट अभ्यारण्य के भीतर तपकारा सिंचाई बाँध स्थित है जिसमें साल भर पानी रहता है । ,"चीता , भालू , लकड़बग्घा , भेड़िया , सियार , बंदर , खरगोश आदि पालकोट अभ्यारण्य के प्रमुख जीव - जन्तु हैं ।" ,"नेतरहाट एक हिल स्टेशन है जो 3,622 फीट की ऊँचाई पर स्थित है ।" ,नेतरहाट हिल स्टेशन महुआडांड़ प्रखंड में राँची से पश्चिम में करीब 150 कि.मी. की दूरी पर पाट क्षेत्र में अवस्थित है । ,प्राकृतिक दृश्यावली के अतिरिक्त नेतरहाट हिल स्टेशन में लोग सूर्योदय एवं सूर्यास्त देखने के लिए आते हैं । ,नेतरहाट हिल स्टेशन को सूर्योदय स्थल तथा सूर्यास्त स्थल भी कहते हैं । ,सूर्यास्त स्थल मेगनोलिया पॉइन्ट के नाम से भी जाना जाता है । ,"मेगनोलिया पॉइन्ट , नेतरहाट से 10 कि.मी. दूर है ।" ,इसके अलावा यहाँ अपर घाघरी और लोअर घाघरी नामक दो छोटे - छोटे प्रपात भी हैं जो प्रसिद्ध वनभोज स्थल हैं । ,नेतरहाट में एक कृषि फार्म भी है जहाँ की नाशपाती की फसल आसपास के शहरों में सरलता से उपलब्ध देखी जा सकती है । ,नेतरहाट में एक आवासीय स्कूल भी है जिसकी स्थापना 1954 में सरकार द्वारा की गयी थी । ,नेतरहाट में एक विशाल खूबसूरत पर्यटक विश्रामागार की भी व्यवस्था है जिसे पर्यटन विभाग द्वारा बनवाया गया है । ,नेतरहाट का पर्यटक विश्रामागार सड़क मार्ग से जुड़ा है । ,नेतरहाट के लिए राँची और डालटनगंज से बसें जाती हैं । pl,निजी टूरऑपरेटर भी नेतरहाट के लिए गाड़ियाँ उपलब्ध कराते हैं । ,नेतरहाट का नजदीकी रेलवे स्टेशन डालटनगंज है । ,ठहरने के लिए होटल प्रभात विहार के अलावा सरकारी रेस्ट हाउस और टूरिस्ट बंगला उपलब्ध है । ,कोयल व्यू प्वाइंट से कोयल नदी की लहरों को पत्थरों के बीच से गुजरते देख मन प्रसन्न हो जाता है । ,चाँदनी रात में कोयल व्यू प्वाइंट की सुन्दरता और बढ़ जाती है । ,नेतरहाट से 25 कि.मी. की दूरी पर कोयल नदी के तट पर स्थित बनारी एक सुन्दर पिकनिक स्पॉट है । ,बनारी के पहाड़ों में अनेक गुफाएँ हैं । ,कहा जाता है कि एक समय बनारी में पाँडव रहते थे । ,बूढ़ाघाघ / लोधा प्रपात झारखण्ड और छ्त्तीसगढ़ के सीमा प्रदेश में स्थित है जो लातेहार जिले के महुआडांड़ से 14 कि.मी. की दूरी पर है । ,बूढ़ाघाघ / लोधा प्रपात बूढ़ा नदी पर स्थित 450 फीट ऊँचा प्रपात है । ,"सिड़पा चट्टान पर उकेरे गये हिरण , सांड़ आदि व टैटू के डिजाइन किसी रहस्य से कम नहीं ।" ,सिड़पा में ही एक स्थान पर चट्टान से निर्मित शेर की पीठ पर सवार देवी की सैकड़ों मूर्तियाँ यहाँ - वहाँ नजर आ सकती हैं । ,लावालौंग अभ्यारण्य चतरा से दक्षिण - पश्चिम में स्थित है इसकी स्थिति चतरा - चंदवा मार्ग में बाबरा से पश्चिम में है । ,"लावालौंग अभ्यारण्य में बाघ , चीता , जंगली सूअर , सांभर , नीलगाय , हिरण और लकड़बग्घा आदि हैं ।" ,पाकुड़ जिले के पर्यटन स्थल - ,मोर्टिलो टावर अंगरेजों द्वारा निर्मित 30 फीट ऊँचा तथा 20 फीट के व्यास का टावर है । ,अंगरेजों द्वारा निर्मित यह 30 फीट ऊँचा तथा 20 फीट के व्यास का टावर है । ,मोर्टिलो टावर का निर्माण 1856 में अंग्रेज अधिकारी सर मार्टिन ने कराया था । ,कहा जाता है रेलवे अधिकारियों की सुरक्षा के लिए मोर्टिलो टावर का निर्माण किया गया था । ,संथाल विद्रोह के दरम्यान अनिष्ट की आशंका से ही इस मोर्टिलो टावर का निर्माण किया गया था । ,मोर्टिलो टावर में कुल 56 खिड़कियाँ हैं जिनसे गोलियाँ दागी जा सकती हैं । ,यह भी प्रचलित है कि मोर्टिलो टावर से 10 हजार संथाली मारे गये थे । ,मोर्टिलो टावर से प. बंगाल के शहर जांगीपुर तथा राजमहल की पहाड़ियों का दृश्यावलोकन किया जा सकता है । ,पाकुड़ से दक्षिण में स्थित अलीगंज गाँव इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है कि यहाँ सन् 1854 - 55 में बना एक छोटा सा किला है जो संथाल विद्रोह के समय उनकी एकजुटता की मिसाल है । sg,देवीनगर गाँव में विरकटी के राजा उदयनारायण सिंह ने एक देवीमंदिर बनवाया था । ,देवीनगर गाँव महेशपुर से 16 कि.मी. दक्षिण - पश्चिम दिशा में स्थित है । ,अब यहाँ देवी मंदिर के भग्नावशेष ही हैं । sg,देवीमंदिर में विरकिटी तक बनाई गई सुरंग आज भी देखी जा सकती है । ,विरकटी को विरखात्ता या मुंडमालडांगा नाम से भी जाना जाता है । ,विरकटी गाँव महेशपुर से 10 कि.मी. दक्षिण में स्थित है । ,संभवतः 18वीं सदी के प्रारंभ में एक बार मुर्शिदाबाद के बादशाह नवाब मुर्शिद कुली जफर खान के साथ उदयानारायण सिंह का युद्ध हुआ । ,इस युद्ध में फौजों के नरसंहार से पूरा गाँव नरमुंडों से पट गया था । sg,तभी से इस गाँव को मुंडमालाडांगा या विरकिटी कहा जाने लगा । ,आज भी राजा के किले के भग्नावशेष मौजूद हैं । ,गोड्डा जिले के पर्यटन स्थल - ,बासनतराई पाथरगामा प्रखण्ड में एक प्राचीन गाँव है जिसका नामकरण राजा बसन्त राय के नाम पर हुआ है । ,बासनतराई गाँव में एक प्राचीन तालाब है जिसका निर्माण काल अज्ञात है । ,20 हेक्टेयर में स्थित यह वृहद तालाब दर्शनीय है । ,यहाँ स्नान करना पवित्र माना जाता है । ,"माँ योगिनी का मंदिर , गोड्डा से 13 कि.मी. दूर बाराकोपा पहाड़ी पर है ।" ,कहते हैं इस मंदिर के स्थान पर माँ सती की दाहिनी जाँघ गिरी थी । ,माँ योगिनी के मंदिर में माँ की प्रतिमा के रूप में जाँघ की आकृति का शैल अंश है । sg,भक्तजन माँ योगिनी के मंदिर में लाल वस्त्र चढ़ाते हैं । ,सिमडेगा एवं गुमला जिले के पर्यटन स्थल - ,राँची - गुमला मार्ग में टाटा से साढ़े छः कि.मी. पश्चिम में आंजन धाम स्थित है । ,आंजन धाम राँची से 130 कि.मी. तथा गुमला से 21 कि.मी. की दूरी पर स्थित है । ,आंजन धाम की प्राकृतिक छटा का अनुमान इस बात से लगा सकते हैं कि इस स्थान को तीन ओर से नेतरहाट पहाड़ी अपनी पाट श्रृंखलाओं से घेर कर खड़ी है तो एक ओर से खरवा नदी प्रवाहित होती है । ,आंजन को हनुमान की जन्मस्थली भी कहा जाता है । ,हनुमान की माता अंजनी के नाम पर इस गाँव का नाम आंजन पड़ा है । ,1953 के पूर्व तक आंजन धाम की खोज नहीं हो पायी थी । ,कहा जाता है आंजम धाम में 360 शिवलिंग और उतने ही तालाब भी हैं भले ही सभी दिखाई न दें । ,बताया जाता है कि अंजनी माता प्रतिदिन एक तालाब में स्नान कर एक शिवलिंग की पूजा करती थीं । ,राँची - लोहरदगा - गुमला मार्ग में लोहरदगा से 24 कि.मी. दूर हापामुनी नामक एक गाँव है जहाँ माँ महामाया देवी का मंदिर स्थित है । ,माँ महामाया देवी के मंदिर का निर्माण मंदिर के अभिलेख के अनुसार महाराजा मोहन राय के पुत्र गजघंट ने 908 ई. ( 965 संवत् ) में किया था । ,"देवी माँ की मूर्ति को मंजूषा में बंद रखा जाता है , कभी बाहर नहीं निकाला जाता है ।" ,इसके साथ यह विश्वास है कि अगर कोई देवी को प्रत्यक्ष आँखों से देख लेता है तो उसकी आँखों की रोशनी चली जाती है । ,पुजारी अपनी आँखों में पट्टी बाँध कर पूजा करता है । ,"इस मंदिर में बलि की प्रथा है , ऐसा प्रतीत होता है कि यह एक तांत्रिक पीठ सदृश देवी स्थल है ।" ,टांगीनाथ राँची से 178 और गुमला से 78 कि.मी. की दूरी पर ऐतिहासिक महत्व वाला स्थान है । ,"टांगीनाथ इलाके में खुदाई से काफी पुराने सामान , सोना - चाँदी और हीरे तक मिले हैं ।" ,"हम आज उस युग में जी रहे हैं जहां पर गैजेटों की भरमार है , इन गैजेटों ने हमारी जिंदगी जहां एक ओंर आसान बना दिया है वहीं ये हमारी अब एक जरूरत बन चुके हैं ।" ,हम बात करेंगे आज कुछ ऐसे गैजेटों की जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी हमारे काम आते हैं ,जैसे वाटरप्रूफ कैमरा हुआ या फिर डस्टप्रूफ स्मार्टफोन जिसमें पानी और धूल का कोई असर नहीं होता । ,"लैपटॉप के लिए 5 जरूरी ऐसी सिरीज वैसे इस तरह के गैजेट अक्सर वे लोग प्रयोग करते हैं जो थोड़ा एडवेंचर पसंद करते हैं जैसे रॉक क्लाइमिंग करना , या फिर सी डाइविंग करना ।" ,लेकिन आप भी इन गैजेटों को खरीद सकते हैं । ,हम आपको आज कुछ ऐसे ही टफ गैजेटों के बारे में बताएंगे । ,"इनमें डेल का ऐ6400 लैपटॉप , सोनिम ध्फ्1 मोबाइल , छ्ध् स्विस मिलिट्ररी वॉच और छाता तक शामिल है जिसे तोड़ना कोई आसान काम नहीं हैं ।" ,टेक्नालॉजी किसी का इंतजार नहीं करती ,इन दिनों नए नए अविष्कारों के चलते हमारे आस पास गैजेटों का अंबार लग चुका है । ,अगर विश्वास न हो तो अपने आसपास नजर दौड़ा कर देख लीजिए । ,"कैमरा , स्मार्टफोन , चार्जर तो अब आम हो चुके हैं जो सभी के पास मिल जाएंगे ।" ,लेकिन कुछ गैजेट ऐसे भी है जिनका रूप आपको हसने पर मजबूर कर देगा । ,हम आपको आज कुछ ऐसे ही गैजेटों की एक झलक दिखलाएंगे जिने आप चाहें तो गिफ्ट में भी दे सकते हैं या फिर खुद प्रयोग कर सकते हैं । ,"इन्हें आप मल्टीयूज कर सकते हैं यानी चाहें तो घर में या फिर चाहें तो ऑफिस में NULL ," ,इनमें सबसे ज्यादा पॉपुलर पेन ड्राइव है । ,नोकिया ने मेटलिक डिजाइन और प्योर व्यू कैमरा वाले लूमिया 925 की बिक्री शुरू कर दी है । ,अभी इसे जर्मनी में बेचा जा रहा है । ,जल्द ही इसे चीन और यूरोप में लाया जाएगा । ,इसके बाद अमेरिका समेत दुनिया के कई बाजारों में इसे उतारा जाएगा । ,ऐसा लगता है कि नेक्सस से अलग ऐंड्रॉयड डिवाइस इस्तेमाल करने वाले लोगों को गूगल इसका एक्स्पीरियंस कराना चाहती है । ,गूगल ने गूगल कीबोर्ड ऐप जारी किया है । ,यह ऐप 4.0 ( आइसक्रीम सैंडविच ) या इससे ऊपर के ऐंड्रॉयड वर्जन के लिए है । ,"यह ऐप आपको वैसा ही कीबोर्ड देगा , जैसा कि नेक्सस डिवाइसेज़ पर मिलता है ।" ,"यह वैसे ही काम करता है , जैसे कि स्विफ्टकी या स्वाइप NULL ।" ,"लेकिन इन कीबोर्ड्स के लिए आपको पैसे देने पड़ते हैं , जबकि गूगल का कीबोर्ड फ्री है ।" ,इस कीबोर्ड पर गेस्चर टाइपिंग और नेक्स्ट - वर्ड प्रिडिक्शन है । ,गेस्चर टाइपिंग में बिना उंगली उठाए एक अक्षर से दूसरे अक्षर तक उंगली कीबोर्ड पर फेरनी होती है और शब्द खत्म होने पर उंगली स्क्रीन से उठाई जाती है । ,कीबोर्ड में माइक्रोफोन पर टैप करने के बाद बोलकर भी टाइप किया जा सकता है । ,यह कीबोर्ड 26 भाषाओं को सपोर्ट करता है । ,हालांकि इसे इस्तेमाल करने वाले इसमें इमोटिकन्स का न होना एक बड़ी कमी मानते हैं । ,"यह कीबोर्ड अभी इंग्लिश स्पीकिंग कंट्रीज़ के लिए उपलब्ध है , लेकिन गूगल के मुताबिक यह जल्द ही बाकी जगहों के लिए भी उपलब्ध होगा यानी भारत में ऐंड्रॉयड यूज़र्स को अभी थोड़ा इंतजार करना होगा ।" ,"गूगल ने सभी ऐंड्रॉयड यूजर्स को दिया फ्री गूगल कीबोर्ड ऐप आपके मेसेज , ईमेल पर है अमेरिकी सरकार की नजर आ रहा है ऐपल का नया आईओएस 7 ।" ,नोकिया ने मेटलिक डिजाइन और प्योर व्यू कैमरा वाले लूमिया 925 की बिक्री शुरू कर दी है । ,अभी इसे जर्मनी में बेचा जा रहा है । ,जल्द ही इसे चीन और यूरोप में लाया जाएगा । ,इसके बाद अमेरिका समेत दुनिया के कई बाजारों में इसे उतारा जाएगा । ,इस फोन में 1280द्768 रिजॉल्यूशन वाला 4.5 इंच का एमोलेड वीएक्सजीए डिस्प्ले है । ,इसे ग्लव्स पहन कर भी इस्तेमाल कर सकते हैं । ,इस फोन में 1.5 गीगाहर्त्ज ड्यूल - कोर स्नैपड्रैगन प्रोसेसर है और यह विंडोज़ 8 पर चलता है । ,इस फोन में प्योरव्यू 8.7 मेगापिक्सल का कैमरा है । ,कंपनी के मुताबिक प्योरव्यू टेक्नॉलजी की वजह से इस फोन से फोटो और विडियो बहुत क्लियर और शॉर्प आएंगे । ,"इसमें ऑप्टिकल इमेज स्टैबिलाइजेशन , ऑटोफोकस , हाई पावर ड्यूल एलईडी फ्लैश , 1080पी एचडी विडियो रेकॉर्डिंग है ।" ,1.2 मेगापिक्सल वाइड ऐंगल का फ्रंट कैमरा भी है । ,इस फोन में 2000माह् की बैटरी है । ,इस फोन को वायरलेस भी चार्ज किया जा सकता है । ,फोन में 1 जीबी की रैम और 16 जीबी की स्टोरेज है । ,"अगर आप फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट पर अपनी पर्सनल लाइफ खासकर पार्टनर के बारे में स्टेटस अपडेट करते हैं , तो इससे रिश्ता और बेहतर ही होता है ।" ,एक नई स्टडी में यह बात पता लगी है । ,कैलिफॉर्निया के रिसर्चरों की इस स्टडी में देखा गया कि रिलेशन के बारे में अपडेट देने वाले ऐसा न करने वालों से ज्यादा सुखी हैं । ,"हालांकि जाहिर सी बात है कि जो कपल अपने रिश्ते से खुश होगा , वही इस बारे में अपडेट्स भी डालना चाहेगा , पर अब इस बात के लिए वैज्ञानिक आधार भी जुटा लिए गए हैं ।" ,"हफिंगटन पोस्ट के मुताबिक , आधार यह निकला है कि अपडेट्स करके कपल खुद का मनोबल बढ़ाना चाहते हैं ।" ,सैमसंग के भारत में सबसे बड़े स्मार्टफोन के ऐलान के एक हफ्ते बाद गैलक्सी नोट की कीमत में भारी कमी आई है । ,गैलक्सी नोट 2011 में लॉन्च हुआ था । ,"इस वक्त कंपनी की वेबसाइट पर इसकी कीमत 28,050 रुपए है , जबकि ऑनलाइन रीटेलर्स इसे 21,500 रुपए तक में बेच रहे हैं ।" ,"अब तो तू दुल्हन की बुआ हो गई है , अब तो अपने लिए कोई अच्छा सा दूल्हा चुन ले ।" ,"लाजो ! मैं तो कब से तैयार हूँ लेकिन मेरे लायक इस पिंड विच कोई है ही नहीं , तो मै क्या करूं ?" ,मेरे को तो लगता है मेरे लिए किसी विलायती को ही आना पड़ेगा । ,भई कमाल है ! बीस साल में पूरी नस्ल जवान हो गई है । ,जब मैं छोटी थी ना तेरे नाना मुझे सिखाया करते थे कि औरत और मर्द में कोई अंतर नहीं है । ,जो एक का हक है वही दूसरे का हक है । ,पूरा बचपन मैं इस बात को सच मान कर जीती रही । ,लेकिन जैसे - जैसे बड़ी होती गई समझ में आता गया कि कितना झूठ है । sg,"मेरी पढाई रोक दी गई इसलिए कि मेरे भाईयों की पढाई ज़्यादा ज़रूरी थी , वो थी मेरी पहली कुर्बानी ।" ,"फिर उसके बाद हर मोड़ पर कभी बेटी बनकर , कभी बहन तो कभी बीवी बनकर अपनी खुशियों की बलि चढाती गई ।" ,"वो बेटी , बहन , बीवी बनकर कदम कदम पर अपने को कुर्बान नहीं करेगी ।" ,"क्या हुआ अगर वो एक लड़की है , वो ज़िंदगी अपनी मर्ज़ी से जियेगी , उसे अपने हिस्से की हर खुशी नसीब होगी ।" ,"मगर मैं गलत थी सिमरन , मैं तो यह भूल ही गई थी कि औरत को वादा करने का भी कोई हक नहीं है ।" ,वो तो पैदा ही इसलिए होती है कि मर्द के लिए कुर्बान होती रहे । ,मर्द तो औरत के लिए कभी कुर्बानी नहीं देता और ना ही कभी देगा । ,"आज मैं तेरी मां , तुझसे तेरी खुशियाँ मांगने आई हूँ , तू उसे भूल जा बेटी ।" ,"तेरे बाऊ जी तेरे आँसू नहीं समझने वाले इसलिए सबके सुख - चैन के लिए , मैं तेरे हाथ जोड़ती हूँ , तू उसे भूल जा बच्ची ।" ,"तुम ठीक कहती हो माँ , मैं भी कितनी नादान हूँ ना मुझे तो ये भी नहीं पता कि वो मुझसे प्यार करता भी है या नहीं ।" ,"आखिर बाऊ जी मेरे पिता हैं , उन्होंने हमेशा मेरी खुशी के बारे में सोचा है ।" ,क्या मैं उनकी खुशी के लिए एक छोटी सी कुर्बानी नहीं दे सकती ? ,"जाओ मां , जाकर बाऊ जी से कह दो कि मैं शादी के लिए बिलकुल तैयार हूँ , अब उन्हें मेरी तरफ से कोई परेशानी नहीं होगी ।" ,"बलदेव ! पता नहीं क्यूं मुझे एक बात खाई जा रही है , मैंने सिमरन की आँखों में एक उदासी सी देखी है ।" ,"उसकी हँसी में भी एक झिझक सी है , सब ठीक है ना ?" ,"कुछ नहीं माँ , नई जगह है , नए - नए लोग हैं , हवा - पानी बदला है , थोड़े दिनों में आहिस्ता - आहिस्ता ठीक हो जाऊँगी ।" ,"तुम नहीं जानते राज कि उस घर में क्या हो रहा है , परसों मेरी सगाई है और पंद्रह दिन बाद मेरी शादी ।" ,"सारी तैयारियाँ हो चुकी हैं , मेरे बाऊ जी ने अपने दोस्त को ज़ुबान दी है और उनकी ज़ुबान उनकी जान है ।" ,"हमें यहां से भागना ही होगा राज , हमें यहाँ से भागना ही होगा ।" ,"नहीं सिमरन NULL , मैं तुम्हें यहां से भगा के या चुरा के ले जाने नहीं आया हूँ ।" ,"भले ही मेरी पैदाइश इंग्लैंड में हुई हो पर हूँ मैं हिंदुस्तानी , मैं यहां तुम्हें अपनी दुल्हन बनाने के लिए आया हूँ ।" ,"मैं जानता हूँ जो मैं कर रहा हूँ वो बहुत मुश्किल है , लेकिन मुझे हमारे प्यार पर पूरा भरोसा है ।" ,"सिमरन ! मैं इस रास्ते पर अकेला नहीं चल सकता , तुम्हें मेरी ताकत बनकर मेरे साथ चलना होगा ।" ,राज सही वक्त पे नहीं पहुंचता ना आज तो शिकारी का शिकार हो चला था । ,सच राज ! तूने मुझे खरीद लिया यार ! ,तुमने कुलजीत की जान बचाकर हम पर बहुत बड़ा एहसान किया है बेटे । ,"जल्दी तैयार हो जा , बलदेव के यहां दावत पे जाना है , अरे भाई उसी की लड़की के साथ तो मेरे कुलजीत का ब्याह हो रहा है ।" ,"चाई जी ! ये राज , मेरा विलायती यार जिसके बारे में मैंने बात की थी आपसे ।" ,अब आप रहने दीजिए मैं करता हूँ । ,"अरे नहीं - नहीं तुम तो लड़के वाले हो , मेहमान हो हमारे ।" ,"आप भी कमाल करतीं हैं मां जी , एक पल में बेटा बना दिया और दूसरे ही पल में पराया कर दिया ।" ,"आज बहुत अच्छा शगुन है , मैंने आज पहली बार सिमरन को दिल खोल कर हँसते देखा है ।" ,"अब आप असली बात सुनिए मां जी , मेरी मां कहा करती थी जो शादी वाले घर में सेवा करता है उसको बहुत सुंदर दुल्हन मिलती है ।" ,ओहो ! तो ये सब एक सुंदर दुल्हन के लिए हो रहा है ! ,आजकल अच्छी दुल्हन सिर्फ किस्मत वालों को मिलती है मां जी । ,तुम जानते हो सगाई की अँगूठी इस उंगली पर क्यूं पहनी जाती है ? sg,"क्यूंकि इस उंगली की नस सीधे दिल तक जाती है , मैं तुम्हारे सिवा किसी और की अंगूठी नहीं पहन सकती राज ।" ,"तुम्हारे लिए ये सब एक बहुत बड़ा मज़ाक है ना , मुझ पर क्या गुज़र रही है , तुम कभी नहीं समझ सकते ।" ,"मैं सब समझता हूँ सिमरन , तुम्हारा दर्द , तुम्हारी तड़प , तुम्हारे आंसू लेकिन तुम क्यूं नहीं समझती कि अभी तो सिर्फ शुरुआत है ।" ,"बाऊ जी कल तो आपने कमाल कर दिया ! क्या नाचे हैं आप , सबकी छुट्टी कर दी ।" ,भागवान ! मैंने फैसला कर लिया है कि आज मैं राज से बात कर के ही रहूँगा । ,कौन ? ,कौन हो तुम लोग ? ,इतनी रात गए हमारे घर में क्या कर रहे हो ? ,हमें लुटिया पठान ने भेजा है । ,इन्हें निर्यात पण्य क्षेत्रों में बेचकर लम्बे समय के विकास के लिए वित्तीय मदद प्राप्‍त होगी । ,कतिपय समय हेतु जानबूझकर जमीन का कुप्रयोग किया जाए । ,इन समस्याओं के लिए प्रयुक्त मृदाएँ व्यवस्थित चारे के अंतर्गत ज्यादा उत्पादक होंगी । ,इस क्षेत्र के विकास के लिए यह सुझाव दिया गया है कि यहाँ के लम्बे समय नियोजन के लिए पशुधन पालन पर ध्यान केन्द्रित किया जाए व इसे भूमि सम्भाव्यता मानचित्र के उदाहरण द्वारा स्पष्‍ट किया गया है । ,यद्यपि जब किसान चारा बोयेंगे उस समय उन्हें चारा बुआई सम्बन्धी निर्देशों की जरूरत होगी । ,इसके लिए यहाँ पण्य व्यवस्थाएँ भी आवश्यक होंगी तभी इस उद्योग के भविष्य के सम्बंध में किसानों में आत्मबल जागृत हो सकेगा । ,किन्तु यहाँ की तात्कालिक जरूरत एक विश्‍वसनीय नगदी सस्य की है जिसे इस प्रदेश की अर्थव्यवस्था में निर्वाहक सस्य के अलावा अधिक महत्त्व न दिया जाए । ,इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए इस प्रदेश में उच्च स्थलीय चावल बोने की अनुशंसा की गई है । ,"दक्षिणी भाग में एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ केला व अनन्नास के उत्पादन से पहले लाभ प्राप्‍त हुए हैं , किन्तु उन्हें नियमित पण्यक्षेत्र प्राप्‍त नहीं हो सका ।" sg,वरानको के निकट तटीय गर्त से दलदली चावल उगाया जाता है । ,इस क्षेत्र में भी पशुपालन के लिए चरागाह बनाने की संभावनाओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए । ,"जहाजों के लिए घाट के निर्माण से नट , पशुधन व चावल के निर्यात में सुविधा होगी ।" ,ऐसी फसलों के उत्पादन पर ध्यान दिया जाना चाहिए जिनके लाने व ले जाने में कम - से - कम नुकसान होता हो । ,वहाँ संभावित चावल भूमि अधिक उत्पादक हो सकती है । sg,संयुक्‍त राज्य के सुदूरवर्ती व सुविकसित मृदा क्षेत्रों में जहाँ सस्यें ही प्रधान पैदावार होती हैं वहाँ प्रामाणिक पैदावार औसत उपज को स्पष्‍ट करती है । sg,हर सस्य के स्थानीय महत्त्व के अनुसार उत्पादकता वर्ग सस्य वर्गक्रम के सामान्य भारित प्रतिशत ( simple percentage weighting ) द्वारा निकाले जाते हैं । ,ऐसी मृदाएं जिनका भारित औसत 100 तथा 90 के बीच में है उसे 1 वर्ग में रखा जाता है तथा 90 और 80 के मध्य में 2 तथा यथाक्रम से । ,स्टोरी सूचनांक ( the Storie Index ) एक आगमनिक विधि है । ,इस विधि का उपयोग संयुक्‍त राज्य व अन्य देशों में किया गया है । ,यह विधि मृदा परिच्छेदिका पर अवलंबित है । ,परिच्छेदिका के प्रमुख लक्षण तीन कारकों में स्पष्‍ट होते हैं । ,उनमें से एक कारक धरातलीय गठन है । ,हर किसी को उस पौधे की उन्नति की अनुकूलतम दशाओं के अनुमानित प्रतिशत के रूप में उद्धरित किया जाता है । ,सोवियत संघ में अब ऐसा माना जाने लगा है कि राज्य व सामूहिक फार्मों से अत्यधिक उत्पादन के लिए भूमि के विविध वर्गों की पैदावारों व परिव्ययों पर ध्यान देने की जरुरत होती है । ,"भूमि के विभिन्न वर्गों की अनुकूलता , किन्तु उर्वरकता और कार्य की योग्यता में विभेद के आधार पर उन्हें विविध भूमि प्रकारों में एक साथ वर्गीकृत किया जाता है ।" ,कृषि को कृषि योग्य भूमि की आपूर्ति के आधार पर दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है । ,गहन कृषि - इस प्रकार की खेती उन भू - क्षेत्रों में अधिक मिलती है जहाँ कृषि योग्य भूमि का विस्तार कम है तथा जनसंख्या का घनत्व ज्यादा है । ,इन भागों में भूमि पर जनसंख्या का भार ज्यादा होने के कारण प्रति व्यक्‍ति कृषि योग्य भूमि की मात्रा बहुत कम मिलती है । ,"गहन कृषि वाले प्रदेशों में गहरी जुताई , भरपूर सिंचाई के साधन , पूंजी , श्रम , उर्वरकों की अधिक आपूर्ति और वैज्ञानिक उपकरणों की सहायता से वर्ष में एक से अधिक फसलें पैदा की जाती हैं और प्रति हेक्टेयर अधिकाधिक उत्पादन लेने के प्रयास किये जाते हैं ।" ,"ज्यादा उत्पादन प्राप्‍त करने हेतु सस्यावर्तन , उत्तम बीज , कीट संरक्षण आदि की व्यवस्था की जाती है ।" ,इन क्षेत्रों में खेत छोटे - छोटे होते हैं व खाद्य - फसलों के उत्पादन पर बल दिया जाता है जिससे ज्यादा से ज्यादा जनसंख्या का भरण - पोषण किया जा सके । ,गहन कृषि वाले ये प्रदेश काफी प्राचीन काल से आबाद हैं और किसानों ने सदियों के प्रयोगों से इस गहन कृषि - पद्धति तथा भूमि उपयोग के प्रतिरूप का विकास किया है । ,ये क्षेत्र नदी - घाटियों व ज्यादा धनी जनसंख्या वाले केन्द्र हैं । ,ज्यादा जनसंख्या के कारण सस्ते श्रमिकों की बहुतायत होती है । sg,इसलिए किसानों ने गहन कृषि को अपनाया है । ,इस तरह की कृषि में चावल मुख्य फसल है जो वर्ष में दो अथवा तीन बार तक कुछ क्षेत्रों में पैदा किया जाता है । ,विस्तृत खेती उन भू - क्षेत्रों में सबसे अधिक पाई जाती है जिन क्षेत्रों में जमीनें अत्यधिक हैं अथवा आबादी का प्रतिशत व घनत्व अपेक्षाकृत अत्यधिक कम है । ,"इन क्षेत्रों में किसानों का प्रमुख उद्देश्य होता है , बड़े - बड़े फार्मों से ज्यादा से ज्यादा उत्पादन प्राप्‍त करना ।" ,इन विस्तृत कृषि - प्रदेशों में फसलों का उत्पादन व्यापार के दृष्‍टिकोण से करते हैं । ,फार्मों पर फसलों का विशिष्‍टीकरण होता है । pl,"जहाँ विस्तृत कृषि - प्रदेश में एक फसल की प्रधानता होती है , वहीं गहन कृषि में वर्ष में दो या तीन फसलें जीवन यापन हेतु पैदा की जाती हैं ।" sg,श्रम की कमी मशीनों से पूरी की जाती है । ,"रूस के भीतरी भागों ( स्टेपीज ) , कनाडा के प्रेयरी , संयुक्‍त राज्य अमेरिका के दक्षिणी तथा मध्य क्षेत्रों तथा अर्जेन्टाइना के पंपास में इस तरह की विस्तृत कृषि का प्रचलन है ।" ,गेहूँ प्रमुख फसल है जो सर्दी के मौसम तथा बसंत काल में बोया जाता है । ,आर्द्र कृषि - ,वे आर्द्र कृषि क्षेत्र होते हैं जहाँ 200 सेमी. अथवा ज्यादा वर्षा होती है । ,पौधों को नमी की आपूर्ति वर्षा से हो जाती है । ,आर्द्र कृषि में चावल की प्रमुखता है । sg,इस पद्धति में अनेक महीनों तक खेतों में पानी भरा रहता है । pl,"नमी की बहुलता से वर्ष में चावल की तीन फसलें ( अमन , आस और बोरो ) प्राप्‍त की जाती हैं ।" ,""" पी. विवैक्स "" तथा "" पी. ओवेल "" परजीवी वर्षों तक यकृत में छुपे रह सकते हैं ।" ,अतः रक्त से रोग मिट जाने पर भी रोग से पूर्णतया मुक्ति मिल गई है ऐसा मान लेना गलत है । ,""" पी. विवैक्स "" में संक्रमण के 30 साल बाद तक फिर से मलेरिया हो सकता है ।" ,"समशीतोष्ण क्षेत्रों में "" पी. विवैक्स "" के हर पाँच में से एक मामला ठंड के मौसम में छुपा रह कर अगले साल अचानक उभरता है ।" ,मलेरिया प्लास्मोडियम गण के प्रोटोज़ोआ परजीवियों से फैलता है । pl,"इस गण के चार सदस्य मनुष्यों को संक्रमित करते हैं - "" प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम "" , "" प्लास्मोडियम विवैक्स "" , "" प्लास्मोडियम ओवेल "" तथा "" प्लास्मोडियम मलेरिये "" ।" ,"इनमें से सर्वाधिक खतरनाक पी. फैल्सीपैरम माना जाता है , यह मलेरिया के 80 प्रतिशत मामलों और 90 प्रतिशत मृत्युओं के लिए जिम्मेदार होता है ।" ,"यह परजीवी पक्षियों , रेँगने वाले जीवों , बन्दरों , चिम्पांज़ियों तथा चूहों को भी संक्रमित करता है ।" ,"कई अन्य प्रकार के प्लास्मोडियम से भी मनुष्य में संक्रमण ज्ञात हैं किंतु "" पी. नाउलेसी "" ( "" P. knowlesi "" ) के अलावा ये नगण्य हैं ।" ,पक्षियों में पाए जाने वाले मलेरिया से मुर्गियाँ मर सकती हैं लेकिन इससे मुर्गी -JOIN पालकों को अधिक नुकसान होता नहीं पाया गया है । ,हवाई द्वीप समूह में जब मनुष्य के साथ यह रोग पहुँचा तो वहाँ की कई पक्षी प्रजातियाँ इससे विनष्ट हो गयीं क्योंकि इसके विरुद्ध कोई प्राकृतिक प्रतिरोध क्षमता उनमें नहीं थी । ,"मलेरिया परजीवी की प्राथमिक पोषक मादा "" एनोफ़िलीज़ "" मच्छर होती है , जोकि मलेरिया का संक्रमण फैलाने में भी मदद करती है ।" ,""" एनोफ़िलीज़ "" गण के मच्छर सारे संसार में फैले हुए हैं ।" ,"केवल मादा मच्छर खून से पोषण लेती है , अतः यह ही वाहक होती है ना कि नर ।" ,"मादा मच्छर "" एनोफ़िलीज़ "" रात को ही काटती है ।" ,शाम होते ही यह शिकार की तलाश में निकल पडती है तथा तब तक घूमती है जब तक शिकार मिल नहीं जाता । pl,यह खड़े पानी के अन्दर अंडे देती है । ,अंडों और उनसे निकलने वाले लारवा दोनों को पानी की अत्यंत सख्त जरूरत होती है । ,इसके अतिरिक्त लारवा को सांस लेने के लिए पानी की सतह पर बार -JOIN बार आना पड़ता है । ,अंडे -JOIN लारवा -JOIN प्यूपा और फिर वयस्क होने में मच्छर लगभग 10 - 14 दिन का समय लेते हैं । ,"वयस्क मच्छर पराग और शर्करा वाले अन्य भोज्य -JOIN पदार्थों पर पलते हैं , लेकिन मादा मच्छर को अंडे देने के लिए रक्त की आवश्यकता होती है ।" ,"मलेरिया परजीवी का पहला शिकार तथा वाहक मादा "" एनोफ़िलीज़ "" मच्छर बनती है ।" sg,युवा मच्छर संक्रमित मानव को काटने पर उसके रक्त से मलेरिया परजीवी को ग्रहण कर लेते हैं । ,"रक्त में मौजूद परजीवी के जननाणु ( अंग्रेजी : "" gametocytes "" , "" गैमीटोसाइट्स "" ) मच्छर के पेट में नर और मादा के रूप में विकसित हो जाते हैं और फिर मिलकर अंडाणु ( अंग्रेजी : "" oocytes "" , "" ऊसाइट्स "" ) बना लेते हैं जो मच्छर की अंतड़ियों की दीवार में पलने लगते हैं ।" ,"परिपक्व होने पर ये फूटते हैं और इसमें से निकलने वाले बीजाणु ( अंग्रेजी : "" sporozoites "" , "" स्पोरोज़ॉट्स "" ) उस मच्छर की लार -JOIN ग्रंथियों में पहुँच जाते हैं ।" pl,मच्छर फिर जब स्वस्थ मनुष्य को काटता है तो त्वचा में लार के साथ -JOIN साथ बीजाणु भी भेज देता है । pl,"मानव शरीर में ये बीजाणु फिर पलकर जननाणु बनाते हैं ( नीचे देखें ) , जो फिर आगे संक्रमण फैलाते हैं ।" ,"इसके अलावा मलेरिया संक्रमित रक्त को चढ़ाने से भी फैल सकता है , लेकिन ऐसा होना बहुत असाधारण है ।" ,मलेरिया परजीवी का मानव में विकास दो चरणों में होता है : यकृत में प्रथम चरण और लाल रक्त कोशिकाओं में दूसरा चरण । ,"जब एक संक्रमित मच्छर मानव को काटता है तो बीजाणु ( अंग्रेजी : "" sporozoites "" , "" स्पोरोज़ॉइट्स "" ) मानव रक्त में प्रवेश कर यकृत में पहुँचते हैं और शरीर में प्रवेश पाने के 30 मिनट के भीतर यकृत की कोशिकाओं को संक्रमित कर देते हैं ।" ,फिर ये यकृत में अलैंगिक जनन करने लगते हैं । ,यह चरण 6 से 15 दिन चलता है । ,"इस जनन से हजारों अंशाणु ( अंग्रेजी : "" merozoites "" , "" मीरोज़ॉइट्स "" ) बनते हैं जो अपनी मेहमान कोशिकाओं को तोड़ कर रक्त में प्रवेश कर जातें हैं तथा लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करना शुरू कर देते हैं ।" ,इससे रोग का दूसरा चरण शुरू होता है । ,""" पी. विवैक्स "" और "" पी. ओवेल "" के कुछ बीजाणु यकृत को ही संक्रमित करके रुक जाते हैं और सुप्ताणु ( अंग्रेजी : "" hypnozoites "" , "" हिप्नोज़ॉइट्स "" ) के रूप में निष्क्रिय हो जाते हैं ।" ,ये 6 से 12 मास तक निष्क्रिय रह कर फिर अचानक अंशाणुओं के रूप में प्रकट हो जाते हैं और रोग पैदा कर देते हैं । ,लाल रक्त कोशिका में प्रवेश करके ये परजीवी खुद को फिर से गुणित करते रहते हैं । ,"ये वलय रूप में विकसित होकर फिर भोजाणु ( अंग्रेजी : "" trophozoites "" , "" ट्रोफ़ोज़ॉइट्स "" ) और फिर बहुनाभिकीय शाइज़ॉण्ट ( अंग्रेजी : "" schizont "" ) और फिर अनेकों अंशाणु बना देते हैं ।" pl,समय समय पर ये अंशाणु पोषक कोशिकाओं को तोड़कर नयीं लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित कर देते हैं । ,ऐसे कई चरण चलते हैं । ,मलेरिया में बुखार के दौरे आने का कारण होता है हजारों अंशाणुओं का एकसाथ नई लाल रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करना । ,"मलेरिया परजीवी अपने जीवन का लगभग सभी समय यकृत की कोशिकाओं या लाल रक्त कोशिकाओं में छुपा रहकर बिताता है , इसलिए मानव शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र से बचा रह जाता है ।" ,"अनुमोदन का अंत , संपादक की विदाई , माघ का प्रभात वर्णन , दमयंती का चंद्रोपालंभ आदि निबंधों में उनकी भावात्मक शैली के दर्शन होते हैं ।" sg,द्विवेदी जी द्वारा किए गए भाषा के परिष्‍कार की बात आरंभ में कही जा चुकी है । ,"अग्रांकित महत्वपूर्ण पंक्‍तियों को देखिए - यदि द्विवेदी जी न उठ खड़े होते तो जैसे अव्यवस्थित , व्याकरण - विरुद्ध और ऊटपटांग भाषा चारों ओर दिखाई पड़ती , उसकी परंपरा जल्दी न रुकती ।" sg,"16 जनवरी , 1899 ई. को गुप्‍त जी ने ’ भारतमित्र ’ का संपादन - भार संभाला ।" ,उनके संचालन का दायित्व भी उन्हीं पर था । ,इसलिए पत्र को उन्होंने अपने अनुसार एक नई व्यवस्था दी । ,"गुप्‍तजी चूंकि युग चेतना के प्रति सचेत थे और उनकी जातीय निष्‍ठा बलवती थी , इसलिए स्वाभाविक था कि उग्र राष्‍ट्रीयता ही पत्र की नीति बने ।" ,बालमुकुंद गुप्‍त महावीरप्रसाद द्विवेदी के समसामयिक थे । ,परंतु उनकी निबंध रचना की शैली भारतेंदु युग की है । ,भाषा में पहले से अब परिष्कार हो चुका है । ,"वाक्‍य विन्यास एकदम सधा हुआ है , गति और यति का वैसा ही ध्यान रखा गया है जैसे मुक्‍त छंद में ।" ,गुप्‍तजी छोटे और चुभते हुए वाक्‍य लिखने में अद्वितीय थे । ,"उन्होंने पत्रकारिता से सीख लिया था कि लघु वाक्‍यावली और मुहावरेदार सरल भाषा , प्रभाव की दृष्‍टि से बहुत ही उपयोगी होती है ।" ,"' काशी में जन्में पराड़कर जी को पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश दिलाने का श्रेय वैसे तो उनके मामा श्री गणेश सखाराम देउस्कर को है , लेकिन ’ हितवार्ता ’ से ’ भारत मित्र ’ में लाकर उन्हें एक नए युग का सूत्रपात करने का अवसर संपादकाचार्य पं. अंबिकाप्रसाद वाजपेयी ने ही दिया । ’" ,बंगाल में तब पत्रकारिता की कला काफी उन्नत थी । ,उस समय के बंगाल के एक विलक्षण पत्रकार थे - पंचकौड़ी बनर्जी । ,वे अनेक शैलियों में लिख सकते थे । ,"उन्हें कभी पराड़कर जी के पिता ने पढ़ाया भी था , इसलिए वे पराड़कर जी से विशेष स्नेह करते थे ।" ,उन्होंने युवा पराड़कर को पत्रकारिता की प्रारंभिक दीक्षा दी थी । ,"किशोरावस्था में जिस लगन से उन्होंने अध्ययन किया था और मामा देउस्कर जी की प्रेरणा से एक हाथ में गीता और दूसरे में ’ पिस्तौल ’ लेकर जिस क्रांतिकारी भविष्य का वरण किया , उसके लिए नया माध्यम आवश्यक था और यह माध्यम बनने की शक्‍ति उन जैसे विचारक के लिए पत्रकारिता में ही निहित थी ।" ,पराड़कर जी ने न केवल हिंदी पत्रकारिता को नई दिशा दी अपितु उन्होंने हिंदी गद्य का स्वरूप सुंदर और प्रभावपूर्ण बनाया । ,उन्होंने सैकड़ों नए शब्द गढ़े और नए मुहावरों का प्रचलन किया । ,’ आज ’ में चलाए गए आपके सैकड़ों शब्द हिंदी में चल पड़े । ,मिस्टर के स्थान पर ’ श्री ’ तथा ’ मैयर्स ’ के स्थान पर ’ सर्वश्री ’ का प्रयोग आपने ही चलाया जो बहु प्रचलित हुआ । ,फिर भारत सरकार ने भी उसे स्वीकार किया । ,हिंदी व्याकरण के अनेक मौलिक सिद्धांत आपके साथ ही चले गए । ,’ मैं ’ तथा ’ को ’ के प्रयोग संबंधी आपके व्याकरण सिद्धांत विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं । ,हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में गणेशशंकर विद्यार्थी का योगदान अविस्मरणीय था । ,वे जुझारू प्रकृति के समर्पित एवं दृढ़ पत्रकार थे । ,पत्रकार होने के साथ - साथ वे स्वंत्रता सेनानी भी थे जो मातृभूमि को आजाद कराने के लिए सदैव प्रयत्‍नशील थे । ,"कानपुर से प्रकाशित होने वाले पत्र ’ प्रताप ’ के माध्यम से गणेशशंकर विद्यार्थी के व्यक्‍तित्व में और अधिक निखार आना प्रारंभ हुआ और वे एक जागरूक , समर्थ तथा जुझारू पत्रकार के रूप में प्रसिद्ध हुए ।" ,"’ प्रताप ’ पहले साप्‍ताहिक था , किंतु समयांतर में वह पत्र दैनिक हो गया ।" ,सन् 1920 से उन्हें इस पत्र का प्रधान संपादक नियुक्‍त किया गया । ,"गणेशशंकर विद्यार्थी हिंदी पत्रकारिता के शुरुआती दौर के प्रमुख पत्रकार थे जो पत्रकारों की स्वतंत्रता , स्वाधीनता तथा संगठन के लिए सदैव जूझते रहते थे ।" ,’ समाचार सुधावर्षण ’ के संपादक बाबू श्याम सुंदर बंगाली होने के बावजूद हिंदी के उन्नायकों में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं । ,द्विभाषी पत्र ’ समाचार सुधावर्षण ’ में हिंदी के साथ - साथ बंगला भाषा की भी सामग्री हुआ करती थी । ,"यद्यपि वे पुरानी रीति - नीति के पक्षधर थे , तथापि नए दैनिक हिंदी पत्रों के प्रवर्तन में भी आपने पूर्ण योगदान किया तथा पत्रकारिता जगत में उल्लेखनीय भूमिका निभाई ।" ,"प्रताप नारायण मिश्र हिंदी , उर्दू , बंगला , संस्कृत , अंग्रेजी , फारसी आदि भाषाओं में दक्ष पक्के राष्‍ट्रवादी थे ।" ,महामना मदनमोहन मालवीय जी के साथ उन्होंने ’ हिन्दोस्तान ’ का संपादन सन् 1889 ई. में किया । sg,"उससे पूर्व 15 मार्च , 1883 ई. को उन्होंने ’ ब्राह्मण ’ नामक पत्र निकाला ।" ,"जनता की भाषा में , जन सामान्य के लिए , जनहित की भावना के आधार पर प्रकाशित ’ ब्राह्मण ’ पत्र एक प्रकार से तत्‍कालीन जनता का कंठहार बन गया था ।" ,लगभग 32 पुस्तकों के रचयिता श्री मिश्र भारतेंदु बाबू हरिश्‍चंद्र के अनन्य भक्‍त थे । ,भारतेंदु मंडल के इस उत्कृष्‍ट कवि और पत्रकार का स्वर्गवास सन् 1894 ई. में हो गया । ,"चुटीले हास्य , सत्य कथन , साहस और देश प्रेम के लिए मिश्र जी को सदैव याद किया जाता रहेगा ।" ,कानपुर और काशी में अध्ययन करने के पश्‍चात अंबिकाप्रसाद बाजपेयी ने कलकत्ता के इलाहाबाद बैंक में सन् 1902 से 1905 तक नौकरी की । sg,’ हिन्दी बंगवासी ’ में लगभग डेढ़ वर्ष तक सेवा करने के बाद सन् 1907 में बाजपेयी जी ने ’ नृसिंह ’ नामक मासिक पत्र का प्रकाशन आरंभ किया जो एक वर्ष तक चला । ,सन् 1909 - 10 में वे नेशनल कॉलेज में हिंदी के प्राध्यापक नियुक्‍त हुए । sg,सन् 1911 से 1919 तक ’ भारत मित्र ’ की उल्लेखनीय सेवा द्वारा आपने पत्रकारिता को समुन्नत बनाया । pl,"’ जासूस ’ नामक पत्र के संपादक , प्रकाशक तथा विशिष्‍ट लेखक गोपाल राम गहमरी ने लगभग 200 उपन्यास लिखे ।" ,दिल्ली से 1932 में लेखराम के संपादन में साप्‍ताहिक ’ रंगभूमि ’ का प्रकाशन शुरू हुआ । ,गूजरी महल के भीतरी भाग में पुरातात्विक संग्रहालय है जिसमें दुर्लभ प्राचीन वस्तुओं का संग्रह है जिनमें से कुछ तो पहली सदी ईसवी की हैं । ,इसमें विशेष रूप से दर्शनीय ग्यारसपुर की शालभंजिका की मूर्ति है - यह वृक्ष देवी अपने लघुरूप में परिपूर्ण है । ,मानमंदिर महल का निर्माण 1486 से 1517 के बीच राजा मानसिंह ने कराया था । ,"मानमंदिर महल के बाह्य भाग पर जो टाइल्स कभी सुशोभित थे , वे अब विद्यमान नहीं हैं , किंतु इसके प्रवेश स्थल पर इनके चिन्ह आज भी मौजूद हैं ।" ,मानमंदिर महल के निकट जौहर - सरोवर है जहाँ राजपूत परंपरा के अनुसार युद्ध में पतियों की पराजय के बाद रानियाँ सामूहिक रूप से सती हो गईं । sg,ध्वनि और प्रकाश के रंगारंग कार्यक्रम के माध्यम से यहाँ की हर साँझ अपने गौरवशाली अतीत को एक बार पुर्नजीवित कर देती है । ,सूरजकुंड नगर की अपेक्षा अधिक प्राचीन है जो दुर्ग की प्राचीरों के भीतर है । ,यही वह मूल सरोवर है जहाँ सूरजसेन या सूरजपाल ( इस नाम से वे बाद में प्रसिद्ध हुए ) को संत ग्वालिपा ने निरोग किया था । ,तेली का मंदिर और सास बहू का मंदिर : ,100 फुट ऊँचा 9वीं शताब्दी का तेली मंदिर प्रतिहार कालीन विष्णु मंदिर है जिसमें विभिन्न स्थापत्य शैलियों का अनूठा मेल है । ,इसकी छत जहाँ विशिष्ट रूप से द्रविड़ शैली की है वहीं श्रृंगारिक अलंकरण विशेष रूप से उत्तर - भारतीय शैली के भारतीय आर्य लक्षणों से युक्त है । ,विष्णु को ही समर्पित अन्य सुंदर मंदिरों में सास बहू का मंदिर है जिसका निर्माण 11वीं सदी में हुआ । ,जयविलास महल और संग्रहालय - ,जयविलास महल की शान - शौकत और वैभव अलग ही है । ,जयविलास महल सिंधिया परिवार का आवास स्थान है । ,इसके 35 कक्षों में जीवाजीराव सिंधिया संग्रहालय है और ये कमरे इतनी शानदार और वैभवपूर्ण जीवन शैली से परिपूर्ण हैं कि उसका अतीत सजीव हो उठता है । ,जयविलास महल का स्थापत्य इतालवी शैली का है । ,जिसमें टसकन और कोरिनथियन वास्तुशैली का मेल हुआ है । ,इसके भव्य दरबार कक्ष में दो केंद्रीय फानूस लटके हुए हैं जिनका वजन कई टन है और जिन्हें लटकाने के पहले दस हाथियों द्वारा इस छत की मजबूती का परिक्षण कराया गया था । sg,"इसकी छत की सुनहली कढ़ाई और यहाँ के कलात्मक परदे , फारस के शानदार कालीन और फ्रांस और इटली का प्राचीन भव्य फर्नीचर इन विशालकाय कक्षों के ऐश्वर्य को मानों मुखरित कर देते हैं ।" ,यहाँ के नायाब आकर्षणों में चाँदी की एक रेलगाड़ी है । ,रेलगाड़ी में नक्काशीदार काँच के कक्ष हैं जो टेबिल पर ही बनी हुई पटरियों पर घूमते हुए अपने मेहमान अतिथियों को भोजन और पेय सामग्री परोसकर उनका सत्कार किया करती थी । ,यहीं इटली का बना हुआ काँच का एक भव्य पालना है जिसमें प्रत्येक जन्माष्टमी को बालकृष्ण झूलते थे । ,इसके अतिरिक्त सिंधिया परिवार के पूर्ववर्ती सदस्यों की अनेक व्यक्तिगत स्मृतियाँ और सामग्री भी यहाँ संकलित है । ,सिंधिया संग्राहालय वस्तुतः राजसी वैभव और गरिमा से ओतप्रोत तत्कालीन भारत की ऐश्वर्यवान संस्कृति और जीवन शैली की अनूठी तस्वीर प्रस्तुत करता है । ,"हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के शिखर - पुरुष तानसेन , जो सम्राट अकबर के नवरत्नों में से एक थे , यहाँ ग्वालियर में शांति की गोद में सोये हुए हैं ।" ,इस महान संगीतकार की स्मृति में निर्मित तानसेन समाधि स्मारक दर्शकों पर अपनी पुरातन शालीनता की अमिट छाप छोड़ता है जो आरंभिक मुगलकालीन वास्तुकला का नमूना है । ,यह अब मात्र एक स्मारक ही नहीं वरन् ग्वालियर की जीवन्त सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है । ,तानसेन समाधि पर प्रतिवर्ष नवंबर - दिसंबर में उस महान संगीतकार की स्मृति में एक राष्ट्रीय संगीत समारोह का भी आयोजन किया जाता है । ,जो संगीत प्रेमियों के लिए प्रमुख आकर्षण है । ,गौस मोहम्मद का मकबरा - ,अफगान राजपुरुष - गौस मोहम्मद का बलुए पत्थर से निर्मित यह स्मारक भी आरंभिक मुगल वास्तुकला की शैली पर है । ,स्मारक की जालियाँ दर्शकों को अपनी अनूठी कलात्मक नक्काशी से मुग्ध कर देती हैं । ,भारतीय स्वातंत्र्य समर के अमर सेनानी तात्या टोपे और वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के स्मारक भी ग्वालियर के दुर्निवार आकर्षण हैं । sg,प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर ग्वालियर राजवंश के पुरुषों की छतरियाँ उसके भव्य अतीत की गाथा दोहराती हैं । ,कला वीथिका और नगरपालिका संग्रहालय : ,कला वीथिका में कलात्मक वस्तुओं का सुंदर संग्रह है । ,नगरपालिका संग्रहालय में प्राकृतिक इतिहास संबंधी अनेक सुंदर चीजों का संग्रह है । ,मोरार में रेसीडेंसी के समीप स्थित नवनिर्मित सूर्यमंदिर उड़ीसा के सुप्रसिद्ध कोणार्क मंदिर से प्रेरणा लेकर बनाया गया है और भारत के इस मध्य भूभाग में दर्शकों को पुरातन गरिमा की अनुभूति कराता है । ,कैसे पहुँचें ग्वालियर - ,वायु सेना : ,ग्वालियर के लिए दिल्ली और जबलपुर से नियमित विमान सेवाएँ हैं । ,रेल सेवाएँ : ,ग्वालियर मध्य रेलवे की दिल्ली - मुंबई और दिल्ली - मद्रास मेन लाइन पर है । ,ताज एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस दिल्ली से आगरा के रास्ते ग्वालियर जाती है और अन्य मुख्य रेलगाड़ियाँ तो हैं ही । ,सड़क मार्ग : ,"ग्वालियर के लिए आगरा , मथुरा , जयपुर , दिल्ली , लखनऊ , भोपाल , चंदेरी , इंदौर , झाँसी , खजुराहो , रीवा , उज्जैन और शिवपुरी से नियमित बस सेवाएँ हैं ।" ,अनुकूल मौसम : जुलाई से मार्च ,ठहरने के स्थान : तानसेन रेसीडेंसी ( मध्यप्रदेश पर्यटन ) ,सिमडेगा से 29 कि.मी. पश्चिम में कैराबेड़ा गाँव स्थित है जिसका टोला है रामरेखा । ,रामरेखा पहाड़ी स्थल है । ,कहा जाता है कि राम भगवान अपने वनवास काल में रामरेखा में ही निवास किये थे । ,यहाँ एक तालाब है जिसे गंगास्रोत कहा जाता है । ,"कहाँ ठहरें - एचपीटीडीसी होटल देवदार ( फोन : 236333 ) , होटल पारुल ( फोन : 224344 ) ।" ,गर्मियों में चंबा शहर गरम रहता है । ,समुद्रतल से 996 मीटर की ऊँचाई पर रावी नदी के किनारे बसे इस ऐतिहासिक शहर को फुरसत में देखने के लिए मार्च अप्रैल या अक्टूबर नवंबर में जाना ठीक है । ,"चंबा से डलहौजी 56 किलोमीटर दूर है , अत: दिन भर में चंबा को देख कर भी डलहौजी की शीतलता में लौटा जा सकता है ।" ,खजियार से तो चंबा केवल 43 किलोमीटर ही है । sg,चंबा के राजा साहिल वर्मा ने अपनी पुत्री चंपावती के नाम पर इस शहर को बसाया था । ,"चंबा में लक्ष्मीनारायण मंदिर समूह , रंगमहल , भूरिसिंह म्यूजियम और चौगान क्षेत्र दर्शनीय हैं ।" ,चंबा के आगे ऊँचे और ठंडे इलाकों में भरमौर आदिम जनजातियों और अनोखे प्राकृतिक नजारों की दुनिया है जहाँ फुरसत में साहसिक सैलानी पहुँचते हैं । ,पांगी क्षेत्र तो और भी दुर्गम किंतु सुंदर और रोमांचदायक है । ,चंबा का मिंजर मेला सावन का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक त्योहार है । ,चंबा की मणिमहेश यात्रा भी प्रसिद्ध है । ,कांगड़ा घाटी के मैदान से जुड़ा धर्मशाला जिला कांगड़ा का मुख्यालय भी है । ,देवदार के वृक्षों से घिरे इस छोटे आकार के स्थल की चोटी का नाम मैक्लोडगंज है । ,मैक्लोडगंज में पर्यटकों की गहमागहमी देखने को मिलती है । ,मैक्लोडगंज में गंगचेन किशोंग नामक क्षेत्र में तिब्बत सरकार का मुख्यालय और दलाईलामा का आवास है । sg,धर्मशाला से धौलाधार पर्वतमालाओं का जादुई संसार एक दृष्टि में देखा जा सकता है । ,1850 में ब्रिटिश सरकार ने मैक्लोडगंज को अपने प्रशासनिक हेडक्वार्टर के रूप में स्थापित किया था । ,धर्मशाला से 10 किलोमीटर और पगडंडी से 4 किलोमीटर दूर मैक्लोडगंज पहाड़ की चौड़ी चोटी पर फैला है । ,14वें दलाईलामा के आवास के कारण यहाँ दुनियाभर से लोग उनसे मिलने आते हैं । ,बौद्ध भिक्षुओं और भिक्षुणियों की बड़ी संख्या यहाँ ध्यान की विधियों के बीच अपनी गतिविधियों के साथ नजर आती है । ,यहाँ अधिकांश व्यवसायी तिब्बती हैं । sg,बर्फ़ से ढकी धौलधार पर्वत श्रृंखलाओं का अद्भुत नजारा यहाँ से देखा जा सकता है । ,छोटी जगह होने के कारण यहाँ बहुत भीड़ रहती है । ,अंगरेज लेफ्टिनेंट गवर्नर डेविड मैक्लोडगंज के नाम से विश्वप्रसिद्ध यह स्थल अब विदेशी सैलानियों का पसंदीदा पर्यटन स्थल बन गया है । ,एक समय था जब यहाँ सिर्फ ’ गद्दी ’ नामक जनजातियों के घुमंतू गड़रिए ही डेरा डालते थे । ,पैदल यात्रा करने वालों के लिए यहाँ सराय बनी तो लोग इसे धर्मशाला कहने लगे । ,आज यही जगह मैक्लोडगंज है । ,बौद्ध धर्म की तमाम कार्यपद्धतियों को देखते हुए इसे अब लोग मिनी ल्हासा भी कहने लगे हैं । ,मैक्लोडगंज की भीड़ से बचने के लिए पूर्वी दिशा में भागसू गाँव अच्छी सैरगाह है । ,भागसू गाँव को भागसूनाथ भी कहते हैं । ,16वीं सदी का एक कलात्मक मंदिर भागसू गाँव में मौजूद है । ,भागसू गाँव के पास ही आकर्षक झरना भी है । ,भागसू गाँव में ठहरने की अच्छी सुविधाएँ हैं । ,निचले क्षेत्र में स्थित कोतवाली बाजार में कांगड़ा के लोगों के घर और दुकानें हैं । pl,पास ही कांगड़ा स्कूल ऑफ आर्ट के अंतर्गत 17वीं शताब्दी से अब तक की कलाएँ देखी जा सकती हैं । ,"पेंटिंग , काष्ठकला , मूर्तिशिल्प और वस्त्र विन्यास के दुर्लभ नमूने यहाँ मौजूद हैं ।" ,कढ़ाई के बेहतरीन नमूने और प्राचीन आभूषण भी कोतवाली बाजार में हैं । ,2 किलोमीटर दूर छोटी सी ’ डल झील ’ भी देखी जा सकती है । sg,गर्मियों में गरम रहने वाली मैदानी और खूबसूरत कांगड़ा घाटी को यात्रा के बीच देखा जा सकता है । ,"कांगड़ा घाटी में अनेक ऐतिहासिक , कलात्मक और पुरातत्त्व की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मंदिर और भवन हैं ।" ,ब्रजेश्वरी और मशहूर शिला मंदिर के अजूबों को देखना रोमांचक है । ,पालमपुर कांगड़ा की ऐसी खुली जगह है जहाँ चाय के बागों के सिलसिले न्यूगलपार्क नामक अनोखे पर्यटक स्थल से जुड़े हैं । ,"कांगड़ा घाटी अपने रंगबिरंगे खेतों , चीड़ के वनों और छोटी रेल के लिए जानी जाती है ।" pl,"कांगड़ा व तिब्बर शैली की चीजें मैक्लोडगंज , कोतवाली बाजार और पालमपुर में खरीदी जा सकती हैं ।" ,"हिमाचल प्रदेश की कुल्लूमनाली विश्व प्रसिद्ध घाटी है जो बर्फ़ से ढकी चोटियों , देवदार के वृक्षों , सेब के बागों , दूधिया नदियों , ऊँचाई से गिरते झरनों और सुंदर सैरगाहों के लिए जानी जाती है ।" ,"समुद्रतल से 1,220 मीटर की ऊँचाई पर स्थित कुल्लू शहर जिले का मुख्यालय है ।" ,कुल्लू शहर मनाली से 40 किलोमीटर पहले पड़ता है । ,सरवरी नदी ने कुल्लू को 2 हिस्सों में बाँटा हुआ है । ,पहला यानी ऊपरी भाग ढालपुर और दूसरा अखाड़ा बाजार कहलाता है । ,ढालपुर मैदान में हर साल एक सप्ताह तक दशहरा मेला चलता है । ,"अत: तात्कालिक राजनीति में जो विभाजक शक्तियां सतह पर आईं , वे पत्रकारिता में भी अंदर तक घुस गईं ।" ,"इसलिए पत्रकारिता से यह अपेक्षा करना कि जो विभाजक तत्व राजनीति में काम कर रहे हैं उन पर वह काबू पा लेगी , यह संभव नहीं है ।" ,अखबारों का दुरुपयोग करने के लिए कुछ राज्यों में एक नया आपराधिक सिलसिला शुरू हुआ है । sg,पिछले कुछ चुनावों के दौरान कुछ अखबारों ने चुनावी समाचार छापने के लिए राजनीतिक दलों से मोटी रकम ले ली । ,हर उम्मीदवार को मिलने वाली धनराशि के अनुपात में खबरों का प्रस्तुतीकरण हुआ । ,इसके नीचे कहीं यह स्पष्‍ट भी नहीं किया गया कि यह प्रायोजित समाचार है । ,"उत्तर प्रदेश , बिहार और तमिलनाडु के राजनेताओं की तरह ब्रिटेन के सांसदों का एक बड़ा वर्ग यह चाहता है कि अखबारों की नियंत्रण - रेखा अधिक कड़ी होनी चाहिए ।" ,भारतीय राजनेता ’ हल्ला बोल ’ की हद तक अखबारों को काबू में करने से नहीं हिचकिचाते । ,जबकि ब्रिटेन के राजनीतिज्ञ पिछले कुछ महीनों से संसद के अंदर और बाहर यह अभियान चलाए हुए हैं कि प्रेस कानूनों को अधिक सख्त किया जाए । ,यों ब्रिटेन के मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के किसी भी स्वतंत्र समाज की तुलना में ब्रिटिश प्रेस पर पहले से ही सर्वाधिक वैधानिक अंकुश है । ,यह बात अलग है कि अश्‍लील पत्र - पत्रिकाओं में भी ब्रिटेन सबसे आगे है । ,"ब्रिटेन और भारत में नेताओं की ही नहीं , हर नागरिक के मान - सम्मान की रक्षा के लिए पर्याप्‍त संवैधानिक प्रावधान हैं ।" ,"दूसरे विश्‍वयुद्ध के समय से चले आ रहे सरकारी गोपनीयता कानून भी हैं और यदि उनका कड़ाई से पालन हो तो रक्षा मंत्रालय की बात दूर रही , तहसीलदार के दफ्‍तर में रखी किसी लाल फाइल में उपलब्ध सामान्य प्रशासनिक जानकारी को छापना भी गुनाह माना जा सकता है ।" ,अदालतों की सुनवाई में वर्षों निकल जाते हैं । ,फिर भी दंड के समुचित प्रावधान हैं । ,"समस्या यह है कि दुनिया के राजनीतिज्ञ कानून बनाने की चिंता भले करते हों , उनके अमल के अवसर पर डगमगाने लगते हैं ।" ,उन्हें अधिकाधिक अधिकारों और सराहना की चाह रहती है । ,आलोचना बर्दाशत करने को कोई तैयार नहीं होता । ,"भारत में लालू यादव हों या अर्जुन सिंह या लालकृष्‍ण आडवाणी अथवा जयललिता , अधिकांश अनुकूल समाचारों और टिप्पणियों को पसंद करते हैं ।" ,कमियों की आलोचना कोई नहीं पढ़ना चाहता । ,इंग्लैंड के राजपरिवार के सदस्यों पर छपने वाली खबरों को लेकर आए दिन विरोध के स्वर उठते हैं । ,जर्मनी के चांसलर हेलमुट कोल ने देश में सर्वाधिक बिकने वाली पत्रिका ’ द स्पीगल ’ को पिछले कुछ वर्षों से इंटरव्यू देने से इनकार किया हुआ है कि पत्रिका में उनकी तीखी आलोचना छपती है । ,पूर्व अमेरिकी राष्‍ट्रपति बिल क्लिंटन कुछ अखबारों और पत्रकारों से रुष्‍ट रहे हैं । ,दुनिया में सर्वाधिक स्वतंत्र कहलाने वाले अमेरिकी अखबारों में राष्‍ट्रपति भवन ( व्हाइट हाउस ) के समाचार - संकलन के लिए तैनात संवाददाता कई बार राष्‍ट्रपति के साथ बदल जाते हैं । ,इस दृष्‍टि से राजनीतिज्ञों और पत्रकारों के बीच मधुर या कड़वे संबंधों की बात बहुत अनहोनी नहीं है । ,भारत में नया सिलसिला चला है - आलोचना करने वालों को कुचलने या तबाह करने का । ,कुछ अर्से पहले बिहार में राष्‍ट्रीय कहे जा सकने वाले एक अंग्रेजी दैनिक के पूर्णकालिक पेशेवर ( प्रोफेशनल ) पत्रकार पुलिस बर्बरता के शिकार हुए । ,चंपारण क्षेत्र में वामपंथियों की एक रैली का समाचार संकलित करने के लिए यह विशेष संवाददाता पटना पहुंचे थे और पुलिस ने उनकी जमकर पिटाई कर दी । ,बिहार में पत्रकार के साथ ज्यादती की यह घटना पहली नहीं है । ,अपराधी गिरोह की तरह पुलिस का एक बड़ा वर्ग मनमानी और ज्यादती का अभ्यस्त रहा है । ,"पत्रकारों की लेखनी से तिलमिलाने वाले अफसर , अपराधी और राजनीतिज्ञ अवसर मिलते ही दिमाग ठिकाने लगाने का प्रयास करते हैं ।" ,"फिर भी सुखद आश्‍चर्य की बात यह है कि बिहार , उत्तर प्रदेश या तमिलनाडु में ईमानदारी से सच लिखने वाले पत्रकारों की कमी नहीं है ।" ,उत्तर प्रदेश में आलोचना का स्वर बंद करने के लिए उस समय सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने ’ हल्ला बोल ’ का आह्वान कर दिया । ,इससे प्रबंधक और पत्रकारों के साथ गरीब अखबार विक्रेता ( हॉकर ) तक राजनीतिक अपराधियों के अत्याचार से प्रभावित हुए । ,इस रवैये की भर्त्सना हर तरफ हुई । ,धनबाद में जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा 1989 में पत्रकारों की बर्बर पिटाई और हथकड़ी लगाए जाने के बाद बिहार सरकार ने राष्‍ट्रीय स्तर के एक जांच आयोग का गठन किया था । ,"न्यायमूर्ति श्री सरवर अली की अध्यक्षता में गठित इस आयोग में जाने - माने संपादक श्री एस. सहाय , श्री एम. वी. देसाई और श्री शंभूनाथ झा भी शामिल थे ।" ,आयोग ने सारी प्रशासनिक कठिनाइयों और राजनीतिक उलझनों के बावजूद 1991 में अपनी रिपोर्ट सरकार को दे दी । ,लेकिन राज्य सरकार दो - तीन वर्षों तक रिपोर्ट को दबाकर बैठी रही और थोड़ा हल्ला मचाने पर एक - दो पत्रकारों को मुआवजा देने की सिफारिश पर अमल करके चुप बैठ गई । ,रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि स्वतंत्रता के पहले प्रशासन और सरकार के पास सरकारी गोपनीयता के नाम पर कड़े अंकुश थे । ,अफसरों ने इस हथियार का जमकर इस्तेमाल किया । ,आजादी के 47 साल बाद भी इस रवैये में विशेष परिवर्तन नहीं आया है । ,अधिकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से बचते हैं और यदि करते हैं तो वहां जन - अदालत की तरह शिकवे - शिकायत होने लगती है । ,फिर प्रशासन और पत्रकारों के बीच सीधे टकराव की नौबत टालने के लिए द्विपक्षीय प्रयासों की आवश्यकता है । ,इस जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि प्रदेश और जिला स्तर पर पत्रकारों तथा अधिकारियों की समन्वय समितियां गठित की जानी चाहिए । ,"राज्य स्तरीय समितियों में सूचना विभाग के मंत्री , प्रदेश से प्रकाशित अखबार के तीन संपादक , पेशेवर या स्वयंसेवी संगठनों के तीन प्रतिनिधि , विभिन्न जिला समितियों से मनोनीत पांच पत्रकार , सूचना विभाग के सचिव तथा महानिदेशक शामिल रहने चाहिए ।" ,"जिला स्तर की समितियों में दो स्थानीय संपादक या संवाददाता , पुलिस अधीक्षक , जिलाधिकारी , चिकित्सा - कानून या सामाजिक संगठनों के दो प्रतिनिधि होने चाहिए ।" ,"जांच आयोग के वरिष्‍ठ सदस्य श्री महेंद्र देसाई का मानना था कि ’ इस जांच आयोग का प्रतिवेदन केवल बिहार के लिए ही नहीं , अन्य राज्यों के लिए भी आदर्श बन सकता है । ’" ,"दुर्भाग्य यह है कि अन्य राज्यों की बात दूर रही , बिहार में भी इसकी सिफारिशें लागू नहीं हुईं ।" ,उत्तर प्रदेश में ’ हल्ला बोल ’ की स्थिति सामने आने पर एक बार फिर इस आयोग की रिपोर्ट पर विभिन्न सरकारों का ध्यान जाना चाहिए । ,"दुनिया की सबसे बड़ी तितली , ' अट्लस तितली ' , भी माडायिप्पारा में आतिथ्य पाने आया करती है ।" pl,माडायिप्पारा क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं जैव वैज्ञानिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने इनके संरक्षण के लिए विशेष योजनाएँ तैयार की हैं । ,माडायिप्पारा से निकटतम रेलवे स्टेशन पष़यंगाडि 2 कि.मी. की दूरी पर है । ,माडायिप्पारा से निकटतम एयरपोर्ट करिप्पूर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा 118 कि.मी. की दूरी पर है । ,मलयाल कलाग्रामम कलाकारों के लिए एक प्रशिक्षणालय है । sg,मलयाल कलाग्रामम में अनेक कलाएँ सीखने तथा उनका अभ्यास करने का अवसर प्रदान किया जाता है । sg,"मलयाल कलाग्रामम में चित्र रचना , शिल्प कला , संगीत , नृत्य , चिकनी मिट्टी से बर्तन बनाने की कला आदि में पूर्णकालिक प्रशिक्षण दिया जाता है ।" pl,मलयाल कलाग्रामम में योग और संस्कृत आदि की कक्षाएँ भी चलाई जातीं हैं । pl,मलयाल कलाग्रामम में केरल की संस्कृति एवं इतिहास विषयों पर संगोष्ठियाँ आयोजित की जातीं हैं । ,कलाग्रामम का ग्रन्थालय उत्तम है । ,मलयाल कलाग्रामम के अध्यापक तथा विद्यार्थियों के साथ एक दिन व्यतीत करना एक नया अनुभव देता है । ,"मलयाल कलाग्रामम न्यू माही , कण्णूर से 29 कि.मी. की दूरी पर स्थित है ।" ,मलयाल कलाग्रामम से निकटतम रेलवे स्टेशन माही है । ,"मलयाल कलाग्रामम से निकटतम एयरपोर्ट - करिप्पूर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा , 64 कि.मी. की दूरी पर है ।" ,कणिमंगलम पीतल से बने शिल्पों और दीपों के लिए प्रसिद्ध है । ,कणिमंगलम पय्यन्नूर के पास है । ,मुष़प्पिलंगाडु बीच केरल के अनुपम ड्राइव - इन समुद्रतटों में एक है । ,लगभग 4 कि.मी. लम्बे मुष़प्पिलंगाडु बीच के समुद्र तट पर वाहन द्वारा यात्रा करने की अनुभूति विलक्षणीय है । ,मुष़प्पिलंगाडु बीच पर समुद्र की उत्ताल तरंगों के अतिक्रमण को रोकते हुए कई विशाल चट्टानें खड़ी हैं । ,इन चट्टानों के कारण अनेक नैसर्गिक कुण्ड बन गए । ,यही कारण है कि मुष़प्पिलंगाडु बीच तैराकियों का स्वर्ग माना जाता है । sg,तट के समानांतर खड़े नारियल के पेड़ तट पर छाया प्रदान करते हैं । ,मुष़प्पिलंगाडु बीच कण्णूर से 15 कि.मी. तथा तलश्शेरी से 8 कि.मी. की दूरी पर है । ,"मुष़प्पिलंगाडु बीच का निकटतम रेलवे स्टेशन कण्णूर , 20 कि.मी. दूर है ।" ,"मुष़प्पिलंगाडु बीच से निकटतम एयरपोर्ट - मंगलूर 140 कि.मी. दूर है जबकि , करिप्पूर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा , 103 कि.मी. दूर है ।" ,पय्यांबलम समुद्रतट स्थान शान्तिपूर्वक संध्या बिताने के लिए उपयुक्त है । ,कुछ समय पहले तक पय्यांबलम समुद्रतट स्थानीय लोगों के पिकनिक का केन्द्र था । ,धीरे - धीरे पय्यांबलम समुद्रतट पर पर्यटकों का आगमन बढ़ता जा रहा है । ,"पय्यांबलम समुद्रतट से निकटतम रेलवे स्टेशन - कण्णूर , 2 कि.मी. की दूरी पर स्थित है ।" ,पय्यांबलम समुद्रतट से निकटतम एयरपोर्ट - करिप्पूर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा 95 कि.मी. दूर है । ,पुर्तगाली वाइसराय फ्रान्सिस्को डी अल्मेड द्वारा 1505 में बनवाया गया । ,लाल पत्थरों से बना यह किला त्रिकोणात्मक आकृति का है । ,सन् 1663 में सैंट आंचलो किले पर डचों ने कब्जा कर लिया था और कण्णूर के अली राजा को बेच दिया था । ,सन् 1709 में ब्रिटिशों ने सैंट आंचलो किला अपने अधीन कर लिया और मालाबार के सैनिकों का प्रमुख केन्द्र बना लिया । ,आज सैंट आंचलो किला पुरातत्व विभाग के अन्तर्गत संरक्षित स्मारक है । sg,सैंट आंचलो किले के बाहर समुद्री भित्ति बनाई गई है । sg,समुद्री भित्ति सैंट आंचलो किले को लहरों की मार से बचाती है । ,"सैंट आंचलो किले पर खड़े होकर ' माप्पिला बे मत्स्य ' संग्रहण बन्दरगाह , धर्मडम द्वीप आदि देखे जा सकते हैं ।" ,' मॉप्पिला बे बन्दरगाह ' प्रकृति का वरदान है । ,मॉप्पिला बे बन्दरगाह का इन्डो नोरवीजियन परियोजना के अन्तर्गत आधुनिकीकरण हुआ है । ,"' धर्मडम द्वीप ' जिसका विस्तार 5 एकड़ है , समुद्र तट से केवल 100 मीटर दूर है ।" ,"सैंट आंचलो किला से निकटतम रेलवे स्टेशन कण्णूर , 3 कि.मी. की दूरी पर है ।" ,"सैंट आंचलो किला से निकटतम एयरपोर्ट - करिप्पूर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा , 93 कि.मी. दूर है ।" ,तलश्शेरी का केरल के इतिहास में विशेष स्थान प्राप्त है । ,"तलश्शेरी की समृद्ध विरासतों में विदेशों से रहे निरंतर संपर्क , व्यापारिक - परंपरा , प्रौढ क्रिकेट - परंपरा , सर्कस की परंपरा आदि शामिल हैं ।" ,पुर्तगालियों और डचों ने तलश्शेरी पर अधिकार जमाने की चेष्टा की थी । ,"ब्रिटिश सेनापति आर्थर मिल्लर जो पष़श्शि राजा को अधीन करने आया था , तलश्शेरी में लम्बे समय तक रहा ।" sg,आर्थर मिल्लर ने ही तलश्शेरी को क्रिकेट के खेल से परिचित करवाया । sg,धीरे - धीरे स्थानीय लोगों ने ब्रिटिश सैनिकों से यह खेल सीखा । ,"मूसा , मांपळ्ळि आदि बड़े - बड़े परिवारों ने क्रिकेट को प्रोत्साहन दिया ।" ,"1965 से 2006 तक , संयुक्त राज्य अमेरिका में धूम्रपान की दर 42 % से गिर कर 20.8 % हुई है ।" ,छोड़ने वालों में अधिकतर पेशेवर संपन्न आदमी थे । ,"उपभोग में इस कमी के बावज़ूद , प्रति दिन प्रति व्यक्ति सिगरेट की औसत खपत संख्या 1954 में 22 से बढ़ कर 1978 में 30 हो गई ।" ,"यह विरोधाभास बताता है कि छोड़ने वाले लोग कम थे , जबकि जारी रखने वाले हलकी सिगरेटों की ओर आकर्षित होने लगे ।" ,"यह प्रवृत्ति कई औद्योगिक देशों में समानान्तर चलती रही , भले ही उसकी दर बराबर रही या उसमें गिरावट आई ।" ,"तथापि , विकासशील दुनिया में , 2002 में 3.4 % की दर के साथ तम्बाकू की खपत में वृद्धि जारी है ।" ,"अफ्रीका के कई क्षेत्रों में , धूम्रपान को आधुनिकता से जोड़ कर देखा जाता है और पश्चिम की कई मज़बूत सलाहों पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है ।" ,"आज रूस तम्बाकू का शीर्ष उपभोक्ता है और उसके बाद इंडोनेशिया , लाओस , यूक्रेन , बेलारूस , ग्रीस , जोर्डन और चीन हैं ।" ,विकासशील दुनिया में खपत की दर को कम करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तम्बाकू मुक्त पहल ( Tobacco Free Initiative ) ( TFI ) नामक कार्यक्रम की शुरुआत की है । ,"1980 के दशक की शुरुआत में , अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों की संगठित तस्करी बढ़ी ।" ,धूम्रपान . ,"इसे एक रिवाज के एक भाग के रूप में , समाधि में जाने के लिए प्रेरित करने और आध्यात्मिक ज्ञान को उत्पन्न करने में भी किया जा सकता है ।" ,"वर्तमान में धूम्रपान की सबसे प्रचलित विधि सिगरेट है , जो मुख्य रूप से उद्योगों द्वारा निर्मित होती है किन्तु खुले तम्बाकू तथा कागज़ को हाथ से गोल करके भी बनाई जाती है ।" ,"धूम्रपान के अन्य साधनों में पाइप , सिगार , हुक्का एवं बॉन्ग शामिल हैं ।" ,ऐसा बताया जाता है कि धूम्रपान से संबंधित बीमारियां सभी दीर्घकालिक धूम्रपान करने वालों में से आधों की जान ले लेती हैं किन्तु ये बीमारियां धूम्रपान न करने वालों को भी लग सकती हैं । ,2007 की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक वर्ष दुनिया भर में 4.9 मिलियन लोग धूम्रपान की वजह से मरते हैं । ,धूम्रपान मनोरंजक दवा का एक सबसे सामान्य रूप है । ,तंबाकू धूम्रपान वर्तमान धूम्रपान का सबसे लोकप्रिय प्रकार है और अधिकतर सभी मानव समाजों में एक बिलियन लोगों द्वारा किया जाता है । ,धूम्रपान के लिए कम प्रचलित नशीली दवाओं में भांग तथा अफीम शामिल हैं । ,"कुछ पदार्थों को हानिकारक मादक पदार्थों के रूप में वर्गीकृत किया गया है जैसे कि हेरोइन , किन्तु इनका प्रयोग अत्यंत सीमित है क्योंकि अक्सर ये व्यवसायिक रूप से उपलब्ध नहीं होते ।" ,धूम्रपान का इतिहास लगभग 5000 ई. पू. पुराना हो सकता है और दुनिया भर की कई संस्कृतियों में इसका जिक्र किया गया है । ,"शुरूआती धूम्रपान धार्मिक अनुष्ठानों जैसे देवताओं को प्रसाद , सफाई के रिवाजों के तौर पर , या फिर आध्यात्मिक ज्ञान के लिए ओझाओं या पुजारियों द्वारा अनुमान लगाने के लिए अपने मस्तिष्क के विचार बदलने के प्रयोजन से किया जाता था ।" ,"यूरोपीय अन्वेषण और अमेरिका की विजय के बाद , तम्बाकू धूम्रपान की आदत दुनिया भर में तेज़ी से फैली ।" ,"भारत तथा अफ्रीका के उप सहारा में , यह धूम्रपान के समकालीन तरीकों ( अधिकतर भांग ) के साथ मिल गई ।" ,"यूरोप में , यह नए प्रकार की सामाजिक गतिविधि और नशीली दवाओं के सेवन के रूप में शुरू हुई , जो पहले अज्ञात थी ।" ,"धूम्रपान संबंधित धारणाएं ; पवित्र और पापी , परिष्कृत और गलत , रामबाण दवा और स्वास्थ्य के लिए घातक खतरा , समय तथा स्थान के साथ बदलती रही हैं ।" sg,"केवल अपेक्षाकृत हाल ही में और औद्योगिक पश्चिमी देशों में मुख्य रूप से , धूम्रपान को नकारात्मक रूप से देखा जाने लगा है ।" ,"आज चिकित्सा अध्ययनों ने यह प्रमाणित कर दिया है कि तम्बाकू धूम्रपान कई रोगों जैसे फेफड़े का कैंसर , दिल का दौरा , नपुंसकता और जन्मजात विकारों को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारणों में से एक है ।" ,"धूम्रपान के स्वास्थ्य निहित खतरों के कारण , कई देशों ने तम्बाकू पदार्थों पर उच्च कर लगा दिए हैं और तम्बाकू धूम्रपान को रोकने के प्रयासों के रूप में धूम्रपान विरोधी अभियान प्रत्येक वर्ष शुरू किए जाते हैं ।" ,धूम्रपान का इतिहास लगभग 5000 ई. पू. शामानीवाद के समय का है । ,"कई प्राचीन सभ्यताओं में जैसे बेबीलोनियन , भारतीय और चीनी , धार्मिक अनुष्ठानों में धूप जलाते थे , जिस प्रकार इज़राइली और बाद में कैथोलिक और रूढ़िवादी ईसाई चर्च भी करने लगे थे ।" ,अमेरिका में धूम्रपान की शुरुआत संभवतः झाड़फूंक के समारोहों में धूप जलाने से शुरू हुई किन्तु बाद में इसे आनंद के लिए या सामजिक रस्म के रूप में स्वीकार कर लिया गया । ,तम्बाकू और अन्य कई नशीली दवाओं का प्रयोग समाधि में जाने तथा आत्माओं की दुनिया से संपर्क करने के लिए किया जाता था । ,"लगभग 2000 साल पहले भांग , मक्खन ( घी ) , मछली के मांस , सांप की सूखी खाल और कई प्रकार के लेप अगरबत्तियों के चारों ओर मले जाते थे ।" ,"धूनी "" ( "" धूप "" ) "" और हवन "" ( "" होम "" ) "" का वर्णन आयुर्वेद में चिकित्सा के प्रयोजन के लिए किया गया है और कम से कम 3000 साल पहले से इनका प्रयोग होता रहा है , जबकि "" धूम्रपान "" ( अर्थात धुंआ पीना ) , कम से कम 2000 साल पहले से चला आ रहा है ।" pl,आधुनिक समय से पहले ये पदार्थ विभिन्न लम्बाईयों के पाइपों या चिल्मों द्वारा ग्रहण किए जाते थे । ,"तम्बाकू के आगमन से पहले , मध्य पूर्व में भांग का धूम्रपान आम था तथा यह एक सामान्य सामाजिक गतिविधि थी जो एक पानी के पाइप के इर्द गिर्द केन्द्रित थी , जिसे हुक्का कहते थे ।" ,"तंबाकू की शुरुआत के बाद विशेष रूप से , धूम्रपान , मुस्लिम समाज और संस्कृति का एक महत्त्वपूर्ण अंग बन गया और यह कई महत्त्वपूर्ण रस्मों जैसे शादियों , ज़नाज़े के साथ जुड़ गया और इसकी अभिव्यक्ति वास्तुकला , कपड़ों , साहित्य तथा कविता द्वारा की जाने लगी ।" ,"अफ्रीका के उप सहारा में भांग का धूम्रपान इथियोपिया और पूर्वी अफ्रीकी तट पर भारतीय या अरब व्यापारियों द्वारा 1200 के दशक में या इससे पहले शुरू हुआ और यह उन मार्गों पर फ़ैल गया जिनके द्वारा कॉफी का व्यापार किया जाता था , जो इथियोपिया के पहाड़ी इलाकों में उगाई जाती थी ।" ,"यह धूम्रपान मिट्टी के कटोरे के साथ जुड़े कालाबाश पानी के पाइपों द्वारा किया जाता था , जो कि निश्चित तौर एक इथियोपियाई आविष्कार था जो बाद में पूर्वी , दक्षिणी तथा मध्य अफ्रीका में प्रचलित हुआ ।" ,"अमेरिका तक पहुँचने वाले पहले खोजकर्ताओं और विजेताओं द्वारा दी गई सूचनाओं , जिसमें निवासी पादरी स्वयं खुमारी की उच्च दर तक धूम्रपान करते थे , से ऐसी संभावनाओं का पता चलता है कि रिवाज़ केवल तम्बाकू तक ही सीमित नहीं थे ।" sg,तम्बाकू के वाणिज्यिक विकास के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में वाणिज्यिक तम्बाकू का इतिहास देखें । ,"जेम्सटाउन समझौते के छह साल बाद 1612 में , तम्बाकू को सफलतापूर्वक नकदी फसल के रूप में उगाने का श्रेय जॉन राल्फ को दिया गया ।" ,"मांग तेज़ी से बढ़ी क्योंकि तम्बाकू , जो "" सुनहरी फसल "" के रूप में प्रसिद्ध हो गया था , ने वर्जीनिया को अपने सोने के अभियान में असफल होने के बाद पुर्नजीवित कर दिया था ।" ,"दुनिया भर से आने वाली मांगों को पूरा करने के लिए , तम्बाकू लगातार बोया गया जिससे भूमि तेज़ी से बंजर होने लगी ।" ,इसने पश्चिम को एक अज्ञात महाद्वीप में बसने के लिए प्रेरक का कार्य किया और इसी तरह तम्बाकू उत्पादन का एक विस्तार हुआ । ,"बेकन के विद्रोह से पहले ठेके पर काम करने वाले मजदूर इसके प्राथमिक श्रमिक बने , जिसके बाद गुलामी पर ध्यान केन्द्रित किया गया ।" ,यह प्रवृत्ति अमेरिकी क्रांति के बाद कम हुई क्योंकि दासप्रथा लाभहीन मानी गई । ,हालाँकि 1794 में सूत कातने वाली मशीनों के आविष्कार के साथ यह प्रथा फिर से जीवित हो गई । sg,1560 में फ्रांस में जीन निकोट नाम के एक फ्रांसीसी ( जिनके नाम से निकोटिन शब्द बना है ) ने तम्बाकू का प्रयोग शुरू किया । ,फ्रांस से तम्बाकू इंग्लैंड में फैल गया । ,"धूम्रपान करने वाले पहले अंग्रेज की सूचना 1556 में ब्रिस्टल के एक नाविक के बारे में है , जिसे "" अपने नथुनों से धुआं छोड़ते हुए "" देखा गया ।" ,"चाय , कॉफी और अफीम की ही तरह , तम्बाकू कई प्रकार के मादक पदार्थों में से एक था जिनका प्रयोग दवाई के तौर पर किया जाता था ।" ,1600 के आसपास फ्रांसीसी व्यापारियों द्वारा उस जगह पर तम्बाकू की शुरुआत की गई जिसे आज के आधुनिक समय में जाम्बिया और सेनेगल के नाम से जाना जाता है । ,"इसी समय मोरक्को के काफिले टिम्बकटू के आसपास के क्षेत्रों से तथा पुर्तगाली दक्षिणी अफ्रीका में वस्तु ( और पौधे ) ले कर आये , जिससे 1650 तक पूरे अफ्रीका में तम्बाकू लोकप्रिय हो गया ।" ,प्राचीन दुनिया में शुरुआत के तुरंत बाद ही तम्बाकू की राज्य स्तर पर और धार्मिक नेताओं द्वारा आलोचना होने लगी । ,"तुर्क साम्राज्य , 1623 - 40 , का सुल्तान मुराद चतुर्थ , यह कह कर धूम्रपान पर प्रतिबंध लगाने वाले पहले व्यक्तियों में से एक था कि यह जनता की नैतिकता और स्वास्थ्य के लिए खतरा है ।" sg,चीनी सम्राट चोंगझेन ने अपनी मृत्यु से दो साल पहले धूम्रपान पर प्रतिबंध लगाने और मिंग राजवंश को समाप्त करने का फतवा जारी किया । ,"बाद में , किंग राजवंश के मांचू , जो खानाबदोश घुड़सवार योद्धाओं का कबीला था , ने धूम्रपान के बारे में दावा किया कि "" यह तीरंदाजी की उपेक्षा से अधिक जघन्य अपराध है "" ।" ,"जापान में इडो काल के दौरान , सेनाध्यक्षों द्वारा तम्बाकू के कुछ शुरूआती पौधे यह कह कर बेकार घोषित कर दिए गए कि ये सैन्य अर्थ व्यवस्था के लिए खतरा हैं , क्योंकि , मूल्यवान भूमि को फसलों के पौधों की बजाए एक नशीली दवाई के रूप में प्रयुक्त किया जा रहा है ।" ,कई आलोचकों ने पत्रकारिता की तुलना भी इस किस्म की वेश्या से की है । ,पत्रकारों पर आरोप लगता है कि उनके पास बगैर उत्तरदायित्व की भावना की शक्‍ति एकत्र है । ,क्योंकि वेश्या और पत्रकार दोनों ही उन हवादानों की तरह हैं जिनसे भावनाएं बाहर निकल जाती हैं । ,वे भावनाएं जिन्हें यदि भीतर रहने दिया जाए तो बाद में समाज में विस्फोटक प्रतिहिंसा के रूप में व्यक्‍त होतीं हैं । ,लेकिन इस तरह की तुलना एक हद तक ही उपयुक्‍त है । ,"एक उदाहरण दिया जा सकता है , यदि कोई विपक्ष की तरह सोचता है तो उसके घर के सामने पड़े कूड़े के ढेर को हटाने की जिम्मेदारी सरकार पर है ।" ,यदि कोई बौद्धिक किस्म का जागरूक नागरिक है तो कूड़े को हटाने की जिम्मेदारी अखबार की है । ,अर्थात उस ढेर को एक मुद्दा बनाएं और नैतिक तथा नागरिक प्रश्‍न खड़ा करके उसे हटवाएं क्योंकि वह मानता है कि अखबार लोगों तक खबर भी पहुंचाता है और विचार भी । ,अखबार निजी पसंद का दायरा भी पूरा करता है और सामाजिक दायित्व के वहन की अपेक्षा भी उससे की जाती है । ,"एक बेहतर अखबार या पत्रिका , जिसका अपने समय के सरोकारों के साथ रिश्‍ता होता है , अपने आप में जनता का एक अघोषित मंच बन जाता है ।" ,वह कोशिश करता है कि आलोचनाओं को जनता के दृष्‍टिकोण से रख सके । ,उस जनता के दृष्‍टिकोण को जिसके पास सैद्धांतिक तौर पर अधिकार तो है लेकिन व्यावहारिक धरातल पर उसे उन अधिकारों के उपयोग की अनुकूलता नहीं देता । ,"अखबार अपने दायरे में सामाजिक जीवन के बौद्धिक क्षेत्र में हस्तक्षेप करके उसके फैसलों , दिशाओं और दशाओं को प्रभावित करता है ।" ,अभिव्यक्‍ति की आजादी का उपयोग नैतिकता और संतुलन की परिधियों में होना आवश्यक है । ,"सबको जानने और परखने के अधिकार का जितना रिश्‍ता कानून से है , उससे कहीं ज्यादा रिश्‍ता मानवीय सरोकारों से होता है ।" ,एक स्वस्थ पत्रकारिता की सबसे बड़ी शर्ते मानवीय सरोकार और मानवीय मूल्य हैं । ,"अखबार अपने दृष्‍टिकोण में विरोधी हो सकता है , लेकिन हमेशा सरकार या व्यवस्था के सामने खड़ा विपक्ष नहीं ।" ,"पत्रकार को अपनी पीठ पर विश्‍वास का सिर्फ एक हाथ चाहिए और वह हाथ होता है उसके अपने पाठकों का NULL , जिन्हें सच को जानने का अधिकार प्राप्‍त है ।" ,"जब - जब और जहां - जहां भी अखबारों ने विपक्ष या किसी दल विशेष के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभाने की कोशिश की , उसका धरातल गड़बड़ाया है ।" pl,उदारीकरण के दौर में विदेशी गड़बड़ियां भारत में आसानी से निगली जा रहीं हैं । ,मीडिया इस प्रवृत्ति से अछूता नहीं है । ,कुछ वर्ष पहले ’ ’लंदन टाइम्स’ ’ के पूर्व संपादक विलियम रीज मोग से दिल्ली में मुझे लंबी बातचीत का अवसर मिला था । ,उन्होंने कई दिलचस्प तथ्यों की जानकारी दी थी । ,वह स्वयं प्रेस शिकायत आयोग से जुड़े रहे थे और उनका मानना था कि स्वैच्छिक नियंत्रण प्रणाली प्रेस को संयमित रखने में अधिक प्रभावी भूमिका नहीं निभा पा रही है । ,सख्ती या सेंसरशिप इसका विकल्प नहीं हो सकता । ,फ्रांस में इसके नियंत्रण के प्रयास किए गए लेकिन वहां कई नई समस्याएं सामने आईं । ,ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में न्यायपालिका के माननीय न्यायाधीशों के निजी व्यवहार या जीवन के बारे में खुलकर छापा जा सकता है । ,ब्रिटेन में कुछ न्यायाधीशों के भ्रष्‍टाचार की खबरें बड़ी प्रमुखता से छपीं और यहां तक हुआ कि ऊंचे पदों पर बैठे न्यायाधीशों के लगभग अपमानजनक मुद्रा वाले उलटे चित्र भी पहले पृष्‍ठ पर प्रकाशित किए गए । ,"महात्मा गांधी ने 1946 में ’ हरिजन ’ में लिखा था कि पश्‍चिम की तरह पूर्व में भी अखबार लोगों की बाइबल , कुरान , जेंद अवेस्ता और भगवद्‍ गीता बनते जा रहे हैं ।" ,"अखबार में जो कुछ छपता है , उसे लोग ईश्‍वरीय सत्य मान लेते हैं ।" sg,लोग किसी भी छपी हुई बात को दैवी सत्य मानते हैं । ,इस कारण संपादकों और अन्य पत्रकारों का उत्तरदायित्व बहुत बढ़ जाता है । ,इस तरह अखबार की विश्‍वसनीयता और संपादक की भूमिका को लेकर निरंतर बहस होती रही है । ,अखबार को उत्पाद के रूप में देखे जाने का सिलसिला भारत में पिछले डेढ़ दशक से तेज हुआ है । sg,पश्‍चिम की तर्ज पर कुछ बड़े संस्थानों ने इस धारणा को महत्व दिया कि साबुन की तरह ही अखबार भी एक उत्पाद है । ,यों आजादी के बाद कई बड़े संस्थानों में मालिकों और संपादकों के बीच इतने गहरे निजी रिश्‍ते रहे कि वे जाने - अनजाने प्रबंधन के हितों की रक्षा करने में सदैव तत्पर रहे । ,उनमें ऐसे संपादक और मालिक शामिल थे जो प्रेस की स्वतंत्रता के लिए कर्णधार माने जाते रहे । ,व्यक्‍तिगत संबंध व्यावसायिक हितों के लिए उपयोगी माने जा सकते थे तो अब व्यावसायिक हितों के लिए मालिकों द्वारा संपादकों का उपयोग होने लगा । ,अखबार का उपयोग व्यावसायिक हितों के लिए भी वहां होता रहा है । ,90 के दशक में अखबारों को उत्पाद की तरह मानने के साथ बाजार में अग्रणी होने के लिए तेज दौड़ने वाले घोड़े की तरह अनुभवी और बुजुर्ग संपादकों की अपेक्षा कम उम्र के पत्रकारों को संपादक बनाए जाने का सिलसिला शुरू हुआ । ,अनुबंध की परंपरा से पत्रकारों का वेतन अवश्य बढ़ता चला गया । ,"वेतन आयोगों की सिफारिशों से प्रारंभिक चार दशकों तक कुछ बड़े अखबारों के पत्रकारों को अवश्य लाभ हुआ , लेकिन क्षेत्रीय अखबारों में ये सिफारिशें अभी ठीक से लागू नहीं हो सकी हैं ।" pl,बड़े संस्थानों ने भी बचाव के अपने गलियारे ढूंढ लिये । ,"बहरहाल , देश में अब भी कुछ ऐसे संस्थान हैं जिन्होंने संपादकीय स्वतंत्रता और गरिमा को बनाए रखा है ।" ,ईमानदारी और निष्‍पक्षता के बिना किसी अखबार या पत्रकार की साख नहीं बन सकती है । sg,सूचना एवं तकनीकी क्रांति के इस युग में समाचार देने वाले माध्यमों के विकास ने अखबारों के स्वरूप को भी निर्धारित करने का काम किया है । ,सूचना का जैसा बाजार इस समय खुला है वैसा न तो कभी देखने में आया और न ही सुनने में । sg,अस्सी के दशक के शुरू में कर्नाटक के मुख्य मंत्री गुंडू राव ने श्रीमती इंदिरा गांधी के मंत्रियों के संबंध में कुछ बड़बोलेपन की बात कह दी । ,शौरी ने उसे छाप दिया । pl,इसी तरह उन्होंने चौधरी देवीलाल की कही हुई बातों को ’ इंडियन एक्सप्रेस ’ में शब्दश: छाप दिया । ,प्रतिरक्षा की सही और सटीक रिपोर्टिंग के लिए आवश्यक है कि संवाददाता फील्ड में जाएं और स्वयं वहां की स्थिति का अध्ययन करें । ,इसी श्रेणी में विश्‍व के सबसे ऊंचे युद्ध - स्थल सियाचिन का सवाल आता है । ,इस बारे में अनेक लेखकों ने न जाने क्या - क्या लिखा है । ,"कुछ ने यहां तक लिखा कि जहां घास का एक निशान भी पैदा नहीं होता है , वहां इतनी बड़ी सेना को तैनात करने या उसकी रक्षा करने का क्या औचित्य है ।" ,ऐसे लेखक भूल गए कि इस श्रेणी में सियाचिन ही एकमात्र स्थान नहीं है । ,"देखा जाए तो जब भी रक्षा रिपोर्टिंग की बात होती है , सबसे पहले युद्ध की कल्पना सामने आती है ।" ,लेकिन अब समय बदल गया है । ,रक्षा रिपोर्टिंग को इसलिए हम दो भागों में बांट सकते हैं । ,एक युद्ध काल और दूसरा शांतिकाल । sg,पहले हम युद्ध काल को लेते हैं । ,किसी भी सैनिक ऑपरेशन या युद्ध के समय कोई भी संवाददाता वैध स्वीकृति के बिना उस क्षेत्र में नहीं जा सकता है । ,ऐसे सभी क्षेत्र पूरी तरह सेना के अधिकार में होते हैं और वहां जाने के लिए संबंधित सरकार की स्वीकृति लेनी जरूरी है । ,कुछ देश रक्षा संवाददाताओं अथवा युद्ध संवाददाताओं को सैनिक वर्दी देते हैं और उन्हें नियमित क्षेत्र में ले जाते हैं । ,इस स्थिति में सारा ऑपरेशन एरिया सेना के तहत होता है और उन्हीं के निर्देशानुसार चलना होता है । ,सेना के साथ मार्च करना होता है । ,"’ युद्धक्षेत्र ’ से आमतौर पर जो खबरें भेजी जाती हैं , उन्हें संबंधित अधिकारी ’ सेंसर ’ करता है ।" ,"कोई देश नहीं चाहता कि कोई भी ऐसी सूचना बाहर जाए , जो उनके दुश्मनों को लाभ पहुंचा सके ।" ,रक्षा रिपोर्टिंग करते समय अपने देश के संवाददाताओं को राष्‍ट्रीय हित पर ध्यान देना अत्यंत जरूरी है । ,यह सिद्धांत ऐसा नहीं कि केवल भारतीय संवाददाताओं के लिए है । ,फॉकलैंड युद्ध के दौरान ब्रिटिश संवाददाता अपने देश के हितों तथा अर्जेंटीना के संवाददाता अपने राष्‍ट्रीय हितों का ध्यान रखते थे । ,युद्धकाल में सेना के निर्देशों का पूरी तरह पालन होना चाहिए । ,अपनी व्यक्‍तिगत सुरक्षा के लिए यह जरूरी है । ,"जगह - जगह बारूदी सुरंगें बिछी होती हैं , बमबारी हो रही होती है , ऐसे में जरा - सी लापरवाही घातक सिद्ध हो सकती है ।" ,सैनिकों को विभिन्न साधनों से युद्धक्षेत्र की ओर भेजा जाता है और एक फार्मेशन तैयार की जाती है । ,"यह एक ऐसी स्थिति है , जिसे बहुत सावधानी से रिपोर्ट करना होता है ।" ,किस क्षेत्र में किस तरह का मूवमेंट हो रहा है । ,जनवरी 1985 में भारत - पाकिस्तान के बीच अचानक तनाव बढ़ गया था तथा दोनों ओर से मूवमेंट शुरू हो गई थी लेकिन तभी जनरल जिया ने क्रिकेट कूटनीति की चाल चली और युद्ध टल गया । pl,सेना के जवानों के मनोबल को बनाए रखने के लिए और साथ ही किसी राष्‍ट्र के मनोबल को बनाए रखने के लिए सैनिकों की गतिविधियों के बारे में समाचार दिए जाते हैं । ,आजकल इसमें एक नया विषय जुड़ गया है । sg,"आतंकवादी घटनाओं , विद्रोह की कार्रवाइयों आदि से निपटने के लिए सेना को तैनात करना पड़ता है ।" ,"देखा जाए तो सैनिकों के लिए ये कार्य अत्यंत जटिल हैं और इनकी रिपोर्टिंग भी सही ढंग से हो , यह जरूरी है ।" ,प्राकृतिक विपदा के समय भी सेना की मदद ली जाती है । ,"बाढ़ हो , हिमस्खलन हो या कोई और विपदा NULL , सबसे पहले सेना को याद किया जाता है ।" ,इन दोनों स्थितियों को देखा जाना चाहिए । ,जब विद्रोहियों से निपटने की बात होती है तो बलात्कार तक के आरोप लगते हैं । ,"जिस स्थान पर हर पल गोली लगने का भय हो NULL , आतंकवादी के निशाने पर जान हो , क्या वहां बालात्कार किया जाना संभव है ?" ,कितने संवाददाता हैं जो हमारी सेनाओं की विभिन्न बटालियनों और उनकी परंपराओं को जानते हैं ? ,"विश्‍व में किस तरह से अत्याधुनिक हथियार , युद्धपोत , लड़ाकू विमान , रक्षा उपकरण , रेडार , मिसाइलें आदि का विकास हो रहा है , इस पर भी नजर रखनी जरूरी है ।" ,इसके लिए विश्‍व की प्रसिद्ध ’ जेन्स वीकली ’ सबसे उपयोगी पुस्तक है । ,ब्लूस्टार ऑपरेशन के दौरान बी. बी. सी. के संवाददाता तक ने एक गलती की कि आर्मी पर्सनल कैरियर ( सैनिकों को ले जाने वाले युद्ध - वाहन ) को युद्ध टैंक समझा । ,"यह भी समझ होनी चाहिए कि सेना के तीनों अंगों में थल सेना का प्रथम , नौसेना का द्वितीय और वायु सेना का तृतीय स्थान है ।" sg,समाचार पत्रों में वही खबर विस्तार से दी जाती है जिसकी जनता को भूख होती है । ,यूं तो किसी भी खबर की कोई ठोस परिभाषा हमें नहीं मिलती है । ,अंग्रेजी का ’ न्यू ’ लेटिन के नौवां और संस्कृत के नव शब्दों का एक ही अर्थ है - नवीन । ,"वास्तव में समाचार वह है , जो नवीन है ।" ,एक अनुमान के अनुसार 30 से 35 प्रतिशत खबरों का संबंध प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से अपराध से होता है । ,प्रश्‍न उठता है आखिर आज के समाज में हत्याकांड या आपराधिक अथवा भयंकर घटनाओं के प्रति जनता की इतनी दिलचस्पी क्यों है ? ,ऐसी घटनाओं से भरी लाखों पुस्तकों अथवा पत्र - पत्रिकाओं की इतनी मांग क्यों है ? ,इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया में भी आपराधिक धारावाहिक क्यों अधिक लोकप्रिय हैं ? ,"’ यह किसी नेता का बयान हो सकता है ’ , खबर नहीं ।" ,"चक्रतीर्थ बीच के आसपास स्थित सुंदर बगीचे , खुला स्टेडियम इसे पर्यटकों के लिए फुल इंजॉयमेंट का स्थान बनाता है ।" ,कब जाएँ दमन और दीव ? ,वैसे तो दमन और दीव की जलवायु वर्षभर पर्यटकों को आकर्षित करती है किंतु यहाँ आने का उपर्युक्त मौसम अक्टूबर से मई तक का है । ,कैसे पहुँचें दमन और दीव ? ,दमन में 191 किमी का सड़क मार्ग है तथा दीव में 78 किमी तक लंबा सड़क मार्ग है । ,दमन पश्चिम रेलवे के दिल्ली - मुंबई रूट पर स्थित है । ,दमन का नजदीकी रेलवे स्टेशन गुजरात का ' वापी ' है । ,दीव मीटर गेज रेलवे लाइन से जुड़ा है । ,दीव का नजदीकी रेलवे स्टेशन ' दिलवाड़ा ' है । ,दमन और दीव दोनों एयरपोर्ट से जुड़े हैं । ,दीव से मुंबई के लिए रोजाना कई उड़ानें भरी जाती हैं । ,राजस्थान के मंदिर निर्माण गतिविधियों निर्माण के प्रमुख केन्द्र । ,मेवाड़ उदयपुर क्षेत्र में मंदिर - निर्माण गतिविधियाँ । ,उत्तर गुप्तकाल में मेवाड़ क्षेत्र में विष्णु एवं शिव की अपेक्षा शक्ति पूजा अधिक प्रचलित थी । ,जगत और उनवास जैसे स्थानों पर बने मंदिर शाक्त संप्रदाय की लोकप्रियता के सशक्त उदाहरण हैं । sg,जगत और उनवास के मंदिरों में दुर्गा के महिषमर्दिनी रूप को महिमान्वित किया गया है । ,वैष्णव संप्रदाय के लोगों के बीच विष्णु के लक्ष्मीनारायण और वराह विग्रहों की पूजा विशेष रूप से होती थी । ,मेवाड़ उदयपुर क्षेत्र में शिव एवं सूर्य देवताओं के बने मंदिर अत्यंत कम प्राप्त होते हैं । ,मेवाड़ प्रान्त की मंदिर निर्माण गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध क्षेत्रों का उल्लेख किया जा रहा है । ,मेवाड़ में सबसे प्राचीन वैष्णव एवं सौर मंदिरों का निर्माण चित्तौड़गढ़ में हुआ था । ,दुर्ग के राजनीतिक एवं धार्मिक इतिहास तथा भौगोलिक परिवेश ने मंदिरों के निर्माण एवं जीर्णोद्धार को प्रभावित किया है । ,अभिलेखीय एवं पुरातात्विक प्रमाणों द्वारा यह ज्ञात होता है कि ईसवी पूर्व द्वितीय शताब्दी से सातवीं शताब्दी तक इस क्षेत्र में वैष्णव धर्म लोकप्रिय था । ,"इसके अलावा मेवाड़ में शैव , शाक्त , सौर , बौद्ध व जैन धर्मों से संबद्ध भी कई प्राचीन तीर्थस्थल के प्रमाण मिलते हैं ।" ,"7वीं - 8वीं सदी के मिले कुछ दान स्तूप , जिनका आधार वर्गाकार है , के चारों ओर की ताखों में ध्यान मुद्रा में बैठे हुए बुद्ध की प्रतिमाएँ अंकित हैं ।" ,इसके अलावा भी 7वीं सदी के कई मंदिर मिलते हैं । ,7वीं से 15वीं सदी के अंतराल में चित्तौड़ निरंतर मंदिर एवं अन्य वास्तु निर्माण जीर्णोद्धार आदि गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र था । ,इस अवधि में महाराणा कुंभा का राज्यकाल ( 1433 - 1466 ई. ) इन गतिविधियों के लिए विशेष उल्लेखनीय है । sg,भवन - निर्माण के लिए उपयोग में आने वाली सामग्री नागरी से लायी जाती थी । sg,उपलब्ध पाषाणों की प्रचुरता ने भी मेवाड़ क्षेत्र में वास्तु - निर्माण को प्रभावित किया है । ,मेवाड़ के कुछ प्रमुख मंदिरों की चर्चा इस प्रकार की जा रही है । ,कालिका माता मंदिर मूलतः एक सूर्य मंदिर था । sg,अभिलेखीय प्रमाण के आधार पर कालिका माता मंदिर को 8वीं शताब्दी के प्रारंभिक काल का निश्चित किया जा सकता है । ,कालिका माता मंदिर का समयांतर में जीर्णोद्धार किया गया । ,"कालिका माता मंदिर में पंचरथ गर्भगृह , मंडप , अभ्यन्तरीय प्रदक्षिणा पथ और द्वार - मंडप निर्मित हैं ।" ,"गर्भगृह की बाह्य तीनों प्रमुख ताखों में से दो में रथारुढ़ सूर्यदेव की प्रतिमाएँ प्रतिष्ठित हैं , जबकि गौण ताखों में चन्द्र तथा अन्य दिक्पालों की प्रतिमाएँ उत्कीर्ण हैं ।" ,गर्भगृह के प्रवेश द्वार का सिरदल एवं चौखट का अलंकरण विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं । ,चौखट पर दोनों ओर गंगा तथा यमुना नदी देवियाँ अपने वाहनों पर आरुढ़ अंकित की गई हैं । sg,"मंदिर में अंकित कूर्मावतार , उमा - माहेश्वर तथा लकुलीश मूर्तियाँ प्रतिमा विज्ञान की प्रारंभिक अवस्था को इंगित करता है |" ,"मंदिर में अंकित कूर्मावतार , उमा - माहेश्वर तथा लकुलीश मूर्तियाँ बाद में प्रौढ़ता प्राप्त कर लेती हैं ।" ,मंदिर का शिखर पूर्णतः नवीन रचना है । sg,8वीं शताब्दी की शिखर शैली के स्थान पर गुंबदाकार नया शिखर बनाया गया है । ,मंडप की अभ्यन्तरीय भित्ति पर लगी दो अर्द्धचित्र तथा एक लकुलीश प्रतिमा बाद में लगाई गई लगती है । ,वस्तुतः इन शिलापट्टों का मूल स्थान मंदिर की जगती पर रहा होगा । ,"अर्द्धचित्र पट्टों की विषयवस्तु नृत्य , संगीत एवं पान गोष्ठी है ।" ,मूलतः मंदिर एक विशाल जगती पर बना था | ,मंदिर की विशाल जगती के कुछ गढ़ने अभी भी शेष हैं । sg,गर्भगृह के प्रदक्षिणापथ में प्रकाश एवं वायु संचार के लिए दो भद्रावलोकन चार स्तंभों पर बनाये गये हैं । ,कुंभस्वामी या कुंभश्याम मंदिर मूलतः वैष्णव मंदिर था । ,"कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति के अनुसार , कुंभस्वामी या कुंभश्याम मंदिर का जीर्णोद्धार नृपति कुंभकर्ण ( महाराणा कुंभा ) के द्वारा करवाया गया था |" ,महाराणा कुंभा के द्वारा जीर्णोद्धार किए जाने के कारण इसे कुंभस्वामी और कुंभश्याम जैसे नामों से जाना जाने लगा । ,दक्षिण का कश्मीर मुन्नार । ,"पर्वत , झील , वन , चाय बागान , मसालों के खेत , चारों ओर हरियाली व ताज़गी से भरपूर , मादक वातावरण से युक्त मुन्नार का सौंदर्य अद्वितीय है ।" ,ऐसा प्रतीत होता है कि मुन्नार के सौंदर्य को संजोकर रखने में प्रकृति ने भी शायद कुछ ज़्यादा ही सावधानी बरती है । ,"केरल के इडूकी ज़िले में समुद्रतल से 1,524 मीटर की ऊँचाई पर स्थित मुन्नार पर्वतीय स्थल दक्षिण भारत के कश्मीर के रूप में जाना जाता है ।" ,मुन्नार यानी मून व आर का तमिल भाषा में शाब्दिक अर्थ है तीन नदियाँ । ,"मुदिरापुझा , नल्लाथानी तथा कुन्डला नदियों का संगम शहर के बीचोंबीच ही होता है ।" ,इन्हीं नदियों से शहर की समस्त आवश्यकताओं की आपूर्ति भी होती है । ,अन्नामलाई पर्वत श्रृंखला के मध्य स्थित मुन्नार पर्यटन स्थल राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 49 के द्वारा प्रमुख शहर कोच्चि से जुड़ा हुआ है । ,मुन्नार पहुँचने के लिए निकटतम एयरपोर्ट व रेलवे स्टेशन भी कोच्चि ही है जो कि मात्र 130 कि.मी. की दूरी पर स्थित है तथा मात्र चार घंटों की ड्राइव के पश्चात ही यहाँ पहुँचा जा सकता है । ,"मुन्नार केवल कोच्चि से ही नहीं , बल्कि प्रसिद्ध पर्यटन स्थल थेक्केडी से भी पहुँचा जा सकता है ।" ,थेक्केडी से देवीकुलम होते हुए लगभग 70 कि.मी. लम्बे इस मार्ग से मुन्नार पहुँचना अपने आप में एक अनोखा अनुभव है । pl,"चाय , कॉफी के बागानों के अलावा पूरा मार्ग तरह - तरह के मसालों जैसे काली मिर्च , इलायची आदि के बागानों से भरा पड़ा है ।" ,कहीं भी ठहरकर इन मसालों की महक का मजा लिया जा सकता है । ,"आज तक जिन मसालों को आपने सूखे हुए पाउडर के रूप में केवल अपने भोजन कक्ष में ही देखा हो , अचानक उनके बागानों में विचरण करना अत्यंत रोमाँचकारी लगता है ।" ,रास्ता इतना मनमोहक है कि यात्रा में थकान की कोई गुंजाइश ही नहीं रहती है । ,पेरियोकेनाल तथा देवीकुलम होते हुए मुन्नार पहुँचने में मात्र ढाई - तीन घंटे का ही समय लगता है । ,प्रारंभिक रास्ता कॉफी तथा मसालों के बागानों से भरा पड़ा है लेकिन पेरियाकेनाल तथा देवीकुलम क्षेत्रों तक पहुँचते - पहुँचते आपको केवल चाय के बागान ही नज़र आएँगे । ,विशाल ढालदार चाय बागानों के मध्य बने कुछ एक छोटे - छोटे ढालनुमा छतों वाले घर किसी विशाल हरे कालीन पर बिखरे मोतियों की भाँति प्रतीत होते हैं । ,परोक्ष रूप से पूरा क्षेत्र और मुन्नार के निवासी इन्हीं चाय बागानों से जुड़े हुए हैं । ,प्राचीन काल में मुन्नार क्षेत्र अंग्रेज़ों तथा भारत में बसे समस्त यूरोपीय लोगों तथा कंपनियों का दक्षिण भारत में सबसे पसंदीदा पर्वतीय स्थल था । ,"अंग्रेज़ों में मुन्नार की साख न केवल उनके प्रिय पेय और यहाँ पैदा होने वाली उत्कृष्ट चाय के कारण थी बल्कि यहाँ के खूबसूरत जंगल , पहाड़ और चिरस्थायी ताज़गी के कारण भी थी ।" ,और यही उनके प्रिय आरामगाह और सैरगाह भी थे । sg,मुन्नार का वातावरण प्रातः काल से ही पक्षियों के कलरव से भर जाता है । ,बागानों में चाय की चमकदार कोपलों पर पड़ने वाली सूर्य की आभा से समस्त क्षेत्र शीशे की भाँति दमकने लगता है । ,बागानों में काम करने वाली महिलाएँ सूर्योदय से पूर्व ही कार्यस्थल पर पहुँच जाती हैं । ,"दिन चढ़ते - चढ़ते बादलों के ढेर चारों तरफ मँडराने लगते हैं , टुकड़ों में फैली धूप दूर तक रंगों की छटाएँ बिखेरती रहती हैं ।" ,बागानों से चुनकर लाई गई ताज़ी चाय की पत्तियाँ पहले सड़कों के किनारे एकत्र की जाती हैं तत्पश्चात ट्रकों में लादकर आगे की प्रक्रिया के लिये कारखानों तक पहुँचा दी जाती हैं । ,पूरा क्षेत्र मुख्यतः टाटा चाय के अधीन आता है तथा देश के इस प्रसिद्ध ब्रांड की चाय यहीं पर उत्पादित होती है । ,"पर्यटन की विभिन्नताओं तथा असीम संभावनाओं से लबरेज़ यह खूबसूरत क्षेत्र न केवल सभी वर्गों के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने में सक्षम है , बल्कि चाय , कॉफी तथा ताज़े मसालों के दीवानों को भी लगातार अपनी ओर खींचता रहता है ।" ,मुन्नार यात्रा के दौरान यहाँ की मशहूर चीज़ें तोहफों के लिए अपने साथ ले जाना मत भूलिये । sg,इसके अतिरिक्त ताज़ा स्ट्रॉबेरी भी आप अपने साथ ले जा सकते हैं । ,"चाय के बागान , बागानों की गोद में झिलमिलाती झीलें तथा जलधारायें तो इस क्षेत्र की पहचान ही बन चुके हैं ।" ,अगर आप मुन्नार में हैं तो यहाँ के वन्य जीवन संरक्षण पार्कों तथा साहसिक पर्यटन के आमंत्रण को अवश्य स्वीकार कीजिए । ,मुन्नार से मात्र 15 कि.मी. की दूरी पर स्थित 97 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में फैला एराविकुलम नेशनल पार्क भी आकर्षण का केंद्र है । ,तीन क्षेत्रों में बँटे एराविकुलम नेशनल पार्क में पर्यटकों को राजमला क्षेत्र के केवल कुछ ही हिस्से में विचरण करने की अनुमति है । ,हाथियों के झुंड और थार यहाँ बहुतायत में देखे जा सकते हैं । ,तमिलनाडु और केरल की सीमा पर स्थित चिन्नार वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र भी मुन्नार से कुछ ही दूरी पर स्थित है । ,"दक्षिण भारत तथा अन्नामलाई श्रृंखला की सबसे ऊँची चोटी अनामुंडी जो कि 8,841 फुट की ऊँचाई पर स्थित है , इसी क्षेत्र में स्थित है ।" ,अनामुंडी तक की पैदल यात्रा अत्यंत रोमाँच तथा विस्मय से भरी है तथा पर्यटकों में काफी लोकप्रिय भी है । ,मुन्नार क्षेत्र के उन्नत वन्य जीवन तथा वनस्पति के अतिरिक्त यहाँ के वनों में नीले रंग का पुष्प नीलाक्कुरिंजी पाया जाता है जो कि बारह वर्षों में केवल एक बार ही विकसित होता है । ,अंतिम बार नीलाक्कुरिंजी पुष्प सन् 2006 में विकसित हुआ था । ,मात्र 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मडुपट्टी बाँध और उसका जलाशय या झील कई मीलों तक जंगल में फैली है । ,"शांत , अलसायी तथा वनों से घिरी यह झील एक मनोहारी पिकनिक स्थल है ।" ,"समुद्रतल से 1,700 मीटर ऊँची इस झील में अक्सर प्रातः या सायं हाथियों के झुंड स्नान करते दिखाई दे जाते हैं ।" sg,मुन्नार क्षेत्र में भारत - स्विस परियोजना के अंर्तगत एक खास डेयरी चलाई जा रही है जिसमें सौ से भी अधिक नस्लों के पशु रखे गये हैं । ,इसी प्रकार केवल 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देवीकुलम अपने हरे - भरे मैदानों तथा प्राचीन पर्वतों के लिये प्रसिद्ध है । sg,देवीकुलम में स्थित सीतादेवी झील पिकनिक के लिए उत्कृष्ट वातावरण प्रदान करती है । ,खास खनिजों से युक्त सीतादेवी झील के पानी से कई रोगों का निवारण भी किया जाता है । sg,मछली पकड़ने के लिये भी देवीकुलम क्षेत्र उत्तम समझा जाता है । ,"पुराने मुन्नार शहर का प्राचीन गिरजाघर , टाटा समूह द्वारा चलाया जा रहा एक अद्‌भुत चाय संग्रहालय , टाटा स्पोर्ट्स मैदान , अट्टाकल जल प्रपात तथा पल्लीवासल देवीकुलम क्षेत्र के अन्य प्रमुख आकर्षण हैं ।" sg,मैं यहाँ स्वीमिंग सीखाता हूँ । ,कितनों को डुबा चुके हो तुम ? ,यही कोई तीस - चालीस को । ,तुम यहाँ कैसे आई ? ,"बहुत दिन से स्वीमिंग नहीं की थी , पता चला तुम यहाँ स्वीमिंग सिखाते हो , सोचा फिर से स्वीमिंग शुरु कर दूँ ।" ,"क्यों नहीं , क्यों नहीं ।" ,तुम मुझे डाइविंग सीखा सकते हो ? pl,"अरे , डाइविंग में तो मुझे तीन - चार मेडल मिल चुके हैं ।" ,तुम लोगों का लंच हो गया ? ,बस भैया का इंतज़ार हो रहा है । ,मैं भी बैठ जाऊँ ? ,"ओ बैठो न , तुम नहीं बैठोगी तो हमारे गले से खाना कैसे उतरेगा ।" ,मैंने सोचा यहाँ मुन्ना . .. । ,जब मुन्ना यहाँ आएगा तो सामने बैठ कर एक दूसरे को खाना खिलाना तो दोनों को तसल्ली हो जाएगी । ,"मुझे पहले पता होता कि यहाँ पर तुम जैसी बेहूदी लड़कियाँ पढ़ने आती हैं , तो मैं यहाँ कभी नहीं आती ।" ,मुन्ना ! मैं जा रही हूँ । ,कॉलेज छोड़ कर ? ,"नहीं , ये शहर छोड़कर ।" sg,एक पागल लड़की की बकवास पर तुम शहर छोड़ दोगी । ,इतना ज़लील होने के बाद मैं किसी को अपना मुँह दिखाने के लायक नहीं रही हूँ न । ,"नीकिता ! मैं तुम्हें कैसे समझाऊँ कि ये सब , इसे इतना सीरियस लेने की ज़रूरत नहीं है ।" ,"ये सब तुम जितना सोचते हो , उससे कहीं ज़्यादा सीरियस है , चलती हूँ ।" ,नीकिता ! फिर कब मिलोगी ? ,कभी नहीं । ,इतिफाक से भी नहीं ? ,इतिफाक से भी नहीं । ,क्या नीकिता चली गई ? ,"मैं तो उससे माफी मांगना चाहती थी , कल न जाने मैंने उसे क्या - क्या कह दिया ।" ,ये मुझसे क्या हो गया मुन्ना ? ,मैं खुद नहीं जानती थी कि मैं क्या कह रही हूँ लेकिन मैं समझती थी कि मैं तुमसे प्यार करने लगी हूँ । ,मुझसे ? ,हाँ मुन्ना ! ,मैं तुमसे प्यार करती हूँ और तुम्हें पाने के लिए कुछ भी कर सकती हूँ । ,मुझे यकीन नहीं हो रहा मोहिनी कि कोई लड़की मुझसे इतना प्यार कर सकती है और वो भी तुम्हारे जैसी लड़की जिसके लिए कॉलेज का कोई भी लड़का कत्ल तक कर सकता है । ,तुम मेरे लिए सिर्फ मुस्कुरा दो वही काफी है । ,"मोहिनी ! मुझे यकीन ही नहीं हो रहा है कि प्यार की जिस अनजानी खुशबू में , मैं भटक रहा हूँ वो मेरे इतने करीब होगी ।" ,तो मुन्ना ! तुम मुझे अपनाओगे ? ,हाँ मोहिनी । ,"हेलो , हेलो मोहिनी जी ! मैं आपसे यह कहना चाह रहा था कि मुन्ना आपको बेवकूफ बना रहा है ।" ,"महज़ सौ रुपये की एक शर्त जीतने के लिए आपका इस्तेमाल किया जा रहा है , आपके जज्बातों से खेला जा रहा है ।" ,ये क्या मज़ाक है ? ,अगर अपने शुभचिंतक पर भरोसा नहीं हो तो आज शाम गोल्डन गेट जाकर अपनी आँखों से देख लीजिएगा । pl,मोहिनी ! अब हमें ये रोज़ - रोज़ की मुलाकातें कम कर देनी चाहिए । ,क्यों ? ,"अरे , परीक्षा नज़दीक आ रही है ।" ,तुम नेवी का ऑफिसर बनना चाहते हो ? ,"हाँ , मेरे पिताजी का ये ही ख्वाब था ।" ,"मोहिनी ! मेरे लिए नौकरी रोज़ी रोटी नहीं है , देश से जुड़ने का , उसकी जद्दोजहद में शामिल होने का एक बहाना है ।" ,अरे ! वहाँ जाते तो रूपा की कुछ खबर ही ले आते । ,"जीजी को ही ले आओ ना बाबू ! कितने दिन हो गए मिले हुए , बहुत मन करता है , ले आ ना बाबू ।" ,गर्भवती महिलाओं में टीबी के उपचार पर काफी प्रयोग किये गए हैं और गर्भावस्था में पीजेडए के कोई विषैले प्रभाव नहीं देखे गए । ,"आरएमपी की ऊंची खुराक ( मानव में प्रयुक्त की जाने वाली खुराक से भी ज्यादा ) पशुओं में न्यूरल ट्यूब दोष का कारण बनती हैं , लेकिन मनुष्यों में ऐसे प्रभाव नहीं देखे गए हैं ।" ,गर्भावस्था में और बच्चे के जन्म के बाद की अवस्थाओं के दौरान हेपेटाइटिस का अधिक जोखिम हो सकता है । ,"महिलाओं को यही सलाह दी जाती है कि जब तक उनका टीबी का उपचार पूरा ना हो जाये , तब तक गर्भवती ना होने में ही समझदारी है ।" ,"एमिनोग्लाइकोसाइड्स ( एसटीएम , केप्रिओमाइसिन , एमिकासिन ) का उपयोग गर्भावस्था में सावधानी के साथ किया जाना चाहिए क्योंकि यह अजन्मे बच्चे में बहरेपन का कारण बन सकता है ।" ,चिकित्सक को मां के उपचार के साथ बच्चे को होने वाले संभावी नुकसान को भी ध्यान में रखना चाहिए और उन बच्चों में अच्छे परिणाम देखे गए जिनकी मां का उपचार एमिनोग्लाइकोसाइड्स से किया गया । ,पेरू में प्राप्त अनुभव दर्शाते हैं कि MDR - TB के लिए उपचार गर्भावस्था को ख़त्म करने की सलाह का कारण नहीं है और इसमें अच्छे परिणाम संभव हैं । ,"जिन रोगियों में वृक्क असफल हो जाते हैं , उनमें टीबी का जोखिम 10 से 30 गुना बढ़ जाता है ।" ,"वीक रोगियों , जिन्हें इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं दी जा रहीं हैं , या जिनमें प्रत्यारोपण पर विचार किया जा रहा है , उनमें अगर उचित हो तो सुषुप्त तपेदिक के उपचार पर विचार किया जाना चाहिए ।" ,"एमिनोग्लाइकोसाइड्स ( एसटीएम , केप्रियोमाइसिन और एमिकासिन ) का उपयोग उन रोगियों में नहीं किया जाना चाहिए , जिनमें थोड़ी बहुत या गंभीर वृक्क समस्या हो , क्योंकि इससे वृक्कों को और अधिक नुकसान पहुंचने की संभावना होती है ।" ,अगर एमिनोग्लाइकोसाइड के उपयोग की उपेक्षा नहीं की जा सकती ( उदाहरण दवा प्रतिरोधी टीबी के उपचार में ) तो सीरम के स्तर की पूरी निगरानी रखी जानी चाहिए और रोगी को पार्श्व प्रभावों की संभावना की चेतावनी दी जानी चाहिए ( विशेष रूप से बहरापन ) । ,"यदि रोगी की वृक्क असफलता अंतिम अवस्था में है और वृक्क अब कोई खास काम नहीं कर रहे हैं , तब एमिनोग्लाइकोसाइड्स का उपयोग किया जा सकता है ।" ,लेकिन केवल तभी जब दवा के स्तर की आसानी से जांच की जा सकती हो ( अक्सर केवल एमिकासिन के स्तर का ही मापन किया जा सकता है ) । ,"वृक्कों की थोड़ी बहुत असामान्यता की स्थिति में , टीबी के उपचार में नियंत्रित रूप से प्रयुक्त दवाओं में किसी प्रकार के परिवर्तन की आवश्यकता नहीं होती है ।" ,"गंभीर वृक्क असफलता की स्थिति में ( GFR30 ) , इएमबी की खुराक को आधा कर दिया जाना चाहिए ( या बिल्कुल रोक देना चाहिए ) ।" ,"PZA खुराक 20 मिलीग्राम / किलोग्राम / दिन ( संयुक्त राष्ट्र की सिफारिश के अनुसार ) या सामान्य खुराक की एक तिहाई ( अमेरिकी सिफारिश के अनुसार ) है , लेकिन इसके समर्थन में पर्याप्त प्रकाशित प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं ।" pl,"डायलिसिस पर उपस्थित रोगियों में 2HRZ / 4HR का उपयोग करते हुए , प्रारंभिक उच्च तीव्रता के चरण में दवाएं प्रतिदिन दी जानी चाहिए ।" ,"निरंतरता चरण में , प्रत्येक हीमो डायलिसिस सत्र के अंत में दवाएं दी जानी चाहिए और जिस दिन डायलिसिस नहीं किया जाता , उस दिन कोई दवा नहीं दी जानी चाहिए ।" ,"एचआईवी के रोगियों में , अगर संभव हो एचआईवी के इलाज को तब तक स्थगित कर दिया जाना चाहिए , जब तक टीबी का उपचार पूरा न हो जाये ।" ,वर्तमान ब्रिटिश दिशानिर्देशों के अनुसार ( ब्रिटिश एचआईवी एसोसिएशन के द्वारा उपलब्ध ) । ,"इस बात के प्रमाण हैं कि इन रोगियों पर टीबी और एचआईवी दोनों के विशेषज्ञों की निगरानी होनी चाहिए , ताकि परिणामों में किसी और बीमारी से समझौता न करना पड़े ।" ,"अगर टीबी के उपचार के साथ एचआईवी का उपचार शुरू करना पड़े , विशेषज्ञ एचआईवी फार्मासिस्ट की सलाह ली जानी चाहिए ।" ,सामान्य रूप से कहा जाये तो NRTI के साथ कोई ख़ास सम्बन्ध नहीं हैं । ,नेविरेपीन का उपयोग रिफाम्पिसिन के साथ नहीं किया जाना चाहिए । ,"इफावरेन्ज का इस्तेमाल किया जा सकता है , लेकिन खुराक रोगी के वजन पर निर्भर करती है ( 600 मिलीग्राम प्रतिदिन अगर वजन 50 किलोग्राम से कम हो ; 800 मिलीग्राम प्रतिदिन यदि वजन 50 किलोग्राम से अधिक हो ) ।" ,"इफावरेन्ज के स्तर की जांच उपचार शुरू किये जाने के बाद शुरुआत में की जानी चाहिए , ( दुर्भाग्य से , यह सेवा संयुक्त राज्य अमेरिका में उपलब्ध नहीं है लेकिन संयुक्त राष्ट्र में उपलब्ध है ) ।" ,अगर संभव हो तो प्रोटियेज़ संदमक का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए । ,रिफाम्पिसिन और प्रोटियेज़ संदमक पर रहने वाले रोगियों में उपचार के असफल रहने या रोग के फिर से उत्पन्न होने का ख़तरा अधिक होता है । ,"डब्ल्यूएचओ एचआईवी के रोगियों में थायोएसिटाज़ोन का उपयोग नहीं करने की चेतावनी देता है , क्योंकि इससे घातक एक्सफोलिएटीव डर्मेटाईटिस का 23 प्रतिशत जोखिम होता है ।" ,आईएनएच के उपयोग से मिर्गी के दौरों की संभावना बढ़ जाती है । sg,आईएनएच लेने वाले सभी मिर्गी के रोगियों को प्रतिदिन 10 मिलीग्राम पायरीडोकसिन दी जानी चाहिए । ,इस बात के कोई प्रमाण नहीं हैं कि जिन रोगियों को मिर्गी की बीमारी नहीं है उनमें आईएनएच दौरों का कारण बन सकता हो । ,टीबी के उपचार में मिर्गी के लिए दी जाने वाली कई दवाओं की प्रतिक्रियाएं शामिल हैं और सीरम में दवाओं के स्तर पर पूरी निगरानी रखी जानी चाहिए । ,"रिफाम्पिसिन और कार्बामाज़ेपिन , रिफाम्पिसिन और फ़िनाइटोइन और रिफाम्पिसिन और सोडियम वाल्प्रोएट के बीच गंभीर प्रतिक्रिया होती है ।" ,हमेशा फार्मासिस्ट की सलाह ली जानी चाहिए । ,"बहु - दवा प्रतिरोधी तपेदिक ( MDR - TB ) , टीबी का वह प्रकार है जो कम से कम आईएनएच और आरएमपी के लिए प्रतिरोधी है ।" ,"वे आइसोलेट्स जो टीबी - रोधी दवाओं के किसी और संयोजन के लिए प्रतिरोध को बढ़ाते हैं , लेकिन आईएनएच और आरएमपी के लिए प्रतिरोधी नहीं हैं , उन्हें MDR - TB की श्रेणी में नहीं रखा जाता है ।" ,"अक्टूबर 2006 को दी गयी परिभाषा के अनुसार , "" बड़े पैमाने पर दवा प्रतिरोधी तपेदिक "" ( XDR - TB ) को MDR - TB के रूप में परिभाषित किया जाता है जो क्विनोलोन के लिए प्रतिरोधी है और केनामाइसिन , केप्रिओमाइसिन या एमिकासिन में से किसी एक के लिए प्रतिरोधी है ।" ,XDR - टीबी के पुराने मामले की परिभाषा MDR - TB है जो तीन या दूसरी पंक्ति की दवाओं के छह से अधिक वर्गों के लिए प्रतिरोधी है । ,"इस परिभाषा का उपयोग अब नहीं किया जाना चाहिए , लेकिन यहां इसे इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि कई पुराने प्रकाशन इसका उपयोग करते हैं ।" ,MDR - टीबी और XDR - टीबी दोनों के उपचार के लिए समान सिद्धांत हैं । ,"मुख्य अंतर यह है कि XDR - टीबी में मृत्यु दर MDR - टीबी की तुलना में अधिक होती है , क्योंकि इसमें प्रभावी उपचार के विकल्पों की संख्या कम होती है ।" ,"XDR - टीबी के महामारी विज्ञान का वर्तमान में अच्छी तरह से अध्ययन नहीं किया गया है , लेकिन यह माना जाता है कि XDR - TB आसानी से स्वस्थ आबादी में संचरित नहीं होती है ।" ,लेकिन यह ऐसी आबादी में महामारी का रूप ले सकती है जो पहले से ही एचआईवी से पीड़ित हैं इसलिए उनमें टीबी के संक्रमण की संभावना अधिक होती है । ,1997 में 35 देशों में किये गए एक सर्वेक्षण के अनुसार सर्वेक्षण के लगभग एक तिहाई देशों में इसकी दर 2 प्रतिशत से ज्यादा थी । ,"इसकी उच्चतम दर पूर्व सोवियत संघ , बाल्टिक राज्यों , अर्जेंटीना , भारत और चीन में पाई गयीं , इसे गरीबी और राष्ट्रीय तपेदिक नियंत्रण कार्यक्रमों की असफलता से जोड़ा गया ।" ,"इसी तरह , न्यूयॉर्क शहर में 1990 के दशक की शुरुआत में MDR - टीबी की ऊंची दरें पाई गयीं , इसे रीगन प्रशासन के द्वारा लागू किये गए सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की समाप्ति से जोड़ा गया ।" ,MDR - टीबी पूरी तरह से संवेदनशील टीबी के उपचार के दौरान विकसित हो सकती है और ऐसा अक्सर रोगी के द्वारा कोई खुराक न लेने या उपचार पूरा न करने के कारण होता है । ,"शुक्र है , MTR - टीबी के उपभेद कम फिट हैं और इनमें संचरण की क्षमता भी कम होती है ।" ,कई सालों से यह ज्ञात है कि आईएनएच प्रतिरोधी टीबी गिनीपिग में कम विषाक्त है और जानपदिक रोग विज्ञान का प्रमाण यह है कि टीबी के MDR उपभेद स्वाभाविक रूप से अधिक प्रभावी नहीं हैं । pl,लॉसएंजिल्स में किये गए एक अध्ययन में MDR - टीबी के केवल 6 % मामले ही पाए गए । ,भारत और इंग्लैंड के बीच हुआ चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल आईसीसी टूर्नामेंट्स के इतिहास का दूसरा सबसे नजदीकी खिताबी मुकाबला रहा । ,इससे पहले 2007 में हुआ आईसीसी टी - 20 वर्ल्ड कप का फाइनल इतना रोमांचक रहा था । ,उस मुकाबले में भी टीम इंडिया ने ही बाजी मारी थी । ,अपने चिरप्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 5 रनों से हराकर धोनी ब्रिगेड ने देश को दूसरे वर्ल्ड कप खिताब का तोहफा दिया था । ,विराट कोहली दूसरे ऐसे खिलाड़ी बन गए हैं जिसने आईसीसी के तीन मेजर वनडे टूर्नामेंट्स में हिस्सा लिया । ,2008 में वे अंडर - 19 वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा थे । ,2011 में उन्होंने धोनी संग सीनियर वर्ल्ड कप का खिताब जीता । ,उसके बाद इस साल वे चैंपियंस ट्रॉफी विनिंग टीम का हिस्सा रहे । ,विराट के अलावा युवराज सिंह तीन मेजर टूर्नामेंट खेल पाए हैं । ,"युवी 2000 के अंडर - 19 वर्ल्ड कप , 2002 की चैंपियंस ट्रॉफी और 2011 के वर्ल्ड कप में खेले ।" ,इंग्लैंड की टीम वनडे इतिहास में छठी बार आईसीसी टूर्नामेंट के खिताबी मुकाबले में हारी है । ,"इससे पहले 1979 और 1980 में 60 - 60 ओवर के फाइनल 1987 , 1992 और 2004 में 50 - 50 ओवरों के फाइनल और इस साल 20 - 20 ओवरों के फाइनल में उसे पराजय झेलनी पड़ी ।" ,आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के इतिहास में यह पहला मौका है जब कोई टीम फाइनल मुकाबला पहले बल्लेबाजी करते हुए जीती है । ,महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेट इतिहास के पहले ऐसे कप्तान हैं जिन्होंने तीन आईसीसी खिताब जीते हैं । ,महेंद्र सिंह धोनी फाइनल मैच में बिना खाता खोले आउट हुए । ,वे चैंपियंस ट्रॉफी 2013 में 0 पर आउट होने वाले एकमात्र बल्लेबाज रहे । ,यह उनके करियर का सातवां डक था । ,इससे पहले वे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 20 अक्टूबर 2010 को विशाखापट्टनम में हुए वनडे में बिना खाता खोले आउट हुए थे । ,वे 44 पारियों के बाद डक बने । ,रविंद्र जडेजा इस चैंपियंस ट्रॉफी में सर्वाधिक विकेट लेने वाले धुरंधर रहे । ,उन्होंने पांच मैचों में 12.83 के औसत से 12 विकेट चटकाए । ,"विराट कोहली ने आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2013 में खेले 5 मैचों में 58.66 के औसत से 176 रन बनाए , जिसमें एक हाफ सेंचुरी शुमार रही ।" ,इसी टूर्नामेंट के दौरान उन्होंने अपना 100वां वनडे भी खेला । ,100 वनडे पारियों के बाद सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में विराट ने कैरेबियाई दिग्गज ब्रायन लारा को पीछे कर दिया है । ,टीम इंडिया दूसरी बार 20 - 20 ओवरों के वनडे में शामिल हुई है । ,इससे पहले 28 फरवरी 1992 को श्रीलंका के खिलाफ वर्ल्डकप मैच में बारिश के कारण वनडे 20 - 20 ओवरों का किया गया था । ,"हालांकि , उस मैच का नतीजा नहीं निकल सका था ।" ,महज दो गेंदें डलने के बाद फिर से बारिश बाधा बन गई थी । ,टीम इंडिया की यह इंग्लैंड के मैदान पर तीसरी खिताबी जीत है । ,1983 में कपिल देव की कप्तानी में वेस्ट इंडीज को हराकर वर्ल्ड कप जीता । ,2002 में सौरव गांगुली की अगुवाई में मेजबान इंग्लैंड को हराकर नेटवेस्ट सीरीज जीती । ,2013 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी की विनर बनी टीम इंडिया । ,जीत गए भई जीत गए... ,धोनी के धुरंधर जीत गए । ,"एक ओर जहां देश का उत्तरी हिस्सा गंगा नदी के कहर से जूझ रहा है , वहीं उस मायूसी में एक मुस्कान की वजह बन कर आई है टीम इंडिया की इंग्लैंड में जीत ।" ,पड़ोसी श्रीलंका को 8 विकेट से रौंद कर टीम इंडिया ने 11 साल बाद फाइनल में जगह बनाई है । ,कार्डिफ में हुए सेमीफाइनल में भारत ने श्रीलंका को 8 विकेट से हराया । ,एक बार फिर जीत के हीरो बने शिखर धवन । ,इस कारनामे को अंजाम देने में उनका साथ दिया नए जोड़ीदार रोहित शर्मा ने । ,"वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर को जोड़ी ने भले ही कई कारनामे किए हों , लेकिन धवन और रोहित के धमाल के आगे वे पिद्दी लगने लगे हैं ।" ,दिल्ली और मुंबई के इन दो धुरंधरों ने ऐसा कारनामा किया है जो कि वनडे इतिहास में कोई ओपनिंग पेयर अभी तक नहीं कर पाया था । ,शिखर धवन और रोहित शर्मा ने सेमीफाइनल मुकाबले में पहले विकेट के लिए 77 रन जोड़े । ,"दोनों ने जैसे ही 50 का आंकड़ा पार किया , वैसे ही वनडे की रिकॉर्ड बुक में आंकड़ेबाजों को एक और चैप्टर जोड़ना पड़ गया ।" ,लगातार चार वनडे मैचों में 50 से ज्यादा रनों की साझेदारी करने वाले ये दोनों पहली ओपनिंग जोड़ी बन गए हैं । ,टीम इंडिया को यूडीआरएस प्रणाली ने दो बार मैच के दौरान रुलाया । ,एक बार कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की बॉलिंग पर और एक बार जडेजा की बॉलिंग पर यूडीआरएस ने फील्ड अंपायर के फैसले को गलत ठहरा दिया । ,मैच के दौरान श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा एक आदमी झंडा लिए मैदान पर आ गया । ,कुशल परेरा की ओर वह प्रदर्शनकारी जैसे ही झपटा वे घबरा गए । ,सुरक्षागार्ड्स ने जैसे - तैसे उसे काबू कर बाहर किया । ,कुमार संगकारा आउट होने के बाद झल्ला गए । ,उसी खीज में अपने पैर पटकते हुए उन्हें कैमरे ने कैद कर लिया । ,इंस्पेक्टर क्रान्तिलाल गरजते हुए बोले अरे कौशल्ये कहां हो ? ,कौशल्या रसोई से डयोढी पर खड़ी होकर बोली क्योंजी डराते हैं । ,इतनी रौबीली आवाज में ये घर है थाना नहीं । ,घर के बाहर से आवाज देने लगते हो । ,क्रान्तिलाल - अच्छा नहीं लगता घर के बाहर से आवाज देना । ,कौशल्या - नहीं । ,ऐसे तो जेठ - ससुर आवाज लगाते हैं । ,क्रान्तिलाल - मतलब मुझमें बदलाव की गुंजाइश है । ,कौशल्या - घर में आ गये हो अब बैठ जाओ । ,मैं चाय पानी लेकर आती हूं । ,क्रान्तिलाल पानी का गिलास थामते हुए बोले कौशल्ये कोई आया है क्या ? ,कौशल्या - देखो जासूसी करना बन्द करो । ,चाय - पानी करो नहाओ धोओ । ,थके मांदे हो । ,थाने में नहीं अपने घर में आ गये हो । ,सामने कोई कैदी नहीं तुम्हारी अर्धांगिनी जो तीस साल से तुम्हारे साथ है । ,क्रान्तिलाल - हां याद है वह छुईमुई सा तुम्हारा रूप और हमारे बुरे दिन । ,"पद दौलत , सोहरत सब कुछ तो है तुम्हारी तपस्या के बल पर ।" ,कौशल्या - मैं तो तुम्हारी परछाई भर हूं । ,परिश्रम तुमने किया है फल तो मिलना ही था देर सबेर । ,क्रान्तिलाल - पद दौलत सोहरत तो है पर औलादों की ओर देखता हूं तो सब व्यर्थ लगता है । ,तीन बेटों में से कोई बाप की मेहनत को संवारने वाला नहीं दिखाई पड़ रहा है । ,कौशल्या - एक बिटिया वह भी अनपढ़ जैसी रह गयी । ,दमाद अच्छा पढ़ा लिखा तो मिल गया पर वह शहर में धक्के खा रहा है । ,नौकरी कोसों दूर भागी जा रही है दमाद से । ,दमाद तो हीरा है पर उसकी किस्मत धोखा दिये जा रही है । ,क्रान्तिलाल - मेरे पाकेट में नौकरी तो नहीं है कि निकालकर दहेज में दे दूं । ,कौशल्या - दहेज में भी कुछ नहीं दिये हो । ,कम से कम नौकरी के लिये कोई सिफारिश कर देते । ,बिटिया आराम से नहाने खाने लगती । ,अब तो गोद भी हरी हो गयी है । ,क्रान्तिलाल - दमाद की नौकरी के लिये हाथ फैलाने जाऊं लोग क्या कहेंगे ? ,कौशल्या - साहब सुबा हो किसी से भी बोल सकते हो । ,दमाद दर - दर की ठोकरें खा रहा है आप अपनी ऊंची नाक लेकर बैठे हो । ,बेटी दमाद सुख चैन से रहने लगेंगे तो इससे नाक और ऊंची हो जायेगी । ,इंस्पेक्टर साहब का दमाद दर - दर धक्के खा रहा है यह बात नाक नीची करने की है । ,क्रान्तिलाल - बेटों के लिये तो किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया तो दमाद के लिये कैसे फैला सकता हूं ? ,कौशल्या - कौन से बेटे को ऊंची पढाई करवाये हो कि हाथ फैलाओगे । ,दमाद लायक है उसके लिये सोच नहीं रहे हो । ,अरे इसमें तो अपनी बिटिया का सुख भी तो निहित है । ,रही बेटों की बात तो उनके लिये तो तुमने इतना जोड़ दिया है कि नौकरी करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी । ,"लाखों में एक पढ़ा लिखा दामाद स्टील फैक्टरी में तो कभी मण्डी में तो कहीं , कहां काम कर रहा है उसकी तनिक फिक्र नहीं है ।" ,चौबीसों घण्टे बेटों के बारे में गुनते - धुनते रहे हो । ,क्रान्तिलाल - देखो मैं दमाद के लिये नौकरी की भीख मांगने से रहा । ,रही बात नौकरी की तो ईश्वर को मिलेगी । ,कौशल्या - कैसे । ,क्रान्तिलाल - तकदीर के भरोसे । ,यदि तकदीर में नौकरी नहीं लिखी होगी तो ईश्वर भी अपने बाप की तरह से हरवाही - चरवाही करके गुजारा तो कर ही लेगा । ,मुझे मालूम है वह बिटिया को कोई तकलीफ नहीं पड़ने देगा । ,मुसीबतें उठाकर भी वह बिटिया को सुख देगा ऐसा मेरा विश्वास है । ,कौशल्या - कैसे बेटी के बाप हो ? ,लोग बेटी दमाद को जीवन भर की कमाई देने को तैयार हैं । ,तुम हो नौकरी के लिये सिफारिश को तौहीनी मान रहे हो । ,क्रान्तिलाल - कौशल्या बेकार की फिक्र ना करो । ,बिटिया की किस्मत में सुख लिखा होगा तो जरूर मिलेगा हमारे देने से कुछ नहीं होगा । ,कौशल्या - आप दमादजी की मदद नहीं करना चाहते हो ना । ,ठीक है जैसे मेरी तपस्या तुम्हारे काम आयी वैसे ही बिटिया की तपस्या दमादजी की तकदीर बदल देगी । ,इंस्पेक्टर साहब लो पैग लगाओ खाना तैयार है । ,खाकर सो जाओ बेटी दमाद को आंसू बहाने दो अपनी किस्मत पर । ,क्रान्तिलाल - कौशल्या नाराज ना हो । ,मेरे हाथ में कुछ नहीं है सब भगवान के हाथ में है । ,दमाद की मेहनत और बिटिया की पूजा का प्रतिफल जरूर मिलेगा । ,हमें फिक्र करने की जरूरत नहीं । ,कौशल्या - मैं नाराज़ होकर भी क्या बिगाड़ सकती हूं ? ,बेटी - दमाद की चिन्ता भले ही तुमको नहीं है हमें तो बहुत है रात की नींद गायब हो जाती है जब दमादजी के संघर्ष के बारे में सोचती हूं । ,कितना दुख उठा कर पढ़ाई किये । ,उनके बाप की कमाई भी तो कुछ नहीं थी खेती किसानी में कितनी कमाई होती है ? ,दमादजी अपने गांव से दस कोस दूर साइकिल से कालेज जाकर पढाई पूरी किये क्योंकि उनके बाप में तुम्हारे इतना सामर्थ्य था कि बेटे को शहर भेजकर पढ़ा पाते । ,तुम तो नहीं पढ़ा पाये ईश्वर के बाप ने हरवाही चरवाही ही सही करके इतना पढ़ा दिया कि तुम्हारी सात पीढ़ी तक कोई इतना पढ़ा लिखा नहीं है । ,क्रान्तिलाल - ताना क्यों मार रही हो मुझे ? ,अरे ईश्वर का हरवाह - चरवाह बाप नौकरी लगवा देगा । ,बहुत ऐठन में था न ईश्वर की पढ़ाई को देखकर । ,नौकरी लगवा कर दिखा दे तब ना जाने उसके ऐठन का दम । ,कौशल्या - अच्छा तो ये अफसर समधी की हरवाह समधी को नीचा दिखाने की कार्रवाई है । ,अरे इतना ही नागवार थी रिश्तेदारी तो बिटिया का ब्याह क्यों किये ? ,क्रान्तिलाल - बड़े भाई साहब की जिद के आगे मेरी एक ना चली । ,मैं तो बिटिया का ब्याह किसी रईस खानदान में करता हरवाह - चरवाह के घर में कभी नहीं करता । ,भईया ने पानी फेर दिया मेरी सोच पर । ,कौशल्या - तुम भले ही रईस परिवार ढूंढ लेते पर ऐसा दामाद तुम्हें कभी नहीं मिलता । ,क्यों भूल जाते हो ? ,यही दमाद बेटों से अधिक तुम्हारी सेवा - सुश्रूषा करता है । ,उसी दमाद के बारे में तुम ऐसा सोच रहे हो । ,बेटों को राजा - महाराजा बनाने की सोच रहे हो बिटिया के बारे में तनिक भी नहीं । ,वाह रे बेटी के बाप । ,क्रान्तिलाल - बेटी के प्रति जो अपना फर्ज था पूरा कर दिया । ,उसका ब्याह - गौना करके गंगा नहा लिया । ,अब तो बस बेटों की चिन्ता बची है । ,कौशल्या - व्याह गौना के अलावा बाप का बेटी के प्रति कोई फर्ज नहीं बचता । ,क्रान्तिलाल - नहीं ..... बिटिया की किस्मत ईश्वर दामाद के साथ जुड़ गयी है । ,बिटिया की चिन्ता अब हमारी नहीं उसके परिवार की है । ,उसके पति ईश्वर की है । ,मैं अपना फर्ज निभा चुका हूं । ,बस अब बहस ना करना । ,कौशल्या - भला मैं इंस्पेक्टर साहब से कैसे बहस कर सकती हूं ? ,क्रान्तिलाल - भइया की वजह से फूल जैसी बेटी दरिद्र के घर में ब्याहना पड़ा । ,भइया जिद पर अड़े थे कि ईश्वर कालेज से निकलते ही कलेक्टर बन जायेगा । ,देखो अब नन्ही सी नौकरी नहीं मिल रही है । ,अच्छे खाते - पीते खानदान में बेटी का ब्याह होता तो ये दिन नहीं देखने पड़ते ना । ,कौशल्या - देखो जेठ जी ने जो किया अच्छा किया है । ,बिटिया जरूर राज करेगी । ,कहते हैं ना घूरे के दिन भी फिरते हैं दमाद पढ़ा लिखा है नौकरी जरूर मिलेगी । ,आप भी दमाद के गुण गाओगे । ,करोड़ों में एक हमारा दमाद है । ,क्रान्तिलाल और कौशल्या की बातचीत चल रही थी । ,इसी बीच ईश्वर आ गया । ,गठरी रखते हुए बोला अम्माजी सब सामान ला दिया हूं । ,मैं अब अपने र्क्वाटर जा रहा हूं । ,कौशल्या - दमादजी खाना खा लो । ,ईश्वर - नहीं अम्माजी । ,मुझे जाना है । ,कौशल्या - कहां दमादजी । ,ईश्वर - शहर छोडकर जा रहा हूं । ,क्रान्तिलाल - हमेशा के लिये क्या ..... ? ,ईश्वर - हां बाबूजी । ,क्रान्तिलाल - हलवाह पुत्र के लिये न तो शहर में और नहीं अपनों के दिल में जगह बची है । ,ईश्वर - अम्मा मेरा कुर्ता खूंटी पर टंगा है दे दीजिये । ,क्रान्तिलाल - खादी का कुर्ता । ,ईश्वर - हां बाबूजी । ,कौशल्या खादी का कुर्ता लेकर आयी । ,कुर्ता लेकर ईश्वर सास ससुर का पांव छूकर शहर को अलविदा कह दिया । ,ईश्वर के जाने के बाद कौशल्या बोली इसी कुर्ते को देखकर पूछ रहे थे कोई आया है क्या अब समझी । ,क्रान्तिलाल - अरे ईश्वर के पास कपड़े लत्ते नहीं थे तो मुझसे कहा होता । ,कल ही की तो बात है कुछ पुराने कपड़े किसी को दिये थे ना । ,ईश्वर को दे देता । ,कौशल्या - तुम्हारा चिथड़ा दमादजी पहनने को हैं क्या ? ,तुम्हारे पुराने कपड़े से कई गुना अच्छा उनकी खुद की कमाई का खादी का कुर्ता है । ,कहते हैं परिश्रम का फल मीठा होता है । ,वही हुआ समय ने करवट बदली और ईश्वर की तकदीर ने भी । ,वही इंस्पेक्टर क्रान्तिलाल दमाद ईश्वर की खूबियां और बेटों की कमियां गिनाने में अपनी शान समझने लगे । ,लोगों से कहते भगवान सबको दमाद दे हमारे ईश्वर जैसा । ,कौशल्या - खादी के कुर्ते वाला दमाद । ,क्रान्तिलाल - हां वही । ,कौशल्या - खादी के कुर्ते वाले दमाद के मान - सम्मान और बिटिया का सुख देख - देख कर जेठ जी की जौहरी आंखों का मोल समझ में आया कि नहीं । ,क्रान्तिलाल - हां आ गया । ,ईश्वर ने पत्थर पर निशान गढ़ दिया । ,खादी के कुर्ते वाले दमाद ने खुद को हीरा साबित कर दिया । ,यही तो मेरे सपनों की बारात थी । ,द्वारपूजा भी हो गयी । ,चैन से मर सकूंगा कौशल्ये । ,कौशल्या - क्या ? ,क्रान्तिलाल - हां । ,खादी का कुर्ता बस कुर्ता नहीं जनून है और स्वामिभान भी है समझ गया । ,"बहिर्मुखता एक ऐसी विशेषता है जो ज्यादातर धूम्रपान से जुड़ी है और धूम्रपान करने वाले मिलनसार , आवेगी , जोखिम उठाने वाले और उत्तेजना की चाहत रखने वाले व्यक्ति होते हैं ।" ,"हालांकि व्यक्तित्व और सामाजिक कारक लोगों को धूम्रपान के लिए प्रेरित कर सकते हैं , लेकिन वास्तविक आदत प्रभाव डालने की अनुकूलता की क्रिया है ।" ,प्रारंभिक चरण के दौरान धूम्रपान सुखद अनुभूतियां प्रदान करता है ( इसके डोपामाइन ( dopamine ) प्रणाली पर प्रभाव के कारण ) और इस तरह सकारात्मक सुदृढ़ीकरण के एक स्रोत के रूप में कार्य करता है । ,एक व्यक्ति द्वारा कई वर्षों तक धूम्रपान करने के पश्चात छोड़ने के लक्षण और नकारात्मक सुदृढ़ीकरण प्रमुख उत्प्रेरक हो जाते हैं । ,"हालांकि लम्बे समय से तम्बाकू के धूम्रपान को एक सार्वभौमिक नशे की लत के रूप में देखा गया है , आंकड़ों द्वारा यह सिद्ध किया जा चुका है कि निकोटिन का आदी बनने में लोगों को अलग अलग समय लगता है ।" ,"वास्तव में , "" नशेड़ी व्यवहार दर्शाने वाली जनसंख्या "" के ग्राफ की प्रतिशतता 100 % तक पहुँचने से पहले , "" निकोटिन की मात्रा "" के ग्राफ के बराबर है जिससे पता चलता है कि एक अनुपात में सभी लोग कभी भी निकोटिन पर निर्भर नहीं होते ।" ,"हालांकि , धूम्रपान करने वाले लोग ऐसी प्रक्रिया में लिप्त होते हैं जिसका स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है , वे अपने व्यवहार को युक्ति संगत बताते हैं ।" ,धार्मिक नेता अक्सर उन प्रमुख लोगों में से रहे हैं जिन्होनें धूम्रपान को अनैतिक या तिरस्कार के योग्य माना है । ,1634 में मास्को के पैट्रिआर्क ने तम्बाकू की बिक्री पर रोक लगा दी और इस प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले स्त्री और पुरुषों की नाक काटने और उनकी चमड़ी उधड़ने तक चाबुक मारने की सज़ा सुनाई । ,कुछ इसी तरह पश्चिमी चर्च नेता अर्बन VII ( सप्तम ) ने 1590 के पोप सम्बंधी आदेश में धूम्रपान की निन्दा की । ,"कई ठोस प्रयासों के बावजूद , प्रतिरोध और प्रतिबंध लगभग दुनियाभर में नजरअंदाज कर दिए गये ।" ,"जब इंग्लैंड के एक कट्टर धूम्रपान विरोधी और "" ए काउंटरब्लास्ट टू टोबेको "" ( A Counterblast to Tobacco ) के लेखक जेम्स प्रथम ने 1604 में तम्बाकू पर अप्रत्याशित 4000 % कर लगा कर एक नई शुरुआत करने की कोशिश की , तो यह एक विफलता साबित हुई , क्योंकि 1600 के दशक की शुरुआत में लंदन में लगभग 7000 तम्बाकू विक्रेता थे ।" ,"बाद में , होशियार शासकों को धूम्रपान प्रतिबंध की निरर्थकता का एहसास हुआ और तम्बाकू के व्यापार और खेती को आकर्षक सरकारी एकाधिकार में बदल दिया गया ।" ,"1600 के दशक के मध्य तक हर प्रमुख सभ्यता तम्बाकू के धूम्रपान से परिचित थी और बहुत से मामलों में इसे पहले ही देशी संस्कृति में शामिल कर लिया गया था , बावजूद इसके कि कई शासकों ने इसे रोकने के लिए सख्त दंड या जुर्माने का प्रावधान किया ।" ,"तंबाकू , उत्पाद और पौधे , दोनों प्रमुख बंदरगाहों और बाजारों के प्रमुख मार्गों पर और इसके बाद आंतरिक इलाकों में फैले ।" sg,"अंग्रेजी भाषा का शब्द "" स्मोकिंग "" 1700 के दशक के अंत में गढ़ा गया था , जिससे पहले यह प्रक्रिया "" धुंआ पीने "" ( drinking smoke ) के नाम से जानी जाती थी ।" ,विश्व में किसी भी स्थान से कहीं ज्यादा अफ्रीका के उप सहारा में तंबाकू और भांग का प्रयोग ना केवल सामाजिक संबंधों की पुष्टि करने अपितु नए संबंध बनाने में भी किया गया । sg,"वर्तमान में कांगो के नाम से बुलाई जाने वाली जगह पर 1800 के दशक में लुबुको ( "" द लैंड ऑफ़ फ्रेंडशिप "" ) में बेना दिएम्बा ( Bena Diemba ) ( "" पीपुल ऑफ़ कैनाबिस "" ) नाम से एक संस्था गठित की गई थी ।" ,बेना दिएम्बा शांतिप्रिय समुदाय थे जिन्होनें भांग के पक्ष में शराब तथा हर्बल दवाओं को अस्वीकार कर दिया था । ,"1860 के दशक में अमेरिकी नागरिक युद्ध तक विकास स्थिर रहा , जिसके बाद प्रमुख श्रमिक , दास से फसल के हिस्सेदार बन गए ।" ,इससे मांग में एक जटिल परिवर्तन हुआ जिसके कारण सिगरेट के साथ तंबाकू उत्पादन के औद्योगीकरण की शुरुआत हुई । sg,1881 में एक शिल्पकार जेम्स बोंसेक ने सिगरेट का उत्पादन बढ़ाने के लिए मशीन बनाई । ,1800 के दशक में अफीम का धूम्रपान आम हो गया था । ,पहले यह केवल खाई जाती थी और वह भी मुख्य रूप से केवल अपने औषधीय गुणों के कारण । sg,चीन में बड़े पैमाने पर अफीम के धूम्रपान में वृद्धि का मुख्य कारण चीनी राजवंश किंग द्वारा ब्रिटिश व्यापार घटा था । sg,"इस समस्या को सुलझाने के लिए , ब्रिटिश लोगों ने भारतीय उपनिवेशों में बड़े पैमाने पर उगाई गई अफीम का निर्यात शुरू कर दिया ।" ,"सामाजिक समस्याओं और मुद्रा में बड़ी गिरावट के कारण , आयात को रोकने के लिए चीन द्वारा कई प्रयास हुए जो अंततः अफीम युद्ध में बदल गए ।" ,बाद में अफीम का धूम्रपान चीनी प्रवासियों के प्रसार के साथ फैला तथा दक्षिण व दक्षिण पूर्व एशिया और यूरोप के आसपास स्थित चीनी शहरों के अफीम के कुख्यात गुप्त अड्डों तक फैलता चला गया । ,"1800 के दशक के उत्तरार्द्ध में , अफीम धूम्रपान , यूरोप के कलात्मक समुदाय में लोकप्रिय हो गया था , विशेषकर पेरिस में कलाकारों के इलाके जैसे मोंटपार्नेस तथा मोंटमारट्रे आभासी "" अफीम राजधानियां "" बन गए थे ।" ,"जबकि दुनिया भर के चीनी शहरों में स्थित अफीम के गुप्त ठिकानों ने प्रवासी चीनियों को आपूर्ति जारी रखी , प्रथम विश्व युद्ध के फैलने के बाद यूरोपीय कलाकारों में यह प्रवृत्ति बड़े पैमाने पर कम हुई ।" ,चीन में अफ़ीम की खपत 1960 और 1970 के दशक में सांस्कृतिक क्रांति के दौरान कम हुई । sg,1930 और 1940 के दशकों में होने वाले आंदोलन के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए नाजी जर्मनी में होने वाले तम्बाकू -JOIN विरोधी आंदोलन को देखें । sg,आधुनिक आंदोलन के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए धूम्रपान -JOIN विरोधी आंदोलन देखें । ,"1920 के दशक में जीवन में वृद्धि की संभावनाओं और सिगरेट निर्माण के आधुनिकीकरण के साथ , स्वास्थ्य के प्रतिकूल प्रभाव और अधिक परिलक्षित होने लगे ।" sg,"जर्मनी में , धूम्रपान विरोधी समूह , जो अक्सर शराब विरोधी समूहों के साथ जुड़े होते थे , ने 1912 और 1932 में "" देर तबकगेग्नेर "" ( Der Tabakgegner ) ( तम्बाकू विरोधी ) नामक एक पत्रिका में तम्बाकू की खपत के खिलाफ अपना पक्ष प्रकाशित किया ।" sg,"1929 में , ड्रेस्डेन जर्मनी के फ्रिट्ज लिकिंट ने फेफड़ों के कैंसर - तम्बाकू के संबंध में औपचारिक सांख्यिकीय प्रमाणों के साथ एक पत्र प्रकाशित किया ।" ,"घनघोर अवसाद के दौरान , एडॉल्फ हिटलर ने धूम्रपान करने की लत को पैसे की बरबादी कहकर इसकी निन्दा की थी और बाद में इस विषय पर उसने दृढ़ वक्तव्य दिये ।" ,नाजी प्रजनन नीति के साथ इस आन्दोलन को और अधिक बढ़ावा मिला क्योंकि जर्मन परिवार में धूम्रपान करने वाली महिला पत्नी या मां बनने के लिए अनुपयुक्त मानी जाती थी । ,द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी आंदोलन समाप्त हो गया क्योंकि धूम्रपान विरोधी समूहों ने जल्दी ही अपना समर्थन खो दिया था । ,"द्वितीय विश्व युद्ध के अंत तक , अमेरिकी सिगरेट निर्माताओं ने जर्मन काले बाज़ार में फिर से प्रवेश कर लिया ।" ,"तम्बाकू की अवैध तस्करी प्रचलित हो गई , और धूम्रपान विरोधी अभियान के नेताओं की हत्या कर दी गई ।" sg,"मार्शल योजना के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका ने जहाजों द्वारा जर्मनी में मुफ्त में तम्बाकू भेजा जो 1948 में 24,000 टन और 1949 में 69,000 टन था ।" ,"युद्ध के पश्चात् जर्मनी में प्रति व्यक्ति सिगरेट की वार्षिक खपत 1950 में 460 से बढ़ कर 1963 तक 1,523 हो गई ।" ,"1900 के दशक के अंत तक , जर्मनी के धूम्रपान विरोधी अभियान नाजी युग के 1939 - 1941 के प्रभाव को बढ़ाने में असमर्थ थे और जर्मन तम्बाकू स्वास्थ्य अनुसन्धान संस्थान को रॉबर्ट एन प्रॉक्टर द्वारा "" मौन "" वर्णित किया गया था ।" ,1950 में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक शोध द्वारा रिचर्ड डौल ने धूम्रपान और फेफड़ों के कैंसर के बीच में संबंध दिखाया । ,"चार साल बाद , 1954 में ब्रिटिश डॉक्टरों के एक अध्ययन , यह अध्ययन 40 हजार डॉक्टरों द्वारा 20 से भी अधिक वर्षों तक किया गया था , ने इस बात की पुष्टि की जिसके आधार पर सरकार ने सलाह जारी की कि धूम्रपान और फेफड़ों के कैंसर का आपस में संबंध था ।" sg,"कुछ इसी तरह 1964 में धूम्रपान और स्वास्थ्य पर अमेरिकन सर्जन जनरल ने धूम्रपान और कैंसर के बीच संबंध बताया , जिसकी पुष्टि 20 वर्षों बाद 1980 के दशक के बाद के वर्षों में की गई ।" ,"जबकि 1980 के दशक में वैज्ञानिक साक्ष्य बढ़ने लगे , तम्बाकू कंपनियों ने आंशिक लापरवाही का दावा किया क्योंकि स्वास्थ्य के प्रतिकूल प्रभाव अज्ञात या अविश्वसनीय थे ।" ,"1998 तक स्वास्थ्य अधिकारियों ने इन दावों का साथ दिया , जिसके बाद उन्होनें स्थिति पलट दी ।" ,"संयुक्त राज्य अमेरिका की चार बड़ी तम्बाकू कंपनियों और 46 राज्यों के अटॉर्नी जनरलों के बीच हुए टोबेको मास्टर सेटलमेन्ट एग्रीमेंट ( Tobacco Master Settlement Agreement ) , जो बाद में अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा नागरिक समझौता बन गया , के तहत तम्बाकू के कई प्रकार के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया और स्वास्थ्य के लिए मुआवजे की मांग रखी गई ।" ,इसने विशेष रूप से कशेरुकी फ्रैक्चर के निवारण में अपनी क्षमता साबित कर दी है । ,"प्रयोगशाला प्रयोगों में नोट किया गया कि स्ट्रॉन्शियम रीनलेट अस्थिकोरकों के प्रसार को बढ़ावा NULL , साथ ही अस्थिभंजकों के प्रसार को प्रतिबंधित करता है ।" ,स्ट्रॉन्शियम रीनलेट को हर रोज़ 2g मौखिक निलंबन के रूप में लिया जाता है और कशेरुकी और हिप फ्रैक्चर को रोकने के लिए हड्डियों की कमजोरी के उपचार हेतु इसे लाइसेंस दिया गया है । ,"बिसफ़ॉस्फोनेट की तुलना में स्ट्रॉन्शियम रीनलेट को अनुषंगी प्रभाव लाभ हासिल है , क्योंकि यह किसी तरह का ऊपरी GI अनुषंगी प्रभाव नहीं पैदा करता , जो कि हड्डियों की कमजोरी में दवा हटा लिए जाने का सबसे आम कारण है ।" sg,"अध्ययनों में शिरापरक घनास्रशल्यता के जोखिम में थोड़ी - सी वृद्धि नोट की गई , जिसके कारण का निर्धारण नहीं किया गया है ।" ,इससे पता चलता है कि यह अलग कारणों से घनास्त्रता के जोखिम से ग्रस्त रोगियों में कम उपयुक्त हो सकता है । sg,"अस्थि मैट्रिक्स में कैल्शियम के स्थान पर ( भारी ) स्ट्रॉन्शियम का उद्ग्रहण , DXA पर मापे गए अस्थि खनिज घनत्व में पर्याप्त और बेमेल वृद्धि दर्शाता है , जिससे स्ट्रॉन्शियम से उपचार किए गए रोगियों के लिए इस विधि द्वारा अस्थि घनत्व के अतिरिक्त अनुवर्तन की व्याख्या में कठिनाई होती है ।" ,एक सुधार एल्गोरिथम तैयार किया गया है । ,"हालांकि स्ट्रॉन्शियम रीनलेट प्रभावी है , पर संयुक्त राज्य अमेरिका में अभी तक इसका उपयोग स्वीकृत नहीं हुआ है ।" ,"तथापि , अमेरिका में कई नामी विटामिन निर्माताओं से स्ट्रॉन्शियम साइट्रेट उपलब्ध है ।" ,"अधिकांश शोधकर्ताओं का मानना है कि स्ट्रॉन्शियम भले ही किसी रूप में प्रयुक्त हो , वह सुरक्षित और प्रभावी है ।" ,ऑस्टियोपोरोसिस ,अस्थिसुषिरता या ऑस्टियोपोरोसिस ( osteoporosis ) हड्डी का एक रोग है जिससे फ़्रैक्चर का ख़तरा बढ़ जाता है । ,"ऑस्टियोपोरोसिस में अस्थि खनिज घनत्व ( BMD ) कम हो जाता है , अस्थि सूक्ष्म - संरचना विघटित होती है और अस्थि में असंग्रहित प्रोटीन की राशि और विविधता परिवर्तित होती है ।" ,"विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) ने महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस को DXA के मापन अनुसार अधिकतम अस्थि पिंड ( औसत 20 वर्षीय स्वस्थ महिला ) से नीचे अस्थि खनिज घनत्व 2.5 मानक विचलन के रूप में परिभाषित किया है ; शब्द "" ऑस्टियोपोरोसिस की स्थापना "" में नाज़ुक फ़्रैक्चर की उपस्थिति भी शामिल है ।" ,"ऑस्टियोपोरोसिस , महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद सर्वाधिक सामान्य है , तब उसे रजोनिवृत्तोत्तर ऑस्टियोपोरोसिस कहते हैं , पर यह पुरुषों में भी विकसित हो सकता है और यह किसी में भी विशिष्ट हार्मोन संबंधी विकार तथा अन्य दीर्घकालिक बीमारियों के कारण या औषधियों , विशेष रूप से ग्लूकोकार्टिकॉइड के परिणामस्वरूप हो सकता है ," sg,जब इस बीमारी को स्टेरॉयड या ग्लूकोकार्टिकॉइड - प्रेरित ऑस्टियोपोरोसिस ( SIOP या GIOP ) कहा जाता है । ,"उसके प्रभाव को देखते हुए नाज़ुक फ़्रैक्चर का ख़तरा रहता है , हड्डियों की कमज़ोरी उल्लेखनीय तौर पर जीवन प्रत्याशा और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है ।" ,ऑस्टियोपोरोसिस को जीवन - शैली में परिवर्तन और कभी - कभी दवाइयों से रोका जा सकता है ; हड्डियों की कमज़ोरी वाले लोगों के उपचार में दोनों शामिल हो सकती हैं । ,"जीवन - शैली बदलने में व्यायाम और गिरने से रोकना शामिल हैं ; दवाइयों में कैल्शियम , विटामिन डी , बिसफ़ॉसफ़ोनेट और कई अन्य शामिल हैं ।" ,"गिरने से रोकथाम की सलाह में चहलक़दमी वाली मांसपेशियों को तानने के लिए व्यायाम , ऊतक - संवेदी - सुधार अभ्यास ; संतुलन चिकित्सा शामिल की जा सकती हैं ।" ,"व्यायाम , अपने उपचयी प्रभाव के साथ , ऑस्टियोपोरोसिस को उसी समय बंद या उलट सकता है ।" ,ऑस्टियोपोरोसिस के सभी मामलों में अंतर्निहित प्रणाली अस्थि अवशोषण और अस्थि - निर्माण के बीच असंतुलन है । ,सामान्य अस्थि में निरंतर अस्थि का पुनर्प्रतिरूपण मैट्रिक्स मौजूद रहता है । ,किसी भी समय बिंदु पर सभी अस्थि पिंड का 10 % पुनर्प्रतिरूपण से गुज़रता रहता है । ,"जैसा कि 1963 में फ़्रॉस्ट ने पहली बार बताया , यह प्रक्रिया अस्थि बहुकोशिकीय इकाइयों ( BMU ) में घटित होती है ।" ,"अस्थिशोषक कोशिकाओं द्वारा ( अस्थि मज्जा से प्राप्त ) अस्थि का अवशोषण होता है , जिसके बाद नई अस्थि अस्थिकोरक कोशिकाओं द्वारा जमा की जाती है ।" ,"जिन तीन प्रमुख क्रियाविधियों द्वारा हड्डियों की कमज़ोरी विकसित होती है , वे हैं अपर्याप्त "" शीर्ष अस्थि पिंड "" ( विकास के दौरान कंकाल अपर्याप्त पिंड और शक्ति विकसित करता है ) , अत्यधिक अस्थि अवशोषण और पुनर्प्रतिरूपण के दौरान नई अस्थि का अपर्याप्त गठन ।" ,"नाज़ुक अस्थि ऊतक के विकास के मूल में है , इन तीन क्रियाविधियों की पारस्परिक क्रिया ।" sg,हार्मोन संबंधी कारक अस्थि अवशोषण की दर को विशेषतः निर्धारित करते हैं । ,"एस्ट्रोजेन की कमी ( उदा. रजोनिवृत्ति के परिणामस्वरूप ) अस्थि अवशोषण को बढ़ाती है और साथ ही , आम तौर पर भार - वहन करने वाली अस्थियों में होने वाले नई अस्थि के निक्षेपण को कम करती है ।" ,"इस प्रक्रिया को दबाने के लिए अपेक्षित एस्ट्रोजन की मात्रा , आम तौर पर गर्भाशय और स्तन ग्रंथि को उत्तेजित करने के लिए अपेक्षित मात्रा से कम है ।" ,अस्थि हेर - फेर के विनियमन में आल्फा - रूप का एस्ट्रोजन रिसेप्टर बहुत महत्वपूर्ण लगता है । ,"अस्थि हेर - फेर में , एस्ट्रोजेन के अलावा कैल्शियम चयापचय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और कैल्शियम और विटामिन D की कमी , अस्थि निक्षेपण अपक्षय की ओर ले जाती है ।" sg,"इसके अतिरिक्त , पैराथाइरॉइड ग्रंथियां कम कैल्शियम स्तर के प्रति प्रतिक्रिया करते हुए पैराथाइरॉइड हार्मोन ( पैराथारमोन , PTH ) स्रावित करती हैं , जो रक्त में कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करने के लिए अस्थि अवशोषण बढ़ाती है ।" ,"अस्थि निक्षेपण को बढ़ाने वाली , थायरॉयड द्वारा उत्पादित हार्मोन कैल्सीटोनिन की भूमिका कम स्पष्ट है और संभवतः PTH की तरह उतनी महत्वपूर्ण नहीं ।" ,"अस्थिशोषकों के सक्रियकरण विभिन्न आणविक संकेतों द्वारा नियंत्रित हैं , जिनमें से RANKL ( परमाणु कारक kB लाइगैंड के लिए रिसेप्टर उत्प्रेरक ) पर सर्वाधिक अध्ययन किया गया है ।" ,"यह अणु , अस्थिकोरक और अन्य कोशिकाओं ( जैसे लसिकाणु ) द्वारा निर्मित होता है और RANK ( परमाणु कारक kB का रिसेप्टर उत्प्रेरक ) को उत्तेजित करता है ।" ,ऑस्टियोप्रोटिजरिन ( OPG ) RANK को जकड़ने का मौक़ा पाने से पहले RANKL को जोड़ता है और इसलिए उसकी अस्थि अवशोषण में वृद्धि की क्षमता को दबा देता है । ,"RANKL , RANK और OPG , ट्यूमर परिगलन कारक और उसके ग्राहियों से निकट से जुड़े हुए हैं ।" ,""" Wnt "" संकेतन मार्ग की भूमिका को स्वीकृति मिली है , पर अच्छी तरह से कम समझा गया है ।" ,"एइकोसनॉइड और इंटरल्युकिन के स्थानीय उत्पादन को , अस्थि हेर - फेर को नियंत्रित करने में भाग लेने वाला माना जाता है और ऑस्टियोपोरोसिस के विकास के मूल में इन मध्यस्थों का अधिक या कम उत्पादन कारक हो सकता है ।" ,"बंधकमय अस्थि , लंबी अस्थियों और कशेरुक के छोर पर स्थित स्पंजनुमा अस्थि है ।" ,"वल्कुटीय अस्थि , हड्डियों का कठोर बाहरी कवच और लंबी हड्डियों का मध्य है ।" ,"क्योंकि अस्थिकोरक और अस्थिशोषक , हड्डियों की सतह पर निवास करते हैं , बंधकमय अस्थि ज़्यादा सक्रिय है और अस्थि के हेर - फेर और पुनर्प्रतिरूपण के अधीन है ।" ,"न केवल अस्थि घनत्व कम होता है , बल्कि अस्थि की सूक्ष्म - संरचना बाधित होती है ।" ,बंधकमय अस्थि ,"कमज़ोर कंटिकाएं ( "" सूक्ष्म - दरारें "" ) भंग हो जाती हैं और कमज़ोर हड्डियों से प्रतिस्थापित होती हैं ।" ,"आम ऑस्टियोपोरोटिक अस्थि - भंग जगहें , यथा कलाई , कूल्हे और रीढ़ की हड्डी में वल्कुटीय अस्थि से बंधकमय अस्थि का अनुपात अपेक्षाकृत उच्च होता है ।" ,"ये स्थल शक्ति के लिए बंधकमय अस्थि पर आश्रित हैं और इसलिए जब पुनर्प्रतिरूपण असंतुलित हो , तो तीव्र पुनर्प्रतिरूपण से इन जगहों का अपक्षय होता है ।" ,ऑस्टियोपोरोसिस का अपना कोई विशेष लक्षण नहीं है । ,"इसका मुख्य परिणाम , अस्थि भंग का वर्धित जोखिम है ।" ,"ऑस्टियोपोरोटिक फ़्रैक्चर उन स्थितियों में होते हैं , जहां आम तौर पर स्वस्थ लोगों की हड्डी नहीं टूटती है ; अतः उन्हें "" नाज़ुक अस्थि - भंग "" माना जाता हैं ।" ,सप्तपुरियों के दर्शन से मिलता है मोक्ष । ,हिंदू धर्म में तीर्थ का बड़ा महत्व है । ,"यूँ तो हर तीर्थ बड़ा और अहम है , लेकिन सात स्थानों की बड़ी महत्ता और मान्यता है ।" ,ये सातों धर्मस्थल सात नगरों या सप्तपुरियों के रूप में ग्रंथों में वर्णित हैं । ,ऐसा कहा गया है कि चतुर्मास में इन सप्तपुरियों का दर्शन मोक्ष प्रदान करने वाला होता है । ,इसका नाम बनारस या वाराणसी भी है । ,गंगा किनारे यह भगवान शंकर की प्रसिद्ध पुरी है । ,मुगलसराय से अमृतसर तथा देहरादून जाने वाली मुख्य रेलवे लाइन पर मुगलसराय स्टेशन से 7 मील पर काशी और उससे 4 मील आगे बनारस छावनी स्टेशन है । ,इलाहाबाद के प्रयाग स्टेशन से भी एक सीधी लाइन काशी होते हुए बनारस छावनी तक जाती है । ,पूर्वोत्तर रेलवे की एक लाइन भटनी से तथा दूसरी छपरा से इलाहाबाद सिटी तक जाती है । ,इस रास्ते से भी बनारस सिटी होते हुए छावनी जा सकते हैं । ,पतित पावनी गंगा हरिद्वार में पर्वतीय क्षेत्र को छोड़कर समतल भूमि में प्रवेश करती हैं । ,इसलिए हरिद्वार को गंगा द्वार भी कहते हैं । ,हरिद्वार में प्रतिदिन शाम को होने वाली माँ गंगा की आरती के समय श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है । ,गंगा नदी पर तैरती दीपमालाओं का दृश्य देखते ही बनता है । ,उत्तर रेलवे की मुगलसराय से अमृतसर जाने वाली मुख्य लाइन पर स्टेशन है । ,लक्सर से एक लाइन हरिद्वार तक गई है । ,प्राचीन काल में पितामह ब्रह्माजी ने कांची में माँ भगवती के दर्शन के लिए दुष्कर तपस्या की थी । ,तब महालक्ष्मी हाथ में कमल धारण किए हुए उनके सामने प्रकट हुई थीं । ,दक्षिण रेलवे के चेन्नै स्टेशन से धनुष्कोटि जाने वाली मुख्य लाइन पर चेन्नै से 35 मील की दूरी पर चेंगलपट स्टेशन है । ,चेंगलपट स्टेशन से एक लाइन अरकोनम तक जाती है । ,चेंगलपट स्टेशन से अरकोनम जाने वाली लाइन पर कांजीवरम स्टेशन है । ,स्टेशन का नाम कांजीवरम जरूर है किंतु नगर का नाम कांचीपुरम है । ,’ अयोध्या ’ भगवान श्री राम के अवतार की पवित्र भूमि है । ,अयोध्या पवित्र नदी सरयू के तट पर स्थित है । ,उत्तर रेलवे की मुगलसराय - लखनऊ लाइन के मुगलसराय स्टेशन से 128 मील की दूरी पर अयोध्या स्टेशन है । ,शिप्रा अथवा क्षिप्रा नदी के तट पर बसी महाकाल की यह उज्जैन नगरी पतित पावनी है । ,कहते हैं कि उज्जैन में महाकाल को नमस्कार कर लेने पर फिर मृत्यु की चिंता नहीं रहती । ,मध्य रेलवे की मुंबई - भोपाल - दिल्ली लाइन के भोपाल स्टेशन से एक लाइन उज्जैन जाती है । ,पश्चिम रेलवे की मुंबई - कोटा - दिल्ली लाइन पर नागदा स्टेशन से एक बड़ी लाइन भी उज्जैन तक गई है । ,उक्त लाइन के महू स्टेशन से भी एक लाइन उज्जैन को गई है । ,द्वारका चार धामों में एक धाम भी है । ,भगवान कृष्ण ने इसे समुद्र के बीच में विशेष रूप से बसाया था । ,पश्चिम रेलवे की सुरेंद्रनगर - ओखा पोर्ट लाइन पर स्थित यह नगर समुद्र किनारे का स्टेशन है । ,यमुना तट पर भगवान श्रीकृष्ण की अवतार भूमि का यह पवित्र नगर मथुरा है । ,पूर्वोत्तर रेलवे की आगरा फोर्ट से गोरखपुर जाने वाली लाइन तथा पश्चिम रेलवे की मुंबई - कोटा - दिल्ली लाइन पर मथुरा स्टेशन है । ,गढ़ - ,गढ़मुक्तेश्वर हिंदुओं का पावन तीर्थ है । ,चलें गढ़ मुक्तेश्वर का गंगा मेला । ,गाजियाबाद जिले के गढ़ मुक्तेश्वर में पतित पावनी गंगा के तट पर हर साल कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाले उत्तर भारत के प्रसिद्ध और प्राचीन धार्मिक मेले का इतिहास लगभग पाँच हजार वर्ष पुराना है । ,इस बार भी गढ़ मुक्तेश्वर में मेले की भरपूर गहमागहमी है और मुख्य स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट रही है । ,मुख्य स्नान 13 नवंबर को है । ,"गढ़ मुक्तेश्वर के विषय में कहा जाता है कि महाभारत के विनाशकारी युद्ध के बाद योगीराज श्रीकृष्ण , धर्मराज युधिष्ठिर व अर्जुन के मन में युद्ध की विभीषिका और नरसंहार को देखकर भारी ग्लानि हुई ।" ,"वे इस सोच में पड़ गए कि युद्ध में मारे गए असंख्य कुटुम्बियों , बंधुओं व निर्दोष लोगों की आत्मा की शांति के लिए क्या उपाय या संस्कार किया जाए ।" sg,तब सबने एक राय से निर्णय लिया था । ,खांडवी वन में भगवान परशुराम द्वारा स्थापित शिव बल्लभपुर नामक स्थान पर मुक्तेश्वर महादेव की पूजा यज्ञ तथा पतित पावनी गंगा में स्नान करने और वहाँ पिंडदान करने से सभी संस्कार पूर्ण हो जाएँगे । ,ज्ञात रहे कि शिव बल्लभपुर को ही अब गढ़ मुक्तेश्वर के नाम से जाना जाता है । sg,भगवान राम के पूर्वज महाराज शिवि ने अपना वानप्रस्थ गढ़ मुक्तेश्वर में ही व्यतीत किया था । ,महाराज शिव ने भगवान परशुराम से यहाँ शिव मंदिर की स्थापना कराई थी । ,उस समय गढ़ मुक्तेश्वर बल्लभ संप्रदाय का मुख्य केन्द्र था । ,गढ़ मुक्तेश्वर का नाम शिव बल्लभपुर पड़ा । ,मानसून के समय वहाँ जाने की अनुमति नहीं है । ,गावि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धी प्राप्त करने वाला इको - टूरिज्म केन्द्र है । ,गावि केरल वन विकास केन्द्र के अधीन है । pl,' एलिस्टेयर इन्टरनेशनल ' नामक विश्व पर्यटन संस्था ने पर्यटकों को इस क्षेत्र में पर्यटन करने की आवश्यकता पर बल दिया । ,"गावि वन्यपशु निरीक्षण , ट्रेकिंग आदि के लिए उपयुक्त स्थान है ।" sg,गावि में वन में तम्बू लगाने से लेकर भोजन तैयार करके देने का काम स्थानीय लोग सस्ते दामों पर करते हैं । ,गावि की यात्रा चाय के बागानों के बीच से शुरु होती है । ,"मुण्डक्कयम , कुट्टिक्कानम , पीरुमेडु आदि स्थानों को पार करते हुए वण्डिप्पेरियार से गावि को जाया जाता है ।" ,गावि पहुँचने पर ग्रीन मैनशन नामक इको लॉज में ठहरा जा सकता है । ,यदि आप पेड़ों के पास तम्बू लगाकर या फिर पेड़ पर बने घरों में रहना चाहें तो यह भी संभव है । ,इको लॉज के पास गावि सरोवर है । ,यहाँ बोटिंग की सुविधा है । ,"सरोवर के चारो तरफ वन , घास के मैदान , पहाडियाँ , घाटियाँ , इलायची के बागान , पेड़ - पौधे आदि दिखाई देते हैं ।" pl,"नीलगिरि गाय , लघु पुच्छ वानर आदि पशुओं को बहुत ही निकट से देखा जा सकता है ।" ,"यहाँ मलमुष़क्कि ( वह चिड़िया जिसकी आवाज़ पहाड़ी में गूँजती है ) , चातक , कठफोडवा , नील कंठ आदि कुल मिलाकर पक्षियों की 260 प्रजातियाँ रहती हैं ।" ,गावि से निकल कर आगे जाया जा सकता है । pl,"कोल्लूर , गावि घास के बगीचों , कोच्चु पम्पा , पच्चक्कानम आदि स्थानों की यात्रा करके रात में निकलने वाले जीव जन्तुओं को भी देखा जा सकता है ।" ,"गावि ट्री हाउस , और तम्बू आदि में रहते हुए वन जीवन के रसास्वादन का अवसर भी मिलता है ।" ,गावि वण्डिप्पेरियार से 28 किमी. और तेक्कडि से 46 किमी. है । ,इक्को प्वाइंट साहसी पर्यटन एवं ट्रेकिंग के लिए बहुत ही उपयुक्त स्थान है । ,मुन्नार से टोप स्टेशन को जाने के रास्ते में इक्को प्वाइंट पड़ता है । ,"इक्को प्वाइंट का क्षेत्र मांकुन्नु , कोडियत्तूरमला , तोणिप्पारा आदि पहाड़ियों से घिरा हुआ है तथा ट्रेकिंग के लिए उपयुक्त है ।" ,इलवीष़ापुंचिरा कांजार के निकट है । ,कोट्टयम जिला के पालाय से कांजार जाना आसान है । ,कांजार में 1500 मीटर की ऊँचाई से घोर गर्जना के साथ गिरते जल से एक मनोहारी जलप्रपात बनता है । ,कांजार जलप्रपात पूरे वर्ष जलयुक्त रहता है । ,कांजार ट्रेकिंग के लिए उपयुक्त है । ,कांजार में पर्याप्त मात्रा में जड़ी - बूटियाँ प्राप्त होती हैं । sg,"जलप्रपात , ऊँची - नींची पहाड़ियों से युक्त आट्टुकल मनोरम दृश्य उपस्थित करता है ।" ,अगर पूरा गोवा कम से कम समय और पैसे में घूमना चाहते हैं तो वहाँ टूर करवाने वाली बसों की सेवा लें । ,कांजार मुन्नार और पल्लिवासल के बीच में है । ,केरल में चन्दन वृक्षों का नैसर्गिक स्थान है मरायूर । ,"मरायूर के दर्शनीय स्थान हैं वन विभाग की चन्दन फैक्टरी , प्रस्तर युगीन चित्रों से सज्जित गुफाएँ , एक हेक्टेयर ज़मीन पर फैला हुआ छायादार बरगद का पेड़ आदि ।" ,""" तूवानम जलप्रपात , राजीव गांधी राष्ट्रीय उद्यान आदि मरायूर के निकट हैं । """ ,मरायूर का पुरातात्त्विक प्राधान्य भी कम नहीं । ,यहाँ प्रस्तर - युगीन गुफाएँ और अनेक प्रचीन कब्रें खोद कर निकाली गई है । ,माट्टुप्पेट्टि के दर्शनीय स्थानों में एक ' इन्डो _ स्विस डेयरी फार्म ' है । sg,माट्टुप्पेट्टि का ' इन्डो _ स्विस डेयरी फार्म ' समुद्र तल से 1700 मीटर की ऊँचाई पर बनाया गया है । ,' इन्डो - स्विस डेयरी फार्म ' में 11 आधुनिक गोशालाएँ हैं । pl,इन 11 आधुनिक गोशालाओं में से केवल तीन ’ गोशालाएँ ’ पर्यटकों के लिए खोली गई हैं । ,"यहाँ के दूसरे दृश्य हैं माट्टुप्पेट्टि बाँध , सरोवर , कुण्डला चाय बागान , कुण्डला सरोवर आदि ।" ,डी. टी. पी. सी. ने इस सरोवर में बोट यात्रा की व्यवस्था की है । ,पल्लिवासल जल - विद्युत योजना का केन्द्र चित्रपुरम माट्टुप्पेट्टि के समीप है । ,भारत के प्रसिद्ध हिल स्टेशनों में एक है मुन्नार । ,तन - मन को आनंद से सराबोर करने वाली मुन्नार की प्राकृतिक - सुषमा अनिर्वचनीय है । ,"मुद्रप्पुष़ा , नल्लतण्णि , कुण्डला आदि नदियों के संगम स्थान पर स्थित पहाड़ियों के कारण मुन्नार में अनुपम हरितिमा के दर्शन होते हैं ।" ,मुन्नार समुद्रतल से 1600 मीटर की ऊँचाई पर स्थित पहाड़ी इलाका है । ,मुन्नार भारत के महत्वपूर्ण ग्रीष्म आवासों में एक था । ,मुन्नार में ब्रिटिश शासन काल में गोरे रहा करते थे । pl,ब्रिटिश बागान मालिकों ने ही मुन्नार में चाय बागान लगवाए थे । ,"विशिष्ट नाज़ुक अस्थि - भंग कशेरुकी स्तंभ , पसली , कूल्हे और कलाई में होते हैं ।" ,"मेरूदंड अवसाद ( "" संपीड़न फ़्रैक्चर "" ) के लक्षण हैं , अचानक पीठ दर्द , अक्सर तंत्रिका मूल दर्द ( तंत्रिका संपीड़न के कारण रह - रह कर उठने वाली तीव्र पीड़ा ) के साथ और विरल ही मेरूदंड संपीड़न या पुच्छीय अश्वग्रंथि सिंड्रोम के साथ , एकाधिक कशेरुकी अस्थि - भंग से भंगिमा में झुकाव , ऊंचाई में कमी , गतिशीलता में परिणामी कमी के कारण दीर्घकालिक दर्द होता है ।" ,लंबी हड्डियों के अस्थि - भंग गतिशीलता पर तीव्र क्षति पहुंचाते हैं और शल्य - चिकित्सा की आवश्यकता हो सकती है । ,"विशेषतः कूल्हे के फ़्रैक्चर के लिए आम तौर पर तुरंत शल्य - चिकित्सा की ज़रूरत है , क्योंकि कूल्हे के अस्थि - भंग के साथ गहरी नस घनास्रता और फुप्फुसीय वाहिकारोध और वर्धित मौत जैसे कई गंभीर जोखिम जुड़े हुए हैं ।" ,"बढ़ती उम्र से जुड़े गिरने के जोखिम में कलाई , रीढ़ और कूल्हे की हड्डी टूट सकती है ।" ,"गिरने का ख़तरा , क्रमशः , किसी भी कारण से दुर्बल नज़रें ( जैसे मोतियाबिंद ) , संतुलन विकार , गतिशीलता विकार ( उदा . पार्किंसंस रोग ) , मनोभ्रंश , और सार्कोपीनिया ( आयु - संबंधी कंकाल की मांसपेशी के नुक्सान ) से बढ़ जाता है ।" ,निपात ( चेतन या अचेतन अवस्था में भंगिमा तान का क्षणिक नुक्सान ) उल्लेखनीय तौर पर गिरने के जोखिम की ओर ले जाता है । ,"बेहोशी के कारण कई गुना हैं , पर इनमें ह्रदय - संबंधी अतालता ( अनियमित दिल की धड़कन ) , तंत्रिका - हृद संबंधी बेहोशी , ऑर्थोस्टेटिक अल्प रक्त - चाप ( खड़े होने पर रक्त - दाब में असामान्य कमी ) और दौरा शामिल हो सकते हैं ।" ,आवासीय परिवेश में बाधाओं और ढीली कालीनों को हटाया जाने से गिरना काफी कम हो सकता है । ,"जो पहले भी गिर चुके हों और जिनकी चाल या संतुलन अव्यवस्थित हो , उन्हें सबसे ज्यादा गिरने का ख़तरा है ।" pl,ऑस्टियोपोरोटिक फ़्रैक्चर के लिए जोखिम कारकों को ग़ैर - परिवर्तनीय और ( संभाव्य ) परिवर्तनीय के बीच विभाजित किया जा सकता है । ,"इसके अतिरिक्त , ऐसे विशिष्ट रोग तथा विकार मौजूद हैं , जिनमें ऑस्टियोपोरोसिस एक स्वीकृत समस्या है ।" ,"दवा का प्रयोग सैद्धांतिक रूप से परिवर्तनीय है , हालांकि कई मामलों में ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को बढ़ाने वाली दवाओं का उपयोग अपरिहार्य है ।" ,ऑस्टियोपोरोसिस के लिए सबसे महत्वपूर्ण जोखिम कारक है उन्नत उम्र ( पुरुष और महिला दोनों में ) और महिला लिंग । ,"रजोनिवृत्ति के बाद एस्ट्रोजन की कमी अस्थि खनिज घनत्व की तेजी से कमी के साथ सह - संबद्ध है , जबकि पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी का तुलनात्मक ( पर कम स्पष्ट ) प्रभाव पड़ता है ।" ,"हालांकि ऑस्टियोपोरोसिस सभी जातीय समूहों के लोगों में पाया जाता है , यूरोपीय या एशियाई मूल के लोग ऑस्टियोपोरोसिस के प्रति पहले से ही प्रवृत्त हैं ।" ,"जिन लोगों का पारिवारिक इतिहास अस्थि - भंग या ऑस्टियोपोरोसिस का है , उन्हें अधिक जोखिम है ।" ,"अस्थि - भंग और न्यून अस्थि खनिज घनत्व की वंशगतता 25 से लेकर 80 प्रतिशत तक विस्तार सहित , अपेक्षाकृत उच्च है ।" ,ऑस्टियोपोरोसिस के विकास से जुड़े कम से कम 30 जीन मौजूद हैं । ,श्वेत महिलाओं के लिए कॉलस अस्थि - भंग के संपोषण का जीवन - भर का जोखिम लगभग 16 % है । ,"70 वर्ष की उम्र तक पहुंचते - पहुंचते , 20 % महिलाओं को कम से कम एक कलाई फ्रैक्चर होता ही है ।" ,"पसलियों का नाज़ुक फ़्रैक्चर , पुरुषों में पैंतीस साल की युवा उम्र से ही आम है ।" ,"अक्सर इन्हें हड्डियों की कमज़ोरी के संकेत के रूप में अनदेखा कर दिया जाता है , क्योंकि बहुधा ये लोग शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हैं और किसी शारीरिक गतिविधि के दौरान इन्हें फ्रैक्चर होता है ।" ,वाटर स्कीइंग या जेट स्कीइंग के दौरान फ़्रैक्चर एक उदाहरण हो सकता है । ,"तथापि , व्यक्ति के टेस्टोस्टेरोन स्तर के एक त्वरित परीक्षण से फ्रैक्चर के निदान के बाद , आसानी से प्रकट हो जाएगा कि क्या उस व्यक्ति को जोखिम हो सकता है ।" ,हड्डियों की कमजोरी को रोकने के तरीक़ों में जीवन - शैली बदलाव भी शामिल है । ,"लेकिन , रोकथाम के लिए दवाइयों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है ।" ,"एक अलग अवधारणा के रूप में ऑस्टियोपोरोसिस ऑरथीसिस उपलब्ध है , जो रीढ़ के अस्थि - भंग को रोकने और मांसपेशियों के निर्माण में मदद देता है ।" ,गिरने से रोकथाम ऑस्टियोपोरोसिस जटिलताओं को रोकने में सहायक हो सकता है । ,"ऑस्टियोपोरोसिस का जीवन - शैली निवारण , संभावित परिवर्तनीय जोखिम कारकों के कई पहलुओं से उलटाव द्वारा संभव है ।" ,"चूंकि धूम्रपान और असुरक्षित शराब सेवन को हड्डियों की कमज़ोरी से जोड़ा गया है , सामान्यतः ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम के लिए धूम्रपान बंद करने और संयमित शराब - सेवन की सिफारिश की जाती है ।" ,ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम के लिए किशोरावस्था के दौरान व्यायाम और उचित आहार के माध्यम से उच्च स्तरीय अस्थि - पिंड हासिल करना महत्वपूर्ण है । sg,"बाक़ी जीवन भर सही व्यायाम और पोषण , अस्थि क्षय को टालता है ।" ,"प्रतिदिन 1500 mg कैल्शियम के साथ , सप्ताह में तीन बार टहलने , घूमने , या 70 - 90 % अधिकतम प्रयास पर सीढ़ी चढ़ने से 9 महीनों में 5 % द्वारा कटिपरक ( निचली ) रीढ़ के अस्थि घनत्व में वृद्धि हो सकती है ।" ,"पहले से ही ऑस्टिपीनिया या हड्डियों की कमज़ोरी के साथ निदान वाले व्यक्तियों को चाहिए कि अपने चिकित्सक से व्यायाम कार्यक्रम की चर्चा करें , ताकि फ़्रैक्चर से बच सकें ।" ,उचित पोषण में पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन D वाला आहार शामिल है । ,ऑस्टियोपोरोसिस के प्रति जोखिम वाले मरीज़ों का ( उदा. स्टेरॉयड का उपयोग ) आम तौर पर विटामिन D और कैल्शियम पूरक तथा बिसफ़ॉस्फ़ोनेट के साथ उपचार किया जाता है । ,"गुर्दे की बीमारी में , विटामिन D के अधिक सक्रिय रूप जैसे पैराकाल्सिटॉल या ( विटामिन D के मुख्य जैविक सक्रिय रूप ) 1,25 - डीहाइड्रॉक्सीकोलेकैलसिफ़ेरॉल या कैल्सिट्राइऑल का प्रयोग किया जाता है , क्योंकि गुर्दे पर्याप्त मात्रा में विटामिन D में संग्रहित रूप में स्थित कैल्सीडाइऑल ( 25 हाइड्रॉक्सीकोलेकैलसिफ़ेरॉल ) से कैल्सीट्राइऑल उत्पन्न नहीं कर सकते ।" ,"उच्च प्रोटीन आहार का सेवन , मूत्र में कैल्शियम उत्सर्जन बढ़ाता है और इसे अनुसंधान अध्ययनों में अस्थि - भंग के वर्धित जोखिम से जोड़ा गया है ।" ,"अन्य अन्वेषणों से पता चला है कि कैल्शियम अवशोषण के लिए प्रोटीन आवश्यक है , लेकिन अत्यधिक प्रोटीन की खपत , इस प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करती है ।" ,हड्डियों की कमजोरी के निवारण और उपचार के लिए आहार में प्रोटीन पर कोई हस्तक्षेप करने वाले परीक्षण नहीं किए गए हैं । sg,"इलाज के तौर पर , बिसफ़ॉस्फ़ोनेट अत्यधिक जोखिम वाले मामलों में इस्तेमाल किया जा सकता है ।" ,ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम के लिए निर्धारित अन्य दवाओं में एक चयनात्मक एस्ट्रोजन रिसेप्टर मॉड्युलेटर ( SERM ) रेलॉक्सिफ़ीन शामिल है । ,"ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम के लिए एस्ट्रोजेन प्रतिस्थापन चिकित्सा एक अच्छा इलाज है , लेकिन इस समय , उसकी सिफ़ारिश नहीं की जाती है , जब तक कि उसके उपयोग के लिए अन्य संकेत उपलब्ध ना हों ।" ,"रजोनिवृत्ति के बाद पहले दशक में महिलाओं के लिए एस्ट्रोजन की सिफ़ारिश की जानी चाहिए या नहीं , इस संबंध में अनिश्चितता और विवाद जारी है ।" ,"अधोयौनग्रंथि वाले पुरुष में टेस्टोस्टेरोन , अस्थि की मात्रा और गुणवत्ता में सुधार करता दिखाई देता है , लेकिन यथा 2008 , अस्थि - भंग या सामान्य टेस्टोस्टेरोन स्तर वाले पुरुषों पर इनके प्रभाव का कोई अध्ययन नहीं किया गया है ।" ,"उम्र - संबंधी अस्थि - घनत्व और फ़्रैक्चर के खतरे में कटौती के बीच संबंध , कम से कम एस्टले कूपर से जुड़ा है और शब्द ' ऑस्टियोपोरोसिस ' तथा उसके रोगात्मक स्वरूप की पहचान का श्रेय आम तौर पर फ्रेंच रोगविज्ञानी जीन लॉबस्टीन को दिया जाता है ।" ,अमेरिकी एंडोक्राइनोलॉजिस्ट फुलर अलब्राइट ने ऑस्टियोपोरोसिस को रजोनिवृतोत्तर दशा से जोड़ा । ,हड्डियों की कमज़ोरी के उपचार में क्रांतिकारी परिवर्तन ले आने वाले बिसफ़ॉस्फ़ोनेट की खोज 1960 दशक में हुई । ,"1986 में स्थापित राष्ट्रीय ऑस्टियोपोरोसिस सोसाइटी , हड्डियों की कमजोरी के निदान , निवारण और उपचार में सुधार के लिए समर्पित यूनाइटेड किंगडम का धर्मार्थ संस्थान है ।" ,"राष्ट्रीय ऑस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन ( संयुक्त राज्य अमेरिका के वाशिंगटन D.C. में मुख्यालय ) , ऑस्टियोपोरोसिस और संबंधित फ़्रैक्चरों का निवारण , आजीवन अस्थि - स्वास्थ्य को बढ़ावा , ऑस्टियोपोरोसिस से प्रभावित लोगों के जीवन - सुधार में मदद देने और कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता , समर्थन , सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी व्यावसायिक शिक्षा और अनुसंधान के लिए प्रयासरत है ।" ,"इंटरनेशनल ऑस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन ( IOF ) ( स्विट्जरलैंड के नैऑन में मुख्यालय ) मरीज़ , चिकित्सा और अनुसंधान सोसाइटियां , वैज्ञानिक , स्वास्थ्य - संरक्षण पेशेवर और अस्थि - स्वास्थ्य से संबद्ध अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के एक वैश्विक गठबंधन के रूप में कार्यरत है ।" ,"ऑर्थोपीडिक रिसर्च सोसाइटी ( संयुक्त राज्य अमेरिका के रोसमॉन्ट , IL में मुख्यालय ) एक अनुसंधान और व्यावसायिक विकास से जुड़ी सोसाइटी है , जो कई वर्षों से ऑस्टियोपोरोसिस अनुसंधान , उपचार और रोकथाम पर जोर दे रही है ।" ,अगर वे ठीक से दवा ले रहें हैं और दवा का अवशोषण भी हो रहा है तो ऐसी सम्भावना होती है कि उनका कोई और निदान किया जाना चाहिए ( सम्भवतया टीबी के निदान के अलावा कोई और रोग ) । ,इन रोगियों का निदान बहुत ध्यानपूर्वक किया जाना चाहिए और टीबी कल्चर और संवेदनशीलता परीक्षण के नमूनों का अध्ययन भली प्रकार से किया जाना चाहिए । ,"वे रोगी पहले कुछ बेहतर हो जाते हैं , उसके बाद उनकी तबीयत फिर से बिगड़ने लगती है , उनसे उपचार के अनुपालन की निगरानी करने के लिए पूछताछ की जानी चाहिए ।" ,"अगर अनुपालन की पुष्टि हो जाती है , तो प्रतिरोधी टीबी के लिए उनकी जांच की जानी चाहिए ( MDR - टीबी सहित ) ।" ,चाहे उपचार शुरू करने से पहले सूक्ष्म जैविकी के लिए पहले से नमूना लिया जा चुका हो । ,दवा के पर्चे में या दवा लेने में किसी प्रकार की गलती इस बात का कारण बन सकती है कि रोगी उपचार के लिए प्रतिक्रिया प्रदर्शित ना करे । ,प्रतिरक्षा दोष प्रतिक्रिया प्रदर्शित ना करने का एक दुर्लभ कारण है । ,"रोगियों के एक छोटे से अनुपात में , उपचार विफलता चरम जैविक भिन्नता का एक प्रतिबिम्ब और इसका कोई कारण नहीं पाया जाता है ।" ,"रोगियों के एक अनुपात में , उपचार के लिए सभी मेडिकल और शल्य विकल्प समाप्त हो जाते हैं और जब ऐसी स्थिति आती है , तो रोगी और उसके परिवार को सूचित कर देना चाहिए कि रोगी के टीबी के कारण मर जाने की सम्भावना है ।" ,"ऐसे समय में रोगी को मनोवैज्ञानिक समर्थन देना चाहिए , उसकी पोषण आवश्यकताओं और श्वसन के लक्षणों पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए , ताकि उसकी मृत्यु सम्मानजनक हो ।" ,एक रोगी को तब रिलेप्स की श्रेणी में रखा जाता है जब वह उपचार करने पर ठीक हो जाता है लेकिन उपचार रोकने के बाद फिर से बीमार हो जाता है । ,"वे रोगी जिनमें उपचार करने पर क्षणिक सुधार होता है , या जो उपचार के लिए कभी भी प्रतिक्रिया प्रदर्शित नहीं करते ।" ,"उन्हें विफल उपचार की श्रेणी में रखा जाता है , जिसका विवरण ऊपर दिया गया है ।" ,"रिलेप्स की दर कम होती है जो उपचार से सम्बन्धित होती है , ऐसा तब भी हो सकता है जब रोगी ने 100 प्रतिशत अनुपालन के साथ दवाओं को ठीक प्रकार से लिया है ।" ,( 2HREZ / 4HR के मानक उपचार में रिलेप्स की दर 2 से 3 प्रतिशत होती है ) । ,अधिकांश बार रिलेप्स उपचार के पूरा होने के बाद 6 माह के भीतर ही हो जाता है । ,अक्सर उन रोगियों में रिलेप्स की सम्भावना अधिक होती है जो अपनी दवाओं को अनियमित रूप से लेते हैं । ,"रिलेप्स करने वाले रोगियों में प्रतिरोध की सम्भावना अधिक होती है और इनमें नमूने लेने के सभी प्रयास किये जाने चाहिए , ताकि संवेदनशीलता की जांच के लिए इनका कल्चर किया जा सके ।" ,"अधिकांश रोगी जो पूरी तरह संवेदी उपभेद के साथ रिलेप्स करते हैं उनमें यह सम्भव है कि ऐसे रोगी में रिलेप्स नहीं हुआ होता , लेकिन इसके बजाय उनमें पुनः संक्रमण हो गया होता है ।" ,ऐसे रोगियों का उपचार पहले की तरह सामान दवाओं से किया जा सकता है । ,( उपचार में और किसी दवा को जोड़ने की और दवाओं की अवधि को और अधिक लम्बा करने की आवश्यकता नहीं होती ) । ,"विश्व स्वास्थ्य संगठन 2SHREZ / 6HRE से उपचार करने की सलाह देता है , जब सूक्ष्मजैविक प्रमाण उपलब्ध ना हो ( अधिकांश देशों में जहां टीबी उच्च स्थानिकमारी वाला रोग है ) ।" ,इस उपचार को पूरी तरह से संवेदनशील टीबी के इष्टतम उपचार के लिए बनाया गया है । ,"( उन रोगियों में सबसे सामान्य खोज जिनमें रिलेप्स हो जाता है ) , साथ ही यह NH - प्रतिरोधी टीबी ( ज्ञात प्रतिरोध का सबसे आम रूप ) की सम्भावना को भी कवर करता है ।" ,"जीवन भर रिलेप्स के जोखिम के कारण , सभी रोगियों को उपचार पूरा होने पर रिलेप्स के लक्षणों की चेतावनी दी जाती है और उन्हें सख्त निर्देश दिए जाते हैं कि अगर उन्हें ऐसे कोई भी लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं ।" ,"जिन क्षेत्रों में टीबी अत्यधिक स्थानिकमारी वाला रोग है , रोगी को बुखार होना असामान्य नहीं है , लेकिन इनमें संक्रमण का कोई स्रोत नहीं पाया जाता ।" ,ऐसी स्थिति में चिकित्सक जांच के बाद सभी बीमारियों को अलग कर देता है और टीबी के उपचार का परीक्षण करता है । ,इसके लिए कम से कम तीन सप्ताह के लिए HEZ से उपचार किया जाता है । ,"उपचार में से RMP और STM को हटा दिया जाता है क्योंकि वे व्यापक स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक हैं , जबकि अन्य तीन पहली पंक्ति की दवाएं केवल माइक्रोबेक्टीरियल संक्रमण का उपचार करती हैं ।" ,उपचार के तीन माह बाद भी बुखार का बने रहना टीबी का एक अच्छा प्रमाण है और इस समय रोगी का टीबी का परम्परागत उपचार ( 2HREZ / 4HR ) शुरू कर देना चाहिए । ,अगर बुखार उपचार के तीन माह बाद ठीक नहीं होता तो यह भी हो सकता है कि रोगी का बुखार किसी और कारण से है । ,"यह दृष्टिकोण इसकी आलोचना के बिना है , इसमें तर्क दिया जाता है कि ऐसे सभी रोगियों को टीबी का उपचार दिया जाना चाहिए ।" sg,1940 के दशक के बाद से शल्य चिकित्सा ने तपेदिक के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । sg,तपेदिक के लिए पहला सफल उपचार शल्य चिकित्सा के द्वारा ही किया गया था । ,वे इस अवलोकन पर आधारित था कि ठीक हो चुके तपेदिक की सभी गुफाएं भर चुकी थीं । ,इसलिए शल्य चिकित्सा में उपचार के लिए खुली गुफाओं को भरने का प्रयास किया जाता है । ,इन सभी प्रक्रियाओं का उपयोग पूर्व एंटीबायोटिक युग में किया गया । ,इसमें एक मिथक है कि शल्य चिकित्सकों का मानना है कि टीबी के जीव को ऑक्सीजन नहीं पहुंचने देनी चाहिए । ,हालांकि यह जाना माना तथ्य है कि यह जीव आवायुवीय परिस्थितियों में जीवित रहता है । ,हालांकि वर्तमान मानकों में इन प्रक्रियाओं को बर्बर माना जाता है । ,"यह याद रखा जाना चाहिए कि यह उपचार रोग के लिए सम्भावी इलाज है , क्योंकि इसमें मृत्यु दर कम से कम उतनी बुरी होती है जितनी कि फुफ्फुस कैंसर में होती है ।" ,इसमें न्युमोथोरेक्स को हमेशा ठीक किया जाता था और इस प्रक्रिया को कुछ सप्ताह के बाद बार बार दोहराया जाता था । ,"पंगु बनाया जा चुका डायाफ्राम इसके बाद ऊपर उठ जाता था और उस ओर का फुफ्फुस नष्ट हो जाता था , जिससे गुफा बंद हो जाती थी ।" ,छह से आठ पसलियों को तोड़ कर वक्ष गुहा में धकेल दिया जाता था ताकि फुफ्फुस के निचले हिस्से को नष्ट किया जा सके । ,"यह एक बर्बर शल्य चिकित्सा थी , लेकिन इसमें प्रक्रिया को फिर से दोहराने की आवश्यकता नहीं होती थी ।" ,"1940 और 1950 के दशक में संक्रमित फुफ्फुस को पुनः ठीक करना असंम्भव था , क्योंकि उस समय निश्चेतक विज्ञान इतना उन्नत नहीं हुआ था , जिससे फुफ्फुस की सर्जरी करते समय उसे बेहोश किया जा सके ।" ,"आधुनिक समय में , तपेदिक की शल्य चिकित्सा , कई दवाओं से प्रतिरोधी टीबी के प्रबंधन तक ही सीमित है ।" ,"MDR - टीबी का रोगी जिसका कल्चर कई महीने के उपचार के बाद भी सकारात्मक रहता है , उसमें संक्रमित ऊतक को काटने के लिए लोबेक्टोमी या न्युमोनेक्टोमी का उपयोग किया जाता है ।" ,शल्य चिकित्सा के लिए उपयुक्त समय निर्धारित नहीं है और शल्य चिकित्सा के बाद भी रुग्णता बनी रह सकती है । ,अमेरिका में एक केंद्र है जिसके पास सबसे ज्यादा अनुभव हैं । ,"यह केंद्र डेनवर , कोलोराडो में नेशनल ज्यूइश मेडिकल एंड रिसर्च सेंटर है ।" ,"हरिहरधाम , गिरडीह जिला मुख्यालय से 6 किलोमीटर दक्षिण - पश्चिम के बगोदर प्रखण्ड में स्थित भारत के सबसे बड़े शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है ।" ,पूरे भारतवर्ष से प्रत्येक वर्ष श्रद्धालु हरिहरधाम दर्शन के लिए आते हैं । ,"दुखिया महादेव , जिला मुख्यालय से करीब 5 कि.मी. गिरडीह - धनबाद मार्ग से ब्रांच मार्ग पर 2 कि.मी. पूरब दिशा में अवस्थित आकर्षक व मनोरम शैव तीर्थस्थल है ।" ,दुखिया महादेव में विभिन्न जिलों से श्रद्धालु दर्शन - पूजन को आते हैं । ,साहेबगंज जिले के पर्यटन स्थल - ,झारखण्ड की राजधानी से सबसे अधिक दूरी पर अवस्थित साहेबगंज जिला है जो गंगा के किनारे बसा है । ,साहेबगंज जिले में वनस्पति जीवाश्मों के अवशेष प्रचुरता में है जिन्हें सुरक्षित रखा गया है । sg,इन सभी जीवाश्मों को एक जगह संरक्षित कर एक फॉसिल पार्क बनाया जायेगा जिसमें इन जीवाश्मों को प्राकृतिक अवस्था में संग्रहालय में संग्रहित किया जायेगा । ,तीर्थयात्रियों के लिए साहेबगंज के समीप अनेक मंदिर हैं । ,"साहेबगंज के बरहैत में शिव मंदिर , बरहरवा रेलवे स्टेशन के समीप विंध्यवासिनी मंदिर , मिर्जापुर गाँव में शुक्रवासिनी मंदिर साथ ही जनजातियों व दूसरे वर्ग के लोगों का एक पवित्र स्थल राक्क्षीस्थान हैं ।" ,यहाँ के कन्हैयास्थान में चैतन्य महाप्रभु के पदचिह्न संरक्षित हैं । ,झारखण्ड और बिहार का इकलौता पक्षी अभयारण्य - ,साहेबगंज जिले के उधवा प्रखण्ड के अन्तर्गत 1998 में बिहार सरकार के द्वारा घोषित झील पंछी अभ्यारण्य पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है । ,"पंछी अभ्यारण्य झील पर ठंड के मौसम नवम्बर , दिसम्बर माह में विदेशी पक्षियों का आगमन होता है ।" ,वर्तमान में पूरे बिहार व झारखण्ड में यही एक पक्षी अभ्यारण्य झील है । ,पंछी अभ्यारण्य झील 565 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली थी । ,लेकिन वर्तमान में पंछी अभ्यारण्य झील मात्र 200 हेक्टेयर क्षेत्र में सिमट गई है । ,जामी मस्जिद है आकर्षण का केन्द्र - ,झारखण्ड का एकमात्र जिला साहेबगंज है जो गंगा के किनारे बसा है । ,"साहेबगंज जिले के ऐतिहासिक , दर्शनीय व आध्यात्मिक स्थलों में एक राजमहल जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर पूरब में अवस्थित है ।" ,राजमहल जिला को 1592 से 1602 तक एवं 1639 - 1660 तक बंगाल की राजधानी रहने का गौरव प्राप्त है । ,"राजमहल की एक तरफ अगम्य राजमहल की पहाड़ी है तो दूसरी तरफ गंगा , इसलिए सुरक्षा के दृष्टिकोण से राजा मान सिंह ने सूबा बंगाल की राजधानी गौड़ से हटाकर राजमहल में अवस्थित किया था ।" ,राजमहल के ऐतिहासिक दर्शनीय व आध्यात्मिक स्थलों में एक जामी मस्जिद भी है । ,"मंगलहाट राजमहल जनपद स्थित जामी मस्जिद 5 एकड़ के विस्तॄत भूभाग में फैला हुआ है , जिसमें 5 गुम्बद और 5 - 5 मीनार हैं लेकिन उत्तर दिशा की मीनार ध्वस्त हो चुकी है ।" ,"राजमहल जनपद के महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थलों में - संगदालान ( पत्थर का विशाल बरामदा ) , अकबरी मस्जिद , मैना बीबी की कब्र , मीरा की कब्र आदि प्रसिद्ध हैं ।" ,उधवा गाँव गंगा के किनारे स्थित है जो राजमहल से 10 कि.मी. दक्षिण - पूर्व में है । ,उधवा गाँव ऐतिहासिक महत्व का है । ,राजमहल शहर से 13 कि.मी. उत्तर - पश्चिम दिशा में गंगा के तट पर कन्हैया स्थान मंदिर स्थित है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति स्थापित है । ,कहा जाता है चैतन्य महाप्रभु बंगाल से लौटते समय कन्हैया स्थान मंदिर में ठहरे थे तथा उन्होंने श्रीकृष्ण का साक्षात दर्शन किया था । sg,गंगा तट के मनोरम दृश्यावलोकन का आनंद भक्तिभाव में मिश्रित होकर कुछ अलौकिक अनुभूति प्रदान करता है । ,संकरी गली नामक रेलवे स्टेशन से 3 कि.मी. उत्तर में रामपुर गाँव स्थित है । ,रामपुर गाँव में 8 फीट ऊँचे टीले पर एक मुस्लिम संत की कब्र है । ,ऐसा कहा जाता है कि इस ऊँचे टीले के भीतर शिव - पार्वती के मंदिर का एक भग्नावशेष है । ,इस कब्र के प्रवेश द्वार में ईंटों का द्वार तथा पत्थर के दरवाजे की आकृति उस शिव मंदिर का आभास कराती है । ,शिव गद्दी स्थान राजमहल अनुमंडल में ही बढ़ैत से 8 कि.मी. उत्तर में स्थित है और तीन तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है । ,मंगलहाट गाँव राजमहल से 10 कि.मी. पश्चिम में स्थित है और अपनी विरासतों का धनी है । ,मंगलहाट गाँव में मानसिंह द्वारा निर्मित एक मंदिर और एक मस्जिद है । ,मंदिर छोटा है जबकि मस्जिद बड़ी है । ,संकरी गली नामक एक गाँव पूर्वी रेलवे की लूप लाइन पर स्थित है । ,प्राचीन काल में यह गाँव सामरिक महत्व का था । ,जैसा कि नाम स्पष्ट करता है यह स्थान राजमहल पहाड़ी और गंगा नदी के बीच एक संकरी समतल भूमि के रूप में बंगाल के द्वार के रूप में स्थित है । ,यह स्थान अनेक भयानक युद्धों का साक्षी भी है । ,धनबाद जिले के पर्यटन स्थल - ,कोल सिटी के नाम से प्रसिद्ध धनबाद को देश की कोयला राजधानी कहा जाता है । ,धनबाद की गणना विश्व के सर्वाधिक तीव्र गति से विकसित हो रहे 100 शहरों में होती है । ,"कोयला खदानें , उच्चस्तरीय तकनीक व रिसर्च संस्थान , प्राकृतिक नजारे धनबाद औद्योगिक शहर के आकर्षण हैं ।" ,धनबाद के पास प्रकृति प्रदत्त खनिज संसाधनों की प्रचुरता है । ,धनबाद के ज्यादातर उद्योग कोयला सफाई एवं कोक निर्माण पर आधारित हैं । ,धनबाद में ही विश्व प्रसिद्ध इंडियन स्कूल ऑफ माइंस अवस्थित है । sg,प्राकृतिक रूप से निर्मित तोपचांची झील अभ्यारण्य से घिरा हुआ है । pl,कई विकास खण्डों में ग्रामीण औद्योगिक बस्तियाँ बनाई गई हैं । ,"इनके फलस्वरुप कृषि श्रमिकों को रोजगार के अधिक अवसर मिल जाते हैं , और खेती पर निर्भरता कम हो जाती है ।" ,"बुनियादी साख समितियाँ सन् 1954 में सम्पूर्ण ग्रामीण साख के मात्र 3 प्रतिशत भाग को ही पूरा कर रही थीं , इसके पश्चात् सन् 1969 तक सहकारी समितियों की ग्रामीण साख में भागीदारी बढ़कर 25 % हो गयी और 1985 तक यह 40 प्रतिशत तक हो गयी ।" ,स्पष्‍ट है कि अभी भी महाजनों का ग्रामीण साख व्यवस्था में महत्व काफी हद तक बना हुआ है । ,प्राथमिक कृषि साख समितियों के अधिकांश दोषों का कारण है । ,अकुशल प्रबन्ध समितियों के प्रबन्धक मंडल को सहकारिता के सिद्धान्तों का ज्ञान ही नहीं होता । ,निहित स्वार्थों के प्रभुत्व पर कोई अंकुश न होने से यह शोषक वर्ग पनपता जाता है और अपना प्रभाव जमाए रहता है । ,समितियों के निरीक्षण और अंकेक्षण के कार्य पर्याप्‍त व संतोषजनक नहीं होते । ,कमजोर वर्ग के किसान प्रायः उपेक्षित ही रहे हैं । ,समितियों के सदस्यों में मितव्ययिता तथा बचत की भावना का विकास नहीं हुआ है । sg,"ऋणों का उपयोग उत्पादक कार्यों में बहुत कम किया जाता है , जो ऋणों पर निगरानी न रखने का दुष्परिणाम है ।" ,साख संस्थाओं में समन्वय का अभाव है । ,"सरकारी संस्थाओं और व्यापारिक बैंकों की कार्यप्रणाली में प्रतिद्वन्द्विता की आंशका बढ़ती जा रही है , जबकि दोनों संस्थाओं में तालमेल स्थापित रहना नितान्त आवश्यक है ।" ,समितियों का विकास विभिन्न राज्यों में असमान रुप से हुआ है । ,प्रदत्त ऋण अपर्याप्‍त है । ,ऋण आवश्यकताओं को देखते हुये ऋण राशि न्यूनतम साख आवश्यकताओं से भी कम है । ,अतः शोषक महाजनों पर कृषकों की निर्भरता बनी हुई है । ,अधिकांश समितियों द्वारा अपनायी गयी ऋण नीति दूषित है । ,समितियों ने न तो फसल ऋण प्रणाली को अपनाया है और न ऋण नीति को उदार और व्यावहारिक बनाया है । ,भूमि की जमानत पर ऋण देने का प्रचलन अपनी जड़ें जमाये है । ,ऋण वितरण में अनाश्यक विलम्ब होता है । ,कृषि साख और विपणन कार्य प्रणाली में समन्वय का अभाव है । ,केन्द्रीय तथा राज्य सहकारी बैंकों का पुनर्गठन तेजी से किया जाये तथा कमजोर समितियों को समाप्‍त कर दिया जाये । ,समितियाँ निक्षेपों को गतिशील बनाने पर अधिक बल दें । ,ऋण प्रणाली में सुधार किया जाये । ,ऋण वसूली उपज के रुप में करने की व्यवस्था रहे तथा फसल प्रणाली अपनायी जाये । ,"ऋणों का उपयोग उत्पादक कार्यों में किया जाये , इस पर निगरानी रखी जाये ।" pl,सहकारी समितियों के निजी कोषों को मजबूत बनाया जाये । ,साख को उत्पादन और विपणन कार्यों से जोड़ा जाये । ,समितियों में कार्यकर्ता प्रबन्धक मण्डल आदि को भली - भाँति शिक्षित व प्रशिक्षित किया जाये । sg,सहकारी साख समितियों और व्यापारिक बैंकों में पारस्परिक समन्वय स्थापित किया जाये । ,सुरक्षित कोष में पर्याप्‍त वृद्धि की तीव्र आवश्यकता पर बल दिया जाये । ,ये समितियाँ शनैः शनैः ग्रामीण बैंकों के रुप में विकसित की जायें ताकि वे कृषकों और गैर - कृषकों दोनों को विभिन्न प्रकार की बैंकिंग सेवायें उपलब्ध कराने लगें । ,अवधिपार ऋण को कम करने के लिये निरन्तर गंभीर प्रयास करने होंगे । ,इसके लिये उत्पादक ऋणों तथा सीख को विपणन से जोड़ने और उत्पाद के रूप में ऋण वसूली की व्यवस्था करना प्रभावी उपाय हो सकता है । ,महाजनों तथा अन्य निहित स्वार्थी तत्वों को समितियों का सदस्य किसी भी दशा में न बनने दिया जाये तथा विवेकशील नेतृत्व को समुचित अवसर दिये जायें । ,छोटे व दुर्बल वर्ग के कृषक सदस्यों को प्रोत्साहित किया जाये ताकि उन्हें बेहतर ढंग से सेवा प्रदान की जा सके । ,"किसानों को नवीन और उत्तम प्रकार के साधन प्रदान किये जाएं , उपभोक्‍ता सामग्रियों की सस्ती दर पर नियमित आपूर्ति की जाये ।" ,"ऋण प्रणाली सरल , उपयोगी तथा कम से कम समय में चालू की जा सकने वाली हो ।" ,अक्टूबर 1985 में सहकारी संस्थाओं और कृषि ऋण की समस्याओं पर विचार विमर्श करने के लिये केन्द्रीय कृषि मन्त्री की अध्यक्षता में एक सम्मेलन हुआ था । ,"इसमें विशेष कार्यक्रमों तथा कमजोर वर्गों के लिये ऋण प्रबन्ध , सहकारी संस्थाओं में ऋण सम्बन्धी अपराधों पर विचार - विमर्श किया गया ।" ,"महत्वपूर्ण संकल्पों में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को सुदृढ़ बनाने , जानबूझकर ऋण न लौटाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही करने और सहकारी संस्थाओं में आंकड़ों के कम्प्यूटराइजेशन शामिल थे ।" ,फसल ऋण प्रणाली का मूलभूत उद्देश्य कृषि साख को उत्पादन कार्यों के लिये प्रयोग करना है । ,इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये जिन तीन बातों पर जोर दिया गया था वे हैं । ,1. साख समितियाँ साख के प्रयोग की समुचित जाँच करेंगी । sg,2. जरुरतमन्दों की ऋण वापसी की क्षमता का सही मूल्यांकन करके ही फसल प्रणाली के आधार पर ऋण देंगी । ,3. तथा ऋणों को देय तिथियों पर वसूलने की भरपूर चेष्‍टा करेंगी । ,इस नये कार्यक्रम को खाद्य कृषि समाज विकास तथा सहकारिता मंत्रालय द्वारा सन् 1964 में बनाकर प्रस्तुत किया गया था । ,रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया के परामर्श पर उसे राज्य सरकारों के पास उसी वर्ष भेज दिया गया था । ,उद्देश्य की पूर्ति के लिये यह निर्देश दिया गया कि कृषकों को ऋण उनकी उत्पादन सम्बन्धी जरुरतों को आंकते हुये नकद तथा जिन्स दोनों रूप में दिये जायें । pl,फसल ऋण पद्धति या प्रणाली की प्रमुख विशेषताओं को निम्नलिखित पंक्‍तियों में स्पष्‍ट किया जा सकता है - ,धनबाद शहर के मध्य में देवी दुर्गा का एक मंदिर है जो शक्ति मंदिर के नाम से जाना जाता है । ,प्रतिदिन शक्ति मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन - पूजन के लिए आते हैं । ,सिंदरी धनबाद से 30 कि.मी. दक्षिण लगभग बंगाल की सीमा पर स्थित है जहाँ देश का प्रसिद्ध खाद कारखाना है तथा बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी नामक संस्थान भी है । ,पंचेत धनबाद से 54 कि.मी. दक्षिण - पूर्व तथा चिरकुण्डा से 9 कि.मी. दक्षिण में स्थित है । ,पंचेत एक पहाड़ी भूभाग है जहाँ से होकर दामोदर नदी प्रवाहित होती है । ,दामोदर नदी पर 60 मीटर ऊँचे और 2250 मीटर लंबे बाँध का निर्माण किया गया है जो पंचेत बाँध के नाम से जाना जाता है । ,पंचेत बाँध के जलाशय में 15000 लाख घनमीटर जल एकत्र होता है । ,अपने सुन्दर दृश्य के कारण आकर्षण का केन्द्र बने पंचेत डैम में 12.7 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन होता है । ,पंचेत डैम के जल से लगभग 2.7 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई भी होती है । ,बोकारो जिले के पर्यटन स्थल - ,बोकारो स्टील सिटी को इस्पातनगर भी कहा जाता है । ,पहले बोकारो माराफारी नामक एक गाँव था किन्तु भारत सरकार और रूस के सहयोग से भारतीय इस्पात प्राधिकरण के अन्तर्गत बोकारो इस्पात कारखाने का निर्माण इस स्थान पर किया गया । ,बोकारो इस्पात कारखाने की स्थापना 1964 में की गयी किन्तु दस वर्षों के बाद 1974 से उत्पादन आरंभ किया गया है । ,तेनुघाट डैम बोकारो जिला अन्तर्गत पेटरवार से उत्तर दामोदर नदी पर निर्मित एक बड़ा बाँध है । ,तेनुघाट डैम की ऊँचाई 166 फीट है तथा 30 वर्ग कि.मी. में विस्तृत बाँध की जलराशि अगाध प्रतीत होती है । ,तेनुघाट डैम का पानी 29 कि.मी. लंबी नहर के द्वारा बोकारो इस्पात संयंत्र के उपयोग के लिए प्रयुक्त होता है । ,बोकारो और कोनार नदी के संगम पर स्थित बोकारो थर्मल स्टेशन पश्चिमी बोकारो के नाम से भी जाना जाता है । ,पश्चिमी बोकारो में दामोदर घाटी निगम के द्वारा ताप विद्युत गृह की स्थापना 1953 में की गयी थी । ,इस ताप विद्युत गृह में लगभग 2.25 लाख किलोवाट विद्युत का उत्पादन होता है । ,चतरा जिले के पर्यटन स्थल - ,चतरा जिले के इटाखोरी प्रखंड में भदुली ग्राम है जहाँ माँ भद्रकाली का प्राचीन मंदिर स्थित है । ,"एक ही शिलाखंड में तराशी मूर्ति साढ़े चार फीट ऊँची , ढाई फीट चौड़ी और 30 मन भारी है ।" ,"संभवतः यह मूर्ति पाल काल में ( 5वीं , 6वीं शताब्दी ) स्थापित की गयी हो ।" ,भद्रकाली मंदिर का प्रांगण 196 एकड़ में विस्तृत है जिसमें एक विशाल यज्ञशाला का निर्माण किया गया है । ,"1980 में निर्मित यह यज्ञशाला 52 फीट ऊँची , 70 फीट लंबी और 50 फीट चौड़ी है ।" ,यज्ञशाला के पूरब में एक संग्रहालय है जिसमें मंदिर परिसर के उत्खनन से प्राप्त 418 मूर्तियाँ एवं भग्नावशेष सुरक्षित हैं । ,भद्रकाली मंदिर परिसर में ही कोठेश्वरनाथ स्तूप है जिसके चारों ओर भगवान बुद्ध की मूर्तियाँ अंकित हैं । ,"कोठेश्वरनाथ स्तूप के ऊपर चार इंच लंबा , चौड़ा और गहरा एक गड्डा है जिसमें चमत्कारिक रूप में सदैव तीन इंच पानी बना रहता है ।" ,भद्रकाली मंदिर परिसर में सहस्रलिंगी शिवलिंग भी है जिसमें 1008 छोटे - छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं । ,चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड मुख्यालय से 10 कि.मी. दक्षिण - पश्चिम में कोल्हुआ पहाड़ पर माँ कुलेश्वरी मंदिर स्थित है । ,कोल्हुआ पहाड़ 1575 फीट ऊँचा है । ,पत्थर निर्मित मंदिरों का यह स्थान हिन्दू बौद्ध और जैन धर्म का अनूठा संगम स्थल है । ,माँ कुलेश्वरी देवी दुर्गा का ही एक स्वरूप है । ,जैन विद्वानों का कहना है कि कोल्हुआ पर्वत शिखर पर दसवें तीर्थकार शीतलनाथ जी तथा महापुराण रचयिता आचार्य जिनसेन ने भी अपना साधना स्थल बनाया था । ,कोल्हुआ पर्वत शिखर के कई स्थानों पर बुद्ध की प्रतिमाएँ भी उकेरी हुई दिखाई पड़ती हैं । ,निर्माण शैली के अनुसार से प्रतिमाएँ हर्षवर्द्धन काल की अर्थात सातवीं शताब्दी की होगी । ,माँ कुलेश्वरी देवी के मुख्य मंदिर की लम्बाई - चौड़ाई साढ़े छः फीट तथा ऊँचाई साढ़े चार फीट ही है । ,माँ कुलेश्वरी देवी की मूर्ति काले पत्थर की है जो ढाई फीट ऊँची और सवा फुट चौड़ी है । ,यह चतुर्भुजी मूर्ति दिगम्बरी महिषासुर के मस्तक पर पदारूढ़ आभूषणों से युक्त है । ,कोल्हुआ पर्वत क्षेत्र में एक स्थान पर एक पदचिह्न है जिसे हिन्दु लोग विष्णु का पदचिह्न मानते हैं । ,जैन धर्मावलंबी इसे पार्श्वनाथ का पदचिह्न मानते हैं । ,कोल्हुआ पर्वत चोटी पर 80*40 फीट का एक तालाब भी है जो आश्चर्यजनक है । ,इस तालाब के पास एक दिगम्बरी जैन मंदिर भी है । ,"एक स्थान है नकटी भवानी , जहाँ पत्थर के छिद्र से सतत् जल प्रवाहित होता रहता है ।" ,लोग इसे अर्जुन वाण के नाम से भी जानते हैं । ,"दामोदर घाटी के मोहुण्डी , जिसे महादेव श्रेणी के रूप में जाना जाता है , में नौटंगवा गुफा प्रगैतिहासिक मानव सभ्यता के गवाह के रूप में आज भी उपस्थित हैं ।" ,नौटंगवा गुफा के अंदर चित्रकारी के अद्‌भुत सौन्दर्य से साक्षात्कार होता है । ,"नौटंगवा गुफा के अंदर किसी दीवार पर जानवरों की विभिन्न मुद्राओं की कलाकृतियाँ हैं , तो किसी चित्र में बच्चे के पीछे भागती माँ को दर्शाया गया है ।" ,उत्तरी सतह पर अवस्थित रहम गुफा 19वीं सदी के अंतिम वर्षों में टाना भगतों की शरण स्थली हुआ करती थी । ,"रहम गुफा को लाल हेमेटाइट से सुसज्जित किया गया था , जो आज भी मौजूद है ।" ,कॉटेज चीज के डेढ़ - डेढ़ इंच के टुकड़े काट लें । ,"इन टुकड़ों पर नमक , पीली मिर्च पावडर व अदरक - लहसुन पेस्ट डाल कर पैंतालीस मिनट के लिए रख दें ।" ,ताकि इसमें से अतिरिक्त पानी बाहर निकल आए । ,अब एक बड़ा बाउल लें । ,उसमें पनीर डालें । ,हाथ से मसलें । ,"उसमें भूना बेसन , जीरा , धनिया पावडर , नमक व जावित्री पावडर मिला लें ।" ,गीले पानी में भीगी सौंफ को उसमें मिला दें । ,अब उसमें क्रीम मिला दें । ,इस मिश्रण में कॉटेज चीज के टुकड़े मिला दें और एक - दो घंटे के लिए मेरीनेट होने के लिए रख दें । ,तत्पश्चात इनकी छोटी - छोटी टिकिया बनाकर डीप फ्राई अथवा तवे पर तेल लगाकर दोनों तरफ से कुरकुरी होने तक सेंक लें । ,तत्पश्चात हरी और मीठी चटनी तथा दही मिलाकर गरमा - गरम तिल - पनीर की टिकिया पेश करें । ,सबसे पहले क्रीम को एक बड़े बर्तन में लेकर गाढ़ा होने तक खूब फेंटें । ,अब दही को फेंटें और दोनों को मिला दें । ,अब इसमें उपरोक्त सभी फल तथा चीनी मिला कर फ्रिज में रखकर ठंडा कर लें । ,4 - 5 घंटे बाद फ्रिज से बाहर निकाल कर कोल्ड क्रीमी फ्रूट्स रायता बाउल में भरकर पेश करें । ,सबसे पहले क्रीम को एक बड़े बर्तन में लेकर गाढ़ा होने तक खूब फेंटें । ,अब दही को फेंटें और दोनों को मिला दें । ,अब इसमें उपरोक्त सभी फल तथा चीनी मिला कर फ्रिज में रखकर ठंडा कर लें । ,4 - 5 घंटे बाद फ्रिज से बाहर निकाल कर कोल्ड क्रीमी फ्रूट्स रायता बाउल में भरकर पेश करें । ,सबसे पहले नारियल को फोड़कर पानी निकाल लें । ,"आम , स्ट्रॉबेरी व रसभरी को चीनी के साथ मिक्स करके मिक्सी में चला लें ।" ,अब गिलासों में कुटी हुई बर्फ डालें । ,तैयार मिश्रण बराबरी से डालकर आइसक्रीम स्कूप जमाएं । ,अब नारियल पानी डालकर पुदीने से सजा कर पेश करें । ,गिलास में चम्मच डालना न भूलें । ,फटाफट तैयार होने वाला यह मिक्स ठंडा पेय पीने में बहुत आनंद देगा । ,मक्का आटा छान लें । ,अब मैथी को अच्छी तरह से धो लें । ,"आटे में मैथी , लाल मिर्च पावडर , हरी मिर्च और नमक डालकर आटे को मिला लें ।" ,अब गुनगुने गरम पानी से नरम आटा गूंथें । ,गूंथे हुए आटे से आवश्यतानुसार लोई बनाएं और हाथ की सहायता से थपथपाकर बेल लें । ,अगर ज्यादा जरूरत हो तो बेलन का प्रयोग करें । ,तवा गरम करके रोटी डालें और दोनों तरफ से सेकें । ,"सेंकते समय दोनों तरफ से घी या तेल लगाएं और कुरकुरी होने तक सेंक लें ," ,"तत्पश्चात साग , कढ़ी या चटनी के साथ गरमागरम मैथी - मक्की की मिस्सी रोटी पेश करें ।" ,एक कटोरी में दही लेकर उसे जमकर फेंटें । ,"अब इसमें चिकन करी कट , मक्खन , बारीक कटा लहसुन , हरी मिर्च , टमाटर और स्वादानुसार नमक मिला लें ।" ,इस पूरी सामग्री को एक साथ डालें और 30 मिनट तक मेरीनेट होने के लिए छोड़ दें । ,अब इसे धीमी आंच पर पकाएं और इसमें जरूरत के मुताबिक पानी मिला लें । ,"जब चिकन पक जाए , तो उसमें क्रीम भी मिला दें और 1 - 2 मिनट पकने दें ।" ,"आप चाहें , तो इसमें अपनी पसंद और स्वाद के मुताबिक सीजनिंग भी डाल सकते हैं ।" ,मुर्ग हांडी तैयार है । ,बस हरा धनिया डालकर सजाएं और स्टीम्ड राइस के साथ गर्मागर्म सर्व करें । ,पहले घी डालकर कद्दूकस की हुई लौकी को हल्का - सा भून लें और अलग रख दें । ,"अब कड़ाही में थोड़ा - सा पानी डालें , साथ में चीनी भी डालें और गर्म करने के लिए चढ़ा दें ।" ,"जब चीनी बिल्कुल घुल जाए , तब इसमें लौकी डालकर चलाएं ।" ,"जब पानी बिल्कुल न रहे और चाशनी बनने लगे , तब इसमें खोया या मावा डालें ।" ,साथ में इलायची डालें और अच्छी तरह चलाएं । ,ऊपर से कटे मेवे डालकर गरमा - गरम लौकी का हलवा व्रतधारियों को पेश करें । ,सबसे पहले केले के दो टुकड़े करके छिलके सहित उबाल लीजिए । ,नॉन - इन्वेसिव वेन्टिलेशन गहन देखभाल इकाई में भर्ती लोगों के लिये लाभकारी हो सकता है । ,काउंटर पर बेची जाने वाली खांसी की दवा को प्रभावी नहीं पाया गया है और बच्चों में ज़िंक का उपयोग भी प्रभावी नहीं है । ,म्यूकोलिक्टस के लिये भी अपर्याप्त साक्ष्य ही उपलब्ध हैं । sg,एंटीबायोटिक उन लोगों में परिणाम को बेहतर करती है जो बैक्टीरिया जनित निमोनिया से पीड़ित होते हैं । ,"एंटीबायोटिक का चुनाव आरंभिक रूप से प्रभावित व्यक्तियों की उम्र , अंतर्निहित स्वास्थ्य , अर्जित संक्रमण का स्थान आदि जैसी विशेषताओं पर निर्भर करता है ।" ,"यूके में समुदाय - अर्जित निमोनिया के लिये अनुभव उपचार के रूप में प्राथमिक रूप से एमॉक्सिसिलीन की अनुशंसा की जाती है , जबकि डॉक्सीसाइक्लीन या क्लैरिथ्रोमाइसीन विकल्प के रूप में अनुशंसित की जाती हैं ।" sg,"उत्तरी अमरीका में जहां पर समुदाय - अर्जित निमोनिया के “ असामान्य ” प्रारूप आम हैं , वयस्कों में मैक्रोलाइड ( जैसे कि एज़ीथ्रोमाइसीन या एरीथ्रोमाइसीन ) और डॉक्सीसाइक्लीन ने एमॉक्सीसिलीन को प्रथम पंक्ति वाह्यरोगियों के उपचार में प्रतिस्थापित कर दिया है ।" ,हल्के या मध्यम लक्षणों वाले बच्चों में एमॉक्सिसिलीन अभी भी प्रथम पंक्ति उपचार है । sg,गैरजटिल मामलों में फ्लूरोक्विनोलोन्स का उपयोग हतोत्साहित किया जाता है क्योंकि इसके पश्च प्रभावों और प्रतिरोध उत्पन्न करने को लेकर चिंतायें होती हैं और इनका कोई खास चिकित्सीय लाभ भी नहीं दिखता है । ,पारंपरिक रूप से उपचार की अवधि सात से दस दिन की रही है लेकिन बढ़ते हुये साक्ष्य यह बताते हैं कि छोटा कोर्स ( तीन से पांच दिन ) समान रूप से प्रभावी होता है । ,"अस्पताल से अर्जित निमोनिया के लिये अनुशंसा में तीसरी और चौथी पीढ़ी के सिफाल्सोपोरिन्स , कार्बापेनम , फ्लोरोक्विनालोन , एमीनोग्लाइकोसाइड और वैन्कोमिसिन शामिल हैं ।" ,इन एंटीबायोटिक्स को अमूमन अंतःशिरीय रूप से दिया जाता है और संयोजनो में इनका उपयोग किया जाता है । ,वे जिनको अस्पताल में उपचार दिया जाता है उनमें से 90 % आरंभिक एंटीबायोटिक से बेहतर हो जाते हैं । ,इन्फ्लुएंज़ा वायरसों ( इन्फ्लुएंज़ा ए और इन्फ्लुएंज़ा बी ) से हुये वायरस जनित निमोनिया का उपचार करने के लिये न्यूरामिनिडेस इन्हिबिटर्स का उपयोग किया जा सकता है । ,"अन्य प्रकार के समुदाय अर्जित निमोनिया वायरस , जिनमें सार्स कोरोनावायरस , एडेनोवायरस , हंटावायरस और पैराइन्फ्लुएंज़ा वायरस शामिल हैं , विशिष्ट एंटीवायरस दवायें अनुशंसित की जाती हैं ।" ,"इन्फ्लुएंज़ा ए का उपचार रिमैन्टाडाइन या एमैन्टाडाइन द्वारा किया जाता है जबकि इन्फ्लुएंज़ा ए या बी का उपचार ओसेल्टावमिविर , ज़ानामिविर या पेरामिविर द्वारा किया जाता है ।" sg,ये सबसे अधिक लाभ तब देती हैं जब इनको लक्षणों की शुरुआत के 48 घंटों के भीतर दिया जाये । sg,"H5N1 इन्फ्लुएंज़ा ए के अनेक चिह्न हैं जिनको एविएन इन्फ्लुएंज़ा या "" बर्ड फ्लू "" भी कहा जाता है , रिमैन्टाडाइन और ऐमन्टाडाइन के प्रति प्रतिरोध दिखाते हैं ।" ,कुछ विशेषज्ञों द्वारा वायरस जनित निमोनिया में एंटीबायोटिक के उपयोग की अनुशंसा की जाती है क्योंकि जटिलता पैदा करने वाले बैक्टीरिया संक्रमण से इंकार नहीं किया जा सकता है । ,ब्रिटिश थोराकिक सोसाइटी इस बात की अनुशंसा करती है कि उन लोगों के साथ एंटीबायोटिक का उपयोग नहीं किया जाना चाहिये जिनको रोग का हल्का प्रभाव हो । ,कॉर्टिकॉस्टरॉएड का उपयोग विवादित है । ,सामान्यतः रुढिवादी रूप से एस्पिरेशन न्यूमोनिटिस को एंटीबायोटिक द्वारा उपचारित किया जाना केवल एस्पिरेशन निमोनिया के साथ देखा गया है । ,एंटीबायोटिक का चुनाव कई सारे कारकों पर निर्भर करेगा जिनमें संदिग्ध कारक जीवाणु और समुदाय में अर्जित निमोनिया या अस्पताल में अर्जित निमोनिया शामिल हैं । ,"सामान्य विकल्पों में क्लिन्डामाइसिन , बीटा - लेक्टम एंटीबायोटिक और मेटरोनिडाज़ोल का संयोजन या एमिनोग्लाइकोसाइड शामिल हैं ।" ,"कॉर्टिकॉस्टेरॉएड कभी - कभार एस्पिरेशन निमोनिया मे उपयोग किया जाता है , लेकिन इनकी प्रभावशीलता के समर्थन पर सीमित साक्ष्य उपलब्ध हैं ।" ,"उपचार के साथ , अधिकतर प्रकार के बैक्टीरिया जनित निमोनिया 3 – 6 दिनों में स्थिर हो जाते हैं ।" ,अधिकतर लक्षणों के समाधान में कुछ सप्ताह लग जाते हैं । ,एक्स - रे परिणाम आम तौर पर चार सप्ताहों में स्पष्ट हो जाते हैं और मृत्युदर ( 1 % से कम ) कम होती है । ,बज़ुर्गों और फेफड़ों की अन्य समस्याओं से ग्रसित लोगों के ठीक होने में 12 सप्ताह लग सकते हैं । ,वे व्यक्ति जिनको अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है उनमें मृत्युदर 10 % तक उच्च हो सकती है और वे जिनको गहन देखभाल की जरूरत पड़ती है उनमें मृत्युदर 30 – 50 % तक हो सकती है । ,निमोनिया वह सबसे आम अस्पताल - अर्जित संक्रमण है जिसके कारण मृत्यु हो सकती है । ,एंटीबायोटिक के आविर्भाव के पहले अस्पताल में भर्ती होने वालों में मृत्युदर आमतौर पर 30 % हुआ करती थी । ,जटिलतायें विशेष रूप से उन लोगों में हो सकती हैं जो बुज़ुर्ग हैं और जिनको अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्यायें हैं । ,"इन समस्याओं में अन्य समस्याओं के साथ एम्पाइयेमा , फेफड़ा एब्सेस , ब्रॉन्कियोलिटिस ऑब्लिटरान्स , गंभीर श्वसन समस्या सिन्ड्रोम , सेप्सिस और अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं की स्थितियों का जटिल होना शामिल है ।" ,"चिकित्सीय भविष्यवाणी नियमों को , निमोनिया में परिणामों को अधिक वस्तुगत रूप से पूर्वलक्षित करने के लिये विकसित किया गया है ।" ,ये नियम अक्सर इस बात का निश्चय करने के लिये उपयोग किये जाते हैं कि व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती करने की ज़रूरत है या नहीं । ,"निमोनिया में तरल का रिसाव , फेफड़े के चारों ओर के स्थान में बन सकता है ।" sg,"कभी - कभार , सूक्ष्म जीव इस तरल को संक्रमित कर देते हैं जिसके कारण एम्पाइयेमा हो जाता है ।" ,यदि यह एम्पायेमा के साक्ष्य दर्शाता है तो तरल को पूरी तरह से निकालना बहुत जरूरी है जिसके लिये अक्सर निकासी कैथेटर की जरूरत पड़ती है । ,एम्पायेमा के गंभीर मामलो में शल्यक्रिया की जरूरत पड़ सकती है । ,यदि संक्रमित तरल निकाला नहीं जाता है तो संक्रमण बना रह सकता है क्योंकि फेफड़े की कैविटी में एंटीबायोटिक ठीक से भेदन नहीं कर पाती है । ,यदि तरल निष्क्रिय है तो इसको निकालने की ज़रूरत केवल तब पड़ सकती है जब इससे लक्षण पैदा हो रहे हों या ये अस्पष्ट हों । sg,कभी - कभार फेफड़े में बैक्टीरिया संक्रमित तरल की एक थैली बनायेंगे जिसको फेफड़े का फोड़ा कहते हैं । ,फेफड़े के फोड़े को आम तौर पर छाती के एक्स - रे द्वारा देखा जा सकता है लेकिन निदान की पुष्टि के लिये अक्सर छाती के सीटी स्कैन की जरूरत पड़ती है । ,फोड़े आम तौर पर एस्पिरेशन निमोनिया में होते हैं और अक्सर इनमें कई तरह के बैक्टीरिया शामिल होते हैं । ,किसी फेफड़े के फोड़े के उपचार के लिये दीर्घ अवधि के एंटीबायोटिक पर्याप्त होते हैं लेकिन कभी - कभार फोड़ों को शल्यचिकित्सक या रेडियोलॉजिस्ट द्वारा निकाला जाना जरूरी हो जाता है । sg,निमोनिया गंभीर श्वसन respiratory distress सिन्ड्रोम ( एआरडीएस ) को शुरु करके श्वसन विफलता पैदा कर सकता है जो संक्रमण और सूजन के संयोजन की प्रतिक्रिया का परिणाम होता है । ,फेफड़ों में तरल भर जाता है और वे सख्त हो जाते हैं । ,इस सख्ती के साथ एल्वियोलर तरल के कारण ऑक्सीजन निष्कर्षण में गंभीर कठिनाइयों के संयोजन के चलते उत्तरजीविता हेतु लंबी अवधि के लिये यांत्रिक श्वसन की आवश्यकता पड़ सकती है । ,"सेप्सिस , निमोनिया की एक संभावित जटिलता है लेकिन आम तौर पर केवल उन लोगों में होती है जिनमें खराब प्रतिरक्षा या हाइपोस्पलेनिस्म होती है ।" ,देवघर शहर के करीब है । ,बाबा मंदिर से इसकी दूरी दो कि.मी. है । ,देवघर को एक लैंडस्केप में देखना हो तो नंदन पहाड़ जायें । ,नंदन पहाड़ बाबा मंदिर से तीन कि.मी. की दूरी पर है । ,यह एक अच्छा पार्क है । ,यहाँ का ब्यूट हाउस देखना लोग पसंद करते हैं । ,सत्संग नगर चार कि.मी. की दूरी पर है । ,इतिहास का प्रांगण है मलूटी । ,"मंदिरों से पटा मलूटी , दुमका जिले के शिकारीपाड़ा के नजदीक अवस्थित है ।" ,"मलूटी एक ऐतिहासिक महत्व का स्थल है , जहाँ की एक विशिष्टता है कि यहाँ हरेक घर के पड़ोस में एक मंदिर देखा जा सकता है ।" ,मलूटी के ज्यादातर मंदिर भगवान शिव को समर्पित हैं जबकि शेष मंदिर अन्य देवी - देवताओं जैसे विष्णु और दुर्गा के हैं । ,मलूटी के ज्यादातर मंदिर मध्यकालीन युग के हैं । ,मलूटी के शिव मंदिर शिकारा शैली में बने हैं जबकि देवी मौलिशा का मंदिर बंगाली निर्माण शैली का नमूना पेश करता है । ,"सामान्यतः मलूटी के मंदिरों के निर्माण में पक्के ईंट , चूने का गारा और टेराकोटा प्लेट का इस्तेमाल किया गया है ।" ,"मंदिरों में रामायण एवं महाभारत के दृश्य , दुर्गा और महिषासुर के प्रसिद्ध युद्ध तथा उस युग में जनसाधारण के रोजमर्रा के जीवन को चित्रित किया गया है ।" ,"मलूटी में गोपाष्ठमी मेला , दशहरा मेला , मकर संक्रांति मेला , नेवान मेला एवं दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता है ।" ,देव मंदिरों का गाँव मलूटी लगभग पाँच सौ साल पुराना है । ,देव मंदिरों की पूरी श्रृंखला के निर्माण में लगभग 125 साल का समय लगा । ,पुरातत्वविदों के अनुसार इन मंदिरों का निर्माण कार्य 1720 ई. के आस - पास शुरू हुआ और यह क्रम 1845 तक जारी रहा । ,मलूटी गाँव मल्ल राजाओं की राजधानी थी । ,"मलूटी गाँव में कुछ प्रस्तर के प्राचीन औजार , मिट्टी के प्राचीन बर्तनों के ठाकरे , पाल कालीन मूर्तियाँ और ऐसे अन्य सामान खुदाई में मिले हैं ।" ,"देव मंदिरों की पुरातात्विक विशेषता यह भी है कि इनकी स्थापत्य शैली में पूर्वोत्तर के कई राज्यों की स्थापत्य कला की छाप दिखायी देती है , मलूटी को गुप्तकाशी भी कहते हैं ।" ,"मलूटी गाँव में पहले कुल 108 मंदिर थे , जिनमें से अब 72 मंदिरों में 58 मंदिर भगवान शिव के हैं ।" pl,"पुरातत्व विभाग ने इस गाँव में अपने कार्यो को मुख्यतः चार भागों में बाँटा - ( १ ) अध्ययन , ( २ ) डक्यूमेंटेशन , ( ३ ) मंदिरों का संरक्षण एवं ( ४ ) गाँव के विकास की सम्भावनाओं का आकलन ।" ,अध्ययन की दृष्टी से मंदिरों की स्थापत्य शैली तथा अलंकरण के विषयों को आधार बनाकर मंदिरों को अलग - अलग समूहों में बाँटा गया तथा उनकी विशेषताओं का अध्ययन किया गया । ,कैसे पहुँचे : ,दुमका से सड़क मार्ग से निजी वाहन से मलूटी पहुँचा जा सकता है । ,रामपुरहाट ( पं. बंगाल ) से निजी वाहन से मलूटी पहुँचा जा सकता है । ,दुमका या रामपुरहाट में ठहर कर मलूटी जाया जा सकता है । pl,"मलूटी में भी गेस्ट हाउस बनवाये गये हैं , जहाँ का लाभ उठाया जा सकता है ।" ,बालानंद आश्रम में एक मंदिर है जिसमें बालेश्वर महादेव और बालेश्वरी देवी की मूर्तियाँ स्थापित हैं । ,मधुपुर से 10 कि.मी. पश्चिम में बकुलिया स्थित है । ,बकुलिया में एक प्रसिद्ध प्रपात है । ,वनभोजन के लिए लोगों का आना - जाना बना रहता है । ,बकुलिया को और अधिक विकसित किया जा सकता है । ,लीला मंदिर देवघर - दुमका रोड में देवघर से 5 कि.मी. की दूरी पर अवस्थित है । ,1921 में लीला मंदिर की स्थापना ठाकुर दयानन्द देव ने की थी । ,"मंदिर के कक्ष में इसके निर्माता की मूर्ति स्थापित है जहाँ उनके शिष्य , प्रवचन सुनते हैं एवं उनके गुणगान गाते हैं ।" ,तपोवन देवघर से 10 कि.मी. दक्षिण - पश्चिम में एक पहाड़ी है जहाँ भगवान शिव का मंदिर है । ,तपोवन में कई गुफाएँ हैं जिसमें ब्रह्मचारी लोग रहा करते हैं । ,कहा जाता है कभी माता सीता ने यहाँ तपस्या की थी । ,हजारीबाग जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल । ,हजारीबाग छोटानागपुर पठार पर बसा एक खूबसूरत हिल स्टेशन है जो समुद्रतल से 2019 फीट की ऊँचाई पर बसा है । ,हजारीबाग उत्तरी छोटानागपुर प्रमण्डल का मुख्यालय है और हजार बागों के शहर के रूप में भी मशहूर है । ,"हजारीबाग के खूबसूरत प्राकृतिक नजारों , उत्तम मौसम , सघन वनक्षेत्रों ने इसे एक उत्तम हेल्थ रिसोर्ट के रूप में प्रचलित कर दिया है ।" sg,"हजारीबाग के आसपास के सघन वन क्षेत्र को हजारीबाग नेशनल पार्क के रूप में विकसित किया गया है , जहाँ विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ पूरे प्राकृतिक वातावरण में संरक्षित की गई हैं ।" ,"पूरे क्षेत्र में साल के पेड़ भरे पड़े हैं , साथ ही वहाँ से दामोदर नदी प्रवाहित होती है , जो इस पूरे वातावरण को एक शांत व स्वच्छंद माहौल प्रदान करती है ।" ,"हजारीबाग नेशनल पार्क के प्रमुख जीवों में जंगली भालू , सांभर , नीलगाय , बाघ , तेंदुआ हैं ।" ,खतरनाक जानवर यहाँ शिकार करते हुए नजर आएँगे । ,"प्राकृतिक पर्यटन , प्रकृति प्रेमी और वनजीव , पहाड़ियों , गहरे नाले , घने जंगलों को देखने में रूचि रखने वालों के लिए यह एक पसंदीदा अभ्यारण्य है ।" ,हजारीबाग नेशनल पार्क में एक डाक बंगला तथा पर्यटकों के ठहरने के लिए विश्रामालय भी है । ,ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड ( सीए ) फवाद को टीम मे शामिल करने को लेकर इस कदर उत्साहित है कि बोर्ड ने आव्रजन मंत्री ब्रेडन ओ कोनोर को पत्र लिखकर जल्द से जल्द इस पाकिस्तानी मूल के खिलाड़ी को ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता देने की अपील की थी ताकि जुलाई में इंग्लैंड में शुरू हो रही एशेज सीरीज से पहले फवाद चयन के लिए उपलब्ध हो सके । ,ऑस्ट्रेलिया के टॉप स्पिनरों की भारत में जमकर कुटाई हुई थी । ,अब डरा ऑस्ट्रेलियाई बोर्ड फवाद से उम्मीद लगाए हुए है । ,पूर्व क्रिकेटर डेमियन मार्टिन तो फवाद को शेन वार्न का उत्तराधिकारी तक बता चुके हैं । ,वहीं पूर्व स्पिनर स्टुअर्ट मैकगिल को फवाद में टीम इंडिया के दिग्गज अनिल कुंबले की झलक दिख रही है । ,ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने भी टीम में उपयोगिता को देखते हुए नियमों में बदलाव तक करते हुए फवाद को नागरिकता दे दी है । ,इस तरह फवाद का ऐशेज में खेलने का रास्ता साफ हो गया है । ,हालाकि इस समय फवाद को ऑस्ट्रेलिया ए के अफ्रीका दौरे के लिए टीम में लिया जा चुका है ,यह माना जा रहा है कि सरकार द्वारा दिखाई जल्दी के बाद सिलेक्टर सबसे पहले उन्हें ऐशेज में ही मौका देंगे । ,त्रिकोणीय सीरीज के एक रोमांचक मुकाबले में वेस्टइंडीज ने टीम इंडिया को 1 विकेट से हरा दिया । ,भारत ने वेस्टइंडीज के सामने जीत के लिए 230 रन का लक्ष्य रखा था । ,वेस्टइंडीज ने 47.4 ओवर में 9 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया । ,वेस्टइंडीज की ओर से जानसन चार्ल्स ने सर्वाधिक 97 रन का योगदान किया । ,इससे पहले रोहित शर्मा ( 60 ) व सुरेश रैना ( 44 ) की संभली हुई पारियों की बदौलत भारत ने त्रिकोणीय वनडे सीरीज में मेजबान वेस्टइंडीज के खिलाफ सात विकेट पर 229 रन बनाए । ,दिनेश कार्तिक ने 23 व कप्तान धोनी ने 27 रन का योगदान दिया । ,"इंडीज की ओर से रोश , बेस्ट व सैमी ने दो - दो विकेट लिए ।" ,मैच में भारत की शुरुआत ठीक नहीं रही । ,ओपनर शिखर धवन 11 रन ही बना सके । ,कोहली भी इतने ही रन बना सके । ,भारत का दूसरा विकेट 10वें ओवर में 39 के स्कोर पर गिरा । ,ओपनर रोहित शर्मा ने टीम को इन झटकों से उबारा । ,उन्होंने दिनेश कार्तिक ( 23 ) के साथ 59 रन की साझेदारी की । ,कार्तिक और रोहित के आउट होने पर सुरेश रैना और कप्तान धोनी ने मोर्चा संभाला । ,दोनों ने 58 रन की साझेदारी की । ,लेकिन रन गति बढ़ाने में नाकाम रहे । ,"वेस्टइंडीज की ओर से केमार रोच , डैरेन सैमी और टीनो बेस्ट ने दो - दो विकेट झटके ।" ,पार्टटाइम स्पिनर मर्लोन सैमुअल्स ने नौ ओवरों में सिर्फ 20 रन दिए । ,लेकिन स्पिनरों की मददगार पिच पर भी सुनील नरेन को कोई विकेट नहीं मिला । ,आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीतने के बाद टीम इंडिया का वेस्ट इंडीज टूर हार के साथ शुरू हुआ । ,मेजबान के खिलाफ हुए पहले वनडे में धोनी ब्रिगेड को महज 1 विकेट से पराजय झेलनी पड़ी । ,क्रिकेट के खेल में कभी एक गेंद से पूरी बाजी पलट जाती है तो कभी आखिरी गेंद तक रोमांच बना रहता है । ,संडे की रात हुए मुकाबले में भारतीय टीम को अपने विकेटकीपर की एक गलती के कारण मैच गंवाना पड़ गया । ,7 विकेट पर 229 रन का छोटा स्कोर खड़ाकर टीम इंडिया पहले ही बैकफुट पर चली गई थी । ,रही सही कसर पूरी कर दी दिनेश कार्तिक की उस गलती ने । ,230 रन के आसान टार्गेट को हासिल करने उतरी वेस्ट इंडीज के लिए ओपनर जॉन्सटन चार्ल्स डटकर खेल रहे थे । ,ड्वेन ब्रावो के साथ मिलकर उन्होंने मैच विनिंग पार्टनरशिप जमा ली थी । ,चार्ल्स ने महज 100 गेंदों में 8 चौके व 4 छक्के लगाते हुए 97 रन बनाए । ,"वे शतक से जरूर चूके , लेकिन अपनी टीम को जीत दिलाकर ही आउट हुए ।" ,विराट कोहली की कप्तानी चार्ल्स की चालाक बल्लेबाजी के आगे फीकी साबित हो रही थी । ,कोई भी इंडियन गेंदबाज उन्हें रोकने में सफल नहीं हो सका । ,"38वें ओवर में ऑफ स्पिनर आर अश्विन ने बड़ी मेहनत से एक मौका बनाया , लेकिन विकेटकीपर की गलती के कारण सब बिगड़ गया ।" ,37.3वीं गेंद पर अश्विन ने चार्ल्स को फिरकी में फंसाया । ,कैरेबियाई बल्लेबाज गेंद को पूरी तरह मिस कर चुके थे । ,देरी थी तो बस विकेटकीपर द्वारा गेंद को लपककर स्टंपिंग करने की । ,लेकिन कार्तिक शायद घर की यादों में खोए हुए थे । ,उन्हें जरा भी होश नहीं रहा और गेंद उनके पास से चौके के लिए चली गई । ,कार्तिक की इस गलती का खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा । ,टीम इंडिया की जीत महज 1 विकेट के कारण हार में तब्दील हो गई । ,यही वह पल था जब टीम इंडिया के हाथ से मैच निकल गया । ,टीम इंडिया की हार में जितना हाथ दिनेश कार्तिक की गलती का रहा उतना ही योगदान डैरेन ब्रावो का भी रहा । ,ब्रावो ने 5 चौके और 1 छक्के से सजी 55 रन की पारी खेली । ,महेश ! यू आर अंडर अरेस्ट । ,लेकिन मेरा गुनाह क्या है ? ,अगर तुम्हें तड़ीपार किया गया है तो ज़रूर तुमने कोई गुनाह किया होगा । ,कानून ने समाज के फायदे के लिए तुम्हें समाज से बाहर रखने के काबिल समझा होगा । ,"इसी समाज ने एक दिन अपने फायदे के लिए प्रभु रामचंद्र को भी 14 बरस के लिए तड़ीपार कर दिया था , उन्होंने कौन सा गुनाह किया था सर ?" ,लेकिन कानून की नज़रों में तुम गुनहगार हो । ,तुम जानते नहीं एक पुलिस वाले को चाकू दिखाने का क्या हश्र हो सकता है ? ,"मैं जानता हूँ सर एक दो साल की सज़ा और क्या , मैं उसके लिए तैयार हूँ , लेकिन इस वक्त मेरा यहाँ से जाना ज़रूरी है सर ।" ,"महेश ! रुक जाओ , मेरा फर्ज़ ये कहता है कि तुम्हें गिरफ्तार करूँ और ज़रूरत पड़े तो गोली चला दूँ ।" ,तो चलाइए गोली । ,"मैं ऐसा नहीं करूँगा , क्योंकि मैं जानना चाहता हूँ कि देश के लिए मर मिटने के लिए कसमें खाते खाते , तुम उसके दुश्मन कैसे बन गए ?" sg,मैं अपनी पिछली ज़िंदगी भूल चुका हूँ । ,"याद करना होगा क्योंकि मेरा फर्ज़ सिर्फ गुनाहगारों को रोकना नहीं NULL , बल्कि गुनाह को रोकने का भी है ।" ,मुझे ये पता चले कि तुम जैसे होनहार नौजवान गुनाहगार कैसे बनते हैं तो शायद आने वाले सालों में कुछ नौजवानों को गुनाहगार बनने से रोक सकूँ । ,आप गुनाहगारों को रोकने की बात करते हैं सर ! मुझे तो आपकी पुलिस ने गुनाहगार कर दिया । ,गुलदस्ता ! ,जी बाबू जी ! ,"कभी - कभी तो ये तय करना मुश्किल हो जाता है कि तुम्हारी चाय ज्यादा मीठी है या तेरी आवाज़ NULL , कहीं तू चाय में कुल्ला तो नहीं करता ।" ,अबे ओए गुलदस्ते ! ,"आया सेठ , आया ।" ,"चाय की पत्ती और शक्कर रख और सुन इन लोगों के पैसे अच्छे से ध्यान में रखना , तू हमेशा भूल कर जाता है ।" ,क्या है सेठ जी ! कदरदान लोग हैं और सच्ची कला की सच्ची कद्र करने वाले तो इस दुनिया में बहुत कम होते हैं । ,"अबे जा , उनसे पैसे ले ।" ,क्या है सेठ जी कि आप तो मेरी तनख्वाह में से पैसे काट लेना । ,"ज्योति ! वो जो तेरी क्लास में लड़की है न जिसकी नीली - नीली आँखें हैं , भूरे - भूरे बाल हैं ।" ,"वही जो पिछले साल कॉलेज में क्वीन हुई थी , नीकिता ?" ,"हाँ , हाँ , उससे पहचान करवा दे न प्लीज़ ।" ,"मैं तो तुम्हारी जान पहचान नीकिता से करवा दूँगी , पर तुम्हें भी मेरा एक काम करना पड़ेगा ।" ,"कैसी बात करती है तू , भाई बहन के और बहन भाई के काम नहीं आएगी तो कौन आएगा , बता क्या काम है ?" ,"ये है मेरी फ्रैंड मोहिनी , इसे तुझसे कुछ काम था ।" pl,"जी , मुझे आपके साइकोलॉजी के नोटस चाहिए थे ।" ,और अगर आप खुद पढ़ा देते तो ... । ,"वो क्या है कि सिखाने में कोई प्रॉब्लम नहीं है , दरअसल टाइम का प्रॉब्लम है ।" ,ये तो मुझे देखता ही नहीं । ,"लगता है नीकिता के बारे में सोच रहा है , अब क्या करें ?" ,"मैं चाहता हूं कि ये दोस्ती जो है , रिश्तेदारी में बदल जाए , मेरी बेटी है ना प्रीति , मै उसके लिए तुम्हारा हाथ मांगता हूँ ।" ,"तू भी कमाल करता है , इतने अच्छे काम के लिए मेरी मर्ज़ी की क्या ज़रूरत है ।" sg,मैंने आज तक तेरी कोई बात टाली है ? ,"समधन जी ! जल्दी मुँह मीठा कराइए , दामाद आया है , शादी जल्द से जल्द होनी चाहिए , नेक काम में देरी नहीं ।" ,कल मेरा पहला करवाचौथ है और मैं चाहती हूँ कि पानी की पहली घूँट और खाने का पहला निवाला मैं तुम्हीं से लूँ । ,"अरे पागल हो गई हो क्या ! मैं सबके सामने आऊँगा और कहूँगा हाय सिमरन ! मैं तुम्हारा होने वाला पति हूँ , लो पानी पी लो ।" ,दीदी ! उसका आना इतना आसान नहीं है । ,"हर आदमी हर वक्त पूछता रहता है , राज कहां है ?" ,राज कहां है ? ,"वो नहीं आ पाएगा दीदी , प्लीज़ कुछ खा लो ।" ,सॉरी मुझे आने में देर हो गई लेकिन वो लोग मुझे आने ही नहीं दे रहे थे । ,"बड़ी मुश्किल से जान छुड़ा कर आया हूँ , ये लो खाना खा लो ।" ,छुटकी ! इनसे कह दो इन्हें फिक्र करने की कोई ज़रूरत नहीं । sg,जब मुझे भूख से चक्कर आ रहे थे तो ये वहां आराम से बैठ कर पेट भर के खाना खा रहे थे । ,"वैसे भी ये तो मेरा पहला करवाचौथ है ना , इन्हें इतना परेशान होने की क्या ज़रूरत है ?" ,"मैं जियूँ या मरूँ , इन्हें इससे क्या ?" ,नरेश बाबू की नौकरी शहर में लग गयी । ,वह गांव से शहर तो आ गया पर शहर में किराये के घर का भाव सुन कर उनके होश उड़ गये । ,ऊपर से अनेक तरह के सवाल जातिवाद के नाम पर आदमियत का पोस्टमार्टम भी । ,"नरेश बाबू के घर की तलाश महीने भर बाद तो पूरी हुई , दो महीना का अग्रिम किराया और चालू महीना का किराया एक मुश्त देने पर ।" ,घर पहले माले पर था । ,नीचे खुली चैम्बर लाइन की तरफ नरेश का ध्यान ही नहीं गया किराये का घर लेने से पहले । ,इस रहस्य का खुलासा तो दूसरे दिन सोकर उठने के बाद चला । ,"खुली चैम्बर लाइन से उठती सड़ांध और मानव मल से भरी लाइन को देखकर , दूसरी तरफ पानी के लिये मारा - मारी NULL , बहुमंजिले किराये के घर में शौचालय की लाइन में धक्का - मुक्की ।" ,बड़ी मुश्किल से कई परीक्षायें पास करने के बाद तो घर मिला था । ,वह भी रास नहीं आ रहा था । ,इसके पहले कई मकान मालिकों ने जाति के नाम पर बाउण्ड्री से बाहर कर दिया था । ,कईयों ने तो साफ कह दिया था नरेश बाबू छोटी जाति वालों को हम घर नहीं देते आदि - आदि । ,यही एक मकान मालिक मिले थे जो बिना कुछ पूछे घर दिया था दो महीने का एडवांस किराया लेकर । ,अन्ततः नरेश ने मानव - मल से घिरे इस किराये के घर को छोड़ दिया । ,काफी खोजबीन के बाद वहां से आठ किलोमीटर दूर ठाकुर चाचा का किराये का घर सुखधाम नगर में मिला था । ,ठाकुर चाचा के जाति के मुद्दे पर बात करने से पहले नरेश बाबू ने अपनी जाति का खुलासा कर दिया । ,ठाकुर चाचा खुश हुए और बोले अभी तक तो बहुत किरायेदार आये छोटी - बड़ी सभी जाति के पर छोटी जाति वाले खुद को बड़ी जाति का बताकर घर लिया था । ,बाद में पता भी लग गया पर बेटा तुम पहले व्यक्ति हो जो स्वाभिमानी लग रहे हो । ,अरे जातिपांति तो आदमी की खीचीं तलवार माफिक है । ,आदमी तो बस आदमी होता है । ,ठाकुर चाचा की बातें सुनकर नरेश बाबू गदगद हो गया । ,शहर से दूर होने के कारण यहां से आने जाने में काफी तकलीफ थी क्योंकि यहां सार्वजनिक साधनों का चलना शुरू नहीं हुआ था । ,खुद के साधन का सहारा था नहीं तो पदयात्रा । ,नरेश ठाकुर चाचा के मकान में अकेला रहने लगा । ,परिवार अभी गांव में रह रहा था । ,एक दिन ठाकुर चाचा की इकलौती बेटी सौदामिनी रात में बेहिचक कमरे में आ गयी । ,उसको देखकर डर गया । ,आखिरकार हिम्मत करके बोला सौदामिनी रात में यह जानकर भी कि मैं अकेला रहता हूं । ,सौदामिनी - हां । ,घर में कोई नहीं है । ,घण्टे दो घण्टे बाद कोई आ सकता है । ,नरेश - माफ करना । ,तुम अभी चली जाओ । ,सौदामिनी - मैं अपनी बात करके जाऊंगी । ,नरेश - नरक में मत डालो बहन । ,सौदामिनी - अब तो बहन बना लिये कोई डर तो नहीं । ,अब तो अपनी बात कहूं । ,नरेश - हां बहन कहो । ,सौदामिनी - मैं खूबसूरत हूं । ,कहीं मेरे साथ कोई ज्यादती न हो जाये इसी डर से पापा ने मेरी पढाई बन्द करवा दी । ,मेरे पापा से कह कर मेरी पढाई चालू करवा दो । ,यदि हो सके तो अपनी कम्पनी में नौकरी लगवा दो । ,मुझे यकीन है आपकी बात पापा टाल नहीं पायेंगे । ,नरेश - कोशिश करूंगा । ,सौदामिनी - फूटी किस्मत आप संवार सकते हो कहते हुए पिछले दरवाजे अपने कमरे में चली गयी । ,नरेश चिन्तन - मनन में लग गया । ,सुबह सोकर उठा तो ठाकुर चाचा को दरवाजे के सामने कुर्सी पर बैठे धूप सेकते पाया । ,उसको देखकर ठाकुर चाचा बोले नरेश बेटा लो कुर्सी बैठो । ,नरेश - ठाकुर चाचा आप बैठो । ,बस मैं दस मिनट में आता हूं । ,आपसे कुछ काम है । ,ठाकुर चाचा - मुझे काम पर जाना है जल्दी करना । ,नरेश - ठाकुर चाचा बस पांच मिनट लूंगा । ,मुझे भी तो काम पर जाना है । ,ठाकुर चाचा - ठीक है । ,आ जाओ । ,नरेश - जल्दी - जल्दी दो कप चाय बनाया । ,एक खुद के लिये दूसरा ठाकुर चाचा के लिये लेकर बाहर आया । ,ठाकुर चाचा को थमाते हुए बोला - लो चाचा चाय पीओ । ,ठाकुर चाचा - चाय के लिये बैठे थे । ,नरेश - नहीं किसी और काम के लिये । ,ठाकुर चाचा - काम बताओ । ,नरेश - चाचा सौदामिनी पढ़ना चाहती है । ,ठाकुर चाचा - बारहवीं पास कर चुकी है । ,अब क्या करेगी पढ़कर ? ,अब तो बस उसकी शादी की चिन्ता है । ,शादी हो जाये बस यही तमन्ना है । ,नरेश - अभी तो पढ़ने की उम्र है । ,शादी जल्दी करने के बहुत जोखिम हैं । ,ठाकुर चाचा - पढ़ाने में बहुत जोखिम हैं । ,उससे तो अच्छा है शादी कर दूं अपने घर - परिवार में रम जाये । ,नरेश - ठाकुर चाचा रेगुलर नहीं तो प्राइवेट पढने दो । ,पढ़ाई के साथ पढ़ा भी तो सकती है किसी स्कूल में । ,इससे अपना खर्च उठाने लगेगी । ,आपके ऊपर भार भी नहीं पड़ेगा । ,ठाकुर चाचा - मनचले लड़कों से डर लगता है । ,कभी कोई अनहोनी हो गयी तो क्या मुंह दिखाऊंगा । ,नरेश - ठाकुर चाचा इतना क्यों डर रहे हैं । ,सौदामिनी मुंह तोड़ जबाब दे सकती है । ,अपनी रक्षा कर सकती है । ,कब तक उसके सिर पर हाथ रखे रहोगे । ,ठाकुर चाचा मेरी बात मान लो । ,कल गांव जा रहा हूं परिवार लेने । ,ठाकुरचाचा - शादी - शुदा हो । ,नरेश - हां ठाकुर चाचा । ,मेरा ब्याह तो बचपन में हो गया था मुझे तो याद भी नहीं । ,इतने में सौदामिनी आ गयी और बोली - नरेश भाई भाभी को लेने जा रहे हो । ,नरेश - हां । ,नरेश पन्द्रह दिन के बाद पत्नी गीतारानी को लेकर आ गया । ,एक दिन सुबह बन संवरकर सौदामिनी गीतारानी के सामने खड़ी हो गयी । ,उसके कान के पास मुंह करके बोली भाभी आपका आना मेरे लिये लकी साबित हुआ है । ,गीतारानी - क्या दूल्हा मिल गया । ,सौदामिनी - स्कूल जा रही हूं । ,गीतारानी - इतना बन - संवरकर । ,सौदामिनी - भाभी मजाक न करो । ,आज पहला दिन है । ,आप और भइया से मिलकर जाऊंगी तभी तो लाभकारी होगा । ,यह सब भईया की वजह से तो हो रहा है । ,सौदामिनी - क्या । ,अरे सुनो जी ये देखो ननदजी बन संवर कर मिलने आयीं हैं । ,नरेश - क्यों मजाक कर रही हो गीता । ,गीतारानी - मजाक नहीं सच है । ,इधर तो आओ देखो कोई परी उतर आयी हो जैसे हमारी ननद किसी परी से तो कम नहीं है । ,नरेश - अच्छा सौदामिनी है । ,सौदामिनी - हां भइया । ,आपकी वजह से प्राइवेट फार्म भी भर गया । ,स्कूल में नौकरी भी लग गयी । ,पापा का पहरा भी हट गया कहते हुए सौदामिनी नरेश का पैर छूने को लटकी । ,नरेश उसके सिर पर हाथ फेरते हुए बोला जा बहन खूब तरक्की कर । ,गीतारानी ने तरक्की के साथ सुन्दर घर - वर तथा गोद हरी होने तक का आशीर्वाद दे डाला । ,सौदामिनी बोली - भाभी इतना कुछ एक साथ । ,गीतारानी - ननद की खुशी में तो हमारी भी खुशी है । ,सौदामिनी - थैंक यू भइया भाभी कहते हुए वह स्कूल की ओर चल पड़ी । ,समय अपनी गति से चल रहा था इसी बीच गीतारानी को कई बीमारियों ने घेर लिया । ,नरेश की नौकरी पर भी खतरा मंड़राने लगा था जातिवाद की वजह से । ,पच्चास लोगों के दफ्तर में अकेले छोटी जाति का नरेश ही था । ,दफ्तर के कुछ खिसियाये लोग बाहर फेंकने पर तुले हुए थे । ,नरेश दफ्तर में हो रहे दुर्व्यवहार और पत्नी की बीमारी के भंवरजाल में फंसा बूढ़ा होने लगा था । ,उधर ठाकुर चाचा के परिवार में कलह का तूफान रह - रहकर उठने लगा था । ,इसी कलह की वजह से ठाकुर चाची एक दिन जहर खा ली फिर सौदामिनी भी । ,बड़ी मुश्किल से नरेश और गीतरानी की भागदौड से दोनों मां - बेटी की जान बची थी । ,एक दिन सुबह सामने वाले घर में रोना चिल्लाना शुरू हो गया । ,गीतारानी दौड़कर पूछी तो पता चला कि सीता ने जहर खा लिया है । ,सीता की भी जान इन्हीं दोनों पति - पत्नी की दौड़धूप से बची । ,इसी बीच नरेश के पास में जाति छिपाकर रहने वाले रामफिरलाल ने नरेश बाबू से रिश्ता जोड़ लिया जबकि दूर तक कोई रिश्ता तो था नहीं पर जातीय रिश्ता था । ,रामफिरलाल का रिश्ता खुलेआम तो नहीं था जातीय पोल खुलने के डर से । ,अन्दर ही अन्दर प्राढ़ता हो गयी थी । ,वह गीतारानी के गिरते हुए स्वास्थ और मकान मालिक के घर और आसपास जहरखुमारी की वजह से किराये का घर बदलवाने की जिद पर अड़ गया । ,ठाकुर चाचा के न चाहने और सौदामिनी के आसूं बहाने के बाद भी रामफिरलाल ने किराये का घर खाली करवाकर पास के मि. ठिमलौतिया के मकान के दो कमरे किराये पर दिलवा दिया ठाकुर चाचा के दो कमरे के किराये के घर से सौ रूपया और अधिक किराया दिलवाकर । ,"मि. ठिमलौतिया भी छोटी बिरादरी के ही थे , रिजर्वेशन की बदौलत स्कूल में अध्यापक हो गये तो थे पर खुद को नरेश की जाति से ऊंची जाति का मानते थे ।" ,रह - रह कर जातीय अभिमान उबल पड़ता था । ,ज्यों ज्यों समय बीतने लगा मि. ठिमलौतिया रंग बदलने लगे । ,कभी पहले पानी भरने पर चिढ़ जाते तो कभी कोई दूसरी बात पर । ,नरेश लैट्रिन बाथरूम में बल्ब लगाते वे निकालकर फयूज लगा देते । ,पानी का नल बन्द कर देते । ,इसी बीच नरेश ने पुराना स्कूटर खरीद लिया । ,स्कूटर को देखकर मि. ठिमलौतिया बोले नरेश साइकिल खड़ी करने की परमिशन थी तुम्हारे स्कूटर को खड़ा करने के लिये जगह कहां से आयेगी । ,बहुत सी सुविधाओं का उपभोग कर रहे हो पर किराया नहीं दे रहे हो । ,"तुम्हारा बेटा गुलाब पानी बहाता रहता है , दीवाल गन्दी कर रहा है ।" ,लैट्रिन बाथरूम का उपयोग बढ़ गया है पानी का उपयोग बढ़ गया है अब स्कूटर खड़ा करने के लिये जगह चाहिये इन सब के लिये किराया बढ़ाना पड़ेगा । ,इसी बीच मि. ठिमालौतिया ने गरम पानी जानबूझकर या अनजाने में डाल दिया ये तो भगवान जाने पर नरेश को बीस हजार रूपये रीनकर्ज कर गीतारानी के इलाज पर लगाना पड़ा । ,पुलिस केस बन रहा था पर नरेश ने कहा बाप समान मि. ठिमलौतिया हैं अनजाने में पानी ऊपर गिर गया होगा । ,जब तक गीतारानी अस्पताल में थी तब तक मि. ठिमलौतिया का व्यवहार थोड़ा ठीक था पर एक टाइम की रोटी के लिये कभी नहीं पूछे जबकि गुलाब महज साल भर का था । ,यह वक्त बहुत बुरा था नरेश के लिये बीवी अस्पताल में नन्हे बच्चे की देखभाल ऊपर से दफ्तर वालों की तनी भौहें तीसरे नौकरी पर लटकी तलवार । ,खैर भगवान ने सभी मुसीबतों से रक्षा किया । ,तीस प्रतिशत जली गीतारानी महीने भर के बाद किराये के घर में वापस आयी । ,गीतारानी के घर वापस आते ही मि. ठिमलौतिया के तेवर तल्ख हो गये वे किराया बढाओ या जल्दी घर खाली करो की रट लगा बैठे । ,यह बात नरेश रामफिरलाल से बताया तो वह मि. ठिमलौतिया के दलाल की तरह बोला बढा दो किराया । ,मकान बनाने में पैसा लगता है जबकि बाजार भाव की तुलना में पहले से ही घर का किराया अधिक था । ,जितना किराया नरेश जनता र्क्वाटर का दे रहा था उतने में अच्छी कालोनी में घर मिल सकता था जातिवाद का नरपिशाच आड़े आ जा रहा था वैसे यहां भी कम न था । ,गीतारानी और नरेश आपस में विचार विमर्श कर दूसरा किराये का घर लेने का निश्चय कर लिया । ,यह खबर लगते ही रामफिरलाल बौखला गया । ,वह भी मि. ठिमलौतिया के षड़यन्त्र में शामिल हो गया । ,मकान न खाली करने और किराया जबर्दस्ती बढ़ाने के लिये चारों ओर से घेराव करने लगा । ,नरेश ने किराये का घर खोजना शुरू कर दिया । ,नरेश जहां घर देखकर आता वहां रामफिरलाल की घरवाली काली बिल्ली की तरह पांव दबाये पहुंच जाती । ,घर न देने का मशविरा दे आती । ,कभी छोटी जाति का बता कर तो कहीं पड़ोसी होने की कसम देकर तो कभी बहुत खराब लोग हैं यानि किसी ना किसी तरह से मकान मालिक का घेराव कर देती । ,यदि नहीं होता तो पति रामफिरलाल के साथ मि. और मिसेज ठिमलौतिया को ले जाती । ,कुल मिलाकर किराये का घर नहीं लेने देती । ,दूसरी तरफ किराया बढ़ाने पर जोर बढता जा रहा था । ,घर न खाली कर पाये इसके लिये घेराव भी पूरी तरह से हो रहा था । ,मि. ठिमलौतिया नरेश की नेकी को भूल चुके थे । ,उनकी बेटी अर्न्तधार्मिक लड़के के साथ शादी करने की जिद न पूरी होने के कारण जहर खा ली थी । ,ऐसे बुरे वक्त में नरेश ही काम आया था । ,दूसरे गीतारानी के ऊपर खौलता पानी डाल दिये । ,नरेश ने जेल जाने से बचाया था । ,वहीं मि. ठिमलौतिया अपने से छोटी जाति का मानकर अधिक किराया वसूल करने के लिये दबाव बना रहे थे । ,मुंह पर तो घर खाली करने को बोल रहे थे पर पीछे से घेराव कर रहे थे कि ये घर न खाली कर पाये । ,ये सब षड़यन्त्र अधिक किराया वसूलने के लिये किया जा रहा था । ,इस षड़यन्त्र में रामफिरलाल और उसका परिवार भी शामिल था । ,आखिरकार नरेश ने जनता र्क्वाटर से दूर की मीडिल क्लास कालोनी में घर देख लिया । ,इसकी भनक रामफिरलाल को लग गयी वह मि. ठिमलौतिया को साथ लेकर मकान मालिक लालाजी के पास गया । ,मि. ठिमलौतिया से पहले रामफिरलाल बोला लालाजी सुना है अपना घर नरेश को किराये पर दे रहे हैं । ,लालाजी - ठीक सुना है । ,रामफिरलाल - जानते हैं नरेश कौन है । ,लालाजी - हां । ,छोटी जाति का है । ,छोटे ओहदे पर काम कर रहा है । ,जातिवाद ने उसका जीना दूभर कर दिया है । ,बहुत पढ़ा लिखा है । ,रामफिरलाल - अछूत को घर दे रहे हैं । ,लालाजी - तुम ठाकुर हो या यादव या चमार कौन हो बताओ जरा मैं भी तो जानूं । ,क्यों एक शिक्षित और नेक आदमी को चैन से जीने नहीं दे रहे हो । ,लालाजी की बात सुनकर रामफिरलाल के पैर के नीचे की जमीन खिसक गयी । ,वह पोल खुलने के डर से चुप रहा । ,"मि. ठिमलौतिया बोले लालाजी घर आपका है , भंगी को दो या चमार को हम कौन होते हैं रोकने वाले ।" ,लालाजी - क्यों अपने स्वार्थ के सपनों की बारात के लिये भले मानुष के सपनों की बारात में आग लगा रहे हो । ,जाति नहीं आदमी को देखो । ,छोटे ओहदे पर काम करते हुए दुनिया को सीख दे रहा है अपने हुनर से । ,अरे छोटी जाति का है तो क्या । ,रामफिरलाल और ठिमलौतिया तुम दोनों एक दिन नरेश के सामने सिर झुकाओगे । ,जाओ मैं बात का पक्का हूं घर नरेश को ही दूंगा । ,तुम किराये का घर एक भले मानुष को नहीं लेने दे रहे हो जानते हो ये तुम्हारा शरीर भी किराये का है । ,यह भी एक दिन खाली होगा । ,पता नहीं एक मुट्ठी माटी पायेगा भी कि नहीं । ,रिश्तेदारी के नाम पर कलंक रामफिरलाल और आदमियत के दुश्मन ठिमलौतिया के घेराव के बाद भी नरेश किराये के घर को खाली कर लालाजी के किराये के घर में शिफ्ट हो गया । ,श्रम की मण्डी में सुकरात साबित हुआ नरेश कुछ बरसों के अन्दर रीन कर्ज कर एक छोटा सा घर बनाकर किराये के घर से फुर्सत तो पा गया पर बूढ़ी रूढ़िवादी व्यवस्था से नहीं । ,लू कुछ हल्की होने लगी थी परन्तु तपन पूरी तरह बरकरार थी । ,आकाश धूल से नहाया हुआ था । ,गाँव में शादी का सीजन ज़ोरों पर था । ,सड़क पगडण्डी सभी रास्ते मुसाफिरों की आवाजाही से शादी के जश्न का मूक साक्षी बन रहे थे । ,"नाच मण्डली वाले इक्के पर लाउडस्पीकर बजाते , नाटक के डायलॉग बोलते , शादी के पारम्परिक गीत गाते अपने गन्तव्य की ओर भागे जा रहे थे ।" ,झुण्ड के झुण्ड साइकिल वाले और पैदल भी कम ना थे । ,कुछ ही देर में सूरज लाल आवरण में ढक गया । ,"रजोदेवी रतन के इन्तजार में खोई हुई थी , बेटी की डोली की चिन्ता जो खाये जा रही थी ।" ,गरीब को तो चारों ओर से मुसीबतों का आक्रमण अपनी हड्डियों पर रोकना पड़ता है । ,रजोदेवी चिन्ता की चिता पर बेहोश सी पड़ी थी इसी बीच रतन भी साइकिल की घण्टी बजाते हुए आ गया पर रजोदेवी को पता ही नहीं चला । ,रजोदेवी को चिन्ता में खोया हुआ देखकर रतन बोला अरे भागवान अब किसका इंतजार है । ,मैं तो आ गया । ,रजोदेवी - किधर से आ गये मैं तो सड़क की ओर ही देख रही थी । ,रतन - उड़कर । ,रजोदेवी - क्या ? ,रतन - तुम्हारे सामने कब से घण्टी बजा रहा हूँ । ,तुम सुन नहीं रही हो और कह रही हो किधर से आ गये । ,ये कैसा इंतज़ार है । ,रजोदेवी - है तो इंतजार ही । ,खैर छोड़ो । ,बात बनी ? ,रतन - समझो पक्की हो गयी । ,रजोदेवी - चलो बेटवा की मेहनत सफल हो गई । ,रतन - हाँ छोटी बहन रजनी के ब्याह के खर्चे की चिन्ता से इतना परेशान होकर श्रीधर नहर पर माटी फेंक रहा है जबकि उसका इम्तहान सिर पर है । ,भाई और बाप दोनों का फर्ज़ निभा रहा है । ,खेतिहर मजदूर बाप की मजबूरी को समझता है । ,श्रीधर के पसीने की कमाई के रूपये से लड़का छेकाई की रस्म पूरी कर आया हूँ । ,माँ बाप की बातें रजनी के कानों को छू गयीं । ,उसकी आखों से आँसू छलक पड़े । ,बेचारी अल्पवयस्क जो थी । ,रजोदेवी को बिटिया की उपस्थिति का एहसास हो गया । ,वह रजनी को आवाज दी । ,वह छुईमुई की तरह खड़ी हो गयी । ,रजोदेवी - बेटी अपने बाबूजी के लिये गगरी से ठण्डा पानी और गुड़ लाओ । ,रजनी - लाती हूँ माँ । ,रजोदेवी - रजनी के बाबू मैं हुक्का चढ़ाकर लाती हूँ । ,रतन ने गुड़ खाकर पानी पिया और गमछे से हवा करने लगा । ,रजोदेवी - लो हुक्का पिओ मैं बेना से हवा कर देती हूँ । ,रतन - ये अच्छा रहेगा । ,रजोदेवी - घर - वर से ठोंक बजाकर देख लिये हो ना ? ,रतन - अरे बैद कक्का की रिश्तेदारी में है । ,बाप नहीं है सिर्फ माँ बेटे हैं । ,बैजू बनारस में पढ़ा है । ,कम्पाउण्डरी कर रहा है । ,बिटिया राज करेगी । ,रजोदेवी - बिटिया राज करे यही तो कामना है । ,अच्छा ये बताओ कि तुमको घर - वर पूरी तरह से पसन्द आ गया है ना । ,ऐसा तो नहीं कि बैद बाबा के दबाव में हाँ कर आये हो । ,रतन - भागवान मैं अपने बच्चों का भला बुरा समझता हूँ । ,"बिटिया की भलाई के लिये हाँ कर आया हूँ , पर एक बात है जो खटक रही है ।" ,रजोदवी - कौन सी बात ? ,रतन - लड़के की उम्र तनिक ज्यादा है । ,रजोदेवी - लड़के की उम्र लड़की से दो - चार साल अधिक होगी तो चलेगा । ,माली हालत कैसी है ? ,इसकी तहकीक़ात भी कर लेनी चाहिये थी । ,रतन - देखो माली हालत भी उतनी अच्छी नहीं है पर बेटी को सकून की रोटी जरूर मिल सकती है ऐसा मेरा विश्वास है । ,बाकी उसकी तकदीर । ,माँ बेटे दोनों कुछ ना कुछ कमा ही रहे हैं । ,"माँ दाई का काम करती है , बेटा कम्पाउण्डर का ।" ,पुश्तैनी जमीन एकाध बीघा तो होगी ही । ,बिटिया का जीवन आराम से कट जायेगा । ,बड़े घर में बेटी ब्याहने के लिये बड़ी रक़म भी तो चाहिये । ,वो हमारे पास है नहीं । ,देख रही हो बेटवा पढाई छोड़कर माटी फेंक रहा है । ,रजोदेवी - काश मेरी फूल सी बेटी रजनी की जिन्दगी में दुःख की तनिक भी धूप ना पड़ती । ,रतन - रजनी की माँ कितने साल से भटक रहा हूँ । ,बिरादरी में जिनकी हालत तनिक सुधर गयी है वे लड़कों को ब्याह के नाम पर बेच रहे हैं । ,हमारी औक़ात तो बेटी के लिये दूल्हा खरीदने की तो है भी नहीं । ,लड़कियों के लिये दहेज तो ज़हर साबित हो रहा है । ,गरीब घर में बेटी सुरक्षित और सुखी जीवन बिताये तो इससे अच्छी बात हमारे लिये क्या हो सकती है । ,"यहाँ तो दहेज की कोई माँग भी नहीं है , लड़का अच्छा पढ़ा लिखा है ।" ,मुझे तो लगता है कि मेरी बेटी की गृहस्थी बहुत बढ़िया चलेगी । ,रजोदेवी - खैर बैद बाबा की रिश्तेदारी में है तो सब हाल उन्हें मालूम होगा । ,देखो ब्याह करने से पहले गहराई से जाँच - पड़ताल कर लेना । ,रतन - हाँ बेटी के जीवन का मामला है । ,ऐसे तो फेंकना नहीं है । ,गाँव के अनुभवी लोगों से रायमशविरा करके ही ब्याह करूँगा । ,यदि बात नहीं बनी तो छेकाई की रस्म में जो रक़म दिया हूँ वह तो बैद कक्का वापस करवा देंगे । ,ऐसी बात भी हो गयी है । ,रजनी की माँ दुनिया उम्मीद पर टिकी है । ,हमें भी उम्मीद है कि मेरी बेटी बैजू के साथ खुश रहेगी । ,रजोदेवी - देखो तुमको घर - वर पसन्द आ गया है । ,ये अच्छी बात है पर परिवार के लोगों से अपने बड़े भाई साहब से भी समझ लेते । ,रतन - भईया हमारी बात को काटेगा क्या ? ,रजोदेवी - काटेगें तो नहीं पर अपनी आँख से देख लेते तो बात कुछ और होती । ,रतन - मैं तो जबान दे आया हूँ पर तू कह रही है तो यह भी कर लूँगा । ,रजोदेवी - इस बार बड़े भाई साहब के साथ बस्ती के एक दो और अनुभवी लोगों को ले जाकर घर - वर दिखा देना । ,करना अपने मन की पर राय तो ले लेना । ,रतन - क्यों खरचा करवाने की बात करती हो ? ,दो - चार लोगों को लेकर जाऊँगा तो इसमें खर्चा तो होगा कि नहीं पर तुम्हारी बात को भी मानना पड़ेगा । ,रजोदेवी - काश हमारी बात गउरमिण्ट मान लेती । ,रतन - कौन सी बात ? ,यहाँ तो गउरमिण्ट वादे पर चलती है । ,वोट लेते ही मुक़र जाते हैं सब अपनी - अपनी रोटी सेंकने लगते हैं । ,खैर तुम अपनी बात तो बता दो । ,रजोदेवी - जन्म - मरण विभाग की तरह विवाह विभाग बना दे । ,जहाँ लड़की - लड़के के माँ बाप शादी योग्य बच्चों के नाम लिखा देते । ,"उम्र और योग्यता के अनुसार गउरमिण्ट सूचना दे देती , माँ - बाप की स्वीकृति और लड़की - लडके की पसन्द के अनुसार ब्याह का प्रमाण पत्र जारी हो जाता तो इतनी परेशानी नहीं होती ।" ,रतन - काश ऐसा हो जाता पर अभी तो ऐसा कोई कानून नहीं है । ,भविष्य में बने यह तो गउरमिण्ट जाने । ,रही बात रजनी के ब्याह की तो वह तो हमें ही करना है । ,रजोदेवी - रजनी के बाबू तुम थक गये हो आराम करो । ,श्रीधर भी आ गया उसको भी रोटी दे दूँ । ,जब तक बिटिया का ब्याह नहीं होगा तब तक चैन नहीं मिलेगा । ,रतन - हाँ ये तो है बेटी के माँ बाप जो हैं । ,"रजोदेवी - दोनों बेटों , श्रीधर , रामधर , चारों बेटियों रजनी , चिन्ता , मिन्ता और सुगन्दा रोटी परोस कर खुद खाना खायीं रतन तो सबसे पहले खा लिया था ।" ,खाना खाने के बाद रजोदेवी चूल्हा - बर्तन का काम निपटा कर सोने गयी । ,काफी करवटें बदलने के बाद नींद ने दस्तक तो दी पर कुछ ही देर में वह चिल्ला कर बिस्तर से उठी और रजनी की तरफ दौड़ी । ,सोई हुई रजनी को गले लगाकर रोने लगी । ,आहट पाकर रतन भी आ गया । ,हाल देखकर हक्का - बक्का रह गया । ,हिम्मत करके वह बोला श्रीधर की माँ क्या हो गया रजनी को लेकर रो क्यों रही हो ? ,रजोदेवी - बहुत बुरा सपना देखी हूँ । ,रतन - सपना और हकीक़त में अन्तर होता है । ,सपना देखकर इस तरह से विलाप कर रही हो । ,क्या देखा तुमने सपने में कि बिटिया को छाती से लगाकर रो रही हो आधी रात में । ,रजोदेवी - मैं सपने में देखी कि रजो का ब्याह हो गया । ,"रतन - इसमें रोने की कौन सी बात है , ब्याह तो होगा ही ..." ,रजोदेवी - पूरी बात तो सुनो । ,रतन - ठीक है सुनाओ । ,रजोदेवी - ब्याह तो हो गया पर माँग में सिंदूर पड़ते ही एक डरावाना सा आदमी काले भैंसे पर सवार होकर आया और बिटिया निगल गया कहकर आँसू बहाने लगी । ,रतन - रामधर की माँ ये तुम्हारा भ्रम है फिर भी किसी जानकार से समझ लेंगे । ,"देखो श्रीधर , रामधर , रजनी , चिन्ता , मिन्ता और सुगन्दा सभी घबरा गये हैं ।" ,मन से भ्रम का भूत निकाल फेंको और शान्त होकर सो जाओ । ,रजोदेवी - ठीक कह रहे हो । ,रतन बेटी के ब्याह के पहले घर - वर के बारे में जाँच - पड़ताल किया पर उसे गरीबी के अलावा और खोट नजर नहीं आयी खैर गरीब तो खुद रतन भी था । ,बैजू की शिक्षा - दीक्षा से वह काफी प्रभावित था । ,उसको उम्मीद थी कि बैजू को आगे चलकर कोई सरकारी नौकरी मिल जायेगी । ,नहीं भी मिली तो क्या कम्पाउण्डरी की कमाई से गृहस्थी तो आराम से चल सकती है । ,ऊपर से बैजू की माँ की भी कुछ कमाई तो हो ही जाती है । ,अपनी तुलना में उसने बैजू को खाता - पीता पाया और भगवान का नाम लेकर अपनी हैसियत के अनुसार दान - दहेज देकर बिटिया का ब्याह बैजू से कर दिया । ,रजनी मायके से हँसी - खुशी विदा हो गयी । ,ससुराल में सासू माँ ने भी आव - भगत की । ,रजनी को बिटिया मानकर बेटी जैसा बरताव करने लगी । ,एक बात दबी रह गयी थी वह ब्याह के बाद उभर कर आयी । ,बैजू का चाल - चलन ठीक नहीं था । ,उसके बुरे चाल - चलन ने फूल जैसी रजनी का ख्याल नहीं आने दिया । ,वह देर रात में घर आता सुबह जल्दी चला जाता । ,बूढ़ी माँ बहुत समझाती पर उसकी बुरी आदतें नहीं छूटीं । ,साल भर के अन्दर रजनी की गोद हरी हो गयी । ,वह भी एक बेटी की माँ बन गयी । ,बेटी के आते ही बैजू और अधिक लापरवाह हो गया । ,बेटी के जन्म के बाद से रजनी बीमार रहने लगी । ,वही रजनी जिसका मायके में कभी सिर तक नहीं दुखा था । ,बूढ़ी सास से जिसकी आँखों से अब सूझना भी कम हो गया था । ,"घुटने शरीर का भार ढोने में आनाकानी करने लगे थे , जहाँ तक होता दवा - दारू करती पर बैजू ने कभी भूलकर एक गोली तक नहीं दी ।" ,बूढ़ी माँ कहती बेटा बहू की तबियत ठीक नहीं हो रही है । ,दवाई क्यों नहीं देता या अस्पताल ले जाकर क्यों नहीं दिखाता बेचारी खटिया में सटती जा रही है । ,वह कहता इसको दवाई देने से कोई पैसा मिलेगा क्या ? ,अस्पताल ले जाकर इलाज करवाने के लिये मेरे पास पैसे नहीं हैं । ,कौन सा इसका बाप भारी - भरकम दहेज दिया है कि उसी रक़म को इसके इलाज पर खर्च करूँ । ,बूढ़ी माँ कहती बेटा ऐसे कसाई क्यों बन रहे हो ? ,रजनी तुम्हारी धर्मपत्नी है । ,तुम्हारी अर्धागिंनी है । ,उसके इलाज के लिये पैसा माँग रहे हो । ,बेटा ऐसा जुल्म ना कर बहू का इलाज करवा नहीं तो उसकी जान चली जायेगी । ,बेचारी को चलने में चक्कर आ रहे हैं । ,बैजू - कल मरती है तो आज मर जाये । ,मुझे परवाह नहीं और वही हुआ रजनी तड़प् - तड़प् कर मौत से जूझने लगी । ,तब जाकर उस रजनी के मायके किसी पड़ोसी ने खबर पहुँचा दी । ,"खबर मिलते ही रतन , रामधर , रजोदवी और बस्ती के चार छः लोग आये और मृतशैय्या पर पड़ी साल भर की नन्ही सी गुड़िया को छाती से चिपकाये रजनी को लालगंज सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया ।" ,दो - तीन दिन मौत से संघर्ष के बाद रजनी भोर में हार गयी । ,मौत के बाद बैजू ने रजनी की लाश अपने गाँव तक ले जाने को मना कर दिया । ,बूढ़ी माँ बार - बार समझाती रही कि बेटा लड़की की डोली मायके से उठती है और अर्थी सुसराल से । ,रजनी की मृत देह का दाह - संस्कार करना तुम्हारा फर्ज है पर वह नहीं माना । ,माँ एवं अन्य लोगों की बार - बार की समझाईस के बाद बैजू नहीं मान रहा था । ,यह सब रामधर से नहीं देखा गया । ,वह अपने बाप रतन से बोला बाबू बहन को बहनोई ने तड़पा तड़पा कर तो मार ही डाला क्या अब लाश भी सड़ायेंगे ? ,"रतन - बेटा जो उचित समझ तू ही कर , बिटिया के सपनों की बारात में दमाद ने आग लगा दी ।" ,"मेरी मति मारी गयी थी , मैंने बेटी को जल्लाद को सौंप दिया ।" ,रामधर - बाबू अब पछताने से क्या होने वाला है ? ,मेरी बहन तो वापस नहीं आने वाली । ,लाश के दाह संस्कार का इन्तज़ाम मायके वालों को करना होगा । ,मैं इक्का लेकर आता हूँ । ,रामधर इक्का लाया । ,"रामधर , रतन और उसके गाँव से आये लोग लाश को इक्का पर पीछे की तरफ बाँधा ।" ,विलाप करती हुई रजोदेवी और सास आँसू बहाती हुई रजनी की सास भी सवार हो गयी पर बैजू साथ जाने को भी तैयार न थे । ,माँ की कसम के बाद वह भी इक्के पर छाती तान कर बैठ गया । ,इक्कावान ने चाबुक हवा में लहराया और घोड़ा सरपट दौड़ पड़ा । ,दो घण्टे के बाद इक्का रजनी के मायके पहुँच गया । ,"रजनी की लाश को देखकर पूरी बस्ती रो पड़ी पर बैजू की पलकें गीली नहीं हुई , वह ऐसे सीना ताने हुए था जैसे कोई बहादुरी का काम कर रहा हो घरवाली को तड़पा - तड़पा कर मारकर ।" ,लाश को नीम की छांव में पुआल बिछाकर लेटा दिया । ,बस्ती के लोग बाँस काटकर टिकठी बनाने लगे । ,बस्ती के दो लोग कफन एवं दाह संस्कार का सामान लेने के लिए पल्हना बाजार की ओर दौड़ पड़े । ,कुछ ही घण्टों में सारी तैयारी हो गयी और रजनी का जनाजा श्मशान की ओर चल पड़ा । ,"रजोदेवी गुड़िया को छाती से चिपकाये दहाड़ मार - मार कर रोते हुए कह रही थी , क्या भगवान तुमने हमारी बेटी की ऐसी तक़दीर क्यों लिख दी कि जहाँ से डोली उठी थी वहीं से अर्थी उठ रही है ।" ,"केलांग लाहुल स्पिति का सबसे बड़ा व्यापारिक केन्द्र और मुख्य बाजार भी है , जहाँ पर्यटक ऊनी कपड़े , बौद्ध मूर्तियाँ और सजावटी चीजें खरीद सकते हैं ।" ,"केलांग लाहुल स्पिति का सबसे अनोखा और रहस्यमय स्थान है जहाँ न आबादी है , न कोई दुकान ।" ,सिर्फ झील है जो 3 किलोमीटर के घेरे में शांत और स्तब्ध दिखाई देती है । ,चाँदनी रात में केलांग रहना एक नई दुनिया में पहुँच जाना है । ,लेखक स्वयं केलांग में अपना तंबू गाड़ कर रहा है । ,पूरे चाँद के नीचे जब झील धीमी हवा से थिरकती है तो लगता है चाँदनी नर्तकी का रूप ले कर हौलेहौले नाच रही है । ,मुख्य मार्ग से 11 किलोमीटर वाहन द्वारा और 3 किलोमीटर पैदल चल कर चंद्रताल पहुँचते हैं । ,जून से अक्तूबर तक मनाली से समूह के रूप में लोग यहाँ पहुँचते हैं । sg,टूर एंड ट्रेवल या एडवेंचर एजेंसियाँ यह काम सँभालती हैं । sg,चंद्रताल से लौटकर सैलानी बातल नामक पड़ाव से कुंजुम दर्रे की चढ़ाई शुरू करते हैं । ,कुंजुम दर्रे का बेहद जोखिम भरा मार्ग है । ,जरा सी चूक होने पर वाहन सैकड़ों फुट नीचे लुढ़क सकता है । ,सावधानी के कारण कुंजुम दर्रे के क्षेत्र में दुर्घटनाएँ बहुत कम होती हैं । ,काजा स्पिति के किनारे बसा बेहद कठिन जीवन वाला इलाका है जहाँ खुश्क और ठंडी हवाएँ लगातार चलती हैं । ,लेकिन रंगबिरंगी चट्टानें और उनसे बनकर नीचे सरकने वाली रेत नए - नए रूप बना कर पर्यटकों को मोहित करती है । ,रेत पर्वतों की उन चोटियों से सरकती है जिन पर साल भर बर्फ़ के भंडार जमा रहते हैं । ,काजा को सरकारी कर्मचारी अपने लिए ’ काला पानी ’ मानते हैं । ,काजा में अब पेड़ों की कतारें और सेब के पेड़ नजर आने लगे हैं । ,"काजा के पास दुनिया की सबसे ऊँची कही जाने वाली बस्तियों में ’ किब्बर ’ , ’ की ’ और ’ गेते ’ जैसे वे इलाके हैं जहाँ बस और बिजली भी पहुँच चुकी है ।" pl,काजा के बौद्ध विहार और अनोखा जनजीवन पर्यटकों को दंग कर देता है । ,काजा में कुछ गेस्टहाउस भी हैं । ,ताबो को ’ हिमालय की अजंता ’ भी कहते हैं । ,ताबो में उन साधक - साधिकाओं की मूर्तियाँ मौजूद हैं । ,जो 1 हजार साल पहले निर्वस्त्र होकर ध्यानमुद्रा में बैठे रहते थे । sg,मिट्टी की इन मूर्तियों पर अब वस्त्र डाल दिए गए हैं । ,"यहाँ के बौद्ध विहार , ध्यान कक्ष , संग्रहालय और पेंटिंग दर्शनीय हैं ।" ,गोंपा यानी बौद्ध विहार में यात्रियों के ठहरने की किफायती व्यवस्थाएँ हैं । ,गोंपा में छोटा सा बाजार भी है । ,गोंपा क्षेत्र में भ्रमण के लिए मनाली स्थित पर्यटन कार्यालय ( फोन : 01902 - 252175 ) पर पूछताछ करें । ,अनेक इतिहासकार और जम्मू के लोग भी मानते हैं कि गोंपा शहर की स्थापना 14वीं सदी में राजा जंबूलोचन ने की थी । ,कश्मीर का प्रवेशद्वार माना जाने वाला जम्मू शहर तवी नदी के तट पर बसा है । ,समुद्रतल से 305 मीटर की ऊँचाई पर बसे जम्मू शहर का क्षेत्रफल 20 . 36 वर्ग किलोमीटर है । ,18वीं शताब्दी के मध्य से जम्मू में डोगरा राजाओं का राज रहा है । ,इसलिए यहाँ पर बने अनेक मंदिरों के कारण इसे ’ मंदिरों का शहर ’ भी कहा जाता है । ,जम्मू घूमने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से अक्तूबर तक है जब पूरी घाटी हरियाली से सराबोर होती है । ,अक्तूबर के बाद जम्मू का मौसम सर्द होने लगता है । sg,जम्मू - कश्मीर में होने वाली आतंकवादी घटनाओं और धार्मिक व्यापार ने इस क्षेत्र की हालत खराब कर रखी है । ,बाहु किला जम्मू बस अड्डे से 5 किलोमीटर की दूरी पर तवी नदी के बाईं तरफ एक पहाड़ी पर बना है । ,बाहु किले को शहर का सबसे पुराना किला माना जाता है । ,बाहु किले का निर्माण राजा बाहुलोचन ( राजा जंबूलोचन का भाई ) ने 3 हजार साल पहले करवाया था । ,जम्मू से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित है मानसर झील । ,खूबसूरत मानसर झील आसपास स्थित जंगलों से घिरी हुई है । ,खूबसूरत मानसर झील पर्यटन की दृष्टि से एक आदर्श स्थान है । pl,झील में नौकायन करते हुए इस के किनारे पर बने पुराने महल के खंडहर दिखते हैं । ,सुरिनसर झील जम्मू से 42 किलोमीटर दूर है । ,सुरिनसर झील की लम्बाई चौड़ाई मानसर झील से कम है लेकिन इस की खूबसूरती पर्यटकों का मन मोह लेती है । ,जम्मू से लगभग 65 किलोमीटर दूर जम्मू - कश्मीर राज्य के रियासी कसबे में शिवखोड़ी की गुफा कुदरत का एक अजूबा जान पड़ती है । ,गुफा लगभग 150 किलोमीटर लंबी है । ,शिवखोड़ी की गुफा की विशेषता है कि इसका दाहिना हिस्सा बहुत सँकरा है । ,दूर से इस सँकरे को देखने पर लगता है कि इसके अंदर जाना असंभव है लेकिन गुफा के अंदर जाते ही एक चौड़ा मैदान दिखाई देने लगता है । ,"इनमें से ज्यादातर पाँच वर्ष से कम आयु वाले बच्चें होते हैं , वहीं गर्भवती महिलाएँ भी इस रोग के प्रति संवेदनशील होती हैं ।" ,संक्रमण रोकने के प्रयास तथा इलाज करने के प्रयासों के होते हुए भी १९९२ के बाद इसके मामलों में अभी तक कोई गिरावट नहीं आयी है । ,यदि मलेरिया की वर्तमान प्रसार दर बनी रही तो अगले २० वर्षों में मृत्यु दर दोगुनी हो सकती है । ,"मलेरिया के बारे में वास्तविक आँकड़े अनुपलब्ध हैं क्योंकि ज्यादातर रोगी ग्रामीण इलाकों में रहते हैं , ना तो वे चिकित्सालय जाते हैं और ना उनके मामलों का लेखा जोखा रखा जाता है ।" ,मलेरिया और एच.आई.वी. का एक साथ संक्रमण होने से मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है । ,"मलेरिया चूंकि एच.आई.वी. से अलग आयु - वर्ग में होता है , इसलिए यह मेल एच.आई.वी. - टी.बी. ( क्षय रोग ) के मेल से कम व्यापक और घातक होता है ।" ,"तथापि ये दोनों रोग एक दूसरे के प्रसार को फैलाने में योगदान देते हैं - मलेरिया से वायरल भार बढ जाता है , वहीं एड्स संक्रमण से व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाने से वह रोग की चपेट में आ जाता है ।" ,"वर्तमान में मलेरिया भूमध्य रेखा के दोनों तरफ विस्तृत क्षेत्र में फैला हुआ है इन क्षेत्रों में अमेरिका , एशिया तथा ज्यादातर अफ्रीका आता है , लेकिन इनमें से सबसे ज्यादा मौते ( लगभग ८५ से ९० % तक ) उप - सहारा अफ्रीका में होती हैं ।" ,"मलेरिया का वितरण समझना थोडा जटिल है , मलेरिया प्रभावित तथा मलेरिया मुक्त क्षेत्र प्रायः साथ साथ होते हैं ।" ,सूखे क्षेत्रों में इसके प्रसार का वर्षा की मात्रा से गहरा संबंध है । ,डेंगू बुखार के विपरीत यह शहरों की अपेक्षा गाँवों में ज्यादा फैलता है । ,"उदाहरणार्थ वियतनाम , लाओस और कम्बोडिया के नगर मलेरिया मुक्त हैं , जबकि इन देशों के गाँव इस से पीड़ित हैं ।" ,"अपवाद - स्वरूप अफ्रीका में नगर - ग्रामीण सभी क्षेत्र इस से ग्रस्त हैं , यद्यपि बड़े नगरों में खतरा कम रहता है ।" sg,१९६० के दशक के बाद से कभी इसके विश्व वितरण को मापा नहीं गया है । sg,"हाल ही में ब्रिटेन के वेलकम ट्रस्ट ने मलेरिया एटलस परियोजना को इस कार्य हेतु वित्तीय सहायता दी है , जिससे मलेरिया के वर्तमान तथा भविष्य के वितरण का बेहतर ढँग से अध्ययन किया जा सकेगा ।" ,"मलेरिया गरीबी से जुड़ा तो है ही , यह अपने आप में खुद गरीबी का कारण है तथा आर्थिक विकास में बाधक है ।" ,जिन क्षेत्रों में यह व्यापक रूप से फैलता है वहाँ यह अनेक प्रकार के नकारात्मक आर्थिक प्रभाव डालता है । ,"प्रति व्यक्ति जी.डी.पी की तुलना यदि १९९५ के आधार पर करें ( खरीद क्षमता को समायोजित करके ) , तो मलेरिया मुक्त क्षेत्रों और मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में इसमें पाँच गुना का अंतर नजर आता है ( १,५२६ डालर बनाम ८,२६८ डालर ) ।" ,जिन देशों में मलेरिया फैलता है उनके जी.डी.पी में १९६५ से १९९० के मध्य केवल प्रतिवर्ष ०.४ % की वृद्धि हुई वहीं मलेरिया से मुक्त देशों में यह २.४ % हुई । ,"यद्यपि साथ में होने भर से ही गरीबी और मलेरिया के बीच कारण का संबंध नहीं जोड़ा जा सकता है , बहुत से गरीब देशों में मलेरिया की रोकथाम करने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं हो पाता है ।" ,"केवल अफ्रीका में ही प्रतिवर्ष १२ अरब अमेरिकन डालर का नुकसान मलेरिया के चलते होता है , इसमें स्वास्थ्य व्यय , कार्यदिवसों की हानि , शिक्षा की हानि , दिमागी मलेरिया के चलते मानसिक क्षमता की हानि तथा निवेश एवं पर्यटन की हानि शामिल हैं ।" ,कुछ देशों में यह कुल जन स्वास्थ्य बजट का ४० % तक खा जाता है । ,इन देशों में अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों में से ३० से ५० % और बाह्य - रोगी विभागों में देखे जाने वाले रोगियों में से ५० % तक रोगी मलेरिया के होते हैं । sg,एड्स और तपेदिक के मुकाबले २००७ के नवंबर माह में मलेरिया के लिए दुगने से भी ज्यादा ४६.९ करोड़ डालर की सहायता राशि खर्च की गई । ,"मलेरिया के लक्षणों में शामिल हैं - ज्वर , कंपकंपी , जोड़ों में दर्द , उल्टी , रक्ताल्पता ( रक्त विनाश से ) , मूत्र में हीमोग्लोबिन और दौरे ।" ,"मलेरिया का सबसे आम लक्षण है अचानक तेज कंपकंपी के साथ शीत लगना , जिसके फौरन बाद ज्वर आता है ।" ,४ से ६ घंटे के बाद ज्वर उतरता है और पसीना आता है । ,""" पी. फैल्सीपैरम "" के संक्रमण में यह पूरी प्रक्रिया हर ३६ से ४८ घंटे में होती है या लगातार ज्वर रह सकता है ।" ,"पी. विवैक्स "" और "" पी. ओवेल "" से होने वाले मलेरिया में हर दो दिन में ज्वर आता है , तथा "" पी. मलेरिये "" से हर तीन दिन में ।" ,"मलेरिया के गंभीर मामले लगभग हमेशा "" पी. फैल्सीपैरम "" से होते हैं ।" ,यह संक्रमण के 6 से 14 दिन बाद होता है । ,"तिल्ली और यकृत का आकार बढ़ना , तीव्र सिरदर्द और अधोमधुरक्तता ( रक्त में ग्लूकोज़ की कमी ) भी अन्य गंभीर लक्षण हैं ।" ,"मूत्र में हीमोग्लोबिन का उत्सर्जन और इससे गुर्दों की विफलता तक हो सकती है , जिसे कालापानी बुखार ( अंग्रेजी : "" blackwater fever "" , "" ब्लैक वाटर फ़ीवर "" ) कहते हैं ।" ,"गंभीर मलेरिया से मूर्च्छा या मृत्यु भी हो सकती है , युवा बच्चे तथा गर्भवती महिलाओं में ऐसा होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है ।" ,अत्यंत गंभीर मामलों में मृत्यु कुछ घंटों तक में हो सकती है । ,गंभीर मामलों में उचित इलाज होने पर भी मृत्यु दर 20 % तक हो सकती है । ,"महामारी वाले क्षेत्र में प्रायः उपचार संतोषजनक नहीं हो पाता , अतः मृत्यु दर काफी ऊँची होती है और मलेरिया के प्रत्येक 10 मरीजों में से 1 मृत्यु को प्राप्त होता है ।" ,मलेरिया युवा बच्चों के विकासशील मस्तिष्क को गंभीर क्षति पहुंचा सकता है । ,बच्चों में दिमागी मलेरिया होने की संभावना अधिक रहती है और ऐसा होने पर दिमाग में रक्त की आपूर्ति कम हो सकती है और अक्सर मस्तिष्क को सीधे भी हानि पहुँचाती है । ,अत्यधिक क्षति होने पर हाथ - पांव अजीब तरह से । sg,दीर्घ काल में गंभीर मलेरिया से उबरे बच्चों में अकसर अल्प मानसिक विकास देखा जाता है । ,"गर्भवती स्त्रियाँ मच्छरों के लिए बहुत आकर्षक होती हैं और मलेरिया से गर्भ की मृत्यु , निम्न जन्म भार और शिशु की मृत्यु तक हो सकते हैं ।" ,"मुख्यतया यह "" पी. फ़ैल्सीपैरम "" के संक्रमण से होता है , लेकिन "" पी. विवैक्स "" भी ऐसा कर सकता है ।" ,एक ऐसा समय भी था जब तलश्शेरी में ब्रिटेन और श्रीलंका से खेलने के लिए क्रिकेट क्लब आते थे । sg,इस प्रकार तलश्शेरी को उन स्थानों में अग्रगणनीय स्थान दिया जा सकता है जहाँ क्रिकेट खेल का आयोजन सर्वप्रथम हुआ था । ,सर्कस परंपरा में भी तलश्शेरी का महत्वपूर्ण योगदान है । sg,तलश्शेरी के सर्कस कलाकारों ने सर्वोत्तम प्रदर्शन प्रस्तुत कर अंन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर यश अर्जित किया । ,भारत के महत्वपूर्ण सर्कस सितारों में एक ' उड़ती बिजली ' तलश्शेरी की संतान हैं । ,मिठाइयाँ बनाने और नई - नई मिठाइयों का प्रयोग कर देखने में तलश्शेरी के लोग सिद्धहस्त हैं । ,केरल का प्रमुख ' बेकरी परिवार ' ( Bakery Family ) मांपल्लि है । ,' बेकरी परिवार ' का बेकरी क्षेत्र में 120 वर्ष का अनुभव है । ,मांपल्लि परिवार ने केरल के एक कोने से दूसरे कोने तक बेकरी की स्थापना करके एक नई क्रान्ति चलाई । ,आज भी केरल में कुछ स्थानों पर मांपल्लि वालों की बेकरियाँ शान से खड़ी हैं । ,तलश्शेरी की लोगन स्ट्रीट ( गली ) एक अन्य आकर्षण है । ,"यह स्थान मिठाइयाँ , सेवईयाँ , कपड़े और बिरियानी के लिए प्रसिद्ध है ।" ,लोगन स्ट्रीट में स्थित पैरिस होटल बिरियानी के लिए मशहूर है । ,"तलश्शेरी के दूसरे आकर्षण हैं 143 वर्ष पुराना ब्रन्नन कॉलेज , हेरमन गुण्डेर्ट का निवासस्थान जो ' इल्लिक्कुन्नु बँगला ' नाम से जाना जाता है , तथा तलश्शेरी किला आदि ।" ,फोर्ट अगॉडा से शुरू होने वाला नॉर्थ गोवा का समुद्र तट लगभग 30 किमी. लंबा है । ,तलश्शेरी में एक रेलवे स्टेशन है । ,तलश्शेरी से निकटतम एयरपोर्ट करिप्पूर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है । ,तोडिक्कुळम शैव मंदिर अत्यंत पुराना है । ,कुछ लोगों के अनुसार तोडिक्कुळम का दुमंजिला चौकोना मंदिर दो हज़ार वर्ष पुराना है । ,विशिष्ट भित्तिचित्र इस मंदिर की विशेषता है । ,तोडिक्कुळम में श्रीमंदिर ( गर्भगृह ) की दीवारों पर 40 पंक्तियों में 700 वर्ग चौड़ाई पर चित्रित लगभग 150 भित्तिचित्र हैं । ,"इन चित्रों के प्रमुख विषय हैं ' रुक्मिणी स्वयंवर ' , ' रावणव - वध ' आदि ।" ,साथ ही दूसरे अनेक चित्र हैं जो ग्रामीण जीवन का प्रतिपादन करते हैं और जिनका काल 16वीं - 18वीं शताब्दी हैं । ,तोडिक्कुळम से निकटतम रेलवे स्टेशन - तलश्शेरी 34 कि.मी. की दूरी पर है । ,"तोडिक्कुळम से निकटतम एयरपोर्ट - करिप्पूर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा , 71 कि.मी. दूर है ।" ,परश्शिनिक्कटवु श्रीमुत्तप्पन मंदिर में अपूर्व एवं अनुपम धार्मिक अनुष्ठान एवं आचार संपन्न होते हैं । ,परश्शिनिक्कटवु श्रीमुत्तप्पन मंदिर में विभिन्न धर्मों - जातियों के लोग उपासना के लिए आते हैं । ,परश्शिनिक्कटवु श्रीमुत्तप्पन मंदिर ' वसुधैवकुटुम्बकम् ' विचार का पालन करता है । ,परश्शिनिक्कटवु श्रीमुत्तप्पन में किसी भी जाति - धर्म को मानने वाला भक्त प्रवेश कर सकता है । ,मुत्तप्पन मंदिर वळपट्टणम नदी तट पर स्थित है । ,मुत्तप्पन मंदिर कण्णूर से 20 कि.मी. दूर है । sg,मुत्तप्पन में तेय्यम नामक लोकनृत्य भी देखा जा सकता है । ,प्रस्तुत मंदिर की स्थापना के पीछे एक किंवदन्ती है । ,यहाँ एक बालक अकस्मात प्रकट हुआ । ,कुछ चमत्कारपूर्ण घटनाओं के उपरान्त लुप्त हो गया था । ,बालक के लुप्त होने के बाद भगवत् अनुभूति लोगों को वहाँ हुई । ,परिणाम स्वरूप यह मंदिर बनवाया गया था । ,सन् 1683 से ईस्ट इंडिया कंपनी तलश्शेरी के साथ लगातार सम्बंध बनाए रखती आई थी । sg,1703 में कंपनी ने तलश्शेरी में एक किला बनवाया । ,बाद में तलश्शेरी के इस किले के इर्द - गिर्द शहर का विकास हुआ । ,यह किला इतिहास के अध्येताओं को प्रिय है । ,तलश्शेरी के इस किले की दीवारें बहुत ही ऊँची हैं । ,तलश्शेरी के इस किले में कई ऐसी रहस्यपूर्ण सुरंगे हैं जो समुद्र की तरफ खुलती हैं । ,वळपट्टणम लकड़ी के उद्योग में समूचे एशिया में सर्वाधिक प्राचीन उद्योग स्थल है । ,"वळप्पट्टणम नदी तट के घने जंगल से प्राप्त सागौन , इरुलि , इलवा , करिमुरिक्कु , चंदन आदि वृक्षों की लकड़ियों से वळपट्टणम का लकड़ी उद्योग संपन्न है ।" ,वेस्टर्न इंडिया प्लाईवुड लिमिटेड वळपट्टणम की लकड़ी उद्योग कंपनी दक्षिण - पूर्व एशिया की प्रमुख लकड़ी उद्योग कंपनी है । ,"वळपट्टणम में चाय , कॉफी , तम्बाकू , काजू आदि की खेती भी होती है ।" ,"केरल में तम्बाकू , कृषि के अपूर्व खेतों में वळपट्टणम का नाम आता है ।" ,"दूसरे आकर्षण हैं मछली संग्रहण केन्द्र , जलसिंचन केन्द्र आदि" ,"वळपट्टणम से निकटतम रेलवे स्टेशन - कण्णूर , 7 कि.मी. की दूरी पर स्थित है ।" ,"वळपट्टणम से निकटतम एयरपोर्ट - करिप्पूर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा , 100 कि.मी. दूर है ।" ,कौसानी बस स्टैंड से कुछ ही दूरी पर हिंदी के प्रमुख कवि सुमित्रानंदन पंत की स्मृति में स्थापित पंत संग्रहालय साहित्यप्रेमी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र है । ,कौसानी से 17 किलोमीटर की दूरी पर बैजनाथ पुरातात्विक महत्व के मंदिरों का समूह है । ,बैजनाथ पुरातात्विक महत्व के मंदिरों का निर्माण 12वीं व 13वीं शताब्दी में कत्यूरी वंश के राजाओं के द्वारा कराया गया । ,"9,050 फुट की ऊँचाई पर कौसानी 20 किलोमीटर दूर पिनाकेश्वर ट्रैकिंग में रूचि रखने वालों की पसंदीदा जगह है ।" ,पिनाकेश्वर से दूर तक फैली घाटी का विहंगम दृश्य दिखाई देता है । ,कौसानी से 39 किलोमीटर की दूरी पर बागेश्वर गोमती और सरयू नदी के संगम पर स्थित है । ,बागेश्वर किसी समय कुमाऊँ की प्रमुख व्यापारिक मंडी हुआ करती थी । ,आज भी बागेश्वर कुमाऊँ के महत्वपूर्ण स्थानों में से एक है । ,कौसानी से 85 किलोमीटर पर चौकोड़ी को प्रकृति का अनूठा वरदान प्राप्त है । ,चौकोड़ी से सूर्यास्त की अद्भुद छटा देखते ही बनती है । ,"चौकोड़ी में ठहरने के लिए होटल , लॉज आदि हैं ।" ,पर्यटक यदि पिंडारी ग्लेशियर देखने का कार्यक्रम बनाएँ तो इसके लिए कुमाऊँ मंडल विकास निगम के नैनीताल स्थित मुख्यालय से संपर्क कर सकते हैं । sg,कुमाऊँ मंडल विकास निगम प्रतिवर्ष पिंडारी ग्लेशियर जाने के लिए टूर आयोजित करता है । ,"टूर में रास्ते में ठहरने , भोजन की व्यवस्था , गाइड , पोर्टर आदि का खर्च शामिल है ।" ,मई से जून या फिर मध्य सितंबर - अक्तूबर के महीने में यहाँ की यात्रा की जा सकती है । ,शेष महिने मौसम के लिहाज से ठीक नहीं हैं । ,पिंडारी ग्लेशियर के लिए कौसानी से 39 किलोमीटर दूर बागेश्वर पहुँचना होगा । sg,बागेश्वर से 25 किलोमीटर की दूरी पर कपकोट तथा कपकोट से 16 किलोमीटर आगे लोहारखेत से पिंडारी ग्लेशियर की 35 किलोमीटर की यात्रा पैदल या घोड़े से तय करनी पड़ती है । ,"अद्भुत पिंडारी ग्लेशियर 3,820 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है ।" ,यहाँ बहने वाली पिंडर नदी के नाम पर इस का नाम ’ पिंडारी ग्लेशियर ’ पड़ा । ,ट्रैकिंग के लिए पिंडारी ग्लेशियर बहुत ही सुंदर है । ,पूरे मार्ग पर रहने खाने की ब्यवस्था के कारण पिंडारी ग्लेशियर की यात्रा अब आसान हो गई है । ,"कफनी ग्लेशियर के लिए लोहार खेत , धाकुड़ी व खाती होते हुए द्वाली पहुँचना होगा ।" ,द्वाली से कफनी की दूरी 20 किलोमीटर है । ,ट्रैंकिंग से संबंधित समस्त व्यवस्थाएँ कुमाऊँ मंडल विकास निगम द्वारा की जाती हैं । sg,राजस्थान का नाम वहाँ के रेगिस्तान और रेत के कारण ही नहीं जाना जाता । ,राजस्थान की संस्कृति और धार्मिक परम्पराएँ देश भर में अनोखा स्थान रखती है । ,राजस्थान के स्थापत्य और किले अपने सौंदर्य और उत्कृष्ट कारीगरी के लिये विश्वभर में जाने जाते हैं । ,जयपुर राजस्थान की राजधानी है । ,"जयपुर नगर से लगभग 12 किलोमीटर दूर एक छोटी सी नगरी है "" आमेर "" ।" ,आमेर नगरी अपने प्रसिद्ध किले और मंदिर के प्रसंग में विश्वभर में जानी - पहचानी जाती है । ,"जयपुर से दिल्ली मार्ग पर अरावली की एक छोटी और सुन्दर टेकड़ी पर बसी यह नगरी "" आमेर "" अपने दो संदर्भों में वहाँ के लोगों की किंवदंतियों और चर्चाओं में जीवित है ।" ,"कुछ लोगों का कहना है कि अम्बकेश्वर भगवान शिव के नाम पर यह नगर "" आमेर "" बना ।" ,परन्तु अधिकांश लोग और तार्किक अर्थ अयोध्या के राजा भक्त अम्बरीश के नाम से जोड़ते हैं । ,"शीतला - माता का प्रसिद्ध यह देव - स्थल भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने , देवी चमत्कारों के कारण श्रद्धा का केन्द्र है ।" ,शीतला - माता की मूर्ति अत्यंत मनोहारी है । ,"शीतला - माता का प्रसिद्ध यह देव - स्थल भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने , देवी चमत्कारों के कारण श्रद्धा का केन्द्र है ।" ,निकट में ही वहाँ जगत शिरोमणि का वैष्णव मंदिर है । ,वैष्णव मंदिर का तोरण सफ़ेद संगमरमर का बना है और उसके दोनों ओर हाथी की विशाल प्रतिमाएँ हैं । ,आम्बेर का किला अपने शीश महल के कारण भी प्रसिद्ध है । ,सुख महल व किले के बाहर झील बाग का स्थापत्य अपूर्व है । ,भक्ति और इतिहास के पावन संगम के रूप में स्थित आमेर नगरी अपने विशाल प्रासादों व उनपर की गई स्थापत्य कला की आकर्षक पच्चीकारी के कारण पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है । ,पत्थर के मेहराबों की काट - छाँट देखते ही बनती है । ,आमेर का विशेष आकर्षण है डोली महल । ,"डोली महल का आकार उस डोली ( पालकी ) की तरह है , जिनमें प्राचीन काल में राजपूती महिलाएँ आया - जाया करती थीं ।" ,इन्हीं महलों में प्रवेश द्वार के अन्दर डोली महल से पूर्व एक भूल - भूलैया है । sg,भूल - भूलैया में राजे - महाराजे अपनी रानियों और पटरानियों के साथ आँख - मिचौली का खेल खेला करते थे । ,आमेर के महलों के पीछे दिखाई देता है नाहरगढ़ का ऐतिहासिक किला । ,नाहरगढ़ के ऐतिहासिक किले में अरबों रुपए की सम्पत्ति ज़मीन में गड़ी होने की संभावना और आशंका व्यक्त की जाती है । ,आमेर नगरी और वहाँ के मंदिर तथा किले राजपूती कला का अद्वितीय उदाहरण है । ,इसमें स्काइप वीडियो चैट के अलावा मौसम की जानकारी और नक्शों के ज़रिए रास्ता बताने की सुविधा भी होगी । ,चश्मे में मौजूद वाइस कमांड और रिकॉर्डिंग की सुविधा के जरिए इसे नियंत्रित किया जा सकेगा । ,यह सारी जानकारी एक साफ - सुथरे और पारदर्शी चौकोर से बने बॉक्स में ' हेडगियर ' के दाहिने हिस्से के ऊपरी भाग में दिखाई देगी । ,गूगल ने इसे एक वीडियो के जरिए आम लोगों के सामने प्रस्तुत किया और लोगों से इस उपकरण पर सुझाव भी मांगे । ,अगले मोबाइल युग के बाद टैबलेट्स और आईपैड का समय आया । ,अब टैबलेट्स के बाद आएगा स्मार्ट आई वॉच का जमाना । ,"स्मार्ट आईवॉच , स्मार्टफोन्स की दुनिया को पूरी तरह बदलकर रख देगी ।" ,अपने आईफोन्स और आईपैड से तहलका मचा चुकी एपल अब आईवॉच लांच करने की तैयारी कर रही है । ,आईवॉच आने के बाद आप अपनी कलाइयों से बातें करते नजर आएंगे । ,दिखने में साधारण घड़ी लगने वाले स्मार्ट ऑईवॉच में वे सभी खूबियां हैं जो आपको स्मार्ट फोन में मिलती हैं । ,खबरों की मानें तो इसी साल गैजेट्स के दीवानों का इंतजार खत्म हो जाएगा और आईवॉच बाजार में आ सकती है । ,मोबाइल की कीमतों में अब एंड्राइड टैबलेट्स मिलने लगे हैं । ,एक वक्त एप्पल आईपैड सेमसंग गैलेक्सी टैब और ब्लैकबेरी प्लेबुक जैसी कंपनियों के टैबलेट्स की दुनिया में नाम था । ,बहुत से भारतीय गैजेट्स प्रेमियों से ये दूर थे । ,अब गैजेट्स की दुनिया में देखा जाए तो बहुत सी कंपनियों के टैबलेट्स भारतीय उपभोक्ताओं की पहुंच में हैं । ,कंपनियां भी कम कीमतों में भारतीय उपभोक्ताओं के लिए टैबलेट्स पेश कर रही हैं । ,लावा और वीडियोकॉन के टैबलेट्स में से कौनसा बेहतर है । ,लावा ने अपना टैबलेट्स जेड7एच प्लस और वीडियोकॉन ने वीटी 71 टैबलेट बाजार में उतारा । ,दोनों 5000 के भीतर उपभोक्ताओं की पहुंच में हैं । ,दोनों टैबलेट्स में 7 इंच का कैपेसेटिर मल्टीटच डिस्प्ले 800 द् 480 पिक्सल के रिसल्यूशन के साथ NULL । ,"वीटी 71 में 1.2 गीगाहर्ट्ज रॉकचीप आरके 2918 प्रोसेसर है , वहीं जेड7एच प्लस में 1 गीगाहर्ट्ज कोरटेक्स ए8 प्रोसेसर है ।" ,दोनों टैबलेट्स एंड्राइड 4.0 आइसक्रीम सैंडविच प्लेटफॉर्म पर चलते हैं । ,दोनों टैबलेट्स में भी यहां समान मुकाबला है । ,0.3 मैगापिक्सल का फ्रंट कैमरा वीडियो कॉलिंग के लिए NULL । ,"दोनों टैबलेट्स में 4 जीबी इंटरनल स्टोरेज मैमोरी , 512 एमबी रैम और 32 जीबी का माइक्रो कार्ड स्लॉट NULL ।" ,"वीटी 71 में थ्रीजी डोंगल , वाईफाई , माइक्रो यूएसबी 2.09 , यूएसबी ओटीजी स्पोर्ट और एचडीएमआई आउट NULL ।" ,"दूसरी तरफ जेड7एच प्लस में वाईफाई , थ्रीजी डोंगल और माइक्रो यूएबी 2.0 है ।" ,वीटी 71 में 3200 एमएएच बैटरी वहीं जेड7एच प्लस में 2800 एमएएच बैटरी है । ,"वीडियोकॉन वीटी 71 की कीमत जहां 4,799 है वहीं लावा के जेड7एच प्लस 5,499 रु. में मिल जाएगा ।" ,दोनों टैबलेट्स में रियर कैमरे की कमी है । ,मोबाइल बनाने वाली बड़ी कंपनियों में से एक एप्पल ने आईपैड का सबसे लेटेस्ट वर्जन आईपैड - 4 को बाजार में लांच किया है । ,फोर्थ जनरेशन वाले इस टैबलेट पीसी आईपैड - 4 की स्टोरेज क्षमता 128 जीबी है । ,इससे पहले वाले आईपैड में स्टोरेज क्षमता 64 जीबी थी । ,आईपैड - 4 की कीमत 799 डॉलर है जबकि इसका एलटीई मॉडल 929 डॉलर में मिलेगा । ,आईपैड - 4 5 फरवरी को मार्केट में आएगा । ,"ब्लैकबेरी बनाने वाली कनेडियन कंपनी रिसर्च इन मोशन ( रिम ) आईफोन 5 , सैमसंग गैलेक्सी एस 3 और नोट 2 के मुकाबले अपना नया ब्लैकबेरी 10 ओएस लांच कर दिया ।" ,कंपनी के सीईओ थार्सटन हेन्स ने कहा कि कंपनी ने कारोबार और ब्रांड के बदलाव की यात्रा की है । ,"ब्लैकबेरी ने अपनी नई पहचान और अपना नया ऑपरेटिंग सिस्टम विभिन्न शहरों नई दिल्ली , लंदन , पेरिस , जोहानसबर्ग , टोरंटो , जकार्ता और दुबई में पेश किया ।" ,ब्लैकबेरी 10 अपने फीचर्स से मोबाइल उपभोक्ताओं को लुभाएगा । ,इसका नया टच की बोर्ड और तेज चलने वाला ब्राउजर इसकी खूबियों में से एक है । ,"इस फोन में फिलिकल की - बोर्ड ऑप्शन नहीं है , यह फुल टच स्क्रीन फोन है ।" ,जो इस नए मॉडल की सबसे बड़ी खूबी है । ,ब्लैकबेरी 10 में बैलेंस फीचर दिया गया है जो पर्सनल लाइफ और ऑफीशियल लाइफ का बैलेंस रखेगा । ,इस स्मार्टफोन में पर्सनल डेटा और ऑफीशियल डेटा अलग - अलग रख सकते हैं । ,ब्लैकबेरी 10 में शानदार स्पोर्ट कैमरा है जिसमें मौजूद टाइम शिफ्ट का फीचर की मदद से मिलिसेकेंड के अंतर में फोटो कैपचर किया जा सकता है । ,यानी आप एक्सप्रेशन्स को बेहतर तरीके से कैप्चर कर सकते हैं । ,"ब्लैकबेरी 10 में हर तरह की मैसेजिंक के लिए वन स्टॉप शॉप है जहां बीबीएम , ई - मेल , सोशल मीडिया को अपडेट रखने के साथ टेक्स्ट मैसेज साथ में हैं ।" ,ब्लैकबेरी 10 में कोई भी होम बटन नहीं दी गई है । ,इसमें गश्चर बेस होम पेज ऑप्शन दिया गया है जो इसे अन्य स्मार्ट फोन्स से अलग बनाता है । ,नोकिया का इस हैंडफोन के बारे में दावा है कि इसकी ब्राउजिंग आम मोबाइल फोन के मुकाबले 85 प्रतिशत अधिक है । ,ऊँचाई से गिरता हुंडरू झरना अद्भुत नजारा बनाता है और नीचे पहुँच कर स्वर्णरेखा नदी में तब्दील हो जाता है । ,जोन्हा फॉल में राहु नदी का पानी 14 फुट की ऊँचाई से गिरता है । ,जोन्हा फॉल रांची से 49 किलोमीटर दूर है । ,फॉल के नजदीक जाने के लिए 489 सीढ़ियाँ बनी हुई हैं । ,सीढ़ियों पर चढ़ते - उतरते समय काफी सावधानी रखनी चाहिए । ,"रांचीपुरुलिया मार्ग पर स्थित इस फॉल तक कार , बस , ट्रैकर आदि से पहुँचा जा सकता है ।" ,रांची से करीब 144 किलोमीटर दूर रांचीपुरुलिया रोड पर स्थित है सीता फॉल । pl,सीता फॉल का 280 फुट से गिरता पानी पर्यटकों को बरबस अपनी ओर खींचता है । ,रांची से 70 किलोमीटर दूर रांची चाईबासा रोड पर स्थित हिरनी फॉल का कलकल करता पानी 120 फुट की ऊँचाई से गिरता है । ,पंचघाघ 5 जलप्रपातों के एक साथ गिरने का स्थान है । sg,बालू से भरे किनारे और हरेभरे जंगल के बीच 5 जलप्रपातों का साथसाथ एक कतार में गिरना मनोहारी दृश्य प्रस्तुत करता है । ,"रांची से 40 और खूंटी से 5 किलोमीटर की दूरी पर पंचघाघ तक कार , बस , मोटरसाइकिल से पहुँचा जा सकता है ।" ,रांची से 6 किलोमीटर दूर मोरहाबादी हिल टैगोर हिल के नाम से मशहूर है । ,मोरहाबादी हिल पर रवींद्रनाथ टैगोर के बड़े भाई ज्योतिरेंद्र नाथ टैगोर का घर था । ,ज्योतिरेंद्र नाथ टैगोर अपने जीवन के अंतिम क्षण 1925 तक मोरहाबादी हिल पर रहे । ,महाकवि रवींद्रनाथ अक्सर मोरहाबादी हिल आते थे । ,राक गार्डन और कांके डैम रांची के प्रसिद्ध बगीचे हैं । ,रांची के कांके रोड पर स्थित रॉक गार्डन से प्राकृतिक सौंदर्य का घंटों आनंद उठाया जा सकता है । sg,कांके डैम के पीछे कलात्मक रॉक गार्डन बनाया गया है । pl,रॉक गार्डन में बने फौआरे और मूर्तिशिल्प लोगों को अपनी ओर खींचते रहे हैं । ,रॉक गार्डन से सटे गोंदा पहाड़ी के पास डैम स्थित है जो मशहूर पिकनिक स्थल है । ,चौबटिया एक बगीचा है । ,"जैसा कि नाम से जाहिर है , चौबटिया में फलों के चार बगीचे हैं ।" ,खास तौर पर चौबटिया स्वादिष्ट सेब के बगीचे के लिए जाना जाता है । ,चौबटिया में उत्तराखंड सरकार का उद्यान व फल अनुसंधान केन्द्र भी देखने योग्य है । ,चौबटिया के पास ही एक जलप्रपात है । ,सैर सपाटे और पिकनिक के लिए चौबटिया एक अच्छी जगह है । ,रानीखेत से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ताड़ी खेत गाँधी आश्रम के लिए जाना जाता है । ,ताड़ी खेत में गाँधी जी ने कुछ समय बिताया था । ,खड़ी बाजार रानीखेत का मुख्य बाजार है । ,खड़ी बाजार के दोनों ओर दुकानें हैं । pl,खड़ी बाजार से आप काष्ट कला की वस्तुएँ खरीद सकते हैं । ,"कौसानी का निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है , जो कौसानी से 140 किलोमीटर दूर है ।" ,जुलाई अगस्त को छोड़कर आप कभी भी कौसानी घूमने का कार्यक्रम बना सकते हैं । ,बरसात के मौसम में भूस्खलन या अन्य कारणों से मार्ग बाधित होने पर आपको असुविधा हो सकती है । ,"अप्रैल से जून तक पर्यटक सीजन पीक पर होता है , इसलिए होटल की एडवांस बुकिंग करवा लेना जरूरी है ।" ,अक्तूबर - नवंबर में मौसम काफी सुहावना रहता है । ,कौसानी घूमने का अक्तूबर - नवंबर सबसे उपयुक्त समय है । ,अक्तूबर - नवंबर में चाँदी सी चमकती हिमालय की गगनचुंबी चोटियाँ साफ नजर आती हैं । ,जनवरी - फरवरी में हिमपात बहुत कम समय के लिए होता है । ,कौसानी में स्थानीय यातायात की सुविधा है । ,कुमाऊँ मोटर ओनर्स यूनियन लिमिटेड की बस सेवा आसपास के सभी प्रमुख स्थानों के लिए उपलब्ध है । ,इसके अलावा टैक्सी द्वारा भी आप निकट के दर्शनीय स्थलों के भ्रमण का कार्यक्रम बना सकते हैं । ,कौसानी के प्राकृतिक सौंदर्य व शांत मनोरम वातावरण से अभिभूत होकर महात्मा गाँधी ने 12 दिन कौसानी में बिताए थे और ’ अनासक्ति - योग ’ नामक पुस्तक की रचना की थी । ,गाँधी जिस भवन में ठहरे थे वह आज ’ अनासक्ति - आश्रम ’ के नाम से जाना जाता है । sg,"300 किलोमीटर के अर्द्धवृत्ताकार घेरे में फैली बर्फ़ से ढकी चौखंबा , त्रिशूल , नंदादेवी , पंचाचूली , नंदाकोट आदि चोटियों पर पड़ती उगते सूरज की किरणें इन चोटियों को मनमोहक रूप प्रदान करती हैं ।" ,कोसी और गोमती नदी के मध्य पिगनाथ शिखर पर स्थित कौसानी पहले वलना नाम से जाना जाता था । ,"प्राचीन समय में कौसानी की उत्तरी चोटी पर कार्तिकेयपुर राज्य बसा था , जिसके अवशेष आज भी दिखाई देते हैं ।" sg,शहरी कोलाहल और भीड़भाड़ से दूर कौसानी का शांत प्राकृतिक वातावरण पर्यटकों को सुकून प्रदान करता है । ,कौसानी में आधुनिक सुविधाओं से युक्त अनेक होटल हैं । ,इनके साथ - साथ जम्मू के अन्य महत्वपूर्ण मंदिरों में जम्मू के आलीशान स्थान गांधी नगर के इलाके में लक्ष्मी नारायण मंदिर और पंज मंदिर भी स्थित हैं । ,अमर महल से तो नज़र हटाना मुश्किल हो जाता है । ,वह भव्य महल शानदार फ्रांसीसी कासिल की याद दिलाता है । ,अमर महल की ऊँची मीनारें और ढलवाँ छतें आकर्षित करती हैं और सबका मन मोह लेती हैं । ,अमर महल को अब संग्रहालय में बदलकर पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है । ,अमर महल में प्राचीन पुस्तकों और पेंटिंग्स का अनूठा और श्रेष्ठ संग्रह है । sg,अमर महल संग्रहालय में नल दमयंती की कथा की समूची मिनिएचर पेंटिंग श्रृंखला देखी जा सकती है । ,जम्मू शहर में पुराने बाज़ार और डिज़ाइनदार बुटीक के प्राचीन और नवीन स्वरूप का एक अद्भुत संगम है । ,बाज़ारों की रौनक में घुलते मिलते आपको ये दोनों स्वरूप दिखाई देते हैं । ,रघुनाथ बाज़ार की भीड़ भरी गलियों में सदियों से पुस्तैनी चली आ रही मेवे की दुकानों के बीचों - बीच आधुनिकता की प्रतीक डिज़ाइनर बुटीक पर नए से नए फैशन के कपड़े और चीज़ें आपको चौंका देंगी । ,"वीर मार्ग , रघुनाथ बाज़ार और हरी मार्केट जम्मू के अन्य बाजार हैं ।" ,"जो कश्मीरी दस्तकारी , पारम्परिक डोगरा जेवरों और अखरोट सहित विभिन्न प्रकार के मेवों के लिए मशहूर हैं ।" ,"जम्मू बेहतरीन किस्म के बासमती चावल , लम्बे लाल दाने वाले राजमा , सूखे और अन्य अलग - अलग किस्म के आम पापड़ , अनार के सुखाए गए बीजों का अनारदाना और गाढ़े दूध से बनी लज्जतदार बर्फी के लिए भी मशहूर है ।" ,जम्मू कैसे पहुँचा जाए । ,हवाई यात्रा : pl,"इण्डियन एयरलाइंस , जम्मू और श्रीनगर / लेह के लिए नियमित उड़ानें चलाती है ।" ,जम्मू हवाई अड्डा शहर के मध्य से आठ किलोमीटर की दूरी पर है । ,जम्मू - दिल्ली और जम्मू - श्रीनगर के बीच जेट एयरवेज की सेवाएँ भी हैं । ,जम्मू - कश्मीर राज्य के लिए उत्तर रेलवे का मुख्य और महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन जम्मू तवी है । ,"जम्मू आने - जाने वाली मुख्य रेलगाड़ियाँ हैं - मालवा एक्सप्रेस , सुपरफास्ट , जम्मू मेल , जम्मू एक्सप्रेस , शालीमार एक्सप्रेस , सियालदाह एक्सप्रेस , झेलम एक्सप्रेस , हिमगिरी एक्सप्रेस , हिमसागर एक्सप्रेस , लोहित एक्सप्रेस , सर्वोदय एक्सप्रेस , हापा एक्सप्रेस , नवयुग एक्सप्रेस , गोरखपुर एक्सप्रेस , बरौनी एक्सप्रेस , मद्रास एक्सप्रेस , राजधानी एक्सप्रेस और फिरोजपुर एक्सप्रेस ।" ,जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग 1 - ए पर स्थित है और देश के सभी हिस्सों से राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा है । ,"जम्मू से दिल्ली , अमृतसर , अम्बाला , चण्डीगढ़ , लुधियाना , जालंधर , पठानकोट , शिमला और मनाली के बीच इन सभी मार्गों पर सामान्य डीलक्स और वीडियो बसें बराबर आती - जाती रहती हैं ।" ,"जम्मू - कश्मीर राज्य सड़क परिवहन निगम की बसें जम्मू को उत्तरभारत - दिल्ली , हरियाणा , हिमाचल प्रदेश , पंजाब और चण्डीगढ़ से जोड़ती हैं ।" ,सभी अंतर्राज्यीय बसें रेलवे स्टेशन से आती - जाती हैं । ,"श्रीनगर के लिए सुपर डीलक्स , डीलक्स , वीडियो कोच और ए - क्लास बसें रेलवे स्टेशन से आती - जाती हैं ।" ,श्रीनगर के लिए बी - क्लास बसें जनरल बस स्टैण्ड से चलती हैं । ,"जम्मू - कश्मीर एसआरटीसी यानी राज्य का सड़क परिवहन का जनरल बस स्टैण्ड , पर्यटक स्वागत केंद्र से आधा किलोमीटर दूर है ।" sg,इसके अलावा कुछ ट्रैवल एजेंसियाँ भी मुख्य रास्तों पर डीलक्स / वीडियो कोच चलाती हैं । ,"स्थानीय रूप से घूमने या किसी अन्य पर्यटन स्थल तक आने - जाने के लिए स्पेशल टूरिस्ट टैक्सी एसोसिएशन , पर्यटन स्वागत केंद्र , वीर मार्ग से फोन:246266 पर सम्पर्क करें ।" ,शहर में निश्चित रास्तों पर आने - जाने के लिए मिनी बसों का सबसे अधिक इस्तेमाल होता है जो शहर के लगभग सभी स्थानों पर जाती हैं । sg,"इन सबके अलावा जम्मू - कश्मीर पर्यटक विकास निगम जेकेटीडीसी , टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर , होटल ब्लॉक , वीर मार्ग में हर बजट में ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराता है ।" ,यहाँ एसी और नॉन एसी दोनों तरह के कमरे उपलब्ध हैं । ,जम्मू शहर में कहीं भी आपको अच्छा भोजन मिल जाएगा । ,सामान्य से शानदार तक हर तरह का भोजन कराने वाले रेस्त्राँ हैं । ,चाहें तो सामान्य उत्तर भारतीय खाना खाएँ या भरपूर लज्जतदार कश्मीरी व्यंजनों का लुत्फ़ उठाएँ । ,शहर में जाने - माने प्रमुख शराबघरों और शराब की दुकानों पर अच्छी ब्रांड की भारतीय और विदेशी शराब मिलती हैं । ,लेकिन राष्ट्रीय छुट्टियों और राज्यस्तरीय कुछ छुट्टियों के दिन शराब नहीं मिलती यानी ड्राई रहते हैं । ,शहर से साढ़े तीन किलोमीटर दूर सर्कुलर रोड पर बने पीर खोह मंदिर में एक गुफा के अन्दर प्राकृतिक रूप से शिवलिंग बना है । ,"यह कितना प्राचीन है और कैसे बना , यह कोई नहीं जानता ।" ,ऐसी मान्यता है कि यह गुफा अन्दर ही अन्दर बहुत से अन्य तीर्थ गुफाओं से जा मिलती है और देश की सीमा पार कर जाती है । sg,नए सचिवालय के पास ही शालीमार रोड पर रणविरेश्वर शिव मंदिर को सन् 1883 में महाराजा रणवीर सिंह ने बनवाया था । ,रणविरेश्वर मंदिर का मुख्य शिवलिंग साढ़े सात फुट ( 7.5 फुट ) ऊँचा है और उसके चारों तरफ से 15 से 38 सेंटीमीटर तक के आकार के क्रिस्टल से बने 12 शिवलिंग हैं । ,रणविरेश्वर मंदिर के गलियारों में लगे पत्थरों के स्लैबों पर हज़ारों की संख्या में शिवलिंग जड़े हुए हैं । pl,शहर के बीचों - बीच स्थित भगवान राम का रघुनाथ मंदिर विभिन्न हिन्दू देवी - देवताओं के मंदिरों से घिरा हुआ है । sg,उत्तर भारत के इस अनूठे राम मंदिर का निर्माण सन् 1835 में जम्मू - कश्मीर रियासत के संस्थापक महाराजा गुलाब सिंह ने शुरू करवाया था । ,शहर से दो किलोमीटर दूर रणवीर नहर के किनारे छोटा सा बगीचा गर्मी में पिकनिक मनाने वालों में मशहूर है । ,जम्मू से 32 किलोमीटर दूर अखनूर में चिनाब नदी से यह रणवीर नहर निकलती है । ,रणवीर नहर का पानी सालभर बर्फ जैसा ठण्डा रहता है । ,"रणवीर नहर के किनारे - किनारे घूमने का मज़ा ही कुछ और है , आसपास के शानदार नज़ारे आपका मन मोह लेंगे ।" ,शहर से पाँच किलोमीटर दूर तवी नदी के बाएँ किनारे पर चट्टानी धरती पर खड़ा बाहू गढ़ शहर का शायद सबसे पुराना किला है । ,यह निर्णय इसलिए बड़ा था क्योंकि जडेजा ने इससे पहले किए पारी के 17 वे ओवर में 12 रन दे डाले थे । ,धोनी को जड्डू पर पूरा यकीन था और जडेजा ने भी धोनी के इस निर्णय को सही साबित किया और केवल चार देकर बिग - हिटर इयान बटलर का विकेट ले डाला । ,इसी ओवर में ब्रेसनन रन आउट भी हुए । ,जडेजा का जब ओवर पूरा हुआ तो इंग्लैंड को आखिरी ओवर में जीत के लिए 15 रन बनाने थे और जीत उसके हाथ से फिसल चुकी थी । ,टीम इंडिया ने अपराजेय रहते हुए जिस अंदाज में चैंपियंस ट्रॉफी में जीत हासिल की है उसके बाद दुनिया भर में धोनी की कप्तानी और उनके यंग ब्रिगेड का डंका बज रहा है । ,धोनी की कप्तानी की तो दुनिया पहले ही कायल थी अब इस जीत के बाद तो अभी से 2015 वर्ल्डकप में टीम इंडिया को सबसे बड़ा दावेदार कहा जाने लगा है । ,क्रिकेट पंडित भी धोनी की इस युवा ब्रिगेड में ही 2015 वर्ल्डकप की टीम देख रहे हैं और माना जा रहा है कि अब आने वाले दिनों में टीम में बहुत ज्यादा चेंज देखने को शायद ही मिलें । ,चैंपियंस ट्रॉफी में टीम इंडिया ने जो जीत हासिल की है उसकी स्क्रिप्ट कैप्टन कूल ने साल भर पहले ही लिखनी शुरु कर दी थी । ,शुरू में थोड़ा विरोध हुआ लेकिन वह कप्तान ही क्या जो अपने निर्णय सही साबित न कर सके और धोनी तो इस मामले में मास्टर हैं । ,दरअसल 2011 में वर्ल्डकप जीतने के बाद ही धोनी ने अगले वर्ल्डकप की तैयारियां शुरू कर दी थीं । ,विश्वकप की टीम में सचिन तेंडुलकर और वीरेंद सहवाग ओपनर थे तो वन डाउन बैट्समैन थे गौतम गंभीर । ,मिडिल ऑर्डर में युवराज सिंह NULL । ,वर्ल्डकप के बाद युवी कैंसर के कारण टीम से आउट हो गए । ,इसके बाद ऑस्ट्रेलिया में हुई कॉमनवैल्थ बैंक ( सीबी ) सीरीज के दौरान ही धोनी ने चैंपियंस ट्रॉफी की जीत का स्क्रिप्ट लिखना शुरू कर दी थी । ,"सीबी सीरीज में धोनी ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए टीम के टॉप और बिग थ्री सचिन तेंडुलकर , वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर को रोटेशन के तहत टीम में शामिल किया ।" ,धोनी ने कहा था कि युवाओं को ज्यादा मौका देने के लिए इन तीन बड़े नामों में से दो को ही प्लेइंग इलेवन में जगह दी जाएगी । ,सीबी सीरीज में तो धोनी के इस निर्णय का विरोध भी हुआ लेकिन सिलेक्शन कमेटी ने भविष्य को देखते हुए धोनी के इस कदम पर सहमति जता दी । ,ऑस्ट्रेलियाई दौरे के समय चयनकर्ताओं ने आउट ऑफ फॉर्म चल रहे वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर को टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया । ,अब धोनी के हाथ में थी युवा टीम । ,धोनी ने युवा टीम को भरोसा देते हुए शानदार प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया । ,युवाओं ने भी कप्तान को सही साबित करते हुए ऑस्ट्रेलिया को पहले टेस्ट सीरीज में 4 - 0 से हराया और अब चैंपियंस ट्रॉफी में धमाकेदार जीत दिला दी । ,इस तरह धोनी ने टीम में बदलाव की जो स्क्रिप्ट 2012 में लिखी वह टीम इंडिया के लिए बंपर हिट साबित हो रही है । ,आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी की विनर धोनी ब्रिगेड ट्राइ नेशन सीरीज के लिए वेस्ट इंडीज पहुंच गई है । ,कैरेबियाई धरती पर कदम रखते ही टीम इंडिया के लिए मेजबान ने एक चेतावनी जारी की है । ,चेतावनी ये कि क्रिस गेल अपने विस्फोटक फॉर्म में लौट आए हैं । ,गेल ने श्रीलंका के खिलाफ पहले मुकाबले में आतिशी सैकड़ा लगाकर अपनी टीम को 6 विकेट से जीत दिलाई । ,209 रन के टार्गेट का पीछा करते हुए गेल ने बतौर ओपनर 109 रन बनाए । ,उन्होंने करियर की 21वीं सेंचुरी में 9 चौके और 7 छक्के जड़े । ,इस सेंचुरी के साथ ही गेल ने टीम इंडिया के स्टार रहे सचिन तेंडुलकर के बेहतरीन रिकॉर्ड को चकनाचूर कर दिया है । ,गेल ने श्रीलंका के खिलाफ किंग्सटन वनडे में लगाई सेंचुरी में 7 छक्के जड़े । ,एंजलो मैथ्यूज की गेंद पर 20वें ओवर में गेल ने साइटस्क्रीन की ओर छक्का जड़ा । ,यह उनके वनडे करियर का 200वां छक्का था । ,गेल ने अब तक खेले 246 मैचों की 241 पारियों में 202 छक्के लगाए हैं । ,मैच शुरू होने से पहले गेल के खाते में 195 छक्के थे । ,मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर ने भी अपने वनडे करियर में 195 छक्के लगाए हैं । ,अजंथा मेंडिस की गेंद पर अपनी पारी का पहला छक्का लगाते ही गेल ने सचिन के रिकॉर्ड को पीछे कर दिया । ,तेंडुलकर ने जहां 463 मैचों की 452 पारियों में 195 छक्के लगाए थे । ,गेल ने महज 241 पारियों में उन्हें पीछे कर दिया । ,वनडे करियर में 200 से ज्यादा छक्के लगाने वाले गेल दुनिया के तीसरे बल्लेबाज बन गए हैं । ,"सबसे ज्यादा छक्के लगाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड पाकिस्तान के शाहिद आफरीदी के नाम है , जिन्होंने 327 वनडे पारियों में 308 छक्के लगाए हैं ।" ,दूसरे पायदान पर 270 छक्कों के साथ श्रीलंका के सनथ जयसूर्या काबिज हैं । ,दुश्मन लाख बुरा चाहे तो क्या होता है । ,वही होता है जो मंजूर - ए - खुदा होता है । ,बॉलीवुड फिल्म का यह डायलॉग आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2013 पर बिल्कुल सटीक बैठता है । ,"बेरहम बारिश ने कई बार खेल में खलल डालने की कोशिश की , लेकिन सूरज देवता ने हर बार खेल प्रेमियों को उनका एंटरटेनमेंट खोने से बचा लिया ।" ,कई रुकावटों के बाद आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के खिताब पर टीम इंडिया ने कब्जा जमाया । ,क्रिकेट एक टीम गेम है । ,"यहां किसी एक खिलाड़ी की परफॉर्मेंस से थोड़ा फर्क तो पड़ता है , लेकिन जीत तभी मिलती है जब हर खिलाड़ी अपना 100 फीसदी मैच में झोंक देता है ।" ,टीम इंडिया के सभी खिलाड़ियों ने अपना - अपना रोल बखूबी निभाया और 2002 में मिली शेयरिंग की कसक को दूर कर दिया । ,चैंपियंस ट्रॉफी में अपने जीत के सफर में टीम इंडिया के धुरंधरों ने कई कीर्तिमान बनाए । ,रूमी दरवाजे को तुर्किश गेटवे के नाम से भी जाना जाता है । ,विशाल रूमी दरवाजे की ऊँचाई 60 फुट है । ,रूमी दरवाजे के निर्माण में कहीं भी लकड़ी या लोहे का इस्तेमाल नहीं किया गया है । ,रूमी दरवाजे से कुछ कदमों की दूरी पर घड़ी मीनार है । ,घड़ी मीनार का निर्माण अंगरेजों ने 1881 में करवाया था । sg,67 मीटर ऊँची घड़ी मीनार पर यूरोपियन स्टाइल में की गई नक्काशी इसे कुछ अलग आकर्षण देती है । ,घड़ी मीनार में लगी घड़ी के डायल 12 पंखुड़ियों वाले फूल की तरह नजर आते हैं । ,पेंडुलम लगभग 14 फुट लंबा है । ,घड़ी मीनार से कुछ दूर आगे चल कर पिक्चर गैलरी है जिसमें अवध के नवाबों के तैलचित्र लगे हैं । ,अवध के नवाबों के तैलचित्रों से नवाबी संस्कृति का पता चलता है । ,रेजीडेंसी भवन का निर्माण भी नवाब आसिफुद्दौला ने करवाया था । ,रेजीडेंसी इमारत को बनाने की शुरुआत 1780 में हुई थी और 1800 में बनकर तैयार हुई । ,1857 में आजादी की लड़ाई के बाद अंग्रेजों ने इस पर कब्जा कर लिया और इस में अपना निवास बनाया तो इस का नाम रेजीडेंसी पड़ गया । ,रेजीडेंसी इमारत की दीवारें आजादी की लड़ाई की गवाह हैं । ,रेजीडेंसी इमारत में एक कब्रगाह है जिसमें गदर के दौरान मारे गए लोगों को दफनाया गया है । ,सुबह 9 से शाम साढ़े 5 बजे तक यह पर्यटकों के लिए खुला रहता है । sg,रेजीडेंसी इमारत में बना खूबसूरत लॉन इस की खूबसूरती को और बढ़ा देता है । ,शहीद स्मारक 1857 में शहीद हुए वीरों की याद में गोमती नदी के किनारे बनाया गया है । ,रेजीडेंसी इमारत में नौका विहार का भी मजा लिया जा सकता है । ,जामा मस्जिद 4950 वर्ग मीटर के विशाल विस्तार में फैली है । pl,जामा मस्जिद के 15 धनुषाकार गुंबद आने वाले सैलानियों को हैरान कर देते हैं । ,जामा मस्जिद का निर्माण अहमदशाह के शासनकाल के दौरान शुरू हुआ और उसकी बेगम ने पूरा कराया । ,जामा मस्जिद इमारत में 260 खंभे हैं । ,ऐतिहासिक शहर इलाहाबाद को शिक्षा और साहित्य की राजधानी कहें तो यह अतिशयोक्ति न होगी । ,इलाहाबाद शहर से नेहरू खानदान का नाम जुड़ा है जिसने देश को 3 प्रधानमंत्री दिए हैं । ,इलाहाबाद शहर का मशहूर चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अपने यात्रा वृतांत में जिक्र किया है । ,इलाहाबाद को पहले प्रयाग नाम से जाना जाता था । ,समूचे उत्तर प्रदेश से ही नहीं बल्कि देशभर से छात्र पढ़ने के लिए यहाँ आते हैं । ,"इलाहाबाद में इलाहाबाद विश्वविध्यालय के अलावा मोतीलाल नेहरू रीजनल इंजीनियरिंग कालिज , इंडियन इंस्टीट्यूट आफ रूरल टैक्नोलॉजी और राजर्षि पुरुषोत्तमदास टंडन मुक्त विश्वविध्यालय शिक्षा के बड़े संस्थान हैं ।" ,शाह आलम और क्लाइव लायड के बीच हुई ऐतिहासिक संधि के लिए भी यह शहर जाना जाता है । ,संगम इलाहाबाद के आकर्षण का एक प्रमुख केन्द्र है । ,इलाहाबाद किले का निर्माण अकबर ने 1583 में यमुना के तट पर करवाया था । ,इलाहाबाद के किले की खासियत इस की संरचना और शिल्पकारी है । ,इलाहाबाद के विशाल और भव्य किले में 3 गैलरियाँ हैं जो ऊँची मीनारों के सहारे टिकी हैं । ,"यहाँ पर सरस्वती कूप , अशोक स्तंभ और जोधाबाई का रंगमहल भी देखा जा सकता है ।" ,किले के सामने जो अशोक स्तंभ बना है उस के बारे में कहा जाता है कि लार्ड कर्जन द्वारा कहीं और से लाकर इसको यहाँ पर स्थापित किया गया था । ,इलाहाबाद रेलवे स्टेशन से कुछ कदमों की दूरी पर खुसरो बाग स्थित है । ,खुसरो बाग को जहाँगीर के पुत्र अमीर खुसरो ने बनवाया था । ,लकड़ी के विशाल दरवाजों वाला खुसरो बाग पत्थरों की दीवारों से घिरा है । ,खुसरो बाग मुगलकालीन कला का एक जीवंत उदाहरण है । ,खुसरो बाग में अमीर खुसरो व उसकी बहन सुलतानुन्निसा की कब्रों पर बना एक मकबरा भी है । ,इलाहाबाद संग्रहालय कमला नेहरू रोड पर चंद्रशेखर आजाद पार्क के पास स्थित है । ,"इलाहाबाद संग्रहालय कच्ची मिट्टी की अद्भुत मूर्तियों और शिल्प के विविध नमूनों , निकोलस रोरिच की पेंटिंग्स , राजस्थानी लघुचित्रों की वजह से पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है ।" pl,कौशांबी की खुदाई में मिली ऐतिहासिक वस्तुओं को भी इलाहाबाद संग्रहालय में रखा गया है । ,ऐतिहासिक जानकारी हासिल करने के लिए छात्र इलाहाबाद संग्रहालय में आते हैं । ,इलाहाबाद संग्रहालय में 8 गैलरियाँ हैं । ,इलाहाबाद संग्रहालय रविवार को छोड़कर हर दिन सुबह 10 से शाम 5 बजे तक खुला रहता है । ,विज्ञान से संबंधित रहस्यमय संसार को जानने के लिए जवाहर प्लेनीटोरियम एक उपयुक्त स्थान है । pl,जवाहर प्लेनीटोरियम में आप ग्रहों और नक्षत्रों से संबंधित अद्भुत खगोलीय जानकारियों से रूबरू होंगे । ,3 नदियों के संगम तट पर ज्यादातर लोग स्नान करने आते हैं । pl,इसके लिए कुछ रचनात्मक सुझाव सोचे जा सकते हैं । ,लोगों ने खेती को छोड़कर दूसरे क्षेत्र में तेजी से जाना शुरु किया है । ,एक सर्वे के अनुसार 57 प्रतिशत लोग खेती के धंधे से बाहर निकलना चाहते हैं । ,क्या किसी को अनुत्पादक भूखंड लेकर भूखों मर जाने देना ठीक होगा या शहरीकरण का फायदा उठाने में समझदारी है ? sg,हर जगह लोग दूसरे विकल्प को आज़मा रहे हैं । ,इसलिए एक विकल्प के रूप में विशेष आर्थिक क्षेत्र ( सेज ) को अपनाना गलत नहीं होगा । ,सेज के निर्माण में गैर कृषि क्षेत्र में लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा । sg,ग्रामीण अपनी गैरउपयोगी भूमि को सेज के लिए बेचकर शहर में बेहतर रोजगार - धंधा चुन सकते हैं । ,खेती की बदहाली और किसानों की बढ़ती मुश्किलों के मद्देनजर राष्‍ट्रीय किसान आयोग ने अनेक अहम सिफारिशें की हैं । ,पर सवाल यही है कि सरकार इन्हें किस हद तक लागू कर पायेगी ? sg,आयोग ने अपनी पहली रिपोर्ट इस साल अप्रैल में दी थी । sg,अब उसने पांचवीं यानी अंतिम रिपोर्ट भी केंद्रीय कृषि मंत्रालय को सौंप दी है । ,आयोग की स्थापना पिछली सरकार के समय ही हो गयी थी । ,यूपीए सरकार ने काफी उत्साह से 2004 में प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में इसका पुनर्गठन किया और किसानों के हितों की रक्षा के लिए इसे एक नीतिगत प्रारूप बनाने का काम सौंपा था । ,लेकिन राष्‍ट्रीय किसान आयोग के मसौदे में कई ऐसे सुझाव हैं जो सरकार के लिए असुविधाजनक साबित हो सकते हैं । ,"1994 - 95 में प्रति व्यक्‍ति वर्षवार खाद्यान्न की खपत 180 किलो थी , जो 2001 में घटकर 176.5 किलोग्राम रह गयी ।" ,"संपन्न लोगों को 2100 से लेकर 2636 कैलोरी की खुराक मिलती है , जबकि गरीब की खुराक घटकर 1890 कैलोरी रह गयी ।" ,"योजना आयोग के अनुसार शहरी आबादी में गरीबी रेखा के नीचे 23.62 प्रतिशत लोग रहते हैं , जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 27.09 प्रतिशत ।" ,जिस देश की 27 करोड़ आबादी पूरी खुराक न जुटा सके उस देश की आर्थिक तरक्की के सारे दावे झूठे हैं । ,इसलिए भारत के कृषि उत्पादन तथा विपणन पर सरकार की कड़ी नजर रहनी चाहिए । ,"सभी को सेहतमंद खुराक देना राज्य का कर्त्तव्य है , इसलिए किसान की उपज का लाभकारी मूल्य और गरीब व्यक्‍ति को उसकी खरीद क्षमता के भीतर खाद्यान्न की आपूर्ति में समन्वय स्थापित करना होगा ।" ,"राशन कार्ड , गरीब बच्चों को दोपहर का भोजन NULL , रोजगार गारंटी स्कीम जैसी कई सरकारी योजनाएं हैं , जो खाद्यान्न आधारित हैं ।" ,इसकी वजह से सरकार को खाद्यान्न की खरीद करनी होती है । ,"देश में कुल 11 राज्य हैं , जहां धान , गेहूं का अतिरिक्‍त उत्पादन होता है इन राज्यों से फूड कारपोरेशन खाद्यान्न की खरीदारी करता है ।" ,शेष सभी राज्य डेफिसिट स्टेट अर्थात कमी वाले राज्य हैं । ,देश में विगत तीन वर्षों से गेहूं का उत्पादन 7 करोड़ मीट्रिक टन के आसपास टिका है । ,"नयी विश्‍व व्यवस्था में हमारे किसानों के लिए बहुराष्‍ट्रीय कंपनियों के बीज खरीदना केवल अनिवार्य ही नहीं है , बल्कि वह उनकी बदहाली की बड़ी वजह भी है ।" ,"रिलायंस हिमाचल के सेबों की खरीद करेगी , तो इससे किसानों को फायदा होगा , बिचौलिये भी खत्म होंगे , लेकिन आम आदमी को भी क्या इसका लाभ मिलेगा ?" ,कश्मीरी सेब की तुलना में सस्ता होने के कारण हिमाचल का सेब आम लोगों में लोकप्रिय है । ,रिलायंस की खरीद के बाद ये सेब क्या महंगे और आम लोगों की पहुंच से बाहर नहीं हो जायेंगे ? ,"बेशक इस पर नजर रखने की जिम्मेदारी सरकार की है , लेकिन प्रबंधक के रूप में उसकी भूमिका अब तक संतोषजनक नहीं रही है ।" ,"गौरतलब है कि डब्ल्यूटीओ दुनिया के देशों का एक ऐसा संगठन है , जो व्यापार एवं वाणिज्य को सहज एवं सुगम बनाने में विश्‍वास रखता है ।" ,"यद्यपि डब्ल्यूटीओ एक जनवरी , 1995 से प्रभावी हुआ , परंतु वास्तव में यह वर्ष 1947 में स्थापित एक बहुपक्षीय व्यापारिक व्यवस्था ’ प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता ’ ( गैट ) के हस्ताक्षरकर्त्ताओं द्वारा उरुग्वे दौर की व्यापार वार्ताओं से अस्तित्व में आया है ।" ,गैट वार्ता वस्तुओं के व्यापार एवं बाजारों में पहुंच के लिए प्रशुल्क संबंधी कटौतियों तक सीमित रही थी । sg,"डब्ल्यूटीओ के सदस्य देशों ने सब्सिडी , सीमा शुल्क में कटौती , व्यापार की अन्य बाधाओं को दूर करने एवं विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2001 में दोहा दौर की व्यापार वार्ता शुरु की थी ।" ,"इस वार्ता को वर्ष 2004 में समाप्‍त होना था , लेकिन सदस्य देशों की विभिन्न सरकारें इस समय सीमा का अनुपालन नहीं कर पायीं ।" ,परिणामस्वरूप यह वार्ता आगे बढ़ती रही और पिछले वर्ष दिसंबर 2005 में हांगकांग में हुई डब्ल्यूटीओ की बैठक में फैसला हुआ था कि कृषि और वस्तुओं के व्यापार में शुल्कों की कटौती के नये समझौते को तैयार कर लिया जायेगा । ,"यदि हम डब्ल्यूटीओ के तहत विकासशील देशों को प्राप्‍त लाभों का मूल्यांकन करें , तो पता चलता है कि दुनिया के विकासशील देशों को शायद ही कोई सार्थक लाभ प्राप्‍त हो ।" ,ज्यादातर विकासशील देश अब शुद्ध खाद्य आयातक बनकर रह गये हैं । sg,उनकी खेती से जुड़ी आजीविका को भारी हानि पहुंच रही है । ,"भारत में उन्होंने विश्‍व बैंक के मुख्य अर्थशास्‍त्री के रूप में गैट बातचीत के उरुग्वे दौर की समीक्षा की थी , तभी से उन्होंने पाया है कि डब्ल्यूटीओ का एजेंडा एवं उसके परिणाम , दोनों ही विकासशील देशों के खिलाफ हैं ।" ,"डब्ल्यूटीओ की व्यवस्था से ठोस लाभ नजर नहीं आने पर विकासशील देश मूकदर्शक नहीं बने रह सकते , उन्हें खुले व्यापार समझौतों ( एफटीए ) की डगर पर आगे बढ़ना चाहिए ।" ,इस समय विश्‍व में 400 से अधिक एफटीए आकार ले चुके हैं । ,"अब भारत सहित विकासशील देशों के हितों की रक्षा के लिए जी - 20 जैसे संगठनों द्वारा अमेरिका एवं यूरोपीय संघ जैसे विकसित देशों को चेताया जाना जरूरी है कि डब्ल्यूटीओ के तहत औद्योगिक उत्पादों पर शुल्क कम करने के मामले में विकासशील देशों के अधिकार का किसी प्रकार हनन किया गया , तो दोहा वार्ता की कार्य सूची से संबंधित सभी प्रकार की बातचीत रोक दी जायेगी ।" ,"जहां गैट वार्ताएं वस्तुओं के व्यापार एवं बाजारों में पहुंच के लिए प्रशुल्क संबंधी कटौतियों तक सीमित रहीं थीं , वहीं इससे आगे बढ़कर डब्ल्यूटीओ वैश्‍विक व्यापारिक नियमों को अधिक कारगर बनाने के प्रयास के साथ - साथ सेवाओं एवं कृषि में व्यापार पर बातचीतों को व्यापक भी बनाते हुए दिखाई दे रहा है ।" ,"अभी तक विकासशील देश औद्योगिक उत्पादों और सेवाओं के आयात पर भारी कर लगाते हैं , जबकि कृषि उत्पादों पर ये कर कम होते हैं ।" ,"दोहा राउंड में विकसित देशों का विकासशील देशों से कहना है कि आप अपने देश के औद्योगिक उत्पादों और सेवाओं के आयात पर कर को कम कीजिये , तो हम अपने यहां कृषि उत्पादों के आयात पर कर को कम कर देंगे ।" ,"कृषि आपकी ताकत है और इससे आपको कृषि उत्पादों के लिए बड़ा बाजार मिल जायेगा , जबकि हमें औद्योगिक उत्पादों व सेवाओं के लिए खुला बाजार मिल जायेगा ।" ,विकसित देश लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि विकासशील देश गैर कृषि उत्पादों पर लगने वाले करों में कटौती करें । ,इसे नॉन एग्रीकल्चरल मार्केट एक्सेज ( संक्षेप में नामा ) कहा गया है । ,मुझे वो दिन अभी तक याद है जिस दिन मैं महेश से पहली बार मिला था । ,"बाबू जी ! बाबू जी ! मैंने आपसे कहा था न कि मैं बेस्ट नेवी केडेट का कप जीत कर दिखाऊँगा , देखिए ।" ,बेस्ट नेवी केडेट का कप ? ,"हाँ माँ ! बेस्ट नेवी कैडेट कप , आइ हैव डन इट डैड , आइ हैव डन इट ।" sg,"देशमुख साहब ! अब तो मिठाई खिलानी पड़ेगी , आपकी तमन्ना आपके बेटे ने पूरी कर दी है ।" ,"हाँ , मेरी तमन्ना तो पूरी हुई , अब महेश का ख्वाब भी तो पूरा होने दीजिए ।" ,क्या बनना चाहते हो महेश ? ,"मैं नवदल में शामिल होना चाहता हूँ सर , एडमिरल बनना चाहता हूँ ।" ,"अच्छा , दैट्स वैरी गुड ।" ,"बचपन से ही न जाने इसके दिमाग में क्या घुस गया है , देश के लिए मर मिटने की बातें करता रहता है ।" ,"ज़रूर पिछले जन्म में देशभक्त रहा होगा , जो देश की आज़ादी के लिए शहीद हो गया ।" ,"अच्छा माँ , मैं चलता हूँ , शाम को घर पर मिलेंगे , अच्छा ।" ,"देखो , मैं बीस साल से इस बैंक का नमक खा रहा हूँ और उनके पैसों की हिफाज़त करना मेरा फर्ज़ है ।" ,फर्ज़ के लिए मुझे अगर जान भी देनी पड़ी तो मुझे इसकी चिंता नहीं । ,वो औरत बैंक के अन्दर जा रही है सर ! और साथ में बच्चा भी है । sg,उनकी जान को खतरा हो सकता है सर । ,"तुम ऐसा करो यहाँ से चले जाओ , रास्ते में अगर पुलिस मिले तो मेरे पास भेज देना ।" ,सर ! मेरे माँ और बाबू जी अंदर फंसे हुए हैं और मैं यहाँ से चला जाऊँ । ,"देखो उन लोगों के पास बंदूकें हैं , कभी भी गोली चल सकती है और तुम्हारी जान को खतरा हो सकता है , समझे ।" ,"क्या बुराइओं और गुनाहों के खिलाफ लड़ने और जान देने का अधिकार सिर्फ आप वर्दी वालों को है , हम लोगों को नहीं ? क्यों सर ?" sg,वैसे मैंने भी अपनी जान देश के नाम उसी दिन लिख दी थी सर जिस दिन मैंने ये वर्दी पहनी थी । ,सर ! उस औरत और बच्चे को बैंक के अन्दर जाने से रोकना बहुत ज़रूरी है सर ! ,"आपकी वर्दी देखकर डाकू गोली चला सकते हैं , मैं जाकर औरत को वापस ले आता हूँ सर !" ,"प्लीज़ गिव मी औडर सर ! आप मुझे औडर दीजिए , प्लीज़ सर !" ,"महेश की सबसे खुशी का दिन मिनटों में सबसे दुखी दिनों में बदल गया था , ज़िन्दगी को इससे बड़ा मज़ाक करते मैंने नहीं देखा था ।" ,"कुछ दिनों में महेश अपनी बहन को लेकर मुम्बई चला गया था , मगर उस दिन के बाद मुझे महसूस होने लगा कि मेरे दर्द सहने की ताकत बढ़ गई है ।" ,"ख़ैर , शहर का कोना - कोना छान मारो और बाहर जाने वाले सारे रास्ते बंद कर दो , इस आदमी का पकड़ा जाना मेरे लिए बहुत ज़रूरी है ।" ,क्योंकि मैं ये जानना चाहता हूँ कि ये महेश से मुन्ना कैसे बन गया ? ,ज्योति ! अभी एक साल पूरे होने में चार दिन बाकी हैं । ,"अभी तक , तड़ीपार का सिक्का मेरे माथे पर लगा हुआ है ।" ,"पुलिस मेरे पीछे कुत्ते के माफिक पड़ी हुई है और तुम तो जानती हो जब तक मैं सज़ा काट नहीं लेता , मैं बम्बई वापस आ नहीं सकता ।" ,बताओ किस लिए बुलाया मुझे ? ,मोहिनी के लिए । ,क्या हुआ मोहिनी को ? ,लोटिया पठान के लोग उसे उठा कर ले गए हैं । ,तो मैं क्या करूं ? ,मोहिनी को लोटिया के यहाँ से छुड़ा कर लाने के लिए तुम्हारे अलावा और किसे कह सकती हूँ ? ,"इस शहर में लाखों लड़कियाँ हैं , सबका ठेका नहीं ले रखा मैंने ।" ,"पर उन लाखों में मोहिनी एक ही है , जिसने मेरी इज्ज़त बचाने के लिए तुम्हारी मदद की थी ।" ,देखो ज्योति ! मैं ठहरा तड़ीपार आदमी और बेवज़ह किसी लफड़े में नहीं पड़ना चाहता । ,पानी भरते - भरते तो जान चली जाती है । ,"हमारे फूफा तो बुआ से कह रहे थे कि अब की बार जब फसल कटेगी ना , तो ट्यूबवेल लगवा लेंगे , फिर देखना पानी भरने की कोई तकलीफ़ ना होगी ।" ,"अरे , जब तुम्हारे द्वारे ट्यूबवेल लग जाएगी तो जब जी में आए पानी भर लेना , पर अभी तो बाल्टी खींचो , हमें भी तो पानी भरना है ।" ,"अरे तो गुस्सा हम पर क्यों होती हो , क्या हमने तुम्हारी बाल्टी नीचे गिरा दी , खुद ही तो झटका मारकर नीचे गिरा दी ।" ,"कैसी नींद है तुम्हारी , कितनी देर से बुला रही हैं सुनाई भी नहीं देता का ?" ,"अरे सुनाई तो दिया , पर हमें का मालूम कि तुम हमें बुला रही हो ।" ,हमें लगा हम सपना देख रहे हैं और सपने में ही कोई बुला रहा है । ,"सबेरे - सबेरे आ गई परेशान करने , कांटा लेकर चलो ।" ,"जब भी कोई ऐसी बात होती है तो बेचारी चंदन को बुलाने आ जाती है , जा निकाल दे इसकी बाल्टी ।" ,"चंदन ! आओ , खाना खा लो ।" ,"तिल्ली में नष्ट होने से बचने के लिए "" पी. फैल्सीपैरम "" एक अन्य चाल चलता है - यह लाल रक्त कोशिका की सतह पर एक चिपकाऊ प्रोटीन प्रदर्शित करा देता है जिससे संक्रमित रक्त कोशिकाएँ छोटी रक्त वाहिकाओं में चिपक जाती हैं और तिल्ली तक पहुँच नहीं पाती हैं ।" ,"इस कारण रक्तधारा में केवल वलय रूप ही दिखते हैं , अन्य सभी विकास के चरणों में यह छोटी रक्त वाहिकाओं की सतहों में चिपका रहता है ।" ,इस चिपचिपाहट के चलते ही मलेरिया रक्तस्त्राव की समस्या करता है । ,"यद्यपि संक्रमित लाल रक्त कोशिका की सतह पर प्रदर्शित प्रोटीन पीएफईएमपी-1 ( "" Plasmodium falciparum "" erythrocyte membrane protein-1 , प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम इरिथ्रोसाइट मैम्ब्रेन प्रोटीन-1 ) शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र का शिकार बन सकता है , ऐसा होता नहीं है क्योंकि इस प्रोटीन में विविधता बहुत ज्यादा होती है ।" ,हर परजीवी के पास इसके 60 प्रकार होते हैं वहीं सभी के पास मिला कर असंख्य रूपों में ये इस प्रोटीन को प्रदर्शित कर सकते हैं । ,वे बार बार इस प्रोटीन को बदल कर शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र से एक कदम आगे रहते हैं । ,कुछ अंशाणु नर -JOIN मादा जननाणुओं में बदल जाते हैं और जब मच्छर काटता है तो रक्त के साथ उन्हें भी ले जाता है । sg,यहाँ वे फिर से अपना जीवन चक्र पूरा करते हैं । ,"मलेरिया के कुछ मामले आपातकालीन होते हैं तथा मरीज को पूर्णतया स्वस्थ होने तक निगरानी में रखना अनिवार्य होता है , किंतु अन्य प्रकार के मलेरिया में ऐसा आवश्यक नहीं है , इलाज बहिरंग विभाग में किया जा सकता है ।" ,उचित इलाज होने पर मरीज बिलकुल ठीक हो जाता है । ,"कुछ लक्षणों का उपचार सामान्य दवाओं से किया जाता है , साथ में मलेरिया -JOIN रोधी दवाएँ भी दी जाती हैं ।" ,ये दवाएं दो प्रकार की होती हैं - पहली जो प्रतिरोधक होती हैं और रोग होने से पहले लिए जाने पर रोग से सुरक्षा करती हैं तथा दूसरी वे जिनका रोग से संक्रमित हो जाने के बाद प्रयोग किया जाता है । ,"अनेक दवाएँ केवल प्रतिरोध या केवल उपचार के लिए इस्तेमाल होती हैं , जबकि अन्य कई दोनों तरह से प्रयोग में लाई जा सकती हैं ।" ,कुछ दवाएँ एक -JOIN दूसरे के प्रभाव को बढ़ाती हैं और इनका प्रयोग साथ में किया जाता है । ,प्रतिरोधक दवाओं का प्रयोग अक्सर सामूहिक रूप से ही किया जाता है । pl,कुनैन पर आधारित अनेक औषधियों को मलेरिया का अच्छा उपचार समझा जाता है । ,"इसके अतिरिक्त आर्टिमीसिनिन जैसी औषधियाँ , जो आर्टिमीसिया एन्नुआ ( अंग्रेजी : Artemisia annua ) नामक पौधे से तैयार की जाती हैं , मलेरिया के इलाज में प्रभावी पाई गई हैं ।" ,कुछ अन्य औषधियों का प्रयोग भी मलेरिया के विरुद्ध सफल हुआ है । ,कुछ औषधियों पर प्रयोग जारी है । ,दवा के चुनाव में सबसे प्रमुख कारक होता है उस क्षेत्र में मलेरिया परजीवी किन दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित कर चुका है । ,अनेक दवाएँ जिनका प्रयोग पहले मलेरिया के विरुद्ध सफल समझा जाता था आजकल सफल नहीं समझा जाता क्योंकि मलेरिया के परजीवी धीरे धीरे उनके प्रति प्रतिरोधक क्षमता प्राप्त कर चुके हैं । ,"होम्योपैथी में मलेरिया का उपचार उपलब्ध है , हालांकि अनेक चिकित्सकों का मानना है कि मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी का इलाज एलोपैथिक दवाओं से ही किया जाना चाहिये , क्योंकि ये वैज्ञानिक शोध पर आधारित हैं ।" ,यहाँ तक कि ब्रिटिश होमियोपैथिक एसोसिएशन की सलाह यही है कि मलेरिया के उपचार के लिए होम्योपैथी पर निर्भर नहीं करना चाहिए । ,आयुर्वेद में मलेरिया को विषम ज्वर कहा जाता है और इसके उपचार के लिये अनेक औषधियाँ उपलब्ध हैं । ,"यद्यपि मलेरिया के आज प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं , लेकिन विश्व के अनेक अविकिसित क्षेत्रों के मलेरिया पीड़ित क्षेत्रों में या तो ये मिलते नहीं हैं या इतने महंगे होते हैं कि आम मरीज उसका उपयोग नहीं कर पाता है ।" ,"मलेरिया की दवाओं की बढ़ती माँग को देखकर अनेक प्रभावित देशों में बड़े पैमाने पर नकली दवाओं का कारोबार होता है , जो अनेक मृत्युओं का कारण बनता है ।" ,आजकल कम्पनियाँ नई तकनीकों का प्रयोग करके इस समस्या से निपटने का प्रयास कर रही हैं । ,"मलेरिया का प्रसार इन कारकों पर निर्भर करता है - मानव जनसंख्या का घनत्व , मच्छरों की जनसंख्या का घनत्व , मच्छरों से मनुष्यों तक प्रसार और मनुष्यों से मच्छरों तक प्रसार ।" ,इन कारकों में से किसी एक को भी बहुत कम कर दिया जाए तो उस क्षेत्र से मलेरिया को मिटाया जा सकता है । ,इसीलिये मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में रोग का प्रसार रोकने हेतु दवाओं के साथ -JOIN साथ मच्छरों का उन्मूलन या उनसे काटने से बचने के उपाय किये जाते हैं । ,अनेक अनुसंधान कर्ता दावा करते हैं कि मलेरिया के उपचार की तुलना में उस से बचाव का व्यय दीर्घ काल में कम रहेगा । ,1956 - 1960 के दशक में विश्व स्तर पर मलेरिया उन्मूलन के व्यापक प्रयास किये गये ( वैसे ही जैसे चेचक उन्मूलन हेतु किये गये थे ) । ,किंतु उनमें सफलता नहीं मिल सकी और मलेरिया आज भी अफ्रीका में उसी स्तर पर मौजूद है । sg,मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करके मलेरिया पर बहुत नियंत्रण पाया जा सकता है । ,"खड़े पानी में मच्छर अपना प्रजनन करते हैं , ऐसे खड़े पानी की जगहों को ढक कर रखना , सुखा देना या बहा देना चाहिये या पानी की सतह पर तेल डाल देना चाहिये , जिससे मच्छरों के लारवा सांस न ले पाएं ।" ,इसके अतिरिक्त मलेरिया -JOIN प्रभावित क्षेत्रों में अकसर घरों की दीवारों पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाता है । ,अनेक प्रजातियों के मच्छर मनुष्य का खून चूसने के बाद दीवार पर बैठ कर इसे हजम करते हैं । ,"ऐसे में अगर दीवारों पर कीटनाशकों का छिड़काव कर दिया जाए तो दीवार पर बैठते ही मच्छर मर जाएगा , किसी और मनुष्य को काटने के पहले ही ।" pl,विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में छिडकाव के लिए लगभग 12 दवाओं को मान्यता दी है । ,"इनमें डीडीटी के अलावा परमैथ्रिन और डेल्टामैथ्रिन जैसी दवाएँ शामिल हैं , खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ मच्छर डीडीटी के प्रति रोधक क्षमता विकसित कर चुके हैं ।" ,मच्छरदानियाँ मच्छरों को लोगों से दूर रखने में सफल रहती हैं तथा मलेरिया संक्रमण को काफी हद तक रोकती हैं । ,एनोफिलीज़ मच्छर चूंकि रात को काटता है इसलिए बड़ी मच्छरदानी को चारपाई / बिस्तर पे लटका देने तथा इसके द्वारा बिस्तर को चारों तरफ से पूर्णतः घेर देने से सुरक्षा पूरी हो जाती है । ,मच्छरदानियाँ अपने आप में बहुत प्रभावी उपाय नहीं हैं किंतु यदि उन्हें रासायनिक रूप से उपचारित कर दें तो वे बहुत उपयोगी हो जाती हैं । sg,मलेरिया -JOIN प्रभावित क्षेत्रों में मलेरिया के प्रति जागरूकता फैलाने से मलेरिया में 20 प्रतिशत तक की कमी देखी गई है । ,साथ ही मलेरिया का निदान और इलाज जल्द से जल्द करने से भी इसके प्रसार में कमी होती है । ,अन्य प्रयासों में शामिल है - मलेरिया संबंधी जानकारी इकट्ठी करके उसका बड़े पैमाने पर विश्लेषण करना और मलेरिया नियंत्रण के तरीके कितने प्रभावी हैं इसकी जांच करना । ,"ऐसे एक विश्लेषण में पता लगा कि लक्षण -JOIN विहीन संक्रमण वाले लोगों का इलाज करना बहुत आवश्यक होता है , क्योंकि इनमें बहुत मात्रा में मलेरिया संचित रहता है ।" ,मलेरिया के विरूद्ध टीके विकसित किये जा रहे हैं यद्यपि अभी तक सफलता नहीं मिली है । ,पहली बार प्रयास 1967 में चूहे पे किया गया था जिसे जीवित किंतु विकिरण से उपचारित बीजाणुओं का टीका दिया गया । ,इसकी सफलता दर 60 % थी । ,"एसपीएफ66 ( अंग्रेजी : "" SPf66 "" ) पहला टीका था जिसका क्षेत्र परीक्षण हुआ , यह शुरू में सफल रहा किंतु बाद में सफलता दर 30 % से नीचे जाने से असफल मान लिया गया ।" ,"आज आरटीएस , एसएएस02ए ( अंग्रेजी : "" RTS , S / AS02A "" ) टीका परीक्षणों में सबसे आगे के स्तर पर है ।" ,"आशा की जाती है कि "" पी. फैल्सीपरम "" के जीनोम की पूरी कोडिंग मिल जाने से नयी दवाओं का तथा टीकों का विकास एवं परीक्षण करने में आसानी होगी ।" ,वहां खसरे के लिए कोई विशेष उपचार नहीं है । ,हल्के और सरल खसरा से पीड़ित अधिकांश रोगी आराम और सहायक उपचार से ठीक हो जाएंगे । ,"हालांकि , यदि मरीज अधिक बीमार हो जाता है , तब चिकित्सा सलाह लेना महत्वपूर्ण हो जाता है , क्योंकि हो सकता है उनमें जटिलताएं विकसित हो रही हों ।" ,कुछ रोगियों में खसरे की अगली कड़ी के रूप में निमोनिया का विकास हो सकता है । ,"अन्य जटिलताओं में कान का संक्रमण , ब्रोंकाइटिस ( श्वसनीशोथ ) और इन्सेफेलाइटिस ( मस्तिष्कशोथ ) शामिल हैं ।" ,तीव्र खसरा श्वसनीशोथ से होने वाली मृत्यु की दर 15 % है । ,हालांकि खसरा मस्तिष्कशोथ का कोई विशेष इलाज नहीं है । ,"प्रतिजैविक निमोनिया के लिए प्रतिजैविकों की जरूरत होती है , खसरे के बाद विवरशोथ और श्वसनीशोथ हो सकता है ।" ,"अन्य सभी उपचार के साथ बुखार कम करने और दर्द कम करने के लिए आइबुफेन या एक्टेमिनोफेन ( पैरासीटामोल भी कहा जाता है ) दिया जा सकता है और यदि आवश्यक हो , तेज खांसी से राहत पाने के लिए श्वसनी विस्फारक ( ब्रान्कोडायलेटर ) भी दिया जा सकता है ।" ,ध्यान रहे कि छोटे बच्चों को बिना चिकित्सा सलाह के कभी भी एस्पिरीन नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि इससे रे'ज सिंड्रोम जैसी बीमारी होने का खतरा रहता है । ,इलाज में विटामिन ए के उपयोग की जांच की जा चुकी है । sg,"इसके इस्तेमाल से होनेवाले प्रयोग की व्यवस्थित समीक्षा करने से समग्र मृत्यु दर में कमी लाने में कोई सफलता नहीं मिली , लेकिन इसने 2 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर को जरूर कम किया ।" ,"हालांकि खसरे से पीड़ित अधिकतर मरीज बच गये , लेकिन कई जटिलताएं रह गयीं और अक्सर जटिलताएं पैदा होती हैं तथा उनमें श्वसनीशोथ , निमोनिया , मध्य कर्णशोथ , रक्तस्रावी ( हेमरैगिक ) जटिलताएं , तीव्र प्रसरित मस्तिष्क सुषुम्ना शोथ , तीव्र खसरा मस्तिष्कशोथ , अर्धजीर्ण कठिन संपूर्ण मस्तिष्क शोथ एसएसपीई ( sspe ) अंधत्व , वधिरता और मौत भी शामिल हो सकती है ।" ,सांख्यिकीय तौर पर खसरा के 1000 मामलों में से 2 - 3 मरीज मर जाते हैं और 5 - 10 जटिलताओं से पीड़ित रहते हैं । ,"जिन रोगियों में जटिलताएं पैदा नहीं होती हैं , आमतौर पर उनके रोग का निदान बढ़िया होता है ।" ,"हालांकि , अधिकांश मरीज बच जाते हैं फिर भी टीका लगाना अति महत्वपूर्ण है क्योंकि खसरा के 15 प्रतिशत मरीजों में जटिलताएं मिलती हैं , कुछ में बहुत कम तो दूसरों में ( जैसे कि अर्धजीर्ण कठिन संपूर्ण मस्तिष्क शोथ ) आम तौर पर बहुत घातक जटिलताएं होती हैं ।" ,"इसके अलावा , भले ही वह रोगी खसरा से सिक्वेला या मृत्यु के बारे में चिंतित न हो लेकिन वह निमोनिया की विशाल कोशिका से प्रतिरक्षा में अक्षम रोगियों तक बीमारी फैला सकता है , जिनके मृत्यु की जोखिम बहुत अधिक रहती है ।" ,खसरे के वायरस के संक्रमण का एक और गंभीर खतरा तीव्र खसरा श्वसनीशोथ है । ,"यह खसरे के दाने का निकलना शुरू होने के दूसरे दिन से लेकर एक सप्ताह तक , बहुत तेज बुखार , गंभीर सिर दर्द , कंपकंपी और अस्वाभाविक मनोभाव के साथ शुरू होता है ।" ,"इससे रोगी कोमा में जा सकता है , उसकी मृत्यु भी हो सकती है या उसके मस्तिष्क को क्षति पहुंच सकती है ।" sg,"विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ ( WHO ) के अनुसार , खसरे का टीका लगाने का प्रमुख कारण यह है कि यह बच्चों के मृत्यु दर को रोकने में काफी सहायक है ।" ,"दुनिया भर में , मीज़ल्स इनिशियेटिव के भागीदारों , द अमेरिकन रेड क्रॉस , द यूनाइटेड स्टेट्स सेंटर्स फॉर डिज़िज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन सीडीसी ( CDC ) , द यूनाइटेड नेशंस फाउंडेशन , यूनिसेफ और विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ ( WHO ) , के नेतृत्व में टीकाकरण अभियान से मृत्यु दर में काफी कमी आई है ।" ,"विश्व स्तर पर , खसरे से हो रही मौतों में 60 % की अनुमानित गिरावट देखी गयी , 1999 में हुई 873,000 मौतों की तुलना में 2005 में केवल 345,000 मौतें हुईं ।" ,"विश्व स्तर पर 2008 में हुई 164,000 तक मौतों में गिरावट आने का अनुमान है , जिसमें दक्षिण - पूर्व एशियाई क्षेत्र में 2008 में 77 % लोगों का निधन खसरा की वजह से हुआ ।" ,डब्ल्यूएचओ ( WHO ) के छह में से पांच क्षेत्रों ने खसरा को समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है और मई 2010 में 63 वें वर्ल्ड हेल्थ असेंबली में प्रतिनिधियों ने 2000 में देखे गये स्तर से 2015 तक खसरे की वजह से होने वाली मृत्यु दर में 95 % की कटौती के वैश्विक लक्ष्य पर सहमति बनाई है तथा साथ ही इसके पूरी तरह से उन्मूलन की दिशा में कदम उठाने का निश्चय किया है । ,"हालांकि , मई 2010 में वैश्विक स्तर पर इसके पूर्ण उन्मूलन की किसी विशिष्ट तिथि का लक्ष्य तय करने पर अभी तक सहमति नहीं हुई है ।" ,"165 - 180 ई. पू. का एन्टोनिन प्लेग , जो प्लेग ऑफ गालेन के नाम से भी जाना जाता है , चेचक या खसरा के रूप में वर्णित है ।" ,इस बीमारी ने कुछ क्षेत्रों में एक तिहाई से अधिक की आबादी और रोमन सेना को पूरी तरह से खत्म कर दिया । ,"पहली बार खसरा के साथ उसके भेद चेचक और छोटी माता के वैज्ञानिक विवरण पता करने का श्रेय फारसी चिकित्सक मोहम्मद इब्न ज़कारिया अर - रज़ी को जाता है , जो पश्चिम में "" राज़ेस "" के नाम से जाने जाते हैं , जिन्होंने "" द बुक ऑफ स्मॉल पॉक्स एंड मीज़ल्स "" ( अरबी में : "" किताब फी अल ज़दारी - वा अल - हस्बा "" ) शीर्षक पुस्तक प्रकाशित की ।" ,"खसरा एक स्थानिक रोग है , जिसका अर्थ है कि यह एक समुदाय में लगातार मौजूद रहता है और अधिकतर लोग इससे प्रतिरोध की क्षमता का विकास कर लेते हैं ।" ,"ऐसी आबादी में जिसका सामना खसरा जैसी बीमारी से नहीं हुआ हो , एक नये रोग से सामना होने पर विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं ।" ,"1529 में , क्यूबा में खसरे की महामारी ने दो तिहाई बाशिंदों की जान ले ली जो पहले चेचक से बच गये थे ।" ,"दो साल बाद होंडूरस की आधी आबादी की मौत खसरे की वजह से हुई थी , जिसने मेक्सिको , सेंट्रल अमेरिका और इंका सभ्यता को उजाड़ दिया था ।" ,मोटे तौर पर पिछले 150 वर्षों में खसरा से विश्वभर में 200 लाख लोगों के मारे जाने का अनुमान है । sg,1850 में खसरा ने हवाई की आबादी के पांचवे हिस्से को मार दिया था । ,"1875 में खसरा से फिजी के 40,000 लोगों की मौत हो गयी , जो अनुमान के तौर पर पूरी आबादी का एक तिहाई हिस्सा था ।" ,19 वीं सदी में इस रोग ने अंडमानी आबादी का भी नाश कर दिया । ,1954 में संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के एक 11 वर्षीय बच्चे डेविड एडमॉनस्टन के शरीर से इस बीमारी को फैलाने वाले वायरस को अलग किया गया था और उसे चूजे के भ्रूण उतक संस्कृति पर अनुकूलित और प्रचारित किया गया । ,अब तक खसरा वायरस के 21 उपभेदों की पहचान की गई है । sg,मर्क में मोरिस हिलमैन ने पहले सफल वैक्सीन को विकसित किया । ,1963 में इस बीमारी की रोकथाम के लिए लाइसेंस प्राप्त टीके उपलब्ध हो गये । ,2009 में सितंबर के शुरुआत में दक्षिण अफ्रीका में गोटांग के एक शहर जोहान्सबर्ग में खसरा के 48 मामलों की सूचना मिली । sg,इस महामारी के तुरंत बाद सरकार ने सभी बच्चों को टीका लगाये जाने का आदेश जारी कर दिया । ,उस समय सभी स्कूलों में टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया गया और अभिभावकों को अपने छोटे बच्चों को टीका दिलवाने की सलाह दी जाती थी । ,"कई लोग टीकाकरण कराने के लिए तैयार नहीं होते थे , क्योंकि उनका मानना था कि यह असुरक्षित और अप्रभावी है ।" ,स्वास्थ्य विभाग ने जनता को यकीन दिलाया कि उनका कार्यक्रम वास्तव में सुरक्षित है । ,अटकलें लगायी जाती थीं कि पता नहीं नई सूइयों का इस्तेमाल किया भी जाता था या नहीं । pl,"मध्य अक्टूबर तक कम से कम 940 मामलों को दर्ज किया गया था , जिनमें 4 मौतें हुई थीं ।" ,"19 फ़रवरी 2009 को उत्तरी वियतनाम के 12 प्रांतों में खसरा के 505 मामलों की सूचना मिली , जिसमें हनोई के 160 मामले दर्ज किये गये थे ।" ,मस्तिष्कावरणशोथ ( मैनिंजाइटिस ) और मस्तिष्कशोथ ( इन्सेफेलाइटिस ) सहित उच्च दर की जटिलताओं ने स्वास्थ्य कर्मचारियों को चिंता में डाल दिया था और यू.एस.सीडीसी ( U.S.CDC ) ने सभी पर्यटकों को खसरे का टीका दिलाये जाने की सिफारिश कर दी थी । ,1 अप्रैल 2009 को उत्तरी वेल्स के दो स्कूलों में महामारी फैल गयी । ,"1983 से 2000 तक , इन्होंने 172 रोगियों में 180 शल्य चिकित्साएं कीं ; इनमें से 98 लोबेक्टोमी थीं और 82 न्यूमोनेक्टोमी थीं ।" ,इसमें 3.3 % ऑपरेटिव मृत्यु दर दर्ज की गयी । ,6.8 % लोग ऑपरेशन के बाद मर गए । ,"12 % में महत्वपूर्ण रुग्णता ( विशेष रूप से सांस ना ले पाने की स्थिति ) की स्थिति बनी रही 91 रोगी जिनका कल्चर शल्य चिकित्सा से पहले सकारात्मक था , उनमें से 4 का कल्चर शल्य चिकित्सा के बाद भी सकारात्मक आया ।" ,"शल्य चिकित्सा के बाद तपेदिक का उपचार करने के बाद भी कुछ जटिलताएं पायी गयीं जैसे बार बार हिमोपटाईसिस , फुफ्फुस का नष्ट हो जाना या एम्पाइएमा ( फुफ्फुसीय गुहा में मवाद का इकठ्ठा हो जाना ) ।" ,"फुफ्फुस के अलावा किसी अन्य अंग की टीबी में , शल्य चिकित्सा अक्सर निदान के लिए आवश्यक होती है ( उपचार के लिए नहीं NULL ) : लसिका पर्वों की सर्जिकल छंटाई , फोड़े में से स्राव , ऊतक बायोप्सी , आदि इसके उदाहरण हैं ।" pl,टीबी कल्चर के लिए गए नमूनों को निर्जर्मीकृत पात्र में रखकर प्रयोगशाला भेजा जाना चाहिए । ,ध्यान रखना चाहिए कि इसमें कोई बाहरी पदार्थ ना मिल जाये ( यहां तक कि पानी या सलाइन भी नहीं ) और जितना जल्दी हो सके इसे प्रयोगशाला पहुंचा दिया जाना चाहिए । ,"जहां तरल कल्चर की सुविधा उपलब्ध है , निर्जर्मीकृत स्थान से नमूने को सीधे प्रक्रिया स्थान में डाल दिया जाना चाहिए ; इससे परिणाम में सुधार आता है ।" ,"मेरुरज्जु की टीबी में , रीढ़ की हड्डी की अस्थिरता के लिए शल्य चिकित्सा का संकेत दिया जाता है ( जब अस्थियों को बहुत अधिक नुकसान पहुंच चुका हो ) या जब मेरुरज्जु को ख़तरा हो ।" ,अगर रोगी इतना ज्यादा बीमार है कि उपचार को रोका नहीं जा सकता तो एसटीएम और इएमबी तब तक दिए जाने चाहिए जब तक ट्रांसएमिनेस का स्तर सामान्य ना हो जाये ( ये दो दवाएं हेपेटाइटिस से सम्बंधित नहीं हैं ) । ,"टीबी के उपचार के दौरान एकाएक बढ़ने वाला हेपेटाइटिस हो सकता है , लेकिन यह बहुत कम देखा जाता है ; ऐसी स्थिति में आपातकालीन यकृत प्रत्यारोपण करना पड़ता है अन्यथा रोगी की मृत्यु हो जाती है ।" ,दवाओं को फिर से अलग अलग शुरू किया जाना चाहिए । ,"ऐसा करते समय रोगी पर पूरी निगरानी की जानी चाहिए , अर्थात उसका प्रेक्षण किया जाना चाहिए ।" ,रोगी को हर परीक्षण खुराक दिए जाने के बाद कम से कम चार घंटे तक रोगी का पल्स और रक्तचाप नापा जाना चाहिए । ,"इसके लिए एक नर्स मौजूद होनी चाहिए ( अधिकांश समस्याएं परीक्षण खुराक के छह घंटे के भीतर होती हैं , ( अगर हो तो ।" ,रोगी अचानक बहुत बीमार हो सकता है और इस समय उसे गहन देखभाल सेवाओं और सुविधाओं की आवश्यकता होती है । ,दवाओं को इस क्रम में दिया जाना चाहिए । ,एक दिन में एक से ज्यादा परीक्षण खुराक नहीं दी जानी चाहिए और परीक्षण खुराक देने के समय अन्य सभी दवाओं को रोक देना चाहिए । ,"उदाहरण के लिए चौथे दिन , रोगी को केवल आरएमपी दी जाती है , कोई अन्य दवा नहीं दी जाती ।" ,"अगर रोगी 9 दिन की परीक्षण खुराक ले लेता है , तो यह पता लगाया जा सकता है कि पीजेडए के कारण हैपेटाइटिस हुआ है और पीजेडए की परीक्षण खुराक की आवश्यकता नहीं है ।" ,"दवा के परीक्षण का उपयोग करने का कारण यह है कि टीबी का उपचार करने के लिए दो मुख्य दवाएं आईएनएच और आरएमपी हैं , इसलिए इनका परीक्षण पहले किया जाता है ।" ,पीजेडए के कारण हेपेटाइटिस की संभावना सबसे अधिक होती है और यह एक ऐसी दवा भी है जिसे आसानी से हटाया जा सकता है । ,"इएमबी उस समय उपयोगी होती है जब टीबी के जीवाणु का संवेदनशीलता प्रतिरूप ज्ञात नहीं होता और इसे हटाया जा सकता है अगर यह जीवाणु आईएनएच के लिए संवेदी हो , हटाई जाने वाली दवाओं की सूची नीचे दी गयी है ।" ,"जिस क्रम में दवाओं का परीक्षण किया जाता है , वह निम्न विचारधाराओं के अनुसार अलग हो सकता है :" pl,इससे रोगियों को एक बार फिर से उस दवा से बचाया जा सकता है जिसकी वजह से पहले भी उनमें ( संभवतया ) खतरनाक प्रतिकूल प्रतिक्रिया देखी जा चुकी है । ,"इसी तरह के सिद्धांतों का उपयोग करते हुए , अन्य प्रतिकूल प्रभावों ( जैसे बुखार और दाने ) के लिए इसी तरह की योजना का इस्तेमाल किया जा सकता है ।" ,फुफ्फुसीय टीबी के उपचार के कुरान मानक उपचार से विचलन के समर्थन में कुछ प्रमाण हैं । ,"जिन रोगियों में उपचार की शुरुआत में थूक का कल्चर सकारात्मक आता है और स्मियर नकारात्मक , वे उपचार के चार माह तक अच्छी प्रतिक्रिया करते हैं ( यह एचआईवी - सकारात्मक रोगियों के लिए सत्य नहीं है ) ।" ,और जिन रोगियों का थूक का कल्चर नकारात्मक आता है वे केवल उपचार के तीन माह के भीतर अच्छी प्रतिक्रिया करते हैं ( संभवतया ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इनमें से कुछ रोगियों को पहले कभी टीबी नहीं हुयी होती ) । ,"केवल तीन या चार महीने के लिए रोगी का उपचार करना बुद्धिमानी नहीं है , लेकिन सभी चिकित्सकों के पास ऐसे रोगी होते हैं जो जल्दी ही अपना उपचार रोक देते हैं ( किसी भी कारण से ) ।" ,उन्हें आश्वस्त किया जा सकता है कि कभी कभी फिर से उपचार की आवश्यकता नहीं होती है । ,"बुजुर्ग मरीज जो पहले से बड़ी संख्या में गोलियां खा रहें हैं , उन्हें पीजेडए की जगह 9HR दी जा सकती है , जो बड़े आकार की होती है ।" ,हमेशा शुरुआत से चार दवाओं के साथ उपचार करना जरूरी नहीं होता है । ,एक ऐसे रोगी का निकट संपर्क इसका उदाहरण हो सकता है जिसमें तपेदिक का पूरी तरह से संवेदनशील विभेद हो । ,"इस मामले में , 2HRZ / 4HR का उपयोग स्वीकार्य है ( इएमबी और एसटीएम को हटा दिया जाता है ) , इसमें यह उम्मीद की जाती है कि इनके विभेद आईएनएच सुग्राही हैं ।" ,"वास्तव में , पहले 1990 के दशक के प्रारंभ तक कई देशों में इसी मानक उपचार की सलाह दी जाती थी , जब आइसोनियाज़िड के लिए प्रतिरोध की दर बढ़ गयी थी ।" ,"जब टीबी का मस्तिष्क और मेरुरज्जु ( मैनिंजाइटिस , इन्सेफेलाइटिस ) पर भी असर हो जाता है , उसका उपचार वर्तमान में 2HREZ / 10HR से किया जाता है ( कुल 13 माह का उपचार ) , लेकिन इस बात के प्रमाण हैं कि यह 2HREZ / 4HR से बेहतर है ।" ,कोई भी इतना बहादुर नहीं होता जो ऐसे समकक्ष छोटे कोर्स के लिए चिकित्सकीय परीक्षण करवा सके । ,संयुक्त राष्ट्र में आइसोनियाज़िड के लिए प्रतिरोध 6 से 7 प्रतिशत है ( 25 फ़रवरी 2006 ) । ,"दुनिया भर में , यह प्रतिरोध का सबसे आम प्रकार है , इसलिए वर्तमान में उपचार की शुरुआत में HREZ के उपयोग की सलाह तब दी जाती है जब संवेदनशीलता ज्ञात हो ।" ,वर्तमान प्रकोप की रिपोर्ट के बारे में ज्ञान होना जरुरी है ( जैसे लन्दन में आईएनएच प्रतिरोधी टीबी का वर्तमान प्रकोप ) । ,"अगर किसी ऐसे रोगी को आइसोनियाज़िड प्रतिरोधी टीबी के विभेद से संक्रमित पाया जाता है जो 2 माह के लिए HREZ को पूरा कर चुका है , तो उसे अगले 10 माह के लिए बदल कर औषधि दी जाती है ।" ,"और इसी तरह अगर रोगी आइसोनियाज़िड के प्रति असहिष्णु है , तब भी ऐसा ही किया जाता है ( हालांकि 2REZ / 7RE को प्रयुक्त किया जा सकता है यदि रोगी पर पूरी निगरानी रखी जाये ) ।" ,संयुक्त राज्य अमेरिका में एक क्विनोलोन जैसे मोक्सीफ्लोक्सेसिन के साथ 6RZE के उपयोग की सलाह दी जाती है । ,इन सभी दवाओं के प्रमाण के स्तर अच्छे नहीं हैं और दूसरे के ऊपर एक की सलाह कम ही दी जाती है । ,ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है कि टीबी का एक विभेद रिफाम्पिसिन है लेकिन साथ ही आइसोनियाज़िड के लिए प्रतिरोधी नहीं है । ,लेकिन रिफाम्पिसिन के लिए असहिष्णुता सामान्य नहीं है ( हेपेटाइटिस और थ्रोम्बोसाइटोपेनिया रिफाम्पिसिन को रोकने के सबसे आम कारण हैं ) । ,"पहली पंक्ति की दवाओं में , रिफाम्पिसिन सबसे महंगी भी है और गरीब देशों में , इसीलिए अक्सर उपचार में रिफाम्पिसिन का उपयोग नहीं किया जाता है ।" ,"रिफाम्पिसिन तपेदिक के उपचार के लिए उपलब्ध सबसे शक्तिशाली निर्जर्मीकृत दवा है और सभी उपचार जिनमें रिफाम्पिसिन का प्रयोग नहीं किया जाता है , वे मानक उपचार से लम्बे होते हैं ।" ,संयुक्त राष्ट्र में 18HE या HEZ की सिफारिश की जाती है । ,संयुक्त राज्य अमेरिका में क्विनोलोन के विकल्प के साथ 9 से 12HEZ की सलाह दी जाती है ( उदाहरण एमएक्सएफ ) । sg,दवा जिसमें से पायराज़ीनामाइड को हटा दिया गया है । ,"HREZ दवा में पीजेडए दोनों , हेपेटाइटिस और दर्द्युक्त जोड़ों के दर्द का आम कारण है और उन रोगियों में इसे सुरक्षित रूप से रोका जा सकता है , जो इसके प्रति असहिष्णु हैं ।" ,"आइसोलेटेड पीजेडए के प्रति प्रतिरोध "" एम . ट्युबरकुलोसिस "" में असामान्य है , लेकिन "" एम . बोविस "" पीजेडए के लिए प्रतिरोधी है ।" ,पीजेडए पूरी तरह से सम्वेदनशील टीबी के उपचार के लिए महत्वपूर्ण नहीं है और इसकी मुख्य भूमिका उपचार की कुल अवधि को 9 माह से कम करके 6 माह तक ले आती है । ,"संयुक्त राष्ट्र में परीक्षणों में इस बात के प्रमाण मिले हैं कि 9HR "" एम . ट्युबरकुलोसिस "" के लिए उपयुक्त है , यह "" एम . बोविस "" के उपचार के लिए प्रयुक्त पहली पंक्ति की खुराक भी है ।" ,इएमबी के लिए असहिष्णुता या प्रतिरोध दुर्लभ है । ,"अगर कोई रोगी वास्तव में असहिष्णु है या इएमबी प्रतिरोधी टीबी से संक्रमित है , तो 2HRZ / 4HR बिल्कुल स्वीकार्य उपचार है ।" ,हॉलीवुड निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय ज्यूरी ने फिल्म के निर्देशक फ्रांसीसी मूल के ट्यूनीशियाई फिल्ममेकर अब्दिलातिफ केचिचे और इसकी दो युवा अभिनेत्रियों अडेल एक्सार्कोपोल्स और ली सोडोक्स के काम की सराहना की । ,ज्यूरी के सदस्यों में भारतीय अभिनेत्री विद्या बालन भी शामिल थीं । ,तीन घंटे की फिल्म ‘ ब्लू इज द वार्मेस्ट कलर ’ में अडेल ने 15 वर्षीय लड़की का किरदार निभाया है जो अपने से बड़ी उम्र की महिला के प्यार में पड़ जाती है । ,इस किरदार को ली ने निभाया है । ,कॉन में इस साल पुरस्कार की दौड़ में 20 फिल्में शामिल थीं । ,फिल्ममेकर कोन ब्रदर्स की फिल्म इन्साइड लेविन डेविस को दूसरा सर्वोच्च पुरस्कार ग्रैंड पी मिला । ,यह फिल्म पिछली सदी के सातवें द्शक में न्यूयॉर्क में लोकसंगीत पर आधारित है । ,एक अन्य अमेरिकी ब्रूस डर्न को फिल्म नेब्रास्का के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता फरहदी की फिल्म द पास्ट के लिए बेरेनियस बेजो को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार मिला । ,ऑस्कर विजेता फिल्म ‘ द आर्टिस्ट ‘ में बेजो के अभिनय की काफी सराहाना हुई थी । sg,कॉन के तीसरे सर्वोच्च अवार्ड ‘ द ज्यूरी पुरस्कार ‘ से जापानी फिल्मकार हिरोकजू कोरेदा की फिल्म ‘ लाइक फादर लाइक सन ‘ को नवाजा गया । ,यह दो परिवारों की कहानी है जिन्हें बाद में पता चलता है कि उनका छह साल का बच्चा जन्म के समय बदल दिया गया था । sg,मैक्सिको में नशीले पदार्थ के लिए हो रही हिंसा पर आधारित फिल्म ‘ हेली ‘ के लिए अमत एक्कलांटे को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार दिया गया । ,चीन के जिया झांगके को उनके देश में फैले भ्रष्टाचार की पड़ताल पर आधारित फिल्म ‘ अ टच ऑफ सिन ‘ के लिए सर्वश्रेष्ठ पटकथा का पुरस्कार मिला । ,बचपन से पहाड़ियों पर चढ़ने के शौकीन युवा आईआईटीयन कश्यप रावल ( 25 ) को साइकिलिंग का ऐसा जुनून सवार हुआ कि वह बैंगलूर से कॉरपोरेट कंपनी में जॉब छोड़कर 16 फरवरी को भारत भ्रमण पर निकल गया । pl,इस दौरान उसने पर्यावरण बचाने के लिए अलग - अलग राज्यों में हो रहे प्रयासों को भी लोगों तक पहुंचाया । ,साइकिल से करीब 12 हजार किलोमीटर का चुनौतीपूर्ण सफर तय करते हुए वह दिल्ली से सोमवार को अपने घर कोटा पहुंचेगा । ,उसके पिता नरेशचंद्र रावल यहां सेना में कर्नल हैं और मां प्रीति गृहिणी हैं । sg,"आईआईटी , कानपुर से एमएससी ( मैथ्स ) करने के बाद उसने दो साल जेनपेक्ट सॉफ्टवेयर कपंनी , बैंगलूर में बिजनेस एनालिस्ट के पद पर काम किया ।" ,ऑफिस आने - जाने के लिए भी वह रोज 12 किमी . साइकिल ही चलाता था । ,"‘ सेव द अर्थ ‘ मिशन को लेकर उसने कन्याकुमारी , केरल , कर्नाटक , जम्मू - कश्मीर , हिमाचल व पंजाब समेत 10 राज्यों के दुर्गम पहाड़ी व बर्फीले रास्तों पर अकेले साइकिल यात्रा की ।" ,कश्यप ने आईआईटी में पढ़ते हुए माउंटेनियर का कोर्स भी किया था । ,यात्रा के दौरान मैदानी इलाकों में उसने एक दिन में 150 किमी . तक साइकिलिंग की । ,अलग - अलग राज्यों में उसे विपरीत मौसम का सामना करना पड़ा । ,"भीषण गर्मी , बरसात और बर्फिले रास्तों से गुजरना पड़ा ।" pl,उसने पर्यावरण बचाने के लिए अलग - अलग राज्यों में किए जा रहे प्रयासों को फेसबुक के ज़रिए लोगों तक पहुंचाया । ,कश्यप ने फोन पर बताया कि दक्षिणी राज्यों में लोगों से बातचीत करते हुए उसने मलयालम जैसी कुछ भाषाएं सीखीं । ,वह अब तक कई पहाड़ी इलाकों की साइकिल से सैर कर चुका है । ,नाम से ही अंदाज़ा लग गया था कि यह फिल्म विशुद्ध रूप से बॉक्स ऑफिस को ध्यान में रखकर बनाई गई है । ,दो गुज्जर गैंग्स के खूंरेजी टकराव के बीच एक पुलिस इंस्पेक्टर की हीरोगिरी । ,लंबी - चौड़ी स्टारकास्ट और कई किस्म के मसाले । ,लेकिन फिल्म जिला गाजियाबाद में ऐसा कुछ भी नहीं है कि कोई विवाद खड़ा हो । ,"फिल्म में मौजूद फौजी सतबीर गुज्जर और प्रीतम सिहं जैसे कुछ नाम अवश्य आभास देते हैं कि यह रियल कहानी पर बनी फिल्म है , परंतु यह सच नहीं है ।" ,सच तो यह है कि जिला गाजियाबाद पिछ्ली कुछ हिट और चर्चित गैंगस्टर और पुलिसिया फिल्मों की छाया है । ,"इस फिल्म को बिना किसी संकोच के ओमकारा , दबंग , सिंघम और राउडी राठौर की कॉक्टेल भी कहा जा सकता है ।" ,कुल मिलाकर यही कि टाइटल के अलावा इस फिल्म का संबंध किसी भी मामले में गाजियाबाद से नहीं है । ,"कुछ दृश्यों को छोड़ दें , तो इसकी ज्यादातर शूटिंग महाराष्ट्र के वाई शहर में हुई है ।" ,जिला गाजियाबाद में दो गुज्जर गैंग्स के टकराव की कहानी है । ,एक गैंग है फौजी का और दूसरा मास्टर जी उर्फ सतबीर गुज्जर का । ,"जब इन दोनों गैंग्स की आपसी लड़ाई जिले के आम निवासियों के लिए मुसीबत बन जाती है , तो एंट्री होती है एक अफलातून किस्म के इंस्पेक्टर प्रीतम सिंह की ।" ,प्रीतम सिंह कूटनीतिक तरीके से दोनों गैंग्स का खात्मा करता है और अपनी दबंगई से विभाग और आम जनता की वाहवाही लूटता है । ,कहने की जरूरत नहीं है कि फिल्म में गोलीबारी के लिए तो पर्याप्त जगह है ही आइटम सॉंग्स के लिए भी स्पेस है । ,"चूंकि यह उस कैटिगिरी की फिल्म है जिसे दिमाग घर में रखकर देखने जाया जाता है , इससे न तो पुलिस की छवि पर कोई असर पड़ना है और न ही जिला गाजियाबाद की कोई बदनामी होनी है ।" ,निर्देशक की बात करें तो आनंद कुमार का काम औसत है । ,अदाकारों के अभिनय में भी संजीदगी नहीं है । ,संजय दत्त और अरशद वारसी ने बतौर एक्टर अपनी नई इमेज बनाने की कोशिश की है । ,"विवेक ओबरॉय , चंद्रचूड़ सिंह , रवि किशन , परेश रावल , आशुतोष राणा , दिव्या दत्ता और मिनिषा लांबा अपनी - अपनी भूमिकाओं में फिट हैं ।" ,"मुंबई के एलिफेंटा की मूर्तियां हों या सारनाथ स्थित भगवान बुद्ध की प्रतिमा , इस प्रौराणिक धरोहर को कैनवास पर रंगों में सजा देखना भी एक सुखद एहसास कराता है ।" ,तैलीय रंगों के मिश्रण से बनी इन सुंदर तस्वीरों में आपको खजुराहो की शिव पार्वती जैसी तमाम मूर्तियों को देखने का मौका मिलेगा । ,जिसे विभिन्न चटकीले रंगों के प्रयोग से चित्रकार ‘ सलन मुर्गोद ‘ ने कैनवास पर उकेरा है । ,आजाद भवन में ‘ पास्ट इन्टू प्रजेंट ‘ नामक पेटिंग प्रदर्शनी में लगे जीवंत चित्रों को देखकर ऐसा मालूम पड़ता है जैसे ये अभी बोल पड़ेंगे । ,सन 1967 में हमारे वैज्ञानिकों ने कपास की पैदावार में बढ़ोत्‍तरी करने के लिए एक विशाल कार्यक्रम आरंभ किया जिसके फलस्वरूप कुछ ही वर्षों में प्रति हेक्टेयर उत्पादन और कुल उत्पादन दोनों में दुगने से ज्यादा की वृद्धि हुई । ,भारत में कपास की खेती का क्षेत्र दुनिया में सबसे अधिक ( करीब 80 लाख हेक्टेयर ) है और यही एकमात्र ऐसा देश है जहाँ कपास की चारों कृषि योग्य किस्मों की खेती की जाती है । ,"किंतु उत्पादन में भारत का स्थान अमेरिका , रुस और चीन जो सर्वाधिक उत्पादक देश हैं , के बाद चौथा है ।" ,भारत में कपास के उत्पादन की कमी का प्रमुख कारण है कि यहाँ कपास की खेती वाले क्षेत्र में से केवल एक चौथाई हिस्से में ही सिंचाई की उचित सुविधा उपलब्ध है और शेष खेती वर्षा पर निर्भर करती है । ,राज्यों में प्रति एकड़ उत्पादन के हिसाब से महाराष्‍ट्र सबसे अग्रणी है किंतु कुल उत्पादन में गुजरात सूची में सर्वोपरि है । ,कपास की खेती में लगभग 4.5 करोड़ से अधिक लोग रोज़गार में व्यस्त हैं तथा इसी से आजीविका चलाते हैं । ,कपास के खेतों के सौंदर्य का वर्णन शब्दों में करना कठिन है - ,ऐसा लग रहा था मानों स्वर्ग ने स्वयं ही इस धरा पर सफेदी बिखेर दी हो । ,बीजकोष के बीजों से निकले हज़ारों रेशों की मुस्कराहट और चमक मन को मोह लेने वाली थी और ऐसा लगता था मानों ये 4 से 6 फुट ऊँचे पौधों पर सजावट की जादुई आकर्षण वाली कलाकृतियाँ हों । ,डा. जोशी ने छात्रों को बताया कि कपास एक बीज - तंतु है जो गौसीपियम ( Gossypium ) प्रजाति के पौधे से उगता है । ,यह मालवेसी ( Malvaceae ) परिवार का सदस्य है जो बोलचाल की भाषा में मैलो ( Mallow ) परिवार के नाम से जाना जाता है । ,गौसीपियम प्रजाति के अंतर्गत कपास की 36 जातियाँ मान्य हैं परंतु अच्छे किस्म की कपास पैदा करने के लिए इनमें से केवल चार प्रकार की कपास की खेती की जाती है क्योंकि अन्य जातियाँ जंगली हैं । ,गौसीपियम हिर्सुटम ( Gossypium Hirsutum ) इनमें से सबसे महत्‍त्वपूर्ण वानस्पतिक जाति है जो मूल रूप से कंबोडिया तथा मैक्सिको में पाई जाती थी परंतु अब यह अमेरिका के विशाल भाग में उगाई जाने लगी है । ,कपास की फसल में कई गुणों का होना आवश्यक है । ,"इनमें से कुछ गुण इस प्रकार हैं : फसल का जल्दी तैयार होना , फसल में बीमारियों तथा कीड़े - मकोड़ों से बचने की प्रतिरक्षा शक्‍ति का पर्याप्‍त मात्रा में होना , अधिक उपज देना , रेशों का अधिक मज़बूत होना आदि ।" pl,कपास की नई - नई किस्में जारी की जा रहीं हैं जिनमें उपरोक्‍त गुण विद्यमान हों । pl,कपास के उत्पादन के लिए प्रजनन ( breeding ) कार्यक्रम के माध्यम से कपास की प्रत्येक जाति में विभिन्न किस्में तैयार की गई हैं । pl,दो जातियों के गुणसूत्रों को मिलाकर अपनी इच्छानुसार संकर ( hybrid ) पौधे विकसित किए जा सकते हैं । ,अभी हाल ही में कुछ वर्ष पूर्व आनुवंशिक परिवर्तन ( genetic modification ) द्वारा अमेरिका में कपास के एक नए बीज का निर्माण किया गया जो बीटी कॉटन सीड ( Bt cotton seed ) के नाम से जाना जाता है । sg,यह बीज कपास की फसल को बीमारियों और कीड़ों से बचाने की शक्‍ति प्रदान करता है । ,इसके उपयोग से अमेरिका और चीन में कपास के उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है । ,इस बीज को भारतवर्ष में बोने की अनुमति हाल ही में मिली है । ,कपास की सर्वोत्‍तम पैदावार के लिए गर्म जलवायु पर्याप्‍त नमी तथा दोमट ( loamy ) मिट्टी के साथ - साथ सिंचाई की भी अच्छी सुविधाएं होनी चाहिए । ,"क्षेत्र की जलवायु , मिट्टी के प्रकार एवं कपास की जाति व किस्म के आधार पर कपास की बुवाई अलग - अलग समय पर की जाती है ।" ,उत्‍तरी भारत में कपास प्रायः मई के मध्य में बोई जाती है । ,बुवाई के पश्‍चात बीज के उगने के बाद जब मूल जड़ भूमि में प्रवेश करती है तो पौधे की वृद्धि के लिए वह भूमि से अपना खाद्‍य पदार्थ लेना शुरु करती है । ,"कपास के पौधे की वृद्धि से लेकर फूल आने तक की अवस्था में ताप , सूरज की रोशनी तथा पानी की उपलब्धि आदि का अधिक प्रभाव पड़ता है ।" ,उदाहरण के लिए यदि दिन व रात दोनों समय अधिक तापमान हो तो फूल अवस्था देर से शुरु होती है । ,चार सप्‍ताह से छः सप्‍ताह के बीच फूलों में कलियाँ निकलना शुरु हो जातीं हैं तथा रोपण के लगभग 100 दिन के बाद पौधे पर सफेद या हल्के अथवा गहरे पीले रंग के अतिसंवेदनशील फूल खिल जाते हैं । ,बीजकोष बहुत जल्दी बढ़ता है तथा पकने पर इसका आकार 2.5 सेंटीमीटर चौड़ा तथा 3.8 सेंटीमीटर लंबा हो जाता है । ,50 से 80 दिन के पश्‍चात बीजकोष फट जाता है तथा वर्ष के इस समय में ( नवंबर माह में ) जब वह पूरी तरह खुल जाता है तो हमें यह अद्‍भुत नजारा देखने को मिलता है । ,कपास के रेशों के टेंट को दिसंबर माह में भारत में प्रायः हाथ से तथा विदेशों में मशीन से तोड़ा जाता है । ,अध्यापक ने बताया कि भारत में रेशम कीट पालन सन् 400 में शुरु हुआ था । ,अब विश्‍व में रेशम उत्पादन करने वाले देशों में भारत का प्रमुख स्थान है । ,"यह एक लघु उद्योग है जिसमें 50,000 गाँव रेशम कीट पालन ( sericulture ) के कार्य में जुटे हुए हैं ।" ,भारत ही एक ऐसा देश है जहाँ कई प्रकार के रेशम के कीड़ों का पालन करके विविध प्रकार का रेशम प्राप्‍त किया जाता है । sg,स्वर्ण रंग का मूंगा रेशम केवल हमारे देश में ही पैदा किया जाता है । ,कृषि व्यवसाय की तरह रेशम कीट पालन भी जीविकोपार्जन का एक मुख्य साधन है जिसमें कई हजार श्रमिक काम करते हुए यह बहुमूल्य रेशा पैदा करते हैं । ,रेशम कई प्रकार के कीड़ों द्वारा बनाया जाता है परंतु इन सब में बांबिक्स मोरी ( Bombyx Mori ) जाति का रेशम कीड़ा ही प्रमुख है और सेरीकल्चर फार्म के विशेष वातारण में रेशम बनाता है । pl,इस कीड़े के लारवा ( larva ) शहतूत के पत्‍ते खाते हैं । ,रेशम का कीड़ा देखने में तितली की तरह होता है जिसके अंडों से पहले लारवा ( कैटरपिलर ) बनता है । sg,फिर कैटरपिलर प्यूपा ( pupa ) अथवा क्राइसेलिस बनने की प्रक्रिया में अपनी सुरक्षा के लिए चारों तरफ रेशम से घर ( कठोरी ) बनाता है जिसे कोया अथवा कोकून ( cocoon ) कहते हैं । ,क्राइसेलिस पूरा विकसित होने के पश्‍चात मॉथ ( moth ) के रूप में कोये से बाहर निकलता है तथा फिर मादा मॉथ ( रेशम कीट ) अंडे देती है । ,इस प्रकार रेशम के कीड़े का जीवन चक्र पूरा हो जाता है । ,उन्होंने बताया कि हम बांबिक्स मोरी जाति के ही रेशम कीड़ों का पालन करते हैं । ,इन कीड़ों की मादा मॉथ ( moth ) कोये से निकलने के तीन दिन बाद करीब 700 अंडे देती है और फिर मर जाती है । pl,वैसे अन्य जाति के रेशम कीट 350 - 400 अंडे देते हैं । ,"प्रत्येक अंडे का आकार एक पिन हैड ( pin head ) के बराबर होता है , जिसमें एक नरम सा बिंदु होता है ।" ,इस नरम बिंदु के कारण ही कोकून को फूटने में आसानी होती है । ,ये अंडे बहुत ही हल्के होते हैं । ,"सबसे आम तौर पर शामिल जीवों में "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" , "" हेमोफेलस इन्फ्लुएंज़ा "" और "" क्लेबसिएला निमोनिया "" शामिल है ।" ,लक्षणों के अन्य कारणों पर भी विचार किया जाना चाहिये जैसे कि मायोकार्डियल इन्फार्क्शन या एक फुफ्फुसीय सन्निवेशन । ,निमोनिया एक आम रोग है जो लगभग 450 मिलियन लोगों को प्रतिवर्ष होता है और दुनिया के सभी हिस्से इसमें शामिल हैं । ,यह सभी उम्र के लोगों में मृत्यु का प्रमुख कारण है जिसके परिणामस्वरूप हर साल 4 मिलियन मृत्यु होती हैं ( पूरी दुनिया में होने वाली कुल मृत्यु का 7 % ) । ,"पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों , वयस्कों और 75 वर्ष से अधिक उम्र वाले बुज़ुर्गों में यह अधिकतम है ।" ,विकसित दुनिया की तुलना में विकासशील दुनिया में यह पांच गुना तक अधिक होता है । ,वायरस जनित निमोनिया लगभग 200 मिलियन मामलों के लिये जिम्मेदार है । ,"संयुक्त राज्य अमरीका में 2009 तक , निमोनिया , मृत्यु का 8 वा प्रमुख कारण है ।" ,2008 में निमोनिया लगभग 156 मिलियन बच्चों को हुआ ( विकासशील देशों में 151 मिलियन और विकसित देशों में 5 मिलियन बच्चे ) । ,"इसके परिणामस्वरूप 1.6 मिलियन मृत्यु या पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की कुल मृत्यु की 28 – 34 % मृत्यु हुई , जिसमें से 95 % विकासशील देशों में हुईं ।" ,"इस रोग के सबसे अधिक बोझ वाले देशों में भारत ( 43 मिलियन ) , चीन ( 21 मिलियन ) और पाकिस्तान ( 10 मिलियन ) शामिल हैं ।" ,यह कम आय वाले देशों में मृत्यु का प्रमुख कारण है । ,इनमें से अधिकांश मृत्यु नवजात अवधि में हुईं । ,विश्व स्वास्थ्य संगठन का आंकलन है कि नवजातों में होने वाली तीन मौतों में से एक निमोनिया के कारण होती है । ,"सैद्धांतिक रूप से इनमें से लगभग आधी मौतों की रोकथाम हो सकती है , क्योंकि ये एक ऐसे बैक्टीरिया के कारण होती हैं जिसका प्रभावी टीका उपलब्ध है ।" ,पूरे मानवीय इतिहास में निमोनिया सबसे आम रोग रहा है । ,हिप्पोक्रेटस ( 460 ई.पू. – 370 ई.पू. ) द्वारा लक्षणों का वर्णन : ,""" पेरिनिमोनिया और फुफ्फुसीय आसक्ति , को निम्न प्रकार से पहचाना जाता है ।" ,यदि तेज़ बुखार हो । ,"यदि दोनो ओर या एक ओर दर्द हो और यदि कफ़ की उपस्थिति के साथ निःश्वसन होता हो और खांसी से निकले कफ़ का रंग सुनहरा या गहरे नीले ग्रे रंग का हो या पतला , मटमैला लाल रंग का हो या सामान्य से भिन्न चरित्र का हो ।" ,"जब निमोनिया का प्रभाव अपने उच्चतम पर होता है , मामला सुधरने योग्य नहीं होता है और यह बुरा तब होता है जब सांस लेना तकलीफदेह हो और मूत्र पतला व बदबूदार हो , गर्दन व सिर से पसीना आता है और ऐसा पसीना आना खराब है और रोग के हिंसक होने के परिणाम स्वरूप घुटन , चक्कर आदि हावी होने लगता है । """ ,"हालांकि , हिप्पोक्रेटस ने निमोनिया को "" प्राचीन लोगों द्वारा नामित "" रोग के रूप में संदर्भित किया था ।" ,उन्होंने फेफड़ों की कैविटी में तरल के जमाव को शल्यक्रिया द्वारा निकालने का वर्णन भी किया था । ,"माइमोनिडस ( 1135 – 1204 ईस्वी ) ने देखा : "" निमोनिया के मूल लक्षण निम्नलिखित हैं : तीव्र बुखार , एक ओर फेफड़े में श्वसन में दर्द , छोटी व तेज़ सांसें , ऊपर नीचे होती नाड़ी और खांसी । """ ,"यह चिकित्सीय वर्णन काफी हद तक आधुनिक पाठ्यपुस्तकों में मिलने वाले वर्णनों के समान है और यह इस बात को बताता है कि चिकित्सीय ज्ञान , किस हद तक मध्यकाल से 19 शताब्दी में आया ।" ,एडविन क्लेब्स वह पहला व्यक्ति था जिसने 1875 में निमोनिया के कारण मरे हुए व्यक्तियों के वायुमार्ग का विश्लेषण किया । sg,"दो आम बैक्टीरिया जनित कारणों "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" और "" क्लेब्सिएला निमोनिया "" की पहचान से संबंधित आरंभिक कार्य कार्ल फ्रेडलैन्डर और अल्बर्ट फ्रैन्केल ने क्रमशः 1882 और 1884 में किया था ।" sg,फ्रेडलैन्डर के आरंभिक कार्य ने ग्राम स्टेन को पेश किया जो कि एक मूलभूत प्रयोगशाला परीक्षण था जिसे आज भी बैक्टीरिया को पहचानने और वर्गीकृत करने में उपयोग किया जाता है । ,क्रिस्चिएन ग्राम के 1884 में पेश किये गये पेपर ने दो बैक्टीरिया के बीच भिन्नताओं को पहचानने की प्रक्रिया की व्याख्या की और दिखाया कि निमोनिया एक से अधिक सूक्ष्मजीवों के कारण हो सकता है । ,""" आधुनिक चिकित्सा के पिता "" के नाम से जाने जाने वाले सर विलियम ओस्लर ने निमोनिया द्वारा होने वाली मृत्यु और अक्षमता को मान्यता प्रदान की और इसको 1918 में "" मनुष्यों की मृत्यु का कप्तान "" कहा , क्योंकि इस समय तक इससे होने वाली मौतो की संख्या ने तपेदिक से होने वाली मौतों की संख्या को पीछे छोड़ दिया था ।" ,"इस शब्द को मूलतः जॉन बुनियन द्वारा उपयोग किया गया था जो कि "" खब्बू "" ( तपेदिक ) के संदर्भ में था ।" ,"ऑस्लर ने निमोनिया को "" बुज़ुर्ग आदमी का दोस्त "" कहा था क्योंकि मृत्यु अक्सर झटपट और दर्द रहित होती थी , जबकि मरने के और भी कई धीमे और दर्द रहित तरीके भी थे ।" pl,1900 के आसपास बहुत से विकासों ने निमोनिया से पीड़ित लोगों के लिये परिणामों को बेहतर कर दिया था । ,"20 शताब्दी में पेनिसलीन तथा अन्य एंटीबायोटिक , आधुनिक शल्यक्रिया तकनीकों और गहन देखभाल के आगमन के साथ , विकसित दुनिया में निमोनिया में मृत्यु दर तेजी से कम हो गयी ।" ,"1988 में "" हेमोफिलस इन्फ्लयुएंज़ा "" टाइप बी के विरुद्ध नवजातों में टीकाकरण की शुरुआत ने इसके बाद से इन मामलों में नाटकीय कमी कर दी ।" sg,"1977 में वयस्कों और 2000 में बच्चों में "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" के विरुद्ध टीकाकरण ने ऐसी ही कमी को दर्शाया ।" ,"विकासशील देशों में रोग के उच्च बोझ और विकसित देशों में रोग के प्रति तुलनात्मक रूप से कम जानकारी के कारण , चिंतित नागरिकों और नीति निर्माताओं के लिये रोग के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिये वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय ने नवम्बर की 12 तारीख को विश्व निमोनिया दिवस घोषित किया है ।" sg,समुदाय अर्जित निमोनिया की अनुमानित वैश्विक आर्थिक लागत $17 बिलियन आंकी गयी है । ,निमोनिया ,फुफ्फुसशोथ या फुफ्फुस प्रदाह ( निमोनिया ) फेफड़े में सूजन वाली एक परिस्थिति है — जो प्राथमिक रूप से अल्वियोली ( कूपिका ) कहे जाने वाले बेहद सूक्ष्म ( माइक्रोस्कोपिक ) वायु कूपों को प्रभावित करती है । ,"यह मुख्य रूप से विषाणु या जीवाणु और कम आम तौर पर सूक्ष्मजीव , कुछ दवाओं और अन्य परिस्थितियों जैसे स्वप्रतिरक्षित रोगों द्वारा संक्रमण द्वारा होती है ।" ,"आम लक्षणों में खांसी , बुखार और सांस लेने में कठिनाई शामिल हैं ।" ,"नैदानिक उपकरणों में , एक्स - रे और बलगम का कल्चर शामिल हैं ।" ,कुछ प्रकार के निमोनिया की रोकथाम के लिये टीके उपलब्ध हैं । ,"उपचार , अंतर्निहित कारणों पर निर्भर करते हैं ।" ,प्रकल्पित बैक्टीरिया जनित निमोनिया का उपचार प्रतिजैविक द्वारा किया जाता है । ,यदि निमोनिया गंभीर हो तो प्रभावित व्यक्ति को आम तौर पर अस्पताल में भर्ती किया जाता है । ,"वार्षिक रूप से , निमोनिया लगभग 450 मिलियन लोगों को प्रभावित करता है जो कि विश्व की जनसंख्या का सात प्रतिशत है और इसके कारण लगभग 4 मिलियन मृत्यु होती हैं ।" ,"19 शताब्दी में विलियम ओस्लर द्वारा निमोनिया को "" मौत बांटने वाले पुरुषों का मुखिया "" कहा गया था , लेकिन 20 शताब्दी में एंटीबायोटिक उपचार और टीकों के आने से बचने वाले लोगों की संख्या बेहतर हुई है ।" ,"बावजूद इसके , विकासशील देशों में , बहुत बुज़ुर्गों , बहुत युवा उम्र के लोगों और जटिल रोगियों में निमोनिया अभी मृत्यु का प्रमुख कारण बना हुआ है ।" ,"संक्रामक निमोनिया से पीड़ित लोगों में अक्सर बलगम वाली खांसी , बुखार के साथ कंपकपी वाली ठंड , सांस में तकलीफ , गहरी सांस लेने पर तीखा व चुभन वाला छाती का दर्द और बढ़ी श्वसन दर के लक्षण होते हैं ।" ,"यदि बाढ़ , अकाल आदि के कारण फसल नष्‍ट हो जाए , तो कृषि श्रमिकों को जीवन - निर्वाह करना भी कठिन हो जाता है ।" ,भारत में अधिकतर मजदूर निम्न वर्ग के होते हैं जिनका सदियों से शोषण किया गया है । ,इस कारण इनका सामाजिक स्तर नीचा रहता है । ,नियोजन काल के दौरान कृषि के क्षेत्र में तकनीकी का व्यापक विकास हुआ । ,"कृषि में मशीनों का प्रयोग बढ़ जाने के कारण अशिक्षित कृषि श्रमिकों में भारी मात्रा में बेरोजगारी बढ़ रही है , जो उनकी एक गंभीर समस्या है ।" ,आवास समस्या - ,भूमिहीन श्रमिकों का अपना निजी मकान नहीं होता है । ,वे भू - स्वामी की अनुमति से उसकी बेकार भूमि पर झोपड़ी बना कर रहते हैं । ,इसके बदले में उन्हें भू - स्वामी के यहाँ बेगार करनी पड़ती है । ,"एक ही झोपड़ी में अनेक व्यक्‍तियों के रहने से शारीरिक , सामाजिक , नैतिक व धार्मिक मर्यादा समाप्‍त हो जाती है ।" ,संगठन का अभाव - ,भारतीय कृषि मजदूरों का कोई विशेष संगठन नहीं है । ,इसलिए भू - स्वामियों से अपनी मजदूरी आदि के संबंध में सौदा करने में असमर्थ रहते हैं । ,मौसमी रोजगार - ,कृषि श्रमिक को पूरे साल लगातार काम नहीं मिल पाता है । ,"द्वितीय कृषि जाँच समिति के अनुसार एक अस्थायी पुरुष श्रमिक को वर्ष में औसतन 197 दिन काम मिलता है , जिसमें 40 दिन वह अपना काम करता है , और 128 दिन बेकार रहता है ।" ,"इसी प्रकार बालकों को वर्ष में 204 दिन , स्‍त्रियों को 141 दिन रोजगार प्राप्‍त होता है ।" ,अतः उसकी वार्षिक आय का औसत कम रहता है । ,मजदूरी का निम्न स्तर - ,भारतीय मजदूरों की मजदूरी के स्तर औद्योगिक श्रमिकों की मजदूरी से बहुत कम हैं । ,इसके दो कारण हैं : भूमिहीन मजदूरों की संख्या में वृद्धि एवं ग्रामीण क्षेत्रों में गैर - कृषि व्यवसायों का अभाव । ,कम मजदूरी का उसके स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ता है । ,ऋणग्रस्तता - ,आवश्यकता अनुसार आय न हो पाने के कारण श्रमिक पर ऋण का भार बढ़ता जा रहा है । ,ऋणग्रस्तता के कारण भू - स्वामी के साथ मजदूरी के लिए वह सौदेबाजी में संकोच करता है । ,श्रमिक जीवन भर भू - स्वामी के यहाँ मजदूरी करने के बाद भी ऋणमुक्‍त नहीं होते । ,बाल श्रम व नारी श्रम का शोषण - sg,अपनी जरुरतों को पूरा करने के लिये मजदूरों की औरतें व बच्चे भी मजबूरन कार्य करते हैं । sg,स्‍त्री व बाल श्रमिकों से अधिक घण्टे काम कराकर उन्हें कम मजदूरी दी जाती है । ,अतः बाल श्रम व स्‍त्री श्रम का शोषण कृषि क्षेत्र की प्रमुख समस्या है । ,कृषि श्रमिकों की आर्थिक तथा सामाजिक स्थिति सुधारने के लिए निम्न सुझाव दिए जा सकते हैं - ,सहकारी समितियों की स्थापना - ,"भूमिहीन मजदूरों की सहकारी समितियाँ बनाई जाएं और वे ऐसे कार्य करें जिनमें मजदूरों को रोज़गार मिल सके , जैसे दुग्धशाला उद्योग , शहद की मक्खी पालने का उद्योग ।" sg,इन सब से इनकी आर्थिक स्थिति को सुधारा जा सकता है । ,न्यूनतम मजदूरी - sg,कृषि श्रमिकों की आय में वृद्धि लाने के लिए सभी राज्यों में न्यूनतम मजदूरी निश्‍चित कर दी जाये । ,केन्द्र सरकार ने सन् 1984 में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम पास करके कृषि मजदूरी को ऊँचा उठाने में कई कदम उठाए हैं । ,न्यूनतम मजदूरी निश्‍चित कर दी गई है । ,निगम की व्यवस्था - ,योजना आयोग द्वारा संस्तुति की गई है कि जहाँ कृषि श्रमिक काम करते हैं वहीं उनके लिए सस्ते - हवादार कम लागत के रिहायशी मकान बनाने चाहिए । ,कृषि कला में उन्नति - ,"उत्तम बीज व खाद का प्रबंध हो , सिंचाई के साधनों का प्रसार हो , यातायात के साधन का विकास हो , बेकार व बंजर भूमि को खेती योग्य बनाया जाये ।" ,"उपज की बिक्री में सुधार किया जाए , तथा खेतों की चकबन्दी हो , और खेतों को आर्थिक जोत के योग्य बनाया जाए , पशु धन की दशा में सुधार हो और किसानों को सस्ते ब्याज की दर पर पूँजी उपलब्ध कराई जाये ।" ,लघु व कुटीर उद्योगों का विकास - ,लुप्‍त हो रहे देश के कुटीर उद्योगों का पुनःविकास करने की आवश्यकता है । ,जिससे बहुत से बेरोजगार लोगों को काम मिल सके । ,रोजगार कार्यालयों की गाँवों में स्थापना - ,"अभी तक जो रोजगार कार्यालय हैं , वे शहरों में हैं ।" ,उनका लाभ केवल पढ़े - लिखे लोग उठा रहे हैं । ,"यदि ऐसे कार्यालय गाँवों में भी स्थापित हो जाएं , तो मजदूरों को काम दिलाने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं ।" ,इसलिये इस तरफ ध्यान दिया जाना चाहिए । ,"स्वतंत्रता के उपरान्त भारतीय प्रशासन द्वारा मजदूरों की स्थिति को सुधारने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रयास किये गये , जो निम्नवत हैं -" ,भूमि का वितरण - ,"सरकार द्वारा इस प्रयास पर बल दिया गया है कि भूमि सुधारों जैसे खेतों की उच्चतम सीमा के फलस्वरुप जो भूमि प्राप्‍त होगी , अर्थात् जिस बेकार और बंजर भूमि को खेती योग्य बनाया जाएगा , वह कृषि श्रमिकों में ही बाँटी जाए ।" ,अभी तक इन्हें 69 लाख हैक्टयर बंजर भूमि प्राप्‍त हो चुकी है । ,भूमि की उच्चतम सीमा के फलस्वरुप प्राप्‍त होने वाली 5.6 लाख हेक्टेयर भूमि का वितरण भी कृषि श्रमिकों में ही किया गया है । ,दासता का उन्मूलन - ,भारतीय संविधान के कृषि श्रमिकों की दासता का उन्मूलन कर दिया है । sg,कृषि श्रमिकों की अवस्था सुधारने और उन्हें स्वतंत्रतापूर्वक जीवन व्यतीत करने हेतु सहयोग प्रदान किया जा रहा है । sg,सन् 1976 में बन्धक श्रम प्रणाली कानून पास किया गया है । ,जिससे देश बन्धक मजदूरी की समस्या से मुक्‍त हो गया है । ,भूदान आन्दोलन - sg,आचार्य विनोवा भावे ने 1951 में भूमिहीन कृषि श्रमिकों के लिए भूदान आन्दोलन शुरु किया था । ,इस आन्दोलन का उद्देश्य भूमिपतियों से उनकी इच्छानुसार भूमि लेकर कृषि श्रमिकों में बाँट देना है । ,"इस आन्दोलन के फलस्वरुप लगभग 68 लाख एकड़ भूमि इकठ्ठी की गई है , जिसमें से 15 लाख एकड़ भूमिहीन कृषकों को वितरित किया गया है ।" ,ग्रामीण औद्योगिकीकरण - ,योजनाओं में ग्रामीण औद्योगिकीकरण को भी काफी महत्त्व दिया गया है । ,जो आज की स्थिति में आवश्यक भी है । ,गाँवों में कुटीर उद्योगों की स्थापना के लिए सहायता दी जाती है । ,चलते - चलते रुकने व मुड़ने में परेशानी होती है । ,चेहरे का दृश्य बदल जाता है । ,आंखों का झपकना कम हो जाता है । ,आंखें चौड़ी खुली रहती हैं । ,व्यक्ति मानों सतत घूर रहा हो या टकटकी लगाए हो । ,"चेहरा भावशून्य प्रतीत होता है बातचीत करते समय चेहरे पर खिलने वाले तरह - तरह के भाव व मुद्राएं ( जैसे कि मुस्कुराना , हंसना , क्रोध , दुःख , भय आदि ) प्रकट नहीं होते या कम नजर आते हैं ।" ,"उपरोक्त वर्णित अनेक लक्षणों में से कुछ , प्रायः वृद्धावस्था में बिना पार्किन्‍सोनिज्‍म के भी देखे जा सकते हैं ।" ,"कभी - कभी यह भेद करना मुश्किल हो जाता है कि बूढ़े व्यक्तियों में होने वाले कम्पन , धीमापन , चलने की दिक्कत डगमगापन आदि पार्किन्‍सोनिज्‍म के कारण हैं या सिर्फ उम्र के कारण ।" ,खाना खाने में तकलीफ होती है । ,भोजन निगलना धीमा हो जाता है । ,गले में अटकता है । ,कम्पन के कारण गिलास या कप छलकते हैं । ,हाथों से कौर टपकता है । ,मुंह में लार अधिक आती है । ,चबाना धीमा हो जाता है । ,"ठसका लगता है , खांसी आती है ।" ,बाद के वर्षों में जब औषधियों का आरम्भिक अच्छा प्रभाव क्षीणतर होता चला जाता है । ,"मरीज की गतिविधियां सिमटती जाती हैं , घूमना - फिरना बन्द हो जाता है ।" ,दैनिक नित्य कर्मों में मदद लगती है । ,"संवादहीनता पैदा होती है क्योंकि उच्चारण इतना धीमा , स्फुट अस्पष्ट कि घर वालों को भी ठीक से समझ नहीं आता ।" ,स्वाभाविक ही मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ता है । ,"सुस्ती , उदासी व चिड़चिड़ापन पैदा होते हैं ।" sg,स्मृति में मामूली कमी देखी जा सकती है । ,"नींद में कमी , वजन में कमी , कब्जियत , जल्दी सांस भर आना , पेशाब करने में रुकावट , चक्कर आना , खड़े होने पर अंधेरा आना , सेक्स में कमजोरी ।" ,पार्किंसन रोग ,पार्किंसन रोग ( Parkinson's disease or PD ) केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र का एक रोग है जिसमें रोगी के शरीर के अंग कंपन करते रहते हैं । ,पार्किन्‍सोनिज्‍म का आरम्भ आहिस्ता - आहिस्ता होता है । ,पता भी नहीं पड़ता कि कब लक्षण शुरू हुए । ,अनेक सप्ताहों व महीनों के बाद जब लक्षणों की तीव्रता बढ़ जाती है तब अहसास होता है कि कुछ गड़बड़ है । ,"डॉक्टर जब हिस्‍ट्री ( इतिवृत्त ) कुरेदते हैं तब मरीज़ व घरवाले पीछे मुड़ कर देखते हैं याद करते हैं और स्वीकारते हैं कि हां सचमुच ये कुछ लक्षण , कम तीव्रता के साथ पहले से मौजूद थे ।" ,लेकिन तारीख बताना सम्भव नहीं होता । sg,"कभी - कभी किसी विशिष्ट घटना से इन लक्षणों का आरम्भ जोड़ दिया जाता है - उदाहरण के लिये कोई दुर्घटना , चोट , बुखार आदि ।" ,यह संयोगवश होता है । ,उक्त तात्कालिक घटना के कारण मरीज़ का ध्यान पार्किन्‍सोनिज्‍म के लक्षणों की ओर चला जाता है जो कि धीरे - धीरे पहले से ही अपनी मौजूदगी बना रहे थे । ,बहुत सारे मरीजों में पार्किन्‍सोनिज्‍म रोग की शुरूआत कम्पन से होती है । ,कम्पन अर्थात् धूजनी या धूजन या ट्रेमर या कांपना । ,"हाथ की एक कलाई या अधिक अंगुलियों का , हाथ की कलाई का , बांह का ।" ,पहले कम रहता है । ,यदाकदा होता है । ,रुक रुक कर होता है । sg,"इस तरह के कृषि क्षेत्रों में मानसून एशिया के ज्यादा वर्षा वाले भागों में सम्मिलित किया जाता है जिसमें पूर्वी भारत , बंग्लादेश तथा श्रीलंका प्रमुख हैं ।" ,फसलों के उत्पादन में ज्यादा से ज्यादा विश्वसनीयता होती है । ,"विश्व में यूरोप , अमेरिका व एशिया के ज्यादातर क्षेत्र आर्द्र कृषि से सम्बन्धित हैं ।" ,सिंचाई क्षमता युक्‍त कृषि क्षेत्र ,"कृषि के उन क्षेत्रों में सिंचाई की अधिक जरूरत पड़ती है , जिन क्षेत्रों में वृष्‍टि की मात्रा अत्यधिक कम होती है यथा - मानसूनी व उपोष्ण प्रदेश ।" ,मौसम तथा अविश्वसनीय बारिश की वजह से इन प्रदेशों की कृषि में सिंचाई का प्रमुख स्थान है । ,जिन भागों में वर्षा की मात्रा कम है अथवा वर्षा किसी विशेष मौसम में ही होती है पूरे वर्ष तापमान साधारणतः कृषि के लिए उपयुक्‍त होता है । ,इसलिए ज्यादा उत्पादन हेतु सिंचाई जरूरी एवं अपरिहार्य है । ,"सिंचाई तालाबों , कुओं , नदियों तथा नहरों से भी की जाती है ।" ,सिंचाई के लिए नलकूपों का भी प्रयोग होता है । ,भारत तथा चीन में सिंचाई का सबसे अधिक विकास हुआ है । ,"संयुक्त राज्य अमेरिका , तुर्की , मिस्र तथा भूमध्य सागरीय प्रदेश व रुस आदि देशों में सिंचित कृषि का प्रचलन है ।" ,अल्प वर्षा क्षेत्र वाली कृषि ,इसका आशय उस कृषि से जहाँ वर्षा की मात्रा 50 सेमी. से कम है और सिंचाई के साधन उपलब्ध नहीं हैं । ,"इस पद्धति का प्रचलन सबसे प्रथम संयुक्‍त राज्य अमेरिका के ग्रेट बेसिन , कोलम्बिया बेसिन और स्नेक नदी बेसिन में हुआ था ।" ,इस प्रविधि के तहत खेतों की गहरी जुताई ( 20 - 25 सेमी. ) की जाती है । ,जिससे प्राप्‍त होने वाली वर्षा मिट्टी में शामिल हो जाये और वाष्पीकरण द्वारा नमी का ह्रास कम हो सके । ,इसलिए सूखी कृषि की फसलें मृदा में मौजूद नमी पर आधारित होती हैं । sg,नमी के लिए बड़ी - बड़ी क्यारियाँ निर्मित करके वर्षा का जलप्रवाह नियमित करते हैं । ,"इस प्रकार जेटजोल ( Jetzold , 1979 ) इसे जल सान्द्रण संस्कृति ( water concentrating culture ) कहते हैं ।" ,"इस प्रदेश में खासकर वे फसलें जो सूखे को सहन कर सकें , शीघ्र ही तैयार हो सकें तथा हानिकारक कीड़ों से अपनी रक्षा कर सकें बोयी जाती हैं ।" sg,खादों एवं उर्वरकों के प्रयोग से मृदा को नम बनाया जाता है । ,इस प्रदेश के लिए गेहूँ सबसे उपयुक्‍त फसल है । ,"गेहूँ के अतिरिक्त राई , जौ तथा ओट का भी उत्पादन होता है ।" ,"भारत के शुष्‍क कृषि क्षेत्रों में बाजरा , ज्वार , जौ , चना आदि प्रमुख फसलें हैं ।" ,एक फसली कृषि का आशय भूमि से वर्ष में एक ही फसल के उत्पादन से है । ,यह कृषि बड़े बागानों में होती है । ,"क्षेत्रविशेष में एक ही फसल की कृषि के विकास में आर्थिक , भौगोलिक तथा अन्य उपादानों का हाथ रहता है ।" ,"यद्यपि उपयुक्‍त परिस्थितियाँ केवल एक ही फसल के लिए प्रमुख नहीं हैं तथापि प्रबन्ध , मजदूरी एवं बाजारों आदि की दृष्‍टि से सिर्फ एक ही फसल के बागान प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं ।" pl,वर्ष में दो बार एक ही क्षेत्र से प्राप्‍त की जाने वाली फसलों को दो फसली कृषि कहा जाता है । ,"ज्यादा सघन आबाद क्षेत्रों में जहाँ भौगोलिक दशाएँ उपयुक्‍त हैं , वहाँ दो फसली क्षेत्र प्राप्‍त होते हैं ।" pl,दक्षिणी पूर्वी एशिया में नदियों द्वारा निर्मित मैदानों में सर्दी तथा ग्रीष्मकालीन ( रबी एवं खरीफ ) फसलें प्राप्‍त की जाती हैं । ,बहु फसलीय कृषि - sg,इस प्रकार की कृषि अथवा खेती का तात्पर्य उस भू - भाग से लगाया जाता है जिस भू - भाग पर साल में दो फसलों से अधिक फसलें काटी जाती हैं । ,बहुफसली कृषि बहुत ही उन्नत एवं गहन कृषि के क्षेत्रों में सम्भव है । ,"इस तरह की कृषि के लिए उत्तम खाद , बीज और सिंचाई की उत्तम व्यवस्था , शस्यावर्तन , उपयुक्‍त जलवायु तथा यांत्रिक कृषि की आवश्यकता आवश्यक होती है ।" ,"भारत , चीन तथा संयुक्‍त राज्य अमेरिका के अनेक भागों में ऐसी खेती का प्रचलन है ।" ,व्यावसायिक कृषि - ,इस प्रकार की खेती आधुनिक विकास की देन है । ,"परिवहन या यातायात संसाधनों में वैज्ञानिक व तकनीकी ज्ञान के विस्तार के फलस्वरूप व्यावसायिक कृषि में अनेक फसलों के उत्पादन के बदले किसी क्षेत्र में केवल एक फसल का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है , जिसके लिए वहां भौगोलिक स्थितियाँ सबसे ज्यादा अनुकूल हों ।" sg,उत्पादित पदार्थ का ज्यादा भाग निर्यात कर दिया जाता है । ,"व्यावसायिक कृषि विस्तृत , गहन व मिश्रित सभी का सम्मिलित रूप है ।" ,फसलोत्पादन तथा पशुपालन मिश्रित कृषि में दोनों ही साथ - साथ चलते हैं । ,मनुष्य श्रम की कमी की वजह से कृषि में मशीनों का सबसे ज्यादा उपयोग होता है । ,"विश्व में इस तरह की कृषि उत्तरी गोलार्द्‍ध में महाद्वीपों के भीतरी भागों व दक्षिणी गोलार्द्‍ध के तटीय भागों में प्रचलित है जिसमें संयुक्‍त राज्य अमेरिका तथा कनाडा का प्रेयरी प्रदेश , यूक्रेन तथा यूराल क्षेत्र व्यावसायिक कृषि हेतु विश्व प्रसिद्ध हैं ।" ,इसके अलावा दक्षिणी अमेरिका में पराना - पराग्वे व आस्ट्रेलिया में मरे - डार्लिंग की घाटियों में भी ऐसी खेती की जाती है । ,रोपण खेती - ,खेती का यह खास तरीका और तुलनात्मक रूप से नयी पद्धति है जिसका प्रारंभ दक्षिणी गोलार्द्‍ध के ऊष्ण तथा उपोष्ण प्रदेशों में हुआ । ,"रोपण कृषि की विशेषताओं में वृहत पैमाने पर कृषि , एक फसल की प्रमुखता , विशिष्‍ट कृषि पद्धति ( रोपण एवं कुछ बीज बोना आदि ) हैं ।" pl,"इसके तहत चाय , नारियल , कहवा , गन्ना , मसाले , केला , रबर , कोको आदि के बड़े - बड़े बागान लगाये जाते हैं ।" ,इस कृषि में समस्त फसलें इस तरह की हैं कि उनका औद्योगिक संशोधन आवश्यक है । ,ससपोल गुफा में सैलानियों की भीड़ लगी रहती है । ,"लद्दाखी समाज नृत्यों , गीतों , फूलों की सजधज और हास्यविनोद का रसिया है ।" ,कठिन जीवन में भी वह शांत और कर्मठ दिखता है । ,लद्दाख का मुखौटा नृत्य देखने दूरदूर से लोग आते हैं । ,मुखौटा नृत्य में केवल लामा लोग ही भाग लेते हैं । ,लामा लोगों ने विचित्र पशुओं के भेष और मुखौटा पहन कर बचपन से ही नृत्य का अभ्यास किया होता है । ,लद्दाख का दूसरा प्रमुख नगर कारगिल है । sg,लेह से 230 किलोमीटर दूर यह शहर चमकदमक से अलग स्थानीय मुस्लिम आबादी से भरा है । ,कारगिल के सामने पाकिस्तान की सीमा से लगे कुछ गाँव हैं । ,श्रीनगर की ओर बढ़ते हुए सीमा बिलकुल साथ लग जाती है । ,लद्दाख का रास्ता तब खुलता है जब जून की धूप से बर्फ़ पिघल कर हट जाती है । ,बारिश न होने के कारण जुलाई से अगस्त तक लद्दाख में बेहतर मौसम रहता है । ,लद्दाख जाने से पहले पूरी जानकारी और तैयारी कर लेनी चाहिए । pl,लेह और लद्दाख की यात्रा पर छोटे बच्चों को साथ न ले जाएँ । ,मनाली से लेह या श्रीनगर से लेह जाने वाले यात्री लौटते हुए श्रीनगर या मनाली पहुँचते हैं । ,लद्दाख की यात्रा आम परिवारों के लिए आम पर्यटन जैसी यात्रा नहीं है । ,फिर भी यह अमरनाथ या केदारनाथ जैसी यात्रा से कहीं अधिक आसान है । ,क्योंकि पैदल चढ़ाई या उतराई पर चलने की जरूरत नहीं है । ,हर कहीं वाहन उपलब्ध हैं । ,पंजाब और हरियाणा राज्य की संयुक्त राजधानी होने के कारण चंडीगढ़ के रख - रखाव पर विशेष ध्यान दिया जाता है । ,चंडीगढ़ शहर केवल उत्तर भारत का ही नहीं बल्कि पूरे देश का एक अति आधुनिक शहर है । ,"हरे - भरे पेड़ पौधों से सुसज्जित चंडीगढ़ की चौड़ी सड़कें , स्वच्छता , प्रदूषणरहित वातावरण इस की खूबसूरती में चार चाँद लगा देते हैं ।" ,चंडीगढ़ शहर का निर्माण सुप्रसिद्ध वास्तुकार ली . कार्बूजिए ने शिवालिक पर्वतों की गोद में करवाया था । ,पहाड़ों से घिरे होने की वजह से चंडीगढ़ की आबोहवा काफी खुशगवार और स्वास्थ्यवर्धक है । ,गर्मियों की छुट्टियों में हिमालय जाने वाले पर्यटक इन हवाओं का आनंद लेने और चंडीगढ़ की खूबसूरती को देखने के लिए यहाँ जरूर रुकते हैं । ,चंडीगढ़ को हिमालय का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है क्योंकि चंडीगढ़ के बाद कालका से ही हिमालय की चढ़ाई शुरू हो जाती है । sg,"चंडीगढ़ के भवन आधुनिक वास्तुशिल्प का एक सुंदर उदाहरण पेश करते हैं , जिन्हें देखने दुनिया भर से लोग यहाँ आते हैं ।" ,रोज गार्डन 30 एकड़ में फैला हुआ है । ,"रोज गार्डन पर 1,600 से अधिक गुलाब की किस्में मौजूद हैं इसी कारण यह एशिया का सबसे बड़ा गुलाब गार्डन है ।" sg,बाग के बीचो - बीच बना फौआरा इस बाग की खूबसूरती को और भी बढ़ाता है । ,हर वर्ष यहाँ ’ रोज फेस्टिवल ’ का आयोजन किया जाता है । ,रौक गार्डन को नेकचंद नाम के एक साधारण व्यक्ति ने भारी परिश्रम के बाद तैयार किया । sg,पद्म्श्री प्राप्त नेकचंद ने टूटी - फूटी घरेलू वस्तुओं एवं कचरे में पड़ी वस्तुओं से इस गार्डन को बनाया है । ,रौक गार्डन को देखने के लिए दूरदूर से लोग यहाँ आते हैं और यहाँ के कला संसार को देख कर दंग रह जाते हैं । pl,विशाल क्षेत्र में फैले इस खूबसूरत पार्क में बोगनवेलिया की अनेक किस्में देखी जा सकती हैं । ,टेरेस गार्डन 10 एकड़ में फैला है । ,टेरेस गार्डन वनस्पति छात्रों की पसंदीदा जगह है जहाँ रंग - बिरंगे मौसमी फूलों की भरमार है । ,चंडीगढ़ का कैपिटल कांप्लेक्स सुंदर वास्तुकला का उदाहरण है । ,"कैपिटल कांप्लेक्स में सचिवालय , विधानसभा भवन और हाईकोर्ट हैं ।" ,टेपिआरी पार्क भी बहुत खूबसूरत है । ,टेपिआरी पार्क में पेड़पौधों को काँट - छाँट कर पशुओं का रूप दिया गया है । ,पार्क की इस खूबी की ओर बच्चे बहुत आकर्षित होते हैं । ,डौल म्यूजियम सेक्टर 23 में स्थित है । ,डौल म्यूजियम से 25 से अधिक देशों की गुड़ियों व कठपुतलियों को देखा जा सकता है । sg,डौल म्यूजियम में मानव का विकास दर्शाया गया है । ,सिटी म्यूजियम प्रतिदिन प्रात: 10 से शाम साढ़े 4 बजे तक पर्यटकों के लिए खुलता है और रविवार को बंद रहता है । ,"नौका विहार , वाटर स्पोटर्स तथा दूसरे पानी के खेलों के लिए सुखना झील बेहतरीन स्थान है ।" ,शिवलिक की तलहटी में कृत्रिम रूप से बनाई गई और 15 वर्ग किलोमीटर में फैली इस झील पर प्रवासी पक्षियों का तांता लगा रहता है । ,अमृतसर एक ऐतिहासिक शहर है । ,देश के उत्तर - पश्चिम में स्थित 425 साल पुराने इस शहर पर आक्रांताओं की कुदृष्टि कई बार पड़ी लेकिन फिर भी इसका गौरव कम नहीं हुआ । ,"वैसे तो इनकी मुस्कराहट का आज भी जवाब नहीं NULL , लेकिन उस ज़माने में हर कोई इनकी एक झलक का दीवाना था ।" ,अगर यहीं पर सब खिला देंगी तो शादी में क्या खातिर करेंगी ? ,"जी , हमारे यहां की खातिर तो जब आप आएंगे तब पता चलेगी , आप तो आएंगे ही ?" ,अजी आएंगे क्यों नहीं और जब हम आएंगे तो आतिशबाजियां होंगी । ,भैया ! अगर आप हमारा काम करेंगे तो हम अपनी मम्मी जी से यानी कि आपकी मौसी जी से कहेंगे कि वे आपके लिए एक सुंदर - सी दुल्हन चुन कर लाएं । ,"जीजा जी तो वहां बैठेंगे मम्मी , ये सीट तो उनके भाई - बंधुओं के लिए है ।" ,ज़रा उन्हें पता तो चले हमारे यहां की खातिरदारी होती कैसी है ? ,"भोला प्रसाद जी हिंदी साहित्य में कालिदास की शकुंतला पर रिसर्च कर रहे हैं , वैसे इन्हें अपनी शकुंतला की भी तलाश है ।" pl,"जीजी , लड़के वालों ने जीजा जी के जूते एक लाल - पीले मिठाई के डिब्बे में छिपा दिए हैं ।" ,"मान गए भैया जी , ऐसी जगह चुनी है जूते छिपाने की कि किसी को शक ही नहीं हो सकता ।" ,"हे प्रभु ! हे मुरली मनोहर ! आप तो चमत्कारों के धनी हैं , निराले से निराला खेल खेलते हैं ।" ,प्रभु ! कोई ऐसा चमत्कार कर दो कि बाज़ी ले जाएं हम और उल्लू बनें वे । ,"लल्लू ! मुझे लगता है कि ये हमें कहीं ले जाना चाह रहा है , शायद इसे मालूम है जूते कहाँ हैं ।" sg,"लल्लू ! एक काम करते हैं , अब उस डिब्बे की जगह ये डिब्बा छिपा और सुन जूतों को ऐसी जगह छिपाना जहां इन्हें ढूंढते - ढूंढते नानी याद आ जाए ।" sg,"बच्चियों , बच्चियों , मेरी बात सुनो , चलो पांच सौ रुपए में बात पक्की करते हैं ।" ,"हम लोग पूरे एक हजार एक लेंगे जीजा जी से , तभी जूते वापस मिलेंगे ।" ,"अरे यार ! कमाल कर रहा है तू , यहां हमें मदद करने की बजाय वहां बैठा - बैठा पपीता खा रहा है , अरे कुछ तो बोल ।" ,"मामा जी , पहले आप सौदा - वौदा कर लो , हम तो अंत में बोलेंगे ।" ,निशा जी ! अगर शादी में हँसी - मज़ाक में मुझसे कोई भूल हुई हो तो मुझे माफ़ कर दीजिएगा । ,"तुम इधर आओ , तुम कहां चले ?" ,"खुश हो न , ये रिश्ता तुम्हीं ने करवाया है , दे दिया भंडार प्रोफ़ेसर साहब ने ?" ,"क्या है मामी जी , जब भौजी के साथ इन सब चीज़ों को तौल कर देखा तो उनका वजन हमारी भौजी के मुकाबले रत्ती भर भी नहीं निकला , छोड़कर आए ।" ,"नहीं , नहीं , मालिक ! आपने हमें इतनी इज्जत दी , इतनी अच्छी भौजी लाकर दी , बस हम गंगा नहा आए ।" ,"तू ही कहता है न कि पूजा की शक्ल बिल्कुल तेरी अपनी भौजी से मिलती है , बस यही समझ ले कि तेरे सामने वही खड़ी है और तुझे दे रही है ।" ,"देख , भाभी सबसे ज्यादा स्नेह अपने देवर से रखती है इसलिए ध्यान रहे तेरी भाभी को कभी इसके मायके की याद न सताए , समझा ?" ,"चमेली इसे कुछ समझा , इतनी मुश्किल से आज छुट्टी के दिन भैया को क्रिकेट खेलने के लिए राजी किया है ।" ,"हे प्रेम ! क्रिकेट फील्ड पर सिर्फ देखने की इज़ाजत नहीं होती , साथ में खेलना भी पड़ता है ।" ,सबका ध्यान हमारे नए खिलाड़ी की तरफ जिन्होंने पहली ही गेंद में मंझे हुए खिलाड़ी को क्लीन बोल्ड कर दिया । ,"हमारे नए खिलाड़ी बैटिंग की तरफ मुड़ते हुए , अब मैच ने बड़ा ही रोमांचक मोड़ ले लिया है ।" ,हमारे नए खिलाड़ी बड़े ही आत्मविश्वास के साथ अपनी क्रीज पर डट गए हैं । ,"हलवाई से भी बातचीत हो गई है , कह दिया है कि बहू की गोद भराई का फंक्शन है , सब काम सही वक्त पर हो जाने चाहिए ।" ,"भई वाह , बहू ! तुमने लल्लू को अंग्रेजी सिखा कर एकदम इंग्लिशमैन बना दिया है ।" ,बहू ! ज़रा पूछो तो सही हमारे समधी लोग फंक्शन के लिए कब आ रहे हैं ? ,"जी , ऐसा है कि इनके कॉलेज के एक्ज़ाम्स पोस्टपोंड होते - होते अभी इन्हीं तारीखों से शुरू हो रहे हैं ।" ,ओहो ! क्या लड़की है ये ? ,"निशा ! उठ बेटा , प्रेम आता ही होगा ।" ,इंतज़ार ? ,हमने तो नहीं किया । ,तो क्या आप छत पर खड़ी दिन में तारे गिन रही थीं ? ,लोग कहते हैं खूबसूरत लड़कियां जब झूठ बोलती हैं तो और भी खूबसूरत लगती हैं । ,"एक बात पूछूं , आज हमें ये फूल किस खुशी में मिले हैं ।" ,"बेसिक्ली निशा जी , जब भी हम मिले हैं सिर्फ लड़े हैं , झगड़े हैं , फूलों से और अच्छा क्या उपाय होता यह पहचान आगे बढ़ाने का ।" ,"अच्छा ये बताइए , शादी में विदाई होते समय आपने हमसे माफ़ी क्यों मांगी थी ?" ,आज फिर हम सात दिन की दवाइयाँ और देते हैं और इस बीच एक - आध चक्कर उधर का लगाएँगे तो आकर देख जाएँगे । ,"इस लड़के का एक बड़ा भाई भी है , ओमकार , रूपा के लिए बड़ा पसन्द पड़ गया है हमें तो ।" ,अरे ! बात तो समय देखकर चलाएँगे । sg,"चंदन बेटा ! हमारा एक काम कर दो बचवा , अचार की हंडिया से एक मिर्चा ला दो ।" ,"अच्छा , पूरा ना सही तो आधा मिर्चा ला दो , जरा मुँह का स्वाद बदल लेंगे ।" ,"खाके उठो , तुम्हारे मुँह का स्वाद बदलने के लिए हम देते हैं , दवाई ।" ,का बात है काका ? ,"अरे भइया ओमकार ! हमको रिहाई दिलवा दियो इस दवाई से , बहुत हो गया ।" ,चंदन ! कल वैद जी आएँगे का ? ,"ना , दवाई ले आने को कहा है ।" ,यों सिंगल स्क्रीन थिएटर के दर्शकों को अग्निपथ अधिक नहीं भा सकी । ,विद्या बालन की फिल्म द डर्टी पिक्चर के वीकएंड कलेक्शन से प्रतिद्वंदी और फिल्म इंडस्ट्री हैरत में है । ,"द डर्टी पिक्चर के प्रचार और जिज्ञासा से फिल्म की जबरदस्त ओपनिंग की उम्मीद थी , लेकिन वीकएंड में 30 करोड़ से अधिक के कलेक्शन की बात ट्रेड पंडितों ने भी नहीं सोची थी ।" ,चूंकि द डर्टी पिक्चर नायिका प्रधान फिल्म है और माना जाता है कि देश के दर्शक ऐसी फिल्में अधिक पसंद नहीं करते । ,विद्या बालन ने अपने आकर्षण और परफारर्मेस से सभी को चौंका दिया है । ,"उल्लेखनीय है कि पा , इश्किया और नो वन किल्ड जेसिका के बाद द डर्टी पिक्चर उनकी लगातार चौथी सफल और प्रशंसित फिल्म है ।" ,विवादों के बीच रिलीज हुई प्रकाश झा की आरक्षण दर्शकों को सिनेमाघरों तक लाने में सफल रही । ,"अगर इसकी रिलीज पंजाब , उत्तर प्रदेश और आंध्रप्रदेश में बाधित नहीं हुई होती तो सप्ताहांत का कलेक्शन और ज्यादा होता ।" ,आरक्षण को 70 से 90 प्रतिशत के बीच आरंभिक दर्शक मिले । ,"सोमवार को पंद्रह अगस्त होने की वजह से छुट्टी का दिन था , इसलिए दूसरी फिल्मों की तरह सोमवार को आरक्षण के दर्शकों की संख्या में भारी गिरावट नहीं आई ।" ,सोमवार के बाद भी इसे पर्याप्त दर्शक मिल रहे हैं । ,शुक्रवार से रविवार के बीच इस फिल्म ने 21 करोड़ से अधिक का कारोबार किया है । ,"ट्रेड पंडितों के मुताबिक आरक्षण को विवादों से फायदा हुआ है , लेकिन तीन राज्यों में उसी दिन रिलीज नहीं मिलने से नुकसान भी हुआ ।" ,"हाल - फिलहाल में आई किसी फिल्म के बाक्स ऑफिस कलेक्शन को लेकर ऐसी जिज्ञासा नहीं दिखी , जो रा - वन ने पैदा की ।" ,दिवाली के दिन रिलीज हुई इस फिल्म को पांच दिनों का वीकएंड मिला । ,"हालांकि रा - वन को आम दर्शकों ने पसंद किया , लेकिन ट्रेड पंडितों के मुताबिक इसका कलेक्शन अपेक्षा से कम रहा ।" ,"दिवाली और उसके अगले दिन के कलेक्शन से लग रहा था कि रा - वन रविवार तक 100 करोड़ की लीग में आ जाएगी , लेकिन रविवार तक इसका कलेक्शन 82 से 92 करोड़ के बीच रहा ।" ,"अलग - अलग ट्रेड विशेषज्ञ अलग - अलग आंकड़े दे रहे हैं , फिर भी रा - वन ने निस्संदेह औसत से बेहतर व्यापार किया है ।" ,सोमवार से कलेक्शन में भारी गिरावट आई है । ,सोमवार को रा - वन ने केवल 6.5 करोड़ का बिजनेस किया । ,"इस गिरावट के बावजूद माना जा रहा है कि फिल्म का बिजनेस औसत से बेहतर रहेगा और यह सुपरहिट की कैटेगरी में आ जाएगी , क्योंकि इस हफ्ते कोई बड़ी फिल्म रिलीज नहीं हो रही है ।" ,रा - वन ने मेट्रो और विदेशी बाजार में अच्छा बिजनेस किया है । ,छोटे शहरों और सिंगल स्क्रीन थिएटर में रा - वन ने बहुत अच्छा बिजनेस नहीं किया । ,रा - वन के कलेक्शन पर गौर करने पर पता चलता है कि इस फिल्म ने हिंदी प्रदेशों के शहरों में अपेक्षाकृत कम दर्शकों को आकृष्ट किया । ,रा - वन को 3डी में दर्शक अधिक पसंद कर रहे हैं । ,लेकिन 3डी की तकनीकी सुविधा ज्यादातर मेट्रो शहरों में है । ,पिछले हफ्ते की फिल्म मौसम का रिलीज टल जाने से मेरे ब्रदर की दुल्हन और बॉडीगार्ड को फायदा हुआ । ,मेरे ब्रदर की दुल्हन ने दस दिनों में 50 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है । ,इमरान खान और कट्रीना कैफ की फिल्म के लिए यह कलेक्शन काफी माना जाएगा । ,मेरे ब्रदर की दुल्हन अब हिट फिल्मों के समूह में शामिल हो गई है । ,बॉडीगार्ड का कलेक्शन भी बढ़ कर 140 करोड़ से अधिक हो गया है । ,ट्रेड पंडितों की निगाह अब इस पर लगी है कि क्या बॉडीगार्ड और नए रिकार्ड बनाएगी । ,इम्तियाज अली की रॉकस्टार को अपेक्षा के मुताबिक बड़े शहरों और मल्टीप्लेक्स में अच्छी ओपनिंग मिली । ,फिल्म के बारे में पहले से ही कहा जा रहा था कि यह शहरी दर्शकों को ज्यादा पसंद आएगी । ,खासकर युवा दर्शकों को । ,ट्रेड पंडितों का अनुमान सही निकला । ,इस फिल्म को छोटे शहरों के दर्शकों ने अधिक पसंद नहीं किया । ,कहा जा रहा है कि रणबीर कपूर को इस फिल्म से सबसे बड़ी ओपनिंग मिली है । ,पहले हफ्ते में इस फिल्म ने लगभग 35 करोड़ का व्यापार किया । ,"फिल्म मनोरंजन के लिहाज से बुरी हो तो संजय दत्त , अजय देवगन और कंगना रानावत के होने के बावजूद फिल्म को दर्शक नहीं मिलते ।" ,रासकल्स के साथ यही हुआ । ,बड़े नाम और प्रचार के बावजूद चार दिनों के वीकएंड में इसे सिर्फ 23 करोड़ का कलेक्शन मिला । ,साउंडट्रैक और लव ब्रेकअप्स जिंदगी में बड़े स्टार नहीं थे । ,उनके प्रति दर्शकों का सामान्य रेस्पांस रहा । ,नई फिल्मों की रिलीज से पिछले हफ्ते फोर्स के दर्शक कम हो गए । ,पिछली फिल्मों में साहब बीवी और गैंगस्टर को दूसरे हफ्ते में भी कुछ दर्शक मिले । ,रा - वन के पहले बाक्स आफिस पर थोड़ी सुस्ती दिख रही है । ,हड़बड़ी में इस हफ्ते पांच फिल्में रिलीज हो रही हैं । ,पिछले हफ्ते प्रदर्शित शकल पर मत जा के बिजनेस की कोई उम्मीद नहीं थी । ,अपेक्षा के मुताबिक बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का प्रदर्शन बुरा रहा । ,रॉकस्टार के दर्शकों में भी भारी गिरावट आई है । ,सर्वश्रेष्ठ गैर - फीचर फिल्म का पुरस्कार राजा शबीर खान की फिल्म ‘ शेफर्ड्स ऑफ पैराडाइज़ ‘ को दिया गया है जबकि सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ पुस्तक का पुरस्कार बीडी. गर्ग की ‘ साइलेंट सिनेमा ऑफ इंडिया ए पिक्टोरियल जर्नी ‘ को दिया गया है । ,"मुंबई आतंकी हमले पर बनी , चर्चित फिल्मकार रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘ द अटैक्स ऑफ 26 / 11 ` पर कुछ संवेदनशील दृश्यों के कारण संकट के बादल छा गए हैं ।" ,भारत पर हुए सबसे बड़े आतंकी हमले की सत्यकथा पर आधारित इस फिल्म के कुछ दृश्यों पर सरकार समेत सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को ऐतराज है । ,गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सेंसर बोर्ड से फिल्म को दोबारा देख कर कुछ दृश्यों की समीक्षा करने को कहा है । ,26 / 11 हमले के बाद विवादों से जुड़े रहे वर्मा की फिल्म पर सरकारी आपत्तियों को देख माना जा रहा है कि उन्हें कुछ दृश्यों से कांट - छांट करनी पड़ सकती है । sg,उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार गृह मंत्रालय ने सेंसर बोर्ड को पत्र लिखा है । ,इसमें कहा गया है कि देश की आंतरिक सुरक्षा की जवाबदेही गृह मंत्रालय की है । ,लिहाजा उसे ‘ द अटैक्स ऑफ 26 / 11 ‘ के बारे में विश्वास में रखा जाए । ,आपत्तियों की सूची के साथ मंत्रालय ने सेंसर बोर्ड से कुछ संवादों और दृश्यों में संशोधन कराने को भी कहा है । sg,सूत्रों के अनुसार खुफिया विभाग ने सरकार को आगाह किया कि फिल्म में हमले के दौरान राज्य और केंद्र सरकारों को हतप्रभ और दुविधा में दिखाया गया है । ,फिल्म में तीन दिन तक ताज होटल में पाकिस्तानी आतंकियों के साथ हुई खूनी जंग के दौरान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को फैसले लेने में देर करते और ढुलमुल रवैया अपनाते भी दिखाया गया है । ,नाना पाटेकर फिल्म में मुख्य पुलिस अधिकारी की भूमिका कर रहे हैं । ,फायदों के खेल में लोगों को आम आदमी की सच्ची आवाज से वाकिफ कराने वाले बेहद कम ही लोग हैं । sg,मशहूर व्यंग्यकार और जाने - माने पत्रकार अनुज खरे का नाम ऐसे ही कुछेक गिने - चुने लोगों में गिनाया जा सकता है । ,‘ चिल्लर चितंन ‘ के बाद खरे का यह दूसरा व्यंग्य संग्रह है । ,"खरे खुद मानते हैं कि कोई पत्ता न खड़के , किसी के अंदर हलचल न हो , कोई गुल न खिले , कोई व्यवस्था न बदले कोई खेल न हो तो लिखने से भला क्या फायदा ?" ,फायदे का यही मर्म उनके व्यंग्य की धार में नजर आता है । ,लेखक की मान्यता है कि खतरे न हों तो जिंदगी बदरंग हो जाती है । ,लिहाजा दाद या दुत्कार की परवाह किए बिना उसने कलम चलाई है । ,"रूटीन के क्रांतिकारियों की खबर लेनी हो या क्रांति की संभावनाओं को पिघलने के कगार पर देखना , टुंडे विचारों का ताबूत उठाना हो या अपना कद किताबों पर खड़े होकर बढ़ने वालों की ‘ प्रशंसा ‘ करना अनुज एकदम खरे साबित हुए हैं ।" ,"उन्होंने निंदारस का लेटेस्ट वर्जन भी खोजा है और सिम्पैथी मैनेजमेंट को भी साधा है , वह लव का लोचा पकड़ पाने में कामयाब रहे हैं , तो मायके गई पत्नी को एक ठो बैरंग पत्र भी लिख मारे हैं ।" ,"उनकी भाषा में मस्तमौलापन और चौकन्नी तन्मयता है , जो पकड़ लेती है कि कहे जा रहे शब्द का निहितार्थ क्या है ।" ,लगभग 20 वर्षों के अंतराल के बाद किसी लेखक के नए रचनाकर्म का आना हैरानी भरा हो सकता है । ,लेकिन इस वजह से राजा खुगशाल जैसे लेखक के नए कविता संग्रह ‘ पहाड़ शीर्षक है पृथ्वी के ‘ को नजर अंदाज कतई नहीं किया जा सकता । ,‘ 1983 में संवाद के सिलसिले ‘ और 1991 में प्रकाशित ‘ सदी के शेष वर्ष ‘ के बाद यह राजा खुगशाल का तीसरा कविता संग्रह है । ,"उनकी कविताओं में समय , समाज , संस्कृति और व्यवस्था से लेकर पर्यावरण से जुड़ा चिंतन नजर आता है ।" ,इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि राजा खुगशाल ने कविता के प्रति अपनी निस्पृहता और उदासीनता के बीच अपने भीतर के कवि को जिंदा रखा है । ,लंबे अंतराल के बावजूद उनके भीतर के कवि ने अपने समय और समाज को कविताओं से ओझल नहीं होने दिया । ,राजा खुगशाल की कविताओं के कई रंग हैं । ,"कभी वे ‘ दुनिया का चेहरा ‘ कविता में बदलते चेहरों को बयां करते हैं , तो कभी ‘ भोटिये ‘ कविता में एक संस्कृति की कहानी कहते हैं ।" ,"‘ मील का पत्थर ‘ छोटी सी कविता है , लेकिन इसका अर्थ बहुत बड़ा है ।" pl,मील के पत्थरों को भी वे ‘ पथप्रदर्शक और सहयात्री ‘ मानते हैं । ,"इसी तरह ‘ अनंत में मौन ‘ ( स्व शमशेर जी के प्रति सादर ) की काव्य भाषा सहज और सरल है , लेकिन कवित्व से रहित बिल्कुल नहीं ।" ,उन्होंने जो भी महसूस किया उसे आदर और सम्मान के साथ सहज भाषा में कविता का रूप दे दिया । ,शब्द अगर अभिव्यक्ति का माध्यम है तो नृत्य अभिव्यक्ति की एक शैली है । ,"सुर , ताल और लय से जुड़कर नृत्य सदियों से हमारी भावनाओं की जुबां बनता आया है ।" ,मौसम बदले या माहौल pl,हर अवसर के अनुसार एक अलग नृत्य ने हमारे देश की परंपराओं को समद्ध किया है । ,"इन परंपराओं का योगदान तब और भी साफ नजर आता है , जब नृत्य के नाम से ही एक प्रदेश को पहचाना जाने लगता है ।" ,हालांकि हर विद्या के साथ कलाकार की अपनी विद्वता का भी बहुत महत्व है । ,जब कोई भी अच्छा कलाकार प्रस्तूति देता है तो इससे परंपरा मजबूत होती है । ,"इसमें खोज का भी अपना महत्व है क्योंकि कलाकार की कल्पना जितनी ऊंची होगी , प्रस्तुति उतनी ही अच्छी होगी ।" ,फिर चाहे राधा - कृष्ण को मंच पर लाएं या किसी और शीर्षक को अपनी कला से जोड़ें । ,"बेशक नए जमाने के लोग नए रंग में रंग चुके हैं , लेकिन इसके साथ ही यह भी दिलचस्प है कि शास्त्रीय संगीत और नृत्य जैसी प्राचीन कलाओं में रुचि लेने वालों की संख्या बढ़ रही है ।" ,इसकी सबसे बड़ी वजह कलाकारों का गहराई से काम करना कहा जाएगा । ,सांस्कृतिक - गतिविधियों से जुड़े कलाकार के भीतर अपनी कला के लिए आदर सम्मान और निष्ठा हो तो उसकी विद्या हमेशा प्रासंगिक रहती है । ,यही हमारी सामाजिक - संस्कृति की पहचान है । ,भारत का शास्त्रीय नृत्य पूरी दुनिया में मशहूर है । ,वैसे भी नृत्य की कोई सरहद या सीमा नहीं होती है । ,अगर हमारे देश में यह प्राचीन पंरपरा है तो दुनिया भर में इसमें रचने - बसने वालों की भी कोई कमी नहीं है । ,"समय के साथ भले ही इसकी विधाओं में ज्यादा बदलाव नहीं आया है , पर इसमें भंगिमाओं और भावनाओं का जो मिश्रण है वह अद्भूत है ।" ,क्या है कि पहले हम सब लोग वहीं रहते थे । ,लेकिन जब मिसेज मल्होत्रा की डेथ हो गई तो मेरा वहां दिल नहीं लगा इसलिए मैंने सोचा कि वापस अपने देश चला आऊं । ,टीना आपके साथ वापस नहीं आई ? ,"नहीं , उसे अपनी पढ़ाई पूरी करनी थी ।" ,"लेकिन फिर मुझे उसकी बहुत याद आने लगी थी , इसलिए मैंने उसे कहा कि कॉलेज का आखिरी साल हमारे कॉलेज में खत्म करोगी ।" ,"आफ्टर आल , हमारा कॉलेज ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से कम थोड़े ही है न यार ।" ,"मेरे बच्चे , तुम टीना का ख्याल रखोगी ना ?" ,"जानती हो , मैं वो पहली लड़की हूं जिसे राहुल ने ये फ़्रैंडशिप बैंड बांधा है ।" sg,"जानती हो सोनिया , ये फ्रैंडशिप मैं सिर्फ तुम्हें दे रहा हूं ।" ,मेरा आधा घंटा वेस्ट कर दिया । ,तुम थक नहीं जाते इन स्टुपिड लड़कियों के पीछे भागते - भागते ? ,"लेकिन क्या तुम एक लड़की ढूंढ़ नहीं सकते , जो खूबसूरत भी हो , जिसका थोड़ा - बहुत दिमाग भी हो ?" ,कहां मिलेगी मुझे ऐसी लड़की ? ,"और वैसे भी , इन लड़कियों के साथ तो मैं सिर्फ टाइमपास करता हूं क्योंकि अभी तक वो नहीं मिली ना ।" ,"क्या है कि मुझे अभी तक ऐसी लड़की नहीं मिली , जिसे देखकर कुछ होने लगता है ।" ,"जब वो चले तो सब देखते रह जाएं , जब वो रुके तो तो वक्त रुक जाए ।" ,वो मिलेगी तो क्या करोगे ? ,"उसके सामने झुक के , अपनी बाहें फैला के कहूंगा कि ए ! तुम जो भी हो , आई लव यू ।" ,"सो टीना , तुम्हारा फर्स्ट डे है आज कॉलेज में ?" ,कैसा लगा आज यहां कॉलेज में फर्स्ट डे ? ,क्यों ? ,कुछ - कुछ हुआ ? ,"ना , मेरे टाइप की नहीं है ।" ,"हिंदुस्तानी नहीं है ना , लंडन में पली - बढ़ी हुई है और ये लंडनवालियां कुछ अजीब सी होती हैं ।" ,"देखो , लड़की तो वो होती है , जिसे घर में अपनी मां के पास ले जाया जा सके ।" ,"ऐसे तो तुम्हें कोई नहीं मिलने वाला है , समझे !" ,"अगर कोई और नहीं मिली ना , तो मैं तुमसे शादी कर लूंगा ।" ,वैसे भी तुमसे तो कोई शादी करने वाला है नहीं । ,"हमारे कॉलेज का एक रूल है , हम हर एक नए स्टूडेंट को गवाते हैं ।" ,राहुल ! ये प्रिसिंपल साहब की बेटी है । ,"तो क्या हुआ , हम अपना रूल किसी के लिए नहीं तोड़ सकते ।" sg,"देखो , तुम हमारे लिए और इस सारे कॉलेज के लिए हिंदी में एक गाना गाओ ।" ,क्यों ? ,लंडन जाकर हिंदी भूल गई हो क्या ? sg,राहुल ! ये हिंदी में गाना कैसे गा सकती है ? sg,"लंडन में रहने से , वहां पढ़ने - लिखने से , मैं अपने संस्कार नहीं भूली ।" ,आज हम कुछ नया शुरू करने वाले हैं । ,"लेकिन शुरू करने से पहले मैं तुम सबसे कुछ पूछना चाहती हूं , कि तुम सब प्यार के बारे में क्या जानते हो ?" ,प्यार दोस्ती है । ,"अगर वो मेरी सबसे अच्छी दोस्त नहीं बन सकती , तो मैं उससे कभी प्यार कर ही नहीं सकता ।" ,क्योंकि दोस्ती बिना तो प्यार होता ही नहीं । ,"कल के कॉलेज कम्पीटिशन में हमारा कॉलेज बेस्ट होगा , मल्होत्रा ।" ,कौन है वो ? ,मुन्ना नाम है उसका । ,आज से एक साल पहले इस इलाके से उसे तड़ीपारी का हुकुम हुआ था । ,ये रही उसकी फाइल । ,"ये तो महेश देशमुख है , मुन्ना कैसे हो गया ?" ,"सर ! वो इस इलाके में मुन्ना के नाम से ही जाना जाता है , इससे पहले खून के जुर्म में एक साल की सज़ा काट चुका है ।" ,"फाइल कहती है कि यह एक खतरनाक मुजरिम है , मगर मेरी याददाश्त कहती है कि ये मासूम , जज्बाती मगर जोशीला नौजवान था जो अपने देश के लिए मर मिटने को तैयार था ।" ,आप इसे जानते हैं सर ? ,जानता था दो साल पहले मेरी पोस्टिंग नासिक में थी । ,"मेरे थाने के सामने सुनसान गली में एक बैंक था , जिसमें उसके माँ - बाप दोनों नौकरी करते थे ।" ,भवानीनन्दन दफ्तर से आते ही कमरे में बिछी चटाई पर पसर गये । ,भवानीनन्दन को चारों खाने चित पसरा देखकर पुष्पा की चुन्नी खड़ी हो गयी । ,वह दौड़कर लोटे में पानी लायी और आंचल पानी में भीगोकर भवानीनन्दन का माथा पोंछते हुए कहने लगी क्यों चिन्ता में डूबे रहते हो । ,अरे बड़े ओहदेदार नहीं हुए तो क्या छोटे तो हो । ,ठीक है योग्य हो । ,तुम अपनी योग्यता को रचनात्मक कामों में लगाकर चिन्ता मुक्त तो हो सकते हो । ,भवानीनन्दन - थोड़ा शान्ति रखो । ,पुष्पा - क्यों घुटते रहते हो । ,बातों का बोझ चिन्ता बढाता है । ,आज फिर दफ्तर में कोई दुर्व्यवहार कर दिया क्या ? ,देखो दफ्तर की बात घर मत लेकर आया करो । ,जानती हूं छोटा ओहदेदार अगर अधिक योग्य होता है तो चारों ओर से भूकम्प का सामना करना पड़ता है । ,तुम उठो हाथ पांव धोओ । ,मैं तुलसी अदरक डाल कर चाय बनाती हूं । ,भवानीनन्दन - भागवान जो बनाना हो बनाओ । ,कुछ देर के लिये अकेला छोड़ दो । ,मैं क्या - क्या कत्ले - बयां करूंगा ? ,भवानीनन्दन की बात खत्म भी नहीं हुई कि टेलीफोन घनघना उठा । ,भवानीनन्दन गरजे पुष्पा दौडकर फोन उठाओ तुम्हारा है । ,पुष्पा - नहीं तुम्हारा है तुम उठाओ । ,भवानीनन्दन - बाप रे बाप क्या किस्मत हो गयी है । ,उधर दफ्तर वाले दिन भर कोसते रहते हैं । ,घर में बीबी का हुक्म । ,पुष्पा - अरे अब तो उठाओ । ,भवानीनन्दन - हां उठाता हूं कहते हुए रिसीवर उठाकर बोले कौन भाई साहब । ,दानवीर - हां । ,बड़ी देर कर दी फोन उठाने में कोई खास बात हो गयी क्या ? ,भवानीनन्दन - क्या खास बात होगी । ,हां सपनों की बारात पर डाका जरूर पड़ जाता है । ,दानवीर - क्या । ,भवानीनन्दन - हां । ,दानवीर - मतलब कत्ल - ए - बयां । ,भईया रविवार को मिलता हूं । ,भवानीनन्दन - कत्ल - ए - बयां सुनने के लिये । ,दानवीर - मन का बोझ कम करने के लिये । ,भवानीनन्दन - ठीक है । ,यहां तो मझधार में नैया डुबोने वाले बहुत हैं । ,अपनों के सामने मन कत्ल - ए - बयां में कोई बुराई नहीं । ,रविवार के दिन दानवीर जल्दी आ धमके । ,पुष्पा ने बढ़िया चाय नाश्ते का इन्तजाम किया । ,चाय की चुस्की लेते हुए दानवीर बोले भाई साहब आप किस कत्ल की बात कर रहे थे फोन पर । ,भवानीनन्दन - मेरा कत्ल - ए - बयां कोई कथा नहीं बल्कि भोगा हुआ यथार्थ है । ,दानवीर - सबल की सफलता तो निर्बल की छाती पर टिकी है । ,शोषक समाज शेर की तरह कमजोर आदमी का शिकार कर रहा है । ,यह तो जगजाहिर हो चुका है तभी तो वह दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा है । ,"कमजोर गरीबी , बेबसी के दलदल में ढकेला जा रहा है ।" ,"ये शोषक लोग बड़े शातिर होते हैं , मुंह खोलने वालों के सामने हड्डी का टुकड़ा डाल देते हैं ताकि आपस में लड़ते रहें और वे शोषण करते रहें ।" ,इस प्रतिष्ठा के संघर्ष में जातिवाद परमाणु बम की तरह से असरकारी साबित होता है । ,खैर छोड़ो तुम तो ये बताओ तुम्हारे साथ क्या बुरा किसने कर दिया । ,भवानीनन्दन - भईया जब से आंख खुली है तब से ही बुरा हुआ है । ,आज तो कोई नया नहीं है । ,पहले जाति के ठेकेदार कर रहे थे । ,अब दफ्तर के कोने बड़े ओहदे पर बैठे मन में राम बगल में जातिवाद की छुरी रखने वाले लोग । ,इसी जातिवाद की छुरी से भविष्य का कत्ल - ए - आम होने लगा है । ,भईया गांव रहा या शहर मेरा मुकाबला जातिवाद के नरपिशाच से जरूर हुआ । ,जब पहली बार नौकरी की तलाश में दिल्ली गया था वहां जातिवाद के सांप ने ऐसा फुफकारा था कि आज भी उसका भय मन से नहीं निकला । ,दानवीर - ऐसा क्या हो गया । ,भवानीनन्दन - बेरोजगारी ने मुझे तोड़कर रख दिया था । ,अपने भी पराये लग रहे थे । ,फांका में भी दिन काटने पड़ रहे थे । ,इसी बीच एक फैक्टरी के बोर्ड पर आवश्यकता है लिखा हुआ देखकर शैक्षणिक प्रमाण - पत्रों के साथ हाजिर हुआ । ,इन्टरव्यू में पास भी हो गया । ,इसके बाद मुझे बड़े अधिकारी के पास भेज दिया गया । ,अधिकारी ने एकदम से पूछा तुम कौन हो । ,मैं बोला भवानीनन्दन सर | ,अधिकारी - देख लिये हैं तुम्हारे प्रमाण पत्र । ,मैं जाति पूछ रहा हूं । ,मैं बोला एस. सी. हूं सर | ,अधिकारी - यहां रिजर्वेशन लागू नहीं है । ,तुम्हारे लायक इस फैक्टरी में नौकरी नहीं है । ,दानवीर - क्या नौकरी नहीं मिली । ,भवानीनन्दन - नहीं । ,जातीय श्रेष्ठता की परीक्षा में फेल हो गया । ,दानवीर - जातिवाद तो समाज और दफ्तर की नस - नस में समाया हुआ है । ,खैर लम्बी बेरोजगारी के बाद सरकारी नहीं तो अर्धसरकारी विभाग में मिल तो गयी ना । ,भवानीनन्दन - हां मिल तो गयी पर यहां भी जातिवाद का विषधर डराता रहता है । ,दिन में काम रात में पढाई कर ऊंची - ऊंची शैक्षणिक योग्यतायें हासिल किया पर यहां भी शैक्षणिक योग्यतायें काम नहीं आ रही हैं । ,मेरा कैरियर सामन्तवाद की बलि चढ़ गया । ,पुष्पा की बीमारी की वजह से अपने कैरियर का जनाजा निकलते हुए देख रहा हूं । ,दानवीर - अर्धसरकारी विभाग में सामन्तवाद । ,भवानीनन्दन - जातिवाद का कहर मानो या सामन्तवाद का । ,इसी चक्रव्यूह में फंसी मेरी उम्मीदें दम तोड़ रहीं हैं । ,मैं तरक्की से दूर फेंका जा रहा हूं ऊंची - ऊंची शैक्षणिक योग्यताओं के बाद भी जबकि विभाग में न्यूनतम् शैक्षणिक योग्यता और जातीय श्रेष्ठता रखने वालों के लिये मुंह मांगी तरक्की मिल रही है । ,"कहने को अपने देश में समानता का हक हासिल है , देश में लोकतन्त्र है पर सच्चाई तो ये है कि आज भी सामन्तवाद की जड़ें बहुत मजबूत हैं ।" ,यही मजबूती कमजोर वर्ग को पनपने नहीं दे रही है । ,जाति के नाम पर तरक्की के रास्ते बन्द पड़े हैं । ,दानवीर - ठीक कह रहे हो भवानीनन्दन । ,अगर तुम्हारे साथ अन्याय नहीं हुआ होता तो तुम विभाग में बड़े ओहदे पर जरूर होते क्योंकि शैक्षणिक योग्यतायें जो हैं पर अफसोस सामन्तवाद का दीमक चट कर रहा है हक को । ,भवानीनन्दन - बूढ़ी व्यवस्था का असर वर्तमान में पढ़े लिखों के दिल में इतनी गहराई तक जगह बनाये हुए है कि वे अपनी जातीय श्रेष्ठता के अभिमान में ऊंची - ऊंची शैक्षणिक योग्यताओं को रौंदने में तनिक भी कोर - कसर नहीं छोड़ रहे । ,मैं इस साहब से कैडर चेंज करने के आशय से अनुरोध किया तो वे एक झटके में बोले तुम्हारे जैसे लोगों के लिये प्रशासन में जगह नहीं है । ,दानवीर - सच जातिवाद का नर पिशाच तुम्हारे लिये तो काफी घातक सिद्ध हो रहा है । ,भवानीनन्दन - मेरे सपनों की बारात को ठग चुका है ये नर पिशाच । ,मुझे तो नहीं लगता है कि इस शैतान के आगे मैं सामन्तवादी डण्डे से हांके जा रहे विभाग में तरक्की कर पाऊंगा । ,मेरा तो भविष्य तबाह हो गया है । ,अब तो मेरे सामने कुआं है पीछे खाई है जायें तो जायें कहां । ,रोटी के लिये नौकरी तो करना है । ,भविष्य दाव पर लगा दिया हूं दानवीर बाबू । ,दानवीर - चिन्ता से कुछ नहीं होगा । ,कर्म करते रहिये परिस्थितियां बदलेगीं । ,सामन्तवाद और जातिवाद के पोषक तुम्हारी योग्यता का लोहा जरूर मानेंगे । ,विभाग में तुम्हारी तरक्की छीनी जा रही है तो अपनी योग्यता को सृजनात्मक कामों में झोको । ,इससे तुम्हें प्रसिद्धि जरूर मिलेगी । ,तुम्हारी राह में कांटा बिछाने वाले देखना एक दिन पछतावे की आग में जलेंगे मरेंगे । ,भवानीनन्दन - सामन्तवाद के पोषकों की चमड़ी गेंडे की चमड़ी से मोटी हो गयी है दीन - दुखियों के आसूं का कोई असर नहीं होता । ,कमजोर वर्ग की योग्यताओं को ठेंगा दिखाकर तकदीर कैद करना ये लोग अच्छी तरह जानते हैं । ,दानवीर - सच कमजोर की कहीं सुनवाई नहीं हो रही है । ,जातिवाद का ताण्डव देखने में कम हुआ है पर अन्दर तो जहर भरा हुआ है जिसकी लपट से तुम्हारे जैसे लोगों का भविष्य सुलग रहा है । ,हौसला रखो तुम्हारा श्रम बेकार नहीं जायेगा । ,भवानीनन्दन - बस हौसले की आक्सीजन पर तो सांसें भर रहा हूं । ,बाकी कोई आसरा नहीं बचा है । ,अब तो दफ्तर में जातीय दबंग लोग गाली तक देने लगे हैं । ,जातीय श्रेष्ठ अफसर कसूरवार हमें ही ठहरा रहे हैं । ,दानवीर - तुम्हारा तो चहुंओर से कत्ल हो रहा है । ,तुम्हारा कत्ल - ए - बयां तो पलकें गीली कर दिया । ,आधुनिक दफ्तर में इस तरह का दुर्व्यवहार विश्वास ही नहीं होता पर सच्चाई है । ,न जाने कब तक जातिवाद और सामन्तवाद का जहर देश की एकता को दीमक की तरह चट करता रहेगा और कमजोर तबके की तकदीर को कैदी बनाता रहेगा । ,भवानीनन्दन - भूमण्डलीयकरण के इस युग में जातीय योग्यता को श्रेष्ठ मानने वालों द्वारा कमजोर का हक छीना जा रहा है और आत्मसम्मान चोटिल किया जा रहा है । ,दानवीर - जाति के नाम पर शैक्षणिक योग्यता का दमन तो अक्षम्य अपराध है पर दुर्भाग्य है कि सत्ता के ठेकेदारों की भी दिलचस्पी इसी में है तभी जातिवाद का जहर फैलता जा रहा है । ,कमजोर वर्ग पिछड़ता जा रहा है । ,"कमजोर वर्ग के पढ़े लिखे भी तरक्की से दूर होते जा रहे हैं , उनकी सपनों की बारातों का जनाजा निकाला जा रहा है ।" ,इसी का तो प्रतिफल है सामाजिक भेद - भाव और गरीबी । ,धर्म और लोकतन्त्र दोनों के ठेकेदार आंख मूंदे मलाई छान रहे हैं । ,कमजोर अपने हक को छिनते हुए देखकर तुम्हारे जैसे आंसू बहाने को बेबस हैं । ,कोई गुहार सुनने वाला नहीं है । ,भवानीनन्दन - अरे गुहार सुनी कही होती तो अपने देश में सामाजिक और आर्थिक असमानता की खाई अब तक न होती । ,दबंग लोगों का ही तो चहुंओर कब्जा बरकरार है । ,आज के इस युग में भी कमजोर वर्ग के साथ वैसा ही हो रहा है जैसा किसी युग में दासों के साथ होता था । ,इस युग में बाह्य रूप से तो कम सूझता है पर आन्तरिक रूप से दर्द भयावह है । ,मैं तो परिवार के पोषण के लिये मौन सत्याग्रह कर रहा हूं । ,भोगे हुए यथार्थ के आंसू की स्याही से पन्ने पर उतार रहा हूं । ,दानवीर - तुम्हारा सत्याग्रह जरूर सफल होगा पर बरसों लगेंगे । ,भवानीनन्दन - जानता हूं मै इस सत्याग्रह के प्रतिफल को नहीं भोग पाऊंगा । ,मेरी आत्मा को खुशी मिलेगी अपने किये पर । ,दानवीर - अच्छे काम के परिणाम अच्छे आते हैं । ,हां देर जरूर होती है । ,भवानीनन्दन - तुम्हारे कत्ल - ए - बयां से मेरा दिल कांप गया । ,भेदभाव का जहरीला वृक्ष सूखेगा । ,कमजोर वर्ग भी तरक्की करेगा और सामाजिक समानता का हक भी पायेगा । ,मुझे तो यकीन है क्योंकि देश का संविधान भी तो यही चाहता है । ,गिद्ध कब तक किसी का हक चट करते रहेंगे । ,मुझे इजाजत दो भाई । ,तुम्हारे सपनों की बारात को पर लगें । ,मैं तो बस दुआ कर सकता हूं । ,भवानीनन्दन - आपकी दुआयें जरूर काम आयेंगी । ,जातीय श्रेष्ठता भले ही मेरी शैक्षणिक योग्यता को डसती रहे परन्तु मैं अपने सपनों की बारात को किसी ना किसी रूप में मुकाम तक अवश्य पहुंचा दूंगा अपने मौन सत्याग्रह के बलबूते । ,दानवीर - मेरी दुआयें तुम्हारे साथ हैं दोस्त । ,"आज कर्ज़ा चुकाने का आखिरी दिन था लेकिन तुमने चुकाया नहीं , इसीलिए याद दिलाने आए हैं ।" ,"हाँ , हाँ , याद दिलाने की ज़रूरत नहीं NULL , जब हमारे पास होगा तब दे देंगे ।" ,"तूने तो कहा था कि जब तेरी बेटी स्टेज पर गाने लगेगी , पैसा बरसने लगेगा |" ,"उसके तो 25 शो हो चुके हैं , लेकिन तेरी मौसमी बरसात का एक - आध छींटा भी उन तक नहीं पहुँचा ।" ,सुनो श्यामलाल ! अगर कल 12 बजे तक पैसे नहीं पहुँचे तो याद रखना तेरा मौसम खराब कर देंगे हम । ,धमकी देते हो ? ,"धमकी नहीं ये तो सिर्फ दस्तखत है , पूरा दस्तावेज़ तो कल लिखा जाएगा और तब तक लिखा जाएगा जब तक तेरे जिस्म में खून है और हमारी कलम में दम ।" ,"अइओ , कैसा बात करता श्यामलाल जी ! हम नंबर एक का , नंबर दो का सब पैसा दे दिया सर , पचास हजार रुपया और ऊपर से मांगता ।" ,"कृष्णामूर्ति ! वो सब हम नहीं जानते , हमारी बात तो बिल्कुल सीधी है ।" ,अगर पचास हजार रुपये नहीं मिलेंगे तो मोहिनी रिहर्सल में नहीं आएगी । ,"क्या हुआ कृष्णमूर्ति ! आप बड़े परेशान नज़र आ रहे हैं , सब ठीक तो है न ?" pl,सर ! वो श्यामलाल जी पचास हज़ार रुपये ऊपर से और माँगता सर ! ,"हाँ , श्यामलाल जी ! अरे आपकी बेटी जैसी महान कलाकार के लिए पचास हजार रुपये क्या चीज़ है , आप जब चाहे ले सकते हैं ।" ,"श्यामलाल जी ! आप मोहिनी को लेकर हमारे घर पर आ जाइएगा , मैं आपको वहीं पैसे दे दूँगा ।" ,"ये रहे आपके पचास हज़ार , अरे गिन तो लीजिए ।" pl,अरे सक्सेना ! ये सब क्लर्की के काम श्यामलाल नहीं करता । ,"ज्यादा - कम हुआ तो कसम काशी - विश्वनाथ की , तुमको बहुत अफसोस होगा , अच्छा तो हम चलते हैं ।" ,अरे श्यामलाल जी ! सूखे - सूखे ही चले जाएंगे । ,"मोहिनी को रिहर्सल पर जाने दीजिए , आप तो हमारे साथ बैठिए , ज़रा गला तर करेंगे ।" ,हम अभी आते हैं । ,"अरे लाओ सक्सेना , लाओ गिलास दो , वाह चियर्स - चियर्स ।" ,"बड़के के अड्डे पर पुलिस की धाव पड़ी है मुन्ना भाई ! फिर भी अपुन माल बचाई कर रहा है , ये रहा आज का हफ्ता ।" ,अरे महीने के आखिरी दिन चल रहे हैं न मुन्ना भाई ! इसलिए कोई तीन पत्ते खेलने आता ही नहीं । ,तेरी ज़िन्दगी और मौत के बीच का फासला मुन्ना के चाकू की धार से ज्यादा नहीं है । ,आइन्दा कभी झूठ बोला तो पत्ते लगाने के लिए भी हाथ नहीं बचेंगे । ,"जल्दी करो , जल्दी करो , टाइम खोटी मत करो , पुलिस स्टेशन में हाजिरी देने जाना है ।" ,"ए पाकिया ! तुम लोग अभी यहीं हो , तुम लोगों की स्ट्राइक है कि रेलवे की स्ट्राइक है ।" ,"मैं बताता हूँ मुन्ना भइया ! अपने यहाँ एक नवी गैंग आइली है , स्टेशन के पास हनुमान गली में फिरती है , और अंधेरे में आकर धन्धा लूट लेती है ।" ,किसकी गैंग ? ,"कोई मुकुटबिहारी नाम का आदमी है , बाहर गाँव से खून कर के आइला है , वो ही इनका दादा है ।" ,कुछ अता - पता मालूम है तेरे को ? ,"कुछ नहीं NULL , और अंधेरे में उनका थोबड़ा तक नहीं दिखा और आजकल हनुमान गली में नवरात्रि का डांडिया चल रहा है , उसे भीड़ में पहचानना भी मुश्किल है ।" ,तुम में से मुकुटबिहारी कौन है ? ,मुकुटबिहारी ! चुपचाप यहाँ से अपना राशनकार्ड ट्रांसफर करवा ले और सुबह के बाद यहाँ नज़र मत आना । ,"तार आया है , मुन्ना भइया जल्दी घर आ जाओ , बहुत बड़ी मुसीबत आ पड़ी है ।" ,सारी दुकानें लुट गई और आज तक हमारी पुलिस फोर्स को ये पता नहीं चला है कि वो लोग कौन थे ? ,"सिर्फ इतना पता चला है कि लोटिया नाम के खतरनाक मुजरिम की गैंग थी , जिसकी तलाश पुलिस को पहले से है , मगर वो मोहिनी को कहाँ लेकर गया है उसका पता तक नहीं चल सका ।" ,"वहाँ से जो मोटरसाइकलें बरामद हुई थीं , उनके मालिकों का कुछ पता चला ?" ,सर ! वो सब चोरी की हुई मोटरसाईकिलें थीं । ,सर वायरलैस पर एक मैसज मिला है कि एक तड़ीपार अपने इलाके में दाखिल हुआ है । ,"वैसे तुम्हारा ख्याल बिल्कुल ठीक था सेनोरिटा , जो एडवेंचर इस जगह में है वो उस कमरे में नहीं होता ।" ,"मैं जानता हूँ कि तुम मेरे बारे में क्या सोचती हो , तुम समझती हो कि मैं बहुत ही घटिया किस्म का आवारा लड़का हूँ ।" ,"मैं सपने में भी तुम्हारे साथ ऐसी हरकत नहीं कर सकता , मेरा यकीन मानो सिमरन ।" ,"मैं सच कह रहा हूँ , कल रात कुछ भी नहीं हुआ था , सिर्फ एक मजाक था ।" ,प्लीज ऐसा मजाक मत करना ! तुम नहीं जानते मैं क्या कर बैठती । ,"मैं वादा करता हूँ , ऐसा मजाक फिर नहीं करूँगा ।" pl,"तुम जल्दी से कपड़े बदल लो , हमें बस पकड़नी है ।" ,सेनोरिटा ! अभी बस निकलने में पंद्रह मिनट बाकी हैं तुम्हें कुछ खाना हो तो खा लो । ,"अरे अंदर से क्या देखते हैं , चर्च भी कोई देखने की चीज़ है , मुझे नहीं जाना ।" ,"नहीं - नहीं , थोड़ी देर और बैठते हैं , चाय - वाय पी कर चलते हैं ।" ,आर्थिक लाभ हेतु बागानों के नजदीक ही औद्योगिक स्थान स्थापित हैं । sg,ऐसे बागानों के समूचे उत्पादन को शीतोष्ण कटिबंधीय देशों को निर्यात कर दिया जाता है जहाँ इसकी भारी माँग है । ,"परंपरागत कृषि - संसार में इस तरह की कृषि 5 से 10 अक्षांसों के मध्य अफ्रीका के कांगो बेसिन , दक्षिणी अमेरिका के अमेजन बेसिन , दक्षिणी - पूर्वी एशिया तथा पूर्वी द्वीप समूह के विषम उच्च भू - भागों में खास रूप से प्रचलित है ।" ,"इसे प्रवासी कृषि ( migratory cultivation ) , स्थानान्तरणशील कृषि ( shifting cultivation ) , व झूमिंग खेती ( Jhooming cultivation ) , भी कहते हैं ।" sg,"सबसे पहले इस तरह की कृषि के लिए वन के सीमान्तीय भागों में क्षेत्र का चुनाव कर , आग द्वारा जलाकर , खेत तैयार किया जाता है ।" ,मनुष्य श्रम का खेती में ज्यादा उपयोग होता है । ,खाद तथा पूँजी का प्रयोग नहीं होता है । ,"दो वर्ष तक ही कृषि कार्य हो पाते हैं , इसके पश्‍चात खेत छोड़कर दूसरे खेत बनाने पड़ते हैं क्योंकि ज्यादा वर्षा के कारण मृदा अपक्षरण की गति में तीव्रता आती है जिससे मृदा की उर्वरता जल्दी ही क्षीण हो जाती है ।" ,"इस कृषि में उत्पादन कम होता है , परिश्रम ज्यादा करना पड़ता है और उत्पादित फसलों का उपयोग स्थानीय होता है ।" ,"सिर्फ खाद्यान्न फसलों का ही उत्पादन होता है जिसमें मक्का , धान , ज्वार , बाजरा मुख्य हैं ।" ,देश की अर्थ व्यवस्था में कृषि का योगदान बहुत ज्यादा है । ,वर्तमान में देश की राष्‍ट्रीय आय में कृषि का हिस्सा लगातार घट रहा है । ,"एक अनुमान के अनुसार कृषि का देश के सकल घरेलू उत्पाद में सन् 1998 - 99 , 1999 - 2000 , 2000 - 01 में अंशदान क्रमशः 6.5 , 6.1 , 4.0 एवं 5.4 % है ।" ,इससे स्पष्‍ट है कि देश की राष्‍ट्रीय आय में कृषि का योगदान अधिक होते हुए भी धीरे - धीरे कम हो रहा है । ,हमारे देश में कृषि का महत्त्व इस बात में भी है कि यह देश में उद्योगों को कच्चा माल प्रदान करती है । ,देश के प्रमुख उद्योग कृषि पर ही निर्भर करते हैं । ,गैर - कृषि के लिए आवश्यक अधिकांश कच्चा माल कृषि क्षेत्र से ही प्राप्‍त होता है । ,"जूट , सूती वस्‍त्र , चीनी , वनस्पति आदि उद्योग प्रत्यक्ष रुप से तथा दूसरे बहुत से उद्योग परोक्ष रुप से कृषि उपज पर ही निर्भर रहते हैं ।" ,हमारे देश में जनसंख्या की व्यापकता के कारण भोजन एक मूल आवश्यकता बन गई है । ,इस जरुरत की पूर्ति सिर्फ कृषि से ही सम्भव है । ,पशु भारतीय किसानों का एक अमूल्य धन है । ,पशुओं के अभाव में कृषि कार्यों का पूर्ण होना सम्भव नहीं है । ,पशु एवं कृषि एक दूसरे के पूरक हैं । ,हमारे देश में पशुओं की संख्या सबसे अधिक है । ,भारतीय अर्थ व्यवस्था में कृषि का योगदान सर्वाधिक है । ,कृषि के विकास पर ही देश का विकास अत्यधिक निर्भर करता है । ,इसका मुख्य कारण कृषि से ही देश में मुख्य उद्योगों को कच्चा माल मिलना है । ,"यदि कृषि का उत्पादन बढ़ता है तो उद्योगों को अधिक कच्चा माल मिलेगा , जिससे उसका विकास सम्भव हो सकेगा ।" ,यदि कृषि का उत्पादन बढ़ेगा तो कृषकों की आय बढ़ेगी जब उनकी आय बढ़ेगी तो उनकी क्रय शक्‍ति बढ़ेगी । ,कृषि का महत्त्व राजस्व की प्राप्‍ति में भी काफी महत्त्वपूर्ण है । ,"इसका उत्पादन के परिवहन , विपणन , माल तैयार करने तथा अन्य पहलुओं और उपयोग का राष्‍ट्र की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता है ।" ,"केन्द्र सरकार को निर्यात कर एवं राज्य सरकारों को मालगुजारी , सिंचाई और कृषि सम्पत्ति पर कर इत्यादि से बड़ी मात्रा में आय प्राप्‍त होती है ।" ,कृषि भारत के आधे से भी ज्यादा लोगों के जीवन का आधार है । sg,देश की कुल कार्यशील जनसंख्या का 64 % भाग कृषि से आजीविका प्राप्‍त करता है । ,खाद्यान्न फसलों की प्रमुखता - ,हमारे देश की सकल कृषि भूमि का लगभग 67 % भाग फसलों को उत्पादित करने के काम में लाया जाता है । ,उत्पादन में कमी - ,भारत में कृषि से जितना उत्पादन होना चाहिए उतना हो नही पाता है । ,यह हैक्टेयर एवं प्रति श्रमिक दोनों की दृष्‍टि से कम है । ,"प्राप्‍त आंकड़ों के अनुसार इकाई क्षेत्रफल पर भारत का औसत गेहूँ उत्पादन इंग्लैण्ड का एक चौथाई , फ्रांस तथा पूर्वी एवं पश्‍चिमी जर्मनी का एक - तिहाई है ।" ,चावल के क्षेत्र में उत्पादकता के मामले में भारत का विश्व में सत्रहवां स्थान है । ,भारत में नियोजन के 53 साल हो गये फिर भी मानसून पर निर्भरता में कोई बहुत कमी नहीं आयी है । sg,वर्षा के अनियमित अनिश्‍चित तथा अपर्याप्‍त होने के कारण भारतीय कृषि को मानसून का जुआ भी कहते हैं । ,"अभी भी कुल कृषि भूमि का 33.3 प्रतिशत क्षेत्रफल ही सिंचित है , शेष 66.7 प्रतिशत मानसून पर निर्भर है ।" ,जीवन - यापन के रुप में - ,"हमारे देश के अधिकांश किसान खेती को व्यापारिक दृष्‍टि से नहीं करते , बल्कि यह उनके जीवन - यापन का धंधा है ।" ,श्रम प्रधानता - ,भारतीय कृषि में पूँजी के अनुपात में श्रम की प्रधानता है । ,जोतें छोटी होने के कारण कृषक पूँजीगत साधनों और कृषि उपकरणों का भरपूर उपयोग नहीं कर पाता है । ,प्रथम पंचवर्षीय योजना और कृषि - ,"1 अप्रैल , 1951 को देश में पहली पंचवर्षीय योजना का शुभारम्भ हुआ ।" ,इस योजना का प्रमुख उद्देश्य कृषि का विकास करना था । ,इसके मुख्य तौर पर दो कारण जिम्मेदार थे - देश के विभाजन के कारण खाद्यान्न तथा जूट और कपास जैसी व्यापारिक फसलों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा । ,यह अनुभव किया गया कि औद्योगिक प्रगति के लिए भी कृषि का पूर्ण विकास करना अनिवार्य है । ,इस योजना के दौरान कृषि नियोजन सम्बन्धी तीन विशेषतायें प्रमुख थीं जो निम्न प्रकार हैं - ,बेक्कल किला केरल का सबसे अधिक प्रसिद्ध किला है । ,बेक्कल किले से समुद्र की गहरी नीलिमा को देखने की अनुभूति अविस्मरणीय है । ,"मलयालम , तमिल , बॉलीवुड सिनेमाओं की शूटिंग की प्रिय लोकेशन है बेक्कल किला ।" ,"केरल सरकार ने बेक्कल किला , समुद्रतट और सम्बद्ध पर्यटन केन्द्रों के विकास के लिए बेक्कल रिसोर्ट , डेवलेपमेंट कॉर्पोरेशन का गठन किया है ।" pl,साथ ही बेक्कल समुद्रतट की कमनीयता बढ़ाने के लिए अनेक योजनाओं को शुरू किया गया है । ,"इस योजना के अंतर्गत तेय्यम शिल्प , भित्तिचित्र , शिल्पोद्यान आदि कलाओं का विकास भी आता है ।" ,पार्किंग - तट के पास 7000 वर्ग मी. विस्तार में पार्किंग स्थान है । ,विश्राम के लिए ट्री हाउस और डोरमिटरी सुविधा है । ,बच्चों का पार्क - ,14 वर्ष से कम आयुवाले बच्चों के विनोद के लिए यह पार्क उपयुक्त है । sg,बेक्कल समुद्रतट पर प्रवेश के लिए एक रुपया प्रति व्यक्ति की दर से टिकट लेना पड़ता है । ,पार्किंग शुल्क भी देना है जो अधिक नहीं है । ,यहाँ की 11 एकड़ ज़मीन में एक वाटर थीम पार्क बनवाने की योजना भी आरडीसी के पास है । ,बेक्कल किले का निकटतम रेलवे स्टेशन कासरगोड है । ,"बेक्कल किले से निकटतम एयरपोर्ट - मंगलूर , 50 कि.मी. , करिप्पूर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा , 200 कि.मी. दूर है ।" ,चन्द्रगिरिप्पुष़ा ( नदी ) के तट पर 17वीं सदी में निर्मित एक किला है । ,उस किले से अरब सागर तथा चन्द्रगिरि नदी के अद्‌भुत दृश्य का आस्वादन किया जा सकता है । ,नदी तट के पास के किष़ूर मंदिर का गीतोत्सव अति प्रसिद्ध है । sg,बेक्कल रिसोर्ट डिवलेपमेंट कॉर्पोरेशन ने चन्द्रगिरि नदी में बोटिंग की सुविधा उपलब्ध कराई है । ,चन्द्रगिरि कासरगोड टाउन के बहुत निकट है । ,निकटतम रेलवे स्टेशन - कासरगोड । ,"निकटतम एयरपोर्ट - मंगलूर , 50 कि.मी. ।" ,चित्तारि हरियाली से ढका एक छोटा द्वीप है । ,चित्तारि का तटीय भाग विशाल है । ,चित्तारि बेक्कल पर्यटन परियोजना का हिस्सा है । sg,पर्यटन के शोर - शराबे ने इस द्वीप को स्पर्श तक नहीं किया है । ,शांति से समय बिताने के लिए चित्तारि उपयुक्त स्थान है । ,"चित्तारि से निकटतम रेलवे स्टेशन - काजंगाडु , 5 कि.मी. की दूरी पर है ।" ,बेक्कल की भीड़ - भाड़ भरी यात्रा के बाद यदि शांत वातावरण में थोड़ा समय गुजारना चाहें तो काप्पिल समुद्र तट उपयुक्त जगह है । ,"काप्पिल बेक्कल से छह कि.मी. दूर स्थित है , तथा अत्यन्त शांत स्थल है ।" ,यहाँ का आकर्षण है धूप में चमकता समुद्रतट और शान्त वातावरण । sg,जो साहसी हैं वे पास के कोडिक्कुन्नु पर चढ़कर अरब सागर के फैलाव को देख सकते हैं । ,"काप्पिल बीच का निकटतम रेलवे स्टेशन कासरगोड , 12 कि.मी. की दूरी पर है ।" ,"काप्पिल बीच से निकटतम एयरपोर्ट मंगलूर , 50 कि.मी. दूर है ।" ,उत्तर केरल में यदि आप आलप्पुष़ा जैसा वातावरण देखना चाहे तो पडन्ना जाइए । ,"पडन्ना क्षेत्र को लेक टूरिज़्म के लिए अनुकूल बनाने वाले घटक हैं - वलियपरम्बु झील , हरियाली से आच्छादित द्वीप , नहरें आदि ।" ,सीपी की कृषि ने दुनिया का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया है । ,इसके किसान गुल मुहम्मद हैं । ,गुल मुहम्मद ने सीपी कृषि को पर्यटन अंग बनाकर अपनी कल्पना शक्ति का परिचय ही नहीं दिया बल्कि पूरे गाँव को प्रगति पथ पर अग्रसर किया । ,गुल मुहम्मद ने अपने ग्रामीणों को यह सिखाया कि वे जीवन - यापन के परंपरागत मार्ग की उपेक्षा किए बिना कैसे पर्यटन उद्योग का लाभ प्राप्त कर सकते हैं । sg,ओयस्टर ओपरा नामक अभियान को चलाते हुए गुल मुहम्मद ने अपना पर्यटन सिद्धांत प्रस्तुत किया । sg,पडन्ना आने पर कृषकों के जीवन को निकट से देखा - समझा जा सकता है । ,ओयस्टर ओपरा में साफ सुथरा माहौल व उत्तम आवासीय सुविधा है । ,पडन्ना में ठहरकर सामूहिक पर्यटन की अनुभूति का अनुभव किया जा सकता है । ,पडन्ना के पास द्वीपों तक बोटिंग की जा सकती है । ,पडन्ना क्षेत्र की विशेषताएँ हैं - विशाल समुद्र तट एवं सागर - मुहाने । sg,समीपवर्ती तेजस्विनी नदी से यात्रा करने का अवसर भी ओयस्टर ओपरा प्रदान करता है । ,"परश्शिनिक्कडवु , बेक्कल किला आदि स्थान इसके करीब हैं ।" ,पडन्ना से निकटतम बस अड्डा एवं रेलवे स्टेशन 9 कि.मी. की दूरी पर है । ,"पडन्ना से निकटतम एयरपोर्ट - मंगलूर , 120 कि.मी. और करिप्पूर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा , 180 कि.मी. की दूरी पर है ।" ,समुद्रतल से 1890 मीटर की ऊँचाई पर सह्याद्रि की चोटी पर अगस्त्यारकूडम स्थित है । ,गढ़ मुक्तेश्वर का वर्णन शिव पुराण में मिलता है । ,एकादशी से चतुर्दशी तक गढ़ मुक्तेश्वर में महाभारत युद्ध में मारे गए सभी लोगों की आत्मा की शांति के लिए यज्ञ किया गया । sg,चतुर्दशी की संध्या को यज्ञ की समाप्ति पर उन आत्माओं को गंगा में दीप दान कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई । ,"अगले दिन प्रात: पूर्णमासी को सभी ने गंगा स्नान कर पूजा - अर्चना , कथा आदि की ।" ,"प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु गढ़ मुक्तेश्वर कार्तिक पूर्णिमा पर कलुष विनाशनी , पापहरिणी गंगा में स्नान करने और अपने स्वजनों की आत्मा की शांति के लिए यहाँ दीप दान करने आते हैं ।" sg,चतुर्दशी की शाम को असंख्य लोग अपने स्वजनों को श्रद्धांजलि देने के लिए गंगा में दीप दान करते हैं । ,उस वक्त गंगा की धारा के साथ बहते दीपों का दृश्य बड़ा ही शांतिदायक और मनोहारी प्रतीत होता है । ,"गढ़ मुक्तेश्वर में धार्मिक महत्व की कई जगहें हैं , जैसे नहुष - कूप ( नक्का कुआँ ) , मुक्तेश्वर महादेव का मंदिर , बद्रीनाथ मंदिर आदि ।" ,प्रथा है कि बद्रीनाथ मंदिर को केवल आरती के समय ही खोला जाता है । ,यह मंदिर साल में केवल एक बार अक्षय तृतीया को परशुराम जयंती पर दिन भर दर्शनार्थियों के लिए खोला जाता है । ,"मुक्तेश्वर महादेव मंदिर के सामने विशाल रेतीला मैदान है , उसे मीराबाई की रेती के नाम से जाना जाता है ।" ,ऐसी मान्यता है कि एक बार मीराबाई यहाँ गंगा स्नान के लिए आई थीं । ,कहते हैं कि एक बार पार्वती जी ने शंकर जी से प्रश्न किया । ,"प्रभु ऐसा कोई उपाय और स्थान बताएँ , जिससे संसार में अनेक व्याधियों और पापों से त्रस्त जीव को मुक्ति मिले ।" ,"वे ऐसा क्या कर्म करें , जिससे उन्हें आपका स्नेह मिले ।" ,"इस पर शंकर जी कहा कि हे देवी सतयुग में सभी तीर्थ पुण्य का फल देते हैं , त्रेता में पुष्कर , द्वापर में कुरुक्षेत्र तीर्थ पुण्य का फल देते हैं और कलिकाल में केवल गंगा स्नान से पुण्य फल की प्राप्ति है ।" ,गंगा तट पर शिव बल्लभपुर नामक एक स्थान है । ,शिव बल्लभपुर नामक स्थान में शिव निवास करते हैं । ,शिव बल्लभपुर शिवजी को अति प्रिय है । ,शिव बल्लभपुर जम्बूद्वीप के आर्यावर्त देश में हस्तिनापुर की पूर्व दिशा में स्थित है । ,"गंगा तट पर बसा शिव बल्लभपुर देवों , ऋषियों और पितरों को संतोष देने वाला है ।" ,शिव बल्लभपुर क्षेत्र मुझे काशी के समान प्रिय है । ,गढ़ मुक्तेश्वर में स्थित गंगा मंदिर काफी ऊँचाई पर बना हुआ है । ,गढ़ मुक्तेश्वर के गंगा मंदिर में गंगा मैया के अतिरिक्त ब्रह्मा जी की मूर्ति भी लगी हुई है । ,"गढ़ मुक्तेश्वर के गंगा मंदिर में एक ऐसा पत्थर भी है , जिसे ध्यानपूर्वक देखने से उस पर भगवान शिव की आकृति का आभास होता है ।" ,गढ़ मुक्तेश्वर के गंगा मंदिर में पहुँचने के लिए कभी 101 सीढ़ियाँ हुआ करती थीं । ,किंतु गढ़ मुक्तेश्वर के गंगा मंदिर में अब 86 सीढ़ियाँ ही बची हैं । ,बताते हैं कि 1937 तक गंगा जी गढ़ मुक्तेश्वर के गंगा मंदिर की सीढ़ियों को छूते हुए बहती थीं । ,लेकिन धीरे - धीरे गंगा जी स्थान छोड़ती चली गईं । ,अब गंगा का तट इस मंदिर से लगभग 10 किलोमीटर दूर है । ,गंगा तट के रेतीले मैदान में मेला लगता है । ,मेले के दौरान तट पर तंबुओं का एक पूरा नगर बस जाता है । ,मेला स्थल दिल्ली से लगभग 90 किलोमीटर पड़ता है । ,मेला स्थल कार आदि से आराम से पहुँचा जा सकता है । ,गढ़ मुक्तेश्वर में पहले मेला स्थल तक लोगों को पैदल ही चलकर जाना पड़ता था । ,लेकिन अब यातायात के कई साधन उपलब्ध हैं । ,"अनेक लोग भैंसा बुग्गी , ट्रैक्टर ट्रॉलियों , कार और अन्य साधनों से मेला स्थल तक पहुँचते हैं ।" ,अनुमान है कि हर साल करीब बीस लाख लोग गढ़ मुक्तेश्वर मेले के दौरान गंगा स्नान करने आते हैं । ,मेले में भाग लेने आए ज्यादातर श्रद्धालु लगाए गए टेंटों में ही ठहरते हैं । ,मेले के अलावा सामान्य दिनों में आने वाले लोग ब्रज घाट के आसपास बनी धर्मशालाओं में ठहरते हैं । ,यूँ तो यहाँ खाने - पीने का सामान बहुत सी दुकानों में मिल जाता है । ,पर समूह के रूप में मेले में आने वाले श्रद्धालु अपने भोजन आदि की व्यवस्था स्वयं ही करते हैं । ,कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गढ़ मुक्तेश्वर में गंगा तट पर लगने वाला मेला विशालतम मेलों में से एक है । ,मेला गंगा के किनारे लगभग 11 किलोमीटर के क्षेत्र में लगता है । ,इस वर्ष मेले का आयोजन मेला स्थल को 20 सेक्टरों में बाँट कर किया जा रहा है । sg,सुरक्षा के लिहाज से गढ़ मुक्तेश्वर में पहले के मुकाबले पुलिस फोर्स ज्यादा लगाई गई है । pl,प्रमुख स्थानों पर क्लोज सर्किट टीवी कैमरे भी लगाए गए हैं । pl,गंगा स्नान के लिए अनेक घाट भी बनाए गए हैं । ,हस्तिनापुर का ऐतिहासिक महत्व है । ,जैन जगत से उत्तर भारत वर्ष की सम्पूर्ण जातियों के लिए विशेष महत्व है । sg,"लीजिए , मम्मी ने आप के लिए चिट्ठी भी भेजी है ।" ,"आदरणीय समधी जी , आशा है कि आप सब सकुशल होंगे ।" ,"आज प्रेम से मिलकर बड़ी खुशी हुई , अब एक बार राजेश बाबू को भी यहाँ जरूर भेज दीजिए ।" ,"लीजिए , प्रोफ़ेसर साहब भी कुछ कहना चाह रहे हैं ।" ,"यार कैलाशनाथ , सुना है आजकल तुम धोती वाले हो गए हो ।" ,"रोज सुबह - शाम अपनी बहू से रामायण सुनते हो , हम इतने बुड्ढे तो नहीं हुए हैं यार ।" sg,तुम्हारे लिए एक नया सूट पीस भिजवा रहा हूँ । ,बच्चे के जन्म की खुशी पर दोनों दादा - नाना एक - सी ड्रेस में नाचेंगे । ,"अरे बड़े भैया आइए , आइए , सब मेहमान आ गए , भोला जी भी आ गए ।" ,"अरे दोपहर से ही आए हुए हैं , हमारी तो बहुत अच्छी घनिष्ठता हो गई है आपके साले बाबू से ।" ,"आज तो आप बहुत अच्छे लग रहे हैं , भैया चलिए न हमारे साथ ऊपर , ऊपर चलिए न ।" ,"बस , जो भी आप कहती हैं , जो भी आप करती हैं हमें सब अच्छा लगता है ।" ,"काका , ये देखिए , फ़ॉरेन से अभी - अभी फ़ैक्स आया है हमारे वहां के कॉलैबरेटर्स को हमारी नई स्कीम बहुत पसंद आई है ।" ,भाई साहब ! ये स्कीम उसी फैक्ट्री की है न जो आप प्रेम के लिए लगवा रहे हैं । ,पूजा ! कुछ फ़ाइनल बातचीत के लिए मुझे वहां बुलाया है उन्होंने । ,भैया ! भाभी की डिलवरी अब किसी भी वक्त हो सकती है । ,इस वक्त उन्हें सबसे ज्यादा ज़रूरत आपकी है और ऐसे मौके पर उन्हें यूं अकेला छोड़कर आपको मेरी वजह से फ़ॉरेन जाना पड़ रहा है । ,कह रहा है कि अब डिलवरी किसी भी वक्त हो सकती है और ऐसे मौके पर इसकी वजह से मुझे फ़ॉरेन जाना पड़ रहा है । sg,"प्रेम ! काका जी के साथ - साथ हम सबने एक सपना देखा है कि तुम दुनिया में खूब तरक्की करो , खूब नाम कमाओ ।" ,इसी सपने को साकार करने तो जा रहे हैं तुम्हारे भैया । ,और रही मेरी बात ! ,तो जब तुम यहां हो क्या मुझे किसी चीज़ की फिक्र करने की ज़रूरत है ? ,देवर से बढ़कर क्या कोई दोस्त होता है भाभी के लिए ? ,"बहू ! राजेश को गए काफी दिन हो गए हैं , कुछ आने की ख़बर - वबर आई ।" ,"भाई साहब ! आज ही मेरी उससे बात हुई है , काम खत्म होने को ही है ।" ,"तुम भी कमाल करती हो भागवान , वो वहां काम करने गया है और तुमने नेलपॉलिशों की लिस्ट थमा दी ।" sg,"जब से राजेश गया है , दफ़्तर का सारा काम उसी ने तो संभाला हुआ है ।" ,"निशा ! ज़रा प्रेम को दफ़्तर फोन तो लगा , ज़रा पूछो तो वो कब आ रहा है ?" ,"हमें आते - आते टाइम लग जाएगा , भाभी से कहिए कि वो आराम करें , लल्लू से कहिए कि हमारा खाना बनाकर रख दे ।" sg,"सब्जियां सेलेक्ट करने में इतना टाइम लगाते हैं , न जाने ऑफ़िस में काम कैसे करते होंगे ?" ,"आपके हाथों में जादू है निशा जी , आज पहली बार हमने इतना अच्छा हलवा खाया है ।" ,"आप भी सोचती होंगी कि अजीब पागल है , आपकी सिंगिंग का फैन है , डांसिंग का फैन है और अब आपकी कुकिंग का भी फैन हो गया ।" ,"आप में एक कमजोरी भी है , आप किसी की बात बड़ी जल्दी मान लेते हैं ।" ,"आप भी कमाल करती हैं निशा जी , जब हम आपसे कुछ पूछना चाहें तो आप हमें रोकती हैं और जब चुप हो जाएं तो टोकती हैं ।" ,"राजेश बाबू के आने का इंतज़ार था , बस अब जाएंगे ।" ,"अरे ! आप भी कमाल करते हैं प्रोफ़ेसर साहब , कल आपका दामाद आया और आज आप जाने की बात कर रहे हैं ।" ,मेरा मन तो था कि चार - पाँच महीने रुक कर जाते लेकिन बेटी का ससुराल है । ,"समधन जी अब आप चाहे नाराज़ हो जाएं , हम आपको आज नहीं जाने देंगे ।" ,"अरे हां प्रेम बेटा , आखिर कब तक यहां बैठे रहेंगे ?" ,"बताओ तो सही , करना क्या है भई ?" ,"बड़ा आसान - सा गेम है , वहां पर भोला जी म्यूज़िक बजाएंगे , यह तकिया हम लोग यहाँ पर पास करेंगे ।" ,जब भी म्यूज़िक रुकेगा यह तकिया जिसके भी हाथ में होगा वो फंसेगा और फिर जो भी सज़ा हम उसे देना चाहेंगे हम देंगे और उसे माननी पड़ेगी । ,"ये लंदन है , दुनिया का सबसे बड़ा शहर ।" ,"मैं 22 वर्ष से यहाँ रह रहा हूँ , रोज़ाना इसी सड़क से गुजरता हूँ और रोज़ाना ये मुझसे मेरा नाम पूछती है ।" ,ये पूछती है कि चौधरी बलदेव सिंह कौन है ? ,कहां से आया है ? ,क्यों आया है ? ,"अब मैं इसे क्या जवाब दूँ , आधी उम्र गुज़ारने के बाद भी ये धरती मेरे लिए अजनबी है और मैं इसके लिए ।" ,"मॉम ! बीस वर्ष से डैड एक ही जगह जाते हैं , एक ही रास्ते से जाते हैं , फिर भी आप रोज फोन करके पूछती हैं ‘ तुसी पहुंच गये जी ? ‘" ,"तू नहीं समझ पायेगी , बस इतना समझ ले अब आदत सी पड़ गयी है ।" ,मिस लूसी सही कहती है आदतें अगर वक्त पर ना बदली जाएं तो जरूरतें बन जाती हैं । ,"फिर झाड़ी फिलॉसफी , अरे तू बारह बरस की है , बारह बरस वालों जैसी बात किया कर ना , अपनी उम्र से बड़ी - बड़ी बातें क्यूँ करती है तू ?" pl,हर कलाकार ने अपने - अपने नज़रिये से कई पेटिंग्स प्रस्तुत की हैं । ,असम की अरुंधती चौधरी ने कल्पनाओं को कलात्मक व रचनात्मक रूप देकर संतुलित ढंग से पेश किया है । ,इसी श्रृंखला में वृद्ध चित्रकार सरफराज़ अहमद ने उम्दा तरीके से दिल्ली की खूबसूरती व शाही तस्वीरों को कैनवस पर उकेरा है । ,"पूर्व मिस यूनिवर्स और अभिनेत्री सुष्मिता सेन और पाकिस्तानी क्रिकेटर वसीम अकरम ने शुक्रवार को मीडिया में फैली उन ‘ खबरों ‘ का जोरदार खंडन किया , जिनमें कहा जा रहा था कि दोनों सितारे शादी करने की योजना बना रहे हैं ।" ,उन्होंने मीडिया से कहा कि उसे लोगों की निजता का सम्मान करना चाहिए । ,उल्लेखनीय है कि मीडिया के एक वर्ग में ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि ये दोनों पिछले कुछ वर्षों से एक दूसरे के प्रेम में हैं और जल्दी ही विवाह बंधन में बंधने जा रहे हैं । ,"लेकिन 37 वर्षीय सुष्मिता ने ट्विटर पर शुक्रवार को मामले को स्पष्ट किया कि 46 वर्षीय अकरम उनके अच्छे दोस्त हैं , इससे अधिक कुछ नहीं ।" ,"उन्होंने लिखा कि वह पिछले कुछ समय से अकरम से अपनी शादी की योजना के बारे में पढ़ रही हैं , जो पूरी तरह बकवास है ।" ,वह सिर्फ मेरे दोस्त हैं और हमेशा रहेंगे । ,सुष्मिता ने मीडिया को गैर ज़िम्मेदार बताते हुए कहा है कि अकरम की जिंदगी में एक शानदार महिला थी .... अफवाहें पूरी तरह बेकार और अपमानजनक हैं । ,उधर अकरम ने भी अफवाहों का खंडन किया और कहा कि वह अपना पूरा समय दो बच्चों के साथ बिताना चाहते हैं । ,"भारत का शास्त्रीय व लोकनृत्य , संगीत , रंगमंच , कला और कला से ही जुड़ी तमाम विधाओं के बीच सूत्रधार के रूप में मौजूद ‘ सहित्य ‘ के एक खास उत्सव का राजधानी में आयोजन होने वाला है ।" ,इसकी खासियत यह होगी कि इसमें साहित्य के दिग्गजों के अलावा अलग - अलग कला विधाओं के दिग्गज कलाकार भी कला के साहित्य पर प्रकाश डालेंगे । ,साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित इस साहित्योत्सव का आयोजन 18 से लेकर 22 फरवरी तक मंडी हाउस में किया जाएगा । ,साहित्योत्सव के विषय में अकादमी के सचिव डॉ. श्रीनिवास राव ने कहा कि साहित्य के उत्सव को पेपर प्रजेंटेशन और व्याख्यानों तक सीमित न रखकर इसे रविंद्र भवन के परिसरों तक लाया जा रहा है । ,"एक नए रंग - रूप में आयोजित इस उत्सव में संगीत , नृत्य और थिएटर से जुड़े कलाकारों की मौजूदगी साहित्य को अधिक आकर्षण और विस्तार देगी ।" ,"साहित्योत्सव में साहित्य अकादमी पर गुलज़ार निर्मित व निर्देशित वृतचित्र के प्रदर्शन , साहित्य व सिनेमा का संबंध , साहित्य व मीडिया , साहित्य व रंगमंच , साहित्य - चित्रकला - संगीत - नृत्य पर इन विषयों के विशेषज्ञ की वार्ता खास होगी ।" pl,इनके अलावा इस साल के साहित्य अकादमी अवार्ड 2012 के विजेता लेखकों को पुरस्कृत भी किया जाएगा । ,आज खतरा मोल लेने को जी चाह रहा है । ,काजू कतली की मिठाई के बाद गुड़ के लड्डू खिलाने की कोशिश टाइप ख़तरा । ,मगर जिस हलवाई की उम्र गुड़ के लड्डू बनाते गुजरी हो वो उसे कैसे छोड़ सकता है ? ,सो मैं भी नहीं छोडूंगा । ,वही करूंगा जो दिल चाहता है । ,आप मेरी बात सुन भी रहे हैं कि नहीं ? ,‘ पलट ! तेरा ध्यान किधर है भाई । ‘ ,मेरी तरह या मुझसे भी ज्यादा उम्र - रसीदा लोग अब तक समझ गए होंगे कि मैं किसकी बात कर रहा हूं लेकिन नव - उम्र जवानों को तो बताना ही पड़ेगा कि मैं असल में एक ऐसे कॉमेडियन की बात करने जा रहा हूं जिसे हिंदुस्तानी सिनेमा का पहला स्टार कॉमेडियन माना गया है । ,एक ऐसा कॉमेडियन जिसकी फीस अपने दौर के बड़े हीरोज़ के मुकाबले भी ज्यादा थी । ,"जो फिल्मों में सिर्फ तड़के के लिए नहीं रखा जाता था , बल्कि बाकायदा हीरो भी था ।" ,पूरा नाम नूर मुहम्मद चार्ली । ,हिंदुस्तानी सिनेमा के परदे पर शुरूआती दौर में जिन लोगों ने कॉमेडी की उनमें एक नाम आता है चार्ली का । ,चार्ली यानी नूर मुहम्मद चार्ली 1912 में गुजरात के पोरबंदर के जन्मे नूर मुहम्मद ने महान अभिनेता चार्ली चैप्लिन से मुतासिर होकर अपने नाम के साथ ‘ चार्ली ‘ जोड़ा था । ,और कमाल देखिए कि उन्हें शोहरत भी अपने असल नाम की बजाय इसी नाम से मिली । ,1931 में जब भारतीय सिनेमा को आवाज मिली उससे बहुत पहले साइलेंट सिनेमा वाले दौर में पश्चिम में लारल - हार्डी चैप्लिन जैसे सितारों की हास्य फिल्मों ने दुनिया में धूम मचा दी थी । ,इन फिल्मों में हास्य के साथ ही व्यंग का गहरा और तीखा पुट होता था । ,ख़ासकर चार्ली चैप्लिन की फिल्मों में । ,"भारत में भी इस तरह की कुछ कोशिशें होती रहती थीं , लेकिन सवाक सिनेमा के आगमन के साथ ही इस दिशा में कोशिशें और तेज हो गईं ।" ,"तब दीक्षित , गौरी , केसरी और ई. बिलीमोरिया जैसे चार कलाकार उभरकर सामने आए ।" ,"सरदार चंदूलाल शाह और उनकी पार्टनर गोहर मामाजीवाला की कंपनी रंजीत मूवीटोन ने 1932 में इन चारों को साथ लेकर एक फिल्म बनाई , जो बेहद कामयाब साबित हुई ।" ,इसका मूल्य दो पैसा था । ,हिंदी की पहली फिल्म पत्रिका कौन सी थी । ,इस विषय पर विवाद है । ,"रामचंद्र तिवारी के अनुसार हिंदी की पहली फिल्म पत्रिका ’ नव चित्रपट ’ थी , जबकि राजकुमार जैन के मतानुसार हिंदी की पहली फिल्म पत्रिका 1931 में इंदौर से प्रकाशित ’ मंच ’ थी ।" ,इस दौरान अंग्रेजी में अनेक फिल्म पत्रिकाएं निकलीं । ,"इनमें ’ फिल्म इंडिया ’ , ’ टाकी हेराल्ड ’ , ’ रूपवाणी ’ , ’ दीपाली ’ और ’ स्क्रीन वर्ल्ड ’ के नाम उल्लेखनीय हैं ।" ,बाबूराव पटेल ने ’ फिल्म इंडिया ’ के प्रकाशन के साथ फिल्म पत्रिका में एक नए अध्याय की शुरुआत की । ,इस बीच द्वितीय विश्‍व युद्ध के कारण फिल्में सैनिकों के मनोरंजन का मुख्य साधन बनीं । ,इससे फिल्म उद्योग की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और अनेक नए सिनेमाघर खोले गए । ,"युद्ध काल के दौरान ’ रसभरी ’ , ’ चित्रप्रकाश ’ , ’ कौमुदी ’ सहित अनेक फिल्मी पत्रिकाएं प्रकाशित हुईं किंतु जितनी तेजी के साथ इनका प्रकाशन शुरू हुआ उतनी ही तेजी से ये लुप्‍त भी हो गईं ।" sg,"स्वतंत्रता के बाद ’ युगछाया ’ , ’ फिल्म ’ और ' चित्रलेखा ’ का प्रकाशन शुरू किया गया ।" sg,"1948 में कहानीकार , स्तंभ लेखक और फिल्म निर्देशक ख्वाजा अहमद अब्बास ने मुंबई से एक बड़ी अच्छी साहित्यिक फिल्मी पत्रिका ’ सरगम ’ का प्रकाशन शुरू किया ।" ,इस समय हिंदी में अनेक फिल्म पत्रिकाएं निकलती हैं । ,’ स्टारडस्‍ट ’ का हिंदी संस्करण लोकप्रिय रहा है । ,जबकि ’ फिल्मफेयर ’ की सहयोगी ’ माधुरी ’ बंद हो गई । ,’ फिल्मफेयर ’ अच्छा मुनाफा कमाकर दे रही है । sg,’ स्क्रीन ’ में भी फिल्मों के व्यावसायिक - व्यापारिक पक्ष पर अधिक सामग्री दी जाती है । sg,अच्छी फिल्म पत्रिकाओं के अभाव को आंशिक रूप से दैनिक समाचार पत्र पूरा करते हैं । pl,हर समाचार पत्र सप्‍ताह में कम से कम दो पृष्‍ठ फिल्म और टीवी को देता है । ,हिंदी में बच्‍चों की पहली पत्रिका 1882 में ’ बाल दर्पण ’ प्रकाशित हुई । ,यह अधिक समय तक नहीं चली । ,1902 में इलाहाबाद से ’ आर्य बालहितैषी ’ का प्रकाशन शुरू हुआ । ,वास्तव में हिंदी बाल पत्रकारिता का प्रारंभ 1917 में इलाहाबाद से ’ बाल सखा ’ के प्रकाशन से शुरू हुआ । ,इसका प्रकाशन इंडियन प्रेस से होता था । ,इससे पहले संपादक बद्रीनाथ भट्ट थे । ,’ बाल सखा ’ का प्रकाशन 53 वर्षों तक हुआ । ,बच्‍चों की कई पीढ़ियां ’ बाल सखा ’ की अभिन्न मित्र रहीं । ,तथापि इसकी प्रसार संख्या कभी दस हजार से ऊपर नहीं गई । ,स्वतंत्रता के बाद अनेक बाल - पत्रिकाओं का प्रकाशन शुरू हुआ । ,"इनमें ’ पराग ’ , ’ नंदन ’ , ’ चंपक ’ , ’ बाल भारती ’ और ’ चंदा मामा ’ प्रमुख हैं ।" sg,’ पराग ’ का प्रकाशन टाइम्स ऑफ इंडिया समूह ने 1958 में शुरू किया था । ,किसी समय यह बच्‍चों की सर्वोत्तम पत्रिका मानी जाती थी । ,’ नंदन ’ का प्रकाशन हिन्दुस्तान टाइम्स समूह ने 1964 में शुरू किया और अब तक चल रहा है । ,पत्रकार व्यवसाय में जबरदस्त प्रतियोगिता है । ,सभी समाचार पत्र समाचार एजेंसियों से खबरें लेते हैं और ये खबरें सभी समाचार पत्रों में लगभग उसी रूप से छपती हैं । ,इस एकरूपता को दूर करने के लिए कुछ समाचार पत्र ऐसी खबरें छापने का प्रयास करते हैं जो अन्य अखबारों में न छप रही हों । ,यह कार्य दो तरीके से किया जाता है । pl,"पहला , सरकारी विज्ञप्‍तियों , सूचनाओं , वार्षिक रिपोर्टों , लेखा रिपोर्टों की तह में जाकर कुछ ऐसी खबरें निकालना जिसकी ओर किसी का ध्यान न गया हो ।" ,इस तरह की खबरों का एक उदाहरण भारत के महानियंत्रक और लेखा परीक्षक की रिपोर्ट में कारगिल के शहीदों के पार्थिव शरीर को ले जाने के लिए अत्यधिक मूल्य पर धातु के ताबूतों की खरीद का समाचार था । ,इस खबर में यह सिद्ध करने का प्रयास किया गया था कि धातु के ताबूतों की खरीद में जबरदस्त घपला - घोटाला हुआ है । ,कुछ समय के लिए यह खबर सभी समाचार पत्रों पर छाई रही । ,किसी ने यह जानने का प्रयास नहीं किया कि जिस तारीख को ताबूत खरीदे गए तब वे क्या कहीं कम मूल्य पर उपलब्ध थे । pl,भारत में भी अनेक पत्रकारों ने घपले - घोटालों को उजागर किया । ,भारतीय पत्रकार चित्रा सुब्रह्मण्यम ने प्रमाण जुटा कर सिद्ध किया कि बोफोर्स तोप सौदे में रिश्‍वत दी गई है । sg,अभी हाल ही में ’ तहलका ’ ने रक्षा सौदों में फैले भ्रष्‍टाचार को सबके सामने रख दिया । ,"’ तहलका ’ ने अपनी जांच के दौरान छिपे कैमरों का उपयोग किया , लोगों को आकर्षक उपहार , शराब और धन देकर भ्रष्‍टाचार को प्रकट किया ।" ,"’ तहलका ’ ने भारत में पत्रकारिता का नया अध्याय खोला , लेकिन उसका अखबार उतना सफल नहीं हो पाया ।" ,"अरुण शौरी का कहना है कि पत्रकारों को कभी - कभी उन बातों को उजागर करने के लिए परंपरा से हटकर काम करना पड़ता है , असामान्य तरीके अपनाने पड़ते हैं ।" ,उनकी राय में भ्रष्‍टाचार को सामने लाने के लिए सभी साधन और तरीके उचित हैं । ,"पहला , सूचना देना यानी घटना की रिपोर्ट करना और दूसरा , खबर पर व्याख्या पेश करना और खबर पर आधारित राय बनाना ।" ,थोड़ी ही देर में मैच शुरू होने वाला है और हम आपको आँखों देखा हाल सुनाने जा रहे हैं । ,"अब आपके सामने आ रहे हैं वो , जिनकी गेंद की रफ़्तार हवा से भी तेज है ।" ,"सच कहती हूँ भाई साहब , अपने राजेश बेटे की जितनी तारीफ़ की जाए वो कम है ।" ,इतनी कम उम्र में इतना बड़ा कारोबार संभालना कोई खेल नहीं है । ,"राजेश और प्रेम इतने - इतने से थे , जब जीजी और जीजा जी का देहांत हुआ था ।" ,इन बच्चों की जिम्मेदारी निभाने के लिए आपने कॉलेज की पढ़ाई भी अधूरी छोड़ दी और एक छोटी - सी नौकरी से शुरुआत की । sg,इनके भविष्य के लिए सिर्फ मेहनत को अपनी ज़िंदगी का लक्ष्य माना । ,"इतने अच्छे संस्कार दिए आपने बच्चों को , तभी तो राजेश का आज इतना नाम है और प्रेम भी तो इस साल एमबीए में अव्वल आया है ।" ,"पिछले दिनों प्रोफ़ेसर्स की कांफ्रेंस के लिए मैं पूना गया हुआ था , वहां मेरी मुलाकात प्रोफ़ेसर एस. एस. चौधरी से हुई ।" ,"वहां मैं उनकी बड़ी बेटी से मिला , बच्ची को बस एक बार देखा , दिल में घर कर गई ।" ,"पूजा नाम है उसका , बी. ए. पास किया है , बड़ा ही मीठा स्वभाव है ।" ,"इस वक्त प्रोफ़ेसर साहब अपने परिवार के साथ तीर्थ यात्रा पर रामटेकड़ी गए हुए हैं और जैसे ही घर लौटें , चले चलते हैं ।" ,"राजेश से जब भी शादी की बात करो वो टाल जाता है , अब ऐसे में दोनों को मिलाएं भी तो कैसे ?" ,आज बड़ी देर तक चली तुम्हारी मीटिंग ? ,क्या कहा फ़ॉरेन कॉलैबरेटर्स ने ? ,"अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक गया न , तो जैसे आपने कहा था इस फैक्ट्री का देश भर में कोई मुकाबला नहीं होगा ।" sg,तेरा भैया तुझे बिज़नेस में लांच करने के लिए कितनी बड़ी फैक्ट्री लगा रहा है । ,इस बार छुट्टियों में हमने रामटेकड़ी जाने का फैसला किया है । ,लेकिन काका ! आप तो कह रहे थे कि आपको किसी हिल स्टेशन पर जाना था । ,"जल्दी कीजिए पापा , अगर मम्मी ने आपको रसोई में ये एक्सपेरीमेंट करते देख लिया ना , तो बड़ी नाराज़ होंगी ।" ,"लेकिन अगर उन्होंने भी एक बार इन कचौरियों को देख लिया ना , तो अपना उपवास तोड़ देंगी ।" ,"पूजा बेटे , जब रामचंद्र जी ने शिव जी का धनुष तोड़ा , तो परशुराम जी ने बड़े गरजते हुए पूछा कि ये धनुष किसने तोड़ा ?" ,"रामचंद्र जी ने बड़ी सरलता से , बड़े प्रेम भाव से उत्तर दिया ।" ,"आपसे जीतना तो हम दोनों के बस के बाहर है , आपसे कोई जीते तो बस निशा ।" ,पापा ने लाइब्रेरी की किताबें भेजी हैं और कहा है थैंक्यू । sg,निशा बेटी ! एक काम करेगी ? sg,"जब तक हम स्टोर रूम से वापस आएं , यह बिल का टोटल चेक कर देगी ?" ,"जी , आप मुझे बता सकती हैं कि प्रोफ़ेसर चौधरी किस कमरे में ठहरे हुए हैं ?" ,"जी हाँ ! साल भर तो पढ़ाई करते हैं नहीं , इम्तिहान के समय बगले झांकते हैं और फिर आ जाते हैं यहां तक अपने नंबर बढ़वाने ।" ,नंबर बढ़वाइए आप अपने चश्मे का मैडम ! ,मैनेजर की कुर्सी पर बैठकर न जाने आप अपने को क्या समझ रही हैं । ,"क्या निशा ! वहां मम्मी कब से तेरी राह देख रही हैं , क्या कर रही है तू यहां ?" ,"आप प्रोफ़ेसर चौधरी जी के लिए पूछ रहे थे न , ये हैं उनकी बेटियां पूजा और निशा और पूजा बेटी ! ये हैं कैलाशनाथ जी , तुम्हारे पापा के दोस्त ।" sg,"मैनेजर साहब , बिल का टोटल आप एक बार फिर से चेक कर लीजिए ।" ,लोग कहते हैं खूबसूरत लड़कियां टोटल में अक्सर मार खा जाती हैं । ,"अमचूर की चटनी के साथ खाइये चौबे जी , मथुरा की कचौड़ियों को भूल जाएंगे ।" sg,सच कैलाशनाथ ! जब अख़बारों में तुम्हारा नाम पढ़ते हैं तो बहुत गर्व महसूस करते हैं । ,"बेटा प्रेम ! तुम शायद हम तीनों की हिस्ट्री नहीं जानते होगे , हम तीनों कॉलेज में एक साथ थे और बहुत मौज - मस्ती किया करते थे ।" ,अपने भतीजे राजेश के लिए हमें तुम्हारी बड़ी बेटी बहुत भा गई है । ,"भगवान ने मुझे सब कुछ दिया , इन बच्चों का प्यार , बड़ा कारोबार , मगर घर का आँगन सूना है ।" ,"राजेश तो फिर भी अपनी माँ की गोद में खेला है मगर प्रेम , वो तो आज तक उस ममता से वंचित रहा ।" ,"देखा मामा जी , टफ़ी को भी पता है आज शाम को बड़े भैया की ससुराल वाले सगाई का शगुन लेकर आने वाले हैं ।" ,"राजेश का रिश्ता तय कर आए , बहू चुन ली और हमें खबर मिल रही है आज ?" ,"आज हम बहुत गुस्से में हैं , आज न हम खाएंगे , न पीएंगे , हम जा रहे हैं ।" ,"देखा प्रेम , मुझसे बोले कि रज़िया बेग़म हम बहुत नाराज़ हैं , किसी से कुछ बात मत करना और यहां बहू की फोटो देखते ही गुस्सा गुल ।" ,"मैंने डॉक्टर चाची की बात सुन ली , अब तो तुम्हारी बारी है दुल्हन चुनने की ।" ,"जब भी मैं तुमसे बात करना चाहती हूँ , कोई न कोई तुम्हें बुला लेता है लेकिन मैं तुम्हारा दिल जीतना खूब जानती हूँ ।" ,"अच्छा , तो ये हलवा प्रेम भैया के लिए बनाया जा रहा है , वो भी इस किताब में पढ़कर ।" ,"वो चले गए यहाँ से , उनकी बेटी की शादी है ना , सब कुछ बेच के चले गए पंजाब ।" ,"बेटा ! बीस साल तक इन आंसुओं को आँखों के अंदर रोक के रखा था , आज ये रुकने वाले नहीं हैं बेटा ।" ,"चैंपियंस ट्रॉफी की जीत से भले ही खिलाड़ियों की रैंकिंग में इजाफा हुआ है , लेकिन इस खिताब ने कप्तान धोनी को दुनिया में नंबर 1 बना दिया है ।" ,चैंपियंस ट्रॉफी में टीम इंडिया से पिटी इंग्लिश टीम को क्रिकेट एक्सपर्ट ने चोकर्स का तमगा दे दिया है । ,अपने ही घर में जिस तरह इंग्लिश टीम को हरा टीम इंडिया ने खिताब जीता उससे कुक एंड कंपनी हैरान है । ,फाइनल में मिले सदमे से उबर रही इंग्लिश टीम को एक अच्छी खबर मिली है । ,अंग्रेजों के लिए इस खबर के खास मायने भी हैं । ,दूसरी ओर इस खबर के आते ही संकट के दौर से गुजर रही ऑस्ट्रेलिया पर खतरा बढ़ गया है । ,दरअसल इंग्लिश टीम को यह गुड न्यूज मिली कांउटी क्रिकेट से । ,चोट के कारण इंग्लैंड टीम से बाहर चल रहे धाकड़ बल्लेबाज केविन पीटरसन ने कांउटी क्रिकेट के माध्यम से वापसी कर ली है । ,यही नहीं केपी ने वापसी भी धांसू अंदाज में की । ,रविवार को एक ओर इंग्लैंड फाइनल मुकाबले में टीम इंडिया से पिट रही थी ,वहीं दूसरी ओर सरे के लिए खेलते हुए केपी यार्कशर के बालर्स की धुनाई कर रहे थे । ,केपी ने शानदार शतक बनाया और 177 के स्कोर पर नॉट आउट रहे । ,केपी की वापसी से ऑस्ट्रेलिया का संकट बढ़ गया है । ,कोच मिकी ऑर्थर की जगह डैरेन लैहमैन को टीम की जिम्मेदारी सौंपने वाली ऑस्ट्रेलिया के लिए ऐशेज से ठीक पहले केपी की वापसी से कंगारुओं के लिए खतरा बढ़ गया है । ,टीम इंडिया की चैंपियंस ट्रॉफी में ऐतिहासिक जीत के बाद क्रिकेट वर्ल्ड में मंथन का दौर शुरू हो गया है । ,क्रिकेट एक्सपर्ट इस यादगार जीत के कारणों को तलाश रहे हैं साथ ही टीम इंडिया में आया बदलाव अब दूसरी कुछ टीमों के लिए तो शोध का कारण तक बन रहा है । ,पड़ोसी पाकिस्तान का हाल कुछ ऐसा ही है । ,जहां टीम इंडिया ने चैंपियंस ट्रॉफी में अपराजेय रहते हुए खिताब जीता वहीं उसकी चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को इस टूर्नामेंट के सारे मैचों में शिकस्त का सामना करना पड़ा । ,शर्मनाक प्रदर्शन के बाद जहां पूर्व दिग्गज टीम की हार के कारण गिना रहे हैं वहीं टीम में बड़े बदलावों की मांग भी उठ रही है । ,दिग्गज क्रिकेटर और अब कमेंटेटेर के रूप में पहचान बना चुके रमीज राजा ने भी पाक टीम की हार के कारणों को बताते हुए टीम इंडिया से सीख लेने की सलाह ली है । ,रमीज ने चैंपियंस ट्रॉफी में बल्लेबाजों के फ्लॉप शो को पाक की हार का कारण बताया । ,साथ ही रमीज ने यह भी कहा कि नया टैलेंट सामने न आने के कारण पाक टीम को मरे घोड़ों पर ही भरोसा करना पड़ रहा है । ,"हालाकि रमीज ने किसी खिलाड़ी का नाम नहीं लिया लेकिन माना जा रहा है कि उनका इशारा कामरान अकमल , शोएब मलिक और इमरान फरहत जैसे बल्लेबाजों की ओर था ।" ,वर्ल्डकप 2015 के लिए रमीज ने अभी से पाक टीम को तैयारी करने की सलाह देते हुए टीम में युवा खिलाड़ियों को शामिल किए जाने की वकालत की । ,रमीज ने खासकर उमर अकमल और अजहर अली जैसे बल्लेबाजों को पाक टीम का भविष्य बताया । ,कप्तानी के मुद्दे पर इस दिग्गज क्रिकेटर ने पाकिस्तान को विकल्पहीन बताया । ,"साथ ही कहा कि यह सही है कि मिस्बाह 2015 वर्ल्डकप में 40 की उम्र को पार कर लेंगे लेकिन वह अभी भी फिट हैं , रन बना रहे हैं और फील्ड पर भी शार्प हैं ।" ,ऐसे में विकल्प न होने के कारण वर्ल्डकप के लिए मिस्बाह ही बेहतर कप्तान साबित होंगे । ,रमीज ने पाक के साथ ही दुनिया भर की टीमों को टीम इंडिया की फील्डिंग में आए जबर्दस्त सुधार से सीखने की सलाह दी । ,"रमीज ने शिखर धवन , रविंद्र जडेजा , रोहित शर्मा , विराट कोहली और सुरेश रैना की मौजूदगी को टीम इंडिया की फील्डिंग में आए सुधार का कारण बताते हुए कहा कि सभी टीमों को युवा खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा मौका देना चाहिए ।" ,चैंपियंस ट्रॉफी में खिताबी जीत के बाद क्रिकेट वर्ल्ड में टीम इंडिया के चर्चे हैं । ,शिखर धवन और रविंद्र जडेजा इस जीत के बाद टीम इंडिया के बड़े स्टार बन चुके हैं और कप्तान एमएस धोनी का जलवा तो पूछिए ही नहीं । ,चैंपियंस ट्रॉफी में फाइनल मुकाबले में 129 के कम स्कोर के बाद भी शुरुआत से ही इंग्लैंड को जिस तरह धोनी दबाव में ले आए वह काबिले तारीफ था । ,और आखिरी ओवर्स में धोनी के दो अप्रत्याशित फैसलों ने टीम इंडिया को चैंपियनों का चैंपियन बना दिया और धोनी को आईसीसी चैंपियंस इलेवन का कप्तान NULL । ,यह ऐसे फैसले थे जो धोनी की जगह कोई भी कप्तान होता तो उसके लिए आसान नहीं होते । ,130 रनों के खिताबी लक्ष्य का पीछा करते समय इंग्लैंड एक समय चार विकेट केवल 46 रन पर खो चुका था । ,"एलिएस्टर कुक , जोनाथन ट्रॉट , जे रूट और इयान बैल जैसे खिलाड़ी पवेलियन लौट चुके थे ।" ,इसके बाद इयान मॉर्गन और रवि बोपारा पारी ने शानदार साझेदारी कर पारी को संभाल लिया था । ,17 ओवर के बाद इंग्लैंड 102 रन बना चुका था और मैच जीतने के लिए अब 18 बॉल पर 28 रन की जरूरत थी । ,सबसे बड़ी बात अभी बैटिंग पॉवर प्ले के दो ओवर बचे हुए थे । ,जो इंग्लैंड अब लेने जा रहा था । ,कुल मिलाकर मॉर्गन और बोपारा इंग्लैंड को दबाव भरी स्थिति से निकाल टीम इंडिया को टेंशन में ले आए थे । ,इस समय टीम इंडिया के कैप्टन कूल ने पहला बड़ा निर्णय लिया और पारी का 18 वां ओवर करने की जिम्मेदारी धोनी ने इशांत को सौंपी । ,धोनी का यह निर्णय इसलिए हैरानी भरा था क्योंकि इशांत इससे पहले अपने तीन ओवर में 27 रन देकर मंहगे साबित हुए थे । ,वहीं मैच में किफायती साबित हुए भुवनेश्वर का एक और उमेश यादव के दो ओवर शेष थे । ,उमेश तो दो ओवर में दस रन देकर एक विकेट भी ले चुके थे । ,जबकि भुवी ने तीन ओवर में केवल 19 रन दिए थे । ,धोनी का इशांत से बॉलिंग कराने का निर्णय हैरानी भरा था लेकिन इशांत ने इस ओवर में न सिर्फ मॉर्गन बल्कि बोपारा का भी विकेट लेकर टीम इंडिया की जबर्दस्त वापसी करा दी और धोनी का पहला दाव बिल्कुल निशाने पर लग चुका था । ,अब इंग्लैंड को जीत के लिए दो ओवर में 19 रनों की जरूरत थी । ,धोनी ने यहां भी एक और ऐसा निर्णय लिया जिसे दूसरा कप्तान शायद ही कभी ले पाता । ,धोनी ने यह ओवर दिया रविंद्र जडेजा को । ,"शुरुआत में जैज़ उन स्थानों पर धूम्रपान से अत्याधिक जुड़ा हुआ था जहां यह बजाया जाता था , जैसे कि बार , डांस हाल , जैज़ क्लब और यहां तक कि वेश्यालयों में भी ।" ,"इसके अलावा तम्बाकू में और भी कई विषाक्त यौगिक हैं जिनसे दीर्घ अवधि तक धूम्रपान करने वालों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं जिनमें से कई संवहनी असामान्यताएं जैसे स्टेनोसिस , फेफड़ों का कैंसर , दिल का दौरा , स्ट्रोक , नपुंसकता , धूम्रपान करने वाली माताओं द्वारा जन्मे गये शिशु का कम वजन आदि शामिल हैं ।" ,"बाद वाले को जैज़ समुदाय में "" चाय "" , "" मग्गल "" और "" रीफर "" के नाम से जाना गया और यह 1920 से 1930 के दशक तक इतना प्रभावी था कि इसने उस समय रचे गये गीतों में अपनी जगह बना ली जैसे कि लुईस आर्मस्ट्राँग का "" मग्गल्स "" ( Muggles ) , लैरी एडलर का "" स्मोकिंग रीफर्स "" ( Smoking Reefers ) और डॉन रेडमैन का "" चैंट ऑफ़ द वीड "" ( Chant of The Weed ) ।" ,"1940 और 50 के दशक में जैज़ संगीतकारों में मारिजुआना की लोकप्रियता बनी रही , जब तक कि इसका स्थान हेरोइन के प्रयोग ने नहीं ले लिया ।" ,"आधुनिक लोकप्रिय संगीत का एक और प्रकार जो गांजे के धूम्रपान के साथ बहुत अधिक जुड़ा है , रेगे नामक संगीत की एक शैली है जो जैमेका में 1950 के अंतिम और 60 के आरंभिक दशक में पनपी ।" ,"माना जाता है कि 19वीं शताब्दी के मध्य में भांग , या गांजे का प्रयोग अप्रवासी भारतीय श्रमिकों द्वारा शुरू किया गया और मुख्य रूप से यह भारतीय श्रमिकों से जुड़ा था जब तक कि इसे 20वीं सदी के मध्य में रस्ताफारी आंदोलन द्वारा विनियोजित नहीं किया गया ।" sg,"रस्ताफारी गांजे के धूम्रपान को भगवान या जाह के पास आने का साधन मानते हैं , एक संगठन जिसे रेगे के प्रतीकों जैसे कि बॉब मारले और पीटर तोश ने 1960 और 70 के दशक में अत्याधिक लोकप्रिय बनाया ।" ,"हालांकि , अत्यधिक उत्पादन और जटिल कानूनों की समस्या से परेशान ड्रग डीलरों ने पाउडर को "" क्रैक "" -JOIN कोकीन को एक ठोस धूम्रपान करने योग्य रूप में बदलने का निश्चय किया , जिसे कम मात्रा में ज्यादा लोगों को बेचा जा सकता था ।" ,"1990 के दशक में पुलिस कार्यवाही के साथ मज़बूत अर्थव्यवस्था से कई संभावित उम्मीदवारों का माल जब्त होने या उन्हें आदत छोड़ने के लिए मजबूर करने के कारण , इस प्रवृत्ति में कमी आई ।" sg,"हाल के वर्ष वाष्पित हेरोइन , मेथाम्फेटामाइन तथा फेन्सीस्लाइडीन ( पीसीपी ) ( PCP ) की खपत में वृद्धि को दर्शाते हैं ।" ,"इनके साथ कम संख्या में दिमाग पर असर करने वाली दवाएं जैसे कि DMT , 5 - Meo -JOIN DMT और सल्विया डिविनोरम शामिल हैं ।" ,धूम्रपान में प्रयुक्त होने वाला सबसे लोकप्रिय पदार्थ तम्बाकू है । ,तम्बाकू की विभिन्न प्रजातियाँ मौजूद हैं जिन्हें कई प्रकार के मिश्रण और ब्रांडों की विविधता से बनाया जाता है । ,"तंबाकू अक्सर सुगंधित करके बेचा जाता है , जिसमें अक्सर विभिन्न फलों की खुशबू होती है , कुछ ऐसे रूप में जो पानी के पाइपों जैसे हुक्के के साथ अधिक लोकप्रिय है ।" ,"धूम्रपान में प्रयुक्त होने वाला दूसरा सबसे आम पदार्थ भांग है , जिसे "" कैनाबिस सतिवा "" ( Cannabis sativa ) के फूलों या पत्तियों से बनाया जाता है ।" ,"इस पदार्थ को दुनिया के अधिकतर देशों द्वारा अवैध माना जाता है और वे देश जिनमें सार्वजनिक खपत बर्दाश्त की जाती है , यह केवल सही तौर पर वैध है ।" ,"इस के बावजूद , कई देशों में वयस्क जनसंख्या का काफी बड़ा प्रतिशत इसका प्रयोग करने वालों की कोशिश करने वालों में से है जिनमें से एक छोटी संख्या इसका प्रयोग नियमित रूप से करती है ।" ,"चूंकि तम्बाकू अवैध है या ज्यादातर क्षेत्रों में बर्दाश्त किया जाता है , सिगरेटों में इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन नहीं होता है जिसका अर्थ है कि धूम्रपान का सबसे प्रचलित प्रकार हाथ से मोड़ी गई सिगरेट , जिसे अक्सर जॉईंट ( joints ) कहा जाता है , या पाइप है ।" ,पानी के पाइप भी काफी आम हैं और भांग के लिए इस्तेमाल करने पर अक्सर इन्हें बॉन्ग कहा जाता है । ,कुछ अन्य मादक दवाओं का प्रयोग छोटे पैमाने पर होता है । ,इनमें से अधिकतर पदार्थ नियंत्रित हैं और कुछ तम्बाकू या भांग से कहीं अधिक नशीले हैं । ,"इनमें क्रैक कोकीन , हेरोइन , मेथाम्फेटामाइन और पीसीपी ( PCP ) शामिल हैं ।" ,"इनके साथ कम संख्या में दिमाग पर असर करने वाली दवाएं जैसे कि DMT , 5 - Meo -JOIN DMT और सल्विया डिविनोरम शामिल हैं ।" ,धूम्रपान के सबसे प्राचीन रूप के प्रदर्शन के लिए भी किसी तरह के उपकरण की आवश्यकता है । ,इसके परिणामस्वरूप दुनिया भर में विभिन्न प्रकार के धूम्रपान उपकरण और सामग्रियां बनी हैं । ,"चाहे तम्बाकू , भांग , अफीम या जड़ी बूटी हो , सभी प्रकारों के मिश्रण को जलाने के लिए आग के एक स्रोत की आवश्यकता होती है ।" ,"अभी तक सबसे आम सिगरेट है , जो कस कर लपेटी गई कागज़ की ट्यूब से बनी होती है , व जिसका निर्माण औद्योगिक रूप से किया जाता है , या फिर कागज़ को मोड़ कर खुले तम्बाकू से बनाया जाता है , जिसमें एक फ़िल्टर हो सकता है ।" ,अन्य लोकप्रिय धूम्रपान उपकरणों में विभिन्न प्रकार के पाइप और सिगार हैं । ,"एक कम आम लेकिन तेजी से लोकप्रियता की ओर बढ़ता प्रकार वैपोराईज़र ( vaporizer ) है , जो गर्म हवा से संचालित होता है और जिसमें पदार्थ का दहन नहीं करना पड़ता , अतः फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए कम खतरनाक होता है ।" ,"वास्तविक धूम्रपान उपकरण के अलावा कई अन्य वस्तुएं धूम्रपान के साथ जुड़ी हुई हैं , सिगरेट केस , सिगार बॉक्स , लाईटर , माचिस , सिगरेट होल्डर , सिगार होल्डर , ऐश ट्रे , पाइप क्लीनर , तम्बाकू कटर , माचिस स्टैंड , पाइप टेम्पर , सिगरेट कॉम्पैनीयन तथा कई अन्य ।" ,इनमें से कई मूल्यवान संग्राहक वस्तुएं बन गई हैं और विशेषकर अलंकृत और प्राचीन वस्तु बेहतरीन नीलामी घरों में उच्च कीमतों पर बिक सकती है । ,इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट की शुरुआत के साथ 2004 में धूम्रपान का एक कथित अधिक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प प्रदर्शित हुआ । ,"ये बैटरी चालित , सिगरेट जैसे उपकरण , तम्बाकू द्वारा उत्पन्न होने वाले धुएं की नकल के रूप में एयरोसोल का उत्पादन करते हैं , जिससे उपयोगकर्ता को तम्बाकू धूम्रपान में उत्पन्न होने वाले हानिकारक पदार्थों के बिना निकोटिन प्राप्त होता है ।" ,"दावा किया गया है कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट असली सिगरेटों की तुलना में कम हानिकारक है , हालांकि कई देशों की कानूनी स्थिति के अनुसार यह अभी विवादित है ।" ,"शिराओं में मादक पदार्थ को पहुंचाने का सबसे तीव्र और कारगर ढंग किसी पदार्थ के वाष्पित गैस रूप को फेफड़ों द्वारा अन्दर लेना है ( क्योंकि गैसें सीधे फुफ्फुसीय शिरा में मिलती हैं , इसके बाद दिल में तथा यहां से दिमाग तक ) और यह पहली सांस के एक सैकेंड से भी कम समय में उपयोगकर्ता को प्रभावित करती है ।" ,"फेफड़े कई लाख छोटे बल्बों से मिलकर बने होते हैं , जिन्हें अल्वेओली ( alveoli ) कहा जाता है जो कि एक साथ मिलकर 70 मी. तक का क्षेत्र बनाते हैं ( जो कि लगभग एक टेनिस कोर्ट के क्षेत्र के बराबर है ) ।" ,"इसका प्रयोग उपयोगी औषधियां लेने के लिए किया जा सकता है जैसे एयरोसोल , जो कि दवाओं की छोटी बूंदों से मिल कर बने होते हैं , या फिर पत्तियां जला कर उसके द्वारा उत्पन्न गैस द्वारा , जिसमें मस्तिष्क को उत्तेजित करने वाले पदार्थ हैं , या फिर पदार्थ के शुद्ध रूप को ग्रहण करके ।" ,"सभी दवाओं का धूम्रपान नहीं किया जा सकता , उदाहरण के लिए सल्फेट व्युत्पन्न ( डेरिवेटिव ) जो मुख्यतः सांस द्वारा नाक के अन्दर ली जाती है , हालांकि पदार्थ के अति शुद्ध रूप का धूम्रपान किया जा सकता है लेकिन इसके लिए ठीक से दवा लेने के लिए अत्याधिक कौशल की आवश्यकता होती है ।" ,यह विधि भी कुछ हद तक अकुशल है चूंकि सारा धुंआ सांस द्वारा अन्दर नहीं जाएगा । ,"सांस द्वारा अन्दर लिया गया पदार्थ तंत्रिकाओं के सिरों में रासायनिक प्रतिक्रियाएं करता है , क्योंकि यह एंडोरफिन्स और डोपामाइन जैसे प्राकृतिक उत्पादों जैसा होता है , जो खुशी के एहसास से संबंधित हैं ।" ,"परिणामस्वरूप प्राप्त होने वाले अनुभव को "" हाई "" ( High ) कहते हैं जो कि निकोटिन के कारण हुई हलकी उत्तेजना से लेकर हेरोइन , कोकीन और मेथाम्फेटामाइन के मामले में अत्याधिक उत्तेजना के बीच की स्थिति हो सकती है ।" ,"चाहे पदार्थ जो भी हो , फेफड़ों में धुआं लेने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है ।" ,"ज्वलनशील पत्तियों की सामग्री जैसे तम्बाकू या भांग के अधूरे दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड उत्पन्न होती है , जो फेफड़ों में रक्त द्वारा ले जाई जाने वाली ऑक्सीजन की मात्रा पर प्रभाव डालती है ।" ,"इसके अलावा तम्बाकू में और भी कई विषाक्त यौगिक हैं जिनसे दीर्घ अवधि तक धूम्रपान करने वालों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं जिनमें से कई संवहनी असामान्यताएं जैसे स्टेनोसिस , फेफड़ों का कैंसर , दिल का दौरा , स्ट्रोक , नपुंसकता , धूम्रपान करने वाली माताओं द्वारा जन्मे गये शिशु का कम वजन आदि शामिल हैं ।" ,दीर्घकालीन धूम्रपान करने वालों के चेहरे में एक विशेष परिवर्तन आता है जिसे डॉक्टरों द्वारा स्मोकर्स फेस ( smoker's face ) कहा जाता है । sg,ज्यादातर धूम्रपान करने वाले वयस्कता या किशोरावस्था की शुरुआत में धूम्रपान आरम्भ करते हैं । ,"धूम्रपान में जोखिम लेने और विद्रोह के तत्व हैं , जो अक्सर युवा लोगों को आकर्षित करते हैं ।" sg,उच्च वर्ग के मॉडल और साथियों की उपस्थिति भी धूम्रपान को प्रोत्साहित कर सकती है । ,"चूंकि किशोर वयस्कों की बजाए अपने साथियों से अधिक प्रभावित होते हैं , इसलिए माता पिता , स्कूल और स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा उन्हें सिगरेट से बचाने की कोशिशें अक्सर असफल सिद्ध होती हैं ।" ,हैंस आइसेंक जैसे मनोवैज्ञानिकों ने विशिष्ट धूम्रपान करने वालों के लिए एक व्यक्तित्व रेखा चित्र का विकास किया है । ,फिर आज के जमाने में यह संभव नहीं है कि निष्‍पक्ष से निष्‍पक्ष संवाददाता का भी कोई राजनीतिक झुकाव न हो । ,कई बार इस तरह के दबावों का भी सहारा लिया जाता है । ,लेकिन विश्‍वसनीयता बनाए रखने से अंत: संबंधों के खोने का डर होता है । ,"किसी भी चुनाव क्षेत्र की सही तस्वीर जानने के लिए सबसे पहले तो जाति , धर्म , पार्टी के पूर्वाग्रहों से दूर रहना जरूरी है ।" ,"संवाददाता का काम किसी जाति , धर्म या पार्टी के उम्मीदवार को न जिताना है , न हराना है ।" ,"कोई उम्मीदवार किसी अखबार के जिताए न जीतता है , न हारता है ।" sg,वह अखबार की भूमिका को इस मामले में बहुत जटिल कारणों से लेता है । ,इसलिए एक संवाददाता को यह भ्रम ही नहीं होना चाहिए कि उसकी एक या दो रिपोर्टें किसी पार्टी के उम्मीदवार के भाग्य का फैसला कर सकती हैं । ,इसलिए जब संवाददाता किसी चुनाव क्षेत्र में जाएं तो अपने सारे पूर्वाग्रह तथा पूर्व कल्पनाएं एक तरफ रखकर जाएं । ,दूसरा भ्रम जाति समीकरणों के आधार पर खड़ा होता है । ,मान लीजिए एक चुनाव क्षेत्र में कई राजनीतिक दलों के उम्मीदवार मुख्य रूप से मैदान में हैं । ,"अब आप जिस उम्मीदवार या उसके समर्थक के पास जाएंगे तो वह जातीय गुणा - भाग , जोड़ - बाकी लगाकर बताएगा कि माहौल उसके पक्ष में है ।" ,लेकिन सबसे ज्यादा जातिवाद बिहार में है और यह जरूरी नहीं है कि कोई उम्मीदवार जाति के आधार पर जीते । ,"कुछ मतदाता किसी पार्टी विशेष के प्रति निष्‍ठावान होते हैं , कुछ मतदाता अपनी जाति के उम्मीदवार से नाराज होते हैं , कुछ क्षेत्र की उपेक्षा के कारण किसी खास उम्मीदवार को समर्थन देना या नहीं देना चाहते हैं ।" ,कई बार किसी उम्मीदवार की कोई टिप्पणी या उसका सार्वजनिक व्यवहार बाधक या साधक बन जाता है । ,इसलिए जातीय समीकरणों के आधार पर भी किसी उम्मीदवार की जीत या हार सुनिश्‍चित नहीं होती । ,सामान्यत: जाति तमाम निर्णायक तत्‍वों में से एक होती है । sg,इसलिए चुनाव को अपने चश्‍मे से न देखें । ,महत्वपूर्ण यह है कि उसे दूसरे के चश्‍में से देखें । sg,आप इस सच्‍चाई को बदल नहीं सकते । sg,इसलिए अपनी रिपोर्ट में इस सच्‍चाई को व्यक्‍त करें । ,"यह सच्‍चाई आप तभी व्यक्‍त कर पाएंगे , जब आप उसे देख सकेंगे ।" ,"उसे देख तब सकेंगे , जब आप अपने पार्टीगत , जातिगत , व्यक्‍तिगत , संप्रदायगत पूर्वाग्रहों से दूर होंगे ।" ,जब आप लालच या धमकी या बहकावे से दूर होंगे । ,"आप चुनाव मैदान में इस्तेमाल होने नहीं , तथ्यों का तर्कसंगत ढंग से इस्तेमाल करने के लिए जाते हैं ।" ,"अपनी आंखें और दिमाग बंद करने नहीं , खोलने जाते हैं ।" ,"अपनी कल्पनाओं और स्वप्‍नों को साकार करने नहीं , तथ्यों और सच्‍चाइयों का सामना करने जाते हैं ।" ,इसलिए मतदाता के रूप में अपने फैसले को चुनावी रिपोर्ट लिखने पर हावी न होने दें । pl,अपनी दोनों भूमिकाओं को अलग - अलग देखें । ,एक की भूमिका दूसरे पर दूसरे की भूमिका पहले पर न लादें । ,फिर वह कहना शायद जरूरी है कि रिपोर्ट में फैसले न दें । ,"रिपोर्ट रिपोर्ट होती है , निर्णय नहीं ।" ,लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि आप तथ्यों को तार्किक - विश्‍वसनीय ढंग से न रखें और चुनाव की एक मुकम्मल तस्वीर न दें । ,हर प्रमुख उम्मीदवार के चुनाव दफ्‍तर में जाएं । ,वहां प्रमुख चुनाव - संचालक से बात करें । ,"हर पार्टी का चुनाव - संचालक बढ़ - चढ़कर , अविश्‍वसनीय और निराधार बातें करेगा ।" ,लेकिन तीन - चार उम्मीदवारों या उनके चुनाव संचालकों से बात करने पर तस्वीर कुछ साफ होगी । ,इनसे प्राप्‍त परस्पर विरोधी तथ्यों के बीच भी एक तस्वीर आपको साफ दिखेगी । ,कम से कम दो - तीन प्रमुख प्रत्याशियों की ताकत और कमजोरी का पता लगेगा । ,उनके दावों - प्रतिदावों की सत्यता पता चलेगी । ,उनकी चुनाव प्रचार शैली का पता चलेगा । ,मौका मिले तो उम्मीदवार के साथ थोड़ा घूमें । ,चुनाव सभा हो रही है तो वह देखें । ,"किसी पार्टी का जुलूस निकल रहा है तो उसके प्रति लोगों का क्या रुख है , इस पर नजर रखें ।" ,लेकिन कभी इस रौब में न आएं कि फलां उम्मीदवार तो हार ही नहीं सकता । ,या फलां पार्टी के पक्ष में कथित रूप से पूरे देश या प्रदेश में हवा बह रही है तो उसी का उम्मीदवार यहां से जीतेगा । ,प्रतिरक्षा के बारे में अपने देश की सुरक्षा से लेकर विश्‍व के सुरक्षा वातावरण के बारे में भी ज्ञान होना जरूरी है । ,ये विषय इसलिए संवेदनशील हैं क्योंकि जरा सी गलती आपकी अपनी राष्‍ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकती है । ,दो देशों के बीच तनाव पैदा कर सकती है और आपकी सेना के मनोबल को नाहक गिरा सकती है । ,यह भी अजीब बात है कि कुवैत - इराक संघर्ष के दौरान विश्‍वभर में प्रतिरक्षा लेखकों की फौज ऐसे खड़ी हो गई जैसे ’ मशरूम ’ का उत्पादन होता है । ,बीटू की मां का चेहरा मुरझाया हुआ । ,बसन्त के मौसम में पतझड़ क्यों ? ,ज्ञानेश्वरी - तुमको मजाक सूझ रहा है मेरे मुरझाये चेहरे को देखकर ? ,सच औरत के दर्द को कोई नहीं समझ पाया । ,रामेश्वर - देवी दर्द का कारण जान सकता हूँ ? ,ज्ञानेश्वरी - सुनोगे ? ,रामेश्वर - अवश्य । ,ज्ञानेश्वरी - दर्द का कारण है बंटवारा । ,रामेश्वर - कैसा बंटवारा देवी ? ,परिवार में बंटवारा नहीं देवी ऐसा ना कहो । ,रहस्य को सुलझाओ मेरी चिन्ता ना बढ़ाओ । ,बंटवारे का नाम सुनकर मुझे घबराहट होने लगी है । ,ज्ञानेश्वरी - घबराने की कोई बात नहीं । ,डाक्टर का फोन आया था । ,रामेश्वर - डाक्टर बंटवारा चाहता है । ,ज्ञानेश्वरी - अरे नहीं क्यों बात का बतंगड़ बना रहे हो । ,रामेश्वर - किस बंटवारे की बात कर रही हो । ,ज्ञानेश्वरी - पिताजी की सम्पति का बंटवारा । ,रामेश्वर - यानि बीटू के नाना की छोड़ी सम्पत्ति का बंटवारा । ,ज्ञानेश्वरी - हां । ,रामेश्वर - चलो अच्छा हुआ । ,कोर्ट का फैसला आने में कई साल लग गये । ,लाखों रूपये तो कोर्ट के चक्कर में खत्म हो गये होगें । ,ज्ञानेश्वरी - अच्छा तो हुआ पर मेरा कत्ल तो हो गया । ,रामेश्वर - तुम्हारा कत्ल ? ,बात मेरी समझ में नहीं आयी । ,ज्ञानेश्वरी - हां तुम मर्द जो ठहरे हमारी बात कहां समझ में आयेगी । ,अब तो औरतें भी औरतों की दुश्मन बनने लगी हैं । ,बेचारी ठगी औरत जाये तो जाये कहां ? ,हर आदमी औरत से बलिदान चाहता है । ,मेरे सगे भाई और मेरी सौतेली मां ने कानूनी तौर पर मेरा कत्ल करवा दिया । ,मेरी मां अपने त्याग के भरोसे घर परिवार की कल्पना करती थी पर बेचारी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ कर मर गयी । ,मां के मरने के दस साल बाद भाईयों ने बाप की दूसरी शादी करवा दी । ,साल भर हुआ नहीं नई मां बाप को भी खा गयी । ,आज नई मां बाप की सम्पति की उत्तराधिकारी हो गयी । ,मुझ से तो अपने मां - बाप की औलाद कहलाने का हक छीन लिया गया । ,कानूनी तौर पर मार दिया गया । ,रामेश्वर - बीटू की मां जीवन - मरण तो सब प्रभु की इच्छा पर है । ,किसी के कहने से कोई मरता है क्या ? ,वैसे भी हमें हिस्सा तो चाहिये नहीं था । ,जाने दो उनकी खुशी में अपनी खुशी है । ,ज्ञानेश्वरी - मैं कहां हिस्सा मांग रही थी कि वे लोग इतनी बड़ी चाल चले हैं । ,मुझे मृत घोषित कर दिये हैं । ,अरे कानूनी तौर पर तो मुझे भी हक है । ,बाप ने भेदभाव किया । ,भाईयों को पढ़ाया मैं अनपढ गंवार रह गयी । ,मां - बाप जब तक दुनिया में थे तब तक उनकी औलाद थी अब उनके मरने के बाद यह भी हक छीन लिया गया । ,रामेश्वर - किसने कहा तुम्हारा हक नहीं है । ,हमारा घर - परिवार तो पूरी तरह तुम्हारे कब्जे में है । ,क्यों आसूँ बहाती हो । ,हमें तो वैसे भी हिस्से की दरकार नहीं थी न रहेगी । ,तुम्हारे भाई - भतीजे और नई मां हंसी खुशी रहें तुम्हारे कानूनी कत्ल में तो क्या बुराई है । ,मायके से हक छीना गया है । ,ससुराल में तो नहीं ना । ,हक की बात कर रही हो यहां तो तुम्हारा साम्राज्य है । ,ज्ञानेश्वरी - देखो मजाक न करो । ,अरे उनका इतना तो फर्ज बनता था कि नहीं कि वे मुझसे राय मशविरा कर लेते । ,मेरी भी इच्छा जान लेते । ,जबकि दिल्ली के बैंक में जमा रूपये को निकालने के लिये मैने दस्तख्त किये थे ना । ,एक रूपये लिये बिना उल्टे अपने ही खर्च हो गये । ,उनको तो मालूम होगा ही न कि मां - बाप की सम्पति में बेटी का भी बराबर का हक है । ,अरे मां - बाप की सम्पति से मुझे हिस्सा नहीं चाहिये था पर उन्होंने मुझे मृत घोषित क्यों कर दिया ? ,मेरे तीन - तीन नन्हें - नन्हें बच्चे हैं । ,आज भी मैं दवाई के भरोसे चल रही हूं । ,मेरे भाई और सौतेली मां ने मेरी मौत का हलफनामा कचहरी में दे दिया । ,वाह रे मतलबी भाई और सौतेली मां । ,रामेश्वर - चेहरे पर बसन्त लाओ । ,अभी पतझड़ का मौसम नहीं है । ,ले जाने दो अपने को वैसे भी नहीं चाहिये वैसी सम्पति । ,ज्ञानेश्वरी - हिस्से का अफसोस नहीं है जीते जी मार क्यों दिया । ,दुख तो इस बात का है । ,फर्जी हलफनामे में कहा गया है कि हरिहर की कोई बेटी नहीं थी । ,तुम बताओ मैं कहां से आई हूं । ,तुमको पता है मृतको का एसोशियन बना हुआ है । ,रामेश्वर - हां तो । ,ज्ञानेश्वरी - क्या तुमको नहीं लगता कि मुझे अपने मां बाप की बेटी कहलाने का हक कचहरी से नहीं मिल सकता । ,रामेश्वर - क्यों नहीं पर ऐसा कर रिश्ते को खत्म नहीं करना है । ,कानूनी तौर पर कागज पर कत्ल हुआ है ना । ,समाज तो इसे मान्यता नहीं दे रहा है न । ,ज्ञानेश्वरी - क्या यह मेरे साथ अन्याय नहीं । ,क्या कानूनी तौर पर रिश्ते का खात्मा नहीं ? ,क्या कानून की नजरों में मरी पड़ी रहूं । ,कितने गुपचुप तरीके से मेरा कत्ल हो गया और मुझे पता ही नहीं चला । ,रामेश्वर - हुआ तो है कत्ल पर इसका मतलब तो ये नहीं कि बदला लिया जाये । ,ज्ञानेश्वरी - क्या लड़की इतनी मजबूर है कि जीवन भर मर - मर कर जीती रहे । ,"आखिर मां - बाप , भाई - भतीजे और रिश्ते के लोग कितना त्याग चाहते हैं ।" ,लड़कियों का मरण जन्म से पहले हो जा रहा है । ,मुझ जैसी कुछ भाग्यशाली जन्म पा भी जातीं हैं तो उन्हें अपने सगों के जुल्म का शिकार होना पड़ जाता है । ,सम्पति से मैं खुद बेदखल हो जाती एक बार मुझ से पूछ तो लेते कत्ल करने से पहले । ,वे मुझे ही नहीं मेरे भरे पूरे परिवार का कत्ल कर दिये हैं । ,इसका जबाब तो देना ही होगा । ,रामेश्वर - सम्पति से कोई मोह नहीं है । ,भाईयों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने से पूरे परिवार को जेल हो सकती है । ,क्या तुम ऐसा चाहोगी ? ,ज्ञानेश्वरी - क्या तुम चाहोगे कि लड़कियों का कोख में कत्ल होता रहे । ,लड़कियां जुल्म की शिकार होती रहें । ,हक से वंचित होती रहें । ,दोयम दर्जे की इंसान बनी रहें । ,रामेश्वर - कभी नहीं चाहूंगा । ,ज्ञानेश्वरी - फिर क्यों नहीं कानूनी जंग लड़ने देते ? ,रामेश्वर - काफी विलम्ब हो चुका है । ,वैसे भी सम्पति में हिस्सा की दरकार नहीं है । ,"सबक सिखाने के और भी तरीके तो हैं , जिससे जीवन में कभी भी सिर ना उठा सकें ।" ,अपराधबोध से दबे मरे रहें । ,ज्ञानेश्वरी - तुम्हारी बात समझ गयी । ,भतीजे के ब्याह में नहीं जाने की सोच रही थी । ,अब जाऊंगी । ,ब्याह बीत जाने पर सब पर्दाफाश कर दूंगी फिर ना मुंह देखूंगी । ,रामेश्वर - मायके का परित्याग कर पाओगी । ,ज्ञानेश्वरी - औरत क्या नहीं कर सकती है जब तनकर खड़ी हो जाये तो । ,रामेश्वर - कानूनी तौर पर तुम्हारा ही नहीं हम और हमारे बच्चों तक का कत्ल हो गया है लेकिन धैर्य नहीं खोना है । ,अब तो बस सबक सिखाना ही मकसद है ताकि जिन्दगी भर पूरा कुनबा अपराधबोध से नहीं उबर पाये । ,ज्ञानेश्वरी - तुम साथ हो तो ऐसा ही होगा । ,सांप भी मर जाएगा और लाठी भी नहीं टूटेगी । ,सबक तो सिखा कर रहूंगी । ,एक पेट से जन्में दगा कर रहें हैं । ,उस सौतेली मां की क्या बात करें । ,"रामेश्वर - ठीक है जैसे भी सबक सिखाना चाहो सिखाओ पर कचहरी के चक्कर में समय , पैसा का नुकसान तो होगा ही बेइज्जती भी बहुत होगी ।" ,ज्ञानेश्वरी - ठीक है । ,ब्याह बीतने के बाद पूरे गांव और नातहितों के सामने अपने भाईयों के हाथ हुए अपने कागजी कत्ल को उजागर कर उनका परित्याग कर आऊँगी । ,घायल नागिन सी ज्ञानेश्वरी पति की समझाइस से कानूनी कार्रवाई न करने को तैयार तो हो गयी पर सामाजिक कार्रवाई करने की जिद पर अड़ी रही । ,शहर से गांव भतीजे के ब्याह में शामिल हुई । ,हंसी - खुशी हर कार्यक्रम में भाग ली । ,अपने मन के घाव का तनिक भी एहसास किसी को नहीं होने दी । ,ब्याह हंसी - खुशी बीत गया । ,दुल्हन भी आ गयी । ,ब्याह के बिहान भर सौतेली मां का गुस्सा फूट पडा । ,अनबन तो दौलत के बंटवारे को लेकर पहले से ही थी । ,वह पूरी दौलत अपने कब्जे में करना चाहती थी पर कचहरी ने चार हिस्से करने का आदेश पारित कर दिया था । ,ज्ञानेश्वरी तो वैसे मरी हुई साबित हो गयी थी । ,सौतेली मां के बढते लालच और बाप की मेहनत की कमाई का सौतेली मां के मायके की तरफ होते रूख को देखकर और कोर्ट में हुए खर्चे को न देने की जिद पर अड़ी सौतेली मां से खार खाये ज्ञानेश्वरी के बड़े भाई सेठूमल ने गांव की पंचायत बुला दी वह भी ज्ञानेश्वरी की गवाही में । ,ज्ञानेश्वरी को भी ऐसे मौके की तलाश थी । ,पंचायत बैठ गयी । ,सेठूमल पंचों के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हुआ । ,ग्राम प्रधान - सेठूमल पंचायत किस प्रयोजनबस बुलाये हो । ,अपनी समस्या पंचों के सामने रखो । ,सेठूमल - पंचों छोटी मां ने बाप की छोडी सम्पति में बराबर का हिस्सा तो ले लिया पर कोर्ट - कचहरी में आये खर्चे के रूपये नहीं दे रही है । ,दोनों भाईयों ने भी कोर्ट कचहरी के चक्कर में हुए खर्चे की अभी तक भरपायी नहीं की है । ,"छोटी मां ने तो एक पैसा न देने की कसम खा ली है पंचों हमारे पास भी बाल बच्चे हैं , छोटी मां क्यों अन्याय कर रही है ।" ,"सेठूमल की बात सुनकर दोनों छोटे भाई रतन और जतन बोले पंचों , भईया हिसाब किताब कर एक - एक पाई ले लिये हैं ।" ,छोटी मां ने दिया है या नहीं वही जाने । ,सेठूमल आगबबूला हो गया । ,वह भागते हुए घर में गया और हिसाब की डायरी लेकर आया । ,पंचों के सामने एक - एक खर्च और रीन कर्ज का ब्यौरा सुनाने लगा । ,"सेठूमल की बात न तो छोटी मां और न ही भाई रतन , जतन ही मानने को तैयार थे ।" ,ग्राम प्रधान बोले - ज्ञानेश्वरी बेटी तू भी कुछ कहना चाहेगी ? ,ज्ञानेश्वरी आंखों में आंसू की बाढ लिये हाथ जोड़कर खड़ी हुई पर उसके मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी । ,"आंसू , आंखों के बांध तोड़ चुके थे ।" ,वह कभी छोटी मां को निहारती तो कभी भाईयों को । ,ग्राम प्रधान बोले - बिटिया कुछ तो बोल । ,क्यों इतनी दुखी है ? ,ज्ञानेश्वरी - पंचों मैं तो अपने बाप की औलाद ही नहीं हुई तो मुझे मां बेटों के बीच लेन - देन से उपजे आक्रोश के बीच में आने का तो हक ही नहीं बनता । ,ग्राम प्रधान - बिटिया क्या कह रही हो । ,ज्ञानेश्वरी - हां पंचों बाप के तो बस यही तीन भाई औलाद हैं । ,मैं तो पैदा ही नहीं हुई अपनी मां की कोख से तो मेरा क्या हक । ,वारिस तो तीनों भाई और छोटी मां हैं । ,मै तो अपने मां - बाप की नाजायज सन्तान हूं वह भी लड़की । ,ग्राम प्रधान - बेटी कौन कहता है कि तुम हरिहरबाबू की औलाद नहीं हो । ,ज्ञानेश्वरी - हलफनामा । ,ग्रामप्रधान - कैसा हलफनामा बेटी ? ,ज्ञानेश्वरी - छोटी मां और बाप समान भाई साहब से पूछिये । ,ग्रामप्रधान - सेठूमल बिटिया क्या कह रही है । ,सेठूमल - प्रधानजी गलती तो हो गयी है । ,ग्रामप्रधान - कैसी गलती ? ,ज्ञानेश्वरी - मैं बताती हूं । ,ग्रामप्रधान - बताओ बिटिया । ,"ज्ञानेश्वरी - पंचों यह सत्य है कि लड़की पराई होती है लेकिन मायके के खूँटे से भी वह अच्छी तरह बंधी रहती है क्योंकि वह मां - बाप , भाई - भतीजों और मायके के पूरे गांव के मान - सम्मान में अभिवृद्धि के लिये सदैव लालायित रहती है ।" ,उसी लड़की से दौलत के लालच में सगे मां - बाप की औलाद होने का अधिकार छीन लिया जाये तो उस लड़की पर क्या बीतेगी ? ,ग्रामप्रधान - इतना बड़ा अपराध कैसे हो गया सेठूमल । ,सेठूमल - पंचों सभी जानते हैं पिताजी की छोड़ी सम्पति का केस कचहरी पहुँच गया था । ,चार साल में फैसला आया । ,केस की सुनवाई के दौरान बालिग वारिसों की सूची मांगी गयी तो हम भाईयों और छोटी मां ने आपस में राय मशविरा कर हलफनामा दे दिया कि हमारी कोई बहन नहीं है । ,बाप की सम्पति के असली वारिस हम तीन भाई और छोटी मां हैं । ,ग्रामप्रधान - सेठूमल जिस ज्ञानेश्वरी को तुम लोगो ने झूठा हलफनामा देकर मृतक घोषित कर दिया है । ,वही ज्ञानेश्वरी ने दिल्ली के बैंक में जमा लाखों रूपया निकलवाने में तुम्हारी मदद की थी । ,एक पैसा भी नहीं ली थी । ,बेचारी खुद अपना पैसा खर्च की थी । ,तुम लोगो ने पैसे का बन्दरबांट किया था । ,यह तो पूरा गांव जानता है । ,इसके बाद भी तुम लोगों ने ज्ञानेश्वरी का कानूनी कत्ल कर दिया । ,सेठूमल - गलती हो गयी पंचों । ,ग्रामप्रधान - इस गलती की सजा में तुम सब सलाखों के पीछे जा सकते हो । ,ज्ञानेश्वरी - पंचों हमें सलाखों के पीछे तो नहीं भेजना है और ना कानूनी झंझट में पडना है । ,हमारे अपने सगों ने हमारे सपनों की बारात में आग ही नहीं लगायी है रिश्ते को भी लतिया दिया है । ,आज मैं इन खून के रिश्तेदारों का अपनी कानूनी हत्या के जुर्म में परित्याग करती हूं कहते हुए अपने घर - मंदिर की ओर दौड़ पड़ी । ,डेंगू बुखार का निदान माइक्रोबायलोजी संबंधी प्रयोगशाला परीक्षण द्वारा किया जा सकता है । ,कुछ भिन्न परीक्षण भी किये जा सकते हैं । sg,कोशिकाओं के कल्चर ( या नमूनों में ) में एक परीक्षण ( वायरस आइसोलेशन ) डेंगू वायरस को पृथक करता है । ,"एक अन्य परीक्षण ( न्यूक्लिक अम्ल पहचान ) वायरस से न्यूक्लिक अम्लों की पहचान करता है , जिसमें पॉलीमर्स चेन रिएक्शन ( PCR ) कही जाने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है ।" ,एक तीसरा परीक्षण ( एंटीजन पहचान ) वायरस के एंटीजन की पहचान करता है । ,एक अन्य परीक्षण रक्त में उन प्रतिरक्षियों की पहचान करता है जो डेंगू वायरस से शरीर को लड़ने की क्षमता देते हैं । ,"वायरस आइसोलेशन तथा न्यूक्लिक अम्ल पहचान परीक्षण , एंटीजन पहचान से बेहतर काम के होते हैं ।" ,"हालांकि इन परीक्षणों की लागत अधिक होती है , इसलिये ये अधिक स्थानों पर उपलब्ध नहीं हैं ।" ,जब डेंगू रोग अपने प्रारंभिक चरणों में होता है तो ये सारे परीक्षण नकारात्मक हो सकते हैं ( अर्थात ये नहीं दर्शाते हैं कि व्यक्ति को बीमारी है ) । ,प्रतिरक्षी परीक्षण के अलावा ये प्रयोगशाला परीक्षण केवल बीमारी के गंभीर ( आरंभिक ) चरण के दौरान डेंगू बुखार के निदान में सहायक हो सकते हैं । ,"हालांकि , प्रतिरक्षी परीक्षण इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि व्यक्ति को डेंगू , संक्रमण की बाद की अवस्था का है ।" ,शरीर प्रतिरक्षियों का निर्माण करता है जो विशिष्ट रूप से 5 से 7 दिनों बाद डेंगू वायरस से लड़ते हैं । sg,डेंगू वायरस से लोगों को बचाने के लिये अभी तक किसी वैक्सीन को स्वीकृत नहीं किया गया है । ,संक्रमण को रोकने के लिये विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) ने मच्छरों की जनसंख्या को नियंत्रित करने तथा लोगों को मच्छरों के काटे जाने से बचाने का सुझाव दिया है । ,"WHO ने डेंगू के रोकथाम के लिये एक कार्यक्रम ( "" एकीकृत वेक्टर नियंत्रण "" ) का सुझाव दिया है जिसमें 5 भिन्न भाग शामिल हैं ।" pl,मच्छरों को नियंत्रित करने तथा लोगों को इससे काटे जाने से बचाने के लिये WHO कुछ विशिष्ट सुझाव भी देता है । ,""" एडीज़ आएजेप्टी "" मच्छर को नियंत्रित करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि इसके निवासों से मुक्ति पायी जाय ।" pl,लोगों को पानी के खुले पात्रों को खाली रखना चाहिये ( जिससे मच्छर इनमें अंडा न दे सकें ) । ,इन क्षेत्रों में मच्छरों को नियंत्रित करने के लिये कीटनाशकों या जैविक नियंत्रण एजेंटों का भी उपयोग किया जा सकता है । ,वैज्ञानिकों का यह मानना है कि ऑर्गेनोफास्फेट या पाइरेथाइराइड इंसेक्टेसाइड का छिड़काव कोई सहायता नहीं करता है । ,ठहरे हुए पानी को समाप्त करना चाहिये क्योंकि यह मच्छरों को आकर्षित करता है और इसलिये भी कि इस ठहरे हुये पानी में जीवाणुओं के पैदा होने से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं । pl,मच्छरों के काटने से बचने के लिये लोग ऐसे कपड़े पहन सकते हैं जो पूरी तरह से उनकी त्वचा को ढक कर रखें । ,"वे कीटरोधियों ( जैसे कीटरोधी स्प्रे ) का उपयोग कर सकते हैं , जो मच्छरों को दूर रखेंगे ( DEET सबसे अच्छा काम करती है ) ।" ,"लोग , आराम करते समय मसहरी ( मच्छरदानी ) का भी उपयोग कर सकते हैं ।" ,डेंगू बुखार के लिये कोई विशिष्ट उपचार नहीं है । ,"लक्षणों के आधार पर , भिन्न लोगों के लिये भिन्न उपचार हैं ।" ,"कुछ लोग घरों पर मात्र तरल पीकर बेहतर हो सकते हैं , जिसके साथ उनके स्वास्थ्य सेवा पेशेवर नजदीकी रूप से उनके स्वास्थ्य की निगरानी करके यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि वे बेहतर हो रहे हों ।" ,कुछ अन्य लोगों को अंतःशिरा द्रव्य या रक्त आधान की आवश्यकता हो सकती है । ,"यदि किसी व्यक्ति की पहले से जटिल स्वास्थ्य स्थिति की समस्या है तो , स्वास्थ्य सेवा पेशेवर उस व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती करने का निर्णय ले सकते हैं ।" ,जब किसी व्यक्ति को अंतःशिरा द्रव्य की जरूरत होती है तो आम तौर पर उनको इसकी जरूरत एक या दो दिन के लिये हो सकती है । sg,स्वास्थ्य सेवा पेशेवर तरल की मात्रा को बढ़ाएगा जिससे कि व्यक्ति मूत्र की एक तय मात्रा ( 0.5 – 1 मिली / किग्रा / घंटा ) निर्गत कर सके । sg,तरल की मात्रा इसलिये भी बढ़ायी जा सकती है जिससे कि व्यक्ति की हेमाटोक्रिट ( रक्त में आयरन की मात्रा ) तथा महत्वपूर्ण चिह्न सामान्य स्थिति पर वापस आ सके । ,"रक्तस्राव के जोखिम के कारण स्वास्थ्य सेवा पेशेवर , नासोगैस्ट्रिक इन्ट्यूबेशन ( नाक के रास्ते से किसी व्यक्ति के पेट में नलिका डालना ) , अंतःपेशीय इंजेक्शन ( दवा को मांसपेशियों में सीधे देना ) तथा धमनियों में पंचर ( किसी धमनी में सुई लगाना ) करना जैसी आक्रामक चिकित्सा प्रक्रियाओं से बचते हैं ।" sg,बुखार तथा दर्द के लिये एसेटामिनोफेन ( टाइलेनॉल ) दी जा सकती है । ,"सूजन - रोधी दवा का एक प्रकार जिसे NSAID ( जैसे आइब्यूप्रोफेन या ऐस्पिरिन ) कहते हैं , प्रयोग नहीं की जानी चाहिये क्योंकि रक्तस्राव होने की काफी संभावना होती है ।" ,यदि व्यक्ति के महत्वपूर्ण चिह्न बदलें या सामान्य न हो और यदि उनके रक्त में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या कम होती जा रही हो तो रक्त आधान को जल्दी शुरू किया जाना चाहिये । ,जब रक्त आधान की आवश्यकता हो तो व्यक्ति को संपूर्ण रक्त ( रक्त जिसको इसके विभिन्न भागों में विभक्त नहीं किया गया हो ) या पैक की गयी लाल रक्त कणिकाओं को दिया जाना चाहिये । ,"प्लेटलेट्स ( संपूर्ण रक्त से निकाली गयी ) तथा ताज़ा फ्रीज़ किया प्लाज़्मा , आम तौर पर संस्तुत नहीं किया जाता है ।" pl,जब व्यक्ति डेंगू के सुधार वाले चरण में होता है तो आम तौर पर उसे और अंतःशिरा द्रव्य नहीं दिये जाते हैं जिससे कि उसके शरीर में तरल की मात्रा अधिक न हो । ,यदि द्रव्य की अधिकता हो जाय लेकिन उस व्यक्ति के महत्वपूर्ण चिह्न स्थिर ( अपरिवर्तित ) हों तो सिर्फ और द्रव्य दिये जाने को रोकना ही पर्याप्त है । ,"यदि व्यक्ति रोग की जटिल अवस्था में न हो तो , उसे फ्यूरोसेमाइड ( लैसिक्स ) जैसे लूप मूत्रवर्धक दिये जा सकते हैं ।" sg,ये उस व्यक्ति के रक्त परिसंचरण से अतिरिक्त द्रव्य को बाहर करने में सहायक होंगे । ,डेंगू से पीड़ित अधिकतर लोग ठीक हो जाते हैं और उनको बाद में किसी तरह की कोई समस्या नहीं होती है । ,डेंगू से संक्रमित लोगों में 1 से 5 % ( प्रत्येक 100 में से 1 से 5 ) की उपचार के अभाव में मृत्यु हो जाती है । ,अच्छे उपचार के बावजूद 1 % से कम लोगों की मृत्यु हो जाती है । ,"हालांकि , गंभीर डेंगू से पीड़ित लोगों में से 26 % ( प्रत्येक 100 में से 26 ) की मृत्यु हो जाती है ।" ,डेंगू 110 से अधिक देशों में आम है । ,"प्रत्येक वर्ष , पूरी दुनिया के 50 से 100 मिलियन लोग इससे प्रभावित होते हैं ।" ,"प्रत्येक वर्ष , पूरी दुनिया के इसके चलते आधे मिलियन लोग अस्पताल में भर्ती होते हैं तथा लगभग 12,500 से 25,000 लोगों की मृत्यु हो जाती है ।" ,"डेंगू , संधिपादों ( आर्थोपोड्स ) द्वारा फैलने वाला सबसे आम वायरल रोग है ।" ,मनोज बाजपेयी अभिनीत चटगांव को सीमित रिलीज मिली थी । ,इस फिल्म के प्रचार पर भी विशेष ध्यान नहीं दिया गया था । ,कंटेंट में अच्छी होने के बावजूद यह कायदे से दर्शकों के बीच नहीं पहुंच सकी । ,इसका कलेक्शन उल्लेखनीय नहीं है । ,"उम्मीद थी कि रानी मुखर्जी की अय्या को दर्शक मिलेंगे , लेकिन पहले वीकेंड के 5 करोड़ के कलेक्शन से जाहिर है कि दर्शकों का उत्साह ठंडा रहा ।" ,रामगोपाल वर्मा की भूत रिटर्न्स की स्थिति तो और भी बुरी रही । ,उसे 4 करोड़ का कलेक्शन भी नहीं मिला । ,इनसे बेहतर दूसरे हफ्ते में चल रही इंग्लिश विंग्लिश और तीसरे हफ्ते में चल रही ओह माय गॉड का कलेक्शन रहा । ,दोनों ने तीसरे हफ्ते में आठ करोड़ से अधिक का कलेक्शन किया । ,मधुर भंडारकर की फिल्म हीरोइन को सबसे बड़ी चुनौती एक हफ्ते पहले रिलीज हुई अनुराग बसु की बर्फी से मिली । ,"रिलीज के पहले हीरोइन की जैसी चर्चा थी , उसी अनुपात में उसे दर्शक नहीं मिले ।" ,दर्शकों की प्रतिक्रिया पर सभी आश्चर्य कर रहे हैं । ,कुछ ट्रेड पंडित यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि पहले हफ्ते में 25 करोड़ का कलेक्शन करने के बावजूद हीरोइन को सफल फिल्म माना जाए । ,बाजार के चलन के मुताबिक अभी ए श्रेणी की फिल्मों का वीकएंड कलेक्शन 30 - 35 करोड़ से कम हो तो उसे सफल नहीं कहा जा सकता । ,महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की वजह से जरूर दर्शकों की भीड़ बंट गई । ,बर्फी अभी तक स्ट्रांग चल रही है । ,"अनुराग बसु की बर्फी देखते हुए सभी आनंदित हुए थे , लेकिन प्रिव्यू में ट्रेड समीक्षकों का एक समूह आशंकित था कि मसालेदार मनोरंजन कम होने से दर्शकों को फिल्म नापसंद हुई तो बहुत बुरा होगा ।" ,उनकी आशंका निर्मूल निकली । ,बर्फी को पहले शो से ही सराहना और कलेक्शन दोनों मिले । ,पहले दिन इस फिल्म का कलेक्शन 9 करोड़ से अधिक रहा । ,शनिवार और रविवार को कलेक्शन बढ़े । ,यहां तक कि बर्फी ने राज 3 के कलेक्शन को भी प्रभावित किया । ,बर्फी एहतियातन सिंगल स्क्रीन में बड़े पैमाने पर प्रदर्शित नहीं की गई है । ,निर्माता और वितरकों को लग रहा था कि आम दर्शक बर्फी देखने नहीं आएंगे । ,अभी पता चल रहा है कि उन्होंने भी इसे पसंद किया है । ,बर्फी का पहले वीकएंड का कलेक्शन 34 करोड़ से अधिक रहा । ,दूसरी तरफ राज 3 को अभी तक दर्शक मिल रहे हैं । ,"मुंबई , बिहार और कुछ दूसरे इलाकों में भोजपुरी की गंगा देवी हाउसफ़ल चल रही है ।" ,अभिषेक चडढा निर्देशित दीपक सावंत की गंगा देवी में अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी दोनों ने निरहुआ और पाखी हेगड़े के साथ काम किया है । ,लंबे अंतराल के बाद किसी भोजपुरी फिल्म के लिए हाउसफुल के बोर्ड लगे हैं । ,निश्चित ही अमिताभ और जया की जोड़ी इस भोजपुरी फैमिली फिल्म का बड़ा आकर्षण है । ,विक्रम भट्ट की राज 3 सिंगल स्क्रीन और मल्टीप्लेक्स दोनों प्रकार के थिएटरों के दर्शकों को पसंद आई है । ,इमरान हाशमी की वजह से सिंगल स्क्रीन के दर्शक थोड़े ज्यादा रहे । ,"आम तौर पर मल्टीप्लेक्स के दर्शक इमरान हाशमी के नाम पर ही नाक - भौं सिकोड़ने लगते हैं , लेकिन इस बार उन्होंने इमरान हाशमी को पसंद किया ।" ,उनके साथ बिपाशा बसु और ईशा गुप्ता का भी आकर्षण रहा । ,निर्देशक विक्रम भट्ट ने काला जादू के खौफ और 3डी के जादू के साथ एक अच्छी प्रेमकहानी भी परोसी । ,"राज 3 ने पहले दिन ही 10 करोड़ से अधिक का कलेक्शन किया , जो शनिवार और रविवार को और बढ़ा ।" ,पहले हफ्ते में इस फिल्म का कलेक्शन 36 करोड़ से अधिक रहा । ,विशेष फिल्म्स राज 3 की सफलता का श्रेय गणपति को दे रहा है । ,यह और कुछ नहीं दर्शकों की धार्मिक भावना को उकसाना है ताकि दर्शक और बढ़ सके । ,शिरीष कुंदर की जोकर ने दर्शकों और समीक्षकों दोनों को निराश किया । ,"उम्मीद थी कि अक्षय कुमार और सोनाक्षी सिन्हा को जोकर से कामयाबी की हैट्रिक मिलेगी , लेकिन फिल्म किसी भी तबके और उम्र के दर्शकों को पसंद नहीं आई ।" ,"शुक्रवार को इस महंगी फिल्म का कलेक्शन केवल 5 करोड़ रहा , जो शनिवार को और कम हो गया ।" ,रविवार को शुक्रवार की तुलना में बढ़ोत्तरी जरूर मिली । ,सोमवार को आई गिरावट फैसला हो गया कि जोकर इस साल की बड़ी फ्लाप साबित होगी । ,इस फिल्म के कम कलेक्शन से अक्षय कुमार की इमेज का घाटा हो सकता है । ,उनकी अगली फिल्म ओ माई गॉड रिलीज के लिए तैयार है । ,जोकर के न चलने का पहला नुकसान शिरीष कुंदर को ही हुआ । ,वे सलमान खान के फिल्म किक से आडट हो गए । ,सलमान खान की एक था टाइगर ने अभी तक सिंगल स्क्रीन और मल्टीप्लेक्स के थिएटरों पर कब्जा कर रखा है । ,उसकी लोकप्रियता और दर्शकों की जारी भीड़ की वजह से फराह खान और बमन ईरानी की शिरीन फरहाद की तो निकल पड़ी को पर्याप्त थिएटर नहीं मिल पाए । ,"जहां थिएटर मिले , वहां शो टाइमिंग की वजह से भी दर्शकों को दिक्कत हुई ।" ,उन्होंने चार्ल्स के साथ मिलकर चौथे विकेट के लिए मैच विनिंग 116 रन जोड़े । ,यही पार्टनरशिप भारत के लिए घातक साबित हुई । ,बल्लेबाजी के दौरान कप्तान महेंद्र सिंह धोनी खुद को चोटिल कर बैठे थे । ,एक रन लेने के चक्कर में उनके पैरों की मांसपेशियों में खिंचाव आ गया था । ,"उन्होंने जैसे तैसे बल्लेबाजी तो की , लेकिन फील्डिंग के लिए वे नहीं उतर सके ।" ,उनके बदले टीम के उपकप्तान विराट कोहली ने कमान संभाली । ,चैंपियंस ट्रॉफी में धमाकेदार खिताबी जीत के बाद ट्राई सीरीज के लिए वेस्टइंडीज पहुंची टीम इंडिया की पहली मैच में खुमारी उतर गई । ,मेजबान इंडीज ने रोमांचक मुकाबले में टीम इंडिया को एक विकेट से हरा दिया । ,इस हार के साथ ही यह साबित हो गया कि इंग्लैंड का बारिश के बाद इंडीज की धूप टीम इंडिया पर आगे भी भारी पड़ सकती है । ,दूसरी ओर इंग्लैंड हो इंडीज टीम रोहित शर्मा सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे है । ,रोहित को बार - बार टीम में शामिल करने पर कई बार धोनी और सिलेक्शन कमेटी की आलोचना तक हुई और रोहित को टीम इंडिया का नवाब तक कहा गया । ,चैंपियंस ट्रॉफी में लंबे समय से अंदर - बाहर हो रहे रोहित को धोनी ने अपनी जगह पक्की करने का सुनहरा मौका दिया है लेकिन रोहित रन बनाकर भी बार - बार एक ही गलती कर इस मौके को जाया करने पर उतारू हैं । ,दरअसल आईपीएल में शानदार बल्लेबाजी करने का इनाम रोहित को चैंपियंस ट्रॉफी की टीम में एंट्री के साथ मिला था । ,धोनी ने रोहित को ओपनिंग की भूमिका में आजमाकर यह तय कर दिया कि रोहित प्लेइंग इलेवन में बने रहें । ,चैंपियंस ट्रॉफी के पांच मैचों में दो पचासों के साथ 193 रन बनाकर धोनी के फैसले को सही साबित भी किया । ,शिखर धवन के साथ उनकी ओपनिंग पूरे टूर्नामेंट में शानदार रही लेकिन इसके बाद भी रोहित लगातार एक चूक कर सारे किए कराए पर पानी फेरने पर अमादा हैं । ,जो गलती रोहित चैंपियंस ट्रॉफी में कर रहे थे वही इंडीज के साथ मैच में भी दिखाई दी । ,दरअसल रोहित अपने विकेट की कीमत नहीं समझ रहे हैं और अच्छी शुरुआत करने के बाद खराब शॉट खेल कर आउट हो रहे हैं । ,यही कारण है कि वे पिछले छह मैचों में तीन अर्धशतक और एक बार 30 प्लस स्कोर बनाकर भी बड़ी पारी नहीं खेल पाए हैं । ,दूसरी ओर शिखर धवन ने अपने विकेट की कीमत समझते हुए ही सफलता का नया मुकाम हासिल कर लिया है । ,रोहित की यही गलती इंडीज के साथ मैच में भी दिखाई दी । ,इंडीज के खिलाफ मैच में भी रोहित ने गजब का टेम्परामेंट दिखाया । ,धवन और कोहली के सस्ते में आउट होने के बाद कार्तिक और रैना के साथ मिल रोहित ने पारी को संभाला और पचासा भी ठोका लेकिन उसके बाद वही हुआ जिसके लिए रोहित बदनाम हो रहे हैं । ,इंडीज के खिलाफ रोहित शानदार पारी खेलने के बाद डैरेन सैमी के ओवर की पांचवी गेंद पर आउट हुए । ,इस ओवर में पहले ही 17 रन बन चुके थे । ,"ऐसे में रोहित ने जो लॉफ्टेड शॉट खेला , ओवर की आखिरी गेंद पर उसकी कोई जरूरत नहीं थी ।" ,मैच की कॉमेंट्री कर रहे रमीज राजा और अरुण लाल ने भी रोहित के इस रवैये पर निराशा जाहिर की थी । ,पारी के बाद अजय जडेजा ने भी रोहित के इस तरह शॉट खेलने को बचकाना करार देते हुए कहा था कि रोहित को जरूर कोच से डांट पड़ेगी । ,चैंपियंस ट्रॉफी जीतने के बाद त्रिकोणीय सीरीज के लिए वेस्टइंडीज पहुंची टीम इंडिया को पहले ही मैच में हार का सामना करना पड़ा है । ,वेस्टइंडीज में चल रही त्रिकोणीय सीरीज के एक रोमांचक मुकाबले में मेजबान टीम ने भारत को एक विकेट से हरा दिया । ,इस सीरीज में वेस्टइंडीज की यह लगातार दूसरी जीत है । ,मंगलवार को श्रीलंका के खिलाफ होने वाले अहम मुकाबले में भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के खेलने पर संदेह है । ,हैमस्ट्रिंग इंजरी से जूझ रहे धोनी इस मैच से बाहर रह सकते हैं । ,ऐसे में विराट कोहली को कार्यवाहक कप्तान बनाया जा सकता है । ,रविवार की रात हुए मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने वेस्टइंडीज के सामने जीत के लिए 230 रन का लक्ष्य रखा था जिसे मेजबान टीम ने 47.4 ओवर में 9 विकेट खोकर हासिल कर लिया । ,वेस्टइंडीज की ओर से जानसन चार्ल्स ने सर्वाधिक 97 रन का योगदान किया । ,चार्ल्स को मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया । ,इससे पहले रोहित शर्मा ( 60 ) और सुरेश रैना ( 44 ) की संभली हुई पारियों की बदौलत भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ सात विकेट पर 229 रन बनाए । ,दिनेश कार्तिक ने 23 और कप्तान धोनी ने 27 रन का योगदान दिया । ,"इंडीज की ओर से रोश , बेस्ट व सैमी ने दो - दो विकेट लिए ।" ,टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी के लिए उतरी टीम इंडिया की सलामी जोड़ी 25 रन ही जोड़ पाई । ,चैंपियंस ट्रॉफी के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए शिखर धवन 10 गेंदों पर महज 11 रन बनाकर केमार रोच को लौटता कैच दे बैठे । ,युवा बल्लेबाज विराट कोहली भी फ्लॉप रहे । ,"उन्होंने धवन की तरह ही केवल 11 रन बनाए , लेकिन 21 गेंदें खेलीं ।" ,कोहली को सैमी ने क्रिस गेल के हाथों कैच कराया । ,लेकिन रोहित शर्मा ने भारतीय पारी संवारने की कोशिश की । ,124 के स्कोर पर वह भी अर्धशतकीय पारी खेल चौथे विकेट के रूप में सैमी की गेंद पर लपक लिए गए । ,आईसीसी ने बॉल टेंपरिंग मामलों में कार्रवाई करने का अधिकार अंपायर को दे दिया है । ,आईसीसी के बोर्ड ने वार्षिक सम्मेलन में यह निर्णय लिया है । ,अब अंपायर बॉल से छेड़छाड़ का संदेह होने पर ही कार्रवाई कर सकता है । ,पालगी भईया कहते हुए धूलीचन्द पांव छूआ और सामने खड़े होकर भीखनरायन की दीन - दशा को चकित होकर निहारने लगा । ,खुस रह धूलीचन्द । ,कैसे हो ? ,घर में सब ठीक हैं । ,खटिया पर बैठ दूर क्यों खड़ा है । ,तू भी बूढा हो गया । ,तुझे मैंने गोद में खेलाया है । ,हां - भईया वक्त कहां किसको बख्शा है रियासतें मिट गयीं । ,राजा - महाराजाओं के नाम मिट गये । ,मैं तो अदना सा इंसान हूं । ,परमात्मा की कृपा है । ,तुम बताओ भीखनरायन भईया कैसे आना हुआ मुद्दतो बाद । ,रिटायरमेण्ट कैसा कट रहा है दमादों के साथ । ,भईया तुम तो स्वर्ग का सुख भोग रहे होगे ? ,धूलीचन्द की बातें सुनकर भीखनरायन की आंखें भर आयीं । ,वह गमछा से आंखों की बाढ रोकते हुए बोला भईया नरक भोग रहा हूं । ,धूलीचन्द - स्वर्ग के सुख की चाह में भाई - भतीजों का कागजी कत्ल करवाकर । ,हक - हिस्सा तक हड़पकर । ,सगे बेटी - दमाद और सौतेली बेटी दमाद को वारिस बना दिये । ,आज खुद के रचे चक्रव्यूह में फंस गये । ,आंसू से रोटी गीली कर रहे हो । ,भईया उधार की ममता में बर्बादी के बीज क्यों बो दिये । ,आज दर - दर की ठोकरें खा रहे हो । ,मुझे मालूम हो गया है जिस भाई अधीरनरायन की चौखट को उखाड़ फेंकने की सौगन्ध खा कर गये थे उस चौखट की छांव में तुम खुशी से तो नहीं आये होगे । ,भीखनरायन - हां धूलीचन्द अब यही दरवाजा खुला है बाकी तो बन्द हो चुके हैं । ,सौतेले दमाद प्रभु ने तो मेरे रिटायरमेण्ट की रकम अंगूठा लगवाकर हड़प ली । ,थाने में गुहार लगाया पर कोई सुनवाई अभी तक नहीं हुई । ,सगे बेटी दमाद के लिये भी छूछा हो गया हूं । ,कहते हैं न छूछा को कौन पूछा । ,धूलीचन्द - सबसे ज्यादा प्रिय तो तुम्हारा प्रभुवा दमाद था । ,वही धोखेबाज निकला । ,सदर तहसील में सी. आर. ओ. होकर भी ऐसी नीचता कर गया । ,दगाबाज प्रभु ने तो अंधे की लाठी ही तोड़ दी । ,भईया दुनिया में सब तुम्हारे बेटी दमाद जैसे ही लोग नहीं होते । ,लोग छूछे को भी पूछते हैं तभी तो यहां बैठे हो । ,सब माया के पीछे नहीं भागते । ,सन्तोष बहुत बड़ा सुख है । ,उसी सन्तोष का फल अधीरनरायन भईया को मिल रहा है । ,तुम तो जानते हो तुम्हारे फेंक देने के बाद कितनी मुसीबतें अधीरनरायन भईया के ऊपर आयी । ,बच्चों को पेट भर रोटी नहीं मिलती थी । ,गरीबी और तुम्हारी दगाबाजी से आहत बुढिया दम तोड़ दी । ,गरीबी की नईया में डूबते उतिरियाते अधीरनरायन भईया के दोनों बेटों ने कामयाबी तो पा ली है । ,देखो दरिद्र अधीरनरायन भईया आज सचमुच स्वर्ग का सुख भोग रहे हैं । ,तुम हक - हिस्सा हड़प कर बने धनवान नरक भोग रहे हो । ,भीखनरायन - बुढिया की जिद के आगे मेरी एक ना चली धूलीचन्द । ,वह तो स्वर्ग सिधार गयी । ,मैं नरक का जीवन जी रहा हूं । ,सन्तोष के फल की महिमा समझ में आ गयी है । ,जमीन - जायदाद सबसे अधीरनरायन को बेदखल कर दिया । ,देखो वही भाई चैन की रोटी खा रहा है और मैं दर - दर की ठोकरें । ,धूलीचन्द - भईया सच कहा गया है बोया बीज बबूल का तो आम कहां से खाय । ,भीखनरायन - मुझे पछतावा है धूलीचन्द । ,काश भाई - भतीजों के सपनों की बारात में आग नहीं लगाता तो मेरी ये दुर्गति नहीं होती । ,धूलीचन्द - भईया अपना हिस्सा लेकर बेटी दमाद को देते तो किसी को तकलीफ नहीं होती । ,अब तो यह कानूनन अधिकार हो गया है पर भाई का हक हड़पकर अच्छा नहीं किया । ,भीखनरायन - तभी तो नरक का दुख भोग रहा हूं । ,काश बुढ़िया की जिद के आगे नहीं झुकता तो ये दुर्दिन नहीं देखना पड़ता । ,धूलचन्द - भईया तुमने गरीब जानकर अधीरनरायन भईया का हक खुली आंखों से लूटा था । ,दूसरी ओर देखो तुम्हारा सौतेला दमाद जिस पर अधिक विश्वास था कि तुम्हें स्वर्ग का सुख देगा । ,वही तुम्हारा अंगूठा काट कर चल - अचल सम्पति का मालिक बन बैठा । ,तुम दीन - दरिद्र जैसे भटक रहे हो । ,भईया पराया खून सगे का मुकाबला नहीं कर सकता । ,भीखनरायन - समझ में आ गया है धूलीचन्द । ,धूलीचन्द - क्या करेगा समझ में आकर । ,जब सहारा बनना था तब तो गरीब सगे भाई को मुसीबतों की खाई में ढकेल दिये । ,अब तो तुम खुद लाचार हो । ,"सहारे की लाठी तुम्हारे अपने दमाद प्रभु , सी. आर. ओ. तहसील सदर ने छीन कर तुम्हें लखपति से सड़कपति बना दिया है ।" ,भीखनरायन - अंधे की लाठी तो छिन गयी है । ,जीवन के इस सांध्य काल में खून का रिश्ता ही मेरी लाठी बनेगा । ,मुझे यकीन है । ,धूलीचन्द - यकीन नहीं टूटा होता तो तुम्हारी लाठी में बहुत जोर होता भईया । ,खैर देर तो बहुत हो गयी है पर मुझे भी यकीन है तुम्हारे दोनों भतीजे तुम्हारे दुख को समझेंगे । ,"भले ही तुम्हारे धोखेबाज दमाद सी. आर. ओ. सदर , प्रभु ने करोड़ों की चल - अचल सम्पति क्यों न छीन ली हो ?" ,भीखनरायन की आंखों से तर - तर आंसू टपक रहे थे । ,धूलीचन्द समझाता जा रहा था । ,इसी बीच श्रीबाबू आ गया । ,बूढे ताऊश्री की आंखों में आंसू देखकर उनके पैर के नीचे से जैसे जमीन खिसक गयी । ,वह ताऊश्री के आंसू पोंछते हुए बोला दादा कौन सी मुसीबत आ गयी । ,भीखनरायन - बेटा मुझ अंधे की लाठी टूट गयी । ,श्रीबाबू - दादा तुम्हारी लाठी कैसे टूट सकती है ? ,भीखनरायन - बेटा जिसके लिये तुम लोगों के साथ बेईमानी किया वही जीवन भर की कमाई छीन कर धकिया दिये । ,अब तो मेरी हालत कुत्ते - बिल्ली जैसी हो गयी है । ,रो - रोकर भीखनरायन आपबीती बताने लगे । ,श्रीबाबू - दादा हम तुम्हारी लाठी हैं । ,ऐसा नहीं है कि जो बेईमानी तुमने बेटी दमाद के मोह में पड़कर की है भूल गये हैं । ,याद है दादा हम दोनों भाई पानी पीकर स्कूल जाते थे । ,मेरे मां - बाप का श्रम हमारी ताकत रहा है । ,उन्ही के श्रम का नतीजा है कि हम दोनों भाई दो जून की रोटी इज्जत से कमा खा रहे हैं । ,हमारे बाप जो झोपड़ी में दिन काटा करते थे देखो पक्की बैठक में बैठे हैं । ,तुम हक छीन कर ससुराल जा बसे । ,दादा तुम आज अपने हाल और हमारे बाप की तुलना तो करो । ,देखो जो लोग गरीब जानकर दुत्कार दिया करते थे । ,वही सलाम ठोंकते हैं । ,हम तो कभी भी तुम्हारे धन के भूखे नहीं थे । ,सब समय का दोष है तुम्हारा नहीं । ,"भीखनरायन - बेटा मैं शर्मिन्दा हूं तो उसकी वजह है तुम्हारी बड़ी ताई , हमारी घरवाली जो बेटी दमाद के मोह में मुझसे अनर्थ करवायी और खुद मुझसे पहले ऊपर पहुंच गयी मैं रह गया नरक भोगने को ।" ,श्रीबाबू - दादा खुद को ना कोसो । ,बड़े - बड़े राजाओं ने भी सन्तान के मोह में ऐसा किया है । ,श्रीबाबू दादा भीखनरायन से चर्चारत् था । ,इसी बीच श्रीधर भी सप्ताह भर बाद आ गया । ,25 साल की लम्बी अवधि के बाद दादा भीखनरायन को अपने दरवाजे बैठा देखकर चकित रह गया । ,वह गाड़ी खड़ी कर भागते हुए आया और भीखनरायन का चरण स्पर्श करते हुए बोला दादा सब ठीक तो है ना । ,इतना सुनते ही भीखनरायन आंसू पोंछते हुये बोले बेटा कुछ भी ठीक नहीं है । ,ठीक होता तो यहां आता ? ,श्रीधर - दादा क्या कह रहे हो ? ,धूलीचन्द - अंधे की लाठी टूट गयी । ,श्रीधर - मतलब ? ,धूलीचन्द - धोखा । ,श्रीधर - कौन है धोखेबाज । ,धूलीचन्द - पहले तो तुम्हारे दादा जी ने तुम्हारे बाप के साथ धोखा किया अब भीखनरायन भईया के साथ दमाद प्रभु ने । ,श्रीधर - क्या हुआ दादा ? ,भीखनरायन - कमाई और बेईमान की सब दौलत लुट गयी । ,श्रीबाबू - दादा ये तो होना ही था । ,किसी की लुट जाती है किसी की छुट जाती है पर तुम्हारे लुटेरे को सजा दिलवा कर रहूंगा । ,श्रीधर - भाई श्रीबाबू सजा देना कचहरी का काम है । ,हां न्याय के लिये गुहार तो करना होगा । ,भीखनरायन - बेटा बिन्द्राबाजार थाने में अर्जी दे चुका हूं प्रभु की हेराफेरी की । ,थानेदार ने कहा था जालसाज प्रभु कानून से नहीं बच पायेगा । ,रकम भी वापस मिल जायेगी । ,बाबा चिन्ता ना करो पर कई महीने हो गये कोई कार्रवाई नहीं हुई । ,प्रभु धमकी देता है कहता है जो करना चाहो कर लो । ,मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाओगे । ,मुझे डर है कि कभी मेरा गला दबा कर भईया की तरह मुझे भी पेड़ पर लटकाकर आत्महत्या का इल्जाम मेरे ही माथे न मढ दे । ,श्रीबाबू - दादा फिर से पुलिस में शिकायत दर्ज करवायेंगे । ,श्रीधर - दादा तुम्हारी सम्पति से हमें मोह नहीं है । ,मोह है तो बस तुमसे क्योंकि तुम हमारे बाप के सगे भाई हो और हमारे बड़े बाप हो । ,सगे खून के रिश्तेदार हो । ,तुम्हारी परवरिश करना हमारा फर्ज है । ,हम खून के रिश्तेदार हैं कानूनी रिश्तेदार नहीं । ,दादा विश्वास करो हम लोग तुम्हारी सेवा करने में तनिक भी कोतहाई नहीं बरतेगें । ,भीखनरायन - विश्वास है बेटा तुम लोगो पर । ,गलती तुम लोगों की नहीं गलती तो हमारी है । ,धोखा तो मैंने किया है । ,होशो - हवास में घरवाली की जिद और बेटी - दमाद के मोह की वजह से कागजी कत्ल करवाकर चल - अचल सम्पति पर कब्जा किया था । ,अपनी बेईमानी पर आज मैं शर्मिन्दा हूं । ,मैं जिस बेटी दमाद के बहकावे में आकर भाई - भतीजों का हक हड़प लिया । ,वही भतीजे मुझे आज भी बाप का सम्मान दे रहे हैं । ,धूलीचन्द - भईया ये तुम्हारे दोनों भतीजे श्रीधर और श्रीबाबू लोभी नहीं हैं तुम्हारे दमाद जैसे । ,दूसरों की मदद करने को तैयार रहते हैं । ,इनके मां - बाप से इन्हें ये गुण मिले हैं विरासत में । ,तुम्हारी धन - दौलत से इन्हें तनिक भी नहीं मोह होगा । ,तुम तो इन पर विश्वास कर यहीं रह जाओ । ,तुम्हारी माटी ये पार लगा देगें । ,श्रीधर - हां दादा । ,तुम्हारे पास अभी जो कुछ बचा भी है उसको भी अपनी बेटी पुष्पा के नाम लिखकर आ जाओ अपने भतीजों के यहां । ,दादा ये तुम्हारे पोती - पोते बहुयें खूब सेवा करेंगी । ,हमें तुम्हारी सेवा का मौका मिल जायेगा क्या यह कम फायदा है ? ,यह तो बड़े - बड़े धनासेठों को नहीं मिलता । ,धूलीचन्द - श्रीधर तुम भी फायदे की बात करने लगे । ,श्रीधर - हां काका अपने लिये नहीं अपनी बहन पुष्पा के लिये । ,धूलीचन्द - पुष्पा को तुम फायदा पहुंचाओगे । ,तुम्हारी मुसीबतों का कारण तो वही बेटी दमाद हैं । ,तुम उनके फायदे की बात कर रहे हो । ,श्रीधर - काका सौतेले बहनोई को तो मैं देखना नहीं चाहता जिसने मेरे बड़े बाप के विश्वास का खून कर दिया । ,वह तो दुश्मन बन गया है मानवता का । ,हम पुष्पा की बात कर रहें हैं । ,दादा को हमारे साथ रहने से पुष्पा को मायका मिल जायेगा । ,"भाई - भाभी , भतीजे - भतीजी मिल जायेंगे जिनके प्यार के लिये वह तरस रही होगी ।" ,भीखनरायन - हां ठीक कह रहे हो । ,बेटा तुम दोनों भतीजे नहीं मेरे बेटे हो । ,तुम पर मुझे विश्वास है मेरी माटी को गिद्ध कौवे नहीं खा पायेंगे । ,श्रीधर - दादा कैसी बात कर रहे हो । ,ये तुम्हारे दोनों बेटे कब काम आयेगें । ,भीखनरायन - बेटा तुम लोगों का हक छीनने के लिये हमने सौतेले दमाद प्रभु और समधी दूधनाथ के बहकावे में आकर क्या क्या षडयन्त्र नहीं रचा । ,तुम्हारे बाप को मरवाने तक की योजना बनवा दिया और तुम लोग मुझे सिर पर बिठा रहे हो । ,श्रीधर - दादा दुश्मनी का जबाब दुश्मनी से देने से क्या मिलेगा ? ,नफरत ना हमें नफरत के बीज नहीं बोना है । ,हम तुम्हारी परवरिश निःस्वार्थ करना चाहते हैं । ,हमें तुम्हारी दौलत नहीं चाहिये हमें तो बस तुम्हारी जरूरत है । ,सेवा का अवसर देकर उपकार करो दादा । ,इतना सुनते ही भीखनरायन उठे और दोनों भतीजों को गले लगाकर रोने लगे । ,धूलीचन्द भीखनरायन से बोला क्यों रोते हो भईया श्रीधर और श्रीबाबू जैसे भतीजों के रहते तुम जैसे अंधे की लाठी भले ही तुम्हारे अपने कानूनी विश्वासपात्र रिश्तेदारों ने तोड़ दी है । ,ये खून के रिश्तेदार जिनके साथ अन्याय किये हो वही तुम्हें लाठी का सहारा देगें । ,श्रीधर और श्रीबाबू एक स्वर में बोले हां दादा अब तो विश्वास करो । ,गरमा - गरम लजीज रंगबिरंगी कोकोनट बिरयानी मेहमानों को पेश करें । ,सबसे पहले मटर को भाप में पका लें । ,अब तेल गर्म करके मखाने तल लें । ,ठंडे होने पर आधे तले मखानों को पीस लें । ,टमाटर प्यूरी में नमक व मसाले मिलाकर रखें । ,प्याज को छोटा व चौकोर काट लें । ,पनीर के टुकड़े भी काट लें । ,तेल गरम करके प्याज डालकर नरम करें । ,अदरक मिश्रण व मैदा डालकर भूनें । ,अब मलाई डालकर कसकर रगड़ें । ,जब मलाई घी छोड़ दें तो पिसे मखाने डालकर भूनें । ,सौंधी महक उठने लगे तो टमाटर प्यूरी डालकर अच्छी तरह भूनें । ,अब एक कटोरी पानी डालकर उबाल आने दें । ,पनीर के टुकड़े डालें व एक - दो उबाल देकर बाकी तले मखानों से सजाकर परोसें । ,गेहूं के आटे में मोयन व नमक डालकर थोड़ा कड़ा आटा गूंथ लें । ,अब पनीर को किसनी से कस लें । ,पनीर में उपरोक्त सभी मसाले डालकर मिला लें । ,"तत्पश्चात आटे की लोई बना कर बेलें , उसके ऊपर तेल लगाकर स्ट्रीप्स में काट लें ।" ,उस पर पनीर का मिश्रण भरें और बेल लें । ,तवे पर तेल या घी लगाकर सेंक लें । ,स्वादिष्ट एवं लच्छेदार पनीर पराठे घर आए मेहमानों को पेश करें । ,सर्वप्रथम पोहे को धो लें । ,10 मिनट के लिए थोड़ा भीगने दें । ,आलू को अच्छी तरह मैश कर लें । ,"आलू में पोहे , नमक , बारिक कटी मिर्च , हरा धनिया , प्याज ( बारिक कटा हुआ ) , सौंफ , जीरा , पीसी अदरक मिलाकर अच्छी तरह गूंथ लें ।" ,मनचाहे आकार में छोटी - छोटी चपटी टिकियां बना लें । ,"अब एक थाली में खसखस फैला लें , फिर टिकिया लेकर खसखस पर दोनों तरफ से रखें , जिससे खसखस चिपक जाएगी ।" ,अब गरम तेल में हल्की सुनहरी होने तक तल लें । ,हरी चटनी के साथ गर्म - गर्म परोसें और खाने का लुत्फ उठाएं । ,सर्वप्रथम सर्विंग डिश में फेनी को हाथ से क्रश करके रखें । ,इन पर फेटा दही एवं इमली की चटनी डालें । ,ऊपर से सभी मसाले छिड़किए । ,अंत में हरा धनिया एवं अनार दानों से सजा कर तुरंत सर्व करें । ,सबसे पहले आलू को छीलकर बारीक काट लें । ,"अब कुकर में आवश्यकतानुसार पानी लेकर आलू , प्याज और थोड़ा - सा नमक डाल दीजिए ।" ,इसे कुकर बंद करके धीमी आंच पर पांच मिनट पका लें । ,कुकर ठंडा होने के बाद इस मिश्रण को मिक्सी में फेंट लें और चलनी से छान लीजिए । ,अब एक दूसरे बर्तन में आधा कप दूध को मैदे में धीरे - धीरे डालें और अच्छे से मिलाइए । ,फिर काली मिर्च और शेष बचा दूध आलू के सूप में डाल दीजिए । ,धीमी आंच पर सूप को गाढ़ा होने दें और चीज डालकर पिघलने तक चलाते रहे । ,तैयार पोटेटो - चीजी सूप को ऊपर से पार्सले से डेकोरेट करके घर आए मेहमानों को गरमा - गरम पेश करें । ,प्याज को साफ छीलकर उनके टुकड़े कर लें । ,"अब इतने पानी में थोड़ा नमक मिलाएं , जिसमें प्याज के टुकड़े अच्छी तरह से डूब जाएं ।" ,थोड़ी देर बाद उन्हें गरम होकर उबलने के लिए आंच पर रख दें । ,उबल जाने पर उन टुकड़ों को पानी से निकाल कर मिक्सी में पीस लें और छान लें । ,"इस छने हुए प्याज के रस में मक्खन , नमक , मिर्च मिला दें ।" ,आंच पर दो - तीन मिनट पुन : पका लें । ,लजीज ओनियन सॉस तैयार है । ,सबसे पहले एक कड़ाही में गुड़ पिघला लें तथा उसे थोड़ा गाढ़ा होने दें । ,फिर उसमें खोपरे का बूरा मिलाकर हल्के से भून लें । ,शाम के छः बजने वाले थे । ,दफ्तर के सभी लोग अपने - अपने घरों को जाने की जल्दी में थे । ,आकाश में आवारा बादल छा रहे थे । ,ऐसा लग रहा था कि जल्दी आंधी भी आयेगी मिस्टर राम साहब को भी घर जाने की जल्दी थी इसी बीच बेगाना एक व्यक्ति आया । ,वह राम साहब की ओर हाथ बढाते हुए बोला हेलो राम साहब कैसे हैं मैं बेगाना आबजर्वर में काम करता हूं । ,मिस्टर राम - मैंने आपको पहचाना नहीं नाम आपका क्या है । ,कैसे आना हुआ ? ,मि. ठगावतार हूं । ,मि. राम - मौसम भयावह रूप अख्तियार कर रहा है । ,ऐसे खराब मौसम में आप किसी खास वजह से आये हैं क्या ? ,मि. ठगावतार - जी । ,जीवन मरण का सवाल है । ,मि. राम - क्या ? ,मि. ठगावतार - हां । ,खून की सख्त जरूरत है । ,पैथालोजी आया था रूपये कम पड़ गये । ,पैथालोजी वाले ने मना कर दिया । ,"बगल में तो है पैथालोजी , आपका ख्याल आया और मैं सीधे आपके पास आ गया ।" ,मेरी मदद कर दीजिये । ,मिस्टर राम - मदद के लिये मेरे पास आये हैं तो बोलिये क्या मदद कर सकता हूं । ,मि. ठगावतार - कुछ रूपये की । ,मिस्टर राम - कितने रूपये की दरकार है । ,मि. ठगावतार - ज्यादा तकलीफ नहीं दूंगा बस पचहत्तर में काम चल जायेगा । ,मि. राम - लीजिये सौ रूपये और चलिये मैं छोड़ देता हूं । ,मि. ठगावतार - बस साहब इतना एहसान मत करिये कि मैं बोझ नहीं उठा सकूं । ,मि. राम - एहसान की कोई बात नहीं आदमी आदमी के काम नहीं आयेगा तो कौन आयेगा ? ,मि. ठगावतार - रहने दीजिये साहब मौसम भी अब ठीक हो गया मैं गली में से शार्ट कट रास्ते से पहुंच जाऊंगा । ,पैथालोजी में साथ आया दूसरा व्यक्ति बैठा है । ,मैं चला जाऊंगा । ,उसने जल्दी जल्दी पैर बढाना शुरू कर दिया । ,मि. ठगावतार के जाते ही उधम ने पूछा कौन था रूपये क्यों दिये ? ,मि. राम - ठगावतार था । ,बेगाना आबजर्वर से । ,मि. उधम - पहचानते हो ? ,मि. राम - नहीं । ,मि. उधम - रूपये क्यों दिये ? ,मि. राम - इंसानियत के नाते । ,मेरे तनिक से रूपयों से किसी का भला हो जाये तो क्या हर्ज है । ,मि. उधम - झूठ बोलकर रूपये ले गया है और लोगों को भी चूना लगाया होगा । ,मि. राम - उसने झूठ बोला है तो वह जाने पर हमने तो सच्चाई समझकर उसकी मदद की है । ,मि. उधम - ठग लोग नकली आंसू बहाकर रूपये ऐठने का पेशा बना लिये हैं । ,तुम्हारे ठगावतार में भी मुझे तो ऐसे लग रहा था । ,ना जाने उसके ऊपर मुझे विश्वास क्यों नहीं हो रहा है कि वह सचमुच खून लेने आया था या ठगने । ,मि. राम - बेगाना आबजर्वर में काम करता है । ,झूठ तो नहीं बोल सकता । ,उधार ले गया है ना वह भी मांग कर । ,बेचारा मुसीबत में है । ,मदद हो जायेगी पचहत्तर रूपये से तो क्या बुराई है । ,नेकी का काम तो हमने किया है । ,मि. उधम - बेगाना आबजर्वर के दफ्तर में कभी उससे मिले हो । ,मि. राम - नहीं तो । ,मि. उधम - फिर इतने यकीन के साथ कैसे कह रहे हो कि वह ठग नहीं था । ,मि. राम - उसकी याचना को देखकर तो कोई भी आदमी कह सकता था । ,"मि. उधम - जो दिखता है वह होता नहीं , होता है वह दिखता नहीं ।" ,तुम्हारे पचहत्तर रूपये तो गये । ,देने से पहले बेगाना आबजर्वर के दफ्तर में फोन लगा लेते । ,दूध का दूध पानी का पानी हो जाता । ,मि. राम - तुम भी तो यह कर सकते थे । ,"खैर छोड़ो , पचहत्तर रूपये से न वह राजा हो जायेगा और न मैं रंक ।" ,मि. उधम - बात राजा रंक की नहीं है । ,इस तरह से ठगी का कारोबार बढेगा । ,कल वह किसी दूसरे के पास जाकर तुम्हारा नाम लेकर रूपये उगाह सकता है । ,वह झूठा तो था । ,मैं रूपये नहीं देने देता मुझे पता होता कि तुम उसको नहीं जानते हो । ,हो सकता है वह अब किसी दूसरे दफ्तर में पहुंच गया हो खून लेने का बहाना लेकर ठग । ,मि. राम - चिन्ता ना करो रास्ते में बेगाना आबजर्वर का दफ्तर है किसी दिन जाकर पता लगा लेंगे कि सच्चाई क्या है ? ,मि. उधम - तुम्हारे खिस्से से चले गये पचहत्तर रूपये । ,"मि. राम - हां , ले तो गया ।" ,मि. उधम - राम साहब ठगों से सावधान रहा करो । ,मि. राम - किसी का दर्द नहीं देखा जाता । ,जहां तक हो सकता है मदद कर देता हूं । ,मि. उधम - ठग तो नाजायज फायदा उठा लेते हैं । ,दान - धर्म से बचो । ,अपने घर - परिवार का ध्यान रखा करो । ,मि. राम - नसीहत याद रखूंगा । ,चलो घर चलें काफी देर हो गयी । ,मि. राम और उधम अपने - अपने घर चल पड़ें । ,दफ्तर में ताला लटकाते हुए रहीस चपरासी बोला - क्या साहब घण्टे भर का टेम खोटा कर दिये । ,ना जाने किस बतकुचन में लगे रहें । ,सब लोग चले गये आप लोग बैठे रहे । ,आप लोगो की वजह से मैं लेट हो गया । ,मि. राम - दफ्तर बन्द करने का समय तो अब हुआ है । ,रहीस - अब बतकुचन बन्द करो । ,रास्ता नापो मुझे भी जाने दो । ,मि. राम - ठीक है । ,तुमको जरूरी है पहले तुम नापो । ,मि. उधम - बाप रे चपरासी है या कोई तोप । ,मि. राम - तोप ही है । ,जब सिर पर बड़ा हाथ होता है तो गीदड़ भी शेर बन जाता है । ,वही हाल इस चपरासी का भी है । ,चलो हम भी रास्ता नाप लेते हैं । ,मि. उधम - चलो मि. राम हां एक बात याद रखना । ,मि. राम - कौन सी बात ? ,मि. उधम - आंख मूंद कर हर किसी पर यकीन मत किया करो । ,मि. राम - तुम्हारी सलाह पर अमल करने की कोशिश करूंगा । ,महीने भर बाद मि. उधम पूछे - क्यों राम साहब आपका मित्र वापस लौटा क्या ? ,मि. राम - किस मित्र की बात कर रहे हैं । ,मि. उधम - अरे वही जो सौ रूपये लेकर गया था खून लेने के नाम पर । ,मि. राम - दे जायेगा । ,बेचारे का बेटा हास्पिटलाइज्ड था । ,लेने दे ले गया होगा । ,सौ रूपये की तो बात है जब उसकी मर्जी होगी दे जायेगा । ,उसके बच्चे की तबियत ठीक हो गयी हो । ,मेरी तो यही दुआ है । ,मि. उधम - ठीक है एक दिन बेगाना आबजर्वर के दफ्तर जाकर पता तो लगाओ । ,पिछले साल भी तो तुम्हारा पण्डित दोस्त भी तो तुमसे हजार रूपया ठग लिया था मकान की किस्त चुकाने के लिये वह भी आज तक नहीं दिया ना । ,वह भी तो उधार ही ले गया था । ,बेगाना के दफ्तर जाकर पता तो लगाओ सच्चाई क्या है ? ,मि. राम - ठीक है आज शाम घर जाते समय चला जाऊंगा कह रहे हो तो । ,वैसे तगादा करने का मेरा कोई इरादा नहीं है । ,मि. उधम - ठीक है कर्णमहाराज तगादा मत करना । ,बच्चे का हालचाल पूछ लेना । ,मि. राम - चला जाऊंगा । ,मि. राम दफ्तर से घर जाते समय मि. ठगावातार से मिलने अखबार के दफ्तर पहुंचा । ,वहां रिसेप्शन पर नाम पूछा तो पता चला कि इस नाम का कोई आदमी काम नहीं करता इस अखबार के दफ्तर में । ,यह सुनकर मि. राम को असलियत का पता तो चल गया पर वह ठगावतार के हुलिये के आधार पर उसकी तहकीकात करने लगा । ,रिसेप्शन पर बैठी मैडम खिसिया कर बोली - सर यहां पर इस नाम का और इस हुलिये का कोई आदमी काम नहीं करता । ,मि. राम - बहनजी उसका बेटा बहुत बीमार था । ,हास्पिटलाइज्ड था । ,खून लेने गया था । ,पैसे कम पड़ गये थे । ,मेरे दफ्तर में महीने भर पहले आया था । ,मैडम - आपसे रूपया लेकर गया । ,मि. राम - हां । ,मैडम - सर इस दफ्तर में काम करने वाले किसी भी कर्मचारी का पिछले कई महीनों से कोई भी बच्चा हास्पिटलाइज्ड नहीं हुआ है । ,आप खून की जरूरत की बात कर रहे हैं । ,मैं तो कह रही हूं ओ. आर. एस. की जरूरत नहीं पड़ी है । ,मि. राम - सॉरी बहन जी । ,मैडम - नाट मेन्शन प्लीज । ,लेकिन वह आदमी मेरे अखबार का नाम लेकर आपसे रूपये क्यों ऐठा । ,कहीं आपको पहचानता तो नहीं था और आप उसको नहीं पहचानते हो । ,मि. राम - ऐसा ही समझिये । ,मैडम - मतलब मैं भी अब आपको पहचान चुकी हूं । ,मि. राम - वो कैसे ? ,मैडम - रचना के साथ फोटो भी तो पिछले अंक में छपी थी । ,मि. राम - सम्भवतः कहते हुए दफ्तर से बाहर निकल गया । ,कई महीनों के बाद ठगावतार मालवा मिल के भीड़ भरे बाजार में दिखाई पड़ गया । ,मि. राम स्कूटर दीवाल के सहारे टिकाकर मि. ठगावतार की ओर लपका । ,मि. ठगावतार मि. राम को नहीं देख पाया था । ,वह किसी से बातें कर रहा था । ,मि. राम एकाएक उसके सामने खड़ा हो गया । ,मि. राम को देखकर वह भौचक्का रह गया । ,मि. राम पूछा - क्यों भाई ठगावतार जी कैसे हो ? ,मि. ठगावतार - ठीक हूं । ,मि. राम - बच्चे की तबियत कैसी है ? ,मि. ठगावतार - कौन बच्चा ? ,मि. राम - जिसके लिये खून लेने गये थे । ,"मि. ठगावतार - अच्छा वो तो मर गया , कहते हुए वह चकमा देकर भीड़ में खो गया वैसे ही जैसे पुलिस किसी चोर के पीछे पड़ी हो और चोर पकड में ना आये ।" ,मि. राम के सामने ठगावतार की असलियत जाहिर हो चुकी थी । ,उसने माथा ठोक तो लिया पर परहित की राह पर सदा कदम फूंक - फूंक कर रखता रहा ताकि सपनों की बारात का जनाजा न निकल जाये । ,सीतामढ़ी पटना से 133 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । ,देवघर एवं दुमका जिले के पर्यटन स्थल - ,देवघर के संथाल परगना क्षेत्र में अवस्थित देवघर शहर अपनी नैसर्गिक सुंदरता और धार्मिक स्थलों के कारण एक अलग स्थान रखता है । ,शांति और भाईचारे का प्रतीक यह शहर न सिर्फ धार्मिक आस्था का बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केन्द्र बिंदु भी है । ,यही कारण है कि देवघर को झारखण्ड की सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है । ,बैद्यनाथ धाम बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है । ,इस शिवलिंग को सिद्धपीठ की मान्यता प्राप्त है और कामना लिंग के रूप में प्राचीन काल से प्रसिद्ध है । ,पूरे पूर्वोत्तर भारत में यह अकेला व अनूठा है जहाँ इतने तीर्थयात्री आते हैं । ,सावन महीने में बाबाबैद्यनाथ धाम की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है । ,लाखों श्रद्धालु इस दौरान भगवान शिव का जलाभिषेक कर उनकी पूजा अर्चना करते हैं । ,लगातार एक महीने तक चलने वाले श्रावणी मेले में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं की संख्या दिन - प्रतिदिन बढ़ती जा रही है । ,इस दौरान काँवरियों के विभिन्न दल सुल्तानगंज से गंगा जल लेकर लगभग सौ किलोमीटर की कठिन यात्रा पैदल तय कर बैद्यनाथ धाम के मंदिर में पहुँचते हैं और बाबा भोलेनाथ को जल अर्पित करते हैं । ,इस मेले के दौरान सुल्तानगंज से देवघर तक की छटा ही निराली होती है । ,"ऐसा प्रतीत होता है मानो गेरूआ केसरियाधारी , बोलबम और जय भोलेनाथ के उद्‌घोष से गूँज उठता है ।" ,इस मेले की सबसे बड़ी विशेषता अनेकता में एकता का संगम है । ,काँवरियों के दल के बीच किसी तरह का भेद - भाव नहीं होता । sg,"विभिन्न प्रांतों और समुदायों के लोग जिस प्रकार एकसाथ इस धार्मिक यात्रा की दूरी तय करते हैं , वह भारतीय संस्कृति के सामाजिक समरसता को दर्शाता है ।" sg,गंगाधाम से बाबाधाम तक की पवित्र यात्रा ज्यादातर श्रद्धालु पैदल ही तय करते हैं । ,त्रिकुटी पहाड़ियाँ देवघर शहर के पश्चिम में 24 किलोमीटर की दूरी में अवस्थित है । ,ऐसी मान्यता है कि ऋषि - मुनियों ने यहाँ मोक्ष प्राप्त किया । ,बड़े - बड़े पत्थरों से भरे इस पहाड़ी की दाहिनी ओर देवी पार्वती का एक छोटा मंदिर है और इस मंदिर में एक शिवलिंग भी अवस्थित है । ,श्रद्धालु यहाँ देवी पार्वती और भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं । ,महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में दूर - दूर के दर्शनार्थियों की भीड़ लगी रहती है । ,देवघर से 43 कि.मी. की दूरी पर अवस्थित बाबा बासुकीनाथ धाम में भगवान शिव का मंदिर है । sg,देवघर आनेवाले श्रद्धालु आस्था अनुरुप बासुकीनाथ में अपनी यात्रा समाप्त करते हैं । ,रिखिया धाम भी देवघर का दर्शनीय स्थल है । ,योग ग्राम जीवन का अनूठा संगम है रिखिया धाम । ,रिखिया धाम देवघर से 10 कि.मी. की दूरी पर है । ,यहाँ स्वामी सत्यानंद सरस्वती के दर्शन होंगे । ,"गाँव के बच्चों के कंठ से गायत्री मंत्र व रामचरित मानस का पाठ सुनेंगे , तो अभिभूत हो जायेंगे ।" ,तारापीठ एक शक्तिपीठ है । ,"माँ तारा का अलौकिक रूप देखना हो , तो तारापीठ जायें और मन से माँ की पूजा करें ।" ,दुमका से कई बसें यहाँ के लिए हैं । ,तारापीठ का निकटतम स्टेशन रामपुर हाट है । ,रामपुर हाट झारखण्ड में पड़ता है । ,तारापीठ बंगाल में है । ,नौलखा मंदिर के निर्माण में नौ लाख रूपये खर्च हुए थे । ,नौलखा मंदिर बहुत ही खूबसूरत राधा - कृष्ण की युगल मूर्तियों वाला मंदिर है । ,नौलखा मंदिर में एक सुंदर बाग है । ,इसके समस्त खर्च का वहन चारूशीला देवी ने किया है । ,श्री अनुकूलचंद्र ठाकुर के शिष्यों द्वारा स्थापित यह सत्संग भवन एक आध्यात्मिक स्थल है । ,यहाँ उनके शिष्यों का एवं अन्य दर्शनार्थियों का ताँता लगा रहता है । ,सत्संग आश्रम की स्थापना श्री ठाकुर अनुकूल चन्द्र द्वारा की गई थी । ,मसानजोरी एक गाँव है जो मयूराक्षी नदी पर बने कनाडा डैम के कारण प्रसिद्ध है । ,"मसानजोरी में पर्यटक डैम की अद्‌भुत बनावट व खूबसूरती को निहारने , जंगल व पहाड़ियों के बीच यात्रा का लुत्फ़ उठाने आते हैं ।" ,"एक तरफ मसानजोर गाँव के निवासियों का बेहद साधारण जीवनस्तर है , तो दूसरी तरफ अत्याधुनिक निर्माण की बानगी पेश करता कनाडा डैम है ।" ,"त्रिकूटांचल आश्रम त्रिकूट पर्वत पर , देवघर से 24 कि.मी. पूरब में , गुफा के भीतर अवस्थित है जिसमें आचार्य रहते हैं ।" ,अरूणांचल मिशन का उद्देश्य है वैश्विक आध्यात्मिक पुनरूत्थान और विश्वशांति एवं भाईचारा की स्थापना करना । ,त्रिकूट पर्वत तीन शिखरों के कारण जाना जाता है । ,यहाँ पार्वती का मंदिर है जिसके पास ही शिवलिंग भी स्थापित है । ,खसरा ,"खसरा श्वसन प्रणाली में वायरस , विशेष रूप से "" मोर्बिली वायरस "" के जीन्स पैरामिक्सो वायरस के संक्रमण से होता है ।" ,"मोर्बिली वायरस भी अन्य पैरामिक्सो वायरसों की तरह ही एकल असहाय , नकारात्मक भावना वाले आरएनए वायरसों द्वारा घिरे होते हैं ।" ,"इसके लक्षणों में बुखार , खांसी , बहती हुई नाक , लाल आंखें और एक सामान्यीकृत मेकुलोपापुलर एरीथेमाटस चकते भी शामिल हैं ।" ,"खसरा ( कभी - कभी यह अंग्रेज़ी नाम मीज़ल्स से भी जाना जाता है ) श्वसन के माध्यम से फैलता है ( संक्रमित व्यक्ति के मुंह और नाक से बहते द्रव के सीधे या वायुविलय के माध्यम से संपर्क में आने से ) और बहुत संक्रामक है तथा 90 % लोग जिनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता नहीं है और जो संक्रमित व्यक्ति के साथ एक ही घर में रहते हैं , वे इसके शिकार हो सकते हैं ।" ,"यह संक्रमण औसतन 14 दिनों ( 6 - 19 दिनों तक ) तक प्रभावी रहता है और 2 - 4 दिन पहले से दाने निकलने की शुरुआत हो जाती है , अगले 2 - 5 दिनों तक संक्रमित रहता है ( अर्थात् कुल मिलाकर 4 - 9 दिनों तक संक्रमण रहता है ) ।" ,"अंग्रेजी बोलने वाले देशों में खसरा का एक वैकल्पिक नाम "" रुबेओला "" है , जिसे अक्सर "" रुबेला "" ( जर्मन खसरा ) के साथ जोड़ा जाता है ; हालांकि दोनों रोगों में कोई संबंध नहीं हैं ।" ,"खसरा के खास लक्षणों में चार दिन का बुखार , तीनों "" सी "" - कफ ( खांसी ) , कोरिज़ा ( बहती हुई नाक ) और नेत्रश्लेष्मलाशोथ ( लाल आंखें ) शामिल हैं ।" ,बुखार 40 °C ( 104 °F ) तक पहुंच सकता है । ,"खसरा के समय मुंह के अंदर दिखाई देने वाले "" कॉपलिक धब्बे "" रोगनिदानात्मक हैं , लेकिन अक्सर ये दिखाई नहीं देते हैं , यहां तक कि खसरा के असली मामलों में भी , क्योंकि वे क्षणिक होते हैं और उत्पन्न होने के एक दिन के भीतर ही गायब हो जाते हैं ।" pl,"खसरा के दाने , खास तौर पर व्यापक मेकुलोपापुलर , एरीथेमेटस दानों के रूप में वर्णित किये जाते हैं , जो बुखार होने के कई दिनों के बाद शुरू होते हैं ।" ,"यह सिर से शुरू होता है और बाद में पूरे शरीर में फैल जाता है , इससे अक्सर खुजली होती है ।" ,"इस दाने को "" दाग़ "" कहा जाता है , जो गायब होने से पहले , लाल रंग से बदलकर गहरे भूरे रंग का हो जाता है ।" ,"खसरा की जटिलताएं अपेक्षाकृत साधारण ही हैं , जिसमें हल्के और कम गंभीर दस्त से लेकर , निमोनिया और मस्तिष्ककोप , ( अर्धजीर्ण कठिन संपूर्ण मस्तिष्‍क शोथ ) , कनीनिका व्रणोत्पत्ति और फिर उसकी वजह से कनीनिका में घाव के निशान रह जाने के खतरे हैं ।" ,आमतौर पर जटिलताएं वयस्कों में ज्यादा होती हैं जो वायरस के शिकार हो जाते हैं । ,विकसित देशों में स्वस्थ लोगों में खसरा की वजह से मौत की दर प्रति हज़ार में तीन मौतें या 0.3 % है । ,अविकसित देशों में कुपोषण और बुरी स्वास्थ्य सेवा की अधिकता की वजह से मृत्यु दर 28 % की ऊंचाई तक पहुंच गयी है । ,"प्रतिरक्षा में अक्षम मरीज़ों में ( "" उदाहरण "" के रूप में एड्स पीड़ित लोगों में ) मृत्यु दर लगभग 30 % है ।" ,खसरा के रोगियों को सांस लेने की सुविधाओं के साथ रखा जाना चाहिए । ,"केवल मनुष्य ही खसरा के ज्ञात पोषक हैं , हालांकि यह वायरस गैर मानव पशु प्रजातियों को भी संक्रमित कर सकता है ।" ,"खसरा के रोग का निदान करने के लिए कम से कम तीन दिन के बुखार के साथ ही तीन "" सी ( खांसी , सर्दी - जुकाम , नेत्रश्लेष्मलाशोथ ) "" ( कफ , कोरिज़ा , कंजंक्टीवाइटिस ) में से एक का होना अति आवश्यक है ।" ,""" कोप्लिक्स के दाग के निरीक्षण से भी खसरा का निदान हो सकता है । """ sg,"वैकल्पिक रूप से , खसरा का प्रयोगशाला निदान श्वसन के नमूनों से खसरा के सकारात्मक आईजीएम प्रतिपिण्डों या खसरा के वायरस आरएनए के अलगाव की पुष्टि होने से किया जा सकता है ।" sg,"बच्चों में जहां शिराछेदन अनुपयुक्त होता है , वहां विशिष्ट आइजीए जांच के लिए लारमय खसरा की लार को इकट्ठा किया जा सकता है ।" ,खसरा के अन्य रोगियों के साथ सकारात्मक संपर्क में आना महामारी विज्ञान में मजबूत प्रमाण जोड़ सकते हैं । ,"संक्रमित व्यक्ति के साथ सेक्स के माध्यम से वीर्य , लार या बलगम सहित , किसी भी तरह का कोई भी संपर्क संक्रमण पैदा कर सकता है ।" ,"विकसित देशों में अधिकतर बच्चों को 18 महीने की आयु तक साधारण तौर पर त्रि - स्तरीय एमएमआर वैक्सीन ( खसरा , कण्ठमाला और रुबेओला ) के भाग के रूप में खसरा के खिलाफ प्रतिरक्षित कर दिया जाता है ।" sg,इससे पहले आमतौर पर 18 महीने से छोटे बच्चों को यह टीका नहीं दिया जाता है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान मां के शरीर से इनके अंदर खसरा विरोधी प्रतिरक्षक - ग्लॉब्युलिन ( प्राकृतिक प्रतिरक्षी ) संचारित हो जाते हैं । sg,रोगक्षमता की दरों को बढ़ाने के लिए आमतौर पर चार और पांच साल के बच्चों को दूसरी खुराक दी जाती है । pl,खसरा को अपेक्षाकृत असामान्य बनाने के लिए ही टीकाकरण की दरों को काफी बढ़ा दिया गया था । ,"यहां तक कि कॉलेज के छात्रावास या इसी तरह के समायोजन में अक्सर स्थानीय टीकाकरण कार्यक्रम में ऐसा एक मामला उजागर होता है , यदि ऐसे लोगों में से किसी एक की पहले से प्रतिरक्षा नहीं हुई हो ।" ,"विकासशील देशों में जहां खसरा उच्च स्थानिक है , वहां डब्ल्यूएचओ ने छह महीने और नौ महीने की उम्र में टीके की दो खुराक देने का सुझाव दिया है ।" ,बच्चा एचआईवी संक्रमित हो या नहीं उसे टीका दिया जाना चाहिए । ,"एचआईवी संक्रमित शिशुओं में टीका कम प्रभावी है , लेकिन प्रतिकूल प्रतिक्रिया के जोखिम कम हैं ।" ,टीका नहीं लिये होने पर आबादी को रोग का खतरा रहता है । ,2000 के प्रारंभ में उत्तरी नाइज़ीरिया में धार्मिक और राजनीतिक आपत्तियों के कारण टीकाकरण की दरों में गिरावट आयी और तेजी से मामलों में इजाफा हुआ और सैकड़ों बच्चों की मौत हो गयी । ,1998 में संयुक्त राज्य में एमएमआर टीका विवाद में ,"एमएमआर के संयुक्त टीके ( बच्चों को मम्प्स , मीज़ल्स और रुबेओला का टीकाकरण दिया जा रहा था ) और स्वलीनता ( ऑटिज़्म ) में संभावित कड़ी होने के बाद भी "" खसरा पार्टी "" में इज़ाफा हुआ ।" ,जहां माता - पिता ने अपने बच्चों को जानबूझकर इंजेक्शन न दिलाकर मीज़ल्स होने दिया । ,इस उम्मीद पर कि ऐसा करने से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जायेगी । ,"इस अभ्यास से बच्चों में कई जानलेवा बीमारियां पैदा हो गयीं , इसी वजह से सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने ऐसा करने से रोका ।" ,वैज्ञानिक सबूत इस परिकल्पना का समर्थन बिल्कुल नहीं करते हैं कि स्वलीनता ( ऑटिज़्म ) में एमएमआर की कोई भूमिका है । ,"2009 में , "" संडे टाइम्स "" की रिपोर्ट में कहा गया कि वेकफील्ड ने 1998 में अपने अखबारों में रोगियों की संख्या में हेरफेर किया और गलत परिणाम दिखाते हुए स्वलीनता के साथ संबंध दर्शाया था ।" sg,""" द लान्सेट "" ने 2 फ़रवरी 2010 को 1998 के अखबार को झुठला दिया ।" ,"जनवरी 2010 में , शिष्ट बच्चों के एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि खसरा , कण्ठमाला और रूबेला जैसे रोग के लिए टीकाकरण ऑटिस्टिक ( स्वलीनता ) के विकार को बढ़ावा देने का जोखिम कारक नहीं था , बल्कि जिन मरीजों ने टीका लगवा लिया था उन मरीजों में ऑटिस्टिक के विकार पैदा होने का खतरा थोड़ा कम था , हालांकि इसके पीछे के तंत्र की वास्तविक कार्रवाई अज्ञात है और यह परिणाम संयोग हो सकता है ।" ,ब्रिटेन में ऑटिज़्म से संबंधित एमएमआर अध्ययन की वजह से टीकाकरण के प्रयोग में तेजी से कमी आयी और फिर से खसरा के मामलों की वापसी हुई । pl,"2007 में वेल्स और इंग्लैंड में खसरा के 971 मामले सामने आये , जो अब तक के खसरा के मामलों में सबसे ज्यादा वृद्धि दर्शाता है , जबकि 1995 में खसरा के रिकार्ड रखने की शुरूआत की गयी थी ।" ,2005 में इंडियाना में खसरा का प्रकोप उन बच्चों पर पड़ा जिनके मां - बाप ने टीकाकरण से इंकार कर दिया था । ,मीज़ल्स इनिशियेटिव के सदस्यों द्वारा जारी किये गये एक संयुक्त बयान में खसरा के खिलाफ लड़ाई का एक और फायदा सामने आया । ,खसरा टीकाकरण अभियानों ने अन्य कारणों से हो रही बच्चों की मौतों में कमी करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है । ,"वे अन्य जीवन रक्षक उपायों - जैसे कि मलेरिया से बचने के लिए मच्छरदानी , कीड़े मारने वाली दवा और विटामिन ए जैसी परिपूरक दवाओं का वितरण करने वाला जरिया बन गये हैं ।" ,खसरा टीकाकरण को अन्य स्वास्थ्य हस्तक्षेपों से मिलाना मिलेनियम डेवलप्मेंट गोल संख्या 4 ( सहस्राब्दि विकास लक्ष्य ) की उपलब्धि में एक महत्वपूर्ण योगदान है । ,1990 से 2015 तक बच्चों की मौत में दो तिहाई कटौती करना । ,चन्द्रगिरी एवं चिंगीतराई में पुरातात्विक महत्व के अवशेष प्राप्त होते हैं । ,जगदलपुर से 30 किलोमीटर की दूरी पर विश्व प्रसिद्ध कोटमसर की प्राकृतिक गुफाएँ स्थित हैं । ,विश्व की सबसे लम्बी इस गुफा की लंबाई 4500 मीटर है । ,चूनापत्थर के घुलने से बनी ये गुफाएँ चूनापत्थर के जमने से बनी संरचनाओं के कारण प्रसिद्ध है । ,"चूनापत्थर के जमाव के कारण स्टलेगटाइट , स्टलेगमाइट एवं ड्रपिस्टोन जैसी संरचनायें बन जाती हैं ।" ,"छत पर लटकते झूमर स्टलेगटाइट , जमीन से ऊपर जाते स्तंभ स्टलेगमाइट एवं छत एवं जमीन से मिले बड़े बड़े स्तंभ ड्रपिस्टोन कहलाते हैं ।" ,डॉ. शंकर तिवारी ने प्रथम बार इस गुफा का वर्णन किया था । ,इस गुफा में छोटे छोटे पोखर स्थित हैं । ,गुफाओं में पायी जाने वाली छोटी छोटी मछलियों की आँखें नहीं पायी जातीं । ,सदियों से अंधेरे में रहने के कारण इनकी आँखों की उपयोगिता खत्म हो गई । ,अब ये मछलियाँ जन्म से ही अंधी पैदा होती हैं । ,यह डार्विन के सिद्धांत की पुष्टि करती है । ,कोटमसर से 16 किलोमीटर की दूरी पर कैलाश गुफा स्थित है । ,इसके बड़े बड़े हॉल किसी राजा के दरबार सा भान देते हैं । ,चूनापत्थर की आकृतियाँ शिवलिंग के समान जान पड़ती हैं । ,इसलिये इस गुफा का धार्मिक महत्व भी है । ,कैलाश गुफा में महाशिवरात्रि के दिन भक्तों का तांता लगा रहता है । ,कैलाश गुफा 50 मीटर की ऊँचाई पर तथा 2500 मीटर लम्बी है । ,दण्डक गुफा कोटमसर से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । sg,"दण्डक गुफा में भी कोटमसर गुफा के समान ही स्टलेगटाइट , स्टलेगमाइट एवं ड्रपिस्टोन जैसी संरचनायें भव्य स्वरूप प्रदान करती है ।" pl,कांगेर घाटी से लगी अरण्यक गुफा में जाधरा झांपी और मकर कक्ष की अवशैल संरचनाएँ देखते ही बनती हैं । ,रायपुर से जगदलपुर आते समय बस्तर जिले का स्वागत करने कांकेर की विशाल पहाड़ियाँ तत्पर दिखाई देती हैं । ,कांकेर से 22 किलोमीटर आगे शुरू होती है केशकाल की मनोरम घाटी । ,हेयर पिन मोड़ लिये हुये यह मनोरम घाटी पर्यटकों का मन मोह लेती है । ,केशकाल घाटी के अंत में शुरू होता है दण्डकारण्य का पठार । ,पंचवटी के विश्रामगृह एवं वाचिंग टावर से केशकाल घाट का मनोरम दृश्य दिखाई पड़ता है । ,एकाएक तो यह एहसास ही नहीं होता कि हम मैदानी क्षेत्र के दृश्यों को देख रहे हैं । ,दूर दूर तक पर्वत मालाएँ फैली हैं । ,"हरी चादर में लिपटी सुन्दर वसुन्धरा , बादलों के पर्वतों से टकराते झुण्ड हमें मानों हिमालय पर्वत सा एहसास कराते हैं ।" ,बस्तर की वास्तविक सीमा यहीं से शुरू होती है । ,बस्तर के सदर मुकाम जगदलपुर से 105 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बारसूर तक पहुँचने के लिये गीदम से होकर जाना पड़ता है । ,बारसूर गीदम से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । ,यहाँ गणेश जी की विशाल मूर्ति है । ,बारसूर नाग राजाओं एवं काकतीय शासकों की राजधानी रहा है । ,बारसूर ग्यारहवीं एवं बारहवीं शताब्दी के मंदिरो के लिए प्रसिद्ध है । ,बारसूर के मंदिरों में मामा - भांजा मंदिर मूलत: शिव - मंदिर है । ,मामा - भांजा मंदिर दो गर्भगृह युक्त मंदिर है । ,मामा - भांजा मंदिर के मंडप आपस में जुड़े हुये हैं । ,बारसूर के भग्न मंदिरों में मैथुनरत प्रतिमाओं का अंकन भी मिलता है । ,इतिहासकार एवं विख्यात शिक्षाविद डॉ. के. के. झा के अनुसार यह नगर प्राचीन काल में वेवश्वतपुर के नाम से जाना जाता था । ,चन्द्रादित्य मंदिर का निर्माण नाग राजा चन्द्रादित्य ने करवाया था एवं उन्हीं के नाम पर इस मंदिर को जाना जाता है । ,बत्तीस स्तंभों पर खड़े बत्तीसा मंदिर का निर्माण बलुआ पत्थर से हुआ है । ,बत्तीसा मंदिर का निर्माण गुण्डमहादेवी ने सोमेश्वर देव के शासन काल में किया । ,बत्तीसा मंदिर में शिव एवं नंदी की सुन्दर प्रतिमायें हैं । ,एक हजार साल पुराने इस बत्तीसा मंदिर को बड़े ही वैज्ञानिक तरीके से पत्थरों को व्यवस्थित कर बनाया गया है । ,ये मंदिर आरकियोलाजी विभाग द्वारा संरक्षित स्मारक हैं । ,गणेश भगवान की दो विशाल बलुआ पत्थर से बनी प्रतिमायें आश्चर्यचकित कर देती हैं । ,मामा - भांजा मंदिर शिल्प की दृष्टि से उत्कृष्ट एवं दर्शनीय है । sg,बस्तर जिले के विकास खण्ड बस्तर में जगदलपुर से करीब 80 किलोमीटर दूर छिंदक नागवंशी राजा धारावर्षा की रानी गुण्डमहादेवी द्वारा नारायणपाल के विष्णु मंदिर को ई. सन् 1111 में बनवाया गया । ,गुण्डमहादेवी का पुत्र सोमेश्वर देव एक प्रतापी राजा था । ,बाद में अधिक देर तक रहने लगता है व अन्य अंगों को भी प्रभावित करता है । ,"प्रायः एक ही ओर ( दायें या बायें ) रहता है , परन्तु अनेक मरीजों में , बाद में दोनों ओर होने लगता है ।" ,"आराम की अवस्था में जब हाथ टेबल पर या घुटने पर , जमीन या कुर्सी पर टिका हुआ हो तब यह कम्पन दिखाई पड़ता है ।" ,"बारिक सधे हुए काम करने में दिक्कत आने लगती है , जैसे कि लिखना , बटन लगाना , दाढ़ी बनाना , मूंछ के बाल काटना , सुई में धागा पिरोना ।" ,"कुछ समय बाद में , उसी ओर का पांव प्रभावित होता है ।" ,"कम्पन या उससे अधिक महत्वपूर्ण , भारीपन या धीमापन के कारण चलते समय वह पैर घिसटता है , धीरे उठता है , देर से उठता है , कम उठता है ।" ,"धीमापन , समस्त गतिविधियों में व्याप्त हो जाता है ।" ,चाल धीमी / काम धीमा । ,"शरीर की मांसपेशियों की ताकत कम नहीं होती है , लकवा नहीं होता ।" ,परन्तु सुघड़ता व फूर्ति से काम करने की क्षमता कम होती जाती है । ,हाथ पैरों में जकड़न होती है । ,मरीज को भारीपन का अहसास हो सकता है । ,परन्तु जकड़न की पहचान चिकित्सक बेहतर कर पाते हैं - जब से मरीज के हाथ पैरों को मोड कर व सीधा करके देखते हैं बहुत प्रतिरोध मिलता है । ,मरीज जानबूझ कर नहीं कर रहा होता । ,जकड़न वाला प्रतिरोध अपने आप बना रहता है । ,खड़े होते समय व चलते समय मरीज सीधा तन कर नहीं रहता । ,थोड़ा सा आगे की ओर झुक जाता है । ,घुटने व कुहनी भी थोडे मुडे रहते हैं । ,कदम छोटे होते हैं । ,पांव जमीन में घिसटते हुए आवाज करते हैं । ,कदम कम उठते हैं गिरने की प्रवृत्ति बन जाती है । ,ढलान वाली जगह पर छोटे कदम जल्दी - जल्दी उठते हैं व कभी - कभी रोकते नहीं बनता । ,"चलते समय भुजाएं स्थिर रहती हैं , आगे पीछे झूलती नहीं ।" ,"बैठे से उठने में देर लगती है , दिक्कत होती है ।" ,यह तीन रंगों का दिखेगा । ,गणतंत्र दिवस पर तैयार है स्वादिष्ट तिरंगा केक । ,"सबसे पहले पालक , मिर्च , अदरक एवं हरे धनिए को मिक्सी में पीस कर पेस्ट बना लें ।" ,अब आटे में नमक मिलाकर छानें । ,इसमें पालक पेस्ट एवं पानी मिलाकर थोड़ा - सा कड़ा आटा गूंथ लें । ,तत्पश्चात गूंथे आटे की लोइयां बनाकर पूरियां बेलें एवं गरम तेल में कुरकुरी तल लें । ,"तैयार कुरकुरी एवं लजीज पालक पूरी को हरी चटनी , नींबू का अचार , अथवा गरमा - गरम कढ़ी के साथ सर्व करें ।" ,गाजर को छीलकर घिस लें । ,दही को अच्छी तरह से मथ लें । ,"इसमें सेंधा नमक , काली मिर्च , शक्कर डालकर अच्छी तरह मिलाएं ।" ,गाजर को हाथ से दबा कर निचोड़ लें और दही में मिला दें । ,"अब इसमें किशमिश , अदरक और हरी मिर्च का पेस्ट मिला कर हिलाएं ।" ,हरे धनिए और भुने जीरे से सजाकर गरमा - गरम आलू के पराठों के साथ पेश करें । ,बनाने से पूर्व रात्रि में मूंग दाल की चूरी को धोकर पानी में भिगो दें । ,सुबह उसका पानी निथार लें । ,अब आटे में बेसन एवं सभी मसाले अच्छी तरह मिला लें । ,इसमें दाल की चूरी एवं थोड़ा - सा तेल का मोयन डालकर अच्छी तरह मिक्स कर लें । ,अब आवश्यकतानुसार पानी लेकर आटा गूंथ लें । ,तत्पश्चात गूंधे आटे को गीले कपड़े से आधा घंटा दबाकर रखें । ,फिर इसकी लोइयां बनाकर पूरी बेलें एवं गर्म तेल में सुनहरी भूरी तल लें । ,"स्वादिष्ट मूंग छिल्का पूरी को अचार , रायता या कढ़ी के साथ सर्व करें ।" ,हरे धनिए के डंठल साफ करके नरम - नरम डंडी वाला धनिया बारीक काट कर अच्छी तरह धो लें । ,लहसुन छील लें । ,उपरोक्त सभी सामग्री को मिलाकर मिक्सी में चटनी पीस लें । ,तपश्चात इसमें नींबू निचोड़ दें । ,गुड़ - लहसुन की स्वादिष्ट चटनी गरमा - गरम भोजन के साथ सर्व करें । ,सोयाबीन को सबसे पहले 10 - 15 मिनट पानी में भिगो दें । ,"अब कटे पालक , लहसुन , हरा धनिया , मिर्च , मूंग दाल , ब्रेड तथा जीरा , नमक , चाट मसाला और भीगे हुए सोयाबीन को एक साथ मिलाकर छोटे - छोटे चपटे ( टिकिया की तरह ) गोले बना लें ।" ,"तत्पश्चात एक पैन में हल्का - सा तेल लगाकर गर्म करें , फिर तैयार गोलों को उलट - पलट कर सुनहरा होने तक तल लें ।" ,हरे धनिए की चटनी के साथ गरमा - गरम चटपटे हरियाले कबाब का मजा उठाएं । ,"सबसे पहले चावल , उड़द दाल और चना दाल को रात भर पानी में भिगो कर रखें ।" ,"फिर उसमें नमक मिलाकर अच्छे से पीस लें , आपका मिश्रण पकौड़े के पेस्ट समान होना चाहिए ।" ,"अब तवे पर एक छोटा चम्मच तेल फैला कर गर्म कर लें , फिर बड़े चम्मच की सहायता से एक चम्मच पेस्ट को धीरे - धीरे पूरे तवे पर फैला दें ।" ,ऊपर से चिली फ्लेक्स और चीज को ग्रेट कर दें । ,नीचे की ओर से डोसा कुरकुरा होने पर पलटे से हल्के से धीरे - धीरे डोसे को लपेट लें । ,"अब तैयार चीज चिली डोसा को नारियल की गीली चटनी , हरे धनिए की चटनी और सांभर के साथ गरमा - गरम पेश करें ।" ,बादाम व खसखस को 2 घंटे के लिए अलग - अलग पानी में भिगो दें । ,फिर बादाम छीलकर खसखस के साथ महीन पीस लें । ,अदरक को छीलकर कद्दूकस करें । ,केसर को एक बड़ा चम्मच दूध में भिगो दें । ,ताजा नारियल को कद्दूकस कर लें । ,इसमें डेढ़ कप पानी डालकर मिक्सी में पीस लें । ,छलनी में छानकर दूध अलग निकाल लें । ,एक कड़ाही में घी गरम करें । ,उसमें पिसी बादाम डाल दें । ,अदरक भूनें फिर काजू पावडर डाल दें । ,दही डालकर फ्राय करें । ,फिर नमक - मिर्च व जीरा पावडर डालें । ,थोड़ा फ्राय करके मलाई डाल दें । ,"जब मसाला अच्छी तरह भुन जाए तब मटर के दाने , नारियल का दूध व गरम मसाला डालें ।" ,यह विंडोज और ऐंड्रॉयड दोनों ऑपरेटिंग सिस्टम्स पर चलता है । ,इसमें 11.6 इंच 1080 पिक्सल स्क्रीन और एक अलग किए जा सकने वाला कीबोर्ड है । ,यूजर इसे टैबलेट या लैपटॉप की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं । ,इसे एक्सटर्नल मॉनिटर में प्लग कर डेस्कटॉप पीसी की तरह भी चलाया जा सकता है । ,ब्लैकबेरी इंडिया के नए एमडी सुनील लालवानी ने नई दिल्ली में ब्लैकबेरी Q10 लॉन्च किया । ,"गुरुवार को ब्लैकबेरी ने जब भारत में अपना क्वर्टी कीबोर्ड और बड़ी टचस्क्रीन वाला नया फोन क्यू 10 लॉन्च किया , तो सबको इंतजार उसके दाम का था ।" ,"दाम का ऐलान हुआ 44,990 रुपए , तो कई लोगों को हल्का झटका सा लगा ।" ,इतने महंगे दाम के साथ क्या लोग ब्लैकबेरी का यह फोन लेंगे । ,"कनाडा की यह कंपनी जल्द ही बीबी 10 ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाला अपना एक और हैंडसेट क्यू 5 भी लाने वाली है , जो इससे कम प्राइस रेंज में होगा , लेकिन ब्लैकबेरी ने साफ कर दिया है कि बीबी 10 वाले फोन बहुत कम दाम में नहीं आएंगे , क्योंकि उस रेंज में उसके ओएस 7 वाले कर्व सीरीज के हैंडसेट पहले से हैं ।" ,"साथ ही , ओएस 7 पर वह और नए हैंडसेट भी ला सकती है ।" ,यानी ब्लैकबेरी ने भारतीय और उभरते हुए बाजारों के लिए अपनी डबल रणनीति तैयार कर ली है । ,"स्मार्टफोन का एंट्री लेवल अगर 9 - 10 हजार रुपए मान लिया जाए , तो वह इसमें अपने पहले से चल रहे कर्व सीरीज पर ही फोकस करेगी ।" ,"इसी के बूते वह फिलहाल इंडोनेशिया , साउथ अफ्रीका और कुछ लैटिन अमेरिकी देशों में नंबर वन कंपनी बनी हुई है ।" ,"ब्लैकबेरी इंडिया के एमडी सुनीत लालवानी से जब पूछा गया कि क्या कंपनी फैबलेट जैसी डिवाइस भी लाएगी , तो उनका कहना था कि अभी वह इस बारे में कोई कॉमेंट नहीं कर सकते हैं , लेकिन कई नए प्रॉडक्ट लॉन्च होंगे ।" ,क्यू 10 ब्लैकबेरी का भारत में सबसे महंगा फोन है । ,"इससे पहले फरवरी में लॉन्च किया गया हैंडसेट जेड 10 का दाम 43,400 रुपए था ।" ,ब्लैकबेरी मेसेंजर का अभी भी कोई मुकाबला नहीं है । ,"इसमें हर रोज 10 अरब से ज्यादा मेसेज आज भी ट्रांसफर हो रहे हैं , जो किसी भी मेसेजिंग ऐप्लिकेशन से कम से कम दो गुना ज्यादा है ।" ,"ब्लैकबेरी को उम्मीद है कि लोग अभी भी क्वर्टी कीपैड वाला फोन पसंद करेंगे , क्योंकि इसमें टाइप करना ज्यादा आसान है ।" ,"भारतीय बाजार में सैमसंग और नोकिया के लेटेस्ट हैंडसेट्स के अलावा लेनोवो , पैनासोनिक और गूगल नेक्सस 4 जैसे नए हैंडसेट आए हैं , लेकिन जिस तरह टचस्क्रीन का फॉर्म्युला सुपरहिट हो रहा है , उसी के मद्देनजर सभी कंपनियां सिर्फ टचस्क्रीन ला रही हैं ।" ,यहां तक कि बजट रेंज के सस्ते फीचर फोन में भी नोकिया आशा और सैमसंग रेक्स के अधिकतर फोन भी टचस्क्रीन वाले हैं । ,ऐसे में कीबोर्ड पर ब्लैकबेरी का इतना बड़ा और महंगा दांव सबकी नजर में रहेगा । ,अक्सर पासवर्ड चोरी की वजह से लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है । ,पासवर्ड प्रोटेक्शन और डेटा सेफ्टी के लिए काम करने वाली फर्म स्प्लैश डेटा ने 2012 के सबसे खराब 25 पासवर्ड की लिस्ट जारी की है । ,"ये इंटरनेट पर इस्तेमाल किए जाने वाले सबसे कॉमन पासवर्ड हैं , जिन्हें हैकर्स ने चुराकर ऑनलाइन पोस्ट किया है ।" ,कंपनी के मुताबिक इन पासवर्ड को इस्तेमाल करने वाले लोगों को सबसे ज्यादा खतरा है । ,इस लिस्ट में टॉप 3 पासवर्ड पिछले साल की लिस्ट में इसी नंबर पर थे । ,"कंपनी ने सलाह दी है कि अगर इनमें से कोई पासवर्ड आपका है , तो तुरंत बदल लें ।" ,ब्लैकबेरी ने अपना नया स्मार्टफोन Q10 भारत में लॉन्च कर दिया है । ,क्वर्टी कीपैड वाला Q10 कंपनी के नए ऑपरेटिंग सिस्टम ब्लैकबेरी 10 पर चलता है । ,"इस स्मार्टफोन की कीमत 44,990 रुपए है , जो कि Z10 के 43,490 रुपए से काफी ज्यादा है ।" ,यह फोन शुक्रवार से देश के 20 शहरों में और 1000 रीटेल स्टोर्स में मिलने लगेगा । ,हमने पिछले हफ्ते ही ब्लैकबेरी Q10 के भारत में 6 जून को लॉन्च होने की खबर दी थी । ,Q10 में 720द्720 पिक्सल रिजॉल्यूशन वाली 3.1 इंच की सुपर एमोलेड टचस्क्रीन है । ,"स्क्रीन के नीचे , क्वर्टी कीपैड है , जो अब तक ब्लैकबेरी की पहचान रहा है ।" ,इसमें 1.5 गीगाहर्त्ज का ड्यूल - कोर प्रोसेसर और 2 जीबी रैम है । ,"इसमें 16 जीबी की इंटरनल स्टोरेज है , जिसे माइक्रो - एसडी कार्ड के जरिए 64 जीबी तक बढ़ाया जा सकता है ।" ,"कनेक्टिविटी ऑप्शंस में 2 जी , 3 जी , 4 जी , वाई - फाई , ब्लूटूथ 4.0 , एनएफसी और माइक्रो यूएसबी 2.0 शामिल हैं ।" ,इसमें पीछे की तरफ एलईडी फ्लैश के साथ 8 मेगापिक्सल कैमरा और आगे की तरफ 2 मेगापिक्सल कैमरा है । ,"बैटरी 2100 माह् की है , जो 10 घंटे का टॉक टाइम देती है ।" ,"सहोलिक और स्नैपडील जिंक ने अपना नया एंड्राइड , क्वाड 10.1 इंच फुल एची डिस्प्ले वाला टैबलेट शुक्रवार को लांच किया ।" ,"इसके पहले कंपनी ने तीन टैबलेट्स ड्यूल 7.0 , क्वाड 8.0 और क्वाड 9.7 लांच किया था ।" ,कंपनी के अनुसार उसका ध्यान अब सस्ते दामों पर उच्च स्तर के टैबलेट उपलब्ध कराना है । ,"इस टैबलेट की स्क्रीन टेन पॉइंट मल्टी टच स्क्रीन 1920स1200 पिक्सल वाली है , जो बहुत शानदार है ।" ,इस टैबलेट की कीमत कंपनी की वेबसाइट पर 14990 रुपए है । ,यह टैबलेट एंड्राइड 4.1 जैली बिन पर रन करता है और इसमें पॉवरफुल क्वॉड कोर 1.5 गीगाहर्ट्ज प्रोसेसर है । ,इसमें 5 मैगापिक्सल टेक्नोलॉजी कंपनी हैवलेट पेकार्ड ( एचपी ) ने गुरुवार को भारत के टैबलेट मार्केट में कदम रख लिया । ,उसने अपना पहला टैबलेट इलाइटपैड लांच किया । ,कंपनी ने यह टैबलेट सरकार और बिजनेस को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया ,हैका रियर ऑटो फोकस कैमरा 2 मैगापिक्सल का फ्रंट कैमरा जिससे वीडियो चैट की जा सकती है । ,कनेक्टिविटी के लिए सीधे डेटा ट्रांसफर के लिए वाईफाई एचडीएमआई पोर्ट माइक्रो यूएसबी । ,इस टैबलेट में 16 जीबी इंटरनल स्टोरेज कैपिसिटी है जिसे 32 जीबी तक बढ़ाया जा सकता है । ,यह मोबाइल नोकिया ईजी स्वैप टेक्नोलॉजी पर आधारित है । ,इस फोन में नोकिया ने अपने स्टोर्स से कई एप्लीकेशन डाउनलोड की सुविधा भी दी है । ,नोकिया ने ड्यूल सीरिज में अपना नया फोन नोकिया - 114 लांच किया है । ,"फेसबुक , ट्विटर जैसे सोशल नेटवर्किंग एप्लीकेशन जैसी खूबियों वाले इस फोन की कीमत सिर्फ 2549 रुपए है ।" ,मोबाइल हैंडसेट्स बनाने वाली कंपनी वीडियोकान ने दोहरे सिम वाला ए - 20 और ए - 30 स्मार्टफोन पेश किया । ,वीडियोकान समूह की कंपनी वीडियोकान मोबाइल्स ने स्मार्टफोन श्रृंखला में कदम रखते हुए दोहरे सिम वाले वीडियोकान ए - 20 और वीडियोकान ए - 30 फोन पेश किए । ,कंपनी ने इन स्मार्टफोन में नवीनतम फीचर और तकनीक का बेहतर संयोजन है । ,कंपनी ने एक बयान में कहा कि क्वालकॉम प्रोसेसर के प्लेटफार्म पर बना यह मोबाइल दोहरे सिम की स्टैंडबाई क्षमता वाला है । ,"यह टचस्क्रीन , 1350 एमएएस बैटरी एवं 3 मेगापिक्सल की खूबियों से युक्त है और स्मार्टफोन तलाशने वाले ग्राहकों के लिए भरोसेमंद विकल्प है ।" ,"कंपनी के वीडियोकॉन ए - 20 की कीमत 4,999 रुपए NULL , जबकि वीडियोकॉन ए - 30 की कीमत 7,299 रुपए है ।" ,"वीडियोकॉन मोबाइल फोन्स के प्रमुख ( उत्पाद योजना एवं विकास ) खालिद जमीर ने कहा कि समय के साथ चलने के लिए स्मार्ट होना बेहद आवश्यक है , इसलिए हमने ग्राहकों के लिए विशेष रूप से किफायती कीमत में स्मार्टफोन की श्रृंखला पेश की है ।" ,हमने इसकी कीमत को किफायती रखकर वीडियोकॉन मोबाइल का बाजार मांग बढ़ाने का प्रयास किया है । ,उल्लेखनीय है कि पांच अरब डॉलर मूल्य के वीडियोकॉन समूह की कंपनी वीडियोकॉन मोबाइल के पास देश में स्वयं का वितरण नेटवर्क है । ,इसके शुरुआती वर्जन में इसकी मैमरी 32 जीबी की रहेगी । ,इस टैबलेट की कीमत 499 डॉलर रहेगी । ,सरफेस की 10.6 इंच की स्क्रीन दूसरे टैबलेट्स से 0.5 इंच और आईपॉड्स की स्क्रीन से 0.9 इंच बढ़ी है । ,"इसका रिज्ल्यूशन 1,366द्768 पिक्सल का है ।" ,"678 ग्राम वजनी इस टैबलेट में माइक्रोसॉफ्ट ने यूनीक फीचर्स जोड़े हैं , जो इसे आईपैड से अलग बनाते हैं ।" ,दिखने में ये टैबलेट्स काफी पतला है । ,इसके स्क्रीन कवर का की - बोर्ड की तरह उपयोग किया जा सकता है । ,माइक्रोसॉफ्ट इसके दो मॉडल बाजार में उतारेगी । ,यह माइक्रोसॉफ्ट का पहला हार्डवेयर डिवाइस है । ,बैक पैनल में दिए स्टैंड से इसे खड़ा भी किया जा सकता है । ,एप्पल भी अपने गैजेट आईपैड का छोटा संस्करण आईपैड मिनी लांच करने जा रही है । ,मिनी आइपैड अमेजन के किंडल फायर और गूगल के नेक्सस 7 से भी टक्कर लेगा । ,सूत्रों की मानें तो एप्पल यह आईपैड 23 अक्टूबर को लांच करेगा और 2 नवंबर से गैजेट प्रेमियों के लिए बाजार में आ जाएगा । ,आईपैड मिनी की स्क्रीन 7.85 इंच की होगी । ,इसका आकार आईफोन 5 से बड़ा होगा । ,ज्यादा आईपैड 10 इंच की स्क्रीन वाले रहते हैं । ,मिनी साइज में पोर्टेबल टच स्क्रीन इसकी खासियतों में से एक होगी । ,एप्पल अपने गैजेट्स में शानदार ऐप से यूजर्स की पसंद रहता है । ,वह अन्य कंपनियों से बेहतरीन ऐप्स और टोन के मामले में अन्य कंपनियों से आगे है । ,आईपैड मिनी में भी शानदार ऐप और टोन यूजर्स को लुभाएंगे मिनी आईपैड में एंड्रायड टैबलेट के मुकाबले बढ़िया फीचर्स रहेंगे । ,एप्पल यूजर्स को लुभाने के लिए इसमें फ्रंट और रियर दोनों तरफ के कैमरे का फीचर्स दे सकता है । ,जो मिनी आईपैड का बेहतरीन फीचर हो सकता है । ,कीमत - ,एप्पल के अन्य प्रोडक्ट के मुकाबले आईपैड मिनी आम आदमी को लुभाएगा । ,एप्पल के अन्य गैजेट्स की अपेक्षा इसकी कीमत कम होगी । ,इससे यह लोगों की पंसद बन सकता है । ,आईपैड मिनी में ऑपरेटिंग सिस्टम आईओएस का नया वर्जन आईओएस 6 होने की उम्मीद जताई जा रही है । ,इससे यूजर्स को एंड्रायड से अलग ऑप्शन मिल सकता है । ,उनके लिए यह एक नया अनुभव भी हो सकता है । ,माइक्रोसॉफ्ट ने एप्पल और गूगल से टक्कर लेते हुए अपना विंडोस सरफेस टेबलेट न्यूयॉर्क में लांच किया । ,माइक्रोसॉफ्ट के 37 वर्षों के इतिहास में यह पहला टैबलेट कम्यूटर है । ,2.5 पाउंड के वजन वाले इस लैपटॉप का स्लिम लुक यूजर्स को लुभाएगा । ,इसमें सैमसंग का एआरएम कार्टेक्स ए 15 प्रोसेसर है । ,"2 जीबी रैम , 16 जीबी फ्लैश स्टोरेज इसमें बहुत सारा स्पेस प्रदान करता है ।" ,सैमसंग क्रोमबुक में 100 जीबी का फ्री क्लाउड स्टोरेज है । ,कंपनी के अनुसार इसका बैटरी बैकअप साढ़े छ: घंटे का है । ,इसमें ड्यूल वाईफाई लगाया गया है । ,इससे आपको इंटरनेट की अच्छी कनेक्टिवटी मिलेगी । ,"कहा जाता है कि "" चेर - स्थल "" , "" कीचड़ "" और "" अलम - प्रदेश "" शब्दों के योग से केरल शब्द बना है ।" ,केरल शब्द का एक और अर्थ है : - वह भूभाग जो समुद्र से निकला हो । sg,समुद्र और पर्वत के संगम स्थान को भी केरल कहा जाता है । sg,प्राचीन विदेशी यायावरों ने इस स्थल को ' मलबार ' नाम से भी सम्बोधित किया है । ,केरल की संस्कृति हज़ारों साल पुरानी है । ,प्रारंभ में लोग पहाड़ी इलाकों में रहते थे । ,केरल के कुछ भागों से प्राचीन प्रस्तर युग के कतिपय खण्डहर प्राप्त हुए हैं । pl,प्राचीन खण्डहरों के अतिरिक्त महाप्रस्तर स्मारिकाएँ भी केरल में मानव जीवन की प्रामाणिक जानकारियाँ देती हैं । ,ये अधिकतर श्मशान रूप में प्राप्त होती हैं । pl,"यहाँ पर प्राचीन महाप्रस्तर काल के अनेक श्मशान - स्थल खोजे गये हैं , जिन्हें कुडक्कल्लु ( छत्राकार शिलाएँ ) , तोप्पिक्कल्लु ( टोपी नुमा शिलाएँ ) , कल्मेशा ( पत्थर से बनी मेज़ ) , मुनियरा ( मुनियों की कोठरी ) , नन्नङाडि ( भस्मकुंभ ) आदि नामों से जाना जाता है ।" sg,इनका काल 500 ईं. पूर्व से 300 तक माना जाता है । ,अधिकतर महाप्रस्तर युगीन स्मारिकाएँ पहाड़ी क्षेत्रों से प्राप्त हुई । ,अतः यह सिद्ध होता है कि केरल में अतिप्राचीन काल से मानव का वास था । ,केरल में आवास केन्द्रों के विकास का दूसरा चरण संघमकाल माना जाता है । ,यही प्राचीन तमिल साहित्य के निर्माण का काल है । ,संघमकाल सन् 300 ई. से 800 ई तक रहा । ,"इसी काल में भारत के अन्य प्रान्तों से भी आकर लोग केरल में बसने लगे , तथा बौद्ध और जैन धर्मों का प्रचार हुआ ।" ,ब्राह्मण आगमन भी इसी काल में हुआ । ,उन दिनों केरल के विभिन्न क्षेत्रों में ब्राह्मणों की कुल मिलाकर 64 बस्तियाँ थीं । ,ईसा की पहली शताब्दी तक केरल में ईसाई धर्म भी पहुँच गया था । ,सन् 345 में कानायि के थॉमस के नेतृत्व में पश्चिम एशिया के सात कबीलों के 400 ईसाई धर्मावलम्बी केरल आकर बसे । ,पश्चिम एशिया के सात कबीलों से केरल में ईसाई धर्म प्रचार को बल मिला । ,आठवीं ईस्वीं से ही केरलवासी इस्लाम धर्म से परिचित हो गए । ,प्राचीन केरल को इतिहासकार तमिल भूभाग का अंग समझते थे । ,"केरल के स्वतंत्र विकास में जो तत्व सहायक हुए हैं उनमें मुख्य हैं - निवासियों का प्रकृति प्रेम , आवास केन्द्रों का विकास , उत्पादन केन्द्रों का उदय और भाषाई समृद्धि ।" ,जब कृषि और संसाधन का नियंत्रण ज़मींदारों के हाथों में आ गया तब केरल में अनेक सामाजिक परिवर्तन हुए । ,परिणामस्वरूप छोटी रियासतों से लेकर बड़े राज्यों का विकास हुआ । ,इस तरह केरल का इतिहास साम्राज्यों और युद्धों का इतिहास है । ,भाषा और साहित्य के विकास का इतिहास है । ,"विदेशी सेनाओं के आगमन तथा उनके दीर्घकालीन उपनिवेश बन जाने का इतिहास है , जाति - पाति और शोषण का इतिहास है ।" ,शिक्षा में हुई प्रगति और वैज्ञानिक क्षेत्रों में हुई तरक्की का इतिहास है । ,व्यापारिक प्रगति और सामाजिक नवजागरण और जनतांत्रिक संस्थाओं के आविर्भावों का इतिहास है । sg,"सुविधा की दृष्टि से केरल के इतिहास को प्राचीन , मध्यकालीन एवं आधुनिक कालीन - तीन भागों में विभाजित कर सकते हैं ।" ,केरल दुर्लभ वनस्पतियों और पशुओं से युक्त झाड़ियों से युक्त स्थान है । ,यद्यपि यहाँ बडे - बड़े वृक्ष भी हैं चिन्नार फिर भी यहाँ की सभी झाड़ियों के लिए उपयुक्त है । ,यहाँ भूरे रंग की लुप्त प्राय: होती जा रही दुर्लभ गिलहरियाँ भी मिलती हैं । ,विश्व में इन गिलहरियों ( Giant Grizzled Squirrel of India ) की संख्या लगभग 200 है । ,केरल के अन्य वनक्षेत्र की अपेक्षा यहाँ बहुत कम वर्षा होती है । ,यहाँ वर्ष में औसतन 48 दिन ही वर्षा होती है । ,चिन्नार के समीपस्थ चन्दनक्काडु नामक स्थान वन्यजीव - दर्शन के लिए उपयुक्त है । pl,इस घने जंगल में गौरों को देखा जा सकता है । ,"हाथी , चीतल , हनुमान - बंदर , मोर आदि मार्ग के दोनों ओर दिखाई देते हैं ।" ,"निकटतम रेलवे स्टेशन - एरणाकुलम , 190 किमी. ।" ,"निकटतम एयरपोर्ट - कोच्चि अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा , 210 किमी. ।" ,यह स्थान बड़े बड़े घास के चौगानों और छायादार वृक्षों से युक्त है । ,करीब 97 वर्ग किमी. क्षेत्रफल में फैला यह राष्ट्रीय उद्यान अति मनोहर है । ,यह नीलगीरि गाय का नैसर्गिक निवास स्थान है । ,अब नीलगीरि गाय लुप्त प्राय: होती जा रही है । ,"यहाँ नीलगिरि लंगूर , लघु पुच्छ वानर , चीता , व्याघ्र आदि जानवर भी मिलते हैं ।" ,यह क्षेत्र विशेष संरक्षित है अत: पर्यटक केवल ' पर्यटक - क्षेत्र ' में ही प्रवेश कर सकते हैं । ,पुरी में जगन्नाथ जी के मंदिर के अतिरिक्त आसपास के क्षेत्रों में बहुत अधिक दर्शनीय कुछ खास नहीं है किन्तु यहाँ विभिन्न ललितकलाओं और हस्तशिल्प का व्यापक विकास हुआ है । ,यहाँ का गीतगोविन्दम पर आधारित ओडिसी नृत्य पूर्णरूप से जगन्नाथ को समर्पित है । ,"जीवन्त प्रस्तर मूर्तियाँ , एप्लीक वर्क से सजे बन्दनवार , छाते और लैम्पशेड , लोककथाओं वाले रंगीन पटचित्र , शंख और सीपी से बनी सुन्दर झालरें , खिलौने और कई कलात्मक वस्तुएँ यहाँ से खरीदी जा सकती हैं ।" ,"पुरी आएँ तो यहाँ की कोटकी , विचित्रपुरी और सम्बलपुरी साड़ियाँ अवश्य खरीदें ।" ,जगन्नाथ पुरी जाने के लिए जुलाई में रथयात्रा का अवसर और सितम्बर से फरवरी तक का समय उपयुक्त है । ,पुरी से विशाल चिलका झील थोड़ी दूरी पर है जहाँ नौका विहार के साथ - साथ वॉटलनेक डॉल्फिन देखने का आनन्द भी उठाया जा सकता है । ,"हावड़ा , आसनसोल , दिल्ली , तिरुपति और तलचर से पुरी स्टेशन तक सीधी रेलगाड़ियाँ हैं ।" ,वॉल्वो बसों व निजी गाड़ियों द्वारा भी रात भर का सफर तय कर जगन्नाथ पुरी पहुँचा जा सकता है । ,दमदम हवाई अड्डे से पुरी जाने के लिए विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी यातायात व्यवस्था है । sg,इसके लिए उड़ीसा परिवहन विभाग से सीधे संपर्क किया जा सकता है । ,"पुरी में ठहरने के लिए चार व तीन सितारा होटलों के अतिरिक्त अनेक मठ , धर्मशालाएँ , गेस्ट हाऊस शहर में व समुद्रतट पर स्थित हैं ।" ,ओरछा का सौंदर्य पत्थरों में इस तरह मुखरित है जैसे - समय की शिला पर युगों - युगों के लिए एक समृद्ध विरासत के रूप में अंकित हो गया हो । ,इस मध्ययुगीन नगर में पाषाण के घनीभूत सौन्दर्य को देख कर लगता है कि जैसे - समय यहाँ विश्राम कर रहा हो । ,16वीं और 17वीं सदी में बुन्देला राजाओं द्वारा बनवाए गए इस नगरी के राज प्रासाद और मन्दिर अभी भी अपनी पुरातन गरिमा बनाए हुए हैं । ,ओरछा राज्य की स्थापना 16वीं सदी में बुन्देला राजपूत प्रमुख रूद्रप्रताप ने की थी । sg,रूद्रप्रताप ने बेतवा नदी के किनारे इस भूमि को अपनी राजधानी के लिए उपयुक्त माना था । ,उनके परवर्ती शासकों में राजा वीर सिंह जू देव प्रसिद्ध हुए जिन्होंने सुन्दर जहाँगीर महल का निर्माण करवाया था । sg,इस बहुमंजिले राजप्रासाद के शीर्ष भाग में बनाई गई मनोहर छत्रियाँ इसकी शोभा को और बढ़ाती हैं । ,जहाँगीर महल से ओरछा के गगनचुम्बी मंदिरों के कलश और राजछत्रियों का दृश्य बड़ा ही मनोहारी लगता है । ,"ओरछा के स्थापत्य बाहर से तो भव्य हैं ही , उनका अंतरंग भी बुन्देली शैली की चित्रकला से सुसज्जित है ।" ,ओरछा के लक्ष्मीनारायण मन्दिर में अंकित मर्मस्पर्शी भित्ति - चित्रों में लोक और परलोक की गाथाओं ने अभिव्यक्ति पाई है । ,वे आज भी दीवारों और भीतरी छतों को जीवन्त बनाए हुए हैं । ,ओरछा के प्रांगण में अनेक छोटे मकबरे और स्मारक हैं । ,इनमें से प्रत्येक का रोचक इतिहास है । ,ओरछा का प्रत्येक स्मारक उसके प्राचीन वैभव और गरिमा को अपने आप संजोए हुए है । ,ओरछा के मुक्त प्रांगण में तीन दर्शनीय महल हैं । ,"जहाँगीर महल , राजमहल और रायप्रवीण महल ।" sg,17वीं सदी में जहाँगीर महल राजा वीर सिंह जू देव ने महराजा जहाँगीर की ओरछा यात्रा की स्मृति में बनवाया था । sg,"जहाँगीर महल की मजबूत प्राचीरें , सुन्दर छत्रियाँ और पत्थर में महीन जालियों का काम महल के समूचे स्थापत्य को असाधारण वैभव प्रदान करता है ।" ,राजमहल का निर्माण वीर सिंह जू देव के पूर्ववर्ती राजा मधुकर शाह ने करवाया था । ,राजा मधुकर शाह अत्यन्त धर्मपरायण व्यक्ति थे । pl,राजमहल अपने बहिरंग की सादगी और सुन्दर छत्रियों के आकर्षण से यात्रियों को अपने अंतरंग की ओर खींचता है । ,जहाँ भित्ति चित्रों में साहसिक रंग योजना के माध्यम से आध्यत्मिक विषयों की मार्मिक अभिव्यक्ति की गई है । ,"कवियित्री और संगीतज्ञ राय प्रवीण , राजा इन्द्रमणि ( 1672 - 76 ) की लावण्यमयी प्रेमिका थी ।" ,सम्राट अकबर के आदेश पर राय प्रवीण को दिल्ली भेजा गया था । ,अकबर राय प्रवीण की वाक्चातुरी से बहुत प्रभावित हुए । ,अपनी इसी प्रतिभा के फलस्वरूप राय प्रवीण ने सम्राट अकबर के सामने राजा इन्द्रमणि के प्रति अपने पवित्र प्रेम का इजहार किया और अकबर ने उसे ससम्मान ओरछा वापिस भेजा । ,राय प्रवीण का महल ईंटों से बनी दो मंजिला इमारत है । ,राय प्रवीण महल का परिवेश आनंद महल के सुन्दर बगीचों के बीच बहुत ही रमणीय है । ,इसके साथ ही राय प्रवीण महल के आठ कोंणों वाले पुष्प कुंज और उपयोगी जलप्रदाय प्रणाली आकर्षित करती है । ,राम राजा मन्दिर ओरछा का प्रसिद्ध स्थल है । ,मन्दिर के रूप में रूपांतरित इस प्रसाद के साथ एक अनोखी जनश्रुति जुड़ी हुई है । ,कहते हैं कि धर्मपरायण राजा मधुकर शाह स्वप्न में भगवान राम के दर्शन पाकर और उनके निर्देश पर अयोध्या से राम की प्रतिमा अपनी राजधानी ओरछा लाए थे । ,मन्दिर में इस मूर्ति की प्रतिष्ठा के पहले उसे इस महल के ही एक स्थान में रख दिया गया । ,प्राण - प्रतिष्ठा के समय जब मूर्ति को यहाँ से हटाना असम्भव हो गया तब राजा को भगवान का यह निर्देश याद आया कि वे इस जगह सबसे पहले विराजमान हो जाएँगे फिर वहाँ से हटाए नहीं जाएँगे । ,तब से राम राजा वहीं विराजे हैं । ,गगनचुंबी कलश और प्रासादिक वास्तुकला के कारण यह मन्दिर निःसन्देह समूचे भारत में अनूठा है । ,राजा राम मंदिर देश का अनोखा ऐसा मन्दिर है जहाँ राम की पूजा राजा की तरह की जाती है । ,पत्थरों के एक बड़े चबूतरे पर बने चतुर्भुज मन्दिर तक सीढ़ियाँ चढ़ कर पहुँचा जा सकता है । ,"चतुर्भुज मन्दिर अयोध्या से लाई गई राम की प्रतिमा की प्राण - प्रतिष्ठा के लिए बनवाया गया था , पर राम इसमें नहीं आए ।" ,यह मंदिर कालिका माता मंदिर का ही समकालीन है तथा इसकी वास्तु योजना तथा शैली भी इससे मिलती - जुलती है । ,"एक तरफ जहाँ मंदिर की वास्तु योजना , उन्नत एवं सादी पीठ , अलंकरण रहित जंघा एवं प्रदक्षिणापथ , गर्भगृह के बाह्य ताखों की देव प्रतिमाएँ तथा अंतराल के अर्द्धस्तंभों की प्रतिमाएँ 8वीं सदी की रचना प्रतीत होती है ।" sg,"कुंभस्वामी का यह मंदिर विभिन्न कालों में निर्मित होने के कारण , कई वास्तु शैलियों एवं मूर्ति शिल्पों का उदाहरण संजोये हुए है ।" ,श्री ढाकी के अनुसार राजा मानभंग ने ही इस मंदिर का भी निर्माण किया । ,"राजा मानभंग को कालिका माता सूर्य मंदिर , निकटवर्ती तड़ाग तथा त्रिपुरविजय प्रासाद आदि के निर्माण का श्रेय है ।" ,श्री ढाकी के अनुसार कीर्तिस्तंभ प्रशस्ति का कुंभस्वामिन आलम प्राचीन त्रिपुर विजय ही था । sg,कुंभस्वामिन आलम प्राचीन त्रिपुर विजय को कुंभा ने फिर से निर्मित किया था । sg,वर्त्तमान कुंभश्याम मंदिर का सभामंडप फिर से प्राचीन अवशेषों और नवीन पाषाणों द्वारा बनाया गया है । pl,मूल खंडित शैव मूर्तियों के स्थान पर नई वैष्णव मूर्तियाँ स्थापित कर दी गई हैं । ,सुरक्षित शैव मूर्तियों को पूर्ववत् ही रखा गया है । ,"मंदिर की पीठ पर बना अश्वधर , नरधर , ग्रास पट्टिका का पूर्णतः अभाव इसे निश्चित रूप से ८वीं शताब्दी का निश्चित करता है ।" ,कुंभश्याम सांधान प्रकार का पूर्वाभिमुखी प्रासाद है । ,मंदिर का गर्भगृह त्रयंग प्रकार का है । ,गर्भगृह का प्रत्येक अंग एक सलिलांतर से जुड़ा है । ,"प्रत्येक कर्ण पर दिग्पालों की प्रतिमाएँ त्रिभंग में खड़ी हुई , अत्यंत कमनीय दिखाई पड़ती हैं ।" ,"भद्रा की रथिकाओं की तीन शाखाएँ हैं - पत्रवल्ली , नागपाश और रूप शाखा ।" ,चित्तौड़ दुर्ग में समाधीश्वर मंदिर का स्थान महत्वपूर्ण मंदिरों में था । ,शिव समाधीश का चित्तौड़ के जन - जीवन में महत्वपूर्ण स्थान था । sg,कुछ अभिलेखों के अनुसार समाधीश्वर मंदिर को ' समिधेश्वर ' तथा अपभ्रंश रूप में ’ समिधेसुर ' के रूप में भी जाना जाता है । ,"समाधीश्वर मंदिर के निर्माण कर्त्ता , अधिष्ठाता देव , रचनाकाल तथा नाम को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है ।" ,सन् 1428 ई. की एक प्रशस्ति के अनुसार महाराजा मोकल ने समाधीश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार किया था । ,समाधीश्वर मंदिर को ' मोकल का मंदिर ' के रूप में भी जाना जाता है । ,"कुछ विद्वानों , जैसे श्री ढ़ाकी के अनुसार , समाधीश्वर मंदिर चालुक्य कुमारपाल द्वारा निर्मित कुमार विहार है ।" ,वेदी बंध के नरथर एवं कुंभक तथा जंघा पर जैन शासन देवयों एवं यक्ष - यक्षिणियों की मूर्ति के आधार पर तथा समाधीश्वर मंदिर के ही प्रांगण से प्राप्त कुमारपाल की 1150 ई. की प्रशस्ति के आधार पर इसे जैन मंदिर माना है । ,कुमारपाल की प्रशास्ति में उसके शैव उपासक होने का ही प्रमाण मिलता है । ,यद्यपि बाद में यशपाल के मोहपराजय नाटक के अनुसार सन् 1159 ई. ( संवत् 1216 ) में कुमारपाल ने जैन धर्म स्वीकार कर लिया था । ,समाधीश्वर मंदिर में उपलब्ध दृश्यों का अंकन सामान्य रूप से जैन एवं हिंदू सभी मंदिरों से प्राप्त होता है । ,जैन एवं हिंदू धर्मों की प्रासाद वस्तु एवं तक्षक एक ही हुआ करते थे । ,इस प्रकार समाधीश्वर मंदिर ' कुमारपाल का विहार ' का न होकर आद्यंत शैव प्रासाद प्रतीत होता है । ,"समाधीश्वर मंदिर शिव की महेश मूर्ति अर्थात वामदेव , सद्योजात भैरव का रूप है ।" ,महेश मूर्ति की विशालता एवं विस्पर्यात्पादकता अपूर्व है । ,"महेश मूर्ति अर्थात वामदेव , शैली की दृष्टि से 15वीं शताब्दी के बाद की प्रतीत होती है ।" ,गर्भगृह का धरातल गूढ़ मंडप से नीचा है । ,ऐसा प्रतीत होता है कि जीर्णोद्धार के समय यह परिवर्त्तन किया गया हो । ,डॉ. रामनाथ तथा कई अन्य विद्वानों ने इस प्रासाद की पहचान तथा निर्माण का काल परमार शासक भोज द्वारा निर्मित त्रिभुवन नारायण से करने का प्रयास किया है । sg,"इनके अनुसार , यह मंदिर 1018 - 1054 ई. में भोज राजा द्वारा निर्मित किया गया होगा ।" ,इसका उल्लेख चीरवा से प्राप्त अभिलेख में है । ,कल्याणपुर उदयपुर के दक्षिण में 77 किलोमीटर दूर स्थित है तथा शैवपीठ के रूप में लोकप्रिय रहा है । ,वर्त्तमान में मंदिर अत्यंत जीर्ण अवस्था में है । ,प्राप्त अभिलेखों के आधार पर इसे 7वीं शताब्दी का निश्चित किया गया है । ,मंदिर की मूर्तियाँ कुछ हरापन लिए हुए काले परेवा पत्थर की बनी हैं । ,"मंदिर की मूर्तियाँ वर्त्तमान में प्रताप संग्रहालय तथा एम.बी. कॉलेज , उदयपुर में संरक्षित हैं ।" ,आहड़ मेवाड़ क्षेत्र का मूर्तिकला की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण स्थान है । ,"आहड़ मेवाड़ क्षेत्र का प्राचीन नाम आघाटपुर , आटपुर तथा गंगोद्भेद तीर्थ है ।" ,यह 9वीं - 10वीं शताब्दी में वैष्णव संप्रदाय का एक प्रमुख केन्द्र था । ,आहड़ से प्राप्त 953 ई. ( संवत् 1010 ) के एक अभिलेख से एक विष्णु के मंदिर का उल्लेख मिलता है । sg,आहड़ में एक वैष्णव भक्त द्वारा आदि वराह की प्रतिमा स्थापित करवाई गई थी । ,आहड़ में एक सूर्य मंदिर भी था । ,सूर्य मंदिर का प्रमाण 14 द्रम्मों के दान का उल्लेख करने वाले एक अन्य अभिलेख से मिलता है । ,"एक अन्य मंदिर में विष्णु के लक्ष्मीनारायण रूप की अर्चना होती थी , जिसे अब मीराबाई मंदिर के नाम से जाना जाता है ।" ,"जिस प्रकार देवकीनंदन खत्री ने ऐय्यारी और तिलिस्मी उपन्यासों का प्रवर्तन किया , उसी प्रकार अंग्रेजी के जासूसी उपन्यासों से प्रेरित होकर गहमरी जी ने हिंदी में जासूसी कहानियों और उपन्यासों का ढेर लगा दिया ।" ,आपने सन् 1946 तक हिंदी की सेवा की । ,"महात्मा मुंशीराम जो आगे चलकर स्वामी श्रद्धानंद के रूप में प्रसिद्ध हुए , उन्हीं के पुत्र इंद्र विद्यावाचस्पति हिंदी पत्रकारिता के एक जाज्वल्यमान नक्षत्र थे ।" ,"सद्धर्म प्रचारक ( 1911 ) , विजय ( 1918 ) , सत्यवादी साप्‍ताहिक ( 1923 ) , नवराष्‍ट्र ( 1939 ) तथा जनसत्ता ( 1952 ) आदि के कुशल संपादन द्वारा उन्होंने उत्तर भारत में जन जागरण का महत्‍वपूर्ण कार्य किया ।" ,उच्चकोटि के गंभीर विचारक के रूप में अपनी लेखनी द्वारा आर्य - धर्म तथा राष्‍ट्र धर्म का प्रचार किया । ,हिंदी पत्रकारिता के जन्म के साथ ही साहित्यिक पत्रकारिता का विकास होने लगा । ,"प्रारंभ में पत्रों की भाषा शिथिल थी , उसमें स्थानीय पुट भी रहता था ।" ,वर्तनी में एकरूपता नहीं थी । ,व्याकरण संबंधी भूलें भी होती थीं । ,"हिंदी पत्र - पत्रिकाओं के प्रारंभिक संपादकों , बाल मुकुंद गुप्‍त , महावीरप्रसाद द्विवेदी , दुर्गाप्रसाद मिश्र , मदनमोहन मालवीय , बाबूराव विष्‍णु पराड़कर , अंबिका प्रसाद वाजपेयी और लक्ष्मीनारायण गर्दे ने इन कमियों को दूर करने और हिंदी गद्य को परिमार्जित करने में उल्लेखनीय योगदान दिया ।" pl,द्विवेदीजी ने साहित्यिक पत्रकारिता के लिए कुछ नियम बताए । sg,वह समय की पाबंदी अथवा पत्रिका के नियमित समय पर प्रकाशन को अत्यधिक महत्व देते थे । ,"वह पत्रिका के संचालकों को विश्‍वास में लेना , स्वतंत्रता एवं निष्‍पक्षता से विचार प्रकट करना , लेखकों को कुछ पारिश्रमिक देना , पाठकों को नई जानकारी और नई रचनाएं प्रदान करना भी आवश्यक समझते थे ।" ,"बाबूराव विष्णु पराड़कर के अनुसार ’ सरस्वती ’ का प्रत्येक अंक अपने आप में पूर्णता लिये होता था , उसका प्रत्येक अंक संपादक के व्यक्‍तित्व की घोषणा करता था ।" ,बीस के दशक के तीसरे वर्ष कलकत्ता से हास्य - व्यंग्य से भरपूर ’ मतवाला ’ का प्रकाशन शुरू हुआ । ,"इसमें तभी के तत्‍कालीन हिंदी लेखकों की रचनाएं , उनके जीवन परिचय , कविताएं और समालोचनाएँ छपती थीं ।" ,हिंदी के मूर्धन्य कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला ’ मतवाला ’ के प्रकाशन से घनिष्‍ठ रूप से जुड़े थे । sg,रामानंद चटर्जी की प्रेरणा पर 1928 में माडर्न रिव्यू - प्रवासी प्रकाशन समूह ने ’ विशाल भारत ’ का प्रकाशन शुरू किया । ,बनारसीदास चतुर्वेदी इसके संपादक थे । ,"इस पत्र ने अपने विद्धतापूर्ण लेखों , सटीक टिप्पणियों , उत्कृष्‍ट चित्रों के कारण अपने लिए शीघ्र ही हिंदी पत्रों में विशेष स्थान बना लिया ।" ,हजारीप्रसाद द्विवेदी के संपादन में शांति निकेतन से 1942 में त्रैमासिक ’ विश्‍व भारती ’ का प्रकाशन भी हिंदी साहित्यिक पत्रों के प्रकाशन में मील का पत्थर था । ,’ विश्‍व भारती ’ में अनेक विद्वानों के शोधपरक और चिंतन प्रधान निबंध प्रकाशित हुए । sg,महात्मा गांधी ने ’ विश्‍व भारती ’ के प्रकाशन को साहसिक प्रयास कहा था । ,साप्‍ताहिक ’ धर्मयुग ’ और ’ हिन्दुस्तान ’ के प्रकाशन ने हिंदी पत्रकारिता के बड़े अभाव की पूर्ति की थी । ,"’ धर्मयुग ’ के पहले संपादक जोशी बंधु , डॉ. हेमचंद्र जोशी और इलाचंद्र जोशी थे ।" ,उन्होंने बड़ी योग्यता से इसकी शुरुआत की । ,बाद में धर्मवीर भारती ने अपने संपादन से इसकी कीर्ति में चार चांद लगाए । ,"’ धर्मयुग ’ , ’ सारिका ’ , ’ पराग ’ और फिर ’ संडे मेल ’ में कन्हैयालाल नंदन जैसे साहित्यकार और संपादक ने सामाजिक , सांस्कृतिक सरोकारों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया ।" sg,मनोहर श्याम जोशी के संपादन में ’ साप्‍ताहिक हिन्दुस्तान ’ ने बड़ी कीर्ति अर्जित की । ,महायुद्ध के बाद देश में उद्योगों की स्थापना के लिए निगम क्षेत्र में कुछ कंपनियां गठित की गईं लेकिन उनके शेयरधारियों की संख्या हजारों में थी । ,"आर्थिक पत्रकारिता तभी विकसित होती है जब आर्थिक क्षेत्र में तेजी से पूंजी निवेश हो , कंपनियां अच्छा लाभांश दें और उनके शेयरों का मूल्य तेजी से बढ़े ।" sg,अनेक नई कंपनियों ने काम शुरू किया । sg,लोग एक आर्थिक पत्र की जरूरत महसूस करने लगे । ,"इस मांग को पूरा करने के लिए आर्थिक पत्रों , ’ इकानामिक टाइम्स ’ और ’ फाइनेंशियल एक्सप्रेस ’ का प्रकाशन शुरू हुआ ।" ,इनके प्रकाशन के बीच केवल दो सप्‍ताह का अंतर था । ,ये दोनों समाचार पत्र मुंबई से प्रकाशित हुए जिसे देश की आर्थिक राजधानी कहा जाता था । ,जनता ने इन दोनों पत्रों का स्वागत किया । ,कुछ वर्ष बाद दोनों पत्रों ने दिल्ली से भी अपने संस्करण निकालने शुरू किए । sg,1975 में ’ बिजनेस स्टैंडर्ड ’ ने कलकत्ता से प्रकाशन शुरू किया । sg,इसी समय ’ इकॉनामिक टाइम्स ’ ने कलकत्ता संस्करण शुरू किया । ,इसकी देखादेखी ’ फाइनेंशियल एक्सप्रेस ’ ने पहले चेन्‍नई और फिर कलकत्ता से और ’ इकानामिक टाइम्स ’ ने अहमदाबाद से अपने संस्करण निकाले । ,भारत में प्रकाशित होने वाली पहली विज्ञान पत्रिका ’ एशियाटिक रिसर्च ’ थी । ,इसका प्रकाशन 1788 में रॉयल एशियाटिक सोसायटी ने किया था । ,भारतीय भाषाओं में प्रकाशित पहली विज्ञान पत्रिका ’ बांग्ला ’ में 1821 में प्रकाशित ’ प्रश्‍नावली ’ थी । sg,हिंदी में विज्ञान पत्रिकाओं की शुरुआत करने का श्रेय ’ आयुर्वेद महासम्मेलन पत्रिका ’ को है । ,इसका प्रकाशन 1913 में शुरू हुआ । ,यह पत्रिका अब भी प्रकाशित हो रही है । ,इस पत्रिका में आयुर्वेद संबंधी विविध लेख प्रकाशित होते थे । sg,’ आयुर्वेद महासम्मेलन पत्रिका ’ के प्रकाशन के दो वर्ष बाद 1915 में इलाहाबाद की विज्ञान परिषद ने ’ विज्ञान पत्रिका ’ का प्रकाशन आरंभ किया । ,इस पत्रिका के प्रकाशन में प्रारंभ से अब तक इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय के विज्ञान संकाय के सदस्य और चोटी के वैज्ञानिक सहयोग देते रहते हैं । ,"भगवान से जो भी मांगते हैं , वो किसी को बताया नही जाता ।" ,"मैं तो सिर्फ इतना जानती हूँ कि वो मेरी ज़िंदगी है , मैं किसी और की नहीं हो सकती मां ।" ,यह पोस्टकार्ड अगर मेरे घर पहुँचा तो पॉप समझेंगे मैं भगवान को प्यारा हो गया । ,"अभी तो कभी नहीं और आगे भी अगर होऊंगा तो बस एक ही बार सीरियस होऊंगा , जब किसी से प्यार हो जाएगा ।" ,"प्यार कभी किसी से नहीं हुआ सेनोरिटा , कोई मिली ही नहीं ।" ,"एक लड़की जिसे देखते ही दिल की सब आरज़ू , सारे ख्वाब , सारे रंग ज़िंदा हो जाएं ।" ,"अभी तक ऐसा हुआ नहीं , लेकिन अब लगता है जैसे कोई अनदेखा , अनजाना चेहरा बादलों में से पुकार रहा है ।" ,पता नहीं ये बादल कब हटेंगे और कब वो पुकारने वाली सामने आएगी । ,"तुम्हारे साथ कभी ऐसा नहीं हुआ , कोई अनदेखा अनजाना तुम्हारे ख्यालों में नही आया ?" ,"मेरे ख्वाबों में किसी अनदेखे , अनजाने के लिए जगह नहीं है , मेरी शादी तय हो चुकी है ।" ,"जिससे तुम्हारी शादी होने वाली है , तुमने कभी उसे देखा नहीं है ?" sg,"तुम अपनी पूरी ज़िंदगी एक ऐसे आदमी के साथ गुज़ार दोगी , जिसे तुम जानती नहीं हो , कभी मिली नहीं हो , जो तुम्हारे लिए बिलकुल अजनबी है ।" ,"मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ सिमरन , मुझे तुमसे प्यार हो गया है ।" ,"ज़रा अपना चेहरा तो देखो , तुम समझी कि मै सच कह रहा हूँ , समझी ना ?" ,"अरे कमाल है सिमरन , कमाल है , तुम मुझे इतने दिनों से जानती हो लेकिन अब तक पहचान नहीं पाई ।" ,याद है मैंने कहा था कि मै आज तक कभी सीरियस नहीं हुआ हूँ । ,"अरे भाई ये लव - शव , प्यार - व्यार मेरे बस की बात नहीं है ।" ,मुझे तो ये समझ नहीं आता कि लोग एक ही इंसान के साथ पूरी ज़िंदगी कैसे गुज़ार सकते हैं । ,"क्या तुम वापस जाकर उस अजनबी से शादी कर लोगी , या फिर तुममें मुझसे प्यार करने की हिम्मत होगी ?" ,"राज ! अगर ये तुझसे प्यार करती है तो ये पलटके देखेगी , पलट , पलट ।" ,"लंदन पहूँच गए , एक महीना कैसे गुज़रा , पता ही नहीं चला ।" ,"अरे राज ! तुमने मुझे अपना अड्रेस दिया ही नहीं , मैं तुम्हें अपनी शादी का कार्ड भेजूंगी , तुम आओगे ना ।" ,"मैने पढा था , सुना था कि प्यार ऐसा होता है , प्यार वैसा होता है मगर कभी समझा नहीं ।" ,"मैं तो तब भी नहीं समझी जब उसने पहली बार मुझे अपना हाथ दिया , इतने दिन उसके साथ - साथ रही फिर भी कुछ नहीं समझी ।" ,"लेकिन आज स्टेशन पर जब वो मुझसे अलग हो रहा था , मुझे ऐसा पहली बार महसूस हुआ कि इस पल के बाद मैं उससे कभी नहीं मिलूंगी ।" ,मैं उसे पलट - पलट कर देख रही थी मगर वो चला जा रहा था । ,"मैं उसे रोकना चाहती थी , कुछ कहना चाहती थी , कुछ सुनना चाहती थी , वो नहीं रुका मगर मैं समझ गई कि प्यार ऐसा होता है ।" ,मैं नहीं जानती वो मुझसे प्यार करता है या नहीं । ,"मैं तो सिर्फ इतना जानती हूँ कि वो मेरी ज़िंदगी है , मैं किसी और की नहीं हो सकती मां ।" ,"बच्ची इतने दिनों बाद आई है ना , वक्त का ज़रा भी अंदाज़ा नहीं रहा मुझे ।" ,"मैंने कहा था मेरे भरोसे को शर्मिंदा मत करना , मैने वादा लिया था तुझसे , फिर भी तूने मुझे धोखा दे दिया ?" sg,"अपना सामान बांध लो , हम कल सवेरे ही इंडिया जा रहे हैं , हमेशा - हमेशा के लिए ।" ,"रोने दे इसे , इसने अपनी तकदीर में ये आंसू खुद लिखे हैं , इसे रोकना भी खुद ही सीखना होगा ।" ,"क्या नाम है उसका , जिसका चेहरा तू चाँद में देखने की कोशिश कर रहा है ?" ,"आप तो मुझे अच्छी तरह से जानते हैं , मै उनमें से नहीं हूँ जो एक ही लड़की के पीछे भागते रहते हैं ।" ,प्रॉब्लम ये है पॉप्स कि उसकी शादी होने वाली है । ,"आपका ज़माना और था पॉप्स , अब ज़माना बदल चुका है ।" ,"मुहब्बत का नाम आज भी मुहब्बत है बेटा , ये ना कभी बदली है और ना कभी बदलेगी ।" ,हम उनमें से हैं जो चाँद को देखते नहीं चाँद को उठा कर घर पर ले आते हैं । ,"अब जा और इस घर में तभी आना जब बहू तेरे साथ होगी , समझा ।" ,"बधाई हो भाई साहब , बधाई हो , जब से राजेश की सगाई की खबर सुनी है मैं तो फूली नहीं समा रही ।" ,सुना है कि बहू के पिता कॉलेज में प्रोफ़ेसर हैं तो फिर तो लेन - देन की क्या बात हुई होगी ? ,"उम्र भर इनकी तरह प्रोफ़ेसरी करते रहे होंगे , जोड़ने का तो मौका ही नहीं मिला होगा ।" ,"ऐसा मत कहो भागवान , वे अच्छे - खासे खानदानी रईस हैं ।" ,"अगर मेरी स्वीटी आती तो इतना लाती - इतना लाती कि तिजोरी में रखते - रखते थक जाते , लाखों का है मेरा राजेश ।" ,"अरे राजेश ! यहां आओ यार , ये जो तुम्हारे ससुर जी हैं न , बड़े दिलचस्प इंसान हैं ।" ,"आपको बजाना - वजाना भी आता है , सिर्फ पोज़ लेकर खड़े हैं ।" ,"लोग कहते हैं बड़ा अच्छा बजा लेते हैं , बाकी जब आप सुनिएगा , फैसला कीजिएगा ।" ,"भैया जी ! भैया जी ! आपको और बीबी जी को नीचे बुलाया है , बड़े भैया का तिलक होने जा रहा है ।" ,"बात उन दिनों की है , डॉक्टर साहब ! जब हम तीनों साथ में पढ़ा करते थे - इनके काका , हम और हमारी श्रीमती जी ।" ,कुल्लू के चारों ओर कई खूबसूरत घाटियाँ हैं । ,घाटियों में व्यास नदी के पार नगर और पार्वती नदी के पार कसोल व मणिकर्ण मुख्य हैं । ,इन घाटियों से होकर मलाना नामक एक अनोखे गाँव को पैदल जाते हैं । ,यह मलाना गाँव अपनी प्राचीन शासकीय व्यवस्था के कारण दुनियाभर में मशहूर है । ,"कुल्लू घाटी में बस मार्ग पर हर कहीं कुल्लू शाल , टोपी व दूसरे कपड़ों की दुकानें सजी हुई मिलती हैं ।" pl,ढालपुर बाजार में सूखे मेवे भी खरीदे जा सकते हैं । ,कुल्लू से 10 किलोमीटर पहले भूंतर हवाई अड्डा स्थित है । ,यहीं व्यास व पार्वती नदी का संगम स्थल भी है । ,व्यास के पार पार्वती नदी के किनारे से एक छिपी हुई घाटी का सफर शुरू होता है । ,भूंतर से कसोल 32 और मणिकर्ण 35 किलोमीटर है । pl,"कसोल जहाँ कुदरती नजारों से भरा है , वहीं मणिकर्ण गरम पानी के चश्मों से घिरा है ।" ,कसोल में विदेशी सैलानी ज्यादा और मणिकर्ण में केवल भारतीय पर्यटक मिलते हैं । ,आबादी से बाहर नदीनालों व देवदारों से सजे पिकनिक स्थल हैं । ,कुल्लूमनाली मार्ग पर पतली कूहल से दाईं ओर व्यास नदी के पार नगर में विश्वप्रसिद्ध चित्रकार निकोलस रोरिख का रचना संसार एक आर्ट गैलरी में संगृहीत है । ,"नगर कैसल में संग्रहालय , पौराणिक जगतीपट और प्राचीन काष्ठ एवं पाषाण से बने मंदिर दर्शनीय हैं ।" ,कैसल यानी किले में ही हिमाचल प्रदेश पर्यटन निगम का होटल है । ,होटल से व्यास नदी का विहंगम दृश्य दिखाई देता है । ,कुल्लू से 26 किलोमीटर दूर नगर प्राचीनकाल में कुल्लू की राजधानी रहा है । pl,देवदार से घिरे रास्तों से सजा नगर एकांतप्रेमी कलाकारों को ज्यादा लुभाता है । ,कुल्लू में रायसन से लेकर डोभी तक के नदी से लगे खुले रेस्तराँ हैं । ,कुल्लू घाटी के सबसे खुबसूरत स्थान के रूप में मनाली विश्वप्रसिद्ध है । ,एक जमाना था जब मनाली में गिनेचुने घुमक्कड़ ही पहुँचते थे । ,जवाहरलाल नेहरू ने जब मनाली को स्विट्जरलैंड से ज्यादा सुंदर और रोमांचक घाटी कहा तो यहाँ दुनिया भर से सैलानी आने लगे और यहाँ होटलों की नगरी ही बस गई । ,"कुल्लू घाटी में अप्रैल से लेकर जून तक तो बेहद प्यारा मौसम रहता है , मगर आज हर मौसम में लोगों को यहाँ छुट्टियाँ बिताते देखा जाता है ।" ,"माल रोड से लेकर रोहतांग की चोटी तक मनाली समुद्रतल से 2,050 मीटर से लेकर 3,978 मीटर तक की ऊँचाई में फैला है ।" ,व्यास नदी के निकट ही मनाली नगर बसा है । ,"बस अड्डे के पास ही माल , बाजार , अधिकांश होटल और रेस्तराँ हैं ।" ,"रामबाग यानी नेहरू पार्क , बौद्ध गोंपा और वनविहार पास ही हैं ।" ,"माल रोड मनाली का सबसे व्यस्त व भीड़ भरा इलाका है , जिसमें आप पैदल भी 1 घंटे के भीतर आराम से घूम सकते हैं ।" ,नेहरू पार्क या वनविहार में घंटा भर भ्रमण व विश्राम अलग से किया जा सकता है । ,खरीदारी की बेहतर जगह माल रोड ही है । ,"मनाली के ज्यादातर दर्शनीय स्थल ऊपरी मनाली में हैं , जिन्हें आप तिपहिया या टैक्सी से जाकर देख सकते हैं ।" ,"हिडिंबा मंदिर , लाग हट्स , पुरानी मनाली और वहीं मनालसू नदी के किनारे क्लब हाउस क्षेत्र देखने व ठहरने योग्य हैं ।" ,"व्यास नदी के पार पर्वतारोहण संस्थान , जगतसुख और नगर के क्षेत्र घूमने योग्य हैं ।" ,व्यास की स्त्रोतदिशा में मनाली के वास्तविक सुंदर इलाके हैं । ,वशिष्ठ गाँव में गरम पानी के चश्मों में नहाने के बाद आप व्यास नदी के साथसाथ चलते हुए सोलंग नाला पहुँचेंगे । pl,सोलंग नाले में हैंड ग्लाइडिंग जैसे कई रोमांचक खेल आयोजित किए जाते हैं । ,"कोठी , गुलाबा और मढ़ी को देखते हुए आप मनाली से 50 किलोमीटर दूर रोहतांग पर्वत शिखर पर जा पहुँचेंगे , जो गर्मियों में भी बर्फ़ से ढका रहता है ।" ,गर्मियों में यहाँ के तंग और खतरनाक रास्तों पर बेहद ट्रैफिक होता है और बहुत से सैलानियों को बीच रास्ते से लौटना पड़ता है । ,"जो लोग सुबह जल्दी वहाँ पहुँचते हैं , उन्हें समय पर लौटने में कम कठिनाई होती है ।" ,जुलाई से सितंबर तक रोहतांग यात्रा आसान है । ,रोहतांग दिशा और रोहतांग क्षेत्र हिमालय के वास्तविक प्रेमियों की जन्नत है । ,घुमक्कड़ों को रोहतांग क्षेत्र में अनोखा सुकून हासिल होता है । ,रोहतांग के पास के संसार की तो बात ही क्या है जो लाहुल के रास्ते लद्दाख तक फैला है । pl,किन्नौर का इलाका घाटियों से भरा है । pl,"घने और ऊँचे पर्वतों के बीच स्थित सांगला घाटी , भावा घाटी , कल्पा घाटी , मूरंग घाटी और कुन्नूचारंग घाटी पर्यटकों को लुभाती है ।" ,"किन्नौर भीड़भाड़ से अलग शांतिप्रिय लोगों की घाटी है , जहाँ आज भी लोग घरों पर ताला नहीं लगाते ।" pl,किसी युग में यहाँ के लोग किन्नर कहलाते थे । pl,किन्नर अनेक कलाएँ जानते थे । pl,बाद में जातिवाद ने यहाँ 2 वर्ग बना दिए । ,"दरअसल , अकबर ने सीकरी को अपनी राजधानी बनाने का निश्चय किया और इसी उद्देश्य से यहाँ उस ने भव्य किले का निर्माण कराया ।" sg,1573 में सीकरी से उसने गुजरात पर विजय पाकर लौटते समय उसने सीकरी का नाम ’ फतेहपुर ’ ( विजय नगरी ) रख दिया । sg,1573 से यह स्थान फतेहपुर सीकरी कहलाता है । ,"बादशाह अकबर के शासनकाल की बुलंदियों का प्रतीक बुलंद दरवाजा एक दर्शनीय स्थल है , जिसका निर्माण बादशाह ने गुजरात विजय के उपलक्ष में करवाया था ।" ,बुलंद दरवाजा 176 फुट ऊँचा दरवाजा एशिया का सबसे ऊँचा दरवाजा है । ,दीवान - ए - खास पर मुगल सम्राट अकबर अक्सर अपने नवरत्नों से मंत्रणा किया करता था । ,दीवान - ए - खास इमारत बाहर से देखने में एक मंजिला प्रतीत होती है मगर अंदर से दो मंजिला है । ,दीवान - ए - खास महल के बीचोंबीच एक नक्काशीदार खंभा है जिसे देख कर सैलानी अचंभित रह जाते हैं पर इस का राज उन्हें तब पता चलता है जब वे ऊपर की मंजिल पर जाते हैं । ,"दीवान - ए - आम लाल पत्थर से बना एक विशाल अहाता है जहाँ बैठकर अकबर जनता की परेशानियाँ , शिकायतें और झगड़े सुनकर उनकी फरियाद पर न्याय करता था ।" ,ख्वाब महल कभी सम्राट अकबर का शयनागार था । ,ख्वाब महल में शाम को नृत्य व संगीत की महफिलें लगती थीं । ,महल में एक खूबसूरत मंच भी है । ,कहा जाता है कि इसी मंच पर ’ तानसेन ’ और ’ बैजू बावरा ’ के बीच संगीत कार्यक्रम का जोरदार मुकाबला हुआ करता था । ,पंचमहल पांचमंजिली भव्य इमारत है । ,पंचमहल का प्रयोग बादशाह द्वारा शाम को हवाखोरी करने एवं चाँदनी रात का लुत्फ़ उठाने में होता था । ,पंचमहल की खूबी यह है कि इस में कुल 176 खंभे हैं जिनके सहारे यह इमारत खड़ी है । ,प्रत्येक खंभे पर अलग - अलग कलाकृति को दर्शाती पच्चीकारी देखने को मिलती है । ,हिरन मीनार इमारत पर एक अलग प्रकार की कलाकृति देखने को मिलती है । ,हिरन मीनार इमारत में हिरन के सिंगो की भाँति उभरे हुए पत्थर देखने में बहुत ही रोमांचकारी लगते हैं । ,शेख सलीम चिश्ती की दरगाह भी यहाँ पर है । ,बुलंद दरवाजे से प्रवेश करने पर सामने ही सम्राट अकबर के गुरू शेख सलीम चिश्ती की दरगाह है । ,सफेद पत्थरों से निर्मित दरगाह पर आज भी सभी धर्मों के लोग दूर - दूर से आते हैं और यहाँ की खूबसूरत जालियों को निहारते हैं । ,जोधाबाई महल में अकबर की हिंदू रानियों का निवास था । ,इसमें हिंदुओं के स्तंभाकार और मुस्लिमों के गुंबजाकार शिल्पकला का सुंदर संयोजन देखते ही बनता है । ,जोधाबाई महल अंदर से दोमंजिला है । ,"चूँकि आगरा और फतेहपुर के मध्य अधिक दूरी नहीं है , अतः आगरा पर्यटन के दौरान फतेहपुर सीकरी का भी एकदिवसीय कार्यक्रम बनाया जा सकता है ।" ,उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ गोमती नदी के किनारे बसा है । sg,नवाबों के शहर के नाम से मशहूर लखनऊ के चप्पे - चप्पे पर नवाबी शानो - शौकत की छाप देखी जा सकती है । ,वैसे भी लखनऊ शहर का इतिहास बहुत पुराना है इसलिए समय के साथ इसके नाम में भी बदलाव आए । ,पहले लखनऊ का नाम लक्ष्मणपुरी NULL फिर लखनपुरी और बाद में लखनऊ हो गया । ,1775 से 1856 तक लखनऊ अवध रियासत की राजधानी था । ,1775 से 1856 में यहाँ पर अवध की तहजीब व अदब का विकास हुआ । ,नवाबों की बनवाई कई इमारतें आज भी लखनऊ में मौजूद हैं । ,"लखनऊ में केवल ऐतिहासिक इमारतें ही देखने लायक नहीं हैं बल्कि यहाँ की चिकनकारी , नवाबी तहजीब , मुगलई खाना , आभूषण और चाँदी का वर्क आदि भी मशहूर हैं ।" ,आज अपनी नजाकत और नफासत को सँभालते हुए लखनऊ एक मेट्रो शहर के रूप में आगे बढ़ रहा है । sg,पर्यटकों को नवाबी मजा देने के लिए ऐतिहासिक स्थलों को घूमने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश पर्यटन निगम ने बग्घियों की नई व्यवस्था शुरू की है । ,इसके अलावा हाल ही में गोमती के किनारे पर खूबसूरत टूरिस्ट स्पॉट का भी निर्माण किया गया है । ,चारबाग रेलवे स्टेशन से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बड़ा इमामबाड़ा वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है । sg,इमामबाड़ा के एक छोर पर कागज फाड़ने की जैसी कम आवाज को भी दूसरी तरफ से सुना जा सकता है । ,इमामबाड़ा इमारत का निर्माण नवाब आसिफुद्दौला ने 1784 में अकाल से अपनी जनता को राहत देने के लिए करवाया था । ,"इमामबाड़ा का करीब 50 फुट लंबा और 16 फुट ऊँचा हाल , बगैर किसी खंभे के सहारे पर टिका है ।" ,यह भवन भूलभुलैया के नाम से भी जाना जाता है । ,बड़ा इमामबाड़ा सैलानियों के लिए सुबह 6 बजे शाम 5 बजे तक खुला रहता है । ,छोटा इमामबाड़ा हुसैनाबाद के इमामबाड़े के नाम से भी जाना जाता है । ,छोटा इमामबाड़ा बड़े इमामबाड़े से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । ,छोटे इमामबाड़े का निर्माण 1837 में मोहम्मद अलीशाह ने करवाया था । ,दूर से इस इमामबाड़े का बाहरी नक्शा ताजमहल जैसा दिखता है । sg,इमामबाड़े में नहाने के लिए एक खास किस्म का हौज बनाया गया था जिसमें गरम और ठंडा पानी एकसाथ आता था । ,इस इमारत में शीशे के लगे हुए झाड़फानूस बेहद खूबसूरत हैं । ,रूमी दरवाजे का निर्माण भी नवाब आसिफुद्दौला ने करवाया था । ,गंगोत्री समुद्र तल से 3200 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है । ,गंगोत्री का मौसम खासा ठंडा रहता है । ,गंगोत्री मंदिर के पट सवेरे 6.15 बजे से दोपहर 2 बजे तक और फिर दोपहर 3 बजे से रात साढे नौ बजे तक खुलते हैं । ,मंगलआरती सवेरे 6 बजे होती है लेकिन उस समय पट बंद रहते हैं । ,संध्याआरती शाम 7.45 बजे और ठंड बढने पर 7 बजे होती है । ,गंगोत्री जाने के लिए सबसे निकट का हवाईअड्डा जौली ग्रांट ( ऋषिकेश से 26 किलोमीटर दूर ) है । ,ऋषिकेश ( 249 किलोमीटर ) ही आखिरी रेल स्टेशन भी है । ,"उत्तरकाशी , टिहरी गढवाल और ऋषिकेश से गंगोत्री के लिए आसानी से बसें मिल जाती हैं ।" ,ठहरने के लिए गंगोत्री में हर किस्म के इंतजाम हैं । ,"लग्जरी होटल , बढ़िया होटल , सस्ते होटल , गेस्ट हाउस , धर्मशालाएँ , आश्रम सब कुछ ।" ,लेकिन यात्रा के दिनों में गंगोत्री में भीड़ भी खासी रहती है । sg,फूलों की घाटी का नाम तो आपने सुना ही होगा । ,जी हाँ चमोली जनपद की प्रसिद्ध तीर्थ स्थली बद्रीनाथ धाम के पास गंधमादन पर्वत पर स्थित फूलों की घाटी या वैली ऑफ फ्लावर्स । ,इतनी ही सुंदर पर अपेक्षाकृत कम प्रसिद्ध फूलों की एक और घाटी उत्तराखंड राज्य में उत्तरकाशी जनपद के मौरी विकास खंड स्थित टांस घाटी में है । ,जो हर की दून के नाम से पर्यटकों के बीच लोकप्रिय होती जा रही है । ,हर की दून जाने के दो मार्ग हैं । ,"एक मार्ग हरिद्वार से ऋषिकेश , नरेन्द्र नगर , चंबा , धरासू , बडकोट , नैनबाग से पुरौला तक ।" ,"और दूसरा देहरादून से मसूरी , कैंप्टी फॉल , नौगाँव , नैनबाग से पुरौला तक जाता है ।" ,पुरौला सुंदर पहाड़ी कस्बा है और चारों ओर पहाड़ों से घिरा बड़ा कटोरा जैसा लगता है । ,"बस्ती के चारों ओर धान के खेत , फिर चीड़ के वृक्ष और उनके ऊपर से झाँकती पर्वत श्रृखलाएँ ।" ,पुरौला से आगे है सांखरी जो हर की दून का बेस कैंप है । ,सांखरी तक बसें और टैक्सियाँ आती हैं । ,इसके बाद शुरू होती है लगभग 35 किमी. की ट्रैकिंग यानी पद यात्रा । ,यह खांई बद्यान क्षेत्र कहलाता है । ,खांई बद्यान क्षेत्र के सीधे - सादे निवासी अब भी आधुनिक सुख - सुविधाओं से वंचित हैं । ,सांखरी में आपको पोर्टर और गाइड मिल जाएँगे । sg,रात्रि विश्राम के बाद सुबह अपनी रोमांचक यात्रा शुरू कर सकते हैं । ,सांखरी समुद्रतल से 1700 मीटर की ऊँचाई पर है । ,सांखरी से प्रारंभ होता है गोविंद पशु विहार का क्षेत्र । ,गोविंद पशु विहार के क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए वन विभाग की अनुमति लेनी पड़ती है । ,सूपिन नदी को पार करते ही आप स्वप्न लोक में पहुँच जाते हैं । ,पूरे विश्व के पर्यटकों के लिये अनेक मौसम भारत में है । ,पर्यटन उद्योग को नया आयाम देने तथा अत्यन्त तीव्र गति से इसका विकास करने के उद्देश्य से सरकार ने पर्यटन उद्योग को निर्यात हाउस ( एक्सपोर्ट हाउस ) का दर्जा देने की घोषणा की है । ,"पर्यटन एक ऐसी यात्रा है , जो मनोरजंन या फुरसत के उद्देश्य का आनंद उठाने के लिए की जाती है ।" ,पर्यटन गैर निवासियों की यात्रा और उनके ठहरने से उत्पन्न सम्बन्ध और प्रक्रियाओं का योग है । ,आज पर्यटन विश्व का तेजी से आगे बढ़ रहा उद्योग है । ,500 करोड़ से अधिक पर्यटकों से संपूर्ण विश्व को होने वाली आय 3.5 खरब अमेरिकी डॉलर की है । ,पर्यटन भारत का विदेशी मुद्रा की आय कराने वाला तीसरा उद्योग है । ,भारतीय पर्यटन विकास एक ही छत के नीचे पर्यटन सेवाएँ और सुविधाएँ उपलब्ध कराने वाला एक अग्रणी पर्यटन संगठन है । ,"पर्यटन रोजगार के अवसर पैदा करने , गरीबी दूर करने और मानव विकास के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में उभरा है ।" ,"इंडिया गेट , दिल्ली - प्रथम विश्वयुद्ध में 9000 से अधिक शहीद भारतीय सिपाहियों की याद में निर्मित है ।" ,"13,516 सिपाहियों के नाम इंडिया गेट पर खुदे हुए हैं ।" sg,"42 मीटर ऊँचा स्मारक चारों ओर से पत्थर से घिरा है , जहाँ अनजान शहीदों की स्मृति में अमरज्योति जल रही है ।" ,"अमृतसर का स्वर्ण मन्दिर , सिक्ख तीर्थस्थलों में सर्वाधिक पवित्र है ।" ,"कुतुब मीनार , दिल्ली की सबसे शानदार यादगारों में से एक है ।" ,कुतुब मीनार का निर्माण दास वंश के कुतुबुद्दीन ऐबक ने विजय स्तम्भ के रूप में करवाया था । ,कुतुब मीनार की ऊँचाई 72.6 मीटर है । ,लाल पत्थर की पाँच मंजिला कुतुब मीनार कुरान की आयतों से अलंकृत है । ,"जंतर - मंतर , दिल्ली की सबसे प्राचीन वेधशाला है ।" ,जंतर - मंतर का निर्माण जयपुर के महाराजा जयसिंह द्वितीय ने सन् 1725 में करवाया था । sg,समय पर सही सूचना मिलने की स्थिति में जिला स्तर के संवाददाता प्रशासन का पक्ष भी ठीक से दे सकते हैं । sg,हिंदी इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया ने समाचार माध्यमों का नक्शा ही बदल दिया है । ,यह विडंबना ही है कि आजकल बाहर की चीज को अपने देश पर थोपना आसान समझा जाने लगा है । ,"विज्ञापनदाता यही चाहता है कि एक ही संदेश , एक ही किस्म की तस्वीर अगर दुनियाभर में चल सके तो बहुत अच्छा है ।" ,यह मीडिया का स्वभाव बन गया है । ,हिंदी में कार्यक्रम बनाना सबसे आसान है । ,"आप तरह - तरह की फिल्मों के टुकड़े लीजिए , गाने लीजिए , लड़कियों को खड़ा कर दीजिए जो स्प्रिंग की तरह बातें कर सकें और कार्यक्रम की भूमिका बना सकें ।" ,"जिन मुद्दों का आम लोगों से सरोकार है और जिन्हें कवर करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में यात्रा की आवश्यकता होती है , वहां टीवी के नेटवर्क अभी सही मायने में नहीं पहुंच पा रहे हैं ।" ,"वे तभी वहां पहुंचते हैं , जब कोई बहुत ही सनसनीखेज या सेक्सी बात हो ।" ,"सामूहिक बालात्कार की घटना हो अथवा हत्याओं की NULL , कैमरे तुरंत वहां तैनात कर दिए जाते हैं ।" ,"गंभीर अकाल होने पर समाचारों के अंत में एक कथा चला दी जाती है , लेकिन अकाल के लिए बन रहीं स्थितियों पर निरंतर काम नहीं होता ।" ,"अमेरिका में तीन - चार सौ टीवी चैनल स्थापित हो गए , लेकिन अखबारों का वजूद अब भी बना हुआ है ।" ,"यही नहीं NULL , नए अखबार भी पैदा हुए हैं ।" ,उनकी प्रसार संख्या भी बढ़ती गई । ,"भारत में इलेक्‍ट्रॉनिक समाचार माध्यमों ने समाज पर जो भी असर डाला हो , भाषा के साथ सबसे अधिक अन्याय किया है ।" ,"ब्रिटेन और फ्रांस पड़ोसी हैं , लेकिन उसके बाद भी ऐसा नहीं होता कि ब्रिटेन में जो कार्यक्रम प्रसारित होते हैं उसमें फ्रेंच या जर्मन शब्दों की भरमार हो ।" ,इसी तरह यदि फ्रांस में कोई कार्यक्रम फ्रेंच में पेश किया जाता है तो उसमें अन्य भाषाओं के शब्द नहीं मिलते हैं । ,बोलचाल में भाषा के नाम पर एक ऐसी खिचड़ी भाषा का उपयोग किया जा रहा है जिसे न हिंदी वाले ठीक से समझ सकते हैं और न ही अंग्रेजी वाले । ,इलेक्‍ट्रॉनिक समाचार माध्यम एक सशक्‍त माध्यम है । ,"जिन्हें अभी पढ़ना नहीं आता या जो अभी साक्षर भी नहीं हैं , वे भी इसके संपर्क में आते हैं ।" ,"एक समय ऐसा था कि लोग अखबारों से भाषा सीखते थे , अब भी सीखते हैं ।" ,फिर भारत में पत्रकारिता का विकास हुआ तो हिंदी के अखबारों ने कोशिश की कि उनमें भाषा का उपयोग हो जो लोग समझें । ,"लेकिन समाचार माध्यमों में भाषा के साथ जिस तरह का खिलवाड़ पिछले वर्षों के दौरान देखने को मिला है , वह चिंता का विषय है ।" ,"हम एक ऐसी भाषा , एक ऐसी संस्कृति बना रहे हैं जिसका इस देश से कोई सरोकार नहीं होगा ।" ,"संस्कृतनिष्‍ठ भाषा का उपयोग इन माध्यमों से हो , इस पक्ष में तो कोई भी नहीं है ।" ,पेशेवर पत्रकार इस बात के समर्थक हैं कि बोलचाल की भाषा का उपयोग होना चाहिए । ,सरकार में जिस तरह की अनुदित ठेठ हिंदी का उपयोग होता है वह इतनी जटिल होती है कि किसी को समझ में ही नहीं आ सकती । ,मक्‍के की खेती को कॉर्न की खेती बोलने का क्या लाभ है । ,कई बार भाषा का उपयोग हास्यास्पद ढंग से होता है । ,जैसे टूटे हुए दिल की बात करते समय ब्रोकन हार्ट से कही गई बात का उल्लेख हो । ,"ब्लैंक चेक का इस्तेमाल कई तरह से हो सकता है , लेकिन हिंदी में इसके अर्थ का अनर्थ हो सकता है ।" ,धारावाहिक कार्यक्रमों में फूहड़ भाषा का इस्तेमाल होने पर कोई नियंत्रण नहीं है । ,अमेरिका में यदि कोई ऐसा कार्यक्रम दिखाया जाए जिससे किसी का बच्‍चा बिगड़कर स्कूल छोड़कर घर आ जाए तो उस पर लोग अदालत में चले जाएंगे और लाखों डॉलर का हर्जाना भी मांगेंगे । ,"जो बाहर के अच्छे शब्द हैं हम उनका उपयोग कर सकें , उन शब्दों को अपने साथ ले सकें , लें , लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं है कि हम पूरी तरह से अपनी भाषा को नष्‍ट कर दें और इसे इतना विकृत बना दें कि आने वाली पीढ़ी हमें कभी क्षमा न करे ।" sg,इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया ने हमें अपसंस्कृति दी है । ,"हमारे बच्‍चों को हमसे बेगाना किया है , उनको ग्लोबल बना दिया है ।" ,इसके कारण परिवार टूट रहे हैं । ,लेकिन जब पश्‍चिमी आदर्श के अनुरूप विकास होगा तो ऐसी स्थितियां निश्‍चित रूप से बनेंगी । ,पहले भारतीय फिल्मों में आदर्श परिवार की कहानियां होती थीं । sg,इसमें अंतत: विवाह की संस्था को स्थापित आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया जाता था । ,अब भारत में प्रस्तुत होने वाले अधिकांश धारावाहिकों का मुख्य बिंदु शादियों का टूटना ही रह गया है । ,एक कटु सत्य यह भी है कि भारत में नौकरशाही की भूमिका निरंतर खतरनाक होती चली गई है । sg,दो प्रतिशत अंग्रेजी बोलने वाला यह वर्ग लोकतंत्र से चिढ़ता है । ,जन प्रतिनिधियों को यह गैर जिम्मेदार तथा अनपढ़ मानता है । ,वास्तव में नौकरशाही ब्रिटिश राज की व्यवस्था बनाए रखना चाहती है । ,हमारा देश वाचक परंपरा का देश रहा है । ,"हम लिखने पर विश्‍वास कम करते हैं , बोलने पर ज्यादा ।" ,हमारे यहां अधिकांश महाकाव्य बोलकर लिखे गए हैं । ,पश्‍चिमी देशों पर जब इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया का हमला हुआ तो कमोबेश उस समाज में शिक्षा का एक स्तर था और लोग कम से कम 90 प्रतिशत और कहीं - कहीं शत - प्रतिशत साक्षर थे । pl,वहां जब इसका हमला हुआ तो इसकी बुराइयां समाज ने झेल लीं । ,इतिहास में दर्ज स्वाधीनता आंदोलन की कई बड़ी घटनाओं से भी अमृतसर का वास्ता रहा है । sg,"दिल्ली की तरह अमृतसर भी कभी मजबूत चारदिवारी से घिरा होता था , जिसके 18 द्वार थे |" ,बादशाह अकबर से दान में मिली इस जमीन को बसाने की जिम्मेदारी सिखों के चौथे गुरू रामदास को सौंपी गई थी जिसे बाद में उनके पुत्र और सिखों के 5वें गुरू अर्जुन देवजी ने बसाया था । ,अमृतसर शहर पाकिस्तान की सीमा से लगा हुआ है । sg,पाकिस्तान की सीमा से लगे होने की वजह से सीमा पार होने वाली गतिविधियों का प्रभाव भी इस शहर को पड़ता है । ,अमृतसर एक व्यवसायिक और प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है । ,अमृतसर आने वाला हर सैलानी सबसे पहले स्वर्ण मंदिर को ही देखने पहुँचता है । ,1803 में पंजाब के शासक महाराजा रणजीत सिंह ने स्वर्ण मंदिर के आधे भाग को संगमरमर और आधे भाग को ताँबे से मढ़वाया था । sg,बाद में इस पर शुद्ध सोने की परत चढ़ाई गई । ,सोने की परत चढ़ने से इसे स्वर्ण मंदिर कहा जाने लगा । ,अनुमान है 400 किलोग्राम सोने का उपयोग इसमें किया गया है । ,अमृतसर के निकट ही पर्यटकों के लिए आकर्षण का एक और केन्द्र वाघा बार्डर है । ,भारत - पाकिस्तान सीमा पर वाघा बार्डर एक संयुक्त चौकी है । ,"वैसे तो यह चौकी दिन भर वीरान रहती है , लेकिन शाम होते - होते यह एकदम जीवंत हो उठती है ।" ,"इसका कारण है रोज शाम यहाँ होने वाले ध्वजारोहण , जिसे देखने के लिए शाम से पहले ही यहाँ पर्यटकों का हुजूम जुटने लगता है ।" ,शहर से करीब 32 किलोमीटर दूर स्थित यह चौकी ध्वजारोहण के समय एक समारोह स्थल के रूप में तब्दील हो जाती है । ,सीमा पर 2 लोहे के गेट लगे हैं । ,तिरंगे के रंगों से सजा गेट भारत की दिशा में है तथा हरे रंग पर चाँदसितारे वाला गेट पाकिस्तान की तरफ है । ,गेटों के मध्य दोनों देशों के राष्ट्रीय ध्वज फहरा रहे होते हैं । pl,पर्यटकों के आने पर सीमा पर देशभक्ति के गीत गूँजने लगते हैं । pl,ध्वजारोहण के समय सीमा सुरक्षा बल के जवान भारी लोहे के दरवाजों को खोलते हैं । ,उस समय पाकिस्तान की तरफ का द्वार भी खुलता है । sg,फिर दोनों देशों के जवान धीरे - धीरे अपना ध्वज फहराते हैं । sg,ध्वज फहराने के बाद पुनः सीमाद्वार बंद कर दिया जाता है । ,"ध्वजारोहण अपनेआप में एक अनोखी रस्म है , जिसे देखने विदेशी सैलानी भी पहुँचते हैं ।" ,ध्वजारोहण देखने के लिए टिकट या पास की जरूरत नहीं होती है । pl,स्वर्ण मंदिर के निकट स्थित सेंट्रल सिख म्यूजियम में सिखों द्वारा लड़ी गई विभिन्न लड़ाइयों के खूबसूरत चित्र पर्यटक देख सकते हैं । ,जलियावाला बाग एक राष्ट्रीय तीर्थ है । ,शहीदों के खून से सिंचित जलियावाला बाग की धरती से आज भी देशभक्ति की खूशबू आती है । ,"जलियावाला बाग में 13 अप्रैल , 1919 को ब्रिटिश जनरल डायर ने स्वतंत्रता सेनानियों की शांतिपूर्ण सभा पर अंधाधुंध गोलियाँ चलाकर अपनी बर्बरता का परिचय दिया ।" ,जलियावाला बाग में करीब 2 हजार निर्दोष स्त्रीपुरुष तथा बच्चों की जानें गई थीं । ,आज जलियावाला बाग में ज्योति के आकार जैसा करीब 35 फुट ऊँचा लाल पत्थर का स्मारक बना हुआ है । ,जलियावाला बाग में शहीदों की याद में एक ज्योति प्रज्ज्वलित रहती है । ,"इसके अलावा खूबसूरत बागों के बीच स्थित ’ दि एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स ’ , ’ खालसा कॉलेज ’ की भव्य इमारत ’ दि टावर आफ बाबाअटल ’ भी पर्यटक देख सकते हैं ।" ,अमृतसर का टेस्टीटेस्टी फूड बहुत प्रसिद्ध है । ,अमृतसर आने वाले पर्यटक ढाबों में बैठकर अमृतसरी छोले - भटूरों का स्वाद जरूर लेते हैं । ,लोगों के लिए ढाबों पर फ्राई की हुई अमृतसरी मछली स्पेशल है । ,अमृतसर की लस्सी के शौकीनों की भी कमी नहीं है । ,"गोल्डन टेंपल के पास बने बाजार में अचार , मुरब्बा , आमपापड़ , बड़ियाँ मिलती हैं जोकि भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में काफी पसंद की जाती हैं ।" ,अमृतसर में त्योहारों की धूम होती है । sg,अमृतसर में बैसाखी का त्योहार पूरे धूमधाम से मनाया जाता है । ,कहा जाता है कि किसानों की जो फसलें तैयार खड़ी होती हैं बैसाखी के दिन से उनकी कटाई शुरू कर दी जाती है । ,लोग बैसाखी उत्सव पर भांगड़ा नृत्य करते हैं और मस्ती करते हैं । ,"आगरा के लिए देश के मुख्य शहरों से इंडियन , जेट एअरवेज , सहारा इत्यादि सरकारी एवं प्राइवेट सभी प्रकार की सीधी विमान सेवा उपलब्ध है ।" ,आगरा दिल्ली - चेन्नई रेल मार्ग पर स्थित होने के कारण देश के सभी प्रमुख नगरों से रेल द्वारा जुड़ा है । ,दिल्ली से लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित आगरा एक ऐतिहासिक पर्यटन स्थल है । ,आगरा शहर जहाँ उर्दू के मशहूर शायर ’ मिर्जा गालिब ’ की जन्मस्थली रहा है वहीं मशहूर संगीतज्ञ उस्ताद फैयाज खान भी आगरा घराने के थे । ,मुगलकाल में आगरा मुगल साम्राज्य की राजधानी बनकर प्रसिद्ध हुआ । ,1526 में यह मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर के हाथों में आया था । ,1575 में अकबर ने आगरा में एक किले का निर्माण करवाया । ,शांति स्तूप बौद्ध धर्म में आस्था रखने वाले लोगों के लिए खासा महत्त्व रखता है । ,अगर आप बिहार घूमने आए हैं तो नालंदा और राजगीर घूमने का मजा एक दिन में ले सकते हैं । ,बिहार की राजधानी पटना से नालंदा की दूरी करीब 85 किलोमीटर है और फिर नालंदा से राजगीर की दूरी सिर्फ 19 किलोमीटर है । ,पटना के दक्षिणपूर्व में स्थित नालंदा के खंडहर आज भी अपने गौरवशाली इतिहास की कहानी बताते प्रतीत होते हैं । ,मुख्य भवन की सीढ़ियों पर चढ़ने से सुखद अनुभूति मिलती है । sg,दुनिया भर में मशहूर रहे नालंदा विश्वविद्यालय को गुप्त राजवंश के राजा कुमारगुप्त प्रथम ने 5वीं सदी में बनवाया था । ,नालंदा विश्वविद्यालय में करीब 700 साल तक शिक्षा - दीक्षा का काम चला और दुनिया भर से लोग यहाँ पढ़ने के लिए आते थे । ,प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग ने 12 साल शिक्षक के रूप में यहाँ बिताए थे । ,14 हेक्टेअर में फैले नालंदा के खंडहरों के आसपास घूमने के साथ - साथ अपने गौरवमयी इतिहास से रूबरू होना एक सुखद एहसास दे जाता है । ,"नालंदा की खुदाई में छात्रावास , पढ़ाई का कमरा , लेक्चर हाल , सभा कक्ष , बड़ा आंगन , आश्रम निकले थे ।" ,"विश्वविद्यालय परिसर की जलनिकासी व्यवस्था अव्वल दर्जे की थी , आज भी भवनों के खंडहरों में बारिश का पानी जमा नहीं होता है ।" ,जबकि हमारे देश के बड़े और आधुनिक शहर बारिश के मौसम में पानी में डूबते तैरते नजर आते हैं । ,बिहार के पक्षी विहार और नेशनल पार्क । ,बरैला और कावर झील बिहार के 2 बड़े और मशहूर पक्षी विहार हैं जहाँ देशविदेश के सैकड़ों प्रजातियों के पक्षी हर साल जमा होते हैं । ,बरैला और कावर झील पर्यटकों और पक्षी प्रेमियों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करते रहे हैं । ,"विश्व भर में पक्षियों की कुल प्रजातियाँ 8,600 हैं जिसमें से करीब 300 प्रजातियों के पक्षी हजारों - लाखों किलोमीटर का सफर तय कर के बरैला और कावर झील के पास हर साल जमा , होते हैं ।" ,बिहार के वैशाली जिले की बरैला झील पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्त्वपूर्ण है । ,बरैला झील को सलीम अली जुब्बा साहनी पक्षी आश्रयनी के नाम से जाना जाता है । ,पटना से 54 किलोमीटर दूर बरैला झील 12 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली हुई है । ,"बरैला झील कई प्रजातियों के पक्षियों का संगम स्थल है , जहाँ हर साल 25 से 30 प्रजातियों के पक्षी जमा होते हैं ।" ,"चीन , साइबेरिया , स्पेन , जापान , रूस एवं खाड़ी देशों से बड़ी संख्या में पक्षी बरैला झील की सुंदरता में चार चाँद लगाने के लिए जमा होते हैं ।" ,पर्यटक बरैला झील में नौका विहार का भी आनंद ले सकते हैं । ,पटना से टैक्सी के जरिए बरैला झील तक पहुँचा जा सकता है । ,बरैला झील का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हाजीपुर है । ,भारत के प्रमुख पक्षी विहारों में बिहार के बेगुसराय जिले की कावर झील भी है । ,अक्तूबर और मार्च महीने के बीच इस झील के पास 250 प्रजातियों के पक्षी जुटते हैं और पर्यटकों को लुभाते हैं । ,कावर विश्वप्रसिद्ध झील बेगुसराय के मंझौल अनुमंडल के चेरिया बरियारपुर प्रखंड में स्थित है जो पटना से करीब 120 किलोमीटर दूर है । ,"टैक्सी , सरकारी और प्राइवेट बस के जरिये कावर झील पहुँचने की सुविधा रातदिन उपलब्ध है ।" ,कावर विश्वप्रसिद्ध झील का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन बरौनी है । ,नेपाल सीमा से सटे बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में स्थित वाल्मीकि नेशनल पार्क सूबे का इकलौता टाइगर प्रोजेक्ट है । ,वाल्मीकि नेशनल पार्क 338 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है । ,वाल्मीकि नेशनल अभ्यारण्य को वर्ष 1989 में नेशनल पार्क का दर्जा मिला था । sg,"वाल्मीकि नेशनल पार्क में वर्ष 1973 में टाइगर प्रोजेक्ट शुरू किया गया था , जहाँ आज भी बाघ और उसके समूचे परिवेश को संरक्षित करने की दिशा में काम चल रहा है ।" pl,"पार्क में बाघ , तेंदुआ , गैंडा , चीतल , सांभर , नीलगाय , हिरण आदि जंगली जानवरों को खुले में चरते - विचरते , अठखेलियाँ करते , शिकार करते आसानी से देखा जा सकता है ।" ,वाल्मीकि नेशनल पार्क पटना से 260 किलोमीटर दूर है । ,प्राइवेट और सरकारी बस सेवा के साथ प्राइवेट टैक्सी हर समय मिल जाती है । ,वाल्मीकि नेशनल पार्क से नजदीकी रेलवे स्टेशन रक्सौल है । ,"रांची कोलकाता , दिल्ली , मुंबई और पटना से हवाई मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है ।" pl,देश के मुख्य शहरों से रांची रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है । ,रांची में प्रमुख धर्मशालाएँ । ,"अग्रसेन भवन , नागरमल मोदी सेवा सदन के पास ." ,"मारवाड़ी ब्राह्मण सभा , अपर बाजार , रांची ." ,"रतनलाल जैन स्मृति भवन , रातू रोड , रांची ." ,"पोद्दार स्मृति भवन , चुटिया , रांची ." ,रांची अक्तूबर से अप्रैल माह के बीच जाना बेहतर रहता है । sg,झारखंड की राजधानी रांची के पर्यटन स्थल अभी शहरीकरण के दुष्प्रभाव से काफी हद तक बचे हुए हैं । pl,"रांची के जंगल , पहाड़ , जलप्रपात और खूबसूरत वादियाँ पर्यटकों को हमेशा से अपनी ओर खींचते रहे हैं ।" ,"समुद्रतल से 2,140 फुट की ऊँचाई पर बसे रांची में कई छोटीबड़ी नदियाँ बहती हैं और घाटियों से घिरा हुआ है ।" ,रांची से 46 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दशमप्रपात की खासियत यह है कि यहाँ पर 144 फुट की ऊँचाई से पानी गिरता है और कांची नदी का रूप धर लेता है । ,हुंडरू फॉल रांची से 40 किलोमीटर दूर है । ,"पाइप द्वारा धूम्रपान जो अभी तक धूम्रपान के ताज़ा रूपों में से एक है , को अक्सर गंभीर चिंतन , बुढ़ापे से जोड़ कर देखा जाता है और इसे अक्सर विचित्र और पुरातन माना जाता है ।" ,"सिगरेट धूम्रपान , जो 19वीं सदी के अंत तक बड़े पैमाने पर नहीं शुरू हुआ था , दुनिया में आधुनिकता और औद्योगिक तेज़ी से अधिक जुड़ा है ।" ,"सिगार पहले तथा अभी भी पुरुषत्व , शक्ति और पूंजीवादी छवि के साथ जुड़े माने जाते रहे हैं ।" ,लम्बे समय से सार्वजनिक रूप से धूम्रपान पुरुषों के लिए आरक्षित रहा है और जब कुछ महिलाओं द्वारा किया जाता है तब इसे संकीर्णता के साथ जोड़ा जाता है । ,जापान में इडो अवधि के दौरान वेश्या और उनके ग्राहक अक्सर भेष बदल कर एक दूसरे को सिगरेट पेश करने के बहाने मिलते थे तथा 19वीं सदी के यूरोप के लिए भी यही बात सच थी । ,धूम्रपान के शुरूआती चित्रण 9वीं शताब्दी के प्राचीन मायन ( Mayan ) मिट्टी के बर्तनों पर पाए जा सकते हैं । ,कला मुख्य रूप से धार्मिक प्रकृति की थी और इसमें देवताओं या शासकों को सिगरेट के शुरूआती रूपों का धूम्रपान करते हुए दर्शाया गया था । ,अमेरिका के बाहर धूम्रपान की शुरुआत के तुरंत बाद इन्हें यूरोप तथा एशिया के चित्रों में देखा जाने लगा । ,डच गोल्डन युग के चित्रकार लोगों के चित्र बनाने वाले उन पहले चित्रकारों में से एक थे जो लोगों को धूम्रपान तथा पाइप और तम्बाकू के साथ चित्रित करते थे । ,"17वीं सदी के दक्षिणी यूरोपीय चित्रकारों के लिए , ग्रीक और रोमन प्राचीन काल से पौराणिक कथाओं से प्रेरित हो कर रूपांकनों में सिगरेट को शामिल करना अधिक आधुनिक था ।" ,शुरुआत में धूम्रपान को नीचता माना गया था और इसे किसानों के साथ जोड़ा जाता था । ,कई प्रारंभिक चित्र मद्यपान गृहों या वेश्यालयों के दृश्यों के थे । ,"बाद में , जब डच गणराज्य ने काफी शक्ति और धन प्राप्त कर लिया तो धूम्रपान करने वाले संपन्न और शौक़ीन सज्जनों के सुन्दर चित्र बने जिसमें वे पाइप उठाते हुए प्रदर्शित किये जाते थे ।" ,"धूम्रपान आनंद , क्षणस्थायता और सांसारिक जीवन की संक्षिप्तता का प्रतिनिधित्व करता है , क्योंकि ये सब धुएं में उड़ जाते हैं ।" ,धूम्रपान सूंघने तथा इसके स्वाद की भावना के प्रदर्शन से भी जुड़ा है । ,18वीं सदी की चित्रकला में धूम्रपान और अधिक विरल हो गया चूंकि सुरुचिपूर्ण रूप से सूंघना और लोकप्रिय बन गया । ,पाइप द्वारा धूम्रपान एक बार फिर निचले दर्जे के साधारण और देशी लोगों के चित्रों में परिवर्तित हो गया तथा कटे हुए तम्बाकू को सूंघने के बाद सफाई से छींकना एक दुर्लभ कला थी । ,जब धूम्रपान आया तो यह अक्सर पूर्व से प्रभावित विदेशी चित्रों से प्रभावित था । ,औपनिवेशिक -JOIN सिद्धांत के कई समर्थकों का विवादास्पद रूप से मानना है कि यह चित्रण यूरोप का अपने उपनिवेशों पर श्रेष्ठता का प्रभाव तथा नारीत्व पर पुरुष प्रभुत्व जताने का ढंग था । ,"वे 19वीं सदी के विदेशी और "" दूसरे "" विषयों में विश्वास रखते थे , जो कि आत्मज्ञान के दौरान एथनोलॉजी की लोकप्रियता में वृद्धि के साथ प्रसिद्ध हुए थे ।" ,19वीं सदी में धूम्रपान साधारण आनंद के एक प्रतीक के रूप में आम था । ,"पाइप का धूम्रपान करता हुआ "" कुलीन दैत्य "" , प्राचीन रोमन खंडहरों में गंभीर चिंतन करते हुए , पाइप का कश लगाते हुए चित्र कलाकारों के दृश्यों में से एक बन गए ।" sg,नव सशक्त मध्यम वर्ग ने भी स्मोकिंग सैलून तथा पुस्तकालयों में हानिरहित आनंद का एक नया आयाम ढूंढ लिया । ,"सिगरेट धूम्रपान या सिगार बोहेमियन ( bohemian ) से भी जुड़ गया , कोई ऐसा जिसने रूढ़िवादी मध्य वर्ग को त्यागा तथा रूढ़िवाद के प्रति अपमान प्रदर्शित किया ।" ,लेकिन यह ऐसी खुशी थी जो केवल पुरुषों की दुनिया तक ही सीमित थी । ,धूम्रपान करने वाली महिला को वेश्यावृति के साथ जोड़ कर देखा जाता था और यह ऐसी क्रिया नहीं मानी जाती थी जिसमें सही महिलाएं खुद को शामिल करें । ,ऐसा सदी के अंत तक नहीं हुआ कि धूम्रपान करने वाली महिलाएं चित्रों और फोटो में ठाठ से और आकर्षक रूप से दिखाई दें । sg,"विन्सेन्ट वैन गॉग जैसे प्रभाववादी , जो खुद पाइप धूम्रपान करते थे , उदासी और "" fin -JOIN du-siècle "" भाग्यवाद से प्रेरित हो कर धूम्रपान से जुड़ गए ।" ,"जबकि सिगरेट , पाइप और सिगार के प्रतीकों को क्रमशः 19वीं सदी तक एक ही समझा जाता था , 20वीं सदी तक के कलाकारों के लिए इसका पूरी तरह से उपयोग शुरू नहीं हुआ था ।" ,"एक पाइप सावधानी और शान्ति का प्रतीक था , सिगरेट आधुनिकता , ताकत और यौवन का प्रतीक था , किन्तु यह बेचैनी का भी प्रतीक था ; सिगार अधिकार , धन और सत्ता का प्रतीक था ।" sg,"द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के दशकों के दौरान , जब धूम्रपान अपने चरम पर था किन्तु अभी इसका धूम्रपान विरोधी आन्दोलनों से पाला नहीं पड़ा था , लापरवाही से होठों के बीच रखी एक सिगरेट युवा विद्रोह को दर्शाती थी , जो मार्लोन ब्रांडो तथा जेम्स डीन या मार्लबोरो व्यक्ति जैसे विज्ञापन के आधार की प्रतीक थी ।" ,धूम्रपान के नकारात्मक पहलू 1970 के दशक तक प्रकट होने लगे थे । sg,"अस्वास्थ्यकर निचले वर्ग , जो सिगरेट का धुंआ छोड़ते थे , विशेषकर धूम्रपान विरोधी अभियानों से प्रेरित या उनके द्वारा लगाये गए चित्रों से प्रेरणा तथा उत्साह की कमी महसूस करते थे ।" ,"मूक फिल्मों के युग से ही , धूम्रपान फिल्म प्रतीकों का एक मुख्य हिस्सा रहा है ।" ,"रोमांचक फिल्म "" नोयर "" जैसी फिल्मों में , सिगरेट का धुआँ अक्सर चरित्र को दर्शाता है तथा यह अक्सर रहस्य का आवरण या शून्यवाद दर्शाने के लिए भी प्रयुक्त होता है ।" ,"इनमें से एक अग्रणी प्रतीक फ्रिट्ज़ लैंग की वेइमार एरा "" डॉ माब्यूस , देर स्पाइलर "" , ( Weimar era Dr Mabuse , der Spieler ) 1922 ( "" डॉ माब्यूस , द गैम्बलर "" ) में देखा जा सकता है , जब लोग जुआ खेलने के दौरान पत्ते खेलने के साथ धूम्रपान करते हुए जुआरी को देख कर चकित हो जाते हैं ।" pl,"शुरुआत में फिल्म में धूम्रपान करने वाली महिलाओं को भी उत्तेज़कता तथा मोहक कामुकता से जोड़ कर देखा जाता था , जिनमें से सबसे विशेष जर्मन फिल्म स्टार मार्लीन डाईट्रिच थीं ।" ,"इसी तरह , हम्फ्रे बोगार्ट और ऑड्री हेपबर्न जैसे अभिनेताओं को उनकी धूम्रपान वाली छवि के साथ बारीकी से चित्रित किया गया है और उनके कुछ सबसे प्रसिद्ध चित्रों तथा भूमिकाओं में सिगरेट के धुएं की एक घनी धुंध दिखाई देती है ।" sg,"हेपबर्न ने एक सिगरेट धारक के रूप में , विशेषकर ब्रेकफास्ट एट टिफ़नी'स ( Breakfast at Tiffany's ) नामक फिल्म में , अक्सर ग्लैमर बढ़ाया |" ,"धूम्रपान सेंसरशिप को खत्म करने के लिए भी प्रयोग में लाया जा सकता था , क्योंकि दो सिगरेटों का एक ऐश ट्रे में जलना अक्सर यौन गतिविधि को ' दर्शाता ' था ।" ,"द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से , स्क्रीन पर धूम्रपान के दृश्य धीरे -JOIN धीरे कम हो गए , चूंकि धूम्रपान के स्पष्ट स्वास्थ्य खतरे अब व्यापक हो गए थे ।" ,"धूम्रपान विरोधी अभियान को अधिक से अधिक सम्मान और प्रभाव मिलने के कारण , स्क्रीन पर धूम्रपान को नहीं दिखने के जागरुक प्रयास किये जा रहे हैं ताकि धूम्रपान को प्रोत्साहन न मिले , विशेषकर पारिवारिक फिल्मों में या फिर इसे सकारात्मक रूप से दिखाया जाता है ।" ,आज के दौर में स्क्रीन पर धूम्रपान करने वाले चरित्र अक्सर असामाजिक या आपराधिक होते हैं । ,"सिर्फ कल्पना के अन्य प्रकार के रूप में , धूम्रपान का साहित्य में महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है और धूम्रपान करने वाले चरित्रों को अक्सर महान व्यक्तित्व , या सनकी , या विशेष रूप से सबसे प्रमुख व्यक्ति जैसे शर्लक होम्स के रूप में दिखाया जाता था ।" ,"छोटी कहानियों और उपन्यासों का एक हिस्सा बनने के अलावा , धूम्रपान साहित्य अंतहीन प्रशंसाओं तक फैला हुआ है , जिसमें इसके गुणों तथा एक समर्पित धूम्रपान करने वाले के रूप में लेखक की पहचान की पुष्टि की जाती है ।" pl,"विशेष रूप से 19वीं शताब्दी के अंत और शुरुआती 20वीं सदी में , धूमधाम से "" टोबेको : इट्स हिस्टरी एंड एसोसिएशंज़ "" ( Tobacco : Its History and associations ) ( 1876 ) , "" सिगरेट्स इन फैक्ट एंड फैंसी "" ( Cigarettes in Fact and Fancy ) ( 1906 ) और "" पाइप एंड पाउच : द स्मोकर्स ओन बुक ऑफ़ पोइट्री "" ( Pipe and Pouch : The Smokers Own Book of Poetry ) ( 1905 ) जैसी किताबें अमेरिका और ब्रिटेन में लिखी गई थीं ।" ,"शीर्षकों को पुरुषों द्वारा अन्य पुरुषों के लिए लिखा गया था और इसमें सामान्य गपशप व धूम्रपान के प्रति प्रेम के काव्य चिंतन और इससे संबंधित सभी चीज़ें शामिल हैं , तथा साथ ही परिपक्व अविवाहित जीवन की निरंतर सराहना की गई है ।" ,""" द फ्रेगरेन्ट वीड : सम ऑफ़ द गुड थिंग्स विच हैव बीन सेड ओर संग अबाउट टोबेको "" , ( The Fragrant Weed : Some of the Good Things Which Have been Said or Sung about Tobacco ) 1907 में प्रकाशित हुई , इसके साथ और बहुत सी पुस्तकों के अलावा , टॉम हाल द्वारा लिखी गई "" ए बैचलर्स व्यू "" ( A Bachelor's Views ) नामक कविता की निम्न पंक्तियां बाकी सभी पुस्तकों से कुछ विशिष्ट हैं ।" ,"ये सभी कार्य एक युग में प्रकाशित किये गए थे जिसके बाद , सिगरेट तम्बाकू की खपत का प्रमुख साधन बन गयी तथा पाइप , सिगार और तम्बाकू चबाना अभी भी सामान्य बात है ।" ,ज्यादातर पुस्तकें उपन्यास पैकेजिंग के रूप में प्रकाशित हुईं जो पढ़े लिखे सज्जनों को आकर्षित करती थीं । ,""" पाइप एंड पाउच "" ( Pipe and Pouch ) तम्बाकू की थैली से मिलते जुलते चमड़े के बैग में आई तथा "" सिगरेट्स इन फैक्ट एंड फैंसी "" ( Cigarettes in Fact and Fancy ) ( 1901 ) पुस्तक के कवर पर चमड़ा मढ़ा हुआ था जो एक नकली सिगारनुमा डिब्बे में पैक की गई थी ।" ,"1920 के दशक के अंत में , साहित्य के इस प्रकार के प्रकाशन बड़े पैमाने पर घटते चले गए और बाद में केवल 20वीं शताब्दी में अनियमित अवधियों में पुनर्जीवित किये जा सके ।" ,"शुरूआती आधुनिक समय के संगीत में तम्बाकू के कुछ उदहारण हैं , हालांकि वे टुकड़ों में खास मौकों पर प्रदर्शित किये गये हैं जैसे जोहान्न सेबेस्टियन बाक का "" एडीफाइंग थोट्स ऑफ़ ए टोबैको -JOIN स्मोकर "" ( Edifying Thoughts of a Tobacco -JOIN Smoker ) ।" ,"हालांकि , शुरुआती 20वीं सदी और उसके बाद से धूम्रपान लोकप्रिय संगीत के साथ जुड़ा रहा है ।" sg,शिमला पर्यटकों के लिए एक अद्भुत अनुभव प्रदान करता है । ,1819 में जब अंगरेजों ने शिमला की खोज की थी तब यहाँ ऊँचे - ऊँचे देवदार और चीड़ के घने पेड़ों के अलावा कुछ नहीं था । ,अंगरेजों ने शिमला को बसाया और 1864 से 1939 तक यह शहर कोलकाता की गर्मी से बचने के लिए अंगरेजों की शीतकालीन राजधानी बना रहा । ,अपनी सुविधा के लिए अंग्रेजों ने शिमला को 1903 में ही रेलवे लाइन द्वारा पूरे देश से जोड़ दिया था । ,देश आजाद होने पर शिमला पंजाब राज्य का हिस्सा था । ,1966 के बाद इसे भारत सरकार ने हिमाचल प्रदेश की राजधानी घोषित किया । ,"समुद्रतल से 2 , 159 मीटर की ऊँचाई पर स्थित होने के कारण शिमला ठंडी जलवायु वाला नगर है ।" ,लंबीचौड़ी अर्धचंद्राकार पहाड़ी पर बसा शिमला आज काफी घनी आबादी वाला शहर बन चुका है । ,शिमला की स्वास्थ्यवर्धक जलवायु और हिमालय के आसपास की संरचना इसे दूसरे पर्यटन स्थलों से अलग बनाती है । ,औपनिवेशिक काल के दौरान बना शिमला शांति की तलाश में लोगों के लिए एक स्वर्ग है । ,शिमला का रिज एरिया 2 मुख्य सड़कों के साथ 12 किलोमीटर की लंबाई पर फैला हुआ है । ,"दिल्ली , पंजाब या उत्तर प्रदेश से शिमला पहुँचने का रास्ता चंडीगढ होकर जाता है ।" ,"छोटी लाइन देवदार , अखरोट , पाइंस , खुबानी के पेड़ों के बीच से गुजरती है , जहाँ पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य का पूरा लुत्फ उठाते है ।" ,शिमला की प्राकृतिक खूबसूरती को निहारने के लिए पर्यटक कालका से छोटी लाइन का भी इस्तेमाल करते हैं । ,"शिमला का शापिंग हब माल है , जो रिज के साथ बसा है और यहाँ पर्यटकों की भीड़ दिखाई देती है ।" ,शिमला का रिज और माल रोड वाला हिस्सा पर्यटकों की आवाजाही से गुलजार रहता है । ,माल रोड पर वाहन नहीं चलने के कारण पर्यटक पैदल ही शिमला की खूबसूरती निहारते हुए खरीददारी करते चलते हैं । ,शिमला का मसीहा चर्च 1846 से लेकर 1857 के बीच 11 साल में बना । ,शिमला का मसीहा चर्च प्रसिद्ध ऐतिहासिक और उत्तर भारत का दूसरा पुराना चर्च है । ,विश्व के सबसे पुराने नाटकघरों में एक शिमला का गेयटी थियेटर माल रोड पर स्थित है । ,जाखू चोटी पर जाने के लिए स्कैंडल प्वाइंट पर्यटकों के लिए एक ठौर है । ,"रिज पर इस मैदान पर अकसर ग्रीष्म उत्सव , राजकीय समारोह और फिल्मों की शूटिंग की जाती है ।" ,जाखू चोटी शिमला की सबसे ऊँची पर्वतचोटी है । ,शिमला से 2 किलोमीटर की दूरी पर और 8 हजार फुट की ऊँचाई पर स्थित जाखू हिल जहाँ देवदार के ऊँचे पेड़ों के लिए मशहूर है वहीं प्रकृति प्रेमियों के लिए उपयुक्त स्थान है । ,स्कैंडल प्वाइंट वाली दिशा पर 2 किलोमीटर आगे 1947 में खोला गया राज्य संग्रहालय दिन भर खुला रहता है । pl,राज्य संग्रहालय में लगभग 9 हजार वस्तुओं को संग्रहीत किया गया है । ,"यहाँ हिमालय की प्राचीन , दुर्लभ कलात्मक वस्तुओं और पुस्तकों का संग्रह है ।" ,"यहाँ रखे चित्र , दस्तकारियाँ और आदमकद मूर्तियाँ पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र हैं ।" ,संग्रहालय शिमला से 67 किलोमीटर की दूरी पर है । ,चाडविक फॉल्स शिमला से 67 किलोमीटर की दूरी पर है । ,शिमला से 5 किलोमीटर दूर स्थित समर हिल एक सुंदर स्थान है । ,"6 , 500 फुट की ऊँचाई पर स्थित समर हिल स्थान हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कारण भी प्रसिद्ध है ।" ,शिमला से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इंदिरा हॉली डे होम देवदार के जंगलों के बीच एक अच्छा पर्यटन स्थल है । ,इंदिरा हॉली डे होम में एक मिनी चिड़ियाघर भी है । ,याक और टट्टू की सवारी का लुत्फ़ भी इंदिरा हॉली डे होम में आकर उठाया जाता है । ,"समुद्रतल से 2,250 मीटर की ऊँचाई पर स्थित चैल शिमला से 65 किलोमीटर दूर बसा है ।" sg,चैल जैसे शानदार सैरगाह को पटियाला रियासत के राजा भूपेंद्र सिंह ने अपने ग्रीष्मकालीन सैरगाह के रूप में बसाया था । ,चैल महल को 1972 में सरकारी संपत्ति घोषित किया गया । ,शिमला का वन्यजीव अभ्यारण्य देखने योग्य है । ,शिमला से 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कुफ़री चैल के रास्ते में ही पड़ता है । ,कुफ़री सुंदर स्थान बर्फ़ के खेलों और कुदरती नजारों के लिए मशहूर है । ,"कुफ़री की ढलानें , मुलायम घास और कुदरती फूलों से भरी हैं जिनका लुत्फ़ पर्यटक खूब उठाते हैं ।" ,कुफ़री में आलू अनुसंधान केन्द्र है साथ ही 20 हेक्टेअर में फैला चिड़ियाघर भी पर्यटकों के आर्कषण का केन्द्र है । pl,कुफ़री के चिड़ियाघर में लगभग 140 जंगली जानवरों को रखा गया है । ,"तिब्बती भेड़िया , ब्राउन बियर , बारकिंग डियर , याक , काला भालू , तेंदुआ आदि इन जानवरों में शामिल है ।" ,शिमला से 23 किलोमीटर दूर नालदेहरा का गोल्फ कोर्स बेहद मशहूर है । ,9 छिद्रों वाले इस गोल्फ कोर्स तक जाने के लिए नियमित बस सेवा है । ,"कोनीफर्स , विशाल देवदारो के बीच बना यह गोल्फ मैदान सैरसपाटे के लिए अद्वितीय जगह है ।" ,कोनीफर्स में पर्यटक रुकना चाहें तो रुक भी सकते हैं । ,कोनीफर्स में एचपीडीसी के रेस्तराँ और होटल हैं । ,"हालांकि , अपनी पहली चार पारियों में वे कुल 27 रन ही बना सके , लेकिन उनके साथी खिलाड़ियों को उनकी काबीलियत पर पूरा भरोसा था ।" ,"हेमंड भले ही सेक्स के आदी रहे हों , लेकिन वे कभी किसी का नुकसान नहीं चाहते थे ।" ,1932 के बॉडीलाइन टूर पर हेमंड ने कप्तान डगलस जार्डीन की क्रूर रणनीति की खिलाफत की थी । ,"हालांकि , उस समय तो वे अपनी भावनाओं को छुपा गए , लेकिन 1946 में उन्होंने इस मामले में अपनी चुप्पी तोड़ी थी ।" ,"हेमंड ने अपने करियर में 85 मैच खेले , जिनकी 140 पारियों में उन्होंने 58.45 के औसत से 7249 रन बनाए ।" ,"उन्होंने करियर में 22 सेंचुरी लगाईं , जिनमें से 10 टीम की जीत के काम आईं ।" ,दरअसल आईपीएल में शानदार बल्लेबाजी करने का इनाम रोहित को चैंपियंस ट्रॉफी की टीम में एंट्री के साथ मिला था । ,धोनी ने रोहित को ओपनिंग की भूमिका में आजमाकर यह तय कर दिया कि रोहित प्लेइंग इलेवन में बने रहें । ,चैंपियंस ट्रॉफी के पांच मैचों में दो पचासों के साथ 193 रन बनाकर धोनी के फैसले को सही साबित भी किया । ,शिखर धवन के साथ उनकी ओपनिंग पूरे टूर्नामेंट में शानदार रही लेकिन इसके बाद भी रोहित लगातार एक चूक कर सारे किए कराए पर पानी फेरने पर अमादा हैं । ,जो गलती रोहित चैंपियंस ट्रॉफी में कर रहे थे वही इंडीज के साथ मैच में भी दिखाई दी । ,दरअसल रोहित अपने विकेट की कीमत नहीं समझ रहे हैं और अच्छी शुरुआत करने के बाद खराब शॉट खेल कर आउट हो रहे हैं । ,यही कारण है कि वे पिछले छह मैचों में तीन अर्धशतक और एक बार 30 प्लस स्कोर बनाकर भी बड़ी पारी नहीं खेल पाए हैं । ,दूसरी ओर शिखर धवन ने अपने विकेट की कीमत समझते हुए ही सफलता का नया मुकाम हासिल कर लिया है । ,रोहित की यही गलती इंडीज के साथ मैच में भी दिखाई दी । ,इंडीज के खिलाफ मैच में भी रोहित ने गजब का टेम्परामेंट दिखाया । ,धवन और कोहली के सस्ते में आउट होने के बाद कार्तिक और रैना के साथ मिल रोहित ने पारी को संभाला और पचासा भी ठोका लेकिन उसके बाद वही हुआ जिसके लिए रोहित बदनाम हो रहे हैं । ,इंडीज के खिलाफ रोहित शानदार पारी खेलने के बाद डैरेन सैमी के ओवर की पांचवी गेंद पर आउट हुए । ,इस ओवर में पहले ही 17 रन बन चुके थे । ,"ऐसे में रोहित ने जो लॉफ्टेड शॉट खेला , ओवर की आखिरी गेंद पर उसकी कोई जरूरत नहीं थी ।" ,मैच की कॉमेंट्री कर रहे रमीज राजा और अरुण लाल ने भी रोहित के इस रवैये पर निराशा जाहिर की थी । ,पारी के बाद अजय जडेजा ने भी रोहित के इस तरह शॉट खेलने को बचकाना करार देते हुए कहा था कि रोहित को जरूर कोच से डांट पड़ेगी । ,1976 में इंग्लैंड के लिए जॉन लेवर नाम के गेंदबाज ने डेब्यू किया था । ,मेजबान टीम इंडिया दिल्ली और कोलकाता में मिली शिकस्त के बाद सीरीज में 0 - 2 से पीछे थी । ,क्रिकेट के खेल में गेंद को चमकाने के लिए खिलाड़ी अपने थूक या पसीने का इस्तेमाल कर सकता है । ,आईसीसी ने खिलाड़ियों को यह छूट दे रखी है । ,इसी नियम को तोड़मरोड़ कर लेवर ने अपने फायदे के लिए उपयोग किया था । ,लेवर चेन्नई में हुए मैच में सिर पर बैंड लगा कर उतरे थे । ,हैडबैंड के नीचे उन्होंने चुपके से वेसलीन छुपा ली थी । ,वे बार - बार गेंदबाजी करते हुए बैंड के अंदर हाथ लगा रहे थे । ,भारत के कप्तान बिशन सिंह बेदी ने इसे नोटिस किया और अंपायर से शिकायत की । ,जांच पर लेवर की वेसलीन की पोल खुल गई । ,"वेसलीन के कारण लेवर को जमकर स्विंग मिल रही थी , जो कि भारतीय बल्लेबाजों को मुश्किल में डाल रही थी ।" ,बाद में खुलासा हुआ कि लेवर ने दिल्ली और कोलकाता में हेयर लोशन का इस्तेमाल किया था । ,उसी के दम पर उन्होंने अपने डेब्यू पर 10 विकेट चटकाए थे । ,दिल्ली टेस्ट में उन्होंने पहली पारी में 76 रन देकर 7 विकेट चटकाए थे तो दूसरी पारी में उन्हें महज 24 रन के खर्च पर 3 विकेट मिले थे । ,"बेईमानी से ही सही , लेवर ने इंग्लैंड के लिए डेब्यू टेस्ट में बेस्ट बॉलिंग का रिकॉर्ड बनाया था , जिसे 1995 में डॉमिनिक कॉर्क ने महज 3 रन कम खर्च कर तोड़ा ।" ,1994 में इंग्लैंड के ही माइकल एथर्टन ने बतौर कप्तान बॉल टेंपरिंग की । ,साउथ अफ्रीका के खिलाफ लॉर्ड्स में हुए टेस्ट मुकाबले में एथर्टन की हरकत कैमरे में कैद हुई थी । ,वे जेब में से कुछ पाउडर निकाल कर गेंद पर घिसते पाए गए थे । ,"हालांकि , एथर्टन ने आरोप को नकारा था , लेकिन बाद में उनका सच सामने आ गया ।" ,मैच रैफरी ने उन पर 2000 पाउंड का फाइन लगाया था । ,2001 में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर पर टेंपरिंग का आरोप लगा था । ,साउथ अफ्रीका टूर पर पोर्ट एलिजाबेथ में हुए टेस्ट में मैच रैफरी माइक डेनिस ने सचिन पर एक मैच का प्रतिबंध लगाया था । ,सचिन गेंद की सीम को कुरेदते हुए कैमरे में कैद हुए थे । ,"हालांकि , वह टूर विवादों से भरा रहा था ।" ,"डेनिस ने ही टीम इंडिया के कई सितारों पर फिजूल की कार्रवाई की थी , जिसके बाद उन पर नस्लभेद का आरोप लगा था ।" ,"नतीजतन , टूर के तीसरे टेस्ट से माइक डेनिस पर स्टेडियम के अंदर जाने पर प्रतिबंध लग गया ।" ,अगस्त 2006 में पाकिस्तानी टीम पर गेंद के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगा । ,इंग्लैंड के खिलाफ उस टेस्ट में मैच के दौरान अंपायर डेरेल हेयर और बिली डॉक्ट्रोव ने इंजी को पूर्व चेतावनी दिए बगैर गेंद छीन ली थी और इंग्लैंड टीम को 5 रन अतिरिक्त बतौर पेनाल्टी दे दिए थे । ,चार्ली के गीत में गिनती रुकती जाकर ‘ बारा ‘ पर और तुक मिलती है इस तरह - ‘ तेरी नज़र ने मुझको मारा ‘ इसके बाद फिर उलटी गिनती शूरू होती है ‘ बारा ‘ से और जाकर रुकती है ‘ एक ‘ पर तुक मिलती हुई लाइन आती है - ‘ मेरी तरफ़ ज़रा तो देख ‘ । ,ए. आर. कारदार की 1943 की फिल्म ‘ संजोग ‘ में वे प्रसिद्ध हीरोइन मेहताब के हीरो थे । ,"इस फिल्म में चार्ली के गाए गीत ‘ ओ दिले नादाँ - 3 , पलट तेरा ध्यान किधर है भई ! ` बेहद लोकप्रिय हुआ ।" ,असल में यह जुमला ‘ पलट तेरा ध्यान किधर है ‘ चार्ली का तकिया कलाम था । ,अगर थोड़ा पीछे मुड़ के देखें और याद करें तो आपको भी याद आ जाएगा कि इस जुमले का इस्तेमाल बाद की ढेर सारे फिल्मी गीतों में हुआ है । ,साथ ही जिन लोगों ने तांगे वाला दौर देखा है उन्हें तो बखूबी याद होगा कि ये जुमला किस कदर इस्तेमाल होता था । ,"इसी फिल्म में नौशाद साहब ने चार्ली के साथ सुरैया से एक रोमांटिक गीत ‘ उड़ते हुए पंछी कौन उनको बताए / जो पास में बैठे हैं , दिल उनका हुआ जाए । ‘" ,आज के दौर में इस पूरे सत्तर साल पुरानी फिल्म को देखना घर में टंगी बाप - दादों की पुरानी तस्वीरों के जरिए हाथ से फिसलकर निकल चुके वक्त को फिर से जीने जैसा लगता है । ,"मुझे तो ख़ासकर तब मजा आता है , जब फिल्म में सुपुड़ - सुपुड़ की ऊंची आवाजों के साथ पात्रों को चाय पीते हुए दिखाया गया है ।" ,उसी के साथ ऐसे डायलॉग NULL - ‘ बेटी बीए. पास कर लो तो तुम्हारी शादी कर दूं । ‘ ,दूसरा ‘ पेट में दर्द हो रहा है / तो झिंझर ले लीजिए । ' ,यहां सब कुछ ठीक चल रहा था कि 1947 में मुल्क का बंटबारा हो गया । ,दंगों से घबराकर चार्ली भी बहुत लोगों की तरह अपना शानदार फिल्मी करिअर छोड़कर पाकिस्तान चले गए । ,उस समय पाकिस्तान की फिल्म इंडस्ट्री की हालत बेहद कमज़ोर थी । ,नतीजे में चार्ली जैसे लोगों के सामने काम करने के इतने कम अवसर थे कि आख़िर हारकर वे अस्थायी परमिट पर 1960 के आसपास वापस बंम्बई आ गए । ,इस वक्त तक बम्बई का पूरा नज़ारा ही बदल चुका था । ,चार्ली की अभिनय शैली में अपना तड़का लगाकर जानी वाकर जैसे कॉमेडियन स्थापित हो चुके थे । pl,महमूद एक बड़ा स्टार बनने की राह पर कदम बढ़ा चुके थे । ,इन हालात में भी संदूलाल शाह ने चार्ली को अपनी फिल्म ‘ ज़मीन के तारे ` में मौका दिया लेकिन बात कुछ बनी नहीं । ,इसके बाद अगले तीन साल में कुल दो और फिल्मों ‘ ज़माना बदल गया ‘ और ‘ अकेली मत जइयों ‘ में ही काम मिला । ,उस पर कुछ लोग पाकिस्तान से वापस आए कलाकारों के परमिट रद्द करवाने के अभियान में जुटे थे । ,आखिर सरकार ने चार्ली को भारतीय नागरिकता देने से इनकार कर दिया । ,उन्हें वापस पाकिस्तान जाना पड़ा । ,"30 जून , 1983 को उनका निधन हो गया ।" ,उस समय तक वे पाकिस्तान छोड़ अमेरिका जा बसे थे । ,कहानी किसी भी फिल्म का पहला और मूल तत्व होता है । ,"हमेशा से ऐसी फिल्मों को काफी देखा जाता रहा है , जिनकी कहानियां वास्तविकता पर आधारित रही हैं ।" ,"इनकी कहानियां वास्तविक होती हैं या भ्रामक NULL , यह कह पाना कई बार मुश्किल होता है ।" ,"प्रख्यात पत्रकार और हैकर जूलियन असांजे और विकिलीक्स पर आधारित हॉलीवुड फिल्म ‘ द फिफ्थ एस्टेट ‘ भी इसी तरह की फिल्म है , जिसका निर्देशन बिल कोन्डन कर रहे हैं ।" ,गॉडस एंड मॉन्सटर के लिए बेस्ट स्क्रीनप्ले राइटर का एकेडमी अवॉर्ड जीत चुके कोन्डन ने ट्वाइलाइट सीरीज का भी निर्देशन किया है । ,"फिल्म से और भी खास लोग जुड़े हैं , लेकिन इसकी खासियत का कारण इसकी कहानी है जो , वास्तविक घटना पर बुनी गई है ।" ,जूलियन असांजे और विकिलीक्स को कौन नहीं जानता ? ,दोनों ही एक दूसरे के पर्याय हैं । ,खोजी पत्रकारिता को वेबसाइट पर लाने का श्रेय जूलियन असांजे को ही जाता है । ,साल 2010 में अमेरिकी सेना और राजनायिक दस्तावेजों के विकिलीक्स पर खुलासे के बाद दोनों ही चर्चा में आए । ,ऑस्ट्रेलियाई नागरिक जूलियन असांजे लंदन स्थित इक्वोडर दूतावास में राजनायिक शरण लिए हुए हैं । ,"यौन उत्पीड़न के मामले में स्वीडन उन पर कार्यवाई चाहता है , लेकिन असांजे कहते हैं कि यह सब अमेरिका के दबाव में हो रहा है ।" ,असांजे का कहना है कि हम पर फिल्म के ज़रिए यह सांस्कृतिक हमला भी अमेरिका के दबाव में हो रहा है । ,साल 2010 में अमेरिका की खुफिया जानकारियां विकिलीक्स पर लीक करने के बाद असांजे अमेरिका के निशाने पर हैं । ,फिल्म ‘ द फिफ्थ एस्टेट ‘ इन्हीं जूलियन असांजे विकिलीक्स और उनके पूर्व सहयोगी एवं जर्मन टेकनोलॉजी एक्टिविस्ट डेनियल डॉमशेट बर्ग के इर्द - गिर्द बुनी गई है । ,फिल्म की पटकथा का आधार डेनियलन डॉमशेट बर्ग की 2011 में आई किताब ‘ इन्साइड विकिलीक्स : माई टाइम विद जूलियन असांजे एट द वर्ल्डस मोस्ट डेंजरस वेबसाइट ‘ और डेविड लाई एवं ल्यूक हार्डिंग की पुस्तक ‘ विकिलीक्स : इन्साइड जूलियन असांजेस वार ऑन सीक्रेसी ‘ है । ,"फिल्म वास्तविक घटना पर बन रही है यह तो इसकी खासियत है , लेकिन उससे भी बड़ी खासियत इसमें डेनियल डॉमशेट बर्ग के पक्ष को दिखाना है ।" ,विकिलीक्स में प्रवक्ता के पद पर रहे बर्ग ने साल 2010 में असांजे से मतभेद होने पर विकिलीक्स छोड़ दिया था । ,"वर्ष 2011 में बर्ग की किताब ‘ इन्साइड विकिलीक्स ... ‘ आई जिस पर फिल्म का अधिकतर हिस्सा आधारित है , इसलिए आशंका है कि फिल्म में जूलियन असांजे को खलनायक के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है ।" ,यह संदेह असांजे ने भी जताया है । ,"फिल्म निर्देशक बिल कोन्डन द्वारा असांजे को भेजी गई स्क्रिप्ट पर 24 जनवरी , 2013 को सैम एड्म्स पुरस्कार समारोह में असांजे ने कहा कि यह विकिलीक्स और उनके सहयोगियों के खिलाफ भ्रामक प्रचार है ।" ,इसमें झूठ के ऊपर झूठ बुना गया है और ईरान के खिलाफ युद्ध को भड़काने वाले अंश जोड़े गए हैं । ,फिल्म के पहले ही दृश्य में दिखाया गया है कि ईरान अपने सैन्य परिसर में परमाणु हथियारों का निर्माण कर रहा है । ,"निर्देशक बिल कोन्डन जूलियन असांजे से अलग कहते हैं कि विकिलीक्स के पूरे क्रांतिकारी सूचनात्मक प्रभाव को समझ पाने में दशकों का समय लगेगा , इसलिए यह फिल्म न किसी विषय पर आरोप लगाती है और न ही कोई निष्कर्ष दे जाती है ।" sg,फिल्म शेरलोक से प्रसिद्ध बेनोडिक्ट क्यूम्बबेच ‘ द फिफ्थ एस्टेट ‘ में जूलियन असांजे के किरदार को निभा रहे हैं । ,"उफ मॉम ! बचपन जवानी कोई चीज नहीं होती , इंसान की उम्र उतनी ही होती है , जितनी वो फील करता है ।" ,"अच्छा बाबा मैं हार गयी , मैं हार गयी ।" ,अब तू अपने स्कूल जा और अपनी मिस लूसी का सिर खा । ,"ओह ! मुझसे भला क्या परदा NULL , देख जब लड़की जवान हो जाती है ना तो माँ उसकी माँ नहीं NULL , सहेली बन जाती है ।" ,"अरे सिमी ! तू तो बड़ी अच्छी शायरी करने लगी है , मुंडा बड़ा चंगा लगता है , पर ये है कौन ?" ,"माँ , अनदेखा है , अनजाना है वो ।" ,"ले यानि कि कोई है ही नहीं , मैं भी बोलूँ ऐसे अच्छे लड़के कहाँ मिलते हैं आजकल ।" ,"तू भी कितनी बावली है , ना देखी ना मिली और सपने देखने लग पड़ी ।" ,"नहीं माँ , ये सपना नहीं है , मैं मानती हूँ मैं उससे कभी मिली नहीं , उसे कभी देखा नहीं , पर वो है , कहीं ना कहीं तो है ।" ,हे राज ! किसने कहा था रात को पार्टी कर ? ,"रात को पार्टी करेगा तो रात को सोयेगा नहीं , रात को सोयेगा नहीं तो सुबह उठेगा कैसे ?" ,अब ग्रेजुएशन के लिए लेट हो गये ना । ,सुना है कि इस साल कोई फेल हो चुका है और डीन ने डिसाइड किया है कि वो सबके सामने नाम अनाउन्स करने वाला है । sg,आज तूने धर्मवीर मल्होत्रा की नाक डेढ़ इंच ऊंची कर दी है । ,"मुझे मालूम था , मुझे मालूम था कि तू एक दिन मेरा नाम जरूर रोशन करेगा ।" ,फेल होना और पढ़ाई ना करना हमारे खानदान की परंपरा है और मुझे खुशी है कि तूने इस परंपरा को ज़िंदा रखा । ,बल्कि तू तो हमसे दो कदम आगे निकल गया । ,हम सब तो हिन्दुस्तान में फेल हुए और तूने तो लंदन में फेल होकर दिखा दिया । ,"खुश नहीं बेहद खुश हूँ , ये पढ़ाई - लिखाई तो बेकार की चीजें होती हैं , दिमाग में किताबें भरने से जेबें थोड़े ही भरती हैं ।" ,मुझे देख भटिंडा से भागा हुआ एक अल्हड़ - गंवार और आज लंदन का मिलियनेयर हो गया । ,"इसलिए मैं कहता हूँ जो होता है अच्छा होता है , तू ऐसा कर कल से ऑफिस ज्वाइन कर ले ।" ,"पॉप्स ! आप सही कहते हैं , मुझे आपका कारोबार संभाल लेना चाहिए , वो क्या है ना , आप बहुत बूढ़े हो चुके हैं ।" ,"पॉप्स मैंने फैसला कर लिया है , मैं यूरोप नहीं जा रहा हूँ और मैं कल से ऑफिस आ रहा हूँ ।" ,"देखो , इस घर में फैसला सिर्फ तुम्हारा बाप करता है , मैंने भी फैसला कर लिया है कि तुम ऑफिस नहीं यूरोप जाओगे ।" ,"नहीं पॉप्स , मैंने बहुत ऐश कर ली है , मैं अपनी पूरी जवानी जी चुका हूँ ।" ,"मैं तो भूल ही गयी थी माँ , कि मुझे सपने देखने का भी कोई हक नहीं ।" ,"ना बेटी ना , सपने देखो जरूर देखो , पर उनके पूरे होने की शर्त मत रखो , और फिर क्या पता शायद कुलजीत ही तेरा सपना हो ।" ,"इतनी छोटी थी जब तुझे लेकर आये थे यहां , और अब देखो तो ?" ,लोग कहते हैं बेटी जब जवान हो जाए तो बाप के कंधे झुक जाते हैं । ,"लेकिन बेटी तेरे जैसी हो तो बाप के कंधे झुकते नहीं , बल्कि ग़ुरूर से छाती और चौड़ी हो जाती है ।" ,"बाबूजी , मैं आपसे कुछ माँगूगी तो आप दोगे ?" ,"जो माँगना है , माँग बेटा ।" ,"बाबूजी , मुझे यूरोप देखना है , ज्युरिक का एक महीने का ट्रिप है , मेरी सारी सहेलियाँ जा रही हैं ।" ,"जिससे मेरी शादी होने वाली है , वो बिल्कुल अजनबी है ! लेकिन मुझे कोई शिकायत नहीं है बाबूजी ।" ,"आपने मेरे लिए कुछ अच्छा ही सोचा होगा , लेकिन बाबूजी ! मुझे ऐसा चान्स फिर नहीं मिलेगा ।" ,"जब से तुम मुझे मिले हो , मुझे परेशान किये जा रहे हो , पूरे ट्रिप पर तुम मेरा सिर खा चुके हो ।" ,तुम्हारे साथ हमेशा कोई ना कोई गड़बड़ होती रहती है और आज तुम्हारी वजह से मेरी ट्रेन मिस हो चुकी है । ,अब मैं ज्युरिक सही सलामत पहुँचना चाहती हूँ इसलिए तुम अपने रास्ते जाओ और मैं अपने रास्ते जाऊँगी । ,"अरे कमाल करती हो सेनोरिटा , हमारी मंजिल एक है , हमारे रास्ते एक हैं और ट्रेन भी हमको एक ही पकड़नी है ।" ,"फिर ये अलग - अलग जाने का क्या मतलब NULL , और वैसे भी सेनोरिटा तुम्हारे जैसी लड़की के साथ मेरे जैसे लड़के का होना बहुत जरूरी है ।" ,"ऐसा करते हैं सामने वाले घर में चलते हैं वहाँ पर पूछते हैं , हो सकता है वहाँ पर रहने की जगह मिल जाए ।" ,"चलो रात गुजारने का बन्दोबस्त हो गया , सिमरन ये तो मानना पड़ेगा कि तुम्हारी च्वॉइस का जवाब नहीं ।" ,हम वहां बैठकर देखेंगे कि कोई चीटिंग न करे । ,"भई कमाल करते हैं डॉक्टर साहब , फ़ौलादी ज़िगर है , इतनी जल्दी फेल थोड़े ही होगा ।" ,"भाभी जी ! हमें आपसे एक शिकायत है , आप लोग इतने दिन यहाँ रहे , एक बार भी हमारे घर खाने पर नहीं आए ।" pl,"अरे भाई एक मिनट , आप लोगों को ठीक से विदा तो कर दें ।" ,"समधन जी ! ये मन भी कितना बावरा है , जितना पाता है उससे ज्यादा पाने की इच्छा रखता है ।" ,"एक दिन तो हमने आप सबको रोक लिया , अब जी चाहता है एक दिन और रोक लें ।" ,निशा के साथ एक फोटो तो दिलाइए ताकि याद तो रहे कि इतने दिन हमारे साथ कितने प्यार से रही । ,जा रही हो ? ,अब कोई बहाना भी तो नहीं जिससे मैं तुम्हें रोक सकूं । ,उन्हें सामान्य जीवन और शिष्‍टाचार से कभी कोई वास्ता ही नहीं पड़ा । ,वाशिंगटन टाइम्स के प्रधान संपादक वैस्ले प्रूडेन या टाइम्स ऑफ इंडिया के पूर्व संपादक गिरिलाल जैन सामान्य परिवार से निकलकर पत्रकारिता में पहुंचे थे । ,"पत्रकार का अपना सम्मान अवश्य होता है , लेकिन वह समाज के अन्य लोगों के मुकाबले शिखर पर बैठा हुआ महाज्ञानी नहीं कहा जा सकता ।" ,"अमेरिका के समाचार माध्यमों में , चाहे वह न्यूयॉर्क टाइम्स या वाशिंगटन पोस्ट जैसे अखबार हों अथवा टेलीविजन नेटवर्क NULL , इसी संभ्रांत वर्ग के युवाओं का बाहुल्य हो गया है ।" ,वे किसी ख्यातिप्राप्‍त विश्‍वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री लेकर बाहर आते हैं । ,"इस तरह की डिग्री लेना गलत नहीं कहा जा सकता , लेकिन जमीन से कटे होने के कारण यह शिक्षा - दीक्षा समाचार माध्यमों में कृत्रिमता ही अधिक लाती है ।" ,इसी तरह किसी खास राजनीतिक विचारधारा में विश्‍वास करने का मतलब यह मान लेना भी गलत है कि खबर को उसी वैचारिक आधार पर तोड़ - मरोड़कर पेश करना ही पत्रकार का जन्मसिद्ध अधिकार है । ,विचार पृष्‍ठ से हटकर समाचार पृष्‍ठों पर लिखते समय पत्रकार को न्यायाधीश की तरह तटस्थ रहना होगा । ,स्वतंत्र समाज में अखबारों और पत्रकारों की भूमिका यही है । sg,वे कड़वे सच को इस तरह पेश करें कि गड़बड़ करने वालों का जीना हराम हो जाए । ,अमेरिका के प्रसिद्ध पत्रकार विलियम रेनडोल्फ का मानना था कि अखबार के संपादक का कोई मित्र नहीं होता । ,"वह मित्रतापूर्ण व्यवहार भले ही कर सकता है , लेकिन सच की अभिव्यक्‍ति के बाद संभव है कि लोग उसे मित्र के बजाय दुश्मन माने ।" ,कोई ईमानदार अखबार और उसका संपादक किसी मित्र या दल अथवा कंपनी के पक्ष में पूर्वाग्रह के साथ समाचारों को परोसेगा तो उसकी इज्जत बहुत जल्द ही मिट्टी में मिल जाएगी । ,हाल के वर्षों में अधकचरी पत्रकारिता दिखने लगी है । ,"राजनीतिक घटनाओं की बात दूर रही , सामरिक महत्व के मामलों में भी आधी - अधूरी सूचनाएं समाचार पृष्‍ठों पर उड़ेल दी जाती हैं ।" ,"संभव है कि कुछ पत्रकार अधिक शिक्षा प्राप्‍त कर गए हों , लेकिन वे अर्द्धशिक्षित पत्रकारों से भी बदतर खबरें और विचार पेश करते हैं ।" ,दूसरी तरफ पत्रकार यदि अपने विषय पर अच्छी मेहनत करे तो उसके पास बड़े से बड़े अधिकारी अथवा नेता से अधिक सही जानकारी उपलब्ध होगी । ,"अमेरिका , ब्रिटेन और भारत में ऐसे पत्रकार रहे हैं , जिनके पास सुरक्षा गुप्‍तचर एजेसिंयों के निदेशकों से भी अधिक सही और प्रामाणिक जानकारियां रहती हैं ।" ,पत्रकारिता की दो सबसे बड़ी शर्तें हैं - अपने पाठकों को पहचानना और समाचारों को सर्वाधिक विश्‍वसनीय बनाना । ,"पाठक कल क्या पढ़ना चाहते हैं और किस विषय पर चर्चा कर सकते हैं , इस बात की दूरदर्शिता होने पर ही कोई पत्रकार अथवा उसका अखबार सफल हो सकता है ।" ,हमारे अखबार की सबसे बड़ी आवश्यकता इसकी विश्‍वसनीयता को सर्वोकृष्‍ट स्तर पर ले जाना है । ,"खबरों को खोजना ठीक है , लेकिन खबरों के लिए शब्दों से खेलना अवश्य गलत है ।" ,"लेखक तो शब्दों से खेलते हैं , पत्रकारों को अंकुश रखना होता है ।" ,"अच्छी या खोजी रिपोर्ट तैयार करने वाले कई संवाददाताओं का तर्क होता है कि उनके पास कागजात हैं , इसलिए संबंधित व्यक्‍ति का पक्ष पूछने की जरूरत क्या है ।" ,संवाददाताओं को यह बताया जाना चाहिए कि कागजात होने का मतलब यह नहीं है कि हमें फैसले की छूट मिल गई । ,"कई बार खबरों में यह उल्लेख मिलता है कि संवाददाता ने आरोपित व्यक्‍ति या संबंधित जवाबदेह अधिकारी से फोन पर बात करने की कोशिश की , लेकिन संपर्क नहीं हो सका ।" ,यह बचाव का फूहड़ तरीका है । sg,इससे संवाददाता को या अखबार को जवाबदेही से मुक्‍ति नहीं मिल जाती । ,"अदालत के न्यायाधीश के सामने भी कागजात और साक्ष्य होते हैं , लेकिन उन्हें उस पर कोई फैसला करने से पहले सभी पक्षों की दलील सुननी पड़ती है ।" ,सर्वविदित हत्यारे तक से पूछना पड़ता है कि उसे अपनी सफाई में कुछ कहना तो नहीं है । ,प्रामाणिकता इसलिए भी आवश्यक है कि एक पक्ष रखने के बाद दूसरा पक्ष यह मानकर चलता है कि खबर उसके राजनीतिक शत्रुओं ने छपवाई या अखबार के प्रबंधन ने लिखवाई । ,असलियत यह है कि कोई भी समझदार पत्रकार इस तरह की प्रायोजित खबर नहीं लिखता । ,लेकिन जब स्पष्‍टीकरण छापने की बात आती है तो हमारे कई सहयोगी पत्रकार कष्‍ट अनुभव करते हैं । ,पश्‍चिम जर्मनी में तो कानून है कि यदि आपने कोई खबर गलत छापी है तो आपको प्रत्युत्तर का अधिकार संबंधित पक्ष को देना पड़ेगा । ,"वह प्रत्युत्तर भी उतने ही महत्व से छापना पड़ेगा , जितने महत्व से आपने समाचार को छापा था ।" ,अपराध समाचार का चयन बहुत ही सावधानी के साथ होना चाहिए । ,अपराध समाचार को लिखने वाले और संपादित करने वाले को सामान्य कानूनी प्रक्रिया का ज्ञान होना चाहिए । ,अपराध की खबरें सबसे अधिक पढ़ी जाती हैं और इसलिए उन खबरों में कसावट तथा विश्‍वसनीयता और अधिक आवश्यक है । sg,कई बार टिप्पणियों में भी बहुत सामान्य ढंग से ’ नपुंसक ’ लिखे जाने से अखबार की साख को भी धक्‍का लगता है । ,न्यायालय या न्यायाधीश की मानहानिपरक बातें वर्तमान कानूनों को ध्यान में रखकर नहीं लिखनी या छापनी चाहिए । ,बेहतर भाषा का अर्थ यह कतई नहीं है कि संवाददाता या डेस्क पर बैठा मुख्य उप संपादक हिंदी का पंडित होना चाहिए । ,उसे सरल भाषा का उपयोग आना चाहिए । ,"उसके शब्दों का भंडार केवल सूत्र , ज्ञातव्य , उल्लेखनीय है , उन्होंने कहा या बताया तक नहीं , न ही उसे संस्कृतनिष्‍ठ होना चाहिए ।" ,हमारे कुछ संवाददाता तो इंट्रो के बाद शुरू होने वाले दूसरे पैराग्राफ में ही उल्लेखनीय का प्रयोग करते हैं । ,इससे ऐसा लगता है कि खबर तो पहले ही पैराग्राफ में समाप्‍त हो गई । ,भाषा की सरलता केवल शब्दों पर ही निर्भर नहीं है । ,वाक्यों की रचना का ध्यान रखा जाना आवश्यक है । ,अंग्रेजी भाषा के वाक्य विन्यास हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं की प्रकृति के अनुरूप नहीं हैं । ,अनुवाद के समय वाक्य विन्यास की ओर ध्यान दिया जाना अधिक आवश्यक है । ,"प्राय: ऐसी खबरें भी देखी जाती हैं जिनमें लिखा होता है - ’ एक ओर मुख्यमंत्री भयमुक्‍त समाज बनाने का दावा करते हैं , वहीं दूसरी ओर चोरों ने फलां गांव में एक दुकान में ताला तोड़कर समान निकाल लिया । '" ,"बुज़ुर्गों में , मतिभ्रम सबसे प्रमुख चिह्न हो सकता है ।" ,"पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में बुखार , खांसी , तेज सांस लेने में कठिनाई आम चिह्न हैं ।" ,बुखार बहुत विशिष्ट लक्षण नहीं है क्योंकि यह सामान्य बीमारियों में भी होता है क्योंकि कई गंभीर रोगों से या कुपोषण से पीड़ित लोगों में नहीं भी हो सकता है । ,इसके अतिरिक्त 2 माह से कम उम्र के बच्चों में खांसी अक्सर नहीं होती है । ,"अधिक गंभीर चिह्नों और लक्षणों में त्वचा की नीली रंगत , प्यास में कमीं , बेहोशी और ऐंठन , बार - बार उल्टी या चेतना का घटा स्तर शामिल हो सकता है ।" ,निमोनिया के बैक्टीरिया तथा वायरस जनित मामलों में आम तौर पर समान लक्षण होते हैं । ,"कुछ मामले परंपरागत लेकिन , गैर - विशिष्ट , चिकित्सीय विशिष्टताओं से जुड़े होते हैं ।" ,""" लेगियोनेला "" द्वारा हुए निमोनिया में पेड़ू दर्द , डायरिया या मतिभ्रम हो सकता है , जबकि "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" द्वारा हुए निमोनिया में जंग जैसे रंग वाला बलगम , और "" क्लेबसिएला "" द्वारा हुए निमोनिया में “ करेंट जेली ” के नाम से जाने वाला खूनी बलगम हो सकता है ।" ,खूनी बलगम ( हेमोप्टाइसिस नामक ) तपेदिक ग्राम नकारात्मक निमोनिया और फेफड़े के फोड़े के साथ - साथ तीव्र ब्रोंकाइटिस के साथ भी हो सकता है । ,""" माइकोप्लाज़्मा "" निमोनिया में गर्दन में लिम्फ नोड्स की सूजन , जोड़ों में दर्द या कान के मध्य में संक्रमण हो सकता है ।" ,वायरस जनित निमोनिया में बैक्टीरिया जनित निमोनिया की तुलना में आम तौर पर घरघराहट अधिक होती है । ,निमोनिया मुख्य रूप से बैक्टीरिया या वायरस द्वारा और कम आम तौर पर फफूंद और परजीवियों द्वारा होता है । ,हालांकि संक्रामक एजेंटों के 100 से अधिक उपभेदों की पहचान की गयी है लेकिन अधिकांश मामलों के लिये इनमें केवल कुछ ही जिम्मेदार हैं । ,वायरस व बैक्टीरिया के मिश्रित कारण वाले संक्रमण बच्चों के संक्रमणों के मामलों में 45 % तक और वयस्कों में 15 % तक जिम्मेदार होते हैं । sg,सावधानी के साथ किये गये परीक्षणों के बावजूद लगभग आधे मामलों में कारक एजेंट पृथक नहीं किये जा सकते हैं । ,"शब्द "" निमोनिया "" व्यापक रूप से कई बार फेफड़ों की सूजन की किसी भी स्थिति ( उदाहरण के लिये स्वतः प्रतिरोधी रोग , रसायन से जलने पर या दवाओं की प्रतिक्रिया ) पर लागू किये जा सकते हैं ; हालांकि , इस सूजन को अधिक सटीक रूप से न्यूमोनाइटिस कहा जाता है ।" ,"संक्रामक एजेंट अनुमानित प्रस्तुतियों के आधार पर ऐतिहासिक रूप से “ सामान्य ” और “ असामान्य ” एजेंटों में विभाजित किये गये थे लेकिन साक्ष्य इस विभेद का समर्थन नहीं करते हैं , इस कारण अब इस पर जोर नहीं दिया जाता है ।" ,"निमोनिया होने की संभावना को बढ़ाने वाली परिस्थितियों और जोखिम कारकों में धूम्रपान , प्रतिरक्षा की कमी तथा मद्यपान की लत , गंभीर प्रतिरोधी फेफड़ा रोग , गंभीर गुर्दा रोग और यकृत रोग शामिल हैं ।" ,अम्लता - दबाने वाली दवाओं जैसे प्रोटॉन - पंप इन्हिबटर्स या H2 ब्लॉकर्स का उपयोग निमोनिया के बढ़े जोखिम से संबंधित है । ,उम्र का अधिक होना निमोनिया के होने को बढ़ावा देता है । ,"समुदाय उपार्जित निमोनिया ( सीएपी ) के मुख्य कारक बैक्टीरिया है , जिसमें से "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" लगभग 50 % मामलों से जुड़ा होता है ।" ,"आम तौर पर शामिल अलग तरह के अन्य बैक्टीरिया में 20 % में "" हीमोफीलस इन्फ्युएंज़ा "" , 13 % में "" क्लैमाइडोफिला निमोनिया "" और 3 % में "" मिकोप्लाज़्मा निमोनिया "" ; "" स्टैफिलोकॉकस ऑरियस "" ; "" मोराक्सेला कैटराहैलिस "" ; "" लैगियोनेला न्यूमोफेला "" और ग्राम - निगेटिव बासिलि शामिल है ।" ,"उपरोक्त संक्रमणों के कई दवा प्रतिरोधी संस्करण अब और आम होते जा रहे हैं जिनमें दवा प्रतिरोधी "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" ( डीआरएसपी ) और मेथिसिलीन - प्रतिरोधी स्ट्रेप्टोकॉकस ऑरियस ( एमआरएसए ) शामिल है ।" ,जब जोखिम कारक उपस्थित हों तो जीवाणुओं के विस्तार को सुविधा मिलती है । ,"मद्यपान की लत "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" , एनाएरोबिक ऑर्गेनिज़्म और "" माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस "" से जुड़ी हुई है ; धूम्रपान "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" , "" हेमोफिलस इन्फ्युएन्ज़ा "" , "" मॉरेक्सेला केटराहेलिस "" और "" लेगोइयोनेला न्यूमोफिला "" के प्रभावों को पैदा करता है ।" ,"चिड़ियों से एक्सपोज़र "" कैमिडिया सिटासी "" के साथ ; पालतू जानवर "" कॉक्सिएला बुर्नेती "" के साथ ; पेच की सामग्री में बाहरी पदार्थ का प्रवेश एनाएरोबिक ऑर्गेनिज़्म के साथ और सिस्टिक फ्राइब्रोसिस , "" स्यूडोमोनस एरयूजिनोसा "" तथा "" स्ट्रेप्टोकॉकस ऑयरियस "" से संबंधित है ।" ,""" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" जाड़े में अधिक आम है , और ऐसे लोगों में इसका संदेह अधिक किया जाना चाहिये जो एनाएरोबिक ऑर्गेनिज़्म का अधिक मात्रा में सेवन करते हैं ।" ,"वयस्कों में , वायरस लगभग एक तिहाई मामलों के लिये और बच्चों में लगभग 15 % निमोनिया के मामलों के लिये जिम्मेदार है ।" ,"आम तौर पर शामिल एजेंटों में राइनोवायरस , कोरोनावायरस , इन्फ्यूएंज़ा वायरस , रेस्पिरेटरी सिन्साइटियल वायरस ( आरएसवी ) , एडीनोवायरस और पैराइन्फ्युएन्ज़ा शामिल है ।" ,"हरपीस सिम्प्लेक्स वायरस नवजात शिशुओं , कैंसर पीड़ित लोगों , अंग प्रत्यारोपण स्वीकार करने वालों और काफी जल गये लोगों के समूहों को छोड़ कर , बेहद कम निमोनिया पैदा करता है ।" ,अंग प्रत्यारोपण करा चुके या प्रतिरोधकता हास वाले लोगों में साइटोमोगालो वायरस निमोनिया की उच्च दर होती है । ,"वायरस संक्रमणों से पीड़ित , "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" , "" स्ट्रेप्टोकॉकस ऑयरियस "" , "" हेमोफिलस इन्फ्युएन्ज़ा "" बैक्टीरिया से द्वितीयक रूप से पीड़ित हो सकते हैं , विशेष रूप से तब जबकि अन्य स्वास्थ्य समस्यायें उपस्थित हों ।" ,भिन्न - भिन्न वायरस वर्ष की भिन्न - भिन्न अवधियों में प्रबलता दिखाते हैं । ,"अन्य वायरसों का प्रभाव भी कभी – कभी होता है जैसे कि "" हान्टा वायरस "" और "" कोरोना वायरस "" ।" ,"फफूंद से होने वाला निमोनिया असामान्य है लेकिन उन लोगों मे अधिक आम तौर पर होता है जो एड्स , प्रतिरोधकता विरोधी दवा या अन्य चिकित्सीय कारणों से कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली की समस्या से पीड़ित होते हैं ।" ,"यह अक्सर "" हिस्टोप्लाज़्मा कैप्स्यूलेटम "" , ब्लास्टोमाइसेस , "" क्रिप्टोकॉकस नियोफॉर्मन्स "" , "" न्यूमोनाइटिस जिरोवेसि "" और "" कॉकिडायोइडेस इमिटिस "" द्वारा होता है ।" ,"हिस्टोप्लास्मोसिस मिसिसिपी नदी घाटी में और कॉकिडियोआइडोमाइकोसिस , दक्षिणपश्चिम संयुक्त राज्य अमरीका में सबसे अधिक आम है ।" pl,"मंदिर के बाह्य ताखों में ब्रम्हा - सावित्री , गरूड़ पर बैठे लक्ष्मी - नारायण , नंदी पर आसीन उमा - महेश्वर आदि की प्रतिमाओं के अतिरिक्त मेवाड़ के तत्कालीन सामाजिक जीवन के दृश्यों को भी प्रस्तुत किया गया है ।" ,"उनवास , दुर्गा मंदिर के लिए प्रसिद्ध है ।" ,उनवास उदयपुर से 48 कि.मी. दूर हल्दी घाटी के निकट स्थित है । ,जन - सामान्य में उनवास का दुर्गा मंदिर पिप्पलादमाता के नाम से विख्यात है । ,10वीं सदी में निर्मित उनवास का दुर्गा मंदिर जगत का अम्बिका मंदिर का समकालीन है तथा यह एक गुहिल शासक अल्लट के राज्यकाल में निर्मित माना जाता है । ,उनवास के दुर्गा मंदिर की गणना मातृपूजा परंपरा के अंतर्गत बने झालरापाटन तथा जगत के मंदिर समूहों में की जाती है । ,झालरापाटन तथा जगत के मंदिर समूहों में एकान्तिक रूप से शक्ति के किसी रूप की ही अर्चना की जाती थी । sg,इसमें दुर्गा के महिषमर्दिनी स्वरुप के शांत व वरद रूप की दिव्यता को प्रस्तुत किया गया है । ,मूर्तिकला की अपेक्षा वास्तुकला के अभिप्रायों के विकास के अध्ययन के लिए उनवास का उपरोक्त मंदिर अधिक महत्वपूर्ण है । ,मंदिर की पीठिका के अलंकरणात्मक अभिप्रायों का इस मंदिर में अभाव है । ,उदयपुर से 42 किलोमीटर दूर स्थित जगत ऐतिहासिक अंबिका मंदिर के लिए जाना जाता है । ,"इस मंदिर समूह के तीन प्रमुख अंग हैं - सभामंडप , मुख्य मंदिर तथा मुख्य मंदिर की जल प्रणालिका पर बना छोटा मंदिर ।" ,सभामंडप का उपयोग देवी के उपलक्ष्य में नृत्यगीतादि सभाओं के लिए होता होगा । ,प्रवेश द्वार के दोनों स्तंभ भी समाप्त प्रायः हैं । ,इन स्तंभों के ऊपरी भाग पर कमल पर खड़ी अलसकन्या की प्रतिमा अंकित थी । ,पीठिका के उत्कीर्ण अभिप्राय अभी भी सुरक्षित हैं । ,उदयपुर से 27 कि.मी. दूर स्थित नागदा गुहिल शासकों की प्राचीन राजधानी रह चुकी है । sg,661 ई. ( संवत् 718 ) का अभिलेख नागदा स्थान की प्राचीनता को प्रमाणित करता है । ,वहीं पुरातात्विक सामग्री की शैली के आधार पर नागदा उतना प्राचीन प्रतीत नहीं होता । ,"संभवतः , प्राचीन स्मारक समय के साथ नष्ट हो गये होंगे ।" ,सास मंदिर आकार में बड़ा है । sg,गुहिल शासकों के सूर्यवंशी होने के कारण नागदा के इस मंदिर को विष्णु को समर्पित किया गया है । ,गर्भगृह के पृष्ठभाग की प्रमुख ताख में एक चतुर्भुज विष्णु प्रतिमा प्रतिष्ठित है । ,दोनों मंदिरों के बाह्य भाग पर श्रृंगार - रत नर - नारियों का अंकन किया गया है । ,"सास मंदिर के दाईं ओर के कोने पर एक शक्ति मंदिर निर्मित है , जिसमें शक्ति के विविध रूपों का अंकन किया गया है ।" ,नागदा के पास ही एक अन्य मंदिर समूह एकलिंग या कैलाशपुरी के नाम से जाना जाता है । ,नागदा के लकुलीश मंदिर से प्राप्त शिलालेख 971 ई. का है और यह सर्वाधिक प्राचीन है । ,अन्य मंदिर 12वीं शताब्दी के हैं । ,टूस उदयपुर के समीप बेड़च नदी के तट पर स्थित है तथा यहाँ का सूर्य मंदिर मूर्तिकला परंपरा के अध्ययन में विशेष महत्व रखता है । ,वैष्णव संप्रदाय की तुलना में सूर्य पूजा का मेवाड़ क्षेत्र में कम प्रचलन था । sg,पश्चिमी सीमा पर अरब सागर और सह्याद्रि पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित एक खूबसूरत भूभाग को केरल के नाम से जाना जाता है । ,केरल राज्य का क्षेत्रफल 38863 वर्ग किलोमीटर है । ,केरल में मलयालम भाषा बोली जाती है । ,अपनी संस्कृति और भाषा वैशिष्ट्य के कारण पहचाने जाने वाले भारत के दक्षिण में स्थित चार राज्यों में केरल प्रमुख स्थान रखता है । ,केरल के प्रमुख पड़ोसी राज्य तमिलनाडु और कर्नाटक हैं । ,पोंडिच्चेरी ( पुतुच्चेरी ) राज्य का मय्यष़ि ( माहि ) नाम से जाना जाने वाला भूभाग भी केरल राज्य के अन्तर्गत स्थित है । ,अरब सागर में स्थित केन्द्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप का भी भाषा और संस्कृति की दृष्टि से केरल के साथ अटूट संबंध है । ,स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व केरल में राजाओं की रियासतें थीं । ,जुलाई 1949 में तिरुवितांकूर और कोच्चिन रियासतों को जोड़कर ' तिरुकोच्चि ' राज्य का गठन किया गया । ,उस समय मलबार प्रदेश मद्रास राज्य ( वर्तमान तमिलनाडु ) का एक जिला मात्र था । ,नवंबर 1956 में तिरुकोच्चि के साथ मलबार को भी जोड़ा गया और इस तरह वर्तमान केरल की स्थापना हुई । ,इस प्रकार ' ऐक्य केरलम ' के गठन के द्वारा इस भूभाग की जनता की दीर्घकालीन अभिलाषा पूर्ण हुई । ,"केरल अपने प्राचीन इतिहास , दीर्घकालीन वैदेशिक व्यापारिक संबंध और विज्ञान एवं कला की समृद्ध परंपरा पर गर्व कर सकता है ।" ,साक्षरता की दृष्टि से केरल का पूरे देश में महत्वपूर्ण स्थान है । ,"सामाजिक न्याय , स्वास्थ्य स्तर , स्त्री पुरुष समानता और कानून के पालन , शिक्षा आदि क्षेत्रों में केरल का प्रमुख स्थान है ।" ,सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिशु - मृत्यु - दर केरल में सबसे कम है । ,अधिक वर्षा के कारण केरल प्रदेश की जलराशि समृद्ध है और यहाँ की भूमि सदैव हरियाली से युक्त रहती है । ,"उत्कृष्ट जलवायु , यातायात की अच्छी सुविधाओं और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के कारण केरल - राज्य पर्यटकों में लोकप्रिय है ।" ,"यही नहीं NULL , केरल की अन्य विशेषताएँ हैं प्रबुद्ध राजनैतिक चेतना , संचार माध्यमों का प्रभाव , अन्य संस्कृतियों को आत्मसात करने की क्षमता आदि ।" ,धार्मिक सौहार्द के लिए प्रसिद्ध केरल विभिन्न संस्कृतियों की संगम भूमि है । ,केरल शब्द की व्युत्पत्ति को लेकर विद्वानों में एकमत नहीं है । ,ठंडी होने के पश्चात लजीज भांगयुक्त ठंडाई कांच के गिलासों में भरकर पेश करें और रंगबिरंगी होली पर्व का आनन्द उठाएं । ,सर्वप्रथम बेसन में आधा चम्मच नमक और एक बड़ा चम्मच तेल का मोयन डालकर गाढ़ा घोल तैयार कर लें । ,अब हरी मिर्च और हरे धनिया को बारीक काट लें । ,मैश किए आलू में उपरोक्त सभी मसाला सामग्री मिलाकर मिश्रण तैयार कर लें । ,इनके छोटे - छोटे गोले बना लें । ,एक कड़ाही में तेल गरम करें । ,"बेसन के घोल में आलू के गोले डुबाएं और कुरकुरे , सुनहरे होने तक तल लें ।" ,"अब तैयार आलू बड़ों को हरी चटनी , इमली की मीठी चटनी के साथ गरमा गरम पेश करें ।" ,सर्वप्रथम आलू को उबाल कर मैश कर लें । ,एक दूसरे बर्तन में उपरोक्त सभी सामग्री मिलाकर पेस्ट बना लीजिए । ,उसमें मसले आलू का पेस्ट मिलाएं । ,अब एक कड़ाही में तेल गर्म करके करारे पकौड़े तल लीजिए । ,इन्हें हरी एवं मीठी चटनी या टोमेटो सॉस के साथ गरमा - गरम पेश करें । ,सबसे पहले बेसन में स्वादानुसार नमक व कॉर्नफ्लोर मिलाकर अच्छे से फेंट कर घोल बना लें । ,अब पनीर स्लाइसों में काट लें । ,"कच्चे केले को उबालें , छीलें और मसल लें ।" ,"मसले हुए केलों में हरी मिर्च , नमक व सभी मसाले मिला दें ।" ,अब एक कड़ाही में तेल गर्म करके दो पनीर स्लाइस के बीच में थोड़ा - सा केला मसाला रख कर हाथ से दबाएं और घोल में लपेट लें । ,धीमी आंच पर इसे सुनहरा होने तक तलें । ,इसे हरी और मीठी चटनी के साथ पेश करें । ,सर्वप्रथम दूध में मिल्क पावडर व शक्कर डालकर उबालें और ठंडा कर लें । ,"अब इसमें आम रस , जीएमएस पावडर , दूध व मलाई डालकर मिक्सर में थोड़ी देर घुमाएं ।" ,अब आइस्क्रीम पॉट में डालकर एक घंटे फ्रीजर में रखें । ,फिर बाहर निकाल कर मिक्सर में फिर से घुमाएं । ,पुनः आइस्क्रीम पॉट में डालकर करीब 3 - 4 घंटे के लिए फ्रीजर में रखें । ,तैयार वासंती मैंगो आइस्क्रीम को पिस्ता कतरन से एवं गुलाब की पत्तियों से सजाएं और पेश करें । ,"खजूर और किशमिश को धोकर , सुखाकर थोड़े - से सिरके में इन्हें दलकर एकसार कर लें ।" ,टमाटरों को छीलकर उनके टुकड़े करें । ,"लहसुन , अदरक और लाल मिर्च को थोड़ा - सा सिरका मिलाकर बारीक पीस लें ।" ,सेब और अनन्नास के टुकड़े करें और उनके बीज निकाल दें । ,अब इन सभी चीजों में नमक डालकर एकसाथ आंच पर रखें । ,थोड़ा गरम हो जाने पर केला छीलकर उसके टुकड़े कर इसमें डालें । ,सारा सिरका और चीनी भी मिला दें । ,अच्छी तरह पकने पर जब इसमें गाढ़ापन आने लगे तो उतार कर ठंडा करें । ,मिक्स फ्रूट सॉस तैयार है । ,आलू को ठंडे होने पर अच्छी तरह मैश कर लें । ,अब आटे में मैदा एवं नमक मिलाकर छान लें । ,"इसमें अजवाइन , अन्य मसाला एवं मैश आलू मिलाकर गूंथ लें ।" ,जरूरत हो तो थोड़ा पानी मिलाएं । ,अब एक कड़ाही में तेल गर्म करें । ,गूंथे आटे की लोइयां बनाएं और पूरी बेल कर गर्म तेल में सुनहरी तल लें । ,गर्मागर्म आलू - अजवाइन पूरी को मनपसंद सब्जी के साथ खिलाएं । ,चावल को आधा - एक घंटे के लिए पानी में भिगो कर रख दें । ,एक चौड़े मुंह वाले बर्तन में पानी उबालें और चावल पका लें । ,अब इन्हें तीन भागों में बराबर बांट कर अलग - अलग कर लें । ,मटर और आलू उबाल लें । ,आलू के छोटे - छोटे टुकड़े कर लें । ,किशमिश थोड़ी देर पानी में भिगोकर निकाल लें । ,"एक भाग में हरे धनिए की चटनी , मटर , पाव चम्मच नमक मिलाकर रख लें ।" ,दूसरी परत के लिए 1 चम्मच घी गर्म कर काजू के छोटे टुकड़े कर भून लें । pl,"ईसाई धर्म प्रचार और उसके प्रतिकार के दौर से बाहर निकलकर पत्र - पत्रिकाएं समाज में शिक्षा और विज्ञान के प्रति चेतना , सामाजिक सुधार , आर्थिक तरक्की और राजनीतिक अधिकारों के मुद्दे उठाने लगीं थीं ।" ,"’ समाचार सुधावर्षण ’ के पश्‍चात कालाकांकर का ’ हिन्दोस्तान ’ और कोलकाता का ’ भारत मित्र ’ उन्नीसवीं शताब्दी की हिंदी पत्रकारिता के जाज्वल्यमान नक्षत्र बनें , जिन्होंने दैनिक पत्रों की पुष्‍ट परंपरा कायम की ।" ,हिंदी के महान लेखक एवं पत्रकार बाबू हरिश्‍चंद्र भारतेंदु और उनके साथियों के प्रयत्‍नों के फलस्वरूप हिंदी पत्रकारिता के लिए एक उपजाऊ भूमि तैयार हुई । ,उनके अथक प्रयासों से प्रेरणा पाकर हिंदी की अन्य प्रतिभाएं भी इस क्षेत्र में कूद पड़ीं और सरकार एवं उसके प्रशासकों की नीतियों का भंडाफोड़ होना प्रारंभ हो गया । ,भारत में दरबार लगाने की प्रथा बहुत प्राचीन है । ,अंग्रेजी सरकार ने भी इसी प्रथा को अपनाया और इस पर अपार धनराशि को पानी की तरह बहाया । ,"इसी संदर्भ में लॉर्ड लिटन ने 1 जनवरी , 1877 को महारानी विक्‍टोरिया के भारत की महारानी बनने की घोषणा करने के लिए एक दरबार किया ।" ,उन दिनों भारत में अकाल पड़ रहा था और आर्थिक संकट के काले बादल मंडरा रहे थे । sg,इस दरबार पर होने वाले व्यय को भारतीय राजाओं से एकत्रित किया गया । ,इनमें कुछ तो इतने ऋणी हो गए कि वे कभी उऋण हो ही नहीं सके । ,उपहारस्वरूप उनको कुछ भी नहीं मिला । ,अत: हिंदी पत्रों ने इसके विरोध में भयंकर अभियान चलाया तथा कहा कि इस दरबार की पृष्‍ठभूमि में केवल साम्राज्यवाद का दिखावा करने की प्रवृत्ति थी । sg,"लॉर्ड रिपन , जो कि उदारवादी माना जाता है , ने भी सन् 1880 में लाहौर में एक दरबार किया ।" ,इस दरबार के कारण उसने भारतीयों की सहानुभूति खो दी । sg,इसी प्रकार का दरबार लॉर्ड कर्जन ने भी किया । ,उन दिनों भी भारतीय समाज की आर्थिक दशा अत्यंत शोचनीय थी । ,लेकिन कर्जन अपने कुकृत्यों से चूकने वाला नहीं था । ,राजकीय सेवा में जातीय एवं रंग - भेद की नीति का बोलबाला था । ,कार्नवालिस सबसे पहला अंग्रेज था जिसने समस्त राजकीय ऊंचे पदों को गोरों के लिए आरक्षित किया । pl,उसने भारतीयों को जान - बूझकर सरकारी सेवाओं से वंचित किया । ,इस अन्यायपूर्ण सरकारी नीति के विरुद्ध हिंदी पत्रों ने डटकर प्रचार किया तथा भारतीय जनता को जगाया । ,"काशी पत्रिका ने कुछ प्रश्‍नोत्तर किए , ’ क्या सिविल सेवा के लिए परीक्षा उत्तीर्ण करने के अतिरिक्‍त भी कोई गुण है ?" ,"क्या हजारों भारतीय जो बुद्धि , न्याय , साहस और चरित्र आदि गुणों से परिपूर्ण होने पर भी इसके लिए कुंठित हो गए हैं जैसे सूर्य के समक्ष मोमबत्ती धुंधली पड़ जाती है । '" pl,जब समाचार पत्रों ने उपरोक्‍त ढंग से उद्‍बोधन किया तो सरकारी सेवाओं के संबंध में स्थान - स्थान पर सभाएं आयोजित की गईं । ,इसके साथ ही हिंदी पत्र - पत्रिकाओं ने उत्तरप्रदेश और पंजाब में प्रांतीय लेजिसलेटिव कौंसिल्स की स्थापना के लिए मांग करनी आरंभ की ताकि इन प्रांतों की समस्याओं को सरकार के कानों में डाला जाए । ,"’ आर्यमित्र ’ ने कहा कि यदि बंबई , कलकत्ता और मद्रास सरीखी लेजिस्लेटिव कौंसिल इन प्रांतों में स्थापित की जाए तो लेफ्टिनेंट - गर्वनर को प्रशासन कुशलतापूर्वक चलाने में सहयोग मिलेगा ।" ,उग्रवादी पत्र - पत्रिकाओं के संपादकों की लेखनी ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आग के शोले उगलने आरंभ कर दिए । sg,"’ हिंदी प्रदीप ’ पत्रिका ने इन शब्द रूपी शोलों से भारतीय जनता को प्रेरित एवं जागृत किया - ’ ओ स्वतंत्रता , तुम भारत को छोड़कर क्यों भाग गई और अकेला छोड़ दिया ?" ,"भगवान की बेटी , विश्‍व की प्रेमिका और गुणों का पुंज , तुम कहां चली गई ?" ,भारतवासी इस हानि पर बुरी तरह सुबक रहे हैं । ' pl,यहां तक कि यात्रा में हिंदी पत्रों और उसके संपादकों को बड़े - बड़े कष्‍ट सहन करने पड़े । ,"लॉर्ड बैंटिक और लॉर्ड मैटकाफ ने जो स्वतंत्रता भारतीय पत्रकारिता को दी थी , वह सन् 1857 के पश्‍चात छीन ली गई ।" sg,प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में यहां के उर्दू अखबारों ने भी मुख्य भूमिका निभाई थी । ,अत: ब्रिटिश सरकार व उसके प्रशासनिक अधिकारियों एवं एंग्लो - इंडियन्स ने भारतीय प्रेस को अपना कट्टर शत्रु मान लिया । ,एंग्लो - इंडियन प्रेस ने विशेषतया स्वदेशी पत्रकारिता के रास्ते में हर संभव रुकावट खड़ी करके उसके विकास को रोकने का प्रयत्‍न किया । ,तत्‍कालीन हिंदी पत्रकारिता का विकास अनेक आर्थिक कारणों से नहीं हो पा रहा था । sg,सरकार उन्ही पत्र - पत्रिकाओं को आर्थिक सहायता देती थी जो उसका समर्थन करते थे । pl,पुलिस और न्यायाधीश भी अपने गंदे और पहले से तय तरीकों को संपादकों के खिलाफ प्रयोग करने में कभी नहीं हिचकते थे । ,उनके द्वारा संपादक सदैव शंका से देखे जाते थे और उन पर अभियोग लगाया जाता कि वे सरकार विरोधी लेख लिखते हैं । pl,वास्तव में ये भारतीय जनता के कष्‍टों को अपने लेखों में प्रदर्शित कर रहे थे । sg,उदाहरण के लिए मेरठ के कलेक्‍टर ने ’ मेरठ गजट ’ को उपरोक्‍त कारण से ही बंद कर दिया था । ,जब कभी कोई पत्र इस निर्दयता के विषय में लिखता तो उसके संपादक को जुर्माना और सजा दोनों भुगतनी पड़ती । ,"भारतेंदु हरिश्‍चंद्र ने जहां अपने जीवनकाल में सत्रह नाटकों , तीन उपन्यासों , एक निबंध संग्रह और अनेक कविता पुस्तकों का निर्माण किया , वहीं उन्होंने ’ हरिश्‍चन्द्र चन्द्रिका ’ , ’ कविवचन सुधा ’ और ’ बाला बोधिनी ’ नामक तीन पत्रिकाओं का भी संचालन और संपादन किया ।" ,श्री बालमुकुंद गुप्‍त ने लिखा है कि ’ कविवचन सुधा ’ जब पाक्षिक होकर राजनीति संबंधी और दूसरे लेख स्वाधीनता भाव से प्रकाशित करने लगी तो बड़ा आंदोलन मचा । ,भारतेंदु जी ऑनरेरी मजिस्ट्रेट नियुक्‍त किए गए तब भी वे निडर होकर लिखते रहे । ,सर्वसाधारण में उनके पत्र का आदर होने लगा । sg,इसी प्रकार आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी के अविस्मरणीय योगदान को भी हिंदी पत्रकारिता कभी नहीं भुला सकती । ,"आचार्य द्विवेदी जी ने ’ सरस्वती ’ के जनवरी 1904 के अंक में ’ संपादकों के लिए स्कूल ’ जून 1907 में ’ संपादकीय योग्यता ’ तथा फरवरी 1909 में ’ अमेरिका में सर्वश्रेष्‍ठ संपादक ’ विषयक जो टिप्पणियां लिखी हैं , उनमें सफल संपादक बनने के लिए आवश्यक योग्यता एवं शिक्षा की चर्चा है ।" ,"आचार्य द्विवेदी एक यशस्वी संपादक , न्यायप्रिय समालोचक , कर्तव्यपरायण सुधारक तथा परिश्रमी निबंध लेखक थे ।" ,उनका विचारवान संपादक उनके भावुक साहित्यकार पर हावी रहा । ,"सुपर्ण वर्मा की फिल्म ‘ आत्मा ‘ बेटी , माँ और पिता का हॉरर ट्रैंगल है ।" ,दो साल पहले मुंबई पर हुए आंतकी हमले की पृष्‍ठभूमि पर राम गोपाल वर्मा लेकर आए हैं ‘ द अटैक्स ऑफ 26 / 11 ‘ । ,"उनके मुताबिक , मुंबई पर हमले की यादें आज भी दिल दहला देती हैं ।" pl,एनएसजी कमांडो और मुंबई पुलिस की तत्परता के चलते गुनहगारों को पकड़ा गया था । ,मैंने फिल्म के जरिए बस यह दिखाने की कोशिश की है कि उस घटना को कैसे अंजाम दिया गया । ,मुंबई पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया और पीड़ितों पर क्या बीती । sg,हमने सीएसटी कोलाबा स्थित लियोपोल्ड कैफे पर हुए हमलों को केंद्र में रखकर फिल्म बनाई है । ,उन लोकेशन पर जाकर हमने शूटिंग भी की । ,ताज होटल को दर्शाने के लिए हमने सेट का निर्माण किया । ,मुंबई के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया की भूमिका में दिखेंगे नाना पाटेकर । ,"उन्होंने बताया कि राकेश मारिया को केंद्र में रखकर फिल्म बनी है , पर यह बायोपिक नहीं है ।" ,फिल्म मुंबई को भी समर्पित है । ,"यह न दर्शकों को रुलाएगी , न हंसाएगी , बल्कि सोचने पर मजबूर करेगी कि आतंकी किस दुनिया के इंसान हैं ?" ,वे कैसे दरिंदे बन जाते हैं । ,पिछ्ले चार दशक से बिग बी यानी अमिताभ बच्चन दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे हैं । pl,"जंजीर ( 1973 ) का एंग्री यंग मैन हो या शोले ( 1975 ) का साहसी जय NULL , मुकद्दर का सिकंदर ( 1978 ) का दमदार सिकंदर हो या सिलसिला ( 1981 ) का इमोशनल प्रेमी NULL , कालिया ( 1981 ) का कल्लू डॉन हो या नमकहलाल ( 1982 ) का कॉमेडियन NULL , दीवार ( 1975 ) का विजय वर्मा हो या डॉन ( 1978 ) का विजय NULL , अमिताभ बच्चन की शुरूआती फिल्मों को भला कौन भूल सकता है ।" ,"जितनी लोकप्रियता उनकी फिल्मों को मिलती थी , लोगों का उतना ही प्यार उन फिल्मों के पोस्टरों और गानों को भी मिलता था ।" pl,"फिल्मी पोस्टरों पर अमिताभ बच्चन के डांस , मारधाड़ अथवा रोमांस का अंदाज लोगों को बरबस ही आकर्षित करता था ।" ,उनके फैंस फिल्मी पोस्टर को उखाड़ने और उन्हें अपने घर ले जाने के फेर में भी लगे रहते थे । ,गानों से लेकर उनकी फिल्मों के डायलॉग तक लोगों की जुबान पर होते थे । ,एंग्री मैन के दौर वाली अमिताभ बच्चन की फिल्मों की वह लोकप्रियता आज भी कायम है । ,उनकी इसी लोकप्रियता को देखते हुए उनकी कुछ खास फिल्मों के पोस्टर लॉबी आर्ट और एलपी रिकॉडर्स की ऑनलाइन बिक्री का आयोजन किया गया । ,चार - पांच साल पहले तक दिल्ली और मुंबई के सेकंड हैंड मार्केट में ऐसी चीजें आसानी से मिल जाती थीं । ,पर बढ़ती मांग के कारण ये अब बाजार से गायब होने लगी हैं और इन्हें इकट्ठा करना अब मुश्किल काम है । ,हालांकि फिल्मी यादगार वस्तुओं का ट्रेंड अपने देश में नया ही है । ,वैसे विदेशों में तो यह चलन आज स्टेटस के नाम से जाना जाता है और एलपी रिकॉडर्स यानी लांग प्लेइंग रिकॉडर्स फिल्मों के गाने और डायलॉगस सुनने के लिए इस्तेमाल किए जाते थे । ,आज भी छोटे शहरों में लॉबी काडर्स की ही व्यवस्था होती है । ,"यह अलग बात है कि एलपी रिकॉडर्स की जगह कैसेट , सीडी , पैन ड्राइव और विभिन्न कंप्यूटराइज्ड उपकरणों ने ले ली है ।" ,अपने यहां भी अब फिल्म से जुड़ी यादगार वस्तुओं के संग्रह में लोगों की दिलचस्पी पिछ्ले दशक में बढ़ी है । ,ऐसे ही लोगों के लिए है बिग बी के पोस्टर और लॉबी आर्ट की ऑनलाइन सेल । ,ड्रीम ऑनलाइन की डायरेक्टर रमोना सिंह जो सेलिब्रिटी आइट्म्स और फिल्मी मेमोरेबल प्रोड्क्टस की ऑनलाइन सेल करती हैं । ,उन्होंने बताया कि अमिताभ बच्चन से जुड़ी ऐसी सेल का हिट होना तय है । ,गौरतलब है कि अमिताभ बच्चन के 60वें जन्मदिन के मौके पर रमोना ने भी एक ऐसी ही सेल लगाई थी । ,हालांकि वे भी इस बात से सहमत हैं कि ऐसी वस्तुओं को इकट्ठा करना अब उतना आसान नहीं रहा । ,"उन्होंने बताया पहले पुरानी दिल्ली और मुंबई में ऐसे पोस्टर आसानी से मिल जाते थे , अब माहौल वैसा नहीं है ।" ,"खासकर शोले , दीवार आदि फिल्मों के पोस्टर मुश्किल से ही मिलते हैं ।" ,"इस संदर्भ में यामिनी ने बताया , ऐसी ऑनलाइन फिल्म सेल लिए अमिताभ से बेहतर फिलहाल और कुछ नजर नहीं आता ।" ,देश के अलावा विदेशों में भी उनकी लोकप्रियता बेमिसाल है । ,यही वजह है कि एनआरआई ऐसी वस्तुओं के सबसे बड़े खरीदार हैं । ,इस कलेक्शन की कीमत कुछ हजार से शूरू होती है । ,"सबसे महंगा आइटम ‘ शोले ‘ का एक पोस्टर है , जिसके लिए कीमत 9,800 रुपये रखी गई है ।" ,एक और दमदार आइटम है फिल्म ‘ कालिया ‘ का एलपी जिसमें गानों के साथ - साथ फिल्म के दमदार डायलॉग्स भी हैं । ,"ऐसे तमाम आइटम्स इस सेल में रखे गए हैं , जिन पर वेबसाइट के ‘ द स्टोरी ‘ हिस्से के ‘ बालीवुड्स बिग बी ‘ के तहत नजर डाली जा सकती है ।" ,यह ऑनलाइन सेल साइट पर 11 मार्च को खत्म हो रही है । ,"जैकी भगनानी की लांचिंग तो बहुत बढ़िया तरीके से हुई थी , लेकिन उतनी ही तेजी से वे गुमनामी में भी खोते चले गए ।" ,मशहूर प्रोड्यूसर वासु भगनानी के बेटे जैकी जल्द ही फिल्म ‘ रंगरेज ‘ में दिखेंगे । ,और इस फिल्म के लिए उन्होंने चर्चा में आने का बहुत बढ़िया तरीका खोजा है । ,जैकी ने यू ट्यूब पर फेमस हुए पॉप सांग गंगनम स्टाइल के राइट्स खरीद लिए हैं और उसे अपनी आने वाली फिल्म के लिए शूट भी कर डाला है । ,जैकी का कहना है कि यह उनके पापा वासु को उनकी ओर से गिफ्ट है । ,देखना है कि यह गिफ्ट रंगरेज को हिट कराने में काम आती है या उन्हें फिर अपने पापा को इंप्रेस करने का कोई और तरीका खोजना होगा । ,षष्‍टम श्रेणी - ,"इस श्रेणी के अन्तर्गत ऐसी भूमि जो खड़े ढाल वाली , शुष्क , ऊबड़ - खाबड़ , तर या इसी प्रकार की हो वह खेती के लिए अनुपयुक्‍त होती है ।" sg,इस प्रकार की भूमि को चरागाह स्थापित करने के लिए ज्यादातर यथेष्‍ठ रूप से जोता जा सकता है । pl,कुछ भूमि में वृक्ष फसलें बोई जा सकती हैं । ,सप्‍तम श्रेणी - ,कठोर सीमाओं या कठोर अपरदन संकट के अन्तर्गत चराई अथवा वन व्यवस्था इस भूमि उपयोग का लक्षण है । ,इसमें चतुर्थ श्रेणी की तुलना में आवरण अपक्षय से अधिक तेज गति से अपरदन होता है । sg,इसमें संरक्षण उद्देश्यों हेतु चराई की तुलना में वन व्यवस्था को पसंद किया जाता है । ,अष्‍टम श्रेणी - ,यह भूमि वन - व्यवस्था चराई व खेती के लिए अनुपयुक्‍त मानी जाती है । ,"इसमें दलदल , बेहड़ भूमि , मरुस्थल तथा उच्च पर्वत शामिल होते हैं ।" ,"अगर उचित जलविभाजन संरक्षण उपायों को किया जाए तो यह भूमि केवल वन्य प्राणियों , मनोरंजन परिरक्षण तथा जलप्रवाह के उपयुक्त होती है ।" ,इस वर्गीकरण का महत्त्व ऐसे स्थलों पर मालूम होता है जहाँ मृदा अपरदन अथवा अन्य संकट खेती को सीमित करते हैं । ,भूमि प्रयोग के व्यापक नियोजन हेतु यह आवश्यक है कि पर्यावरण के प्रमुख कारकों से निकाले एक विभक्‍तिकरण का इस्तेमाल किया जाए । ,एक भूमि वर्गीकरण योजना साधारणतः जमीन में निहित प्राकृतिक गुणों को अभिवयक्‍त करने का प्रयत्‍न करती है । sg,मृदा के बारे में यह अनुमान लगाया जा सकता है कि भूमि के संभाव्यता मूल्य को निर्धारित करने में मृदा के रासायनिक तत्वों की अपेक्षा भौतिक तत्व अधिक सहायक होते हैं । ,मृदा की पोषक प्रास्थिति पूर्णतः कृत्रिम हो सकती है अर्थात वह प्रबंध की प्रणाली तथा उर्वरकों के प्रयोग पर निर्भर होती है । ,"यदि गहराई , जल , गठन , निकासी आदि के अधिक स्थायी लक्षण संतोषप्रद हों तो ऐसी मृदा की पोषक स्थिति का निर्माण किया जा सकता है जो जन्मजात से घटिया हो ।" ,विशेष परिस्थिति व मृदा के एक अथवा अधिक कारकों के काफी विपरीत प्रभाव के कारण भूमि की उत्पादकता कम होती है । ,प्रयोग हेतु भूमि वर्गीकरण प्रणाली का निर्धारण करते समय ऊष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में इस बात पर ध्यान रखना चाहिए कि वहां शीतोष्ण कटिबंध की तुलना में बिल्कुल विपरीत दशाएं पाई जाती हैं । ,शीतोष्ण कटिबंध में भूमि का वर्गीकरण अब बहुत अधिक विकसित हो चुका है । pl,शीतोष्ण भूमियों में उपयोग में लाई जाने वाली प्रणालियां ऊष्णकटिबंधीय भूमि में सर्वेक्षकों को साधारण सिद्धान्तों के रूप में मार्गदर्शन कर सकती हैं । ,कुछ कारकों का वहां बिलकुल अलग प्रभाव होता है । ,उदाहरणस्वरूप शीतोष्ण प्रदेशों में ऊँचाई में वृद्धि का साधारणतः हानिप्रद प्रभाव होता है । ,जबकि ऊष्ण कटिबंध में इसका लाभदायक प्रभाव होता है । ,निश्‍चित रूप से वनस्पति जलवायु तथा मृदा के एक महत्त्वपूर्ण सूचक के रूप में प्रचलित है । ,यदि वनस्पति जातियों के आवास कारकों व संलग्न साहचर्य का ज्ञान हो तो आसान विधि के रूप में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है । ,शीतोष्ण कटिबंध में मृदा की उत्पादक क्षमता के प्राक्कलन में रासायनिक स्थिति की तुलना में भौतिक लक्षण ज्यादा महत्त्वपूर्ण होते हैं । ,"वाणिज्य फसलों में जहां नाइट्रोजन , फॉस्फेट पोटाश व चूना नियमित रूप से विशाल मात्रा में दिया जा सकता है ।" ,वहाँ आर्थिक दृष्‍टिकोण से ऐसा करना सम्भव है क्योंकि वहां वाणिज्य खेती के लिए लाभदायक पण्य क्षेत्र उपस्थित है । ,अनेक स्रोतों से ज्ञात हुआ है कि कृषि के अंतर्गत आने वाली ऊष्णकटिबंधीय मृदाओं की उर्वरकता में तीव्रता से ह्रास हुआ है । ,आर्द्र वन क्षेत्रों में ह्रास विशेष रूप से तीव्र होता है । ,घाना में 8 वर्षों तक मक्का व कसावा का नियमित द्विवर्षीय सस्यावर्तन किया गया । ,यह उर्वरकों के प्रभावों की अनुपस्थिति में किया गया । sg,दोनों सस्यों की पैदावार में चौथे चक्र के बाद प्रौढ़ गौण को साफ किया गया । ,"यह अनुमान लगाया गया है कि मलाया में क्रमांगत वर्षों में चावल की भूमि 1500 - 200 , 1200 तथा 820 पौण्ड धान पैदा करती है ।" ,यहां खेतों में प्रयुक्‍त खाद का लाभ सिर्फ कुछ महीनों तक ही मिलता है जबकि शीतोष्ण प्रदेशों में इसका लाभ तीन वर्षों तक मिलता रहता है । ,इसलिए ऊष्ण कटिबंधीय भूमियों के व्यावहारिक वर्गीकरण में भूमि के वर्गों में अंतर होना चाहिए । ,गौरु ने लिखा है कि यदि मृदाओं का गठन उपयुक्‍त हो तो ऊष्ण कटिबंधीय कृषि अपनी घटिया मृदाओं से ही जरुरतों की पूर्ति कर सकती है । ,उनके कहने का आशय यह है कि वहाँ मृदाओं का गठन पर्याप्‍त रूप से सुचूर्ण्य होता है । ,यह एक ऐसा सामान्य निष्कर्ष है जो समस्त ऊष्ण कटिबंधीय पौधों पर समान रूप से लागू नहीं हो सकता है किन्तु इसे वर्गीकरण का मानदण्ड मानना चाहिए । ,"पुनश्‍च , मृदा में कृत्रिम रूप से लम्बे काल तक परिवर्तन लाना मुश्किल होता है ।" ,किन्तु उनका आयु और मृदाओं की प्रौढ़ता से सम्बन्ध होता है । ,गौरु ने उद्धृत किया है कि अति - विशिष्‍ट उच्च श्रेणी मृदाएँ विशिष्‍ट नदीय जलोढ़क हैं । ,ये बहुत ही नवीन जमाव हैं । ,ये उन क्षेत्रों से बहकर आती हैं जहां ऊष्ण कटिबंधीय मौसमी क्षरण नहीं होता है । ,सुधार योग्य जमीन को ऐसी जमीन से अलग रखना चाहिए जिसमें सुधार की कोई भी संभावना न हो । ,लैटराइट और ऐसी मृदाएं जिनमें लैटराइट के प्रक्रम ज्यादा विकसित हों उन्हें सबसे निकृष्‍ट मानना चाहिए । ,पानी की उपलब्धता के कारण तटीय पट्टी की बंध्य बालुका राशि में फसलों की पैदावार होने लगी है । ,परन्तु यह स्वीकार किया गया है कि वन संसाधनों तथा चारा कृषि का विकास करने में समय लगेगा । pl,इस समयावधि में उत्पादन के अन्य रूपों को विकसित किया जाना चाहिए । ,आर्थिक स्थिति की आवश्यकता को स्मरण में रखकर ऐसा करना आवश्यक है । ,"यह सलाह दी गयी है कि एक अथवा अधिक दशकों के लिए चावल नींबू वंशीय फल , फलियाँ और कोको उत्पादन करने के लिए विशिष्‍ट प्रयत्‍न किया जाना चाहिए ।" ,एप्पल का दावा है कि नई टेक्नोलॉजी की बदौलत आईफोन - 5 से लगातार आठ घंटे तक 4जी ब्राउजिंग की जा सकेगी । ,माइक्रोमैक्स फनबुक प्रो 10.1 टैबलेट माइक्रोमैक्स का दूसरा टैबलेट है । ,इससे पहले वह फनबुक 7 इंच का लांच कर चुका है । ,फनबुक प्रो 10.1 में सुपर सिल्क टच स्क्रीन डिस्प्ले लगा है । ,यह एंड्रायड 4.0 आइसक्रीम सैंडविच ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है । ,इसमें 1.2 गीगा हर्ट्ज का प्रोसेसर भी लगा है । ,यह टैबलेट 3जी मोड्यूल के बिना ही 3 जी यूएसबी डेटा कार्ड को सपोर्ट करता है । ,"माइक्रोमैक्स फनबुक टैबलेट में वीजीए फ्रंट फेसिंग कैमरा , 8 जीबी बिल्ट - इन स्टोरेज , माइक्रो एसडी स्लॉट है जिसे 32 जीबी तक बढ़ाया भी जा सकता है ।" ,"फनबुक में कई एप्लीकेशन्स जैसे यूट्यूब , टेक्स्ट एडिटर , अडोब पीडीएफ , फ्लैश आदि पहले से लोड हैं ।" ,विशेषताएं ,अगले पेज पर सैमसंग गैलेक्सी नोट 10.1 एंड्रायड 4.0 पर चलता है और इसमें 1.4 गीगाहर्ट्ज का क्वाड कोर प्रोसेसर लगा हुआ है । ,टैब का रियर कैमरा 5 मेगापिक्सल का है जबकि फ्रंट कैमरा 1.9 मेगापिक्सल NULL । ,"टैब की 16 जीबी की मेमोरी की को 32 जीबी तक बढ़ाया जा सकता है , गैलेक्सी नोट में 2 जीबी षां लगी हुई है ।" ,"इसके 16 जीबी वर्जन की कीमत लगभग 28 हजार रुपए और 32 जीबी की कीमत लगभग 31,000 रुपए है ।" ,इसका डिस्प्ले 10.1 इंच का है जिसका रिजोल्यूशन 1280 / 800 पिक्सल्स है । ,मल्टीस्क्रीन इसका एक रोचक फीचर है । ,इसमें आप आधे डिस्प्ले में अलग - अलग एप्लीकेशन्स देख सकते हैं । ,सैमसंग में 3 टाइप के स्क्रीन कीबोर्ड हैं । ,दूसरा है आप जिसे दो हिस्सों में बांट सकते हैं । ,तीसरा है फ्लोटिंग कीबोर्ड जिसे आप चारों ओर घुमा भी सकते हैं । ,इसका सबसे अनोखा फीचर एस पेन है । ,यह ठीक एक पेन की तरह ही काम करता है । ,इससे आप डिस्प्ले पर लिख भी सकते हैं और कोई भी डिजाइन भी बना सकते हैं । ,आर्कोस 97 कार्बन एंड्रायड 4.0 आइसक्रीम सैंडविच ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाला टैबलेट है । ,9.7 इंच डिस्प्ले का यह टैबलेट है जिसकी पिक्सल डेन्सिटी 1024 / 768 है । ,इसमें 1 गीगा हर्ट्ज का प्रोसेसर भी लगा है । ,16 जीबी का इंटर्नल स्टोरेज और 1 जीबी रैम है । ,पीछे की ओर तथा फ्रंट कैमरा दोनों की सुविधा इसमें है । ,लेनोवो आइडियापैड टैबलेट के1 में 1 गीगा हर्ट्ज का एनवीआईडीआईए टेगरा टी 20 चिप लगा है । ,1 जीबी डीडीआर2 रैम है और यह एंड्रायड 3.1 पर चलता है । ,"इसके अन्य फीचर ब्लूटूथ , वाई - फाई , एचडीएमआई पोर्ट और दो कैमरे हैं ।" ,5 मेगा पिक्सल का कैमरा पीछे लगा है जबकि 2 मेगा पिक्सल का फ्रंट कैमरा है । ,लेनोवो आइडियापैड टैबलेट के1 में 1 गीगा हर्ट्ज का एनवीआईडीआईए टेगरा टी 20 चिप लगा है । ,1 जीबी डीडीआर2 रैम है और यह एंड्रायड 3.1 पर चलता है । ,"इसके अन्य फीचर ब्लूटूथ , वाई - फाई , एचडीएमआई पोर्ट और दो कैमरे हैं ।" ,5 मेगा पिक्सल का कैमरा पीछे लगा है जबकि 2 मेगा पिक्सल का फ्रंट कैमरा है । ,आर्कोस 101 जी 9 एक 10.1 इंच स्क्रीन का टैबलेट है । ,यह गूगल ओपन सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलता है । ,इसमें मल्टी कोर एआरएम कोरटेक्स ए9 1 गीगा हर्ट्ज का प्रोसेसर लगा है । ,"16 जीबी की इंटर्नल मेमोरी क्षमता है , माइक्रोएसडी कार्ड स्लॉट , जीपीएस , वाई - फाई , ब्लूटूथ 2.1 आदि सुविधाएं भी हैं ।" ,लेनोवो आइडिया टैब एस2110 एक एंड्रायड आईसीएस टैबलेट है । ,इसमें 10.1 इंच का आईपीएस डिस्पले लगा है । ,इसमें 2 प्रोसेसर लगे हैं इसकी क्षमता 1.5 गीगाहर्ट्ज है । ,"1 जीबी मेमोरी , 5 मेगा पिक्सल का ऑटो फोकस लेड फ्लैश रियर कैमरा और 1.3 मेगा पिक्सल का फ्रंट कैमरा है ।" ,"माइक्रो - एचडीएमआई , माइक्रो - यूएसबी और सिम कार्ड स्लॉट्स आदि की भी सुविधा इसमें है ।" ,मैकबुक प्रो विद रेटिना डिस्प्ले के नाम से ही ज़ाहिर है कि यह मैकबुक प्रो रेटिना डिस्प्ले के साथ उपलब्ध है । ,एप्पल का यह मैकबुक हैरान कर देने वाले फीचर 5.1 मिलियन पिक्सल के रेटिना डिस्प्ले के साथ बाज़ार में धूम मचाने को तैयार है । ,मैकबुक प्रो रेटिना डिस्प्ले के साथ एप्पल एक बार फिर पोर्टेबल टेक्नोलॉजी में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहा है । ,मैकबुक प्रो रेटिना डिस्प्ले के परिचय के लिए इसके रेटिना डिस्प्ले फीचर की व्याख्या करने से बेहतर कुछ नहीं हो सकता । ,आपकी कल्पना का स्क्रीन बनाने के लिए इसमें कोई कसर बाकी नहीं रखी गई है । ,"अब तक आपने जितनी भी स्पष्ट इमेज देखी हैं , उनकी तुलना में इसमें आप इमेज को कई गुना स्पष्ट पाएंगे ।" ,खबर सिर्फ इतनी है कि दुकान में चोरी हो गई । ,अच्छी भाषा के लिए पुनर्लेखन भी आवश्यक है । ,हमारे पत्रकार यह ध्यान रखें कि अखबार में खबरों को चाय की केतली की तरह संभाल कर रखना है जहां गर्म पानी डालते समय स्वयं ठंडा रहना है । ,इलेक्‍ट्रॉनिक समाचार माध्यमों की क्रांति के बावजूद हाल के वर्षों में प्रिंट मीडिया का महत्व बढ़ता ही गया है । ,वैश्‍वीकरण के कारण हिंदी के अखबारों का महत्व कम होने की आशंका भी कुछ वर्षों पहले की जा रही थी । ,"हिंदी के अखबारों की प्रसार संख्या लगभग डेढ़ करोड़ हो चुकी है , जबकि अंग्रेजी के अखबारों की कुल प्रसार संख्या लगभग 40 लाख की है ।" ,हिंदी अखबारों की छपाई भी अंग्रेजी के अखबारों से कमतर नहीं कही जा सकती । ,"आधुनिक टेक्‍नॉलाजी का सबसे अधिक उपयोग हिंदी के अखबार ही कर सकते हैं , क्योंकि उत्तर भारत में ऐसे अनेक हिंदी अखबार हैं जिनके 15 - 20 संस्करण निकल रहे हैं ।" ,फिर इन संस्करणों के जिला परिशिष्‍ट अलग से होते हैं । ,प्रिंट मीडिया में हिंदी के समक्ष एक चुनौती अवश्य है कि हिंदी के कुछ अखबार अंग्रेजी अखबारों से बंधे हुए हैं । ,ऐसे में हिंदी का अखबार या उससे जुड़े कुछ पत्रकार हीनभावना ग्रस्त रहते हैं । ,वे भूल जाते हैं कि उनकी प्रतिष्‍ठा हिंदी भाषा के व्यापक प्रभाव की प्रतिष्‍ठा से जुड़ी हुई है । ,जब प्रतिष्‍ठा का भाव नहीं रहता है तो भाषा का विकास अवरुद्ध हो जाता है । ,हिंदी के पाठकों की अभिरुचि सीमित नहीं है । ,"उसे अपने गांव , कस्बे के साथ पूरी दुनिया को समझने की उतनी ही क्षमता है जितनी कि किसी अन्य भाषा के अखबार के पाठक की होती है ।" ,सच तो यह है कि हिंदी का पाठक अधिकांश सामग्री चाहता है । ,अंग्रेजी के पाठकों के लिए अंग्रेजी अखबारों के साथ कंप्यूटर से जुड़ी हुई सुविधाएं भी हैं । ,हिंदी पाठकों का बड़ा वर्ग आज भी प्रकाशित सामग्री पर ही निर्भर है । ,"हिंदी अखबारों की प्रसार संख्या इसलिए भी बढ़ी है , क्योंकि प्रति व्यक्‍ति आय भी बढ़ी और साक्षरता भी बढ़ती गई है ।" ,"भ्रष्‍टाचार के वातावरण में क्षेत्रीय अखबारों के संवाददाता कहीं कुछ प्रतिशत भले ही भ्रष्‍ट हुए हों , लेकिन बहुत बड़ी संख्या ऐसे पत्रकारों की है जो न्यूनतम वेतन में अधिकाधिक समर्पित भाव से काम कर रहे हैं ।" ,पिछले वर्षों के दौरान हिंदी पत्रकारिता में अच्‍छी पत्रिकाएं अवश्य कम हुई हैं । ,हिंदी पत्रिकाओं की अकाल मृत्यु दुर्भाग्य का विषय है । ,हिंदी पत्रिकाओं के लिए विज्ञापन मुश्किल से मिलते हैं । ,उसका एक बड़ा कारण यह भी है कि विज्ञापन की दुनिया में हिंदी के लोग कम पहुंचे हैं । ,हिंदी पत्रकारिता को सशक्‍त करने के लिए विज्ञापन और प्रसार के क्षेत्र में हिंदी से जुड़े लोगों को प्रोत्साहित करना आवश्यक है । ,"हिंदी पत्रकारिता का स्वर्णिम युग तभी आएगा , जबकि अंग्रेजी अखबारों के मुकाबले इसकी आमदनी अधिक होगी ।" ,अंग्रेजी पत्रकारिता की तुलना में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के अखबार इस देश से ज्यादा गहराई से जुड़े हुए हैं । ,इसकी सांस्कृतिक और बौद्धिक जड़ें अधिक गहरी और मजबूत हैं । ,"वे जिस स्तर पर पाठकों का ध्यान रखते हैं , वह अंग्रेजी पत्रकारिता कभी नहीं कर सकती है ।" ,वैश्‍वीकरण के दौर में हिंदी पत्रों के लिए एक बड़ा खतरा यह अवश्य है कि कई संस्थानों के प्रबंधक अंग्रेजी अखबार को आदर्श मानकर चलते हैं और बाजार की मांग के नाम पर अधिकाधिक हल्की - फुल्की सामग्री देना आवश्यक मानते हैं । pl,टैबलाइड अखबार और अंग्रेजी अखबारों के प्रभाव से हिंदी प्रिंट मीडिया को बचाने के लिए सही दृष्‍टि वाले पत्रकारों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी । sg,कहीं न कहीं कोई लक्ष्मणरेखा खींचनी होगी । sg,विश्‍व के श्रेष्‍ठतम कहे जाने वाले अंग्रेजी के अखबारों ने भी बाजार के समक्ष समर्पण के चक्‍कर में गंभीर वैचारिक सामग्री को कम नहीं किया । ,नाम तो है ’ संवाददाता सम्मेलन ’ लेकिन इसका आयोजन संवाददाता नहीं करते हैं । pl,आयोजक अपनी बात कहने के लिए संवाददाताओं को आमंत्रित करते हैं । ,आमतौर पर आयोजक संवाददाता सम्मेलन के आयोजन पर एक हजार रुपए से लेकर एक लाख रुपए तक और कभी - कभी संवाददाताओं को दी जाने वाली भेंट को मिलाकर अनाप - शनाप भी खर्च करते हैं । ,"इसमें चाय , कॉफी से लेकर मांस - मदिरा तक परोसा जाना आम बात है ।" ,"एक पूंजीपति करोड़ों रुपए विज्ञापन पर खर्च करने के बावजूद चार पंक्‍तियां खबर के रूप में छपवाने को लालायित रहता है , क्योंकि खबरों की विश्‍वसनीयता होती है ।" ,यही विश्‍वसनीयता पत्रकारों की धरोहर है । ,वैसे संवाददाता सम्मेलनों में सबसे बड़ी समस्या प्रश्‍न पूछने की होती है । ,इन सम्मेलनों में एक - दो ऐसे बड़बोले संवाददाता होते हैं जो पूरे सम्मेलन पर छा जाने की कोशिश में रहते हैं । pl,वे एक पर एक सार्थक या निरर्थक प्रश्‍न दागते रहते हैं । sg,प्रश्‍न पूछने में वे ऐसा एकाधिपत्य कायम कर लेते हैं कि दूसरों को प्रश्‍न पूछने का मौका ही नहीं देते । ,इसलिए कुशल संवाददाता को अपना प्रश्‍न पूछने का मौका ही नहीं देते । ,इसलिए कुशल संवाददाता को अपना प्रश्‍न पूछना सुनिश्‍चित करना होता है । ,यह तो संवाददाता का अपना कौशल व चातुर्य है कि बातचीत के क्रम में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रश्‍नों के माध्यम से व्यक्‍ति विशेष के मन की बात उगलवा लेता है । ,यदि पत्रकार बाहर नहीं निकलें और प्रश्‍न नहीं पूछें तो समाचार पत्रों में खबर कहां से आएगी ? ,अक्सर संवाददाता सम्मेलनों में आजकल हम लोग बगैर तैयारी के और बिना सोचे - समझे भी पहुंच जाते हैं । ,"राजनेता कभी विचारों के आधार पर NULL , कभी आजादी के आधार पर NULL , कभी सांप्रदायिक आधार पर और कभी प्रलोभन के बल पर पत्रकारों को प्रभावित करते हैं ।" ,"एक कहावत है , जिम्मेदारी की भावना से रहित शक्‍ति केवल वेश्याओं के पास होती है । ’" ,"अब इस मिश्रण में मेवे की कतरन डालें , मिलाएं और आंच से उतार कर ठंडा होने के लिए रख दें ।" ,तत्पश्चात चावल के आटे को पानी की सहायता से नरम गूंथ कर थोड़ी देर ढंक कर रख दें । ,"अब आटे की छोटी - सी लोई हाथ में लेकर फैलाएं , ऊपर से एक छोटा चम्मच मिश्रण रखकर मोदक के आकार में सभी मोदक तैयार कर लें ।" ,एक कड़ाही में घी गरम करके धीमी आंच पर सभी मोदक तल लें । ,लीजिए तैयार मेवे भरे चावल के लजीज मोदक से भगवान को भोग लगाएं । ,सबसे पहले कवर सामग्री को मिलाकर उसमें थोड़ा - सा मोयन डालकर गूंथ लें । ,"अब कड़ाही में किशमिश को छोड़कर बाकी सामग्री गुड़ , दूध और कटे मेवे डालकर सूखने तक पकाएं ।" ,तत्पश्चात इलायची पावडर और किशमिश मिला कर मिश्रण आंच से उतार कर ठंडा कर लें । ,अब आटे की छोटी - छोटी पतली पूरियां बना कर उसमें भरावन सामग्री भरकर मोदक का आकार दें । ,इसी तरह सभी मोदक बना लें । ,फिर घी गर्म करके मध्यम आंच पर सुनहरे मोदक तल लें । ,एक मोटी तल वाली कड़ाही में घी गरम करके छनी हुई सूजी को हल्का भूरा होने तक सेक लें । ,अब इसमें किसा हुआ नारियल डालें और थोड़ा सेक लें । ,तत्पश्चात एक दूसरे पैन में शक्कर - पानी मिलाकर चाशनी बनाएं । ,ध्यान रहे चाशनी एक तार की हो । ,"अब इसमें मीठा रंग , इलायची मिला लें और उसमें सूजी - नारियल का मिश्रण डालें और अच्छी तरह से मिला लें ।" ,फिर थोड़ी देर ढंक कर रखे और ठंडा होने दें । ,मिश्रण गुनगुना होने पर सभी के मोदक बना लें । ,ऊपर से एक पिस्ता मोदक के मुंह पर चिपका दें और तैयार स्वादिष्ट नारियल - सूजी के मोदक प्रसाद में उपयोग में लाएं । ,मोदक महाराष्ट्र में खाया जाने वाला और भगवान श्री गणेश का प्रिय व्यंजन है । ,इसलिए गणेश जी को इसका भोग अवश्य लगाना चाहिए । ,इससे गणेश जी अपने भक्तों पर प्रसन्न होकर उनकी हर मनोकामना पूर्ण करते हैं । ,सबसे पहले आलू उबाल कर ठंडे होने के लिए रख दें । ,"कड़ाही में तेल गर्म करके राई , चने और उड़द दाल , बारीक कटे प्याज डाल दें ।" ,"अच्छी तरह भुन जाने पर , हरी मिर्च - अदरक का पेस्ट डाल दें ।" ,आलू छीलकर मसल लें । ,हल्दी और स्वादानुसार नमक मिलाएं । ,इस मिश्रण को दस मिनट तक हल्की आंच पर भूनें । ,पहले से भिगाए गए चावल को बारीक पीस लें । ,आलू ठंडे होने पर मध्यम आकार के गोले बना लें । ,"अब बेसन में नमक , सोडा और पीसे चावल मिला कर घोल बना लें ।" ,"आलू के गोलों को बेसन में लपेटे , गर्म तेल में सुनहरे होने तक तलें ।" ,तैयार आलू बौंडों को हरी चटनी और मीठी चटनी के साथ गरमा - गरम पेश करें । ,"सबसे पहले मैदे में मोयन , नमक , बेकिंग पावडर और पानी डालकर सख्त आटा गूंथ कर एक घंटे के लिए ढंक कर रख दीजिए ।" ,एक घंटे बाद मैदे की बड़ी लोई करके पतला एवं बड़ा बेल लें । ,अब इसकी लंबी - लंबी पट्टियां काट लें । ,इसके बाद भरावन की सामग्री हल्के हाथ से मिला लें । ,एक - एक चम्मच भरावन एक - एक पट्टी के कोने पर रखकर उसे त्रिकोण के आकार में मोड़ते जाएं । ,"त्रिकोण आकार देते समय चिपकाने के लिए दूध का उपयोग करें , जिससे समोसे के मुंह फटे नहीं ।" ,अब एक कड़ाही में तेल गरम करके धीमी आंच पर तल लें । ,तैयार लाजवाब चॉकलेट समोसे को गरमा - गरम पेश करें । ,भुट्टों को कद्दूकस कर लें । ,चूल्हे पर कड़ाही रखें । ,गरम होने पर इसमें मक्खन डालें । ,जीरे का तड़का डालें और बारीक कटा प्याज थोड़ा भूनें । ,अब इसमें हरी मिर्च बारीक काटकर डालें और अदरक बारीक काट लें या कसा हुआ अदरक भी डाल सकते हैं । ,कसा हुआ भुट्टा इसमें डालकर 10 मिनट तक भूनें । ,एक कप दूध डालकर उबालें । ,थोड़ा पकने पर आधा कप दही और नमक भी डाल दें और 50 ग्राम चीज कसा हुआ बुरक दें । ,ढक्कन लगाकर 5 से 7 मिनट और पकाएं । ,नारायणपाल के विष्णु मंदिर के पूर्ण होते - होते धारावर्षा एवं सोमेश्वर देव दिवंगत हो चुके थे । ,एवं गुण्डमहादेवी के पौत्र छिंदक नागवंशी राजा कन्हर देव का शासन था । ,गुण्डमहादेवी और उसकी बहू सोमेश्वर देव की रानी के शिलालेख यहाँ पर हैं । ,नारायणपाल का यह विष्णु मंदिर पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित स्मारक है । ,नारायण पाल का यह विष्णु मंदिर छिंदक नागवंशी शासन के समय की जानकारी प्राप्त करने का मुख्य स्त्रोत भी है । ,शंखनी एवं डंकनी नदी के संगम स्थल पर स्थित दण्तेवाड़ा जगदलपुर से 85 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । ,यहाँ बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी देवी का प्राचीन मंदिर है । ,दंतेश्वरी देवी बस्तर के रहवासियों की आस्था का प्रतीक है । ,दशहरे के समय देश - विदेश के पर्यटक बस्तर आते है । pl,"पैदल चलकर आने वाले श्रद्धालुओं के लिये विभिन्न स्वयं सेवी संस्थाओं के द्वारा नि:शुल्क भोजन , नास्ते , रहने एवं चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाती हैं ।" ,"बस्तर में दण्तेश्वरी माई के अलावा शिव , गणेश , विष्णु , सूर्य , भैरव की प्रतिमाएँ हैं ।" ,ये प्रतिमाएँ पुरातात्विक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं । ,बैलाडीला में लौह अयस्क का खनन देखना भी अद्भुत अनुभव होता है । ,बचेली एवं किरंदूल में एन.एम.डी.सी. की खदाने हैं । ,बैलाडीला में गेस्ट हाऊस में रुका जा सकता है । ,बैलाडीला में लौह अयस्क की खदानों को देखने के लिये अनुमति लेना आवश्यक है । ,बचेली की खदानें टाउनशिप से 25 किलोमीटर दूर हैं । sg,बचेली का अयस्क अच्छे ग्रेड का माना जाता है । ,बचेली के अयस्क में लोहे का प्रतिशत 86 तक रहता है । ,के. के. रेलवे लाइन ( कोत्सावल्या से किरन्दूल ) ,के. के. रेलवे लाइन में पेसेंजर से सफर करना एक रोमांचक अनुभव होता है । pl,"रास्ते में घने जंगल एवं गगनचुम्बी पहाड़ियों के बीच से गुजरती ट्रैन , यू-टर्न लेती ट्रैन एवं बादलों के बीच से झाँकते पहाड़ मनमोहक दृश्य उपस्थित करते हैं ।" ,जो जैवविविधता बस्तर में दिखलाई पड़ती है वह अन्यत्र देखने को नहीं मिलती । ,बस्तर के रोमांच भरे सफर में एशिया का सबसे ऊँचा ब्राड गेज रेलवे स्टेशन शिमलीगुड़ा पड़ता है । ,ताड़ी के रसभरे फल लेकर बेचने वाले पूरे रास्ते में मिलते हैं । ,ताड़ी के रसभरे फलों को खाना अच्छा लगता है । ,इस रोमांचकारी सफर में दो इलेक्ट्रिक इंजनों से चलने वाली ट्रैन 84 बोगदों ( टनल ) से होकर गुजरती है । ,के. के. लाइन की लम्बाई 50 से 900 मीटर तक है । ,के. के. लाइन का निर्माण जापानियों ने बैलाडीला के लौह अयस्क को विशाखापटनम होते हुए जापान ले जाने के लिये किया था । sg,विशखापटनम से लौह अयस्क पानी के जहाज से जापान ले जाया जाता है । ,के. के. लाइन के सफर में खाने पीने की सामग्री नहीं मिलती । ,अत: यदि इस सफर का आनंद लेना हो तो खाने - पीने की भरपूर सामग्री साथ लेकर चलना चाहिए । ,के. के. लाइन विगत 40 वर्षों से लोह अयस्क का परिवहन कर रही है । ,औसतन 16 मालगाड़ियाँ के. के. रेलवे लाइन पर प्रतिदिन चलती हैं । ,525 किलोमीटर लम्बे इस के. के. रेलवे लाइन से लौह अयस्क परिवहन कर रेलवे को प्रतिवर्ष लगभग 8 बिलियन का फायदा होता है । ,जगदलपुर से 40 किलोमीटर की दूरी पर विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात स्थित है । ,चित्रकोट में इन्द्रावती नदी विस्तारित होकर मनमोहक जलप्रपात का निर्माण करती है । ,चित्रकोट जलप्रपात को बस्तर का नियाग्रा भी कहा जाता है । sg,फ्लड लाइट में जलप्रपात को देखना अलग ही अनुभव प्रदान करता है । ,पर्यटन विभाग की पूर्ण सुविधा संपन्न हट में रुकने का आनंद ही अलग है । ,चित्रकोट जलप्रपात से 10 किलोमीटर की दूरी पर तामड़ाघुमड़ जलप्रपात है । ,तामड़ाघुमड़ जलप्रपात में एक छोटी सरिता सीधे लगभग 100 फिट की ऊँचाई से निचले भाग में गिरकर एक मनोरम जलप्रपात का निर्माण करती है । ,प्रपात को नीचे से उतरकर देखना अच्छा लगता है । ,उतरने का मार्ग दुर्गम होने के कारण अतिरिक्त सावधानी रखना आवश्यक होता है । ,जगदलपुर के हृदयस्थल में स्थित एक मनोरम स्थान है । ,यहाँ बच्चों के लिये बाल उद्यान एवं रेलगाड़ी की व्यवस्था है । pl,साथ ही एक विशाल स्केटिंग रिंग युवाओं को आकर्षित करती है । ,सुन्दर लॉन एवं पुष्प उद्यान पर्यटकों का मन मोह लेते हैं । ,काकतीय वंश के महाराजा पुरूषोत्तम देव द्वारा बनाये गये इस तालाब को छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े तालाब होने का गौरव प्राप्त है । ,प्रात: एवं सांयकालीन भ्रमण के लिये यह उपयुक्त स्थान है । ,दूसरे कॉलेज के स्टूडेंट्स देखते ही रह जाएंगे । ,अंजलि ! राहुल को तुम कब से जानती हो ? ,राहुल तुम्हारा सबसे अच्छा दोस्त है ना ? ,तुम उससे प्यार नहीं करती ? ,"मेरे डैड कहा करते थे , कि मर्द का सिर सिर्फ तीन औरतों के सामने झुकता है ।" ,"अपनी मां के सामने , एक दुर्गा मां के सामने और… ।" ,राहुल ! तुम यहां इस वक्त ? ,ऐक्चुली मुझे नींद नहीं आ रही थी और मैंने सोचा कि तुम्हें भी नहीं आ रही होगी और अगर तुम जाग रही होगी तो मेरे बारे में ही सोच रही होगी । ,तुम्हें नहीं लगता यहां पर काफी गर्मी है । ,राहुल ये तुम क्या कर रहे हो ? ,अंजलि ! मैं तुम्हें ही मिलने आ रहा था । ,"कहते हैं - टूटते तारे को देखकर कुछ मांगो ना , तो मिल जाता है ।" ,कैसी लग रही हूं मैं ? ,"मैं तुम्हारी तरह खूबसूरत लगना चाहती थी , लेकिन मुझे तो कुछ आता ही नहीं ।" ,"ऐक्चुली तुम बहुत खूबसूरत हो , क्योंकि तुम सबसे ज्यादा अलग हो ।" ,"और मालूम है , तुम अगर चाहो ना तो तुम्हें कोई भी लड़का मिल सकता है ।" sg,तुम मुझसे कोई भी बात छुपा नहीं सकती हो ? ,लेकिन राहुल ? ,तुम्हें और कोई नहीं मिला ? ,"ऐक्चुली , राहुल की जगह कोई और होता , तब भी शायद मुझे इतना ही बुरा लगता ।" sg,तुमने उससे अपने दिल की बात कह दी ? ,टीना ! मैं जानता हूं राहुल सिर्फ तुमसे प्यार करता है । ,मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कभी किसी को ये कहूंगा । ,"आई होप , मैं उसको ये सब कह पाऊं ।" ,"यू नो , मैंने कितनी बार सोचा कि उसको जाकर कह दूं ।" ,"मेरा पहला प्यार अधूरा रह गया , रिफ़त दी ।" ,मैं वापस नहीं आ रही राहुल । ,कॉलेज छोड़ कर जा रही हो तुम । ,"मुझे छोड़ कर जा रही हो , मुझे बताया भी नहीं ।" ,अंजलि की शादी दिसंबर से पहले नहीं हो सकती है । ,"खुदा की रहमत तो सुना था , आज देख भी लिया , बच्ची की दुआ कबूल हो गयी ।" ,अंजलि ! तुमसे कुछ पूछूं ? ,तुम खुश हो बेटी ? ,यह कैसा सवाल है मां ? ,"ऑफ्कोर्स , मैं खुश हूं ।" ,मेरी सगाई हो गयी है । ,अमन बहुत अच्छा लड़का है । ,मुझसे बहुत प्यार करता है । ,पर क्या तुम उससे प्यार करती हो ? ,"प्यार तो मैंने कर लिया है मां , शायद मुझसे फिर से न हो , इसे एक समझौता ही समझ लो ।" ,"मेरी बेटी समझौता करेगी और प्यार नहीं करेगी , ये तो मैंने कभी सोचा ही नहीं था ।" ,"मैं भी मां हूं , क्या मैं नहीं चाहती कि तुम खुश रहो , तुम्हारा घर बस जाए ?" ,"लेकिन वो घर , जो समझौते के बलबूते पर बना हो , प्यार के नहीं NULL , वो घर नहीं होता है बेटी , मकान होता है ।" ,अंजलि ! तुम्हारा फोन है । ,मेरी एक छोटी सी प्रॉब्लम है । ,तुम मुझे इस तरह छोड़ कर मत जाया करो । ,अमन ! पता नहीं कौन फोन पर है ? ,"अमन ! तुम जानते हो मैं हर साल समर कैंप जाती हूं , उन बच्चों को सिंगिंग और डासिंग सिखाने ।" ,अब तो वो बच्चे मेरी जिंदगी का एक हिस्सा बन चुके हैं । ,मुझे क्यों ऐसा लगता है कि तुम मुझसे प्यार नहीं करती ? ,तुम जाओ शिमला अपने समरकैंप । ,तुम कोई समरकैंप - वमरकैंप नहीं जा रही हो । ,बेटा ! वहां पर बहुत बर्फ पड़ती है । ,तीसरे दिन व्रत की रात को सरस्वती देवी को सपने में अपने घर के निकट स्थित एक स्थान के बारे में कुछ अद्‍भुत दिखाई दिया । ,"अगली सुबह जब उस स्थान की खुदाई कराई गई , वहाँ चंद्र प्रभु भगवान की भव्य मूर्ति प्राप्त हुई ।" ,खुदाई करने के पश्चात जिस समय मूर्ति निकाली गई श्रद्धालु जनों ने इसका अर्थ यह निकाला । ,ट्रेन में प्रकृति का पूरा आनंद लेते हुए गोवा जाने का अलग ही मजा है । ,प्रकृति ने ही मूर्ति का जलाभिषेक करके उसे पवित्र कर दिया । ,"इस घटना के कई वर्ष बाद उसी क्षेत्र से 29 मार्च , 1972 को चंद्र प्रभु भगवान की काले रंग की पद्मासन मुद्रा में एक अन्य मूर्ति प्राप्त हुई ।" ,चंद्र प्रभु भगवान की यह मूर्ति मंदिर के दक्षिणी गेट की खुदाई के दौरान निकली थी । ,अतिशय क्षेत्र में स्थापित इस मंदिर का बाहरी स्वरूप अत्यंत भव्य है । ,अतिशय क्षेत्र में स्थापित इस मंदिर की आंतरिक सजावट बहुत लुभावनी है । ,मंदिर के प्रांगण में इतनी जगह है कि एक ही बार में यहाँ दो हजार लोग आसानी से मौजूद रह सकते हैं । ,गोवा जाने का ट्रेन रूट छोटी - छोटी पहाड़ियों और घाटियों से भरा पड़ा है । ,तिजारा में एक बड़ा हॉल है । sg,तिजारा के हॉल के दोनों ओर दीवारों पर काँच का काम किया गया है | sg,तिजारा के हॉल की दीवारों पर चित्रों के माध्यम से पौराणिक कथा उकेरी गई है । ,अतिशय क्षेत्र के मंदिर में व्यक्ति इस मूर्ति के सामने सच्चे मन से प्रार्थना करता है । ,मान्यता है कि व्यक्ति की सभी इच्छाएँ पूरी होती हैं । ,जादू - टोने से प्रभावित लोग भी अपनी समस्याओं के निवारण के लिए तिजारा आते हैं । ,मंदिर के सामने एक अत्यंत आकर्षक स्तंभ स्थापित है । ,इसे मानस्तंभ कहकर पुकारा जाता है । ,स्तंभ के ऊपर भगवान की मूर्तियाँ लगाई गई हैं । ,भगवान की मूर्तियों के दूर से ही दर्शन हो जाते हैं । ,इसे मानस्तंभ कहा जाता है । ,मानस्तंभ के दर्शन मात्र से ही व्यक्ति का घमंड कम हो जाता है । ,सामान्य रीति यह है कि मानस्तंभ की चोटी पर तीर्थंकर भगवान की चार मूर्तियाँ स्थापित की जाती हैं । ,तिजारा में वर्ष में दो बार विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है । ,एक बार फाल्गुन सप्तमी को और दूसरी बार श्रावण शुक्ल दशमी को । sg,तिजारा के अतिशय क्षेत्र में श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए 300 कमरों की धर्मशाला बनाई गई है । ,प्राचीन काल में तिजारा अतिशय क्षेत्र देहरा नाम से प्रसिद्ध था । ,कालांतर में यह स्थान देहरा - तिजारा और अब सिर्फ तिजारा भी कहलाता है । ,बस्तर के जिला मुख्यालय जगदलपुर से दक्षिण में 35 किलोमीटर की दूरी पर कांकेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान स्थित है । ,"कांकेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपने जलप्रपातों , गुफाओं एवं जैव विविधता के लिये प्रसिद्ध है ।" ,कांकेर घाटी के मुख्य पर्यटन स्थल निम्नानुसार हैं - ,जगदलपुर से 35 किलामीटर की दूरी पर स्थित तीरथगढ़ का मनमोहक जलप्रपात पर्यटकों का मन मोह लेता है । ,पर्यटक इसकी मोहक छटा में खो जाते हैं । ,तीरथगढ़ से वापिस जाने का मन ही नहीं करता । ,मुनगाबहार नदी पर स्थित यह जलप्रपात चन्द्राकार रूप से बनी पहाड़ी से 300 फिट नीचे सीढ़ीनुमा प्राकृतिक संरचनाओं पर गिरता है । pl,पानी के गिरने से बना दूधिया झाग एवं पानी की बूँदों का प्राकृतिक फव्वारा पर्यटकों को मन्द - मन्द भिगो देता है । ,भूविज्ञान में एम.टेक. होने के नाते मैने इसकी भूवैज्ञानिक उत्पत्ति जानने का प्रयास किया । ,मैनें यह पाया । ,करोड़ो वर्ष पहले किसी भूकंप से बने चन्द्र - भ्रंस से नदी के डाउन साइड की चट्टाने नीचे धसक गई थीं एवं इससे बनी सीढ़ीनुमा घाटी ने इस मनोरम जलप्रपात का सृजन किया होगा । ,तीरथगढ़ जलप्रपात से 20 किलोमीटर की दूरी पर पुरातात्विक महत्व का मंदिर चिंगीतराई में स्थित है । ,तीरथगढ़ के साथ चिंगीतराई एवं चन्द्रगिरी ऐतिहासिक महत्व रखते हैं । ,ऐसा कहा जाता है । ,तीरथगढ़ रियासत के किसी राजा के दो पुत्र थे । ,एक राजकुमार चन्द्रदेव और दूसरा तीरथदेव । ,राजकुमार चन्द्रदेव को विरासत में चन्द्रगिरी का क्षेत्र मिला । ,चन्द्रदेव के नाम पर ही इस शहर का नाम चन्द्रगिरी पड़ा । ,वहीं उनके भाई को तीरथगढ़ की जागीर मिली । ,जिसका नाम उनके नाम पर तीरथगढ पड़ गया । ,"उदाहरण के लिये डेंगू को "" ब्रेकहार्ट फीवर "" तथा "" ला डेंगू "" भी कहा जाता था ।" pl,"जटिल डेंगू के लिये कई नाम उपयोग किये जाते थे : उदाहरण के लिये "" इनफेक्शस थ्रोम्बोकाइटोपेनिक परप्यूरा "" , "" फिलीपाइन "" , "" थाई "" तथा "" सिंगापुर हेमोरेजिक फीवर "" ।" ,"वैज्ञानिक , डेंगू की रोकथाम तथा उपचार के मार्गों पर शोध कर रहे हैं ।" ,लोग मच्छरों पर नियंत्रण पाने वैक्सीन बनाने तथा वायरस से लड़ने के लिये दवाएं बनाने पर कार्य कर रहे हैं । pl,मच्छरों को नियंत्रित करने के लिये कई सरल काम किये गये हैं । ,"उदाहरण के लिये गप्पियां ( "" पोइसीलिया रेटिक्युलाटा "" ) या कोपपॉड को ठहरे हुये पानी में मच्छरों के लार्वा ( अंडे ) खाने के लिये डाला जा सकता है ।" sg,"वैज्ञानिक , लोगों को सभी चार प्रकार के डेंगू से सुरक्षित करने के लिये वैक्सीन बनाने पर काम कर रहे हैं ।" sg,"कुछ वैज्ञानिक इस बात से चिंतित हैं कि वैक्सीन , एंटीबॉडी - निर्भर वृद्धि ( ADE ) के कारण गंभीर रोग के जोखिम को बढ़ा सकता है ।" ,सर्वश्रेष्ठ संभव वैक्सीन की कुछ भिन्न गुणवत्ताएं होंगी । ,"पहला , यह सुरक्षित होगा ।" ,"दूसरा , यह एक या दो इंजेक्शन ( या शॉट्स ) के बाद कार्यशील होगा ।" sg,"तीसरा , यह सभी प्रकार के डेंगू वायरसों से सुरक्षा प्रदान करेगा ।" ,"चौथा , यह ADE नहीं पैदा करेगा ।" ,"पांचवां , इसका परिवहन तथा संग्रहण ( उपयोग किये जाने तक ) आसान होगा ।" ,"छठा , यह कम - लागत तथा लागत - प्रभावी ( अपनी लागत के अनुसार उपयोगी ) होगा ।" ,2009 तक कुछ वैक्सीनों का परीक्षण किया गया था । ,वैज्ञानिक आशा करते हैं कि पहला वैक्सीन 2015 तक व्यवसायिक निर्माण ( आम उपयोग ) के लिये तैयार होगा । ,"वैज्ञानिक , डेंगू बुख़ार के आक्रमण का उपचार करने के लिये वायरस विरोधी दवाओं को बनाने के लिये तथा लोगों को गंभीर जटिलताओं से बचाने की दिशा में काम कर रहे हैं ।" sg,वे इस बात पर भी काम कर रहे हैं कि वायरस की प्रोटीन संरचना किस प्रकार की है । ,इससे डेंगू के लिये प्रभावी दवाओं के निर्माण में सहायता मिल सकती है । ,डेंगू बुख़ार ,डेंगू बुख़ार एक संक्रमण है जो डेंगू वायरस के कारण होता है । sg,मच्छर डेंगू वायरस को संचरित करते ( या फैलाते ) हैं । ,"डेंगू बुख़ार को "" हड्डीतोड़ बुख़ार "" के नाम से भी जाना जाता है , क्योंकि इससे पीड़ित लोगों को इतना अधिक दर्द हो सकता है कि जैसे उनकी हड्डियाँ टूट गयी हों ।" ,डेंगू बुख़ार के कुछ लक्षणों में बुखार ; सिरदर्द ; त्वचा पर चेचक जैसे लाल चकत्ते तथा मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द शामिल हैं । ,"कुछ लोगों में , डेंगू बुख़ार एक या दो ऐसे रूपों में हो सकता है जो जीवन के लिये खतरा हो सकते हैं ।" ,"पहला , डेंगू रक्तस्रावी बुख़ार है , जिसके कारण रक्त वाहिकाओं ( रक्त ले जाने वाली नलिकाएं ) , में रक्तस्राव या रिसाव होता है तथा रक्त प्लेटलेट्स ( जिनके कारण रक्त जमता है ) का स्तर कम होता है ।" ,"दूसरा डेंगू शॉक सिंड्रोम है , जिससे खतरनाक रूप से निम्न रक्तचाप होता है ।" ,डेंगू वायरस चार भिन्न - भिन्न प्रकारों के होते हैं । ,यदि किसी व्यक्ति को इनमें से किसी एक प्रकार के वायरस का संक्रमण हो जाये तो आमतौर पर उसके पूरे जीवन में वह उस प्रकार के डेंगू वायरस से सुरक्षित रहता है । ,हालांकि बाकी के तीन प्रकारों से वह कुछ समय के लिये ही सुरक्षित रहता है । ,यदि उसको इन तीन में से किसी एक प्रकार के वायरस से संक्रमण हो तो उसे गंभीर समस्याएं होने की संभावना काफी अधिक होती है । ,लोगों को डेंगू वायरस से बचाने के लिये कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है । ,"डेंगू बुख़ार से लोगों को बचाने के लिये कुछ उपाय हैं , जो किये जाने चाहिये ।" ,लोग अपने को मच्छरों से बचा सकते हैं तथा उनसे काटे जाने की संख्या को सीमित कर सकते हैं । pl,वैज्ञानिक मच्छरों के पनपने की जगहों को छोटा तथा कम करने को कहते हैं । ,यदि किसी को डेंगू बुख़ार हो जाय तो वह आमतौर पर अपनी बीमारी के कम या सीमित होने तक पर्याप्त तरल पीकर ठीक हो सकता है । ,"यदि व्यक्ति की स्थिति अधिक गंभीर है तो , उसे अंतः शिरा द्रव्य ( सुई या नलिका का उपयोग करते हुये शिराओं में दिया जाने वाला द्रव्य ) या रक्त आधान ( किसी अन्य व्यक्ति द्वारा रक्त देना ) की जरूरत हो सकती है ।" ,"1960 से , काफी लोग डेंगू बुख़ार से पीड़ित हो रहे हैं ।" ,द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से यह बीमारी एक विश्वव्यापी समस्या हो गयी है । ,यह 110 देशों में आम है । ,प्रत्येक वर्ष लगभग 50 - 100 मिलियन लोग डेंगू बुख़ार से पीड़ित होते हैं । sg,वायरस का प्रत्यक्ष उपचार करने के लिये लोग वैक्सीन तथा दवाओं पर काम कर रहे हैं । ,"मच्छरों से मुक्ति पाने के लिये लोग , कई सारे अलग - अलग उपाय भी करते हैं ।" sg,डेंगू बुख़ार का पहला वर्णन 1779 में लिखा गया था । ,20वीं शताब्दी की शुरुआत में वैज्ञानिकों ने यह जाना कि बीमारी डेंगू वायरस के कारण होती है तथा यह मच्छरों के माध्यम से संचरित होती ( या फैलती ) है । ,डेंगू वायरस से संक्रमित लगभग 80 % लोगों ( प्रत्येक 10 लोगों में से 8 ) में कोई लक्षण नहीं होते हैं या बेहद हल्के लक्षण ( जैसे कि मूलभूत बुख़ार ) होते हैं । ,संक्रमित लोगों में से लगभग 5 % लोग ( प्रत्येक 100 लोगों में से 5 ) गंभीर रूप से बीमार पड़ते हैं । ,"इन लोगों की एक छोटी संख्या में , बीमारी जीवन के लिये खतरनाक होती है ।" ,डेंगू वायरस से पीड़ित होने के 3 से 14 दिनों के बाद किसी व्यक्ति में लक्षण दिखते हैं । ,"निमेनिया के एक्स - रे प्रस्तुतिकरण को लोबार निमोनिया , ब्रॉकोनिमोनिया ( लोब्यूलर निमोनिया भी कहा जाता है ) और इन्ट्रस्टिशल निमोनिया में वर्गीकृत किया जाता है ।" sg,"बैक्टीरिया जनित , समुदाय से अर्जित निमोनिया , पारम्परिक रूप से एक फेफड़े के खंडीय लोब के फेफड़े में जमाव दिखाता है जिसे लोबार निमोनिया भी कहा जाता है ।" ,"हालांकि , परिणाम कितने भी अलग - अलग हो सकते हैं लेकिन अन्य प्रकार के निमोनिया में अन्य प्रतिमान समान होते हैं ।" ,"एस्पिरेशन निमोनिया , बैक्टीरिया जनित अपारदर्शिता ( ओपेसिटीस ) के साथ प्राथमिक रूप से फेफड़ों के आधार में और दाहिनी ओर उपस्थित हो सकता है ।" ,"वायरस जनित निमोनिया का रेडियोग्राफ सामान्य , अधिक - सूजा , बैक्टीरिया वाले धब्बेदार क्षेत्रों या लोबार एकत्रीकरण वाले बैक्टीरिया जनित निमोनिया जैसा दिख सकता है ।" ,"विशेष रूप से निर्जलीकरण की अवस्था में , रोग की प्राथमिक अवस्था में रेडियोलॉजिक परिणाम उपस्थित नहीं भी हो सकते हैं या मोटापे से ग्रसित तथा फेफड़े की बीमारी के इतिहास वाले लोगों में इसकी व्याख्या कर पाना भी कठिन है ।" sg,"अनिश्चित मामलों में , सीटी स्कैन अतिरिक्त जानकारी प्रदान कर सकता है ।" ,समुदाय में रहने वाले लोगों में कारण एजेंट की निर्धारण लागत प्रभावी नहीं है और आमतौर पर प्रबंधन को बदलता नहीं है । ,"वे लोग जो उपचार के प्रति प्रतिक्रिया नहीं देते हैं उनमें बलगम कल्चर पर विचार किया जाना चाहिये और गंभीर उत्पादक कफ़ से पीड़ित लोगों में "" माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबक्यूलोसिस "" के लिये कल्चर किया जाना चाहिये ।" ,"अन्य विशिष्ट जीवों के लिये , सार्वजनिक स्वास्थ्य कारणों के लिये इसे प्रकोप के दौरान अनुशंसित किया जा सकता है ।" ,"वे जिनको गंभीर रोग के कारण अस्पताल में भर्ती किया गया है , बलग़म और रक्त कल्चर दोनों और साथ ही "" लेग्यिनेला "" और "" स्ट्रेप्टोकॉकस "" के एंटीजन के लिये मूत्र का परीक्षण अनुशंसित किया जाता है ।" ,वायरस जनित संक्रमण को अन्य तकनीकों के अतिरिक्त कल्चर या पॉलीमरेस चेन प्रतिक्रिया ( पीसीआर ) के साथ वायरस या इसके एंटीजन की पहचान की पुष्टि की जा सकती है । ,नियमित माइक्रोबायोलॉजिकल परीक्षणों के साथ कारक एजेंटों का निर्धारण केवल 15 % मामलों में हो पाता है । ,न्यूमोनाइटिस फेफड़े की सूजन से संबंधित है । ,"निमोनिया आम तौर पर संक्रमण और कभी - कभार गैर - संक्रामक न्यूमोनाइटिस से संबंधित है , जिसमें फुफ्फुसीय जमाव का अतिरिक्त गुण भी होता है ।" ,"निमोनिया को सबसे आम तौर पर इसके होने के स्थान और तरीके के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है : समुदाय से अर्जित , श्वास , स्वास्थ्य सेवा से संबंधित , अस्पताल से अर्जित और वेंटीलेटर से संबंधित निमोनिया ।" ,"इसे फेफड़े के प्रभावित क्षेत्र द्वारा भी वर्गीकृत किया जा सकता है : लोबार निमोनिया , ब्रॉन्कियल निमोनिया और गंभीर इन्ट्रस्टिशल निमोनिया ; या कारक जीवों के आधार पर भी वर्गीकृत किया जा सकता है ।" ,"बच्चों में निमोनिया को चिह्नों व लक्षणों के आधार पर गैर - गंभीर , गंभीर या बेहद गंभीर के रूप में अतिरिक्त रूप से वर्गीकृत किया जा सकता है ।" ,"कई सारे रोग निमोनिया के समान चिह्नों और लक्षणों वाले हो सकते हैं , जैसे कि : गंभीर प्रतिरोधी फेफड़ा रोग ( सीओपीडी ) , अस्थमा , फुफ्फुसीय एडेमा , ब्रांकिएकटैसिस , फेफड़े का कैंसर और फुफ्फुसीय एम्बोली ।" ,"निमोनिया से इतर अस्थमा और सीओपीडी आम तौर पर घरघराहट के साथ होते हैं , फुफ्फुसीय एडेमा में इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम असमान्य होता है , कैंसर व श्वासनलिकाविस्फार में लंबे समय की खांसी होती है और एम्बोली में तीखे सीने के दर्द की शुरुआत के साथ सांस लेने में तकलीफ होती है ।" ,"रोकथाम में टीकाकरण , पर्यावरणीय उपाय और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का उपयुक्त उपचार शामिल है ।" ,"यह माना जाता है कि उपयुक्त रोकथाम वाले उपाय वैश्विक रूप से स्थापित किये जाते तो बच्चों में मृत्युदर को 4,00,000 से कम किया जा सकता था और यदि वैश्विक रूप से उपयुक्त उपचार उपलब्ध होते तो बचपन में होने वाली मौतों में से 6,00,000 को कम किया जा सकता था ।" ,टीकाकरण कुछ बैक्टीरिया और वायरस जनित निमोनिया के विरुद्ध बच्चों तथा वयस्कों दोनों में रोकथाम करता है । ,इन्फ्लुएंज़ा टीकाकरण इन्फ्लुएंज़ा ए व बी के विरुद्ध सबसे अधिक प्रभावी है । ,सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेन्शन ( सीडीसी ) 6 और अधिक उम्र के प्रत्येक व्यक्ति के लिये वार्षिक टीकाकरण की अनुशंसा करता है । sg,स्वास्थ्य सेवा कार्यकर्ताओं का टीकाकरण उनके रोगियों के बीच वायरस जनित निमोनिया के जोखिम को कम करता है । ,जब इंफ्लुएंज़ा का प्रकोप होता है तो एमान्टाडाइन या रिमैन्टाडाइन जैसी दवायें स्थितियों की रोकथाम करने में सहायता कर सकती हैं । ,यह अज्ञात है कि ज़ानामिविर या ओसेल्टामिविर प्रभावी हैं या नहीं और ऐसा इसलिये क्योंकि ओसेल्टामिविर बनाने वाली कंपनी ने परीक्षण आंकड़ों को स्वतंत्र विश्लेषण के लिये जारी करने से इन्कार कर दिया है । ,""" हेमोफिलस इन्फ्लुएंज़ा "" और "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" के विरुद्ध टीकाकरण के अच्छे साक्ष्य उपलब्ध हैं ।" ,""" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" के विरुद्ध बच्चों को टीकाकरण प्रदान करने से वयस्कों में इसके संक्रमण में कमी आयी है , क्योंकि कई सारे वयस्क इस संक्रमण को बच्चों से ग्रहण करते हैं ।" ,"एक "" स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया "" टीका वयस्कों के लिये उपलब्ध है और इसको हमलावर निमोनिया रोग के जोखिम को कम करता पाया गया है ।" ,"अन्य वे टीके जिनमें निमोनिया के विरुद्ध रक्षा प्रदान करने की क्षमता है , उनमें परट्यूसिस , वेरिसेला और चेचक के टीके शामिल हैं ।" ,धूम्रपान अवसान और घर के भीतर लकड़ी या गोबर के साथ खाना पकाने से होने वाला भीतरी वायु प्रदूषण कम करना दोनों ही अनुशंसित हैं । ,"धूम्रपान , अन्य रूप से स्वस्थ वयस्कों में न्यूमोकॉकल निमोनिया के लिए सबसे बड़ा अकेला जोखिम होता है ।" ,हाथों की स्वच्छता और अपनी बांह पर खांसना प्रभावी रोकथाम उपाय हो सकता है । sg,बीमार लोगों द्वारा शल्यक्रिया मास्क पहनना बीमारी को रोक सकता है । sg,"अंतर्निहित बीमारियों ( जैसे HIV / AIDS , डायबिटीज़ मेलाटिस और कुपोषण ) का उपयुक्त उपचार निमोनिया के जोखिम को कम कर सकता है ।" pl,6 माह से कम उम्र के बच्चों को मात्र माँ के दूध का आहार देना रोग की गंभीरता और जोखिम दोनों को कम करता है । ,"HIV / AIDS से पीड़ित लोगों और CD4 की गिनती 200 cells / uL से कम वाले लोगों में trimethoprim / सल्फामेथोक्साजोल एंटीबायोटिक , "" न्यूमोसिस्टिस निमोनिया "" के जोखिम को कम करता है और उन लोगों के लिये उपयोगी हो सकता है , जिनमें प्रतिरक्षा की कमी है लेकिन HIV नहीं है ।" ,"समूह बी स्ट्रेप्टोकॉकस और "" क्लामीडिया ट्रैकोमेटिस "" के लिये गर्भवती महिलाओं का परीक्षण और आवश्यकता पड़ने पर एंटीबायोटिक उपचार का प्रबंध करना शिशुओं में निमोनिया की दर को कम करता है ; माँ से बच्चे को HIV संक्रमण से बचाना भी कुशल हो सकता है ।" sg,"नवजात के मुंह और गले का मेकोनियम - चिह्नित एम्नियोटिक तरल से चूषण करने से एस्पाइरेशन निमोनिया की दर मे कमी नहीं पायी गयी है और ऐसा करना संभावित क्षति उत्पन्न कर सकता है , इस प्रकार यह अभ्यास अधिकतर परिस्थितियों में अनुशंसित नहीं है ।" sg,कमजोर बुजुर्गों में अच्छी मौखिक ( मुंह की ) स्वास्थ्य देखभाल एस्पिरेशन निमोनिया के जोखिम को कम कर सकता है । ,"संपूर्ण विघटन के लिये आमतौर पर मौखिक एंटीबायोटिक्स , आराम और सरल एन्लजेसिक्स और तरल की अधिक मात्रा ।" ,"हालांकि , अन्य चिकित्सीय स्थितियों वाले , बुजुर्ग या श्वसन में महत्वपूर्ण कठिनाई वालों को अधिक गहन देखभाल की आवश्यकता पड़ती है ।" ,"यदि लक्षण और खराब होते हैं , निमोनिया घर पर दिये जाने वाले उपचार से सुधरता नहीं है या जटिलतायें होती हैं तो अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता पड़ सकती है ।" ,"वैश्विक रूप से बच्चों में लगभग 7 – 13 % मामलों में अस्पताल में भर्ती करवाने की आवश्यकता पड़ती है जबकि विकसित दुनिया में वयस्कों में 22 से 42 % वे लोग , जिनमें सामुदायिक रूप से अर्जित निमोनिया होता है , अस्पताल में भर्ती होते हैं ।" ,वयस्कों में अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत के निर्धारण के लिये सीयूआरबी - 65 स्कोर उपयोगी होता है । ,"यदि स्कोर 0 या 1 है तो लोग आमतौर पर घर पर रह कर उपचार करा सकते हैं , यदि स्कोर 2 है तो अस्पताल में थोड़ी सी अवधि के लिये भर्ती होना या नज़दीकी फॉलोअप की आवश्यकता होती है यदि यह 3 - 5 है तो अस्पताल में भर्ती होने की अनुशंसा की जाती है ।" pl,श्वसन परेशानी या ऑक्सीजन संतृप्तता के 90 % से कम होने पर बच्चों को अस्पताल में भर्ती किया जाना चाहिये । ,निमोनिया में सीने की फिज़ियोथेरेपी की उपयोगिता अभी तक निर्धारित नहीं है । ,भारत में स्वच्छ पानी की सबसे बड़ी वूलर झील श्रीनगर के उत्तरपूर्व में लगभग 32 किलोमीटर दूर है । ,वूलर झील ऊँचे - ऊँचे पहाड़ों से घिरी है । sg,वूलर झील के आसपास का नजारा झील की खूबसूरती को और बढ़ा देता है । sg,झील में बहता कलकल करता साफ पानी मानो अपनी कहानी खुद बयां कर रहा हो । ,सैलानियों के लिए श्रीनगर के बाग - बगीचे आकर्षण का मुख्य केन्द्र हैं । ,"श्रीनगर के कुछ प्रमुख बगीचों में निशात बाग , शालीमार बाग , चश्मेशाही बगीचा काफी मशहूर हैं ।" ,श्रीनगर के बगीचों में निशात बाग सबसे बड़ा है । ,निशात बाग मल्लिका नूरजहाँ के भाई आसिफ खान ने बनवाया था । ,शालीमार और निशात बाग चश्मेशाही की तुलना में काफी बड़े बाग हैं । ,"चश्मेशाही बगीचा एक चश्मे के इर्द - गिर्द बना हुआ है , जिसे 1632 में शाहजहाँ ने बनवाया था ।" ,मुगल बादशाह जहाँगीर ने 1616 में मल्लिका नूरजहाँ के लिए शालीमार बाग का निर्माण करवाया था । ,इन बागों में लगे वृक्षों पर लगने वाले फूलों की खूबसूरती बयां करना काफी मुश्किल है । ,गुलमर्ग शहर से 52 किलोमीटर दूर स्थित है । pl,गुलमर्ग का पूरा रास्ता देवदार के वृक्षों से ढका हुआ है । ,गर्मियों में यह अपने हरे - भरे घास के ढलानों व गोल्फ मैदान के लिए देशीविदेशी सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र होता है ,सर्दियों में स्की रिसोर्ट दुनिया भर के सैलानियों के लिए भरपूर आनंद उठाने का केन्द्र बन जाता है । ,"समुद्रतल से 2,700 मीटर की ऊँचाई पर स्थित होने की वजह से इस सैरगाह में नवंबर से लेकर अप्रैल तक बर्फ़ की सफेद चादर फैली रहती है ।" ,सर्दी के मौसम में सैलानी यहाँ बर्फ़ के खेलों का मजा लेते हैं । ,गुलमर्ग में रोपवे एक और आकर्षण है । ,रोपवे स्थानीय भाषा में गंडोला कहा जाता है । ,गंडोला में बैठ कर सैलानी चारों तरफ के मनमोहक दृश्यों का नजारा करते हैं । ,श्रीनगर से 96 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पहलगाम अनंतनाग जिले में आता है । ,"पहलगाम में सैलानी गोल्फ , हौर्स राइडिंग , स्कीइंग , ट्रैकिंग के अलावा अन्य कई रोमांचक खेलों का आनंद उठा सकते हैं ।" ,"2,130 मीटर की ऊँचाई पर होने की वजह से पहलगाम में केसर की पैदावर एशिया में सबसे ज्यादा होती है ।" ,"लद्दाख का नक्शा देखें तो पूर्व में तिब्बत , पश्चिम में पाकिस्तान , दक्षिण - पश्चिम में कश्मीर और दक्षिण में हिमाचल प्रदेश की लाहुल घाटी है ।" ,"लद्दाख की आबादी 1 लाख के करीब है , जिनमें आधे सैनिक हैं ।" sg,कभी - कभी दुनियाभर से आने वाले सैलानी इस आबादी को दोगुना कर देते हैं । ,लेह शहर में सबसे ज्यादा आबादी है । ,लद्दाख हिमालय की दक्षिण पश्चिम पर्वत श्रृंखला से जुड़ा है । ,"हिमालय की दक्षिण पश्चिम पर्वत श्रृंखला में सबसे ऊँची चोटियाँ नुन ( 7 , 135 मीटर ) और कुन ( 7 , 087 मीटर ) शामिल हैं ।" ,दक्षिण हिमालय और उत्तरी सिंधु नदी के बीच आने वाली जयशंकर पर्वत श्रृंखला लद्दाख में ही है । pl,लद्दाख में आज भी याक और घोड़े ही दुर्गम घाटियों में लोगों को ले जाने और सामान ढोने के काम आते हैं । ,लेह क्षेत्र में बौद्ध आबादी अधिक है और आगे कारगिल में मुस्लिम । ,लेह में लद्दाखी भाषा के साथ - साथ लोग अच्छी हिंदी भी बोलते हैं और विश्वभर के पर्यटकों से कामचलाऊ अंग्रेजी भी । ,अब लेह में पर्यटन ही मुख्य व्यवसाय है । ,अनाज की पैदावार कम होने के कारण लोग सरकारी सस्ते अनाज पर निर्भर हैं । ,पर्यटक यहाँ बहुत फुरसत और बेफिक्री में घूमते मिलते हैं । ,लद्दाख में जून से सितंबर तक अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों का तांता लगा रहता है । ,लेह शहर में पहली बार पहुँचने वाला सैलानी इस के बड़े विस्तार को देखकर चकित रह जाता है । ,"चौड़ी सड़कें , बड़ी - बड़ी इमारतें और हर कहीं चहल - पहल ।" ,जहाँ देखो वहीं विश्व बिरादरी यानी हर देश के लोग । ,"19वीं शताब्दी में बना लेह महल और 1430 में बना नामग्यालत्सेमो गोंपा , शांति स्तूप , हॉल ऑफ फेम म्यूजियम देखे बिना कोई लेह से नहीं लौटता ।" ,लेह में अनेक कलात्मक बौद्ध मंदिर और स्तूप हैं । ,"खुले और चौड़े बाजारों में लद्दाखी , कश्मीरी और तिब्बती शिल्प और कलात्मक चीजों के भंडार हैं ।" ,"लेह से बाहर पश्चिम में स्पितुक , लिकिर , आलची और खालसी इलाके घूमने योग्य हैं ।" ,"पूर्व दिशा में लेह के निकट चोग्लाम्सर , स्टाक पैलेस , शे गोंपा , ठिकसे गोंपा और हेमिस गोंपा दर्शनीय हैं ।" ,"हर कहीं मठ , मंदिर और स्तूप हैं ।" ,"लद्दाख के अधिक दुर्गम इलाकों में नुरबा , सुरू , पादुम और जंस्कर घाटियाँ रोमांच प्रेमियों का स्वर्ग हैं ।" ,लेह श्रीनगर मार्ग पर 60 किलोमीटर दूर ससपोल गाँव के उत्तर में पहाड़ के भीतर कई गुफाएँ हैं । ,एक बड़ी गुफा ससपोल गुफा कहलाती है । ,कल्लार नदी में गोलाकार पत्थरों के टुकडे भरे पड़े हैं । ,तिरुवनन्तपुरम से 50 कि.मी. दूरी पर स्थित कल्लार पर्यटकों और यात्रियों का प्रिय मनोरंजन स्थल है । ,कल्लार का मुख्य आकर्षण है पास के वनान्तर की गोल्डन वैली ( सुवर्ण उपत्यका ) और मीनमुट्टि जलप्रपात । ,गोल्डन वैली प्रधान सड़क के बहुत निकट है । ,यहाँ कल्लार के साफ ठंडे पानी में स्नान करने की सुविधा है । pl,पत्थर पर होकर बहती कल्लार गोल्डन वैली में अनेक छोटी - छोटी जलराशियाँ बनती हैं । ,कल्लार पुल के किनारे से दाईं तरफ के छोटे पथ से चलते चले जाएँ तो आप मीनमुट्टि पहुँचेंगे । ,इस यात्रा में कई तितलियाँ तथा चिड़ियाँ दिखाई देंगी । ,मीनमुट्टि के जंगल में बरसात में खुजली पैदा करने वाले कीड़े मकौड़े होते हैं । sg,कल्लार वनसंरक्षण समिति की ओर से वन - भ्रमण के लिए गाइड नियुक्त किए हैं । ,क्षेत्र के निवासियों तथा वन विभाग ने मिलकर वन संरक्षण समिति का गठन किया है । pl,कल्लार के पर्यटकों के लिए जिला टूरिज़्म प्रोमोशन काउंसिल ने सुविधाएँ उपलब्ध कराई हैं । ,कल्लार में विश्राम तथा आतिथ्य - सत्कार की व्यवस्था भी की गई है । ,"कल्लार में भोजन कक्ष , शौचालय , चेंजिंग रूम , वन संसाधन विक्रय केन्द्र , टेलिफोन बूथ , पार्किंग स्थान आदि की सुविधा उपलब्ध हैं ।" ,कल्लार से निकटतम रेलवे स्टेशन तिरुवनन्तपुरम 61 कि.मी. की दूरी पर है । ,तिरुवनन्तपुरम अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा से कल्लार 67 कि.मी. है । ,यदि आपने अब तक पैदल या वाहन में वन सौन्दर्य का मज़ा चखा हो तो हाथी पर सवार होकर वन भ्रमण की सुविधा मिलने पर क्या आप उसका आनंद नहीं उठाएँगे ? sg,वन्यपशु विभाग तथा कोट्टूर इक्को डेवलेपमेंट समिति के संयुक्त तत्वावधान में काप्पुकाट्टु में इसकी सुविधा प्रदान की गई है । ,तिरुवनन्तपुरम से 18 कि.मी. की दूरी पर स्थित काट्टाक्कडा के पास स्थित है काप्पुकाडु । ,हाथी की सवारी बोट लैंडिंग प्वाइंट से शुरू होती है । ,अगस्त्य वन क्षेत्र में आयोजित आधे घंटे का यह भ्रमण सैलानियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए चिरस्मरणीय अनुभव साबित होगा । ,काप्पुकाडु से शुरू होने वाला यह भ्रमण घने जंगल से होकर गुजरता है । ,सैलानी इरावुपारा होते हुए काप्पुकाडु में वापस पहुँच सकते हैं । ,काप्पुकाडु ट्राइबल इक्को डेवलेपमेंट कमेटी ने प्रस्तुत भ्रमण की व्यवस्था की है जिसका किराया मात्र रु. 100 हैं । sg,पालोड के पास इडिंजार में वनान्तर में कालक्कयम जलप्रपात अपनी छवि बिखेरता है । ,कालक्कयम जलप्रपात साहसी पर्यटकों तथा प्रकृति प्रेमियों को अपनी ओर आकृष्ट करता है । ,पालोड तिरुवनन्तपुरम से 35 कि.मी. दूर है । ,पालोड से पेरिंगम्मला पहुँच सकते हैं । ,पेरिंगम्मला से इडिंजार के रास्ते आगे जायें तो 12 कि.मी. के बाद कुरिश्शडी पहुँच जाएँगे । ,पालोड में ही कालक्कयम जलप्रपात दिखता है । sg,कालक्कयम जलप्रपात और चारों ओर की प्रकृति नयनाभिराम दृश्य से मन को लुभाती है । ,जलप्रपात मंकयम झरने का भाग है जो अगस्त्यकुंड से निकलता है । ,कालक्कयम जलप्रपात के आगे एक जलराशि बनी है । ,इस जलराशि में चिकने पत्थर अधिक मात्रा में हैं । ,इस जलराशि में जाने वाले को बहुत सावधानी से जाना चाहिए । ,वनमार्ग से पर्यटकों के लिए आयोजित भ्रमण यात्रा पशु और वनस्पति सम्पदा का साक्षात्कार करवाती है । ,आधुनिक भारतीय चित्रकला के जनक राजा रवि वर्मा का जन्म किलिमानूर राजमहल में हुआ था । ,यह भी उल्लेखनीय है कि रवि वर्मा के अलावा उनकी बहिन और मामा भी कुशल चित्रकार थे । ,किलिमानूर राजमहल में जन्मे रवि वर्मा के प्रथम गुरु उनके अपने मामा राज वर्मा थे । ,"राजमहल में रहकर राजा रवि वर्मा ने पश्चिमी चित्रकला तकनीकों , विशेषतः तैलचित्र कला का परिचय पाया ।" ,बाद में राजा रवि वर्मा विश्वप्रसिद्ध हो गए । ,राजा रवि वर्मा कई वर्ष मुम्बई और बड़ौदा में रहे । ,तिरुवनन्तपुरम से 39 कि.मी. दूर स्थित किलिमानूर राजमहल 15 एकड़ भूमि में फैला हुआ है । ,"किलिमानूर राजमहल में छोटे - बड़े भवन , तालाब , कुएँ , काव सब निर्मित किए गए हैं ।" ,रविवर्मा चित्र का सबसे बड़ा निजी संग्रहालय आज भी बडौदा राजपरिवार के पास है । pl,दो वर्ष के बडौदा जीवन में उन्होंने पुराण संबन्धी 14 चित्र बनाए । ,भारत के राजा एवं ब्रिटिश शासक सभी रविवर्मा से चित्र बनवाने के लिए अत्यंत लालायित रहते थे । ,राजमहल का प्रवेश द्वार राजा रवि वर्मा की चित्रशाला ( आर्ट गैलरी ) की ओर खुलता है । ,राजमहल के प्रवेश द्वार पर बैठकर राजा रवि वर्मा चित्र रचना करते थे । ,यहीं स्टुडियो में उनकी रचनाओं की प्रतियाँ सुरक्षित रखी गई हैं । ,भारत में तो निरक्षरता का स्तर अब भी 40 - 50 प्रतिशत तक है । ,अब इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया का दुरुपयोग हो तो इसका नुकसान समाज पर क्यों नहीं होगा । ,इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया का असर अधिक गहरा होता है । ,"तमाम लोग ऐसे हैं जो अखबार पढ़ते नहीं , लेकिन टेलीविजन जरूर देखते हैं ।" ,टीवी पर ऑफ दि रिकॉर्ड बातें नहीं पेश हो सकतीं । ,"पहले नेता बड़ी आसानी से अपनी बात का खंडन स्वयं कर देते थे , लेकिन अब यह संभव नहीं है ।" ,फ्रांस के एक प्रसिद्ध दार्शनिक की उपस्थिति में स्वर्ग और नरक को लेकर गरमागरम बहस चलती रही । sg,दार्शनिक महोदय तटस्थ भाव से दोनों पक्षों की बात सुनते रहे । ,अंत में किसी ने उनसे पूछा कि इस विषय पर आपकी राय क्या है ? ,"दार्शनिक महोदय ने बड़ी विनम्रता से उत्तर दिया कि आप मुझे क्षमा करें , क्योंकि दोनों ही स्थानों पर मेरे मित्र हैं ।" ,मतलब यह कि ऐसे अवसरों पर समझदार व्यक्‍ति किसी का पक्ष नहीं लेता । ,मीडिया में भी यही प्रवृत्ति देखने को मिलती है । ,"डॉक्‍टर , वकील या कॉलेज के प्राध्यापकों के लिए ऐसे पेशेवर संस्थान हैं जो उनकी योग्यता और मानदंड निर्धारित करते हैं , लेकिन प्रेस के लिए ऐसा कोई पैमाना तय नहीं किया गया है ।" ,पिछले 50 वर्षों के दौरान समाचार माध्यमों की गति अवश्य तेज हुई है । ,"टाइपराइटर के की - बोर्ड से इंटरनेट या टेलेक्स के बाद सेटेलाईट फोन और लैप‍टॉप का जमाना आ गया , लेकिन अनुभव यही बताता है कि वैश्‍वीकरण के इस दौर में दुनिया के लोग एक - दूसरे से दूर होते जा रहे हैं ।" ,इसी तरह पश्‍चिमी टेलीविजन चैनलों में अपराध समाचारों को अधिक प्रधानता मिलती है और अंतर्राष्‍ट्रीय खबरें पुछल्ले की तरह पेश होती हैं । ,सामाजिक और आर्थिक समस्याओं की अपेक्षा सेक्स कांड की गूंज समाचार माध्यमों में अधिक सुनाई देती है । ,पश्‍चिमी देशों की तरह भारत में भी आधी गप और आधी अफवाह पर चिकनी - चुपड़ी भाषा का उपयोग कर टिप्पणियां कर दी जाती हैं । ,पूर्वाग्रह वाली रिपोर्टिंग देखने को मिलती है । ,निरपराध लोग कठघरे में खड़े होते हैं और कई बार अपराधी का महिमामंडन होता है । ,समाचार माध्यमों में विचारधारा का महत्व दिनोंदिन घटता दिखाई दे रहा है । ,व्यक्‍तित्वों का असर अधिक दिखता है । ,सनसनीखेज कहानी दे सकने वाले लोगों के इर्द - गिर्द पत्रकार अधिक जुटते हैं । ,"सिद्धांतों , आदर्शों और मूल्यों की चर्चा करना बेमानी - सा लगता है ।" ,टेलीविजन और कंप्यूटर क्रांति ने नई पीढ़ी को विचारों से दूर किया है । pl,समाचार माध्यमों में आई उच्छृंखलता ने दुनिया के विभिन्न देशों में समस्याओं को बढ़ाया भी है । ,राजनीतिज्ञों में सच्‍चाई का सामना करने की हिम्मत नहीं रह गई है । ,प्रजातांत्रिक ढंग से असहमति और आलोचना को सुनने और सहने वाले राजनेताओं की कमी होती जा रही है । ,"भ्रष्‍टाचार केवल प्रशासन और राजनीति में ही नहीं है , बल्कि राजनेताओं और कॉर्पोरेट कंपनियों ने पत्रकारों के एक वर्ग को अपने मोहजाल में फंसाया है ।" ,अखबारों में एक सबसे बड़ी गड़बड़ यह हुई है कि तात्कालिक संकट पर अधिक ध्यान दिया जाने लगा है । ,कुछ समय पहले जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध होने की स्थितियां बन गई थीं और परमाणु हथियारों के उपयोग की बात आई तो इन हथियारों से होने वाले विनाश के विवरण विस्तार से छपने लगे । ,"लेकिन जैसे ही मामला शिथिल हुआ , उस विषय की चर्चा ही बंद हो गई ।" ,"आतंकवादी संगठनों को दुनिया में जहां कहीं भी समर्थन दिया गया , उसके परिणाम देने वाले के लिए भी घातक सिद्ध हुए ।" ,समाचार माध्यमों का दायित्व यह है कि वे दूरगामी हितों को ध्यान में रखकर निरंतर समाचार और लेख देते रहें । ,हाल के वर्षों में पत्रकारिता के लिए एक बड़ा खतरा व्यापारिक हितों के कारण पैदा हुआ है । ,भारत के अखबारों से पहले अमेरिकी अखबारों में यह प्रवृत्ति देखने को मिली । pl,अमेरिकी अखबारों में समाचारों के लिए संपादक के बजाय महाप्रबंधक रखे जाने लगे । pl,प्रबंधन और संपादकीय विभाग के बीच रहने वाली लक्ष्मण रेखाएं लांघी जाने लगीं । ,अखबार को इतिहास का कच्‍चा दस्तावेज कहा जाता रहा है । ,लेकिन इतिहासकारों को इस दस्तावेज में जान पैदा करनी होती है । ,इसका परीक्षण करना होता है और घटनाओं को इतिहास के रूप में पेश करना होता है । ,फिर भी पत्रकार के नाते इस दस्तावेज को तैयार करना इतिहासकार से कम महत्वपूर्ण नहीं है । pl,अपराधिक घटनाओं पर अदालती सुनवाई के समय या उससे पहले ही पत्रकार अपने निष्कर्ष सुनाने लगते हैं । ,हत्या के अपराध पर हो रही सुनवाई में प्रतिदिन न तो कोई जीत सकता है और न ही कोई हार सकता है । pl,नृशंस हत्या के मामले मनोरंजन का रूप नहीं ले सकते हैं । sg,राजकुमारी डायना की मृत्यु को भी पश्‍चिमी मीडिया ने एक मनोरंजक बिकाऊ घटना की तरह ही इस्तेमाल किया । pl,भारत में पिछले दिनों शिवानी भटनागर हत्याकांड के संबंध में भी हर दिन पुलिस अधिकारी रविकांत शर्मा की पत्‍नी सुधा शर्मा के बयानों को टेलीविजन पर सनसनीखेज ढंग से प्रस्तुत किया जाता रहा । ,पूर्व उपराष्‍ट्रपति कृष्‍णकांत के अंतिम संस्कार के तत्काल बाद निगमबोध घाट से निकलने पर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से इसी तरह के सवाल टेलीविजन संवाददाता पूछते दिखाई दिए । ,स्व. कृष्‍णकांत के घनिष्‍ठ मित्र के समक्ष इस तरह का सवाल उन्हें दुखी करने के साथ अपमानित करने जैसा ही था । ,मीडिया की एक बड़ी समस्या यह हुई है कि अमेरिका की तरह ही भारत में भी उच्‍च वर्ग के युवा समाचार माध्यमों से जुड़े हैं । ,ध्यान रखें कि केले ज्यादा गलने न पाएं । ,ठंडे होने पर इनके छिलके उतार कर गोल - गोल टुकड़े काट कर रख लें । ,टुकड़े ज्यादा मोटे न रखें । ,अब सिंघाड़े आटे का घोल तैयार करें । ,"इसमें अपने स्वादानुसार हरी मिर्च , अदरक काट कर डालें तथा अंदाज से नमक मिला दें ।" ,घोल को गाढ़ा ही रहने दें । ,मोयन के लिए थोड़ा - सा घी अथवा तेल घोल में डाल दें । ,एक कड़ाही में घी गरम कर लें और केले के टुकड़ों को घोल में लपेट कर घी में छोड़ते जाएं । ,दोनों तरफ से कुरकुरे होने तक सेंक लें । ,अब इन पकौड़ों को इमली की मीठी और हरी चटनी के साथ पेश करें । ,एक प्रेशर कुकर अथवा कड़ाही में तेल गरम करके सबसे पहले पनीर को हल्का गुलाबी होने तक चारों ओर से तलिए । ,दो बड़े चम्मच तेल रखकर शेष बचा तेल अलग कटोरी में निकाल लें । ,अब अदरक - लहसुन का पेस्ट तैयार कर लें । ,"गरम तेल में खड़ी लाल मिर्च , लौंग , तेजपान , दालचीनी और इलायची डालकर कुछ देर चलाइए , फिर प्याज और टमाटर डालकर सुनहरा भूनें ।" ,अब अदरक - लहसुन का पेस्ट डालकर चलाए । ,"हल्दी , लाल मिर्च और पानी डालकर टमाटर नरम होने तक पकाइए ।" ,अब चना दाल और नमक डालिए । ,अच्छी तरह हिलाकर कुकर बंद कीजिए । ,2 - 3 सीटी आने के बाद आंच बंद कर दें । ,ठंडा होने पर कुकर खोलें और पनीर डालकर हल्की आंच पर कुछ देर तक पकाएं । ,अब हरे धनिया से सजाकर गरमा - गरम पनीर विद चना दाल को तंदूरी रोटी या पराठे के साथ पेश करें । ,प्याज को बारीक कतर लें । ,"काजू के लंबे , पतले - पतले टुकड़े काट लें ।" ,किशमिश साफ कर लें । ,मैथी काटकर एवं धोकर पानी निथार लें । ,अदरक - लहसुन का पेस्ट बनाएं । ,जीरा - अजवाइन को पीस लें । ,खसखस को भूनकर एक थाली में रख लें । ,एक कड़ाही में दो - तीन चम्मच तेल डालकर पहले लहसुन - अदरक का पेस्ट व प्याज डालकर भूनें । ,"प्याज गुलाबी होने पर उसमें हल्दी , लालमिर्च , काली मिर्च तथा जीरा डालकर मिला लें , फिर कटी हुई मैथी डालकर दो से पांच मिनट आंच पर रखें ।" ,सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर नीचे उतार लें । ,थाली में खसखस को फैलाएं और मैथी का मसाला ठंडा होने पर खसखस के ऊपर फैला दें । ,"फिर उसमें नमक , खोपरा बूरा , काजू के टुकड़े व किशमिश डालकर मिश्रण को तैयार कर लें ।" ,अगर चाहें तो थोड़ी सी शक्कर व अमचूर पावडर भी डाल सकते हैं । ,"मैदा छानकर उसमें मोयन , नमक व पिसी अजवाइन डालकर कड़ा गूंध लें व आधा घंटा रख दें फिर मसलकर छोटी - छोटी लोइयां काटें ।" ,"पतली - पतली पूरी बेलकर पहले उसमें मसाला चिपक जाए , इसके लिए दही में नमक डालकर फेंट लें व बेली हुई पूरी पर पहले फेंटा हुआ दही सब तरफ अच्छी तरह लगाएं ।" ,उसके बाद उस पर थोड़ा - सा मैथी का मसाला फैलाएं व पूरी को रोल कर दें । ,इससे तलते समय मसाला बाहर नहीं आएगा व अच्छी तरह चिपक जाएगा । ,एक कड़ाही में तेल गरम कर रोल को दोनों तरफ से अंगूठे से दबाकर धीमी आंच पर गुलाबी - सुनहरा तल लें । ,गरमा - गरम काजू - किशमिश से बने शाही रोल टोमेटो कैचअप या इमली की चटनी के साथ पेश करें । ,सबसे पहले भारी पेंदे के बर्तन में दूध को उबलने के लिए रख दें । ,अब भीगे बादाम के छिलके उतार लें । ,खसखस और बादाम को मिक्सी में पीस लें और गरम दूध में डालें । ,अच्छी तरह उबलने के बाद शक्कर डालें और लगातार हिलाते हुए गाढ़ा होने तक पकाएं । ,"फिर सूखे मेवे की कतरन , इलायची डालें एवं 10 - 15 मिनट तक पकाएं ।" ,तत्पश्चात मलाई डालकर मिलाएं और आंच बंद कर दें । ,"अब ऊपर से केसर , बादाम और पिस्ता कतरन से सजाएं और पौष्टिकता से भरपूर मेवा - पोस्त दाना की खीर गरमा - गरम पेश करें ।" ,सबसे पहले लहसुन - अदरक व मिर्च का पेस्ट आलू में डाल कर अच्छी तरह मिला लें । ,अब सभी मसाले डालें और मिलाएं । ,फिर दो चम्मच तेल कड़ाही में डाल कर उसमें राई - जीरा व सौंफ तड़काएं । ,बिहार की राजधानी पटना का इतिहास देश के सबसे प्राचीन गौरवशाली इतिहासकारों में एक है । ,पटना में एक के बाद एक प्रतापी राजाओं का शासन रहा जिन्होंने अपने राजवंश की ख्याति को बढ़ाते हुए अपनी राजधानी को हर बार एक नया नाम देकर संबोधित किया । ,"कुसुमपुर , पुष्पापुर , पाटलीपुत्र , अजीमाबाद और अब इसका नाम पटना पड़ा है ।" sg,मगध नरेश अजातशत्रु ने 600 ईसापूर्व पाटलिग्राम में गंगा नदी के किनारे एक छोटा सा किला बनाया था । ,जो कि बीते समय तक इसकी शानशौकत का परिचय देता रहा । sg,"आज भी वही शानौशौकत इस के आसपास के क्षेत्रों जैसे कुमराहर , अगम कुँआ , बुलंदी बाग , कंकड़ बाग क्षेत्रों में देखी जा सकती है ।" ,गंगा किनारे तक फैला होने के कारण पटना शहर उपज की दृष्टि से भी बहुत समृद्ध रहा है । ,इसीलिए लंबे समय से कृषि क्षेत्र का बड़ा व्यापारिक केन्द्र भी रहा है । sg,भारत छोड़ो आंदोलन में मारे गए 7 शहीदों की याद में यह स्मारक बनाया गया है । ,आजादी के ये दिवाने सचिवालय भवन पर तिरंगा फहराने की जिद के साथ आगे बढ़े थे और तिरंगे की शान में अपनी कुर्बानी दे दी । ,"पटना संग्रहालय में प्रथम विश्वयुद्ध के हथियारों , मौर्य और गुप्तकाल की धातु और पत्थर की बनी प्रतिमाओं तथा प्राचीन मिट्टी के बने शिल्प आदि को संजो कर रखा गया है ।" ,संग्रहालय में एक 16 मीटर लंबे पेड़ का अवशेष भी इसकी विशेषताओं में से एक है । ,पत्थर की खूबसूरत मस्जिद गंगा के किनारे स्थित है । sg,पत्थर की खूबसूरत मस्जिद को जहाँगीर के बेटे परवेज साह ने उस वक्त बनवाया था जब वह बिहार का शासक था । ,शेरशाह सूरी की मस्जिद बिहार की सबसे खूबसूरत मस्जिदों में से एक है । sg,1545 में इस मस्जिद को शेरशाह सूरी ने बनवाया था । ,शेरशाह सूरी की मस्जिद पुराने अफगान स्टाइल में बनाई गई थी । ,खुदाबक्श ओरिएंटल लाइब्रेरी भारत के राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त पुस्तकालयों में से एक है । ,"अशोक राजपथ पर स्थित इस लाइब्रेरी में अरबी और फारसी भाषा की हस्तलिखित पुस्तकें , राजपूत और मुगलों की पेंटिंग्स , एक 25 मि.मी. चौड़ी किताब में लिखी गई कुरान कोरडोबा विश्वविध्यालय की नई और पुरानी किताबों आदि का संग्रह है ।" sg,भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्रप्रसाद ने रिटायरमेंट के बाद सदाकत आश्रम पर अपने रहने का ठिकाना बनाया था । ,तभी से सदाकत आश्रम राष्ट्रीय विश्वविध्यालय बिहार विध्यापीठ के मुख्यालय के रूप में स्थापित है । ,अगम कुँआ बिहार के सबसे ऐतिहासिक और पुरातात्विक अवशेषों में से एक है । ,ऐसा माना जाता है कि सम्राट अशोक ने अपने भाइयों का अगम कुँआ पर ही वध किया था । ,अगम कुँआ गुलजार बाग रेलवे स्टेशन के नजदीक होने की वजह से लोगों की भीड़ जुटाने में सक्षम है । ,अगम कुएँ की गहराई का आज तक किसी को पता नहीं है । ,आधुनिक तारामंडल केन्द्र पटना में स्थित है । ,पटना की वेली रोड पर स्थित आधुनिक तारामंडल केन्द्र एशिया का सबसे बड़ा तारामंडल है । ,सबसे ज्यादा पर्यटक आधुनिक तारामंडल केन्द्र जाना पसंद करते हैं । ,"इसके अलावा पटना में एशिया का सबसे लंबा रोडवे ब्रिज , गाँधी सेतु है ।" ,"पादरी की हवेली , वह स्थान है जहाँ मदर टेरेसा ने अपनी शिक्षा ली थी ।" ,"संजय गाँधी बायोलोजिकल पार्क , बिरला मंदिर , हरमिंदर तख्त , नवाब शहिद का मकबरा , बिहार इंस्टीट्यूट आफ हैंडीक्राफ्ट एंड डिजाइन आदि भी पर्यटकों के देखने के लिए उत्तम स्थान हैं ।" ,"पटना में खरीदारी के लिए मौर्या लोक कांप्लेक्स , सबसे बेहतर स्थान है ।" ,मौर्या लोक कांपलेक्स वेली रोड पर डाक बंगले के नजदीक स्थित है । ,मौर्या लोक कांपलेक्स से आप बिहार की सभी प्रसिद्ध वस्तुओं की खरीदारी कर सकते हैं । ,वैशाली अब बिहार का एक छोटा शहर है । pl,वैशाली चारों ओर केले और आम के झुरमुटों से घिरा है । ,इसी कारण वैशाली की खूबसूरती देखते ही बनती है । pl,वैशाली में मिली खुदाई में मिले अवशेषों से यह बात सामने आई है कि इसका एक प्रभावशाली इतिहास रहा है । ,इतिहासकारों के मुताबिक जब पाटलिपुत्र मौर्यों और गुप्तों की राजधानी था तब वैशाली उद्योग और व्यवसाय का गढ़ माना जाता था । ,सम्राट अशोक द्वारा लोलुआ में बनाया गया अशोक स्तंभ विश्वप्रसिद्ध है । ,अशोक स्तंभ को सिंह स्तंभ के नाम से भी जाना जाता है । ,18.3 मीटर ऊँचे एक ही लाल पत्थर के बने अशोक स्तंभ को देश के राष्ट्रीय चिन्ह के रूप में मान्यता मिली हुई है । ,अशोक स्तंभ के पास एक छोटा सा तालाब भी है । ,आज बुद्धा स्तूप का बाहरी भाग जीर्णशीर्ण अवस्था में है । sg,"बुद्ध स्तूप में बुद्ध की अस्थियों के 8वें हिस्से को पत्थर के एक ताबूत में संजो कर रखा गया है , जिसकी वजह से दुनिया भर के बौद्ध धर्म के अनुयायी यहाँ आते हैं ।" ,1958 की खुदाई के दौरान बुद्ध की अस्थियों का एक हिस्सा इसी जगह पर मिला था । ,राजा विशाल का गढ़ भी यहाँ का प्रसिद्ध स्थल है । ,"1 किलोमीटर क्षेत्र में फैला बड़ा सा टीला है , जो चारों तरफ से 43 मीटर चौड़ी खाई और 2 मीटर ऊँची दीवार से घिरा हुआ है ।" ,बिहार का शांति स्तूप विश्व प्रसिद्ध है । ,शांति स्तूप बौद्ध विहार सोसायटी द्वारा अभिषेकी तालाब के दक्षिण तट पर बनाया गया है । ,पीरुमला पीरुमेडु से 4 कि.मी. और कुट्टिक्कानम से एक कि.मी. की दूरी पर है । ,पीरुमला कोट्टयम रेलवे स्टेशन से 75 कि.मी. दूर है । ,"पीरुमला का निकटतम एयरपोर्ट कोच्चि अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा , 180 कि.मी. दूर है ।" ,वागामण् के बारे में असंख्य किस्से - कहानियाँ प्रचलित हैं । sg,वागामण् क्षेत्र का अनुपम सौन्दर्य आँख - कान दोनों को रसास्वादन देता है । ,ऐसा प्रतीत होता है कि हरियाली ओढ़ कर लेटी पहाड़ियों पर निगूढ़ सौन्दर्य की झलकियाँ अनायास प्रकट हो गई है । ,वागामण् में खड़े होकर इस हरिताभा का दर्शन करने वाले के समक्ष इस प्रदेश के सौन्दर्य का शनै:शनै: अनावरण होता है । ,"वागामण के पास ऐसी पहाड़ियाँ हैं जहाँ मुस्लिम तंगल का मकबरा है , हिन्दू मुरुकन का मंदिर है , क्रूस पहाड़ नाम से पहचाना जाने वाला ईसाई गिरजा घर है ।" ,वागामण् में ढलान पर चीड़ का वन है । ,चर्च के अन्तर्गत डेयरी फार्म भी दर्शनीय है । ,वागामण् पीरुमेडु से 25 कि.मी. है । ,वागामण् बस से जा सकते हैं । ,वागामण् का निकटतम रेलवे स्टेशन कोट्टयम 100 कि.मी. की दूरी पर है । ,वागामण् का निकटतम एयरपोर्ट कोच्चि अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा 175 कि.मी. की दूरी पर है । ,मुन्नार से 45 कि.मी. पूर्व में स्थित वट्टावडा एक ग्राम है । ,वट्टावडा अपने प्राकृतिक सौन्दर्य एवं शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है । ,वट्टावडा में पर्यटकों को आकर्षित करने वाले विभिन्न स्थान अभी तक पूरी तरह सामने नहीं आए हैं । ,"जिस तरह मुन्नार चाय के बगानों के कारण मनोहर है , उसी तरह वट्टावडा अपने वनस्पति उद्यानों के कारण दर्शनीय है ।" ,वट्टावडा समुद्र तल से 6500 फीट की ऊँचाई पर स्थित भी है फिर वट्टावडा में जाड़े के दिनों में भी असह्य ठंड नहीं होती है । ,वट्टावडा में पहाड़ की चढ़ाइयों को समतल बनाकर साग सब्जियों की खेती की जाती है । ,वट्टावडा में विभिन्न प्रकार की तितलियाँ और पक्षी मिलते हैं । ,"वट्टावडा से ही कोडाईकेनाल , टोप स्टेशन , माट्टुप्पेट्टि , कान्तल्लूर , मीशप्पुलिमला तक की वन यात्रा की जा सकती है ।" ,इसके लिए जीप या मोटर साइकिल से भी यात्ना की जा सकती है । ,वट्टावडा तथा जंगल में तम्बू लगाने के लिए प्राइवेट एजेन्सियों की सेवाएँ उपलब्ध हैं । ,वट्टावडा मुन्नार सड़क से 45 कि.मी. दूर है । ,वट्टावडा से 175 किमी. दूर निकटतम रेलवे स्टेशन एरणाकुलम जंक्शन है । ,कोच्चि अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा वट्टावडा से 155 कि.मी. दूर है । ,आरळम वन्यजीव अभ्यारण्य है । ,आरळम सह्याद्रि की ढलान पर 55 वर्ग कि.मी. विस्तार में फैला हुआ है । ,"आरळम में हीरण , हाथी , बाइसन , जंगली सुअर आदि सामान्य रूप से विचरते हैं ।" ,"चीता , जंगली बिल्ली तथा विभिन्न तरह की गिलहरियाँ आदि कभी - कभार दिखाई पड़ सकती हैं ।" ,3060 हेक्टेयर विस्तृत ' आरलम फार्म ' इसके करीब स्थित है । ,आरलम तलश्शेरी से 35 कि.मी. और कण्णूर टाउन से 60 कि.मी. स्थित है । ,आरलम से निकटतम रेलवे स्टेशन तलश्शेरी है । ,आरलम से निकटतम एयरपोर्ट करिप्पूर हवाई अड्डा तलश्शेरी से 71 कि.मी. है । sg,उत्तरी केरल के इस भाग में ' कव्वायि ' नाम से जानी जाने वाली झील अनुपम शोभा बिखेरती है । sg,"कव्वायि और कांकोल , वण्णात्तिच्चाल , कुप्पित्तोडु , कुनियन आदि नहरें झील का रूप ग्रहण करती हैं ।" ,कव्वायि झील 37 वर्ग कि.मी. लम्बी है । ,झील के सौन्दर्य के परिपूर्ण आनन्द के लिए कोट्टि - कोट्टप्पुरम मार्ग में नौका द्वारा यात्रा की जानी चाहिए । ,कव्वायि झील से निकटतम पय्यन्नूर रेलवे स्टेशन 4 कि.मी. दूर है । ,"93 कि.मी. स्थित कव्वायि झील का निकटतम एयरपोर्ट करिप्पूर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा , कण्णूर है ।" ,कण्णूर के पष़यंगाडि में बसा माडायिप्पारा जैव - विविधता एवं ऐतिहासिक परम्परा से समृद्ध है । ,एष़िमला कोलत्तुनाड राजाओं की राजधानी थी । ,14वीं शताब्दी से 18वीं शताब्दी तक कोलत्तुनाडु नरेशों का अभिषेक माडायिप्पारा में ही सम्पन्न होता था । ,पहाड़ी की दक्षिणी घाटियों में पुराने किले का खण्डहर है । ,यहाँ एक तालाब है जो लम्बी हत्थी वाले दर्पण की आकृति का है । ,कहते हैं माडायिप्पारा के तालाब का निर्माण यहूदियों ने कराया था । ,"माडायिप्पारा के अन्य आकर्षण हैं शैव मंदिर , एक एकड़ में विस्तृत मंदिर का तालाब और माडायिक्कावु ( घने जंगलों में पवित्र स्थान ) ।" ,माडायिप्पूरम ( उत्सव ) का आयोजन माडायिक्कावु से सम्बद्ध है । ,"इस पहाड़ी के अन्य आकर्षण हैं - 300 विभिन्न प्रजातियों के फल और फूल , 30 प्रजातियों के मूल - कन्द , जड़ी - बूटियों की सैकड़ों प्रजातियाँ , मांस भोजी , वनस्पतियाँ , 150 भिन्न प्रजातियों के पक्षी आदि ।" ,यह माना जाता है कि डेंगू के ऊपर प्रति मिलियन जनसंख्या में से लगभग 1600 विकलांगता समायोजित जीवन वर्ष का भार है । ,इसका अर्थ है कि डेंगू के कारण प्रति मिलियन जनसंख्या में से 1600 वर्षों का जीवन समाप्त हो जाता है । ,यह उतना ही है जितना कि रोग भार अन्य बचपन या टीबी ( तपेदिक ) जैसी उष्णकटिबंधीय बीमारियों का है । ,डेंगू मलेरिया के बाद दूसरे नंबर की सबसे महत्वपूर्ण उष्णकटिबंधीय बीमारी है । ,विश्व स्वास्थ्य संगठन भी डेंगू को 16 उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारियों ( अर्थात डेंगू को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता है जितना लिया जाना चाहिये ) में से एक मानता है । ,डेंगू पूरी दुनिया में और अधिक आम होता जा रहा है । ,1960 के मुकाबले 2010 में डेंगू 30 गुना अधिक आम था । ,डेंगू के विस्तार के लिये कई सारी चीजें जिम्मेदार हैं । ,शहरों में अधिक लोग रहने लगे हैं । ,दुनिया की जनसंख्या बढ़ रही है । ,अधिक से अधिक लोग अब अंतर्राष्ट्रीय यात्राएं ( देशों के बीच ) कर रहे हैं । ,ग्लोबल वार्मिंग को भी डेंगू के विस्तार का एक कारण माना जाता है । ,डेंगू सबसे अधिक भूमध्य रेखा के आसपास होता है । ,जहां डेंगू होता है उस क्षेत्र में 2.5 बिलियन लोग निवास करते हैं । ,इनमें से 70 प्रतिशत लोग एशिया और प्रशांत क्षेत्र से हैं । ,"अमरीका में डेंगू प्रभावित इन क्षेत्रों से यात्रा करके वापस आये लोगों में से 2.9 % से 8 % लोग ऐसे हैं , जिनको बुखार हो जाता है और जो यात्रा के दौरान प्रभावित हो जाते हैं ।" ,लोगों के इस समूह में मलेरिया के बाद डेंगू दूसरा सबसे आम संक्रमण है जिसका निदान होता है । ,डेंगू को कई वर्षों पूर्व सबसे पहले लिखा गया था । ,जिन साम्राज्य ( 265 से 420 ईसा पूर्व ) का एक चीनी चिकित्सा विश्वकोष एक ऐसे व्यक्ति की बात करता है जिसे संभवतः डेंगू हुआ था । ,"किताब एक "" जल जहर ( वॉटर पॉएज़न ) "" रोग के बारे में बताता है जिसका संबंध उड़ने वाले कीटों से था ।" ,17 वीं शताब्दी के लिखित दस्तावेज़ भी एक ऐसी महामारी की चर्चा करते हैं जो डेंगू हो सकती है ( जहां पर रोग थोड़े ही समय में तेज़ी से फैलता है ) । ,सबसे अधिक संभावित डेंगू महामारी की आरंभिक रिपोर्ट 1779 तथा 1780 की है । ,"ये रिपोर्ट एक ऐसी महामारी की बात करती हैं जिसने एशिया , अफ्रीका तथा उत्तरी अमरीका को अपने घेरे में ले लिया था ।" ,उस समय से 1940 तक बहुत सारी महामारियां नहीं हुई । ,"1906 में वैज्ञानिकों ने सिद्ध किया कि लोगों को "" एडीज़ "" मच्छरों से संक्रमण हो रहा था ।" ,1907 में वैज्ञानिकों ने दर्शाया कि डेंगू का कारण वायरस है । ,यह मात्र दूसरा रोग था जिसे वायरस से होता दिखाया गया था ( वैज्ञानिक पहले ही सिद्ध कर चुके थे कि पीला बुखार वायरस के कारण होता है ) । ,जॉन बर्टन क्लेलैंड तथा जोसेफ फ्रैंकलिन सिलर डेंगू के वायरस का अध्ययन करते रहे और वायरस के विस्तार के आधार का पता लगाया । ,दूसरे विश्व युद्ध के बाद डेंगू अधिक तेजी से फैलने लगा । ,माना गया कि युद्ध ने पर्यावरण को कई तरीको से बदला । ,भिन्न प्रकार के डेंगू नये क्षेत्रों में फैले । ,लोगो को पहली बार रक्तस्रावी डेंगू बुखार होना शुरू हुआ । sg,डेंगू का यह भीषण प्रकार सबसे पहले 1953 में फिलीपींस में रिपोर्ट किया गया । ,1970 के आते - आते रक्तस्रावी डेंगू बुखार बच्चों में मृत्यु का प्रमुख कारण बन गया । ,यह प्रशांत क्षेत्र तथा अमरीका में भी होने लगा । ,रक्तस्रावी डेंगू बुखार तथा डेंगू शॉक सिन्ड्रोम सबसे पहले मध्य तथा दक्षिण अमरीका में 1981 में रिपोर्ट किया गया । ,इस समय स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों ने यह देखा कि जिन लोगों को टाइप 1 डेंगू वायरस का असर हो चुका था उनको कुछ वर्षों के बाद टाइप 2 डेंगू वायरस का असर हो रहा था । ,"यह स्पष्ट नहीं है कि शब्द "" डेंगू "" कहां से आया ।" ,"कुछ लोगों का मानना है कि यह शब्द स्वाहीली के वाक्यांश "" का - डिंगा पेपो "" से आया है ।" ,यह वाक्यांश बुरी आत्माओं से होने वाली बीमारी के बारे में बताता है । ,"माना जाता है कि स्वाहीली शब्द "" डिंगा "" स्पेनी के शब्द "" डेंगू "" से बना है ।" ,"इस शब्द का अर्थ है "" सावधान "" ।" ,वह शब्द एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताने के लिये उपयोग किया गया हो सकता है जो डेंगू बुखार के हड्डी के दर्द से पीड़ित हो ; वह दर्द उस व्यक्ति को सावधानी के साथ चलने पर मजबूर करता होगा । ,"हालांकि , यह भी संभव है कि स्पेनी शब्द स्वाहीली भाषा से आया हो , न कि जैसा ऊपर बताया गया है ।" ,"अन्य लोगों का मानना है कि "" डेंगू "" नाम वेस्ट इंडीज़ से आया है ।" ,"वेस्ट इंडीज़ में , डेंगू से पीड़ित गुलाम "" ए डैंडी "" की तरह खड़े होने वाले और चलने वाले कहे जाते थे और इसी कारण से बीमारी को भी "" डैंडी फीवर "" कहा जाता था ।" sg,""" हड्डी - तोड़ बुखार ( ब्रेकबोन फीवर ) "" नाम सबसे पहले एक चिकित्सक संयुक्त राज्य अमरीकी "" संस्थापक जनक "" बेंजामिन रश द्वारा उपयोग किया गया था ।" ,"1789 में रश ने "" हड्डी - तोड़ बुखार ( ब्रेकबोन फीवर ) "" नाम का उपयोग एक रिपोर्ट में किया जो 1780 में फिलाडेल्फिया में हुये डेंगू के प्रकोप पर था ।" ,"रिपोर्ट में रश ने अधिक औपचारिक नाम "" बिलियस रिमिटिंग फीवर "" का अधिकतर उपयोग किया ।" ,"शब्द "" डेंगू बुखार "" 1828 तक आम तौर पर उपयोग में नहीं था ।" ,तट्टेक्काडु इडुक्कि जिले की देविकुलम तहसील के अन्तर्गत आता है । ,तट्टेक्काडु इडुक्कि में लगभग 500 प्रजातियों के दुर्लभ पक्षी मिलते हैं । ,अतः केरल सरकार ने इस क्षेत्र में प्रसिद्ध पक्षी निरीक्षक डॉ. सलीम अली के नाम से ' पक्षी अभ्यारण्य ' बनाया है । ,तट्टेक्काडु इडुक्कि पक्षी अभ्यारण्य विश्व प्रसिद्घ है । ,तट्टेक्काडु इडुक्कि कोच्चि नगर से 58 कि.मी. दूर है । ,तट्टेक्काडु पेरियार नदी की दो धाराओं के बीच में स्थित 25 वर्ग कि.मी. क्षेत्रफल वाला द्वीप है । ,"तट्टेक्काडु में पक्षियों की अनेक प्रजातियों के अतिरिक्त 28 प्रकार पशु , भीमाकार वृक्ष , नौ प्रकार के सरीसृप आदि पाए जाते हैं ।" ,इडुक्कि वन्यजीव अभ्यारण्य समुद्र तल से 450 - 748 मीटर ऊँचाई पर स्थित है । ,इडुक्कि वन्यजीव अभ्यारण्य 77 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में व्याप्त है । ,इडुक्कि वन्यजीव अभ्यारण्य तोडुपुष़ा और उडुम्बनचोला तहसीलों के अन्तर्गत आता है । ,इडुक्कि वन्यजीव अभ्यारण्य पेरियार और चेरुतोणिप्पुष़ा के मध्य का वनप्रदेश है । ,पेरियार और चेरुतोणिप्पुष़ा वनप्रदेश इस क्षेत्र में सदाबहार वन हैं । ,"पेरियार और चेरुतोणिप्पुष़ा में जंगली सुअर , व्याघ्र आदि पशु रहते हैं ।" ,"नाग , वाइपर ( दुबोइया ) , चमकीला साँप , मैना , बुलबुल , कठफोड़वा , रामचिरैया आदि भी इस वन में पाये जाते हैं ।" ,इडुक्कि वन्यजीव अभ्यारण्य इडुक्कि बाँध के निकट है । ,पेरियार से बोट यात्रा की भी व्यवस्था है । ,वण्डिप्पेरियार प्रकृति समृद्ध प्रदेश है । ,"वण्डिप्पेरियार में चाय , कॉफी , कालीमिर्च आदि की खेती होती है ।" ,वण्डिप्पेरियार के बीचों - बीच से पेरियार नदी बहती है । ,वण्डिप्पेरियार में सरकारी कृषि - उद्यान एवं पुष्पोद्यान है । ,"वण्डिप्पेरियार पहाड़ी फल - फूल , कन्द - मूल , आदि का केन्द्र है ।" ,प्रशांत सुन्दर वातावरण और मन्द - मन्द हवा से युक्त भ्रमण केन्द्र है रामक्कल्मेडु । ,"पहाड़ी पर से कम्बम , बोडी इत्यादि दूर के दृश्य दिखलाई देते हैं ।" ,रामक्कल्मेडु इडुक्कि से 45 कि.मी. तथा मुन्नार से 75 कि.मी. दूर स्थित है । ,"प्रातः 9.30 बजे मुन्नार से NULL , 10.30 बजे कोट्टयम से और 9.30 बजे एर्णाकुलम से रामक्कल्मेडु के लिए बसें जाती हैं ।" ,पल्लिक्कुन्नु में ' सह्याद्रि ' नामक प्रसिद्ध आयुर्वेद केन्द्र है । ,सह्याद्रि आयुर्वेद केन्द्र पीरुमेडु विकास समिति के अधीन है । ,सह्याद्रि आयुर्वेद केन्द्र के पास औषधीय वनस्पतियों का एक उद्यान है जिसमें चिकित्सा के लिए आवश्यक जड़ी - बूटियाँ उगाई गई हैं ,सह्याद्रि आयुर्वेद केन्द्र में विभिन्न रोगों की चिकित्सा के अतिरिक्त सुख चिकित्सा अर्थात् स्वास्थ्य वर्धन चिकित्सा की भी व्यवस्था की गई है । ,केरल पेरियार वन्यजीव अभ्यारण्य पर गर्व कर सकता है । ,पेरियार वन्यजीव अभ्यारण्य पेरियार सरोवर के तट पर बसा है । ,पश्चिमी घाट पर स्थित पेरियार वन्यजीव अभ्यारण्य का यह भूभाग अद्‌भुत हरितिमा से युक्त है । ,"यहाँ हाथी , हरिण , बाघ , लघु पुच्छ वानर आदि जीव जन्तु पाए जाते हैं ।" ,यहाँ नदी पर नौका विहार करते समय तट के घने घास के मैदानों में चरते हाथी के झुण्ड दिखाई देते हैं । ,तेक्कडि वन में ट्रेकिंग के द्वारा जंगल के बीचों - बीच स्थित शिला मंदिर ( मंगला देवी मंदिर ) में पहुँच सकते हैं । ,जँगली हाथियों का फोटो उतारने के लिए तेक्कडि सबसे उपयुक्त स्थान है । sg,तेक्कडि में दो संस्थाएँ सरोवर के तट पर ठहरने की सुविधा प्रदान करती हैं - तिरुवितांकूर नरेशों का ग्रीष्मकालीन बंगला लेक पैलस और अरण्यनिवास । ,लेक पैलस अरण्यनिवास सरोवर के तट पर एक छोटे से द्वीप में है । ,दोनों अब के.टी.डी.सी. के स्वामित्व में है । ,त्रिशंकु मला का पर्वतीय स्थान अत्यन्त रमणीय है । ,त्रिशंकु मला में मंत्रमुग्ध करने वाली सुषमा बिखरी है । ,त्रिशंकु मला में पहाड़ियों के ऊपर से सूर्यास्त का दर्शन करना साक्षात् सौन्दर्य के दर्शन करने के समान है । ,किन्तु त्रिशंकु मला से नीचे देखने के लिए हिम्मत चाहिए । ,त्रिशंकु मला में मन्द - मन्द झोंको के रेशम से स्पर्श का आनन्द उठाते हुए वन प्रदेशों के बीच भ्रमण करते हुए गुजरना अनिर्वचनीय अनुभव होगा । ,त्रिशंकु मला पीरुमेडु से 4 कि.मी. और कुट्टिक्कानम से आधा किमी. की दूरी पर स्थित है । ,कहा जाता हैं कि पीरु मुहम्मद नामक सूफ़ी संत के नाम पर यह पहाड़ी पीरुमला नाम से प्रसिद्ध हो गई । ,यह यायावरों और ट्रेकिंग - शौकीनों का प्रिय स्थान है । ,तिरुवनन्तपुरम रेलवे स्टेशन से किलिमानूर राजमहल 39 कि.मी. दूर है । ,"तिरुवनन्तपुरम अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से किलिमानूर राजमहल , 46 कि.मी. दूर है ।" ,"पीरुमला सूफ़ी मक़बरा , दीवान भवन , राज परिवार के सदस्यों का ग्रीष्मकालीन प्रासाद आदि देखने योग्य चीज़ें हैं ।" ,"दूसरे शब्दों में , वे समझाने के लिए , तर्क कला विकसित करते हैं कि उनके लिए धूम्रपान आवश्यक क्यों है , हालांकि जरूरी नहीं कि कारण तार्किक हों ।" sg,"उदाहरण के लिए , एक धूम्रपान करने वाला यह कह कर अपने व्यवहार को सही बता सकता है कि हर कोई मरता है और इसलिए , सिगरेट वास्तव में कुछ भी नहीं बदलती है या एक व्यक्ति यह विश्वास कर सकता है कि धूम्रपान तनाव से छुटकारा दिलाता है या इसके कई अन्य लाभ हैं जो इसके जोखिम को सही ठहराते हैं ।" ,"धूम्रपान करने वाले , जिनकी प्रत्येक सुबह सिगरेट से शुरुआत होती है , अक्सर सकारात्मक प्रभावों को व्यक्त करेंगे , किन्तु वे स्वीकार नहीं करेंगे कि उन्हें खुशी की कमी महसूस हो रही है ( डोपामाइन के कम स्तर के कारण ) और खुशी के "" सामान्य "" स्तर को पाने के लिए वे धूम्रपान करेंगे ।" ,"( डोपामाइन का "" सामान्य "" स्तर ) ।" ,"2010 में प्रकाशित 20,000 से अधिक इज़रायली सैन्य रंगरूटों पर किये गये एक अध्ययन के अनुसार , धूम्रपान करने वालों में धूम्रपान न करने वालों की तुलना में कम बुद्धि ( I.Q. ) होती है ।" ,"जिन्होनें कभी धूम्रपान नहीं किया उनकी औसत बुद्धि 101 थी , जबकि एक पैकेट से अधिक धूम्रपान करने वालों की औसत बुद्धि 90 थी ।" ,मुख्य रूप से तम्बाकू का धूम्रपान एक ऐसी प्रक्रिया है जो 1.1 बिलियन लोगों द्वारा की जाती है और इसका 1 / 3 भाग व्यस्क आबादी है । ,"धूम्रपान करने वाले की छवि काफी अलग हो सकती है , किन्तु यह अक्सर कल्पना में स्वयं तथा अकेलेपन से जुड़ी होती है ।" ,"फिर भी , तंबाकू और भांग का धूम्रपान एक सामाजिक गतिविधि हो सकते हैं , जो सामाजिक संरचनाओं का सुदृढीकरण करते हैं और कई और विविध सामाजिक और जातीय समूहों के सांस्कृतिक अनुष्ठान का हिस्सा हो सकते हैं ।" ,"अधिकतर धूम्रपान करने वाले सामजिक परिवेश में धूम्रपान आरम्भ करते हैं और कई मामलों में सिगरेट पेश करना किसी बार , नाईट क्लब , काम करने की जगह या सड़क पर एक नई पहल को शुरू करने या अजनबी से बात करने का अच्छा बहाना हो सकता है ।" ,सिगरेट जलाना अक्सर आलस या आवारागर्दी से बचने का प्रभावशाली ढंग समझा जाता है । sg,"किशोरों के लिए , यह उनके बचपन की दुनिया से निकलने के पहले कदम या वयस्कों की दुनिया से विद्रोह के रूप में कार्य करता है ।" sg,"इसके अलावा , धूम्रपान सौहार्द के एक प्रकार के रूप में देखा जा सकता है ।" ,"ऐसा देखा गया है कि सिगरेट का एक पैकेट खोलने या अन्य लोगों को सिगरेट पेश करते समय , मस्तिष्क में डोपामाइन का स्तर बढ़ सकता है ( "" प्रसन्नता का अनुभव "" ) और निःसंदेह धूम्रपान करने वाले अन्य धूम्रपान करने वालों के साथ इस तरीके से संबंध स्थापित कर लेते हैं जिनसे उनकी यह आदत बनी रहती है ।" sg,विशेषकर उन देशों में जहाँ सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान वैध कर दिया गया है । ,"मनोरंजक दवा के उपयोग के अलावा , यह अपनी पहचान स्थापित करने या धूम्रपान के अपने अनुभवों को अपनी छवि के विकास से जोड़ने का साधन हो सकता है ।" ,19वीं सदी में आधुनिक धूम्रपान विरोधी आंदोलन ने धूम्रपान के बारे में जागरुकता फ़ैलाने से भी कहीं अधिक किया । ,"इसने धूम्रपान करने वाले की प्रतिक्रिया को उकसाया कि पहले क्या था और अब अक्सर क्या है , जो कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमले के रूप में माना जाता है और इसने धूम्रपान न करने वालों के बीच बागियों या बाहरी व्यक्तियों की छवि बना दी है ।" sg,सैनिकों के बीच तम्बाकू के महत्व को एक ऐसी चीज़ के रूप में देखा गया जिसे कमांडरों द्वारा अनदेखा नहीं किया जा सकता था । ,"17वीं सदी तक तम्बाकू भत्ता कई देशों के नौसैनिकों के राशन का सामान्य हिस्सा था और प्रथम विश्वयुद्ध तक , युद्ध क्षेत्र में लड़ने वाले सैनिकों के लिए कई सिगरेट निर्माताओं और सरकारों ने गठजोड़ किया ।" ,"इस बात पर जोर दिया गया था कि कारागार में तम्बाकू का नियमित उपयोग ना केवल सैनिकों को शांत रखेगा , बल्कि दबाव सहने में भी उनकी मदद करेगा ।" ,"20वीं शताब्दी के मध्य तक , कई पश्चिमी देशों की अधिकांश व्यस्क आबादी धूम्रपान करने वालों की थी और धूम्रपान विरोधी कई कार्यकर्ताओं के दावों को यदि अनदेखा नहीं किया गया तो इन पर बहुत अधिक विश्वास भी नहीं किया गया ।" ,"वर्तमान में आंदोलन का दावा और अधिक पुख्ता और प्रामाणिक है , लेकिन जनसंख्या के अनुपात में धूम्रपान करने वालों की संख्या काफी स्थिर बनी हुई है ।" ,तंबाकू संबंधित बीमारियाँ आज दुनिया में सबसे बड़े हत्यारों के रूप में से एक हैं और औद्योगिक देशों में इन्हें अकाल मृत्यु का सबसे बड़ा कारण कहा जाता है । ,संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रति वर्ष लगभग 500000 मौतें तम्बाकू संबंधित बीमारियों के कारण होती हैं और एक ताज़ा अध्ययन का अनुमान है कि चीन के पुरुषों के 1 / 3 भाग ने धूम्रपान के कारण अपना जीवनकाल घटा लिया है । ,पुरुष और महिला धूम्रपान करने वाले अपने जीवन के क्रमशः 13.2 वर्ष और 14.5 वर्ष औसतन कम कर लेते हैं । ,आजीवन धूम्रपान करने वाले लगभग आधे लोग धूम्रपान के कारण समय से पहले मर जाते हैं । ,फेफड़ों के कैंसर से मरने का खतरा 85 वर्ष की उम्र में धूम्रपान करने वाले एक पुरुष के लिए 22.1 % और धूम्रपान करने वाली एक वर्तमान महिला के लिए 11.9 % है । ,मृत्यु के प्रतिस्पर्धी कारणों की अनुपस्थिति में इसीसे यह भी अनुमान लगाया गया कि 85 वर्ष की उम्र से पहले आजीवन धूम्रपान न करने वालों की फेफड़ों के कैंसर से मरने की सम्भावना यूरोपीय क्षेत्र के पुरुष के लिए 1.1 % और महिला के लिए 0.8 % है । ,"प्रतिदिन एक सिगरेट पीने से धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के लिए , धूम्रपान ना करने वाले व्यक्ति की अपेक्षा दिल के दौरे की संभावना पचास प्रतिशत है ।" ,अरैखिक खुराक प्रतिक्रिया को प्लेटलेट एकत्रीकरण प्रक्रिया पर धूम्रपान के प्रभाव से समझाया जाता है । ,"धूम्रपान के कारण होने वाली बीमारियों और वेदनाओं के कारण संवहनी स्टेनोसिस , फेफड़ों के कैंसर , दिल का दौरा और क्रोनिक प्रतिरोधी फुफ्फुसीय रोग हो सकते हैं ।" ,कई सरकारें मास मीडिया में धूम्रपान विरोधी अभियानों के साथ धूम्रपान के दीर्घकालीन खतरों के बारे में जोर देते हुए लोगों को रोकने की कोशिश कर रही हैं । ,"पैसिव धूम्रपान , या निष्क्रिय धूम्रपान , जो धूम्रपान करने वालों के आसपास के क्षेत्र में लोगों को तत्काल प्रभावित करता है , धूम्रपान पर प्रतिबंध लागू करने का एक प्रमुख कारण है ।" ,"यह एक ऐसा कानून है जो कि किसी व्यक्ति को इनडोर सार्वजनिक स्थलों जैसे बार , पब और रेस्तरां में धूम्रपान करने से रोकने के लिए बनाया गया है ।" ,ऐसा करने के पीछे विचार यह है कि धूम्रपान को अत्याधिक असुविधाजनक बना कर इसे हतोत्साहित किया जाए तथा सार्वजनिक स्थानों पर खतरनाक धुएं पर रोक लगाई जाए । ,कानूनविदों के बीच चिंता का एक मुख्य कारण किशोरों को धूम्रपान के लिए हतोत्साहित करना है और कई राज्यों ने कम उम्र के लोगों को तम्बाकू पदार्थ बेचने के खिलाफ कानून पारित किये हैं । ,कई विकासशील देशों ने अभी धूम्रपान विरोधी नीतियां नहीं अपनाई हैं जिसके कारण कुछ देश धूम्रपान विरोधी अभियान और ETS ( पर्यावरण तम्बाकू धूम्रपान ) के बारे में शिक्षा दे रहे हैं । ,"कई प्रतिबंधों के बावजूद , यूरोपीय देश शीर्ष 20 स्थानों में से 18 स्थानों पर कब्ज़ा जमाए हुए हैं और एक मार्केट रिसर्च कम्पनी ERC के अनुसार , 2007 में प्रति व्यक्ति औसतन 3000 सिगरेटों के साथ सबसे ज्यादा धूम्रपान करने वाले ग्रीस में हैं ।" ,"विकसित दुनिया में धूम्रपान की दर स्थिर हुई है या इसमें गिरावट आई है , लेकिन विकासशील देशों में वृद्धि जारी है ।" ,1965 से 2006 तक संयुक्त राज्य अमेरिका में धूम्रपान की दर 42 % से 20.8 % तक गिरी है । ,"दुनियाभर में कानूनों तथा मादक पदार्थों के कानूनों में मतभेद के कारण , समाज पर लत के प्रभाव , अलग -JOIN अलग पदार्थों तथा इनसे उत्पन्न होने वाली अप्रत्यक्ष सामजिक समस्याओं के कारण भिन्न हो सकते हैं ।" ,"हालांकि निकोटिन अत्याधिक नशीली दवाई है लेकिन मस्तिष्क पर इसका प्रभाव इतना तीव्र या ध्यान देने योग्य नहीं है जितना कि दूसरी दवाओं जैसे कोकीन , एम्फेटामाइन्स या अन्य कोई मादक पदार्थ का ( जिसमें हेरोइन व मॉर्फीन भी शामिल है ) ।" ,"चूंकि तम्बाकू गैर कानूनी दवा भी नहीं है , इसमें उपभोक्ता के लिए उच्च जोखिम और अधिक दामों वाला कोई काला बाज़ार नहीं है ।" ,धूम्रपान अल्जाइमर रोग के खतरे का एक महत्त्वपूर्ण कारक है । ,तम्बाकू मुक्त बच्चों के लिए अभियान का दावा है कि धूम्रपान करने वालों की वजह से अमेरिकी उत्पादकता को प्रतिवर्ष 97.6 बिलियन डॉलर का नुकसान होता है और लगभग 96.7 बिलियन डॉलर सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य पर अतिरिक्त खर्च किया जाता है । ,यह सकल घरेलू उत्पाद के 1 % से भी अधिक है । sg,संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रतिदिन एक पैकेट से अधिक धूम्रपान करने वाला पुरुष अपने जीवन काल में औसतन 19000 डॉलर केवल अपनी चिकित्सा पर खर्च करता है । sg,अमेरिका में प्रतिदिन एक पैकेट से अधिक धूम्रपान करने वाली महिला भी अपने जीवन काल में औसतन 25800 डॉलर केवल अपनी अतिरिक्त स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च करती है । ,यह लागत अतिरिक्त राजस्व कर से अलग देखी जानी चाहिए जो धूम्रपान के कारण प्राप्त होता है । ,"धूम्रपान विभिन्न कला रूपों में संस्कृति में स्वीकार किया गया है और इसने कई अलग , अक्सर परस्पर विरोधी या परस्पर अलग , समय , स्थान और धूम्रपान करने वालों के अनुसार कई अर्थ विकसित किए हैं ।" ,"कनेक्टिविटी के लिए ब्लूटूथ 3.0 , एचडीएमआई पोर्ट , वीजीए कैमरा और बिल्ट इन डुअलबैंड वाई - फाई 802.11 ए / बी / जी / एन की सुविधा है ।" ,यह क्रोमबुक 10 सेकंड से भी कम समय में बूट हो जाता है । ,गूगल ने इस लैपटॉप की कीमत 13 हजार 300 रुपए रखी है । ,स्वाइप ने पहला ड्यूल सिम एंड्रायड टैबलेट लांच किया । ,स्वाइप के इस टैबलेट को आप ऑल इन वन कह सकते हैं । ,यह टैबलेट एंड्रॉयड के आईसीएस प्लेटफार्म पर रन करता है । ,11 हजार 999 की कीमत वाले इस टैबलेट में क्या हैं फीचर्स । ,"अगर आप अपना पुराना कंप्यूटर , मोबाइल फोन या कोई और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कचरे में फेंक रहे हैं तो जरा ठहरिये क्योंकि इसमें लगा सोना चांदी आपके लिये फायदे का सौदा साबित हो सकता है ।" ,"विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया में कंप्यूटर , मोबाइल फोन , टैबलेट तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिक उपकरणों के निर्माण में हर वर्ष करीब 320 टन सोना और 7500 टन चांदी का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें से सिर्फ 15 प्रतिशत ही वापस निकल पाता है और शेष कचरे में बदल कर बर्बाद हो जाता है ।" ,ई कचरे में छिपा 21 अरब डालर का सोना चांदी । ,इन उच्च तकनीक वाले उपकरणों के निर्माण में हर वर्ष करीब 21 अरब डॉलर अर्थात लगभग 1155 अरब रुपये मूल्य के सोने चांदी का इस्तेमाल किया जाता है । ,इसमें से 16 अरब डॉलर का सोना व पांच अरब डॉलर की चांदी होती है । ,घाना की राजधानी अक्रा में हाल में संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय द्वारा ई कचरे के बारे में आयोजित सम्मेलन में विशेषज्ञों ने बताया कि खानों से निकलने वाले अयस्क से निकलने वाली बहुमूल्य धातु का 40 से 50 गुना ई कचरे में उपलब्ध है । ,विशेषज्ञों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक और बिजली उपकरणों में 2001 में करीब 197 टन सोने का इस्तेमाल हुआ था जो सोने के कुल उत्पादन का 5.3 प्रतिशत था । ,यह पिछले वर्ष बढ़ कर 320 टन हो गया जो विश्व के कुल उत्पादन का 7.7 प्रतिशत है । ,इस दशक के दौरान विश्व में सोने की आपूर्ति में 15 प्रतिशत का इजाफा हुआ । ,एप्पल के आईपैड को पहली बार तगड़ी चुनौती मिलने जा रही है । ,ये कोई और नहीं बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट देगी । ,अगले हफ्ते माइक्रोसॉफ्ट अपना पहला टैबलेट कम्प्यूटर दुनिया के सामने लाएगा । ,"ये टैबलेट कम्प्यूटर , माइक्रोसॉफ्ट के आने वाले ऑपरेटिंग सिस्टम - विंडोज 8 पर चलेगा ।" ,एप्पल के आईपैड को माइक्रोसॉफ्ट की तगड़ी चुनौती ,"विंडोज 8 की सबसे बड़ी खूबी ये है कि ये ऑपरेटिंग सिस्टम , टैबलेट कम्प्यूटर की टचस्क्रीन के लिए ही डिजाइन किया गया है ।" ,"इसका बड़े - बड़े टाइल्ड आइकॉन्स वाला यूजर इंटरफेस समझने में बेहद आसान है , साथ में दिखने में खूबसूरत भी NULL ।" ,टैबलेट कम्प्यूटर के मामले में अभी तक सिर्फ एप्पल के आईपैड का ही बोलबाला था । ,"एंड्रॉयड के टैबलेट हैं जरूर , पर उनमें से किसी में भी आईपैड को टक्कर देने जितनी काबिलियत नहीं है ।" ,पर विंडोज 8 पर चलने वाला ये टैबलेट कम्प्यूटर कई मायनों में आईपैड को चुनौती देगा । ,माइक्रोसॉफ्ट के विंडोज प्लेटफॉर्म पर दुनिया भर में लगभग 80 फीसदी कम्प्यूटर काम करते हैं । ,"जब किसी यूजर को एक ही ऑपरेटिंग सिस्टम उसके ऑफिस के कम्प्यूटर और उसके पोर्टेबल टैबलेट पर मिलेगा , तो जीवन में असमंजस और योग्य मसले भी कम होंगे ।" ,माइक्रोसॉफ्ट के ऑफिस सूट का बोलबाला पूरी दुनिया में है । ,"माइक्रोसॉफ्ट के ऑफिस सूट का मजा सिर्फ विंडोज 8 टैबलेट पर ही लिया जा सकेगा , आईपैड पर नहीं NULL ।" ,"इसके साथ ही माइक्रोसॉफ्ट ने नोकिया के अलावा एचटीसी , सैमसंग , एसर जैसे ढेरों मैन्यूफैक्चरर्स के साथ डील कर रखी है ।" ,जिसके कारण विंडोज 8 पर चलने वाले ढेरों टैबलेट हर प्राइज रेंज में मिलेंगे । ,तो पीसी और मैक के बीच की बरसों पुरानी ये प्रतिस्पर्धा अगले हफ्ते एक नया मोड़ लेगी । ,"माइक्रोसॉफ्ट को जहां उसके बड़े यूजर बेस का भरोसा है , वहीं एप्पल के आईपैड को टैबलेट पीसी के बाजार में आगे रहने का फायदा है ।" ,ऐसे में साफ जाहिर है कि ये मुकाबला काफी दिलचस्प रहने वाला है । ,दूरसंचार कंपनी एमटीएस ने आकर्षक स्मार्ट फोन एमटैग पेश किया है । ,आधुनिक क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 800 मेगाहर्ट्ज से लैस एमटैग 353 एंड्रोयाड 2.3 जिंजरब्रेड पर आधारित है । ,"कंपनी ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि यह अपनी श्रेणी में सबसे पतले स्मार्ट फोन में से एक है और इसकी कीमत 5,999 रुपए है ।" ,एमटीएस इंडिया के मुख्य विपणन अधिकारी और बिक्री अधिकारी लियोनिद मुसतोव ने कहा कि एमटीएस एमटैग 353 अपनी श्रेणी का बेहतरीन और स्टाइलिश स्मार्ट फोन है । ,यह एमटीएस टीवी एप्लीकेशन से लैस है जिससे ग्राहक 100 से अधिक लाइव टीवी और वीडियो ऑन डिमांड जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं । ,"युवाओं की पसंद को ध्यान में रखकर बीएसएनएल ने तीन टेबलेट बाजार में उतारे हैं , जिनकी कीमत 3999 से लेकर 10999 के बीच है ।" ,निजी कंपनियों के साथ समझौते के तहत बीएसएनएल ने ये टैबलेट बाजार में उतारे हैं । ,एप्पल ने दुनिया का सबसे हल्का स्मार्ट फोन आईफोन - 5 लांच कर दिया है । ,"इसका वजन सिर्फ 112 ग्राम है , जो आईफोन - 4एस के मुकाबले करीब बीस फीसदी कम है ।" ,कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट फिल शिलर ने आईफोन फाइव को दुनिया के सामने पेश किया । ,आईफोन - 5 की सबसे बड़ी विशेषता उसकी बड़ी स्क्रीन है । ,आईफोन - 5 की स्क्रीन चार इंच की है जबकि आईफोन - 4 की स्क्रीन 3.5 इंच की थी । ,"इसके साथ ही स्क्रीन की लंबाई और चौड़ाई में 16:9 का रेशियो रखा गया है , जिससे वाइडस्क्रीन वीडियो देखने में सहूलियत होगी ।" ,आईफोन - 5 में भी आईफोन - 4 की तरह ही आठ मेगापिक्सल का कैमरा है । ,"इस कैमरे में एक नया पैनोरामा ऑप्शन दिया गया है , जिसकी मदद से आठ मेगापिक्सल के कैमरे से 28 मेगापिक्सल तक की तस्वीरें खींची जा सकती हैं ।" ,"आईफोन फाइव में एपल की नई आ6 चिप लगी है , जिससे फोन की प्रोसेसिंग स्पीड के साथ - साथ बैटरी लाइफ भी बढ़ने की उम्मीद की जा रही है ।" ,गुमला जिले के घाघरा थाना अन्तर्गत सेन्हा से 8 कि.मी. द.पू. दिशा में कोराम्बे गाँव स्थित है । ,कोराम्बे गाँव दक्षिण कोयल नदी के तट पर स्थित है । ,नदी तट पर ही भगवान वासुदेव राय का मंदिर है । ,भगवान वासुदेव राय के मंदिर की स्थापना विधिवत पूजा - अर्चना कर नागवंशी राजा चेतकर्ण ने 1470 में की थी । ,भगवान की मूर्ति काले पत्थर से निर्मित है । ,स्थानीय किंवदन्ती है कि गर्मी के दिनों में मूर्ति से पसीना निकलता है । ,प्रयाग को तीर्थों का राजा कहा जाता है । ,पुराणों में प्रयाग के तीर्थराज कहलाने संबंधी कथा भी मिलती है । ,कथा है - समुद्र मंथन के समय निकलने वाले तमाम रत्नों में से अमृत भी निकला जिसको प्राप्त करने के लिए देव - दानवों में छीना - झपटी होने लगी । ,अमृत की बूंदें पृथ्वी पर चार जगह गिरीं । ,"पहली प्रयाग में NULL , NULL फिर नासिक , उज्जैन और हरिद्वार में ।" ,तभी से आज तक इन चारों जगह पर समय - समय पर कुंभ व अर्द्धकुंभ मेले लगते हैं । ,एक कथा के अनुसार ब्रह्मा तथा ऋषियों ने शेषनाग से प्रयाग के तीर्थराजत्व के विषय में प्रश्न किया । ,"शेषनाग के कहने पर ब्रह्मा ने तुला के एक पलड़े पर समस्त तीर्थों और सप्तपुरियों को तथा दूसरे पर केवल प्रयाग को रखा , लेकिन तुला प्रयाग की ओर झुक गयी और तब प्रयाग का तीर्थराजत्व तय हुआ ।" ,कहते हैं जैसे ही व्यक्ति इस क्षेत्र की सीमा में प्रविष्ट होता है तो उसे प्रत्येक पग पर एक अश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता है । ,"प्रयाग से विश्व के सभी तीर्थ उत्पन्न हुए हैं , अन्य तीर्थों से प्रयाग की उत्पत्ति नहीं हुई है , इसलिये प्रयाग को तीर्थराज कहा जाता है ।" ,"पद्मपुराण के अनुसार जिस प्रकार जगत की उत्पत्ति ब्रह्माण्ड से होती है , जगत से ब्रह्माण्ड उत्पन्न नहीं होता , उसी प्रकार प्रयाग से अन्य तीर्थों की उत्पत्ति है ।" ,प्रयाग जिले में महर्षि ययाति की राजधानी प्रतिष्ठापुर तथा भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के गुरु संदीपनि ऋषि का आश्रम स्थित है । ,भगवान बुद्ध ने इसी नगर में कई वर्ष रह कर धर्मोपदेश दिया था और सम्राट अशोक ने तीर्थराज प्रयाग में ही अपना एक लाट खड़ा किया था जो आज भी विद्यमान है । ,आदिगुरु शंकराचार्य भी यहाँ पधारे थे और कार्षाग्नि में आत्मदाह के लिये उद्‌धत कुमारिल भट्ट से उनकी यहीं भेंट हुई थी । ,ऐसी मान्यता है कि आदि शंकराचार्य ने ही प्रयाग के माघ मेले को राष्ट्रीय पर्व का रूप दिया था । ,माघ अमावस्या के दिन सूर्य एवं चन्द्र पृथ्वी के एक ही अंश पर मकर राशि में रहते हैं । ,इसलिये माघ मास में यज्ञ एवं स्नान करना विशेष रूप से अमावस्या के दिन मोक्ष प्राप्ति के लिये महत्वपूर्ण है । ,प्रयाग में माघ मेला हर वर्ष लगता है । ,हर छठवें वर्ष अर्ध कुंभ और बारहवें वर्ष कुंभ लगता है । ,प्रयाग में कुंभ मेला हरिद्वार कुंभ मेले के तीन वर्ष बाद होता है तथा प्रयाग और नासिक के कुंभ मेले में तीन वर्ष का अंतर होता है किंतु नासिक एवं उज्जैन का कुंभ एक ही वर्ष में मनाया जाता है । ,कभी - कभी नासिक का कुंभ उज्जैन से पूर्व हो जाता है । ,कुंभ पर्व चक्र इस प्रकार है । pl,चारों स्थानों के कुंभ पर्वों को ज्योतिषीय गणना तथा स्नान की प्रमुख तिथियों से जोड़ा गया है । ,कुंभ चक्र के बारे में विभिन्न विद्वानों के अलग - अलग मत रहे हैं । ,कुछ विद्वान बारहवें वर्ष ही कुंभ पर्व का होना निश्चित करते हैं । ,दूसरे मत से जब तक ज्योतिषीय योग नहीं बनता तब तक कुंभ का योग नहीं बनता । ,दूसरे ग्रहों का समीकरण शास्त्र सम्मत नहीं हुआ तो ग्यारहवें तथा तेरहवें वर्ष भी कुंभ पर्व हो सकता है । ,बृहस्पति के पश्चगामी प्रभाव के कारण और सूर्य के चारों ओर चक्कर काटने के समय के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है । ,कुंभ पर्व के निर्णय में गुरु की महत्वपूर्ण भूमिका है । ,"काल विभाजन की दृष्टि से 27 नक्षत्र एवं 12 राशियों , नवग्रहों में से 11वीं राशि कुंभ है ।" ,कुंभ जलीय राशि है । ,स्वामी शनि है । ,शनि वायु तत्व है । ,जल और वायु यही तो जलवायु है । ,"सूर्य , पृथ्वी , अग्नि तत्व की प्रधानता तो है ही ।" ,हरिद्वार का कुंभ इसी राशि का द्योतक है । ,देवताओं का एक दिन मनुष्यों के एक वर्ष के बराबर होता है । ,यही कारण है ग्रहव्य स्थिति के क्रमानुसार बारहवें वर्ष में कुंभ पर्व चार स्थानों पर होता है । ,यह पर्व ही मेले का पर्याय है । ,पौराणिक अध्ययन से स्पष्ट होता है कि कुंभ पर्व और गंगा का विशेष संबंध है । ,प्रयाग में तो गंगा है ही । ,नासिक की गोदावरी भी संगम है । ,यह गौतमी के नाम से जानी जाती है । ,क्षिप्रा उस स्थल से पूर्व वाहिनी हो जाती है जहाँ वह एक बार गंगा द्वारा आलिंगित हुई थी । ,विदेशी समाचारों पर रायटर का एकाधिकार था । ,प्रेस ट्रस्ट का गठन समाचार ट्रस्ट के रूप में किया गया । pl,सभी समाचार पत्रों ने इसके शेयर खरीदे । ,समाचार पत्र ही इसकी सेवा के ग्राहक भी थे । ,इस प्रकार इसे निजी प्रभुत्व और विदेशी प्रभाव से मुक्‍त रखा गया । ,यू. पी. आई. को बढ़ावा दिया गया । ,लेकिन यू. पी. आई. का खर्च अधिक और आय कम थी । ,स्वतंत्रता के बाद देश में भारतीय भाषाओं की पहली समाचार सेवा शुरू करने का प्रयास किया गया । ,दिसंबर 1948 में हिन्दुस्तान समाचार के गठन के साथ यह उद्देश्य पूरा हो गया । ,इसकी स्थापना एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में की गई थी । ,1957 में इसे एक सहकारी समिति का रूप दे दिया गया । sg,यह एजेंसी हिंदी के अलावा नौ भारतीय भाषाओं में समाचार देती थी । sg,"यू. पी. आई. की समाप्‍ति के बाद रामनाथ गोयनका के प्रयासों से 1959 में इंडियन न्यूज सर्विस , एक नई समाचार सेवा शुरू की गई ।" ,इसने 1961 में काम शुरू किया लेकिन कुछ ही महीनों बाद इसने अपना काम समेट लिया । ,1959 में ही एक और समाचार एजेंसी शुरू करने का प्रयास किया गया । ,इस कार्य में पश्‍चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. विधान चंद्र राय ने भी गहरी रुचि ली । ,"अक्‍टूबर 1966 में एक और भाषायी समाचार एजेंसी , समाचार भारती की स्थापना पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में की गई ।" pl,सात राज्य सरकारों ने भी इसके शेयर खरीदे । pl,समाचार भारती 14 कार्यालयों और 17 दूरमुद्रक केंद्रों के जरिए प्रतिदिन लगभग 30 हजार शब्दों के समाचार जारी करती थी । ,आपातकाल के दौरान समाचार के प्रचार - प्रसार पर अधिक नियंत्रण लागू करने के लिए सरकार ने देश की दो प्रमुख अंग्रेजी समाचार एजेंसियों पी. टी. आई. और यू. एन. आई. और हिंदी के हिंदुस्थान समाचार और समाचार भारती को मिलाकर एक नई समाचार एजेंसी ’ समाचार ’ का गठन कराया । ,इस प्रकार सभी अंतर्राष्‍ट्रीय और आंतरिक समाचारों पर एक ही समाचार एजेंसी का नियंत्रण हो गया । sg,आपातकाल के बाद जब 1977 में जनता सरकार सत्ता में आई तो उसने ’ समाचार ’ का विघटन करके पूर्व स्थिति बहाल कर दी । ,इस बीच यू. एन. आई. ने मई 1982 में अपनी हिंदी सेवा यूनिवार्ता शुरू की । sg,शीघ्र ही 200 समाचार पत्र इसकी सेवा लेने लगे । ,"आरंभ से ही यूनिवार्ता का ध्येय रहा है : सच्ची खबरें , जल्दी खबरें और आपकी भाषा में खबरें ।" pl,"वार्ता अपनी सेवा में प्रादेशिक , राष्‍ट्रीय , अंतर्राष्‍ट्रीय , अर्थ - वाणिज्य , खेलकूद सभी तरह की खबरें देती है ।" ,यूनिवार्ता इस समय हिंदी की अग्रणी समाचार एजेंसी है । sg,यूनिवार्ता के जन्म के कुछ वर्ष बाद पी. टी. आई. ने भी 1986 में अपनी हिंदी सेवा ’ भाषा ’ नाम से शुरू की । ,’ भाषा ’ के पहले संपादक वेद प्रताप वैदिक थे । ,दुनिया के विभिन्न प्रजातांत्रिक देशों में राजनीतिज्ञों और पत्रकारों के बीच गहरे रिश्‍ते रहे हैं । ,राजनीतिक दलों तथा राजनीतिज्ञों के अपने अखबार भी रहे हैं । ,ब्रिटेन के ’ हाउस ऑफ कॉमन्स ’ में करीब डेढ़ सौ साल पहले छह अखबारों के मालिक सांसद बन गए थे । ,फिर यह संख्या दुगुनी हो गई । ,जनता ने भी 30 - 40 पत्रकारों को चुनकर संसद में भेजा । ,1959 के बाद ब्रिटिश संसद के हर चुनाव में 100 से अधिक उम्मीदवार पत्रकार रहे हैं । ,भारत में राजनीतिज्ञों और पत्रकारों के बीच रिश्‍तों की कोई संहिता आज तक नहीं बन पाई । pl,स्वतंत्रता प्राप्‍ति से पहले और बाद के प्रारंभिक वर्षों में कई नेताओं ने आजादी की अलख जगाने के लिए अखबार निकाले । ,अखबारों की व्यावसायिकता बढ़ने लगी और उसी नजरिए से रिश्‍ते बनते - बिगड़ते रहे । ,कभी राजनीतिज्ञ संपादक का पद पा गए तो कभी अच्छे पत्रकार राजनीतिज्ञ बन गए । ,कुछ लोग इस चक्‍कर में मालिकों और मंत्रियों के बीच कड़ी मात्र बनकर रह गए । ,"चतुर अखबार मालिकों ने ऐसे पत्रकारों का लाभ उठाया , लेकिन राजनीतिक नक्‍शा बदलने पर उन्हें मक्खी की तरह निकाल फेंकने में देरी नहीं की ।" sg,कांग्रेस के बाद सत्ता में आने वाली प्रमुख पार्टी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने भी प्रतिबद्ध पत्रकारिता को महत्वपूर्ण माना । ,राष्‍ट्रवाद के नाम पर अपने पसंदीदा पत्रकारों और अखबारों को सर्वाधिक प्रश्रय दिया गया । ,इस बात की कोशिश होती रही है कि सत्ता की तीखी आलोचना करने वालों को विरोधी नेताओं की तरह यथासंभव दूर रखा जाए । ,राजनीतिज्ञों में सबसे बड़ी बीमारी यह रही है कि वे अपनी हर आलोचना के पीछे षड्‍यंत्र की बू महसूस करने लगते हैं । ,"कांग्रेसी राज में जैसे हर छोटी - बड़ी घटना के लिए सीआईए का हौआ खड़ा कर दिया जाता था , उसी तरह गैर कांग्रेसी राज में धर्मनिरपेक्षता के आदर्शों की बात करने वालों को अपराधी की तरह चित्रित किया जाने लगा ।" ,कुछ नेता अपने गलत काम की आलोचना को तत्काल पूंजीवादी प्रेस के षड्‍यंत्र की संज्ञा देने लगते हैं । ,कोई भी राजनीतिक दल यह दावा नहीं कर सकता कि उसने विभाजक तत्‍वों को भुनाने का प्रयास नहीं किया । pl,पत्रकारिता में भी उसी प्रकार के विभाजक तत्वों को बढ़ावा दिया गया । ,एक तरह से पत्रकारिता तात्कालिक राजनीति से जुड़ गई । ,सैमसंग गैलक्सी नोट में 1280 द् 720 रिजॉल्यूशन और 285 पीपीआई पिक्सल डेंसिटी का 5.3 की सुपर एमोलेड डिस्प्ले है । ,इसे ऐंड्रॉयड 4.2 पर अपग्रेड किया जा सकता है । ,इसमें 1.4 गीगाहर्त्ज ड्यूल - कोर प्रोसेसर और 1 जीबी रैम है । ,16 जीबी इंटरनल स्टोरेज है । ,32 जीबी तक का माइक्रो - एसडी कार्ड सपोर्ट करता है । ,इसमें पीछे की तरफ एलईडी फ्लैश के साथ 8 मेगापिक्सल कैमरा है । ,आगे की तरफ 2 मेगापिक्सल कैमरा है । ,"कनेक्टिविटी ऑप्शंस में 2 जी , 3 जी , वाई - फाई , ब्लूटूथ 3.0 और माइक्रो - यूएसबी शामिल हैं ।" ,2500 माह् की बैटरी 13 घंटे तक का टॉकटाइम देती है । ,इसके साथ स्टाइलस भी है । ,ऑफिस में टेंशन और ईमेल के इस्तेमाल में सीधा रिश्ता है । ,कुछ रिसर्चरों ने अपनी स्टडी में पाया है कि ईमेल पढ़ते या भेजते समय कर्मचारियों के टेंशन में होने की संभावना होती है । ,"इसका पता रिसर्च में शामिल किए गए कर्मचारियों के बढ़े ब्लड प्रेशर , हार्ट बीट और कॉर्टिसोल लेवल से चला ।" ,"ब्रिटेन की लवबरो यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों के मुताबिक उन्होंने जिन कर्मचारियों पर रिसर्च की है , वह उन बेकार के ईमेल मिलने से परेशान हो जाते थे , जिनका उन्हें तुरंत जवाब देना होता था या फिर वह उन्हें काम के बीच डिस्टर्ब करता और काम से उनका ध्यान हटाता था ।" ,वहीं रिसर्च में इस बात का भी पता चला कि समय रहते किसी तरह की जानकारी देने वाला ईमेल मिलने या काम पूरा होने पर आभार जताने वाले ईमेल के मिलने से कर्मचारी खुश होते थे । ,"रिसर्चर टीम के सदस्य प्रोफेसर टॉम जैक्सन , डॉक्टर गिलियन रैग्सडेल और लौरा मारूलैंडा - कार्टर कर्मचारियों पर ईमेल के शारीरिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव के अध्ययन के दौरान इन नतीजों पर पहुंचे ।" ,स्टडी में ईमेल और तनाव के बीच एक सीधा संबंध पाया गया । ,रिसर्चरों ने स्टडी में 30 कर्मचारियों के एक समूह को शामिल किया था । ,"उन्होंने कर्मचारियों के ब्लड प्रेशर , हार्ट बीट और कॉर्टिसोल लेवल की जांच की ।" ,साथ ही कर्मचारियों की डायरियों की भी स्टडी की । ,इन कर्मचारियों ने अपनी डायरियों में भी ईमेल के इस्तेमाल के नुकसान के बारे में लिखा था । ,हालांकि जैक्सन के मुताबिक अगर ईमेल की दूसरे संचार माध्यमों से तुलना करें तो इससे उपजने वाली टेंशन बाकी की तुलना में ज्यादा नहीं है । ,उन्होंने कहा कि ईमेल देखने और भेजने के साथ - साथ दूसरे संचार माध्यमों का इस्तेमाल करने जैसे फोन पर बात करने और किसी से आमने - सामने बात करने जैसे कई काम करने से तनाव बढ़ने की संभावना और बढ़ जाती है । ,नई दिल्ली ,अमेरिकी सरकार अमेरिकी नागरिकों के साथ - साथ आप पर भी नजर रखे हुए है । ,"यूके के अखबार गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक भारत उन टॉप 5 देशों में शामिल है , जिन पर अमेरिकी सरकार की नैशनल सिक्युरिटी एजेंसी ( एनएसए ) पैनी नजर रखती है ।" ,रिपोर्ट के मुताबिक इस साल मार्च में एनएसए ने भारत में कंप्यूटर नेटवर्क्स से 6.3 अरब जानकारियां रिकॉर्ड कीं । ,ईरान 14 अरब जानकारियों के साथ अमेरिका की लिस्ट में पहले नंबर पर है । ,"13.5 अरब जानकारियों के साथ पाकिस्तान दूसरे , 12.7 अरब जानकारियों के साथ जॉर्डन तीसरे और 7.6 अरब जानकारियों के साथ इजिप्ट चौथे नंबर पर है ।" ,अखबार के मुताबिक मार्च 2013 में एजेंसी ने पूरी दुनिया से 97 अरब जानकारियां इकट्ठी कीं । ,इसमें कहा गया है कि एनएसए ने जानकारियों को रिकॉर्ड और ऐनालाइज़ करने का पावरफुल टूल डिवेलप किया है । ,एनएस के डेटामाइनिंग टूल का नाम बाउंडलेस इन्फॉर्मेंट है । ,यह देश के हिसाब से कंप्यूटर और टेलिफोन नेटवर्क से जानकारी हासिल करता है । ,ऐपल के आईफोन 5 को उसके ही घर अमेरिका में सैमसंग के गैलक्सी एस4 ने पिछाड़ दिया है । ,"कैनकॉर्ड जेन्युटी के ऐनालिस्ट माइकल वॉकले के डेटा से पता चलता है कि अमेरिका के 4 टेलिकॉम ऑपरेटरों में से 3 टॉप सेलिंग देश में भले ही स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या लगातार बढ़ रही है , लेकिन ये लोग ऑनलाइन शॉपिंग के लिए शॉपिंग ऐप्स के बजाय वेबसाइट्स पर जाना ज्यादा पसंद करते हैं ।" ,"रिसर्च कंपनी नील्सन के सर्वे के मुताबिक , देश में लगभग 25 फीसदी स्मार्टफोन यूजर्स अपने हैंडसेट पर शॉपिंग एप्स के बजाय ऑनलाइन शॉपिंग करना पसंद करते हैं ।" ,नील्सन का कहना है कि शॉपिंग ऐप्स अभी शुरुआती दौर में हैं और केवल 3 फीसदी स्मार्टफोन यूजर्स इनका इस्तेमाल करते हैं । ,हर चार में से एक स्मार्टफोन यूजर महीने में कम से कम एक बार शॉपिंग वेबसाइट्स को ऐक्सेस करता है । ,सर्वे में फ्लिपकार्ट को सबसे लोकप्रिय शॉपिंग वेबसाइट पाया गया । ,उम्मीद है कि इस साल के अंत तक स्मार्टफोन की बिक्री फीचर फोन को पार कर जाएगी । ,"अगर ऐसा होता है , तो यह पहली बार होगा ।" ,इससे पूरी दुनिया में स्मार्टफोन का दबदबा हो जाएगा । ,"इंटरनैशनल डेटा कॉर्पोरेशन के मुताबिक , इस साल स्मार्टफोन की बिक्री में 33 फीसदी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है ।" ,पिछले साल इसकी बिक्री 72.3 करोड़ यूनिट्स रही थी । ,इंटरनैशनल डेटा कॉर्पोरेशन का कहना है कि कन्ज़यूमर डेटा यूज पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं । ,"साथ ही स्मार्ट फोन भी अलग - अलग कीमत यानी हर रेंज में उपलब्ध है , लिहाजा कन्ज़यूमर की डिमांड बदल रही है ।" ,गैलक्सी एस4 अमेरिका में 26 अप्रैल को लॉन्च किया गया था । ,"मई 2013 में यह टेलिकॉम ऑपरेटर वेरिजोन , स्प्रिन्ट और टी - मोबाइल पर सबसे ज्यादा बिकने वाला फोन था , जबकि एटीऐंडटी पर आईफोन 5 सबसे आगे है ।" ,"अप्रैल में चारों नेटवर्क पर सबसे ज्यादा आईफोन 5 बिका , जबकि एटीऐंडटी और स्प्रिन्ट पर गैलक्सी एस4 दूसरे नंबर पर था ।" ,"रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में मई 2013 में सैमसंग के बाद ऐपल , एचटीसी और नोकिया रहीं ।" ,यह रिसर्च केवल स्टोर सर्वे पर आधारित है और इसमें यूनिट सेल्स शामिल नहीं है । sg,निम्नलिखित सुझावों पर ध्यान देकर सहकारी आन्दोलन को सफल बनाया जा सकता है - ,निजी कोषों के निर्माण व वृद्धि के साथ प्रबन्धन पर जोर दिया जाये । ,सहकारी समितियों की संख्या वृद्धि पर जोर देने के बजाय समितियों के गुणात्मक पक्ष पर अधिक ध्यान देना आवश्यक है । pl,सहकारी शिक्षा व प्रशिक्षण के व्यापक कार्यक्रम चलाये जायें । pl,"निजी स्वार्थ की भावनाओं को दूर करके ईमानदार , विवेकशील व कठोर परिश्रमी नेतृत्व तैयार किये जायें ।" ,सहकारिता के सिद्धान्तों का कड़ाई व सजगतापूर्वक पालन किया जाये । ,महिलाओं में आन्दोलन के प्रति दिलचस्पी पैदा की जाये ताकि वे भी सहकारिता के विकास में भरपूर योगदान कर सकें । ,कृषि साख मुख्यतः उत्पादक कार्यों के लिये दिया जाये तथा कुछ ऋण अनुत्पादक कार्यों के लिये भी दिया जाये । ,सहकारिता कानूनों की जटिलता कम करने के लिये इनके पुनर्मूल्यांकन की तीव्र आवश्यकता है । ,सहकारिता आन्दोलन को सरकारी हस्तक्षेप से मुक्‍त किया जाये । ,सहकारी आन्दोलन के विकास के लिये समुचित नियोजन करना चाहिये । sg,विभिन्न राज्यों में सहकारिता के विकास तथा कार्यों में असन्तुलन की स्थिति को दूर करना चाहिये । ,आन्दोलन का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों तथा आदिवासी क्षेत्रों तक किया जाये । ,"सरकारी संगठनों को चाहिये कि वे सहकारी विपणन , उपभोक्‍ता समितियों निर्यात और आयात व्यापार संगठनों के साथ सहयोगी वृति अपनायें ।" ,समय - समय पर राष्‍ट्रीय एवम् प्रान्तीय सरकारों ने कृषि विपणन दोषों की जानकारी प्राप्‍त करके उनके निवारण के लिये कदम उठाये हैं । ,सर्वप्रथम शाही कृषि आयोग ने सन् 1928 में विपणन प्रणाली में सुधार के लिये जो प्रमुख परामर्श दिये गये हैं वे इस प्रकार हैं - ,प्रशिक्षित कुशल विपणन अधिकारियों की नियुक्‍ति । ,विभिन्न कृषि उत्पादों का विपणन सर्वेक्षण कराना । ,विनियमित मंडियों की स्थापना । ,सबसे पहले कृषि विपणन बाधाओं से छुटकारा पाने के लिए किसानों को यह चाहिए कि वे अपनी सहकारी विपणन समितियाँ संगठित करें । ,"समितियाँ कृषकों को व्यापारियों के शोषण से बचाती हैं , मध्यस्थों के एकाधिपत्य को कम करती हैं और किसानों की सौदेबाजी की शक्‍ति बढ़ाती हैं ।" pl,"वे कृषि उत्पादों के एकत्रीकरण , संग्रहण परिवहन श्रेणीकरण तथा प्रक्रिया की सुविधायें उपलब्ध कराती हैं ।" ,भारतीय प्रशासन के द्वारा जनवरी सन् 1935 में विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय की स्थापना की गयी । ,इस निदेशालय की स्थापना के लिए सन् 1928 में शाही कृषि कमीशन और सन् 1931 में केन्द्रीय बैंकिंग जाँच समिति ने संस्तुति की थी । sg,जुलाई 1958 से निदेशालय का कार्यालय नागपुर से लेकर फरीदाबाद में स्थानान्तरित कर दिया जाता है । ,इस समय यह ग्रामीण पुनर्निर्माण मंत्रालय के अन्तर्गत विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय के रुप में कार्यरत है । ,भारत में कृषि उत्पादनों के आधार पर यातायात की सुविधाओं का विकास किया जाना परम आवश्यक है ताकि कम खर्च पर उत्पाद सामग्री का आवागमन किया जा सके । ,तभी कृषि विपणन व्यय को कम करना सम्भव होगा । ,दूसरा जिस पर ध्यान देना चाहिये वह है ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक ऋतु में काम देने वाली सड़कों के निर्माण तथा गाँव और शहर को जोड़ने वाली सड़कों में प्रगति का तेज दौर चलाना चाहिये । ,साथ ही पर्याप्‍त संख्या में रबड़ टायर वाली हल्की बैलगाड़ियों तथा पैट्रोल या डीजल चालित ट्रकों का प्रबन्ध भी आवश्यक प्रतीत होता है । ,इस वैज्ञानिक युग में बैलगाड़ियों की महत्ता कम नहीं हुई है । ,बैलगाड़ियों पर अधिकांश कृषि विपणन टिका हुआ है । ,द्वितीय पंचवर्षीय योजना में कृषि उत्पादों के मूल्य परिवर्तनों की सूचना की सुविधा उपलब्ध कराने के लिये एक अखिल भारतीय बाजार सेवा की व्यवस्था की गयी है । ,आकाशवाणी से प्रतिदिन मंडियों के कृषि उत्पादों के भाव प्रसारित होते हैं । sg,"दैनिक व साप्‍ताहिक , मासिक पत्रों में बाजार समीक्षा प्रकाशित की जाती है ।" ,इसके लिये ग्राम पंचायतों में रेडियो और दूरदर्शन की व्यवस्था की गई है । ,विभिन्न मंडियों के दैनिक व्यापार के आँकड़े एकत्रित किये जाते हैं और उनका प्रकाशन किया जाता है । ,भारतीय कृषि मजदूरों की स्थिति काफी दयनीय है । ,इन मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी होने के कारण इनका जीवन स्तर काफी निम्न है । ,ये लोग सुबह से लेकर शाम तक खेतों में काम करके दो वक्‍त की रोटी का इन्तजाम करते हैं । ,इनके सामने विभिन्न प्रकार की समस्याएं व्याप्‍त हैं । ,कृषि मजदूर गन्दगी व कीचड़ में दिन बिताता है । ,वह भूखे पेट कार्य करता है और उसे आँधी और धूप में आराम का ज्ञान नहीं है । ,"वह हमारे लिए चावल उत्पन्न करता है , परन्तु खुद भूखा रहता है ।" ,"वह हमारी दुधारू गायों को खिलाता है , परन्तु उसे काँजी व पानी के अतिरिक्‍त कभी कुछ नहीं मिलता ।" ,"वह हमारे गोदामों को आनाजों से भरता है , परन्तु वर्ष भर प्रतिदिन का राशन माँगता है ।" ,वह उनके लिए निरन्तर लकड़ी काटता है और पानी भरता है जो उसके श्रम पर अमीर हुए हैं । ,उसकी दशा दिल दहलाने वाली एक शोचनीय कहानी है । ,गाँवों में सहायक घरेलू उद्योग धंधों का अभाव है । ,मेरा शरीर जिम्मेदारियों को बोझ समझने लगा है । ,दर्द से छलनी हो रहे इस कमजोर तन के सहारे पारिवारिक जिम्मेदारियों की वैतरिणी कैसे पार कर सकूंगी । ,कोई दवा भी काट नहीं कर रही है । ,थककर गिर ना जाऊं डर लगने लगा है अभिनन्दन के पापा । ,सुशील - गीते तुम ना कभी हार मानी हो न मानोगी । ,मुझे विश्वास है । ,तुम कैसे गिर सकती हो तुम्हारे सहारे तो मैं चल रहा हूं । ,मानता हूं तुम दुखी हो । ,दर्द के दरिया में डूबकर भी संयुक्त परिवार को ताकत दे रही हो । ,गीता तुम्हारे त्याग का हमारा खानदान कर्जदार रहेगा । ,तुम जो कर रही हो वह किसी कठोर तपस्या से कम नहीं है । ,गीते - देखो ताड़ पर ना चढाओ गिर पड़ूंगी । ,सुशील - सच्चाई है गीते । ,"गीते - अभिनन्दन के पापा , तुम्हारे अलावा इस परिवार में मुझे कौन समझा है ।" ,मैं मौत के मुंह से निकली हूं तो तुम्हारी वजह से । ,डॉ. विनोद ने गलत आपरेशन कर मार ही डाला था ना । ,मेरे जीवित शरीर का चार - चार बार पोस्टमार्टम हो गया डॉ. विनोद की वजह से । ,फटे बोरे की तरह सिले इस शरीर के सहारे कैसे तपस्या पूरी होगी । ,हमारे बच्चे भी अभी छोटे है ऊपर से परिवार के दूसरे और उनके बच्चों की जिम्मेदारी । ,घर - परिवार के लोग बस लेना जानते हैं । ,तुम्हारी मजबूरी और हमारे दुख को कभी कोई नहीं समझा । ,सबको हमसे अपेक्षा बनी रहती है अपेक्षा पर पूरी तरह मजबूरी में खरा नहीं उतरने पर नाराजगी की बिजली गरजने लगती है । ,मै दिन पर दिन शरीर से अक्षम होती जा रही हूं । ,घुटने शरीर का बोझ उठाने में आना - कानी करने लगे हैं और आंख भी रोशनी समेटने लगी है । ,कैसे जीवन पार होगा ? ,सुशील - साहस की ताकत तुम्हारे पास तो है । ,यही असली ताकत है । ,नारी कभी नहीं हारी है तुम कैसे हार मान सकती हो ? ,मुझे तो यकीन ही नहीं होता । ,नारी परिवार की आत्मा होती है एक नारी की हार में पूरे परिवार की हार है । ,गीते सही मायने में तुम हमारी तीनों शक्ति हो - धन की बल की और ज्ञान की भी । ,कई जन्मों के पुण्य के प्रतिफल स्वरूप तुम हमें अर्धांगिनी के रूप में मिली हो । ,गीते - उल्टा कह रहे हो । ,सुशील - नहीं सच कह रहा हूं । ,दर्द में कराहते हुए भी परिवार के लिये इतना बड़ा त्याग कौन कर सकता है । ,जबकि मतलब के लिये लोग एक दूसरे का हक हड़पने में लगे हैं तुम अपने बच्चों के साथ निःस्वार्थ भाव से कुल का नाम उज्जवल कर रही हो । ,यह कर्म तुम्हें दैवीय प्रतिष्ठा प्रदान करता है पर लोग समझे तब ना । ,यहां तो हमारे बाप ही नहीं समझ रहे हैं तो परिवार के और सदस्यों की क्या बात करूं ? ,गीते - ससुर जी तो सासू मां को नहीं समझे तो हमें कहां से समझेगें ? ,बेचारी सासू मां असमय साथ छोड गयी । ,थी तो निरक्षर पर पढे - लिखों को सबक सिखाती थी । ,दुखी नर को नारायण समझकर सेवा करती थी तंगी की हालत में भी । ,"हमें तो चैन से नहाने खाने भर को तो है , हम क्यों पीछे रहें ?" ,सुशील - भूल गयी ना तू अपने दर्द को । ,चल पड़ी ना त्याग के रास्ते । ,तुम त्याग के रास्ते से दर्द के रोड़े को उखाड़ फेकोगी । ,गीते - तुम साथ हो तो कोई रोड़ा टिक भी कैसे सकता है । ,सुशील - गीते अपने त्याग का सेहरा मेरे माथे मत बांधो । ,गीते - तुम्हारे सिवाय हमारा क्या ? ,स्वार्थ परिवार में दरार पैदा करता है । ,यह मैं नहीं चाहती । ,जब तक आँखों में ज्योति और घुटने में तन का बोझ उठाने की ताकत है परिवार के लिये जीऊंगी । ,सुशील - गीते दर्द में झटपटाते हुए जीवन यापन करते हुए भी परिवार के लिये यही तुम्हारा त्याग मेरी असली सफलता है । ,सच नारी के इस भाव को देखकर कवि ने कहा है - जहां नारी की पूजा वहीं भगवान विराजित हैं । ,सच गीते परिवार के लोग भले ना माने मैं तुम्हारे समर्पण भाव को नमन करता हूं । ,गीते - नरक का भागीदार मत बनाओ । ,सुशील - कैसे ? ,गीते - पति परमेश्वर भला ऐसी बात करेंगे तो स्वर्ग का द्वार खुलेगा क्या ? ,"सुशील - गीते तुम जैसी गृहस्थ तपस्विनी के सामने भगवान तक को हाजिर होना पड़ा है , इतिहास गवाह है ।" ,गीते - अभिनन्दन के पापा तुम्हारे साथ की छांव में दर्द का एहसास कैसे हो सकता है । ,सुशील - इतना बड़ा मान ना दो मुझे । ,हर दुख - सुख में हम बराबर के भागीदार हैं । ,हां मुझे भी दर्द हुआ है जब अपने मुसीबत के दौर में आंखें तरेरे हैं । ,इस दर्द से कभी नहीं उबर पाउंगा । ,मैं शहर की गलियों में पागलों जैसा रोजगार की तलाश में भटक रहा था । ,तुम्हें मेरे बाप के कड़वे शब्द सुनने को मिल रहे थे । ,अरे तुम मेरी बेरोजगारी के लिये जिम्मेदार तो ना थी । ,सही मायने में मेरे बाप ही मेरी मुश्किलों का कारण रहे । ,कम उम्र में ब्याह नहीं करते तो परिवार का बोझ तो नहीं बढ़ता ना । ,जब मैं अपने पैर पर खड़ा हो जाता तो ब्याह करते तो । ,मुझे भी आसानी होती पर नहीं उन्हें तो अपनी नाक ऊँची करनी थी । ,इस नाक की ऊँचाई में भले ही बेटे का जीवन बर्बाद हो जाये परवाह नहीं । ,गीते - बाबूजी को कोसने से क्या फायदा । ,मां - बाप बच्चों के भले के लिये करते हैं । ,पुरानी सोच में बंधकर किया जाने वाला काम फायदेमंद नहीं साबित होता । ,इस बात पर मैं भी सहमत हूं । ,सुशील - बात सहमति असहमति की नहीं है । ,बात है समय के साथ चलने की । ,आज भी अपनी जिद पर अड़े रहते हैं । ,पिताजी की वजह से मां को कितनी मुश्किलें झेलनी पड़ीं । ,बेचारी असमय चल बसी । ,पिताजी हैं कि नाक की सीध में चलने के अलावा और कुछ नहीं सीखे । ,नशा से तो ऐसा नाता है जैसे भूखे का रोटी से । ,रोटी की चिन्ता नहीं है । ,घर परिवार की चिन्ता नहीं है । ,वे अपनी जिद को पूरा करने के लिये हर नुस्खा अजमा लेते हैं । ,गीते - बाबूजी की अच्छाई को देखो । ,"संयुक्त परिवार की विरासत को जिस तरह से बचाये रखा है , पूरे गांव में वैसा किसी ने नहीं किया है ।" ,सुशील - फायदा क्या हुआ ? ,हम भाई - बहनों का हक उन लोगों पर कुर्बान हो गया जो लोग आज दुश्मन बन बैठे हैं । ,गीते - सभी अपने नसीब का खाते हैं । ,मान भी लें तुम - भाई बहनों का हक तुम्हारे चाचा - ताऊ के बच्चों में बंट भी गया तो क्या हुआ अपने ही तो वे भी हैं । ,तुम्हारे पिताजी उनके भी तो अपने हैं । ,"तुम को चाचा - ताऊ , चाची - ताई , नाना - नानी , मामा - मामी , फुआ - फूफा और कुटुम्ब संबधियों का जो प्यार मिला वह प्यार आज की पीढ़ी को नहीं मिल रहा है ।" ,"एकल परिवार में भले ही भर पेट रोटी मिले , शान - शौकत रहे पर संयुक्त परिवार वाला सुख कभी नहीं मिल सकता ।" ,मुझे खुशी है कि तुम भी संयुक्त परिवार की राह में मील का पत्थर साबित हो रहे हो । ,तुम्हारा त्याग व्यर्थ नहीं जायेगा । ,तुम्हारे त्याग को तुम्हारे भतीजे - भतीजियां समझेंगे । ,मुझे तुम पर नाज है कि तुम अपने पिताजी की नशापान वाली बुराई का त्याग कर दिये हो पर एक अच्छाई को अपनाये हो । ,यह तुम्हारा बहुत बड़ा त्याग है लाख कष्ट उठाकर । ,सुशील - अब कौन सा तीर चला रही हो भागवान । ,बात तुम्हारे त्याग से शुरू हुई थी तुम श्रेय का सेहरा मेरे सिर बांध रही हो । ,परिवार को गृहलक्ष्मियां अमरता प्रदान करती हैं । ,गीते - बात नहीं बना रही हूं सही कह रही हूं । ,संयुक्त परिवार को जीवित रखने के लिये तुम त्याग कर रहे । ,सुशील - क्या तुम्हारे बिना सहयोग के कुछ सम्भव है ? ,आज की दुल्हन आते अपना चूल्हा रोप लेती है । ,तुम बेटी दमाद वाली होकर भी सास - ससुर के कपड़े धो लेती हो । ,देवर - देवरानी का भाई - बहन की तरह ध्यान रखती हो । ,भतीजे - भतीजियों को अपना बेटा - बेटी समझती हो । ,क्या यह त्याग कम है संयुक्त परिवार को जीवित रखने के लिये । ,गीते - तुम्हारी तरह और भी लोग सोचने लगे तो संयुक्त परिवार कभी टूटे नहीं । ,देखो न मंदी का दौर दुनिया को हिलाकर रख दिया । ,इसकी जड़ में संयुक्त परिवार का हाथ है जिसकी वजह से छोटी - छोटी बचत के महत्व को समझा गया । ,सुशील - ठीक कह रही हो संयुक्त परिवार में दुख कम सुख अधिक है लेकिन आज के दौर में तो ग्रहण लगने लगा है । ,शहर की बात छोड़ो गांव में भी संयुक्त परिवार बिखरने लगा है । ,"ना जाने कौन सी ऐसी बयार चल पड़ी है कि बस खुद के परिवार को छोड़कर सारे बेगाने होते जा रहे हैं , यहां तक कि मां बाप भी ।" ,जबकि संयुक्त परिवार सुख का सागर है और दुख के लिये लुकमान । ,गीते - आज के लोग ज्यादा स्वार्थी हो गये हैं । ,"पहले अपना पेट भरने की ललक है , दूसरे भले ही भूख से मर जायें इसकी चिन्ता नहीं ।" ,"मेरी मां ताऊजी के तीनों बच्चों को हम चारों भाई बहनों की तरह ही पाली , जबकि हमारे पिताजी तो सरकारी मुलाजिम थे ।" ,मेरी मां के मन में कभी कोई विकार नहीं पनपा ना किसी प्रकार का भेद । ,ताई आराम की बंसी बजाती रहती थी । ,मेरे मां बाप के मरते ही सब कुछ बिखर गया । ,पुराने लोगों में परिवार को साथ लेकर चलने की कला आती थी । ,आज बस दिखावा है । ,अरे जरूरत पड़े तो खून भी पी लें । ,देखो ताऊजी के बेटे अपना कमा खा रहे हैं । ,बेचारे ताऊ दो चूल्हों के बीच रोटी के लिये टुकुर - टुकुर ताकते रहते हैं । ,सुशील - ये सब पाश्चात्य संस्कृति की नकल है । ,यही नकल हमारे देश की संस्कृति को वनवास दे रही है । ,हमारे देश के लोग अपनी विरासत बचाने में गौरव नहीं महसूस कर रहे हैं पश्चिमी खान - पान रहन - सहन को स्टेटस सिम्बल से जोड़कर देख रहे हैं । ,"जबकि अपने देश के लोग भी जानते हैं पश्चिमी सभ्यता में माम - डैड , ब्रदर - सिस्टर और आंटी - अंकल के अलावा कोई रिश्ता नहीं होता ।" ,"हमारे यहां मां - बाप , भाई - बहन , फुआ - फूफा , चाचा - चाची , दादा - दादी मौसा - मौसी , मामा - मामी और बहुत सारे पवित्र रिश्ते हैं पर ये रिश्ते नहीं पश्चिमी रिश्ते मॉम - डैड ज्यादा अच्छे और आधुनिक लगने लगे हैं ।" ,गीते - ठीक कह रहे ऐसी सोच अपनी संस्कृति सभ्यता और मानवतावादी परम्परा के साथ न्याय कहां कर सकती है । ,सुशील - पश्चिमी संस्कृति की नकल महामारी है । ,गीते - इस महामारी से बचने के लिये नई पौध को संयुक्त परिवार की विशेषताओं से परिचय करना होगा । ,"उन्हें दादा - दादी , नाना - नानी के सानिध्य में दीक्षित करना होगा तभी देश की आन संयुक्त परिवार बचा सकती है ।" ,सुशील - सभी तो शहर की तरफ भाग रहे हैं । ,गीते - परदेस तो लोग पहले भी जाते थे । ,"बात ये नहीं है बात ये है कि आज की जरूरत के अनुसार स्कूल कालेज गांव स्तर पर होगें तो नौकरीपेशा मां - बाप बच्चों को दादा - दादी , नाना - नानी की देखरेख में पढ़ा लिखा तो सकते हैं ।" ,दुर्भाग्यबस आज के इस युग में भी गांव की पहुंच से बहुत दूर सुविधायें हैं । ,बच्चों के भविष्य की चिन्ता में मां - बाप शहर की ओर भाग रहे हैं और संयुक्त परिवार टूट रहा है । ,ऐसा नहीं कि इसे बचाया नहीं जा सकता है बचाया जा सकता है । ,सुशील - वो कैसे ? ,गीते - तनिक अपनी जरूरतों को सीमित करना होगा । ,"सगे - सम्बन्धियों के बारे में सोचना होगा , अपनी जन्मभूमि के प्रति कर्तव्य के बारे में सोचना होगा ।" ,यही पाठ अपने बच्चों को अपने स्तर पर पढ़ाना होगा और यह सब बिना त्याग के नहीं हो सकता । ,अरे हम भी तो आज के जमाने के लोग हैं ना । ,संयुक्त परिवार को सींच रहे हैं कि नहीं । ,साल भर में दो बार गांव जाते हैं । ,पूरे कुटुम्ब की फिक्र करते हैं । ,अपनी कमाई से जो हो सकता है सभी के लिये साबुन तेल से लेकर कपड़ा लत्ता तक करते हो । ,समय - समय पर मनिआर्डर भी करते हो क्योंकि गांव में जो लोग हैं उनसे गहरा नाता है । ,सुशील - बात तो सही है पर सभी परदेसी ऐसा सोचे तब ना । ,देखने में तो यहां तक आ रहा है कि शहर की हवा लगते ही गांव की जमीन जायदाद बेचकर शहर बस जा रहे हैं । ,जबकि शहर में पड़ोसी भी नहीं पहचानता । ,मरने पर किराये के लोग ढूढें जाते हैं । ,कंधा देने वाला कोई नहीं मिलता । ,दुख तकलीफ में कौन किसको पूछता है । ,गांव में तो दुख - तकलीफ में लोग टूट पड़ते हैं । ,अपनापन सिर चढकर बोलता । ,यह संयुक्त परिवार की देन है । ,अभी भी संयुक्त परिवार का असर देश की धड़कन में बसा है । ,जरूरत है थोड़े से स्वहितों में कटौती कर परिवारजनों पर न्यौछावर करने की । ,गीते - जैसा मेरे मां - बाप और सास - ससुर ने त्याग किया । ,काश ऐसा सभी करने लगें तो मरणासन्न अवस्था में पड़ी संयुक्त परिवार की परम्परा को संजीवनी मिल जाती । ,मैं तकलीफ उठाकर भी संयुक्त परिवार को सींचती रहूंगी भले ही परिवारजनों ने मेरे साथ बदसलूकी की हो । ,"मैं सारी गलतियों को भुलाकर अच्छाईयों को याद रखूंगी क्योंकि संयुक्त परिवार में मान है सम्मान है , सुदृढ पहचान है , कई जोड़ी लाठियों की ताकत , पारिवारिक सुख - समृद्धि का आनन्द , आत्मिक सकून भी तो है संयुक्त परिवार में ।" ,हम इसे टूटने नहीं देगें । ,सुशील - त्याग से ही संयुक्त परिवार का हमारा सपना संवर सकता है । ,हम तुम्हारे साथ हैं गीते । ,शुक्रवार से तीन दिन पहले दीवाली के दिन मंगलवार को रिलीज हुई ' जब तक है जान ' और ' सन ऑफ सरदार ' को लेकर ट्रेड पंडितों में कोई आशंका नहीं थी । ,शुरू से ही अनुमान लगाया जा रहा था कि दोनों फिल्में चलेंगी । ,"हां , इस पर मतभेद था कि कौन सी फिल्म ज्यादा चलेगी ।" ,लगाव और स्टार वैल्यू के हिसाब से कयास लगाए जा रहे थे । ,कभी जब तक है जान का पलड़ा भारी हो जाता था तो कभी सन ऑफ सरदार का NULL । ,यश चोपड़ा के अकस्मात निधन से जब तक है जान के प्रति श्रद्धा की लहर की बड़ी उम्मीद थी । ,साथ ही यह बताया जा रहा था कि शाहरुख खान लंबे समय के बाद रोमांटिक रोल में आ रहे हैं । ,ऊपर से कट्रीना कैफ और अनुष्का शर्मा भी रहेंगी । ,अनुमान सही निकला । ,पहले दिन से ही ' जब तक है जान ' ने बढ़त बना ली । ,छह दिनों के पहले हफ्ते में ' जब तक है जान ' ने लगभग 81 करोड़ का कलेक्शन किया । ,अगर ओवरसीज का 41.5 करोड़ जोड़ दिया जाए तो ' जब तक है जान ' 88 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है । ,दूसरी तरफ ' सन ऑफ सरदार ' प्योर एंटरटेनर मानी जा रही थी । ,अजय देवगन कॉमेडी और एक्शन दोनों तरह की फिल्मों में दर्शकों की पसंद बने हुए हैं । ,उनके साथ सोनाक्षी सिन्हा भी थीं । ,इस फिल्म ने भी अनुमान के मुताबिक दर्शकों को आकर्षित किया । ,इसने पहले हफ्ते में 66 करोड़ का क्लेक्शन किया । ,उल्लेखनीय है कि ' सन आफ सरदार ' के 500 कम प्रिंट थे । ,ढेर सारे सिंगल स्क्रीन उसे मिल भी नहीं पाए थे । ,दोनों फिल्मों की पसंदगी और कारोबार ने साबित किया कि दर्शक चाहें तो एक ही हफ्ते में रिलीज हुई दो बड़ी फिल्मों को भी हिट कर सकते हैं । ,"एक तो दीवाली का त्योहार , लंबी छुट्टी और दोनों फिल्मों को लेकर चला मीडिया घमासान कुल मिला कर नतीजा यह रहा कि दर्शक सिनेमाघरों में जाने को विवश हुए ।" ,अनोखी बात यह है कि ज्यादातर दर्शकों ने दोनों फिल्में देखीं । ,दीवाली पर रिलीज हुई फिल्म जब तक है जान और सन ऑफ सरदार के बीच बॉक्स ऑफिस में कांटे की टक्कर चल रही है । ,रिलीज से पहले माना जा रहा था कि दोनों फिल्मों के बीच मुकाबला एक तरफा हो सकता है । ,दोनों फिल्में बिजनेस के मामले में 100 करोड़ रुपए के आंकड़े के करीब हैं । ,"ट्रेडर्स के मुताबिक , ये दोनों फिल्में 100 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर सकती हैं ।" ,"जब तक है जान ने पहले छह दिन में 80 करोड़ का कारोबार किया है , वहीं सन ऑफ सरदार ने 66 करोड़ का कारोबार किया है ।" ,"फिल्म आलोचक आमोद मेहरा का कहना है कि पहले दो दिन दोनों फिल्मों के लिए सामान्य रहे , लेकिन बाद में इन फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर रफ्तार पकड़ी ।" ,उन्होंने कहा कि हो सकता है कि दोनों फिल्में कमाई के मोर्चे पर 100 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर लें । ,लेकिन इसके बाद 150 करोड़ या 200 करोड़ रुपए की कमाई के आंकड़े इन दोनों फिल्मों के बीच चल रहे मुकाबले का सही फैसला करेंगे । ,"उत्तरी राज्यों में सन ऑफ सरदार को ज्यादा पसंद किया गया , जबकि बाहरी मुल्कों में शाहरुख का जादू एक बार फिर चला ।" ,शाहरुख खान ने जब तक है जान में अपनी अदायगी से साफ कर दिया कि वह बॉलीवुड के बादशाह हैं । ,"ट्रेड गुरू अतुल मोहन ने बताया कि अगर हम औसत कमाई , टिकट के दाम और इसे देखने आने वाले लोगों की संख्या ( फुटफॉल ) की बात करें तो अजय देवगन की सन ऑफ सरदार लंबी अवधि में शाहरुख की जब तक है जान से कुछ आगे निकल सकती है ।" ,ऐसे में अजय देवगन के लिए सन ऑफ सरदार बड़ी हिट साबित हो सकती है । ,"हालांकि , पिछले दो दिनों में इन फिल्मों को 6 - 7 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ होगा , क्योंकि बाला साहेब ठाकरे की मौत के चलते इस दौरान थिएटर बंद थे ।" ,दीवाली के दिन रिलीज हुई दो बड़े बजट की फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया है । ,इन फिल्मों की कमाई की अगर बात की जाए तो दोनों फिल्में उम्मीद के मुताबिक एक दूसरे को कड़ी टक्कर दे रही हैं । ,यश चोपड़ा की आखिरी फिल्म जब तक है जान ने पहले दिन 15 करोड़ से ज्यादा का कारोबार किया । ,"वहीं , अजय देवगन स्टारर सन ऑफ सरदार ने रिलीज के दिन 10 करोड़ से ज्यादा कमाई की ।" ,त्योहार पर रिलीज दोनों फिल्मों ने देश विदेश में अच्छा प्रदर्शन किया है । ,उम्मीद की जा रही है कि दोनों फिल्में पहले हफ्ते में 100 करोड़ का बिजनेस कर लेंगी । ,ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक यह दीवाली बॉलीवुड के लिए शानदार रही । ,सलमान खान की अतिथि भूमिका वाली सन ऑफ सरदार मास सर्किट में आगे है जबकि मल्टीप्लेक्सों में जब तक है जान का जलवा है । ,तरण आदर्श का कहना है रिलीज के दूसरे दिन भी फिल्मों ने जबरदस्त बिजनेस किया और अब कमाई का आकड़ा पहले दिन से भी आगे बढ़ने के आसार हैं । ,सन ऑफ सरदार ने पाकिस्तान में इतिहास रच दिया है । ,इस फिल्म में पाकिस्तान में पहले दिन 42 हजार डॉलर का कलेक्शन किया है । ,पाकिस्तान में किसी भारतीय फिल्म की यह अब तक की सबसे बड़ी ओपनिंग है । ,वहीं दूसरी तरफ बॉक्स ऑफिस पर शाहरुख की फिल्म ने रिलीज के पहले दिन 15.23 करोड़ की कमाई की । ,यह शाहरुख की अब तक की सबसे बड़ी ओपनर रही है । ,अजय देवगन की फिल्म का पहले दिन का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 10.72 करोड़ रुपये रहा है । ,यशराज फिल्म्स के बैनर तले बनी जब तक है जान करीब 2500 स्क्रीन्स पर जबकि सन ऑफ सरदार करीब दो हजार स्क्रीन्स पर दिखाई जा रही है । ,"इया , चटगांव और भूत रिटर्न्स पिछले हफ्ते रिलीज हुई तीनों फिल्मों को दर्शकों ने नकार दिया है ।" ,रविवार को कलेक्शन दोगुना होकर साढ़े पांच करोड़ हो गया । ,सुजॉय घोष और विद्या बालन की बड़ी कामयाबी के तौर पर इस फिल्म को देखा जाना चाहिए । ,इरफान की पान सिंह तोमर के दर्शक अभी तक बने हुए हैं । ,"दूसरे हफ्ते में भी सीमित प्रिंट के साथ चल रही इस फिल्म का कलेक्शन संतोषजनक रहा , जबकि लंदन पेरिस न्यूयार्क थिएटरों से निकलती नजर आई ।" ,पिछले हफ्ते रिलीज हुई अनु मेनन निर्देशित लंदन पेरिस न्यूयार्क और तिग्मांशु धूलिया निर्देशित पान सिंह तोमर की बॉक्स आफिस पर मजेदार दौड़ रही । ,शुक्रवार के पहले से ही लंदन पेरिस न्यूयार्क की हवा बह रही थी । ,फिल्म इंडस्ट्री की चर्चित हस्तियों फिल्म की तारीफ कर रही थीं । ,पान सिंह तोमर का कोई नाम नहीं ले रहा था । ,पता तो यह भी चला है कि यूटीवी इस फिल्म को केवल डीवीडी पर रिलीज करने की प्लानिंग कर रहा था । ,पहले दिन लंदन पेरिस न्यूयार्क का कलेक्शन ज्यादा रहा । ,"इस फिल्म ने 1 करोड़ से अधिक कलेक्ट किया , जबकि पान सिंह तोमर का कलेक्शन केवल 85 लाख रहा ।" ,शनिवार को पान सिंह तोमर के दर्शक बढ़े । ,और रविवार को कलेक्शन बढ़ कर ढाई गुना हो गया । ,दर्शकों ने इसे पसंद कर लिया है । ,वीकएंड कलेक्शन की बात करें ,पान सिंह तोमर का आंकड़ा लगभग 20 लाख ज्यादा रहा । ,माना जा रहा है कि पान सिंह तोमर अंतिम योग में लंदन पेरिस न्यूयार्क से बहुत आगे निकल जाएगी । ,पिछले हफ्ते रिलीज हुई जोड़ी ब्रेकर्स और तेरे नाल लव हो गया में एक समानता थी कि दोनों रोमांटिक कामेडी फिल्में थीं । ,एक में अनोखी जोड़ी थी बिपाश बसु और आर माधवन की और दूसरी में रियल जोड़ी थी । ,बॉक्स आफिस पर दोनों फिल्मों को समान रेस्पांस मिला । ,कहीं जोड़ी ब्रेकर्स आगे रही तो कहीं तेरे नाल लव हो गया NULL । ,दोनों फिल्मों में उन्नीस - बीस का ही अंतर रहा । ,ट्रेड पंडितों के मुताबिक अगर दोनों फिल्में एक साथ रिलीज नहीं होतीं तो उन्हें अच्छा बिजनेस मिल सकता था । ,पहले दिन दोनों ही फिल्मों का कलेक्शन दो करोड़ से नीचे रहा । ,इसका मतलब है कि तमाम प्रचार के बावजूद दर्शक दोनों ही फिल्मों को देखने नहीं गए । ,गौतम मेनन की तमिल और तेलुगू की हिट फिल्म हिंदी में आकर फ्लॉप हो गई । ,दोष गौतम मेनन का नहीं है । ,उन्होंने तो अपनी फिल्म को जस का तस हिंदी में उतारा । ,"प्रतीक और एमी जैक्सन की जोड़ी ही बेमेल नहीं थी , वे अपने रोल में मिसफिट रहे ।" ,इस फिल्म को पहले दिन से लेकर तीसरे दिन तक लगभग 1 करोड़ का कलेक्शन मिला । ,शहरी दर्शकों को भी नहीं भाए प्रतीक । ,सिंगल स्क्रीन के दर्शकों ने पहले ही किनारा कर लिया था । ,अगर यह फिल्म हफ्ते भर टिकी रह गई तो बड़ी बात होगी । ,पिछले हफ्ते रिलीज करण जौहर की शकुन बत्रा निर्देशित एक मैं और एक तू मल्टीप्लेक्स के शहरी दर्शकों ने अधिक पसंद किया । ,"शुक्रवार को इस फिल्म को उत्साहजनक ओपनिंग नहीं मिली थी , लेकिन शनिवार और रविवार को इस फिल्म के दर्शक बढ़ते गए ।" ,वीकएंड में इस फिल्म का कारोबार 21 करोड़ से अधिक रहा । ,इमरान खान की फिल्म के लिए यह कलेक्शन ठीक है । ,"मजेदार तथ्य है कि यह फिल्म देश के भीतरी भागों में नहीं चली है , जबकि मुंबई , दिल्ली , कोलकाता और पंजाब में दर्शकों ने इसे पसंद किया ।" ,रूमी जाफरी की फिल्म गली गली चोर है को दर्शकों ने ज्यादा पसंद नहीं किया । ,भ्रष्टाचार का मुद्दा अपील नहीं कर पाया । ,महानगरों और मल्टीप्लेक्स के दर्शकों को भोपाल शहर के एक बैंक कैशियर की परेशानी से कोई सहानुभूति नहीं हुई । ,"यह फिल्म सिंगल स्क्रीन में थोड़ा - बहुत व्यवसाय कर सकी , लेकिन वह भी उल्लेखनीय नहीं है ।" ,पिछले हफ्ते भी अग्निपथ का ही जोर रहा है । ,फिल्म अभी तक दर्शकों को आकर्षित कर रही है । ,निर्माता करण जौहर और निर्देशक करण मल्होत्रा की अग्निपथ ने पहले दिन दर्शकों को थिएटर में खींचा । ,प्रोमोशन से इस फिल्म के प्रति बढ़ी जिज्ञासा कलेक्शन के रूप में सामने आई । ,पहले दिन का कारोबार 23 करोड़ रहा । ,उस दिन गणतंत्र दिवस की छुट्टी भी थी । ,"अगले दिन शुक्रवार को कलेक्शन में 30 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई , जो शनिवार - रविवार को भी अधिक नहीं संभल सकी ।" ,"अनुमान था कि अग्निपथ का वीकएंड कलेक्शन 75 करोड़ के लगभग होगा , लेकिन सप्ताह के अंत तक दर्शकों की रुचि नहीं बने रहने से कलेक्शन 67 करोड़ के आसपास ठहर गया ।" ,फिर भी उम्मीद है कि अग्निपथ 100 करोड़ क्लब में शामिल हो जाएगी । ,"फुफ्फुस की परीक्षा , करने पर विशेष लक्षण नहीं मिलते ।" ,"किंतु छाती ठोंकने पर विशेष ध्वनि , जिसे अंग्रेजी में राल कहते हैं , मिल सकती है ।" sg,"इस रोग का आंत्रिक रूप भी पाया जाता है जिसमें रक्तयुक्त अतिसार , वमन , जी मिचलना और ज्वर होता है ।" ,रोग के अन्य उपद्रव भी हो सकते हैं । ,स्वस्थ बालकों और युवाओं में रोगमुक्ति की बहुत कुछ संभावना होती है । ,रोगी थोड़े ही समय में पूर्ण स्वास्थ्यलाभ कर लेता है । ,"अस्वस्थ , अन्य रोगों से पीड़ित , दुर्बल तथा वृद्ध व्यक्तियों में इतना पूर्ण और शीघ्र स्वास्थ्यलाभ नहीं होता ।" ,उनमें फुफ्फुस संबंधी अन्य रोग उत्पन्न हो सकते हैं । ,महामारी के समय अधिक मनुष्यों का एक स्थान पर एकत्र होना अनुचित है । ,ऐसे स्थान में जाना रोग का आह्वान करना है । ,गले को पोटास परमैंगनेट के 1 : 4000 के घोल से प्रातः सायं दोनों समय गरारा करके स्वच्छ करते रहना आवश्यक है । ,इनफ्लूएँजा वायरस के वैक्सीन का इंजेक्शन लेना उत्तम है । ,इससे रोग की प्रवृत्ति कम हो जाती है । ,दो से लेकर 12 महीने तक यह क्षमता बनी रहती है । ,किंतु यह क्षमता निश्चित या विश्वसनीय नहीं है । ,वैक्सीन लिए हुए व्यक्तियों को भी रोग हो सकता है । ,इस रोग की कोई विशेष चिकित्सा अभी तक ज्ञात नहीं हुई है । ,चिकित्सा लक्षणों के अनुसार होती है और उसका मुख्य उद्देश्य रोगी के बल का संरक्षण होता है । ,जब किसी अन्य संक्रमण का भी प्रवेश हो गया हो तभी सल्फा तथा जीवाणुद्वेषी ( ऐंटिबायोटिक ) औषधियों का प्रयोग करना चाहिए । ,"ये मच्छर आमतौर पर 350 उत्तर तथा 350 दक्षिण अक्षांस पर , 1000 मीटर से कम ऊंचाई पर होते हैं ।" ,ये अधिकतर दिन के समय काटते हैं । ,इनके एक बार काटने से भी मानव संक्रमित हो सकता है । ,कभी - कभार मच्छरों को भी मानवों से डेंगू मिल सकता है । ,यदि मादा मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति को काट ले तो मच्छर को डेंगू वायरस मिल सकता है । ,सबसे पहले वायरस उन कोशिकाओं में रहता है जो मच्छर के पेट में होती हैं । ,"लगभग 8 से 10 दिनों के बाद वायरस , मच्छर की लार ग्रंथियां जो लार ( या "" थूक "" ) बनाती हैं , उनमें संक्रमित हो जाते हैं ।" ,इसका अर्थ है मच्छर द्वारा बनायी गयी लार डेंगू के वायरस से संक्रमित होती है । sg,इसलिये जब मच्छर मानव को काटते हैं तो इनकी संक्रमित लार मानव को संक्रमित कर सकती है । ,"वायरस उन संक्रमित मच्छरों के लिये कोई समस्या पैदा नहीं करते दिखते हैं , जो अपने पूरे जीवन भर संक्रमित रहेंगे ।" ,"इस बात की संभावना सबसे अधिक होती है कि "" एडीज़ आएजेप्टी "" मच्छर डेंगू फैलाता है ।" ,ऐसा इसलिये कि क्योंकि ये मानवों के सबसे अधिक नज़दीक रहते हैं और जानवरों की बजाय मानवों पर जीते हैं । ,यह मानव - निर्मित पानी रखने के पात्रों में अंडे देना पसंद करते हैं । ,डेंगू संक्रमित रक्त उत्पादों तथा अंग दान द्वारा फैल सकता है । ,"यदि डेंगू से संक्रमित व्यक्ति रक्त दान या अंग दान करता है , जो किसी अन्य व्यक्ति को दिया जाता है , इस व्यक्ति को दान दिये गये रक्त या अंग से डेंगू हो सकता है ।" ,कुछ देशों जैसे सिंगापुर में डेंगू आम है । ,"इन देशों में , 10,000 रक्त आधानों में से 1.6 से 6 तक डेंगू फैलाते हैं ।" ,गर्भावस्था के दौरान या बच्चे को जन्म देते समय डेंगू वायरस माँ से बच्चे में भी फैल सकता है । ,डेंगू आमतौर पर किन्ही और तरीकों से नहीं फैलता है । ,डेंगू से पीड़ित वयस्कों से अधिक शिशुओं तथा बच्चों में बीमारी की गंभीरता होने की अधिक संभावना होती है । ,बलवीर काका खुद तो अल्पशिक्षित थे पर पढ़ाई के महत्व को अधिक और बहुत बारीकी से समझते और दूसरों को भी समझाते थे । ,बलवीर बेटा रोहन को पढ़ाने लिखाने में तनिक भी कसर नहीं छोड़े । ,वे खुद तकलीफ उठा लेते पर बेटे की तकलीफें उनके कान को स्पर्श तक नहीं कर पाती थीं । ,खुद तकलीफ के बोझ तले दबे रहने के बाद भी बलवीर दुःख की परछाईं बेटे तक नहीं पहुंचने देते थे । ,बलवीर खुद फटे पुराने कपड़े पहनते पर रोहन के लिये नये कपड़ों की कमी नहीं पड़ने देते । ,हर त्यौहार पर कपड़े लाते और जन्म दिन के लिये तो पूरा दूल्हे जैसे कपड़े जूते मोजे तक खुद खरीद कर लाते । ,कस्तूरी काकी मना करती तो कहते तुमको नहीं मालूम मैंने कितने बुरे दिन देखे हैं । ,शहर की सड़कों पर कई रातें फांके में काटी हैं । ,तन ढकने के लिये पुराने बीस - पच्चीस रूपये में कपड़े खरीद कर पहने हैं । ,भगवान ने मुझे अच्छे दिन दिखा दिये हैं तो मैं अपने बेटे बेटी को वह सारा सुख दूंगा जिससे मैं वंचित रह गया रोहन की मां । ,"कस्तूरी काकी कहती अरे मैं तो मना नहीं कर रही हूं तुमको कि बच्चों की पढाई - लिखाई , खान - खर्च , कपड़े - लत्ते में कंजूसी बरतो ।" ,मैं तो बस इतना कह रही हूं कि साल में कम से कम एक जोड़ा अच्छे कपड़े तो खुद के लिये भी बनवा लिया करो । ,बेटवा के खर्चे में कमी मत करो पर अपना भी तो ध्यान रखा करो । ,तुम्हारे साथ रहकर मैं निरक्षर पढाई के महत्व को समझ गयी हूं । ,मैं भी चाहती हूं कि मेरा बेटा और बिटिया पढ़ लिखकर हमारा तुम्हारा ही नहीं गांव और देश का नाम रोशन करें । ,तुम्हारे शरीर पर सालों पुराने कपड़े मुझे अच्छे नहीं लगते । ,फटे कपड़ों को सिलवा - पुरवा कर पहनते हो क्या अच्छा लगता है । ,साल में कम से कम एक जोड़ी बढिया कपड़ा तो बनवा लिया करो । ,बलवीर काका - अरे कहां दूल्हा बनना है कहकर खीस निपोर देते कस्तूरी काकी कहती तुम नहीं सुधरोगे । ,मुझे ही कुछ करना पड़ेगा । ,तब बलवीर काका कहते करते करते तो बाल भी खिचड़ीनुमा हो गये । ,कस्तूरी काकी - बात उल्टा पुल्टा करना कोई तुमसे सीखे । ,बलवीर कस्तूरी को समझाते हुए कहते आज तनिक कष्ट उठा लेंगे तो क्या बुराई है कल के सुख के लिये । ,कस्तूरी - कल के लिये आज क्यों खराब करते हो । ,बलवीर - खराब नहीं सुखद बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ,कस्तूरी - खुद को तकलीफ के साथ कंजूसी करके । ,बलवीर - अपने बच्चों के लिये कर रहा हूं कहां दूसरों के लिये कर रहा हूं काश अपने पास इतनी दौलत होती तो दूसरों की भी कुछ भलाई कर पाता । ,खैर अभी अपनों का भविष्य बना लूं बाद में यह भी इच्छा पूरी कर लूंगा । ,कस्तूरी - बहुत हसीन सपने देख रहे हो । ,बलवीर - तुम्हारे साथ रहकर हसीन नहीं तो और क्या देखूंगा ? ,कस्तूरी - भगवान तुम्हारी ख्वाहिश पूरी करें । ,बलवीर कहते रोहन की मां हम कहां तकलीफ उठा रहे हैं । ,दोनों टाइम भोजन कर रहे हैं । ,अपनी छत के नीचे चैन से रात गुजार लेते हैं । ,महीने की पहली तारीख को तनख्वाह मिल जाती है । ,ठीक है बड़ा ओहदा और दौलत का ढेर नहीं है अपने पास पर जो है वह हमें खुश रखने के लिये काफी है । ,तुम्हारे संस्कारित बेटा - बेटी पढ लिख रहे हैं क्या यह कम है । ,कस्तूरी - मैं कहां मना कर रही हूं कि बच्चों की परवरिश में कंजूसी करो । ,उन्हें कपड़े लत्ते मत दो । ,मुझे मालूम है बिटिया परायी हो जायेगी । ,बेटवा अपनी बुढौती की लाठी है । ,इसका मतलब तो ये नहीं कि तीन - चार साल में एक जोड़ी खुद के लिये कपड़े बनवाओ और बच्चों के लिये इतना लाकर रख दो कि अलमारी में रखे रहें । ,बलवीर - भागवान अभी तो बच्चों की जरूरतें पूरी करने भर की अपनी कमाई है । ,बाद में मेरी जरूरतें बच्चे पूरी करेंगे । ,तू चिन्ता क्यों करती है । ,अरे कपड़ा भले ही पुराना पहनता हूं पर साफ सुथरे तो होते हैं ना । ,बच्चों के भविष्य के लिये तनिक कटौती कर लेता हूं तो क्या बुराई है । ,आजकल के बच्चों और अपने जमाने में बहुत अन्तर है रोहन की मां । ,कस्तूरी - ठीक है महाप्रभु तुम जीते मैं हारी । ,इस दीवाली पर मेरे लिये साड़ी नहीं लाना अपने लिये कपड़े बनवा लेना यही मेरे लिये दीवाली का तोहफा होगा । ,बलवीर - तोहफा तुमको । ,दीवाली आने तो दो दूल्हे वाला सूट बनवा लूंगा । ,कस्तूरी - हर दीवाली पर कहते हो पर बनवाते नहीं हो । ,बच्चों के नाम पर तुमने कपड़े लत्ते के शौक से तौबा कर लिया है । ,बलवीर - शौक किया होता तो बच्चों पर खर्च कैसे करता । ,देख नहीं रही हो बड़े बड़े ओहदे और अच्छी कमाई करके भी पैसे पैसे के लिये मोहताज हैं । ,कहीं कोई ठेके पर लुटा रहा है तो कोई कहीं और घर में बालबच्चे जरूरतों से जंग लड़ रहे हैं । ,मेरा शौक तो मेरे बच्चों का भविष्य है बस । ,अब तो मेरा बस एक ही सपना है बेटा अपने पैर पर खड़ा हो जाये बेटी के हाथ पीले हो जायें । ,इसके बाद सूट - बूट और बाकी शौक पूरा कर लेंगे । ,कस्तूरी - रिटायरमेण्ट के बाद । ,बलवीर - ठीक समझी । ,कस्तूरी - बुढ़ौती में सूट - बूट में तो जोकर लगोगे । ,बलवीर - तुमको तो खुशी मिलेगी ना । ,खैर कल की बात छोड़ो आज भूखे को दो रोटी मिल पायेंगी । ,कस्तूरी - क्यों नहीं । ,हाथ पांव धोकर बैठिये मैं खाना लगाती हूं । ,बलवीर काका आज की तंगी को कल की खुशी मानते थे । ,बच्चों के भविष्य के लिये हर तकलीफ़ उठाने को तैयार रहा करते थे । ,बड़ी बात तो यह थी कि वह तकलीफ़ में भी खुशी का एहसास करते थे । ,बलवीर काका का त्याग काम आ गया । ,बेटी सावित्री के हाथ पीले हो गये । ,वह अपने परिवार में हंसी - खुशी जीवन यापन करने लगी । ,साल दो साल की बेरोजगारी के बाद रोहन को भी नौकरी मिल गयी । ,वह भी अपने पैर पर मजबूती से खड़ा हो गया । ,बलवीर काका काफी खुश रहने लगे । ,बलवीर अपनी कामयाबी पर अब जश्न मनाते नज़र आने लगे थे । ,उनको अत्यधिक खुश देखकर कस्तूरी काकी बोली - रोहन के बाबू सावित्री अपने घर - परिवार में रच बस गयी बेटवा अपने पांव पर खड़ा हो गया इसके बाद भी अभी कुछ बाकी है जो तुमको सूझ नहीं रहा है । ,बलवीर - क्या हमें नहीं सूझ रहा है भागवान तुम्हीं सुझा दो । ,कस्तूरी - बेटवा का ब्याह । ,अरे कब तक ये बूढ़ी चश्मा लगाकर कच्ची पक्की रोटी परोसती रहेगी । ,अब दो ही साल की तुम्हारी नौकरी बची है । ,कब सोचोगे बेटवा के ब्याह के बारे में । ,बलवीर - भागवान मैं चुपचाप बैठा तो हूं नहीं । ,मैं भी तलाश में हूं कोई बेटवा के योग्य पढी - लिखी लड़की मिल जाये तो ब्याह कर गंगा नहा लूं । ,यही तो एक फर्ज पूरा करने को बचा है । ,कस्तूरी - बहू संस्कारित और अच्छे खानदान की मिल जाती तो कम से कम दो रोटी अपने को समय पर मिल जातीं । ,हमें तो अपनी बहू से इतनी ही ख्वाहिश है । ,हमने तो अपनी सासू मां की सेवा में तनिक भी कोतहाई नहीं की । ,सास ससुर की बात तो हमारे लिये परमात्मा के आदेश के बराबर हुआ करती थी । ,खैर आज के युग की बहुऐं हमारे जमाने की बहुओं जैसी तो नहीं हो सकतीं । ,बलवीर - अरे आज भी पुराने संस्कार जीवित हैं । ,आज की लड़कियां कितनी भी मॉर्डन क्यों न हों पर मंदिर के सामने सिर पर दुपट्टा रखकर सिर तो झुका ही लेती हैं । ,क्यों डरती हो । ,कस्तूरी - मैं क्यों डरूं । ,मैंने तो अपने सास ससुर को भगवान मानकर उनकी पूजा में तनिक भी कोतहाई नहीं बरती । ,मैंने अपने सास - ससुर के साथ कोई बुरा सलूक नहीं किया तो मेरी बहू मेरे साथ क्यों करेगी । ,बलवीर - बहुत बड़ी बात तुमने कह दी । ,बहू हमारे इस घर को मंदिर बना देगी । ,भगवान हमारी तपस्या को खण्डित नहीं करेगा । ,अच्छी बहू देगा जो हमारी विरासत में चार चांद जोड़ देगी । ,कस्तूरी - प्रभु हमारी ख्वाहिश पूरी कर देना । ,जीवन के बचे पल हंसी खुशी बीत जायें । ,बलवीर - अरे भगवान इतना निर्दयी थोड़े ही है कि हमारी तपस्या का प्रतिफल नहीं देगा । ,हमारा शेष जीवन हंसी खुशी से ही बीतेगा रोहन की मां । ,हमने किसी का कुछ नहीं बिगाड़ा है हमारे साथ भगवान अन्याय क्यों । ,हमें जल्दी ही वैसी बहू मिल जायेगी जैसा तुम चाहती हो रोहन की मां । ,कस्तूरी - बेटवा का ब्याह जल्दी करके अपना फर्ज़ पूरा करो । ,दो साल के बाद रिटायर हो जाओगे तो अपने मनमाफ़िक जश्न नहीं मना पाओगे । ,बलवीर - मैं भी जल्दी चाहता हूं । ,"कोई संस्कारित लड़की का बाप तो आये रिश्ता लेकर , आये तो सही ।" ,हम तो एक पैसा भी दहेज नहीं लेंगे । ,कस्तूरी - दहेज नहीं हमें तो गुणवान पढ़ी - लिखी और अच्छे संस्कार वाली बहू चाहिये बस । ,भले ही हमने अपनी बेटी के ब्याह में दहेज दिया है पर ना लेने की कसम खाते हैं । ,बलवीर - ठीक कह रही हो । ,हम अपराध नहीं करेंगे । ,किसी लड़की के बाप की छाती पर कर्ज़ का बोझ नहीं डालेंगे और ना ही भाई के कंधे पर । ,रोहन के ब्याह नहीं करने की जिद के बावजूद भी बलवीर काका बहू की चिन्ता में बूढ़ी होती पत्नी की ख्वाहिश पूरी करने में जुट गये । ,हर मिलने जुलने वाले से बेटे के ब्याह की बात ज़रूर कहते । ,दहेजरहित ब्याह करने की बात ज़रूर कहते साथ यह भी कहते कि पढ़ी लिखी अच्छे संस्कार वाली बहू चाहिये भले ही गरीब बाप की बेटी क्यों न हो । ,कस्तूरी और बलवीर की तलाश पूरी हो गयी । ,बेटे और होने वाली बहू रजनी आपस में बातचीत भी कर लिये । ,दोनों की रज़ामंदी से दहेजरहित ब्याह भी हो गया । ,मनमाफिक बहू पाकर कस्तूरी के जैसे पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे तो वह हर मिलने वाली से बहू की तारीफ़ खुले दिल से करती और बलवीर और कस्तूरी बहू को बेटी का दर्जा तक दे दिये । ,बहू भी ऐसे सास - ससुर को पाकर खुद को गौरवान्वित समझ रही थी । ,दो साल के अन्दर खानदान को कुलदीपक भी दे दी । ,बहू अच्छी पढी लिखी थी । ,घर में किलकारी गूंजी कि वह नौकरी करने की जिद करने लगी । ,सास ससुर के मना करने पर कहने लगी कि बाबूजी दो महीने में रिटायर हो जायेंगे तो एक आदमी की कमाई से घर चलाने में मुश्किल होगी । ,बलवीर काका बोले - बहू घर के खर्च की तू चिन्ता ना कर हमें पेंशन भी तो मिलेगी । ,रजनी - बाबूजी पेंशन के कितने रूपये आयेगें । ,हजार पन्द्रह सौ । ,कहां आप बड़े अधिकारी से रिटायर हो रहे हैं कि आपको बड़ी राशि मिलेगी । ,बहू की बात सुनकर कस्तूरी के पांव के नीचे से जैसे ज़मीन खिसक गयी वह बलवीर से बोली रोहन के बाबू बहू जो ठीक समझे करने दो । ,रोहन ने रजनी को नौकरी करने से रोकना चाहा पर वह सास - ससुर को ढाल बनाकर अपने मकसद में जीत गयी । ,हफ्ते भर में ही एक स्कूल में टीचर की नौकरी ज्वाइन कर ली । ,दो महीने के बाद बलवीर काका रिटायर हो गये । ,कस्तूरी काकी भी पहले जैसी नहीं रहीं उम्र की बीमारी ने उन्हें भी थका दिया । ,उन्हें भी सहारे आसरे की जरूरत लगने लगी । ,बलवीर के रिटायरमेण्ट का पैसा रजनी और रोहन पूरी तरह से खाली करने में लग गये और अपनी साजिश में कामयाब भी हो गये । ,बलवीर के पास मकान और पेंशन के अलावा दूसरी और कोई रकम नहीं बची थी । ,रजनी पुराने मकान को बेचने की ज़िद पर अड़ गयी पर कस्तूरी और बलवीर नहीं माने बोले हमारा जनाजा इसी घर से निकलेगा । ,मेरे मरने के बाद जो चाहे तुम कर सकते हो पर मेरे जीते जी नहीं । ,बूढ़े - बूढ़ी की ज़िद के आगे बेटा बहू घुटने टेक गये । ,अब क्या जो सास - ससुर रजनी को भगवान लगते थे अब वे राक्षस लगने लगे । ,उन्हें दो रोटी के भी लाले पड़ने लगे समय से । ,बलवीर और कस्तूरी के सपने बिखरने लगे । ,एक दिन बलवीर काका कस्तूरी काकी से बोले रोहन की मां भूख लग रही है । ,खाना मिल सकता है क्या ? ,कस्तूरी - बेटी रोटी बन गयी क्या ? ,तेरे बाबू जी का दवाई खाने का समय हो गया है । ,सिर चकरा रहा । ,इन्हें खाना दे दो । ,रजनी - वे तो हमेशा भूखे रहते हैं । ,बाहर भी नौकरी करो घर में भी । ,ये सब मुझसे अब नहीं होता । ,सासू दिन भर खटिया तोड़ती रहतीं हैं । ,रोटी भी नहीं बना सकतीं क्या ? ,कस्तूरी - बहू नाराज क्यों हो रही हो । ,सब काम तो मैं ही की हूं ना तुम सिर्फ रोटी बेल रही हो । ,वह भी इसलिये कि रोटी मुझसे बरोबर बेलते नहीं बनती । ,अगर मेरी नजर जबाब न देती तो रोटी भी बेल लेती । ,खटिया कब तोड़ती हूं घर का काम कोई नौकरानी तो नहीं करने आती इसके बाद पोते की देखभाल हम ही न कर रहे हैं । ,तुम तो सुबह स्कूल चली जाती हो चाय नाश्ता मैं ही बनाकर देती हूं । ,शाम को बस रोटी बनाती हो । ,ठीक है कल से यह भी कर लिया करूंगी । ,रजनी - कल से नहीं अभी से । ,अलग - अलग रोटी बनाकर पेट भर खाओ । ,मैं न तीनों टाइम रोटी दे पाऊंगी और न ही दवाई दारू का खर्चा उठा पाऊंगी । ,कस्तूरी - क्या एक तवा दो रोटी । ,रजनी - हां अभी से । ,कस्तूरी - बेटी तू बंटवारा कर रही है । ,क्या इसी दिन के लिये हमने सपने देखे थे । ,रोहन को पढाया लिखाया था । ,अब हम अलग रोटी बनायें खायें । ,रजनी - सभी मां बाप करते हैं तुमने कर दिया तो कौन सा तीर मार दिया । ,खूब बनाओ खाओ । ,मैं तुम्हारा बोझ नहीं ढो सकती । ,तुम लोग मेरे साथ रहे तो मुझे ज़हर खाना पड़ सकता है । ,लो तवा गरम है आटा गूंथा है । ,बना लो बुढ़ऊ और अपनी रोटी । ,मेरे और उनके भर की रोटी बन गयी है कहते हुए रजनी चूल्हे से दूर चली गयी । ,कई दिन दोनों बलवीर काका और कस्तूरी काकी फांके में दिन गुजारे जब नहीं रहा गया तो बलवीर काका बोले रोहन की मां कब तक भूखे मरेंगे । ,अब तो बेटा भी नहीं पूछता है । ,थाम लें हम दोनों चूल्हे चौके का काम । ,अब कोई सहारा नहीं है । ,हम दोनों एक दूसरे के सहारे बने जब तक सांस है । ,कस्तूरी - हां क्यों नहीं । ,बेटा बहू की खुशी के लिये अब यह भी करना पड़ेगा । ,रजनी पहले खाना बना लेती इसके बाद नन्हे रोहित से संदेश भेजवाती कि जा दादी से बोल दे तवा गरम है रोटी बना ले । ,"गैस , राशन आदि सभी सामानों की व्यवस्था खुद बलवीर काका करते ।" ,नन्हा रोहित तुतलाते हुए दादी को बोलकर चला जाता । ,बेचारी बूढ़ी कस्तूरी आंखों में आंसू लिये रोटी सेंकती और बूढ़े बलवीर को दवाई खिला कर रोटी परोसती । ,दोनों को जीते जी ना जाने क्यों नरक का दुःख मिल रहा था । ,वे सोच - सोच कर बीमार रहने लगे । ,पापी पेट की भूख के लिये रोटी तो चाहिये । ,बेचारी कस्तूरी चश्में के अन्दर से आंख फाड़ - फाड़कर देखती और रोटी बनाती । ,दोनों का दिन काफी कष्टमय बीत रहा था । ,उधर रजनी काफी खुश थी रोहन भी पत्नी के दबाव में । ,रोहन तो सुबह दफ्तर चला जाता देर रात तक वापस आता । ,रजनी रोहित को झूलाघर छोड़कर देर से स्कूल पहुंचती । ,स्कूल से छूटती तो किटी पार्टियों का लुत्फ उठाती । ,रजनी की रोज़ - रोज़ की लेटलतीफी से उसकी क्लास के बच्चे उदण्डता करते । ,रजनी के रोज़ - रोज़ देर से स्कूल आने और बच्चों की उदण्डता की खबर स्कूल की संचालिका को लगी । ,वे रजनी के ऊपर निगाह जमाने लगीं । ,जब तक रजनी न आती खुद क्लास लेती । ,सप्ताह भर स्कूल संचालिका के नज़र रखने के बाद भी रजनी में परिवर्तन नहीं आया । ,वह अब रजनी की परेशानी को नजदीक से जानने की कोशिश करने लगी । ,स्कूल की दूसरी शिक्षिकाओं से पूछताछ की पर सन्तुष्ट नहीं हुई । ,एक दिन स्कूल की संचालिका स्कूल - टाइम में रजनी के घर जा पहुंची । ,वहां बूढ़े बलवीर दर्द में कराह रहे थे । ,बूढ़ी कस्तूरी तवा पर रोटी जल्दी - जल्दी सेंक रही थी । ,यह सब संचालिका चुपके से खड़ी देखती रही । ,कस्तूरी रोटी लायी कांपते हुए हाथों से बलवीर की ओर बढ़ाते हुए बोली लो खाकर दवाई खा लो । ,कस्तूरी और बलवीर की दशा देखकर संचालिका की आंखों में आंसू उतर आये । ,वे आंसू को पीती हुई दरवाजा खटखटायी और बोली कोई है । ,बलवीर - दर्द भूल कर बोले आ जाइये दरवाजा खुला है । ,संचालिका - आप लोग अकेले रहते हैं । ,बलवीर - नहीं बेटा बहू और एक पोता भी है । ,अभी तो हम पांच सदस्य हैं घर में । ,संचालिका - कांपते हाथों से अम्मा रोटी क्यों बना रही थी । ,कस्तूरी - बहू काम पर जाती है ना । ,फुर्सत नहीं मिलती उसको । ,घर और बाहर दोनों का काम देखना पड़ता है ना । ,ऊपर से हम बूढ़ी - बूढ़े का बोझ भी । ,संचालिका महोदया बलवीर और कस्तूरी के बिना कुछ कहे सब तहकीकात पूरी कर ली । ,दूसरे दिन रजनी फिर देर से स्कूल पहुंची । ,संचालिका महोदया उसका इंतजार ही कर रही थीं । ,उसे क्लास में न जाकर अपने दफ्तर में हाजिर होने को बोलीं । ,रजनी संचालिका के ऑफिस में प्रवेश करते ही बोली कहिये मैडम क्यों तलब की हैं । ,संचालिका - मैडम आप शिक्षा देने के काबिल नहीं हैं । ,एकाउण्ट डिपार्टमेण्ट से अपना हिसाब करवा लीजिये । ,रजनी - कालेज में पढाने की योग्यता है मेरे पास । ,आपने मेरी डिग्रियां देखकर नौकरी दी थी । ,अयोग्यता का इल्जाम क्यों । ,"संचालिका - सेवा , त्याग और परमार्थ की शिक्षा देने वाले खुद बड़े बूढ़े बुजुर्गो पर अत्याचार करें तो क्या शिक्षा देंगे ।" ,आप जा सकती हैं । ,रजनी - मैडम मुझसे अपराध हो गया है । ,भगवान स्वरूप सास - ससुर से माफी मांग लूंगी । ,उम्मीद है माफ कर देंगे । ,संचालिका महोदया - चलो गाड़ी में बैठो । ,रजनी को लेकर संचालिका महोदया रजनी के घर पहुंची । ,रजनी गाड़ी से उतर कर बलवीर और कस्तूरी के कमरे की ओर भागी । ,बलवीर का पैर पकड़ कर रोते हुए बोली मुझे माफ कर दो बाबूजी । ,बलवीर - माफी किस बात की ? ,क्या अपराध किया है तुमने ? ,रजनी - मुझे अपने अपराध का पता चल गया है । ,माफ कर दो । ,कस्तूरी - बेटी कैसा अपराध कैसी माफी कहते हुए गले से लगा ली । ,बूढ़े बलवीर जबाब सवाल कर रहे घुटनों पर शरीर का बोझ डालते हुए उठे और रजनी के सिर पर हाथ फेरते हुए बोले बेटी तेरी खुशी में हम दोनों की खुशी है । ,हमारी ओर से कोई शिकायत नहीं है । ,तुमने खुद प्रायश्चित कर लिया । ,रजनी खुशी के मारे उछल पड़ी और संचालिका के सामने हाथ जोड़कर खड़ी हो गयी । ,संचालिका महोदया बोली धरती के भगवान माफ कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं । ,अब क्या बूढ़ी आंखों में चमक और पतझड़ हुए जीवन में फिर से बहार छा गयी । ,बूढ़े बलवीर का दर्द छूमन्तर हो गया । ,वह कस्तूरी को चश्मा थमाते हुए बोले रोहन की मां देखो हमारे सपने । pl,आमेर का प्रसिद्ध दुर्ग आज भी ऐतिहासिक फिल्मों के निर्माताओं को शूटिंग के लिए आमंत्रित करता है । sg,दुर्ग का मुख्य द्वार गणेश पोल कहलाता है । ,मुख्य द्वार की नक्काशी अत्यन्त आकर्षक है । ,"आमेर में ही है चालीस खम्बों वाला वह शीश महल , जहाँ माचिस की तीली जलाने पर सारे महल में दीपावलियाँ आलोकित हो उठती है ।" ,हाथी की सवारी यहाँ का विशेष आकर्षण है । ,जो देशी सैलानियों से अधिक विदेशी पर्यटकों के लिए कौतूहल और आनंद का विषय है । ,सतपुड़ा - ,मैकल और विंध्य पर्वत शृंखला के संधि स्थल पर सुरम्य नील वादियों में बसा अमरकंटक ग्रीष्मकाल के लिए अनुपम पर्यटन स्थल है । sg,अमरकंटक को प्रकृति और पौराणिकता ने विविध संपदा की धरोहर बख्शी है । ,"चारों ओर हरियाली , दूधधारा और कपिलधारा के झरनों का मनोरम दृश्य , सोननदी की कलकल करती धारा , नर्मदा कुंड की पवित्रता , पहाड़ियों की हरी - भरी उँचाइयाँ हैं ।" ,""" अमरकंटक , सोन और नर्मदा नदी की उद्गम स्थली है । """ ,अमरकंटक 20 ' 40 ' उत्तरी अक्षांश और 80 ' 45 ' पूर्वी देशांश के बीच स्थित है । ,नर्मदा नदी 1312 कि.मी. चलकर गुजरात में 21 ' 43 ' उत्तरी अक्षांश और 72 ' 57 ' पूर्वी देशांश के बीच स्थित खंभात की खाड़ी के निकट गिरती है । ,"नर्मदा नदी 1077 कि.मी. मध्यप्रदेश के शहडोल , मंडला , जबलपुर , नरसिंहपुर , होशंगाबाद , खंडवा और खरगौन जिले में बहती है ।" ,"इसके बाद नर्मदा नदी 74 कि.मी. महाराष्ट्र को स्पर्श करती हुई बहती है , जिसमें 34 कि.मी. तक मध्यप्रदेश और 40 कि.मी. तक गुजरात के साथ महाराष्ट्र की सीमाएँ बनाती हैं ।" ,नर्मदा नदी खंभात की खाड़ी में गिरने के पहले लगभग 161 कि.मी. गुजरात में बहती है । ,"इस प्रकार नर्मदा नदी के प्रवाह पथ में मध्यप्रदेश , महाराष्ट्र , और गुजरात राज्य पड़ता है ।" ,"नर्मदा का कुल जल संग्रहण क्षेत्र 98799 वर्ग कि.मी. है जिसमें 80.02 प्रतिशत मध्यप्रदेश में , 3.31 प्रतिशत महाराष्ट्र में और 8.67 प्रतिशत क्षेत्र गुजरात में है ।" ,"नदी के कछार में 160 लाख एकड़ भूमि सिंचित होती है जिसमें 144 लाख एकड़ अकेले मध्यप्रदेश में है , शेष महाराष्ट्र और गुजरात में है ।" ,अमरकंटक की अरण्य स्थली में प्रमुख रूप से नर्मदा और सोन नदी के उद्गम के आसपास एक भी बाँस का पेड़ नहीं है । ,यही नहीं अमरकंटक की अरण्य स्थली में प्रमुख नर्मदा कुंड का पानी पीने लायक भी नहीं है । ,नर्मदा कुंड का पानी इतना प्रदूषित है कि आचमन तक करने की इच्छा नहीं होती । ,इसके विपरीत सोन नदी के उद्गम का पानी स्वच्छ और ग्रहण करने योग्य है । ,नर्मदा कुंड को मनुष्य की कृत्रिमता ने आधुनिक बनाकर सीमित कर दिया है । ,सोन नदी की उद्गम स्थली सोन - मुड़ा अभी भी प्रकृति की रमणीयता और सहजता से अलंकृत है । ,"समुद्र से 3600 फुट की ऊँचाई पर स्थित अमरकंटक प्राचीन काल से ही ऋषि मुनियों की तपस्थली , लक्ष्मी जी की शरण स्थली और उमा महेश्वर के विहार स्थल के रूप में प्रसिद्ध है ।" ,अमरकंटक के पुजारी जी ने हमें बताया कि यहाँ आज भी शंकर जी के डमरू की आवाज़ सुनाई देती है । ,स्वामी रामकृष्ण परमहंस आश्रम के प्रभारी जी ने बताया कि अमरकंटक का वातावरण स्वस्थ है । ,अमरकंटक ,साधना के लिए यह बहुत ही उपयुक्त है । ,अमरकंटक में ब्रह्मा के कण विद्यमान हैं जो मन को शांति प्रदान करते हैं । ,बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि अमरकंटक में नर्मदा और सोन नदी के अलावा अन्य किसी नदी का भी उद्गम है । ,अमरकंटक से तीसरी ' जोहिला नदी ' निकली है । sg,अमरकंटक में नर्मदा कुंड से 6 कि.मी. की दूरी पर कपिलधारा में नर्मदा 150 फीट नीचे गिरकर प्रपात बनाती है । ,प्रपात से थोड़ी दूर पर नर्मदा दूध की धारा बनाकर 10 फीट नीचे गिरती है । ,उसी तर्ज़ में सोन नदी 300 फीट नीचे गिरती है । ,अमरकंटक के गर्भ में बाक्साइट है जिसे निकालकर बाल्को भेजा जाता है । sg,खानों के विस्फोट अमरकंटक के वातावरण में कंपकपी पैदा कर देते हैं । pl,""" वंशगुल्म '' के नाम से प्रसिद्ध अमरकंटक आज बाँस के कटीले पेड़ों से वंचित होता जा रहा है ।" ,अक्षय तृतीया का दिन उत्तरकाशी के लिए विशेष महत्व रखता है । ,अक्षय तृतीया को प्रत्येक वर्ष उत्तराखण्ड के चार में से दो धाम गंगोत्री और यमनोत्री के पट यात्रियों के लिए खुल जाते हैं । ,इसी के साथ चारधाम यात्रा का शुभारंभ हो जाता है । sg,अक्षय तृतीया को गंगाजी डोली में सवार होकर अपने शीतकाल के निवास मुखिमठ से गंगोत्री स्थित गंगा मंदिर पहुँचकर वहाँ अपना ग्रीष्मकालीन निवास स्थापित कर लेती हैं । ,मुखिमठ को आम भाषा में लोग मुखबा के नाम से जानते हैं । ,ऐसी मान्यता है कि मुखबा गंगाजी का मायका है जहाँ वह साल के छह माह रहती हैं । ,अक्षय तृतीया से एक दिन पहले गंगाजी की डोली मुखबा से गंगोत्री के लिए प्रस्थान करती है । ,मुखबा अत्यंत ही सुंदर गाँव है । ,मुखबा में अधिकतर भवन लकड़ी से निर्मित हैं । ,मुखबा क्षेत्र अपनी काष्ठ कला के लिए प्रसिद्ध है । ,काष्ठ कला के उत्कृष्ट नमूने मुखबा के भवनों पर स्थित हैं । ,भवनों पर की गई नक्काशी देखने लायक है । ,हमारा अगला पड़ाव कोपांग था जहाँ सेना का कैंप और मंदिर है । ,इस स्नान को धर्म की मान्यता मिलने के कारण यहाँ भिखारियों से अधिक पंडों की भीड़ है जो सैलानियों को तरह - तरह से ठगने की कोशिश करते हैं । ,वाराणसी का पौराणिक नाम ’ काशी ’ है । ,किंतु वर्तमान नाम ’ वाराणसी ’ यहाँ की वरुणा और असि नदियों पर रखा गया है । ,गंगा नदी के पश्चिमी किनारे पर अर्द्धचंद्राकार में बसे इस शहर में इतने घाट बने हैं कि इसे घाटों का शहर भी कहा जाता है । ,बनारस का कत्थक नृत्य घराना संगीत की दुनिया में अपनी विशेष पहचान रखता है । ,बनारसी साड़ी अपनी चमक व डिजाइन के लिए देशभर में काफी लोकप्रिय है । sg,लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में फैले बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना पंडित मदनमोहन मालवीय ने की थी । ,"जिसके मूल में मुख्यतः संस्कृत , भारतीय कला की शिक्षा का उद्देश्य था ।" ,लेकिन आजकल बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हर विषय पढ़ाया जाता है । ,बनारस हिंदू विश्वविद्यालय भारत का सबसे बड़ा आवासीय विश्वविद्यालय भी है । ,वाराणसी से 10 किलोमीटर दूर सारनाथ एक बौद्ध स्थल है । ,सारनाथ बनारस - गाजीपुर मार्ग पर स्थित है । ,सारनाथ में सम्राट अशोक के शासनकाल में बनाए गए अनेक स्तूप हैं । sg,अशोक ने सारनाथ में एक स्तूप बनवाया था । ,इस स्तूप के समीप खंभे का निर्माण करवाया था जिसपर 4 शेर बने हुए हैं जो आज भारत का राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह है । ,सारनाथ में एक पुरातात्विक संग्रहालय भी है जहाँ बुद्ध की प्रतिमाएँ और शिलालेख रखे हुए हैं । ,"पुरातात्विक संग्रहालय में प्राचीन काल के बरतन , कुछ बेहतरीन चित्र , बौद्ध धर्म की महत्वपूर्ण घटनाओं का चित्रण मौजूद है ।" ,पुरातात्विक संग्रहालय में गुप्त काल का सबसे बड़ा संग्रह मौजूद है । ,काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण इंदौर की महारानी अहल्याबाई होल्कर ने 1717 में करवाया था । ,दशाश्वमेघ घाट के पास यह मंदिर एक सँकरी गली में स्थित है । ,भारत माता को समर्पित भारत माता मंदिर बनारस का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ देवीदेवताओं की मूर्तियाँ मौजूद नहीं हैं । sg,भारत माता मंदिर में भारत का मानचित्र उकेरा गया है । ,एकमात्र ऐसा मंदिर होने के कारण पर्यटक इसकी ओर खिंचे चले आते हैं । ,बनारस के घाट पर्यटन स्थलों में प्रमुख स्थान रखते हैं । ,शाम - ए - अवध और सुबह - ए - बनारस का जवाब नहीं । ,बनारस का जीवन गंगा किनारे स्थित 100 से भी ज्यादा घाटों के इर्द - गिर्द घूमता नजर आता है । ,सूर्य की पहली किरण जब अपना आँचल लहराती है तो इन घाटों की खूबसूरती देखते ही बनती है । ,झाँसी शहर अपने इतिहास के लिए प्रसिद्ध है और इसे नाम व मान देने में रानी लक्ष्मीबाई ने अहम भूमिका अदा की थी । ,रानी लक्ष्मीबाई ने हाथ में तलवार लेकर अंग्रेजों के दाँत खट्टे कर दिए थे और जीते जी फिंरगियों को किले में घुसने नहीं दिया । pl,आज भी बच्चे इन पंक्तियों को बड़े गर्व से गाते हैं : ’ खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी ’ । ,झाँसी दिल्ली से करीब 415 किलोमीटर दूर है । ,झाँसी शहर लगभग 20.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है । ,झाँसी का नजदीकी हवाई अड्डा ग्वालियर है जो 98 किलोमीटर की दूरी पर है । ,नैशनल हाइवे 25 और 26 से जुड़ा यह शहर अपनी ऐतिहासिक लोकप्रियता के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है । sg,झाँसी का ऐतिहासिक किला ओरछा के राजा वीर सिंह जूदेव ने 1610 में बंगरा की पहाड़ी पर बनवाया था । ,जो आज भी अपनी पहले की स्थिति में मौजूद है जबकि 1857 में इस किले पर अंग्रेजों ने गोले बरसाए थे । ,झाँसी का किला और इससे संबंधित झाँसी राज्य 18वीं शताब्दी में मराठों के हाथ में चला गया था । ,"मराठों के अंतिम शासक गंगाधर राव थे , जिनकी मौत 1853 में हुई थी ।" ,गंगाधर राव के बाद रानी लक्ष्मीबाई ने शासन की बागडोर संभाली थी । sg,किले में रखी ’ भवानी शंकर ’ और ’ कड़क बिजली ’ नामक अष्टधातु की बनी तोपें लक्ष्मीबाई की वीरता की याद ताजा करती हैं । ,झाँसी के दुर्ग का भीतरी भाग आकर्षक एवं दर्शनीय है । ,झाँसी का किला आज भी अपने कल के वैभव का प्रतीक है । ,शहर के बीच रानी महल का निर्माण महाराज रघुनाथ राव और महारानी लक्ष्मीबाई के समय में हुआ था । ,रानी महल का पुराना नाम ’ बाई साहब की हवेली ’ था । ,"रानी महल की रंग - बिरंगी पच्चीकारी , चित्रकारी और कला के नमूने आज भी मौजूद हैं ।" ,"रंग - बिरंगी पच्चीकारी , चित्रकारी और कला के नमूने देख कर अतीत की शिल्पकला का एहसास होता है ।" sg,बड़ी - बड़ी ढलानों की मेहराबों पर पत्थर की कारीगरी प्राचीन शिल्प को सुरक्षित रखे हुए है । ,अंग्रेजों के खिलाफ अपने सरदारों में विद्रोह की भावना रानी के इसी महल में भरी थी । ,रानी महल में पुरातत्त्व विभाग का संग्रहालय है जिसमें बुंदेलखंड के चाँदपुर एवं दुहाई स्थलों से लाई गई मूर्तियाँ हैं । ,रानी महल शहर के बीचों - बीच स्थित है । ,ऐसा लगता है कि नेक्सस से अलग ऐंड्रॉयड डिवाइस इस्तेमाल करने वाले लोगों को गूगल इसका एक्स्पीरियंस कराना चाहती है । ,गूगल ने गूगल कीबोर्ड ऐप जारी किया है । ,यह ऐप 4.0 ( आइसक्रीम सैंडविच ) या इससे ऊपर के ऐंड्रॉयड वर्जन के लिए है । ,"यह ऐप आपको वैसा ही कीबोर्ड देगा , जैसा कि नेक्सस डिवाइसेज़ पर मिलता है ।" ,"यह वैसे ही काम करता है , जैसे कि स्विफ्टकी या स्वाइप NULL ।" ,"लेकिन इन कीबोर्ड्स के लिए आपको पैसे देने पड़ते हैं , जबकि गूगल का कीबोर्ड फ्री है ।" ,इस कीबोर्ड पर गेस्चर टाइपिंग और नेक्स्ट - वर्ड प्रिडिक्शन है । ,गेस्चर टाइपिंग में बिना उंगली उठाए एक अक्षर से दूसरे अक्षर तक उंगली कीबोर्ड पर फेरनी होती है और शब्द खत्म होने पर उंगली स्क्रीन से उठाई जाती है । ,कीबोर्ड में माइक्रोफोन पर टैप करने के बाद बोलकर भी टाइप किया जा सकता है । ,यह कीबोर्ड 26 भाषाओं को सपोर्ट करता है । ,हालांकि इसे इस्तेमाल करने वाले इसमें इमोटिकन्स का न होना एक बड़ी कमी मानते हैं । ,"यह कीबोर्ड अभी इंग्लिश स्पीकिंग कंट्रीज़ के लिए उपलब्ध है , लेकिन गूगल के मुताबिक यह जल्द ही बाकी जगहों के लिए भी उपलब्ध होगा यानी भारत में ऐंड्रॉयड यूज़र्स को अभी थोड़ा इंतजार करना होगा ।" ,अब यह तय हो गया है कि ऐपल का नया आईओएस 7 आ रहा है । ,सैन फ्रांसिस्को में 10 से 14 जून तक ऐपल की वर्ल्ड वाइड डिवेलपर्स कॉन्फ्रेंस होगी । ,"ऐपल ने सैन फ्रांसिस्को के मॉस्कोनी वेस्ट की सजावट में ' 7 ' लिखे बैनर टांगे हैं , जिससे आईओएस 7 का ऐलान पक्का हो गया है ।" ,"ऐपल ने ' द् ' लिखे बैनर भी टांगे हैं , जिससे लगता है कि ऐपल ओएस द् के बारे में कुछ नया ऐलान करेगी ।" ,डिजिटल इमेजिंग सेक्टर की नामी कम्पनी एप्सन ने अपने मोनो इंक टैंक इंकजेट प्रिंटर की एम - सीरीज को बाजार में उतारा । ,"एप्सन इंडिया के डेप्युटी जनरल मैनेजर ( कन्ज़यूमर प्रॉडक्ट ग्रुप ) राम प्रसाद ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि एम सीरीज के प्रिंटर उन कॉर्पोरेट्स के लिए हैं , जो खास तौर पर ब्लैक ऐंड वाइट डॉक्युमेंट प्रिंट करते हैं और जो कम कॉस्ट में बढ़िया क्वॉलिटी के प्रिंट चाहते हैं ।" ,उन्होंने बताया कि इस सीरीज के प्रिंटर लेजर प्रिंटर में इस्तेमाल किए जाने वाले कमजोर क्वॉलिटी वाले रीफिल किए गए लेजर टोनर के मुकाबले एक तिहाई लागत में कागज प्रिंट कर सकता है । ,साथ ही यह बिजली खपत के मामले में भी बेहद किफायती है । ,माइक्रोसॉफ्ट ने कहा है कि उसने हैक किए गए कंप्यूटरों के खिलाफ कार्रवाई में एफबीआई से हाथ मिलाया है । ,इन कंप्यूटरों के जरिए दुनिया भर में 50 करोड़ डॉलर से ज्यादा के आर्थिक घपले किए गए थे । ,इस कार्रवाई के तहत पुलिस और वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर ग्लोबल साइबर क्रिमिनल्स द्वारा इस्तेमाल किए गए हजार से अधिक ' बॉटनेट्स ' को निष्क्रिय किया गया । ,बॉटनेट्स में ' बॉट ' रोबॉट से लिया गया है । ,"उद्योग संगठनों की ओर से ग्रेग ग्रासिया ने कहा , ' इस कार्रवाई का उद्देश्य लोगों और उद्योगों के खिलाफ बॉटनेट्स के मौजूदा नुकसान को रोकना था ।" ,क्या है बॉटनेट : साइबर क्रिमिनल्स मैलवेयर के जरिए कंप्यूटर को बॉट में बदल देते हैं । ,ऐसा होने पर आपका कंप्यूटर बिना आपकी जानकारी के इंटरनेट के इस्तेमाल से कई काम करने लगता है । ,क्रिमिनल्स इन बॉट्स का इस्तेमाल बड़ी संख्या में कंप्यूटरों को इन्फेक्ट करने में करते हैं । ,"ये सारे कंप्यूटर मिलकर जो नेटवर्क बनाते हैं , उसे बॉटनेट कहते हैं ।" ,स्मार्टफोन की बिक्री ने पहली बार फीचर फोन को पछाड़ दिया है और इसे भांपते हुए हर नामी कंपनी इस बाजार पर अपनी पकड़ मजबूत बना रही है । ,कंप्यूटर बनाने वाली कंपनी लेनोवो ने बुधवार को अपने कई स्मार्टफोन की सीरीज भारत में पेश की । ,"कंपनी ने 6 ऐंड्रॉयड पावर्ड स्मार्टफोन लॉन्च किए हैं , जिनकी कीमत 8,689 रुपए से 32,999 रुपए के बीच है ।" ,इनमें इन्टेल के साथ मिलकर पेश किया गया फोन लेनोवो के 900 खास है । ,इन्टेल के लेटेस्ट प्रोसेसर जेड 2580 के साथ आए इस फोन में 2 गीगाहर्त्ज ड्यूल कोर की प्रोसेसिंग पावर है । ,"5.5 इंच की बड़ी स्क्रीन , 400 पिक्सल पर इंच का डिस्प्ले , 13 मेगापिक्सल का कैमरा सोनी एक्समोर बीएसआई सेंसर के साथ , सात मिलीमीटर से भी कम मोटाई इसके खास फीचर हैं ।" ,"इस ऐंड्रॉयड फोन का दाम 32,999 रुपए रखा गया है ।" ,"लेनोवो ने एंट्री लेवल पर ए सीरीज में ए 706 और ए 390 उतारे हैं , जिनके दाम 15949 रुपए और 8689 रुपए हैं ।" ,इनमें मिड और एंट्री रेंज जैसे फीचर हैं । ,"लेनोवो की इस रेंज में पी 780 मॉडल भी हमें खास लगा , जिसमें सबसे ज्यादा बैटरी लाइफ का दावा किया गया है ।" ,इस फोन में 4000 मिली एंपियर की बैटरी है जो 25 घंटे तक का ऐक्टिव टॉक टाइम देती है । ,इसमें 1.2 गीगाहर्त्ज का क्वॉड कोर प्रोसेसर है । ,इसका दाम 22529 रुपए है । ,साथ ही एंटरटेनमेंट कैटिगरी में कंपनी ने एस सीरीज में मॉडल नंबर 820 और 920 उतारे हैं । ,चीन की लेनोवो स्मार्ट कनेक्टेड डिवाइसेज में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी होने का दावा करती है । ,"इसने पिछले साल देश में 5 ऐंड्रॉयड बेस्ड स्मार्टफोन 6,499 से 28,499 रुपए की रेंज में लॉन्च किए थे ।" ,"लेनोवो ग्रुप के सीनियर वाइस प्रेज़िडेंट मिल्को वैन दुइल ने कहा , ' भारत में हम स्मार्टफोन पर फोकस करेंगे ।" ,"लेनोवो इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अमर बाबू ने बताया , हमारी रीटेल पहुंच बढ़कर 3,000 स्टोर तक हो गई है ।" ,"कंपनी का चीन , इंडोनेशिया , फिलीपींस , रूस और वियतनाम में पहले ही मोबाइल फोन बिजनेस अच्छा चल रहा है ।" ,"ताइवान की कंप्यूटर मैन्युफैक्चरर असुस ने बुधवार को एक मोबाइल डिवाइस पेश की , जिसे दुनिया का पहला थ्री - इन - वन टैबलेट , लैपटॉप और डेस्कटॉप कंप्यूटर बताया जा रहा है ।" ,इसका नाम ट्रांसफॉर्मर बुक ट्रायो है और इसमें इन्टेल का नया फोर्थ - जेनरेशन प्रोसेसर लगा है । ,मुन्नार की खूबी यह है कि यहाँ पर्यटक कभी भी नहीं ऊबते हैं । ,मुन्नार टाउन से 22 कि.मी. दूरी पर चाय के बागानों के बीच से यात्रा करना अच्छा है । ,बाँध के चारों ओर घना जंगल है । ,टोप स्टेशन मुन्नार से 32 कि.मी. दूर मुन्नार कोडाइकनाल मार्ग पर सबसे ऊँचा क्षेत्र है । ,यहीं नीलकुरिंजि नामक विश्व प्रसिद्व फूल खिलते हैं । ,इन पहाड़ियों पर से तमिलनाडु की झाँकी भी देखने को मिलती है । ,नीलकुरिंजि बारह साल में एक बार खिलता है । ,यह केरल के लिए प्रकृति का वरदान है । ,जब नीलकुरिंजि खिलते हैं तो पहाडियाँ ऐसी लगती हैं मानो नीले रंग में डूबी हो । ,ये फूल नीले रंग के करीब 60 शेड्स में मिलते हैं । ,जब ये खिलते हैं तो प्रतीत होता है कि मानों संपूर्ण प्रकृति नीले रंग से नहा उठी है । pl,"प्रकृति का यह अद्‍भुत नज़ारा कोविलूर , कडावरि , राजमला , इराविकुळम , मुन्नार क्षेत्रों में दर्शकों को मंत्रमुग्ध करता है ।" ,पिछली बार नीलकुरिंजि 2006 में खिला था । ,हालाँकि हर वर्ष कुछ पहाड़ियों पर नीलकुरिंजि खिलते हैं किन्तु पूर्ण नीलाम पुष्पोत्सव के लिए हमें 2018 तक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी । ,मुन्नार पर्यटन कार्यक्रम में चाय - संग्रहालय को भी स्थान देना चाहिए । ,' चाय संग्रहालय ' नल्लतण्णि नामक ' टी इस्टेट ' में है जो टाटा टी के स्वामित्व में है । ,"मुन्नार के ' चाय संग्रहालय ' में प्रदर्शित प्राचीन वस्तुओं में महत्त्वपूर्ण हैं - मुन्नार में चाय की खेती के विकास की कड़ियाँ , आदिकालीन यंत्र जो घने जंगलों को चाय के बागान में बदलने के लिए प्रयुक्त किए जाते थे , 1905 का टी रोलर , 1920 का पेल्टन व्हील , चाय ले जाने के लिए हाई रेंज में स्थापित लाइट रेल पटरियों पर चलने वाली रेलगाड़ियों के कल - पुर्जे आदि ।" ,चाय पत्ती के निर्माण के विविध स्तरों का प्रदर्शन बहुत ही आकर्षक है । ,एक दूसरी प्रमुख वस्तु है ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी का एक ' चिता - भस्म - कलश ' जो आप देख सकते हैं । ,"इसके अतिरिक्त चाय - उत्पादन की परंपरागत - प्रणालियाँ , विभिन्न प्रकार की चाय - पत्तियाँ भी यहाँ प्रदर्शित की गई हैं ।" ,इडुक्कि जिले का पाण्डिक्कुष़ि क्षेत्र वन तथा वन्यजीव फोटोग्राफ़ी के लिए उपयुक्त है । pl,पाण्डिक्कुष़ि की शस्य श्यामल प्रकृति एवं विविध वन्यजीव दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं । ,पाण्डिक्कुष़ि चेल्लारकोविल के पास तमिलनाडु की सीमा पर स्थित है । ,पीरुमेडु समुद्रतल से 915 मीटर की ऊँचाई पर स्थित हिल स्टेशन है । sg,"पीरुमेडु की हरितिमा को चाय , कॉफी , रबड़ , इलायची , युकेलिप्टस आदि के बागान - जीवित रखते हैं ।" ,"घास के मैदान , जलप्रपात , चीड़ वृक्ष आदि पीरूमेडू की खूबसूरती में चार चाँद लगा देते हैं ।" ,"पीरुमेडु ट्रेकिंग , साईकिल सवारी , घुड़ सवारी आदि के लिए उपयुक्त स्थान है ।" ,पेरियार नदी से सटी शस्य श्यामल पर्वतमाला है पुलमेडु । ,पीरुमेडु से शबरीमला मंदिर दिखाई देता है । ,शबरीमला मंदिर जाने के एक मार्ग में पुलमेडु पड़ता है । ,हम जीप से ही पुलमेडु पहुँच सकते हैं । ,संरक्षित वन - क्षेत्र होने के कारण भ्रमण के लिए वन विभाग की अनुमति आवश्यक है । ,"चेल्लारकोविल पीरुमेडु का ही एक भाग है , यहाँ अनेक जलप्रपात हैं ।" ,चेल्लारकोविल क्षेत्र अत्यन्त रमणीय प्रकृति से युक्त है । ,चेल्लारकोविल ग्राम का एक हिस्सा खड़ी चट्टान है । ,चेल्लारकोविल ग्राम की खड़ी चट्टान नीचे चलकर तमिलनाडु के कम्बम में स्थित नारियल के बगानों तक खड़ी है । ,वण्डिप्पेरियार प्रकृति समृद्ध प्रदेश है । ,"वण्डिप्पेरियार में चाय , कॉफी , कालीमिर्च आदि की खेती होती है ।" ,इस के बीचों - बीच से पेरियार नदी बहती है । ,यहाँ सरकारी कृषि - उद्यान एवं पुष्पोद्यान है । ,"यह पहाड़ी फल - फूल , कन्द - मूल , आदि का केन्द्र है ।" ,' पट्टुमला ' नाम का तात्पर्य है कि हरियाली युक्त पहाड़ी जो ऐसी लगे कि मानो हरे रेशम से ढकी हो । ,पीरुमेडु में स्थित पट्टुमला का सौन्दर्य अलौकिक है । sg,पट्टुमला अपने सौन्दर्य में विश्‍व को लुभा रहा है । ,पट्टुमला की हरी - भरी पहाड़ी की चोटी पर स्थित वेलांकण्णि - माता - चर्च एक प्रसिद्ध तीर्थस्थान है । ,चर्च के एकदम निकट एक सुन्दर उद्यान भी है । ,वण्डनमेडु विश्व प्रसिद्ध इलायची बिक्रय केन्द्र है । ,वण्डनमेडु के नीलाम केन्द्र में विश्व भर के व्यापारियों की भीड़ रहती है । ,इडुक्कि घने जंगलों तथा घास के चौगानों से युक्त वन प्रदेश है । ,भारत की स्थिति के बारे में बताने की आवश्यकता नहीं है । ,संशोधित आनुवांशिक खाद्य का प्रचलन दुनिया में तेजी से फैल रहा है । ,"अमेरिका इन खाद्य पदार्थों को निर्यात करने की जी - तोड़ कोशिश कर रहा है , क्योंकि इन खाद्य पदार्थों के उत्पादकों ने अमेरिका पर इस बात के लिए जबरदस्त दबाव बनाया हुआ है कि इनका ज्यादा से ज्यादा निर्यात किया जाये ।" ,लेकिन अनेक तरह की वैज्ञानिक जानकारियां मिलने के बाद पता चला है कि यह संशोधित खाद्य मानव उपयोग के काबिल कतई नहीं है । sg,भारत को इसकी सच्चाई जानकर इनके आयात को हतोत्साहित करना चाहिए । ,दूसरी ओर अमेरिका विश्‍व व्यापार संगठन के माध्यम से इनके निर्यात की भरपूर कोशिश में लगा हुआ है । ,1979 से 1994 तक अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के मुख्य नियंत्रक रहे हेनरी मिलर का कहना है कि इस क्षेत्र में अमेरिका की सरकारी एजेंसियों ने वही किया है जो उसके बड़े कृषि व्यापारियों ने चाहा । ,"अमेरिका में ही आनुवांशिक रूप से संशोधित खाद्यान्नों के फेडरल रेगुलेशन समीक्षक डेविड स्कबर्ट का कहना है कि हमें आश्‍चर्य होता है कि अमेरिका के ज्यादातर खाद्य नियंत्रक उन लोगों की सूचनाओं पर भरोसा कर रहे हैं , जो खुद बायोटेक फसलों के उत्पादक हैं और उनके द्वारा दिये गये आंकड़े किसी भी जर्नल में प्रकाशित नहीं हुए हैं , न गंभीरता से उनकी समीक्षा की गयी है ।" ,कंपनियों के हाथ में जमीन जाने की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए हमारी सरकारें भी कई कदम उठा रहीं हैं । ,भूमि हदबंदी कानूनों को शिथिल किया जा रहा है और भूमि का बाजार विकसित करने की कोशिश की जा रही है । ,"खेती में जिस तरीके से लगातार नुकसान हो रहा है और वह तेजी से घाटे की खेती बनती जा रही है , उसके चलते कई जगहों पर किसान खुद भी जमीन बेचने के लिए तैयार ( या मजबूर ) हो रहे हैं ।" ,"अगर कृषि सुधार नहीं किया गया , तो यह औद्योगिक विकास के रास्ते में भी बाधा खड़ी करेगा , क्योंकि उद्योग कच्चे माल के रूप में कृषि और मजदूरी पर ही निर्भर होते हैं ।" ,"हालांकि देश में कृषि का विकास असंतुलित है , जिससे छोटे किसान कम उत्पादन कर पाते हैं और फिर बाद में इससे पलायन कर जाते हैं ।" ,इन समस्याओं में गरीब ग्रामीणों में तेजी से बढ़ती जनसंख्या की समस्या भी अलग से जुड़ जाती है । ,इससे कृषि मजदूरों में पलायन की दर तेज हो जाती है । ,कृषि क्षेत्र में इन सारी बातों का परिणाम यह होता है कि किसानों और कारपोरेट पेशेवरों के बीच का अंतर बढ़ जाता है । sg,"भारत - अमेरिका ज्ञान पहल की नींव 2005 में ही रख दी गयी थी , जब डॉ. मनमोहन सिंह और जार्ज बुश ने कृषि टेक्नोलॉजी समझौते पर हस्ताक्षर किये थे ।" ,अपनी अमेरिका यात्रा पर अमेरिकी संसद के दोनों सदनों की संयुक्‍त बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत में हरित क्रांति ने लाखों लोगों को गरीबी से निजात दिलवाई । ,’ मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता हो रही है कि राष्‍ट्रपति बुश तथा मैंने कृषि क्षेत्र में भारत - अमेरिका सहयोग का दूसरा चरण आरंभ करने का फैसला किया है । ,"समझौते के बाद , भारत के कृषि वैज्ञानिकों का एक दल , इस कार्यक्रम पर अमल के तौर - तरीके तय करने के लिए , दिसम्बर 2005 में अमेरिका गया था ।" ,"कृषि क्षेत्र में भारत - अमेरिका ज्ञान पहल ऐसे समय शुरू हुई है , जब भारत की कृषि भयंकर दौर से गुजर रही है ।" ,"इस पहल के तहत भारत के कृषि क्षेत्र के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की व्यवस्था है , इसलिए यह भारत के लिए नितांत अहम है , लेकिन एक बात जिसका एहसास किसी को नहीं हो रहा कि जिस भारत की अस्सी फीसदी जनता लगभग सवा एकड़ जोत से जैसे - तैसे गुजर - बसर कर रही है , वहां इस नवीनतम अमेरिकी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कैसे होगा ।" sg,दूसरी हरित क्रांति का पूरा ताना - बाना अमेरिकी कृषि - व्यापार के हितों के इर्द - गिर्द बुना गया है । sg,बहुराष्‍ट्रीय कंपनियां ( और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद भी ) जो नयी टेक्नोलॉजी देने का प्लान बना रहीं हैं वह इतनी अत्याधुनिक है कि बड़ी संख्या में किसान उसके फायदे नहीं उठा सकेंगे । ,"हालांकि परिषद् ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह गुजारे लायक खेती से आगे ठेका - खेती की तरफ बढ़ रही है , पर हकीकत यह है कि खेती से , गुजारा चलाने वाली बात निकाल लेने की जो भारी सामाजिक - आर्थिक और राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी , इस पर देश में कोई कारगर बहस हुई ही नहीं है ।" ,एक किसान परिवार की 1993 में औसत आमदनी मात्र 2115 रूपये थी । ,दूसरे शब्दों में अगर हम यह मानकर चलें कि एक औसत खेतिहर परिवार में पांच सदस्य होते हैं तो 99 फीसदी किसान गरीब व निर्बल वर्ग में आ जायेंगे । ,और अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले कुछ सालों के दौरान सीमांत किसानों की वास्तविक आमदनी गिरकर दैनिक मजदूर के न्यूनतम वेतन से भी कम हो गयी है । ,क्या समय नहीं आ गया है कि किसान को भी हर महीने एक निश्‍चित धनराशि घर के लिए मिले ? ,कुल मिलाकर वह देश के लिए आर्थिक संपदा का उत्पादन कर रहा है और उसे पर्याप्‍त हर्ज़ाने की जरूरत है । ,कृषि क्षेत्र में आर्थिक स्थायित्व का एक ही रास्ता है कि छठे वेतन आयोग का दायरा बढ़ाकर उसमें किसानों को भी शामिल करें या फिर उनके लिए अलग से वेतन आयोग का गठन करें । ,न्यूनतम भूमि को आधार बनाया जाये और उत्पादन से वास्ता न रखा जाये । ,"एक तरफ वे लोग हैं , जिनके जेहन में रोमांटिक किस्म का एक गांव है , जिसमें सब कुछ ठीक चल रहा है ।" ,वे चाहते हैं कि यह सीन बदलना नहीं चाहिए । ,पुराने किस्म के नक्सलवादियों से लेकर नए किस्म के एनजीओ तक सब यही कह रहे हैं । pl,"पोस्टर , बुकलेट , गाने , धरना , प्रदर्शन , ये सब इनके द्वारा चलाए जा रहे हैं ।" ,विरोध अब खुद में एक बड़ा कारोबार है । ,इन्हें यह नहीं दिखाई पड़ता कि खेती से आमदनी लगातार कम होती जा रही है । ,"खेती से जीवन स्तर को ऊंचा उठाना तो दूर NULL , उसे बचाए रखना मुश्किल है ।" ,"वे यह देखने में असमर्थ हैं कि आज के किसानों की अगली पीढ़ी को जिस दुनिया का सामना करना है , उसमें रोमांटिक किस्म के गांव नहीं हैं , बल्कि बाजार संचालित कारोबार है ।" ,"अतिवादिता के दूसरे छोर पर वे लोग हैं , जो मानकर चलते हैं कि सरकार को सिर्फ पूंजीपतियों और उद्योगपतियों का एजेंट होना चाहिए ।" ,"टाटा को जमीन चाहिए , तो सरकार को दिलवानी चाहिए ।" ,"इंडोनेशिया के किसी उद्योगपति को जगह चाहिए , तो सरकार को दिलवानी चाहिए ।" ,"जमीन दिलवाना भले ही सरकार की जिम्मेदारी हो , पर उचित शर्तें तय करना किसकी जिम्मेदारी है ?" sg,उद्योग वाले कोई खैरात का काम नहीं कर रहे । sg,वे धंधे के लिए जगह मांग रहे हैं । ,"उद्योगपति जिस जमीन को हासिल करते हैं , उसके भाव कुछ ही वर्षों में आसमान छूने लगते हैं ।" ,इसका फायदा किसानों को नहीं होता । ,किसानों को समझाया जाना ज़रूरी है कि जमीन देना उनके लिए कैसे फायदे का सौदा है । ,"करीब 40,000 अंडों का वजन केवल एक आउंस के लगभग होता है ।" ,ये अंडे जलवायु के अनुसार 3 से 7 दिन के भीतर लारवा ( कैटरपिलर ) में परिवर्तित हो जाते हैं । ,एक नया कैटरपिलर केवल 1/4 इंच लंबा होता है परंतु यह इतना पेटू होता है कि अत्यधिक शहतूत की पत्‍तियाँ खाकर शीघ्र ही बढ़ने लगता है । pl,"एक कैटरपिलर अपने वजन से 7,000 - 9,000 गुना शहतूत के पत्‍ते खा जाता है ।" ,कैटरपिलर अपने बढ़ने की क्रिया में बार - बार अपनी त्वचा बदलता है ताकि वह बढ़ते हुए आकार को ढक सके । ,"इस प्रकार 30 - 35 दिन तक शहतूत के पत्‍ते खाकर यह श्‍वेत - स्लेटी रंग का कैटरपिलर बन जाता है और इसकी लंबाई 3 / 1 / 2 "" और चौड़ाई 1 / 4 "" हो जाती है ।" ,उसके बाद यह कैटरपिलर हल्के गुलाबी रंग का पारदर्शक कीड़ा बन जाता है तब इसकी खाने में रुचि कम हो जाती है । ,प्रत्येक कीड़े में दो ग्रंथियाँ पायी जाती हैं जो कीड़े के सिर वाले भाग में जबड़े के नीचे स्थित होती हैं । pl,रेशम का कीड़ा दोनों ग्रंथियों पर दबाव डालकर निरंतर रेशम के दो तंतु बनाता है । ,यदि हम सूक्ष्मदर्शी ( microscope ) से इस महीन रेशे को देखें तो ज्ञात होगा कि यह रेशा दो तंतुओं का बना होता है । ,इन महीन तंतुओं को ब्रिन ( brin ) कहते हैं । ,ये दो पतले रेशम के तंतु स्पिनिंग हैड में सैरिसिन द्वारा जुड़कर एक ही साथ बाहर निकलते हैं जिसे वेब ( bave ) कहते हैं । ,ये रेशम के रेशे तिकोने होते हैं और इनमें अणु श्रृंखलाएं सूक्ष्म ( micro ) और स्थूल ( macro ) तंतुकों ( fibrils ) के रूप में व्यवस्थित अवस्था में उपस्थित होती हैं । ,एक रेशम का कीड़ा 46 मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से रेशे का निर्माण करता है । ,यह कहना अधिक उपयुक्‍त होगा कि पूरा तंतु बनाने में आठ अंक को वह करीब 12 लाख बार रेशम के धागे से लिखता है । ,रेशा बनाने की क्रिया में कीड़े का वजन कम हो जाता है और कोकून के भीतर कैटरपिलर क्राइसेलिस ( प्यूपा ) में बदल जाता है और फिर दो सप्‍ताह में मॉथ ( moth ) बन जाता है । ,अब इस अवस्था में रेशम कीट एक प्रकार के क्षारीय पदार्थ को निकालकर उसके द्‍वारा कोकून के कुछ भाग को घोलकर छिद्र बना देता है और इस छिद्र से कीड़ा कोकून से बाहर निकल आता है । ,परंतु हम सेरीकल्चर फार्म में क्राइसेलिस को बाहर नहीं निकलने देते । sg,उसके निकलने से पूर्व ही कोकून को हल्की भाप में रखकर रेशम कीट को कोकून के भीतर ही मार देते हैं । ,इस क्रिया को स्टोविंग ( stoving ) कहते हैं । ,स्टोविंग की क्रिया में रेशम कीट कोकून के भीतर ही मर जाता है परंतु रेशम के रेशे या कोकून को भाप से किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुँचता । ,कोकून का रंग व आकार रेशम कीट के खाने और जलवायु पर ( जिसमें उसका पालन किया जाता है ) निर्भर करता है । ,चीन में रेशम के कीड़े से प्राप्‍त कोये प्रायः सफेद रंग के होते हैं क्योंकि वहाँ पर कैटरपिलर सफेद शहतूत के पत्‍ते खाते हैं । ,जापान तथा यूरोप में कोकून क्रीम व हल्के पीले रंग के होते हैं क्योंकि वहाँ पर कैटरपिलर कैस्टर आयल पौधों ( castor oil plant ) के पत्‍ते खाकर अपने अंदर टैनिन ( tannin ) नामक पदार्थ सोख लेते हैं । pl,जापान में हल्के हरे रंग के कोकून भी पैदा किए जाते हैं जिसके कैटरपिलर हरी पत्‍तियाँ खाते हैं । ,भारत में सफेद कोकून के अतिरिक्‍त स्लेटी तथा हल्के भूरे रंग के कोये भी पाए जाते हैं । ,लच्छियों की चमक तथा कोमलता में अंतर को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि प्रत्येक रेशा दो महीन तंतुओं ( brins ) से बनता है और ये तंतु सैरिसिन गोंद से जुड़े होते हैं । ,अतः हम कह सकते हैं कि प्रत्येक रेशा मुख्यतया दो रासायनिक पदार्थों से बना है : पहला तरल पदार्थ के रूप में फिब्रॉयन जो स्पिनरेट से निकलकर हवा के संपर्क में आकर सूख जाता है और दूसरा पदार्थ सैरिसिन गोंद है । ,प्रत्येक रेशे में करीब 75 % फिब्रॉयन तथा 25 % सैरिसिन होता है । pl,"हमारे देश में चार प्रकार के रेशम पैदा किए जाते हैं : मल्बरी रेशम , टसर , ऐरी और मूंगा ।" ,केवल भारत ही ऐसा देश है जहाँ सुनहले पीले रंग का मूंगा रेशम पैदा किया जाता है । ,"भारत में शहतूत ( mulberry ) रेशम कीट का पालन कई स्थानों पर होता है जैसे : असम के पहाड़ी इलाकों , बंगाल , कोनूर , तमिलनाडु , देहरादून तथा हिमाचल प्रदेश ।" ,"कश्मीर में यूनिवोल्टाइन तथा बाइवोल्टाइन रेशम कीट NULL , पश्‍चिम बंगाल में बढ़िया किस्म के मल्टीवोल्टाइन रेशम कीट तथा कर्नाटक में मल्टीवोल्टाइन रेशम कीट का पालन होता है ।" ,"हमारे देश में लगभग 90 % शहतूत ( mulberry ) रेशम पैदा किया जाता है और शेष 10 % वन्य सिल्क ( wild silk ) टसर , ऐरी तथा मूंगा पैदा किया जाता है ।" ,"जब से देश में सिल्क बोर्ड ( Silk Board ) की स्थापना हुई , सिल्क उत्पादन में वैज्ञानिक तरीकों से काफी तरक्की हुई है ।" ,"ऐसे रेशम कीट जिनसे टसर रेशम प्राप्‍त होता है , देश के उष्ण तथा शीतोष्ण जलवायु वाले भागों में पैदा होते हैं ।" ,"इनके कोकून प्रायः अंडाकार , सख्त व भूरे रंग के होते हैं ।" ,"टसर रेशम का कैटरपिलर शहतूत के पत्‍तों की जगह ओक ( oak ) पेड़ के पत्‍ते खाता है , संभवतः इसके कोकून का रंग पत्तों का टैनिन सोखने के कारण ही भूरा होता है ।" ,टसर रेशम कीट को कोकून के भीतर मारने की आवश्यकता नहीं पड़ती और लंबे रेशे आसानी से मिल जाते हैं । ,परंतु टसर के रेशे मल्बरी सिल्क के रेशे की अपेक्षा मोटे तथा सख्त होते हैं और इनमें सैरिसिन की मात्रा भी मूंगा तथा ऐरी रेशम से ज्यादा होती है । ,यह सुनहले रंग का रेशम मल्टीवोल्टाइन वर्ग के रेशम कीड़ों से प्राप्‍त होता है । ,ऐसा रेशम कीड़ा विशेषरूप से असम में पाया जाता है । ,इस रेशम कीड़े के कोकून बंद होते हैं और उन पर बाहरी परत ( Shell ) काफी पतली होती है । ,एक कोकून का भार करीब 6.3 ग्राम होता है जिसमें पतली परत का केवल 0.5 ग्राम होता है । ,यह सफेद या लाल रंग का रेशम है जो मल्टीवोल्टाइन वर्ग के रेशम कीड़ों से प्राप्‍त होता है । ,"ऐसे कीड़ों का पालन असम , बिहार , बंगाल , मणिपुर , उड़ीसा तथा त्रिपुरा में किया जाता है ।" ,इन कीड़ों के कोकून कुछ लंबे आकार के होते हैं । ,एक कोया का भार केवल 3 ग्राम होता है । ,इन कोयों की विशेषता बहुरूपी रंग बदलना है । ,ऐरी सिल्क के कोयों के खुले मुंह होने के कारण इनसे निकले हुए रेशों की रीलिंग नहीं कर सकते । ,सुधा - मम्मी फोन लो । ,ज्योति - किसका है ? ,सुधा - मामा हैं । ,ज्योति - कौन से मामा । ,सुधा - बात तो करो । ,ज्योति - कानूनी तौर पर मारी गयी बहन से क्या बलिदान चाहते हो ? ,अब क्या बचा है ? ,कब्र के मुर्दे की याद कैसे आयी ? ,जगप्रकाश - गलती का एहसास हो गया है । ,दीदी तुम भूली ही कब थी । ,ज्योति - मां - बाप के मरने के बाद भला मेरी याद क्यों आयेगी ? ,बाप की छोड़ी दौलत पर कब्जा करने के लिये मेरी मौत का हलफनामा कौन से रिश्ते की गवाही करता है । ,मेरे कानूनी कत्ल से तुम भाईयों और सौतेली मां की हवस पूरी नहीं हुई तो अब कैसे होगी । ,जगप्रकाश - दीदी तुम्हारे कानूनी कत्ल के अपराधी सौतेली मां सहित हम तीनों भाई भी हैं । ,ज्योति - तुम सबका मां - बाप की दौलत पर कब्जा तो हो गया ना । ,अब तो मुझे चैन से जी लेने दो तुम लोग । ,बाप की जमींदारी में हिस्सा तो मुझे नहीं चाहिये था । ,इसके बाद भी तुम लोगों ने साजिश रचकर कानून की नजरों में मुझे मरी हुई साबित कर दिया । ,क्या यह काली करतूत भाई - बहन के रिश्ते को खत्म करने के लिये कम है ? ,जिस बहन को भाईयों ने कागजी मौत दे दी हो उस बहन का मायका कसाईखाना के सिवाय और क्या हो सकता है ? ,जगप्रकाश - दीदी ऐसा न कहो । ,रिश्ते ऐसे तो खत्म नहीं होते । ,गलती हुई है लालच में आकर । ,दीदी रिश्ते का धागा न टूटा है और ना कभी टूट सकता है । ,ज्योति - तुम लोग चाहते तो मै लिखकर दे देती कि मुझे मां - बाप की दौलत में हिस्सा नहीं चाहिये । ,कानूनी तौर पर मैं निरापद मरती नहीं और न खून का रिश्ता खत्म होता । ,जगप्रकाश - रिश्ते के धागे को बड़े भाई साहब और छोटी मां ने तोड़ा है । ,उन्हें डर था कि तुम बाप की छोड़ी पन्द्रह लाख की रकम और अचल सम्पति में हिस्सादार बनोगी । ,इसलिये तुम्हारी मौत का हलफनामा पेश हुआ । ,बाप की चल - अचल सम्पति चार बराबर हिस्सों में बंट गयी । ,ज्योति - तुम हो या छोटी मां या बाकी दोनों भाई सब मेरी नजरों में अपराधी हो । ,अरे पूछ कर तो देखते । ,"एक लड़की को मायके का कुत्ता भी प्यारा लगता है , भाई और उनके परिवार के लोग कितने प्यारे होंगे ।" ,खैर तुम लालची लोग कहां सोच सकते हो । ,जगप्रकाश - बाप के मरने के पहले और बाद में भी घर का मालिकाना तो भाई हठप्रकाश के हाथों में था । ,दीदी ये सब हठप्रकाश भईया और छोटी मां का किया कराया है । ,ज्योति - किसका किया कराया है हमें जानकर क्या करना है । ,मैं तो अब अपने सगे मां - बाप की नाजायज औलाद हो गयी हूं । ,खैर छोड़ो फोन क्यों किया है । ,जगप्रकाश - तुम्हारे चरणों की धूल माथे चढ़ाना चाहता हूं एक मौका दे दो दीदी । ,ज्योति - मुझ अभागिन के ऐसे कहां भाग्य होंगे । ,जगप्रकाश - दीदी इतना कठोर ना बनो । ,ज्योति - अब न तो कोई हक तुम लोगों पर बचा है और न कोई रिश्ता । ,जगप्रकाश - बाप के मरने के बाद परिवार में कलह शुरू हो गयी है । ,कुछ जमीन पर छोटी मां का कब्जा हो गया है । ,बाप की आधी से अधिक दौलत पर कब्जा हो गया है थोड़ी बहुत जो रकम बैंक में थी उसमे चार बराबर के हिस्से हुए । ,छोटी मां अपने भतीजों को मोटर साइकिल गिफ्ट कर रहीं हैं । ,अनाज की गाड़ियाँ छोटी मां अपने मायके और बहन के घर भेज रहीं हैं । ,छोटी मां बाबूजी के मरने के बाद रिश्ते के सारे धागे तोड़कर स्वार्थ पर उतर गयीं हैं । ,"सब कुछ बिखर चुका है , दीदी तुम टूटे रिश्ते को जोड़ सकती हो ।" ,ज्योति - टूटे रिश्ते जुड़ते नहीं अगर जुड़ भी जायें तो गांठ पड़ जाती है । ,जगप्रकाश - ऐसा ना कहो । ,दीदी खून के रिश्ते ऐसे नहीं चटकते । ,ज्योति - जानती हूं पर मेरा कत्ल जिस तरीके से हिस्सेदारी खत्म करने के लिये हुआ है वह तो अक्षम्य अपराध है । ,जगप्रकाश - दीदी हम तुम्हारी चौखट पर माथा पटकने आ रहे हैं । ,ज्योति - मेरी चौखट से कुत्ते भी भूखे नहीं जाते । ,मेरे मायके वाले कैसे जा सकते हैं भले ही जीते जी वे मुझे मार डाले हों । ,जगप्रकाश - धन्यवाद दीदी । ,तुम्हारा उपकार नहीं भूलूंगा । ,ज्योति - औरत लाख जख्म खाकर उपकार करने के लिये पैदा हुई है । ,जगप्रकाश - अगस्त माह में नौ तारीख को तुम्हारी चौखट पर माथा पटकने हम तीनो भाई आ रहे हैं । ,फोन रखता हूं दीदी । ,ज्योति - ठीक है रख दो । ,नौ अगस्त का दिन महीने भर बाद आ गया । ,कलेण्डर को देखकर ज्योति बोली बिटिया सुधा आज नौ तारीख है ना । ,सुधा - हां मम्मी आज नौ तारीख है और रक्षा - बंधन भी । ,ज्योति - अब समझी वो जगप्रकाश नौ तारीख को क्यों आने की जिद कर रहा था । ,सुधा - बांध देना फिर से रिश्ते का धागा । ,मैं मिठाई लेकर आती हूं । ,अभिनन्दन - ला दूंगा । ,पापा के पैसे तो खर्च करने हैं । ,अभिनन्दन और वन्दन एक स्वर में बोले बड़े होकर सब भरपाई कर देगें दीदी । ,सुधा - कोई नहीं कर पाया है तो तुम कैसे कर सकते हो ? ,वन्दन - दीदी इमोशनल ना करो । ,सुधा - सच तो कह रही हूं मां - बाप का कर्ज आज तक कोई भरपाई नहीं कर पाया है तो तुम कैसे कर पाओगे । ,अभिनन्दन - दीदी हम लोगों का मतलब कुछ और था । ,अब आप जाओ । ,हम दोनों नन्हें आपसे हारे दीदी । ,बस मिठाई अच्छी लाना । ,सुधा घण्टे भर में मिठाई श्रीफल और पूजा सामग्री लेकर आ गयी । ,दोनों भाईयों अभिनन्दन और वन्दन को शुभ मुहर्त में राखी बांधकर उठी ही थी कि काल - बेल घनघना उठी । ,सुधा - मां दरवाजा खोलो । ,कोई आया है । ,आज नौ तारीख है । ,ज्योति - तुम खोलो जी । ,तुम्हारे कोई लेखक मित्र होंगे । ,तुम्हारे हाथ में बंधी राखी देखकर उन्हें अच्छा लगेगा । ,अभिजीत - मजाक ना उड़ाओ जाकर दरवाजा खोलो । ,ज्योति - ठीक है । ,वह दरवाजा खोली बाहर झांककर जोर से बोली अरे बाप रे । ,दरवाजे पर बड़ी सी कार खड़ी है । ,"जगप्रकाश , रत्नप्रकाश और हठप्रकाश हम आये हैं" ,आज नौ तारीख है । ,"चम्पा , चमेली और चांदनी ननद जी आज रक्षा बंधन है ना ।" ,जगप्रकाश - दीदी अन्दर आने को नहीं कहोगी । ,इतना सुनते ही ज्योति की आंखों से गंगा - जमुना की धारा बह गयी । ,वह काष्ठ की मूर्ति की तरह खड़ी टकटकी लगाये हुए भाई - भौजाइयों और भतीजों को निहार रही थी । ,ज्योति को चुप देखकर अभिजीत बाहर निकले तीनों सालों और उनके परिवार को देखकर बोले आप लोग बाहर क्यों खड़े हैं अन्दर तो आइये । ,ज्योति - सुधा बिटिया पानी पिलाओ । ,सुधा - मम्मी अभी शुभ मुहूर्त चल रहा है पानी बाद में । ,थामो थाली । ,ज्योति - अपने कानूनी हत्यारों को कैसे रिश्ते का कच्चा सूत बांधूगी ? ,ये कच्चे सूत की महिमा क्या समझेगें ? ,फिर मतलब आते ही लतिया देगें । ,"जगप्रकाश , रत्नप्रकाश और हठप्रकाश , चम्पा , चमेली और चांदनी एक साथ बोले अब ऐसी गलती नहीं होगी ।" ,क्षमा करो । ,अभिजीत - भागवान आज नौ अगस्त है । ,बहुत शुभ दिन है । ,बरसों के बिछुड़े भाई मिले हैं । ,अशुभ बातें ना करो । ,लपेट दो कच्चे सूत भाईयों की कलाई पर अपना पुर्नजन्म समझकर । ,रिश्ते का धागा इतना कमजोर नहीं होता कि एक झटके में हमेशा के लिये टूट जाये । ,सुधा - हां मम्मी पापाजी ठीक कह रहे हैं । ,जोड़ दो टूटे रिश्ते के धागे को कच्चा सूत तीनों मामा की कलाईयों पर बांधकर । ,अभिजीत - भागवान देर ना करो । ,मुहूर्त निकला जा रहा है । ,ज्योति - लाओ सुधा बिटिया पूजा की थाली । ,औरत तो सदा से बलिदान करती आ रही है । ,एक बार और बलिदान कर देती हूं खून के रिश्ते के लिये । ,अभिजीत - कसकर बांधना ताकि रिश्ते का धागा ढीला न पड़े । ,"जगप्रकाश , रत्नप्रकाश और हठप्रकाश , चम्पा , चमेली और चांदनी एक स्वर में बोले हम कसम खाते हैं अब कभी रिश्ते का धागा ढीला नहीं होगा बहनोई चाहे कोई भी कुर्बानी देनी पड़े ।" ,इतना सुनते ही ज्योति की आंखों में सावन भादों उमड़ पड़े । ,"कुछ रोगियों में , बुखार किसी दवा से एलर्जी के कारण भी हो सकता है ।" sg,चिकित्सक को इस संभावना को भी ध्यान में रखना चाहिए कि टीबी का निदान गलत किया जा रहा है । ,"अगर रोगी के उपचार को दो सप्ताह से ज्यादा समय हो चुका है और बुखार शुरू में चला गया था , फिर से हो गया है , तो ऐसी स्थिति में टीबी की सभी दवाओं को 72 घंटे के लिए रोक देना उचित है ।" ,"अगर टीबी की सभी दवाएं बंद कर देने के बाद भी बुखार बना रहता है , तो बुखार दवाओं के कारण नहीं है ।" ,अगर दवाएं बंद करने से बुखार चला जाता है तो अलग अलग हर दवा का परीक्षण किया जाना चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन सी दवा बुखार का कारण है । ,दवा से होने वाले हैपेटाइटिस के लिए भी इसी तरीके ( नीचे वर्णित ) का उपयोग किया जाता है । ,अक्सर यह बात सामने आती है कि बुखार के लिए उत्तरदायी दवा आरएमपी होती है : इसका विस्तृत विवरण रिफाम्पिसिन पर प्रविष्टि में दिया गया है । ,"टीबी के इलाज से होने वाली एकमात्र सबसे बड़ी समस्या है दवाओं के कारण हैपेटाइटिस हो जाना , जिसमें मृत्यु दर लगभग 5 प्रतिशत होती है ।" ,"तीन दवाएं हैपेटाइटिस को प्रेरित कर सकती हैं : पीजेडए , आईएनएच और आरएमपी ( आवृति के घटते हुए क्रम में ) ।" ,लक्षणों के आधार पर इन तीन कारणों के बीच विभेदन करना सम्भव नहीं है । ,कौन सी दवा इसके लिए उत्तरदायी है इसकी जांच के लिए परीक्षण खुराक दी जानी चाहिए ( इसका विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है ) । ,"उपचार की शुरुआत में लीवर फंक्शन टेस्ट ( एलएफटी ) किया जाना चाहिए , लेकिन , अगर यह सामान्य है तो दुबारा इसकी जांच करने की आवश्यकता नहीं होती ।" ,रोगी को केवल हैपेटाइटिस के लक्षणों के बारे में चेतावनी दे दी जाती है । ,"कुछ चिकित्सक उपचार के दौरान एलएफटी के नियमित परीक्षण पर जोर देते हैं और इस मामले में , परीक्षण उपचार शुरू किये जाने के दो सप्ताह बाद ही किया जाता है और इसके बाद हर दो महीने बाद यह जांच की जाती है , जब तक कोई समस्या न दिखाई दे ।" ,आरएमपी उपचार के साथ बिलीरूबिन के बढ़ने की संभावना होती है ( आरएमपी बिलीरूबिन के उत्सर्जन को अवरोधित करता है ) RD_PUNC ,आमतौर पर यह समस्या 10 दिनों के बाद हल हो जाती है ( इसकी क्षतिपूर्ति के लिए यकृत के एंजाइमों का उत्पादन बढ़ जाता है ) । ,बिलीरूबिन के स्तर के बढ़ने की सुरक्षापूर्वक उपेक्षा की जा सकती है । ,उपचार के पहले तीन सप्ताहों में यकृत ट्रांसएमिनेस ( एएलटी और एएसटी ) का बढ़ना सामान्य है । ,यदि रोगी में ऐसे कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं और इनमें से किसी भी स्राव का स्तर बहुत अधिक नहीं बढ़ता है तो कोई कार्रवाई करने की जरुरत नहीं है । ,"कुछ विशेषज्ञों का सुझाव है कि इनकी ऊपरी सामान्य सीमा से चार गुना वृद्धि को उपेक्षित किया जा सकता है , लेकिन इस संख्या के समर्थन में कोई प्रमाण नहीं है ।" ,कुछ विशेषज्ञों का विचार है कि उपचार को केवल तभी रोका जाना चाहिए अगर पीलिया नैदानिक रूप से स्पष्ट हो जाये । ,अगर चिकित्सकीय रूप से स्पष्ट हेपेटाइटिस प्रकट होता है तो सभी दवाओं को तब तक रोक दिया जाना चाहिए जब तक यकृत ट्रांसएमिनेस का स्तर समान्य न हो जाये । ,तपेदिक उपचार ,तपेदिक उपचार शब्द का उपयोग संक्रामक रोग तपेदिक ( क्षय या टीबी ) के चिकित्सकीय उपचार के लिए किया जाता है । ,"अगर सक्रिय तपेदिक का उपचार न किया जाये , हर तीन में से लगभग दो रोगियों की मृत्यु हो जाती है ।" ,"तपेदिक के जिन रोगियों का उपयुक्त उपचार किया जाता है , उनमें मृत्यु दर केवल 5 प्रतिशत होती है ।" ,"टीबी के लिए मानक उपचार में आइसोनियाज़िड , रिफाम्पिसिन ( इसे संयुक्त राज्य अमेरिका में रिफाम्पिन के नाम से भी जाना जाता है ) , पायराज़ीनामाईड और एथेमब्युटोल का उपयोग दो महीने के लिए किया जाता है ।" ,इसके बाद केवल आइसोनियाज़िड और रिफाम्पिसिन का उपयोग चार महीने के लिए किया जाता है । ,छह महीने बाद ऐसा माना जाता है कि रोगी का उपचार पूरा हो गया है । ,( हालांकि अभी भी 2 से 3 प्रतिशत मामलों में रोग के फिर से होने की संभावना होती है ) । ,इस सुषुप्त ( शरीर में छुपे हुए ) तपेदिक के लिए छह से नौ महीने तक केवल आइसोनियाज़िड से मानक उपचार किया जाता है । ,"अगर जीव ( रोगकारक ) को पूरी तरह से संवेदनशील माना जाता है , तो पहले दो महीने के लिए आइसोनियाज़िड , रिफाम्पिसिन और पायराज़ीनामाईड से उपचार किया जाता है ।" ,उसके बाद चार महीने के लिए आइसोनियाज़िड और रिफाम्पिसिन से उपचार किया जाता है । ,एथेमब्युटोल का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं होती है । ,तपेदिक के उपचार में काम आने वाली सभी पहली पंक्ति की दवाओं के मानक नाम अंग्रेजी के तीन अक्षरों के हैं और इनका संक्षिप्त रूप केवल एक अक्षर का है । ,"संयुक्त राज्य अमेरिका में सामान्यतः ऐसे नामों और संक्षिप्त रूपों का उपयोग किया जाता है , जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य नहीं हैं : रिफाम्पिसिन को रिफाम्पिन कहा जाता है और इसका संक्षिप्त रूप RIF है ।" ,स्ट्रेप्टोमाइसिन को आमतौर पर इसके संक्षिप्त रूप SM से जाना जाता है । ,इसी तरह से दवाओं के नामों का संक्षिप्तीकरण भी एक मानक तरीके से ही किया जाता है । ,"दवाओं की सूची उनके एक अक्षर वाले संक्षिप्त रूप का उपयोग करके बनायी जाती है ( ऊपर दिए गए क्रम में , जो मोटे तौर पर चिकित्सकीय उपयोग में उन्हें काम में लेने का क्रम है ) ।" sg,"इसके आगे एक संख्या उपसर्ग लगाया जाता है , जो उपचार के महीनों की संख्या को बताता है ।" ,एक सबस्क्रिप्ट आंतरायिक खुराक को बताता है ( जैसे so का अर्थ है एक सप्ताह में तीन बार ) और अगर कोई सबस्क्रिप्ट नहीं लगाया जाता तो इसका अर्थ है कि दवा की खुराक रोज दी जाएगी । ,"अधिकांश उपचार प्रक्रियाओं में शुरुआत में उच्च तीव्रता की प्रावस्था होती है , जिसके बाद एक निरंतर प्रावस्था होती है ( इसे एक समेकन प्रावस्था या उन्मूलन प्रावस्था भी कहा जाता है ) ।" ,"उच्च तीव्रता की प्रावस्था पहले दी जाती है , इसके बाद निरंतर प्रावस्था दी जाती है , दोनों प्रवास्थाओं को एक स्लेश के निशान के द्वारा अलग अलग कर दिया जाता है ।" ,"इसलिए इसका अर्थ है आइसोनियाज़िड , रिफाम्पिसिन , एथेमब्युटोल और पायराज़ीनामाईड रोज दो महीने के लिए इसके बाद आइसोनियाज़िड और रिफाम्पिसिन एक सप्ताह में तीन बार दी जाती हैं ।" ,इन मानक संक्षिप्त रूपों का उपयोग इस लेख के शेष हिस्से में किया गया है । ,दूसरी पंक्ति की दवाओं के छह वर्ग हैं जिनका उपयोग टीबी के उपचार में किया जाता है । sg,"तीन संभव कारणों से एक दवा को पहली पंक्ति के बजाय दूसरी पंक्ति में वर्गीकृत किया जाता है : यह पहली पंक्ति की दवा से कम प्रभावी हो सकती है ( उदाहरण , "" p "" - एमोनी सेलिसिलिक एसिड ) ; या , इसके कोई विषैले पार्श्व प्रभाव हो सकते हैं ( उदाहरण : साइकलोसेरिन ) ; या यह कई विकासशील देशों में उपलब्ध नहीं हो सकती है ( उदाहरण फ्लोरोक्विनोलोनेस ) ।" ,"अन्य दवाएं जो उपयोगी हो सकती हैं , परन्तु WHO की SLD की सूची में नहीं हैं :" ,"इन दवाओं को "" तीसरी पंक्ति की दवाएं "" माना जाता है और इन्हें यहां इसलिए सूचीबद्ध किया गया है क्योंकि वे या तो बहुत अधिक प्रभावी नहीं हैं ( उदहारण , क्लेरीथ्रोमाइसिन ) या क्योंकि उनकी प्रभाविकता अब तक साबित नहीं हुई है ( उदाहरण , लाइनज़ोलिड , R207910 ) ।" ,"रीफाब्युटिन प्रभावी है , लेकिन इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) की सूची में शामिल नहीं किया गया है क्योंकि अधिकांश विकासशील देशों के लिए यह गैर - व्यावहारिक रूप से महंगी है ।" ,50 सालों से ज्यादा समय से तपेदिक का उपचार संयोजन चिकित्सा के द्वारा किया जाता रहा है । ,"किसी दवा को अकेले इस्तेमाल नहीं किया जाता है ( सुषुप्त टीबी या कीमोप्रोफाइलेक्सिस के अलावा ) और जिन दवाओं को अकेले इस्तेमाल किया जाता है , उनके प्रति शरीर में तेजी से प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है और उपचार असफल रहता है ।" ,टीबी के उपचार के लिए कई दवाओं का एक साथ इस्तेमाल संभाव्यता पर आधारित है । ,"स्वतः उत्परिवर्तन की आवृति , जिसके परिणामस्वरूप एक विशेष दवा के लिए प्रतिरोध उत्पन्न हो जाता है , वह है : EMB के लिए 10 में एक , STM और INH के लिए 10 में 1 और RMP के लिए 10 में 1 ।" ,"जिस रोगी को व्यापक फुफ्फुसीय टीबी होता है , उसके शरीर में लगभग 10 जीवाणु होते हैं और इनमें संभवतया 10 EMB प्रतिरोधी जीवाणु , 10 STM प्रतिरोधी जीवाणु , 10 INH प्रतिरोधी जीवाणु और 10 RMP प्रतिरोधी जीवाणु होते हैं ।" ,"प्रतिरोध के उत्परिवर्तन अनायास और स्वतंत्र रूप से प्रकट होते हैं , इसलिए उसके एक ऐसे जीवाणु की शरण में जाने की संभावना , जो INH और RMP दोनों के लिए स्वतः प्रतिरोधी है , होती है ।" ,10 में 1 x 10 में 1 = 10 में 1 और उसके एक ऐसे जीवाणु की शरण में जाने की सम्भावना 10 में 1 होती है जो सभी चारों दवाओं के लिए अनायास प्रतिरोधी हो जाये । ,"यह निश्चित रूप से , एक सरलीकरण है , परन्तु यही संयोजन चिकित्सा को स्पष्ट करने का एक सही तरीका भी है ।" ,"आटोक्लेविंग कक्ष प्रयोगशाला का वह भाग होता है , जहां पोषक माध्यम को इस यंत्र से निर्जमीकृत किया जाता है ।" sg,कक्ष का यह भाग अन्य कक्ष की तुलना में बड़ा बनवाया जाना चाहिए । ,दोमुखी ऑटोक्लेव को इस प्रकार कक्ष में स्थापित करें कि एक हिस्सा माध्यम भण्डारण एवं ऑटोक्लेव कक्ष का पिछला हिस्सा ऑटोक्लेव कक्ष में खुले । ,भण्डारण एवं ऑटोक्लेव कक्ष में मध्य हिस्से को पूर्णतः सील करना चाहिए । sg,इस कक्ष में प्रयोगशाला के जीवाणुरहित भाग की तरफ 6 फुट की एक बड़ी फाइबर युक्‍त खिड़की रखें जो खुलने - बन्द करने वाली हो । ,इसका प्रयोग पोषक माध्यम को जीवाणुरहित करने के साथ - साथ संदूषित पोषक माध्यम को निर्जमीकृत करने में भी किया जाता है । sg,ऑटोक्लेव के पिछले हिस्से से माध्यम को ट्राली की सहायता से लोड करते हैं । ,इस ऑटोक्लेव को एलपीजी ( LPG ) अथवा बिजली दोनों से चलाया जा सकता है । ,निर्जमीकृत माध्यम को अगले द्वार से भण्डारण कक्ष में सीधे ले जा सकते हैं । ,हाल में हुए भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण का जैव - प्रौद्योगिकी उद्योग के विकास पर महत्वपूर्ण प्रभाव है । ,ऊतक संवर्धन द्वारा पौधों का सूक्ष्म - प्रवर्धन एक अत्यधिक सफल एवं जनप्रिय आर्थिक विकास का माध्यम सिद्ध हुआ है । ,"सूक्ष्म - प्रवर्धन तकनीक का विश्‍व - स्तर पर , विशेष रूप से औद्योगिक कृषि वाले राष्‍ट्रों में , व्यवसायीकरण हुआ है ।" ,प्राप्‍त आंकड़ों के अनुसार विश्‍व में 796 से अधिक व्यावसायिक कंपनियां इस प्रकार की गतिविधियों से जुड़ी हैं एवं इनकी संख्या बढ़ती ही जा रही है । ,लगभग 90 करोड़ पादपों का वार्षिक उत्पादन किया जा रहा है । pl,आज ऊतक संवर्धन उद्योग मुख्यतः पुष्प - कृषि एवं उद्यान - कृषि क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है । ,"वास्तव में , ऊतक संवर्धन उद्योग ही पुष्प - कृषि एवं उद्यान - कृषि उद्योग की रीढ़ है ।" ,पुष्प उपभोग मुख्यतः विकसित राष्‍ट्रों में होता है और यह अधिकतर सामाजिक आर्थिक एवं सांस्कृतिक कारकों पर निर्भर है । ,विश्‍व में ऊतक संवर्धन की कंपनियां बढ़ रही हैं तथा इस क्षेत्र में लगभग 90 करोड़ पौधों का उत्पादन हो रहा है । ,"विश्‍व में कृषि , उद्यान - पुष्प एवं वानिकी फसलों की रोपण - सामग्री की संभावित मांग 160 खरब पौध प्रतिवर्ष की है ।" ,सकल बाजार 40 खरब अमेरिकी डालर प्रतिवर्ष है । ,भारत में करीब 120 निबंधित कम्पनियां हैं परन्तु केवल लगभग 30 ही अपने उत्पादों सहित बाजार में विद्यमान हैं । ,वार्षिक उत्पादन अनुमानतः 5 करोड़ है । ,"सूक्ष्म प्रवर्धन में लागत मूल्य जैसे गुणनदर , स्थानांतरण चक्र , कामगारों की दक्षता , उत्पादन क्षमता कई कारकों से प्रभावित होती है ।" sg,निरंतर अनुसंधान एवं विकास के द्वारा व्यावसायिक रूप से लाभप्रद तकनीक का विकास कर लागत मूल्य कम किया जा सकता है । ,सूक्ष्म प्रवर्धन वहां पर बेहद लाभप्रद है जहां प्रवर्धन की अन्य विधियां कारगर नहीं हो जैसे स्ट्रॉबेरी अथवा उन पौधों में जहां सूक्ष्म प्रवर्धित पौध की उपज परंपरागत पौधों से अधिक हो जैसे केला या इलाइची । pl,"अति विशिष्‍ट जातियों के बड़े स्तर पर गुणन के लिए ऊतक - सवर्धन प्रौद्योगिकी को प्रदर्शित करने के लक्ष्य से जैव - प्रौद्योगिकी विभाग ने 1989 में दो ऊतक - संवर्धन पायलट - संयंत्र सुविधाएँ टाटा ऊर्जा शोध संस्थान ( टी.ई.आर.आई. ) , नई - दिल्ली तथा राष्‍ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला ( एन.सी.एल ) , पुणे में स्थापित की थीं ।" ,"ये दो सुविधाएं राष्‍ट्रीय सुविधाओं के रूप में , अति विशिष्‍ट वन - वृक्ष जातियों के ऊतक - संवर्धन द्वारा गुणन के मुख्य उद्देश्य से स्थापित की गयी थीं ।" ,प्रत्येक पायलट संयंत्र 10 लाख पादपों की उत्पादन क्षमता रखता था । ,प्रारंभिक आंकड़े बताते हैं कि 95 - 98 प्रतिशत सूक्ष्म प्रवर्धन पौध में सफलतापूर्वक वृद्धि भी होती है । ,अनेक स्थलों पर फील्ड टेस्टिंग चलाने का मुख्य लक्ष्य विभिन्न क्लोनों की अनेक कृषि - जलवायु क्षेत्रों में उपयोगिता का अध्ययन करना था । pl,"प्राप्‍त परिणामों से , एक विशेष स्थल पर श्रेष्‍ठतम वृद्धि कर रहे अति विशिष्‍ट क्लोनों को पहचाना गया है ।" sg,"लगभग सभी मामलों में , ऊतक संवर्धित पौधों में 90 प्रतिशत तक क्लोनीय समानता देखी गयी है ।" ,"ऊतक - संवर्धित पौधों का काष्‍ठ - आयतन 45 क्यू. मीटर / हैक्टर ऊंचा था एवं इसने 38.91 प्रतिशत अधिक काष्‍ठ - मूल्य प्राप्‍त किया , जिसका परिणाम 42 प्रतिशत अधिक शुद्ध लाभ हुआ ।" ,"विभिन्न पादप जातियों , विशेषतया वन - वृक्षों के फील्ड मूल्यांकन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ऊतक संवर्धित पौधों की आनुवंशिक निष्‍ठा की परीक्षा करना है ।" ,"वन - वृक्षों एवं अन्य पौधों के ऊतक संवर्धन द्वारा बड़े स्तर पर गुणन में , उनकी विभिन्न कृषि - जलवायु क्षेत्रों से संबंधित विशिष्‍ट आवश्यकताओं की दृष्‍टि में , दशानुकूलन प्रक्रिया एक मुख्य बाधा होती है ।" pl,इन मामलों के प्रभावी निस्तारण के लिए विभाग ने विशिष्‍ट कृषि जलवायुवीय क्षेत्रों में आवश्यकताओं को पूरा कर रही अपेक्षाकृत छोटी दशानुकूलन इकाईयों को प्रमुखता दी है । ,"किंतु जोधपुर , हिसार , अल्मोड़ा , कोलकाता , जम्मू एवं गुवाहाटी में छः दशानुकूलन इकाईयां स्थापित की गयी हैं ।" ,"प्रारंभ में , कार्यक्रम वन वृक्षों की जातियों पर केन्द्रित था जो बाद में उद्यान कृषि व रोपण फसलों तक विस्तृत हो गया ।" ,अध्ययन लगभग 65 विभिन्न जातियों पर केन्द्रित है एवं लगभग 20 जातियों के लिए संपूर्ण प्रौद्योगिकी के प्रोटोकोलों को मानकीकृत किया गया है । ,कुछ प्रोटोकालों का प्रक्षेत्र मूल्यांकन अभी भी किया जा रहा है एवं लगभग 10 जातियां व्यावसायिक स्तर पर सफलतापूर्वक उत्पादित की जा रही हैं । sg,इन जातियों के ऊतक संवर्धन द्वारा व्यावसायिक उत्पादन के लिए प्रौद्योगिकियों के उद्योग को स्थानान्तरित किया गया है । ,दैहिक भ्रूणोदभव द्वारा कायिक प्रवर्धन की सूक्ष्म प्रवर्धन तकनीक जरूर विकसित की गयी किन्तु इनसे उत्पन्न पौधों का दशानुकूलन नहीं किया जा सकता है । sg,इसलिए इस विषय पर शोध बन्द कर दिया गया है । ,"कॉफी , चाय व मसालों के मामलों में प्रवर्धन प्रोटोकॉल आज विकसित हो चुके हैं तथा इन फसलों के जैविक एवं अजैविक स्ट्रेस को नियंत्रित करने की आवश्यकता है , साथ - ही आण्विक चिह्न के द्वारा जनन - द्रव्य को सूचीबद्ध किया जा रहा है ।" ,विभाग की एक प्रमुख प्राथमिकता दशानुकूलन इकाईयों की स्थापना रही है जो विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करती हैं । ,एक अनुमान के अनुसार विश्‍व में लगभग 300 व्यावसायिक प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं । ,अधिकांश नई प्रयोगशालाओं की उत्पादन क्षमता 2 लाख पौध प्रति सप्‍ताह है । pl,"भारत में लगभग 125 सूक्ष्म प्रवर्धन प्रयोगशालाएं स्थापित की गयीं , जिनमें से 81 प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं एवं 44 बंद हो गयी हैं ।" ,"महाराष्‍ट्र में लगभग 25 , कर्नाटक में 9 , आंध्र प्रदेश में 6 , गुजरात एवं तमिलनाडु में 7 एवं केरल में 4 प्रयोगशालाएं चल रही हैं ।" ,नहरों द्वारा सिंचाई से निम्नलिखित लाभ हैं - sg,बाढ़ के अतिरिक्‍त पानी को बहाकर ले जाती है । sg,शुष्क प्रदेश में खेती संभव बनाती है । ,यह सिंचाई की स्थायी व्यवस्था है । sg,यह भूमि की उर्वरा शक्‍ति को बढ़ाती है । sg,समतल मैदानों में शीघ्र व सस्ती दर पर सिंचाई की सुविधा प्रस्तुत करती है । sg,यातायात की सुविधा प्राप्‍त की जा सकती है । ,अकाल का भय समाप्‍त हो जाता है । ,नहरों द्वारा सिंचाई से निम्नलिखित हानियाँ भी होती हैं । ,नहरी क्षेत्रों में मलेरिया फैल जाता है । ,नहरी पानी पर किसानों में झगड़े होते हैं । ,नहरों के टूटने पर निकटवर्ती क्षेत्रों में पानी भर जाता है । ,इनमें आवश्यकतानुसार एवं नियमित रुप से पानी नहीं मिलता है । ,भारत में सिंचाई के लिए कुओं का प्रयोग अत्यन्त प्राचीन काल से ही होता आ रहा है आज भी यह सिंचाई का सबसे लोकप्रिय साधन है । ,कुएं मुख्य रुप से दो तरह के होते हैं - सतही कुएं तथा उप सतही कुएं या नलकूप । ,इससे निम्नलिखित लाभ हैं - pl,कम लागत से कुओं को खुदवाया जा सकता है । ,भूमि की उर्वरा शक्‍ति में वृद्धि होती है । ,पानी के मामले में किसान आत्मनिर्भर हो जाता है । ,इससे निम्नलिखित हानियाँ भी हैं - ,सूखा पड़ने पर कुएं भी सूख जाते हैं । ,"जहाँ पर जलस्तर नीचा होता है , वहाँ कुआं खुदवाने की अधिक लागत आती है ।" ,खारा पानी जो अक्सर कुओं में पाया जाता है । ,फसल के लिए हानिकारक होता है । ,"नलकूप कृषि सिंचाई का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम है , इससे विद्युतशक्‍ति के द्वारा सिंचाई के लिए पानी निकाला जाता है ।" ,नलकूपों द्वारा की गयी सिंचाई से निम्नलिखित लाभ होते हैं । ,"किसानों का अपना श्रम बच जाता है , तथा उन्हें अधिक पशु भी नहीं रखने पड़ते ।" sg,"जिन स्थानों पर नहरों का पानी कम रह जाता है , वहाँ नलकूप नहरों के पूरक के रुप में काम करते हैं ।" ,"नहरों की तुलना में कुओं का पानी अधिक लाभदायक होता है , क्योंकि उसमें कई तत्त्व व रसायन होते हैं , जो भूमि की उर्वरा शक्‍ति को बनाए रखते हैं ।" ,इसमें आवर्तक संचालन व्यय कम होता है । ,इससे निश्‍चित व नियमित सिंचाई संभव है । ,यह बड़े पैमाने की खेती के लिए उपयुक्‍त है । ,"नलकूपों द्वारा की गयी कृषि सिंचाई के अन्तर्गत एक कमजोरी यह है , कि इस हेतु अत्यधिक वित्त की जरूरत होती है जो निर्धन किसान नहीं कर पाता ।" pl,कृषि विज्ञान व प्रौद्योगिकी संबंधी कई महत्त्वपूर्ण संस्थाएं स्थापित की गई हैं । sg,जो कृषि के विकास हेतु व्यापक स्तर पर कार्य कर रही हैं । ,भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद - sg,लार्ड इरविन के कार्यकाल ( 1926 - 1931 ) में लिनलिथगो की अध्यक्षता में सन् 1926 में शाही कृषि आयोग गठित किया गया था । ,"आयोग की सिफारिशों के अनुसार कृषि विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी का विकास करने के लिए 23 मई , 1929 को ‘ इम्पीरियल काउन्सिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च ’ की स्थापना की गई थी ।" ,स्वतन्त्रता के उपरांत इस काउन्सिल का नाम ‘ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ’ कर दिया गया । ,भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकास में संलग्न शीर्षस्थ राष्‍ट्रीय संस्था है । ,"भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद , कृषि , पशुपालन और मत्स्यपालन आदि से सम्बद्ध शिक्षा , बोध और इसके अनुप्रयोग का कार्य स्वयं करता है , इसके लिए सहायता देता है , और प्रोत्साहित करता है , तथा इनमें समन्वय स्थापित करता है ।" ,कृषि विश्व विद्यालय का कृषि के विकास में व्यापक योगदान है । ,यहाँ कृषि सम्बन्धी समस्याओं पर शोध कार्य कर उनका निदान किया जाता है । ,कृषि विश्वविद्यालय और कालेज कृषि शोध की दृष्‍टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं । pl,"भारत में 1901 - 05 की अवधि में पुणे , कानपुर , सबौर , नागपुर , कोयम्बटूर और ल्यालपुर ( पाकिस्तान ) में कृषि कालेज स्थापित किये गये ।" ,तत्पश्‍चात कृषि कालेजों की सशक्‍त श्रृंखला बनी । ,भारत में ज्वाइंट इन्डो - अमेरिकन टीम की सलाह पर सन् 1960 में पंतनगर में प्रथम कृषि विश्‍वविद्यालय की स्थापना हुयी । ,तत्पश्चात इनकी संख्या बढ़ी । ,"अब भारत में कुल 33 राज्य कृषि विश्वविद्यालय , और इम्फाल विश्वविद्यालय केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय हैं ।" ,"रबर , कॉफी और चाय की फसलों से सम्बद्ध शोधकार्य उनके अपने परिषदों द्वारा किया जाता है ।" ,"हरित क्रान्ति के फलस्वरुप खाद्यान्नों के संदर्भ में जो आत्म - निर्भरता प्राप्‍त की जा सकी है , वह मुख्यतः विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र की सफलता की कहानी है ।" ,फीचर किसी भी सामयिक विषय पर लिखा जाता है । ,"मोटे तौर पर लेख , रूपक और फीचर में कोई अंतर नहीं है ।" ,"समाचार पत्रों में प्रकाशित लेख , रूपक और फीचर आमतौर पर सामयिक होते हैं ।" ,सरल सुबोध शैली में लिखे जाते हैं और जनता को खबरों के निहितार्थों के बारे में समझाते हैं । ,तथापि इनमें सूक्ष्म अंतर होता है । ,लेख अपेक्षाकृत गंभीर विषय पर लिखे जाते हैं । ,फीचर पत्रकारिता के क्षेत्र में एक नई विधा है । ,इसका तेजी से विकास हो रहा है । pl,पिछले कुछ वर्षों के दौरान इस विधा ने नई बुलंदियां प्राप्‍त की हैं । pl,"फीचर को भारतीय पत्रकारिता में विशिष्‍ट स्थान दिलाने का श्रेय ’ संडे ’ , ’ इंडिया टुडे ’ और ’ आउटलुक ’ पत्रिकाओं को है ।" sg,इन्होंने सार्वजनिक महत्व के अनेक विषयों पर फीचर प्रकाशित करके संबंधित विषय पर जनता का ध्यान आकृष्‍ट करने के साथ सरकार को कार्रवाई करने पर मजबूर किया । ,लेख और फीचर में अनेक समानताएं हैं । ,"दोनों सूचना को अधिक स्पष्‍ट करने , घटनाओं की समीक्षा करने और उन पर राय प्रकट करने के लिए लिखे जाते हैं ।" sg,दोनों जनमत बनाने का कार्य करते हैं । pl,लेख कभी फीचर के लक्षण ग्रहण कर लेता है । ,कभी फीचर लेख - सा लगने लगता है । ,"फीचर कई किस्म के होते हैं , जैसे उन समस्याओं से जुड़े , व्यक्‍तित्व संबंधी , पौराणिक , कुतूहलवर्धक , चित्रमय , मनोरंजक , साहसिक अभियान संबंधी , और यह व्यंग्यमय फीचर मनोरंजन के साथ सूचना प्रदान करता है ।" ,पाठकों की जिज्ञासा को जगाता है तथा उन्हें और अधिक पढ़ने की प्रेरणा देता है । ,"फीचर लिखने के लिए लेखक के पास असीम अनुभव , भाषा पर पूर्ण अधिकार के साथ ज्ञान का पिटारा होना आवश्यक है ।" sg,फीचर का मुख्य उद्देश्य पाठक को जटिल से जटिल विषय से संबंधित जानकारी सरल से सरल भाषा में अत्यंत दिलचस्प ढंग से देना है । ,कभी - कभी फीचर लिखते समय उसमें नाटकीय पुट दिया जाता है तो कभी मनोरंजक घटना से फीचर की शुरुआत की जाती है । ,अधिकांशत: फीचर लिखने में लघु कथा की शैली का प्रयोग किया जाता है । sg,कभी - कभी किसी आकर्षक उद्धरण से फीचर शुरू किया जाता है । ,"फीचर की विशेषता उसका लचीलापन , सरलता , सुबोधता और आकर्षक भाषा एवं चित्रावली है ।" ,फीचर का महत्व इस बात में है कि वह कभी भी किसी भी अवसर पर प्रकाशित किया जा सकता है । ,"अवसर नहीं , फीचर का अपना स्वरूप उसे महत्व प्रदान करता है ।" ,"तथापि , कुछ विशेष अवसरों पर भी फीचर किए जा सकते हैं ।" ,विश्‍व की पहली समाचार एजेंसी की स्थापना 1835 में चार्ल्स हवास ने फ्रांस में की थी । sg,1845 में कुछ अमेरिकी समाचार पत्रों ने मेक्सिको युद्ध के समाचार प्राप्‍त करने के लिए एक संगठन बनाया । ,यह अनुभव किया गया कि यह कार्य अकेले करना किसी समाचार पत्र के बस का नहीं है । ,इस प्रतियोगिता को टालने के लिए 1865 में इन एजेंसियों ने मिलकर काम करने का एक समझौता कर लिया । ,1872 में अमेरिकी समाचार एजेंसी न्यूयॉर्क एसोसिएटेड प्रेस भी इस समझौते में शामिल हो गई । sg,इन चार एजेंसियों ने विश्‍व को चार भागों में बांट लिया । ,"हवास एजेंसी को फ्रांस , इटली , स्पेन , पुर्तगाल , स्विट्जरलैंड तथा मध्य एवं दक्षिण अमेरिका दिए गए ।" ,रायटर को ग्रेट ब्रिटेन और समूचा ब्रिटिश साम्राज्य दे दिया गया । pl,रायटर और हवास को कुछ क्षेत्र संयुक्‍त रूप से दिए गए । ,ब्रिटिश समाचार एजेंसी रायटर 1858 में अस्तित्व में आई । ,अस्तित्व में आने के कुछ ही समय बाद यह भारत में समाचार देने वाली मुख्य एजेंसी बन गई । ,1860 में ’ बाम्बे टाइम्स ’ ने डाक से रायटर के समाचार प्राप्‍त करना शुरू कर दिया था । ,पहला भारतीय समाचार पत्र जिसने रायटर की तार सेवा लेनी शुरू की ’ बंगाली ’ था । ,यह बात सन् 1900 की है । ,अत: देशवासियों को नियमित प्रामाणिक और सही समाचार देने के लिए 1910 में एसोसिएटेड प्रेस ऑफ इंडिया की स्थापना की गई । ,यह समाचार एजेंसी शुरू करने का संपूर्ण श्रेय अनुभवी और वरिष्‍ठ पत्रकार के. सी. राय को जाता है । ,रायटर ने एक नई कंपनी ईस्टर्न न्यूज एजेंसी बनाकर 1915 में इस पर अधिकार कर लिया । ,एसोसिएटेड प्रेस ऑफ इंडिया का यह प्रबंध अनेक राष्‍ट्रवादियों को पसंद नहीं आया । ,"उनका दृढ़ मत था कि ब्रिटिश प्रभुत्व में काम करने वाली इस प्रकार की एजेंसी भारतीयों की इच्छाओं , आकांक्षाओं को कभी प्रकट नहीं कर सकती ।" ,इसी वर्ष पहली सितंबर को कलकत्ता के कुछ अखबारों के संयुक्‍त प्रयास से एक नई एजेंसी यूनाइटेड प्रेस ऑफ इंडिया ( यू. पी. आई. ) की स्थापना की गई । ,एसोसिएटेड प्रेस ऑफ इंडिया की कड़ी प्रतियोगिता के बावजूद इस एजेंसी ने विश्‍व की अनेक समाचार एजेंसियों के साथ सहयोग - समझौते किए । ,स्वतंत्रता प्राप्‍ति के समय रायटर समाचार एजेंसी और उसकी सहायक एसोसिएटेड प्रेस ऑफ इंडिया समाचार एजेंसी का देश में समाचारों के वितरण पर वर्चस्व था । ,यही कारण है कि उस समय प्रतिरक्षा लेखकों की अधिकांश भविष्‍यवाणियां गलत साबित हुईं । ,फिल्म ने रिलीज के पहले दिन शुक्रवार को 5.18 करोड़ रुपये जबकि शनिवार को 6.27 करोड़ रुपये कमाए । ,इस तरह दो दिनों में इसने 11.45 करोड़ रुपये कमाए । ,"वर्ष 1981 में प्रदर्शित हुई मूल चश्मेबद्दूर फिल्म में फारुक शेख , दीप्ति नवल , राकेश बेदी व रवि बासवानी ने अभिनय किया था , जबकि नए संस्करण के सितारों में ऋषि कपूर , अनुपम खेर , अली जफर , दिव्येंदु शर्मा व सिद्धार्थ , तापसी पन्नू और लिलेट दुबे शामिल हैं ।" ,सच है कि दर्शकों की रुचि और रुझान का सही अनुमान कोई भी नहीं लगा सकता । ,अपनी फूहड़ फिल्मों से कामयाब हुए साजिद खान को अहंकार था कि उनकी फिल्मों से दर्शकों का सीधा रिश्ता है । ,फिल्म समीक्षक भले ही उनकी फिल्मों की धज्जियां उड़ाते रहें । ,दर्शक उनकी फिल्में पसंद करते हैं । ,हिम्मतवाला ने उनके इस अंधविश्वास को तोड़ दिया । ,पिछले हफ्ते रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स आफिस पर पस्त दिख रही है । ,शुक्रवार को फिल्म को सामान्य ओपनिंग मिली और कलेक्शन 12 करोड़ के लगभग रहा । ,"निर्माता और वितरक को अनुमान था कि चलन के मुताबिक शनिवार और रविवार को कलेक्शन बढ़ेगा , लेकिन शनिवार को कलेक्शन 7 करोड़ के लगभग रहा ।" ,"रविवार को कलेक्शन थोड़ा बढ़ा , फिर भी शुक्रवार के 12 करोड़ से कम ही रहा ।" ,यह सबूत है कि दर्शकों ने फिल्म को नकार दिया है । ,साजिद खान की ' हिम्मतवाला ' को सिंगल स्क्रीन से ही थोड़ा सहारा मिला है । ,हिम्मतवाला का वीकएंड कलेक्शन लगभग 30 करोड़ रहा । ,पिछले हफ्ते रिलीज हुई तीन फिल्मों में सुभाष कपूर की ' जॉली एलएलबी ' सबसे आगे है । ,शुक्रवार को तीनों ही फिल्मों की ओपनिंग एक समान हल्की रही । ,शाम और रात के शो से ' जॉनी एलएलबी ' ने बढ़त बनाई और वीकएंड में बाकी दोनों फिल्मों से आगे निकल गई । ,जॉली एलएलबी का वीकएंड कलेक्शन 12.51 करोड़ रहा । ,बमन ईरानी और अरशद वारसी की फिल्म के लिए यह आंकड़ा संतोषजनक है । ,मेरे डैड की मारूति के भी दर्शक शनिवार और रविवार को बढ़े । ,नए स्टार साकिब सलीम की फिल्म ने 5 करोड़ से अधिक का कलेक्शन किया । ,नील नितिन मुकेश और सोनल चौहान की ' 3 जी ' का बुरा हाल रहा । ,इस फिल्म का वीकएंड 5 करोड़ से भी कम रहा । ,पिछले हफ्ते बॉक्स ऑफिस पर साहब बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स में नए किरदारों को दर्शकों ने पसंद किया । ,"सीक्वल , रीमेक और फ्रेंचाइजी के दौर में दर्शकों को भी इनका चस्का लग गया है ।" ,"वे किसी नई फिल्म के प्रति आशंकित दिखते हैं , जबकि ऐसी फिल्मों को देखने के लिए टूट पड़ते हैं ।" ,तिग्मांशु धूलिया ने दर्शकों की रुचि का खयाल रखते हुए पुरानी फिल्म का ही विस्तार किया । ,दो नए किरदार जोड़े और रोचकता बनाए रखी । ,इरफान खान के प्रशंसकों की तादाद बढ़ी है । ,दर्शक उनकी खास अदाओं को देखने जाते हैं । ,साहब बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स ने पहले वीकएंड में लगभग 13 करोड़ का कलेक्शन किया । ,"शुक्रवार को आरंभिक शो में दर्शकों की संख्या कम रही , लेकिन शाम के शो से दर्शक बढ़ते गए ।" ,शुक्रवार का साढ़े तीन करोड़ का कलेक्शन रविवार को पांच करोड़ हो गया । ,अंशुल शर्मा की सारे जहां से महंगा से खास उम्मीद नहीं थी । ,पिछले हफ्ते रिलीज हुई अभिषेक कपूर की काय पो छे को उम्मीद के मुताबिक बॉक्स ऑफिस पर उड़ान मिली । ,रिलीज से पहले इस फिल्म की काफी चर्चा थी । ,धुआंधार प्रचार से दर्शकों में जिज्ञासा बढ़ गई थी । ,"शुक्रवार को इस फिल्म का कलेक्शन साड़े चार करोड़ के लगभग रहा , जो रविवार को 7 करोड़ से अधिक हो गया ।" ,इन दिनों सफल फिल्मों के कलेक्शन का यही पैटर्न है । ,पहले दिन के कलेक्शन का डेढ़ गुना कलेक्शन रविवार को हो जाना चाहिए । ,इस लिहाज से जिला गाजियाबाद शुक्रवार के संतोषजनक कलेक्शन के बावजूद अगले दिनों में नहीं बढ़ सकी । ,शुक्रवार का साढ़े तीन करोड़ का कलेक्शन शनिवार को घटा और फिर रविवार को साढ़े तीन करोड़ पर ही अटक गया । ,अभिषेक कपूर की फिल्म काय पो छे ने पहले ही दिन बॉक्स आफिस पर करीब साढ़े चार करोड़ रुपये का कारोबार किया है । ,वहीं विदेशों में भी फिल्म ने बेहतर प्रदर्शन किया है । ,शुक्रवार को यह फिल्म देश भर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई थी । ,यूटीवी प्रोडेक्शन के बैनर तले बनी इस फिल्म की कुल लागत बारह करोड़ रुपये आई थी । ,फिल्म के डायरेक्टर गौरव वर्मा ने इसे फिल्म की बेहतर शुरुआत बताते हुए उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में भी यह फिल्म बेहतर कारोबार करेगी । ,विदेश में यह फिल्म करीब ढ़ाई सौ सिनेमाघरों में प्रदर्शित की गई है । ,"इनमें से सबसे ज्यादा अमेरिका में , जहां 109 सिनेमाघरों में यह फिल्म प्रदर्शित की गई , ब्रिटेन के 54 सिनेमाघर , खाड़ी देशों के 35 और आस्ट्रेलिया के करीब बारह सिनेमाघरों में यह फिल्म प्रदर्शित की गई है ।" ,दो दिनों में इस फिल्म ने विदेशों से एक लाख सत्तर हजार डॉलर का कारोबार किया है । ,इंटरनेशनल डिस्ट्रीब्यूशन एंड डिजनी मीडिया डिस्ट्रीब्यूशन के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अम्रिता पांडे के मुताबिक आने वाले दिनों में फिल्म और अधिक कारोबार करने में सफल रहेगी । ,इमरान हाशमी के दर्शकों में ज्यादा संख्या वैसे भी उनकी ही रहती है । ,दिल्ली के परिवेश को छूती इस फिल्म में इमरान हाशमी अपने रेगुलर किरदार से थोड़े अलग नजर आए । ,रणदीप हुडा और इमरान हाशमी के बीच के दृश्य फिल्म का आकर्षण बने । ,"इस फिल्म की ओपनिंग अच्छी रही थी , लेकिन शनिवार और रविवार को बाकी फिल्मों की तरह इसके दर्शक नहीं बढ़े ।" ,फिर भी लगभग 25 करोड़ के कलेक्शन से जन्नत - 2 सफलता की तरफ बढ़ रही है । ,पिछले हफ्ते रिलीज हुई दोनों छोटी फिल्मों को पर्याप्त दर्शक मिले । ,"दोनों ही फिल्मों में स्टार नहीं थे , लेकिन कहानी की नवीनता और बोल्डनेस ने दर्शकों को आकर्षित किया ।" ,विक्की डोनर मुख्य रूप से मैट्रो - मल्टीप्लेक्स में चल रही है । ,इस फिल्म में अन्नू कपूर की सभी तारीफ कर रहे हैं । ,हेट स्टोरी को सिंगल स्क्रीन के दर्शकों ने हाथों हाथ लिया । ,"महानगरीय दर्शक अंग्रेजी फिल्म में हेट स्टोरी जैसी बोल्डनेस देख चुके हैं , जबकि सिंगल स्क्रीन थिएटर के दर्शकों को अपनी भाषा में ऐसी फिल्म देखी ।" ,साजिद खान की हाउसफुल - 2 भी 100 करोड़ क्लब में पहुंच गई है । ,साल की दूसरी तिमाही भी अच्छी जा रही है बॉक्स आफिस पर । ,उम्मीद थी कि बिट्टू बॉस को दर्शक मिलेंगे । ,इस फिल्म के जबरदस्त प्रचार और प्रमोशन के तरीके से यह उम्मीद बढ़ी थी । ,सभी को यही लग रहा था कि एक नए स्टार पुलकित सम्राट का आगमन हो जाएगा । ,फिल्म की ओपनिंग साधारण रही । ,"आम तौर पर शनिवार और रविवार को कलेक्शन बेहतर होता है , लेकिन इस फिल्म के कलेक्शन में खास सुधार नहीं आया ।" ,"फिर भी इस फिल्म में तीन नए चेहरों को पहचान मिली - राजिन्दर सेठी , आशुतोष पाठक और पुलकित सम्राट ।" ,हाउसफुल 2 का कलेक्शन दूसरे हफ्ते में भी अच्छा रहा । ,फिल्म का नाम ही हाउसफुल है । ,साजिद खान निर्देशित इस फिल्म का टायटल सार्थक हो गया । ,हाउसफुल 2 को आम दर्शकों ने पसंद किया । ,कहते हैं अगर आईपीएल के इंटरेस्टिंग मैच नहीं होते तो दर्शक और बढ़ते । ,फिर भी पहले तीन दिनों में चालीस करोड़ से अधिक का कलेक्शन संतोषजनक है । ,"ज्यादातर समीक्षकों ने फिल्म की आलोचना की है , लेकिन दर्शकों को फिल्म अच्छी लग रही है ।" ,लंबे समय के बाद अक्षय कुमार को एक हिट फिल्म मिली है । ,अब ट्रेड पंडित अनुमान लगा रहे हैं कि हासउसफुल 2 कितनी जल्दी 100 करोड़ के क्लब में पहुंचती है । ,विशाल म्हाडकर निर्देशित ब्लड मनी से कोई खास उम्मीद नहीं थी । ,स्टार वैल्यू न होने की वजह से फिल्म के प्रति आकर्षण नहीं था । ,गानों और भट्ट कैंप के पब्लिसिटी स्टंट ने सिंगल स्क्रीन के दर्शकों की जिज्ञासा अवश्य बढ़ा दी । ,ट्रेड पंडितों के मुताबिक कुणाल खेमू की सोलो फिल्म के लिए औसत कारोबार भी संतोषजनक कहा जाएगा । ,"सीमित बजट में बनी ब्लड मनी को मल्टीप्लेक्स के दर्शकों ने साफ नकार दिया , लेकिन सिंगल स्क्रीन के दर्शकों ने सहारा दिया ।" ,श्रीराम राघवन की फिल्म एजेंट विनोद दूसरे हफ्ते में टिकी नहीं रह सकी । ,इस फिल्म के कलेक्शन में भारी गिरावट आई है । ,"हां , विद्या बालन की कहानी सुपरहिट घोषित हो गई है ।" ,यह अभी तक सिनेमाघरों में टिकी हुई है । ,श्रीराम राघवन निर्देशित एजेंट विनोद की ओपनिंग साधारण रही । ,पहले दिन के पहले शो में ज्यादा दर्शक नहीं आए । ,दोपहर बाद के शो में दर्शक बढ़े । ,"हालांकि वीकएंड में इस फिल्म का कारोबार 30 करोड़ से अधिक का रहा , लेकिन ट्रेड पंडितों के मुताबिक फिल्म ने अपेक्षित कारोबार नहीं किया ।" ,इस फिल्म के प्रचार में सैफ अली खान ने मुख्य रूप से शहरों पर ही ध्यान दिया था । ,"सिंगल स्क्रीन के दर्शकों ने एजेंट विनोद को नकार दिया , जबकि मल्टीप्लेक्स के शहर दर्शकों ने इसे पसंद किया ।" ,खुशी की बात है कि पान सिंह तोमर और कहानी अभी तक दर्शकों को भा रही है । ,सचमुच विद्या बालन पर दर्शकों को भरोसा हो गया है । ,"सुजॉय घोष की फिल्म कहानी में विद्या बालन के अलावा और कोई नहीं था , जो फिल्म को चलाने का भार शेयर कर सके ।" ,इस फिल्म पर विद्या का विश्वास था । ,उन्होंने इसका जमकर प्रचार किया । ,दर्शकों को सिनेमाघरों तक लाने में वह कामयाब रहीं । ,रिलीज के एक दिन पहले गुरूवार को इसके प्रिव्यू शो से दर्शकों के रुझान की जानकारी मिल गई थी । ,शुक्रवार को कहानी ने पौने तीन करोड़ से अधिक का कलेक्शन किया । ,ओ गॉड दीदी ! तुम्हें नहीं पता लेकिन राज ने भी सुबह से कुछ नहीं खाया । ,इसने कहा था कि तुम्हारे साथ ही खाएगा और तुम्हें बताने से मना किया था । ,सॉरी राज ! पर मैं और चुप नहीं रह सकती । ,"मैं कुछ सुनना नहीं चाहती , मैने सब देख लिया है ।" ,"मैं जानती हूँ , राज वही लड़का है , जिससे तू यूरोप में मिली थी ।" ,और मैं ये भी जानती हूँ कि तुम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हो । ,मेरा आशीर्वाद है तुम्हारे साथ । ,ले जाओ मेरी बेटी को । ,चले जाओ इसे ले के । ,यहां तुम्हारे प्यार को समझने वाला कोई नहीं है । ,मां जी ! मैं बहुत छोटा सा था जब मेरी मां गुज़र गई । ,"आज मैं जैसा भी हूँ , उन्हीं की वजह से हूँ ।" sg,"वो हमेशा मुझे एक बात कहा करती थीं , जो मैं आज तक नहीं भूला ।" ,"वो कहती थीं बेटा ! ज़िदगी के हर मोड़ पर तुम्हें दो रास्ते मिलेंगे , एक सही , एक गलत ।" ,"गलत रास्ता बहुत आसान होगा , तुम्हें अपनी तरफ खींचेगा , और सही रास्ता बहुत मुश्किल होगा ।" ,"अगर तुम गलत रास्ते पर चलोगे तो शुरू में तुम्हें बहुत खुशियां मिलेंगी , मगर अंत में तुम्हारी हार होगी ।" ,"और अगर सही रास्ते पर चलोगे , तो भले ही शुरूआत में तुम्हें परेशानियां हों , मगर अंत में हमेशा जीत होगी ।" ,"अब आप ही बताइए माँ जी , मेरा रास्ता सही है या गलत ?" ,अगर मुझे सिमरन को भगाकर ले जाना था तो ये मैं पहले भी कर सकता था । ,"लेकिन मैं सिमरन को छीनना नहीं , पाना चाहता हूँ ।" ,"मैं उसे आँख चुराकर नहीं NULL , आँख मिलाकर ले जाना चाहता हूँ ।" ,मैं आया हूँ तो अपनी दुल्हनिया लेकर ही जाऊँगा । ,"पर जाऊँगा तब , जब बाबूजी सिमरन का हाथ खुद मेरे हाथ में देंगे ।" ,"अब सिमरन आपकी परेशानी नहीं , मेरी परेशानी है ।" ,"ठीक कहा था तुमने NULL , मैं ही पहचान नहीं पाया ।" ,"मेरे ही घर में घुसकर , मेरे परिवार के बीच में , मेरी इज़्ज़त के साथ खिलवाड़ किया है तुमने ।" ,"धोखा दिया है तुमने हमें , फायदा उठाया है हमारे विश्वास का , हमारी शराफत का मज़ाक उड़ाया है तुमने ।" ,तुमने सिमरन के साथ प्यार करने की जुर्रत कैसे की ? ,कैसे सोच लिया कि तुम उसके साथ शादी करोगे ? ,"अरे , तुम तो खुद अपने काबिल नहीं हो तो सिमरन के काबिल कैसे होगे ?" ,मेरी राय तुम्हारे बारे में बिलकुल सही थी । ,"तुम जैसे आवारा लड़के सुधरते नहीं NULL , और बिगड़ते हैं ।" ,मैंने कहा था ना मुझे यहां से ले चलो । ,मैंने कहा था ना यहां हमारे प्यार को समझने वाला कोई नहीं है । ,मैंने कहा था ना हमें भाग जाना चाहिए । ,"नहीं सिमरन ! , भागा तो परायों से जाता है ।" ,अपनों से हम भाग कर जाते भी तो कहाँ जाते ? ,हमको कोई हक नहीं पहुँचता कि हम इनको दुख पहुँचाकर अपनी खुशियों के महल खड़े करें । ,"बाबूजी ठीक कहते हैं मैं झूठा हूँ , धोखेबाज़ हूँ ।" ,तो क्या हुआ अगर मैंने झूठ तुम्हें पाने के लिए कहा था । ,झूठ तो आखिर झूठ होता है ना । ,"ये लीजिए बाबूजी आपकी अमानत , बाबूजी मैं यहां किसी का दिल तोड़ने नहीं आया था ।" ,मैं तो दिल जीतने आया था पर शायद मुझ ही में कुछ कमी होगी कि आपका दिल पूरी तरह जीत नहीं पाया । ,"मुझे जाने दीजिए बाबूजी , प्लीज़ बाबूजी मुझे जाने दीजिए ।" ,बाबूजी राज मेरी ज़िंदगी है । ,मैं उसके बगैर नहीं रह सकती बाबूजी । ,बाबूजी मुझे मेरे राज के पास जाने दीजिए । ,"जा सिमरन जा , इस लड़के से ज़्यादा प्यार तुझे और कोई नहीं कर सकता ।" ,"जा बेटा जा , अपने राज के पास जा , जा सिमरन जा जी ले अपनी ज़िंदगी ।" ,"अरे बेटा ! तुमने तो हमारे मुँह की बात छीन ली , हम तुमसे यही कहने जा रहे थे ।" ,तो फिर जल्दी से देख सुन के तय कर दो । ,रज्जो ! ई का कह रही हो ? ,तुम्हारा ब्याह हमारे साथ ? ,का तुम हमको नहीं चाहते ? ,हमको प्यार नहीं करते तो फिर किसे करते हो ? ,मन तो हमारा गुंजा को चाहता है रज्जो और गुंजा भी हमें उतना ही चाहती है । ,"रज्जो ! मन तो एक ही होता है , दो नहीं , और वो कब और कैसे गुंजा का हो गया , ये हम भी नहीं जान पाए ।" ,"चंदन ! अरे ओ चंदन ! तुम्हार भइया , ओमकार जीजा कहाँ है ?" ,ज़रा बुलाओ उनको । ,तुम्हारी भौजी सीढ़ी पर से गिर पड़ी हैं । ,सिर से बहुत खून निकला है । ,हालत नाजुक है । ,ओमकार ! ए ओमकार ! अरे ऐसे अंधेरे में काहे गुमसुम होकर बैठे हो बेटा ? ,"अरे वो अपनी थी नहीं , निर्मोहिन थी , चार दिन के लिए मोह - मोहब्बत लगाकर चली गई बेटा ।" ,हमारे देश में कृषि की दो मुख्य समस्यायें हैं । ,पहली कृषि पर से जनसंख्या के भार को कम किया जाये और दूसरी लोगों को खेती से हटाकर दूसरे उद्योगों में लगाया जाए । ,भारत में ज्यादातर किसान निर्धन हैं । ,"साथ ही कृषि उत्पादन में अधिक समय का लगना , दैविक प्रकोपों का कृषि पर कुप्रभाव और कृषि का मौसमी धन्धा होना आदि अनेक कारणों से उनको पर्याप्‍त मात्रा में वित्त नहीं मिल पाता है ।" ,वित्त की कमी कृषि को प्रभावित करती है और पैदावार कम होती है । ,कुछ संस्थागत कारण भी पाये गये हैं जो कृषि उत्पादकता में कमी आने हेतु जिम्मेदार हैं । ,जोतों का आकार छोटा होने के कारण कृषि उत्पादन प्रति हेक्टेयर बहुत कम है । ,"हमारे यहाँ जोतों का आकार औसतन 1.51 हेक्टेयर है , जबकि अन्य देशों में औसत जोत आकार जैसे 1993 हेक्टेयर आस्ट्रेलिया में , 188 हेक्टेयर से भी कम है तथा 32 % जोतें 1 हेक्टेयर से 4 हेक्टेयर तक की हैं ।" ,कुछ प्रमुख तकनीकी कारणों से भी कृषि उत्पादकता में कमी आयी है । ,यह एक सच्चाई है कि बिना पानी के भूमि पर फसल भली प्रकार से नहीं ली जा सकती है । ,इसी कारण सिंचाई की पर्याप्‍त सुविधायें नहीं होने से कृषि उत्पादन भी प्रभावित होता है । ,"हमारे यहाँ कृषि योग्य भूमि का मात्र 33.3 प्रतिशत भाग ही सिंचित है , शेष 66.7 प्रतिशत भाग असिंचित एवं मानसून पर निर्भर है इस वजह से उत्पादकता में कमी आयी है ।" ,भारत में निम्न कृषि उत्पादकता का एक प्रमुख कारण फसलों की कीड़े - मकोड़े व रोगों से सुरक्षा न कर पाना है । ,कुल खाद्यान्नों का 16 प्रतिशत भाग प्रतिवर्ष कीड़ों - मकोड़ों से नष्‍ट हो जाता है । ,"भारत में कृषि उत्पादन के कम होने का महत्त्वपूर्ण कारण यह है , कि हमारे देश के किसान अच्छे उन्नतशील बीजों के कम मात्रा में उपलब्ध होने के कारण उनका उपयोग ठीक ढंग से नहीं कर पाते हैं ।" sg,"दूसरे , भारतीय किसान रुढ़िवादी परम्परा के होने के कारण अच्छी एवं उपयोगी रासायनिक खादों का प्रयोग भी बहुत कम मात्रा में करते हैं ।" ,हमारा देश रासायनिक खादों का प्रयोग भी बहुत कम मात्रा में करता है । ,प्राकृतिक कारणों से भी हमारे देश की कृषि उत्पादकता कम हो जाती है । ,"भारतीय कृषि प्रकृति पर निर्भर है , विशेष रुप से वर्षा पर , वर्षा अनिश्‍चित , असामयिक व असमान्य होती है , जिससे उत्पादन प्रभावित होता है ।" ,"अधिक वर्षा से खेत की उपजाऊ मिट्टी कटकर नदियों में बह जाती है , जिससे भूमि की उर्वरा शक्‍ति का ह्रास होता है ।" ,परिणामस्वरुप कृषि उत्पादन प्रभावित होता है । sg,"भारत की मिट्टी में भी कुछ दोष पाया जाता है , जिससे उसकी उत्पादकता कम होती है ।" pl,"हमारे देश की मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी , भूमि का कटाव , पानी का भरना व ऊसर भूमि का आधिक्य आदि दोष पाये जाते हैं ।" ,भारत जैसे कृषि प्रधान देश में सिंचाई एवं बहुद्देश्यीय नदी घाटी परियोजनाओं का विशेष महत्त्व है । ,"कृषि का विकास वहीं सम्भव है जहाँ इसके अनुकूल वातावरण हो अर्थात् मिट्टी , जलवायु व वर्षा आवश्यकता के अनुरुप हों ।" ,कृषि के क्षेत्र में सिंचाई एक महत्त्वपूर्ण कारक है । ,खेती में कृत्रिम साधनों द्वारा जल पहुँचाना सिंचाई कहलाता है । ,भारत में वर्षा मानसूनी हवाओं द्वारा होती है । ,वर्षा की मात्रा समय तथा स्थान सभी अनिश्‍चित होते हैं । ,अतः वर्षा के आधार पर कृषि में प्रगति करना संभव नहीं है । ,भारत जैसे राष्‍ट्र के लिए जहाँ की सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था कृषि निर्भर है । ,उस क्षेत्र में सिंचाई माध्यमों का विशिष्‍ट महत्त्व है । ,भारतीय केन्द्र सरकार ने जल माध्यमों के विकास हेतु कुछ प्रमुख संसाधनों का गठन किया है । ,राष्‍ट्रीय जल विकास परिषद् - ,इसकी स्थापना जुलाई 1982 में की गई । ,इसका कार्य नदियों को मिलाकर पानी के सदुपयोग की सम्भावनाओं का पता लगाना है । ,"ताकि पानी , आधिक्य वाले क्षेत्रों से कमी वाले क्षेत्रों में पहुँचाया जा सके ।" ,केन्द्रीय जल आयोग - ,सन् 1985 में स्थापित यह आयोग जल माध्यमों के वृद्धि गणित एक उच्च प्रौद्योगिक संस्था है । ,"इस आयोग का कार्य जलसंसाधनों के उपयोग , संरक्षण तथा नियंत्रण हेतु योजनाएं बनाना तथा उन योजनाओं में समन्वय स्थापित कर उनका विकास करना है ।" ,"यह बाढ़ नियंत्रण , सिंचाई तथा जहाजरानी के लिए राज्य सरकारों से विचार - विमर्श कर उन्हें सलाह देता है ।" ,केन्द्रीय भूमिगत जल बोर्ड - ,इस बोर्ड की स्थापना 1952 में की गई थी परन्तु 1972 में भारत के भूगर्भ सर्वेक्षण की भूमिगत जल - इकाई को इसके साथ मिलाकर इसका पुनर्गठन कर दिया गया । ,"इस बोर्ड का कार्य भूमिगत जल के संबंध में सर्वेक्षण करना , संभावनाओं का पता लगाना , मूल्यांकन करना तथा भूमिगत जल की गुणवत्ता व पद्धति की मानीटरिंग करना है ।" ,"यह बोर्ड पूरे देश में भूमिगत जल के विकास के संबंध में नीति , रणनीति तथा कार्यक्रम बनाता है ।" ,"भारत में कृषि सिंचाई का सबसे अधिक प्रमुख माध्यम नहर है , उत्तर के विशाल मैदान में नहरों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई की जाती है ।" ,"उत्तर प्रदेश , पंजाब तथा हरियाणा नहरों द्वारा सिंचाई के प्रमुख क्षेत्र हैं ।" ,इन राज्यों में सिंचाई की नहरों का जाल बिछा है । ,"इनके अतिरिक्‍त बिहार , राजस्थान तथा पश्‍चिम बंगाल के कुछ भागों में नहरों द्वारा सिंचाई की जाती है ।" ,दक्षिणी भारत में डेल्टा क्षेत्रों तथा नदी घाटियों में भी नहरों द्वारा कुछ सिंचाई की जाती है । ,हमारे देश में नहरें मूलतः दो प्रकार की होती हैं । ,बाढ़ वाली नहरें व बारहमासी नहरें । ,बाढ़ वाली नहरों में सिर्फ वर्षा ऋतु के दौरान ही पानी रहता है और बारहमासी नहरों में वर्षभर पानी रहता है । ,भारत में बारहमासी नहरों की संख्या ज्यादा है । ,अल्पकालीन साख के लिये उत्पादक आवश्यकताओं तथा उत्पादक प्रयोग पर बल दिया जाता है । ,यथार्थ में किसान को कर्ज या जन्टण फसल की योग्यता या क्षमता के अनुसार प्रदान किया जाता है । ,उनकी संपत्ति की प्रतिभूति के आधार पर नहीं । sg,अच्छे तथा नवीनतम कृषि आदानों की पूर्ति नियमित और सुनिश्चित की जाती है । ,कृषि साख को फसल के विपणन से सम्बद्ध कर दिया जाता है । ,कृषक को लिखित रूप में वचनबद्ध कर लिया जाता है कि वह अपनी फसल निर्दिष्‍ट विपणन समिति के माध्यम से ही बेचेगा तथा विक्रय मूल्य में से ऋण राशि की कटौती उसे स्वीकार्य होगी । ,अधिकांश ऋण कृषि - आदानों के रूप में दिये जाते हैं । ,फसल बोने के पूर्व ऋण दिया जाता है तथा फसल कटने पर वसूल कर लिया जाता है । ,फसल ऋण पद्धति को लागू करने में निम्नलिखित समस्यायें उत्पन्न होती हैं - ,सामान्य साख वितरण की तैयारी प्रत्येक सदस्य के लिये उनके उत्पादन कार्यक्रमानुसार नहीं की गयी । sg,"सदस्यों ने ऋण वापसी की क्षमता से कहीं अधिक ऋण ले लिया , क्योंकि अधिकतम मान न्यूनतम बनकर रह गया ।" ,वित्तीय मान का निर्धारण क्षेत्र की फसलों के लिये अलग - अलग नहीं किया जा सका है । ,"कृषकों की दिलचस्पी नकद ऋण में अधिक है , कृषि आदानों के रूप में वे ऋण लेना कम पसन्द करते हैं ।" ,ऋणों का भुगतान अधिकतर उपज की बिक्री से नहीं किया जाता । ,इसका रिजोल्यूशन 1280 / 800 पिक्सल्स है और गोरिल्ला ग्लास है । ,इसमें टेगरा 3 क्वाड कोर प्रोसेसर लगा है । ,इसमें 1 जीबी रैम की क्षमता है । ,8 मेगापिक्सल का पीछे कैमरा है और 1.2 मेगा पिक्सल का फ्रंट कैमरा लगा है । ,"सोनिक मास्टर ऑडियो , माइक्रोएसडी स्लॉट और एचडीएमआई पोर्ट की भी सुविधा है ।" ,8 मेगा पिक्सल कैमरा 1080पी एचडी का वीडियो शूट कर सकता है । ,गैलेक्सी टैबलेट2 510 आपके और परिवार के लिए टैबलेट का एक नया अनुभव है । ,सभी के लिए आरामदायक और साथ - साथ मजे करने वाला भी NULL । ,मल्टीमीडिया को इंज्वॉय करना कभी इतना आसान और सुविधाजनक नहीं था । ,विशेष रूप से आपके घर में । ,"नए - नए गेम्स , बच्चों के लिए ईबुक्स या स्मार्ट टीवी देखना आदि ।" ,फन एंड ईजी कम्यूनिकेशन ,"चैट ऑन मैसेजिंग पर संदेश भेजना , एक साथ अनेक लोगों से वीडियो कॉल आदि सभी ऑप्शन्स इसमें हैं ।" ,ड्यूल कोर प्रोसेसर वाला यह टैबलेट एंड्रायड 4.0 ब्राउजर ( आइसक्रीम सैंडविच ) पर चलता है । ,"गूगल सर्च , यूट्यूब , गूगल मोबाइल एप्लीकेशन्स आदि से सुसज्जित है यह स्लिम फोन और तेजी से काम करता है ।" ,वाई - फाई आईपैड 2 वर्जन सबसे सस्ता और हल्का है । ,इसका वजन मात्र 601 ग्राम है । ,डिजाइन और हार्डवेर के मामले में यह इससे पहले आए टैबलेटों से बेहतर है । ,इसमें 1 गीगा हर्ट्ज का ड्यूल कोर एप्पल ए5 चिपसेट लगा है । ,इसकी बैटरी क्षमता 10 घंटे की है । ,इसमें रियर और फ्रंट दोनों कैमरे हैं । ,सैमसंग गैलेक्सी टैब 10.1 वाई - फाई में 10.1 इंच का डिस्प्ले लगा है । ,1 गीगा हर्ट्ज का ड्यूल कोर प्रोसेसर है जोकि एंड्रायड 3.0 पर चलता है । ,इसमें 3 मेगा पिक्सल का कैमरा भी लगा है जोकि वीडियो रिकॉर्डिंग भी कर सकता है । ,एल्काटेल वन टच टी20 एंड्रायड टैबलेट है । ,इसमें 7 इंच का टच स्क्रीन डिस्प्ले लगा है जिसका रिजोल्यूशन 1024 / 600 पिक्सल्स है । ,इस टैबलेट की मेमोरी 1 जीबी रैम और इंटर्नल मेमोरी 4 जीबी है जिसे माइक्रोएसडी कार्ड के जरिये 32 जीबी तक बढ़ाया जा सकता है । ,यह सिंगल कोर एआरएम कोरटेक्स - ए8 प्रोसेसर है जिसकी ऑपरेटिंग फ्रीक्वेंसी 1.0 गीगा हर्ट्ज है । ,लेनोवो आइडिया टैब एस2 एंड्रायड 4.0 ब्राउजर पर चलने वाला आईसीएस टैबलेट है । ,इसमें 10.1 इंच का डिस्प्ले लगा है । ,साथ ही दो कैमरे और एक ड्यूल कोर प्रोसेसर से सुसज्जित है यह टैबलेट । ,व्यूसोनिक व्यूपैड ई 100 में 9.7 इंच का आईपीएस डिस्पले है जिसका रिजोल्यूशन 1024 / 768 पिक्सल्स है । ,1.2 गीगा हर्ट्ज का प्रोसेसर लगा है । ,यह एंड्रायड आइसक्रीम सैंडविच पर चलता है । ,इसमें एचडीएमआई - आउट भी है । ,इसका वजन 620 ग्राम और थिकनेस 9.1 एमएम है । ,आर्कोस 101 जी 9 एक 10.1 इंच स्क्रीन का टैबलेट है । ,यह गूगल ओपन सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलता है । ,इसमें मल्टी कोर एआरएम कोरटेक्स ए9 1 गीगा हर्ट्ज का प्रोसेसर लगा है । ,"16 जीबी की इंटर्नल मेमोरी क्षमता है , माइक्रोएसडी कार्ड स्लॉट , जीपीएस , वाई - फाई , ब्लूटूथ 2.1 आदि सुविधाएं भी हैं ।" ,एसर आइकोनिया टैब ए100 7 इंच स्क्रीन का टैबलेट है । ,यह एंड्रायड 3.0 हनीकॉम्ब ब्राउजर पर चलता है तथा यूएमटीएस नेटवर्क को सपोर्ट करता है । ,इसमें 1 गीगा हर्ट्ज एनवीआईडीआईए टेगरा 2 प्रोसेसर लगा है । ,5 मेगा पिक्सल का रियर कैमरा और फ्रंट कैमरा 2 मेगा पिक्सल का है । ,"वाई - फाई , एचडीएमआई पोर्ट और ब्लूटूथ से सुसज्जित है यह टैबलेट ।" ,सोनी टैबलेट पी की स्क्रीन 5.5 इंच है जिसका रिजोल्यूशन 1024 द् 480 पिक्सल्स है । ,यह टेगरा 2 चिप है और एंड्रायड 3.2 हनीकॉम्ब पर चलता है । ,वैज्ञानिकों को बहुत जल्द अल्ट्राफास्ट कंप्यूटर बनाने में सफलता मिल जाएगी जो आज के कंप्यूटर से कई गुणा शक्तिशाली होगी । ,ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इसके लिए सिलिकॉन में 10 अरब क्वांटम इंटेंगलमेंट ईजाद करने में सफलता हासिल कर ली है । ,इंटेंगलमेंट वह उपकरण है जिससे क्वांटम कंप्यूटर बनाया जाता है । ,इससे कंप्यूटर की क्षमता कई गुणा बढ़ जाती है । ,इनफ्लुएंजा ,इनफ्लुएंजा ( श्लैष्मिक ज्वर ) एक विशेष समूह के वायरस के कारण मानव समुदाय में होनेवाला एक संक्रामक रोग है । ,इसमें ज्वर और अति दुर्बलता विशेष लक्षण हैं । ,फुफ्फुसों के उपद्रव की इसमें बहुत संभावना रहती है । ,यह रोग प्रायः महामारी के रूप में फैलता है । ,बीच - बीच में जहाँ - तहाँ रोग होता रहता है । ,"सन् 1933 में स्मिथ , ऐंड्रयू और लेडलो ने इनफ्लुएंजा के वायरस - ए का पता पाया ।" ,फ्रांसिस और मैगिल ने 1940 में वायरस - बी का आविष्कार किया और सन् 1948 में टेलर ने वायरस - सी को खोज निकाला । ,इनमें से वायरस - ए ही इनफ्लुएंजा के रोगियों में अधिक पाया जाता है । ,ये वायरस गोलाकार होते हैं और इनका व्यास 100 म्यू के लगभग होता है ( 1 म्यू थ्र् मिलीमीटर ) । ,रोग की उग्रावस्था में श्वसनतंत्र के सब भागों में यह वायरस उपस्थित पाया जाता है । ,"श्लेष्मा ( बलगम ) और नाक से निकलनेवाले स्राव में तथा थूक में यह सदा उपस्थित रहता है , किंतु शरीर के अन्य भागों में नहीं ।" ,नाक और गले के प्रक्षालन जल में प्रथम से पाँचवें और कभी - कभी छठे दिन तक वायरस मिलता है । pl,इन तीनों प्रकार के वायरसों में उपजातियाँ भी पाई जाती हैं । ,इनफ्लुएंजा की प्रायः महामारी फैलती है जो स्थानीय ( एकदेशीय ) अथवा अधिक व्यापक हो सकती है । ,"कई स्थानों , प्रदेशों या देशों में रोग एक ही समय उभड़ सकता है ।" ,कई बार सारे संसार में यह रोग एक ही समय फैला है । ,इसका विशेष कारण अभी तक नहीं ज्ञात हुआ है । ,"रोग की महामारी किसी भी समय फैल सकती है , यद्यपि जाड़े में या उसके कुछ आगे पीछे अधिक फैलती है ।" ,"इसमें आवृत्ति चक्रों में फैलने की प्रवृत्ति पाई गई है , अर्थात् रोग नियत कालों पर आता है ।" ,वायरस - ए की महामारी प्रति दो तीन वर्ष पर फैलती है । ,वायरस - बी की महामारी प्रति चौथे या पाँचवें वर्ष फैलती है । ,वायरस - ए की महामारी बी की अपेक्षा अधिक व्यापक होती है । ,भिन्न - भिन्न महामारियों में आक्रांत रोगियों की संख्या एक - पाँच प्रतिशत से 20 - 30 प्रतिशत तक रही है । ,"स्थानों की तंगी , गंदगी , खाद्य और जाड़े में वस्त्रों की कमी , निर्धनता आदि दशाएँ रोग के फैलने और उसकी उग्रता बढ़ाने में विशेष सहायक होती हैं ।" ,सघन बस्तियों में रोग शीघ्रता से फैलता है और शीघ्र ही समाप्त हो जाता है । ,दूर - दूर बसी हुई बस्तियों में दो से तीन मास तक बना रहता है । ,रोगी के गले और नासिका के स्राव में वायरस रहता है और उसी के निकले छींटों द्वारा फैलता है ( ड्रॉपलेट इनफ़ेक्शन से रोग होता है ) । ,इन्हीं अंगों में रोग का वायरस घुसता भी है । ,"रोगवाहक व्यक्ति नहीं पाए गए हैं , न रोग के आक्रमण से रोग - प्रतिरोध - क्षमता उत्पन्न होती है ।" ,छह से आठ महीने पश्चात् फिर उसी प्रकार का रोग हो सकता है । ,रोग का उद्भवकाल एक से दो दिन तक होता है । ,रोग के लक्षणों में कोई विशेषता नहीं पाई जाती । ,केवल ज्वर और अतिदुर्बलता ही इस रोग के लक्षण हैं । ,इनका कारण वायरस में उत्पन्न हुए जैवविष ( टॉक्सिन ) जान पड़ते हैं । sg,भिन्न - भिन्न महामारियों में इनकी तीव्रता विभिन्न पाई गई है । ,"ज्वर और दुर्बलता के अतिरिक्त सिरदर्द , शरीर में पीड़ा ( विशेषकर पिंडलियों और पीठ में ) , सूखी खाँसी , गला बैठ जाना , छींक आना , आँख और नाक से पानी बहना और गले में क्षोभ मालूम होना , आदि लक्षण भी होते हैं ।" ,ज्वर 101 से 103 डिग्री तक निरंतर दो या तीन दिन से लेकर छह दिन तक बना रह सकता है । ,नाड़ी ताप की तुलना में द्रुत गतिवाली होती है । ,परीक्षा करने पर नेत्र लाल और मुख तमतमाया हुआ तथा चर्म उष्ण प्रतीत होता है । ,नाक और गले के भीतर की कला लाल शोथयुक्त दिखाई देती है । ,प्रायः वक्ष या फुफ्फुस में कुछ नहीं मिलता । ,रोग के तीव्र होने पर ज्वर 105 रू से 106 रू तक पहुँच सकता है । ,इस रोग का साधारण उपद्रव ब्रोंको न्यूमोनिया है जिसका प्रारंभ होते ही ज्वर 104 रू तक पहुँच जाता हैं । ,"श्वास का वेग बढ़ जाता है , यह 50 - 60 प्रति मिनट तक हो सकता है ।" ,"नाड़ी 110 से 120 प्रति मिनट हो जाती है , किंतु श्वास कष्ट नहीं होता ।" ,सपूय श्वासनलिकार्ति ( प्युरुलेंट ब्रॉनकाइटिस ) भी उत्पन्न हो सकती है । ,खाँसी कष्टदायक होती है । ,"श्लेष्मा झागदार , श्वेत अथवा हरा और पूययुक्त तथा दुर्गंधयुक्त हो सकता है ।" ,रक्तमिश्रित होने से वह भूरे या लाल रंग का हो सकता है । ,केवल खुली आंखों से 15.4 इंच की स्क्रीन पर 5 मिलियन से अधिक पिक्सल की इमेज को पिक्सल की भाषा में समझना मुश्किल है । ,इसमें स्टैंडर्ड मैकबुक प्रो की तुलना में इमेज 29 गुना अधिक स्पष्ट और कंट्रास्ट देखाई देती है । ,साथ ही पिक्चर क्वालिटी में भी बेहतरीन दिखाई देती है । ,इसमें आईपीएस टेक्नोलॉजी से 178 डिग्री का व्यू एंगल दिया गया है । ,एप्पल हमेशा ही अपनी सीमाओं में रहकर आगे बढ़ा है । ,"स्टैंडर्ड मैकबुक प्रो जिसका रेसोल्यूशन 1440द्900 है , उसकी तुलना में मैकबुक प्रो रेटिना डिस्प्ले का रेसोल्यूशन 2880द्1800 है , जो बहुत ही तेज़ी से एप्प को सपोर्ट करता है और कुछ ही सेकंड में स्टार्ट हो जाता है ।" ,साथ ही यह एप्प खोलने में भी कम समय लेता है और इसका नेविगेशन भी कमाल का है । ,इसके अलावा 768 जीबी का फ्लेश स्पेस आपको अपनी फोटो और भारी भरकम फाइल रखने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध करवाता है । ,एप्पल के मैकबुक प्रो रेटिना डिस्प्ले में लाजवाब बैटरी लाइफ भी है । ,इसकी बैटरी लगभग 7 घंटे से भी अधिक समय तक चल सकती है और इसका स्टैंड बाय टाइम 30 दिनों का है । ,इसमें स्लीपिंग मोड पर भी आपके मेल और कैलेंडर इंविटेशन को रिसीव करने की सुविधा दी गई है । ,इंटेल कोर इ7 हाई स्पीड क्वाड कोर प्रोसेसर 16 जीबी तक 1600MHz की तेज़ स्पीड उपलब्ध करवाता है । ,अत्याधुनिक ण्Vईढीआ ग्राफिक्स की मदद से यह मैकबुक स्क्रीन पर आपको जीवंत ग्राफिक्स का अनुभव करवाता है । ,यह जानकर लोगों को खुशी होगी कि यह पावर पैक्ड डिवाइस मैकबुक एयरलाइन की तुलना में तीन सौ इंच अधिक मोटा है और इसका वज़न 4.46 पाउंड है । ,हमेशा की तरह एप्पल ने डिवाइस की डिज़ाइन के लिए छोटे रूप को चुना है और यह नया मैकबुक भी छोटे रूप में है । ,"इससे एक बार फिर साबित कर दिया गया है कि मल्टीटच ग्लास , ट्रैकपेड , टाइपिंग करना बिना किसी अड़चन के बाएं हाथ का काम है ।" ,इसमें मौजूद ड्यूअल इनबिल्ट माइक्रोफोन से आप शोर शराबे के बीच भी बिना किसी व्यवधान के सुन सकते हैं । ,इसमें डिक्शन टूल के ज़रिये आप बैकड्राप के बावजूद अपनी आवाज़ पहचान सकते हैं । ,इस नए मैकबुक के अपग्रेटेड सॉफ्टवेयर इसके रेटिना डिस्प्ले को प्रभावी रूप से सपोर्ट करेंगे और इसकी परफॉर्मेंस बढ़ाएंगे । ,बिना किसी शक के यह कहा जा सकता है कि इस नए मैकबुक को इसका रेटिना डिस्प्ले प्रभावी बनाता है । ,"यह बाहर से चिकना और अंदर से मज़बूत दिखाया गया है , जो एप्पल के तथ्य ' एप्पल एक स्टीकर है , जो ग्राहकों को परफेक्ट से कम कुछ नहीं देता ' को दर्शाता है ।" ,हालांकि यह डिवाइस कई लोगों को महंगी लग सकती है । ,इसके मेंटेनेंस में होने वाला खर्च और बैटरी आपकी ज़ेब पर और बोझ डाल सकती है । ,कुल मिलाकर आपका बैंक बैलेंस यह तय करेगा कि आप रेटिना डिस्प्ले वाला मैकबुक लेंगे या नहीं NULL । ,यह रिव्यू रिलायंस डिजिटल के एक्सपर्ट द्वारा किया गया है । ,रिलायंस डिजिटल में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड उपलब्ध हैं और यह आपकी खरीददारी को समझने में बहुत सफल रहा है । ,रिलायंस डिजिटल के आईस्टोर में खास तौर पर एप्पल के प्रोडक्ट उपलब्ध करवाए गए हैं । ,प्रोडक्ट के बारे में और अधिक जानकारी और उन पर चल रहे ऑफर के बारे में जानने के लिए आप इसके फेसबुक पेज पर जा सकते हैं । ,आप इसके बारे में ट्विटर पर भी अपने दोस्तों को बता सकते हैं । ,इसके अलावा आप सोल्यूशन बॉक्स में आकर अलग अलग प्रोडक्ट की वर्किंग के बारे में यू ट्यूब पर आकर विस्तृत जानकारी ले सकते हैं । ,हुवाई मीडियापैड विश्व का पहला टैबलेट है जोकि एंड्रायड हनीकॉम्ब पर 3.2 पर चलता है । ,इसकी आईपीएस स्क्रीन का प्रति इंच रिजोल्यूशन 217 पिक्स्लस है । ,कुल मिलाकर इसका रिजोल्यूशन 1280 / 800 है । ,1.2 गीगा हर्ट्ज का ड्यूल कोर प्रोसेसर लगा है जिससे यह 1080पी एचडी वीडियो को हैंडल कर सकता है । ,इसमें पीछे की तरफ 5 मेगा पिक्सल का तथा सामने की ओर 1.3 मेगा पिक्सल का कैमरा लगा है । ,सैमसंग गैलेक्सी टैबलेट 7.7 सुपर अमोल्ड डिस्प्ले में अपनी तरह का पहला टैबलेट है । ,इसमें 1.4 गीगा हर्ट्ज प्रोसेसर लगा है । ,यह एंड्रायड हनीकॉम्ब 3.2 ब्राउजर पर चलता है । ,इसमें 3 मेगा पिक्सल का कैमरा पीछे की तरफ और 2 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा भी लगा है । ,बैटरी की क्षमता 5100 एमएएच है जिसका वीडियो प्लेबैक भी 10 घंटे है । ,गूगल नेक्सस 7 आसुस द्वारा बनाया गया टैबलेट है । ,7 इंच डिस्प्ले का यह टैबलेट एंड्रायड 4.1 जेलीबीन पर चलता है । ,इसका रिजोल्यूशन 1280 / 800 पिक्सल्स है । ,1.3 गीगा हर्ट्ज एनवीआईडीआईए टेगरा 3 क्वार कोर प्रोसेसर है । ,आसुस ट्रांसफॉर्मर पैड 300 एनवीआईडीआईए का क्वाड कोर टेगरा 3 चिप लगा है । ,इसकी थिकनेस 9.9 एमएम है और इसका वजन 635 ग्राम है । ,इसकी स्क्रीन लगभग ट्रांसफॉर्मर प्राइम की तरह ही है । ,इसका रिजोल्यूशन 1280 / 800 पिक्सल्स है । ,इसमें 1 जीबी रैम और 16 जीबी की इनबिल्ट मेमोरी है । ,आसुस ट्रांसफॉर्मर प्राइम पहला क्वाड कोर एंड्रायड टैबलेट है जिसमें 10 इंच की सुपर आईपीएस प्लस डिस्प्ले लगा है । ,टाटा चाय कारखाने का भ्रमण अवश्य करना चाहिए । ,वहाँ जाकर चाय की चुस्की लेना एक अभूतपूर्व अनुभव है । ,ठहरने के लिये मुन्नार शहर में अलग - अलग श्रेणियों के होटल रिजॉर्ट व अतिथि गृह बहुतायत में मौजूद हैं । sg,इनमें अपने बजट के अनुसार ठहरकर आप संपूर्ण यात्रा को अत्यंत आरामदायक तथा मनोरंजक बना सकते हैं । ,सितम्बर से लेकर मई तक मुन्नार और इसके आसपास घूमने के लिए श्रेष्ठ समय है । ,श्री जगन्नाथ की नगरी पुरी । ,भारत के चार धामों में पूर्व के धाम जगन्नाथ पुरी का अवलोकन सचमुच वैकुण्ठ के दर्शन के समान है । ,"यहाँ भगवान जगन्नाथ का प्रसिद्ध मंदिर , शांत समुद्र तट , जैन , बौद्ध , शैव और वैष्णव मतावलंबियों के धर्मस्थल और अनेक हस्तशिल्प और कलाएँ सभी दर्शनीय और मोहक हैं ।" ,"उड़ीसा राज्य में , बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित पुरी हिन्दुओं के चार प्रमुख तीर्थस्थानों में एक है ।" ,पुरी में नारायण जगन्नाथ के रूप में वास करते हैं अतः इसे पुरुषोत्तम क्षेत्र भी कहते हैं । ,इसे शंखक्षेत्र भी कहा जाता है क्योंकि इसका आकार शंख सा है । sg,भगवान विष्णु अपने एक हाथ में शंख भी धारण करते हैं । ,कभी यह पावन पुरी प्राचीनकाल की ऋषिकुला और वैतरणी नदी के मध्य दस योजन तक फैली हुई थी । ,आज पुरी का विस्तार लगभग दस मील का है जिसका कुछ हिस्सा समुद्र में डूबा हुआ है । ,जगन्नाथ पुरी अनेक दृष्टियों से विशिष्ट है । ,"ऐसा विश्वास है कि श्री केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम सतयुग के , रामेश्वरम द्वापर और द्वारिका त्रेता के पवित्र पीठ हैं तो कलियुग में है जगन्नाथ पुरी ।" ,"श्री जगन्नाथ पुरी में भारत के सभी धार्मिक विचारों यथा शैव , वैष्णव , शाक्त के साथ - साथ जैन और बौद्ध धर्म का समन्वय माना जाता है और इसका प्रमाण है इसके आसपास स्थित विभिन्न धार्मिक स्थल ।" ,"जैन धर्मावलम्बियों की उदयगिरी और खण्डगिरी की गुफाएँ , जिनकी चढ़ाई दुर्गम ही नहीं बल्कि इनसे श्रमणों का कठिन जीवन भी स्पष्ट होता है ।" ,कोणार्क का सूर्य मंदिर जिसे ब्लैक पैगोडा का नाम दिया गया है । ,कोणार्क का सूर्य मंदिर स्थापत्य कला का अद्‌भुत नमूना है । ,"इतिहास प्रसिद्ध कलिंग राज्य , धवलगिरी पर्वत की तलहटी में स्थित था ।" sg,कलिंग के नरसंहार ने चक्रवर्ती सम्राट अशोक को बौद्ध भिक्षु बना दिया था । ,कहा जाता है कि प्राचीनकाल में यहाँ दर्शन अपने शिखर पर था । ,पास बहती चन्द्रभागा नदी के अतिरिक्त चारों ओर फैले विभिन्न देवी - देवताओं के मंदिर और पुण्य सरोवर इस स्थान पर धर्म व इतिहास को एकाकार कर देते हैं । ,किन्तु इन सबसे असाधारण है पुरी का जगन्नाथ मंदिर जिसे मर्त्य वैकुण्ठ भी कहा जाता है । ,"भक्ति भाव को जाग्रत रखने के लिए , संभवतः प्राचीन मनीषियों ने हमारी आशावादी संस्कृति को धार्मिक परंपराओं से जोड़े रखने के लिए भारत के चार कोनों में , चार पवित्र पीठों की स्थापना कर दी और मोक्ष प्राप्ति के अभिलाषी हर हिन्दू के लिए इनकी यात्रा अनिवार्य कर दी ।" ,"उत्तर में केदार - बद्रीनाथ , पश्चिम में द्वारिका , दक्षिण में रामेश्वरम और पूर्व में जगन्नाथ पुरी ।" ,यात्रा केदारनाथ से होती हुई पुरी में पूरी होनी चाहिए । ,इन चारों धामों की स्थिति का भेद बड़ा गहरा है । ,हमारे धर्म गुरु जानते थे कि नाना रूप - रंग और रीतिरिवाजों वाले धर्मभीरू भारतीयों को एक धार्मिक सूत्र में बाँध कर ही अनेकता में एकता की सृष्टि की जा सकती है । pl,महापुण्य कमाने का लोभ भारतखंडे जम्बूदीप के निवासियों को इस प्रकार एक करता रहेगा । ,कोलकाता से पुरी तक की यात्रा एक रात की है । ,शहर साधारण और छोटा सा है पर श्री जगन्नाथ की उपस्थिति के कारण विभूतिपूर्ण है । ,"श्री जगन्नाथ , देवी सुभद्रा और बलभद्र जी की काष्ठ प्रतिमाएँ सामान्य वस्त्र धारण किए , पत्थर के सिंहासन पर विराजमान हैं ।" ,संभवतः सभी प्रमुख तीर्थों में केवल यहीं भगवान विष्णु अपने भाई - बहन के साथ विराजमान हैं । ,हर जाति व धर्म के भक्तगण परमेश्वर के चरण स्पर्श कर सकते हैं । ,देवता से दूर रखने वाला अवरोधक यहाँ नहीं है । sg,"मिट्टी की बड़ी - बड़ी हड़ियों में , अत्यंत पवित्रता से प्रतिदिन इतना भोग बनाया जाता है कि प्रभु के द्वार से कोई भी भूखा न जाए ।" ,खाजा और शक्करपारे श्री जगन्नाथ के प्रिय मिष्ठान हैं । ,"प्रसाद के रूप में भोग के भात को ही सुखाकर , छोटी - छोटी थैलियों में बन्द कर इलायची दाने के साथ दिया जाता है ।" sg,यह सरलता ही श्री जगन्नाथ महाप्रभु को विश्वचेतना का मूर्त बना देती है । ,ईसा से 100 वर्ष पूर्व कलिंग के प्रतापी राजा खरबेल ने मगध पर चढ़ाई कर नील माधव को पुरी में प्रतिष्ठित किया । sg,नवीं शताब्दी के प्रारंभ में उत्कलराज ययाति केशरी ने समुद्रतट पर श्री जगन्नाथ का एक भव्य मंदिर बनवाया जो नमकीन हवा से नष्ट हो गया । ,"उसी स्थान पर बारहवीं शताब्दी के चौथे दशक में सम्राट अनन्तवर्मन चोलदेव ने इसका पुनर्निर्माण करवाया , जिसे संभवतः गंगकुल के उनके नाती राजा अनंग भीमदेव ने पूरा किया ।" sg,पुरी का राजवंश आज भी प्रभु का प्रमुख सेवक माना जाता है । ,श्री जगन्नाथ मंदिर बड़े - बड़े पत्थरों से बना हुआ है । sg,श्री जगन्नाथ मंदिर का आकार - प्रकार ही इसकी प्राचीनता को इंगित करता है । ,इस भव्य जगन्नाथ मंदिर की बाहरी दीवारों पर सुंदर कलात्मक मूर्तियाँ उत्कीर्ण हैं । ,"यात्रा का शेष , पुरी का समुद्र ।" ,एशिया के समुद्री तटों में यह सबसे लम्बा और सबसे शान्त माना जाता है । ,"मेरा निजी तौर पर यह मानना रहा है कि नृत्य कोई भी हो , अगर उसका कुशलतापूर्वक प्रस्तूतिकरण हो और उसे ढंग से कोरियोग्राफ किया जाए , तो दर्शकों के लिए इससे अच्छा कुछ नहीं हो सकता ।" ,गिद्धों ने पर्वत पर लौटकर विचार किया ‘ मगध ‘ सेठ ने हम पर उपकार किया है । ,वहां की मीडिया और जनता ने इसकी खूब तारीफ की थी । ,इसी तरह हमें एडीलेड में भी ऑल एशिया आर्ट फेस्टिवल में लोगों की तारीफ मिली । ,ऐसा ही कुछ हुआ जब कंबोडिया और लाओस में हमने अपनी प्रस्तुति दी । ,"कहने का मतलब यह है कि शास्त्रीय नृत्य के बारे में भारत के लोग जितना जानते हैं , विदेशी उससे भी कम NULL , न तो उन्हें हमारी शब्दावली पता होती है , न ही संस्कृति ।" ,इसके बावजूद भी कार्यक्रम के दौरान मिलने वाली जानकारी के सहारे वे कला के आकर्षण से खुद को बांध लेते हैं । ,"एक कलाकार जब अपनी प्रस्तुति देता है , तो उसे कुछ बातों का ख्याल जरूर रखना चाहिए ।" ,"सबसे पहले तो उसके अंदर क्लासिज़्म होना चाहिए , तभी वह परंपरा के पैमाने पर खरा उतर पाएगा ।" ,दूसरा कंटेंट अच्छा होना चाहिए और सबसे बड़ी बात प्रस्तुति के लिए बेहद सावधान रहना चाहिए । ,इसके बाद उसे दर्शकों की तालियां और वाहवाही जरूर मिलेगी । ,देश के समूचे सिनेमा जगत में सिर्फ पुरूष मेकअप आर्टिस्ट को ही मान्यता दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं । sg,शुक्रवार को जस्टिस राधाकृष्णन और जस्टिस दीपक मिश्रा की दो सदस्यीय बेंच ने देश के सभी फिल्म उद्योगों में महिला मेकअप आर्टिस्टों को मान्यता न देने के मामले में तीन केंद्रीय मंत्रालयों समेत 15 संगठनों को नोटिस जारी किया है । sg,मुंबई और दक्षिण भारत से सिनेमा जगत में बतौर मेकअप आर्टिस्ट काम न दिए जाने की शिकार चारू खन्ना की ओर से राष्ट्रीय महिला आयोग इस मामले पर पिछ्ले चार साल से सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ रही है । ,महिला आयोग की ओर से मामले को उठाने वाली एडवोकेट ज्योतिका कालरा ने बताया है कि सुप्रीम कोर्ट के दोनों ही जजों ने महिलाओं के प्रति सिनेमा जगत में व्यवहार पर हैरानी जताते हुए पूछा है कि आखिर क्यों महिला मेकअप आर्टिस्ट काम करने के योग्य नहीं है ? ,कोर्ट ने यह भी पूछा है कि किसी भी उद्योग में महिलाओं के काम करने से अन्य लोगों की रोजी - रोटी कैसे खतरे में पड़ जाती है । sg,"सुप्रीम कोर्ट ने महिला मेकअप आर्टिस्टों को सिने जगत के किसी मेकअप आर्टिस्ट एसोसिएशन में सदस्यता न देने के मामले में सूचना - प्रसारण मंत्रालय , महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और श्रम मंत्रालय को नोटिस जारी किया है ।" ,कोर्ट ने सभी संबंधित ट्रेड यूनियनों से भी महिलाओं के प्रति ऐसा रवैया अपनाने का कारण पूछा है । ,सदियों पहले मगध राज्य की राजधानी में भीषण आंधी - तूफान आया । ,उसी दौरान कहीं से एक गिद्ध उड़ता हुआ आया और पानी से बचने के लिए एक दीवार के पास बने चबूतरे पर बैठ गया । ,उसके साथ यह दशा देख नगर सेठ ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया । ,गिद्धों ने पर्वत पर लौटकर विचार किया ‘ मगध ‘ सेठ ने हम पर उपकार किया है । ,हमें उनके उपकार का बदला चुकाना चाहिए । ,लेकिन प्रत्युपकार कैसे करें । ,"इसके लिए पहले गिद्ध ने रास्ता सुझाया अब हमें जो भी कीमती वस्तु कहीं मिले , हम उसे सेठजी के आंगन में गिरा दें ।" pl,वे छतों पर सूखते हुए वस्त्र उठा लेते । ,कहीं किसी स्त्री का आभूषण उठा लेते और नगर सेठ के आंगन में डाल देते । pl,जब सेठ को यह बात पता चली तो उन्होंने उन सभी वस्तुओं को एक अलग कक्ष में रखवा दिया । sg,राजा को पता चला कि गिद्ध चोरी कर रहे हैं तो उन्होंने उनमें से एक गिद्ध को सैनिकों द्वारा पकड़वाया । ,राजा ने पूछा - ‘ तुम लोगों के वस्त्र - आभूषण चुराकर ले जाते हो ? ' ,‘ गिद्ध ने बताया कि नगर सेठ ने हमारी प्राण रक्षा की थी । ,हम उस उपकार का बदला चुका रहे हैं । ,"राजा ने नगर सेठ से इस बाबत पूछताछ की , तो उन्होंने चोरी गए सामानों का अपने पास होना बताया और यह भी कहा कि उन्हें अलग इसलिए रखा गया है कि जो जिसका है , वह उसे ले जाए ।" ,"फिर नगर सेठ ने गिद्ध को समझाया कि उपकार चुकाना अच्छा है , किंतु उसका तरीका भी सही होना चाहिए ।" ,"वस्तुत: उपकार के बदले प्रत्युकार की भावना प्रशंसनीय है , किंतु वह जनहित का विचार कर उचित रूप से करनी चाहिए ।" ,ब्यूटी कॉन्टेस्ट ‘ फेमिना मिस नार्थ इंडिया 2013 ‘ का फाइनल शुक्रवार को नई दिल्ली में होगा । ,"करीब एक माह तक विभिन्न शहरों में आयोजित प्रतियोगिता में यूपी , बिहार , उत्तराखंड , राजस्थान , मध्य प्रदेश , जम्मू और हिमालच प्रदेश की एक हजार से भी ज्यादा सुंदरियों ने भाग लिया ।" ,प्रतियोगिता का आयोजन अमर उजाला डॉट कॉम और श्री साई इंटरटेनमेंट ने किया है । ,फाइनल के लिए तैयारी कर रही 20 सुंदरियों का पिछले आठ दिनों में दिल्ली में ग्रूमिंग सेशन चल रहा है । pl,"इस दौरान सुंदरियों ने मेकअप , कोरियोग्राफी , स्टाइल , पर्सनल डेवलपमेंट के गुर सीखे ।" ,देहरादून की दीक्षा शर्मा ने बृहस्पतिवार को बताया कि ग्रूमिंग सेशन के दौरान शानदार अनुभव रहा । pl,"एक्सपर्ट ने फिटनेस , स्किनकेयर , ग्लैमर और मीडिया के बारे में कई सारे टिप्स दिए ।" ,फाइनल को लेकर नर्वस जरूर हूं लेकिन एक्साडटेड हूं । ,यूं तो भारतीय संस्कृति अपने आप में अनूठी है क्योंकि जो विविधता इस देश में है वह कहीं और नहीं । ,क्रिएटिव एन क्लासिक पेटिंग्स प्रदर्शनी का यह नज़ारा विकास मार्ग स्थित पूर्वा सांस्कृतिक केंद्र में नजर आ रहा है । pl,यहां दिल्ली की खूबसूरत तस्वीरें बरबस ही कलाप्रेमियों को आकर्षित कर रही हैं । pl,कलर एन फोकस की ओर से आयोजित पेटिंग्स प्रदर्शनी में देश के कई राज्यों से पहुंचे कलाकारों ने कैनवस की सतह पर विविध विषयों पर बेहतरीन चित्र प्रदर्शित किए हैं । ,अधिकांश चित्र भारतीय संस्कृति से एक पहल ‘ रूबरू है ’ का एहसास करा रहे हैं तो दूसरे क्षण अन्य चित्रों में नारी शक्ति व नारी उत्पीड़न विषय पर आधारित पेटिंग्स समाज को कर्तव्यों व अधिकारों के लिए प्रेरित करती हैं । ,पेटिंग्स प्रदर्शनी 15 मार्च तक चलेगी । ,"पेटिंग्स प्रदर्शनी में असम , हरियाणा , पंजाब , उत्तर प्रदेश , व दिल्ली के कलाकारों ने अलौकिक कैनवस के पटल पर सृजित कर पृथक रंग रूप दिया है ।" ,पोलियो वैक्सीन ,दुनियाभर में पोलिओम्येलितिस ( या पोलिओ ) का मुकाबला करने के लिए दो पोलियो वैक्सीन का प्रयोग किया जाता है । ,पहला जोनास सॉल्क द्वारा विकसित किया गया और 1952 में उसका पहला परीक्षण किया गया । ,"1955 , अप्रैल 12 को सॉल्क द्वारा दुनिया को इसकी घोषणा की गयी कि , यह निष्क्रिय ( मरे हुए ) पोलियो वायरस के इंजेक्शन की खुराक होते हैं ।" ,एक मौखिक टीका अल्बर्ट साबिन द्वारा तनु ( कमजोर किये गए ) पोलियो वायरस का उपयोग करके विकसित किया गया । ,साबिन के टीके का मानव परीक्षण १९५७ में शुरू किया गया और इसने १९६२ में लाइसेंस प्राप्त किया । ,"चूँकि साधारणतः असंक्राम्य व्यक्तियों में पोलिओ वायरस की कोई दीर्घकालिक वाहक परिस्थिति नहीं है और , पोलियो वायरस का प्रकृति में कोई गैर रिहायशी भण्डारण नहीं है और पर्यावरण में इस वायरस का एक समय की विस्तारित अवधि के लिए अस्तित्व बनाये रखना मुश्किल है ।" ,"इसलिए , टीकाकरण के द्वारा वायरस का व्यक्ति से व्यक्ति में संचरण की रोकथाम वैश्विक पोलियो उन्मूलन का एक महत्वपूर्ण कदम है ।" ,"इन दो टीकों द्वारा दुनिया के सबसे अधिक देशों से पोलियो का उन्मूलन किया गया है और दुनियाभर में पोलियो के मामले , अनुमानित , १९८८ में ३५०,००० से घटकर २००७ में १,६५२ रह गए हैं ।" ,"सामान्य अर्थ में , टीकाकरण रोग प्रतिरोगी तंत्र को ' immunogen ' ( रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले तत्त्व ) के द्वारा तैयार करता है ।" sg,"प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को , एक संक्रामक एजेंट के माध्यम से , उत्तेजित करने की प्रक्रिया को प्रतिरक्षण ( immunization ) के रूप में जाना जाता है ।" ,"टीकाकरण द्वारा पोलियो के प्रति रोग क्षमता को विकसित करने से जंगली पोलियो वायरस का व्यक्ति से व्यक्ति संचरण कुशलतापूर्वक ब्लॉक हो जाता है , जिससे व्यक्तिगत टीका प्राप्तकर्ताओं और व्यापक समुदाय , दोनों की सुरक्षा होती है ।" ,"1936 में , मौरिस ब्रोदिए ने , जो कि न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में एक अनुसंधान सहायक थे , एक मुलभुत बन्दर स्पिनल कॉर्ड से एक formaldehyde द्वारा मारे गए पोलियो टीके का निर्माण करने का प्रयास किया ।" ,उनके प्रारंभिक प्रयास पर्याप्त वायरस प्राप्त न कर पाने के कारण अवरुद्ध हुए । ,ब्रोदिए ने सबसे पहले उस टीके का परीक्षण अपने आप पर और अपने कई सहायकों पर किया । ,"उसके बाद उन्होंने वह teeka तीन हज़ार बच्चों को दिया , जिनमें से कई बच्चों को प्रतिक्रियात्मक एलर्जी हुई , लेकिन किसी में भी पोलियो प्रतिरोधकता विकसित नहीं हुई ।" ,"फिलाडेल्फिया के रोगविज्ञानी जॉन कोल्मेर ने भी उसी वर्ष एक teeka बनाने का दावा किया , लेकिन उससे भी प्रतिरोधकता उत्पन्न नहीं हुई और उन्हें कई मामले प्रवृत करने का दोषी ठहराया गया , जिनमें से कुछ जानलेवा थे ।" ,एक सफलता 1948 में मिली जब जॉन एंडर्स की अध्यक्षता में एक शोध समूह ने बोस्टन चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में मानव ऊतकों पर पोलियो वायरस सफलतापूर्वक उगा दिया । ,इस बढ़त ने वैक्सीन अनुसंधान में बहुत मदद की और अंततः पोलियो के खिलाफ टीके का विकास करना मुमकिन बना दिया । sg,"एंडर्स और उनके सहयोगियों , थॉमस एच. सी. वेलर और फ्रेडरिक रॉबिंस द्वारा की गयी मेहनत को मान्यता देने के लिए उन्हें वर्ष १९५४ में फिजियोलॉजी या चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार दिया गया ।" ,"पोलियो वायरस के विकास के अन्य महत्वपूर्ण अग्रगणि थे : तीन पोलियो वायरस ( serotype ) की पहचान ( पोलियो वायरस प्रकार १ - PV1 , या Mahoney ; PV2 , Lansing और PV3 , Leon ) ।" ,यह निष्कर्ष कि पक्षाघात से पहले वायरस का रक्त में मौजूद होना ज़रूरी है और यह स्पष्टीकरण कि एंटीबॉडी की खुराक गामा - ग्लोबुलिन के रूप में लेने से पक्षाघाती पोलियो से बचा जा सकता है । ,दो पोलियो टीकों के विकास के मार्गदर्शन में पहले आधुनिक बहुसंख्यक टीकों तक पहुंचे । pl,"संयुक्त राज्य अमेरिका में जंगली वायरस के स्थानिक संचरण के कारण लकवाग्रस्त पोलिओम्येलितिस के प्रकोप के कुछ आखिरी मामले वर्ष 1979 में मिडवेस्ट के भिन्न राज्यों , जिनमें से अमिश भी एक था , में दर्ज किये गए ।" sg,"विश्व स्वास्थ्य संगठन , यूनिसेफ और रोटरी फाउंडेशन के नेतृत्व में १९८८ में पोलियो के उन्मूलन के लिए एक वैश्विक प्रयास शुरू किया गया , जो कि मुख्य रूप से अल्बर्ट साबिन के मौखिक वैक्सीन पर निर्भर था ।" ,यह रोग अमेरिका से १९४४ में पूरी तरह मिटा दिया गया । ,"2000 में ऑस्ट्रेलिया और चीन सहित , ३६ पश्चिमी प्रशांत के देशों से पोलियो आधिकारिक तौर पर मिटा दिया गया था ।" ,यूरोप 2002 में पोलियो मुक्त घोषित किया गया । ,"२००८ तक , पोलियो केवल इन चार देशों में स्थानिक रह गया : नाइजीरिया , भारत , अफगानिस्तान और पाकिस्तान ।" ,"हालांकि पोलियो वायरस संचरण दुनिया के बहुत बड़े हिस्से में बाधित कर दिया गया है , किन्तु जंगली पोलियो वायरस का संचरण जारी है और पहले से पोलियो मुक्त क्षेत्रों में जंगली पोलियो वायरस के आयातित होने का निरंतर ख़तरा बना हुआ है ।" ,"अगर पोलियो वायरस आयातित होता है तो , पोलियो का प्रकोप फ़ैल सकता है , खासतौर पर उन क्षेत्रों में जहाँ कम टीकाकरण कवरेज है और पर्याप्त स्वच्छता नहीं है ।" ,"अतः , टीकाकरण कवरेज के उच्च स्तरों को बनाए रखा जाना चाहिए ।" ,पहला प्रभावी पोलियो वैक्सीन पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय में 1952 में जोनास सॉल्क द्वारा विकसित किया गया था । ,लेकिन इसको वर्षो के परीक्षण की आवश्यकता थी । ,"धैर्य बंधाने के लिए सॉल्क ने 26 मार्च 1953 को रेडियो सीबीएस पर वयस्कों और बच्चों के एक छोटे से समूह पर सफल परीक्षण किये जाने की घोषणा की , दो दिन बाद उस परीक्षण के नतीजे JAMA में प्रकाशित किये गए ।" ,"सॉल्क वैक्सीन , या निष्क्रिय पोलियोवायरस टीके ( आइपीवी ) , तीन जंगली विषमय उपभेदों पर आधारित है ।" ,"Mahoney ( प्रकार 1 पोलियो वायरस ) , MEF - 1 ( प्रकार 2 पोलियो वायरस ) और Saukett ( प्रकार 3 पोलियो वायरस ) , जिन्हें बन्दर के गुर्दे के ऊतक समूह ( वेरो सेल रेखा ) के एक प्रकार में उगाया गया था और उसके बाद उन्हें फोर्मलिन से निष्क्रिय किया गया ।" sg,"इंजेक्शन सॉल्क वैक्सीन आईजीजी के माध्यम से रक्तप्रवाह में प्रतिरक्षा प्रदान करता है , जो कि पोलियो के संक्रमण को बढ़ाकर विषाणुरक्तता में बदलने से रोकता है और मोटर नुरोंस की रक्षा करता है और इस प्रकार कंदाकार पोलियो एवं पोस्ट पोलियो सिंड्रोम के जोखिम को ख़त्म कर देता है ।" ,"1954 में इस वैक्सीन का Arsenal Elementary स्कूल और वाटसन होम फॉर चिल्ड्रेन पिट्सबर्ग , पेंसिल्वेनिया में परीक्षण किया था ।" ,फिर सॉल्क के टीके का इस्तेमाल थोमस फ्रांसिस के नेतृत्व में Francis Field Trial नामक एक परीक्षण में किया गया जो कि इतिहास का सबसे बड़ा चिकित्सा परीक्षण था । ,"परीक्षण की शुरुआत कुछ ४००० बच्चों के साथ Franklin Sherman Elementary School , मक्लेँ , वेर्जिनिया में की गयी ।" ,जिसमें कि आगे चलकर Maine से लेकर कैलिफोर्निया तक ४४ राज्यों के १८ लाख बच्चे शामिल होने थे । sg,"अध्ययन के ख़त्म होने तक , लगभग 440,000 बच्चों को एक या एक से अधिक टीके का इंजेक्शन दिया जा चुका था ।" ,"२१०,००० बच्चों को प्लासेबो , जिसमें हानिरहित मीडिया समूह शामिल था , दिया जा चुका था , और 12 लाख बच्चे जिन्हें कोई भी टीका नहीं लगाया गया था ।" ,"वे एक नियंत्रण समूह की भूमिका में थे , जिसका फिर निरीक्षण किया गया यह देखने के लिए कि किसी को पोलियो हुआ है या नहीं ।" ,"क्षेत्र परीक्षण के परिणामों की घोषणा 12 अप्रैल 1955 ( फ्रेंकलिन डी. रूजवेल्ट की मौत की दसवें सालगिरह ; देखिये , फ्रेंकलिन डी. रूजवेल्ट की लकवे की बीमारी ) को की गयी थी ।" ,"सॉल्क वैक्सीन PV1 1 ( प्रकार 1 पोलियो वायरस ) के विरुद्ध 60 से ७० % कारगर है , PV2 और PV3 के विरुद्ध ९० प्रतिशत से ज्यादा कारगर है , और कंदाकार पोलियो के विकास के विरुद्ध ९४ प्रतिशत तक कारगर है ।" sg,सॉल्क वैक्सीन को 1955 में लाइसेंस दिए जाने के बाद जल्द ही बच्चों का टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया गया । ,"अमेरिका में , March of Dimes के द्वारा प्रचारित सामूहिक प्रतिरक्षण टीकाकरण अभियान का अनुसरण करते हुए , पोलियो के सालाना मामले १९५७ में ५६०० तक गिर गए ।" ,१९६१ तक संयुक्त राज्य अमेरिका में केवल १६१ मामले दर्ज हुए । ,"नवंबर 1987 में , संयुक्त राज्य अमेरिका में एक अधिक प्रबल आइपीवी को लाइसेंस दिया गया और वर्त्तमान में वह संयुक्त राज्य अमेरिका का चुनिन्दा विकल्प है ।" ,"पोलियो टीके की पहली खुराक जन्म के बाद शीघ्र ही , आमतौर पर १ से २ महीने की उम्र के बीच और , एक दूसरी खुराक 4 महीने की उम्र में दी जाती है ।" ,"तीसरी खुराक का समय टीका निरूपण पर निर्भर करता है , लेकिन यह ६ से १८ महीने की उम्र के बीच दे देना चाहिए ।" sg,"४ से ६ साल की उम्र के बीच एक बूस्टर टीका दिया जाता है , जो कि स्कूल जाने तक या उस से पहले दिए जाने वाले कुल ४ टीकों में होता है ।" sg,"कुछ देशों में , किशोरावस्था के दौरान एक पांचवाँ टीकाकरण दिया जाता है ।" ,विकसित देशों में वयस्कों ( 18 साल और उससे बड़ी आयु ) का नियमित टीकाकरण न तो ज़रूरी है और न ही इसकी सलाह दी जाती है क्योकि ज्यादातर व्यस्क या तो पहले से ही उन्मुक्त हैं या फिर जंगली पोलियो विषाणु के प्रति उनकी अरक्षितता का जोखिम बहुत कम है । ,"वर्ल्ड चैंपियन , चैंपियनों की चैंपियन और आईसीसी वर्ल्ड रैंकिंग में नंबर वन ।" ,जी हां टीम इंडिया इस समय क्रिकेट की बुलंदियों पर है लेकिन क्रिकेट में कहा जाता है हर दिन एक नया मुकाबला और उस दिन जो जीता वही सिकंदर NULL । ,ऐसा ही कुछ हुआ टीम इंडिया के साथ ट्राई नेशन सीरीज के पहले मुकाबले में । ,आईसीसी वन - डे रैंकिंग में नंबर आठ और मेजबान वेस्ट इंडीज ने रोमांचक मुकाबले में टीम इंडिया को एक विकेट से शिकस्त दे डाली । ,यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि मुकाबले से पहले इंडीज के नियमित कप्तान ड्वेन ब्रावो और स्पीड स्टार रवि रामपॉल अनफिट हो गए थे और टीम की कमान थी कैरन पोलार्ड के हाथ । ,मैदान पर पोलार्ड के चार यारों ने ऐसा गजब ढाया कि चैंपियनों की चैंपियन बनी टीम इंडिया को घुटने टेकने पर मजबूर होना पड़ा । ,खेल डेस्क । ,"क्रिकेट में वैसे तो दो टीमें आपस में टकराती हैं , लेकिन इसके अलावा खेल के दौरान देखने को मिलती है दो खिलाड़ियों के बीच अहम की जंग ।" ,इसमें कई बार खिलाड़ी अपनी अकड़ में करियर को बर्बाद कर लेते हैं । ,ऐसे ही एक खिलाड़ी का नाम है वैली हेमंड । ,इंग्लैंड के इस लेजेंड्री कप्तान ने अहम और बुरी लतों में पड़कर अपने बेहतरीन करियर को दागदार कर लिया था । ,1 जुलाई का दिन इंग्लिश क्रिकेट के लिए एक दुखद दिन रहा है । ,1965 में आज ही के दिन इंग्लैंड के पूर्व कप्तान वैली हेमंड का निधन हुआ था । ,विजडन द्वारा क्रिकेट इतिहास में 4 बेस्ट बल्लेबाजों में शुमार किए गए हेमंड का करियर एक बुरी लत के कारण दागदार हुआ था । ,"उन्होंने उस लत को छुपाने की बहुत कोशिश की , लेकिन उनकी मृत्यु के बाद सच्चाई सामने आ गई ।" ,"हेमंड को निजी जिंदगी की सेक्स की बुरी लत जरूर थी , लेकिन मैदान पर उनका बल्ला जमकर बोलता था ।" ,महज 85 टेस्ट मैचों में 22 सेंचुरी और 24 हाफ सेंचुरी लगाने वाले हेमंड को सर डॉन ब्रेडमैन से बेहतर बैट्समैन माना जाता है । ,चैंपियंस ट्रॉफी में धमाकेदार खिताबी जीत के बाद ट्राई सीरीज के लिए वेस्टइंडीज पहुंची टीम इंडिया की पहली मैच में खुमारी उतर गई । ,मेजबान इंडीज ने रोमांचक मुकाबले में टीम इंडिया को एक विकेट से हरा दिया । ,इस हार के साथ ही यह साबित हो गया कि इंग्लैंड का बारिश के बाद इंडीज की धूप टीम इंडिया पर आगे भी भारी पड़ सकती है । ,दूसरी ओर इंग्लैंड हो इंडीज टीम रोहित शर्मा सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे है । ,रोहित को बार - बार टीम में शामिल करने पर कई बार धोनी और सिलेक्शन कमेटी की आलोचना तक हुई और रोहित को टीम इंडिया का नवाब तक कहा गया । ,चैंपियंस ट्रॉफी में लंबे समय से अंदर - बाहर हो रहे रोहित को धोनी ने अपनी जगह पक्की करने का सुनहरा मौका दिया है लेकिन रोहित रन बनाकर भी बार - बार एक ही गलती कर इस मौके को जाया करने पर उतारू हैं । ,लंदन । ,आईसीसी ने बॉल टेंपरिंग मामलों में कार्रवाई करने का अधिकार अंपायर को दे दिया है । ,आईसीसी के बोर्ड ने वार्षिक सम्मेलन में यह निर्णय लिया है । ,अब अंपायर बॉल से छेड़छाड़ का संदेह होने पर ही कार्रवाई कर सकता है । ,भले ही इसके प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं हों । ,नए नियम के अनुसार छेड़छाड़ का शक होने पर संदिग्ध खिलाड़ी की पहचान नहीं होने पर भी अंपायर गेंद बदल सकता है । ,फील्डिंग करने वाले कप्तान को पहली और अंतिम चेतावनी दे सकता है । ,बल्लेबाजी करने वाली टीम को पेनल्टी स्वरूप पांच रन दे सकता है । ,यह नियम एक अक्टूबर से लागू हो जाएगा । ,हाल ही चैंपियंस ट्रॉफी के एक मैच में पूर्व इंग्लिश कप्तान बॉब विलिस ने इंग्लैंड पर ही बॉल टेंपरिंग के आरोप लगाए थे । ,"विलिस ने कहा था कि श्रीलंका के खिलाफ मैच के दौरान जब गेंद बदली गई थी , तब इंग्लैंड का खिलाड़ी गेंद को खुरच रहा था ।" ,चैंपियन ट्रॉफी के फाइनल में टीम इंडिया से पिटे अंग्रेजों की चार दिनों में दूसरी बार घरेलू मैदान पर दोबारा बेइज्जती हो गई । ,टीम इंडिया के हाथों फाइनल में चोकर्स साबित हो चुकी इंग्लिश टीम को इस बार बेइज्जत किया न्यूजीलैंड ने । ,"केनिंगटन ओवल , लंदन में दो टी - 20 मैचों की सीरीज के पहले मैच में ब्लैक कैप्स ने अंग्रेजों को रोमांचक मुकाबले में हरा दिया ।" ,यहां भी अंग्रेजों के लिए 5 का डिजिट अनलकी साबित हुआ । ,चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में पांच रनों से हारने वाली इंग्लिश टीम यहां भी पांच रनों से हार गई । ,इंग्लैंड के कप्तान इयान मॉर्गन ने टॉस जीतकर न्यूजीलैंड को पहले बैटिंग के लिए बुलाया । ,कीवीज ओपनर हैमिश रदरफोर्ड ने 62 रनों की आतिशी पारी खेल मॉर्गन के इस फैसले को गलत साबित कर दिया । ,युवा रदरफोर्ड के तेवर कितने तीखे थे इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने इस पारी में केवल 35 बॉलें खेलीं और छह चौके और चार गगनभेदी छक्के जड़ दिए । ,रदरफोर्ड का साथ दिया कप्तान बैरंडन मैक्कुलम ने । ,इंग्लैंड के बॉलर्स की धुनाई करते हुए मैक्कुलम ने भी 48 गेंदों पर सात चौके और दो छक्कों से सजी 68 रनों की पारी खेली । ,आखिरी ओवर्स में रॉस टेलर ( 32 ) और टॉम लॉथम ( 22 ) ने भी तेजतर्रार पारियां खेल कीवीज टीम को 201 के टोटल तक पहुंचा दिया । ,जवाबी पारी खेलते हुए अंग्रेजों ने भी तूफानी शुरुआत की और केवल 3.3 ओवर्स में ही 50 रन जोड़ डाले । ,एलेक्स हेल्स और माइकल लंब खतरनाक साबित हो रहे थे । ,एक समय इंग्लैंड ने केवल 10 ओवर्स में ही 100 रन पूरे कर लिए थे लेकिन हेल्स के आउट होते ही मैच का नक्शा बदल गया । ,इसके बाद न्यूजीलैंड के बॉलर्स ने वापसी करते हुए विकेट गिराना शुरू कर दिए । ,हालाकि ल्यूक राइट ने केवल 34 गेंदों पर 52 रन ठोक इंग्लैंड को मुकाबले में बनाए रखा पर पूरे प्रयासों के बाद भी 5 का अंक अंग्रेजों पर भारी और इंग्लैंड 196 रन ही बना सकी । ,इस तरह न्यूजीलैंड ने इस रोमांचक मुकाबले को जीत सीरीज में 1 - 0 की बढ़त हासिल कर ली । ,पोलार्ड के पहले यार हैं टीनो बेस्ट । ,इस पर बाह्य अलंकरण के रूप में धार्मिक महत्व के कमल प्रतीक और अन्य मांगलिक चिन्ह सुरुचिपूर्ण अंकित किए गए हैं । ,"आंतरिक भाग का मन्दिर गर्भ बिल्कुल सात्विक है , जिसकी अलंकार विहीन मेहराबदार दीवारें गहन पवित्रता से भरी हैं ।" ,लक्ष्मीनारायण मन्दिर तक पहुँचने के लिए राम राजा मन्दिर से फर्शीदार मार्ग जाता है । ,"लक्ष्मीनारायण मन्दिर की वास्तु - संकल्पना अत्यंत रोचक है , जिसमें मन्दिर और दुर्गा शैली का अद्‌भुत समन्वय है ।" ,लक्ष्मीनारायण के भीतरी भागों में ओरछा के भित्ति चित्रकला के सबसे सुन्दर नमूने देखने को मिलते हैं । ,दीवारों पर और खासकर तीन बड़े कमरों में बने भित्ति चित्रों में अभी भी जीवन स्पन्दित प्रतीत होता है । ,इन चित्रों में सर्वधर्म समभाव और आध्यात्मिक अनुभूतियों को अभिव्यक्तियाँ मिलती हैं । sg,उचित संरक्षण के कारण इनके रंगों ने अपनी कांति अभी तक नहीं खोई है । sg,एक सुरम्य बागीचे के रूप में परिकल्पित फूलबाग उद्यान प्रांगण बुन्देला राजाओं के सौंदर्यबोध की श्रेष्ठता को प्रकट करता है । ,"इसके मध्य भाग में फव्वारों की कतार है , जो एक आठ खम्बों वाले प्रासाद मंडप तक जाती है ।" ,इनके नीचे ओरछा राजाओं का ग्रीष्मकालीन शीतल विश्राम गृह था । ,इस भूमिगत प्रासाद में अभिनव कुशलता के साथ चंदन कटोरा के द्वारा छत से झरती हुई पानी की बूँदें बरसात का आभास देती थीं । ,दीवान हरदौल महल स्थानीय लोगों के लिए आस्था का केन्द्र है । ,"हरदौल , वीर सिंह जू देव के सुपुत्र थे जिन्होंने अपने बड़े भाई जुझार सिंह द्वारा संशय प्रकट करने पर भाभी के प्रति अपनी निश्छ्ल प्रीति प्रकट करने के लिए प्राण उत्सर्ग कर दिए थे ।" ,संत स्वभाव वाले हरदौल के इस महान उत्सर्ग के फलस्वरूप उन्हें देवताओं के समान कीर्ति मिली । ,बुन्देलखण्ड के ग्रामों में आज भी उनकी स्मृति में आशीर्वाद की याचना करते हैं । ,"छोटा सा सुन्दर महल आज भग्न स्थिति में है , जिसे मुसलमान तीर्थ मानते हैं ।" sg,जुझार सिंह के पुत्र धुर्जबान ने दिल्ली में मुसलमान युवती से विवाह कर मुस्लिम धर्म अंगीकार कर लिया था । ,बाद में उन्होंने अपना जीवन भजन - पूजन में बिताया और फिर वह एक संत के रूप में प्रतिष्ठित हुए । ,बेतवा नदी के किनारे कंचन घाट पर ओरछा के राजाओं की स्मृति में 14 भव्य छत्रियाँ बनी हुई हैं । sg,महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चंद्रशेखर आजाद की स्मृति में मध्यप्रदेश सरकार ने शहीद स्मारक निर्मित किया है । ,भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन के समय 1926 - 1927 में आजाद यहाँ अज्ञातवास में छिपकर रहे । ,शहीद स्मारक परिसर में आजाद की प्रतिमा भी स्थापित है । ,"ओरछा के अन्य दर्शनीय स्थलों में सिद्धबाबा का स्थान , जुगलकिशोर , जानकी मन्दिर और ओहरेद्वार का हनुमान मन्दिर महत्वपूर्ण है ।" ,ओरछा कैसे पहुँचा जाए । ,वायु सेवा : ,ग्वालियर ( 119 कि.मी. ) एवं खजुराहो ( 170 कि.मी. ) निकटवर्ती हवाई अड्डे हैं । ,रेलवे सेवाएँ : ,दिल्ली - मुम्बई और दिल्ली - चेन्नई मुख्य मार्गों पर निकटवर्ती रेलवे स्टेशन झाँसी ( 160 कि.मी. ) है । ,सभी प्रमुख मेल और एक्सप्रेस गाड़ियाँ झाँसी में रुकती हैं । ,ओरछा झाँसी - खजुराहो मार्ग पर स्थित है । ,ओरछा और झाँसी के बीच नियमित बस सेवाएँ उपलब्ध हैं । ,अनुकूल मौसम : जुलाई से मार्च ,ठहरने के स्थान : ,"होटल शीश महल , बेतवा रिट्रीट ( मध्यप्रदेश पर्यटन ) ।" sg,ग्वालियर राज्य की पुरातन राजधानी आज भी अपने प्राचीन वैभव की कहानी कह रही है । ,"ग्वालियर में अनेक राजवंशों ने राज किया जिनमें प्रतिहारों के महान राजपूत कुल , कुछवाहा वंश के सम्राट और स्मारकों के इस नगर पर अपने राज की अमिट छाप छोड़ी ।" ,ग्वालियर के प्राचीन इतिहास के संबंध में किंवदंती कुछ इस प्रकार है : ,आठवीं सदी में सूरज सेन नामक एक मुखिया भयावह बीमारी से ग्रस्त हो गया था । ,वह ग्वालिपा नामक एक एकान्तवासी साधु की सहायता से निरोग हुआ और कृतज्ञता स्वरूप उसने इस नगर की स्थापना कर इसका नामकरण उसी संत के नाम पर किया । ,ग्वालियर शहर सदियों तक अनेक राजवंशों का आश्रयस्थल रहा और प्रत्येक के राज्यकाल में शहर में नये आयाम जुड़े । ,"ग्वालियर के योद्धा राजाओं , कवियों , संगीतकारों , और साधु - संतों में अपने योगदान से इस नगर को अधिकाधिक समृद्धि और संपन्नता दी और यह नगर सारे देश में विख्यात हुआ ।" ,आज वह जीवन की हलचल और स्पंदन से ओतप्रोत एक आधुनिक भारतीय नगर है । ,ग्वालियर के दर्शनीय स्थल - ,बलुए पत्थर की सीधी चट्टानों पर खड़ा हुआ ग्वालियर दुर्ग समूचे शहर की दृष्टि से ऊँचे आसन पर है और इसका सबसे शानदार स्मारक है । ,"ग्वालियर दुर्ग महान घटनाओं , कारागार - सजाओं , युद्धों और जौहरों का मूक साक्षी रहा है ।" ,एक खड़ी सड़क ऊपर की ओर इस दुर्ग को जाती है जिसके किनारों पर चट्टानों में से काटकर तराशी गई जैन तीर्थकारों की मूर्तियाँ हैं । ,किले की वाह्य प्राचीरें आज भी शानदार ढंग से खड़ी हैं जिनकी लंबाई दो मील और ऊँचाई 35 फुट है । ,ग्वालियर दुर्ग की कीर्ति भारतवर्ष के अपराजेय दुर्ग की है । sg,ग्वालियर दुर्ग के निराले शानदार स्वरूप को देखकर ही बाबर ने इसे भारत के दुर्गों का मोती कहा था । ,किले के भीतर मध्यकालीन स्थापत्य कला के कुछ नायाब नमूने हैं । sg,पंद्रहवीं सदी का गूजरी महल राजा मानसिंह तोमर ने बनवाया जो उसकी साहसी गूजर रानी मृगनयनी के प्रेम का स्मारक है । ,गूजरी महल का बाहरी रूप आज भी प्रायः पूरी तरह से सुरक्षित है । ,उनका मानना है कि इस फिल्म के माध्यम से हम विकिलीक्स के प्रभाव को समझ पाएंगे और उस विचार को जान पाएंगे कि कैसे एक असाधारण व्हिसल ब्लोइंग वेबसाइट की नींव पड़ी । ,"एक फिल्म का प्रभाव चूंकि बहुत बड़े स्तर पर होता है , इसलिए विकिलीक्स इस फिल्म को सांस्कृतिक हमले के रूप में देख रहा है ।" ,"वर्ष 2007 से 2010 के काल को समेटे नवम्बर में प्रदर्शित हो रही यह फिल्म क्या सामाजिक - सांस्कृतिक भूचाल खड़ा करती है , यह तो समय ही बताएगा , लेकिन एक बात तो तय है कि यह फिल्म किसी मायने में विकिलीक्स की किसी सनसनीखेज खबर से कम नहीं होगी ।" ,चर्चित फिल्म ‘ जॉली एलएलबी ‘ ने सोमवार तक भारत के बॉक्स ऑफिस पर 14.41 करोड़ रुपए का कारोबार किया था । ,फिल्म के साधारण बजट को देखते हुए ट्रेड पंडितों का मानना है कि फिल्म की प्रोडक्शन कंपनी फॉक्स स्टार इंडिया मुनाफे में रहेगी । ,इस फिल्म के सैटेलाइट और छोटे केंद्रों में यह फिल्म बिल्कुल नहीं चली । ,दिल्ली - यूपी पंजाब और मुंबई से ही फिल्म की ज्यादातर कमाई हुई है । ,यशराज फिल्म्स की ‘ मेरे डैड की मारुति ‘ दर्शकों को खास लुभा नहीं पाई और पहले सप्ताहांत और बाद के दो दिनों में यह सिर्फ 5.40 करोड़ ही इकट्ठा कर पाई थी । ,"नील नितिन मुकेश की ‘ थ्री जी ‘ भी खास कुछ कर नहीं पाई , हालांकि इसने अपेक्षाकृत छोटे केंद्रों में थोड़ा बेहतर कारोबार करते हुए पहले हफ्ते करीब 5 करोड़ बटोरे ।" ,हाल की रिलीज फिल्मों में तिग्मांशु धूलिया की ‘ साहब बीबी और गैंस्टर रिटर्न्स ‘ ने 18.75 करोड़ रुपये का कारोबार किया है । ,संजय - व्यंग्य फिल्म ‘ सारे जहां से महंगा ‘ कमजोर पटकथा की वजह से नहीं चल पाई । ,जॉन अब्राहम की ‘ आई मी और मैं ‘ के 9 करोड़ के कारोबार से तय है कि फिल्म अपनी लागत भी नहीं वसूल पाएगी । ,"काय पो चे ने किया अच्छा कारोबार , रामगोपाल वर्मा की ‘ द अटैक ऑफ 26 / 11 ‘ को इंड्स्ट्री ने फ्लॉफ करार दिया है ।" ,इसने अभी तक करीब 11.50 करोड़ रुपए की कमाई की । ,संजय दत्त की ‘ जिला गाजियाबाद ‘ भी 16 करोड़ के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के साथ इसी श्रेणी में रही । ,हाल की एक प्रमुख हिट फिल्म नए कलाकारों वाली ‘ काय पो चे ‘ रही है जिसने केवल भारत में 49.5 करोड़ रुपए बटोरे हैं । ,वैसे नए कलाकारों के साथ ही कम लागत वाली ‘ एनिबडी कैन डांस ` ने भी 45.5 करोड़ रुपए बटोरकर खुद को बड़ी हिट फिल्मों की सूची में डाल लिया है । pl,पिछले साल से भारतीय सिनेमा के क्षेत्र में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार बांट रही केंद्र सरकार इस साल से सिनेमा की पढ़ाई कर रहे छात्रों की फिल्मों को भी हर साल पुरस्कारों से सम्मानित करेगी । ,भारतीय सिनेमा के 100 साल पूरे होने वाले इस सिने शताब्दी साल में सरकार की कई योजनाओं में से एक योजना यह है कि सिनेमा के छात्रों द्वारा बनाई जा रही फिल्मों का एक विशेष फेस्टीवल हो और बेहतर फिल्मों को पुरस्कृत कर इन छात्रों का उत्साह बढ़ाया जाए । pl,इसके लिए राष्ट्रीय पुरस्कार शुरू किए जा रहे हैं । pl,"फ्रांस , जर्मनी , अमेरिका समेत कई मुल्कों के छात्रों की फिल्मों के समारोह आयोजित किए जाते हैं जहां केवल उन्हीं की फिल्मों का प्रदर्शन होता है ।" sg,सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने हाल ही में सिनेमा के 100 साल को मनाने से जुड़ी ऐसी कुछ अन्य योजनाओं के प्रस्ताव की स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय को लिखा है । sg,अनुमति मिलते ही उन पर तेजी से काम शुरू होगा । ,मंत्रालय ने अपने अधीन आने वाले पुणे स्थित फिल्म एवं टेलीविजन इंस्टीट्यूट और कोलकाता स्थित सत्यजीत राय फिल्म एवं टेलीविजन इंस्टीटयूट को ज़िम्मेदारी दी है कि वे इन फेस्टीवल का आयोजन करें । ,सरकार ने यह भी तय किया है कि राष्ट्रीय छात्र फिल्म फेस्टीवल हर साल एक तय समय में आयोजित किया जाएगा । ,शुरूआत में इन दोनों इंस्टीट्यूट को बारी से इसके आयोजन की जिम्मेदारी दी जाएगी । ,मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि अलग श्रेणियों के तहत कुल 14 पुरस्कार दिए जाएंगे । ,"ये पुरस्कार फिचर फिल्म , गैर फिचर फिल्म , ( डॉक्युमेंट्री व लघु फिल्म ) को दिए जाएंगे ।" ,विजेता फिल्मों को दिए जाने वाली पुरस्कार राशी तय करने की प्रक्रिया चल रही है । ,"इन समारोहों के दौरान फिल्मों से जुड़े सेमिनार वर्कशॉप ओपन फोरम , और नामी फिल्मी हस्तियों के साथ मास्टर क्लासेज आदि भी आयोजित किये जाएंगे ।" ,यह फेस्टीवल देश भर के उन सभी छात्रों के लिए होगा जो सरकारी या गैर सरकारी संस्थानों में सिनेमा से जुड़े पाठ्यक्रमों का अध्ययन कर रहे हैं । pl,विवादों में फंसने के बाद प्रियंका चोपड़ा खानों के मामले में फूंक - फूंक कर कदम रख रही हैं । ,"उनका नाम कभी शाहरुख खान के साथ , तो कभी सलमान खान के साथ जोड़ा जाता रहा है ।" ,फिलहाल उन्हें शाहरुख खान के करीब माना जाता है । sg,शायद इसी वजह से उन्होंने अनुराग कश्यप की छोटी फिल्म के प्रस्ताव को सिरे से ठुकरा दिया । ,भारतीय सिनेमा के 100 साल पूरे होने के अवसर पर ‘ बॉम्बे टॉकीज ‘ शीर्षक से एक फिल्म बन रही है । ,"इसमें अनुराग बसु , दिबाकर बनर्जी , करण जौहर , अनुराग कश्यप और जोया अख्तर की छोटी फिल्में होंगी ।" sg,अनुराग कश्यप एक प्रशंसक के दृष्टिकोण से किसी पापुलर स्टार पर फिल्म की योजना बना चुके थे । ,उन्होंने पहले सलमान खान की मौजूदा लोकप्रियता को ध्यान में रख कर स्क्रिप्ट लिखी और उसमें प्रियंका चोपड़ा से उनकी ज़बर्दस्त फैन की भूमिका निभाने का आग्रह किया । ,"प्रियंका चोपड़ा को स्क्रिप्ट पसंद आई , लेकिन संभावित विवादों को ध्यान में रखकर उन्होंने फिल्म करने से मना कर दिया ।" ,वह नहीं चाहती थीं कि उन्हें सलमान खान का करीबी मान कर उनके नए दोस्त नाराज़ हो जाएं । sg,उनके इंकार के बाद ही अनुराग को जल्दबाजी में अमिताभ बच्चन पर केंद्रित फिल्म लिखनी पड़ी । ,प्रियंका के करीबी सूत्रों के मुताबिक आगामी फिल्मों की शूटिंग और अपने पहले म्यूजिक अलबम ‘ इन माई सिटी ‘ के प्रमोशन की व्यस्तता के कारण उन्हें अनुराग कश्यप को न कहना पड़ा । ,अभिनेत्री बिपाशा बसु ‘ राज 3 ‘ के बाद फिर से एक बार सपूर्ण वर्मा की हॉरर फिल्म ‘ आत्मा ‘ में नजर आने वाली हैं । ,"बकौल बिपाशा लोगों को लगता है कि मैं हॉरर फिल्मों की एक्सपर्ट हो गई हूं , लेकिन मुझे भूतों से अभी भी बहुत डर लगता है ।" pl,मेरी छोटी बहन इतनी हॉरर फिल्में देख चुकी है कि उसे अब जरा सा भी डर नहीं लगता । ,मुझसे कम तो मेरी भतीजी डरती है जिसका नाम निया है । ,मैंने अपने डर को ही कम करने के लिए ‘ आत्मा ‘ में रील लाइफ बेटी चार वर्षिया डोएल धवन के किरदार का नाम निया रखा । ,फिल्म के निर्देशक सुपर्ण से निया नाम देने का आग्रह किया । ,"मैंने उनसे कहा कि हॉरर कहानी फिल्माने के दौरान डोएल और मेरा मनोबल बना रहे , इसके लिए यह जरूरी है मुझे अपनी भतीजी की याद आती रहे ।" ,"स्टेरॉयड पेरिटोनिटिस , मिलियरी रोग , स्वरयंत्र का टीबी , लिम्फेडेनीटिस और मूत्रजन यह पूर्ण रूप से प्रमाणित नहीं है और स्टेरॉयड के नियमित उपयोग की सलाह नहीं दी जा सकती ।" ,इन रोगियों में स्टेरॉयड उपचार का उपयोग मामले पर निर्भर करता है जिसका फैसला चिकित्सक के द्वारा किया जाता है । ,थेलिडोमाइड टीबी मैनिंजाइटिस में लाभकारी हो सकता है और इसका उपयोग उन मामलों में किया गया है जिनमें रोगी स्टेरॉयड उपचार के लिए प्रतिक्रिया नहीं देता । ,"जो रोगी टीबी का उपचार नियमित रूप और भरोसे के साथ नहीं करते हैं , उनमें उपचार की विफलता की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है , उनमें रोग के फिर से होने , या दवा प्रतिरोधी टीबी विभेद उत्पन्न हो जाने की संभावना भी बहुत अधिक होती है ।" ,ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से रोगी अपना इलाज पूरा नहीं ले पाते । ,आमतौर पर टीबी के लक्षण उपचार शुरू होने के कुछ सप्ताह में ही कम होने लगते हैं और इस समय कई रोगी लापरवाह हो जाते हैं और दवा लेना बंद कर देते हैं । ,"इसके पूरे उपचार के लिए निरंतर दवा लेना जरुरी है , समय समय पर यह जांच भी की जानी चाहिए कि रोगी में कोई समस्या तो उत्पन्न नहीं हो रही है ।" ,रोगियों को यह बताया जाना जरूरी है कि उन्हें नियमित रूप से अपनी दवा लेनी चाहिए । ,"उपचार को पूरा किया जाना बहुत महत्वपूर्ण है , क्योंकि ऐसा न करने से रोग फिर से हो सकता है और दवा के लिए प्रतिरोध भी उत्पन्न हो सकता है ।" ,इसमें एक मुख्य शिकायत यह रहती है कि इसकी गोलियां बहुत बड़ी होती हैं । ,सबसे बड़ी पीजेडए है ( होर्स टेबलेट का आकार ) ,"इसकी जगह पीजेडए विकल्प के रूप में सिरप भी दिया जा सकता है , या और अगर गोली का आकार वास्तव में बहुत बड़ा है और इसका सिरप विकल्प उपलब्ध नहीं है तो पीजेडए को पूरी तरह से हटाया जा सकता है ।" ,"अगर पीजेडए को हटा दिया जाता है , तो रोगी को यह चेतावनी दी जानी चाहिए कि इससे रोग के ठीक होने की अवधि बढ़ सकती है ( पीजेडए को हटाने के परिणामों को विस्तारपूर्वक नीचे बताया गया है ) ।" ,एक दूसरी शिकायत यह रहती है कि इस दवा को खाली पेट लेने की सलाह दी जाती है जिससे इसका अवशोषण जल्दी हो । ,"यह रोगियों के लिए कई बार मुश्किल हो जाता है ( उदाहरण के लिए , पारी में काम करने वाले लोग जो अपना भोजन अनियमित समय पर खाते हैं ) और इसलिए रोगी को सिर्फ दवा लेने के लिए अपनी दिनचर्या से एक घंटा जल्दी जागना पड़ता है ।" ,ये नियम वास्तव में इतने कड़े नहीं हैं जितना कि अक्सर चिकित्सकों के द्वारा बताये जाते हैं । ,"वास्तव में बात यह है कि अगर आरएमपी को वसा के साथ लिया जाये तो इसके अवशोषण की गति धीमी हो जाती है , लेकिन प्रोटीन , कार्बोहाइड्रेट और अम्लरोधी इसके अवशोषण को प्रभावित नहीं करते हैं ।" ,"सितम्बर 2006 की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद से , अब दक्षिण अफ्रीका के अधिकांश प्रान्तों में मामले सामने आये हैं ।" pl,"16 मार्च 2007 , तक 314 मामले दर्ज किये जा चुके थे , जिनमें से 215 की मृत्यु हो गयी ।" ,"यह स्पष्ट है कि टीबी के इस उपभेद का प्रसार एचआईवी और संक्रमण के अपर्याप्त नियंत्रण से सम्बंधित है ; अन्य देशों में जहां XDR - TB के उपभेद उत्पन्न हुए हैं , मामले का उपयुक्त प्रबंधन न किये जाने के कारण दवा के लिए प्रतिरोध विकसित हुआ ।" ,या रोगी के द्वारा उपचार को ठीक प्रकार से न लेने के कारण ऐसा हुआ । ,"टीबी का यह उपभेद पहली और दूसरी पंक्ति के लिए , दक्षिण अफ्रीका में वर्तमान में उपलब्ध किसी भी दवा के लिए प्रतिक्रिया नहीं देता ।" ,अब यह स्पष्ट है कि इस समस्या को अधिकारियों के द्वारा बताये गए समय से अधिक समय हो चुका है और यह उससे कहीं अधिक व्यापक है । pl,"23 नवम्बर 2006 तक XDR - TB के 303 मामले दर्ज किये जा चुके हैं , जिनमें से 263 मामले क्वाजुलू - नेटल में दर्ज किये गए ।" ,"टीबी के रोगियों को अलग रखा जाना एक गंभीर विचार है , कई लोगों के अनुसार यह रोगी के मानव अधिकारों का उल्लंघन है , लेकिन टीबी के इस उपभेद के आगे प्रसार को रोकने के लिए यह आवश्यक हो सकता है ।" ,MDR - टीबी का उपचार और निदान संक्रमण के बजाय बहुत कुछ कैंसर से मिलता जुलता है । ,"इसमें मृत्यु दर 80 प्रतिशत तक है , जो कई कारकों पर निर्भर करती है , इन कारकों में शामिल हैं ।" ,"उपचार की अवधि कम से कम 18 महीने की होती है और इसमें एक साल भी लग सकता है ; इसमें शल्य चिकित्सा की आवश्यकता भी पड़ सकती है , हालांकि इष्टतम उपचार के बावजूद मृत्यु दर अधिक होती है ।" ,"उस ने कहा , अच्छे परिणाम अभी भी संभव हैं ।" ,उपचार कम से कम 18 माह की अवधि का होता है और इसमें प्रत्यक्ष प्रेक्षण का अवयव उपचार की सफलता को 69 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है । sg,MDR - टीबी का इलाज ऐसे चिकित्सक से ही लेना चाहिए जो MDR - टीबी के उपचार में अनुभवी हो । ,विशेषज्ञ केन्द्रों में उपचार लेने वाले रोगियों की तुलना में गैर विशेषज्ञ केन्द्रों में उपचार लेने वाले रोगियों में मृत्यु दर अधिक पाई गयी है । pl,"स्पष्ट जोखिम के अलावा ( अर्थात MDR - टीबी के रोगी में ज्ञात जोखिम ) अन्य जोखिम भी देखे जाते हैं जैसे पुरुष लिंग , एचआईवी संक्रमण , पहले भी टीबी का हो चुका होना , टीबी का उपचार असफल होना , मानक टीबी के उपचार के लिए प्रतिक्रिया न होना और टीबी के मानक उपचार के बाद रोग का फिर से हो जाना ।" ,MDR - टीबी का उपचार संवेदनशीलता परीक्षण के आधार पर किया जाना चाहिए : इस जानकारी के बिना ऐसे रोगियों का उपचार असंभव है । ,अगर MDR - टीबी के संदिग्ध रोगी का उपचार किया जा रहा है तो रोगी का उपचार प्रयोगशाला संवेदनशीलता परीक्षण के आधार पर SHREZ + MXF + साइक्लोसेरीन के साथ शुरू किया जाना चाहिए । ,"कुछ देशों में "" rpoB "" के लिए एक जीन जांच उपलब्ध है और यह MDR - टीबी के लिए एक उपयोगी मार्कर का काम करता है ।" ,क्योंकि आइसोलेटेड आरएमपी प्रतिरोध दुर्लभ है ( ऐसी स्थिति को छोड़कर जब रोगी का उपचार पहले कभी केवल रिफाम्पिसिन के साथ किया जा चुका हो । ,"अगर जीन जांच ( "" rpoB "" ) के परिणाम सकारात्मक आते हैं तो आरएमपी को हटा कर SHEZ + MXF + साइक्लोसेरीन का उपयोग किया जाना चाहिए ।" ,MDR - टीबी के संदेह के बावजूद रोगी को INH पर रखने का कारण यह है कि INH टीबी के उपचार में इतनी शक्तिशाली है कि इसे हटाना मूर्खता होगी जब तक इस बात का सूक्ष्मजैविक प्रमाण न मिल जाये कि यह अप्रभावी है । ,"आइसोनियाज़िड - प्रतिरोध के लिए भी जांच उपलब्ध है ( "" katG "" और "" mabA - inhA "" ) , लेकिन ये अधिक व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं हैं ।" ,"जब संवेदनशीलता ज्ञात हो जाती है और आइसोलेट को निश्चित रूप से INH और RMP दोनों के लिए प्रतिरोधी पाया जाता है , पांच दवाओं को निम्नलिखित क्रम में चुना जाना चाहिए ( ज्ञात संवेदनशीलताओं के आधार पर ) ।" ,"दवाओं को सूची में सबसे ऊपर रखा जाता है क्योंकि वे अधिक प्रभावी और कम विषाक्त हैं ; दवाओं को सूची में सबसे नीचे रखा जाता है क्योंकि वे कम प्रभावी और अधिक विषाक्त हैं , या उन्हें प्राप्त करने में कठिनाई होती है ।" ,"एक वर्ग के भीतर एक दवा के लिए प्रतिरोध का अर्थ है कि आमतौर पर उस वर्ग में सभी दवाओं के लिए प्रतिरोध होता है , परन्तु रिफाम्पिसिन एक उल्लेखनीय अपवाद है ।" ,रिफाम्पिसिन के लिए प्रतिरोध का तात्पर्य हमेशा रीफाब्युटिन से प्रतिरोध नहीं होता और प्रयोगशाला में इसकी जांच के लिए कहा जाता है । ,दवा के प्रत्येक वर्ग में केवल एक दवा का उपयोग करना ही संभव है । ,यदि उपचार के लिए पांच दवाएं ढूंढना मुश्किल है तो चिकित्सक इस बात का अनुरोध कर सकता है कि उच्च स्तरीय INH - प्रतिरोध की जांच की जाये । ,"अगर उपभेद में केवल निम्न स्तर का INH - प्रतिरोध है ( प्रतिरोध 1.0 mg / l INH पर , परन्तु 0.2 mg / l INH पर संवेदी ) तो INH की ऊंची खुराक का उपयोग उपचार के एक हिस्से के रूप में किया जा सकता है ।" ,"दवाओं को जारी रखने के साथ , PZA और इंटरफेरॉन का काउंट शून्य हो जाता है ; अर्थात , चार दवाओं के साथ PZA को शामिल करने से , आप पांच करने के लिए एक दवा का चयन और कर सकते हैं ।" ,"एक से अधिक इंजेक्शन वाली दवा का उपयोग करना संभव नहीं होता ( STM , केप्रिओमाइसिन या एमिकासिन ) , क्योंकि इन दवाओं का विषाक्त प्रभाव थोड़ा बहुत हो सकता है ।" ,"अगर संभव हो , एमिनोग्लाइकोसाइड्स प्रतिदिन कम से कम तीन महीने के लिए दी जानी चाहिए ( और संभवतया इसके बाद सप्ताह में तीन बार ) ।" ,सिप्रोफ्लोक्सासिन का उपयोग ट्यूबरकुलोसिस के उपचार में नहीं किया जाना चाहिए अगर अन्य फ्लोरोक्विनोलोन उपलब्ध हों । ,"MDR - टीबी में उपयोग के लिए कोई आंतरायिक उपचार नहीं है , परन्तु चिकित्सकीय अनुभव यह है कि सप्ताह में पांच दिन के लिए इंजेक्शन से दी जाने वाली दवाओं ( क्योंकि सप्ताहांत पर दवा देने के लिए कोई भी उपलब्ध नहीं होता है ) का बुरा परिणाम नहीं होता ।" ,प्रत्यक्ष प्रेक्षित थेरेपी निश्चित रूप से MDR - टीबी के परिणामों में सुधार करने में मदद करती है और इसे MDR - टीबी के उपचार का एक अभिन्न हिस्सा माना जाना चाहिए । ,"उपचार के लिए क्या प्रतिक्रिया हो रही है , इसका पता लगाने के लिए बार बार थूक का कल्चर किया जा सकता है ( अगर संभव हो तो हर माह इसे करना चाहिए ) ।" ,अब टोस्ट बनाने के लिए बेकिंग डिश में थोड़ी चिकनाई लगाकर ब्रेड के स्लाइस बिछाकर उस पर भुट्टे का मिश्रण फैला दें ( 1 इंच मोटाई तक ) । ,इस पर टोमेटो सॉस छिड़कें और बाकी बची चीज भी बुरक दें । ,टोस्ट को भूरा होने तक बेक करें और गरमा - गरम कुरकुरे टोस्ट का लुत्फ उठाइए । ,काले चनो को साफ करके धो लीजिये और 5 घंटे के लिए पानी में भिगो दें । ,भीगे हुए चनो को धोकर 1 कुकर में डाल दें उसमें थोड़ा सा नमक और 1 गिलास पानी डालकर उबाल लें । ,जब चने उबल जाए तो उसका पानी निकाल दें । ,अब एक कड़ाही में तेल डालकर गरम करें ,जब तेल गरम हो जाए तो उसमें जीरा डाल दें ,जब जीरा भुन जाए तो उसमें सूखा धनिया और लाल मिर्च डालकर चने भी डाल दें । ,5 मिनट ढककर पकने दें । ,"अब इसमें अमचूर पाउडर , अदरक का लच्छा और हरा धनिया डालकर मिला दें ।" ,उत्तर भारत में नवरात्र के अवसर पर अष्टमी और नवमी के दिन ये चने पूड़ी और हलवे के साथ प्रसाद के रूप में बनाये जाते हैं । ,टमाटर धोकर ऊपर से स्लाइस काट लें व स्कूपर से खोखला कर लें । ,टमाटर के अंदर की तरफ नमक लगाकर उल्टा रख दें । ,एक पैन में 2 चम्मच तेल गर्म करें और जीरा भूनें । ,फिर प्याज तथा हरी मिर्च डालकर भूनें । ,हल्दी डालें । ,पनीर डालकर सावधानी से मिलाएं । ,"अब नमक , लाल मिर्च पाउडर , गरम मसाला पाउडर तथा हरा धनिया मिलाएं ।" ,आंच से उतार लें । ,तैयार भरावन को खोखले टमाटर में भरकर स्लाइस से ढंककर टूथपिक्स से जोड़ दें । ,पैन में बचे तेल को गर्म करके टमाटर रखें । ,टमाटर एक के ऊपर एक ही हो । ,पैन को हलकी आग पर रख दें । ,थोड़े से तेल को पैन से लेकर टमाटर पर डाल दें । ,हलकी आग पर ढंककर टमाटर गलने तक पकाएं । ,हरे धनिया व गरममसाले से सजाकर नान या परांठे के साथ सर्व करें । ,"एक कटोरी में अदरक - लहसुन का पेस्ट , सरसों का तेल , अमचूर , अन्य सूखे मसाले व नमक डालकर एक साथ मिलाएं ।" ,बैंगन में चीरा लगाएं और मसाला मिश्रण को बराबर प्रत्येक बैंगन में भरें । ,मसाला बाहर न निकले इसलिए बैंगन को धागे से लपेट दें । ,फिर एक पैन में तेल डालकर गर्म करें और एक - एक करके बैंगन रखें । ,उलट - पलट कर 8 - 10 मिनट तक गलने तक पकाएं । ,सर्विग प्लेट पर रखकर हरे धनिया से सजाकर गरमागरम सर्व करें । ,"एक बर्तन में घी को गरम कीजिए और उसमें जीरा , राई , कलौंजी , सौंफ और हींग डालिए ।" ,"जब मसाले चटखने लगें तब तेजपत्ता , लौंग , दालचीनी , करी पत्ता और हरी मिर्च डालिए और कुछ सेकंड तक भूनिए ।" ,"आलू , पिसी हुई लाल मिर्च , धनिया - जीरे का पाउडर , हल्दी और नमक डालिए और भूनिए जब तक मसाले आलू को समान रूप से ढक नहीं देते ।" ,आधा कप पानी डालिए और उफान के आने तक गरम कीजिए । ,दही डालिए और लगातार चलाते हुए एक उफान तक उबालिए जिससे ग्रेवी अलग न हो जाए । ,हरे धनिया से सजाइए । ,कढ़ाई में तेल डालकर गर्म करें और प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें । ,"प्याज भुन जाने पर हल्दी , नमक , मिर्च ( हरी व लाल दोनों ) डालकर दो मिनट चलाएं और कटे हुए टमाटर डालें तथा तेल छोड़ने तक भूनें ।" ,मिश्रण के ठंडा हो जाने पर उसे मिक्सी में बारीक पीसें । ,अब इसमें दूध में भीगा पनीर डालकर एक उबाल आने तक पकाएं और धनिया की पत्ती से सजाकर गरमागरम सर्व करें । ,एक कड़ाही में घी डाल कर गर्म करें और प्याज डालकर हलका सुनहरा करें । ,"फिर कटी हुई हरी मिर्च , लाल मिर्च और नमक डालकर चलाएं ।" ,टोमैटो प्यूरी डालें और तब तक भूनें जब तक कि चिकनाई न छूटने लगे । ,छोलिया और गरम मसाला डाल कर दोबारा 5 मिनट तक भूनें । ,फिर लगभग 240 मिली. पानी मिलाएं । ,एक उबाल आने के बाद आंच मध्यम करें और पकने दें । ,अब पनीर को चौकोर टुकड़े में काट कर मिलाएं । ,नमक डालें और चलाएं । ,ऊपर से जीरा और गरम मसाला डाल कर लगभग एक मिनट तक पकाएं । ,बच्चे यदि अच्छी तरह से पोषित हों तो उनके गंभीर रूप से बीमार होने की अधिक संभावना है ( यदि वे स्वस्थ हैं तथा अच्छी तरह से पोषित हैं ) । ,"( यह अन्य दूसरे संक्रमणों से भिन्न है जो कुपोषित , अस्वस्थ , या अच्छे पोषण की कमी वाले बच्चों में अधिक गंभीर होते हैं । )" ,महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में गंभीर बीमारी की संभावना अधिक होती है । ,पुरानी ( दीर्घ - अवधि की ) बीमारियां जैसे मधुमेह तथा अस्थमा वाले लोगों में डेंगू जीवन के लिये खतरा हो सकता है । ,जब मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो इसकी लार मानव की त्वचा में प्रवेश कर जाती है । ,यदि मच्छर को डेंगू है तो वायरस इसकी लार में होता है । ,इसलिये जब मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो वायरस मच्छर की लार के साथ व्यक्ति की त्वचा में प्रविष्ट हो जाता है । ,वायरस व्यक्ति की श्वेत रक्त कणिकाओं से जुड़ कर उनमें प्रवेश कर जाता है ( श्वेत रक्त कणिकाओं को संक्रमण जैसे खतरों से निपटने के लिये सहायता करने का काम करना होता है ) । ,जब श्वेत रक्त कणिकाएं शरीर में इधर - उधर जाती हैं तो वायरस पुर्नउत्पादन ( अपने प्रतिरूप पैदा करता है ) करता है । ,"श्वेत रक्त कणिकाएं कई तरह के संकेतों प्रोटीन ( तथाकथित माइटोकाइन ) के माध्यम से प्रतिक्रिया करती हैं जैसे इंटरल्यूकिन्स , इंटरफेरॉन तथा ट्यूमर परिगलन कारक ।" ,"इन प्रोटीन के कारण डेंगू के साथ बुखार , फ्लू जैसे लक्षण तथा गंभीर दर्द पैदा होते हैं ।" ,यदि किसी व्यक्ति को गंभीर संक्रमण है तो वायरस उसके शरीर में और अधिक तेज़ी से बढ़ता है । pl,क्योंकि वायरस की संख्या बहुत अधिक है इसलिये ये कई और अंगों ( जैसे जिगर तथा अस्थि मज्जा ) को प्रभावित कर सकता है । ,छोटी रक्त केशिकाओं की दीवारों से रक्त रिस करके शरीर के कोटरों में चला जाता है । ,इस कारण से रक्त केशिकाओं में कम रक्त का प्रवाह ( या शरीर में कम रक्त का प्रवाह होता है ) होता है । ,व्यक्ति का रक्तचाप इतना कम हो जाता है कि हृदय महत्वपूर्ण अंगों को पर्याप्त रक्त की आपूर्ति नहीं कर पाता है । ,"साथ ही , अस्थि मज्जा पर्याप्त प्लेटलेट्स का निर्माण नहीं कर पाती है , जो रक्त का थक्का बनाने के लिये जरूरी है ।" ,"पर्याप्त प्लेटलेट्स के बिना , व्यक्ति को रक्तस्राव होने की समस्या होने की काफी संभावना है ।" ,"रक्तस्राव , डेंगू के कारण पैदा होने वाली मुख्य जटिलता ( किसी भी बीमारी से होने वाली सबसे गंभीर समस्याओं में से एक ) है ।" ,"स्वास्थ्य सेवा पेशेवर आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति की जांच करके और यह देख कर कि उसके लक्षण डेंगू से मिलते हैं , डेंगू का निदान करते हैं ।" ,"स्वास्थ्य सेवा पेशेवर , इस प्रकार से डेंगू का निदान करने में उन क्षेत्रों में विशेष रूप से सक्षम हो सकते हैं जहां पर यह आम तौर पर होता है ।" ,"हालांकि , जब डेंगू प्रारंभिक अवस्था में होता है तो इसे अन्य वायरल संक्रमणों ( वायरस द्वारा होने वाले अन्य संक्रमण ) से अलग कर पाना कठिन होता है ।" ,किसी व्यक्ति को संभवतः डेंगू तब हो सकता है जब उसको बुखार हो तथा निम्न में से दो लक्षण हों : मतली और उल्टी ; लाल चकत्ते ; सामान्य दर्द ( पूरे शरीर में दर्द ) ; श्वेत रक्त कणिकाओं की कम संख्या ; या सकारात्मक टूर्निकेट परीक्षण । ,वे क्षेत्र जहां पर यह बीमारी आम है वहां पर कोई भी चेतावनी चिह्न तथा बुखार इस बात का संकेत है कि व्यक्ति को डेंगू है । ,चेतावनी चिह्न आम तौर पर डेंगू के गंभीर होने के पहले दिखने लगते हैं । ,टूर्निकेट परीक्षण तब काफी होता है जब कोई प्रयोगशाला परीक्षण नहीं किया जा सकता है । sg,टूर्निकेट परीक्षण में स्वास्थ्य सेवा पेशेवर रक्तचाप नापने वाले उपकरण का पट्टा व्यक्ति की बाहों के चारों ओर 5 मिनट तक बांधता है । ,फिर यदि उस व्यक्ति की त्वचा पर लाल धब्बे दिखें तो स्वास्थ्य सेवा पेशेवर उनकी गिनती करता है । ,धब्बों की संख्या जितनी अधिक होगी व्यक्ति को डेंगू बुखार होने की संभावना उतनी अधिक होगी । ,चिकनगुनिया तथा डेंगू बुखार के बीच अंतर करना कठिन हो सकता है । ,चिकनगुनिया एक ऐसा वायरल संक्रमण है जिसमें डेंगू जैसे समान लक्षण होते हैं तथा यह भी विश्व के उन्ही हिस्सों में होता है । ,"डेंगू के लक्षण अन्य बीमारियों मलेरिया , लेप्टोपाइरोसिस , टायफॉएड बुखार तथा मेनिंगोकॉक्कल रोग जैसे हो सकते हैं ।" pl,"अक्सर , किसी व्यक्ति में डेंगू का निदान होने के पहले , उसके स्वास्थ्य सेवा पेशेवर इस बात को सुनिश्चित करने के लिये कि वह व्यक्ति इनमें से किसी एक परिस्थिति से पीड़ित न हो , कुछ परीक्षण करेंगे ।" ,जब किसी व्यक्ति को डेंगू होता है तो उसकी श्वेत रक्त कणिकाओं की कम संख्या का प्रयोगशाला परीक्षण में दिखना सबसे पहला परिवर्तन देखा जा सकता है । ,कम प्लेटलेट्स संख्या तथा चयापचय अम्लरक्तता ( मेटाबोलिक एसिडोसिस ) भी डेंगू के लक्षण हैं । ,यदि व्यक्ति को गंभीर डेंगू है तो ऐसे अन्य बदलाव भी होंगे जो रक्त का अध्ययन करने पर देखे जा सकते हैं । ,गंभीर डेंगू के कारण रक्त धाराओं से तरल का रिसाव हो सकता है । ,"जिसके कारण हीमोकॉन्सन्ट्रेशन ( रक्त में प्लाज़्मा - रक्त का तरल भाग , की कमी तथा लाल रक्त कणिकाओं की अधिकता ) हो सकता है ।" sg,यह रक्त में एल्ब्युमिन के स्तर को भी कम करता है । ,कभी - कभार गंभीर डेंगू अधिक फुफ्फुस प्रवाह ( जिसमें रिसाव वाला द्रव्य फेफड़ों के आसपास एकत्र होता है ) या जलोदर ( रिसाव वाला द्रव्य पेट में एकत्र होने लगता है ) भी उत्पन्न करता है । ,यदि इसकी मात्रा पर्याप्त हो तो स्वास्थ्य सेवा पेशेवर इसे रोगी के परीक्षण के समय देख सकता है । pl,कोई स्वास्थ्य सेवा पेशेवर डेंगू के शॉक सिंड्रोम को पहले ही देख सकता है यदि वह शरीर के भीतर द्रव्य देखने के लिये चिकित्सीय अल्ट्रासाउंड का उपयोग कर सके । ,"लेकिन बहुत सारे ऐसे क्षेत्रों में जहां पर डेंगू आम है , अधिकतर स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों तथा चिकित्सालयों में अल्ट्रासाउंड मशीनें नहीं होती हैं ।" sg,2009 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) नें डेंगू बुखार को दो प्रकारों में वर्गीकृत या विभाजित किया : सरल तथा गंभीर । sg,इसके पहले 1997 में WHO ने रोग को अविभेदित तथा डेंगू बुखार में बांटा था । ,WHO ने तय किया कि डेंगू बुखार को विभाजित करने के इस पुराने तरीके को सरल करने की ज़रूरत है । ,इसने यह भी तय किया कि पुराना तरीका काफी सीमित था : इसमें वे सभी तरीके शामिल नहीं थे जिनसे डेंगू अपने को प्रस्तुत कर सकता था । ,हालांकि डेंगू वर्गीकरण का तरीका आधिकारिक रूप से बदला गया था लेकिन पुराना वर्गीकरण अभी भी प्रयोग किया जाता है । sg,"WHO की पुरानी पद्धति में डेंगू रक्तस्रावी बुखार को चार चरणों में विभक्त किया गया था , जिनको ग्रेड I – IV कहा जाता था ।" sg,इसके पहले रोग के लिये भिन्न लोग भिन्न नाम उपयोग करते थे । ,लक्षण अक्सर 4 से 7 दिनों के बाद ही दिखते हैं । ,इस तरह यदि कोई व्यक्ति ऐसे क्षेत्र से लौटता है जहां डेंगू आम है और उसके लौटने के 14 दिन या उसके बाद उसको बुख़ार होता है या अन्य लक्षण दिखते हैं तो शायद उसको डेंगू नहीं है । ,"अक्सर जब बच्चों को डेंगू बुख़ार होता है तो उनके लक्षण आम सर्दी - ज़ुकाम या आंत्रशोथ ( गैस्ट्रोएनटराइटिस ) ( या उदर फ्लू ; उदाहरण के लिये , उल्टी तथा दस्त ( डायरिया ) ) होते हैं ।" ,"हालांकि , बच्चों में डेंगू बुख़ार द्वारा गंभीर समस्याएं होने की अधिक संभावनाएं होती हैं ।" ,डेंगू बुख़ार के ऐसे आदर्श लक्षण कम होते हैं जो अचानक शुरू हो जाते हैं जैसे सिरदर्द ( आमतौर पर आँखों के पीछे ) ; चकत्ते तथा मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द । ,"बीमारी का उपनाम "" हड्डीतोड़ बुख़ार "" यह दर्शाता है कि यह दर्द कितना गंभीर हो सकता है ।" ,"डेंगू बुख़ार तीन चरणों में होता है : बुख़ार संबंधी , गंभीर तथा सुधार संबंधी ।" ,"बुख़ार संबंधी चरण में , किसी व्यक्ति को आमतौर पर उच्च बुख़ार होता है ।" ,"( "" फैब्राइल "" का अर्थ है कि व्यक्ति को उच्च बुख़ार है । )" ,बुख़ार अक्सर 40 डिग्री सेल्सियस ( 104 डिग्री फ़ॉरेनहाइट ) होता है । ,व्यक्ति को सामान्य दर्द तथा सिरदर्द हो सकता है । ,यह चरण आमतौर पर 2 से 7 दिन तक चलता है । ,इस चरण में जिन लोगों में लक्षण होते हैं उनमें से लगभग 50 से 80 % लोगों को चकत्ते हो जाते हैं । ,"पहले या दूसरे दिन , चकत्ते लाल त्वचा जैसे दिख सकते हैं ।" ,बीमारी के बाद के दिनों में ( चौथे से सातवें दिन पर ) चकत्ते चेचक जैसे लग सकते हैं । ,छोटे लाल दाग ( पटीकिया ) त्वचा पर उभर सकते हैं । ,त्वचा को दबाने पर ये दाग हटते नहीं हैं । ,ये लाल दाग टूटी केशिकाओं के कारण बनते हैं । ,व्यक्ति को श्लेष्म झिल्ली द्वारा मुंह तथा नाक से हल्का रक्तस्राव हो सकता है । ,बुख़ार अपने आप कम ( बेहतर ) होने लगता है तथा एक या दो दिनों के लिये वापस होने लगता है । ,"हालांकि , भिन्न लोगों में यह पैटर्न भिन्न होता है ।" sg,"कुछ लोगों में , उच्च बुख़ार के जाने के बाद बीमारी गंभीर चरण में प्रवेश कर जाती है ।" ,गंभीर चरण एक से दो दिनों तक चलता है । ,"इस चरण के दौरान , छाती तथा पेट में तरल का निर्माण हो सकता है , ऐसा इसलिये क्योंकि रक्त नलिकाओं में रिसाव होता है ।" ,तरल बनता है तथा यह पूरे शरीर में परिसंचरित होता है । ,इसका अर्थ है कि महत्वपूर्ण ( सबसे महत्वपूर्ण ) अंगों को उनकी आवश्यकता के अनुसार आम तौर पर रक्त नहीं मिलता है । sg,"इस कारण से , अंग सामान्य तरीके से काम नहीं कर पाते हैं ।" ,व्यक्ति को अत्यधिक रक्तस्राव भी हो सकता है ( आमतौर पर जठरांत्र संबंधी मार्ग में ) । ,"डेंगू से पीड़ित 5 % से कम व्यक्तियों को परिसंचरण आघात , डेंगू आघात सिन्ड्रोम तथा डेंगू रक्तस्रावी बुख़ार होता है ।" ,"यदि किसी व्यक्ति को पहले किसी दूसरे प्रकार ( "" द्वितीयक संक्रमण "" ) का डेंगू हुआ हो तो उसको ऐसी गंभीर समस्याएं होने की संभावनाएं अधिक होती हैं ।" ,"सुधार चरण में , वह तरल जो रक्त नलिकाओं से बाहर रिस जाता है , रक्तप्रवाह में वापस शामिल कर लिया जाता है ।" ,सुधार चरण 2 से 3 दिनों तक चलता है । ,व्यक्ति अक्सर इस चरण के दौरान काफी बेहतर हो जाता है । ,"हालांकि , उनको गंभीर खुजलाहट तथा धीमी हृदय गति की शिकायत हो सकती है ।" ,"इस चरण के दौरान , व्यक्ति तरल ओवरलोड स्थिति ( जिसमें काफी अधिक तरल वापस ले लिया जाता है ) में जा सकता है ।" ,"यदि यह दिमाग को प्रभावित करता है तो , यह चेतना के स्तर में परिवर्तन या दौरे जैसी स्थिति ला सकता है ( जिसमें व्यक्ति की सोचने , समझने तथा व्यवहार करने की सामान्य स्थिति भिन्न हो सकती है ) ।" pl,कभी - कभार डेंगू हमारे शरीर के अन्य तंत्रों को प्रभावित कर सकता है । ,किसी व्यक्ति में केवल लक्षण हो सकते हैं या आदर्श डेंगू लक्षण भी साथ में हो सकते हैं । ,0.5 – 6 % मामलों में चेतना का स्तर घट सकता हैं । ,ऐसा तब हो सकता है जब डेंगू वायरस मस्तिष्क में संक्रमण पैदा करता है । ,ऐसा तब भी हो सकता है जब महत्वपूर्ण अंग सही ढंग से काम न कर रहे हों । ,अन्य स्नायुतंत्र संबंधी विकार ( मस्तिष्क तथा स्नायुओं को प्रभावित करने वाले विकार ) उन लोगों में दर्ज किये गये हैं जिनको डेंगू बुख़ार होता है । pl,"उदाहरण के लिये , डेंगू ट्रांसवर्स माइलिटिस ( अनुप्रस्थ मेरुदंड की सूजन ) तथा गुइलियन - वाले सिन्ड्रोम पैदा कर सकता है ।" ,"हालांकि ऐसा लगभग नहीं होता है , लेकिन डेंगू दिल का संक्रमण तथा गंभीर जिगर की विफलता पैदा कर सकता है ।" ,डेंगू बुखार डेंगू वायरस के कारण होता है । ,"वह वैज्ञानिक प्रणाली जिसमें वायरस का वर्गीकरण तथा नामकरण किया जाता है उसके अंतर्गत डेंगू वायरस "" फ्लाविविरिडे "" परिवार तथा "" फ्लाविविरस "" जीन का हिस्सा है ।" ,अन्य वायरस भी इस परिवार से संबंधित हैं तथा मानवों में बीमारियां पैदा कर सकते हैं । ,"उदाहरण के लिये , पीत - ज्वर वायरस , वेस्ट नाइल वायरस , सेंट लुईस एन्सेफलाइटिस वायरस , जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस , टिक - जनित एन्सेफलाइटिस वायरस , क्यासानूर जंगल रोग वायरस तथा ओमस्क रक्तस्रावी बुख़ार , सभी "" फ्लाविविरिडे "" परिवार से संबंधित हैं ।" ,इनमें से अधिकतर वायरस मच्छरों या टिक द्वारा फैलते हैं । ,"डेंगू वायरस , अधिकतर "" एडीज़ "" मच्छरों द्वारा संचरित ( या फैलता ) होता है , विशेष रूप से "" एडीज़ आएजेप्टी "" प्रकार के मच्छर से ।"